रविवार, 9 मार्च 2014

70 साल का मौलवी 15 साल की युवती संग फरार




(राजेश शर्मा)

भोपाल (साई)। भोपाल में 70 साल के एक मौलवी अपनी 15 साल की स्टूडेंट से प्यार कर बैठे और दोनों घर से फरार हो गए। मौलवी कुछ महीने पहले तक युवती को धार्मिक शिक्षा देते थे। पुलिस ने लड़की के नाबालिग होने के कारण मौलवी के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कर लिया है।
भोपाल के बजारिया इलाके में रहने वाले मौलवी का नाम हफीज है। जबकि युवती पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके की है। युवती दसवीं की छात्रा है। वह भोपाल में अपने दादी के साथ रहती है। पुलिस के मुताबिक मौलवी और युवती की मुलाकात सालभर पहले हुई थी। मौलवी साहब युवती को उसके घर पर धार्मिक शिक्षा देने जाते थे। इसी दौरान 70 साल के मौलवी और 15 साल की युवती का प्यार परवान चढ़ा। छह महीने पहले घरवालों को शक हुआ, तो उन्होंने मौलवी को घर पर आना बंद करवा दिया।
इसके बाद भी मौलवी और युवती संपर्क में थे। पुलिस के मुताबिक चार मार्च को मौलवी युवती को अपने घर पर लेकर आया। पड़ोसियों ने जब ऐतराज किया, तो दोनों फरार हो गए। युवती के घर न लौटने पर दादी ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने अपने पोती के अपहरण की आशंका जताई है।
पुलिस ने मौलवी के घर की तलाशी ली, तो दोनों लापता मिले। पुलिस ने युवती के नाबालिग होने के कारण मौलवी के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक युवती को उसके मोबाइल नंबर के जरिए तलाशने की कोशिश की जा रही है।

स्याही कांड: आप ने लिया यू टर्न



(मणिका सोनल)
नई दिल्ली (साई)।  आम आदमी पार्टी को लगातार विरोध का सामना करना पड़ा है। पार्टी नेता योगेंद्र यादव पर कालिख पोती गई है।
जंतर-मंतर पर शनिवार को योगेंद्र के चेहरे पर काली स्याही पोत दी गई है। दिल्ली पुलिस के अनुसार स्याही कांड वाला शख्स आम आदमी पार्टी का ही कार्यकर्ता है। इस शख्स का नाम सागर भंडारी बताया जा रहा है। इस बीच आप नेता शाजिया इल्मी ने कहा, ‘कोई भी आप टोपी पहन कर ऐसा कर सकता है। पार्टी को बदनाम करने का ये तरीका बहुत पुराना हो चुका है।

अब याद आया कौन था हमलावर
योगेंद्र का कहना है कि मुझे सुनने में आया है कि उसने (हमलावर) राज्य चुनाव के एक महीने पहले आप ज्वाइन किया था। लेकिनआज के पहले तक कोई नहीं जानता था कि वह कहां है।

पहले किया था पहचानने से इनकार
इससे पहले योगेंद्र यादव ने हमलावर को पहचानने से साफ इनकार किया था। इसके अलावा केस दर्ज कराने से भी इनकार कर दिया है। गौरतलब है कि योगेंद्र पर स्याही फेंकने वाले शख्स ने कालिख पोतने से पहले भारत माता की जय‘ का नारा लगाया था।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पोती कालिख
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आप नेता योगेंद्र यादव महिला दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम में मौजूद थे। वह यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे कि इतन में पीछे से एक शख्स ने उनके मुंह पर कालिख पोत दी। वह जैसे ही वहां से भागना चाहा कि आप समर्थकों ने उसे तत्काल पकड़ कर उसकी जमकर पिटाई कर दी। युवक को घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने का व्यापक अभियान आज



(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर निर्वाचक नामावली में पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिये रविवार 9 मार्च को मतदान केन्द्रों में विशेष शिविर लगेंगे।
राज्य के सभी 53 हजार 946 मतदान केन्द्र में बूथ लेवल ऑफिसर सुबह 10.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक निर्वाचक नामावली की प्रति साथ लेकर उपलब्ध रहेंगे। निर्वाचक नामावली की एक प्रति मतदान केन्द्र की दीवार पर चस्पा की जायेगीताकि मतदाता उसमें नाम की जाँच-पड़ताल कर सके। केम्प के दौरान अशिक्षित मतदाताओं की सुविधा के लिये लोगों के बीच निर्वाचक नामावली को पढ़कर सुनाया जायेगा। भारत निर्वाचन आयोग के उप निर्वाचन आयुक्त विनोद जुत्शी रविवार को सुबह 11 बजे राजधानी के कुछ मतदान केन्द्र का भ्रमण कर शिविर का अवलोकन करेंगे।
आयोग के निर्देश पर आमजन को शिविर की जानकारी देने के लिए स्थानीय स्तर पर मुनादी करवाई गई है। शिविरों की जानकारी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों को भी दी गई है। राजनैतिक दलों से अनुरोध किया गया है कि शिविर में उनका बूथ लेवल एजेंट (बी.एल.ए.) भी उपस्थित रहे। बीएलओ द्वारा इच्छुक मतदाताओं के फार्म भरवाने की सुविधा भी शिविर में रहेगी। फार्म भरवाने के बाद बीएलओ उसका भौतिक सत्यापन तथा स्थानीय जाँच आदि कर उसे ईआरओ को जमा करायेंगे। ईआरओ शेष कार्यवाही पूर्ण कर फार्म का निराकरण 11 दिन के भीतर करायेंगे। शिविर के दौरान छूटे हुए सभी पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने की विशेष पहल की जायेगी।
शिविर के दौरान ऐपिकधारी मतदाता भी निर्वाचक नामावली में अपना नाम चेक कर और नाम न होने की स्थिति में फार्म-6 भर सकेंगे। ऐपिक पहचान-पत्र हैयदि निर्वाचक नामावली में मतदाता का नाम नहीं हैतो ऐपिक होने के बावजूद वह मताधिकार का उपयोग नहीं कर सकेगा। आयोग के निर्देश पर शिविर के दिन प्राप्त होने वाले सभी फार्म की जानकारी निर्धारित प्रपत्र में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रवार सीईओ के वेब पोर्टल पर आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध करवाई जायेगी। राज्यों से फार्म्स की जानकारी 11 मार्च तक प्राप्त कर उनके निराकरण अथवा निरस्त करने की कार्यवाही 20 मार्च तक पूर्ण कर ली जायेगी।

