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सोमवार, 22 अप्रैल 2013

दामनि के बाद अब गुड़िया!


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)


दामनि के बाद अब गुड़िया!
देश की राजनैतिक राजधानी है दिल्ली। दिल्ली में आए दिन बलात्कार हो रहे हैं। देश में आदि अनादि काल से अबलाओं के साथ दुराचार होता आया है। इक्कीसवीं सदी आते ही बलात्कार में एक परिवर्तन देखने को मिला है। अब बलात्कार का शिकार मासूम और छोटी बच्चियां हो रही है। यह निश्चित तौर पर विकृति है। इस विकृत मानसिकता के लिए शोध जरूरी है। दरअसल, पश्चिमी देशों की नग्नता से परिपूर्ण संस्कृति को अपनाकर देश में विकृत मानसिकता का जन्म हो रहा है। भले ही कोई स्वीकार करे या ना करे पर देश में इस नग्नता को परोसने में कही ना कहीं इलेक्ट्रानिक मीडिया जवाबदार है। दामिनी के वक्त दिसंबर में जो तूफान उठा था, उससे लग रहा था कि आने वाले समय में इसकी पुनरावृत्ति शायद ही हो, पर वस्तुतः एसा हुआ नहीं। प्रधानमंत्री, देश के गृह मंत्री, दिल्ली की मुख्यमंत्री की नाक के नीचे ही बालाएं सुरक्षित नहीं तो फिर सुदूर ग्रामीण अंचलों की कौन कहे।

शिव से नाराज है संघ!
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी दूसरी पारी खेल रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि वे 2013 में अपना तीसरा कार्यकाल आरंभ करके नरेंद्र मोदी की बराबरी पर जाकर खड़े हो जाएंगे। शिव के राज में जिस तरह से घालमेल हो रहा है उससे लग रहा है मानो शिव और उनके गणों को अहंकार हो गया है। शिवराज के मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के जबर्दस्त आरोप लग रहे हैं। शिव के एक मंत्री विजय शाह को बड़बोलेपन के कारण कुर्सी से हाथ धोना पड़ा है तो अजय विश्नोई, कैलाश विजयवर्गीय जैसे मंत्री कतार में हैं। शिव के राज में अफसरशाही के बेलगाम घोड़े सरपट दौड़ रहे हैं। दिल्ली के झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय केशव कूंज के सूत्रों ने बताया कि एमपी में भाजपा के सुशासन के बजाए कुशासन से संघ नेतृत्व भी शिवराज से खासा खफा नजर आ रहा है।

बीमारी का नाटक किया ममता ने!
ममता बनर्जी और कांग्रेस के बीच सब कुछ सामान्य सा नजर नहीं आ रहा है। ममता बनर्जी कांग्रेस से खफा हैं। प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात ममता ने रद्द कर दी। ममता दीदी ने तबियत नासाज होने की बात कहकर मुलाकात को रद्द किया। भोले भाले वजीरे आजम इस बात को मान गए। पर जब उन्हें बताया गया कि ममता दी तो उन्हें मामा बनाकर चली गईं तो वे भोंचक्के रह गए। पीएमओ के सूत्रों ने बताया कि ममता उसी रात में सांसद मुकुल राय के घर चुनिंदा संपादकों के साथ भोज किया जिसमें उन्होंने उनकी मनपसंद टाईगर प्रान और मटनकरी का स्वाद चखा। जब यह बात पीएमओ के जरिए सत्ता के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ पहुंची तो सोनिया गांधी की भकुटी तन गईं। सोनिया ने अपने थिंक टेंक्स को बुलाकर इस मामले में विचार करने और ममता के भाजपा से जुड़ने की संभावनाओं पर भी विचार करने की बात कह डाली।

पंकज पचौरी पर लटक रही तलवार!
टीवी की आकर्षक नौकरी छोड़कर प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार बने पंकज पचौरी लंबे समय से हैरान परेशान चल रहे हैं। इसका कारण पीएमओ में उनकी पूछ परख ही समाप्त हो जाना बताया जा रहा है। पंकज पचौरी के सर पर तलवार लटकी हैै। दरअसल, जबसे तेज तर्रार प्रवक्ता रहे मनीष तिवारी को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का काम सौंपा गया है तबसे पीएम काफी राहत महसूस कर रहे हैं। वैसे भी पचौरी पर आरोप हैं कि वे पीएम की छवि चमकाने में पूरी तरह से असफल ही साबित हुए हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पचौरी को जनार्दन द्विवेदी और अंबिका सोनी ने पीएम का एडवाईजर इसलिए बनवाया था क्योंकि दोनों ही पीएम के पूर्व एडवाईजर हरीश खरे से खासे नाराज थे। अब मनीष तिवारी को भी पचौरी भा नहीं रहे हैं। उधर, पीएमओ के सबसे ताकतवर अफसर पुलक चटर्जी को भी पंकज की पीएमओ में उपस्थिति रास नहीं आ रही है।

सत्ता मोह में राजमाता ने बदली आस्था!
सत्ता जो ना करवाए कम है। कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी वैसे तो इटली मूल की हैं। शादी के पहले और उसके बाद भी सोनिया ने कैथोलिक ईसाई धर्म को माना। जब तक राजीव गांधी जिंदा रहे तब तक सोनिया गांधी अपने बच्चों के साथ कम से कम क्रिसमस पर तो चर्च जाया करती थीं। इसके बाद उन्होंने यह सब बंद कर दिया। कहा जाता है कि सोनिया के सलाहकारों ने उन्हें मशविरा दिया है कि अगर सत्ता में रहना है तो यह सब करना ही पड़ेगा। वैसे सियासी हल्कों में यह बात भी तेजी से उभर रही है कि सोनिया गांधी कर्मकांडी हिन्दू कैसे बन सकती हैं, क्योंकि इंदिरा गांधी का विवाह फारसी फिरोज गांधी से हुआ था, इस लिहाज से सोनिया फारसी परिवार की बहू हैं। सत्ता मोह में इंसान से क्या क्या नहीं कराया जा सकता है इस बात की मिसाल है सोनिया गांधी का चर्च से दूरी बनाना।

सुस्त पड़ी है एमपीसीसी
मध्य प्रदेश में चुनाव के लिए महज सात माह से भी कम का समय बचा है। इसके बावजूद भी प्रदेश में कांग्रेस का कोई जलजला देखने को नहीं मिल पा रहा है। कांग्रेस को प्रदेश में मानो पक्षाघात हो गया हो। कांग्रेस बड़े बड़े मुद्दों पर महज रस्म अदायगी ही करती नजर आ रही है। कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि कांग्रेस ही कांग्रेस को हराती है। हाल ही में महाकौशल अंचल के सिवनी में आदिवाीस बाहुल्य घंसौर में देश के उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के एक कथित कर्मचारी बिहार निवासी फिरोज खान ने चार साल की दुधमुही बच्ची के साथ बलात्कार किया, इसके बाद भी प्रदेश कांग्रेस मौन साधे बैठी है। लगता है गौतम थापर से सभी को बराबर चंदी मिल रही है, तभी तो रक्षित वन में नियम विरूद्ध लगने वाले इस प्लांट के बारे में किसी ने भी आवाज बुलंद करने की जहमत नहीं उठाई है।

जानते बूझते गरीब बना रही सरकार!
आप बुरा काम ना करें तो पुलिस और कोर्ट कचहरी जाने से बच सकते हैं, पर आपको बीमार होने से कोई रोक नहीं समता है। देश के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद का मानना है कि देश में लगभग चार करोड़ लोग बीमारी की वजह से गरीब बन जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था कि शहरी क्षेत्र के 31 तो ग्रामीण क्षेत्र के 47 फीसदी लोग एसे हैं जिन्हें अपने इलाज के लिए अपनी संपत्ति बेचनी पड़ती है। आलम यह है कि ग्रामीण क्ष़्ोत्र के तीस फीसदी लोग आर्थिक कारणों से इलाज कराने ही नहीं जाते हैं। अब आप ही बताईए जब देश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री का यह कहना हो फिर भी दवा कंपनियों और चिकित्सकों की सांठ गांठ से मरीज लुट रहे हों तो क्या कहा जाए?

मनरेगा बनी भ्रष्टाचार गारंटी योजना!
मध्य प्रदेश में कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भाजपा पर बोथरी कुल्हाड़ी से वार कर रहे हें। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना को मनरेगा संबोधित करने पर एक बार सोनिया गांधी बरी तरह भड़क चुकी हैं। बावजूद इसके उनके अनुयाई और पार्टी जन आज भी इस योजना को मनरेगा कहकर ही संबोधित कर रहे हैं। भूरिया और अजय सिंह मनरेगा के भ्रष्टाचार की बात कहते हैं इस संबंध में अनेक होर्डिंग्स भी लगाए गए हैं। सियासी फिजां में यह बात जमर उछल रही है कि अगर वाकई ये दोनों नेता और कांग्रेस मनरेगा के भ्रष्टाचार पर इतना चिंतित हैं तो फिर कांतिलाल भूरिया लोकसभा और अजय सिंह राहुल विधानसभा में इस बात को क्यों नहीं उठाते हैं। मतलब साफ है कि हमाम में सब नग्न हैं, सिर्फ जनता को ही भरमाना चाह रहे हैं नेतागण।

राजभवन की वेब साईट पर नेहरू की सिगरेट!
देश के हृदय प्रदेश में लाट साहेब यानी राज्य पाल की आधिकारिक वेब साईट कुछ बयां कर रही है। इस साईट पर अनेक पुराने संस्मरणों का उल्लेख है। इसमें एनक्डोट्स बटन पर प्रदेश के राज्यपाल रहे एच.विनायक पाटस्कर के एक संस्मरण का उल्लेख है। ये 1957 से 1965 तक राज्य पाल रहे। इसमें लिख है कि एक बार भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भोपाल यात्रा पर आए। अचानक ही राजभवन में पता चला कि पंडित नेहरू की पसंद वाली 555 सिगरेट राजभवन में स्टाक में नहीं है। तुरंत एक हरकारा विमान लेकर इंदौर गया जहां एयरपोर्ट पर ही एक नुमाईंदा 555 सिगरेट लेकर खड़ा था। नेहरू के लिए विशेष विमान से सिगरेट बुलवाई गई। क्या यहां नैतिकता की वर्जनाएं नहीं तोड़ी जा रही हैं। एक तरफ तो बीड़ी सिगरेट के विज्ञापन पर सरकार ने रोक लगाई हुई है, वहीं दूसरी ओर उसकी चर्चा वह भी पंडित जी के साथ सरकारी वेब साईट पर, वाह क्या कहने!

