सोमवार, 21 जनवरी 2013

खत्म हुआ खेल तमाशा!


खत्म हुआ खेल तमाशा!

(लिमटी खरे)

कांग्रेस का चिंतन शिविर समाप्त हो गया। समाचार पत्र और चेनल्स ने चीख चीखकर राहुल गांधी के नए उपाध्यक्ष और नंबर दो वाले अवतार के लिए रेड कारपेट बिछाए। अब सब कुछ सामान्य ढर्रे पर लौट रहा है। जमीनी कार्यकर्ताओं की पीड़ा और रिसते घावों की चिंता किसी ने नहीं की। कार्यकर्ता क्या आज आम आदमी यह कह रहा है कि राहुल गांधी तो पहले से ही पार्टी मे नंबर दो पर थे। नेहरू गांधी परिवार के वारिस होना ही कांग्रेस में नेतृत्व की पहचान माना जाता है। कांग्रेस का झंडा और डंडा उठाने वाले कार्यकर्ता के बारे में माना जाता है कि वह झंडा उठाने और दरी बिछाने के लिए ही पैदा हुआ है। आज देश में मैनेज्ड मीडिया ना तो राहुल, ना सोनिया से यह पूछने का साहस कर पाता है कि मंहगाई के मामले में आप चुप क्यों है? देश की जनता तो उसी झंडा डंडा उठाने वाले कार्यकर्ता से मंहगाई के बारे में पूछता है और कार्यकर्ता निरूत्तर हो जाता है। कुल मिलाकर राहुल गांधी को एक बार फिर महिमा मण्डित करने कांग्रेस ने चिंतन के नाम पर लाखों रूपए फूंक दिए। ये पैसे भी आखिर गरीब गुरूबों के टेक्स से संचित आय से ही आए होंगे।

