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बुधवार, 24 अप्रैल 2013

भूतप्रेत कल्पना बनकर रह गई ब्राडगेज!


भूतप्रेत कल्पना बनकर रह गई ब्राडगेज!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सिवनी में ब्राडगेज एक दिवा स्वप्न नहीं भूत प्रेत की काल्पनिक कथा बनकर रह गई है। तिस पर से करेला और नीमचढ़ा की कहावत को चरितार्थ करते हुए नैनपुर से बरास्ता सिवनी होकर छिंदवाड़ा जाने वाली सिवनी की छुकछुक गाड़ी इन दिनों बढ़ी यात्रियों की संख्या के दबाव में चरमराती दिख रही है।
छोटी लाईन पर यात्रियों की संख्या के दबाव से जहां रेल का परिसंचालन गड़बड़ा गया है, वहीं यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बताया जाता है कि उपरी राजनैतिक दबाव के चलते सिवनी में नेरोगेज के अमान परिवर्तन का मार्ग रूक गया है।
ज्ञातव्य है कि वर्तमान में ग्रीष्मकालीन अवकाश का मौका है। शादी ब्याह मेले ठेले के चलते छोटी रेल में यात्रियों की तादाद में जमकर इजाफा दर्ज किया जा रहा है। आलम यह है कि यात्री इनके डब्बों में मवेशियों के मानिंद ही भरे हुए हैं। इसके साथ ही साथ इस रेल में एमएसटी यानी रोजाना आने जाने वाले यात्रियों का दबाव अलग से है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेल के इस नेरोगेज पर चलने वाली विभिन्न रेल ट्रेन्स को सीएन नाम दिया गया है। नैनपुर से ंिछंदवाड़ा जाने वाले मार्ग पर सिवनी एक प्रमुख और मध्य में पड़ने वाला स्टेशन है, जहां से प्रतिदिन छिंदवाड़ा और नैनपुर की ओर जाने वाले यात्रियों की खासी तादाद देखी जाती है।
इस रेल खण्ड का उपयोग ग्रामीण इसलिए भी करना पसंद करते हैं क्योंकि इसमें यात्रा करना अपेक्षाकृत सस्ता है। नैनपुर से आगे जबलपुर और छिंदवाड़ा के आगे भोपाल जाने के लिए लोग इन्ही रेल गाड़ियों का प्रयोग करते हैं। छिंदवाड़ा से पेंचव्हेली और नई दिल्ली जाने वाली पातालकोट एक्सप्रेस का लुत्फ भी यात्री उठाते हैं।
छोटी लाईन में यात्रियों की रेलमपेल इस कदर होती है कि यात्री छतों पर भी सवारी करने से गुरेज नहीं करते हैं। एसा नहीं है कि रेल प्रशासन और सुरक्षा के लिए तैनात जीआरपी इससे अनजान है, किन्तु आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि रेल प्रशासन इस मामले में नागपुर के जोनल कार्यालय के एक तुगलकी फरमान का हवाला देकर अपने हाथ खड़े कर लेता है।
रेल्वे विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जोनल मुख्यालय नागपुर के आदेश के तहत रेल के डब्बों की संख्या कम कर दी गई है, जो पहले से ही अपर्याप्त मानी जाती थी, लिहाजा यात्री जो पहले से ही ठसाठस भरकर यात्रा करने पर मजबूर थे, वे अब घास भूसे के मानिंद यात्रा पर मजबूर हैं।

शुक्रवार, 22 मार्च 2013

सिवनी : यात्री सुविधाओं से लेना देना नहीं है रेल्वे को


0 सिवनी से नहीं चल पाएगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 20

यात्री सुविधाओं से लेना देना नहीं है रेल्वे को

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। सिवनी में चलने वाली नेरोगेज रेलगाड़ी जिसे बाहर से आने वाले टॉय ट्रेन भी कहते हैं में सुविधाओं के प्रति ना तो रेल्वे प्रशासन संजीदा है और ना ही लोकसभा में सिवनी जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख एवं कांग्रेस के बसोरी सिंह मसराम! मजे की बात तो यह है कि रेल्वे की सलाहकार समिति के सदस्य भी इस दिशा में कोई प्रयास करते नजर नहीं आते हैं।
नेरोगेज रेल लाईन में सिवनी जिले में डेढ़ दर्जन से ज्यादा स्टापेज हैं, जिसमें जिला मुख्यालय सिवनी का रेल्वे स्टेशन प्रमुख है। सिवनी के रेल्वे स्टेशन पर ना तो ठण्डे पानी की कोई व्यवस्था है और ना ही हवा के लिए पर्याप्त पंखे। रेल्वे पुलिस के अभाव में देर रात असमाजिक तत्वों का रेल्वे स्टेशन पर डेरा ही बना रहता है। रेल्वे स्टेशन के सामने दो तालाब हैं जो गंदगी से बजबजा रहे हैं।
इतना ही नहीं रेल्वे स्टेशन पर महज एक ही प्लेटफार्म है। दूसरी ओर ना तो कोई बांउंड्रीवाल है और ना ही सुरक्षा के कोई इंतजाम, जिससे असमाजिक तत्वों के साथ ही साथ मवेशी भी बेखटके रेल्वे स्टेशन में विचरण करते रहते हैं। सिवनी के रेल्वे स्टेशन को सुधारने की दिशा में जो प्रयास कर सकते हैं वे इस दिशा में मौन ही साधे हुए हैं।
रेल्वे चूंकि सीधे सीधे केंद्र सरकार के अधीन है, इसलिए सांसदों का इसमें हस्ताक्षेप इसकी दशा और दिशा सुधार सकता है। विडम्बना ही कही जाएगी कि पूर्व और वर्तमान के संसद सदस्यों को भारतीय रेल के सिवनी स्टेशन की दशा या दिशा से कोई लेना देना नहीं है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी रेल्वे स्टेशन के संबंध में वर्तमान और पूर्व सांसदों ने अब तक कोई भी बात सदन अथवा रेल मंत्री के ध्यान में नहीं लाई गई है।

