मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012

ब्राडगेज आ गई सिवनी जिले में!


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  58

ब्राडगेज आ गई सिवनी जिले में!

जिले के घंसौर तहसील में जारी है अमान परिवर्तन का काम



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा देश के हृदय प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में लगाए जा रहे 1200 मेगावाट के कोल आधारित पावर प्लांट के चलते सिवनी जिले को ब्राडगेज का तोहफा अवश्य मिल गया है, यह अलहदा बात है कि जिला मुख्यालय में अमान परिवर्तन का काम कब होगा यह बात भविष्य के गर्भ में ही है।
रेल मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि पूर्व रेल मंत्री ममता बनर्जी पर एक केंद्रीय मंत्री का जबर्दस्त दबाव था कि जबलपुर से बालाघाट के अमान परिवर्तन में भले ही नैनपुर से बालाघाट के बीच वन विभाग के फच्चर को न सुलटाया जा सके, किन्तु जबलपुर से बिनेकी तक रेल मार्ग का अमान परिवर्तन जल्द से जल्द करा दिया जाए। गौरतलब है कि सिवनी जिले के बिनेकी ग्राम के समीप गौतम थापर का कोल आधारित पावर प्लांट प्रस्तावित है, जहां कोयले की आपूर्ति रेल मार्ग से होना प्रस्तावित है।
सूत्रों ने आगे कहा कि जबलपुर से बिनेकी तक के अमान परिवर्तन का काम युद्ध स्तर पर जारी है। स्वाभाविक है कि जबलपुर से बिनेकी मार्ग के अमान परिवर्तन होने से गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के 1200 मेगावाट के कोल आधारित पावर प्लांट में कोयले की आपूर्ति निर्बाध तौर पर की जा सकेगी। पूर्व में कयास लगाए जा रहे थे कि जबलपुर के उपरांत नेरोगेज होने से कोयले की आपूर्ति सड़क मार्ग से की जाएगी।
सूत्रों ने आगे कहा कि सिवनी से होकर गुजरने वाले एक शताब्दी पुराने छिंदवाड़ा नैनपुर रेल खण्ड के अमान परिवर्तन का काम एक केंद्रीय मंत्री की विशेष दिलचस्पी के चलते ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर मण्डला से नैनपुर के अमान परिवर्तन का काम इसलिए प्राथमिकता पर हो रहा है, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी ने इस रेल खण्ड के लिए अपनी सैद्धांतिक सहमति प्रदाय की थी।
रेल मंत्री के करीबी सूत्रों का कहना है कि सिवनी के लोग अब यह बात नहीं कह पाएंगे कि उन्हें ब्राडगेज से नहीं जोड़ा गया है। देखा जाए तो सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकास खण्ड में ब्राडगेज आने से सिवनी जिला ब्राडगेज के नक्शे में अवश्य आ जाएगा। सूत्रों ने कहा कि सिवनी जिले के साथ सौतेला व्यवहार करने वाले कांग्रेस के नेताओं ने बड़ी ही चतुराई से सिवनी को ब्राडगेज के नक्शे पर अवश्य ही ला दिया है, पर जिला मुख्यालय अभी भी ब्राडगेज से जुड़ने से वंचित ही है। इसका कारण भले ही गौतम थापर हों जिनका इकबाल राजनैतिक तौर पर बुलंद हैं, हों, किन्तु जिले का (जिला मुख्यालय नहीं) ब्राडगेज से जुडने का सालों पुराना सपना सच होता दिख रहा है।

(क्रमशः जारी)

सोनिया की मुखालफत कर रहे थे हरीश खरे


बजट तक शायद चलें मनमोहन. . . 80

सोनिया की मुखालफत कर रहे थे हरीश खरे

आईबी ने पकड़ी थी आपत्तिजनक मेल



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। मीडिया के मसले में प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के आंख नाक कान समझे जाने वाले हरीश खरे को अंततः दूध में से मख्खी की तरह निकालकर बाहर कर दिया गया। सियासी गलियारों में इस बात की पतासाजी जारी है कि आखिर क्या वजह थी कि मनमोहन सिंह ने अपने विश्वस्त हरीश खरे के साथ इतनी बेरूखी अख्तियार की? हिन्दी और भाषाई पत्रकारों और समाचार पत्रों की उपेक्षा का कारण इसमें प्रमुखता से सामने आया था किन्तु यह तो महज एक निमित्त था, दरअसल, कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी की नजरें हरीश खरे के लिए तिरछी हो गईं थीं, जो उनकी बिदाई का कारण बनीं।
कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (सोनिया गांधी का सरकारी आवास) के अति विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि 10, जनपथ बनाम 7, रेसकोर्स (प्रधानमंत्री आवास) में हरीश खरे एक इंस्टूमेंट के मानिंद काम कर रहे थे, जिसकी जानकारी सोनिया गांधी को दी गई। इसके बाद ही प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार हरीश खरे को बाहर का रास्ता दिखाने का ताना बाना बुना गया।
सूत्रों ने बताया कि मूलतः अंग्रेजी भाषा के प्रेमी हरीश खरे के कुछ आपत्तिजनक ईमेल इंटेलीजेंस ब्यूरो ने पकड़े थे। सूत्रों ने आगे कहा कि इन ईमेल की भाषा, विचार, भावार्थ, भाव भंगिमाएं, निहितार्थ कुछ इस तरह के थे जो सीधे सीधे 10, जनपथ के खिलाफ थे। इन ईमेल को जब सोनिया गांधी के संज्ञान में लाया गया तब सोनिया गांधी को मशविरा दिया गया कि प्रधानमंत्री बनाम कांग्रेस अध्यक्ष के अघोषित शीत युद्ध को हवा देने का काम कोई ओर नहीं हरीश खरे ही कर रहे हैं।
सूत्रों ने साफ तौर पर कहा कि डॉ.मनमोहन सिंह के मीडिया एडवाईजर हरीश खरे ने उक्त ईमेल उस वक्त भेजी थी जब मीडिया में प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह और कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के बीच अनबन की खबरें मीडिया की सुर्खियां बन रहीं थीं। वज़ीरे आज़म डॉ.सिंह के मीडिया सलाहकार हरीश खरे ने उक्त ईमेल आंग्ल भाष के सोनिया विरोधी वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों को भेजी थी। इसके बाद ही सोनिया की भवें तनीं और हरीश खरे को निकालने के अलावा प्रधानमंत्री के पास कोई और मार्ग नहीं बचा।

(क्रमशः जारी)

मादक पदार्थों की नीति घोषित


मादक पदार्थों की नीति घोषित

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। केंद्र सरकार ने मादक पदार्थों और नशीली दवाओं के बारे में एक राष्ट्रीय नीति की घोषणा की है। इसका उद्देश्य इन पदार्थों की तस्करी पर रोकथाम लगाना और प्रबंधन में सुधार लाना है। मादक पदार्थों और नशीली दवाओं की की तस्करी की खबरें तेजी से बढ़ने से सरकार चिंतित नजर आ रही थी।
वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कल नई दिल्ली में एक समारोह में यह नीति जारी की। नीति के तहत नशीली दवाओं के दुरूपयोग की चुनौती पर नियंत्रण लगाने की व्यवस्था की गई है और इसमें मादक पदार्थों के शिकार लोगों के इलाज, पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रावधान शामिल हैं।
सरकारी सूत्रों का दावा है कि इसके लागू हो जाने से अपराधों में कमी आएगी और जनस्वास्थ्य में सुधार आएगा। इलाज के लिए जरूरी मॉर्फीन और इस तरह के अन्य पदार्थों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा। नीति में कहा गया है कि पोस्त और भांग की अवैध खेती के बारे में उपग्रह के जरिए पता लगाकर रोक लगाई जाएगी। इसके बाद अवैध खेती से जुड़े लोगों को आजीविका के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