कांग्रेस के तीन दिवसीय चिंतन शिविर पर देश की जनता टकटकी लगाए बैठी थी। सभी अपने अपने टीवी सेट्स से चिपके बैठे कि पता नहीं कब मंहगाई के दानव से उन्हें मुक्ति दिलाने की बात इस शिविर में हो जाए। विडम्बना देखिए कि चिंतन शिविर में महज राहुल गांधी को ही महिमा मण्डित करने की बात कही गई। राहुल की ताजपोशी के आगे बाकी सारी बातें गोड हो गईं। जैसा कि हमने पूर्व में अपने आलोखों किस बात का हो रहा चिंतन और चिंतन शिविर में युवराज की चिंता में आशंका व्यक्त की थी कि यह सब कुछ सिर्फ और सिर्फ राहुल गांधी के लिए हो रहा है, निर्मूल साबित नहीं हुईं।
जयपुर में जिस बात का चिंतन हुआ और जो निश्कर्ष निकलकर सामने आया है उससे साफ हो गया है कि पार्टी ने अब घोषित तौर पर सोनिया गांधी के बजाए राहुल गांधी को अपना नेता मान लिया है। कुल मिलाकर यह कहा जाए कि सामंतशाही राज व्यवस्था की तरह ही अब सत्ता की धुरी सोनिया के हाथों से राहुल गांधी के हाथों में आ चुकी है। एक तरह से यह कहा जाए कि राहुल की ताजपोशी हो गई है तो अतिश्योक्ति नहीं होगा।
आज हर किसी के जेहन में एक ही बात उभरकर सामने आ रही है कि आखिर कांग्रेस को चिंतन की आवश्यक्ता क्यों पड़ी? और अगर चिंतन शिविर में ही राहुल गांधी के हाथों सत्ता सौंपी जानी थी तो यह काम तो दिल्ली के 24 अकबर रोड़ पर बैठकर कार्यसमिति की बैठक बुलाकर यह काम किया जा सकता था। आखिर इस व्यापक स्तर पर चिंतन का बहाना कर राहुल को महिमामण्डित करने के पीछे कारण क्या है?
कांग्रेस जिस तरह दिशाहीन होकर पिछले लगभग पंद्रह सालों से चल रही है उससे लगने लगा है कि कांग्रेस अब ना तो जवाहर लाल नेहरू और ना ही इंदिरा गांधी के माडल पर अपने आप को ले जा सकती है। लगभग डेढ दशकों में देश में क्षेत्रीय स्तर पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का जिस तरह से विखण्डन हुआ है उस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। कांग्रेस के अंदर अनुशासन की कमी पूरी तरह से महसूस की जाने लगी है।
इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि कांग्रेस की कालर पकड़कर उसे पटखनी देने वाले नेताओं ने जब अपने अपने सियासी दल बनाए तो सत्ता की मलाई चखने की गरज से कांग्रेस उनकी चौखट चूमती नजर आई। शरद पंवार का उदहारण सबसे नायाब है। शरद पंवार ने जब सोनिया गांधी को गरियाया और राकांपा का गठन किया उसके बाद महाराष्ट्र और केंद्र में कांग्रेस पंवार के आगे घुटनों पर नजर आई।
एक समय था जब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का रोष और असंतोष देखते ही बन रहा था क्योंकि शरद पंवार ने सोनिया को विदेशी मूल का बताकर नई बहस छेड़ दी थी। कार्यकर्ताओं को यूटर्न लेने पर मजबूर होना पड़ा क्योंकि पंवार और सोनिया एक ही मंच पर मुस्कुराते हुए एक दूसरे का अभिवादन करते मीडिया में छा गए। तभी आम कार्यकर्ता समझ गया कि अब कांग्रेस की कमान एसे हाथों में पहुंच चुकी है जिसकी नीतियां ढुलमुल हैं।
