विशेष खबर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
विशेष खबर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 9 फ़रवरी 2014

अन्नदाता किसानों की मेहनत के फूट रहे अंकुर!

पिछले साल की अधिकांश धान सड़ चुकीइस साल की धान हो रही अंकुरित
(महेश रावलानी/पीयूष भार्गव)
सिवनी (साई)। देश के अन्नदाता किसान के द्वारा हाड़ तोड़ मेहनत का मेहनताना भले ही उसे मिल चुका हो किन्तु उसकी मेहनत से ऊगी फसल का अंजाम बेहद ही भयानक और दुखदायी रूप से सामने आ रहा है। ठण्ड के मौसम में हुई बारिश और ओस की बूंदों ने धान को अंकुरित करने के लिए उपजाऊ माहौल तैयार किया। अधिकारियों कर्मचारियों की अनदेखी का यह नतीजा निकला कि धान अंकुरित होने लगी है।
जिला कलेक्टर भरत यादव द्वारा पूर्व में कड़े निर्देश‘ जारी कर कहा गया था कि अगर धान गीली हुई तो अधिकारी कर्मचारियों पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। विडम्बना देखिए धान गीला होना तो दूर धान के अंकुरण की खबरें वह भी छाया चित्रों के साथ मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद भी जिला कलेक्टर द्वारा अब तक इनके विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की है।

हजारों क्विंटल धान हो गया है गीला
पिछले दिनों पानी गिरने से नरेला में रखे हजारों क्विंटल धान में से भारी मात्रा में धान बुरी तरह गीला हो चुका है। दिसंबर और जनवरी माह में गिरते पानी में बिना स्टेग को ढके हुए (जबकि ढकने के लिए पर्याप्त मात्रा में कैप मौजूद थे) धान को खुले में ही रखा गया था। इसके परिणाम स्वरूप धान का अधिकांश हिस्सा गीला हो चुका थाजो अब अंकुरित हो रहा है।

परिवहन का है इंतजार
यद्यपि धान की खरीद समाप्त हो चुकी हैफिर भी जिले भर में धान खरीद केंद्रों पर बारिश के बावजूदधान खुले में बिना बोरा सिले ही रखा हुआ है। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के दल ने पाया कि जगह-जगह सड़कों किनारे रखे धान में बारिश का पानी बुरी तरह बोरों को भेद चुका है। अनेक सोसायटीज के कारिंदों ने साई न्यूज को बताया कि यहां एकत्र धान में से सत्तर फीसदी धान संग्रहण स्थल तक पहुंचने के उपरांत सड़ ही जाएगाक्योंकि यहां से इन्हीं गीली बोरियों में बारिश का भीगा धान संग्रहण केंद्र पहुंचेगा और वहां बिना सुखाए ही इसे छल्ली बनाकर रख दिया जाएगा। अब जबकि धान अंकुरित हो चुका है तब इस धान के खराब होने के लिए किसे जिम्मेवार ठहराया जाएगा।

कलेक्टरप्रभारी मंत्री कर चुके हैं दौरा
सिवनी में अधिकारियों की लापरवाही की दाद देनी होगी। इसका कारण यह है कि जिला कलेक्टर भरत यादव द्वारा खुद खरीद केंद्र और धान संग्रहण केंद्र नरेला का भ्रमण किया जा चुका है। कलेक्टर द्वारा अवश्यक और कड़े निर्देश‘ देने के बाद भी अधिकारियों के कानों में जूं भी नहीं रेंगी है। वहीं दूसरी ओर शिवराज सिंह चौहान मंत्री मण्डल के एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री बालाघाट के विधायक गौरी शंकर बिसेन को दी गई है। बिसेन सिवनी के प्रभारी मंत्री भी हैं। यहां गौरतलब होगा कि गौरी शंकर बिसेन सिवनी जिले के ग्रामीण अंचलों का दौरा कर चुके हैं और उनके संज्ञान में सड़कों किनारे रखे धान की स्थिति आई ही होगी। खाद्यकृषि विभाग के अधिकारियों सहित नागरिक आपूर्ति निगम और विपणन संघ के आला अधिकारियों को न तो कलेक्टर की चिंता है और न ही प्रभारी मंत्री की।

सड़ांध मार रहा है सड़ा धान!
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया का दल जब नरेला में बने स्टेग में पहुंचा तो उसने पाया कि पिछले साल संग्रहित कर रखे धान में से अनेक बोरे धान सड़ चुका है। सड़े बोरे मैदान में यत्र तत्र बिखरे पड़े हैं। यहां तक कि कुछ स्थानों पर तो बोरों के ऊपर फफंूद भी साफ तौर पर दिखाई पड़ रही थी। नरेला से पहले बनाए गए स्टेग में दायीं ओर वाले स्टेग में अंदर घुसते ही कुछ स्टेग के पास सड़ी धान से उठती दुर्गंध अपने आप में यह साबित करने के लिए पर्याप्त मानी जा सकती है कि अधिकारी किसमुस्तैदी‘ के साथ अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। सड़े धान की दुर्गंध इतनी तेज उठ रही है कि वहां खड़ा होना भी मुश्किल ही प्रतीत हो रहा है।

जानवर खा रहे धान!
नान के एक कर्मचारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर साई न्यूज को बताया कि नान के द्वारा संग्रहित की जा रही धान के रखरखाव में पर्याप्त अनियमितताएं बरती जा रही हैं। कर्मचारियों के अभाव के चलते दिन हो या रातसंग्रहण क्षेत्र मेें आवारा मवेशी और जंगली जानवर घुसकर स्टेग के बोरों में मुंह मारकर अपना पेट भर रहे हैं। साई न्यूज की टीम ने पाया कि कुछ स्टेग के आसपास भारी मात्रा में धान जमीन पर बिखरी पड़ी हुई थी। कहा जाता है कि अन्न का एक-एक दाना कीमती होता है पर यहां तो अन्न की बरबादी को ही साफ तौर पर रेखांकित किया जा सकता है। अन्न की इस तरह की बर्बादी सिवनी में ही देखने को मिल रही है शेष स्थानों पर शायद ही धान सड़ा हो।