गुरुवार, 21 मार्च 2013

समेट रहे हैं नेरोगेज का बोरिया बिस्तर


0 सिवनी से नहीं चल पाएगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 19

समेट रहे हैं नेरोगेज का बोरिया बिस्तर

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। लगभग सौ साल पुरानी नेरोगेज रेल लाईन ब्राडगेज में तब्दील होगी या नहीं यह बात तोभ्ज्ञाविष्य के गर्भ में ही है पर एक एक कर अब नेरोगेज में संसाधनों के अभाव में सामान समिटता दिख रहा है। नेरोगजे के लिए नए डब्बों का निर्माण सालों से बंद हो चुका है इसलिए अब छिंदवाड़ा से सिवनी होकर नैनपुर जाने वाली नेरोगेज रेल के डब्बे कम करना आरंभ कर दिया गया है।
नागपुर स्थित डीआरएम कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि नेरोगेज रेल के लिए तैयार होने वाले नवीन डब्बों का निर्माण कई साल पहले ही बंद कर दिया गया है। मौजूदा डब्बों की मरम्मत एवं रखरखाव का कामभ्ज्ञाी लगभग डेढ़ साल से बंद है, क्योंकि इनका रखरखाव नागपुर में किया जाता था, और अब छिंदवाड़ा से नागपुर रेल खण्ड का अमान परिवर्तन आरंभ हो चुका है इसलिए इस रेल खण्ड से नेरोगेज रेल अब नहीं गुजरती है।
अब अगर छोटी लाईन का इंजन और डब्बे ही नागपुर नहीं पहुंच रहे हैं तो उनका रखरखाव किस तरह किया जाएगा। सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि यह रेल प्रशासन की मजबूरी है कि वे चाहकरभ्ज्ञाी इस मामले में कुछ नहीं कर पा रहे हैं, मजबूरी में रेल प्रशासन को यात्रियों की बढ़तीभ्ज्ञाीड़ के बादभ्ज्ञाी अप्रिय कदम उठाना पड़ा है।
रेल प्रशासन ने अब सिवनी से होकर गुजरने वाली रेल में दस डब्बों की संख्या घटाकर आठ कर दी है। यह डिब्बों निर्णय डिब्बों की कमी को देखते हुए मजबूरी में लिया गया है। सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि आने वाले समय में डब्बों की संख्या घटकर छः हो जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
उधर, रेल्वे प्रशासन ने गर्मी को देखकर बड़े शहरों में इंतजामात पुख्ता किए हैं।भ्ज्ञाारतीय रेलवे ने होली के अवसर पर यात्रियों कीभ्ज्ञाीड़ को देखते हुए व्यापक इंतजाम किए हैं। इस अवसर पर विशेष रेलगाड़ियों के ३६० से ज्यादा फेरे होंगे। यात्रियों की अतिरिक्तभ्ज्ञाीड़ से निपटने के लिए विशेष रेलगाड़ियां १७ प्रचलित मार्गों पर चलाई जाएंगी। इनमें से ४ रेलगाड़ियां अनारक्षित होंगी, ३ पूरी तरह वातानुकूलित होंगी तथा ८ को सुपर फास्ट का दर्जा दिया गया है। होली के अवसर पर नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, बेंगलौर, जम्मू-तवी, जयपुर, गुवाहाटी, लखनऊ, पुणे, गोरखपुर, पटना, डिब्रूगढ़, बनारस, दरभंगा, बरौनी, बरेली, सिकंदराबाद जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों को जोड़ने वाली विशेष रेलगाड़ियां चलाई जाएंगी।

बुधवार, 20 मार्च 2013

सिवनी को डाल दिया है नेताओं ने हाशिए में


0 सिवनी से नहीं चल पाएगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 18

सिवनी को डाल दिया है नेताओं ने हाशिए में

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। कांग्रेस में सुश्री विमला वर्मा और भाजपा में पंडित महेश प्रसाद शुक्ल के सक्रिय राजनीति से हटते ही सिवनी जिले में राजनैतिक शून्यता आ गई, जिसे भरने का प्रयास किसी भी दल के किसी भी नेता ने नहीं किया है। इक्कीसवीं सदी के आते आते प्रमुख राजनैतिक दल कांग्रेस और भाजपा के नेताओं द्वारा एक दूसरे के छद्म विरोध से जनता को भरमाया जाने लगा। यही कारण है कि सिवनी जिला अब हाशिए में डाल दिया गया है।
सालों से सिवनीवासी नेरोगेज के अमान परिवर्तन के लिए चिंतित नजर आ रहे हैं। बार बार इसकी मांग की जाती रही है कि छिंदवाड़ा से सिवनी होकर नैनपुर जाने वाले खण्ड का अमान परिवर्तन कर उसे ब्राडगेज में तब्दील किया जाए ताकि सिवनी के निवासी बड़ी रेल लाईन का लुत्फ उठा सकें।
रेल्वे बोर्ड के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि भारतीय रेल मंत्रालय द्वारा 16 अगस्त 2012 को लोकसभा के पटल पर रखी जानकारी के अनुसार दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे ने इस बात को रेखांकित किया था कि इस रेल्वे में दो नई रेल लाईन दिल्ली राजहरा जगदलपुर 235 किमी और वडसा गदिरोली 49.5 किमी का काम चल रहा है।
इसके अलावा अमान परिवर्तन के काम में छिंदवाड़ा मण्डला फोर्ट 182.25 किमी, छिंदवाड़ा नागपुर 152.49 किमी, जबलपुर गोंदिया जिसमें बालाघाट कटंगी शामिल है 285 किलोमीटर का काम आरंभ है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण जानकारी इसके अंतिम कालम में वर्तमान स्थिति के तहत दी गई है।
सूत्रों ने बताया कि वर्तमान स्थिति में अमान परिवर्तन वाले हिस्से में छिंदवाड़ा नैनपुर फोर्ट के संबंध में कहा गया है कि द वर्क फार नैनपुर मण्डला फोर्ट एण्ड मण्डला फोर्ट नैनपुर सेक्शन हेज आलरेडी बीन टेकन अप। इससे साफ जाहिर है कि इस रेल खण्ड में काम को मण्डला वाले सिरे से आरंभ करवाया जा रहा है।
इन परिस्थितियों में कांग्रेस के नेताओं की अमान परिवर्तन में सिवनी जिले को केंद्रीय मंत्री से मिलने वाली मदद की विज्ञप्ति आधारहीन और भरमाने वाली ही प्रतीत होती है।
(क्रमशः जारी)

