बुधवार, 16 नवंबर 2011

हिमाचल से भोपाल बरास्ता दिल्ली


हिमाचल से भोपाल बरास्ता दिल्ली

भाजपा शासित राज्य के अधिकारी कर रहे दिल्ली में रहकर भोपाल से पीएचडी

एमपी के अधिकारी दे रहे संरक्षण

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भाजपा शासित हिमाचल प्रदेश के एक अधिकारी दिल्ली में नौकरी करते हुए आश्चर्यजनक तौर पर रोजाना हृदय प्रदेश की राजधानी भोपाल में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। यह चमत्कार वे अपने भाजपा शासित मध्य प्रदेश के एक अधिकारी मित्र के जरिए कर रहे हैं। उप संचालक स्तर के उक्त अधिकारी अपने ही समकक्ष तथा समान विभाग के अधिकारी के माध्यम से पत्रकारिता में शोध के काम को अंजाम दे रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक भाजपा शासित हिमाचल प्रदेश के एक उप संचालक स्तर के अधिकारी दिल्ली में पदस्थ हैं। उन्हें अचानक ही जर्नलिज्म में पीएचडी करने का भूत सवार हुआ। उन्होंने अपने समान विभाग के एक अन्य अधिकारी जो सेवानिवृति की कगार पर ही हैं से संपर्क साधा और अपनी बात रखी। मध्य प्रदेश काडर के उक्त अधिकारी द्वारा चुटकी बजाते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि वे दिल्ली में अपनी नौकरी करें, मध्य प्रदेश के माखन लाल चतुर्वेदी जर्नलिज्म प्रतिष्ठान में वे उनके लिए जुगाड़ लगवा देंगे।

फिर क्या था उक्त उप संचालक महोदय ने अपना पत्रकारिता में शोध का काम आरंभ कर दिया। भोपाल में अनुपस्थित रहते हुए उनका यह शोध लोगों के लिए शोध का विषय बन गया है। गौरतलब है कि पूर्व में मध्य प्रदेश के उक्त अधिकारी द्वारा सेवा वृद्धि की लालच में अपने कार्यालय को भाजपा संगठन का कार्यालय बना दिया था। इस कार्यालय से भाजपा की विज्ञप्ति आदि का वितरण भी किए जाने के आरोप लगे थे। जब मामला सार्वजनिक हुआ तब भाजपा के आला नेताओं ने उक्त सरकारी अधिकारी से किनारा कर लिया।

कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश काडर के सेवानिवृति की कगार पर खड़े उक्त अधिकारी को अब सेवा वृद्धि मिलने की गुंजाईश समाप्त हो गई है। अब उक्त अधिकारी का यह प्रयास जारी है कि वे किसी भी तरह माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता प्रतिष्ठान में पुर्ननियुक्ति पा जाएं ताकि सेवानिवृति के उपरांत भी वे सरकारी सुविधाओं का लाभ ले सकें।

लोकायुक्त कराएंगे शिवराज की किरकिरी


लोकायुक्त कराएंगे शिवराज की किरकिरी

सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई है पेंडिंग

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। कांग्रेस भले ही मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के इशारों पर मुजरा कर रही हो पर लोकायुक्त के मामले में शिवराज सिंह चौहान घिर चुके हैं। सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले में सुनवाई होना अभी बाकी है, इन परिस्थितियों में लोकायुक्त पी.पी.नावलेकर को अगर त्यागपत्र देना पड़ा तो शिवराज सिंह चौहान की बुरी तरह किरकिरी होने से कोई नहीं बचा सकता है। मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी इस मामले में अब दिलचस्पी लेने लगे हैं।

लोकायुक्त के मामले में मध्य प्रदेश का रिकार्ड बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता है। जस्टिस नावलेकर तीसरे लोकायुक्त हैं जिन पर आरोप लगे हैं। इसके पूर्व अस्सी के दशक में समाजवादी नेता रघु ठाकुर ने तत्कालीन लोकायुक्त जस्टिस पी.के. तारे पर तत्कालीन निजाम कुंवर अर्जनसिंह की कठपुतली बनने का आरोप लगाया था।

प्रदेश में दस साल लगातार शासन करने वाले राजा दिग्विजय सिंह के मुख्य मंत्रित्व काल में लोकायुक्त नियुक्त हुए जस्टिस रिपुसूदन दयाल को लेकर काफी विवाद रहा। जस्टिस दयाल पर आरोप लगे कि उन्होंने अपने प्रभाव का उपयोग करके भोपाल में स्वयं, पत्नि एवं अपने पुत्रों के नाम पर मप्र गृह निर्माण मंडल से तीन आवास आवंटित कराए हैं। इनमें से दो आवास रिवेयरा टाउन में और एक बाग मुगालिया में है।

तत्कालीन लोकायुक्त जस्टिस दयाल एवं मप्र के मुख्य सूचना आयुक्त पी.पी. तिवारी के बीच भी हुआ विवाद भी भोपाल के महारणा प्रताप नगर के थाने तक पहुंच गए थे। आरोप है कि जस्टिस दयाल ने सूचना के अधिकार के तहत एक मामले में पीपी तिवारी को उनके खिलाफ फैसला देने से रोकने का प्रयास किया था। इसके लिए जस्टिस दयाल तिवारी के घर पहुंचे थे और तिवारी ने इस सब का उल्लेख अपने फैसले की आर्डरशीट में भी लिखा है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को डंपर मामले में क्लीन चिट देने वाले जस्टिस नावलेकर तब सुर्खियों में आए जब उनके व्यवसायी पुत्र संदीप नावलेकर ने मुख्यमंत्री के साथ चीन की यात्रा की। इससे जाने अनजाने में यह संकेत गया कि डम्पर मामले में क्लीन चिट मिलने के कारण ही मुख्यमंत्री चौहान लोकायुक्त के पुत्र संदीप को चीन यात्रा पर लेकर गए थे।

झाबुआ पावर करेगा पहले से ही प्रदूषित नर्मदा को और गंदा


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 16

झाबुआ पावर करेगा पहले से ही प्रदूषित नर्मदा को और गंदा

नर्मदा का पीएच दर्ज किया गया 9.02

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। तरह तरह के प्रदूषणों के चलते पुण्य सलिला नर्मदा अपने उदगम अमरकंटक से दाहोद के बीच बुरी तरह प्रदूषित हो चुकी है। इसका पीएच 9.02 दर्ज किया गया है जो मानक से कहीं अधिक है। संस्कारधानी जबलपुर के समीप बरगी बांध के मुहाने पर लगने वाले झाबुआ पावर लिमिटेड के कोल आधारित पावर प्लांट से इसका प्रदूषण कई गुना बढ़ने की उम्मीद है।