बना रहे पाखड़ धान!
नान के सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि खाली पड़ी भूमि पर बनाए गए स्टेग के आसपास चूहों का साम्राज्य स्थापित हो गया है। देखरेख के अभाव में चूहे अंदर ही अंदर बारदानों को काटकर मौज काट रहे हैं। कुछ ही माहों में ढंके वाले स्टेग में बोरे अंदर ही अंदर धराशाई हो जाते हैं। इस तरह की धान या चांवल टूट की श्रेणी में आता है। जानकारों का कहना है कि इस तरह चूहों के खाने से टूट वाले ब्रोकन राईस या खण्डा और गीली सड़ी धान जिसे पाखड़ कहा जाता है से मैदा का निर्माण किया जाता है और इससे निकलने वाला राईस ब्राण्ड तेल भी बाजार में उपलब्ध होता है। सूत्रों का कहना है कि इस गीली धान को अगर सुखा लिया जाए तो पाखड़ धान कहलाती है और पाखड़ धान बाजार में बिक नहीं पाती है। जानकारों का कहना है कि इस तरह के चांवल को शराब उत्पादन कंपनियां सस्ते में खरीदकर इससे शराब का निर्माण भी करती हैं।

करोड़ों के हो रहे वारे न्यारे
वहीं नान के सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों का ध्यान निर्धारित लक्ष्य (अपना निजी एवं सरकार की ओर से दिया गया) को पूरा करने की ओर ही है। धान किस स्थिति में हैइस बात से उन्हें कोई लेना देना नहीं है। आलम यह है कि पानी गिरने के बाद न तो नरेला में ही कोई अधिकारी यह जानने पहुंचा कि धान की क्या स्थिति है और न ही ग्रामीण अंचलों में ही संबंधित अधिकारियों ने जाने की जहमत उठाई है। पिछले दिनों वर्ष 2013 में खरीदे गए धान को नया धान बताकर स्टेग में लगाने का मामला भी प्रकाश में आया था। बताया जाता है कि इस मामले को भी दबा दिया गया है।

इंतजार है प्रशासनिक कार्यवाही का
जब धान अंकुरित हो चुकी है तो इससे साफ है कि धान की खरीदपरिवहन और भण्डारण में गंभीर लापरवाही बरती गई है। अन्नदाता किसान की खून पसीने की कमाई को अगर इस तरह लापरवाही से बरबाद किया जाएगा तो निश्चित तौर पर यह अक्षम्य लापरवाही की श्रेणी में ही आएगा। अब लोगों को इंतजार संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव के अगले कठोर कदम‘ का ही रह गया है।

बुधवार, 6 नवंबर 2013

सुबह 11 बजे आरओ केवलारी के कार्यालय में उपस्थित होकर बयान रिकार्ड कराएं हिन्द गजट के संपादक!

सुबह 11 बजे आरओ केवलारी के कार्यालय में उपस्थित होकर बयान रिकार्ड कराएं हिन्द गजट के संपादक!

रात लगभग साढे़ सात बजे फोन पर दिया आरओ केवलारी ने समाचार पत्र के संपादक को आदेश, आज जारी किया नोटिस, नहीं दिया 48 घंटे का नियमानुसार मिलने वाला समय!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। चार नवंबर की रात लगभग सवा सात बजे हिन्द गजट के संपादक के मोबाईल पर 8989867665 नंबर से एक फोन आया। फोनकर्ता ने अपने आप को रिटर्निंग ऑफिसर केवलारी बताया और कहा कि अगले दिन यानी 5 नवंबर को सुबह ग्याहर बजे सिवनी स्थित आरओ (रिटर्निंग ऑफिसर), केवलारी के कार्यालय पहुंचकर बयान रिकार्ड करवाएं। इस तरह के आदेशात्मक फोन से संपादक सकते में आ गए।
दैनिक हिन्द गजट के संपादक ने बताया कि उनके कुछ बाल सखा दीप पर्व पर सिवनी आए हुए थे। वे अपने मित्रों के साथ पुरानी यादें ताजा कर रहे थे। इसी बीच रात्रि सवा सात बजे एक फोन आया जिसमें फोनकर्ता ने उनसे कहा कि वे आरओ केवलारी बोल रहे हैं। और उन्होंने संपादक को अगली सुबह ग्यारह बजे आरओ केवलारी के सिवनी कार्यालय पहुंचकर बयान दर्ज कराने का निर्देश दे दिया।
जब संपादक द्वारा उनसे कहा गया कि मसला क्या है? तब उन्होंने कहा कि उनकी एक शिकायत आरओ के पास है और उसमें कुछ धाराओं के तहत नोटिस जारी किया गया है। जब इस संबंध में संपादक द्वारा कहा गया कि अगर कोई शिकायत है तो आरओ केवलारी को नियमानुसार नोटिस जारी कर 48 घंटे का समय दिया जाना चाहिए। चूंकि वे लॉ ग्रेजुएट नहीं हैं अतः धाराओं की जानकारी उन्हें नहीं है। वे कैसे बिना जानकारी के बयान रिकार्ड करवा सकते हैं।
साथ ही साथ संपादक द्वारा यह बात भी आरओ केवलारी के संज्ञान में ला दी गई कि 03 और 04 नवंबर कार्यालय का अवकाश है अतः 05 नवंबर को ही वे इस संबंध में कोई कार्यवाही कर पाएंगे। साथ ही साथ यह भी कहा गया कि 04 नवंबर को कांग्रेस के एक महामंत्री द्वारा उनसे इस नोटिस के बारे में कुछ पूछताछ की गई थी। जिस पर हिन्द गजट के व्यवस्थापक द्वारा अपनी भावनाओं से लिखित रूप में अपनी बात से एमसीएमसी और जिला निर्वाचन अधिकारी को आवगत करा दिया गया था। इस पर आरओ केवलारी द्वारा फोन पर ही कहा गया कि एमसीएमसी और जिला निर्वाचन अधिकारी कौन होते हैं? हम आरओ केवलारी हैं और आप हमारे समक्ष कल 11 बजे उपस्थित होकर बयान दर्ज करवाएं।
संपादक द्वारा इस संबंध में आरओ केवलारी से यह पूछा गया कि शिकायतकर्ता कौन है? शिकायत की क्या प्रकृति है? इस बारे में उन्हें लिखित रूप में अवगत कराया जाए तब वे अपना जवाब दे सकेंगे। इस पर आरओ केवलारी ने फोन पर ही कहा कि वे अपने रिकार्ड में इस बात को ले रहे हैं कि संपादक को फोन पर ही सूचना दे दी गई है। इस पर संपादक द्वारा उनसे कहा गया कि आपकी नोटशीट है, आपका पैन है आप जो चाहे लिख सकते हैं, इसमें संपादक भला क्या कर सकता है। इस पर आरओ केवलारी द्वारा फोन पर कहा गया कि फोन पर दी गई सूचना ही पर्याप्त है और संपादक को सुबह 11 बजे उपस्थित होना ही होगा।
दैनिक हिन्द गजट के संपादक द्वारा इस मामले में उनसे निवेदन किया गया कि वे कायस्थ हैं और 05 नवंबर को यमद्वितीया एवं भाई दूज का पर्व होता है। इस दिन सुबह से लेकर शाम तक भगवान चित्रगुप्त का पूजन किया जाता है। इस दिन का महत्व कायस्थ समाज के लिए बेहद अधिक है अतः नोटिस भेजकर कम से कम 48 घंटे का समय दिया जाए। इन सारी बातों को दरकिनार कर फोनकर्ता आरओ केवलारी द्वारा अंत में साफ तौर पर कहा गया कि वे इस बात को अपने रिकार्ड में ले रहे हैं कि उनके द्वारा फोन पर सूचना तामील कर दी गई है।