अब रमेश नहीं बचे कांग्रेस के दुलारे!
कांग्रेस के अंदर एक जुमला बड़ा मशहूर हुआ था कि हर मर्ज की दवा जयराम रमेश के पास है। अब जयराम रमेश के पास का जादुई पिटारा शायद कहीं खो गया है। कांग्रेस उनसे दूरी बनाकर चल रही है। दरअसल, यह जयराम रमेश और पलनिअप्पम चिदम्बर के बीच के शीत युद्ध का परिणाम है कि रमेश को अब कम भाव मिल रहा है। डायरेक्ट कैश ट्रांसफर स्कीम के प्रेजेंटेशन के समय राहुंल गांधी को इसका नाम पसंद नहीं आया तो इसमें बैनीफिट जोड़ दिया गया। अनेक प्रेस कांफ्रेंस में भी रमेश की अनुपस्थिति को नोट किया गया। अनेक स्कीम्स की प्रेस कांफ्रेंस में चिदम्बरम तो मोजूद रहे पर जयराम रमेश गायब रहे। मीडिया ने इस बात को नोट किया और कांग्र्रेस के आला नेताओं की मंशा को समझा जिसकी चर्चा जमकर हो रही है।

मोदी की राह में शूल बोते तोगड़िया!
हिन्दुत्व का चेहरा बनकर उभरे युवा नेता प्रवीण तोगड़िया के चेहरे पर अब झुर्रियां साफ दिखाई परिलक्षित होने लगी हैं। तोगड़िया का एकमात्र एजेंडा नरेंद्र मोदी को पीछे ढकेलना है। कहा जाता है कि इसमें उन्हें एल.के.आड़वाणी का आर्शीवाद प्राप्त है। भाजपा मोदी को आगे कर रही है तो तोगड़िया उन्हें हाशिए पर ढकेलने का काम कर रहे हैं। गुजरात के पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने मोदी और उनके समर्थित उम्मीदवारों को हराने का असफल जतन किया जो मोदी की जानकारी में है। अब कहा जा रहा है कि तोगड़िया द्वारा शिक्षित वर्ग को भाजपा से तोड़ने का उपक्रम किया जा रहा है। तोगड़िया विवादस्पद मुद्दों को हवा देकर मोदी के विकास माड़ल को कमजोर करने की जुगत में दिख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि संघ इस मामले में क्या रूख अख्तियार करता है।

अब सामी पर गिर सकती है गाज!
पीएमओ में राज्य मंत्री नारायण सामी के दिन खराब चल रहे हैं। सीबीआई छापों के चलते द्रमुक ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया। कहा जा रहा है कि नारायण सामी को इन छापों की जानकारी पहले से ही थी। पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि छापों के एक सप्ताह पूर्व फाईल मंत्री के पास से हरी झंडी प्राप्त कर चुकी थी। कांग्रेस के प्रबंधकों का मानना था कि सीबीआई की चाबुक से द्रमुक सरकार के सामने घुटने टेक देगी पर हुआ इससे उलट! वहीं दूसरी ओर मुलायम सिंह यादव ने सीबीआई की चाबुक की बात सार्वजनिक अवश्य की पर समर्थन वापस नहीं लिया। पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि मामला अब कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी के दरबार में पहुंच गया है। हो सकता है राजमाता इस मसले को गंभीरता से लेकर सामी के पर कतर दें।

पुच्छल तारा
दिल्ली का अबोध बालिका और सिवनी का चार वर्षीय बालिका का रेप इन दिनों सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स यानी सोशल मीडिया पर जमकर छाया हुआ है। इसमें एक चित्र लोगों को आकर्षित कर रहा है जिसमें तिरंगा में भारत का मानचित्र है और वह एक बच्ची को अपने दामन में छिपाए कह रहा है कि कहां छिपाउं तुझे, मेरी कोई सुनता भी नहीं है। यह है इक्कीसवीं सदी के भारत का स्वरूप!

सोमवार, 15 अप्रैल 2013

सोनिया थीं, विदेशी खरीद में मध्यस्थ!


ये है दिल्ली मेरी जान


(लिमटी खरे)

सोनिया थीं, विदेशी खरीद में मध्यस्थ!
सनसनीखेज खुलासों के लिए मशहूर विकीलीक्स द्वारा एक जबर्दस्त खुलासे से कांग्रेस की चूलें हिलती नजर आ रही हैं। इंदिरा गांधी के दरबार में अमरीकी जासूस, फिर राजीव गांधी को दलाल निरूपित करने के बाद अब विकीलीक्स ने कांग्रेस और संप्रग अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को भी लपेट लिया है। हाल ही में एक केबल में अमेरिकी राजनयिको को मारुति हेवी व्हीकल लिमिटेड कंपनी के प्रबंध निदेशक के. एल. जालान ने बताया था कि इस कंपनी के मालिकों में संजय गांधी, सोनिया गांधी तथा जेके जालान शामिल है। जालान के अनुसार मारुति कंपनी इटली, स्वीडन और र्जमनी में कार्यरत वाहन कंपनी इंटरनेशनल हार्वेस्टर के साथ भी जुड़ी है। इस मारुति कंपनी ने अमेरिकी राजनयिको से एक अमेरिकी कंपनी के विमानों की खरीद के बारे मे सहयोग करने की पेशकश की थी। अब लगता है कांग्रेस को इन आरोपों का जवाब देने में कठिनाई महसूस हो रही है।

राहुल के बस की नहीं राजनीति!
कांग्रेस की नजर में भले ही राहुल गांधी भविष्य के प्रधानमंत्री हों, पर हकीकत यह है कि उनके बस की राजनीति नहीं है। राजनीति में जिस तरह की चालाकी, चपलता और धूर्तता चाहिए वह उनके अंदर नहीं है। राहुल गांधी के राजनैतिक गुरू एक के बाद एक बदल रहे हैं और वे अपने अपने तौर तरीकों से युवराज को सियासी पाठ पढ़ा रहे हैं। कभी राजा दिग्विजय सिंह उन्हें सियासत की सीढियां चढ़वाने की कवायद करते हैं तो कभी उनके नए गुरू सैम पित्रोदा उन्हें दुनिया के चौधरी अमरीका की स्टाईल में सियासी पाठ पढ़वाते हैं। कभी जनार्दन द्विवेदी राहुल को गरीब हरिजन दलित के घर पर रात्रि विश्राम का मशविरा देते हैं तो कभी कोई कुछ बता देता है। राहुल बुरी तरह कन्फयूज ही नजर आ रहे हैं। हालात देखकर लगने लगा है मानो सियासत उनके बस की नहीं उन्हें तो अपना रास्ता बदल ही लेना चाहिए।

मूल काम से भटके काटजू!
भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू एक बार फिर चर्चाओं में हैं। उनका मूल काम मीडिया से संबंधित शिकायतों का निष्पादन ही माना जाता है। पिछले काफी समय से काटजू अपने बयानों के चलते विवादों में हैं। एक बार उन्होंने फिल्म अभिनेता संजय दत्त की माफी के लिए पत्र लिख दिया। काटजू ने अब 1993 दिल्ली ब्लास्ट केस में फांसी की सजा पाए खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट के आतंकवादी देविंदर पाल सिंह भुल्लर को माफ करने की अपील की है। काटजू ने भुल्लर की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसले को आधार बनाते हुए प्रेजिडेंट प्रणव मुखर्जी को छह पेज की चिट्ठी लिखी है। इसमें प्रेजिडेंट से संविधान के आर्टिकल 72 के तहत भुल्लर की फांसी की सजा माफी करने की अपील की गई है। काटजू साहेब को चाहिए कि वे मीडिया की शिकायतों का निष्पादन करें। हाल ही में मध्य प्रदेश के सिवनी में कर्फ्यू के दौरान अखबार ना बटने और मीडिया को घरों में कैद किए जाने की शिकायत उनके पास पहुंची पर वह लंबित ही है।

कौन है वह कांग्रेस का क्षत्रप!
भाजपा के निर्वतमान निजाम नितिन गड़करी ने एक बड़ा अजीब सा खुलासा किया है, उन्होने कहा है कि कांग्रेस के एक सीनियर लीडर ने उन्हें संपर्क कर वर्तमान संप्रग सरकार को गिराने की चाहत रखी थी। गड़करी का यह खुलासा वाकई कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। भले ही गड़करी अपने आप को मर्द का बच्चा बताकर सामने से वार करने की बात कह रहे हों पर उनके करीबी सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के एक व्यवसाई सीनियर लीडर जिनसे सोनिया और राहुल गांधी बुरी तरह खफा हैं, ने भाजपा के व्यवसाई अध्यक्ष गड़करी से संपर्क कर अपनी मंशा का इजहार किया था। जिस समय यह बात की गई थी उस समय देश में घपले घोटालों की गूंज थी और अगर तब चुनाव हो जाते तो कांग्रेस की लुटिया डूबना तय था। अब भाजपा के अंदर भी यह बात उठ रही है कि आखिर गड़करी कांग्रेस के हिमायती हैं या भाजपा के!

क्या कानून हम से उपर है!
देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद का काम देश में कानून बनाने का है। कानून बनाने के बाद इस पंचायत के पंच ही उस कानून की धज्जियां उड़ाते दिख जाते हैं। सूचना के अधिकार कानून में सुभाष चंद्र अग्रवाल द्वारा एकत्र की गई जानकारी के अनुसार आठ सांसदों ने बार बार मांगे जाने के बाद भी अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है। इनमें से पांच सदस्य उच्च सदन यानी राज्य सभा और तीन लोकसभा के हैं। आश्चर्य तो इस बात पर है कि इसमें झारखण्ड के नेता मधु कोड़ा का नाम भी शामिल है। पता चला है कि इन सांसदों ने अपनी संपत्ति को सार्वजनिक ना किए जाने का लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया था जिसे स्वीकार कर लिया गया है। यक्ष प्रश्न तो फिर खड़ा ही है ना कि देश की सबसे बड़ी पंचायत के आठ सदस्य आखिर अपनी संपत्ति को सार्वजनिक करने से हिचक क्यों रहे हैं।

हेमा का नाम लेना भारी पड़ा पांडे को!
क्या ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी का नाम लेना अपराध है! जी नहीं शायद नहीं। जब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा 1997 में केंद्रीय मंत्री कमल नाथ के खिलाफ भाजपा से उपचुनाव में उतरे थे, तब वे कमल नाथ की रिहाईश शिकारपुर की सड़कों की तुलना हेमा मालिनी के गालों से किया करते थे। अब उत्तर प्रदेश के खादी और ग्रामोद्योग मंत्री राजा राम पांडे को सड़कों की तुलना हेमा मालिनी के गालों से करना भारी पड़ गया है। इस बयान ने उनकी कुर्सी छीन ली है। पांडेय को देर रात बर्खास्त कर दिया गया। पांडे की जुबान दूसरी बार फिसली है इसके पहले उन्होंने सुल्तानपुर की डीएम की तारीफ करते हुए अशोभनीय टिप्पणी कर दी थी। पाण्डे की कुर्सी जाने से अब कम से कम हेमा मालिनी को तो शांति मिलेगी कि उनके गालों की तुलना सड़क से तो कम से कम नहीं होगी।