यूपी में मतदान कल


यूपी में मतदान कल

(दीपांकर श्रीवास्तव)

लखनऊ (साई)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के पहले चरण के चुनाव के लिए प्रचार कल शाम समाप्त हो गया। मतदान कल होगा। इसके लिए मतदानकर्मियों को मतदान केन्द्रों पर आज भेजा जा रहा है। इस चरण में अवध और पूर्वी क्षेत्र के १० जिलों में ५५ विधानसभा सीटों पर होने वाले मतदान के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा प्रबंध किए गये हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लोगों के बीच विश्वास पैदा करने के लिए कई स्थानों पर केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों ने फ्लैगमार्च किया। स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के लिए केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों की ६८० कंपनियां तैनात की गई हैं।


नेपाल की सीमा सील


नेपाल की सीमा सील

(प्रियंका श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। अंतर्राज्यीय और पड़ोसी देश नेपाल से लगने वाली अंतर्राष्ट्रीय सीमा सील कर दी गई है। चुनाव वाले क्षेत्रों में अराजक तत्वों की आवाजाही को रोकने के लिए जगह-जगह बैरियर लगाए गए हैं। कुल आठ सौ ६२ उम्मीदवारों के राजनीतिक भाग्य का फैसला एक करोड़ सत्तर लाख से ज्यादा मतदाता करेंगे।
इनके वोट डालने के लिए १७ हजार से अधिक मतदान केन्द्र बनाए गए हैं। इनमें से छह हजार आठ सौ ५५ की पहचान संवेदनशील के रूप में की गई है। तीन सौ ५१ मतदान केन्द्रों पर वोट डालने संबंधित सभी गतिविधियों पर निगाह रखने के लिए वेब कैमरे लगाए गए हैं। प्रथम चरण में लखनऊ, फैजाबाद, देवी पाटन और बस्ती मंडलों के दस जिलों में वोट डाले जाएंगे। इस बीच, पांचवे चरण के चुनाव के लिए कुल एक हजार एक सौ ८५ नामांकन पत्रों में से २८२ उम्मीदवारों के नामांकन पत्र जांच के दौरान रद्द कर दिए गये।




विदेश मंत्री चीन यात्रा पर


विदेश मंत्री चीन यात्रा पर

(यशवंत श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा, आज से तीन दिन की यात्रा पर चीन जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच जारी उच्चस्तरीय वार्ता में कुछ समय तक गतिरोध रहने के बाद दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों ने पिछले महीने नई दिल्ली में सीमा मुद्दे पर फिर बातचीत शुरू की थी।
श्री कृष्णा, अगले महीने के अंत में चीन के राष्ट्रपति हू चिंताओ की भारत यात्रा से पहले आधार बनाने के उद्देश्य से चीन जा रहे हैं। श्री कृष्णा पेइचिंग में चीन के विदेश मंत्री यांगजीएची ;ल्ंदह श्रपमबीपद्ध से मुलाकात करेंगे और नए चांसरी भवन का उद्घाटन करेंगे। वे आपसी, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक बातचीत करेंगे। पूर्व राजनयिक जी पार्थसार्थी का कहना है कि यह वार्ता कई मायनों में महत्वपूर्ण है।
पार्थसारथी ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि इस दौरे के दौरान द्विपक्षिय विषयों और खासतौर पर सीमा समस्या पर जरूर बातचीत होगी। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री का यही इरादा रहेगा कि इसको आगे ले जाएं। इसके अलावा कई अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं पर जरूर बातचीत होगी। क्योंकि फिलहाल अमरीका ने ईरान के तेल के आयाता पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। ईरान से तेल का आयात चीन के लिए और भारत के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने यकीन जताया कि ऐसे कुछ रास्ते ढूंढेंगे हम सम्मिलित होकर ताकि अमरीकन प्रतिबंध जो लगाए गए हैं इसका हम सामना कर सकें, क्योंकि हमारी जो ऊजा सुरक्षा है इसके लिए हमारे संबंध ईरान के साथ महत्वपूर्ण हैं।

अमरबेल: गंजेपन का उपाय


हर्बल खजाना ----------------- 17

अमरबेल: गंजेपन का उपाय



(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। जंगलों, सडक, खेत खलिहानों के किनारे लगे वृक्षों पर परजीवी अमरबेल का जाल अक्सर देखा जा सकता है, वास्तव में जिस पेड पर यह लग जाती है, वह पेड धीरे धीरे सूखने लगता है। खैर, इसकी पत्तियों मे पर्णहरिम का अभाव होता है जिस वजह से यह पीले रंग की दिखाई देती है। इसके अनेक औषधिय गुण भी है।
अमरबेल का वानस्पतिक नाम कस्कूटा रिफ़्लेक्सा है। पूरे पौधे का काढा घाव धोने के लिए बेहतर है और यह टिंक्चर की तरह काम करता है। डाग गुजरात के आदिवासी हर्बल जानकार इसके बीजों और पूरे पौधे को कुचलकर आर्थराईटिस के रोगी को दर्द वाले हिस्सों पर पट्टी लगाकर बाँध दिया जाए तो काफ़ी फ़ायदा होता है।
गंजेपन को दूर करने के लिए पातालकोट के आदिवासी मानते है कि यदि आम के पेड पर लगी अमरबेल को पानी में उबाल लिया जाए और उस पानी से स्नान किया जाए तो बाल पुनःः उगने लगते है हलाँकि डाँग के आदिवासी अमरबेल को कूटकर उसे तिल के तेल में २० मिनट तक उबालते है और इस तेल को कम बाल या गंजे सर पर लगाने की सलाह देते है।
अमरबेल को कुचलकर इसमें शहद और घी मिलाकर पुराने घावों पर लगाया जाए तो घाव जल्दी भरने लगता है। आधुनिक अध्ययनों से पता चलता है कि इस पौधे का अर्क पेट के कैंसर से लड़ने में मदद कर सकता है। कई ग्रामीण अंचलों मे इसका काढा गर्भपात कराने के लिये दाईयों द्वारा दिया जाता है।

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नए अवतार में ताई!


ये है दिल्ली मेरी जान



(लिमटी खरे)

नए अवतार में ताई!
देश की पहली महिला महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल इन दिनों अलग ही रूप में नजर आ रहीं हैं। कल तक शांत रहने वाली प्रतिभा ताई ने अब अपनी भाव भंगिमाएं बदल लीं हैं। इस साल जुलाई में वे सेवानिवृत होने वाली हैं। इस साल गणतंत्र दिवस परेड पर प्रतिभा पाटिल ने पूर्व राष्ट्रपति कलाम के मानिंद ही बच्चों के साथ खूब समय बिताया। कहा तो यह भी जा रहा है कि कलाम की तरह लोकप्रिय होने की जुगत में प्रतिभा ताई ने यह कदम उठाया है, ताकि वे अगली मर्तबा इस पद पर अपनी दावेदारी पुख्ता कर सकें। रायसीना हिल्स से रूखसती के पहले प्रतिभा ताई ने अपनी प्राथमिकताएं भी तय कर लीं हैं। राष्ट्रपति भवन के सूत्रों का दावा है कि प्रतिभा ताई मई माह में देश के हर सूबे में जाकर विधायकों से रूबरू होंगी। वे सर्वोच्च न्यायायल के न्यायधीशों, मीडिया कर्मियों कुछ गैर सरकारी संगठनों से मिलने वाली हैं। जुलाई के पहले सप्ताह में वे केंद्रीय मंत्रीमण्डल के सदस्यों से रूबरू होंगीं।