रही सही कसर राजनैतिक तौर पर नासमझ सोनिया गांधी के सलाहकारों ने निकाल दी। समय समय पर गलत सही सलाहें देकर सोनिया के सलाहकारों ने कांग्रेस के विशाल बट वृक्ष के आसपास की मिट्टी खुदवा दी। परिणामस्वरूपप आज कांग्रेस का बटवृक्ष खुद सहारे के लिए यहां वहां तांक झांक कर रहा है। मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाए रखना कांग्रेस की मजबूरी है किन्तु प्रधानमंत्री पद की सारी मर्यादांए जब तार तार हो चुकी हों तब मनमोहन सिंह को ढोना कहीं से भी उचित नहीं कहा जा सकता है।
दरअसल, कांग्रेस में राहुल गांधी नंबर दो की स्थिति में पहले से ही थे। राहुल गांधी नंबर दो आधिकारिक तौर पर नहीं थे। अब वे आफीशियल नंबर टू हैं। चार पांच माहों में ही उनके कदम तालों का विरोध या स्वागत स्पष्ट कर देगा कि उन्हें जल्द ही जिम्मेदारी संभाल लेना चाहिए या नहीं। राहुल गांधी को इस तरह एक के बाद एक सधे कदम से आगे बढ़ाने के पीछे थिंक टैंक और कोई नहीं वरन् उनकी अग्रजा प्रियंका वढ़ेरा ही हैं।
राहुल गांधी के बारे में देश कम ही जानती है और राहुल गांधी भी देश को कम ही जानते हैं। कहा जा रहा है कि पिछले लगभग एक साल से राहुल गांधी का पारा जब तब उबल पड़ता है। राहुल के शार्ट टेंपर्ड होने से अब उनके आस पास फटकने वाले नेताओं की संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। इसका सीधा लाभ राहुल को होता दिख रहा है। राहुल को सलाह देने वालों की संख्या में भी तेजी से कमी आई है।
चिंतन शिविर को खेल तमाश कहने का तातपर्य यही है कि इसमें जमीनी हकीकत को कोसों दूर रखा गया। जब सोनिया गांधी अपने उद्बोधन में भ्रष्टाचार पर प्रहार कर रही थीं तब प्रधानमंत्री असहज हो उठे। उन्होंने तत्काल एक चिट लिखी और मदाम को भेज दी। चिट में संभवतः यही लिखा था कि मदाम आप भ्रष्टाचार पर बोल रही हैं। केंद्र में हमारी सरकार है, हमारे और सहयोगियों के भ्रष्टाचार के मामले अभी लोगों के दिमाग से विस्मृत नहीं हुए हैं इस तरह आप खुद को ही भ्रष्टाचारी साबित कर रही हैं। तब जाकर सोनिया ने विषय से विषयांतर किया।
इस मामले को मनीष तिवारी के नेतृत्व वाले सूचना प्रसारण मंत्रालय ने बखूबी मैनेज कर लिया। चेनल्स ने इस मामले को छुआ भी नहीं और प्रिंट में भी इसकी गूंज ज्यादा नहीं दिखी। रही सोशल मीडिया की बात तो सोशल मीडिया ने इस मामले को उठाया है। राहुल गांधी की चिंता भी सोशल मीडिया को लेकर ही है। अगर देश के मीडिया को भरपूर पैसा देकर कांग्रेस द्वारा राहुल के पक्ष में कर भी लिया जाता है तब भी सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स को काबू करना असाना नहीं होगा। सोशल मीडिया का जुनून आज देश में सर चढकर बोल रहा है। देश में अंदर ही अंदर अराजकता चरम पर है।
गरीब गुरबे किस तरह दिन गुजार रहे हैं यह बात राहुल को नहीं पता। सुरसा की तरह मंहगाई के बढ़ते मुंह ने सभी को निगलना आरंभ कर दिया है। अगर कोई आदमी कानून ना तोडे तो वह वकील की फीस से बच सकता है। पर दवाओं से तो नहीं बच सकता। अगर बच्चे को पढाना है तो स्कूल की मनमाफी फीस देना ही होगा। अब तो आम आदमी कहने लगा है कि वह तीन ही बातों के लिए कमा रहा है। खाने, डाक्टर को पैसा देने और स्कूल की फीस चुकाने। अबदेखना है कि राहुल इस चुनौति से आखिर निपटते कैसे हैं? (साई फीचर्स)