पवार की उलटबंसी!
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में सहयोगी दल राकांपा के सुप्रीमो शरद पंवार ने अचानक ही उलट बंसी बजाना आरंभ कर दिया है। उन्होने ठाणे में कहा कि डीएमके के समर्थन वापस लेने के उपरंात यूपीए कमजोर हो चुका है, और उन्होंने इस बात के संकेत भी दिए कि चुनाव किसी भी वक्त हो सकते हैं अतः चुनाव की तैयारी में जुट जाना चाहिए। वैसे भी डीएमके के बाहर होने के बाद अब समाजवादी पार्टी के 22 और बहुजन समाजवादी पार्टी के 21 सांसदों की बैसाखी पर यूपीए टिकी हुई है। मुलायम सिंह यादव भी सीबीआई के दुरूपयोग के आरोप लगा चुके हैं तो मायावती भी ताज कारीडोर से परेशान हैं। उधर मुलायम सिंह यादव इस बात का अंदाजा लगा रहे हैं कि चुनाव इस साल नवंबर में हो सकते हैं। अगर एसा हुआ तो यूपीए टू का यह अंतिम खेल हो सकता है।

नमो फोबिया से ग्रसित है कांग्रेस!
कांग्रेस के अंदर अब संगठित राजग के बजाए एक मात्र फेक्टर ही डराने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है वह है नमो यानी नरेंद्र मोदी का फेक्टर। कांग्रेस के सारे के सारे थिंक टेंक नमो के फेक्टर से निपटने की रणनीति में जुट चुके हैं। नमो ने अपनी सारी ताकत सोशल मीडिया में झोंक दी है। उनके करीबी सूत्रों का दावा है कि नमो ने लगभग दो सौ करोड़ रूपए का दांव सोशल मीडिया में लगाया है। सोशल मीडिया में अनेक लोगों को नमो के तरह तरह के कार्टून, फोटो, केप्शन आदि के साथ सुसज्जित कर शेयर करवाया जा रहा है ताकि फेसबुक जैसे सोशल मीडिया में नमो की तूती बोले। आज आलम यह है कि घपले घोटाले अनाचार और विशेषकर भ्रष्टाचार पर सोनिया राहुल की चुप्पी ने युवाओं को कांग्रेस से दूर कर दिया है, वहीं सोशल मीडिया पर नरेंद्र मोदी का जादू सर चढ़कर ही बोल रहा है।

टेक्सी की तरह घूम रहा है हेलीकाप्टर!
देश के कांग्रेस के एक उद्योगपति नेता जब चुनाव में उतरते हैं तो वे अपनी पारिवारिक कंपनी के हेलीकाप्टर को अपने संसदीय क्षेत्र में बैलगाड़ी के मानिंद घुमा देते हैं। हेलीकाप्टर को देखने जुटने वाली भीड़ ही उनकी सभा को सुनती है। इसी तर्ज पर अब मां, माटी, मानुष वाली त्रणमूल कांग्रेस पार्टी ने भी पश्चिम बंगाल से निकलकर अपना प्रभाव अन्य राज्यों में बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। हरियाणा में त्रणमूल कांग्रेस द्वारा अपने राज्य सभा सांसद और उद्योगपति के.डी.सिंह को हेलीकाप्टर मुहैया करवाया गया है। सिंह हरियाणा में हर कस्बे में अपने हेलीकाप्टर से पहुंच रहे हैं। गांव के लोगों के लिए आज भी हेलीकाप्टर कौतुहल का ही विषय है सो बच्चों से लेकर बड़े बूढ़ेे जवान सभी वर्ग के लोग हेलीकाप्टर के आसपास जुट जाते हैं। इसकी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कर सिंह द्वारा ममता की नजरों में अपने नंबर बढ़वाने में कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

मोईली ने साध लिया भाजपा को!
सदन में क्या सत्ता पक्ष क्या विपक्ष! सदन के अंदर सभी एक बराबर हैं। सभी हाड़ मांस के पुतले हैं जिनके निहित स्वार्थ एक दूसरे से अटके हैं। कार्पोरेट मामलों के मंत्री रहे वीरप्पा मोईली के खिलाफ भाजपा के हाथ कुछ सबूत लगे जिनमें मोईली द्वारा अपने पुत्र के ट्रस्ट के लिए चंदा उगाहा था। कुछ अखबारों की कतरने और एक ईमेल की प्रति भी भाजपा नेताओं को मुहैया करवाई गईं। मोईली के खिलाफ सबूत इतने जबर्दस्त थे कि उनकी कुर्सी जाना तय था। कहा जा रहा है कि इसके पीछे दक्षिण भारत की ही एक महिला मंत्री का हाथ था। पर यह क्या, भाजपा ने जब शून्य काल में इसे उठाने का मन बनाया उसके पहले ही मोईली ने भाजपा के नेताओं से संपर्क साधा और सब कुछ सध गया। ना मामला शून्यकाल में उठा और ना ही मोईली को किसी तरह की परेशानी का ही सामना करना पड़ा। जय भारत जय जवान, हो रहा भारत निर्माण।

यदुवंशियों के भरोसे यूपी!
उत्तर प्रदेश में यदुवंशी एण्ड सन्स यानी मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव ने अपने इर्दगिर्द स्वजातीय बंधुओं की खासी फौज खड़ी कर रखी है। अखिलेश यादव ने अपने सचिवालय में भी तीन यादव अफसर तैनात हैं। शंभू नाथ यादव को सेवा विस्तार दिया गया है। पंधरी यादव और जगदेव यादव भी अखिलेश यादव की टीम में शामिल हैं। यदुवंशियों के हाथों में है उत्तर प्रदेश की सत्ता की बागड़ोर, एसा मंत्रालय में कमोबेश हर किसी की जुबान पर चढ़ गया है। कहते हैं यदुवंशियों के बढ़ते वर्चस्व को देखकर राज्य के मुख्य सचिव राकेश गर्ग ने अघोषित तौर पर कलम बंद हड़ताल कर दी है। अब तो गर्ग किसी भी कागज पर दस्तखत ही नहीं कर रहे हैं। राज्य में उनका काम काज अनीता सिंह देख रही हैं। गर्ग केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने की जुगत लगाते देखे गए हें।

पुच्छल तारा
बरसात आते ही मेंढ़क सक्रिय हो जाते हैं। चुनाव की आहट पाते ही अब सियासी हल्कों में भी एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप के दौर से लगने लगा है कि चुनाव कभी भी हो सकते हैं। सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर इनकी धूम है। भाजपा कांग्रेस पर दिशाहीन होकर राजनीति करने का आरोप लगाती है तो कांग्रेस भाजपा को कोसती है। सवाल यह उठता है कि इस सबके लिए सबसे सही मंच लोकसभा और राज्य सभा के साथ ही साथ राज्यों में विधानसभाएं और विधानपरिषद है। इन सभी मंचों पर किसी भी सियासी दल ने किसी भी सियासी दल के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाता है, जाहिर है जो भी सदन के बाहर होता है वह सिर्फ जनता को भरमाने के लिए ही होता है।

सोमवार, 8 अप्रैल 2013

आज भी ताकतवर हैं नितिन गड़करी


ये है दिल्ली मेरी जान


(लिमटी खरे)

आज भी ताकतवर हैं नितिन गड़करी
नितिन गड़करी को भले ही आरोपों के चलते भाजपाध्यक्ष की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा हो, पर संगठन के अंदर उनकी तूती आज भी बोल रही है। भाजपा के नए निजाम राजनाथ सिंह हर मामले में गड़करी की राय को पूरा पूरा तवज्जो दे रहे हैं। भाजपाई सूत्रों का कहना है कि गड़करी के आज भी भैय्यू जी जोशी और मोहन भागवत से जीवंत संपर्क है। हाल ही में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने राजनाथ से मिलकर राजस्थान का प्रभार नितिन गड़करी के हवाले करने का आग्रह किया है। भाजपा के मुख्यमंत्रियों में शिवराज सिंह चौहान, नरेंद्र मोदी, रमन सिंह आदि के भी गड़करी से खासे रिश्ते थे जो अब भी चल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो गड़करी पदच्युत जरूर हो गए हैं, पर वे कहीं भीतराघात कर कोई बखेड़ा ना खड़ा कर दें इसलिए राजनाथ सिंह उन्हें कदम कदम पर साधे हुए हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि संघ मुख्यालय में गड़करी आज भी वहां की हर वस्तु का भोगमान भोग रहे हैं।

आरोपियों के लिए रेड कारपेट बिछाती कांग्रेस!
क्या आज आप आजाद भारत गणराज्य में सांसें ले रहे हैं? इस देश में कानून व्यवस्था नाम की चीज बची है? क्या इंटरनेशनल ट्रीटी के नाम पर कुछ भी किया जा सकता है? इस तरह के प्रश्न कमोबेश हर भारतीय के दिल दिमाग में घुमड़ रहे होंगे। मछुआरों के हत्यारे कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के पीहर के सैनिकों पर जिस तरह लाड़ प्यार लुटाया जा रहा है उससे लगता है मानो इटली शिशुपाल और भारत भगवान श्रीकृष्ण हो गया है। बोफोर्स से लेकर हर मामले में इटली के नागरिकों का हर अपराध क्षम्य है। इन सैनिकों को मौत की सजा ना देने का वायदा भी कर दिया गया है। अब यह बात भी सुनाई देने लगी है कि पुरूलिया में हथियार गिराने वाले डेनमार्क के आरोपी किम डेवी को भी भारत लाकर पांच सितारा होटल में ठहराने की बात सीबीआई ने की थी। आखिर क्या वजह है कि इंटरनेशनल आरोपियों के लिए कांग्रेस द्वारा आवभगत में रेड कारपेट बिछाया जा रहा है।

राहुल के सामने बगलें झांकते भूरिया!
कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी अब सख्ती के मूड में दिख रहे हैं। प्रदेशों के अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारियों से भेंट के दौरान उनसे की जाने वाली पूछताछ लोगों की पेशानी पर पसीने की बूंदे छलका देती है। अमूमन अब तक नेहरू गांधी परिवार के नाम पर सियासी बियावान में अपनी धाक जमाने वाले पुराने कांग्रेसी राहुल के नए अवतार से परेशान नजर आ रहे हैं। राहुल से जब भी कोई मिलने जाता है वे फौरन उनके प्रदेश की गतिविधियों की जानकारी तफसील से लिया करते हैं। राहुल गांधी के जासूस देश के कोने कोने में फैले हुए हैं। टीम राहुल का एक विंग सोशल नेटवर्किंग वेबसाईट्स पर भी सक्रिय है। दिन भर की गतिविधियों की जानकारी तीन चार बार राहुल को ईमेल से भेजी जाती है, ताकि वे कहीं भी रहें अपडेटेड रहें। पिछले दिनों एमपीसीसी चेयरमेन कांतिलाल भूरिया राहुल से मिले तो राहुल के प्रश्नों का वे उत्तर देते समय काफी असहज दिखे और राहुल की भुकटी तनी दिखीं।

