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बुधवार, 26 मार्च 2014

पहला चरण: नाम वापसी की अंतिम तिथि आज


पहला चरण: नाम वापसी की अंतिम तिथि आज

(सोनल सूर्यवंशी)

भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 9 संसदीय क्षेत्र में हुई नामांकन प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों द्वारा 26 मार्च तक नाम वापिस लिये जा सकेंगे।
पहले चरण में 144 उम्मीदवार ने नाम-निर्देशन पत्र दाखिल किये थे। नामांकन पत्रों की 24 मार्च को हुई स्क्रूटनी के बाद 134 उम्मीदवार शेष रह गये थे। इनमें सतना संसदीय क्षेत्र में 18, रीवा में 17, सीधी में 15, शहडोल में 14, जबलपुर में 15, मण्डला में 11, बालाघाट में 19, छिन्दवाड़ा में 17 और होशंगाबाद के 8 उम्मीदवार शामिल हैं।

मंगलवार, 22 जनवरी 2013

सरकार का दोहरा चेहरा: सड़क को ना, रेल को हां!


सरकार का दोहरा चेहरा: सड़क को ना, रेल को हां!

(महेश)

नई दिल्ली (साई)। एनएचएआई के ठेकेदार इस बात को लेकर परेशान हैं कि उन्हें वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से सड़क बनाने के लिए आवश्यक मंजूरी नहीं मिल पा रही है। इसी के चलते वे काम को बीच में ही छोड़ रहे हैं, वहीं भारतीय रेल का दावा है कि उसकी परियोजनाओं के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का पूरा पूरा सहयोग मिल रहा है।
उल्लेखनीय है कि देश के विभिन्न हिस्सों में माल जल्दी और बिना किसी बाधा के पहुंचाने के लिए रेल मंत्रालय डीएफसी के दो गलियारे बना रहा है। इनमें एक पूर्वी हिस्से को जोडे़गा और दूसरा पश्चिमी हिस्से को। अभी तक जो प्रस्ताव है इसके मुताबिक डीएफसी की योजना 2016 तक शुरू होनी है।
रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनय मित्तल ने डीएफसी की प्रगति को लेकर हुई समीक्षा बैठक में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की खुलकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि डीएफसी के लिए नौ राज्यों के 61 जिलों में करीब 8 हजार एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है। अब तक कुल जमीन का 82 प्रतिशत अधिग्रहण कर लिया गया है। शेष 18 प्रतिशत की भी प्रक्रिया चल रही है। जल्दी ही इसे पूरा कर लिया जाएगा।
मित्तल ने रेल मंत्री को बताया कि डीएफसी के लिए दो अभ्यारण्यों और एक पक्षी अभ्यारण्य से अनुमति मिल गई है। इस काम में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के साथ-साथ महाराष्ट्र एवं गुजरात की सरकारों ने भी बहुत मदद की है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में करीब एक हजार किलोमीटर लाइन का ठेका दे दिया जाएगा। 

शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

फोरलेन के मार्ग प्रशस्त: वर्मा


फोरलेन के मार्ग प्रशस्त: वर्मा

(शिवेश नामदेव)

सिवनी (साई)। सिवनी। फोर लेन निर्माण में आने वाले व्यवधान अब समाप्त होते दिख रहें हैं। प्रदेश वन्य प्राणी बोर्ड ने प्राधिकरण के प्रस्ताव को स्वीकार कर दिल्ली भेज दिया हैं। इसे लेकर जन मानस काफी आदोलित हैं और कई तरह के नकारात्मक प्रचार प्रसार से केन्द्र सरकार के बारे में भ्रम फैलाया जा रहा हैं। इसलिये इसे शीष्र ही स्वीकार कर काम चालू कराया जाये। उक्ताशय की मांग जिले के वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा ने प्रधानमंत्री,राहुल गाध्ंाी,भू तल परिवहन मंत्री सी.पी. जोशी और वन एवं पर्यावरण मंत्री श्रीमती जयंती नटराजन को एक पत्र भेज कर की हैं।
इंका नेता वर्मा ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में आगे उल्लेख किया है कि प्रधानमंत्री स्वर्णिम चर्तुभुज के अंर्तगत उत्तर दक्षिण गलियारे में निर्माणाधीन मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में सिवनी से खवासा के निर्माण कार्य में कुरई घाट में विवाद हो गया था। माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार एन.एच.ए.आई और वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा संयुक्त प्रस्ताव स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड में प्रस्तुत किया गया था। स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने अपनी बैठक दिनांक 28 जुलाई 2012 को इस संशोधित प्रस्ताव को अपनी मंजूरी देकर नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड में प्रस्तुत करने की अनुशंसा कर दी हैं। विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 8 नवम्बर 2012 को यह प्रस्ताव दिल्ली भेज दिया गया हैं।
अपने पत्र में इंका नेता आशुतोष वर्मा ने उल्लेख किया है कि इसे लेकर जिले का जन मानस काफी आंदोलित हें और समय समय पर इस मांग को लेकर जनांदोलन भी होते रहें हैं। पिछले दिनों जब कांग्रेस महासचिव श्री राहुल गांधी जिले के प्रवास में आये थे तब उनके समक्ष भी जोरदार तरीके से इस मांग को रखा गया था। उन्होंने जिलें की जनता को आश्वस्त किया था कि शीघ्र ही इस मांग को पूरा किया जायेगा। राहुल जी के इस आश्वासन से जनता आश्वस्त हो गयी थी कि शीघ्र ही यह मांग पूरी हो जायेगी।
इंका नेता वर्मा ने पत्र में यह भी लिखा हैं कि जिले की जीवन दायिनी कही जाने वाली फोर लेन के इस मामले में बहुत अधिक आधारहीन नकारात्मक प्रचार प्रसार भी हो रहा हैं जिससे केन्द्र सरकार के संबंध में यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि वह इसमें अड़गें लगा रही है। वैसे भी वर्तमान सड़क का पिछले पांच साल से रख रखाव नहीं होने के कारण यह सड़क इतनी अधिक खस्ता हाल हो गयी थी कि इस कारण एन.एच. 7 पर कई बार ना केवल जाम लगा वरन वाहन दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान भी चली गयी थी। 
पत्र के अंत में इंका नेता आशुतोष वर्मा ने अनुरोध किया है कि शीघ्र ही इस प्रस्ताव को नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड से स्वीकृति दिलाने का कष्ट करें ताकि शीघ्र यह महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना पूरी हो सके और समय और ईंधन बचाने के मूल मंत्र के तहत बन रहे इस कॉरीडोर का लाभ जनता को मिल सके।

शनिवार, 22 सितंबर 2012

सरकार को बाय बाय कहा टीएमसी ने

सरकार को बाय बाय कहा टीएमसी ने

(महेश रावलानी)

नई दिल्ली (साई)। तृणमूल कांग्रेस ने केन्द्र में यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के १९ सांसद हैं। पार्टी ने मनमोहन सिंह सरकार से समर्थन वापस लेने का पत्र कल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को सौंपा। राष्ट्रपति भवन की विज्ञप्ति में कहा गया है कि तृणमूल कांग्रेस ने तत्काल प्रभाव से यूपीए सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है।
तृणमूल कांग्रेस के छह मंत्रियों ने भी मनमोहन सिंह सरकार से इस्तीफा दे दिया। पार्टी अध्यक्ष ममता बैनर्जी ने डीजल की कीमतों में वृद्धि, रसोई गैस से सब्सिडी हटाने और मल्टी ब्रांड खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति जैसे केन्द्र के फैसलों के विरोध में यूपीए सरकार से अपना समर्थन वापस लेने के फैसले की मंगलवार को घोषणा की थी।
उधर, कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार से अपने सभी मंत्रियों को हटाने का फैसला किया है। पार्टी के कोर ग्रुप की कल शाम नई दिल्ली में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि ममता बनर्जी सरकार में पार्टी के सभी मंत्री आज शाम तक अपना इस्तीफा सौंप देंगे।इस बीच, सरकार ने कहा है कि यूपीए से तृणमूल कांग्रेस के बाहर होने से कोई असर नहीं पड़ेगा।

शनिवार, 8 सितंबर 2012

संसद सत्र समाप्त नहीं उठा फोरलेन का मामला!