एसएमएस सुविधा
मतदाता सूची में अपना नाम होने की जानकारी मतदाता एस.एम.एस. द्वारा भी प्राप्त कर सकेंगे। मतदाताओं को मोबाइल से एस.एम.एस. भेजकर अपना मतदान केन्द्र एवं मतदाता सूची में किस सरल क्रमांक पर नाम है, उसकी जानकारी प्राप्त करने की सुविधा दी गई है। कोई भी मतदाता किसी भी मोबाइल से 51969 पर एस.एम.एस. कर मतदाता सूची में अपना नाम होने तथा मतदाता केन्द्र की जानकारी प्राप्त् कर सकेगा। प्रक्रिया अनुसार मोबाइल पर एस.एम.एस. बॉक्स में जाकर एमपी टाइप कर एक स्पेस देकर ईपीआईसी टाइप करना होगा (बिना गेप के)। उसके बाद एक स्पेस देकर कार्ड पर दिया गया नंबर टाइप कर उसे 51969 पर एस.एम.एस. करना होगा। एस.एम.एस. करने पर मतदाता का नाम किस मतदान केन्द्र पर व किस सरल क्रमांक पर है, उसका रिटर्न मैसेज मोबाईल पर प्राप्त होगा। मतदाताओं से एस.एम.एस. की सुविधा का उपयोग कर अपने मतदान केन्द्र का नाम एवं मतदाता सूची में सरल क्रमांक इत्यादि की जानकारी मोबाईल पर प्राप्त करने का अनुरोध किया गया है।

सीबीएसई 5 दिन लगाएगा स्कूल!



केजी से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
(सुरेंद्र जायस्वाल)
जबलपुर (साई)। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने आने वाले नए सत्र में केजी से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को लाभान्वित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। जिसके तहत इन कक्षाओं के विद्यार्थियों को सप्ताह में केवल 5 दिन स्कूल जाना होगा। छोटे बच्चों के लिहाज से समय अधिक होने के कारण सीबीएसई ने यह निर्णय लिया है, जिसे स्वैच्छिक रखा जाएगा।
प्रायोगिक तौर पर उक्त नियम को पहले कुछ स्कूलों में लागू किया जाएगा, उसके बाद बाध्यता जारी होगी। उल्लेखनीय है कि सीबीएसई स्कूल के विद्यार्थियों पर राज्य शासन के पाठ्यक्रम से कहीं अधिक पढ़ाई का बोझ होता है। राज्य शासन के अंग्रेजी और हिन्दी माध्यमों के स्कूल अब भी 5 घंटे लग रहे हैं तो वहीं सीबीएसई स्कूल 6 घंटे तक लगते हैं।
इधर सीबीएसई ने एक नया सर्कुलर भी तैयार किया है, उसमें रोजाना साढ़े 7 घंटे की कक्षाएं लगाने की योजना है। फिलहाल इसका विरोध होना शुरू हो गया है। यदि ऐसा होता है तो सीबीएसई विद्यार्थियों के विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। नए प्रस्ताव में 5 दिन स्कूल की योजना अभिभावकों को काफी लुभा रही है।
वैसे भी केजी से पांचवीं तक के विद्यार्थी उतने परिपक्व नहीं होते हैं कि वे रोजाना छह घंटे स्कूल की कक्षाओं में बिता सकें, ऊपर से दो घंटे का समय उनके आने-जाने का होता है तो 1 घंटे तैयार होने और नाश्ता करने में निकल जाता है। इस तरह विद्यार्थियों के स्कूल जाने से लेकर घर वापस आने तक में कुल 9 घंटे खर्च हो जाते हैं।

बालाघाट से हिना कांवरे कांग्रेस उम्मीदवार




(रश्मि सिन्हा)

नई दिल्ली (साई)। कांग्रेस ने लोकसभा के मद्देनजर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। बालाघाट सिवनी संसदीय क्षेत्र से हिना कांवरे को मैदान में उतारा है। वे पूर्व मंत्री स्व.लिखीराम कांवरे की पुत्री हैं। मण्डला सिवनी संसदीय क्षेत्र की घोषण अभी नहीं की गई है।
आज जारी सूची में भिंद एससी से भागीरथ प्रसाद, ग्वालियर से अशोक सिंह, गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया, सागर से गोविंद सिंह राजपूत, टीकमगढ़ एससी से कमलेश्वर वर्मा, दमोह से महेंद्र प्रताप, खजुराहो से राजा पटेरिया, रीवा से सुंदरलाल तिवारी, सीधी से इंद्रजीत पटेल, शहडोल एसटी से राजेश नंदिनी सिंह, जबलपुर से विवेक तनखा, बालाघाट से हिना कावरे को मैदान में उतार गया है।
इसी तरह छिंदवाड़ा से कमलनाथ, भोपाल से पीसी शर्मा, देवास एससी से सज्जन कुमार वर्मा, उज्जैन एससी से प्रेम चंद गुड्डू, मंदसौर से मीनाक्षी नटराजन, रतलाम एसटी से कांतिलाल भूरिया, इंदौर से सत्यनारायण पटेल, खरगौन से रमेश पटेल, खंडवा (मध्यप्रदेश)रू अरुण यादव, बैतूल (मध्यप्रदेश)रू राहुल चौधरी को मैदान मे उतारा गया है।

अपरिपक्व पालिका प्रशासन ने उलझाई मॉडल रोड



अनेक अनुमतियों के बिना ही आरंभ करवा दिया सड़क का काम

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। शहर को साफ सुथरा और सुंदर बनाने का दावा नगर पालिका के युवा एवं ऊर्जावान अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी द्वारा बारंबार किए जाने के बाद भी, उनके ही नेतृत्व में नगर पालिका प्रशासन पूरी तरह अपरिपक्वता का परिचय दे रहा है। नगर के अंदर बन रही 11 करोड़ 70 लाख रूपए की मॉडल रोड के वर्क ऑर्डर जारी करने के पहले, नगर पालिका प्रशासन द्वारा स्वयं ही दी जाने वाली अनुमतियों में विलंब किया गया है।
ज्ञातव्य है कि जबलपुर की ओर से नागपुर की ओर तक लगभग साढ़े चार किलोमीटर लंबी इस सड़क पर दोनों ओर सात मीटर चौड़ी सड़क बनना प्रस्तावित है। इस सड़क के मध्य में दो मीटर चौड़ा डिवाईडर भी प्रस्तावित है। इस सड़क की मोटाई में साढ़े सात एमएम का बीएम और 25 एमएम का एचडीडीसी डाला जाना है। इसका ठेका गुना की मेसर्स राजलक्ष्मी कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया है। इस कार्य को नवंबर 2013 में आरंभ किया जाकर, इस साल अक्टूबर तक पूरा किया जाना है।
नगर पालिका प्रशासन के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि 11 करोड़ 70 लाख रूपए के कार्य में सड़क निर्माण, डिवाईडर निर्माण, नाली निर्माण, पोल शिफ्टिंग, झाड़ कटाई आदि का कार्य शामिल है। सूत्रों की मानें तो अब तक तो न ही इस सड़क पर से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही हुई है, न ही पोल हटाने की और न ही पेड़ कटाई ही हो पाई है।