दूरदर्शन का कांग्रेसीकरण!
प्रसार भारती का दूरदर्शन अब कांग्रेस का भोंपू साबित हो रहा है। भारतीय मछुआरों के हत्यारे इतालवी नौ सेनिकों के मामले में एक प्रोग्राम में सांसद तरूण विजय ने सोनिया गांधी को इतालवी मूल के होने के कारण घेरे में लिया। इसके बाद से डीडी न्यूज में मानो सांप सूंघ गया हो। प्रसार भारती में उच्च पदस्थ नौकरशाहों ने इस मामले में गंभीर मंथन के बाद डीजी न्यूज एस.एम.खान और सीईओ जवाहर सरकार को पाबंद किया है कि उनके ग्रीन सिग्नल के बाद ही कोई काम हो। दूरदर्शन में अब नया फरमान जारी हो चुका है जिसमें प्राईम टाईम के सलाहकार संपादक संजीव श्रीवास्तव के पर कतर दिए गए हैं। श्रीवास्तव सहित साभी को अतिथियों की सूची और प्रोग्राम को तय करने के लिए खान और सरकार पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। चर्चा है कि सोनिया के पीहर की अगर किसी ने छिया तो अंजाम अच्छा नहीं होगा।

गांधी के मुकाबले अब और युवा गांधी!
नेहरू गांधी परिवार की विरासत यानी वर्तमान पीढ़ी और स्वदेशी और विदेशी बहुओं को कांग्रेस और भाजपा ने बराबर बांट लिया है। संजय की पत्नि मेनका और वरूण भाजपा में तो राजीव की पत्नि सोनिया और राहुल कांग्रेस में हैं। कांग्रेस के गांधियों का जलजला है तो भाजपा के गांधी हाशिए पर ही रहे हैं। अब उत्तर प्रदेश को देखकर भाजपा ने अपने गांधी को झाड़ पोंछकर सामने लाया है। 42 साल के कुंवारे राहुल के सामने भाजपा ने 33 साल के शादी शुदा वरूण को खड़ा किया है जिसका परिणाम आने वाले समय में ज्ञात हो सकेगा। राहुल की युवा नीति की काट भाजपा ने इस कदर फेंकी है कि आम चुनावों में राहुल गांधी चित हो जाएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए, बस इसके लिए भाजपा को अपना मीडिया मैनेजमेंट तगड़ा रखना होगा। लोग तो यह भी कहने लगे हैं कि राहुल गांधी 42 के हो गए और कुंवारे हैं अतः अब उन्हें फ्रस्टेशन होने लगा है और यह कांग्रेस के नेताओं पर ही उतरता दिखता है।

भाई मिले पर मोहतरमाएं अलग अलग!
अंबानी बंधुओं के मिलन की खबरों से पटा रहा मीडिया पिछले सप्ताह। मुकेश और अनिल अंबानी ने हाथ क्यों मिलाया है इस बारे में तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। एन 30 मार्च को मुकेश और अनिल के बीच सुलह की आधिकारिक घोषणा की गई है। जानकारों का कहना है कि हो सकता है यह सब कुछ रिलायंस के शेयर में बढोत्तरी दर्ज करने किया गया कदम हो। दोनों भाई अगर मिल जाएं तो संपत्ति आसमान छू सकती है। वहीं दूसरी ओर अंबानीज पर केंद्र सरकार को हांकने का आरोप भी लगा है। हो सकता है किसी मामले में सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसी के फेरे में पड़ चुके हों अंबानी। सियासी फिजां में एक बात की चर्चा जोरों पर हो रही है कि अंबानीज का मिलन कागजी है, क्योंकि आज भी मोहतरमाएं यानी नीता और टीना अंबानी एक दूसरे से मुंह फुलाए घूम रही हैं।

ममता की नजरें तख्त पर!
त्रणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी इन दिनों अपना जनाधार बढ़ाने की जुगत में दिख रही हैं। दरसअल, वे दिल्ली के तख्त पर कब्जे का सपना देख रही हैं। सूत्रों की मानें तो ममता को मशविरा दिया गया है अगर वे कम से कम चार राज्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज करवा दें तो त्रणमूल को क्षेत्रीय से राष्ट्रीय दल के बतौर मान्यता मिल जाएगी। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के साथ अब हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में अपने पैर पसारने आरंभ कर दिए हैं। इन राज्यों में ममता बनर्जी और त्रणमूल सांसद के.डी.सिंह के फोटो वाले पोस्टर्स बहुतायत में देखने को मिल रहे हैं जिसमें लोगों को त्रणमूल से जुड़ने का आमंत्रण दिया गया है। ममता बनर्जी को यह भी बताया गया है कि राकांपा के सुप्रीमो शरद पंवार ने इसके पहले यह कोशिश की थी पर वे औंधे मुंह ही गिरे थे। ममता की नजरें मध्य प्रदेश की ओर भी दिख रही हैं। वे एमपी में भी संभावनाएं तलाशती नजर आ रही हैं।

नाथ की कायल हुईं सुषमा!
भाजपा की तेज तर्रार नेत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमति सुषमा स्वराज इन दिनों कमल नाथ पर खासी मेहरबान दिख रही हैं। अब तक के संसदीय कार्य मंत्रियों में कमल नाथ की टीआरपी यानी लोकप्रियता का ग्राफ सबसे उपर ही नजर आ रहा है। विपक्षी दलों में वे खासे लोकप्रिय हैं। मीडिया और कांग्रेस में भले ही उनकी आलोचना हो पर भाजपा उन पर मेहरबान ही नजर आती है। बजट के लिए जब विपक्षी दलों के साथ बैठक चल रही थी तब नाथ ने सुझाव दिया कि सदन आठ घंटे चलना चाहिए। इस पर सुषमा स्वराज बिदक गईं और बोली कि इसके पहले सदन 12 घंटे चलता था। यह सुनते ही कमल नाथ ने अपनी चिरपरिचित अदा में आंखें मिचमिचाई और बोले आई एम स्वारी सुषमा जी, आई एम न्यू इन दिस मिनिस्ट्री। मुझे नहीं पता कि पहले क्या होता था। ठीक है सदन 12 घंटे ही चलेगा। फिर क्या था, सुषमा हो गईं नाथ की कायल, पर किसी ने चुटकी ली कि 1980 से लगातार संसद सदस्य हैं नाथ फिर भी उन्हें बजट के बारे में जानकारी नहीं, आश्चर्य है?

फेमली बिजनिस छोड़ सन्यास लेना चाहिए युवराज को!
देश की सियासी फिजां में एक बात तेजी से उभर रही है कि नेहरू गांधी परिवार की वर्तमान पीढ़ी के सदस्य राहुल गांधी को अब फैमली बिजनिस त्यागकर सन्यास लेने की बात सोचना चाहिए। हो सकता है यह बात नरेंद्र मोदी केंप से उछाली गई हो पर लोग गंभीरता से इस बारे में चर्चा करने लगे हैं। लोगों का कहना है कि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की स्थापना के लिए राहुल का सन्यास अत्यावश्यक है। हर फैसले के लिए मां बेटे पर निर्भरता के बजाए आम कांग्रेसी को ही निर्णय के लिए बाध्य होना चाहिए। अगर एसा नहीं हुआ तो जल्द ही कांग्रेस का नामलेवा भी नहीं बचने वाला है। कांग्रेस में भाटचारण और गणेश परिक्रमा का आलम चरम पर है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मणिशंकर अय्यर को राज्य सभा के लिए ग्रीन सिग्नल इसलिए मिला क्योंकि मनी लांड्रिग मामले में उन्होंने राबर्ट वढ़ेरा को बचाया।

लाल बत्ती हूटर का कहर
देश भर में लाल बत्तियों और बिना लाल बत्तियों वालों के हूटर्स की चांव चांव ने आम आदमी का जीना मुहाल कर रखा है। जनता के बीच में जाकर अपना रोब झाड़ने के लिए शहरों के भीड़ भाड़ वाले इलाकों में हूटर्स जबरन ही बजाए जाते हैं। इसी तरह लाल बत्ती भी नेताओं का प्रिय शगल बन गया है। देश की शीर्ष अदालत ने इस पर संज्ञान लिया है। इसके गलत प्रयोग के लिए देश की शीर्ष अदालत काफी सख्त नजर आ रही है। लाल बत्ती वाली गाड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमाम राज्य सरकारों को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि गाड़ियों पर रेड लाइट लगाना और सायरन बजाना स्टेटस सिंबल बन गया है। इसका गलत इस्तेमाल करने वालों पर 10 हजार रुपये फाइन लगाया जाए। न मानने वालों की गाड़ियां जब्त की जाएं। कोर्ट ने कहा कि वीआईपी के नाम पर लाल बत्ती वाली गाड़ियों में कमी लाई जाए। अगर 2 जुलाई तक कोई पहल नहीं हुई तो कोर्ट ने खुद इस मामले में आदेश जारी करने का कहा है।

अब सरकारी मीडिया में यौन शोषण
सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी की नाक के नीचे प्रसार भारती में यौन शौषण के गंभीर आरोप से कांग्रेस सकते में है। सरकारी रेडियो एफ एम गोल्ड में महिलाओं के यौन शोषण को लेकर दायर याचिका के बाद देश भर में सरकारी भर्राशाही पर बहस शुरु हो गई है। प्रसार भारती के उपक्रमों में अनुबंध के आधार पर काम करने वाली महिलाओं के यौन शोषण की बात सामने आने के बाद प्रसार भारती के नियम-कायदों को भी सवालों के घेरे में लाया जा रहा है। गौरतलब है कि सामाजिक कार्यकर्ता मीरा मिश्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि एफएम गोल्ड में कार्यरत महिलाओं का यौन उत्पीड़न हो रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया रिपोर्टाे के माध्यम से कथित तौर पर एफएम चौनल की महिला कर्मचारियों के यौन उत्पीड़न के बारे में पता चला था। इन रिपोर्टाे के अनुसार ये लोग पिछले कई वर्षाे से चौनल में काम करती थी। उनकी सेवाओं को बिना कोई कारण बताए समाप्त किया कर दिया गया। दायर याचिका में प्रसार भारती के एफएम गोल्ड तथा ऑल इंडिया रेडियो में महिला रेडियो प्रस्तोताओं का यौन उत्पीड़न एवं शोषण रोकने के निर्देश देने की मांग की गई है।