संसद सत्र समाप्त नहीं उठा फोरलेन का मामला!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। दिसंबर 2008 में कांग्रेस और भाजपा के षणयंत्र का शिकार हुई स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना के अंग उत्तर दक्षिण गलियारे की सिवनी से होकर गुजरने वाली फोरलेन को अब भी ठोर नहीं मिल सका है। केंद्र राज्य के बीच आरोप प्रत्यारोपों के बीच इस सड़क के धुर्रे पूरी तरह से उड़ चुके हैं, पर किसी को भी इसकी सुध लेने की फुर्सत नहीं मिल पाई है। सांसद, विधायक और संपन्न वर्ग के लोग तो सिवनी से नागपुर का सफर बरास्ता छिंदवाड़ा पूरा कर ले रहे हैं पर गरीब गुरबों की किसी को भी चिंता नहीं है।
ज्ञातव्य है कि मामला तत्कालीन जिला कलेक्टर सिवनी पिरकीपण्डला नरहरि के 18 दिसंबर 2008 को जारी किन्तु 19 दिसंबर को पृष्ठांकित आदेश के तहत अवरूद्ध हुआ है। यह मामला आईने की तरह ही साफ है। इसके बाद जिला कलेक्टर से मिले बिना ही सर्वोच्च न्यायालय तक की लंबी लड़ाई अनेक संगठनों द्वारा लड़ी गई। पिछले साल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी मामले को वाईल्ड लाईफ बोर्ड के पाले में डाल दिया गया बताया जाता है।
सिवनी जिले के भाजपा के लोकप्रिय विधायक कमल मस्कोले, श्रीमति शशि ठाकुर, श्रीमति नीता पटेरिया के साथ ही साथ केंद्र में खासी दखल रखने वाले कांग्रेस के चार बार के विधायक हरवंश सिंह जो वर्तमान में विधानसभा उपाध्यक्ष भी हैं ने अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़कर इस मामले को विधानसभा के मंच पर उठाने की जहमत क्यों नहीं उठाई इसका जवाब वे ही बेहतर दे सकते हैं।
हद तो तब हो जाती है जब परिसीमन में बिना प्रस्ताव के विलोपित हुई सिवनी लोकसभा जो अब मण्डला और बालाघाट संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है में बालाघाट के भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख और कांग्रेस के मण्डला के सांसद बसोरी सिंह मसराम ने भी इस मामले में लोकसभा में आवाज उठाने की कवायद नहीं की। मजे की बात तो यह है कि यह उपेक्षित सड़क के.डी.देशमुख, बसोरी सिंह मसराम, हरवंश सिंह, श्रीमति नीता पटेरिया, श्रीमति शशि ठाकुर, कमल मस्कोले सभी के संसदीय और विधानसभा क्षेत्र की जीवन रेखा है।
इस साल बारिश के मौसम में भी अनेक ट्रक ट्राले सिवनी नागपुर मार्ग पर पलटते रहे रास्ता जाम होता रहा पर किसी ने भी इसकी सुध नहीं ली। उम्मीद की जा रही थी कि इस मामले में आवाज उठाने वाले सिवनी और लखनादौन के कुछ स्वयं सेवी संगठन अपनी आवाज बुलंद कर जनता को राहत देंगे पर वस्तुतः एसा हो नहीं सका, मजबूरन गरीब गुरबों को मन मारकर इस खटारा सड़क से होकर गुजरना नियति बन गया है।

गुरुवार, 17 मई 2012

फोरलेन मामले में सद्भाव की भूमिका संदिग्ध!


फोरलेन मामले में सद्भाव की भूमिका संदिग्ध!

बरसात में बंद हो जाएगी उत्तर दक्षिण की जीवनरेखा

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। स्वर्णिम चर्तुभुज सड़क योजना के अंग उत्तर दक्षिण गलियारे पर संकट के बादल मण्डरा चुके हैं। विध्न संतोषियों द्वारा मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के दरम्यान दिसंबर 2008 में लगाया गया बीज अब कटीली घनी और बहुत बड़ी झाड़ियों में तब्दील हो चुका है। फोरलेन मामले में मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा और केंद्र की कांग्रेस द्वारा गेंद को एक दूसरे के पाले में फेंककर जनता को गुमराह किया जा रहा है। इस मामले में सिवनी से खवासा तक के सड़क निर्माण के ठेकेदार मेसर्स सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी की भूमिका पर सिवनी की विधायक श्रीमति नीता पटेरिया द्वारा सवालिया निशान लगाने के बाद अब इस कंपनी की भूमिका और अधिक संदिग्ध हो चुकी है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश से होकर गुजरने वाले उत्तर दक्षिण गलियारे में सिवनी जिले में जबर्दस्त फच्चर फंसाए गए हैं। इसके लिए तत्कालीन भूतल परिवहन मंत्री और छिंदवाड़ा के सांसद कमल नाथ पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र जिला छिंदवाड़ा में नेशनल हाईवे का सबसे बड़ा चौराहा बनाने की गरज से महाकौशल के सिवनी जिले के साथ अन्याय किया है। 2008 में सर्वोच्च न्यायालय में इस मार्ग से वन्य प्राणियों के लिए खतरे की बात कहकर अशोक कुमार की याचिका सामने आई तब कहा गया कि अशोक कुमार मूलतः कमल नाथ के रिश्तेदार हैं।
इस सड़क के लिए आंदोलन आरंभ हुआ, सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया, पर हासिल कुछ नहीं हुआ। कांग्रेस ने कभी इसका श्रेय लिया तो कभी भाजपा ने। भाजपा के विधायक कमल मस्कोेले ने इसके लिए अनशन किया और भूख हड़ताल की घोषणा के पहले ही वे रणछोड़दास हो गए। बताया जाता है कि कांग्रेस के एक क्षत्रप और भाजपा के एमपी सुप्रीमो प्रभात झा के बीच हुई सौदे बाजी के बाद भाजपा द्वारा कमल मस्कोले को उठने के निर्देश दिए गए। अब 16 मई के जनांदोलन में भाजपाध्यक्ष सुजीत जैन और विधायक कमल मस्कोले भी मौके पर जा रहे हैं।
एनएचएआई के सूत्रों का कहना है कि सिवनी जिले में राजलक्ष्मी नामक कंपनी ने विवादित सड़क के पुर्ननिर्माण हेतु टेंडर भरा था। इस कंपनी के पीछे सद्भाव का हाथ बताया जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सिवनी से खवासा तक के मार्ग में विवादित 8.7 किलोमीटर को छोड़कर शेष भाग में मंथर गति से काम करने का ईनाम इस कंपनी को मिला। इसे नरसिंहपुर से बरास्ता छिंदवाड़ा, सौंसर, नागपुर मार्ग के निर्माण की जवाबदारी दे दी गई है। इस कंपनी की नीयत पर भाजपा विधायक नीता पटेरिया ने प्रश्न चिन्ह लगाया तो जिला भाजपा आश्चर्यजनक तरीके से इस मामले में मौन साध गई।
सूत्रों का कहना है कि उनके पास जमीनी हकीकत आई तो आला अफसरान के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। क्षतिग्रस्त कुरई घाट की एक जर्जर पुलिया को रेत की बोरियों से संभाला गया है। शेष लगभग आधा दर्जन पुलिया इस साल की बरसात सहने की स्थिति में नहीं हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर कहा कि कांग्रेस के एक बड़े नेता और भाजपा के क्षत्रपों के इशारों पर इस सड़क को मझधार में छोड़ दिया गया है। इस साल बारिश में यह सड़क हर हाल में बंद हो जाएगी। तब मजबूरी में वाहनों को सिवनी से कुरई खवासा के स्थान पर वैकल्पिक छिंदवाड़ा सौंसर होकर नागपुर जाने पर मजबूर होना पड़ेगा।