अनुमतियां पालिका को ही देना है!
पालिका के सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि इस सड़क के निर्माण में आने वाली बाधाओं को नगर पालिका प्रशासन के द्वारा स्वयं ही हटाया जाना है। इसके लिए वृक्ष कटाई की अनुमति, नगर पालिका परिषद को ही देना है। (जानकारों का कहना है कि शहरी सीमा के अंदर कटाई की अनुमति पालिका द्वारा ही दी जाती है)
इसके अलावा बिजली के खंबे हटवाने का कार्य भी नगर पालिका को स्वयं ही करवाना है। विडम्बना ही कही जाएगी कि इसके लिए अब तक नगर पालिका परिषद द्वारा पोल शिफ्टिंग के लिए निविदा तक जारी नहीं की गई है। अब जबकि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो चुकी है, तब यह मामला 16 मई तक स्वतः ही टल गया है।
रही बात इस सड़क के निर्माण हेतु अतिक्रमण हटवाने की, तो सर्वविदित है कि नगर पालिका क्षेत्र से अतिक्रमण हटवाने की जवाबदेही नगर पालिका प्रशासन के स्वयं के ऊपर ही आहूत होती है। नगर पालिका परिषद द्वारा कुछ समय के अंतराल में ही अतिक्रमण हटाने की मुंहदेखी मुहिम अवश्य ही छेड़ी जाती है।

काम नवंबर में आरंभ, राशि का पता नहीं!
सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि इस सड़क के निर्माण हेतु हुडको से नगर पालिका को ऋण प्राप्त होना था। सूत्रों के अनुसार इसकी पहली किश्त ही पालिका को प्राप्त हो पाई है। इसकी बाकी किश्तें नहीं आ पाने से यह कार्य मंथर गति से चल रहा है।

अनुभवहीन है प्रशासन
लोगों का मानना है कि नगर पालिका प्रशासन अनुभवहीनता का प्रदर्शन कर रहा है। इसका कारण यह है कि मॉडल रोड के निर्माण का वर्क ऑर्डर जारी करने के पहले, न तो जरूरी अनुमतियां ही ली या दी गई हैं और न ही अतिक्रमण ही हटाया गया है। इन परिस्थितियों में कार्य में होने वाले विलंब का भोगमान भी नगर पालिका प्रशासन को ही भोगना होगा। कहा जा रहा है कि अगर कार्य निर्धारित समयावधि में पूरा नहीं हुआ तो ठेकेदार बाद में विलंब के लिए बाजार भाव बढ़ने आदि पर क्लेम मांगेगा और उस समय विलंब को जस्टिफाई करने में नगर पालिका प्रशासन को पसीना आ जाएगा।

आचार संहिता के झमेले में उलझ गया अन्नदाता किसान




(लिमटी खरे)

