शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

बंदरो से त्रस्त हैं दिल्ली वासी


बंदरो से त्रस्त हैं दिल्ली वासी

(धीरेंद्र श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। राजधानी के कमोबेश हर इलाके में लोगों की नाक में दम करने वाले बंदरों से अब हाईकोर्ट भी नाराज नजर आ रहा है। दिल्ली हाइकोर्ट ने राजधानी में बंदरों के उत्पात पर काबू पाने के लिए राज्य सरकार और एमसीडी को साथ मिल कर काम करने को कहा है। राजधानी में बंदरों को काबू में करने पर राज्य सरकार और एमसीडी का अलग-अलग रुख है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एके सीकरी और न्यायाधीश राजीव सहाय एंडला की पीठ ने बंदरों को पकड़ने के लिए वन्य जीव विभाग को निर्देश देने संबंधी एमसीडी की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। एमसीडी का कहना है कि इस काम को अंजाम देने के लिए उसके पास प्रशिक्षित व्यक्ति नहीं है। हालांकि, दिल्ली सरकार ने दलील दी कि बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी एमसीडी की है। पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए 3 अक्तूबर की तारीख निर्धारित करते हुए कहा कि आप दोनों को मतभेद दूर करते हुए एक-दूसरे के साथ सहयोग करना चाहिए और समस्या का हल करना चाहिए।

बंदरो से त्रस्त हैं दिल्ली वासी


बंदरो से त्रस्त हैं दिल्ली वासी

(धीरेंद्र श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। राजधानी के कमोबेश हर इलाके में लोगों की नाक में दम करने वाले बंदरों से अब हाईकोर्ट भी नाराज नजर आ रहा है। दिल्ली हाइकोर्ट ने राजधानी में बंदरों के उत्पात पर काबू पाने के लिए राज्य सरकार और एमसीडी को साथ मिल कर काम करने को कहा है। राजधानी में बंदरों को काबू में करने पर राज्य सरकार और एमसीडी का अलग-अलग रुख है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एके सीकरी और न्यायाधीश राजीव सहाय एंडला की पीठ ने बंदरों को पकड़ने के लिए वन्य जीव विभाग को निर्देश देने संबंधी एमसीडी की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। एमसीडी का कहना है कि इस काम को अंजाम देने के लिए उसके पास प्रशिक्षित व्यक्ति नहीं है। हालांकि, दिल्ली सरकार ने दलील दी कि बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी एमसीडी की है। पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए 3 अक्तूबर की तारीख निर्धारित करते हुए कहा कि आप दोनों को मतभेद दूर करते हुए एक-दूसरे के साथ सहयोग करना चाहिए और समस्या का हल करना चाहिए।

स्कूली बच्चों को पर्यावरण मित्र बनाया गया


स्कूली बच्चों को पर्यावरण मित्र बनाया गया

(नंदन)