पुच्छल तारा
कहते हैं अगर नौकरशाह शीर्ष पर है तो वह कभी रिटायर नहीं होता। अगर वह रिटायर होता भी है तो अपनी सेवानिवृति के छः महीने पहले ही वह अपने लिए नई मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित कर लेता है। यही हाल देश के शीर्ष नौकरशाहों का हो रहा है। कोई कहीं महामहिम राज्य पाल बना बैठा है तो कोई कहीं। अब जम्मू काश्मीर के राज्यपाल बनने के लिए लाबिंग जारी है। पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि टी.के.नायर, दुल्लत, संधु जैसे माननीय जेएण्डके में लाट साहब बनने को आतुर दिख रहे हैं। (साई फीचर्स)

सोमवार, 1 अप्रैल 2013

दिग्‍गी राजा का पांसा, सोनिया को फांसा


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

राजा ने फेंका पांस सोनिया को फांसा!
कांग्रेस में उपरी स्तर पर सब कुछ सामान्य नहीं है। सत्ता का हस्तांतरण सोनिया गांधी से राहुल गांधी की ओर हो रहा है। राहुल के नवरत्नों में नए लोगों की आमद ने पुराने चावलों को नाराज कर दिया है। कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10, जनपथ (सोनिया का आवास) के सूत्रों ने इस बात के संकेत दिए हैं कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हार से सोनिया गांधी राजा दिग्जिवय सिंह से इस कदर नाराज थीं कि वे उन्हें वापस मध्य प्रदेश भेजने पर आमदा थीं। सोनिया के विरोध के बाद भी राहुल गांधी ने अपने अघोषित राजनैतिक गुरू रहे राजा को अपनी अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समीति में तो स्थान दे दिया पर वे उनकी किचिन कैबनेट में स्थान नहीं पा सके। हाल ही में एक निजी चेनल के साथ चर्चा के दौरान राजा ने सोनिया के दो पावर सेंटर को फेल्युअर बताकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। अब सोनिया बैकफुट पर हैं, राजा जो अर्जुन सिंह के बाद के कांग्रेसी चाणक्य ठहरे!

बाजपेयी की विरासत पर नाज करते कांग्रेसी!
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार 2004 में सत्ता में आई। इसके उपरांत कांग्रेस ने विकास की आधारशिला रखकर देश को आगे बढ़ाने का दावा किया जाने लगा। वस्तुतः विकास की सारी योजनाओं की आधारशिला पूर्व में राजग के शासनकाल में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने रखी थी। सड़क और रेल कारीडोर से संपूर्ण भारत को जोड़ने की अभिनव योजना का श्रीगणेश बाजपेयी के शासनकाल में ही हुआ था। देश की योजनाओं में भ्रष्टाचार का पलीता अवश्य लगाया है कांग्रेसनीत संप्रग सरकार ने। संप्रग और कांग्रेस के खिलाफ लोगों का गुस्सा अब सतह पर है। अण्णा हजारे और बाबा रामदेव केे आंदोलनों ने कांग्रेस को हिलाकर रख दिया है। अब कांग्रेस के नुमाईंदों को चुनाव जीतने तक की चिंता सताने लगी है। उधर, हालातों से डरे राहुल गांधी ने भी पीएम बनने से इंकार कर दिया है, तब मनमोहन सिंह तीसरी पारी का सपना देखकर खुश अवश्य हो सकते हैं।

पीहर पर मेहरबान मनमोहन
देश के सियासी गलियारों में एक बात घुमड़ रही है कि आखिर भारत सरकार आखिर इतालवी नागरिकों पर इतनी मेहरबानी क्यों दिखा रही है? इसका सीधा सा उत्तर दिया जा रहा है क्योंकि इटली देश में कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी का पीहर जो ठहरा। एक आरटीआई कार्यकर्ता ने जानना चाहा है कि देश में बंद किसी नागरिक को क्या ईद या दीवाली मनाने उसके देश भेजा जा सकता है? जिस तरह क्रिसमस मनाने इतालवी नागरिकों को भेजा गया था। इसके बाद उन दोनों को वोट डालने कैसे भेजा गया? क्या दोनों चुनाव लड़ रहे थे। अगर मताधिकार की इतनी चिंता थी तो पोस्टल वैलेट से काम चलाया जा सकता था? दो देशों के बीच संधि क्या है इस बारे में भी भारत सरकार मौन है। लगता है मानो देश के संविधान को एक तरफ रखकर अघोषित संविधान बनाकर उस पर देश चलाया जा रहा है।

उत्तर भारत में कांग्रेसी सांसदों की बगावत!
उत्तर भारत के कांग्रेसी सांसद अब सदन में अपनी अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी की गरिमा का भी ध्यान नहीं रख पा रहे हैं। रेल बजट पेश किया कांग्रेस के मंत्री पवन बंसल ने 17 साल बाद। बावजूद इसके अपने क्षेत्र की उपेक्षा से नाराज उत्तर प्रदेश के सांसद जगदंबिका पाल ने सोनिया की उपस्थिति में अपनी कमीज उताकर अफसरों को लानत मलानत भेजी और यहां तक कह डाला कि उन्हें वहां से चुनाव जीतना है। सोनिया गांधी ने स्थिति को भांपा और उन्हें अपने आसन पर बैठने का आदेश दिया। वे बैठ तो गए पर अचानक वे फिर खड़े हुए तब सोनिया गांधी ने शीला पुत्र सांसद संदीप दीक्षित को उन्हें चुप कराने भेजा। उत्तर भारत के कांग्रेस के सांसद सकते में हैं कि इन परिस्थितियों में उनकी वैतरणी पार कैसे लगेगी? उत्तर भारत में कांग्रेस के सांसदों में अगर विद्रोह के स्वर प्रस्फुटित हो जाएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

एनडी की शरण में नेताजी
कांग्रेस के आला क्षत्रप 88 साल के नारायण दत्त तिवारी को भले ही कांग्रेस बेकार समझ रही हो, किन्तु तिवारी को इस समय नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव झेल रहे हैं। इसका कारण यह है कि नारायण दत्त तिवारी पुराने समाजवादी जो ठहरे। तिवारी का नैनीताल क्षेत्र में जलजला है। कहा जाता है कि वे अटल बिहारी बाजपेयी की तरह ही नैनीताल से बिना चुनाव प्रचार के भी जीत दर्ज करवा सकते हैं। उत्तर प्रदेश से चार बार सीएम रहे तिवारी लंबे समय तक उत्तर प्रदेश सरकार के सरकारी मेहमान बने रहे। नेताजी अल्प संख्यकों को तो साध चुके हैं सूबे के ब्राम्हण वोटों के लिए वे तिवारी का उपयोग करना चाह रहे हैं। नेताजी इन दिनों तिवारी पर इस कदर फिदा है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने तिवारी के एक पुरानी कोठी के जीर्णोद्धार में एक करोड़ रूपए से ज्यादा की रकम फूंक दी है। किसी ने सही ही कहा है कि नेताजी को नगीनों की परख अन्य लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा है।

राकांपा की उड़ती नींद का राज
महाराष्ट्र में सब कुछ ठाकरे ब्रदर्स की मर्जी के हिसाब से ही चलता है। वे चाहें जिसे गालियां दें जिसे मारें पीटें देश का कानून भी उनके आड़े नहीं आ सकता है। पिछले दिनों ठाकरे ब्रदर्स में से चालाक चपल रााज ठाकरे के साथ भाजपा की गलबहियों ने राकांपा की नीद उड़ाकर रख दी है। सूबे में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, इन परिस्थितियों में अगर राज और भाजपा के बीच समझौता हो गया तो राकांपा और कांग्रेस दोनों ही के लिए खतरे की घंटी बजना स्वाभाविक ही माना जा रहा है। पिछले महीने गोवा में एक मशहूर उद्योगपति गौतम अदानी के बेटे की शादी में टेबिल पर राज ठाकरे के साथ नरेंद्र मोदी को देखकर सभी का माथा ठनका। दोनों के बीच क्या बात हुई यह तो दोनों ही जाने पर राज ठाकरे ने अब उत्तर भारतीयों को छोड़ अपनी तोप का मुंह एनसीपी के मंत्रियों की ओर कर दिया है। मीडिया मैनेजमेंट में माहिर राज की इस चाल से राकांपा की नींद उड़ना स्वाभाविक ही माना जा रहा है।

अण्णा की बखिया उधेड़ने में लगी कांग्रेस
कांग्रेस की नींद हराम करने वाले अण्णा हजारे के खिलाफ अब कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर जहरबुझे तीर चलाना आरंभ कर दिए हैं। कांग्रेस मुख्यालय के सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के एक धड़े को अण्णा हजारे को बदनाम करने का काम सौंपा गया है। इस धड़े ने अण्णा की जन्मपत्री निकालना आरंभ कर दिया है। सूत्रों ने कहा कि अण्णा हजारे ने तीसरी बार अपनी नई टीम के लिए स्वयं सेवकों को भर्ती करना आरंभ किया है। इसके पहले उन्होने 1992 में पहली बार और 1997 में दूसरी बार लोगों की भर्ती की थी। आज अण्णा के साथ पहली दो भर्तियों के लोग नहीं है। अण्णा और अरविंद केजरीवाल के अलग होने की कहानी यह बताई जा रही है कि अण्णा भाजपा के रिमोट से चल रहे थे, पर केजरीवाल भाजपा पर हमला बोल रहे थे, यही कारण था कि केजरीवाल से अण्णा अलग हो गए। इन बातों के कितनी सच्चाई है यह तो वे ही जाने पर जब अफवाहें फैलती हैं तो अच्छे अच्छे मजबूत दरख्त भी उखड़ जाते हैं।

हुड्डा की नाक में दम करतीं शैलजा!
हरियाणा सूबे की दलित केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा ने इन दिनों सूबे के निजाम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की नाक में दम कर रखा है। कहा जाता है कि हुड्डा द्वारा शैलजा के संसदीय क्षेत्र की घोर उपेक्षा की जा रही है। एक दशक पहले कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी की करीबी रहीं कुमारी शैलजा इस समय उपेक्षित पड़ी हैं। हरियाणा के दलितों को उनका वाजिब हक ना मिल पाने की शिकायत उन्होंने कई बार कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से की है। हर बार शैलजा को मुंह की ही खानी पड़ी है। हुड्डा और शैलजा के बीच रार इस कदर बढ़ चुकी है कि पिछले माह जब महामहिम राष्ट्रपति सूरजकुंड मेले के उद्घाटन के लिए आए तब भी शैलजा को राज्य सरकार ने आमंत्रित ही नहीं किया। शैलजा ने हुड्डा के विरोधियों से भी हाथ मिलाए पर इसका कुछ लाभ नहीं हुआ। ना तो सोनिया गांधी और ना ही मनमोहन सिंह इस बारे में कुछ सुनने को तैयार दिख रहे हैं।