2014 में होगी राजपथ पर गणतंत्र की झांकी: सीपीआर


लाजपत ने लूट लिया जनसंपर्क ------------------39

2014 में होगी राजपथ पर गणतंत्र की झांकी: सीपीआर

(आकाश कुमार)

नई दिल्ली (साई)। देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह पर निकलने वाले चल समारोह में देश भर के सूबों की झांकियां दिखेंगी पर इस साल भी लगातार दूसरी बार मध्य प्रदेश की झांकी दिखाई नहीं पड़ेगी, इस सवाल के जवाब में मध्य प्रदेश के जनसंपर्क आयुक्त का कहना है कि वर्ष 2014 में मध्य प्रदेश की झांकी अवश्य दिखाई देगी। ज्ञातव्य है कि 2013 के दिसंबर में विधानसभा चुनाव हैं, चुनावी साल में शिवराज सिंह चौहान सरकार की योजनाओं के प्रचार प्रसार से ना केवल मध्य प्रदेश वरन देश भर में भाजपा को पालीटिकल माईलेज मिलने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
मध्य प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों और योजनाओं की जानकारी जन जन तक पहुंचाने के लिए पाबंद जनसंपर्क विभाग अपने मूल काम को अंजाम देने के स्थान पर पूरी तरह से किसी और के इशारों पर काम करता नजर आ रहा है। यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि लगातार दूसरे साल भी दिल्ली के राजपथ पर मध्य प्रदेश सरकार की झांकियां तलाशते फिरेंगे एमपी के वाशिंदे।
रक्षा मंत्रालय के डीसेरीमोनियल अनुभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को स्पष्ट तौर पर बताया कि इस साल एक बार फिर गणतंत्र दिवस पर राजपथ मध्य प्रदेश की झांकी से रीता ही रहेगा। पिछले साल तो एमपी से प्रस्ताव आ गए थे पर उनमें से किसी का चयन नहीं किया गया किन्तु इस साल तो हद ही हो गई है क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार के सत्ता के मद में डूबे नौकरशाहों ने झांकी का प्रस्ताव ही केंद्र को नहीं भेजा।
इस संबंध में जब आयुक्त जनसपंर्क राकेश श्रीवास्तव से चर्चा की गई तो उन्होंने मोबाईल पर साई न्यूज को बताया कि गणतंत्र दिवस पर झांकियां रोटेशन में शामिल की जाती है, अतः अगले साल इन्हें भेजा जाएगा। जब उन्हें याद दिलाया गया कि पिछले साल भी झांकी शामिल नहीं हुई थी, तब उन्होंने कहा कि हम अगले साल के गणतंत्र 2014 के लिए प्रस्ताव अवश्य तैयार कर भेजेंगे। इस साल प्रस्ताव शामिल नहीं किए जाने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस साल हमने प्रस्ताव ही नहीं भेजे हैं। इसके पहले कि उनसे यह पूछा जाता कि यह चुनावी साल है इससे सरकार की नीतियां रीतियां जनता तक आसानी से पहुंच सकती उन्होंने फोन ही रख दिया।
वहीं दूसरी ओर जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक लाजपत आहूजा से इस संबंध में जब समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ने विभाग का दृष्टिकोण जानना चाहा तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह जनसंपर्क विभाग के फील्ड पब्लिसिटी डिपार्टमेंट का काम है और इस विभाग को सुरेश तिवारी डील करते हैं आप उनसे ही मालुमात कीजिए।
जब इस संबंध में जनसंपर्क के फील्ड पब्लिसिटी विभाग से संपर्क किया गया तो एक अधिकारी ने उचटते ही कहा कि नहीं गई तो नहीं गई इससे क्या फर्क पड़ता है।? आप साबित क्या करना चाहते हैं? जब उनसे आग्रह किया गया कि साई न्यूज कुछ साबित नहीं करना चाहता वरन् उनसे सरकार का पक्ष जानना चाह रहा है तब फिर बाद में उन्होंने नाम उजागर ना करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से कहा कि यह पूरा मामला आयुक्त डील करते हैं अतः उनसे ही संपर्क किया जाए एवं उनका नाम कहीं कोड ना किया जाए।
भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय 11, अशोक रोड़ में बैठे एक वरिष्ठ पदाधिकारी से जब इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने पहचान उजागर ना करने की शर्त पर कहा कि दरअसल, यह सत्ता और संगठन के बीच वर्चस्व की जंग का नतीजा है। उन्होने कहा कि पूर्व अध्यक्ष चाहते थे कि वे प्रदेश के निजाम बन जाएं, इसी लिहाज से उन्होंने अपने समर्थक सरकारी अधिकारियों की जमावट करना आरंभ किया था। सबसे पहले मीडिया को साधने वाले जनसंपर्क विभाग पर पकड़ बनाई गई, फिर दूसरे विभागों पर। अब उनके जाते ही उपजे वेक्यूम के चलते यह परिस्थिति निर्मित हो रही है।
इस बात में सच्चाई कितनी है यह तो भाजपा संगठन और मध्य प्रदेश सरकार जाने किन्तु यह सच है कि चुनावी साल में देश की राजधानी में मध्य प्रदेश की झांकी ना होना आश्चर्य का ही विषय है। ज्ञातव्य है कि देश के हृदय प्रदेश के निजाम शिवराज सिंह चौहान ने महिला सशक्तिकरण के लिए बेटी बचाओ अभियान का आगाज किया। इसके उपरांत 2007 में लाडली लक्ष्मी योजना का श्रीगणेश किया जिसमें लगभग साढ़े तेरह लाख बच्चियां अब तक लाडली लक्ष्मी बन चुकी हैं। महिलाओं पर आधारित तेजस्वनी योजना के तहत स्वसहायता समूहों का गठन भी किया गया है।
शिवराज सिंह चौहान के खाते की सबसे सुपर डुपर हिट योजना है मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना। इस योजना पर आधारित झांकी अगर इस साल गणतंत्र दिवस पर राजपथ से गुजरती तो निश्चित तौर पर मध्य प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों में भाजपा को जमकर लाभ होता। इस योजना में उत्तराखण्ड, उड़ीसा, गुजरात, जम्मू काश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, आंध्र प्रदेश, तमिल नाडू, झारखण्ड, कर्नाटक और महाराष्ट्र का चयन किया गया है।
इन राज्यों में जब तीर्थ दर्शन योजना की रेलगाडी जाती और उसकी जमकर पब्लिसिटी करवाई जाती तो निश्चित तौर पर इसका लाभ वहां भाजपा को मिल सकता था। इन राज्यों में भाजपा की स्थानीय इकाई अगर तीर्थ यात्रियों का स्वागत करती तो इसका संदेश बहुत ही अच्छा जा सकता था, विडम्बना ही कही जाएगी कि मध्य प्रदेश के सरकारी नुमाईंदे और शिवराज सरकार के अंगों ने इस दिशा में विचार ही नहीं किया।
देश की राजधानी दिल्ली के मंहगे व्यवसायिक इलाके कनाट सर्कस के बाराखम्बा रोड़ स्थिति मध्य प्रदेश आवासीय आयुक्त के कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि 2013 के अंत में चुनाव होने हैं और फिर अगली सरकार किसकी बनती है अगले साल गणतंत्र पर प्रदेश की झांकी क्या बनेगी यह बात भविष्य के गर्भ में है, किन्तु इस बार गणतंत्र दिवस पर चुनावी साल होने के बाद भी इसका फायदा मध्य प्रदेश के सरकारी नुमाईंदों ने शिवराज सिंह को नहीं लेने दिया, जो आश्चर्य का विषय ही माना जा रहा है। सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि मध्य प्रदेश जनसंपर्क के फील्ड पब्लिसिटी में पदस्थ एक अधिकारी इस बात से नाराज हैं कि उनका तबादला दिल्ली से वापस कर दिया गया था, इसलिए पिछले दो सालों से उन्होंने इस मामले में अपनी दिलचस्पी ना दिखाते हुए झांकी के प्रोग्राम से किनारा ही कर रखा है।