क्या है मामला
दरअसल, सालों साल से समाचार पत्रों की अघोषित चली आ रही परंपरानुसार इस साल दैनिक हिन्द गजट द्वारा दीपोत्सव पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और माता सरस्वती के चित्रों से युक्त एक रंगीन छायाचित्र निःशुल्क वितरण के लिए प्रकाशित किया गया था। अमूमन हर समाचार पत्र द्वारा इसका प्रकाशन किया जाना आम बात है। अमूमन इसे समाचार पत्र का ही अंग माना जाता है अतः इसके प्रकाशन में अलग से संपादक, प्रकाशक, मुद्रक के नाम अथवा प्रसार संख्या का उल्लेख नहीं होता है। इस छायाचित्र में (देखें फोटो) विज्ञापनों का प्रकाशन सामान्य बात है। इस बार इसके प्रकाशन के साथ इसमें कुंवर शक्ति सिंह का फोटो और उनकी ओर से दीप पर्व की बधाई का प्रकाशन किया गया था।
एसडीएम कार्यालय केवलारी के सूत्रों की मानें तो एसडीएम केवलारी द्वारा इसे पंपलेट की श्रेणी में रखा जा रहा है, एवं इसमें संपादक को प्रिंटिंग एक्ट के उल्लंघन का नोटिस जारी किया जा रहा है। अगर दैनिक हिन्द गजट के साथ प्रसारित इस रंगीन छायाचित्र को उनके द्वारा अवैध माना जा रहा है तो शेष समाचार पत्रों द्वारा इसी प्रकृति के वितरित छायाचित्र क्या वैध हैं यही यक्ष अनुत्तरित ही है, क्योंकि उनमें भी न तो यह लिखा है कि फलां अखबार के साथ प्रकाशित या प्रसारित! हिन्द गजट द्वारा तो 03 नवंबर के अंक के साथ प्रथम पृष्ठ पर यह सूचना भी हाईलाईटेड कर प्रकाशित की गई थी कि 03 नवंबर के अंक के साथ उक्त छायाचित्र दिया जा रहा है जिसे पाठक अपने हाकर्स से अवश्य ही ले लें। इन परिस्थितियों में इसे पंपलेट मानना उचित नहीं कहा जा सकता है।
दैनिक हिन्द गजट के व्यवस्थापक द्वारा आज जिला निर्वाचन अधिकारी को एक पत्र लिखकर संपूर्ण घटनाक्रम से उन्हें अवगत करवाया है। साथ ही साथ उन्होंनें जिला निर्वाचन अधिकारी से आग्रह किया है कि नियमानुसार जवाब के लिए मिलने वाले 48 घंटों के लिए जिले की समस्त विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचन अधिकारियों को पाबंद किया जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया है अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया जाए कि वे समाचार पत्र के संपादकों या प्रतिनिधियों से इस तरह का बर्ताव कतई न करें मानों मीडिया से जुड़े लोग सरकारी मुलाजिम हों।
व्यवस्थापक द्वारा अपने पत्र में जिला निर्वाचन अधिकारी से यह भी आग्रह किया है कि आरओ केवलारी से इस बात का स्पष्टीकरण भी मांगा जाए कि आखिर उन्होंने किस आधार पर एक जिम्मेदार समाचार पत्र के जिम्मेदार संपादक को रात लगभग सवा सात बजे यह आदेशित किया कि वे अगले दिन ग्यारह बजे (महज सोलह घंटे बाद) उनके कार्यालय में उपस्थित होकर बयान दर्ज करवाएं। जबकि संपादक ने 05 नवंबर को होने वाली पूजा का हवाला भी दिया था।
इसके साथ ही साथ भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक को भी इसकी एक प्रति भेजकर मार्गदर्शन मांगा है कि क्या समाचार पत्र के साथ समय समय पर निशुल्क प्रसारित और वितरित की जाने वाली सामग्री में क्या प्रथक से प्रकाशक, संपादक या मुद्रक का नाम प्रकाशित करना अनिवार्य है? क्या इसमें प्रसार संख्या का उल्लेख किया जाना आवश्यक है?
इसके अलावा भारतीय प्रेस परिषद् के अध्यक्ष को भेजी गई प्रति में व्यवस्थापक द्वारा उनसे मार्गदर्शन भी मांगा है जिसमें आग्रह किया गया है कि बिना पर्याप्त समय दिए फोन पर ही आदेशात्मक तरीके से बातचीत कर बयान दर्ज करवाने के लिए बुलवाने का दवाब डालना क्या न्यायोचित है? क्या यह प्रेस की स्वतंत्रता के हनन की श्रेणी में नहीं आता है? अगर आता है तो इस पर उचित कार्यवाही का आग्रह किया गया है।
इसकी प्रति भारत निर्वाचन आयोग तथा राज्य निर्वाचन आयोग को भी भेजकर अनुरोध किया गया है कि इस पूरे मामले की जांच करवाई जाए। आचार संहिता के उल्लंघन के नाम पर समाचार पत्र के संपादक को मौखिक आदेश देकर वह भी अखबार के अवकाश वाली रात्रि में, देकर नियमानुसार 48 घंटे का समय दिए और लिखित नोटिए दिए बिना ही, उपस्थिति के लिए बाध्य करना क्या न्यायोचित है?
अंत में जिला दण्डाधिकारी से अनुरोध कर मार्गदर्शन चाहा गया है कि क्या प्रिंटिंग एक्ट सिर्फ चुनाव की आचार संहिता के दरम्यान ही प्रभावी होता है? अगर यह साल भर प्रभावी होता है तो सिवनी से प्रकाशित होने वाले उन समाचार पत्रों पर अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई है जो भारत के समाचार पत्रों की शीर्षक (अस्थाई और स्थाई) में शामिल नहीं हैं। इसके साथ ही साथ क्या संपूर्ण सिवनी जिले में दीपोत्सव के पर्व पर अन्य समाचार पत्रों के द्वारा बांटे गए माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, भगवान गणेश के पोस्टर्स जिनमें प्रकाशक, मुद्रक का नाम और प्रसार संख्या नहीं है, पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है?

