मंगलवार, 8 अक्टूबर 2013

आरोप प्रत्यारोप के दौर आरंभ

आरोप प्रत्यारोप के दौर आरंभ

(शरद खरे)

विधानसभा चुनावों की रणभेरी बज चुकी है। अभी चुनाव की तिथियों की घोषणा हुई है, पर गजट नोटिफिकेशन 01 नवंबर को होगा। आचार संहिता तो लागू हो गई है पर यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि आदर्श आचार संहिता लागू हुई है अथवा नहीं। इस बार नकारात्मक वोटिंग का बटन भी होगा। पर अगर किसी स्थान पर सबसे अधिक मत पाने वाले प्रत्याशी से अधिक लोगों द्वारा नोटाबटन दबा दिया गया तो उस परिस्थिति में क्या चुनाव निरस्त होगा, या सबसे अधिक मत पाने वाले (भले ही वह नोटा से कम वोट पाए) को विजयी घोषित कर दिया जाएगा। कमोबेश यही स्थिति पेड न्यूज की है। पेड न्यूज के बारे में भी सिवनी में निर्वाचन अयोग, जनसंपर्क विभाग आदि ने कोई स्पष्ट गाईड लाईन जारी नहीं की है। इन परिस्थितियों में पेड न्यूज की इबारत समझ पाना सिवनी के मीडिया के लिए दुष्कर ही साबित होगा। आवश्यकता इस बात की है कि जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा पत्रकार बिरादरी को पेड न्यूज के बारे में सविस्तार जानकारी दी जाए।
वैसे चुनाव की आहट के साथ ही साथ सियासी दलों में भी आरोप प्रत्यारोप के दौर आरंभ हो गए हैं। सिवनी में राजनीति चाहे वह कांग्रेस की हो, भाजपा की या अन्य किसी दल की, दो दशकों तक धुरी बने रहे हरवंश सिंह ठाकुर के अवसान के बाद अब कांग्रेस भाजपा सहित अन्य सियासी दल दिग्भ्रिमित ही दिख रहे हैं। सियासी दलों ने आरोप प्रत्यारोप का कभी न थमने वाला युद्ध छेड़ दिया है। मजे की बात तो यह है कि कांग्रेस ने भाजपा और भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ इस युद्ध का आगाज न कर, अपने ही दलों के क्षत्रपों के खिलाफ तलवारें पजाना आरंभ कर दिया है।
भाजपा में नरेश नीता हटाओ, भाजपा बचाओके नारे आसमान में गुंजायमान हुए। नरेश दिवाकर दस साल तक भाजपा के विधायक रहे और वर्तमान में भाजपाध्यक्ष हैं, तो नीता पटेरिया पांच साल सांसद तो पांच साल से विधायक हैं। दोनों ही के पास अपने अपने कार्यकर्ताओं सहित अन्य लोगों को उपकृत करने का पर्याप्त अवसर और संसाधन रहे हैं। विडम्बना ही कही जाएगी कि दोनों ही नेताओं के पास आज की तारीख में हार्डकोरकार्यकर्ताओं का अभाव नजर आता है। जब नरेश दिवाकर की टिकिट कटी और नीता पटेरिया को विधायक की टिकिट दी गई तब नरेश दिवाकर पर आरोप लगे कि उन्होंने निर्दलीय दिनेश राय के पक्ष में अपने समर्थकों को मोबलाईज किया। इन बातों में कितनी सच्चाई है यह तो वे ही जानें, पर नरेश दिवाकर सिटिंग एमएलए होने के बाद उनकी टिकिट कटने की पीड़ा आज भी उन्हें रह रहकर दर्द दे जाती होगी।
रही बात नीता पटेरिया की तो उन पर पिछले विधानसभा चुनावों में कमीशन खोरी के आरोप इतने संगीन लगे थे कि हर कोई उन्हें मेडम परसेंटेजके नाम से जानने लगा था। यह तो कांग्रेस की तलवार में धार नहीं थी वरना नीता पटेरिया तो कब का मैदान छोड़कर जा चुकी होतीं। श्रीमती पटेरिया पर कमीशन लेने के आरोप नए नहीं है। उन पर घटिया टेंकर वितरण का आरोप भी है, वह भी अधिक कीमत पर खरीदी करके। टेंकर कांड का दर्द नरेश दिवाकर को भी होता होगा, उनके विधायक रहते हुए टेंकर कांड भी जमकर उछला था।
नीता पटेरया पर टेंकर वितरण कार्यक्रम में पुरोहित की थाली से दो सौ रूपए चुराने का आरोप है। उन पर आरोप है कि उनका मकान ही अतिक्रमण कर बनाया गया है। श्रीमती पटेरिया पर आरोप है कि उन्होंने सीएमओ के ईयर मार्क आवास पर जबरिया कब्जा जमाया हुआ है। श्रीमती पटेरिया ने नैतिकता इस कदर खो दी है कि विधायक निधि जो सार्वजनिक कामों के लिए होती है, से एक लाख रूपए निकालकर भाजपा कार्यालय के बाजू में नलकूप खुदवा दिया। इसका उपयोग विशुद्ध रूप से भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा बेशर्मी के साथ किया जा रहा है। यह निधि श्रीमती पटेरिया के वेतन की नहीं है, यह जनता का पैसा है। हाल ही में मारबोड़ी की सरपंच ने नीता पटेरिया पर दस परसेंट कमीशन लेने का सनसनीखेज आरोप मढ़ा है। यह आरोप एक बार फिर नीता पटेरिया को मेडम परसेंटेजके नाम से मशहूर कर दे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
बरघाट विधायक कमल मर्सकोले का अपना अलग जलवा है। मुस्कुराकर अभिवादन करना उनकी फितरत में है। बरघाट विधानसभा क्षेत्र के लोग कमल मर्सकोले का चेहरा ही भूल चुके हैं। हां उनकी विधानसभा क्षेत्र में अगर किसी को कमल मर्सकोले का चेहरा याद है तो वह है खवासा बार्डर पर तैनात अमले को, जो बिना नागा हर महीने की पहली तारीख को कमल मर्सकोले के दरबार में हाजिरी लगा जाता है। कमल मर्सकोले के बारे में यह प्रसिद्ध हो गया है कि वे भाजपा के बजाए कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की ज्यादा सुनते हैं और कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेताओं से सलाह मशविरा कर अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों को साधते हैं।
कमोबेश यही आलम लखनादौन विधायक श्रीमती शशि ठाकुर का है। उनके पति लंबे समय तक सिवनी में सीएमओ पदस्थ रहे हैं। श्रीमती शशि ठाकुर काफी हद तक कमजोर प्रतीत होती हैं। उन्होंने सिवनी की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कोई प्रयास नहीं किए। उनके विधानसभा क्षेत्र मुख्यालय लखनादौन में नगर परिषद् ने अत्त मचाई, पर वे खामोश ही रहीं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश हवा में उड़े, यहां तक कि भाजपा का कार्यालय बनने से रोका नगर परिषद् ने, पर शशि ठाकुर द्वारा अपने चिर परिचित अंदाज में अपने आप को असहाय ही बताया गया। वे भूल जाती थीं कि वे विधायक हैं, और विधायक के पास असीमित अधिकार होते हैं। उनके पास विधानसभा का सशक्त मंच है। पर सिवनी के सारे जनसेवक अपने मंच का उपयोग निहित स्वार्थ के लिए ही करते आए हैं, जनता की परवाह शायद ही किसी को रही हो. . .।