सोयाबीन की तबाह फसल के सदमे से किसान उबर ही नहीं सका कि उस पर फरवरी माह में बेमौसम पड़े ओलों का कहर आन पड़ा। महंगाई आसमान छू रही है। गांव-गांव में जिंसों (वस्तुओं) के भाव किसी से छिपे नहीं है। देश के प्रधानमंत्री ने पहले सौ दिन में मंहगाई पर काबू पाने की बात कही फिर तारीख पर तारीख. . ., के बाद लोकसभा चुनाव की मुनादी पिट गई पर मंहगाई ने अपना सुरसा जैसा मुंह दिखाकर सभी को चिढ़ा दिया है। आज आम आदमी हलाकान है। शहरों में रहने वाले तो किसी तरह अपनी गुजर-बसर कर ले रहे हैं पर गरीब गुरबे किसानों पर जो बीत रही है, उसका एहसास शायद ही किसी सियासतदार को हो।
आज देश के अन्नदाता किसान की देश के ही हृदय प्रदेश में कमर टूटी पड़ी है। पिछले साल सोयाबीन की फसल का नुकसान हुआ, मुआवजे के लिए किसान अब तक दर-दर भटक रहा है। इस साल जब फसल पक गई, उसी वक्त इंद्रदेव का कोप किसानों पर भारी पड़ा। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का भोगमान आखिर किसानों को ही सबसे पहले भोगना होता है। किसान की खड़ी फसल ओलों ने तबाह कर दी। सियासी दल इसके लिए एक-दूसरे पर दोषारोपण करते रहे और आचार संहिता का बिगुल बज गया। अब किसानों को फौरी राहत भला कहां से मिल पाएगी!
आज चुनावों की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लग गई है। आचार संहिता में अब किसानों को शायद ही मुआवजा मिलने की बात पर चुनाव आयोग अपनी हरी झंडी दे। इसके पीछे यह वजह हो सकती है कि कहीं प्रदेशों में सत्तारूढ़ दल, मुआवजे की आड़ में मतदाताओं को लुभाने की कोशिश न लग जाए। अगर ऐसा होता है तो किसानों को मुआवजा 16 मई के बाद ही मिल पाएगा। इस मामले में भी किसानों की किस्मत शायद दगा दे गई है। सिवनी सहित प्रदेश के अनेक जिलों में आज अनेक किसान ऐसे भी होंगे जिनके घरों में चूल्हे भी न जल पा रहे होंगे। किसान खुद और अपने परिवार की क्षुदा किस तरह बुझाएगा, इस यक्ष प्रश्न का उत्तर शायद ही किसी के पास हो।
किसान, उनकी बेवाएं आज फूट-फूट कर रो रही हैं। इतिहास इस बात का गवाह है कि जब भी कोई प्राकृतिक आपदा में किसान तबाह हुआ है, और सरकारी स्तर पर मुआवजा बांटा गया है, उसमें रसूखदार बड़े और संपन्न किसान ही ज्यादा लाभान्वित हुए हैं। गरीब गुरबे किसानों को तो सरकारी नुमाईंदे फटकार कर भगा देते हैं। इसके पहले भी अनेक बार किसानों के मुआवजे में दबंगई की शिकायतें आम हो चुकी हैं।
इस बार कहा जा रहा है कि सोयाबीन का मुआवजा बांटा जा रहा है उसमें भी विसंगतियां हैं। जिन किसानों को बड़ी रकम के धनादेश दिए गए हैं, उसमें ओव्हर राईटिंग की शिकायतें मिल रही हैं। इस तरह की कांट-छांट से बैंक भी उनको भुगतान करने से कतरा रहा है। अब किसान आखिर जाए तो जाए कहां और रोए तो किसके पास। नीली छतरी वाला जादूगर भी प्रकृति से छेड़छाड़ के कारण नाराज ही दिख रहा है, वरना क्या कारण है कि फाल्गुन के मौसम में सावन का मौसम बना हुआ है।
आज तक प्रशासनिक स्तर पर आनावारी तय नहीं हो पाई है। अब कोई बताए कि किसानों को तत्काल राहत कैसे मिल पाएगी। किसी की बेटी की शादी है, तो किसी के बच्चे की स्कूल की फीस जमा होनी है। किसी के घर मांगलिक कार्य हैं, तो किसी के घर मातम पसरा हुआ है। होली का त्यौहार सिर पर है। हालात वाकई बेहद गंभीर और संगीन नजर आ रहे हैं। इन परिस्थितियों में किसानों के घरों में खर्चे लगे ही हुए हैं। किसान अपने खर्चे कहां से और किस तरह पूरे कर पाएगा?
जाहिर है सरकारी इमदाद के अभाव में किसान अब सूदखोरों की चौखट चूमने पर मजबूर हो जाएगा। सियासतदार तो आचार संहिता है-नौ सप्ताह बाद यानि 16 मई के बाद ही कुछ हो पाएगा, कहकर अपनी जान छुड़ा लेंगे पर इससे किसानों के रिसते घावों पर मरहम नहीं लगाया जा सकेगा। यक्ष प्रश्न यही खड़ा हो रहा है कि देश का अन्नदाता किसान ही अन्न से महरूम रहेगा। लोकसभा चुनावों के मद्देनजर किसानों को लुभाने के लिए सियासतदार भी अब ‘टुकड़ों‘ के रूप में किसान के सामने कुछ इमदाद रखने का प्रयास अवश्य ही करेंगे।
प्रदेश के निजाम शिवराज सिंह चौहान को पता नहीं किसने सलाह दी कि वे शहर की सीमा से सटे ग्राम कंडीपार के एक खेत में जाकर नुकसानी का जायजा लें और फिर उड़न खटोले से फुर्र हो जाएं। सिवनी में फसलों की तबाही कंडीपार के अलावा सुदूर ग्रामीण अंचलों में भी हुई है। माना कि प्रदेश के निजाम के पास और भी कई काम रहे होंगे, पर वे हेलीकॉप्टर से आए थे। जिले के नेता अगर चाहते तो जिले में कम से कम चार-पांच स्थानों पर शिवराज सिंह चौहान का उड़न खटोला उतारने का मशविरा दे सकते थे। इस तरह वे महज आधे घंटे के अतिरिक्त समय में ही सिवनी के अनेक क्षेत्रों में जाकर तबाही का जायजा ले सकते थे, वस्तुतः ऐसा कुछ हुआ नहीं। हेलीकॉप्टर सरकारी था अतः शिवराज सिंह चौहान की जेब से अतिरिक्त कुछ नहीं जा रहा था, इसका भोगमान प्रदेश की जनता के गाढ़े पसीने से संचित राजस्व से ही भुगतना था।
लगता है कि किसानों के रिसते घावों पर मरहम लगाने के बजाए सियासतदारों द्वारा प्रदेश और केंद्र सरकार पर तोहमत लगाने का काम ज्यादा किया गया है। केंद्र सरकार चाहती तो इसके लिए पहले ही पैकेज का ऐलान कर देती और राज्य सरकार चाहती तो समय-सीमा में ही किसानों को मुआवजा बांटना आरंभ कर देती। न नौ मन तेल आया न राधा नाची। असली मरण किसान की ही रही। जो आज भी बदस्तूर ही जारी है।
अभी लोगों की स्मृति से यह बात विस्मृत नहीं हुई होगी कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डॉ.रमन सिंह सिकरवार द्वारा सूदखोरों के खिलाफ जमकर अभियान चलाया गया था। इस अभियान में अनेक सूदखोरों के पास से न जाने कितने एटीएम और लोगों की हस्ताक्षरित चैक बुक भी मिली थी। आज भी वह क्रम बदस्तूर जारी हो तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। उस वक्त पकड़े गए सभी सूदखोर, अवैध रूप से सूद का धंधा कर रहे थे। ऐसा नहीं है कि पुलिस के संज्ञान में यह बात नहीं है, पर ‘गंदा है पर धंधा है‘ की तर्ज पर यह चल ही रहा है।
किसान मझधार में है। सोयाबीन का मुआवजा उसे मिला नहीं है और अभी की उसकी फसल चौपट हो चुकी है। देश दुनिया की क्षुदा मिटाने वाला किसान, आज दाने-दाने को मोहताज है। 20 फरवरी के बाद मौसम ने करवट ली और दो-तीन दिन में ही किसानों की खड़ी फसल तबाह हो गई। इसके लगभग 13 दिन बाद आचार संहिता की घोषणा हुई। तेरह दिनों तक सियासतदार महज बयानबाजी ही करते रहे। सियासतदारों की बयानबाजी से किसानों का ध्यान कुछ समय तो भटका होगा, किन्तु जब उनके भोजन का समय हुआ होगा और खाने की थाली रीती रही होगी तब वे जरूर . . .।