ठाकुरों का वर्चस्व दिखने लगा महाकौशल में!
देश के हृदय प्रदेश की संस्कारधानी मानी जाता है जबलपुर को। जबलपुर और आसपास के जिलों को मिलाकर महाकौशल अंचल अप्रत्यक्ष तौर पर आज भी अस्तित्व में समझा जाता है। इस महाकौशल पर कांग्रेस की तरफ से आजादी के उपरांत पंडित द्वारका प्रसाद मिश्रा का बोलबाला था तो फिर यहां पंडित गार्गीशंकर मिश्र और विमला वर्मा की तूती बोली। नब्बे के दशक के आरंभ होते ही महाकौशल पर छिंदवाड़ा के सांसद कमल नाथ का दबदबा बढ़ने लगा। अब एक बार फिर वर्चस्व की जंग में महाकौशल में ठाकुर लाबी हावी होती दिख रही है। महाकौशल के अधिकांश कांग्रेसी नेता अब अपनी आस्था बदलते दिख रहे हैं। कोई राजा दिग्विजय सिंह को अपना आका मान रहा है तो कोई अजय सिंह राहुल का दामन थाम रहा है। बचे खुचे नेता मनराखनलाल हरवंश सिंह की शरण में जाना पसंद कर रहे हैं।

मोदी की राह में शिव का रोढ़ा!
भाजपा में शीर्ष स्तर पर गुजरात के निजाम नरेंद्र मोदी ने अपना सिक्का जमा लिया है। नरेंद्र मोदी की उपरी स्तर पर स्वीकार्यता लगभग तय हो चुकी है। मोदी की राह में बस एक ही रोढ़ा नजर आ रहा है वह हैं एमपी के निजाम शिवराज सिंह चौहान। सीधी साधी छवि वाले पांव पांव वाले भईया शिवराज सिंह चौहान लोकप्रियता के मामले में नरेंद्र मोदी से बीस ही नजर आ रहे हैं। गुजरात चुनाव में नरेंद्र मोदी हाईटेक हुए तो अब शिवराज उनसे दो कदम आगे निकलने आतुर दिख रहे हैं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विधानसभा चुनाव के दौरान एक साथ 250 स्थानों पर सभाएं संबोधित करते नजर आएंगे। हाईटेक तरीके से होने वाले इस चुनाव प्रचार में चौहान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से भी आगे रहेंगे, क्योंकि मोदी ने एक साथ सिर्फ 53 सभाओं को ही संबोधित किया था। वहीं कहते हैं कि सुषमा स्वराज को अपनी सींची गई विदिशा संसदीय सीट देकर बहुत दूर की कौडी खेली थी शिवराज ने।

पुच्छल तारा
होली के अवसर पर देश भर में जमकर धूम हुई लोगों ने जमकर भांग मदिरा का सेवन किया। इंटरनेट पर सोशल नेटवर्किंग वेब साईट भी इससे अछूती नहीं रही। एक पोस्ट ने कांग्रेस की हालत बयां कर दी। इस पोस्ट में कांग्रेस के अखिल भारतीय स्तर से जिला स्तर के संगठन को बयां किया गया है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी जिसे एआईसीसी कहा जाता है को ये आई शीशी कहा गया। प्रदेश की कांग्रेस समिति तो पीसीसी कहा जाता है को पी शीशी कहा गया और फिर जिला कांग्रेस कमेटी को डीसीसी कहा जाता है को शीशी को पीने के बाद फेंकने वाले अंदाज में दी शीशी कहा गया है। (साई फीचर्स)

सोमवार, 25 मार्च 2013

तिवारी भी नहीं चाह रहे वर्मा का उदय!


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

तिवारी भी नहीं चाह रहे वर्मा का उदय!
सूचना प्रसारण मंत्रालय में जमकर घमासान मचा हुआ है। इसका कारण एमपी काडर के वरिष्ठ आईएएस आई एण्ड बी सेकेरेटरी उदय वर्मा का रवैया है। दिल्ली के हृदय स्थल में अवस्थित शास्त्री भवन में मंत्रालय का माहौल इस समय खिंचा खिंचा सा नजर आ रहा है। दरअसल, उदय वर्मा वैसे तो मिलनसार और गहरी सोच समझ वाले हैं पर उनके इर्द गिर्द रहने वालों ने उनकी छवि कुछ तानाशाह सी बना रखी है। पिछले दिनों प्रगति मैदान में ब्राडकास्टिंग इंजीनियर्स सोसायटी के पुरूस्कार वितरण समारोह में लगभग दो हजार केबल आपरेटर्स ने उदय वर्मा हाय हाय के नारे लगाए थे, तबसे विभागीय मंत्री मनीष तिवारी की नजरें भी उदय वर्मा की ओर तिरछी हो गईं हैं। आईएण्डबी मिनिस्ट्री में अफसरों के स्थानांतरण की नई नीति से भी विभागीय अफसर भी उदय वर्मा से बुरी तरह खफा हैं। अब मनीष तिवारी भी उदय वर्मा की बातें सुनने तैयार नहीं दिख रहे हैं।

दिग्गी राजा की बैटरी से चमक रहा बेनी बाबू का लट्टू!
उत्तर प्रदेश की सियासत में अब जमीनी स्तर पर चलने वाली लहरें विकराल रूप धारण कर सतह पर घुमड़ने लगी हैं। इन लहरों के शोर और आवेग के झंझावत में केंद्र सरकार के नए समीकरण अमृत मंथन के रूप में सामने आने की उम्मीद लग रही है। 2014 के आम चुनावों में उत्तर प्रदेश एक निर्णायक की भूमिका में होगा इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। यूपी से सियासत करने वाले केंद्रीय मंत्री बेनी वर्मा ने पहले नेताजी यानी मुलायम यादव को गुंडा कहा। फिर बासी कढ़ी में उबाल आया, बाद में सब कुछ सामान्य। एक बार फिर बेनी वर्मा ने अपनी खुन्नस को सार्वजनिक किया है। अब बेनी ने नेताजी पर जनता के बजाए परिवार का भला करने के आरोप मढ़े हैं। केंद्र सरकार इस समय डीएमके के साथ पतली डोर से बंधी है, तब मुलायम की आक्सीजन पर वह जिंदा है, इन परिस्थितियों में नेताजी को नाराज करना यानी स्वाईडल अटेम्पट। कहा जा रहा है कि इक्कसवीं सदी में कांग्रेस के चाणक्य राजा दिग्विजय सिंह बेनी बाबू के कंधे का इस्तेमाल कर अपना हित साध रहे हैं।

10 जनपथ के बजाए 12 तुगलक लेन!
कांग्रेस में अब सत्ता का हस्तांतरण अघोषित तौर पर हो चुका है। कांग्रेस के अंदर सत्ता की धुरी अब राहुल गांधी के आसपास आकर सिमट चुकी है। कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ (सोनिया गांधी का सरकारी आवास) के बजाए अब 12 तुगलक लेन (राहुल गांधी का सरकारी आवास) बन गया है। सोनिया के करीबी सूत्रों का कहना है कि अब उनसे मिलने जाने वाले नए पुराने कांग्रेसियों को सोनिया गांधी ने हिदायत देना आरंभ कर दिया है कि जो भी बात कहना हो अब सीधे राहुल गांधी से कही जाए। सोनिया के करीबी या उनसे मिलने वाले उन कांग्रेसियों की बुरी गत हो रही है जिनका राहुल गांधी से कोई वास्ता ही नहीं रहा है। अब उन्हें नए सिरे से गोटियां बिठाकर राहुल गांधी से मिलने मशक्कत करना पड़ रहा है। वैसे सोनिया गांधी के इर्दगिर्द फैले चाटुकारों के चेहरों पर पसीना साफ झलक रहा है क्योंकि उनकी तूती बोलना बंद जो हो गया है।

इसलिए नाथ ने साधा चिदम्बरम को!
दो केंद्रीय मंत्रियों के बीच रार किसी से छिपी नहीं है। एक हैं पलनिअप्पम चिदम्बरम दूसरे हैं कमल नाथ। कुछ माह पहले दोनों की आपस में जुगलबंदी की खबरें आम हुंई तो सियासी हल्कों में इसके मायने खोजे जाने लगे। कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर कहा कि दरअसल, सोनिया के मनमोहन सिंह अब आगे ज्यादा चल नहीं पाएंगे। राहुल गांधी को पीएम बनने में अभी काफी समय है। इस बीच के अंतराल में राहुल के मनमोहन बनेंगे चिदम्बरम। अब चिदम्बरम जब पीएम बनेंगे तो उन्हें पहले से ही साध लिया जाए तो बेहतर है। दुनिया के चौधरी अमरीका से प्रकाशित एक किताब में भी चिदम्बरम को पीएम इन वेटिंग बताया गया था। यह मनगढंत या प्लांटेड स्टोरी नहीं थी। बाकायदा इसके लिए चिदम्बरम द्वारा यूएस में लाबिंग भी की गई बताई जा रही है। कहते तो यहां तक हैं कि देश में मंत्री और उनका विभाग दिल्ली में नहीं वरन् अमरीका के व्हाईट हाउस में तय होता है!

खूनी होली की फिराक में आतंकी!
पचहत्तर में आई सुपर डुपर हिट फिल्म शोले का डायलाग आज प्रासंगिक होता दिख रहा है जिसमें डाकुओं का सरदार गब्बर कहता है होली कब है कब है होली। देश में अब डाकू तो नहीं बचे पर उनका स्थान आतंकवादियों ने ले लिया है। पुलिस की स्पेशल सेल के सूत्रों का दावा है कि होली के मौके पर खून की नदियां बहाने की फिराक में नजर आ रहे हैं आतंकी। दिल्ली में जामा मस्जिद के पास सीसीटीवी केमरे में कुछ संदिग्ध कार और बाईक नजर आए हैं जिनसे हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया गया हो। पुलिस ने तलाशी तेज कर दी है। उधर, मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में एटीएस द्वारा पांच संदिग्ध लोगों को धरा है। इनके पास से सवा सौ से ज्यादा जिंदा बम और हथियार मिले हैं। हो सकता है सिवनी के तार दिल्ली से भी जुड़ जाएं। सूत्रों की मानें तो दिल्ली के एक गेस्ट हाउस में 20 मार्च को चार बजकर एक मिनिट पर एक आतंकी एक बैग के साथ अंदर घुसा था। सूत्रों की मानें तो हिजबुल मुजाहिद्दीन के सैयद लियाकत शाह के पास पाक अधिकृत कश्मीर की एक मोबाईल सिम भी मिली है।

प्रणव मुखर्जी को हल्के में लेने लगे कांग्रेसी!
भारत में पहला नागरिक का दर्जा है रायसीना हिल्स स्थित महामहिम राष्ट्रपति के आवास में रहने वाले को। वर्तमान में यह प्रणव मुखर्जी का आशियाना बना हुआ है। प्रणव मुखर्जी जब तक कांग्रेस के ट्रबल शूटर रहे तब तक कांग्रेसी उनके आगे मिमियाते देखे गए, पर जबसे वे रायसीना हिल्स गए हैं कांग्रेसियों ने उन्हें हल्के में लेना आरंभ कर दिया है। प्रणव मुखर्जी भले ही भारत गणराज्य के संवैधानिक प्रमुख हों, पर कांग्रेसनीत संप्रग सरकार के लिए वे महत्वपूर्ण नहीं हैं। संसद सत्र के पूर्व उनके अभिभाषण को जब कैबनेट में मंजूरी देने की बारी आई तो अनेक मंत्री नदारत ही थे। शरद पवार दिल्ली में नहीं थे, कुमारी शैलजा और श्रीप्रकाश जायस्वाल क्षेत्र में थे, किशोर चंद देव उड़ीसा दौरे पर थे, और अनेक मंत्री कैबनेट में नहीं थे। क्या यह संभव है कि इन मंत्रियों को यह ना बताया गया हो कि फलां तारीख को अभिभाषण को मंजूरी का एजेंडा कैबनेट में रखा जाएगा!