शक्ति सिंह को जारी हुआ फरमान आठ बजे तक दो हाजिरी!
वहीं, बताया जाता है कि कांग्रेस के महसचिव कुंवर शक्ति सिंह को आरओ केवलारी ने 04 नवंबर को ही एक नोटिस जारी कर उसी रात आठ बजे तक आरओ केवलारी के केवलारी स्थित कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब देने को कहा गया। बताया जाता है कि इस नोटिस से शक्ति सिंह असमंजस में थे कि आखिर हुआ क्या है जो आनन फानन 48 घंटे के बजाए तत्काल ही उपस्थ्ति होकर जवाब चाहा गया है।

दिया शक्ति सिंह ने अपना जवाब
बताया जाता है कि एसडीएम केवलारी के कार्यालय में रात में निर्धारित अवधि में कुंवर शक्ति सिंह ने नियमों का अनुपालन करते हुए पांच कंडिकाओं में अपना जवाब प्रस्तुत किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार शक्ति सिंह द्वारा दिए गए लिखित जवाब में कंडिका नंबर एक में कहा गया है कि इस तरह का कोई काम उनके द्वारा नहीं किया गया है।
अपने लिखित जवाब की दूसरी कंडिका में उन्होंने कहा है कि संभवतः उनके किसी मित्र या समर्थक द्वारा इस आशयक काम किया गया हो, इस संबंध में उन्होंने कहा कि वे अपने मित्र या शुभचिंतकों से पूछकर 24 घंटे के अंदर आरओ केवलारी को अवश्य ही सूचित कर देंगे।
कंडिका तीन में इस बात का उल्लेख किया गया है कि वे जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री हैं, और उन्होंने किस हैसियत से या आधार पर उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी निरूपित किया गया है। उन्होंने कहा है कि उनके द्वारा वर्तमान में न तो आरओ केवलारी और न ही आरओ सिवनी के कार्यालय में नामांकन प्रस्तुत नहीं किया है, अतः वे वर्तमान में जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री हैं।
कंडिका चार में उन्होंने कहा है कि इस संबंध में वे संबंधित समाचार पत्र से जानकारी चौबीस घंटों के अंदर आरओ केवलारी को अवगत कराएंगे।
बताया जाता है कि अंत में कुंवर शक्ति सिंह ने कहा है कि अगर वे विधानसभा चुनाव मंें उम्मीदवारी करते हैं और उनके किसी समर्थक या मित्र द्वारा विज्ञापन दिया गया है तो उक्त विज्ञापन की राशि उनके व्यय में शामिल कर ली जाए। उन्होंने आगे कहा कि उम्मीदवारी के बाद (अगर वे करते हैं तो) उनके द्वारा इस विज्ञापन के व्यय को उसमें शामिल कर संबंधित आरओ को इससे अवगत करा दिया जाएगा।