मंगलवार, 19 मार्च 2013

बालाघाट जबलपुर का काम रूका है फोरलेन के कारण


0 सिवनी से नहीं चल पाएगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 17

बालाघाट जबलपुर का काम रूका है फोरलेन के कारण

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। बालाघाट से नैनपुर रेल लाईन में नेरो गेज से ब्राडगेज अमान परिवर्तन का काम वन विभाग के क्लीयरसेंस का काम अभी भी रूका हुआ है। यह क्लीयरेंस कब मिलेगा इस बारे में कहा नहीं जा सकता है, किन्तु कहा जा रहा है कि अगर इसे क्लीयरेेस दे दिया गया तो फिर सिवनी जिले में वाईल्ड लाईफ कारीडोर के नाम पर फोरलेन में फसे फच्चर को हटाने के मार्ग अपने आप प्रशस्त हो जाएंगे।
रेल्वे बोर्ड के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि बालाघाट नैनपुर जबलपुर रेल खण्ड के अमान परिवर्तन का काम वास्तविक तौर पर गोंदिया से जबलपुर रेल खण्ड के अमान परिवर्तन का ही हिस्सा है। यह प्रथक से कोई नई परियोजना नहीं है। इसमें एक ब्रांच लाईन बालाघाट कटंगी भी जोड़ी गई है।
रेल्वे बोर्ड के सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि गोंदिया से बालाघाट मेल लाईन और बालाघाट से कटंगी ब्रांच लाईन का काम पूरा हो चुका है। इस मूल परियोजना मे अब तक 63 फीसदी काम पूरा हो चुका है। शेष काम में बालाघाट और सिवनी जिले की वन भूमि का अडंगा प्रमुख समस्या के रूप में सामने आ रहा है।
सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को आगे बताया कि गोंदिया से जबलपुर अमान परिवर्तन के काम की परियोजना को 1037.90 करोड़ की धनराशि से पूरा किया जाना प्रस्तावित था। इस परियोजना में बालाघाट और सिवनी जिले के वन विभाग की भूमि के हस्तांतरण होने के उपरांत वन भूमि का रेल्वे को मिलने की तिथि से तीन वर्ष के अंदर इस परियोजना को मूर्तरूप दिया जा सकेगा।
सूत्रों ने यह भी बताया कि उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा घंसौर में डाले जा रहे पावर प्लांट में कोयला आपूर्ति के लिए जबलपुर से नैनपुर तक के रेल खण्ड का अमान परिवर्तन का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
सूत्रों ने यह भी कहा कि अगर बालाघाट से नैनपुर तक के अमान परिवर्तन में वन विभाग की बाधाएं हटा दी गईं तो इसी आधार पर सिवनी से नागपुर जाने वाले नेशनल हाईवे के फोरलेन कारीडोर जिसे रोकने के लिए कांग्रेस और भाजपा के नेता पुरजोर कोशिश कर रहे हैं के बनने के मार्ग प्रशस्त हो जाएंगे, संभवतः यही कारण है कि इस रेल खण्ड को अभी उलझाए रखा गया है।
(क्रमशः जारी)

बुधवार, 13 मार्च 2013

छिंदवाड़ा जिले में फटाफट मिलता है फारेस्ट क्लीयरेंस!


0 सिवनी से नहीं चल पाएगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 16

छिंदवाड़ा जिले में फटाफट मिलता है फारेस्ट क्लीयरेंस!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले में ब्राडगेज अब युवा होती पीढ़ी के लिए सपना ही साबित हो रहा है। महाकौशल अंचल के पिछड़े सिवनी जिले में सशक्त नेतृत्व के अभाव में यहां विकास की किरणें प्रस्फुटित होती नहीं दिख रही हैं। वहीं पड़ोसी जिले छिंदवाड़ा और बालाघाट में लंबित परियोजनाओं को फटाफट क्लियरेंस मिलने से यहां विकास दु्रत गति से हो रहा है।
ज्ञातव्य है कि सिवनी जिले में लगभग सौ साल पुरानी बाबा आदम के जमाने की नेरोगेज रेल लाईन संचालित हो रही है। इस रेल लाईन के अमान परिवर्तन की बात लंबे समय से की जा रही है। बार बार मांग करने पर सिवनी जिले की झोली में आश्वासन के अतिरिक्त और कुछ भी नही आ पाता है। दो दो सांसदों वाले सिवनी जिले में ब्राडगेज का ना आना वाकई आश्चर्य और शोध का ही विषय माना जा रहा है।
रेल्वे के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि छिंदवाड़ा से सौंसर होकर नागुपर के अमान परिवर्तन को हरी झंडी मिल चुकी है और इसमें से छिंदवाड़ा से सौंसर तक का काम भी अगले साल तक पूर्ण होने का लक्ष्य रखा गया है। यहां उल्लेखनीय तथ्य यह है कि छिंदवाड़ा से नागपुर रेल खण्ड दो बार रिजर्व फारेस्ट और वाईल्ड लाईफ कारीडोर को काट रहा है।
बावजूद इसके इस बारे में केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय मौन साधे हुए है। कहा जा रहा है कि बालाघाट से नैनपुर होकर जबलपुर जाने वाले रेलखण्ड के अमान परिवर्तन का काम भी इसीलिए रूका हुआ है क्योंकि इसका कुछ हिस्सा सिवनी के वनों से होकर गुजर रहा है।
(क्रमशः जारी)