पहला पत्थर वो मारे जिसने पाप ना किया हो . . .
राजेश खन्ना मुमताज अभिनीत एक फिल्म का गाना था कि पहला पत्थर वो मारे जिसने पाप ना किया हो जो पापी ना हो। कांग्रेस द्वारा बच्चों के कुपोषण के मामले में गुजरात पर घेरा कसा जा रहा है। इसका आधार संसद में रखी एक रिपोर्ट को बनाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि गुजरात में बच्चों के कुपोषण की तादाद सबसे ज्यादा है। गुजरात के निजाम नरेंद्र मोदी हैं, जिनके पास दिमाग और संसाधन वाले लोगों की कमी नहीं है। मोदी ने तत्काल इसकी काट निकलवाई और कांग्रेस को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब इस आरोप का जवाब आ रहा है कि देश की नेशनल केपीटल दिल्ली में ही पचास फीसदी बच्चे कुपोषित हैं। गौरतलब है कि देश की राजनैतिक राजधानी होने के कारण दिल्ली को केंद्र सरकार द्वारा आधारभूत विकास और हर मद में अतिरिक्त आवंटन दिया जाता है। बावजूद इसके दिल्ली में अगर पचास फीसदी बच्चे कुपोषित हैं तो यह कांग्रेस और शीला दीक्षित के लिए शर्म कही ही बात है।

मठों को साढ़े चार सौ करोड़ का चढ़ावा!
सरकारी धन की होली किस तरह खेली जाती है और राजनैतिक दल के नुमाईंदे किस तरह अपने निहित स्वार्थ सधते ही खामोशी अख्तियार कर लेते हैं इस बात को देखना है तो आप कर्नाटक जाईए और वहां देखिए नजारा। भारत के महालेखा परीक्षक यानी सीएजी के प्रतिवेदन से साफ हो जाता है कि 2008 के बाद कर्नाटक में जबसे भाजपा का शासन आया है, तबसे वहां सरकार ने जनता के धन से संचित धन की जमकर होली खेली है। अब तक लगभग साढ़े चार सौ करोड़ रूपए की होली खेली जा चुकी है। यह धन विभिन्न मठों को दिया है सरकार ने। इसमें सबसे ज्यादा पैसा येदियुरप्पा और जगदीश शेट्टर वाले समुदाय यानी लिंगायत समुदाय के मठ को सबसे अधिक चंदा सरकार ने दिया है। मजे की बात तो यह है कि राज्य में निजी तौर पर संचालित मठ मंदिरों को सरकार ने वर्ष 2010 - 2011 में 52 करोड़ रूपए का चंदा दिया है।

पसीना आ रहा है सिंह को टीम राजनाथ बनाने में!
राजनाथ सिंह को अपनी टीम बनाने में पसीना आ रहा है। इसका कारण यह है कि टीम राजनाथ के सिर पर ही अगला आम चुनाव होगा। इसके लिए क्षेत्रीय संतुलन के साथ ही साथ बड़े नेताओं का समन्वय भी बनाना आवश्यक है। राहुल गांधी को कांग्रेस ने उपाध्यक्ष बना दिया है तो अब वरूण गांधी को महत्वपूर्ण स्थान देने दबाव बढ़ा है। राजनाथ को मीडिया अनुभाग में भी दमदार व्यक्त्वि को लाना मजबूरी होगा। राजनाथ के सामने मध्य प्रदेश सबसे बड़ा संकट पैदा कर रहा है। देश के हृदय प्रदेश से पूर्व अध्यक्ष प्रभात झा, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और अनुसूचित जाति से थांवर चंद गहलोत दावेदारी पेश कर रहे हैं। टीम राजनाथ भले ही बन जाए पर जब तक इसे एल.के.आड़वाणी, सुषमा स्वराज, अरूण जेतली, एम.एम.जोशी, नरेंद्र मोदी, वेंकैया नायडू, अनंत कुमार जैसे दिग्गज पास ना कर दें तब तक राजनाथ सिंह इसे घोषित नहीं कर सकते हैं।

क्या लोगों को मारने के लिए पैदा हो रही बिजली!
देश भर में बिजली की कमी दूर करने पावर प्लांट्स की स्थापना करवाई जा रही है। वहीं  पर्यावरण मामलों की जानी-मानी संस्था ग्रीनपीस और अर्बन इमिशंस द्वारा मुंबई के कंजर्वेशन एक्शन ट्रस्ट की अगुवाई में की गई एक स्टडी से अनेक चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश मे डले पावर प्लांट्स से उत्सर्जित उर्जा, विकिरण, धुआं, राख आदि तमाम कारणों से अकेले 2011-12 में ही करीब एक लाख लोग अकाल मौत के शिकार हो गए। इसके अलावा लाखों अन्य लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं और इनके इलाज पर हर साल आम जनता का करीब 23 हजार करोड़ रुपया खर्च हो रहा है। कोयला आधारित पावर प्लांट्स के कारण होने वाली मौतों और बीमारियों के बारे में यह देश की पहली व्यापक स्टडी है। इसमें 111 पावर प्लांट्स से जुड़े आंकड़ों को शामिल किया गया है।

पुच्छल तारा
देश में महात्मा गांधी को सभी आदर से देखते हैं। बापू की सादगी और साफगोई पर सभी मर मिटे थे। आधी लंगोटी वाले बापू ने गोरे ब्रितानियों को देश से खदेड़ दिया था। आज बापू नहीं है, पर उनकी यादें अवश्य ही हमारे बीच हैं। सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर एक चुटकुला गुदगुदाने पर मजबूर कर रहा है। इसमें लिखा था -
एक बार एक व्यक्ति खून के इल्जाम में पकड़ा गया। उसने बापू से कहा कि वह बेगुनाह है उसे बचाया जाए। बापू ने उसका केस लड़ा और वह बईज्जत बरी हो गया। वह खुशी से फूला नहीं समाया और बोला -बापू आज तो आपने मुझे बचा लिया, पर कल जब आप नहीं होंगे तब बेगुनाहों को कौन बचाएगा?
बापू मुस्कुराए और बोले चिंता मत करो। आने वाले समय में जिस कांग्रेस को मैने भंग करने की सिफारिश की थी उसी कांग्रेस के नेता नोट पर मेरी मुस्कुराती फोटो लगाएंगे, और तब किसी को भी बचाने के लिए मेरी मुस्कुराते हुए नोट वाली फोटो ही काम आने वाली है।

सोमवार, 18 मार्च 2013

मीडिया मैनेजमेंट में मास्टर हैं मोदी


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

मीडिया मैनेजमेंट में मास्टर हैं मोदी
भाजपा के नए उभरते नेता नरेंद्र मोदी इस समय मीडिया पर छाए हुए हैं। उनके मीडिया सलाहकार उनकी छवि का निर्माण जमकर करने पर तुले हुए हैं। सोशल मीडिया में अनेक एकाउंट्स बनाकर मोदी को देश का सबसे ताकतवर नेता प्रोजेक्ट किया जा रहा है। वहीं कांग्रेस इस मामले में बुरी तरह पिछड़ती नजर आ रही है। भाजपा में नरेंद्र मोदी के समकक्ष समझे जाने वाले शिवराज सिंह चौहान, डॉ.रमन सिंह और सुषमा स्वराज का मीडिया मैनेजमेंट कमजोर ही है। सोशल मीडिया में कांग्रेस पर एक के बाद एक वार करते हुए नरेंद्र मोदी की टीआरपी (टेलीवीजन रेटिंग प्वाईंट) बढ़ाने का काम अनेक एजेंसियों के हवाले है। गुजरात का जनसंपर्क महकमा भी उनके लिए मीडिया को साधे हुए है। वहीं दूसरी ओर शिवराज का मीडिया प्रबंधन जीरो ही नजर आ रहा है। शनिवार को दिन भर एक निजी चेनल पर नरेंद्र मोदी ही छाए रहे। जानकार इसे मोदी के विज्ञापन के बतौर ही देख रहे हैं, पर आम दर्शक तो मंत्रमुग्ध होकर उन्हें देख सुन रहे हैं।

गुरू गुड़ चेला हो गए शक्कर!
उड़ीसा के निजाम नवीन पटनायक बेहद परेशान हैं। इसका कारण उनका पर्स चोरी होना है। पर्स का तातपर्य उनके अघोषित खजांची का उनसे टूटकर जाना है। चर्चा है कि नवीन पटनायक के सारे हिसाब किताब रखने वाले प्यारी मोहन महापात्र अब उनके साथ नहीं हैं। नवीन पटनायक द्वारा वैध अवैध तरीके से संचित धन महापात्र के साथ ही चला गया। अब पटनायक को पास पाटी चलाने के लिए भी लाले पड़ रहे हैं। उधर, महापात्र ने नवीन से सारे गुर सीखकर उड़ीसा जनमोर्चा का गठन कर नवीन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। महापात्र का कहना है कि अगर वे सत्ता में आए तो पश्चिमी उड़ीसा को स्वायत्ता दिलाने के साथ ही साथ संबलपुरी भाषा को राजभाषा का दर्जा भी दिलवाएंगे। इतना ही नहीं पश्चिमी उड़ीसा में एक अलग हाईकोर्ट भी होगा। महापात्र चूंकि नवीन के साथ रहे हैं अतः उन्हें नवीन के बारे में सारी जानकारियां हैं, यही कारण है कि वे अपने भाषणों में इशारों ही इशारों में पटनायक को पटखनी दे रहे हैं।

कौन भोगेगा चालीस हजार का भोगमान!
सरकारी खजाने से भले ही एक रूपए की फिजूलखर्ची की जाए या एक करोड़ की, दोनों ही अवैध है। केंद्र के एक चर्चित मंत्री के विभाग में उनके काफिले की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। उसके सुधार में खर्च होने वाले चालीस हजार रूपए की रकम का भोगमान कौन भोगे इस बारे में अब सब बगलें झांकते नजर आ रहे हैं। दरअसल, दिल्ली सहिए देश भर में नामी स्कूल की एक चेन के प्रमुख रहे वर्तमान में केंद्र में विवादस्पद मंत्री के कान्वाय की एक कार को उनके जानने वाले चहेते अपने निजी उपयोग में ला रहे थे। दिल्ली के एक अखबार के अनुसार उक्त बड़बोले मंत्री के कथित चम्मच उनके मंत्रालय की कार का उपयोग अपने रिश्तेनाते दारों को एयरपोर्ट छोड़ने के लिए कर रहे थे, रास्ते में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई। कार की मरस्मत पर चालीस हजार रूपए का खर्च आया। अब मंत्रालय संशय में है कि वह बिल के भुगतान के लिए मंत्री जी से कहे तो कैसे?