प्रचलित मान्यता यह है कि यमुना का पानी सात दिनों में, गंगा का पानी छूने से, पर नर्मदा का पानी तो देखने भर से पवित्र कर देता है। साथ ही जितने मंदिर व तीर्थ स्थान नर्मदा किनारे हैं उतने भारत में किसी दूसरी नदी के किनारे नहीं है। लोगों का मानना है कि नर्मदा की करीब ढाई हजार किलोमीटर की समूची परिक्रमा करने से चारों धाम की तीर्थयात्रा का फल मिल जाता है। परिक्रमा में करीब साढ़े सात साल लगते हैं।

जाहिर है कि लोगों की परंपराओं और धार्मिक विश्वासों में रची-बसी इस नदी का महत्व कितना है। लेकिन दुर्भाग्य से जंगल तस्करों, बाक्साइट खदानों और हमारी विकास की भूख से यह वादी इतनी खोखली और बंजर हो चुकी है कि आने वाले दिनों में उसमें नर्मदा को धारण करने का सार्म्थय ही नहीं बचेगा। इसकी शुरुआत नर्मदा के मैलेपन से हो चुकी है।

मजे की बात है कि सरकार का जल संसाधन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण मंडल नदी जल में प्रदूषण की जांच करता है और प्रदूषण स्तर के आंकड़े कागज़़ों में दर्ज कर लेता है, लेकिन प्रदूषण कम करने के लिए सरकार कोई भी गंभीर उपाय नहीं कर पाता है। सरकारी सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अमरकंटक और ओंकारेश्वर सहित कई स्थानों पर नर्मदा जल का स्तर क्षारीयता पानी में क्लोराईड और घुलनशील कार्बनडाईऑक्साइड का आंकलन करने से कई स्थानों पर जल घातक रूप से प्रदूषित पाया गया।

भारतीय मानक संस्थान ने पेयजल में पीएच 6.5 से 8.5 तक का स्तर तय किया है, लेकिन अमरकंटक से दाहोद तक नर्मदा में पीएच स्तर 9.02 तक दर्ज किया गया है। इससे स्पष्ट है कि नर्मदाजल पीने योग्य नहीं है और इस प्रदूषित जल को पीने से नर्मदा क्षेत्र में गऱीब और ग्रामीणों में पेट से संबंधित कई प्रकार की बीमारियां फैल रही है, इसे सरकारी स्वास्थ्य विभाग भी स्वीकार करता है। जनसंख्या बढऩे, कृषि तथा उद्योग की गतिविधियों के विकास और विस्तार से जल स्त्रोतों पर भारी दबाव पड़ रहा है।

(क्रमशः जारी)

चुनावों के मद्देनजर पेट्रोल की घटी कीमतें


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 28

चुनावों के मद्देनजर पेट्रोल की घटी कीमतें

इस मसले पर सैट विपक्ष का हो सकता है मुंह बंद

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर खासा दबाव बनाया और अंततः सरकार को पेट्रोल के बढ़े हुए दामों में कुछ कमी करनी ही पड़ी। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम घटे नहीं पर देश में पेट्रोल की कीमतें कम कर दी गईं। विपक्ष के हाथ यह नायाब मुद्दा लग तो चुका है पर कांग्रेस के इशारों पर चलने वाले विपक्ष से इस मामले में उम्मीद करना बेमानी ही होगा।

सरकार ने पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रण से मुक्त ही बताया हुआ है। यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के मूल्य बढ़ते ही सरकार की नवरत्न कंपनियों में शुमार तेल कंपनियां भी पेट्रोल की कीमतें बढ़ा देती हैं। पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से देश में हाहाकर मच जाता है। सरकार सफाई देती है कि उसने तो कीमतों को नियंत्रण से मुक्त रखा हुआ है।

मंगलवार और बुधवार की दर्मयानी रात से पेट्रोल की कीमतों में कमी की गई है। विपक्ष चाहे तो इस मामले को भुना सकती है। विपक्ष संसद के सत्र में सरकार को इस मामले में घेर सकती है और पूछ सकती है कि आखिर क्या वजह है कि पेट्रोल की कीमतों में कमी की गई है। उधर कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ के सूत्रों का कहना है कि भाजपा के आला नेता अंततः कांग्रेस के पे रोलपर ही हैं, अतः इस मामले में वे चुप्पी ही साधे रहेंगे।

(क्रमशः जारी)

चहुंओर त्रस्त हैं आईडिया के उपभोक्ता


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  24

चहुंओर त्रस्त हैं आईडिया के उपभोक्ता

हर सेवा में उपभोक्ताओं को लूटने का आईडिया

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। देश के मशहूर उद्योगपति आदित्य बिरला के स्वामित्व वाली आईडिया सेल्यूलर कंपनी अपने उपभोक्ताओं के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार कर ही है। एक समय में एकाधिकार करने वाले क्षेत्रीय मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों को खरीदकर आईडिया में तब्दील करने के बाद इस कंपनी ने उपभोक्ताओं की जेब हल्का करने के नए नए प्रयोग आरंभ किए हैं।

राजधानी के हजारो मोबाईल उपभोक्ता जो आईडिया सेल्लुलर कंपनी की सर्विसेस से आजकल बुरी तरह से परेशान है, जिनकी कही सुनवाई नही है। प्रीपेड उपभोक्ताओ के पैसे कही ये कम्पनी मेसेज के नाम तो कही रिंग टोन के नाम पर तो कही इन्टरनेट ब्राउसिंग के नाम पर हड़प रही है। वही दूसरी और जो उपभोक्ता पोस्ट पैड है जिन्होंने मिनिमम मासिक प्लान पर आईडिया का पोस्ट पैड प्लान लिया हुआ है उन उपभोक्ताओ को भी भारीभरकम बिल थमा कर आईडिया चूना लगा रहा।

जब इस तरह की शिकायत को लेकर ग्राहक आईडिया के आउट लेट पर जाते है तो वहा बैठे कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव द्वारा उपभोक्क्ताओं को उनकी तकलीफों को तुरंत हल करने के बजाये कंपनी के मुख्यालय मेसेज भेज कर ग्राहक को चलता कर देते है। जिलों में आईडिया प्वाईंट्स पर उपभोक्ताओं की सुनवाई भी नहीं हो पा रही है। जब आईडिया प्वाईंट पर ग्राहक जाता है तो उसे पोस्ट पेड या प्री पेड के चक्कर में ही उलझा दिया जाता है।