पचौरी ने आरंभ किया अपना काम
भारत गणराज्य के वज़ीरे आज़म डॉ.मनमोहन सिंह के नए मीडिया सलाहकार पंकज पचौरी ने अपनी जवाबदारी लेने के बाद काम युद्ध स्तर पर आरंभ कर दिया है। एक तरफ तो मनमोहन के गण (मंत्री) कपिल सिब्बल द्वारा फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स पर नकेल कसने की मंशा जाहिर की जाती है वहीं दूसरी ओर पीएम के मीडिया एडवाईजर पचौरी ने प्रधानमंत्री का ट्विटर पर एकाउंट बनवा दिया है। पीएमओ इंडियानामक यह एकाउंट चर्चा में आ चुका है। इसकी खासियत यह है कि इस एकाउंट से किसी को फालो नहीं किया गया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि कपिल सिब्बल अब मनमोहन के मनमाफिक नहीं रहे, तभी तो सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स के उनके घोर विरोध के बावजूद भी पीएम ने अपना एकाउंट इस वेब साईट पर बनाने की सहमति दे दी। गौरतलब है कि इसके पहले पूर्व मंत्री शशि थरूर ने ट्विटर को सरकारी कामकाज का जरिया बनवा दिया था।

कुलकर्णी ने थामा गड़करी का हाथ
एक समय एल.के.आड़वाणी के खसुलखास रहे सुधींद्र कुलकर्णी ने अब नया आशियाना ढूंढ लिया है। कुलकर्णी अब भाजपा के निजाम नितिन गड़करी के सलाहकार के रूप में सामने आए हैं। नोट फॉर वोटमामले में जेल की हवा खा चुके कुलकर्णी के दिमाग की दाद देते हुए भाजपा ने उनका पुनर्वास किया है। 2009 में आड़वाणी के विजन दस्तावेज को तैयार करने वाले कुलकर्णी को भाजपा मुख्यालय 11, अशोक रोड़ में एक कमरा भी आवंटित हो गया है। बताते हैं कि कुलकर्णी इस समय गड़करी के लिए उत्तर प्रदेश में सत्ता वापसी का रोड़ मेप तैयार कर रहे हैं। जानकार इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि वेस्ट बंगाल की निज़ाम ममता बनर्जी के कथित तौर पर करीबी रहे कुलकर्णी जो रेल्वे की विशेषज्ञ समिति में भी थे को भाजपा इतनी महती जवाबदारी कैसे दे सकती है। ममता के रायटर बिल्डिंग पर कब्जे में भी कुलकर्णी की महती भूमिका बताई जा रही है।

पुर्ननियुक्ति की चाहत में द्विवेदी!
मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के दिल्ली स्थित सूचना केंद्र के अपर संचालक पद से 31 जनवरी को सेवानिवृत हुए सुरेंद्र कुमार द्विवेदी पर भाजपा संगठन मेहरबान दिख रहा है। चर्चा है कि मध्य प्रदेश भाजपाध्यक्ष प्रभात झा के करीबी रहे द्विवेदी को पहले भोपाल स्थित माखन लाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पुर्ननियुक्ति देने की कवायद की गई थी। जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संज्ञान में यह बात लाई गई कि द्विवेदी द्वारा सरकार के बजाए संगठन की छवि बनाने पर ज्यादा ध्यान दिया गया तो मामला खटाई में पड़ गया था। भाजपा मानसिकता वाले पत्रकारों पर मेहरबान रहने के आरोप द्विवेदी पर अनेक बार लगे। बताते हैं कि अब द्विवेदी की पुर्ननियुक्ति के लिए एमपी गर्वमेंट द्वारा दिल्ली में एक संसदीय सेल का गठन किया जा रहा है, जो सांसदों का सहयोग करेगा, और इस सेल के प्रभारी के बतौर सुरेंद्र द्विवेदी का नाम चलाया जा रहा है।

राजमाता से मिलने बैचेन खरे
देश के मीडिया को सरकार के लिए मैनेज करने वाले पीएम के मीडिया एडवाईजर रहे हरीश खरे का शनी लगता है काफी भारी चल रहा है। पीएमओ से हटने के बाद अब हरीश खरे के साथ सबसे बड़ा संकट उनकी पीठ पर लगा पीएम के मीडिया एडवाईजर का है। अब उन्हें इस पद पर रहने के बाद इसके समकक्ष या इससे उपर का ओहदा ही चाहिए होगा। अगर वे कहीं ज्वाईन करते हैं और वह पद इससे नीचे का हुआ तो यह उनकी अवनति माना जाएगा। कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (सोनिया गांधी का सरकारी आवास) के सूत्रों का कहना है कि हरीश खरे इस वक्त कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी से मिलने को बेहद बेताब हैं। इसलिए उन्होंने सोनिया गांधी के पारिवारिक मित्र और पत्रकारी सुमन दुबे से मदद की गुहार लगाई है। उधर, खरे के घुर विरोधी पुलक चटर्जी ने अपना पूरा जोर लगा दिया है कि खरे और सोनिया गांधी की मुलाकात न हो पाए।
पगार सरकारी, गुणगान थापर के!
मध्य प्रदेश सरकार के अधीन काम करने वाले प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का एक नया कारनामा सामने आया है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि एमपीपीसीबी के जबलपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय और भोपल स्थित मुख्यालय के अधिकारियों द्वारा पगार तो शिवराज सिंह चौहान सरकार से ली जा रही है, किन्तु गुणगान हो रहा है मशहूर उद्योगपति गौतम थापर का। दरअसल, थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा सिवनी जिले के छटवीं अनुसूची में अधिसूचित आदिवासी बाहुल्य विकासखण्ड घंसौर में कोल आधारित पावर प्लांट लगाया जा रहा है। पर्यावरण संतुलन हेतु इसे 2008 से वृक्षारोपण कराना था। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि उसने दिसंबर 2011 से वृक्षारोपण कराया है। उधर, पीसीबी के अधिकारियों ने कागजों पर ही वृक्षारोपण कर उनकी तसदीक भी कर ली। कहते हैं कि कंपनी ने इन पंक्तियों के लिखे जाने तक वृक्षारोपण किया ही नहीं। पता नहीं क्यों एमपीपीसीबी द्वारा थापर की जुबान बोली जा रही है?

परेशान हैं दिनेश त्रिवेदी!
देश के रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी की पेशानी पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई पड़ रही हैं। वे काफी टेंशन में दिखाई पड़ रहे हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि त्रणमूल कोटे से मंत्री बने दिनेश त्रिवेदी और त्रणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के बीच सब कुछ सामान्य नहीं हैं। उधर, पश्चिम बंगाल की निजाम ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस की कालर पकड़कर उसे हड़काना आरंभ कर दिया है। त्रिवेदी के करीबी सूत्रों का कहना है कि मंत्री महोदय को लग रहा है कि पता नहीं वे अपने जीवन का पहला रेल बजट पेश भी कर पाएंगे अथवा नहीं। वैसे उनकी मुश्किल यह भी है कि ममता रेल किराया नहीं बढ़ाने की पक्षधर हैं, पर अगर रेल भाड़ा नहीं बढ़ा तो घाटे में चलने वाली भारतीय रेल के हालात इंडियन एयरलाईंस और एयर इंडिया के महराजाकी तरह ही हो जाएंगे, जो दर दर भटककर मदद की गुहार लगा रहे हैं।

कांग्रेसियों के रडारपर मीनाक्षी
टीम राहुल की सदस्य और हृदय प्रदेश के मंदसौर की युवा सांसद मीनाक्षी नटराजन इन दिनों कांग्रेस के आला नेताओं के निशाने पर हैं। मीनाक्षी पर आरोप है कि उन्होंने आखिल भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) में राहुल गांधी के द्वारा तय किए गए नियम चुनाव के कायदों का सरेआम माखौल उड़ाया है। मीनाक्षी अपने पसंदीदा उम्मीदवार को एनएसयूआई का अध्यक्ष मनोनीत करवा दिया है। रोहित चौधरी पर आरोप है कि वे संगठन के लिए निर्धारित 30 वर्ष की आयु सीमा को पार कर चुके हैं। एक तरफ तो देश भर में एनएसयूआई क चुनाव चल रहे हैं, इन चुने हुए प्रतिनिधियों को नया अध्यक्ष चुनना है, पर कांग्रेस की बोरा बंद संस्कृति के चलते चौधरी को पद पर बिठा दिया गया है। इस बात को लेकर एनएसयूआई सहित कांग्रेस के आला नेताओं में रोष और असंतोष पनप रहा है। मीनाक्षी की शिकायत अनेक आला नेताओं ने सोनिया और राहुल से भी कर दी है।