रविवार, 6 अक्टूबर 2013

हवेली के सरदार मौन, पर महाराजा ने लिया संज्ञान

हवेली के सरदार मौन, पर महाराजा ने लिया संज्ञान

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के 29 सितम्बर के सिवनी आगमन पर जनपद पंचायत धनौरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा भीड़ जुटाने के लिए सरपंचों और सचिवों को जारी फरमान के मामले में केवलारी से कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी रजनीश सिंह ठाकुर भले ही मौन धारित किए हुए हों पर प्रदेश में कांग्रेस के युवा तुर्क केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा इस मामले को गंभीरता से लिया गया है।
ज्ञातव्य है कि समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया और दैनिक हिन्द गजट द्वारा गत दिवस भाजपा या निर्दलीय के खिलाफ बोलने से क्यों बच रहे बर्रा हवेली के नए सरदारशीर्षक से समाचार प्रसारित और प्रकाशित किया गया था। इस समाचार को देश भर के अनेक समाचार पत्र, न्यूज वेब पोर्टल्स आदि ने प्रमुखता के साथ प्रकाशित और प्रसारित किया था।
इस खबर में इस बात का उल्लेख किया गया था कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इलेक्शन एजेंट बन गए हैं सीईओ जनपद पंचायत धनौरा के साथ ही साथ इस बात का भी उल्लेख किया गया था कि इस मामले में भीड़ लाने के आदेश जिला पंचायत सिवनी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रियंका दास द्वारा जारी किए गए थे।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के भोपाल ब्यूरो से राजेश शर्मा ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संज्ञान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की खबर जैसी ही आई उन्होंने तत्काल ही इस पर कार्यवाही की। कांग्रेस के युवा तुर्क ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग से करते हुए सीईओ जनपद पंचायत धनौरा पर तत्काल कार्यवाही करने की मांग की है।

जिप सीईओ ने किया नोटिस जारी

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत धनौरा के पत्र में इस बात का उल्लेख किया गया था कि जिला पंचायत की सीईओ प्रियंका दास ने उन्हें फोन पर आदेशित किया था जिसके चलते उन्होंने सरकारी स्तर पर पत्र जारी कर सरपंच और सचिव से भीड़ एकत्र करने को कहा था। बताया जाता है कि जैसे ही यह खबर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया और हिन्द गजट द्वारा प्रकाशित और प्रसारित की गई वैसे ही सीईओ जिला पंचायत प्रियंका दास हरकत में आईं और उन्होंने तत्काल ही जनपद पंचायत धनौरा के सीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

नीता पर पुनः लगा कमीशन खोरी का आरोप

नीता पर पुनः लगा कमीशन खोरी का आरोप

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। सिवनी संसदीय क्षेत्र की अंतिम सांसद एवं वर्तमान की सिवनी विधायक श्रीमती नीता पटेरिया पर अब चौतरफा वार तेज हो गए हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में मैडम परसेंटेज़के नाम से मशहूर रहीं श्रीमती नीता पटेरिया पर अब एक बार फिर संकट के बादल मण्डराने लगे हैं। सांसद अथवा विधायक रहते हुए श्रीमती नीता पटेरिया ने सिवनी के हित संवर्धन के लिए शायद ही कोई प्रयास किए हों।

मेडम परसेंटेज़ हुईं मशहूर
बतौर लोकसभा सांसद श्रीमती नीता पटेरिया द्वारा सिवनी के हित में कोई आवाज संसद में शायद ही उठाई गई हो। सांसद रहते हुए श्रीमती नीता पटेरिया पर लगातार सांसद निधि के साथ ही साथ अन्य कामों में कमीशन लेने के आरोप लगते रहे हैं। कमीशन लेने के आरोपों को भाजपा के ही नेताओं द्वारा जमकर हवा दी गई। नतीजतन नीता पटेरिया को मेडम परसेंटेज़के नाम से पहचाना जाने लगा।

अंतिम सांसद बनीं नीता
सांसद रहते हुए श्रीमती नीता पटेरिया पर यह आरोप भी लगते रहे कि वे तत्कालीन कांग्रेसी क्षत्रप हरवंश सिंह ठाकुर के आभा मण्डल से बेहद प्रभावित रही हैं। कहा जाता है कि हरवंश सिंह के सियासी समीकरणों में उनकी शतरंज की चालों में नीता पटेरिया भी एक प्यादे की भूमिका में रही हैं। जाने अनजाने नीता पटेरिया ने हरवंश सिंह की चालों में आकर अपने आपको कार्यकर्ताओं के सामने एक्सपोज कर लिया। आमानाला कांड में नीता पटेरिया पर जानलेवा हमला करवाने का आरोप खुद नीता पटेरिया ने हरवंश सिंह पर लगाया था। पता नहीं किन परिस्थितियों में उसके बाद इस मामले में श्रीमती पटेरिया द्वारा दिलचस्पी नहीं ली गई। कहा जाता है कि अंत में कांग्रेस की राजनीति के चतुर सुजान हरवंश सिंह ठाकुर द्वारा खुद ही अपने प्रकरण में संज्ञान लिया गया तब जाकर इस प्रकरण में खात्मा लगाया गया।