दस दस बार उपभोक्ता इन आउटलेट पर चक्कर लगाता रहता है मगर कोई सुनवाई नही होती। आईडिया की ग्राहक सेवा पर भी कोई शिकायत दर्ज करने के लिए अगर फोन लगाया जाता है तो पहले उससे बिना बात के दस विज्ञापन झेलने पड़ते है तब जाकर कंपनी का कोई पकाऊ बंदा फ़ोन अटैंड करता है। इन सब प्रक्रियाओ से ग्राहक को हर तो चार दिन में एक बार सामना करना पड़ता है मगर फिर भी समस्या जस की तस रहती है आईडिया के इस चूना लगाने की योजना ने ग्राहक को परेशानी में डाल रखा है लगता है जब तक कोई ग्राहक अपनी परेशानी के लिए अदालत की शरण में नही जायेगा तब तक शायद आईडिया ग्राहकों को चूना लगाने से बाज़ आने वाला नही।

(क्रमशः जारी)

मंगलवार, 15 नवंबर 2011

टीम राहुल जल्द ही दिखाएगी कमाल


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

टीम राहुल जल्द ही दिखाएगी कमाल
कांग्रेस की नजर में भविष्य के वजीरे आजम राहुल गांधी की कोर टीम शनैः शनैः देश की सत्ता पर कब्जा जमाने की तैयारी में जुट गई है। राहुल गांधी ने आग और पानी का जिस तरह से संतुलन बनाया है उससे लगने लगा है कि राहुल को प्रशिक्षण अब सही व्यक्तित्व द्वारा दिया जा रहा है। राहुल ने अपनी कोर टीम को अब कांग्रेस के महासचिव राजा दिग्विजय सिंह के साथ ही साथ सिंह के घुर विरोधी सोनिया के राजनैतिक सचिव अहमद पटेल के हवाले भी कर दिया है। सियासी हल्कों में इस बात को लेकर शोध जारी है कि आखिर राहुल कौन सा तीर चला रहे हैं कि एक तरफ राजा दिग्विजय सिंह गुरू द्रोणाचार्य की भूमिका में तो दूसरी तरफ अहमद पटेल टीम राहुल को आकार देंगे। राजनैतिक वीथिकाओं में अब राहुल को इस तरह का अचूक मंत्र देने वाले चाणक्य की खोज आरंभ हो गई है।

बिहार से मन भरा लालू का
इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में देश की राजनीति में धूमकेतू की तरह उभरे स्वयंभू प्रबंधन गुरू लालू प्रसाद यादव का अब बिहार से मोहभंग होता नजर आ रहा है। मौका चाहे उनके अपने जन्म दिवस का हो या फिर बिहार के महात्योहार छट पूजा का हर बार लालू बिहार से गायब रहकर दिल्ली में ही दिखाई दिए। गौरतलब है कि लगातार दूसरी मर्तबा बिहार में मरणासन्न स्थिति को पा चुकी है। बिहार में लालू को शायद अब कोई भविष्य नहीं दिखाई पड़ रहा है। लालू के करीबी लोगों का दावा है कि लालू यादव ने अब अपना ठौर दिल्ली को ही बना लिया है। उनके समर्थकों की मानें तो वे अब पश्चिम दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। गौरतलब है कि पश्चिम दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में पूर्वांचली विशेषकर बिहारी मतदाताओं की तादाद अधिक है।

मीडिया को कब्जाने की जुगत में मनमोहन
देश के गैर नेहरू गांधी परिवार (महात्मा गांधी नहीं) के वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह इन दिनों मीडिया को अपने पक्ष में करने की जुगत लगा रहे हैं। मनमोहन चाह रहे हैं कि घपले, घोटाले और भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक का उन पर लगा अघोषित तमगा वापस हो जाए। मनमोहन जुंडाली इन दिनों मीडिया से पींगे बढ़ाने में जुटी हुई है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के आला अधिकारियों को भी इस हेतु पाबंद किया जा रहा है। मनमोहन जल्द ही अपनी पीआर ठीक करने के लिए निजी एजेंसियों की शरण में जाने हेतु गंभीरता से विचार कर रहे हैं। हाल ही में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन काम करने वाले पत्र सूचना ब्यूरो (पीआईबी) में आवासों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव अस्तित्व मे आया है। पीआईबी में आवासों की संख्या साठ से बढ़ाकर सौ की जाना प्रस्तावित है। मतलब साफ है कि चालीस पत्रकारों को जल्द ही रियायती दरों पर घर देने का वायदा किया जाएगा।

गणतंत्र दिवस पर नहीं दिखेगा अपना एमपी
इस बार गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर मध्य प्रदेश की झांकी शायद ही देखने को मिले। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश की थर्ड ग्रेड झांकी को नकार दिया है। इस बार कुल अठ्ठाईस राज्यों ने अपनी झांकियों के प्रस्ताव भेजे थे, पहली छटनी के बाद ये महज डेढ़ दर्जन ही रह गए हैं। रक्षा मंत्रालय के भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि इस बार गुजरात में नरेंद्र मोदी और तमिलनाडू में जयललिता सरकार ने तो झांकी का प्रस्ताव ही नहीं भेजा है। इस बार कुल 28 राज्यों के प्रस्ताव आए हैं। रक्षा मामलों की विशेषज्ञ समिति ने इनमें से 16 प्रस्तावों को मंजूरी दी है। एमपी द्वारा बड़ी राशि खर्च कर राजा भोज की थीम पर आधारित प्रदर्शनी तैयार करवाई गई थी। भोज नगरी की यह झांकी विशेषज्ञ समिति द्वारा सिरे से खारिज कर दी गई है।

विकास के मामले में पिछड़ा हृदय प्रदेश
पीएचडी चेंबर ऑफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के एक प्रतिवेदन ने मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार की कलई खोलकर रख दी है। इस प्रतिवेदन में शीर्ष स्थान दिल्ली ने पाया है, दिल्ली 65.15 अंक के साथ पहली, हरियाणा 53.61 के साथ दूसरी तो पंजाब 52.21 के साथ तीसरी पायदान पर है। चौथे मुकाम पर उत्तराखण्ड है जिसका विकास सूचकांक 45.19 है, तो इसके बाद नंबर आता है हिमाचल का जो 44.49 के साथ पांचवे स्थान पर है। छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार 44.13 के साथ छटवें तो जम्मू काश्मीर 42.55 के साथ सातवें स्थान पर है। इसके बाद उत्तर प्रदेश का नंबर आता है जो 42.54 तो उसके बाद राजस्थान 42.34 के साथ नौवें स्थान पर है। दसवें स्थान पर शिवराज सिंह चौहान हैं जिन्होंने 38.34 नंबर लिए हैं।