चम्बल में होगा भाजपा का प्रभात!
सिंधिया घराने के वर्चस्व वाले ग्वालियर चंबल संभाग पर इन दिनों मध्य प्रदेश भाजपा संगठन काफी मेहरबान दिख रहा है। मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन का समन्वय बन चुका है। मुख्यमंत्री शिवराज चौहान अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं तो संगठन के प्रदेश प्रमुख प्रभात झा को काम करने फ्री हेण्ड मिला हुआ है। प्रभात झा अभी राज्य सभा से सांसद हैं। वे बरास्ता लोकसभा संसदीय सौंध में जाने के इच्छुक बताए जा रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के एक पदाधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि प्रभात झा की इच्छा है कि वे ग्वालियर से लोकसभा चुनाव लड़ें। इस बात की भनक वहां की सांसद यशोधरा राजे सिंधिया को लग चुकी है। यशोधरा की रातों की नींद उड़ना स्वाभाविक ही है। यशोधरा के करीबी अब प्रभात झा के बिहार मूल के होने की बात को जोर शोर से उठा रही है। पार्टी नेताओं को डर है कि कहीं प्रभात यशोधरा के इस शीत युद्ध में चंबल में भाजपा का खिलता सूर्य अस्ताचल की ओर न अग्रसर हो जाए।

अपनी पीठ ठोंकते वर्मा और जायस्वाल!
उत्तर प्रदेश के आसन्न चुनावों में सूबे के कोटे से केंद्र में मंत्री श्रीप्रकाश जायस्वाल और बेनी वर्मा के बीच ही अनबन जगजाहिर होने लगी है। सूबे में दोनों ही नेताओं ने अपनी पीठ ठोंकते हुए बेनर, पोस्टर, फलेक्स का युद्ध छेड़ दिया है। दरअसल, दोनों ही नेता यूपी में सीएम के दावेदार बताए जा रहे हैं। जायस्वाल ने एक सर्वे कराया कि यूपी में किसका जनाधार सबसे ज्यादा है। इसके पोस्टर चस्पा हुए तो बेनी वर्मा कहां पीछे रहने वाले थे। उन्होंने अपने कामों की फेहरिस्त के साथ कानपुर, बाराबंकी, लखनऊ सहित समूचे सूबे में पोस्टर लगवा दिए। जायस्वाल समर्थकों ने बेनी के पोस्टर हटाकर अपने आका के पोस्टर लगा दिए। फिर क्या था, बेनी समर्थकों ने उन्हें हटाकर अपने पोस्टर लगा दिए। उत्तर प्रदेश की जनता अब कांग्रेस बनाम अन्य राजनैतिक दल के स्थान पर कांग्रेस बनाम कांग्रेस का ही मजा ले रही है।

कांग्रेस को झटका देने ममता का नया पेंतरा
ममता की त्रणमूल और सोनिया की कांग्रेस के बीच खींचतान अब चरम पर पहुंच चुकी है। अपनी बातें मनवाने के लिए ममता बनर्जी द्वारा प्रेशर टेक्टिस का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे कांग्रेस बुरी तरह आहत ही नजर आ रही है। कांग्रेस अब त्रणमूल को छोड़कर सायकल (समाजवादी पार्टी) की सवारी गांठने पर विचार कर ही है। ममता को जैसे ही इस बात की जानकारी मिली उसने कांग्रेस विरोधी ताकतों से हाथ मिलाना आरंभ कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि ममता को मशविरा दिया गया है कि वे दिल्ली में देश भर की पार्टियों के क्षत्रपों को एकजुट कर उनका एक ‘‘दबाव समूह‘‘ बना लें। ममता वैसे भी नवीन पटनायक, प्रकाश सिंह बादल और नितीश कुमार के जीवंत संपर्क में बताई जाती हैं। ममता अपने विश्वस्त साथियों के साथ जयललिता को साधने की जुगत में भी दिख रही हैं। वैसे ममता बनर्जी के संबंध राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सुप्रीमो शरद पवार के साथ बेहतरीन ही हैं। यह सब कुछ कांग्रेस का रक्तचाप बढ़ाने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है।

पुच्छल तारा
मध्य प्रदेश में कांग्रेस संगठन कुछ सक्रिय होता दिख रहा है। इसके पीछे राहुल सिंह और माणक अग्रवाल की मेहनत ही सामने आ रही है। पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश महाराष्ट्र की संस्कारधानी नागपुर प्रवास पर थे। उन्होंने एमपी के सिवनी जिले का प्रोग्राम बना लिया। वे नेशनल हाईवे नंबर सात से गए। इस मार्ग की जर्जर हालत के लिए वे ही दोषी हैं, क्योंकि रमेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री रहते ही इस सड़क के निर्माण में पेंच का फच्चर फसा था। सिवनी में नेशनल हाईवे के साथ ही साथ शहर के अंदर की सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। इसी बात पर वहां से अखिलेश ने एक एसएमएस भेजा है। अखिलेश लिखते हैं कि इस सड़क को इसलिए नहीं बनाया जा रहा है ताकि लोग इसके बजाए छिंदवाड़ा के रास्ते नागपुर जाएं, पर कांग्रेस के नेताओं से गुजारिश है कि सिवनी शहर के अंदर से गुजरने वाले हाईवे को तो दुरूस्त करवा दो कम से यहां के लोग शहर में तो ठीक तरीके से विचरण कर सकें।

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

गड़करी को सांसे उधार दी संघ ने


गड़करी को सांसे उधार दी संघ ने

औसत परफार्मेंस के बाद भी दूसरी पारी खेल सकते हैं गड़करी



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। महाराष्ट्र की सूबाई राजनीति से एकाएक उठकर देश के फलक पर छाने वाले भाजपा के निजाम नितिन गड़करी की लाटरी लग गई है। भाजपा के पितृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने अपना वरद हस्त गड़करी की पीठ पर रख दिया है। गड़करी अब दूसरे टर्म के साथ ही देश के आम चुनाव भी करवाएंगे। प्रतिकूल परिस्थितियों के बाद भी गड़करी ने न केवल भाजपा में ही अपनी मर्जी के मुताबिक काम किया है वरन् भगवा पार्टी को मनचाहे तरीके से हांका भी है।
दिल्ली में झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय केशव कुंजके उच्च पदस्थ सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि भाजपा को निर्देशित और मार्ग दिखाने वाला संघ इन दिनों गड़करी का खासा मुरीद हो चुका है। संघ ने गड़करी को साफ साफ कह दिया है कि वह गड़करी की कार्यप्रणाली से संतुष्ट है। भाजपा से रिसाकर (रूठकर) गए नेताओें की घर वापसी के बाद विशेषकर उमा फेक्टर का मुंह मध्य प्रदेश से मोड़कर उत्तर प्रदेश करने और यूपी के बड़बोले नेताओं को साईज में लाने से संघ इन दिनों गड़करी पर फिदा हो गया है।
गड़करी जिस तरह की चालें चल रहे थे, उसे देखकर भाजपा के अंदरखाने में यह बात तेजी से उभर रही थी कि गड़करी निरंकुश हो गए हैं और वे दूसरी पंक्ति के नेताओं की परवाह किए बिना ही मनमाने फैसले लेते जा रहे हैं। उमा भारती की घरवापसी के बाद भाजपा का एक धड़ा गड़करी के खिलाफ ही तलवार पजाने लगा था। बाद में जब उन्हें यूपी भेजा गया तो एमपी के धड़े ने तो राहत की सांस ली किन्तु यूपी में घमासान मच गया।
माना जा रहा था कि भाजपा के नेशनल प्रेजीडेंट नितिन गड़करी के मनचाहे तरीके से काम करने को लेकर जब भाजपा के अनेक आला नेता नाराज हैं तो उनका जाना तय है। गड़करी के तौर तरीकों को लेकर अनेक लोगों ने उनकी शिकायत संघ के आला नेताओं से भी की थी। समझा जा रहा था कि शिकवे शिकायतों के दौर के बाद संघ नेतृत्व उन्हें बुलाकर कायदे में रहकर काम करने की सीख देगा। लोगों का तीर उल्टा ही लगा। संघ के शीर्ष नेतृत्व ने गड़करी को फटकारना छोड़ उन्हें गले लगाकर उनकी पीठ ही थपथपा दी है।
केशव कुंज के सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के उपरांत परिणामों की समीक्षा जल्द ही निपटा ली जाएगी। इसके तत्काल बाद ही भाजपा संगठन का प्लेनेरी सेशनबुलवाया जाएगा। इस सेशन में भगवा पार्टी अपना संविधान संशोधन का मसौदा पेश करेगी। जिसमें पार्टी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल करने का प्रस्ताव होगा। इसके अलावा इसमें यह व्यवस्था भी दी जा रही है कि कोई भी अध्यक्ष लगातार दो बार अर्थात लगातार छः साल अपना टर्म पूरा कर सकता है। 