रविवार, 26 फ़रवरी 2012

किसको दें धन्यवाद. . . .


किसको दें धन्यवाद. . . .



(लिमटी खरे)

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर हृदय प्रदेश के अंतिम जिले सिवनी के नामकरण के बारे में अनेक धारणाएं प्रचलित हैं। कोई कहता है सेवन के वृक्षों की अधिकता के कारण इसका नाम सिवनी पड़ा तो कोई इसे भगवान शिव की नगरी के बतौर सिवनी कहता है। इक्कीसवीं सदी के पहले ही दशक में सिवनी को किसी की नजर लग गई थी। एक के बाद एक यहां की सौगातें छिन रही थीं। परिसीमन में नेताओं की जुगलबंदी के चलते सिवनी लोकसभा और घंसौर विधानसभा का झटका बहुत ही बड़ा घाव दे गया था सिवनी को। इस रिसते घाव में एक और चीरा लगा जब स्वर्णिम चतुर्भुज के अंग उत्तर दक्षिण गलियारे में सिवनी जिले से गुजरने वाले हिस्से में फच्चर फंसा दिया गया। माननीय न्यायालय का डर बताकर सिवनी जिले के लखनादौन से लेकर खवासा तक के मार्ग का न केवल निर्माण रोका गया वरन् इसका रखरखाव भी नहीं किया गया। जर्जर गड्ढे वाली सड़कों में न जाने कितनी दुर्घटनाओं में लोग घायल हुए और प्राण तजे, पर किसी की नींद नहीं खुली। आज न्यायालयीन स्थिति कमोबेश पहले के मानिंद ही है, किन्तु अब पांच बरस के उपरांत गड्ढ़े भरने के काम को अंजाम दिया जा रहा है। पांच सालों से कांग्रेस केंद्र में सत्ता की मलाई चख रही है। मतलब साफ है कि कांग्रेस ही चाह रही थी लोग जर्जर सड़कों पर चलकर असमय ही काल कलवित हों, हाथ पैर तुड़वाएं और अपने वाहनों का सत्यानाश करवाएं. . .। गड्ढ़े भरने की औपचारिकताएं आरंभ हो गई हैं, सिवनी वासी सोच रहे हैं कि इसके लिए धन्यवाद ज्ञापित करें तो आखिर किसको?