नई दिल्ली (साई)। पर्यावरण मित्र एक राष्टीय परियोजना जो पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार तथा आर्सेलर मित्तल के सहयोग से पर्यावरण शिक्षण केंद्र पुणे द्वारा संचालित हो रही हैं। सिवनी एवं बालाघाट जिले के गैर एनजीओ स्कूल में स्वतंत्र युवा शक्ति संगठन सिवनी द्वारा यह कार्यक्रम क्रियांवित किया सतत जारी हैं जिसमें पर्यावरण मित्र कार्यक्रम के अंतर्गत ली गई गतिविधियंा जैसे जल संरक्षण उर्जा संरक्षण कचरा प्रबंधन जैवविविधता संरक्षण तथा संस्क्रति एवं धरोहर के संरक्षण के प्रति बच्चों को प्रेरित कर पर्यावरण मित्र बनाने के लिये प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया जा रहा हैैं।
जिसके तहत संस्था द्वारा स्कूलों का पंजीयन कर पर्यावरण मित्र शिक्षकों के माध्यम से पर्यावरण मित्र बच्चों का चयन कर जिलें की गैर एनजीओ स्कूल द्वारा संचालित गतिविधियंा जैसे स्कूल जैवविविधता पंजी तैयार करना कचरा प्रबंधन उर्जा एवं जल संरक्षण संस्क्रति एवं धरोहर के संरक्षण की दिशा में बच्चों को प्रोत्साहित कर जागरूक बनाया जा रहा हैं
इस संस्था के अध्यक्ष राजेश टेमरे ने बताया कि पर्यावरण मित्र कार्यक्रम के अंतर्गत स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को जिले के अलग अलग विकास खण्ड के अंतर्गत आने वाले गैर एनजीओ स्कूल में संस्था के कार्यकर्ताओं द्वारा जल संरक्षण उर्जा संरक्षण कचरा प्रबंधन जैवविविधता संरक्षण तथा संस्क्रति एवं धरोहर के संरक्षण संबधीं गतिविधियांे के बारे में बताया गया जिससे बच्चे पर्यावरण के महत्व को समझ सके ओर आगे चल कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सहभागी बनकर अहम भूमिका अदा कर सकें। विकास खण्ड कुरई-महेंद्र राहंगडाले, विकास खण्ड बरघाट-महेंद्र राहंगडाले, विकास खण्ड सिवनी-राजेश बघेल /शैलेंद्र महोबिया, विकास खण्ड छपारा-चंद्रभान सिह बघेल, विकास खण्ड केवलारी-सुरेश  पटले, विकास खण्ड घंसौर-तुलाराम गोल्हानी, विकास खण्ड लखनादौन-सेंडेजी राजेश बघेल, विकास खण्ड धनौरा-महेंद्र राहंगडाले, राजेश का समावेश है इसी तरह बालाधाट जिले के सदस्यों में दिनेश राहांगडाले, ओमप्रकास राहांगडाले, हरीश शाव, लोकेश गौतम, राजेश टेमरे, रूपेश राहांगडाले, शिशुपाल ठाकरे  शामिल हैं जिनके सहयोग से इस संस्था द्वारा स्कूली बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुये विभिन्न कार्यक्रम समय समय पर आयोजित होते रहते हैं। जिसके अंतर्गत इस कार्यक्रम बच्चों से पर्यावरण से संबधित चर्चा करके खेल के माध्यम से रैली संवाद तथा प्रश्नोत्तरी इत्यादि द्वारा उन्हें प्रेरित कर पर्यावरण मित्र बच्चें तैयार किये जा जाते है। इस तरह पर्यावरण मित्र कार्यक्रम का कियांवयन किया जा रहा है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अयोजित कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण मित्र कार्यक्रम के लिऐ विकसित शैक्षिक सामग्री पर्यावरण मित्र पुस्तिका पोस्टर पूर्व राष्टपति एवं पर्यावरण ब्राण्ड ऐमबेसेडर डा। ए।पी।जे अब्दुल कलाम जी द्वारा दी गई प्रतिज्ञा का पोस्टर कार्यक्रम के तहत शाला को प्रदान किया गया

सपा शासन में भी फल फूल रहा है पोंटी चड्ढा का काला कारोबार


सपा शासन में भी फल फूल रहा है पोंटी चड्ढा का काला कारोबार

(आशीष वशिष्ठ / विस्फोट डॉट काम)