मिला हिन्द गजट को नोटिस
इस संबंध में आज अपरान्ह लगभग दो बजे हिन्द गजट को अनुविभागीय अधिकारी/रिटर्निंग ऑफिसर, विधानसभा क्षेत्र 116, केवलारी के हस्ताक्षरों से जारी नोटिस लगभग ढाई बजे तामील किया गया। इस नोटिस में उल्लेख किया गया है कि 03 नवंबर के अंक में विधानसभा क्षेत्र 116 के निर्दलीय प्रत्याशी शक्ति सिंह के फोटो युक्त दीपावली शुभकामना संदेश आपके द्वारा प्रसारित कर वितरित किया गया है। उक्त संबंध में शक्ति सिंह ने आरओ केवलारी के समक्ष उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत किया गया है कि उनके द्वारा किसी भी प्रकार का शुभकामना संदेश प्रसारित नहीं करवाया गया है।
नोटिस में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 127 क (1) में प्रावधान है कि निर्वाचन से संबंधित किसी भी पैम्पलेट, पोस्टर आदि के ऊपर मुद्रक और प्रकाशक का नाम व पता एवं मुद्रित प्रतियों की संख्या छपी होनी चाहिए। आपके द्वारा प्रसारित शुभकामना संदेश में मुद्रक व प्रकाशक का नाम व पता, मुद्रित संख्या अंकित नहीं की गई है, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 127 क (1) का उल्लंघन है।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि आपके द्वारा जिला जनसम्पर्क अधिकारी सिवनी के माध्यम से एम.सी.एम.सी. सिवनी को 4 नवंबर को लिखे पत्र में लेख किया गया है कि कांग्रेस के जिला महामंत्री शक्तिसिंह द्वारा विज्ञापन आदेश दिया गया था, जिसका बिल भी आपके द्वारा भेजा गया।
नोटिस में कहा गया है कि निर्वाचन आचार संहिता के दौरान राष्ट्रीय राजनैतिक दल के पदाधिकारी द्वारा जिन्होंने मेरे समक्ष निर्दलीय प्रत्याशी होने का दावा किया है, अपने फोटोयुक्त विज्ञापन छपवाना आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है। छपवाये गये विज्ञापन में प्रकाशक एवं मुद्रक का नाम, प्रकाशित विज्ञापन की संख्या का मुद्रण किया जाना आवश्यक था, जो नहीं किया गया है। उक्त पोस्टर में ‘‘हिन्द गजट‘‘ के माध्यम निःशुल्क प्रसारित लेख किया गया है।
अतः क्यों न आपके विरूद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 127 क (1) तथा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171 (छ) के तहत कार्यवाही की जावे। आप दिनांक 06/11/2013 को दोपहर 12.00 बजे (जबकि नोटिस 5 नवंबर को अपरान्ह दो बजे तामील किया गया है इस हिसाब से 48 घंटों का समय 7 नवंबर 2013 को अपरान्ह दो बजे के लगभग होता है) न्यायालय कलेक्टर कक्ष सिवनी में मेरे समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें कि आपके द्वारा किस विज्ञापनदाता द्वारा कब और कितनी प्रतियों में पोस्टर प्रकाशित कराने हेतु विज्ञापन दिया। विज्ञापन आदेश की सत्यप्रतिलिपि प्रस्तुत करें, साथ ही यह भी बतायें कि आपके द्वारा प्रमाणित विज्ञापन में प्रकाशक व मुद्रक का नाम तथा मुद्रित प्रतियों की संख्या क्यों नहीं मुद्रित की गईं। आपकी अनुपस्थिति की दशा में एकपक्षीय कार्यवाही कर दी जावेगी।

शक्ति सिंह ने पुनः दिया जवाब
बताया जाता है कि आज देर रात एसडीएम केवलारी के कार्यालय में अपना वायदा निभाते हुए शक्ति सिंह द्वारा संबंधित समाचार पत्र और अपने मित्र समर्थकों से पूछकर यह जानकारी दे दी गई है कि उनके किसी समर्थक ने इस आशय के विज्ञापन का प्रकाशन कराया गया है। साथ ही साथ शक्ति सिंह ने इस बावत अपनी लिखित सहमति भी आरओ केवलारी को दे दी है।

गौरतलब है कि गत दिवस शक्ति सिंह द्वारा इस आशय के विज्ञापन के संबंध में अनिभिज्ञता व्यक्त करते हुए कहा गया था कि वे 24 घंटे के अंदर इस मामले में अपने समर्थकों और मित्रों सहित समाचार पत्र से पूछकर जवाब दे देगें।

बुधवार, 31 जुलाई 2013

सिवनी में मिले खतरनाक डेंगू के चार मरीज!

सिवनी में मिले खतरनाक डेंगू के चार मरीज!

विवेकानन्द वार्ड में 552 घरों के 1764 कंटेनर्स में 255 में मिले खतरनाक लार्वा: रियाया की जान से कर रही नगर पालिका जमकर खिलवाड़: विपक्ष में बैठी कांग्रेस देख रही चुपचाप तमाशा

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। जिला मुख्यालय सिवनी में घोषित तौर पर डेंगू के चार मरीजों के मिलने से हड़कंप मच गया है। साफ सफाई के अभाव में शहर भर में मच्छरों के लिए उपजाऊ माहौल पैदा हो रहा है, पर नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के नेतृत्व में पार्षद और पालिका प्रशासन कमीशन के गंदे धंधेमें ही उलझा हुआ है। डेंगू रेपिड टेस्ट में 13 संभावित डेंगू के मरीजों की जांच में चार नमूने पॉजिटिव पाए गए हैं। खतरनाक डेंगू के लिहाज से अब सिवनी जिला भी हाई अलर्टपर आ गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.वाय.एस.ठाकुर के हस्ताक्षरों से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिला चिकित्सालय में डेंगू रेपिड किट से 13 संभावित डेंगू मरीजों की जांच की गई है, जिससे किट में चार मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। इन चारों का रक्त नमूना लेकर क्षेत्रीय आर्युविज्ञान शोध केंद्र (आरएमआरसी) जबलपुर भेजा गया था।
डॉ.ठाकुर ने बताया कि आरएमआरसी द्वारा विवेकानन्द वार्ड के संभावित डेंगू के नमूनों की 26 जुलाई को ही पुष्टि कर दी गई थी। शेष दो में अभी आरएमआरसी की राय आना शेष है।
उन्होंने बताया कि इसके उपरांत जबलपुर के कीट विज्ञानी डॉ.मनमोहन माहुलिया एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.वाय.एस.ठाकुर के द्वारा स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का दल बनाकर उन्हें बाकायदा प्रशिक्षित किया जाकर विवेकानन्द वार्ड में रवाना किया गया।
सीएमओ डॉ.ठाकुर का दावा है कि उनके द्वारा विवेकानन्द वार्ड के लिए 32 कर्मचारियों का दल बनाया गया है, जो घर घर जाकर लार्वा का सर्वे कर रहा है। जिन घरों में बुखार के पीड़ित मिल रहे हैं उन्हें मौके पर ही रक्त पट्टिका बनाकर त्वरित उपचार दिया जा रहा है।
इसके साथ ही साथ मकानों में जहां पानी जमा हो सकता है या हो रहा है इस तरह के कंटेनर्स को खाली करवाया जा रहा है। इन कंटेनर्स में टेमोफॉस नामक दवा डाली जा रही है ताकि मच्छरों का लार्वा नष्ट हो सके। डेंगू प्रभावित और संभावित विवेकानन्द वार्ड में फागिंग मशीन से धुंआ भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मच्छरों से सावधान रहने और सावधानियां बरतने के लिए विभाग द्वारा मुनादी पिटवाकर पर्चे भी बांटे जा रहे हैं।
डॉ.ठाकुर के अनुसार मंगलवार को इस विशेष दल ने डेंगू प्रभावित या संभावित वार्ड के 552 घरों का निरीक्षण किया। दल ने आज 1764 कंटेनर्स को देखा जिसमें से 255 में लार्वा पाए गए। इन कंटेनर्स को खाली कराया गया और दवा डाली गई। आज बनाई गई सारी रक्त पट्टिकाएं नकारात्मक ही पाई गईं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार अभी तक सिवनी जिले में डेंगू से मृत्यु के समाचार नहीं मिले हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों में रखे कंटेनर्स जिसमें पानी भरा रहता हो, उसे सात दिवस के अंदर एक बार अवश्य ही खाली कर लिया करें।
प्रदेश में मण्डला जिले के बाद सिवनी में डेंगू की खतरनाक स्थिति से हड़कंप मचना स्वाभाविक ही है। अब तक सिवनी के लोग समाचार माध्यमों के जरिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में डेंगू की बद से बदतर स्थिति और इससे होने वाली पीड़ा एवं मौत के आंकड़े देखा करते थे, अब इस जानलेवा और दर्दनाक डेंगू ने सिवनी में भी अपनी जड़ें गहरी कर ली हैं।
दरअसल, नगर पालिका परिषद के निकम्मेपन के चलते शहर भर में मच्छरों के प्रजनन के लिए उपजाऊ माहौल तैयार हो गया है। नगर पालिका परिषद में कमीशन के गंदे धंधेके चलते ना तो अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी, ना ही उपाध्यक्ष राजिक अकील और ना ही किसी पार्षद को नागरिकों के स्वास्थ्य की परवाह ही रह गई है।