भावी दस्तावेज तैयार हुआ कांग्रेस का


भावी दस्तावेज तैयार हुआ कांग्रेस का

(शैलेन्द्र)

जयपुर (साई)। कांग्रेस के नवनियुक्त उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आम आदमी के लाभ के लिए पार्टी के कामकाज और व्यवस्था में व्यापक बदलाव का आह्घ्वान किया है। कल जयपुर में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अधिवेशन में राहुल गांधी ने कहा कि बदलाव के साथ हर कदम सोच समझकर उठाना होगा।
उन्होंने कहा कि राजनीति में मैं अब आठ नौ साल से हूं और मैं एक बात समझा हूं काम करना है सोच समझकर करना है। गहराई से करना है और जल्दी से नहीं करना है। बदलाव हो तो लंबे तौर पर हो और गहराई से हो। राहुल गांधी ने कहा कि अब सरकारी कामकाज की केन्द्रीयकृत और उदासीन शैली पर सवाल उठाने का समय आ गया है।
उन्होंने कहा कि लीडरशिप डिवेलपमेंट की जरूरत है और इसके लिए ढांचे की जरूरत है सिस्टम की जरूरत है। इर्न्फाेमेशन की जरूरत है, क्योंकि यहां पर जो नहीं होता है, इसलिए नहीं होता है क्योंकि कोई चाहता नहीं। इसलिए नहीं होता है क्योंकि सिस्टम नहंी और सिस्टम बनाया जा सकता है और इस सिस्टम को आप लोग बनाओगे और आप लोग चलाओगे।
कांग्रेस पार्टी ने जयपुर घोषणा पत्र भी जारी किया इसमें सभी धर्मनिर्पेक्ष और प्रगतिशील ताकतों से समाज को बांटने वाली शक्तियों के विरुद्ध एकजुट होने को कहा गया। कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने अपने भाषण में जयपुर घोषणा को पार्टी का भावी दस्तावेज बताया।
उधर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी ने कहा कि ये जयपुर घोषणा एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन यह ध्यान रखना है कि यह दस्तावेज एक तरह से हमारे निकट भविष्य का मार्ग दर्शन हैं। अगर हम इसके अनुरूप चलेंगे तो कोई भी बाधा हमारा रास्ता नहीं रोक सकती।
कांग्रेस के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि ५६ सूत्री घोषणा में कहा गया है कि पार्टी विशेषकर नौकरशाही और राजनीतिक स्तर पर भ्रष्टाचार से लड़ने में सबसे आगे रहेगी। इसमें हर साल एक करोड़ नौकरियां जुटाने का वायदा किया गया है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार मजबूत लोकपाल के प्रति संकल्पबद्ध है। डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि महिलाओं के प्रति अपराध रोकने के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसा माहौल तैयार करें जिसमें महिलाएं अपने आपको सुरक्षित महसूस करें। जिस काम के लिए कानून में जो भी बदलाव हो रहे हैं। वो करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। लेकिन ये करना काफी नहीं होगा। हमें अपने सामाजिक मूल्यों में भी बदलाव लाना होगा।