कांग्रेस और भाजपा के नेताओं का आपसी सामंजस्य गजब का है। देश भर में किसी भी भाग में एसा कही हो या ना हो किन्तु सिवनी जिले में तो कांग्रेस और भाजपा का सामंजस्य देखते ही बनता है। कांग्रेस द्वारा मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के कार्यकर्ताओं, सांसद और विधायकों को तो भाजपा द्वारा केंद्र की कांग्रेस सरकार के नुमाईंदो, सांसद और विधायक को घेरने में कोई कसर नहीं रख छोड़ी है। बावजूद इसके सिवनी में एक इंच भी विकास दर्ज नहीं किया गया है।
सिवनी लोकसभा का अवसान तो इक्कीसवीं सदी का पहला और सबसे बड़ा अजूबा था। सिवनी के विलोपन का प्रस्ताव कहीं भी दूर दूर तक नहीं था। दावे अपत्तियां भी सिवनी के विलोपन को लेकर नहीं लिए गए। अचानक ही सिवनी लोकसभा को विलोपित कर दिया गया। सिवनी के राजनैतिक बियावान के सारे पहलवानों ने उस वक्त घडियाली आंसू अवश्य ही बहाए, किन्तु किसी ने भी ठोस कदम उठाने की जहमत नहीं उठाई। अंत्तोगत्वा सिवनी लोकसभा का अस्तित्व ही समाप्त हो गया।
हमारी नजरों में इसके लिए कांग्रेस और भाजपा कतई जिम्मेवार नहीं कही जा सकती है। इसके लिए जिम्मेवार हैं सिवनी को कर्मभूमि बनाकर राजनैतिक पायदान चढ़ने या चढ़ने का प्रयास करने वाले नेता। इन नेताओं को इतनी भी गैरत नहीं बची कि ये अपनी कर्मभूमि या मातृभूमि की अस्मत बचा सकें। राजनैतिक और आर्थिक स्वार्थों की बलिवेदी पर सिवनी की अस्मत को चढ़ाने में इन्हें गुरेज नहीं है।
तत्कालीन वज़ीरे आज़म पंडित अटल बिहारी बाजपेयी ने अपने शासनकाल में एक महात्वाकांक्षी परियोजना बनवाई जिसे स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना का नाम दिया गया। इसमें दिल्ली, कोलकता, मुंबई और चेन्नई को आपस में सड़क मार्ग से जोड़ना प्रस्तावित था। बाद में जब उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम सीधे जाने वालों के लिए सुलभ और कम दूरी वाले मार्ग की खोज की गई तो अस्तित्व में आया उत्तर दक्षिण और पूर्व पश्चिम गलियारा।
सिवनी के लोगों तब फूले नहीं समाए जब उनके संज्ञान में यह लाया गया कि उत्तर दक्षिण फोरलेन सड़क गलियारा सिवनी जिले से होकर गुजरने वाला है। इस समय महाकौशल के कांग्रेस और भाजपा के क्षत्रपों ने इस मार्ग को अपने अपने जिलों या कर्मभूमि से लेकर जाने के प्रयास किए, किन्तु इसका एलाईंमेंट बदलना बेहद दुष्कर था, इसलिए राजनेताओं के ना चाहने के बाद भी यह सिवनी से होकर ही गुजरने के मार्ग प्रशस्त हो गए।
इसी बीच सिवनी में शहर से बॉयपास की बात सामने आई। उल्लेखनीय है कि पूर्व में जिला मुख्यालय में नगझर से मण्डला, बालाघाट, कटंगी मार्ग को जोड़कर पूर्व दिशा में एक बायपास का निर्माण एस.के.बनर्जी के निर्देशन में करवाया गया था। गुणवत्ता विहीन इस मार्ग में जगह जगह गड्ढे आज भी इस बात को रेखांकित करने के लिए पर्याप्त है कि बीसवीं सदी के अंतिम दशक और इक्कीसवीं सदी के आगाज के साथ ही नेताओं और ठेकेदारों की जुगलबंदी से किस तरह सिवनी को मेहमूद गज़नवी के मानिंद लूटा जा रहा है।
इस दौरान जब बायबास को पश्चिम दिशा से होकर गुजारने का एलाईंमेंट तैयार किया गया तो इसकी राह में अनेक रोढ़े अटकाए गए। रेल्वे के उपर के पुल को लेकर ना जाने कितने माहों तक काम को रोका गया। कांग्रेस और भाजपा की जुगलबंदी फिर एक बार सामने आई। दरअसल, यह देरी इसलिए की जा रही थी ताकि जबलपुर और नागपुर के बीच चलने वाले भारी वाहनों से एस.के.बनर्जी के गुर्गे टोल वसूल कर सकें। इस मामले में कांग्रेस और भाजपा के सियासी ठेकेदार मौन ही साधे रहे।
जैसे तैसे यह बायपास तैयार हुआ। इसके साथ ही साथ लखनादौन से खवास तक के हिस्से का रखरखाव बिना किसी कारण को सामने लाए ही रोक दिया गया। जिसके परिणामस्वरूप सड़क बेहद जर्जर हो गई और इस सड़क पर रोजना ही दुर्घटनाएं होने लगीं। यह सड़क सिवनी जिले में इतनी जर्जर हो चुकी है कि इस पर चलना सर्कस के बाजीगरों के बस की ही बात रह गई है। उल्लेखनीय होगा कि अटल बिहारी बाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में गढ़ी गई स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना का अंग उत्तर दक्षिण गलियारा नेताओं के न चाहने के बाद भी सिवनी जिले से होकर ही गुजरा, क्योंकि सड़क का एलाईमेंट बदलना नेताओं के लिए दुष्कर कार्य था।
इसके बाद इस सड़क में अंड़गों की बौछारे आरंभ हो गईं। तत्कालीन जिलाधिकारी पिरकीपण्डला नरहरि के 18 दिसंबर 2008 के आदेश क्रमांक 3266/फो.ले./2008 जिसे 19 दिसंबर को पृष्ठांकित किया गया था के द्वारा राज्य सरकार से आदेश मिलने की प्रत्याशा में पूर्व कलेक्टर द्वारा सिवनी जिले में मोहगांव से खवासा तक के भाग में सड़क चौड़ीकरण हेतु जारी वन एवं गैर वन क्षेत्रों की वनों की कटाई पर रोक लगा दी थी। इसके उपरांत सड़क की राजनीति के गर्म तवे पर न जाने कितने ही शैफ (मुख्य रसोईए) आए और अपनी अपनी रोटियां सैंकते चले गए। न्यायालयीन प्रक्रियाओं के चलते इस सड़क पर हाथ लगाने से हर कोई घबरा रहा था।
एक एनजीओ द्वारा मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचाया गया। सिवनी का पक्ष भी यहां के समूहों द्वारा न्यायालय में रखा गया। अंत में इसे वर्ष 2011 के आरंभ में माननीय न्यायालय ने मामले को वाईल्ड लाईफ बोर्ड के पास भेज दिया। गौरतलब है कि वाईल्ड लाईफ बोर्ड कोई न्यायिक संस्था नहीं है। यह सब होने के बाद भी जिले की जनता का वोट लेकर विधानसभा और लोकसभा में बैठने वाले जनता के नुमाईंदे खामोश हैं? उनकी खामोशी क्या बयां कर रही है? क्या वे किसी नेता विशेष से भयाक्रांत हैं? क्या नेता विशेष सिवनी की जनता जनार्दन जिसने इन नेताओं को सर आखों पर बिठाया से कद में बड़े हो गए?
इसी दौरान केंद्रीय मंत्री कमल नाथ पर यह आरोप भी लगे कि उन्होंने ही इस काम में अडंगा लगवाया है। वे इस मार्ग को लखनादौन से हर्रई, अमरवाड़ा, छिंदवाड़ा, चौरई के रास्ते नागपुर ले जाना चाह रहे थे। कमोबेश इसी आशय का वक्तव्य उन्होंने राज्य सभा में भी दिया था। फिर फिजां में एक बात तैरी कि यह रास्ता सिवनी से चौरई, छिंदवाड़ा, सौंसर होकर छिंदवाड़ा जाएगा। आज सिवनी से खवासा होकर नागपुर मार्ग इतना जर्जर हो चुका है कि लोग सिवनी से छिंदवाड़ा सौंसर के रास्ते ही नागपुर जाने पर मजबूर हैं।
ज्ञातव्य है कि दो साल पहले सितम्बर माह में सिवनी जिले के कथित विकास पुरूष हरवंश ंिसह ठाकुर ने जिला मुख्यालय सिवनी में एतिहासिक दलसागर तालाब के किनारे इस मार्ग जीर्णोद्वार के काम का बाकायदा भूमिपूजन कर यह जानकारी दी थी कि यह राशि दो माह पूर्व अर्थात जुलाई में ही स्वीकृत करा ली गई थी। बारिश के उपरांत आबादी के अंदर सड़कों का काम तेजी से आरंभ हो जाएगा। हरवंश सिंह की इस पहल से नागरिकों में हर्ष व्याप्त था कि कम से कम शहरों के अंदर की सड़कों का हाल तो सुधर जाएगा। पूरे दो साल बीत गए किन्तु शहरों की सड़कें सुधरना तो दूर अब तो उनके धुर्रे ही उड़ चुके हैं। आलम यह है कि पिछले दिनों कुरई के ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष ने सड़क पर भरे गड्ढ़े के पानी से बाकायदा स्नान किया और इसका वीडियो यूट्यूब पर सुपर डुपर हिट बना हुआ है।