सीएजी रहेगी सरकार के कब्जे में
घपलों और घोटालों से आजिज आ चुके प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक की छवि से बाहर निकलने बुरी तरह छटपटा रहे हैं। कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी को लगने लगा है कि मनमोहन के नेतृत्व में कांग्रेस 2014 के आम चुनाव में शायद ही केंद्र पर काबिज हो पाए। यही कारण है कि वे मनमोहन से छुटकारे का ताना बाना बुन रही हैं। मनमोहन जुंडाली ने उन्हें मशविरा दिया है कि अगर नियंत्रक एंव महालेखा परीक्षक यानी सीएजी को काबू में कर लिया जाए तो घपले घोटाले मीडिया में जाने से बच सकते हैं। मनमोहन को यह बात जंची और उन्होंने इसके लिए ग्रीन सिग्नल दे दिया। अब सीएजी को शासन के अधीन लाने का प्रयास जारी है। मनमोहन जुंडाली इसके लिए विपक्ष को भी साधने का प्रयास अवश्य ही करेगी। अगर विपक्ष सैट नहीं हुआ तो सीएजी स्वतंत्र संस्था ही रहेगी।

आरटीओ का खौफ नहीं मोबाईल कर्मियों को
मशहूर उद्योगपति आदित्य बिरला के स्वामित्व वाली निजी क्षेत्र की मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आईडिया सेल्यूलर के कारिंदों ने परिवहन और यातायात पुलिस को जेब में रखने का नया आईडिया निकाला है। देश भर में अनेक जिलों में आईडिया के सेल प्रमोशन के चलते दो पहिया वाहनों पर आईडिया के कर्मचारी नंबर प्लेट पर आईडिया के स्टीकर लगाकर यातायात नियमों का सरेआम माखौल उड़ाते नजर आ रहे हैं। आईडिया के जिलों में तैनात कर्मचारियों ने परिवहन विभाग और यातायाप पुलिस की आंखों में भी धूल झोंकने का काम किया जा रहा है। आईडिया के अधिकांश कर्मचारियों की निजी दो पहिया वाहनों पर भी नंबर प्लेट पर आईडिया का ही स्टीकर चस्पा मिलता है।

क्या है जोशी पर मेहरबानी का शिव राज
देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में इन दिनों छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ.प्रदीप जोशी को एमपी की आर्थिक राजधानी इंदौर में सरकारी आवास देने का मामला छाया हुआ है। एमपी काडर के अखिल भारतीय सेवा के कुछ अधिकारी इसके निहितार्थ खोजने में जुटे हुए हैं। दरअसल शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रहे डॉ.जोशी जो अब छग के लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष हैं को इंदौर स्थित आयोग के अध्यक्ष का सरकारी आवास अगले साल 15 मई तक रखने के आदेश जारी कर दिए हैं। जोशी का इंदौर प्रेम तो समझ में आता है, किन्तु शिव के जोशी प्रेम का राजकिसी को समझ में नहीं आ पा रहा है। गौरतलब है कि जोशी का नया कार्यक्षेत्र छत्तीसगढ़ है और उनका मुख्यालय रायपुर है, जहां उनके लिए एक बंग्ला अलग सजकर तैयार है।

क्या एसपीजी सरकार से झूट बोल रही है!
दिल्ली में मीडिया हैरान है कि सूचना के अधिकार के तहत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के विदेश दौरों के बारे में जब किसी भी मंत्रालय को जानकारी नहीं है। सोनिया के साथ चोबीसों घंटे साए की तरह रहने वाले स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के जवान और अधिकारी अखिरकार यात्रा भत्ता और वेतन तो भारत सरकार के गृह मंत्रालय से ही पा रहे हैं। इस परिस्थिति में एसपीजी ने अपने विभाग को तो सोनिया के दौरों के बारे में बताया ही होगा। वैसे भी सोनिया गांधी व्हीव्हीआईपी की फेहरिस्त में सबसे अव्वल हैं अतः विदेश दौरा उनका निजी हो या सरकारी, उनके लिए प्रोटोकाल की व्यवस्था तो भारत सरकार द्वारा ही की जा रही होगी। अब यही हो सकता है कि मनमोहन सरकार अपनी राजमाता के बारे में जानकारी सार्वजनिक ही न करना चा रही हो।

मामा के राज में भानजे हैं खौफज़दा!
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने आप को सूब के बच्चों का मामा बताते हैं, दरअसल वे मामा बताते नहंी बनाते हैं सबको। नेशलन क्राईम ब्यूरो और एनजीओ का प्रतिवेदन तो कमोबेश यही कह रहा है। नेशनल क्राईम ब्यूरो द्वारा जारी वर्ष 2009 - 2010 के प्रतिवेदन में मध्य प्रदेश को बच्चों के लिए सबसे असुरक्षित बताया गया है। इस अवधि में इंदौर में बच्चों के साथ हुए अपराधों की तादाद 337, जबलपुर में 257 तो भोपाल में 127 पाई गई। बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों में भी मध्य प्रदेश पहली पायदान पर है। एमपी में इस अवधि में शिवराज सिंह चौहान की 1071 भानजियों के साथ बलात्कार के मामले पंजीबद्ध किए गए। एमपी के बाद उत्तर प्रदेश में 625 तो महाराष्ट्र में 612 मामले बलात्कार के दर्ज हुए। बच्चों की हत्या के मामले में सूबे में इस अवधि में 115 अपराध दर्ज किए गए।

जनसेवकों को नहीं फिकर रियाया की
मध्य प्रदेश के 11 राज्य सभा और 29 लोकसभा सदस्यों को अपने प्रदेश की सुध लेने की फिकर नहीं है। एमपी के सांसदों ने अपने सूबे के मामले में लोकसभा या राज्य सभा में आवाज उठाने की जहमत तक नहीं उठाई है। उत्तर को दक्षिण से जोड़ने वाली रेल की जीवन रेखा इटारसी से झांसी के बीच बढ़े रेल यातायात के चलते इस मार्ग पर दो और रेल की पातों की आवश्यक्ता महसूस की जा रही है। आलम यह है कि छोटे से छोटे स्टेशन पर भी थ्रू लाईन छोड़कर शेष में माल गाड़ियां खड़ी रहती हैं। मध्य प्रदेश से कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्र में मंत्री हैं और सुषमा स्वराज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, फिर भी किसी को इस बात की परवाह ही नहीं है। सुषमा का संसदीय क्षेत्र विदिशा तो इस मेन ट्रेक पर ही है।