वृक्षारोपण के मामले में गलत बयानी क्यों?


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  57

वृक्षारोपण के मामले में गलत बयानी क्यों?

क्या ऐसे बचेगें वन और पर्यावरण!



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा देश के हृदय प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में लगाए जा रहे 1200 मेगावाट के कोल आधारित पावर प्लांट में संयंत्र प्रबंधन ने अब तक कोई भी वृक्षारोपण नहीं किया गया है। वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के साथ ही साथ संयंत्र प्रबंधन द्वारा भी इस बारे में गलत बयानी ही की जा रही है।
संयंत्र प्रबंधन के सूत्रों का कहना है कि संयंत्र के इर्द गिर्द अब तक किसी भी तरह का वृक्षारोपण ही नहीं किया गया है। संयंत्र प्रबंधन को 22 अगस्त 2008 को हुई प्रथम चरण की लोकसुनवाई के उपरांत ही वृक्षारोपण करवा देना चाहिए था, वस्तुतः संयंत्र प्रबंधन ने एसा किया नहीं। प्रबंधन ने प्रथम चरण की अनुमति मिलने के उपरांत संयंत्र के निर्माण का काम आरंभ कर दिया। इस दरम्यान संयंत्र में भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी रही, जिससे क्षेत्र में धूल के गुबार उड़ते रहे।
कहा जा रहा है कि क्षेत्र में रहने वाले गरीब आदिवासियों को इस धूल के कारण स्वास की तरह तरह की बीमारियां होने लगी हैं। संयंत्र प्रबध्ंान ने दावा किया था कि वह निर्माण अवस्था में आवागमन के मार्ग पर पानी का सतत छिड़काव करेगा और वहां वृक्षारोपण करवाएगा। वस्तुतः दोनों ही कामों से संयंत्र प्रबंधन ने अपने आप को दूर रखा है।
हद तो तब हो गई जब संयंत्र प्रबंधन ने दूसरे चरण की लोक सुनवाई में 22 नवंबर 2011 को यह स्वीकार किया कि उस तिथि तक संयंत्र प्रबंधन ने साईट या इर्द गिर्द कोई वृक्षारोपण नहीं करवाया गया है। इसके बाद जब मध्य प्रदेश प्रदूषण मण्डल के जबलपुर सिथत क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी श्री बुंदेला से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि संयंत्र के महाप्रबंधक श्री मिश्रा झूठ बोल रहे हैं। वास्तविकता यह है कि वृक्षारोपण एक सतत प्रक्रिया है और गौतम थापर के इस संयंत्र ने वृक्षारोपण करवाया था। संभवतः श्री मिश्रा को वृक्षारोपण की जानकारी ही नहीं है।
सबसे अधिक आश्चर्य की बात तो यह है कि एक तरफ संयंत्र के महाप्रबंधक श्री मिश्रा ने प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के आला अािकारियों के समक्ष ही 22 नवंबर 2011 को संयंत्र प्रबंधन द्वारा वृक्षारोपण न करवाए जाने की बात सर्वाजनिक तौर पर लोक सुनवाई में स्वीकारी थी, वहीं दूसरी ओर संयंत्र प्रबंधन का पक्ष गलत तरीके से लेते हुए श्री बुंदेला ने संयंत्र प्रबंधन के बचाव का असफल प्रयास किया है। इस तरह से पीसीबी का मशहूर उद्योगपति गौतम थापर की देहरी पर मुजरा करना समझ से परे ही माना जा रहा है।
कुल मिलाकर सिवनी जिले की आदिवासी बाहुल्य तहसील घंसौर में पर्यावरण बिगड़े, प्रदूषण फैले, क्षेत्र झुलसे या आदिवासियों के साथ अन्याय हो इस बात से मध्य प्रदेश सरकार के प्रदूषण नियंत्रण मण्डल और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को कुछ लेना देना नहीं है। यह सब देखने सुनने के बाद भी केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के।डी।देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

पीएम का विश्वास नहीं जीत पाए हरीश खरे


बजट तक शायद चलें मनमोहन. . . 79

पीएम का विश्वास नहीं जीत पाए हरीश खरे

सोनिया से पंगा लेना मंहगा पड़ा खरे का



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के वज़ीरे आज़म डॉ.मनमोहन सिंह के लिए देश के मीडिया को मैनेज करने की महती जवाबदेही संभालने वाले पीएम के मीडिया एडवाईजर हरीश खरे अपने कार्यकाल में प्रधानमंत्री का विश्वास कभी भी जीत नहीं पाए। उनकी रवानगी में महती भूमिका सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने निभाई। जिस दिन हरीश खरे ने पीएमओ में आमद दी थी उसी दिन से हरीश खरे की पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहराव से नजदीकी को बड़े ही करीने से उकेरना आरंभ कर दिया गया था। गौरतलब है कि हरीश खरे पूर्व वज़ीरे आज़म नरसिंहराव के बेहद करीबी समझे जाते रहे हैं।
पीएमओ के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि हरीश खरे ने अपने अहम के चलते मनमोहन सिंह की पंजाबी जुंडाली और सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी से पंगा ले लिया था। हरीश खरे ने अनेक मौकों पर पीएम के पंजाबी मित्रों विशेषकर अंबिका सोनी को नीचा दिखाया था। अंबिका सोनी मन ही मन हरीश खरे को सबक सिखाने की फिराक में ही दिख रहीं थीं।
बताते हैं कि अंबिका सोनी की नाराजगी का पारा तब आसमान पर पहुंचा जब मुश्किल की घड़ी में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को चुनिंदा संपादकों की टोली के साथ हरीश खरे ने चाय पर बुला भेजा। दो बार पीएम मीडिया के चुनिंदा लोगों से रूबरू हुए, इन दोनों ही मर्तबा हरीश खरे ने देश की सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी को विश्वास में लेना उचित नहीं समझा।
उधर, अंबिका सोनी के करीबी सूत्रों का कहना है कि हरीश खरे पर पलटवार करने की तैयारी में बैठी अंबिका सोनी के हाथ तत्काल ही एक मौका लगा। वह मौका था चुनिंदा संपादकों की टोली के साथ चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री का बंग्लादेश के बारे में कहा गया ऑफ द रिकार्डबयान केंद्र सरकार की आधिकारिक विज्ञप्ति जारी करने वाले सूचना प्रसारण मंत्रालय के एक अंग पत्र सूचना कार्यालय की वेब साईट पर अपलोड हो गया। इस बयान से कूटनतिक विवाद पैदा हो गया था।