नगर पालिका परिषद के पास फागिंग मशीन है इस फागिंग मशीन का तेल और दवा दोनों ही का बिल पालिका के बजट सत्र में पारित होता है, इसमें किसी भी पार्षद द्वारा अब तक अपनी आपत्ति दर्ज नहीं कराया जाना आश्चर्यजनक है कि जब मशीन किसी वार्ड में चलती ही नहीं दिखी तो फिर इसके देयक का भुगतान कैसा? कुल मिलाकर सभी, नागरिकों की चिंता छोड़ पैसा बनाने में जुट चुके हैं।

रविवार, 28 जुलाई 2013

आवारा मवेशी, कुत्ते, सुअर मस्त, नगर पालिका पस्त

आवारा मवेशी, कुत्ते, सुअर मस्त, नगर पालिका पस्त

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। जिला मुख्यालय में जिला प्रशासन की नाक के नीचे नगर पालिका परिषद ने आवारा पशुओं कुत्तों, सुअरों आदि को पकड़ने की कार्यवाही भले ही दिखावे के लिए की हो पर की तो सही।उक्ताशय की चर्चाएं अब शहर भर में होना आरंभ हो गई हैं। दैनिक हिन्द गजट द्वारा पालिका के लिए मायने नहीं रखते कलेक्टर के निर्देशशीर्षक से समाचार के प्रकाशन के उपरांत नगर पालिका प्रशासन हरकत में आया और फिल्टर प्लांट में जग खा रही पशुओं को पकड़ने वाली विशेष ट्राली को सड़कों पर उतारा गया।
शुक्रवार और शनिवार को इस विशेष तरह की ट्राली और पालिका के कारिंदे, लोगों के लिए कोतुहल का विषय बने हुए थे। बुधवारी बाजार से लेकर कटंगी नाका क्षेत्र, मठ मंदिर, छिंदवाड़ा चौक आदि क्षेत्र में इस ट्राली ने सीमित मात्रा में कुत्तों की धर पकड़ की। गौरतलब है कि बिना किसी पूर्व सूचना के की गई इस कार्यवाही की तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
लोगों का कहना है कि नगर पालिका परिषद को बाकायदा इसके लिए समय समय पर मुनादी पीटी जाना चाहिए कि नागरिक पालतू जानवरों को बांधकर रखें, उन्हें खुला ना छोड़ें। शहर में कांजी हाउस कहां है, यह बात लोग भूल ही चुके हैं। बताया जाता है कि नगर पालिका परिषद द्वारा आवारा कुत्तों को नागपुर रोड पर कुछ दूर ले जाकर छोड़ दिया गया, जिससे मार्ग में पड़ने वाले गांवों में ये आवारा कुत्ते कोहराम मचा रहे हैं।
शुक्रवार को खबर के प्रकाशन के बाद संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव के कोप का भाजन बनने से बचने के लिए संभवतः नगर पालिका परिषद द्वारा दिखावे के लिए प्रतीकात्मक तौर पर यह कार्यवाही की गई है। लोगों का आरोप है कि आज भी शहर के हर गली मोहल्ले में कुत्तों की टोली आतंक बरपा रही है। लोग विशेषकर छोटे बच्चे इन आवारा कुत्तों का शिकार बन रहे हैं।
वहीं, दूसरी ओर शहर भर में घूमते आवारा मवेशी भी लोगों का जीना मुहाल किए हुए हैं। आवारा गाय बैल वैसे हैं तो पालतू किन्तु पालकों द्वारा नगर पालिका परिषद के घृतराष्ट्र बनने का फायदा उठाकर इन्हें घरों में बांधकर नहीं रखा जाता है, परिणामस्वरूप ये आवारा मवेशी शहर भर में घूम घूमकर ना केवल लोगों के घरों में घुसकर उत्पात मचा रहे हैं, वरन् सड़कों के बीच बैठकर आवागमन प्रभावित भी कर रहे हैं।