मंगलवार, 12 मार्च 2013

अमान परिवर्तन में भी सिवनी के साथ हुआ सौतेला व्यवहार


0 सिवनी से नहीं चल पाएगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 15

अमान परिवर्तन में भी सिवनी के साथ हुआ सौतेला व्यवहार

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। पता नहीं पर लगता है कि सिवनी को किसी की नजर लग गई है। जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी की जन्मस्थली होने के बाद भी कांग्रेस द्वारा सिवनी के साथ पिछले दो दशकों से दोयम दर्जे का व्यवहार ही किया जा रहा है। सालों पुरानी बहुप्रतिक्षित छिंदवाड़ा सिवनी नैनपुर मण्डला रेलखण्ड के अमान परिवर्तन की मांग रेल्वे के वर्ष 2010 - 2011 में पूरी तो कर दी गई किन्तु इसका काम मण्डला वाले सिरे से आरंभ किया गया है वह भी औपचारिकता के बतौर।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के दिल्ली ब्यूरो से मणिका सोनल ने रेल्वे बोर्ड के सूत्रों के हवाले से बताया कि वर्ष 2010 - 2011 में छिंदवाड़ा नैनपुर रेलखण्ड के अमान परिवर्तन के लिए चार करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान किया गया था। बाद में 2011 - 2012 के बजट में इस रेलखण्ड के लिए महज 72 लाख रूपए की राशि का ही प्रावधान किया गया था। इस तरह यह राशि बढ़ाकर चार करोड़ 72 लाख कर दी गई थी। इस परियोजना में काम को चालू कराने के निर्देश मण्डला की ओर से दिए गए थे।
इसके साथ ही साथ वर्ष 2012 - 2013 के बजट में इस रेलखण्ड के लिए 25 करोड़ रूपए का प्रावधान किया जाना रेल्वे बोर्ड के सूत्रों ने स्वीकार किया है, किन्तु यह राशि कब रिलीज की जाएगी इस बारे में रेल्वे बोर्ड के सूत्र मौन हैं। सूत्रों ने कहा कि छिंदवाड़ा सिवनी नैनपुर मण्डला फोर्ट रेल्वे खण्ड के अमान परिवर्तन में पहली प्राथमिकता मण्डला फोर्ट से नैनपुर रेलखण्ड की है।
इसके पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए रेल्वे बोर्ड के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मण्डला से नैनपुर अमान परिवर्तन के उपरांत नैनुपर से जबलपुर के हिस्से को जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। सिवनी वैसे भी रेल्वे बोर्ड की प्रथमिकता की सूची में शामिल नहीं है।
सूत्रों ने बताया कि 2005 - 2006 में रेल्वे बजट में स्वीकृत छिंदवाड़ा नागपुर के अमान परिवर्तन के लिए अब तक 202.95 करोड़ रूपए दिए जा चुके हैं और चालू माली साल के लिए इसके लिए चालीस करोड़ रूपए का अतिरिक्त प्रावधान भी किया गया है। वहीं जबलपुर गोंदिया और बालाघाट कटंगी के लिए 598.36 करोड़ रूपए का अवंटन दिया जा चुका है और वर्तमान में इसके लिए 30 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
(क्रमशः जारी)

सोमवार, 11 मार्च 2013

तीन साल पहले स्वीकृत हुआ थ छिंदवाड़ा नैनपुर रेलखण्ड


0 सिवनी से नहीं चल पाएगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 14

तीन साल पहले स्वीकृत हुआ थ छिंदवाड़ा नैनपुर रेलखण्ड

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। छिंदवाड़ा से सिवनी नैनपुर होकर मण्डला फोर्ट जाने वाले रेलखण्ड को वर्ष 2010 - 2011 के बजट में नए काम के रूप में शामिल किया गया था। 182.25 किलोमीटर लंबे इस खण्ड की अनुमानित लागत उस समय 564.54 करोड़ रूपए आंकी गई थी। उक्ताशय की बात भारतीय रेल्वे बोर्ड के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कही है।
रेल्वे बोर्ड के सूत्रों ने आगे कहा कि अगर सिवनी संसदीय क्षेत्र के सांसदों द्वारा इस रेल खण्ड के अमान परिवर्तन हेतु सतत दबाव बनाया होता तो यह रेलखण्ड कभी का ब्राडगेज में तब्दील हो गया होता। सूत्रों ने कहा कि जब भी रेल्वे बोर्ड के पास इस रेल खण्ड के अमान परिवर्तन की बात लाई जाती रही है तब तब पूर्व के ऋणात्मक आंकलन को हाईलाईट कर इसे ड्राप करवा दिया जाता रहा है।
सूत्रों ने आगे बताया कि चूंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंहराव ने नेरोगेज को ब्राडगेज में बदलने के लिए समय सीमा तय कर दी गई थी अतः इस रेलखण्ड के भाग्य खुले। इस रेल खण्ड के लिए वर्ष 2010 - 2011 में चार करोड़ रूपए की राशि तो आवंटित की गई थी किन्तु इसके पूरे होने की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई थी।
(क्रमशः जारी)

गुरुवार, 7 मार्च 2013

सिर्फ दस बार होता है रेल पटरियों का उपयोग दिन भर में!