तीन लोगों को महिमा मण्डित करती कांग्रेस
सवा सौ साल पुरानी और इस देश पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस ने देश में नेहरू गांधी परिवार (महात्मा गांधी नहीं) ने अपने और अपने वारिसान को महिमा मण्डित करने की गरज से सियासी धुरी तीन लोगों के इर्द गिर्द ही घुमाई हुई है। इस परिवार के तीन सदस्यों ने देश की दिशा और दशा बदल दी। इनके अलावा आजादी के उपरांत भारत गणराज्य की स्थापना के बाद सभी का योगदान नगण्य ही है। यही कारण है कि अब नेहरू गांधी परिवार से इतर सात साल प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले अर्थशास्त्री वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन सिंह की रूखसती का ताना बाना बुना जाने लगा है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि कांग्रेस ने नेहरू गांधी परिवार के तीन लोगों को ही महिमा मण्डित करने का जतन पूरे जोर शोर से किया है। आजाद भारत के पहले वजीरे आजम पंडित जवाहर लाल नेहरू, उनकी पुत्री श्रीमति इंदिरा गांधी और फिर नवासे राजीव गांधी। इसके अलावा देश के लिए सभी नेता गौड ही हैं।

पुच्छल तारा
देश की बागडोर इस समय मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह के हाथों में ही दिख रही है। इस चौकड़ी के आगे सब बेबस हैं। मंहगाई सुरसा की तरह मुंह फाड रही है। इस पर मध्य प्रदेश से नरेंद्र ठाकुर ‘‘गुड्डू‘‘ ने ईमेल से एक कविता भेजी है। गुड्डू लिखते हैं-

ये मनमोहन भी ले लो,
ये दिग्विजय भी ले लो!

भले ही छीन लो हमसे,
हमारी सोनिया गांधी!!

मगर लौटा दो हमको,
वो आटा, वो गैस!
वो बिजली, वो पानी!!

होगी आपकी बड़ी मेहरबानी!
ले ही लो अब हमसे यह कुर्बानी!!

भ्रष्टाचार पर राजपरिवार की आश्चर्यजनक खामोशी!


भ्रष्टाचार पर राजपरिवार की आश्चर्यजनक खामोशी!

(लिमटी खरे)

नेहरू गांधी परिवार (महात्मा गांधी नहीं) देश का अघोषित राज परिवार है। इस परिवार ने पीढ़ी दर पीढ़ी देश पर राज किया है। सत्ता का केंद्र सदा ही इस परिवार के आसपास ही रहा है। पंडित जवाहर लाल नेहरू और प्रियदर्शनी श्रीमति इंदिरा गांधी के अंदर नैतिकता थी। फिर भी सत्तर के दशक में इंदिरा गांधी पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगे थे। उसके बाद उनके पुत्र राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए उन पर भी भ्रष्ट होने के आरोप लगे। उनकी पत्नि इटली मूल की सोनिया माईनो कांग्रेस अध्यक्ष हैं, पुत्र राहुल गांधी कांग्रेस के महासचिव हैं। दोनों ही उत्तर प्रदेश से लोकसभा सांसद हैं। यूपी कांग्रेस के हाथ से कभी का फिसला है। मां बेटा दोनों के सामने मनमोहन सरकार भ्रष्टाचार की गंगोत्री बन चुकी है। सरकार आकंठ भ्रष्टाचार में डूब चुकी है। मंहगाई आसमान छू रही है। देश में अराजकता है, सीमाएं असुरक्षित हैं, कभी पाक तो कभी चीन कालर पकड़ने पर आमदा है। यह सब देख सुनकर भी सोनिया और राहुल मौन साधे बैठे हैं, मानो यह देश उनका है ही नहीं!

कांग्रेस के नेता भी अजीब हैं। एक विदेशी महिला जो इस देश की बहू तो बन गई पर देश को सरेआम लुटते देख रही है के पीछे अगर बत्ती लिए दौड़ लगा रहे हैं। सोनिया के पुत्र राहुल गांधी भी अपने पीछे दिया लेकर दौड़ने वालों को देखकर मन ही मन प्रसन्न होते हैं। उन्हें जरूर लगता होगा कि कितने बेवकूफ हैं लोग जो सिर्फ नेहरू गांधी परिवार के नाम के सामने ही नतमस्तक हो जाते हैं। छः दशकों में कांग्रेस एक भी कद्दावर नेता को पैदा नहीं कर पाई जो कांग्रेस को संभाले।

आज कांग्रेसियों द्वारा अपनी राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी को प्रसन्न करने के लिए उनके पूर्वजों पंडित जवाहर लाल नेहरू, श्रीमति इंदिरा गांधी, राजीव गांधी को बड़ी शिद्दत से याद करते हैं। जब बारी संजय गांधी की आती है तो मुट्ठी भर नेता ही जुट पाते हैं उनकी पुण्य तिथि या जन्म दिवस पर। इसके अलावा गांधी नाम जिसने दिया उस फिरोज गांधी को ही भुला दिया कांग्रेसियों ने। न सरकारी विज्ञापन न कोई बड़ा कार्यक्रम होता है उनकी पुण्य तिथि या जन्म दिन पर।

आजादी के उपरांत देश पर सबसे अधिक कांग्रेस ने ही राज किया है। कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों में मनमोहन सिंह ही इकलौते हैं जो पांच साल से ज्यादा चल पाए। वरना तो पंडित जवाहर लाल नेहरू, श्रीमति इंदिरा गांधी के बाद सत्ता राजीव गांधी के हाथों में चली गई थी। वह तो राकांपा नेता शरद पवार थे जिन्होंने सोनिया गांधी के विदेश मूल के मामले को उकेरा, वरना आज सत्ता फिर नेहरू गांधी परिवार के पास घोषित तौर पर होती।

अब राहुल गांधी की ताजपोशी की तैयारियां हो रही हैं। कोई कह सकता है कि देश में प्रजातंत्र है? आज भी वही पुरानी राजशाही ही दिख रही है। जिसमें सत्ता एक के बाद परिवार में ही दूसरे को सौंपी जाती है। राजनीति में भी कमोबेश यही देखने को मिल रहा है। राजनेताओं के पुत्र तत्काल ही अनुकंपा नियुक्ति पा जाते हैं। प्रणव मुखर्जी ने तो अपने पुत्र को स्थापित कर ही दिया।

कितने आश्चर्य की बात है कि भ्रष्टाचार के मामले को लोकसभा में सोनिया गांधी ने एक मर्तबा भी नहीं उठाया। बाबा रामदेव के साथ रामलीला मैदान में हुई रावणलीला पर भी राहुल और सोनिया ने अपना मुंह सिल रखा था। अण्णा हजारे का मामला भी दोनों ने मूकदर्शक बनकर ही देखा। काला धन भारत लाने के मामले में भी दोनों ही नेताओं ने कोई बयान नहीं दिया।

राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी सांसद हैं इस लिहाज से वे जनता की सेवक हैं। राजमाता की ठसक तो देखिए, वर्ष 2009 से अब तक वे कभी संसदीय शिष्ट मण्डल में शामिल नहीं हुंई और तो और उन्होंने कभी भी अंतर्राष्ट्रीय समारोहों में शिरकत नहीं की। सोनिया गांधी अपना कद सरकार के उपर ही समझतीं होंगी तभी तो उन्हें अब तक किसी भी संसदीय समिति का सदस्य नहीं बनाया गया।

आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी ने विदेशों में जमा भारतीयों के गाढ़े पसीने की कमाई को हिन्दुस्तान वापस लाने के मामले को कभी संसद में नहीं उठाया। आजाद भारत गणराज्य के इस राजपरिवार के सदस्यों को भारत की कितनी चिंता है इस बात का अंदाजा दोनों ही के द्वारा संसद की कार्यवाही में हिस्से दारी से लगाया जा सकता है।

ईमानदार छवि वाले अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस के ही नेता देश को नोंच नोंच का खा रहे हैं, मगर राजपरिवार खामोश है। टूजी स्पेक्ट्रम, एस बेण्ड, नोट फार वोट, कामन वेल्थ, आदर्श सोसायटी जैसे अनगिनत घोटाले हुए। सीबीआई को मजबूरी में कदम उठाकर अनेक नेताओं को जेल भेजना पड़ा। यह सब देखने सुनने के बाद मोटी चमड़ी वाले जनसेवकों के साथ ही साथ सोनिया और राहुल भी चुप रहे। क्या यह प्रजातंत्र का अपमान और मजाक नहीं?

देश की सीमाएं असुरक्षित हैं, अंदर ही अंदर नक्सलवाद, अलगाववाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, माओवाद, आतंकवाद आदि भय पैदा कर रहा है। कभी पाकिस्तान तो कभी चीन हमारी कालर पकड़कर झझकोर रहा है। इस सबके बाद भी राजपरिवार यानी गांधी परिवार खामोश है। आम आदमी आज यही सोच रहा है कि आखिर इटली मूल की सोनिया माईनो अपने नेतृत्व में भारत गणराज्य को किस अंधी और अंतहीन सुरंग में ले जा रही है।

. . . तो जहरीला पानी पीने को मजबूर होंगे राजधानी वासी


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 15

. . . तो जहरीला पानी पीने को मजबूर होंगे राजधानी वासी

संस्कारधानी में भी नल उगलेंगे जहर!

जहर पिलाने की तैयारी में शिव का राज

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। देश के हृदय प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से महज सौ किलोमीटर दूर भगवान शिव के जिले सिवनी के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में स्थापित होने वाले देश के मशहूर थापर ग्रुप के सहयोगी प्रतिष्ठान के छः सौ मेगावाट के पावर प्लांट की स्थापना अगर हो गई तो यह सुनिश्चित ही है कि संस्कारधानी जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, भोपाल, खण्डवा आदि जिलों में लोग जहर पीने पर मजबूर हो जाएंगे।

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के सूत्रों का दावा है कि इस पावर प्लांट की प्रोजेक्ट रिपोर्ट को देखकर यह अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि इससे उड़ने वाली राख जब पुण्य सलिला नर्मदा नदी पर बने रानी अवंती बाई सागर परियोजना अर्थात बरगी बांधी की तलहटी पर जाकर बैठेगी तो वहां तलहटी में सिल्ट जमा होना आरंभ होगा जिससे साल दो साल में ही नदी का भराव क्षेत्र आश्चर्यजनक तौर पर कम हो जाएगा। इसके अलावा इस राख से पानी पूरी तरह जहरीला भी हो जाएगा।

गौरतलब है कि देश की सबसे प्राचीनतम नदी नर्मदा का जल तेजी से जहरीला होता जा रहा है। अगर यही स्थिति रही तो मध्यप्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा अगले 10-12 सालों में पूरी तरह जहरीली हो जाएगी और इसके आसपास के शहरों-गांवों में बीमारियों का कहर फैल जाएगा। हाल ही मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नर्मदा के जल की शुद्धता जांचने के लिए किए गए एक परीक्षण में पता चला है कि नर्मदा तेजी से मैली हो रही है।

तमाम शोध और अध्ययन बताते हैं कि नर्मदा को लेकर बनी योजनाओं से दूरगामी परिणाम सकारात्मक नहीं होंगे। भयंकर परिणामों के बावजूद नर्मदा समग्र अभियान वाली हमारी सरकार नर्मदा जल में जहर घोलने की तैयारी क्यों कर रही है? यह विडंबना ही कही जाएगी कि मध्यप्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली नर्मदा नदी जिसके पानी का भरपूर दोहन करने के लिए नर्मदा घाटी परियोजना के तहत 3000 से भी ज्यादा छोटे-बड़े बांध बनाए जा रहे हैं।

वहीं एक सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार नर्मदा नदी के तट पर बसे नगरों और बड़े गांवों के पास के लगभग 100 नाले नर्मदा नदी में मिलते हैं और इन नालों में प्रदूषित जल के साथ-साथ शहर का गंदा पानी भी बहकर नदी में मिल जाता है। इससे नर्मदा जल प्रदूषित हो रहा है। नगरपालिकाओं और नगर निगमों द्वारा गंदे नालों के ज़रिए दूषित जल नर्मदा में बहाने पर सरकार रोक नहीं लगा पाई है और न ही आज तक नगरीय संस्थाओं के लिए दूषित जल के अपवाह की कोई योजना बना पाई है। राज्य के 16 ज़िले ऐसे हैं जिनके गंदे नालों का प्रदूषित पानी नर्मदा में प्रदूषण के स्तर को बढ़ा रहा है।

राज्य के 16 ज़िले ऐसे हैं जिनके गंदे नालों का प्रदूषित पानी नर्मदा में प्रदूषण के स्तर को बढ़ा रहा है। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्र के कटाव से भी नर्मदा में प्रदूषण बढ़ रहा है। कुल मिलाकर नर्मदा में 102 नालों का गंदा पानी और ठोस मल पदार्थ रोज़ बहाया जाता है, जिससे अनेक स्थानों पर नर्मदाजल खतरनाक रूप से प्रदूषित हो रहा है।

(क्रमशः जारी)

राहुल के मन बनेंगे दिग्विजय!