ठाकुरों से पल्ला झाड़ते अखिलेश!
उत्तर प्रदेश में कभी ठाकुरों का बोलबाला हुआ करता था। कांग्रेस ने सदा ही ठाकुरों को सर माथे पर बिठाया तो अब भाजपा ने अपनी नैया राजनाथ सिंह के हाथों में देकर ठाकुरों को लुभाने का जतन किया है। इससे उलट उत्तर प्रदेश के निजाम अखिलेश यादव ने अब उल्टी सोशल इंजीनियरिंग करना आरंभ कर दलितों को लुभाने का प्रयास किया है। अखिलेश यादव ने ठाकुरों को पदावनत करना आरंभ किया है ताकि पिछड़ी जाति के लोग सपा का साथ खुलकर दे पाएं। हाल ही में अखिलेश ने तीन ठाकुर मंत्रियों के पर कतरे हैं। परिवहन मंत्री दिनेश सिंह को स्टाम्प और पंजीयन, राजा भैया से जेल मंत्रालय वापस लिया गया तो राज किशोर सिंह को ग्रामीण इंजीनियरिंग से हटा दिया गया है। माना जा रहा है कि अगामी लोकसभा चुनावों में अगड़ों के बजाए पिछड़ों को अपने करीब लाने का यह पहला कदम है।

देश के सबसे गरीब निजाम!
देश में अनेक राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया है। हर कहीं सीएम लखपति और करोड़पति निकल रहे हैं। एसे में एक मुख्यमंत्री एसे भी सामने आए हैं जो सबसे गरीब सीएम कहकर पुकारे जा सकते हैं। त्रिपुरा के निजाम मानिक सरकार देश के सबसे गरीब मुख्मयंत्री हैं। उनके मंत्रीमण्डल में शामिल उनके सारे सहयोगी उनसे कहीं ज्यादा अमीर हैं। सरकार के पास ना घर है ना कार। वे आने जाने में सरकारी वाहन का प्रयोग करते हैं तो उनकी सरकारी सेवा से रिटायर पत्नि आवागमन के लिए बस या आटो का प्रयोग करती हैं। 2003 में उनके पास महज 3000 रूपए थे और 2013 में उनकी जमा पूंजी 1080 रूपए है। वे अपना सारा वेतन पार्टी को दान दे देते हैं बदले में पार्टी उन्हें पांच हजार प्रतिमाह देती है। मानिक सरकार के पास ना तो मोबाईल है और ना ही उनके पास कोई इंटरनेट पर ईमेल एकाउंट। हैं ना इक्कीसवीं सदी में पहला एसा नायाब मुख्यमंत्री भारत में।

यूपी ही बना राजनाथ के लिए परेशानी का सबब!
उत्तर प्रदेश से आते हैं भाजपा के नए निजाम राजनाथ सिंह। राजनाथ सिंह को अपनी टीम बनाने में पसीने आ रहे हैं। उनकी पेशानी पर छलकती पसीने की बूंदें उत्तर प्रदेश के कारण होने वाली परेशानी की साफ साफ चुगली करती दिख रही है। दरअसल, उत्तर प्रदेश राजनाथ सिंह का गृह प्रदेश है और वर्तमान में उत्तर प्रदेश से काफी सारे नेता कार्यकारिणी में हैं और पदाधिकारी भी हैं। अब राजनाथ अगर किसी उत्तर प्रदेश के नेता को ड्राप करते हैं तो उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इन परिस्थितियों में वे अपनी पसंद के नेता को भी स्थान देते हैं तो उन पर भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बजाए उत्तर प्रदेश राज्य भाजपा के गठन के आरोप लगने लगेंगे। अभी मुख्तार अब्बास नकवी, विनय कटियार, कलराज मिश्र उपाध्यक्ष हैं। राजनाथ के करीबी रमापति राम त्रिपाठी अपने लिए लाबिंग कर रहे हैं उधर कल्याण सिंह भी लंगोट लगाकर तैयार खड़े हैं।

झल्लाने लगे हैं मोहन प्रकाश!
हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए मोहन प्रकाश पता नहीं क्यों काफी झल्लाए झल्लाए दिख रहे हैं। उनकी झल्लाहट का आलम यह है कि वे अपने आगे कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के सियासी मददगार अहमद पटेल और कांग्रेस प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी को भी कुछ नहीं समझ रहे हैं। मोहन प्रकाश गुजरात में कांग्रेस के औंधे मुंह गिरने पर अहमद पटेल को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। गुजरात की हार के बारे में जब उनसे पत्रकार प्रश्न करते हैं तो वे झल्लाकर कह उठते हैं जाईए अहमद पटेल से जाकर पूछिए। इसी तरह लगता है मोहन प्रकाश के रडार पर कांग्रेस प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी भी हैं। एक मर्तबा जब पत्रकारों ने उन्हें उकसाते हुए किसी मामले में उनका और कांग्रेस का पक्ष जानना चाहा तो लगभग चिल्लाते हुए मोहन प्रकाश बोल पड़े-‘‘आपको मैं कांग्रेस का प्रवक्ता दिखता हूं, क्या? जाईए इस बारे में जनार्दन द्विवेदी से पूछिए वह हैं कांग्रेस के आधिकारिक प्रवक्ता।‘‘

अव्यवस्था छाई रही भाजपा अधिवेशन में
भारतीय जनता पार्टी के तालकटोरा स्टेडियम में हुए अधिवेश में अव्यवस्थाएं जमकर हावी रहीं। दिल्ली भाजपाध्यक्ष विजय गोयल इस आयोजन के बाद राजनाथ सिंह की ब्लेक लिस्ट में शामिल होते दिख रहे हैं। समूचे अधिवेशन में टेंट, खाना पीना, पावर बैकअप, परिवहन आदि हर मामले में पदाधिकारियों को असुविधा का सामना करना पड़ा। आड़वाणी और राजनाथ समर्थकों ने आला नेताओं को अपना दर्द बयां किया तो दोनों ने इशारों ही इशारों में अपने उद्बोधनों में इस पर प्रकाश भी डाला। अब सवाल यह उठता है कि गोयल की इस तरह भद्द पिटने से ताली कौन पीट रहा था। एक तो सुधांशु मित्तल थे, जिनका टेंट हाउस भाजपा के प्रोग्राम्स में काम आता है, जो इस बार नहीं लिया गया। और दूसरी आरती मेहरा, जो कि खुद को शीला दीक्षित की टक्कर में भाजपा की सीएम इन वेटिंग बनने का ख्वाब देख रही हैं।

नितीश के लिए उजाड़ दिया बाग!
बिहार के निजाम नितीश कुमार पैदा हुए थे एक मार्च को। जिस तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी के जन्म दिवस के बारे में उनके चंद समर्थक ही जानते हैं उसी तरह नितीश भी सादगी पसंद हैं और उन्हें अपने जन्मदिन पर शोर शराबा पसंद नहीं है। उनके जन्म दिवस के बारे में किसी को पता नहीं था। 01 मार्च को जब नितीश विधानसभा पहुंचे तब वहां उद्योग मंत्री रेणु कुमारी ने उन्हें बड़ा सा गुलदस्ता भेंट कर उन्हें जन्म दिवस की बधाई दी। वहां खड़े विधायकों को जब इस बात की भनक लगी वे आनन फानन गुलदस्ते के इंतजाम में जुट गए। गुलदस्ते के आने में देरी को देखकर उन्होंने विधानसभा के बाग में लगे गुलाब के फूल तोड़ना आरंभ किया। माली ने दयनीय हालत में कहा साहब नौकरी चला जाएगा। विधायक कहां मानने वाले थे बोले -अबे तेरा नौकरी की फिकर किसे है, इधर हमारा नौकरी जा रहा है।

लाशों की बुनियाद पर तैयार होती बिजली!
बिजली के संकट से निपटने कोल आधारित पावर प्लांट्स स्थापित किए जा रहे हैं। कोयला आधारित पावर प्लांट्स से निकलने वाले उत्सर्जन के कारण देश में 2011-12 में करीब एक लाख लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। इनमें से करीब 8800 लोग दिल्ली और हरियाणा इलाके के हैं। सूत्रों की मानें तो पर्यावरण मामलों की जानी-मानी संस्था ग्रीनपीस और अर्बन इमिशंस द्वारा मुंबई के कंजर्वेशन एक्शन ट्रस्ट की अगुवाई में की गई एक स्टडी से ये आंकडे़ सामने आए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि इन प्लांट्स की वजह से आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की जिंदगी बहुत तकलीफदेह हो गई है। बुजुर्गों और बच्चों की सेहत पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। आंकलन से साफ हो गया है कि इन पावर प्लांट्स से बड़े पैमाने पर सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पारे के साथ भारी मात्रा में कार्बन और अन्य महीन कण निकलते हैं। इनकी चपेट में आने वाले लोग अस्थमा, सांस और फेफड़ों की दूसरी कई बीमारियों, कैंसर और दिल के रोगों के शिकार हो रहे हैं।

पुच्छल तारा
इस समय सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स पर पत्रकारों की मश्के कसने की खबरें आम हैं। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने पत्रकारों की न्यूनतम योग्यता निर्धारित करने की बात कही है। उन्होंने इसके लिए एक समिति का गठन भी कर दिया है। जस्टिस काटजू के इस कदम से मीडिया की गर्दी छटना स्वाभाविक है। सोशल मीडिया में इस बारे में चिंतन चल रहा है बहस चल रही है। मीडिया में भीड़ तो कम हो जाएगी किन्तु जस्टिस काटजू ने जिस उद्देश्य यह किया है वह तो वे ही जानते होंगे पर एसा करने से क्या उनका उद्देश्य पूरा हो पाएगा। काश वे एसी पहल संसद और विधानसभा चुनावों लड़ने वालों के लिए भी कर पाते।