शनिवार, 5 मार्च 2011

एक के बाद एक मसालेदार बयानों से बने हुए हैं चर्चाओं में दिग्गी राजा


कांग्रेस के असली प्रवक्ता बनकर उभरे हैं दिग्विजय सिंह
 
(लिमटी खरे)
 
नई दिल्ली। कांग्रेस के इक्कीसवीं सदी के चाणक्य राजा दिग्विजय सिंह का कद भले ही कांग्रेस में ज्यादा उपर न चढ़ पाया हो पर उनकी वजनदारी अब काफी हद तक बढ़ चुकी है। एक के बाद एक सधे हुए कदमों के चलते उन्होंने कांग्रेस के सारे पदाधिकारियों को हाशिए में ही ढकेल दिया है, यहां तक कि कांग्रेस के प्रवक्ता भी उनके आगे बौने नजर आने लगे हैं। दिग्गी राजा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कांग्रेस महासचिव रहते हुए उन्होंने जितनी भी पत्रकार वार्ताएं आयोजित की हैं, वे सब कांग्रेस मुख्यालय से परे ही की हैं।
 
वर्ष 2003 में सत्ता से उतरे राजा दिग्विजय सिंह ने दस सालों तक सक्रिय राजनीति से तौबा अवश्य कर ली थी, किन्तु वे राजनैतिक परिदृश्य से गायब नहीं हुए। एक के बाद एक विवादस्पद बयान देकर उन्होंने खुद को चर्चा में बनाए रखा है, जबकि अन्य कांग्रेस के क्षत्रप उनके सामने बौने ही प्रतीत हो रहे हैं।
 
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश पर दस साल शासन के दौरान उन्होंने संयुक्त मध्य प्रदेश के ताकतवर क्षत्रपों विद्याचरण शुक्ल, श्यामाचरण शुक्ल, अजीत जोगी को हाशिए पर डाला। फिर तिवारी कांग्रेस के जन्मदाता कुंवर अर्जुन सिंह को होशंगाबाद से चुनाव लड़ने पर मजबूर किया और कुंवर साहेब जब औंधे मुंह गिरे तब उन्हें बरास्ता राज्यसभा संसदीय सौंध में जाना पड़ा। स्व.महाराजा माधवराव सिंधिया ने भी अपना संसदीय क्षेत्र बदला, और तो और दिग्गी राजा को ताज पहनाने वाले उनके बड़े भाई कमल नाथ को भी 1997 में उपचुनावों में कड़ी पराजय का मुंह देखना पड़ा।
 
बाद में सन्यास की अपनी पारी में पहले बटाला मुटभेड़ को फर्जी निरूपित कर उन्होंने आजमगढ़ की सियासत में अपनी जबर्दस्त दखल दर्ज करवाई। इसके बाद नक्सल समस्या पर सरकार के दावों पर विरोधाभासी बयान देकर दिग्गीराजा ने चिदम्बरम को उनकी औकात बता दी। फिर भगवा आतंकवाद में संघ को कटघरे में खड़ा करने वाले दिग्विजय सिंह ने मंुबई आतंकी हमले की आरएसएस वाली पुस्तक को भी हवा देना आरंभ कर दिया। महाराष्ट्र एटीएस चीफ हेमंत करकरे के साथ बातचीत को भी राजा दिग्विजय सिंह ने लोगों के कोतुहल का विषय बना ही दिया।

हाल ही में इक्कीसवीं सदी के स्वयंभू योग गुरू रामकिशन यादव उर्फ बाबा रामदेव जिन्होने 2003 में छोटे से मंच से अपना करोबार आरंभ किया और जो अब 2011 में एक लाख करोड़ रूपए से अधिक का हो चुका है, को भी सार्वजनिक रूप से ललकार दिया है। जबकि बाबा योग के अलावा काले धन को वापस लाने की वकालत भर कर रहे हैं। कांग्रेस के आला दर्जे के सूत्रों का कहना है कि दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी का भरोसा जीत लिया है, इसलिए अब वे अपने हिडन एजेंडे पर काम कर रहे हैं। वे बाबा पर तीखे प्रहार इसलिए कर रहे हैं, ताकि बाबा रामदेव भी कांग्रेस के नेताओं के चुन चुन कर नाम लेकर उनसे हिसाब मांगे और फिर आधुनिक राजनीति के चाणक्य राजा दिग्विजय सिंह उन सबको आसानी के साथ अपने प्रधानमंत्री बनने के मार्ग से उखाड़कर अलग कर सकें।

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