लाल बत्ती मिलते मिलते रह गई
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि नोट फार वोट मामले में रिश्वत न लेने की दुहाई श्रीमती पटेरिया द्वारा बार बार आला नेताओं को दी जाकर अपने संसदीय क्षेत्र के विलोपन की बात कही जाकर सिवनी से विधान सभा की टिकिट मांगी गई थी। श्रीमती नीता पटेरिया की बात सुनकर उस वक्त तत्कालीन विधायक नरेश दिवाकर से नाराज नेताओं ने भी श्रीमती पटेरिया का साथ दिया और नरेश दिवाकर की टिकिट काटकर उनके स्थान पर श्रीमती नीता पटेरिया को टिकिट दे दी गई। श्रीमती पटेरिया का चुनाव जीतना आसान नहीं था, क्योंकि नरेश दिवाकर के चाहने वालों द्वारा श्रीमती नीता पटेरिया के स्थान पर निर्दलीय दिनेश राय के पक्ष में काम किया गया था। कहा जाता है कि कांग्रेस के तत्कालीन क्षत्रप हरवंश सिंह ठाकुर द्वारा भी विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी प्रसन्न चंद मालू के बजाए दिनेश राय का काम करने के निर्देश कार्यकर्ताओं को दिए गए थे।
बहरहाल, किस्मत की धनी श्रीमती पटेरिया के विजयश्री के वरण के उपरांत खून का घंूट पीने वाले भाजपाईयों का यह पहला प्रयास रहा कि वे लाल बत्ती लेकर मंत्री न बन पाएं। बर्रा हवेली के सूत्रों का कहना है कि इसके लिए भाजपाईयों द्वारा हरवंश सिंह की देहरी पर भी माथा रगड़ा गया। भाजपा के सूत्रों की मानें तो जैसे ही श्रीमती नीता पटेरिया को प्रदेश में मंत्री बनाना लगभग तय हो गया था, उसी वक्त हरवंश सिंह के मशविरे पर ही तत्कालीन भाजपाध्यक्ष प्रभात झा द्वारा उन्हें प्रदेश महिला मोर्चा का अध्यक्ष बना दिया गया, जिससे श्रीमती पटेरिया के हाथ में लाल बत्ती आते आते रह गई।

पुरोहित की थाली से उठाए दो सौ रूपए
विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस की तोपें एकाएक शांत हो गईं, तो लोगों के दिलो दिमाग से श्रीमती नीता पटेरिया की मेडम परसेंटेज़वाली छवि गायब होने लगी। इसी बीच मिशन स्कूल में आयोजित विधायक निधि से टेंकर वितरण समारोह में श्रीमती पटेरिया पर पुरोहित की थाली से दो सौ रूपए सरेआम उठाने की बात सामने आई। यह मामला देश प्रदेश में जमकर उछला। इस मामले में नगर कांग्रेस काफी हद तक सक्रिय रही पर जिला कांग्रेस ने श्रीमती नीता पटेरिया के विरोध से अपने आप को दूर ही रखा।

मारबोड़ी सरपंच ने लगाए कमीशन के लिखित आरोप!
हाल ही में सिवनी विधानसभा क्षेत्र के अंर्तगत मारबोड़ी पंचायत की सचिव श्रीमती प्रतीक्षा ब्रजेश राजपूत ने लिखित तौर पर सनसनीखेज आरोप लगाकर भाजपा को हिला दिया है। श्रीमती राजपूत द्वारा प्रेस को जारी एक लिखित पत्र में इस बात का उल्लेख किया गया है कि लगभग दो साल पूर्व श्रीमती पटेरिया द्वारा विधायक निधि से सीसी रोड़ के लिए दो लाख रूपए की राशि प्रदान की गई थी। इस राशि में से दस परसेंट कमीशन के बतौर बीस हजार रूपए की राशि श्रीमती नीता पटेरिया द्वारा दो लोगों के माध्यम से वापस ले ली गई है।

संकट में पड़ सकती है नीता की टिकिट
चुनाव की आचार संहिता लागू हो चुकी है। साथ ही साथ पितरों का मास भी समाप्त हो गया है। नवरात्र के आगाज़ के साथ ही साथ अब टिकिट वितरण का काम भी तेज हो जाएगा। प्रत्याशियों के नामों पर अब तेजी से विचार आरंभ होने वाला है। इन परिस्थितियों में मारबोड़ी सरपंच का लिखित पत्र वाकई एक धमाका ही साबित हो सकता है। इस पत्र के अचानक ही अस्तित्व में आने से श्रीमती नीता पटेरिया की टिकिट पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराते दिख रहे हैं।

कांग्रेस में पसरा है सन्नाटा

भाजपा विधायक श्रीमती नीता पटेरिया के खिलाफ एक बार फिर बहुत ही शानदार मुद्दा वह भी चुनावी बेला में कांग्रेस के हाथ लगा है। बावजूद इसके कांग्रेस के प्रवक्ताओें की कलम की रोशनाई एक बार फिर सूखती ही दिख रही है। एक समाचार पत्र द्वारा जारी विधायक निधि की राशि में कांग्रेस के प्रवक्ताओं के परिजनों के नामों का होना भी अपने आप में इस बात को साबित करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है कि उनके खिलाफ कांग्रेस के प्रवक्ता शायद ही अपना मुंह खोल पाएं।

शनिवार, 5 अक्टूबर 2013

कलेक्टर व पीआरओ के बीच समन्वय का अभाव

कलेक्टर व पीआरओ के बीच समन्वय का अभाव


(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। लगता है सिवनी में जिला कलेक्टर भरत यादव और जनसंपर्क विभाग के बीच समन्वय का अभाव चल रहा है। आज देर शाम चुनिंदा मीडिया पर्सन्स को जनसंपर्क कार्यालय (220538) से फोन आया कि जिला कलेक्टर पत्रकार वार्ता लेने वाले हैं।
बताया जाता है कि जिला जनसंपर्क कार्यालय से आज कुछ पत्रकारों को देर शाम फोन किया गया कि जिला कलेक्टर आज शाम सात बजे एक पत्रकार वार्ता लेने वाले हैं। यह पत्रकार वार्ता कलेक्ट्रेट के सभा कक्ष में आयोजित की गई थी। पत्रकार सभा कक्ष में सात बजे पहुंचे और वहां इंतजार करतेे रहे।
बताया जाता है कि कुछ देर बात वहां फोन आया कि कलेक्टर भरत यादव द्वारा उनके चेंबर में ही पत्रकार वार्ता ली जा रही है। जब पत्रकार वहां पहुंचे तो पत्रकार वार्ता समाप्ति की ओर थी। मजे की बात यह है कि सभा कक्ष में इंतजार करने वाले पत्रकारों के साथ जनसंपर्क विभाग का एक मुलाजिम भी था।

जब इंतजार करने वाले पत्रकार कलेक्टर के चेंबर में पहुंचे तो वे आवक रहे गए, क्योंकि वहां जनसंपर्क अधिकारी भी मौजूद थीं। वहीं, देश के ख्याति लब्ध इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारों को इस पत्रकार वार्ता की जानकारी न दिया जाना भी आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है। गौरतलब है कि इसके पहले 29 सितम्बर को मुख्यमंत्री की जन आर्शीवाद यात्रा के बारे में भी जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा चुन चुन कर चुनिंदा पत्रकारों को ही कव्हरेज के लिए आमंत्रित किया गया था।

भाजपा या निर्दलीय के खिलाफ बोलने से क्यों बच रहे बर्रा हवेली के नए सरदार!