कौन बनेगा करोड़पति का छटवां सत्र समाप्त


कौन बनेगा करोड़पति का छटवां सत्र समाप्त

(निधि गुप्ता)

मुंबई (साई)। कंप्यूटर महाशय यह लाईफ लाईन अंकित की जाए, जैसे जुमले अब कुछ समय तक आप नहीं सुन पाएंगे। इसका कारण आखिरी एपिसोड की शूटिंग के साथ अमिताभ बच्चन ने टीवी कार्यक्रम कौन बनेगा करोडपतिके छठे सत्र से विदा ले लिया जाना है। उम्मीद जतायी कि वह एक बार फिर इस टीवी गेम शो के साथ वापसी करेंगें।
बच्चन केबीसी के छह सत्र में से पांच के प्रस्तोता रहे हैं। गेम शो के तीसरे सत्र के प्रस्तोता शाहरुख खान थे। बच्चन ने फेसबुक पर लिखा, ‘‘केबीसी का छठा सत्र खत्म हो गयाुं उदासी जैसा है, जो महसूस कर रहा हूं वह शब्दों में बयां नहीं कर सकता।
उन्होंने आगे लिखा, ‘‘इस कार्यक्रम को दर्शक बहुत चाव से देखने आते हैं, शांत और अनुशासित रहते हैं आप सभी का शुक्रिया मुझे उम्मीद है कि मैं जल्द ही आपके पास एक बार फिर लौटूंगा।  बिग बी ने पोस्ट के अलावा फेसबुक पर केबीसी के आखिरी एपिसोड के सेट की कुछ तस्वीरें भी डालीं जिनमें गणतंत्र दिवस का थीम दिखा क्योंकि यह एपिसोड 26 जनवरी को दिखाया जाएगा। 

राहुल की ताजपोशी तरह तरह की प्रतिक्रियाएं


राहुल की ताजपोशी तरह तरह की प्रतिक्रियाएं

(राज कुमार अग्रवाल)