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 27

राहुल के मन बनेंगे दिग्विजय!

सधे कदम से 7 रेसकोर्स का रास्ता तय कर रहे दिग्गी

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में दस साल तक लगातार शासन करने वाले राजा दिग्विजय सिंह अब प्रधानमंत्री पद के काफी करीब पहुंच चुके हैं। मनमोहन की संभावित बिदाई के बाद अगर किसी की किस्मत खुलेगी तो वे होंगे राजा दिग्विजय सिंह। राहुल भले ही प्रधानमंत्री बनने के लिए आतुर न दिख रहे हों पर दिग्गी राजा जल्दी में ही दिख रहे हैं। वे राहुल गांधी पर दबाव बना रहे हैं कि अब समय आ चुका है राहुल को पद संभाल लेना चाहिए।

दरअसल, इसके पीछे दिग्विजय सिंह की कुछ और रणनीति काम कर रही है। दिग्गी के करीबी सूत्रों का कहना है कि सोनिया अपनी बीमारी के दरम्यान जब विदेश गईं तो कांग्रेस की संचालन समिति में स्थान न पाने के कारण दिग्विजय सिंह बुरी तरह आहत थे। उधर सोनिया के लोटने के बाद यह चार सदस्यी समिति अस्तित्व में तो है पर ज्यादा प्रभावी नहीं है। सोनिया की तबियत वैसे भी नासाज ही है। वे पार्टी के कामकाज में ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रहीं हैं।

सूत्रों ने यह भी कहा कि दिग्गी राजा ने राहुल गांधी के आसपास एसे लोगों की फौज जमा दी है जो दिग्गी की कठपुतली बने हुए हैं। वे राहुल को उसी रंग का चश्मा लगाकर दुनिया दिखा रहे हैं जिस रंग की दुनिया दिग्विजय सिंह दिखाना चाहते हैं। नादान राहुल चुपचाप इस काकस में जकड़े हुए हैं। राहुल को मशविरा देने के लिए कोई आगे आता है तो यह चण्डाल चौकड़ी उसकी विश्वसनीयता पर ही प्रश्न चिन्ह लगाकर राहुल को भरमा देते हैं।

राहुल गांधी के कदम तालों को देखकर अब यह बात हवा में फैला दी गई है कि राहुल को अब पार्टी अध्यक्ष का काम संभाल लेना चाहिए। चूंकि सोनिया भी अस्वस्थ्य हैं इसलिए राहुल के लिए पार्टी अध्यक्ष बनने का यह मुफीद समय है। एक तीर से दिग्विजय सिंह ने कई निशाने साध लिए हैं। अव्वल तो राहुल पार्टी की कमान संभालेंगे फिर मनमोहन को बाहर का रास्ता दिखाएंगे। सोनिया ने मनमोहन को प्रधानमंत्री चुना अब राहुल के मन बन सकते हैं महासचिव दिग्विजय सिंह।

(क्रमशः जारी)

आईडिया के पालतू गुण्डों ने चमकाया उपभोक्ता को


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  23

आईडिया के पालतू गुण्डों ने चमकाया उपभोक्ता को

अब मैं छपवाउं कि आप फर्जी आईडी देते हैं!

आईडिया के अधिकारी ने फोन पर चमकाया उपभोक्ता को

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। आदित्य बिरला के स्वामित्व वाली आईडिया सेल्यूलर ने अब गुण्डे पाल लिए हैं। ये गुण्डे सरेआम उपभोक्ताओं को धौंस दे रहे हैं। एक भुक्तभोगी उपभोक्ता के मुताबिक आईडिया के एक एएसएम ने उसे फोन पर तबियत से धमकाया। यह फोन उपभोक्ता के बीएसएनएल फोन पर आईडिया के फोन से आया था। एक नहीं चार पांच मर्तबा फोन कर उस आईडिया के गुण्डे ने उपभोक्ता को चमकाया।

उपभोक्ता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि उसने आईडिया के नेट सेटर लिया था जो एक दिन चलकर ही बंद हो गया। बाद में वह लगातार दो महीनों से अपनी सिम, रिचार्ज और नेट सेटर के पैसे वापस लेने दर दर भटक रहा है। उस उपभोक्ता ने कहा कि उसे उस जिले के टीम लीडर का फोन आया और उसने उपभोक्ता से शांत रहने को कहा।

इसके उपरांत केंद्र में एक कद्दावर मंत्री के संसदीय क्षेत्र के मुख्यालय में पदस्थ आईडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उस उपभोक्ता को मोबाईल करके कहा कि उसके द्वारा दी गई आईडी फर्जी है। इसलिए उसका कनेक्शन बंद कर दिया गया है। जब उस उपभोक्ता ने कहा कि उसकी आईडी तो मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी की गई है। हो सकता है उसकी वैधता समाप्त हो गई हो, किन्तु उसके साथ दिए गए भोपाल के अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के हस्ताक्षरों से युक्त चालक अनुज्ञा की वैधता तो 2012 तक है।

इस पर एक बार फिर उक्त अधिकारी ने उपभोक्ता को चमकाया कि अब अखबारों से वे छपवाएं की फर्जी आईडी के जरिए मोबाईल कनेक्शन लेने का प्रयास कर रहा है वह उपभोक्ता। उपभोक्ता बुरी तरह चकरा गया कि उसके द्वारा दिए गए वैध परिचय पत्रों की छाया प्रति को आखिर अवैध कैसे माना जा सकता है। हो सकता है कि केंद्रीय मंत्री के क्षेत्र में पदस्थ रहने के कारण आईडिया के इन कारिंदों के पास इतना साहस आ गया हो कि वे उपभोक्ताओं के साथ गुण्डागर्दी पर उतारू हो गए हों।

(क्रमशः जारी)

सोमवार, 14 नवंबर 2011

अपने ही निर्णय से पलटते शिवराज


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . . 14

अपने ही निर्णय से पलटते शिवराज

खेती की जमीन अधिगृहित न करने का जारी किया था फरमान

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। देश के हृदय प्रदेश के निजाम शिवराज सिंह चौहान अब अपने कौल से ही पलटते नजर आ रहे हैं। पहले खेती की जमीनों का अधिग्रहण न करने के निर्देश देते हैं फिर उद्योगों के दबाव में आकर गरीब आदिवासियों की जमीन को कांग्रेस के नेताओं के दबाव में निजी कंपनियों के हवाले करने से भी वे गुरेज करते नहीं दिख रहे हैं।