भाजपा या निर्दलीय के खिलाफ बोलने से क्यों बच रहे बर्रा हवेली के नए सरदार!

शिवराज चौहान के इलेक्शन एजेंट बने सीईओ जनपद पंचायत धनौरा, प्रियंका दास ने दिए थे निर्देश!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। केवलारी विधानसभा क्षेत्र पर लगभग दो दशकों तक राज करने वाले बर्रा दरबार के नए सरदार भी पूर्ववर्ती सरदार की ही तर्ज पर प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ बोलने से गुरेज ही कर रहे हैं। ममला चाहे लखनादौन नगर परिषद् द्वारा आधी रात तक कानफाडू डीजे बजाने का हो, या भाजपा के अनाचार का, हर मामले में बर्रा दरबार के नए सरदार ने मौन ही साधे रखा है।
ज्ञातव्य है कि कुछ दिन पूर्व लखनादौन में नगर परिषद् द्वारा अपने अध्यक्ष के एक वर्ष के कार्यकाल पूरा करने पर मुंबई के कुछ कलाकारों के साथ नागपुर तथा मुंबई की बार बालाओं को नचवाया गया था। इसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की सरेआम धज्जियां उड़ा दी गईं, पर कांग्रेस के महामंत्री रजनीश सिंह ने मौन ही साधे रखा।

सीएम के इलेक्शन एजेंट बने सीईओ धनौरा
मुख्यमंत्री के 29 सितंबर को संपन्न हुए जन अशीर्वाद यात्रा के कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए जनपद पंचायत धनौरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा शासकीय स्तर पर पत्र लिखकर सरपंच सचिव को ताकीद किया गया था। 27 सितम्बर को सीईओ के हस्ताक्षरों से जारी पत्र क्रमांक 967 / पंचा.सचिव, स्था / ज.प. / 2013 में जनपद पंचायत धनौरा के सरपंच सचिवों को कहा गया है कि रविवार 29 सितम्बर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन आर्शीवाद यात्रा सिवनी जिले के विधानसभा क्षेत्र लखनादौन के ग्राम आदेगांव में सुबह 11 बजे एवं विधानसभा क्षेत्र केवलारी के ग्राम केवलारी में दोपहर एक बजकर तीस मिनिट पर होना सुनिश्चित हुआ है।
पत्र में आगे समस्त सचिव और सरपंचों को सीईओ जनपद पंचायत धनौरा की ओर से निर्देशित किया गया है कि हर सरपंच और सचिव अपनी अपनी ग्राम पंचायत से 150 - 150 ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधियों को निर्धारित दिनांक अर्थात 29 सितम्बर को समय पर वाहन सुविधा बनाते हुए अपनी ग्राम पंचायत की संबंधित विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जन आर्शीवाद सभा में लेकर स्वयं भी उपस्थित होना सुनिश्चित करते हुए उपस्थित जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणों की जानकारी इस कार्यालय (सीईओ जनपद पंचायत धनौरा) को अवगत कराना सुनिश्चित करें।
इस पत्र की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर, सीईओ जिला पंचायत, एसडीएम घंसौर सहित समन्वयक अधिकारी जनपद पंचायत धनौरा को भेजी गई है। समन्वयक अधिकारी को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे अपने अपने पंचायत सेक्टर की प्रत्येक ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव को कम से कम 150 - 150 ग्रामीण एवं जनप्रतिनिधियों को संबंधित पंचायत क्षेत्र की विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जन आर्शीवाद यात्रा स्थल पर निर्धारित तिथि एवं समय पर लेकर उपस्थिति कराना सुनिश्चित करते हुए सीईओ जनपद के कार्यालय को अवगत कराना सुनिश्चित करें। पत्र में सीईओ जनपद पंचायत धनौरा द्वारा समन्वयक अधिकारी को यह भी निर्देश दिया गया है कि यह उनकी व्यक्तिगत जवाबदेही होगी।

प्रियंका दास ने दिए थे निर्देश!
इस आशय के निर्देश जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रियंका दास द्वारा दिए गए हैं। इस आशय की पुष्टि जनपद पंचायत धनौरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के उक्त पत्र से हो रही है। इस पत्र में संदर्भ के स्थान पर अंकित किया गया है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सिवनी द्वारा दूरभाष पर दिए गए निर्देश दिनांक 17 सितम्बर। इससे साफ है कि 27 सितम्बर को जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रियंका दास द्वारा सीईओ जनपद पंचायत धनौरा को इस आशय के निर्देश जारी किए गए थे कि वे यह व्यवस्था सुनिश्चित करें कि उनके अधिकार क्षेत्र में हर ग्राम पंचायत से 150 लोग सीएम के प्रोग्राम में शिरकत करें।

रजनीश का मौन आश्चर्यजनक!
इस मामले में केवलारी विधानसभा क्षेत्र के अनेक ग्रामों से भी भीड़ एकत्र की गई है। इस मामले में केवलारी विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी रजनीश सिंह ठाकुर अभी तक मौन साधे हुए हैं। कहा जा रहा है कि अगर रजनीश सिंह केवलारी विधानसभा क्षेत्र से किस्मत आजमाने का विचार रख रहे हैं तो उन्हें कम से कम केवलारी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की गलत बातों का विरोध करने का माद्दा रखना होगा। वैसे वे जिला कांग्रेस के महामंत्री हैं, इस नाते उन्हें सिवनी जिले के बारे में भी चिंता करना ही होगा। वस्तुतः इससे उलट, क्षेत्र और जिले में रजनीश सिंह ठाकुर की यह छवि बनती जा रही है कि वे अपने पिता हरवंश सिंह ठाकुर की तरह ही मनराखनलाल बनते जा रहे हैं। वे भाजपा या निर्दलीय प्रत्याशियों की गलत नीतियों का विरोध करने का साहस भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

कांग्रेस में पसरा सन्नाटा!