(क्रमशः जारी)

पहले चरण का प्रचार होगा शाम को समाप्त


पहले चरण का प्रचार होगा शाम को समाप्त



(दीपांकर श्रीवास्तव)

लखनऊ (साई)। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए प्रचार आज शाम समाप्त हो जाएगा। इस चरण में बुधवार को ५५ सीटों के लिए मतदान होगा। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संवाददाता ने बताया है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार और नेता अधिक से अधिक मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों दलों ने मतदाताओं आकर्षित करने के अपने अंतिम प्रयासों में अपने वरिष्ठतम नेताओं को आज भी कई क्षेत्र में प्रचार में उतारा है। पांचवे चरण के चुनाव के लिए दाखिल मतपत्रों की आज जांच की जाएगी। आगरा, अलीगढ, कानपुर, झांसी और चित्रकूट धाम मण्डलों के १३ जिलों के ४९ विधानसभा क्षेत्रों में कुल एक हजार दो सौ दो नामांकन पत्र भरे गए हैं। फैजाबाद में गुसाईगंज क्षेत्र से बाहुबली बहुजन समाज पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ मतदाताओं को डराने धमकाने और बुरी तरह पीटने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया है। सुनील शुक्ल आकाशवाणी समाचार लखनऊ।श्श्
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण के लिए राज्यपाल बी एल जोशी आज अधिसूचना जारी करेंगे। इसके साथ ही रूहेलखंड के तीन मंडलों के दस जिलों में साठ निर्वाचन क्षेत्रों के लिए नामांकन प्रक्रिया आज शुरू हो जाएगी। इस चरण में तीन मार्च को मतदान होगा।
विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के लिए कल आठ फरवरी को सीतापुर, बाराबंकी, फैजाबाद, अम्बेडकर नगर, बहराइच, श्रवास्ती, बलरामपुर, गोण्डा, सिद्धार्थनगर और बस्ती जिलों की पचपन सीटों के लिए मतदान कराया जाएगा। इन जिलों में मतदाताओं की कुल संख्या एक करोड़ सत्तर लाख से अधिक है, जिनमें महिला मतदाताओं की संख्या लगभग अट्ठहत्तर लाख है। मतदान के लिए तेरह हजार एक सौ छियासी मतदान केन्द्र बनाये गये हैं, जहां उन्नीस हजार तीन सौ तिरासी ईवीएम मषीनों के माध्यम से मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
इस बीच उन जिलों में प्रचार कार्य अपने चरम पर है। सभी पार्टियों के वरिश्ठ नेता जनसभाओं के माध्यम से अपने उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करने के लिए लोगों से अपील कर चुके हैं। चुनाव आयोग ने षांतिपूर्ण ढंग से मतदान सम्पन्न कराने के लिए सभी आवष्यक प्रबंध कर लिये हैं।
गोण्डा जिले में चुनाव प्रचार आज अंतिम दौर में है। समाचार एजेेंजी ऑफ इंडिया के संवाददाता ने बताया है कि आगामी बुधवार को मतदान कराने के लिए सभी तैयारियॉ पूरी कर ली गयी हैं। ’’गोण्डा जिले की सॉत विधानसभा सीटों के लिए कुल एक सौ छह उम्मीदवार मैदान में हैं। यहॉ एक महिला विधायक सहित सॉत महिलाऐं भी अपना भाग्य अजमा रहीं है। निश्पक्ष और षांतिपूर्ण ढंग से चुनाव सम्पन्न कराने के लिए पूरे जिले को एक सौ छियासी सेक्टर और अट्ठाईस जोनों में बॉटा गया है। एक सौ अड़तीस मतदान केन्द्रांे पर पर्यवेक्षक नियुक्त किये गये हैं। जिले के संवेदनषील केन्द्रों पर सुरक्षा के विषेश इंतजाम किये गये हैं।
विधानसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण के लिए कल से नामांकन प्रारम्भ हो जाएगा। इस चरण के दौरान मुरादाबाद, बरेली और लखनऊ मण्डलों के दस जिलों की साठ सीटों के लिए आगामी तीन मार्च को मतदान कराया जाएगा। कल नामांकन षुरू होने के बाद उम्मीदवार तेरह फरवरी तक पर्चे दाखिल कर सकेंगे। अगले दिन नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि सोलह फरवरी तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। इन जिलों में मतदाताओं की संख्या एक करोड़ अस्सी लाख से अधिक है, जिनमें इक्यासी लाख से कुछ अधिक महिला मतदाता षामिल है। इस चरण का चुनाव का पहले चार फरवरी को निर्धारित था, परन्तु बारावफात के कारण चुनाव कार्यक्रम में परिवर्तन कर इसे तीन मार्च को कराने का निर्णय लिया गया है।

मनमोहक परेड को सराहा लोगों ने


मनमोहक परेड को सराहा लोगों ने

(साक्षी शाह)

पोर्ट ब्लेयर (साई)। मिलन दो हजार बारह के अंतर्गत कल पोर्ट ब्लेयर में भव्य सिटी परेड़ का आयोजन हुआ। चौदह देशों की नौसेनाआंे की टुकड़ियां जिस समय कदम से कदम मिलाते हुए दर्शकों के सामने से गुजरी लोग रोमांच और उत्साह से भर उठे। बैंड की मधुर धुनों के साथ आकर्षक परेड़ देखने लायक थी।
इस मौके पर सबसे पहले डोर्नियर विमानों की ओर से करतब दिखाते हुए फ्लाई पास्ट हुआ। इसके बाद सुखोई विमानों द्वारा हवा में रोमांचक करतब दिखाए गए। नेताजी स्टेडियम से लेकर मरीना पार्क से होते हुए गर्वमेंट प्रेस तक सड़क के दोनों ओर अपार जनसमूह उपस्थित था। मिलन दो हजार बारह की यह सामूहिक परेड आपसी सहयोग और साझा सामरिक रणनीति की भावना को प्रकट करते हुए हर्षोल्लास का वातावरण पेश कर रही थी।
इस मौके पर द्वीपसमूह के उपराज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल भूपेन्द्र सिंह, अंडमान निकेाबार कमान के कमांडर इन चीफ़ लेफ्टिनेंट जनरल एन.सी.मारवाह के अलावा सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारी और जवान मौजूद थे। कल दोपहर बाद पोर्ट ब्लेयर मंे नेताजी स्टेडियम से लेकर साउथ प्वाइंट तक भव्य मेले जैसा दृश्य था।