0 सिवनी से नहीं चल पाएगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 13

सिर्फ दस बार होता है रेल पटरियों का उपयोग दिन भर में!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। छिंदवाड़ा से नैनपुर का नेरोगेज रेलखण्ड अब रेल मंत्रालय के लिए बोझ बनता जा रहा है। इस रेलखण्ड का उपयोग चौबीस घंटों में महज दस बार ही होता है, वह भी पेसेंजर रेल गाडियों के लिए। घाटे में जाते इस रेल खण्ड के अमान परिवर्तन की बात सियासी बियावान में खो गई है। दस दस सांसद मिलकर भी इस रेलखण्ड के अमान परिवर्तन को अमली जामा नहीं पहना सके हैं।
रेल्वे बोर्ड के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी से होकर गुजरने वाले रेलखण्ड को भारतीय रेल ने बोझ मान लिया है। इस रेलखण्ड के अमान परिवर्तन में स्थानीय संसद सदस्यों के द्वारा दिलचस्पी ना लिए जाने से यह रेलखण्ड अब रेल्वे बोर्ड के लिए सफेद हाथी ही साबित हो रहा है।
ज्ञातव्य है कि इस रेलखण्ड से प्रातः पांच बजकर दस मिनिट पर सिवनी से जबलपुर से आकर नागपुर जाने वाली रेल गाडी छिंदवाड़ा तक, के अलावा आठ बजकर 51 मिनिट, बारह बजकर 51 मिनिट, शाम पांच बजकर 31 मिनिट और रात्रि बारह बजकर 55 मिनिट पर नैनपुर से छिंदवाड़ा तक रेल गाडी का संचालन होता है।
इसी तरह नागपुर से जबलपुर चलने वाली रेल का संचालन छिंदवाड़ा से जबलपुर तक रात्रि ग्यारह बजे, के अलावा सुबह साढ़े आठ बजे, दिन में ग्यारह बजे, दोपहर सवा तीन बजे एवं रात्रि सात बजकर 41 मिनिट पर छिंदवाड़ा से नैनपुर तक के लिए रेल का संचालन किया जाता है। इस तरह चौबीस घंटों में इस रेल खण्ड पर महज दस रेल गाडियों का ही संचालन होता है। यहां यह उल्लेखनीय होगा कि इस रेलखण्ड में माल गाडियों का संचालन सालों से नहीं किया जा रहा है।
(क्रमशः जारी)

सोमवार, 4 मार्च 2013

सिवनी : एक भी मालगाड़ी नहीं चलती है सिवनी में!


0 सिवनी से नहीं चल पाएगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 12

एक भी मालगाड़ी नहीं चलती है सिवनी में!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। भगवान शिव के नाम पर बसे सिवनी में भारतीय रेल की एक भी मालगाड़ी का आवागमन नहीं होता है। अस्सी के दशक में यहां माल गाडियां आया करती थीं, जिससे सामान का परिवहन होता था, विडम्बना ही कही जाएगी कि अस्सी के दशक के उपरांत नपुंसक राजनैतिक नेतृत्व के चलते सिवनी में बिछी नेरोगेज की रेल की पांतो पर माल गाडियों का आवागमन बंद हो गया।
ज्ञातव्य है कि पिछले लगभग तीन दशकों से सिवनी जिले में सामान का परिवहन पूरी तरह से सड़क मार्ग पर ही निर्भर रहा है। इक्कसवीं सदी के पहले ही दशक में 2008 के उपरांत शेरशाह सूरी के जमाने की एनएच 07 पर ग्रहण लग गया और इसका निर्माण फोरलेन में करना तो छोड़िए इसका रखरखाव भी बंद कर दिया गया जिसके परिणामस्वरूप सिवनी जिले का एनएच का हिस्सा मोटरेबल भी नहीं बचा।
यहां माल ढुलाई काफी हद तक इसलिए मंहगी हो गई क्योंकि कम कीमत में माल ढोने पर वाहन चालकों के टायर की घिसाई भी नहीं निकल पाती थी। लोगों की निगाहें नेरोगेज के अमान परिवर्तन की ओर आकर टिक गईं। 2006 के बाद बार बार सिवनी के निवासियों के ब्राडगेज के मामले में रिसते घावों पर मरहम लगाने के बजाए नेताओं ने उस पर नमक ही छिड़कने का काम किया है।
देखा जाए तो पडोसी जिले छिंदवाड़ा में परासिया से छिंदवाड़ा का अमान परिवर्तन हो चुका है और छिंदवाड़ा से सौंसर का अमान परिवर्तन अगले साल पूरा होना बजट में दर्शाया गया है। इतना ही नहीं बालाघाट में बालाघाट से गोंदिया रेलखण्ड का अमान परिवर्तन हो चुका है। रह गया है तो छिंदवाड़ा से सिवनी होकर नैनपुर का रेलखण्ड।
(क्रमशः जारी)

शुक्रवार, 1 मार्च 2013

कभी भी बंद हो सकती है छिंदवाड़ा नैनपुर ट्रेन!