अब असली मरण तो आम जनता की होती है। अब तो लदे फदे ट्रक भी गड्ढ़े बचाने के चक्कर में सड़कों पर लोट रहे हैं। इसके साथ ही साथ रख रखाव के अभाव में यह मार्ग भी अब बली लेने लगा है। गड्ढ़ों में एक के बाद एक दुर्घटनाएं और असमय काल कलवित होने की घटनाओं के बाद भी न तो एनएचएआई ही जागा है और ना ही सांसद विधायक साहेबान भी। सांसद के.डी.देशमुख ने तो इस बात को भी स्वीकारा है कि उन्होने इस मामले को संसद में अब तक नहीं उठाया है। सवाल यह उठता है कि संसद में इस मामले को उठाने की जवाबदेही आखिर किसकी है? देखा जाए तो यह मार्ग सिवनी मण्डला के कांग्रेसी सांसद बसोरी मसराम, सिवनी बालाघाट के सांसद के.डी.देशमुख के साथ ही साथ भाजपा विधायक शशि ठाकुर, नीता पटेरिया, कमल मस्कोले के साथ ही साथ कांग्रेस के क्षत्रप और केवलारी विधायक हरवंश सिंह ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र से होकर भी गुजरता है। जनता ने जनादेश देकर इन्हें चुना है, फिर ये जनादेश का अपमान करने का साहस आखिर कैसे जुटा पा रहे हैं?
मध्य प्रदेश के घोषणावीर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि भले ही सूरज पश्चिम से उग आए पर यह सड़क सिवनी से होकर ही गुजरेगी। इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय में मध्य प्रदेश सरकार अपना वकील भी खड़ा करेगी। सवोच्च न्यायालय ने इस साल के आरंभ में मामले को खारिज करते हुए वाईल्ड लाईफ बोर्ड के पास भेज दिया है। सूरज आज पूर्व से ही निकल रहा है। न तो शिवराज सरकार का वकील ही सर्वोच्च न्यायालय में गया और न ही सड़क बन पाई।
इतना ही नहीं दो साल पहले ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा द्वारा नेशनल हाईवे की बदहाली के उपरांत सूबे से गुजरने वाले नेशनल हाईवे पर पड़ने गांव, कस्बे और शहरों में हस्ताक्षर अभियान के उपरांत मानव श्रंखला बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद यह योजना टॉय टॉय फिस्स हो गई। इस वक्त भूतल परिवहन मंत्री की आसनी पर प्रदेश के क्षत्रप कमल नाथ काबिज थे। कमल नाथ के रहते शिवराज सिंह चौहान भी सड़कों की दुर्दशा का रोना रोते रहे हैं। कमल नाथ के हटते ही प्रदेश भाजपा और सरकार का एजेंडा मानो बदल ही गया हो। मंत्रीमण्डल फेरदबल के बाद महज जो बार ही सरकार ने सड़कों की बदहाली का रोना रोया है। सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर 10 एनएच वापस मांग लिए हैं। यहां उल्लेखनीय होगा कि भोपाल से महज सत्तर किलोमीटर दूर होशंगाबाद की यात्रा इन दिनों चार से पांच घंटों में पूरी हो पा रही है, जिसमें मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र भी आता है। अब प्रभात झा ने सिवनी में यह बात कह दी कि इस बार नेशनल हाईवे को लेकर मध्य प्रदेश भाजपा का महिला मोर्चा कमान संभालेगा। गौरतलब है कि महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष पद पर सिवनी लोकसभा की अंतिम सांसद और सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया विराजमान हैं।
सिवनी के हितों को यहां के जनप्रतिनिधियों के बजाए बाहर के लोगों ने साधने का प्रयास किया है। ब्राडगेज और रामटेक गोटेगांव नई रेल लाईन के लिए भले ही प्रयास के स्वांग रचे जा रहे हों किन्तु यह बात उतनी ही सच है जितनी कि दिन और रात कि सिवनी के किसी भी सांसद ने सिवनी के ब्राडगेज के बारे में संसद में प्रश्न नहीं उठाया है। इतिहास गवाह है कि 28 अगस्त 2005 को बिलासपुर के सांसद पुन्नू लाल माहोले ने अतारांकित प्रश्न संख्या 4502 के तहत चार बिन्दुओं पर जानकारी चाही थी। इसमें बिलासपुर से मण्डला होकर नैनपुर और नैनपुर से सिवनी होकर छिंदवाड़ा रेलमार्ग के अमान परिवर्तन की जानकारी चाही गई थी। इसके जवाब में तत्कालीन रेल राज्यमंत्री आर.वेलू ने पटल पर जानकारी रखते हुए कहा था कि नैनपुर से बरास्ता छिंदवाड़ा के 139.6 किलोमीटर खण्ड का छोटी लाईन से बड़ी लाईन में परिवर्तन हेतु 2003 - 04 में सर्वेक्षण किया गया था। सर्वेक्षण प्रतिवेदन के अनुसार इस परियोजना की लागत ऋणात्मक प्रतिफल के साथ 228.22 करोड़ रूपए आंकी गई थी। वेलू ने यह भी कहा था कि इस प्रस्ताव की अलाभकारी प्रकृति, चालू परियोजनाओं के भारी थ्रोफारवर्ड एवं संसाधनों की अत्याधिक तंगी को देखते हुए स्वीकार नहीं किया जा सका। इसके बाद बार बार रेल बजट में छिंदवाड़ा से सिवनी होकर नैनपुर तक अमान परिवर्तन का झुनझुना सिवनी वासियों को दिखाया जाता रहा। कांग्रेस और भाजपा ने इसका पालीटिकल माईलेज लेने की गरज से विज्ञापनों की बौछार कर दी। आज फरवरी 2012 में भी एक इंच काम आरंभ नहीं हो सका है।
बहरहाल, फोरलेन के मामले में सिवनी जिले में लखनादौन से खवास तक की स्थिति कमोबेश आज भी वही है जो पहले थी। बावजूद इसके अब जाकर गड्ढ़े भरने का काम आरंभ किया गया है। जिससे साफ है कि सिवनी के राजनैतिक तौर पर सक्रिय ठेकेदार यही चाह रहे थे कि लोग गड्ढ़ों में चलकर दुख तकलीफ का अनुभव अवश्य करें। अपने वाहनों का नाश करें और लोग हाथ पैर तुड़वाकर असमय ही काल के गाल में समाएं। अगर नहीं तो क्या कारण है कि शहर के अंदर और बाहर गड्ढ़े भरने का काम का  सिवनी के कथित विकास पुरूष हरवंश सिंह ठाकुर के द्वारा दो साल पहले भूमिपूजन करवाने के बाद आरंभ क्यों नहीं करवाया जा सका।
इस संबंध में एक वाक्या याद पड़ता है। नब्बे के दशक में ओला पाला से फसलें तबाह हो गईं। उस समय बैतूल में किसानों पर गोली चालन भी हुआ। राजधानी भोपाल में एक केंद्रीय मंत्री के निज सहायक से चर्चा में हमने कहा कि मंत्री के संसदीय क्षेत्र में मुआवजे की कार्यवाही आरंभ करवाई क्यों नहीं हो रही है। निज सहायक ने मुस्कुराते हुए कहा कि पहले क्षेत्र से मांग तो आने दो, किसान धरना प्रदर्शन तो करें? बिन मांगे दे देंगे तो उन्हें इसकी कीमत समझ में नहीं आएगी। आज फोरलेन की स्थिति भी वही दिख रही है। अगर कष्ट के बिना ही सब कुछ मिल जाता तो सिवनी वाले इसकी कीमत नहीं समझते (हो सकता है नेताओं की यह सोच हो)। अब जबकि सड़क के गड्ढ़े भरने का काम आरंभ हो गया है तो विचारणीय प्रश्न यह है कि इसके लिए धन्यवाद किसका ज्ञापित करें सिवनी वासी? मनमोहन सिंह का, सोनिया गांधी का, जयंती नटराजन का, सीपी जोशी का, सिवनी के कथित विकास पुरूष हरवंश सिंह का, प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का, प्रभात झा का या फिर सिवनी के सांसद विधायकों का!
वैसे 2004 से केंद्र में कांग्रेस काबिज है। फोरलेन के रखरखाव का जिम्मा केंद्र सरकार का है, इसलिए यह बात स्थापित हो चुकी है कि कांग्रेस चाहती थी कि सिवनी के लोग गड्ढ़ों में अपने वाहनों का नास कराएं, हाथ पैर तुड़ावाएं इतना ही नहीं अनेक घरों के दिए बुझें। अगर नहीं तो क्या वजह है कि न्यायालयीन स्थिति वही रहने पर अब जाकर सड़कों के गड्ढ़े भरने की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं? कांग्रेस में रहकर कांग्रेस के क्षत्रपों, भाजपा में रहकर भाजपा के क्षत्रपों की तलवारें इस मसले में रेत में ही गड़ी हैं। कांग्रेस को लेकर भाजपा तो भाजपा को लेकर कांग्रेस मौन है! रहे क्यों ना नूरा कुश्ती का अद्भुत और अकल्पनीय नजारा जो दिखता है सिवनी में।