बलबोड़े मंत्री, बावली सरकार


बलबोड़े मंत्री, बावली सरकार



(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। इन दिनों मप्र सरकार के सहकारिता मंत्री गौरी शंकर बिसेन विवादों के घेरे में अक्सर नजर आते हैं उनके विवादों मंे आने की वजह भी इनके बडबोलापन है जैसे एक नासमझ बच्चा अपने मन पर आए शब्दों को बिना सोंचे समझे बोल देता है और उसका अंजाम की चिंता नहीं करता है उसी तरह मंत्री महोदय भी अपने अनाप सनाप बयान बाजी को लेकर विवादों में घिरे रहते हैं यहीं नहीं इनकी कई बचकाना हरकतों के कारण सरकार को नीचा भी देखना पडा है।
गौरीशंकर बिसेन की विवादों को पूरी तरह जानने के लिये हमें कुछ अतीत मंे जाना होगा बात ज्यादा पुरानी भी नहीं है लगभग सभी पाठकों को यह बात ध्यान होगी कि एक आमसभा पर सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन के द्वारा एक आदिवासी पटवारी को सार्वजनिक रूप से मंच पर बुलाकर उठक बैठक लगवाकर और उसे रिश्वतखोर बोलकर सुर्खियों पर आए थे जिसे जिला कांग्रेस ने भी फुटबाल की तरह लात मारकर उछाला यही नहीं पटवारियों ने सरफिरे मंत्री के द्वारा कराई गई इस ओछी हरकत का विरोध करते हुए पूरे प्रदेश के पटवारियों ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग लेकर अनशन पर बैठ गए थे जिसे भाजपा बचने के लिये कांग्रेस के इशारे पर इस अनशन को अंजाम देने की बात कहती है जब बात नहीं बनी तो भाजपा के ही कुछ चतुर नेताओं ने किसानों की रैली निकाल पटवारियों के खिलाफ मोर्चा खुलवा दिया जिससे पटवारी संद्य भी भयभीत हो अपने अनशन को समाप्त करने के लिये मजबूर हो गया यह बात बहुत कम लोग ही जानते हैं कि सत्ता पर बैठे इन घूंसखोर मंत्रियों के हाथ सभी सरकारी कर्मचारी और अधिकारी के गले पर होते हैं क्योंकि भ्रष्टाचार की मलाई इन्हें भी पहंुचाई जाती है इसी कारण अपनी  बेईज्जती को भूल विवश पटवारी चुपचाप अनशन तोड लिये। मजे की बात यह है कि एक आदिवासी की छबि धूमिल होने की घटना पर जिले के दो आदिवासी विधायक भी मौन साधे बैठे रहे क्योंकि यह अच्छी तरह जानते थे कि अपने ही मंत्री के खिलाफ बोलना इन पर भारी पड सकता है।
गौरीशंकर बिसेन का दूसरा मामला उनकी चंदा वसूली को लेकर जनचर्चा का विषय बना बताया जाता है कि  एक धार्मिक आयेाजन में गौरीशंकर बिसेन ने भारी दिलचस्पी दिखाई थी और इस धार्मिक आयोजन को लेकर वह अपने मंत्री पद की धौंस दिखाकर सरकारी भ्रष्ट अधिकारियों के साथ चोर व्यापारियों से बडी मात्रा में चंदा उगाही कर रहे थे लेकिन एक जबलपुर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र ने इस बात को जब प्रकाशित किया तो मंत्री बिसेन इस सारी बातों से मुकर गये और आनन-फानन में खुद के द्वारा 1 लाख रू. चंदा देने की बात भी कह डाली खैर यह बात सोंचने योग्य है कि मंत्रियों को पैसा कमाने की रास्ते अनेक हैं तो संभवतः इस धार्मिक आयोजन मंे मंत्री बिसेन धर्मलाभ कमाने के उद्देश्य ही चंदा उगाने में लगे रहे होंगे न कि तिजोरी भरने के उद्देश्य से।
खैर जो भी हो लेकिन चंदा वसूली अभियान को लेकर यह एक बार फिर दागदार हो गया यह मामला लोग भूले भी नहीं थे कि गौरीशंकर बिसेन छिंदवाडा के एक राजनैतिक कार्यक्रम मंे जहां बडे-बडे दिग्गज नेताओं ने शिरकत की थी वहां पर मंत्री बिसेन भी अपना जलवा दिखा रहे थे और सभी अपना रुतवा दिखाने पर उतारू थे इसी जलवा दिखाने के चक्क्र मंे मंत्री बिसेन अपनी मर्यादा भूलकर अपने मंत्री पद दुरूपयोग करने से भी नहीं चूके और उनका यह रूतबा देख बडे-बडे दिक्कज भी भौंचक्के रह गये।
मंत्री बिसेन ने मंच मंे ही एक नाबालिक बालक से जूते की लैस बंधवा लिया यह घटना घटते ही मानों कोहराम मच गया हो और चारों ओर से मंत्री बिसेन के खिलाफ आलाचनाएं शुरू हो गई लेकिन बेशर्म मंत्री एक पत्रकार वार्ता मंे यह कहते हुए संतुष्ट हो गये कि बच्चे से जूते की लेस बंधा लिया तो क्या हुआ। जबकि हमारे संविधान में किसी के भी सम्मान को ठेस पहंुचाने का अधिकार किसी भी शख्स को नहीं है चाहे वह राष्ट्रपति हो, प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री लेकिन इन सभी बातों का उल्लंघन हमारे प्रदेश के सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन ने किया और हमारे प्रदेश की सरकार बिसेन के नाटकीय अंदाज को बर्दाश्त करती रही जो समझ के परे है।
उससे भी ज्यादा मजे की बात तो यह है कि अब गौरीशंकर बिसेन भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने की बात मंच मंे कहने से नहीं चूकते इससे यह स्पष्ट होता है कि मंत्री बिसेन भ्रष्टाचार को बढावा देना चाहते हैं एकतरफ प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान भ्रष्टाचार को प्रदेश के जड समेत उखाड फेंकने की बात कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ मंत्री बिसेन जिले के कलेक्टर को सरपंच सचिवों के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने कीबात सार्वजनिक रूप से घोषित कर रहे हैं।
दोनो एक ही पार्टी के नेता हैं ओर दोनो के विचार अलग अलग हैं जब भ्रष्टाचार पर जांच न होने की बात मंत्री ने मंच पर कही तो जबलपुर से प्रकाशित एक समाचार पत्र ने प्रमुखता से लीड समाचार बनाकर प्रकाशित किया जिसमंे तरह-तरह की प्रतिक्रिया सामने आई कुछ बुद्धिजीवों कहना है कि मंत्री के इस कथन से भ्रष्ट अफसर और छोटे नेताओं के होंसले और बुलंद होंगे यह बात सभी जानते हैं कि आज पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार किस तरह समाया हुआ है और भ्रष्टाचार की अधिकांश जांच पंचायत स्तर पर ही चल रही हेैं जिनमंे सरपंच सचिवों के द्वारा ग्राम के विकास के लिये आई राशि का भ्रष्ट अफसरों के साथ मिलकर बंदर बांट कर अपने तिजोरी भर लेते हैं सूत्रों की मानें तो यह बात सत्य है कि इस भ्रष्टाचार की राशि मंत्री तक बतौर नजराना के रूप मंे भेंट की जाती है तो वहीं विधायक निधि और सांसद निधि की बंदरबांट या कमीशनखोरी की बात तो आम है यह था बडबोले में गौरीशंकर बिसेन का सफर जो सरकार को बावली कर कर रखा है।
अपने उटपटांग बयान बाजी को लेकर आलोचना का विषय बना गौरीशंकर बिसेन अब सरकार के लिये सरदर्द बन चुके हैं लेकिन मप्र सरकार मंे गौरीशंकर बिसेन एक ऐसे मंत्री लगते हैं जो किसी के बस पर नहीं हैं परत दर परत आलोचनाओं का शिकार होते गौरीशंकर बिसेन पर न तो प्रदेश के मुखिया  शिवराज ने लगाम लगा पाई और न ही प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने इससे यह प्रतीत होता है कि गौरीशंकर बिसेन अपने ही पार्टी के बडे नेताओं के बस पर नहीं हैं उनकी मर्जी पर जो आता है वह कर देते है और बाद में माफी मांग कर पल्ला झाड लेते हैं इससे पार्टी की छवि धूमिल हो या दागदार इससे उन्हें कोई मतलब नहीं आखिर क्या कारण है कि मंत्री बिसेन पर पार्टी के बडे नेता और पदाधिकारी लगाम नहीं लगा पा रहे हैं कहीं सबकी पोल बिसेन के पास तो नहीं शायद यही एक कारण है कि बडे नेताओं से भी बडे नेता बनकर बिसेन पार्टी को तहस नहस करने के लिये यह बयानबाजी कर रहे हैं यह पार्टी के लिये विचार करने योग्य प्रश्न है।