नमाज़ियों की परेशनी का सबब!
आवारा मवेशी और कुत्तों का आतंक इस कदर है कि पाक रमज़ान के महीने में अलह सुब्बह सेहरी के उपरांत जब मुस्लिम धर्मावलंबी नमाज अता करने मस्जिदों की ओर कूच करते हैं तो आवारा कुत्ते इन्हें परेशान करने से नहीं चूकते हैं। बताया जाता है कि गत दिवस बस स्टैंड में फिरोज जहाज नामक युवक को आवारा कुत्तों ने काट लिया।
छोटी मस्जिद चौक, ईदगाह, ज्यारत नाका, एकता कालोनी, बड़ी मस्जिद, कटंगी रोड़ की मस्जिद, सब्जी मण्डी के सामने वाली मस्जिद, भैरोगंज मस्जिद आदि में धर्मावलंबी नमाज अता करने जाते हैं। रास्ते में आवारा मवेशी और आवारा कुत्ते मुंह अंधेरे इबादत करने जाने वाले इन धर्मावलंबियों को परेशान करने से नहीं चूकते हैं।

विद्यार्थियों में भय
मुंह अंधेरे सुबह साढ़े छः बजे से शहर की शालाओं के विद्यार्थियों को लाने ले जाने वाले आटो घरों घर से बच्चों को एकत्र कर शाला की ओर प्रस्थान करते हैं। मोहल्लों में अपने आटो या बस का इंतजार करने वाले बच्चों को इन आवारा कुत्तों से सदा ही खतरा बना रहता है। ये आवारा कुत्ते छोटे बच्चों की ओर भौंकते हुए दौड़ते हैं। डर के कारण भागते बच्चे कई बार गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। अनेक बच्चों को इन आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने की खबरें भी मिली हैं।

स्वाईन फ्लू को बढ़ावा दे रही पालिका
यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि स्वाईन फ्लू का वायरस सुअरों के माध्यम से ही तेजी से फैलता है। शहर में मलेरिया के उपरांत डेंगू के मरीज मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, दूसरी ओर शहर में आवारा घूमते सुअरों से स्वाईन फ्लू के खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता है। जाने अनजाने में राजेश त्रिवेदी के नेतृत्व में नगर पालिका प्रशासन लोगों को बहुत बड़ी बीमारी की मुश्किल में ढकेलता नजर आ रहा है।

25 - 30 का होता है झुण्ड!
बारिश को कुत्तों के प्रजनन का मौसम माना जाता है। इस मौसम में कुत्ते वंशवृद्धि के लिए अपना जीवनसाथी चुनते हैं। अमूमन कुत्ते एक झुण्ड बनाकर ही प्रजनन के लिए साथी तलाशते हैं। इनमें ताकतवर नर श्वान ही सहवास कर पाता है। ताकत की जंग में कुत्तों में आपस में लड़ाई आम बात है। इस लड़ाई में अनेक कुत्ते घायल भी हो जाते हैं। इन कुत्तों के बीच में फंसकर पालतू कुत्ते भी अनेक बार घायल हुए हैं। अक्सर इस तरह के कुत्ते 10 से तीस कुत्तों के झुण्ड में घूमतेे दिख जाएं तो आम बात ही है। शहर की कथित वैध और अवैध कालोनियों में इन कुत्तों का आतंक देखते ही बनता है। इस तरह झुण्ड में घूमने वाले कुत्तों द्वारा अपनी भूख मिटाने के लिए पालतू मुर्गे मुर्गियां, बकरी, सुअर, आदि को भी अपना शिकार बनाया जाता है। ये कुत्ते घरों के खुले दरवाजे देखकर, घरों में घुसकर आतंक बरपाते नजर आते हैं।

जरूरी है कुत्तों की नसबंदी
आवारा कुत्ते पकड़ने का काम मूलतः नगर पालिका परिषद का ही है, किन्तु कमीशन के चक्कर में उलझे नगर पालिका के कारिंदों का ध्यान इस ओर नहीं जाता है। सारे शहर में एक ही चर्चा तेज है कि नगर पालिका परिषद में चल रहा कमीशनका गंदा धंधालोगों का अमन चैन छीन रहा है। सारा शहर नरक बन चुका है पर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी द्वारा कभी पार्षदों के साथ ना देने का रोना रोया जाता है तो कभी संगठन द्वारा कथित तौर पर उंगलीकरने की बात कही जाती है। नगर पालिका परिषद ने अब तक कितने श्वान पकड़े और कितनों की नसंबदी कराकर उन्हें कहां छोड़ा इस बारे मेें कोई जानकारी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं कराई जाती है।

नहीं पिटवाई जाती मुनादी
नगर पालिका परिषद में कमीशन के गंदे धंधे के चलते पालतू पशुओं को घरों में बांधकर रखने की ना तो मुनादी पीटी जाती है और ना ही समाचार पत्रों में इस तरह की सूचनाएं ही प्रकाशित करवाई जाती हैं। हालात देखकर लगने लगा है मानो नगर पालिका परिषद द्वारा आम जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के स्थान पर निर्माण कार्य, खरीदी आदि को ही सर्वोच्च प्राथमिकता बना लिया गया है। कहा जाता है कि इस काम में एक बार फिर कमीशन का गंदा धंधा ही कारिंदों को फायदा दिलाता है।

कांजी हाउस पर कितना खर्च!

शहर के अंदर नगर पालिका परिषद के स्वामित्व में एक कांजी हाउस भी है। यह कहां है इस बारे में आज की युवा पीढ़ी को शायद ही पता हो। इस कांजी हाउस पर नगर पालिका प्रशासन द्वारा हर साल कितना खर्च किया जाता है इस बारे में भी शायद ही किसी को कोई जानकारी हो। इस कांजी हाउस में नगर पालिका की कमान राजेश त्रिवेदी के संभालने के उपरांत कितने मवेशी पकड़कर रखे गए हैं इस बारे में भी नगर पालिका के पास शायद ही कोई रिकार्ड हो।

गुरुवार, 25 जुलाई 2013

क्या नाव किराए पर लेगी नगर पालिका!

क्या नाव किराए पर लेगी नगर पालिका!