0 सिवनी से नहीं चल पाएगी पेंच व्हेली ट्रेन . . . 11

कभी भी बंद हो सकती है छिंदवाड़ा नैनपुर ट्रेन!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। सिवनी वासियों के लिए यह खबर दर्दनाक हो सकती है कि लगभग 110 साल पुरानी छिंदवाड़ा से बरास्ता सिवनी, नैनपुर छुक छुक गाड़ी को कभी भी बंद किया जा सकता है। इसका कारण इस रेल खण्ड पर माल ढुलाई का ना होना है। अमूमन रेल को जो आय होती है वह माल ढुलाई से ही होती है, सालों से छिंदवाड़ा नैनपुर रेलखण्ड पर माल ढुलाई नहीं हो रही है, जिससे यह रेल खण्ड घाटे में जाकर रेल मंत्रालय के लिए सफेद हाथी बना हुआ है।
रेल मंत्रालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि भारत जब आजाद हुआ था तब रेल द्वारा माल ढुलाई 90 फीसदी से अधिक हुआ करती थी। अब यह माल ढुलाई तीस प्रतिशत से भी कम बची है। शेष 70 फीसदी माल ढुलाई अब सड़क परिहन के भरोसे ही है। रेल माल ढुलाई में कमी का सबसे बड़ा कारण यात्री रेल सुविधाएं एवं कारीडोर का अभाव ही माना जा रहा है।
इस तरह रेल्वे का मुख्य आय का स्त्रोत माल ढुलाई सिकुड रहा हैै। यही कारण है कि देश में माल ढुलाई के कारीडोर में इजाफे के साथ ही साथ रेल्वे द्वारा हर यात्री रेल में अलग से कमोबेश चार चार डिब्बे लगाए जा रहे हैं, जिससे रेल्वे की आय में इजाफा हो सके। अगर रेल्वे को माल ढुलाई से आय कम होती गई तो भारतीय रेल की अर्थव्यवस्था चरमराने में समय नहीं लगेगा।
देखा जाए तो सार्वजनिक परिवहन एक सामाजिक जिम्मेदारी है ना कि लाभ कमाने का जरिया। इस बात को आजाद भारत में रेल मंत्री रहे बिहार के सांसद डॉ.राम सुभग सिंह ने 1977 - 1967 के रेल बजट में साफ किया था। बाद में बिहार के ही सांसद रहे रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने स्वयंभू प्रबंधन गुरू बनकर इसे सामाजिक जिम्मेदारी से ज्यादा लाभ का जरिया बनाने का हर संभव प्रयास किया था।
सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि रेल्वे बोर्ड द्वारा उन रेल खण्डों को चिन्हित करने का प्रयास किया जा रहा है जिन रेल खण्डों में माल ढुलाई शून्य है। इनमें नैनपुर छिंदवाड़ा का नेरोगेज रेल खण्ड सबसे उपर ही आ रहा है। इन परिस्थितयों में जब इस रेल खण्ड में माल गाड़ी का संचालन सालों से बंद है और इसके अमान परिवर्तन का काम मंथर गति से चल रहा है तो आने वाले समय में इस रेलखण्ड पर रेल का संचालन बंद कर दिया जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
(क्रमशः जारी)

गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

फरवरी 2006 में कांग्रेस का प्रतिनिधिमण्डल मिला था लालू से


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फरवरी 2006 में कांग्रेस का प्रतिनिधिमण्डल मिला था लालू से

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। सिवनी में ब्राडगेज लाने के प्रयास हाथी के दिखाने के दांत ही साबित हुए हैं अब तक। कांग्रेस की कद्दवर नेता सुश्री विमला वर्मा के सक्रिय राजनीति से किनारा करने के उपरांत कांग्रेस के इकलौते क्षत्रप हरवंश सिंह के नेतृत्व में दो मर्तबा रेल मंत्री से मिलने का भी कोई लाभ नहीं हुआ। हालात देखकर लगने लगा है मानो कांग्रेस के क्षत्रपों ने सिवनी के विकास से पर्याप्त दूरी बना ली है।
इसी बीच सिवनी में रेल संघर्ष समिति का अभ्युदय हुआ और मामला कुछ हद तक इस समिति के पक्ष में आता दिखा। श्रेय की राजनीति के चलते कांग्रेस और भाजपा के लंबरदारों ने इस मामले को किसी ओर के हाथ चले जाने के भय से अब सक्रिय होना आरंभ कर दिया। फरवरी 2006 में कांग्रेस के कद्दावर नेता हरवंश सिंह ठाकुर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमण्डल दिल्ली आया और अनेक मांगें जिनमें छिंदवाड़ा नैनपुर का अमान परिवर्तन भी शामिल था को लेकर तत्कालीन मंत्रियों से मुलाकात की।
लालू से चर्चा के दौरान प्रतिनिधिमण्डल ने छिंदवाड़ा से नैनपुर (मण्डला फोर्ट तक नहीं) के रेल खण्ड के अमान परिवर्तन की मांग की। इसके बाद जब लालू यादव केंद्रीय मंत्री कमल नाथ की कर्मभूमि छिंदवाड़ा आए और छिंदवाड़ा नागपुर के अमान परिवर्तन की आधार शिला रखी तब भी सिवनी के कांग्रेसी नेताओं ने लालू यादव से इसकी मांग दुहराई। लालू प्रसाद यादव ने अपने चिर परिचित अंदाज में फिर से इसे मुस्कुराकर टाल दिया।
केंद्रीय मंत्री कमल नाथ, सिवनी के क्षत्रप हरवंश सिंह ठाकुर की उपस्थिति में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव का यह आश्वासन कितना कोरा था इसका पता जल्द ही लग गया। कुछ दिनों बाद छिंदवाड़ा दौरे पर आए मण्डल रेल प्रबंधक नागपुर से जब मीडिया ने लालू यादव के आश्वासन की चर्चा की थी,, तो ठेठ देसी अंदाज में उन्होंने कहा था कि मंत्री का आश्वासन नहीं वे रेल्वे बोर्ड के रूक्के (आदेश) पर काम करते हैं। जाहिर था रेल मंत्री ने आश्वासन दिया था इसके लिए विभाग से कोई आदेश जारी ही नहीं हुआ था तो डीआरएम कैसे काम आरंभ करवाते।
हालात देखकर सिवनी वासियों के मन में एक ही बात उठ रही थी कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही यह नहीं चाह रहे थे कि सिवनी में छोटी लाईन पर चलने वाली नेरो गेज रेल की न तो गति बढ़े और न ही सिवनी वासियों को ब्राडगेज की सुविधा मिले। सिवनी के सांसदों ने अमान परिवर्तन के लिए उपयुक्त मंच जिसे संसद के नाम से जाना जाता है में छिंदवाड़ा से नैनपुर के बीच के खण्ड के अमान परिवर्तन की बात न रखना अपने आप में किसी आश्चर्य से कम नहीं माना जा सकता है।
सिवनी लोकसभा विलोपन के पूर्व में सांसदों ने इस मांग को लोकसभा में क्यों नहीं उठाया इसका जवाब तो वे ही बेहतर तरीके से दे सकते हैं। उन्होंने जनता के विश्वास और प्यार के साथ क्या विश्वास घात किया है इसका जवाब भी उन्हें ही देना है। वर्तमान में बालाघाट संसदीय क्षेत्र जिसमें सिवनी और बरघाट विधानसभा का समावेश है के सांसद के.डी.देशमुख और मण्डला संसदीय क्षेत्र जिसमें लखनादौन और केवलारी विधानसभा का समावेश है के सांसद बसोरी सिंह मसराम ने लोकसभा में प्रश्न क्यों नहीं उठाया है इसका जवाब जनता अवश्य जानना चाह रही है। साथ ही साथ जनता को यह जानने का भी हक है कि क्या दोनों ही सांसद महोदय आने वाले लोकसभा सत्र में इस प्रश्न को लोकसभा में गुंजायमान करने की जहमत उठाएंगे या फिर इसके लिए भी उन्हें जगाने के लिए जनता को ही आगे आकर आंदोलन जैसे तरीकों को अपनाना होगा?
(क्रमशः जारी)