कच्ची कली कचनार की


हर्बल खजाना ----------------- 16

कच्ची कली कचनार की



(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। हल्के गुलाबी लाल और सफ़ेद रंग लिये फ़ूलों वाले इस पेड को अक्सर घरों, उद्यानों और सडकों के किनारे सुंदरता के लिये लगाया जाता है। कचनार का वानस्पतिक नाम बाउहीनिया वेरीगेटा है। मध्यप्रदेश के ग्रामीण अँचलों में दशहरे के दौरान इसकी पत्तियाँ आदान-प्रदान कर एक दूसरे को बधाईयाँ दी जाती है।
इसे सोना-चाँदी की पत्तियाँ भी कहा जाता है। रक्तपित्त की दशा में कचनार के फ़ूलों की सब्जी तैयार कर रोगी को दिया जाता है। डाँग- गुजरात के आदिवासी सर्पदंश में कचनार की जडों को पानी में कुचलकर रस तैयार करते है और इसे हर आधे घंटे में घायल व्यक्ति को दिया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि यह जहर के दुष्प्रभाव को कम करता है। मुँह में छाले, घाव, या जीभ के कट जाने पर कचनार की छाल का काढा बनाकर मुँह में कुल्ला करने से जल्द ही आराम मिलता है। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकार जोडों के दर्द और सूजन में आराम के लिये इसकी जडों को पानी में कुचलते है और फ़िर इसे उबालते है। इस पानी को दर्द और सूजन वाले भागों पर बाहर से लेपित करने से काफ़ी आराम मिलता है।
मधुमेह की शिकायत होने पर रोगी को प्रतिदिन सुबह खाली पेट इसकी कच्ची कलियों का सेवन करना चाहिए। ये कलियाँ अत्यधिक अम्लता या एसीडिटी होने पर भी काफ़ी फ़ायदा करती है। लगातार दस्त या डायरिया की शिकायत में कचनार की फ़ल्लियों का चूर्ण (लगभग ३-५ ग्राम) रोगी को दिया जाए तो आराम मिलता है।

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

द्विवेदी बन सकते हैं संसदीय सेल के समन्वयक!

द्विवेदी बन सकते हैं संसदीय सेल के समन्वयक!

पार्टी का काम करने के एवज में उपकृत हो सकते हैं सेवानिवृत अधिकारी



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश की राजधानी के मंहगे रिहाईशी इलाके में स्थित मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग के सूचना केंद्र के प्रभारी पद से सेवा निवृत हुए अधिकारी सुरेंद्र कुमार द्विवेदी को सूबे के सांसदों के प्रस्तावित सेल का समन्वयक बनाकर सरकारी सिस्टम में दोबारा लाने की कवायद की जा रही है। हाल ही में बसंत पंचमी पर एमपी भाजपाध्यक्ष प्रभात झा द्वारा आयोजित मिलन समारोह में उक्त अधिकारी का बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना इसी बात को दर्शा रहा है कि वे सेवानिवृत्ति के कगार पर पहुचने के बाद भी भाजपा के आकाओं को प्रसन्न करने में जुटे हुए थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश भाजपाध्यक्ष प्रभात झा द्वारा बसंत पंचमी पर राजधानी दिल्ली में मंत्रियों, सांसदों और पत्रकारों का मिलन समारोह आयोजित किया गया था। बताते हैं कि इस समारोह को संपन्न कराने की जिम्मेदारी 31 जनवरी को सूचना केंद्र के प्रभारी और अपर संचालक सुरेंद्र द्विवेदी सेवानिवृत्त होने वाले थे। कहा जा रहा है कि सेवानिवृत्ति के एक साल पहले से ही उन्होंने मध्य प्रदेश सूचना केंद्र को भाजपा संगठन का अघोषित कार्यालय बना दिया था।
चर्चा है कि इस कार्यालय में उन्हीं पत्रकारों को ज्यादा तरजीह दी जाती थी जो भाजपा मानसिकता के थे। इतना ही नहीं पत्रकारों को मिलने वाली सुविधाएं मीडिया के बजाए भाजपा सांसद विधायकों को मुहैया करवाने के आरोप लगने लगे थे। बसंत पंचमी को प्रभात झा के इस प्रोग्राम में मंत्रियों ने किनारा ही किया। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों को भय था कि अगर उन्होंने इसमें शिरकत की तो कहीं सूबे के निजाम शिवराज सिंह के कोप का भाजन उन्हें न बनना पड़े। इस कार्यक्रम का भोगमान (प्रोग्राम का संपूर्ण खर्च) किसने भोगा यह शोध का विषय है। कहा जा रहा है कि जाते जाते श्री द्विवेदी ने इसे जनसंपर्क विभाग के खाते से ही करवा दिया गया है।
बताया जाता है कि पहले तो उक्त अधिकारी द्वारा संगठन की परोक्ष तौर पर सेवा के एवज में भोपाल स्थित माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में पुर्ननियुक्ति की असफल कोशिश की। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संज्ञान में यह बात ला दी गई थी कि मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग का दिल्ली स्थित सूचना केंद्र सरकार के बजाए संगठन की छवि चमकाने का काम कर रहा है।
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों का दावा है कि अब सेवानिवृति के उपरांत सुरेंद्र द्विवेदी को उपकृत करने के लिए मध्य प्रदेश के सांसदों के लिए सरकारी स्तर पर एक सेल का गठन किया जा रहा है। इस सेल में मध्य प्रदेश के सांसदों को संसद में होने वाली गतिविधियों से रूबरू रखने के लिए काम किया जाएगा। चर्चा है कि एमपी भाजपा सुप्रीमो प्रभात झा के करीबी सुरेंद्र द्विवेदी को सेवानिवृति के उपरांत इस सेल में भेजकर उन्हें पुर्ननियुक्ति देकर सरकार के बजाए पार्टी की सेवा का सम्मान दिलाने का जतन जारी है।

ठौर नहीं मिल पा रहा हरीश खरे को!


ठौर नहीं मिल पा रहा हरीश खरे को!



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। कल तक देश के वज़ीरे आज़म के नाक का बाल बने रहे हरीश खरे आज आशियाने के लिए दर दर भटकने पर मजबूर हैं। स्वाभिान से लवरेज़ हरीश खरे अपनी प्रतिष्ठा को अक्ष्क्षुण रखने की खातिर अब जमीन तलाश रहे हैं। कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी से मिलने का सपना मन में लिए हरीश खरे अब कांग्रेस में सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (सोनिया गांधी का सरकारी आवास) में घुसने के लिए सीढ़ी तलाश रहे हैं।
10, जनपथ के उच्च पदस्थ सूत्रों का दावा है कि पीएमओ से बाहर किए गए हरीश खरे ने सोनिया गांधी के पारिवारिक मित्र और पत्रकारी सुमन दुबे से मदद की गुहार लगाई है। दरअसल, सुमन दुबे और हरीश खरे की इस बैठक को सुमन दुबे के समधी ने आयोजित किया। सुमन दुबे के पुत्र का विवाह इकानामिक टाईम्स के एक वरिष्ठ पत्रकार की भतीजी के साथ हुआ है।
इस बैठक के बाद जो बातें छन छन कर बाहर आ रही हैं, उनके अनुसार हरीश खरे की तमन्ना है कि वे एक मर्तबा सोनिया गांधी से मिलकर अपना दर्द हल्का करना चाह रहे हैं। उधर, हरीश खरे के अघोषित तौर पर धुर विरोधी पुलक चटर्जी ने इस बात की घेराबंदी कर रखी है, कि हरीश खरे सोनिया गांधी से न मिल पाएं।
पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि पुलक चटर्जी के संज्ञान में जबसे यह बात आई है कि सुमन दुबे और हरीश खरे के बीच एक सिटिंग हो चुक है, तबसे उनका रक्तचाप भी कुछ बढ़ सा गया है। सूत्रों ने कहा कि अब चटर्जी इस प्रयास में हैं कि सुमन दुबे को इस बात के लिए राजी कर लिया जाए कि वे हरीश खरे को 10, जनपथ से दूर ही रखें।