(साई फीचर्स)

सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

सोलह करोड़ का टेंडर किसी को कानो कान खबर नहीं!


सोलह करोड़ का टेंडर किसी को कानो कान खबर नहीं!

इस बार श्रेय लेने का मौदा नहीं दिया सीपी जोशी ने

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। न तो किसी राजनेता को और ना ही एनएचएआई के अधिकारियों को इस बात की भनक लगी कि सिवनी जिले के मोहगांव से खवासा तक के फोरलेन मार्ग का ठेके की 16 करोड़ 41 लाख रूपए की निविदा जारी हो गई है। इस बार केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री सी.पी.जोशी ने कांग्रेस भाजपा के नेताओं को चकमा देते हुए चुपचाप ही निविदा जारी करवा दी गई।
एनएचएआई के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि मोहगांव से खवासा सेक्शन में किलोमीटर 623 से किलोमीटर 652 तक लगभग 29 किलोमीटर तक के काम को हरी झंडी प्रदान कर दी गई है। सूत्रों ने कहा कि इस मार्ग के पुर्ननिर्माण सुधार कार्य की 1641 लाख रूपए की निविदा जारी की गई है। इसके साथ ही साथ समस्त प्रकार के पूर्ण कार्य 2006 - 2007 से अब तक के लिए निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 19 मार्च निर्धारित की गई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में विधानसभा चुनावों के समय से इस मार्ग के निर्माण में वन एवं पर्यावरण का फच्चर अशोक कुमार नामक एक व्यक्ति के एनजीओ द्वारा फंसा दिया गया था। राजनैतिक बियावान में सीढीयां चढ़ने उतरने, कांग्रेस भाजपा के आश्वासनों के समुंदर में गोते लगाने के बाद भी इस सड़क के रखरखाव पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया, जिसके परिणाम स्वरूप आज चार सौ साल पुराने शेरशाह सूरी के जमाने के इस मार्ग में गड्ढ़ों में सड़क ढूंढने का काम जारी है।
इस सड़क के रखरखाव की मांग जब भी की जाती तभी सिवनी में बैठे राजनेताओं द्वारा माननीय न्यायालय की अवमानना का भय बताकर लोगों को शांत कर दिया जाता। मजबूर सिवनी वासी इस तरह के जर्जर मार्ग से होकर गुजरने को मजबूर हो रहे हैं। इतना ही नहीं खवासा से मोहगांव के हिस्से में कुरई घाट सहित समूचे भाग में रोजाना ही दुर्घटनाएं घट रही हैं, असमय ही लोग काल कलवित हो रहे हैं, पर मोटी चमड़ी वाले राजनेताओं के कानों में इस चीख पुकार का कोई असर नहीं हुआ।
सिवनी शहर सहित मार्ग में पड़ने वाले सिवनी जिले के शहरों के अंदर की सड़कों के जीर्णोद्धार हेतु भी कांग्रेस ने बड़ी बड़ी विज्ञपितयों के माध्यम से लोगों को दो तीन सालों से भरमाया जा रहा है, पर जमीनी हकीकत कुछ और ही सामने आई है। शहर के अंदर की सड़कों पर चलना अब सर्कस के बाजीगरों के बस की ही बात बची है।
एनएचएआई के सूत्रों का कहना है कि इस साल बारिश के पहले ही मोहगांव से खवासा तक के वर्तमान के टू लेन को सुधारकर ब्लेक टाप का काम अर्थात सड़क को पूर्व जैसी ही टूलेन बनाने के लिए 16 करोड़ 41 लाख की प्रथम निविदा जारी कर दी गई है। माना जा रहा है कि इस साल गर्मी के मौसम में इस सड़क को पूरी तरह सुधार दिया जाएगा। फोरलेन के मामले में वन विभाग के अडंगे की समाप्ति के बाद ही काम आरंभ होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस संबंध में जब एनएचएआई के परियोजना निदेशक श्री सिंघई से फोन पर चर्चा की गई तो उन्होंने इस तरह की किसी निविदा के जारी होने से साफ इंकार कर दिया। वहीं दूसरी ओर सिवनी में पदस्थ श्री पुरी ने दूरभाष पर बताया कि इस मार्ग के सुधार की प्रथम निविदा जारी हो चुकी है। श्री पुरी ने उम्मीद जताई कि बारिश के पहले पहले तक सिवनी से नागपुर मार्ग का सुधार पूरा हो जाएगा।
इस निविदा के बारे में कांग्रेस और भाजपा के विज्ञप्तिवीरों के तरकश इसलिए खाली हैं क्योंकि इस बारे में उन्हें पूर्व में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। अब जबकि इसकी निविदा ही जारी होकर समाचार पत्रों में स्थान पा चुकी है अतः अब इसका श्रेय लेने की कवायद तेज हो सकती है। 

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

जनसेवकों की उदासीनता के चलते छात्र शक्ति हुई सक्रिय


जनसेवकों की उदासीनता के चलते छात्र शक्ति हुई सक्रिय

सोमवार से आठ दिवसीय चरण बद्ध आंदोलन की घोषणा



(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले के सांसद विधायकों की उदासीनता और निहित स्वार्थ में उलझे होने के चलते अब छात्र शक्ति को आगे आने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जिले की बदहाली पर आंसू बहाते हुए छात्रशक्ति मंत्र ने अपनी छः सूत्रीय मांगों के साथ विज्ञप्ति जारी कर जिले के हित में खुद को सक्रिय होने का प्रमाण दिया है।
युवा छात्रशक्ति मंच के समन्वयक द्वारा आज यहां जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि सिवनी जिले की विभिन्न मांगों को लेकर जनमंच सहित अनेक संगठनों ने समय समय पर आंदोलन किए किन्तु राजनैतिक दूरदर्शिता एवं जनमानस के आपेक्षित सहयोग के न मिल पाने आज जिला अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने पर मजबूर हो गया है।
इसके फलस्वरूप युवा छात्रशक्ति मंच सिवनी की विभिन्न मांगों को लेकर देश के महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रेल मंत्री, भूतल परिवहन मंत्री, पर्यावरण मंत्री, प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने पर मजबूर हो गई है। गौरतलब है कि विद्यार्थियों का समूचा ध्यान अपने पठन पाठन में ही होता है। विद्यार्थियों को राजनीति से दूर दूर तक लेना देना नहीं होता है। किन्तु जब जिले की दुर्दशा होती वे खुद अपनी आंखों से देख रहे हों तब उन्हें पठन पाठन से इतर इस तरह की गतिविधियों में कूदना पड़ रहा है जो जिले के भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर के मुंह पर करारा तमाचा ही है।
विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि बड़ी रेल लाईन के लिए 2012 - 13 के रेल बजट जो कि 14 मार्च को आएगा में सिवनी से होकर गुजरने वाली छोटी रेल लाईन के अमान परिवर्तन के लिए राशि सुनिश्चित की जाए। दूसरी मांग के तौर पर युवा छात्रशक्ति ने कहा है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार फोर लेन मार्ग के अविवादित हिस्से में कार्य आरंभ करवाया जाए।
इसके साथ ही साथ बद से बदतर हो चुकी एनएच 7 जो अब एनएचएआई के फोरलेन में तब्दील हो चुकी है में सुकतरा से खवासा और सिवनी शहर से नगझर और शीला देही तक बायपास को जोड़ने वाले मार्ग का सड़क सुधार तत्काल प्रारंभ कराया जाए। युवा छात्र शक्ति ने अपनी चौथी मांग के रूप में सिवनी को अधोसंरचना के अनुरूप बालाघाट और छिंदवाड़ा के मध्य स्थित होने के कारण विश्वविद्यालय का दर्जा या विश्वविद्यालय स्थापित किया जाए।
युवा छात्र शक्ति का कहना है कि चार सौ बिस्तरों वाले जिला अस्पताल को एक मिनी मेडीकल कालेज बनाकर उससे जोड़ा जाए। इस कालेज में आयुर्विज्ञान, दंत और आयुर्वेदिक की पढ़ाई के कोर्स संचालित किए जाने अधोसंरचना और कार्यवृत्त को मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया को प्रेषित किया जाए।
अंतिम मांग के बतौर युवा छात्रशक्ति ने कहा है कि सिवनी का संसदीय क्षेत्र इसे पुनः वापस किया जाए एवं भौगोलिक दृष्टि से उपयुक्त संभागीय मुख्यालय सिवनी में ही बनाया जाए। युवा छात्र शक्ति इसके लिए सोमवार 13 फरवरी से 20 फरवरी तक चरण बद्ध आंदोलन आरंभ कर रही है।