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

फिर उपेक्षा का शिकार हुआ सिवनी ब्राडगेज के मामले में


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फिर उपेक्षा का शिकार हुआ सिवनी ब्राडगेज के मामले में

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। सौ साल से पुरानी छिंदवाड़ा नैनपुर नेरोगेज लाईन एक बार फिर वर्ष 2013 - 2014 के बजट में उपेक्षा का शिकार हो गई। 17 साल बाद कांग्रेस के रेल मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट में छिंदवाड़ा नैनपुर रेल खण्ड के अमान परिवर्तन का नाम ना होना आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है।
अगले साल के रेल बजट में सिवनी जिले में सिवनी छपारा लखनादौन, सिवनी बरघाट कटंगी और रामटेग गोटेगांव के लिए 27.5 किलोमीटर के सर्वे का प्रावधान अवश्य ही किया गया है। सिवनी से बरघाट कटंगी मार्ग का कब सर्वे होगा और कब रेल खण्ड के लिए बजट आवंटन होगा यह बात अभी भविष्य के गर्भ में ही है।
सिवनी से छपरा लखनादौन के रेल खण्ड को भी झुनझुना ही माना जा सकता है, क्योंकि निश्चित तौर पर यह रेलखण्ड बंजारी के आसपास से गुजरेगा जहां अभी भी फोरलेन की वन मंत्रालय से अनुमति लंबित है। रही रामटेक गोटेगांव की बात तो इस रेलखण्ड में 27.5 किलोमीटर का जो आंकड़ा रेल बजट में दर्शाया गया है वह महाराष्ट्र में रामटेक के आसपास का ही बताया जा रहा है।
इस रेल बजट में नैनपुर से मण्डला के अमान परिवर्तन का उल्लेख किया गया है। जिससे साबित होता है कि बालाघाट सिवनी के भाजपाई सांसद के.डी.देशमुख और मण्डला सिवनी के कांग्रेसी सांसद बसोरी सिंह मसराम के लिए सिवनी जिला प्राथमिकता में नहीं है।

मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013

छिंदवाड़ा नैनपुर के लिए किसी ने भी नहीं किया आंदोलन!


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छिंदवाड़ा नैनपुर के लिए किसी ने भी नहीं किया आंदोलन!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। 2004 में सिवनी जिले की जनता की आवाज को लोकसभा में उठाने के लिए दिल्ली भेजी गईं परिसीमन में समाप्त हुई सिवनी लोकसभा की अंतिम सांसद श्रीमति नीता पटेरिया ने भी छुक छुक रेल गाड़ी को ब्राडगेज में तब्दील कराने के लिए कोई प्रयास नहीं किए। श्रीमति पटेरिया द्वारा कांग्रेस के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व.नरसिंहराव की चुनावी घोषणा को पूरा करने के लिए अवश्य ही 2005 में एक पत्र तत्कालीन रेल मंत्री को प्रेषित किया था।
यहां उल्लेखनीय होगा कि 30 जनवरी 2005 में वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा द्वारा रामटेक से गोटेगांव तक नई रेल लाईन हेतु पोस्टकार्ड अभियान चलाया गया था। श्री वर्मा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2005 के अंत तक इस अभियान को पूरे जोर शोर से चलाए जाने के लिए हर संभव प्रयास किए। इस दौरान जिले के समस्त जनपद अध्यक्षों, सामाजिक, जातीय, कर्मचारी, पत्रकार, व्यापारी संगठनों आदि ने रेल मंत्री को पत्र लिखे थे। जिले के विधायकों ने भी इसमें बढ़ चढ़कर अपनी हिस्सेदारी जताई थी।
जगतगुरू स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी द्वारा भी इस हेतु दो मर्तबा केंद्र को पत्र लिखा गया। इतना ही नहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री विमला वर्मा ने केंद्रीय रेल मंत्री से इस लाईन के लिए गुहार लगाई। तत्कालीन सांसद श्रीमति नीता पटेरिया ने संसद में (जो कि उनके लिए सहज सुलभ और उचित मंच था) यह बात न उठाकर रेल मंत्री को पत्र लिखकर रस्म अदायगी कर डाली। श्री वर्मा के प्रयासों से एक साल में लगभग पच्चीस हजार पोस्टकार्ड रेल भवन पहुंचे किन्तु इसके बाद भी कांग्रेसनीत केंद्र सरकार के रेल मंत्रालय के कानों में जूं नहीं रेंगी।
आश्चर्य तो इस बात पर हो रहा है कि सिवनी में सियासत की बिछात बिछाने वाले किसी भी नेता ने इतने सालों तक छिंदवड़ा से नैनपुर की छोटी लाईन के अमान परिवर्तन के लिए बड़े आंदोलन का आगाज आखिर क्यों नहीं किया? सियासी तौर पर सक्रिय लोग किस बात से खौफजदा थे यह बात समझ से परे ही है। अगर ब्राडगेज सिवनी में आ जाती तो उनके कौन से राजनैतिक मंसूबों पर पानी फिरने वाला था यह बात समझ से परे ही रही।
सिवनी के किसी संसद सदस्य ने उनके कार्यकाल के रेल मंत्रियों से यह पूछने का दुस्साहस भी नहीं किया कि उनके कार्यकाल में चलने वाली पंचवर्षीय योजनाओं में महज 139.6 किलोमीटर के छोटे से रेल खण्ड के सर्वेक्षण के लिए कब और कितनी राशि जारी होने के आदेश जारी होंगे? सिवनी संसदीय क्षेत्र की जनता द्वारा इसके अस्तित्व में आने से विलोपन तक कुल दस संसद सदस्यों पर भरोसा कर उन्हें केंद्र में अपनी नुमाईंदगी के लिए भेजा जाता रहा किन्तु किसी ने भी सिवनी के हित साधने का जतन नहीं किया। अब जबकि किसी प्रस्ताव के बिना ही अंतिम समय में परिसीमन में सिवनी लोकसभा का विलोपन किया जाकर इसे बालाघाट और मण्डला संसदीय क्षेत्र में मिला दिया गया है तब इन दोनों संसदीय क्षेत्रों के सांसदों द्वारा अगर सिवनी से दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है, सिवनी के हितों की अनदेखी की जाती है तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
(क्रमशः जारी)

सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

हर बार ब्राडगेज का आश्वासन देकर छला गया सिवनी वासियों को


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हर बार ब्राडगेज का आश्वासन देकर छला गया सिवनी वासियों को

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। जब जब लोकसभा चुनाव हुए हैं तब तब ब्राडगेज जैसे ज्वलंत और जनता से जुड़े मुद्दे को पार्टियों द्वारा उठाकर इस मामले में आश्वासन दे जनता का विश्वास जीता जाता रहा है। जीतने के बाद पांच साल तक न तो किसी सांसद ने उसे मिले जनादेश की चिंता की है और ना ही लोकसभा में इस मामले को उठाने का ही प्रयास किया है, और न ही पराजित उम्मीदवार ने ही इस मामले के लिए सांसद को जगाने का प्रयास किया। हार के बाद पराजित उम्मीदवार ने भी उसे नियति मानकर पांच साल के लिए मौन साधे रखा।
सिवनी लोकसभा जब तक अस्तित्व में रही हर बार जनता की भावनाओं का जमकर उपयोग किया गया है, प्रत्याशियों द्वारा। चूंकि रेल का ममला केंद्र सरकार का होता है अतः लोकसभा चुनावों के दौरान प्रमुख राजनैतिक दल के प्रत्याशियों द्वारा इस संवेदनशील मुद्दे को हथियार की तरह इस्तेमाल कर सिवनी में शतायु हो चुकी नेरोगेज रेल लाईन को ब्राड गेज में तब्दील कराने का आश्वासन दिया जाता रहा है।
एक मर्तबा तो तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.व्ही.नरसिंहराव द्वारा भी चुनावी घोषणा के तौर पर परमहंसी आश्रम श्रीधाम में जगतगुरू शंकराचार्य जी के समक्ष यह कहा गया था कि उनके संसदीय क्षेत्र रहे महाराष्ट्र के रामटेक से गोटेगांव तक बड़ी रेल लाईन लाई जाएगी। दुर्भाग्य से वे दुबारा प्रधानमंत्री नहीं बन पाए और छिंदवाड़ा नैनपुर से इतर रामटेक गोटेगांव की यह घोषणा खालिस चुनावी वायदा बनकर रह गई।
सिवनी विधानसभा से दो बार कांग्रेस प्रत्याशी रहे आशुतोष वर्मा द्वारा अलबत्ता इस मामले को अपने हाथ में लेकर रामटेक गोटेगांव को भारतीय रेल के नक्शे पर लाने का हर संभव प्रयास किया गया किन्तु उनकी आवाज भारतीय रेल के नक्कारखाने में तूती ही साबित हुई। पिछले बजट में इस मार्ग का जिकर होने से कुछ आशाएं अवश्य जगी हैं, किन्तु यक्ष प्रश्न अब भी यही है कि जब नागपुर से छिंदवाड़ा, सिवनी, नैनपुर होकर मण्डला और जबलपुर जाने वाला जो मार्ग अस्त्तिव में है उसका छिंदवाड़ा से नैनपुर और मण्डला का रेलखण्ड ही अभी तक नहीं बन पाया है तो नई रेल लाईन कब और कैसे आ पाएगी।
यहां उल्लेखनीय होगा कि जब जब चुनाव समाप्त हुए तो विजयी सांसद ने जनता से किए गए इस चुनावी वायदे को पूरा करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि सिवनी जिले के किसी भी संसद सदस्य द्वारा अब तक नैनपुर से बरास्ता सिवनी होकर छिंदवाड़ा जाने वाले रेलखण्ड के संबंध में प्रश्न नहीं उठाया गया है। सिवनी की सियासती जमीन इतनी भुरभुरी है कि बरास्ता राज्यसभा संसदीय सौंध तक पहुंचाने कांग्रेस और भाजपा को एक भी दावेदार नहीं मिला है इसलिए इस रेलखण्ड से संबंधित बात राज्य सभा में भी नहीं उठ सकी है।
लोकसभा चुनावों के आते ही सिवनी वासियों के मस्तिष्क पटल पर विकास का जो नक्शा उकेरा जाता रहा है उसमें ब्राडगेज को विशेष स्थान दिया जाता रहा है। लोगों को लगने लगता बस एक दो बरस में ही सिवनी ब्राडगेज से जुड़ जाएगा और फिर सिवनी के विकास के रास्ते प्रशस्त हो जाएंगे। सिवनी के निवासियों के युवा सदस्यों को इस विकास का भागीदार बनाकर यहां उद्योग धंधे स्थापित हो जाएंगे, फिर सिवनी में राम राज्य की स्थापना को कोई नहीं रोक सकता है।
(क्रमशः जारी)