सिवनी जिले में धनौरा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा शिवराज सिंह चौहान के इलेक्शन एजेंट की तरह काम किया जा रहा है, और विपक्ष में बैठी कांग्रेस अभी तक अपना मुंह सिले बैठी है। महज पांच दिन बाद सिवनी में कांग्रेस के आला नेताओं का आगमन होने जा रहा है, और कांग्रेस के विज्ञप्तिवीर भोंपू अभी भी शांत ही हैं। कांग्रेस के नेताओं ने इस संबंध में भी कोई विज्ञप्ति जारी करना मुनासिब नहीं समझा है। मजे की बात तो यह है कि कांग्रेस द्वारा केंद्रीय मंत्रियों और संगठन के आला नेताओं के आगमन की तैयारियों पर भी कोई विज्ञप्ति जारी नहीं की गई है।

अतिक्रमण निगल गया सड़कों को

अतिक्रमण निगल गया सड़कों को

(शरद खरे)

सिवनी जिले में अतिक्रमण हर तरफ जोर शोर से फैल रहा है। संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि मौन ही रहकर सब देख सुन रहे हैं। सिवनी शहर के चारों ओर कैंसर के मानिंद, अतिक्रमण पसर चुका है, जिसकी परवाह किसी को नहीं है। शहर की सीमाओं पर चेचक के मानिंद पसरा अतिक्रमण वाकई दुखदायी साबित होता जा रहा है। महाकालेश्वर टेकरी, जनता नगर, झिरिया, हड्डी गोदाम, डूंडा सिवनी, लूघरवाड़ा आदि क्षेत्रों में जिसका मन जहां चाहा वहां उसने अपना आशियाना या दुकान बना ली। धीरे धीरे ये अतिक्रमणकारी इसे अपनी निजी संपत्ति समझने लगते हैं। एक समय के बाद इन्हें विस्थापित करने में जिला प्रशासन की पेशानी पर पसीने की बूंदे छलक जाती हैं।
सिवनी शहर के अंदर भी अतिक्रमण का यही आलम है। दुकानदारों ने सड़कों को सकरा कर दिया है। नगर पालिका परिषद्् के कार्यालय के सामने ही अतिक्रमण का बुरा हाल है। सालों से सरकारी कार्यालयों के आसपास केंटीन के लिए निर्धारित स्थान न होने के चलते चाय पान की गुमटियां भी वर्षों से यहां लग रही हैं। युवा एवं उत्साही जिला कलेक्टर भरत यादव ने सिवनी शहर को अतिक्रमण से मुक्त करवाने का प्रयास किया था, पर उनकी मुहिम को बीच में ही अपरिहार्य कारणों से रोकना पड़ा है। अब एक बार फिर शहर की सड़कें अतिक्रमण से पट गई हैं, जिससे आवागमन प्रभावित हुए बिना नहीं है। इसके बाद मानो नगर पालिका ने अतिक्रमण विरोधी अभियान को तिलांजली ही दे दी है।
1991-92 में तत्कालीन स्थानीय शासन मंत्री बाबू लाल गौर द्वारा प्रदेश में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया गया था। उस समय भोपाल की सड़कें देखने लायक हुआ करती थीं। भोपाल सहित प्रदेश भर में सड़कों के हाल इस कदर बेहतर हो गए थे कि लोगों ने दिल से बाबू लाल गौर को धन्यवाद दिया था। उस समय सिवनी के तत्कालीन जिला कलेक्टर पुखराज मारू ने सिवनी में डोजर, बुलडोजर का उपयोग कर अतिक्रमण को ढहाया था। उसके बाद सिवनी में सड़कें कुछ हद तक चलने लायक हो पाई थी। शहर की जीवन रेखा, जीएन रोड भी उस समय काफी साफ सुथरी दिखाई पड़ती थी।
उसके पहले नेहरू रोड पर व्यापारियों द्वारा सड़कों पर सामान फैलाए जाने की शिकायतें आम हुआ करती थीं। उस दौर में कोतवाली के पास एक बड़ा वाहन होता था। कोतवाली का यह डग्गा जब नेहरू रोड पर निकलता तो व्यापारी न केवल अपना सामान अंदर कर लिया करते थे, वरन् साईकिलों के उस दौर में, साईकिल तक दुकानों के अंदर हो जाया करती थीं। शनैः शनैः प्रशासन के ढीले रवैए के चलते जिला मुख्यालय में अतिक्रमण एक बार फिर सुरसा की तरह मुंह उठाने लगा है। शहर में अनेक बैंक ऐसे हैं जिनके पास पार्किंग का अभाव है। किराए के भवनों में लग रहे इन बैंक के सामने, वहां आने वालों की भीड़ लगी होती है जिसके चलते आवागमन बाधित हुए बिना नहीं रहता है।
बड़े जैन मंदिर के बाजू में महाराष्ट्र बैंक के सामने तो सड़क पर खड़े वाहनों के चलते आवागमन दिन में कई बार अवरूद्ध हो जाता है, इसके अलावा कचहरी चौक पर स्टेट बैंक की शाखा के सामने भी यही आलम रहता है। मजे की बात तो यह है कि अनुविभागीय दण्डाधिकारी कार्यालय के बाहर मुख्य सड़क पर अतिक्रमण कर साईकल स्टैंड बना दिया गया है जिससे कलेक्टोरेट, सिंधी कॉलोनी और कचहरी जाने आने वालों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। गांधी भवन से पोस्ट ऑफिस तक के हिस्से में सड़कों पर ही वाहन सुधारने का काम धड़ल्ले से होता है। वहीं गांधी भवन से गणेश चौक तक के मार्ग में सड़कों पर भवन निर्माण सामग्री, टेंकर, ट्रेक्टर, डंपर आदि की भीड़ से आवागमन बाधित हुए बिना नहीं रहता है। कुछ दिन पूर्व दिखावे के लिए ही सही यातायात पुलिस ने सड़कों पर खड़े वाहनों को उठा लिया था, पर यह कार्यवाही भी मात्र दिखावे की ही कार्यवाही साबित हुई।
बारापत्थर क्षेत्र में भी भारी वाहन, डंपर, दस चका से बड़े वाहनों की रेलमपेल भी दुर्घटनाओं को न्योता देती नजर आती है। पता नहीं शहर के नाकों पर यातायात पुलिस के कारिंदे होने के बाद भी ये वाहन शहर के अंदर नो एंट्री वाले समय में कैसे घुस आते हैं? शहर में न जाने कितने बस स्टैंड बन चुके हैं। मुख्य बस स्टैंड, प्राईवेट बस स्टैंड, बरघाट नाका, कचहरी चौक, मिशन स्कूल के सामने, गणेश चौक, सर्किट हाउस, छिंदवाड़ा चौक, शंकर मढ़िया, न जाने कहां कहां, निजी वाहन रूक रूककर सवारी भरते नजर आते हैं। पर इन्हें देखने की फुर्सत यातायात पुलिस के पास शायद नहीं है। शहर में जहां देखो वहां यात्री बस खड़ी दिखाई दे जाती है। ज्यारत नाके के पास, पोस्ट ऑफिस से भैरोगंज पहुंच मार्ग, दलसागर तालाब के मुहाने से हनुमान मंदिर होकर भैरोगंज पहुंच मार्ग आदि स्थानों पर यात्री बस, डम्पर, निजी वाहन यातायात को प्रभावित करते नजर आते हैं। शहरों में सुबह आठ से रात्रि आठ तक भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है। इसको धता बताकर भारी वाहन, दस चका डंपर आदि यमराज बनकर सड़कों पर बेलगाम दौड़ रहे हैं। नाकों पर तैनात नगर सेना के कर्मी महज दस से बीस रूपए लेकर इन वाहनों को प्रवेश दिलवा रहे हैं, क्या यह सब कुछ आला अधिकारियों से छिपा है? जाहिर है नहीं, पर इसके बाद भी वाहनों के प्रवेश पर अंकुश आखिर क्यों नहीं लग पा रहा है यह शोध का ही विषय है।

जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि शहर को अतिक्रमण मुक्त कराने की गई प्रभावी पहल को पुनः आरंभ किया जाए, एवं शहर भर में बेतरतीब तरीके से खड़े होने वाहनों को रोकने के लिए यातायात पुलिस को निर्देश दिए जाएं। साथ ही साथ शहर में प्रवेश के समस्त स्थानों पर तैनात पुलिस या नगर सेना के नुमाईंदों को स्पष्ट तौर पर ताकीद किया जाए कि नो एंट्री वाले समय में शहर में प्रतिबंधित वाहनों का प्रवेश रोका जाए।

शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2013

मीडिया के सवालों पर निरूत्तर रहे कांग्रेस के नेता

मीडिया के सवालों पर निरूत्तर रहे कांग्रेस के नेता

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। केंद्रीय मंत्री कमल नाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री अरूण यादव, कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया 10 अक्टूबर को सिवनी आ रहे हैं। उक्ताशय की जानकारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राममूर्ति मिश्रा एवं सिवनी के प्रभारी मोहम्मद अबरार ने आज पत्रकार वार्ता में दी।
उन्होंने बताया कि 10 अक्टूबर को सिवनी में कांग्रेस की एक विशाल आमसभा का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन स्थल अभी तय नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश बलात्कार के मामले में नंबर वन बन चुका है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम जिला मुख्यालय में ही होगा।

जब पत्रकारों ने नेताओं से यह पूछा कि क्या कारण है कि जिला कांग्रेस स्थानीय स्तर के मुद्दे उठाने के बजाए प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर के प्रवक्ताओं की भूमिका में नजर आती है तो नेताद्वय बगलें झांकने लगे। साथ ही साथ एक संपादक द्वारा जब मोहम्मद अबरार से यह पूछा गया कि क्या उन्होंने बरघाट के किसी नेता को टिकिट के लिए आश्वस्त कर दिया है तो मो.अबरार ने इस बात को नकार दिया।

टेम्पटेशन गुप का नौ दिवसीय गरबा महोत्सव कल से

टेम्पटेशन गुप का नौ दिवसीय गरबा महोत्सव कल से

(पीयूष भार्गव)

सिवनंी (साई)। हर साल की तरह युवाओं के मध्य एक ही बात चल रही है-स्थान वही, समय वही, गरबे का आनन्द वही।जी हां, टेम्पटेशन गुप का नौ दिवसीय गरबा महोत्सव 05 सितम्बर से 13 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। प्रतिवर्षानुसार यह शाम सात बजे से रात्रि दस बजे तक आयोजित किया जाएगा।
गरबा महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष संदीप शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2007 में आरंभ किए गए टेम्पटेशन समूह के इस गरबा आयोजन को हर साल लोगों का जबर्दस्त सहयोग मिलता आया है। उन्होंने बताया कि इस गरबा आयोजन में, आयोजन समिति का यह प्रयास होता है कि इसमें पारिवारिक वातावरण में प्रतिभागी निडर होकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर पाएं।
आयोजन समिति के सचिव योगेश भिड़े ने बताया कि फूहड़ता, और अन्य गतिविधियों से दूर इस गरबा आयोजन की खासियत यह है कि यहां पुरूष और महिला प्रतिभागी पारिवारिक वातावरण में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने बताया कि हर साल शहर के गणमान्य नागरिकों और अतिथियों द्वारा इस आयोजन को न केवल सराहा जाता है वरन् उनके परिवार के सदस्यों द्वारा भी इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया जाता है।
आयोजन समिति के अध्यक्ष ने आगे बताया कि गरबा महोत्सव का आयोजन शनिवार 5 सितम्बर से 13 सितम्बर तक पूर्व वर्षाें के अयोजन स्थल, तिकोना पार्क के सामने एवं शिक्षक सदन के पीछे, श्रीमंत सेठ गोपाल साव पूरन साव परमार्थ ट्रस्ट की भूमि में किया जा रहा है। उन्होने बताया कि इस गरबा महोत्सव में पुरूष और महिला प्रतिभागियों के लिए गरबा खेलने की व्यवस्थाएं प्रथक प्रथक की गई हैं।

आयोजन समिति द्वारा पूर्ववर्ती वर्षों में शहर के गणमान्य नागरिकों, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर पालिका, एवं अन्य संबंधित विभागों के सहयोग के लिए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित करते हुए इस वर्ष भी पूर्व की भांति सहयोग देने की अपील की है।

हवेली की हुकूमत से आज़ाद होने कलपता केवलारी

हवेली की हुकूमत से आज़ाद होने कलपता केवलारी

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। आज़ाद भारत में केवलारी विधानसभा पर अधिकांश समय कांग्रेस का ही राज रहा है। केवलारी में पहले सालों साल तक विमला वर्मा विधायक रहीं तो उनके बाद लंबे समय तक सिवनी में सत्ता और कांग्रेस की धुरी बने रहे हरवंश सिंह ठाकुर के इर्द गिर्द ही सत्ता की धुरी घूमती रही। आज़ादी के उपरांत भी सिवनी जिले का केवलारी विधानसभा क्षेत्र आज़ादी में सांसे लेने को बेताब दिख रहा है।
लगभग बीस सालों से बर्रा हवेलीके ठाकुर हरवंश सिंह केवलारी के विधायक रहे हैं। हरवंश सिंह ने लगभग हर चुनाव में आपने बनाया हमने निभायाकी बुकलेट बांटी, जिसमें उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों की फेहरिस्त जनता के सामने प्रस्तुत की गई। इस सूची में वे ही काम हुआ करते थे जिनकी स्वीकृति बर्रा नरेश द्वारा दी जाती थी। ग्रामीण अंचलों में विकास की किरण शायद नहीं पहुंच सकी, यह बात भी हकीकत ही है।