गौरतलब है कि इसी साल अगस्त के दूसरे पखवाड़े में राजधानी भोपाल में भोपाल में शीर्ष स्तरीय निवेश संवर्धन साधिकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा था कि कम होती जा रही खेती की जमीन के मद्देनज़र किसानों की जमीनें अधिगृहीत नहीं की जायेंगी। बड़ी उद्योग परियोजनाओं को अपने उपयोग के लिये स्वयं जमीन खरीदना होगी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री चौहान की पहल पर औद्योगिक इकाइयों की स्थापना और व्यावसायिक संचालन संबंधी मुद्दों पर त्वरित निर्णय लेने और अंर्तावभागीय मुद्दों का समाधान करने के लिये नियमित रूप से शीर्ष समिति की बैठक आयोजित की जाती है।

उस समय भावावेश में श्री चौहान ने दिल्ली मुम्बई औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना से संबंधित मुद्दों के समाधान के लिये वित्त मंत्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिये। उन्होंने संबंधित विभागों के प्रमुख सचिवों को निर्णयों का पालन निश्चित समय-सीमा में करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि शीर्ष समिति के समक्ष विभिन्न विषय रखने के पहले उन पर गहन रूप से विचार-विमर्श हो जाना चाहिये ताकि निर्णय लेने में आसानी हो।

इस महात्वपूर्ण बैठक में वित्त मंत्री राघवजी, उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मुख्य सचिव अवनि वैश्य, प्रमुख सचिव उद्योग पी.के. दाश, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन एस.पी.एस. परिहार, प्रमुख सचिव जल संसाधन आर.एस. जुलानिया, प्रमुख सचिव आवास एवं पर्यावरण इकबाल सिंह बैंस, प्रमुख सचिव राजस्व आर.के. स्वाई, प्रमुख सचिव कृषि एम.एम. उपाध्याय, जैसे वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के ही सिवनी जिले में देश की मशहूर थापर ग्रुप के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड के लिए 600 एकड़ में प्रस्तावित छः सौ मेगावाट के पावर प्लांट को डालने के लिए शिवराज सरकार द्वारा गरीब आदिवासियों की जमीन भी माटी मोल कंपनी को दिलवाई जा रही है। इस सबके बाद भी मध्य प्रदेश में आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस कमेटी मौन धारण किए हुए है।

(क्रमशः जारी)

सोनिया की नासाजी बचा ले मनमोहन को

बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 26

सोनिया की नासाजी बचा ले मनमोहन को

राहुल को अध्यक्ष बनने का न्योता दिया मन से

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। चला चली की बेला में देश के वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन सिंह के सितारे अब वापस बुलंदी पर जाते दिखने लगे हैं। सोनिया गांधी की नासाज तबियत से वे ज्यादा सक्रिय नहीं हो पा रही हैं। सोनिया से मिलने वालों की तादाद में भी कमी की गई है। मनमोहन जुंडाली उनकी बीमारी को लेकर अब खेल खेलने पर आमदा दिख रही है।

पीएमओ के सूत्रों ने कहा कि मनमोहन सिंह अपनी कुर्सी बचाने के लिए अब कुछ भी करने को तैयार हो गए हैं। सूत्रों ने आगे कहा कि उनकी जुंडाली ने अब सोनिया की रहस्यमय बीमारी के बारे में भी मीडिया को भरमाने की योजना बनाई है ताकि सोनिया की रहस्यमय बीमारी एक बार फिर सुर्खियों में आ जाए और सोनिया के करीबी लोग मनमोहन पर वार करने के स्थान पर डैमेज कंट्रोल में जुट जाएं।

उधर मनमोहन सिंह ने यह कहकर भी भूचाल ला दिया है कि राहुल गांधी अगर अध्यक्ष बनते हैं तो वे उसका स्वागत करेंगे। सियासी हल्कों में अब यह बात स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है कि सोनिया गांधी स्वास्थ्य कारणों के चलते अध्यक्ष पद संभाल नहीं पा रही हैं। राहुल गांधी को अगर कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाता है तो मां अध्यक्ष बेटा कार्यकारी अध्यक्ष की बात किसी के गले नहीं उतरेगी और चहुंओर कांग्रेस की भद्द पिटेगी। इसलिए राहुल को कांग्रेस संगठन की कमान सौंपी जाए। अगर एसा होता है तो मनमोहन के लिए यह राहत की बात इसलिए होगी क्योंकि कुछ दिन तक उन पर वार नहीं किए जाएंगे।

(क्रमशः जारी)

उपभोक्ताओं को लूटने का नायाब ‘आईडिया‘

एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  22

उपभोक्ताओं को लूटने का नायाब आईडिया

उपभोक्ता परेशान, आखिर शिकायत करें तो कहां

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। आदित्य बिरला के स्वामित्व वाली आईडिया सेल्युलर ने इस समय धूम मचा रखी है। आईडिया के उपभोक्ता इसका कनेक्शन लेने पर अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। एक बार आईडिया के जाल में फंसने के बाद उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज कराने न जाने कहां कहां भटकता रहता है पर उसकी कोई सुनवाई ही नहीं होती है।

एक उपभोक्ता ने बताया कि उसने पिछले महीने आईडिया का एक नेट सेटर लिया। इसकी सिम का नंबर 89917851010105568677 तथा मोबाईल नंबर उसे 9617564970 प्रदाय किया गया। उसका इंटरनेट एक दिन बढिया चला फिर अचानक ही बंद हो गया। उपभोक्ता दर दर मारा फिरता रहा पर उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। आईडिया प्वाईंट जाकर शिकायत करने पर उसे दो टूक कह दिया गया कि उसकी शिकायत वे नहीं ले सकते।

12345 पर शिकायत करने के डेढ माह बाद भी उपभोक्ता को राहत नहीं मिल सकी है। उक्त उपभोक्ता ने बताया कि उसे बताया गया कि उसके द्वारा जमा किए गए डाक्यूमेंट में सरकारी परिचय पत्र की तिथि समाप्त हो चुकी है। उपभोक्ता ने कहा कि चालक अनुज्ञा तो सही है। इस पर उसे कोई जवाब नहीं मिला।

उक्त उपभोक्ता ने बताया कि उसने बड़ी मशक्कत के बाद अपने संपर्कों से आईडिया के टीम प्रबंधक, एरिया सेल्स मेनेजर का फोन कबाड़ा और उनसे चर्चा भी पर उसका भी कोई निष्कर्श नहीं निकला। उक्त उपभोक्ता ने कहा कि आईडिया कंपनी ने लूटने के गजब गजब के आईडिया इजाद किए हुए हैं। उसके द्वारा सिम, नेट सेटर और उसके रिचार्ज के पैसे तो आईडिया कंपनी ने गटक लिए हैं।

(क्रमशः जारी)