शुक्रवार, 20 जनवरी 2012

हरवंश का कद बढ़ा गए जयराम रमेश


हरवंश का कद बढ़ा गए जयराम रमेश

भाजपा के मंत्रियों को आमंत्रित कर इतिहास रचा हरवंश सिंह ने



(साई ब्यूरो)

सिवनी (साई)। मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर ने जिला मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में दलगत राजनीति से उपर उठकर सूबाई भाजपा के मंत्रियों को आमंत्रित कर इतिहास रच दिया है। उधर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश द्वारा इस कार्यक्रम में मंच से हरवंश सिंह की तारीफों में कशीदे गढ़कर महाकौशल में उन्हें एक स्थापित क्षत्रप का अघोषित तगमा दे दिया है।
एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र की संसकारधानी आए केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश के व्यस्त क्षणों में से सिवनी के लिए समय निकलवाने को लेकर अब जिले के कांग्रेस के सिपाहियों के सीने हरवंश सिंह ठाकुर के कारण चौड़े होते नजर आ रहे हैं। हरवंश सिंह ठाकुर ने संवैधानिक पद पर रहते हुए भी अनेकों बार इसके पहले कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का उत्साह वर्धन किया है।
गौरतलब है कि वर्चस्व की लड़ाई को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच समस्याएं दूर करने नहीं वरन् एक दूसरे को नीचा दिखाने की गरज से विज्ञप्ति युद्ध एक अरसे से छिड़ा हुआ है जिससे जनता आजिज आ चुकी है। इस बार जब केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश जर्जर और दुर्घटनाओं को न्योता देने वाले खवासा से सिवनी मार्ग से हिचखोले खाते आए तो सिवनी वासियों का दर्द उन्होंने अवश्य ही जाना होगा।
उल्लेखनीय होगा कि उत्तर दक्षिण फोरलेन गलियारे में सिवनी जिले में मोहगांव से लेकर खवासा तक मार्ग के निर्माण का काम उस वक्त रोका गया था जब जयराम रमेश खुद वन एवं पर्यावरण मंत्री थे। उन्होंने इशारों ही इशारों में अपने उद्बोधन में इस बात को कह दिया कि उस वक्त उनके हाथ बंधे हुए थे। जयराम रमेश के द्वारा सिर्फ और सिर्फ सिवनी में आकर एक कार्यक्रम करना और वापस जाने के अनेक सियासी अर्थ लगाए जा रहे हैं।
उधर, कांग्रेस के अंदर ही इस बात की चर्चा जोरों पर होने लगी है कि भाजपा के मंत्रियों को तो आमंत्रित कर दिया गया किन्तु हरवंश सिंह द्वारा अपनी ही पार्टी के धुरंधर नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष को आमंत्रित नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने अपने उद्बोधन में ही अपनी पीड़ा का इजहार किया था कि वे इस कार्यक्रम में अनाधिकृत तौर पर आए हुए हैं। उन्हें सरकारी अथवा जिला कांग्रेस की ओर से कोई न्योता न भेजा जाना आश्चर्य जनक ही माना जा रहा है।
साई के दिल्ली ब्यूरो ने कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी के करीबी सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि कांग्रेस की कोर कमेटी ने यह निर्णय लिया है कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार नहीं है उन राज्यों में अगर केंद्रीय मंत्री कोई कार्यक्रम करते हैं तो उसमें उस राज्य के नेता प्रतिपक्ष को जाना अनिवार्य होगा। वही कांग्रेस या सरकार का नुमाईंदा समझा जाएगा। संभवतः इसी नीति के तहत हाई कमान की इच्छाओं का सम्मान करते हुए अजय सिंह ने सिवनी के कार्यक्रम में बिना बुलाए आकर अपना बडप्पन दिखाया।
देखा जाए तो अजय सिंह का इस तरह बिनबुलाए आना जिला कांग्रेस कमेटी के मुंह पर करारा तमाचा था, जिसकी गूंज दिल्ली दरबार तक सुनाई दे सकती है। वहीं दूसरी ओर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के दिल्ली ब्यूरो ने बताया कि दिल्ली की सियासी गलियों में रमेश के इस दौरे के अनेक मतलब लगाए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार जयराम रमेश सिवनी गए जो महाकौशल का अभिन्न अंग है। महाकौशल में कांग्रेस के क्षत्रप कमल नाथ के एकाधिकार से इंकार नहीं किया जा सकता है। जब भी कमल नाथ के संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा में कोई केंद्रीय मंत्री आता है तो महाकौशल के सारे जिलों की कांग्रेस कमेटियों के साथ ही साथ समूचे सांसदों को मंच पर स्थान दिया जाता है। यह पहला मौका था जब महाकौशल के सिवनी में हुए कार्यक्रम में स्थानीय कांग्रेसी सांसद बसोरी सिंह मसराम भी अनुपस्थित रहे।
सूत्रों ने कहा कि महाकौशल में पिछले डेढ़ दशक में कांग्रेस के गर्त में जाने की खबरें कांग्रेस हाईकमान को लगातार मिलती रहीं हैं। जयराम रमेश को सोनिया गांधी का अघोषित दूत माना जाता है। बताया जाता है कि सोनिया गांधी ने जयराम रमेश के मार्फत महाकौशल में कांग्रेस की गिरती स्थिति की सच्चाई पता करना चाहा है। केंद्रीय मंत्री के बतौर जयराम रमेश को सिवनी लाकर जिला स्तर पर एक कार्यक्रम कराकर हरवंश सिंह ने अपने आप को निश्चित तौर पर स्थापित कर लिया हो पर इस कार्यक्रम में महाकौशल के क्षत्रप और पड़ोसी जिले छिंदवाड़ा के सांसद का न होना अनेक प्रश्नों को जन्म दे ही गया है।

शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

फोरलेन छीनने का षड़यंत्र


0 एनएचएआई के नक्शे से सिवनी गायब!