लंबे समय तक रहे प्रदेश में मंत्री
हरवंश सिंह ठाकुर का कद बेहद ही बड़ा हो गया था। पहली बार विधायक बनते ही हरवंश सिंह ठाकुर को मंत्री लीक से हटकर मंत्री बना दिया गया। जैसे ही हरवंश सिंह ठाकुर प्रदेश में मंत्री बने, केवलारी वासियों की उम्मीदें जागीं कि उसके उपरांत केवलारी का पिछड़ापन काफी हद तक दूर हो सकेगा। केवलारी से भोपाल के लिए सीधी बस सेवा आरंभ हुई तो केवलारी वासियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, पर धीरे धीरे लोगों को लगने लगा कि महज एक बस चलवाकर ही उनकी समस्याएं समाप्त नहीं होने वाली हैं।

सागर नदी का पुल बना परेशानी का सबब्
केवलारी से बालाघाट को जोड़ने वाले मार्ग पर सागर नदी के पुल का निर्माण सालों से प्रतिक्षित होने के बाद भी हरवंश सिंह ठाकुर द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। केवलारी से उगली मार्ग के निर्माण के समय लोगों को उम्मीद थी कि छोटे बड़े पुल पुलियों के निर्माण के साथ ही सागर नदी के पुल का भी जीर्णोद्धार होगा, किंतु उस वक्त कार्य न होने से लोगों में निराशा पसर गई।

सीएम की घोषणा, नहीं बनी नगर पंचायत
केवलारी विधानसभा क्षेत्र के मुख्यालय केवलारी को नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिल पाने से केवलारी के निवासियों का कांग्रेस के प्रति अब मोह भंग होने लगा है। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में केवलारी को नगर पंचायत बनाने की घोषणा की गई थी। कांग्रेस के कद्दावर नेता तथा प्रदेश में लंबे समय तक ताकतवर मंत्री रहे हरवंश सिंह भी केवलारी को नगर पंचायत नहीं बनवा सके। कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि केवलारी के विधायक रहे हरवंश सिंह चाहते तो केवलारी को नगर पंचायत का दर्जा एक दिन में मिल सकता था, किन्तु उन्होंने कभी दिल से केवलारी का विकास चाहा ही नहीं।

दुर्दशा पर आंसू बहा रहा बस स्टैंड
केवलारी बस स्टैंड की हालत किसी से छिपी नहीं है। केवलारी का बस स्टैंड सालों से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। केवलारी में बस स्टेंड के बाजू वाला क्लब भवन पिछले साल काफी जर्जर हालत में था। इस भवन की हालत इतनी जर्जर थी कि यहां सांप बिच्छू ने अपना डेरा जमा लिया था। इस भवन या बस स्टैंड की ओर तत्कालीन विधायक हरवंश सिंह ठाकुर द्वारा कभी ध्यान नहीं दिया गया।

विकास की दौड़ में पिछड़ गया केवलारी
केवलारी अंचल के वाशिंदों के सामने अनेकानेक समस्याएं आज भी सुरसा की तरह मुंह उठाए खड़ी हैं। जिले से बाहर जाकर जीविकोपार्जन करने वाली की संख्या अगर देखी जाए तो एक अनुमान के अनुसार केवलारी से सबसे ज्यादा तादाद में लोग बाहर जाकर कमाने पर मजबूर हैं। इसका कारण केवलारी का उद्योग विहीन होना है। लोगों को इस बात का आश्चर्य है कि केवलारी विधायक हरवंश सिंह के कारण केवलारी क्षेत्र को जाना जाता रहा है। इसके अलावा केंद्र में उद्योग एवं अन्य विभागों के कद्दावर मंत्री रहे कमल नाथ से हरवंश सिंह का जुड़ाव किसी से छिपा नहीं है। कमल नाथ केंद्र में उद्योग मंत्री भी रहे हैं। बावजूद इसके केवलारी क्षेत्र सहित सिवनी जिले में उद्योग धंधों का न होना इस बात का परिचायक है कि उन्होंने अपने प्रभावों का इस्तेमाल कभी भी सिवनी जिले या केवलारी को विकसित करने नहीं किया है।

केवलारी के अंदरूनी मार्ग हो चुके हैं जर्जर
केवलारी विधानसभा क्षेत्र के अंदरूनी मार्गों की दशा देखकर बाहर से आने वाले आगंतुकों को पसीना आ सकता है, यह सच है। केवलारी में बरघाट कान्हीवाड़ा मार्ग की हालत वाकई दर्दनाक ही रही है। साथ ही साथ केवलारी से डुंगरिया मार्ग बेहद ही बुरी स्थिति में पहुंच चुका था। वहीं पलारी से छपारा मार्ग के धुर्रे उड़ चुके। साथ ही साथ पलारी से घंसौर मार्ग पर चलना तो सर्कस के बाजीगरों के ही बस की बात रही।

नांव में जाते हैं स्कूल
केवलारी क्षेत्र के आधा दर्जन गांव के बच्चे आज भी बरसात के मौसम में सड़कों के अभाव में या तो रेल की पांते पार कर स्कूल जाते हैं या फिर नदी से ही आना जाना करते हैं। ये समस्याएं तत्कालीन विधायक हरवंश सिंह ठाकुर के संज्ञान में लाने के बाद भी जस की तस बनी रहना वाकई दुखद ही है।

हवेली की जद से निकलने को बेताब!

केवलारी के लोगों का कहना है कि अब हरवंश सिंह के अवसान के उपरांत कांग्रेस के आला नेताओं ने केवलारी में उनके ज्येष्ठ पुत्र रजनीश सिंह ठाकुर को यहां से टिकिट देने का मन बनाया है। केवलारी क्षेत्र के लोगों विशेषकर युवाओं का कहना है कि समस्याओं के मकड़जाल में उलझा केवलारी विधानसभा क्षेत्र अब बर्रा की हवेलीकी जद से बाहर आने को बेताब ही नजर आ रहा है।

नरेंद्र गुड्डू को साधुवाद

नरेंद्र गुड्डू को साधुवाद

(शरद खरे)

