गुरुवार, 9 मई 2013

नशैलों के लिए जुहू बीच बना दलसागर!


नशैलों के लिए जुहू बीच बना दलसागर!

(शरद खरे)

सिवनी (साई)। दलसागर का सौंदर्यीकरण नगर पालिका द्वारा अवश्य कराया जा रहा है, पर नगर के सुबह-शाम से देर रात के नशेलचियों को क्या कहा जा सकता है, जो अपने शौक के मद्देनजर इसे मुंबई का जुहू बीच बनाने पर आमदा हैं। मुंबई, गोआ न जा सकें तो क्या दलसागर के सुरम्य तटों में इसका अनुभव तो किया ही जा सकता है। इसी सोच को ये अंजाम देने पर उतारू हैं।
नगर के हृदय स्थल पर मौजूद, गौड़ राजा दलपत शाह के ऐतिहासिक राजकाल में निर्मित यह तालाब दलसागर न केवल अपने आकार-प्रकार के चलते बल्कि जैव विविधताओं की मौजूदगी के कारण सिवनी नगर की पहचान माना जाता है। समय पर जिले में पदस्थ रहे जिला कलेक्टरों ने इसके सौंदर्य को संचित करने का प्रयास भी किया है। तालाब के सौंदर्यीकरण, गहरीकरण बीच में मौजूद टापू के विकास, नौकाविहार आदि की सुविधाऐं भी शासन स्तर और जनसहयोग से मुहैय्या कराई गई। इन सभी कार्यों के प्रयासों पर अमल भी हुआ, परन्तु रख-रखाव व निगरानी की मुकम्मल व्यवस्था न होने के कारण, नतीजा वही ‘‘ढाक के तीन पात‘‘। व्यवस्था परिवर्तन होते ही फिर से अव्यवस्था अपने ढर्रे पर आ जाती है। दलसागर- गाड़ियां धोने, धोबी घाट और शौचालय में बदल कर रह जाता है।
एक बार फिर नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी और जिला प्रशासन के तालमेल से दलसागर के सौंदर्यीकरण का बीड़ा उठाया गया है। पूर्व से प्रस्तावित चारों ओर वाकर्स-वे, फव्वारे, लाईटिंग, और बाउण्ड्री दीवार का निर्माण प्रगति पर है। इन सब सुविधाओं का लाभ भले ही शहर के नागरिक नहीं उठा रहे हैं, पर इसका फायदा मयकश यानि शराब के शौकीन खुले आम बेखौफ होकर उठाते देखे जा सकते हैं। अल-सुबह या सांझ ढले से देर रात्रि, दलसागर के विभिन्न घाटों पर इनका जमावड़ा देखा जा सकता है। इस झील के किनारों पर देशी और विदेशी शराब की दुकानें हैं। हालांकि इस शराब सेवन के लिए अहाते बने हैं, पर शराब खोर अपनी फितरत को प्राकृतिक आनंद देने के चलते और उमस भरी गर्मी से निजात पाने खुली और ठण्डी हवा के झोंको का आनंद लेने दलसागर के तीरे, खुले में बैठ, शराबखोरी करते देखे जा सकते हैं।
दल सागर के खुले हुए और लहरों के थपेड़े वाले खुली ठण्डी हवा के किनारे मुंबई के जुहूबीच या गोवा के समुद्री तटों का नजारा दे स्वास्थ्य के लिए सुबह-शाम सैर करने वालों से अधिक इन जुनूनी मयकशों को अपनी ओर अधिक आकर्षित कर रहे हैं। वैसे समझा जा सकता है कि ऐसे माहौल में कौन सभ्य शहरी इसका उपयोग करना चाहेगा।
सौंदर्यीकरण और नगर विकास के लिए संकल्पित पालिका अध्यक्ष, प्रशासन और पुलिस से यह अपेक्षा व्यक्त की जाती है कि वह ‘‘दलसागर ओपन बार‘‘ की ओर संज्ञान ले अन्यथा इनकी सारी कवायद व्यर्थ ही साबित होगी.....

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