कैथल (साई)। जयपुर में चल रहे कांग्रेस के चिंतन अधिवेशन में राहुल गांधी को उपाध्यक्ष बनाने एवं 2014 के चुनाव में प्रधानमंत्री की भागडोर संभालने के लिए गए फैसले पर कांग्रेसियों में खुशी की लहर फैल गई। जिस पर राहुल गांधी को यह भार सौंपने पर कांग्रेसियों ने खुशी में लड्डू भी बांटे। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री तेजेंद्र सिंह पाल मान ने कहा कि राहुल गांधी को यह जिम्मेवार सौंपने पर विपक्ष का नामों निशान समाप्त हो जाएगा और 2014 के चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस अपने दम पर ही अपनी सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि 2014 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी को अपना बहुमत साबित करने के लिए किसी अन्य दल की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कांग्रेसी नेता मनोज मलिक ने भी कहा कि 2014 के चुनाव में राहुल गांधी के साथ देश के सभी युवा तन मन धन से कांग्रेस का साथ देंगे। उधर राजीव गांधी युवा सेना के प्रदेशाध्यक्ष कंवल भसीन करनाल एवं जिलाध्यक्ष कृष्ण गर्ग ने भी बताया कि इस जिम्मेवारी से पार्टी में नए जोश, उत्साह से पार्टी उभर कर सामने आएगी। 2014 में कांग्रेस पार्टी को किसी सहारे की जरूरत नहीं होगी। जिस कारण से देश में कांग्रेस पार्टी विकास कार्यों की गंगा बहाएगी। उधर विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने राहुल गांधी को यह जिम्मेवारी सौंपने को ढ़कौसला बताया है। हजकां के जिलाध्यक्ष विक्की शर्मा ने गांव देबन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राहुल गांधी पहले भी नम्बर 2 पर थे और अब भी नम्बर 2 पर ही है। यह पहले भी युवाओं की भागढ़ौर संभाले हुए थे। फिर इसमें नया क्या है? इससे तो ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे पुरानी बोतल में से शराब निकाल कर दूसरी पुरानी खाली बोतल में ही डाल दी हो। इनेलो के पूर्व मुख्य संसदीय सचिव एवं कलायत के विधायक रामपाल माजरा ने कहा कि देश की जनता पर इसका कोई असर पडऩे वाला नहीं है। अब कांग्रेस के सफाए के दिन आ गए है। कांग्रेस ने पहले भी बदले की भावना से काम किया है और अब भी बदले की भावना से कार्य कर रही है। इसके साथ-साथ आगे भी बदले की भावना से कार्य करेगी। जिसका जनता को पता चल चुका है। उन्होंने कहा कि सीबीआई जो एक ऐसी संस्था है जो अपने बलबुते पर भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्य करती है। परन्तु कांग्रेस के राज में यह सीबीआई ऐसा कोई भी कार्य नहीं कर रही है बल्कि कांग्रेस पार्टी की कटपुलती बन कर रह गई है। जिस कारण से अब सीबीआई यानि सेंट्रल ब्यूरो इंवेस्टीगेशन की बजाएं अब इसका नाम कांग्रेस ब्यूरो इंवेस्टीगेशन हो गया है। कांग्रेस के इशारों पर यह निर्दाेष व्यक्तियों को भी जेल की सलाखों में डाल सकती है। कांग्रेस द्वारा पहले भी इसी की मदद से मायावती, मुलायम सिंह आदि अनेक नेताओं को डरा रखा है और उनसे विभिन्न प्रकार से मदद लेते रहे ताकि उनकी सत्ता बनी रहे। यदि सीबीआई के द्वारा इन नेताओं को डराया धमकाया नहीं जाता तो सरकार कब की गिर चुकी होती। अब इसी के दम पर प्रदेश के पूर्व एवं भावी मुख्यमंत्री को नाजायज रूप से जेल में डाला है। परन्तु ये आने वाले समय में निर्दाेष होकर प्रदेश की जनता के सामने आएंगे और कांग्रेस की पोल पट्टी खोलते हुए प्रदेश ही नहीं देश में से कांग्रेस पार्टी का सुपड़ा साफ कर देंगे। 