भाजपा के युवा और ऊर्जावान नेता नरेंद्र गुड्डू ठाकुर ने सूबे के निज़ाम को 21 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है। नरेंद्र का यह ज्ञापन अपने आप में सिवनी की समूची समस्याओं को न केवल समाहित किए हुए है, वरन् यह ज्ञापन सिवनी के कांग्रेस और भाजपा के उन नेताओं को आईना दिखाने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है जो सिवनी के हितों के संवर्धन का स्वांग रचकर लोगों को भरमाने का प्रयास करते आए हैं। नरेंद्र के ज्ञापन में छोटे और बड़े कमोबेश हर मुद्दे को शामिल किया गया है। सिवनी के नेताओं ने इन मुद्दों को चर्चाओं में तो स्थान दिया है, किन्तु जब ठोस कार्यवाही की बात आती है तो वे अपने आप को, इन मामलों से पीछे ही खींच लिया करते हैं।
फोरलेन के लिए 2009 में प्रयास हुए हैं इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। जनमंच सिवनी, लखनादौन और कुरई ने अपने अपने स्तर पर प्रयास किए हैं। जनमंच सिवनी पांच बार सीएम से इसके लिए मिल चुका है (जैसा कि प्रचारित किया जा रहा है)। केंद्रीय मंत्री कमल नाथ को इसके लिए जवाबदेह बताया गया जनमंच द्वारा। कमल नाथ 13 जून को सिवनी आए तो उन्हें जनमंच ने काले झंडे दिखाए, पर अचानक जनमंच को सूबे के निज़ाम शिवराज सिंह चौहान से क्या अनुराग उमड़ा कि काले झंडे दिखाने के बजाए महज ज्ञापन सौंपकर ही अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। जनमंच का गठन संघर्ष के लिए किया गया था, विडम्बना यह है कि जनमंच ही खुद संघर्ष से पीछे हटकर जिला वासियों से अपने स्तर पर विरोधकी बात पर उतर आया। जनमंच को आत्म मंथन की आवश्यकता है। फोरलेन बनने तक विरोध का झंडा जनमंच के पास था, पर यह किसी विशेष दिशा में जाता दिखाई देने लगा।
इसी तरह सिवनी के लिए पेंच परियोजना भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस परियोजना में भी दो दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी पानी सिवनी को नहीं मिल सका है। कभी इसके बंद करने की बात सुनाई देती है तो कभी शहरी विकास मंत्रालय के अधीन काम करने वाली मेट्रो रेल परियोजना की मशीनों से छिंदवाड़ा में दु्रत गति से काम करने की बात प्रकाश में आती हैं। कुल मिलाकर स्थिति पूरी तरह अस्पष्ट ही है। बीस साल बीतने के बाद भी इस परियोजना का एक बूंद पानी भी सिवनी को न मिल पाना, निश्चित तौर पर सिवनी के कांग्रेस भाजपा के सांसद विधायकों के चेहरे पर बदनुमा दाग से कम नहीं है, जिन्होंने संसद या विधानसभा में इस मामले को नेता विशेषको प्रसन्न करने नहीं गुंजायमान किया।
यही आलम औद्योगिक क्षेत्र बवरिया और भुरखुलखापा का है। लोगों ने अपने अपने सियासी प्रभावों का इस्तेमाल कर यहां माटी मोल जमीनें तो हथिया लीं, किन्तु सालों से यहां उद्योग आरंभ नहीं किए हैं। आज ये जमीनें बेशकीमती हो चुकी हैं। जिला उद्योग केंद्र में अब तक पदस्थ रहे अधिकारियों पर इसके लिए कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए कि आखिर क्या कारण है कि यहां उद्योग आरंभ नहीं किए जाने के बाद भी इन अधिकारियों ने जमीन वापसी की कार्यवाही सालों साल तक क्यों नहीं की। वहीं, भुरखुलखापा में भी जमीनें आवंटित हो चुकी हैं किन्तु स्थानीय स्तर पर रोजगार के नाम पर मामला सिफर ही है।
युवा भाजपा नेता नरेंद्र ठाकुर ने लगभग तीन दशकों से प्रियदर्शनी के नाम से सुशोभित जिला चिकित्सालय में पदस्थ सिविल सर्जन डॉ.सत्यनारायण सोनी को हटाने की मांग उठाई है। बीमार जिला चिकित्सालय की सेहत सुधारने की गुहार लगाने के लिए नरेंद्र गुड्डू बधाई के पात्र हैं। उन्होंने बर्न यूनिट, आईसीसीयू को शासन के स्वास्थ्य महकमे में दर्ज करवाकर स्थापना व्यय बढ़वाने का अनुरोध किया है। साथ ही साथ ट्रामा यूनिट को भी अस्पताल के अंदर के बजाए सड़क किनारे स्थापित करने की मांग की है। क्या सिविल सर्जन या सीएमओ ट्रामा यूनिट के महत्व और उसकी कार्यप्रणाली से अपरिचित हैं, जाहिर है नहीं? तब क्या कारण है कि इस यूनिट को अंदर घुमावदार रास्तों के बाद स्थापित किया जा रहा है।
उच्च शिक्षा के लिए नरेंद्र गुड्डू की सोच जबर्दस्त है। नरेंद्र का कहना स्वागत योग्य है कि शासकीय स्नात्कोत्तर महाविद्यालय में प्रथम तल पर कक्षाओं के निर्माण के साथ ही साथ यहां पर्याप्त मात्रा में स्टाफ की भर्ती की जाए। साथ ही साथ यहां नए संकाय भी आरंभ किए जाएं। इसी तरह नरेंद्र ने खेल के क्षेत्र में भी अपनी गुहार सीएम से लगाई है। उनका कहना है कि क्रिकेट के लिए स्टेडियम का निर्माण करवाया जाए। ब्रॉडगेज और संभाग के लिए भी उन्होंने अपनी बात रखी है। उन्होंने जिले में मनचाहे धार्मिक स्थलों पर सरकारी रिसीवर बिठाने की मांग की है। काले हिरण की सेंचुरी, तालाबों के संरक्षण, कलेक्टोरेट के निर्माण, झाबुआ पॉवर की लोकसुनवाई की जांच, अवैध उत्खनन, शहर के अंदर की सड़कों आदि पर भी अपनी बात बेबाकी के साथ नरेंद्र ठाकुर ने शिवराज सिंह चौहान के समक्ष रखी है।

वस्तुतः देखा जाए तो यह काम सांसद विधायक का अथवा विपक्ष में बैठी कांग्रेस का है। कांग्रेस को इन मुद्दों को उठाना चाहिए था, पर लगता है चूंकि ये मुद्दे स्थानीय हैं और स्थानीय मामलों को उठाने से कांग्रेस अब तक बचती ही आई है इसलिए उसने शायद इन मामलों को न उठाया हो, वहीं ये मामले अगर प्रदेश स्तर के होते तो कांग्रेस के प्रवक्ता झट से प्रदेश स्तर के प्रवक्ताओं के अधिकारों पर अतिक्रमण कर इन्हें उठा चुके होते। अब चूंकि नरेंद्र ठाकुर ने इन मामलों को उठा ही दिया है, तब कांग्रेस और भाजपा के नेता श्रेय लेने के चक्कर में इन मुद्दों को आने वाले दिनों में अवश्य ही उठाएंगे, पर श्रेय तो नरेंद्र गुड्डू ठाकुर की झोली में जा ही चुका है।