शनिवार, 8 मार्च 2014

बीजेपी में शामिल हुईं पुरंदेश्वरी


(रश्मि कुलश्रेष्ठ)
नई दिल्ली (साई)। तेलंगाना मुद्दे पर हाल में केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा देने वाली डी. पुरंदेश्वरी ने बीजेपी में शामिल हो गई हैं। बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर पुरंदेश्वरी के बीजेपी में शामिल होने की जानकारी दी। इससे पहले पुरंदेश्वरी ने बीजेपी में शामिल का संकेत देते हुए शुक्रवार सुबह बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता एम. वेंकैया नायडु ने कहा कि तेलगु देशम पार्टी के संस्थापक दिवंगत एन. टी. रामाराव की बेटी पुरंदेश्वरी आडवाणी का आशीर्वाद लेने उनके निवास आई थीं। कांग्रेस के टिकट पर सीमांध्र के विशाखापटनम से लोकसभा के लिए निर्वाचित पुरंदेश्वरी ने हालांकि आडवाणी ने मिलने के बाद संवाददाताओं के सवालों के जवाब नहीं दिए। पुरंदेश्वरी ने गुरुवार को कहा था कि ऐसे हालात बन गए हैं जिससे कष्टदायक निर्णय लेने पड़ेंगे।

गुड़गांव में जन्मी करजई की बेटी


(अनेशा वर्मा)
गुड़गांव (साई)।  गुड़गांव अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई बुधवार को छोटी सी यात्रा पर गुड़गांव में थे। वह अपनी पत्नी और नन्ही बेटी से मिलने आए थे। करजई की बेटी का जन्म मंगलवार को गुड़गांव के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट में हुआ।
भारत में अफगानिस्तान की राजदूत शाइदा मोहम्मद अब्दाली ने टाइम्स ऑफ इंडिया को एक ईमेल के जवाब में बताया, ‘लड़की का जन्म मंगलवार सुबह 9.30 बजे हुआ। मां-बेटी दोनों स्वस्थ हैं। राष्ट्रपति बुधवार को कोलंबो जाते हुए रास्ते में कुछ देर के लिए दिल्ली में रुके और उनसे मिले।‘
वैसे अस्पताल की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक इसी हफ्ते 56 वर्षीय करजई की पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके साथ उनके परिवार के लोग हैं। सूत्रों के मुताबिक करजई ने करीब 20 मिनट अपने परिवार के साथ गुजारे। शुक्रवार शाम तक उनकी पत्नी को छुट्टी मिल जाने की संभावना है।  करजई ने गुड़गांव को क्या चुना, इस सवाल के जवाब में अब्दाली ने लिखा है, ‘राष्ट्रपति के दो खूबसूरत बच्चे अफगानिस्तान में पैदा हुए थे। लेकिन इस बार कुछ पेचीदगियां थीं इसलिए अफगानिस्तान में डॉक्टरों ने डिलिवरी भारत में करवाने की सलाह दी।‘

आतंकवादी नहीं हूं, मोदी क्यों डरते हैं: केजरीवाल

(जलपन पटेल)
अहमदाबाद (साई)। बीजेपी के पीएम कैंडिडेट और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुलाकात का समय न दिए जाने से नाराज अरविंद केजरीवाल ने मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि उनके साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया गया है।
केजरीवाल ने कहा कि उन्हें नरेंद्र मोदी के घर से पांच किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया। आखिर वह कोई आतंकवादी तो नहीं हैं। मोदी आखिर इतने क्यों डरे हुए हैं? उधर, कांग्रेस ने भी केजरीवाल को मिलने का समय न दिए जाने पर मोदी की आलोचना की है। कांग्रेस ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री ने अतिथियों का स्वागत करने की राज्य की परंपरा का असम्मान किया है।
कांग्रेस प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने मोदी की कार्रवाई की निंदा करते हुए, हमारी संस्कृति में अतिथि भगवान के समान हैं । केजरीवाल गुजरात के अतिथि थे और राज्य की यह परंपरा रही है कि यहां जो भी मुख्यमंत्री रहा है, वह दूसरे राज्यों के नेताओं और मुख्यमंत्रियों से मिलता है।
प्राइवेट प्लेन से दिल्ली आए केजरीः मोदी से मुलाकात का समय न मिलने के बाद केजरीवाल गुरुवार शाम को प्राइवेट प्लेन से जयपुर और फिर वहां से दिल्ली लौटे। केजरीवाल राजस्थान पत्रिका के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जेट के प्लेन से जयपुर आए और फिर दिल्ली में एक मैगजीन के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रेलिगेयर के विमान से दिल्ली लौटे। विमान यात्रा के खर्च पर विवाद के बाद आम आदमी पार्टी ने सफाई देते हुए कहा कि इसका खर्चा आयोजकों की तरफ से ही उठाया गया है। पार्टी ने कहा कि केजरीवाल ने पहले ही साफ कर दिया था कि पार्टी के पास विमान यात्रा के पैसे नहीं हैं, इसके बाद आयोजकों ने इंतजाम किया। बाद में केजरीवाल ने भी सफाई देते हुए कहा कि उनकी हवाई यात्रा का खर्च आयोजकों ने उठाया है।

राहुल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी में संघ


(अमित कौशल)
नई दिल्ली (साई)। राहुल गांधी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप लगाने संबंधी बयान से खफा संघ ने निर्णय लिया है कि वह उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगा और निर्वाचन आयोग के पास शिकायत दर्ज कराएगा.
संघ के प्रवक्ता राम माधव ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर कहा, ‘‘ गांधी की हत्या से संघ को जोड़ने के राहुल गांधी के गैर जिम्मेदाराना बयान को लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरु की जाएगी. निर्वाचन आयोग के पास भी शिकायत दर्ज कराई जाएगी.‘‘संघ ने राहुल गांधी द्वारा कल महाराष्ट्र में एक रैली के दौरान दिए गए बयान पर रोष प्रकट किया है.
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने ठाणे जिले में रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया था कि ‘‘संघ के लोगों‘‘ ने महात्मा गांधी की हत्या की थी. राहुल ने अपने भाषण में कहा था, ‘‘ संघ के लोगों ने गांधी की हत्या की  थी और आज ये लोग (भाजपा) उनकी ((गांधी की) बात करते हैं. उन्होंने सरदार पटेल और गांधी जी का विरोध किया था.‘‘