उत्कृष्ट जनगणना कर्मी पदक होंगे सम्मानित


उत्कृष्ट जनगणना कर्मी पदक होंगे सम्मानित

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। भारत सरकार के गृह मंत्र्ाालय्ा के अधीन जनगणना कायर््ा निदेशालय्ा, मध्य्ाप्रदेश भोपाल द्वारा वर्ष २॰११ में संपन्न हुई जनगणना में जिला सिवनी (३९) में उत्कृष्ट कायर््ा करने वाले मैदानी कर्मचारिय्ाों एवं अधिकारिय्ाों को माननीय्ा राष्ट्रपति महोदय्ा की ओर से जनगणना पदक एवं प्रमाण-पत्र्ा दिय्ो जाय्ोंगे। इसके लिय्ो सिवनी जिले के १५ शासकीय्ा सेवकों को जनगणना के रजत पदक एवं १॰ शासकीय्ा सेवकों को जनगणना के कांस्य्ा पदक, इस प्रकार कुल २५ शासकीय्ा सेवकों को इन पदकों के लिय्ो चय्ानित किय्ाा गय्ाा है। इन सभी शासकीय्ा सेवकों को २६ जनवरी को गणतंत्र्ा दिवस के मुख्य्ा समारोह में जनगणना पदकों और प्रमाण पत्र्ा से नवाजा जाय्ोगा।
कलेक्टर अजीत कुमार ने य्ाहां बताय्ाा कि जनगणना २॰११ में प्रगणक के रूप में कायर््ा करने वाले क्रमशः घंसौर तहसील के भीमसिंह गोल्हानी को रजत पदक एवं मंगासिंह मरकाम को कांस्य्ा पदक, केवलारी तहसील के रविकान्त ताम्रकार, शिक्षक, डोभ को रजत पदक एवं संदीप राय्ा चौधरी शिक्षक अहरवाडा को कांस्य्ा पदक, छपारा तहसील के राजनाराय्ाण तिवारी, सहाय्ाक शिक्षक को रजत पदक एवं पूनाराम राजपूत, सहाय्ाक अध्य्ाापक को कांस्य्ा पदक, धनौरा तहसील के महेन्द्र श्रीवास्तव, सहाय्ाक अध्य्ाापक, धनौरा को रजत पदक एवं श्रीमती रूकमणी य्ाादव, सहाय्ाक अध्य्ाापक, साजपानी को कांस्य्ा पदक, सिवनी तहसील के देवेन्द्र कुमार चौधरी, अध्य्ाापक, उन्नय्ान मा. शा. पुसेरा को रजत पदक एवं नोबद शुक्ला, शिक्षक, मा. शाला डुंगरिय्ाा को कांस्य्ा पदक, लखनादौन तहसील के एच.ओ.पाराशर, संविदा शिक्षक, प्रा. शा. गंगई को रजत पदक एवं श्य्ााम य्ाादव, संविदा शिक्षक, प्रा.शा. अंडिय्ाा को कांस्य्ा पदक, बरघाट तहसील के तामसिंह देशमुख, सहाय्ाक शिक्षक पौनिय्ाा को रजत पदक एवं राधेलाल कटरे, सहाय्ाक शिक्षक, खुर्सीपारखुर्द को कांस्य्ा पदक, कुरई तहसील के रामरूप गोनगे, सहाय्ाक शिक्षक, प्रा.शा.कुरई को रजत पदक एवं द्वारका प्रसाद उइके, सहाय्ाक शिक्षक को कांस्य्ा पदक, नगरपालिका सिवनी की कु. शशिकला साहू, वरिष्ठ अध्य्ाापक, शासकीय्ा उर्दू उ.मा.वि.सिवनी को रजत पदक, नगर परिषद लखनादौन के ओमप्रकाश कुमार गुमास्ता, संविदा शाला शिक्षक वर्ग-२ को रजत पदक एवं नगर परिषद बरघाट की श्रीमती डोरेश्वरी परिहार, सहाय्ाक अध्य्ाापक, शा.प्रा.शा.मूंडापार को रजत पदक दिय्ाा जाय्ोगा।
इसी क्रम में जनगणना २॰११ में पयर््ावेक्षक के रूप में कायर््ा करने वाले (जिला स्तर पर) राजाराम सनोडिय्ाा, शिक्षक, प्रा.शा. चंदोरीखुर्द तहसील सिवनी को रजत पदक एवं के.जी. सेंगर, शिक्षक प्रा. शा. चंदोरीखुर्द तहसील सिवनी को कांस्य्ा पदक दिय्ाा जाय्ोगा। 

साई तेरे कई रूप, सबका मालिक एक


साई तेरे कई रूप, सबका मालिक एक

(ब्यूरो कार्यालय)

गोपालगंज (साई)। गोपालगंज के मीरगंज नगर में मकर संक्रांति के अवसर पर सोमवार की शाम साई सेवा संस्थान के तत्वाधान में नृत्य-संगीत कार्यक्रम की प्रस्तुति की गयी। जिसका उद्घाटन हथुआ अनुमंडल पदाधिकारी मंजू प्रसाद ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत अनुज सिंह ने गणेश वंदना से की। उनके गाये गए गीत, मेरे घर के सामने साई नाथ तेरा मंदिर बन जाए, पर लोग झूम उठे। कार्यक्रम में विनय बिहारी, विजय बिहारी ने साई तेरे कई रुप, सबका मालिक एक है, सुनाकर सभी को भक्ति रस में डूबने पर मजबूर कर दिया। कलाकार राज नंदनी ने साई के दर्शन पर आधारित कई गीत पेश किए। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में बीडीओ रामेश्वर राम, एमओ काशीनाथ प्रसाद श्रीवास्तव, साई सेवा संस्थान के अध्यक्ष रिंकू, तरुण, अनमोल केशरी सहित काफी संख्या में नगरवासी मौजूद रहे।