शनिवार, 3 मार्च 2012

टूजी मामले की समीक्षा की गुहार


टूजी मामले की समीक्षा की गुहार

(प्रियंका श्रीवास्वत)

नई दिल्ली (साई)। केंद्र सरकार ने टू-जी स्पेक्ट्रम के एक सौ २२ लाइसेंसों को रद्द करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले की समीक्षा के लिए याचिका दायर की है। सरकार ने टू-जी स्पेक्ट्रम के आबंटन में पहले आओ, पहले पाओ की नीति अपनाने को असंवैधानिक करार देने पर भी सवाल उठाया है। याचिका में कहा गया है कि न्यायालय ने ऐसे क्षेत्र में प्रवेश किया है, जो बिल्कुल कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है और जो न्यायिक समीक्षा की सीमा से बाहर है।
समीक्षा याचिका में कहा गया है कि स्पेक्ट्रम सहित सभी प्राकृतिक संसाधनों का आबंटन केवल नीलामी के जरिये करने का न्यायालय का आदेश संविधान में वर्णित अधिकारों के बंटवारे के सिद्धांत के विपरीत है। कोई विवेकपूर्ण प्राधिकरण सभी मामलों में ऐसा नहीं कर सकता। प्राकृतिक संसाधन सबसे अधिक बोली लगाने वाले को दिये जाने चाहिए।
सरकार ने कहा कि टू-जी स्पेक्ट्रम लाइसेंसों को रद्द करने का २ फरवरी के आदेश की समीक्षा जरूरी है, क्योंकि इसमें कई गलतियां हैं। न्यायमूर्ति जी.एस. सिंघवी और ए.के. गांगुली की पीठ द्वारा दिये गए फैसले की समीक्षा के लिए और भी पर्याप्त कारण हैं। सरकार ने नीति सम्बन्धी फैसले में हस्तक्षेप करने के लिए भी उच्चतम न्यायालय पर सवाल उठाये हैं और कहा है कि नीति के बारे में फैसला स्थापित कानून के विपरीत है।
उधर, पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने टू-जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंसों को रद्द करने के बारे में उच्चतम न्यायालय के फैसले की समीक्षा करने की मांग की है। राजा ने आज न्यायालय से कहा कि लाइसेंसों को रद्द किया जाना सामान्य न्याय और न्यायिक तौर-तरीकों के सिद्धांत का उल्लंघन है, क्योंकि उन्हें अपनी बात कहने का मौका दिये बिना, दोषी ठहराया गया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ फैसले के निष्कर्ष से, टू-जी स्पेक्ट्रम आबंटन घोटाले मामले में उनका बचाव पक्ष प्रभावित हो सकता है। राजा इस मामले में एक साल से अधिक समय से जेल में हैं।

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