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। शहर में यह चर्चा आम हो गई है कि अपने कर्तव्यों के निर्वहन में पूरी तरह असफल नगर पालिका परिषद को अब नाव किराए पर ले लेनी चाहिए, क्योंकि जरा सी बारिश होने पर सारा शहर तालाब में तब्दील हो जाता है। सड़कों पर भरे पानी के कारण सड़कों के गड्ढ़े दिखाई नहीं पड़ते हैं और लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि शहर में लगातार हो रही बारिश के कारण शहर की अधिकांश सड़कें जलमग्न हो जाया करती हैं। कहा जा रहा है कि दूरदृष्टि के अभाव में पहले आओ पहले पाओ (कमीशन) के चलते जहां देखो वहां मनमर्जी की सीमेंट की कमजोर सड़कें बन चुकी हैं। इन सड़कों के आजू बाजू नालियां ही नहीं हैं। जहां नालियों के टेंडर हो चुके हैं वहां महीनों से नालियां नहीं बन पाई हैं।
वार्डवासियों के अनुसार जब नालियों का टेंडर लेने वाले ठेेकेदार से पूछा जाता है तो उनके द्वारा स्पष्ट कहा जाता है कि टेंडर लेने से क्या होता है। अध्यक्ष जी ने मना किया है कि फलां वार्ड का पार्षद, फलां पत्रकार, फलां नेता बदमाश है उसके वार्ड में, उसके घर के पास काम अभी नहीं करना है।
इसी के चलते नालियां ना होने, होने तो सफाई ना हो पाने के कारण गंदा बदबूदार पानी सड़कों पर से बहकर बीमारी को न्योता दे रहा है। दुर्गाचौक में मंदिर के सामने से नेहरू रोड़ को जोड़ने वाले मार्ग पर तो जरा सी बारिश में पानी सड़क के उपर लबालब हो जाता है जिसमें नाली की गंदगी उतराती दिख जाती है।
सड़कों पर भरे पानी के कारण दुपहिया वाहन सवारों को यह अंदाज लगाना मुश्किल होता है कि सड़क पर कहां, कितना बड़ा, कितना गहरा गड्ढ़ा है, और फिर क्या छपाकवाहन गड्ढ़े में जाकर समा जाता है एवं सवार गंदे पानी में ढेर। स्कूली छात्र छात्राओं को कमोबेश रोजना ही इस तरह की समस्याओं से दो चार होना पड़ रहा है।
सावन आने के पहले अषाढ़ माह में ही इंद्रदेव पहले तो मेहरबान दिखे पर फिर लगा कि प्रकृति से छेड़छाड़ से वे कुपित हो गए हैं और धरती वासियों को अपने कोप का भाजन बना रहे हैं। अषाढ़ में हुई अनवरत बारिश से शहर जब तब तालाब में तब्दील हो चुका है।

शहर की इस बदहाल स्थिति को देखकर अब लोग मन ही मन यह कहने पर मजबूर हो रहे हैं कि नगर पालिका परिषद को चाहिए कि लोकल ट्रांसपोटेशन (स्थानीय परिवहन) के लिए पालिका को अब बारिश के चार माह के लिए नाव किराए पर ले लेना चहिए, ताकि लोग नाव से एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले आ-जा सकें, इससे लोगों के वाहन के तेल की बचत के साथ ही साथ दुर्घटनाएं भी कम हो जाएंगी।

सिवनी जिले में खुल सकता है डॉस बार!

सिवनी जिले में खुल सकता है डॉस बार!

(आशीष कौशल)

नागपुर (साई)। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के प्रकाश में अब डॉस बार एक बार फिर आबाद हो सकते हैं। वहीं महाराष्ट्र के गृह मंत्री द्वारा नया अध्यादेश लाकर डॉस बार नहीं खुलने देने की बात कही गई है। चर्चा है कि नेशनल हाईवे पर सिवनी जिले में डॉस बार खोलने की तैयारी की जा रही है।
नागपुर पुलिस के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी जिले के आधा दर्जन लोग इस बात के लिए खासे फिकर मंद हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के प्रकाश में सिवनी जिले में डॉस बार संचालित किए जाएं। वैसे भी डॉस बार कमाई का खासा जरिया माने जाते हैं।
वहीं, सिवनी में चल रही चर्चाओं के अनुसार डॉस बार के लिए लोगों को पेंच नेशनल पार्क में टुरिया के आसपास, जिला मुख्यालय की सीमा के क्षेत्र सहित खवासा से लखनादौन तक सड़क किनारे इन डॉस बार के लिए जगह मुफीद लग रही है। इसके लिए लोगों द्वारा बने बनाए होटल्स को चिन्हित किया जा रहा है।
वहीं, मुंबई से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से अतुल खरे ने मुंबई पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि सिवनी के व्हाईट कालर नेता नुमा ठेकेदारों द्वारा मुंबई में बार बालाओं से संपर्क कर उन्हें सिवनी जाकर मुजरा करने का सौदा भी किया जा रहा है। इस सौदे में वर्तमान में बात सतही तौर पर ही भाव ताव तय करने तक ही सीमित है।
चर्चा तो यहां तक है कि सुरा और सुंदरीके शौकीन धनपतियों द्वारा इस काम के लिए आगे आए लोगों की हौसला अफजाई भी की जा रही है। सिवनी जिले की सीमा में खवासा से लखनादौन तक हाल ही के सालों में निर्मित किए गए होटलों (ढाबे नहीं) के संचालकों द्वारा अपने होटल किराए पर देकर पर्दे के पीछे रहकर डॉस बार खुलवाने का काम किए जाने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

वहीं, सामाजिक तौर पर डॉस बार खुलने की खबरों से लोगों की पेशानी पर चिंता की बूंदे स्पष्ट दिखाई देने लगी हैं। एक सज्जन ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर कहा कि हद हो गई, अभी तक तो कमर में बंदूक टांगकर सिवनी को बिहार बनाने की जुगत में थे लोग पर अब तो डॉस बार खुलवाकर ये लोग सिवनी को गर्म गोश्तकी मण्डी बनाने पर तुल गए हैं। अगर ऐसा हुआ तो सिवनी में बाहर से जरायमपेशा लोग बहुतायत में आने लगेंगे और सिवनी का बचा खुचा अमन चैन भी छिन जाएगा।