मथुरा में बनेगा दुनिया का सबसे ऊंचा कृष्ण मंदिर


(मीनाक्षी शर्मा)
वृंदावन (साई)। मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण का सबसे ऊंचा मंदिर बनाया जाएगा। मंदिर की ऊंचाई 212 मीटर यानि 700 फीट होगी, जिसकी आधारशिला 16 मार्च को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रखेंगे। मंदिर का नाम वृंदावन चंद्रोदय मंदिर होगा।
मंदिर का परिसर दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ने वाली चटिकरा सड़क से सटे 5.5 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा। साथ ही यह यमुना एक्सप्रेस-वे से भी जुड़ा होगा। मंदिर 79 मंजिला बनाया जाएगा और यह दिल्ली के कुतुब मीनार से तीन गुना अधिक ऊंचा होगा।
मंदिर में राधा-कृष्ण की प्रतिमा के अतिरिक्त चौतन्य महाप्रभु और इस्कॉन आंदोलन के संस्थापक प्रभुपाद की भी प्रतिमा लगाई जाएगी। मंदिर की अवधारणा और डिजाइन इस्कॉन की बेंगलुरू शाखा द्वारा तैयार की गई है। एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में मंदिर की ऊंचाई 300 मीटर रखी गई थी, लेकिन बाद में इसमें संशोधन किया गया। इसके निर्माण पर 400 करोड़ रुपये की लागत आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि मंदिर बन जाने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालु सबसे ऊपरी मंजिल से ताजमहल देख पाएंगे। अगले कुछ वर्षाे में हजारों शिल्पकारों और कुशल कामगारों को यहां रोजगार भी मिल सकेगा।

कांग्रेस को झटका, जगदंबिका पाल ने दिया इस्तीफा


(सुमित माहेश्वरी)
नई दिल्ली (साई)। एक दिन के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यबमंत्री रह चुके जगदंबिका पाल ने कांग्रेस छोड़ दी है. उन्होंने लोकसभा सदस्य्ता से भी इस्तीफा दे दिया है. कयास लगाए जा रहे हैं कि वे बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. हालांकि उन्होंिने कहा है कि भविष्यन के बारे में उन्होंकने अभी कोई फैसला नहीं लिया है. उन्हों्ने कहा कि वे मतदाताओं से बातचीत करेंगे और फिर कोई फैसला लेंगे.
कांग्रेस छोड़ने की घोषणा करते हुए डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल ने मीडिया से कहा कि उन्होंमने पूरी निष्ठां से पार्टी के लिए काम किया, लेकिन अब कांग्रेस को उनकी जरूरत नहीं है. उन्होंतने कहा कि पार्टी में सीनियर नेताओं को सम्घ्मान नहीं मिल पा रहा है.
बताया जाता है कि जगदंबिका पाल पिछले कई समय से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्वष से नाराज चल रहे थे और इस बात की आशंका थी कि वे पार्टी छोड़ देंगे. अपनी नाराजगी जताते हुए उन्होंषने कहा था कि वे पार्टी में अपमानित महसूस कर रहे हैं. उनका कहना था कि पार्टी ने उनका इस्तेामाल किया और बदले में कुछ नहीं दिया.

ओपिनियन पोल पर रोक लगेगी!


(एडविन अमान)
नई दिल्ली (साई)। चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनावों की घोषणा से कुछ ही दिन पहले कानून मंत्रालय से ओपिनियन पोल यानी चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों पर रोक लगाने के मुद्दे पर अंतिम निर्णय करने के लिए जोर दिया है. लेकिन सरकार इस मुद्दे पर कोई निर्णय लेने की जल्दवाजी में नहीं दिख रही.
कानून मंत्रालय के विधायी विभाग के सचिव को पिछले हफ्ते भेजे एक पत्र में चुनाव आयोग ने ओपिनियन पोल के नतीजों के प्रकाशन पर रोक लगाने के लिए कानून में संशोधन करने के सर्वप्रथम वर्ष 2004 में किए गए अपने प्रस्ताव का उल्लेख किया और इस बात पर खेद जताया कि अब तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं किया गया है.
आयोग ने कहा कि कांग्रेस की शिकायत में उठाए गए मुद्दों के मद्देनजर आयोग यह चाहेगा कि सरकार उपरोक्त प्रस्ताव पर जरूरी कार्रवाई करे. सरकार हालांकि इस मुद्दे पर फैसला करने की जल्दबाजी में नहीं लगती. उसने इस मामले को विधि आयोग को भेज दिया है जो पहले से ही चुनाव सुधार के व्यापक मुद्दों पर गौर कर रहा है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि विधि आयोग पहले ही चुनाव सुधार के मुद्दे की पड़ताल कर रहा है. ओपिनियन पोल चुनाव सुधार के व्यापक मुद्दे का एक हिस्सा है, इसलिए यह मामला उसे भेजा गया है.

राष्ट्रपति शासन के बारे में भाजपा और कांग्रेस रुख साफ करें: कोर्ट


(मोदस्सिर कादरी)
नई दिल्ली (साई)। सुप्रीम कोर्ट ने आज बीजेपी और कांग्रेस से पूछा कि क्या वे दिल्ली में सरकार बनाने के लिए हाथ मिला सकते हैं। दिल्ली विधानसभा को एक साल तक निलंबित रखने और राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के खिलाफ आम आदमी पार्टी (आप) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘जनलोकपाल बिल पर बीजेपी और कांग्रेस, दोनों पार्टियां एक-साथ आई थीं। यह संकेत हैं कि बीजेपी और कांग्रेस साथ मिलकर सरकार भी बना सकती हैं। दिल्ली विधानसभा में जो हुआ, उससे साफ संकेत मिलता है कि कुछ भी असंभव नहीं। यहां तक कि किसी पर मंच पर एक-साथ नहीं आने वाली दो पार्टियां भी कुछ मुद्दों पर साथ आ सकती हैं। राजनीति में कोई भी स्थाई शत्रु नहीं होता। आज के दुश्मन कल दोस्त और सबसे अच्छे दोस्त भी हो सकते हैं।‘
शीर्ष अदालत ने शुरू में इन दोनों राजनीतिक दलों को सुनवाई से अलग रखा था, लेकिन आज उसने इस मसले पर दोनों दलों को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पाया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस्तीफा देने के बाद सरकार बनाने के सवाल पर भाजपा और कांग्रेस ने अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की थी।
जस्टिस आरएम लोढा और जस्टिस एनवी रमण की पीठ ने कहा, ‘हम भाजपा और कांग्रेस को इस मामले में तथ्यों के बारे में उनकी स्थिति जानने के लिये नोटिस जारी कर रहे हैं।‘ न्यायाधीशों ने कहा कि अगर उनकी स्थिति साफ हो जाएगी, तो उसे विधानसभा को निलंबित रखने के पीछे दल बदल के सहारे बहुमत हासिल करने की अटकल के सवाल पर गौर करने की जरूरत नहीं है।