फोरलेन छीनने का षड़यंत्र



(संतोष श्रीवास)

सिवनी (साई)। राजग सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की दो महत्वकांक्षी योजनाएं थी एक नदियों को जोड़ने की और दूसरी भारते के चारों महानगरों और चारों दिशाओं को सड़क मार्ग द्वारा जोड़ने की जिसे कि स्वर्णिम चतुर्भुज तथा उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम गलियारे का नाम दिया गया। इस चतुर्भज में उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम के महानगरों को जोड़ने के लिए कोई सीधा वैकल्पिक मार्ग न हो पाने से उत्तर दक्षिण और पूर्व पश्चिम गलियारे की परिकल्पना की गई। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना का ही एक महत्वपूर्ण अंग उत्तर दक्षिण कारीडोर हैं जो कि श्रीनगर से आते आते नरसिंगपुर-लखनादौन-सिवनी-खवासा होते हुए नागपुर से आगे कन्याकुमारी तक जाता है।
सीमावर्ती जिला छिंदवाड़ा के सांसद और केंद्रीय मंत्री कमलनाथ बहुत पहले से चाहते थे कि छिंदवाड़ा जिले में नेशनल हाईवे का जाल बिछाया जाए। इस हेतु उन्होंने नब्बे के दशक के अंतिम वर्षों में ओबेदुल्लागंज से परासिया, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, गोंदिया होकर देवरे के मार्ग को नेशनल हाईवे में तब्दील कराने का प्रयास किया था जो परवान नहीं चढ़ सका।
इसके बाद यह बात और सामने आई कि उत्तर दक्षिण कारीडोर नरसिंहपुर से लखनादौन सिवनी होकर नागपुर जाने के स्थान पर नरसिंहपुर से हर्रई, अमरवाड़ा, छिंदवाड़ा,सौंसे होते हुए नागपुर जाए। इस योजना की हवा तब निकली जब राज्य सभा में कमल नाथ के बयान के बाद उनके संज्ञान में लाया गया कि उक्त मार्ग नेशनल के बजाए स्टेट हाईवे है अतः इस योजना को ठण्डे बस्ते के हवाले कर दिया गया। इसके उपरांत बताते हैं कि कमल नाथ ने अपने प्रभाव का उपयोग कर मध्य प्रदेश सरकार से नरसिंहपुर, अमरवाड़ा छिंदवाड़ा सौंसर नागपुर मार्ग को नेशनल हाईवे घोषित करवाने का प्रस्ताव केंद्र बुलवा लिया। चूंकि कमल नाथ स्वयं ही भूतल परिवहन मंत्री थे, अतः इस योजना को तत्काल स्वीकृति मिल गई।
कहा तो यह भी जा रहा है कि पूर्व में अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में कमलनाथ ने उनसे मुलाकात कर इस सड़क को नरसिंगपुर से डायवर्ट कर छिंदवाड़ा होते हुए बनाये जाने की मांग रखी थी तब श्री वाजपेयी ने मना कर दिया था और कहा था कि कि जो है जैसा है वैसा ही रहेगा। चूंकि यह मार्ग एरियल सर्वे के माध्यम से तय किया गया था जिसमें दूरी कम और ईंधन की बचत मूल मंत्र था अतः इसका एलाईंमेंट बदलना किसी भी कीमत पर संभव ही नहीं था।
इसके बाद जब कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार बनी और मनमोहन सिंह जी प्रधानमंत्री बने उस समय उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय कमलनाथ के पास था। बताते हैं कि तब उन्होंने एक बार पुनः प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से इस सड़का का एलाईंमेंट बदलकर इसे नरसिंहपुर से छिंदवाड़ा होते हुए ले जाये जाने की बात कही थी तब प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि आप आपनी कान्सटेंसी ही क्यों देखते हैं पूरा देश देखकर चलिये।
आरोपित है कि इसके बाद भी कमलनाथ ये प्रयास करते रहे कि ये सड़क सिवनी न होकर छिंदवाड़ा होकर ही गुजरे और कुरई घाट से 7.8 किलोमीटर के हिस्से को लेकर वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आँफ इंडिया ने एक आवेदन लगा दिया। चूंकि यह मामला वन्य जीव और पर्यावरण से संबंधित था अतः इसे काफी पहले 1995 की गोधावर्धन नंबर 202 वाली याचिका में जाकर संलग्न कर दिया गया। इसके बाद मामला सेन्ट्रल एम्पावरमेंट कमेटी (सीईसी) जो कि सुप्रीम कोर्ट में लगने वाले पर्यावरण से संबंधित मामलों पर मौके पर जाकर लोगों से मिलकर वस्तुस्थिति की जानकारी का पता कर सर्वोच्च न्यायालय को अपनी राय देती है के पास पहुँच गया।
वर्ष 2008 में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव थे। इसी बीच चुनावों के दरम्यान जब आचार संहिता लागू थी, सभी लोग चुनावों में व्यस्त थे, के बीच सीईसी के एकल सदस्यीय टीम सिवनी पहुंची और मौके का कथित तौर पर मुआयना किया। उक्त एकल सदस्य ने मध्य प्रदेश सरकार के तत्कालीन मुख्य सचिव राकेश साहनी को एक अनुरोध पत्र दिया जिसमें कहा गया कि कुरई घाटी के विवादित हिस्से से वनों और वृक्षों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग कर डाली।
यह पत्र जिला कलेक्टर सिवनी के पास कैसे पहुंचा यह बात अभी भी रहस्य ही बनी हुई है। बहरहाल जब यह पत्र जिला कलेक्टर सिवनी के पास पहुंचा तब तत्कालीन जिला कलेक्टर सिवनी पिरकीपण्डला नरहरि ने 18 दिसंबर 2008 को जारी और 19 दिसंबर 2008 को पृष्ठांकित आदेश क्रमांक 3266/फोले/2008 के माध्यम से वनों की कटाई पर रोक लगा दी। जिला कलेक्टर ने अपने आदेश में साफ लिखा था कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित केंद्रीय साधिकार समिति के सदस्य सचिव द्वारा उनके पत्र क्रमांक 1-26/सीईसी/सुको/2008 दिनांक 15 दिसंबर 2008 से मुख्य सचिव म.प्र.शासन को लेख कर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 7 के चौड़ीकरण कार्य में ग्राम मोहगांव से खवास तक पेंच टाईगर रिजर्व से लगे वन क्षेत्र व गैर वन क्षेत्रों में की जा रही वृक्षों की कटाई पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आगामी आदेश तक रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।
इसी तारतम्य में इस प्रत्याशा के साथ कि राज्य शासन के निर्देश इस संबंध में प्राप्त होना है, उन समस्त आदेशों को जो कलेक्टर कार्यालय सिवनी द्वारा इस संबंध में पूर्व में जारी किए गए हैं, स्थगित रखते हुए भाराराप्रा सिवनी एवं अन्य सभी संबंधित विभागों को आदेशित किया जाता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक सात के चौड़ीकरण कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग से लगे सभी वन क्षेत्रों और गैर वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की कटाई प्रतिबंधित की जाती है। वृक्षों की कटाई प्रतिबंधित करने संबंधी यह आदेश मप्र भू राजस्व संहिता के अंर्तगत प्रदत्त की गई पूर्व में प्रदत्त सभ्ीा अनुमतियों पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के इस सबंध में आगामी आदेश जारी होने तक लागू रहेगा।
इस तरह षणयंत्र का ताना बाना बुनकर अटल बिहारी बाजपेयी के शासनकाल की महात्वाकांक्षी सड़क योजना जिसमें ईंधन और समय दोनों ही की बचत होने का अनुमान लगाया जा रहा था पर सिवनी जिले में एक एसा फच्चर फसां दिया गया जिसे निकालने में मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस भी अपने आप को असफल ही पा रही थी। दोनों ही दलों के सिवनी में बैठे नुमाईंदे जनता से आंख चुराकर एक दूसरे पर दोषारोपण इसलिए भी नहीं कर पा रहे थे क्योंकि उन्हें इस पूरे ममाले की असलियत का भान ही नहीं था। मजे की बात तो यह है कि न तो सिवनी की तत्कालीन सांसद श्रीमति नीता पटेरिया ने इस मामले में मुंह खोला और ना ही मध्य प्रदेश विधानसभा में सिवनी जिले का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों ने ही अपनी चुप्पी तोड़ना उचित समझा।