अब पर्स में पोर्टेबल शौचालय लेकर चल सकेंगी महिलाएं


(रश्मि सिन्हा)
नई दिल्ली (साई)। घूमने फिरने के दौरान, काम के सिलसिले में यात्रा के दौरान या फिर किसी दूसरे मौके पर जरूरत महसूस होने के बावजूद सार्वजनिक शौचालयों में गंदगी और संक्रमण के डर से इनमें जाने से बचने वाली महिलाओं को अब परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आसानी से बैग में रखा जाने वाला, एक पोर्टेबल शौचालय उनकी इस समस्या को दूर कर सकता है।
यह पोर्टेबल शौचालय पेश करने वाले ‘फर्स्ट स्टेप प्रोजेक्ट्स‘ के साझेदार दीप बजाज ने बताया ‘महिलाओं के लिए शौचालय भारत में एक तरह से बुरे सपने की तरह है। वहां सफाई नहीं होती, जिसके कारण संक्रामक बीमारियां होने का खतरा होता है। इसीलिए हमने ‘पी बडी‘ पेश किया है, जो भारत का पहला पोर्टेबल शौचालय है। इसे दूसरे सामानों की तरह आसानी से बैग में रखा जा सकता है।‘
‘पी बडी‘ को पिछले साल दिसंबर में पेश किया गया था और इसकी मदद से महिलाएं मॉल, हवाईअड्डों, अस्पतालों, राजमार्गों, रेलवे स्टेशनों तथा मेट्रो के सार्वजनिक शौचालयों आदि में खड़े हो कर अपनी ‘समस्या को हल‘ कर सकती हैं। वाटरप्रूफ कोटिंग वाले कागज से बना यह पोर्टेबल शौचालय कीप यानी फनल के आकार का है और मोड़ कर छोटे से पर्स में भी रखा जा सकता है। यह उत्पाद 5, 10 या 20 के पैक में विभिन्न पोर्टल जैसे स्नैपडील, हेल्थकार्ट और फर्स्ट क्राई में क्रमशरू 120, 200 और 350 रुपये में बेचा जा रहा है।
बजाज ने बताया कि यह शौचालय उन महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी है, जिन्हें काम के सिलसिले में लंबी दूरी का सफर करना पड़ता है, जो महिलाएं अर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द से पीड़ित हैं, जो गर्भवती हैं और जो महिलाएं गंदे सार्वजनिक शौचालय में नहीं जाना चाहतीं। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक पेशाब रोके रखने की वजह से गुर्दे में समस्या होने की भी आशंका होती है। गंदे शौचालयों में जाने से पेशाब की नलिका (यूरिनरी ट्रैक्ट) में संक्रमण की आशंका भी होती है। एक बार संक्रमण होने पर लंबे समय तक इलाज कराना पड़ता है और एंटीबायोटिक दवाएं लेनी पड़ती हैं।

हमारे सैनिक बमों पर तैर रहे हैं: बीजेपी


(मणिका सोनल)
नई दिल्ली (साई)। भारत के एक अन्य पोत आईएनएस कोलकाता के दुर्घनाग्रस्त होने और उसमें एक नौसैनिक अधिकारी के मारे जाने पर दुख जताते हुए बीजेपी ने कहा कि रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी को इसकी जवाबदेही स्वीकारते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
उसने कहा कि कांग्रेस नीत 10 साल के शासन में नौसेना की ऐसी उपेक्षा हुई कि आज हमारे सैनिक एक तरह से कभी भी फूट सकने वाले बमों पर तैर रहे हैं। पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार द्वारा नौसेना की पूरी अनदेखी किए जाने के चलते पिछले 11 महीने में यह 11वीं दुर्घटना है।
बीजेपी ने राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से इस स्थिति की विस्तृत जांच कराने का आग्रह किया और साथ ही कहा कि इन दुर्घटनाओं के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी देश को जवाब देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने गुरुवार को ही कहा है कि रक्षा मंत्रालय उसे दिए गए धन का ‘विवेकपूर्ण‘ इस्तेमाल नहीं कर रहा है।

सात अन्य स्थानों पर भी प्रदर्शित होंगे उम्मीदवारों के शपथ-पत्र


(संतोष पारदसानी)
भोपाल (साई)। भारत निर्वाचन आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों की राय और प्रतिक्रिया के बाद निर्वाचन में अभ्यर्थियों द्वारा नाम-निर्देशन पत्रों के साथ दाखिल किये जाने वाले शपथ-पत्र के सार भाग- दो की सूचना के प्रचार-प्रसार के मौजूदा तरीके में परिवर्तन किया है।
अभी आयोग के निर्देश के अनुसार शपथ-पत्र मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की वेबसाइट पर अपलोड किये जाते हैं। शपथ-पत्रों की पूर्ण हार्ड प्रतियाँ सूचना के प्रचार-प्रसार के लिये रिटर्निंग ऑफिसर के सूचना-पटल पर प्रदर्शित की जाती है। यदि सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (एआरओ) का कार्यालय रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के कार्यालय से भिन्न स्थान पर हो तो शपथ-पत्रों में से प्रत्येक की कॉपी एआरओ के कार्यालय के सूचना-पटल पर भी प्रदर्शित की जाती है। आरओ और एआरओ के कार्यालय निर्वाचन क्षेत्र की क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर होने पर शपथ-पत्रों की प्रतियाँ निर्वाचन क्षेत्र के भीतर एक प्रमुख सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शित की जाना होती है। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति आरओ से शपथ-पत्रों की प्रतियों की माँग करता है तो उसको प्रतियाँ उपलब्ध करवाई जाती हैं।
आयोग से भिन्न-भिन्न क्षेत्रों से यह माँग की गई कि निर्वाचन लड़ने वाले उम्मीदवारों द्वारा दाखिल शपथ-पत्र में घोषित जानकारी निर्वाचकों को अपेक्षाकृत अधिक आसानी से पहुँच सके, इसके लिये उसका अधिकाधिक प्रचार-प्रसार करवाया जाये। इस पर आयोग द्वारा राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों से प्रतिक्रिया प्राप्त कर विचार किया गया। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों से प्राप्त प्रतिक्रिया के अनुसार अधिकांश मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी शपथ-पत्र का सार हिस्सा निर्वाचन क्षेत्र के भिन्न-भिन्न सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करने के पक्ष में रहे।
निर्वाचन आयोग ने इस मामले में समुचित विचार-विमर्श करने के बाद निर्णय लिया कि शपथ-पत्र के सार भाग-दो की सूचना के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिये मौजूदा तरीके के अलावा सात अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी प्रदर्शित किये जायें। जिन स्थानों पर यह सूचना प्रदर्शित होगी, उनमें (1) कलेक्ट्रेट, (2) जिला परिषद कार्यालय, (3) एसडीएम कार्यालय, (4) पंचायत समिति कार्यालय (यानि ब्लॉक कार्यालय), (5) निर्वाचन क्षेत्र में नगरीय निकाय या निकायों के कार्यालय, (6) तहसील/तालुका कार्यालय और (7) पंचायत कार्यालय शामिल हैं।

वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने रविवार को लगेंगे शिविर


(राजेश शर्मा)
भोपाल (साई)। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर निर्वाचक नामावली में पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करवाने के लिये रविवार 9 मार्च को मध्यप्रदेश के सभी 53 हजार 946 मतदान केन्द्र में शिविर आयोजित किये जायेंगे। शिविर में बूथ लेवल ऑफिसर निर्वाचक नामावली की प्रति साथ लेकर बैठेंगे। निर्वाचक नामावली की एक प्रति मतदान केन्द्र की दीवार पर चस्पा की जायेगी, ताकि मतदाता उसमें अपने नाम की जाँच कर सके। शिविर के दौरान अशिक्षित मतदाताओं की सुविधा के लिये निर्वाचक नामावली को पढ़कर सुनाया जायेगा।
शिविर के दिन मतदान केन्द्रों पर बूथ लेवल ऑफिसर सुबह 10.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक फार्म-6 के साथ उपलब्ध रहेंगे। फार्म-6 को इच्छुक व्यक्तियों द्वारा भरवाया जायेगा। आयोग के निर्देश पर स्थानीय स्तर पर मुनादी करवा कर लोगों को शिविर के आयोजन की जानकारी दी जा रही है। जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों को शिविरों की जानकारी दी गई है। राजनैतिक दलों से यह अनुरोध किया गया है कि वे शिविर में अपना बूथ लेवल एजेंट (बी.एल.ए.) उपस्थित रखें। बीएलओ द्वारा इच्छुक मतदाताओं के फार्म भरवाने की सुविधा भी शिविर में रहेगी। फार्म भरवाने के बाद बीएलओ उसका भौतिक सत्यापन तथा स्थानीय जाँच आदि कर ईआरओ को जमा करायेंगे। ईआरओ शेष कार्यवाही पूर्ण कर फार्म का निराकरण 11 दिन के भीतर करायेंगे।

जर्जर सड़क पर हो रही टोल वसूली!


महाराष्ट्र की तर्ज पर एमपी में भी बन सकती है सड़क!
(राजेश स्थापक)
सिवनी (साई)। सिवनी जिले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा जर्जर सड़क के एवज में टोल वसूली की जा रही हैजबकि समीपस्थ महाराष्ट्र प्रदेश में कोर्ट की फटकार के बाद एनएचएआई द्वारा 28 मार्च तक मनसर से खवासा तक की सड़क को पूरा करने की बात कही गई है।
समाचार एजेंसी ऑॅफ इंडिया के नागपुर ब्यूरो से आशीष कौशल ने बताया कि एनएचएआई द्वारा जर्जर सड़क पर टोल वसूली के मामले में हाई कोर्ट की फटकार के बाद एनएचएआई ने शपथ पत्र प्रस्तुत कर मनसर से खवासा तक के महाराष्ट्र प्रदेश के हिस्से को 28 मार्च तक चुस्त दुरूस्त करने की बात कही है।
उच्च न्यायालय की नागपुर खण्डपीठ में जस्टिस भूषण गवई और जस्टिस सी.वी.भडंग की युगल पीठ ने इस मामले की सुनवाई 02 अप्रैल तक स्थगित कर दी है। गौरतलब होगा कि पूर्व की सुनवाई में हाईकोर्ट ने नागपुर-चंद्रपुर और नागपुर-अमरावती एनएच की दुर्दशा पर भी संज्ञान लेते हुए एनएचएआई को शपथ पत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया था।
05 मार्च को हुई सुनवाई में युगल पीठ ने इस मामले में दो सप्ताह के अंदर जवाब प्रस्तुत करने को कहा है। इसमें कोर्ट को यह भी बताया गया है कि इसके लिए निविदा की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। बताया जाता है कि कोर्ट द्वारा यह भी कहा गया था कि खराब सड़कों के बाद भी टोल वसूली से जनता में आक्रोश भड़कता है।
इस समय एनएचएआई द्वारा नीतियों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया था कि सड़कों के लिए ही टोल वसूली की जा रही है। एनएचएआई की दलील थी कि सड़कें अगर अच्छी होंगी तो लोगों को कम समय में दूरी तय करने में सुविधाओं के साथ ही साथ वाहनों का रखरखाव और ईंधन की मद में भी कम व्यय होगा। बताया जाता है कि इस पर अदालत का मानना था कि अगर टोल के रूप में भारी भरकम राशि वसूली जा रही है तो जनता को पूरी सुविधाएं भी मिलना चाहिए।
दिनेश की दिल्ली यात्रा से मिली थी सफलता
अगर महाराष्ट्र में सड़क को समय सीमा में बांधकर बनाया जा सकता है तो फिर सिवनी में इसमें बाधाएं समझ से परे ही हैं। गौरतलब है कि गत दिवस सिवनी विधायक दिनेश राय स्वयं दिल्ली गए थे और उन्होंने भूतल परिवहन मंत्री से मिलकर इसकी बाधाएं हटाने की बात भी कही थी। इसके बाद विधायक के मीडिया प्रभारी के हवाले से यह विज्ञप्ति भी जारी की गई थी कि छपारा बंजारी के पास की बाधांए हट गई हैं और इस आशय का पत्र भी जारी हो चुका है। अब अगर यह सब कुछ हो चुका है तो सड़क के निर्माण में अब शायद ही कोई बाधा बची हो।