लखनऊ (साई)। यूपी से बसपा की सरकार भले ही चली गई हो, लेकिन अभी भी शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा का साम्राज्य बरकरार है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री एवं विभागीय मंत्री अखिलेश यादव अब तक चार जिला आबकारी अधिकारियों को शराब की ओवर रेटिंग के चलते निलंबित कर चुके हैं, बावजूद इसके प्रदेश में धड़ल्ले से प्रिंट रेट से अधिक मूल्य पर शराब बेची जा रही है। इससे करीब 2000 करोड़ की अवैध वसूली का काला कारोबार जारी है।
एमआरपी से अधिक और अवैध शराब की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए आबकारी विभाग द्वारा जारी किया गया शासनादेश कागजों तक सीमित होकर रह गया है। ज्ञात हो कि शराब माफिया पोंटी चड्ढा के ठिकानों पर आयकर विभाग के छापों के बाद प्रदेश सरकार ने 10 फरवरी, 2012 को एक शासनादेश जारी कर प्रदेश के सभी जिला आबकारी अधिकारी, उप आबकारी आयुक्त (प्रभार) तथा संयुक्त आबकारी आयुक्त (जोन) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि प्रदेश के किसी भी जनपद में देसी/ विदेशी मदिरा तथा बीयर की एमआरपी से अधिक मूल्य पर थोक/ फुटकर बिक्री (ओवर रेटिंग) कदापि न हो पाये।
इसके बाद लगभग डेढ़ माह तक प्रिंट रेट से शराब बिकी। जैसे ही सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में पूर्ववर्ती सरकार की आबकारी व्यवस्था जारी रखने यानी थोक व फुटकर शराब व्यापार पर पोंटी चड्ढा का कब्जा बने रहने की घोषणा की वैसे ही यह अंदेशा जाहिर किया जा रहा था कि प्रदेश में ओवर रेटिंग पर शराब बिक्री पर लगाम लगा पाना आसान नहीं होगा। यह आशंका सच साबित भी हो रही है।
सत्ता बदलने के बाद भी पोंटी चड्ढा का काला कारोबार बदस्तूर जारी है। जब भी किसी थोक अथवा फुटकर लाइसेंसी द्वारा ओवर रेटिंग की शिकायत प्राप्त हो तत्काल टीमें भेजकर उसकी सघन जांच करायी जाए। यदि कोई ओवर रेटिंग करती हुआ पायी जाये तो संबंधित लाइसेंसी/ दुकानदार के विरुद्ध आबकारी अधिनियम की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत प्रभावी कठोर विधि सम्मत कार्रवाई तत्काल सुनिश्चित की जाये। अवैध मद्य निष्कर्षण एवं अन्य प्रांतों की मदिरा की तस्करी तथा अवैध मदिरा की बिक्री पर भी कड़ी नजर रखी जाए। इसके लिए समुचित मुखबिरी विकसित की जाये और प्रवर्तन तथा एसएसएफ इकाइयों का सहयोग प्राप्त करते हुए इनकी पकड़-धकड़ के बारे में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाये। यही नहीं प्रत्येक जिले में रोज की गई कार्यवाही की रिपोर्ट आबकारी आयुक्त को भेजा जाना सुनिश्चित किए जाने का भी निर्देश संबंधित जिला आबकारी अधिकारी को दिया गया था।
शासनादेश में चेतावनी भी दी गयी थी कि यदि उपरोक्त निर्देशों के अनुपालन में किसी प्रकार की कोई शिथिलता पायी जाती है तो उसके लिए संबंधित आबकारी निरीक्षक तथा जिला आबकारी अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे एवं उनके विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्यवाही आरम्भ कर दी जाएगी। यदि इस प्रकार शिथिलता दोबारा पायी जाती है तो संबंधित अधिकारी को निलम्बित करने पर भी विचार किया जायेगा।
इसके साथ ही शासनादेश में कहा गया कि संबंधित उप आबकारी आयुक्त प्रभारी एवं संबंधित संयुक्त आबकारी आयुक्त, जोन भी किसी प्रकार की शिथिलता पाये जाने पर अपने पर्यवेक्षणीय दायित्वों में शिथिलता के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे। यदि किसी जनपद से रिपोर्ट किसी दिन नहीं प्राप्त होती तो उसके लिए संबंधित जिला आबकारी अधिकारी तो उत्तरदायी होंगे ही संबंधित प्रभार केउप आबकारी आयुक्त तथा जोन के संयुक्त आबकारी आयुक्त भी उतने ही उत्तरदायी होंगे। पोंटी चड्ढा की हनक और विभागीय भ्रष्टाचार में सिक्के की खनक के कारण यह शासनादेश व्यवहार रूप में रद्दी की टोकरी में चला गया है तथा ओवर रेटिंग से लगभग 2000 करोड़ रुपये की अवैध वसूली जारी है।

राडिया टेप लीक करने वाले को नहीं खोज पाई सरकार


राडिया टेप लीक करने वाले को नहीं खोज पाई सरकार

(विस्फोट डॉट काम)

नई दिल्ली (साई)। सरकार ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि कार्पाेरेट घरानों के लिए संपर्क का काम करने वाली नीरा राडिया और टाटा समूह के अध्यक्ष रतन टाटा सहित कई प्रमुख व्यक्तियों के बीच रिकार्ड की गयी टेलीफोन वार्ता के टेप लीक करने वाले स्रोत का पता नहीं लगाया जा सका है।
न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी और न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष सरकार ने सीलबंद लिफाफे में गोपनीय जांच रिपोर्ट पेश की। न्यायाधीशों ने इसके अवलोकन के बाद कहा कि संक्षेप में रिपोर्ट कहती है कि यह पता लगाना मुश्किल है कि किस स्रोत ने इसे लीक किया।
न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘इन टेप को लीक करने वाले स्रोत के बारे में वे (सरकार) पता लगाने में विफल रहे हैं।’’ न्यायाधीशों के अनुसार रिपोर्ट में सरकार ने कहा है कि नियमों के तहत इन टेप की मूल प्रति शीर्ष अदालत के समक्ष पेश करने के बाद सारे टेप नष्ट कर दिये गए हैं। टेलीफोन टैपिंग की सारी वार्तालाप सार्वजनिक करने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाले गैर सरकारी संगठन सेन्टर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस के वकील प्रशांत भूषण ने इस घटनाक्रम पर अचरज व्यक्त किया है।  टेलीफोन टैपिंग के दौरान रिकार्ड की गयी वार्ता के अंश लीक होने के मामले में सरकार की जांच की दूसरी रिपोर्ट सुनवाई के दौरान न्यायालय में पेश की गयी। इससे पहले, सरकार ने प्रगति रिपोर्ट में दावा किया था कि इस लीक के लिए कोई भी सरकारी एजेन्सी जिम्मेदार नहीं है और मीडिया द्वारा प्रसारित राडिया के टेप से छेड़छाड़ की गयी थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि टैपिंग के काम में सर्विस प्रदाताओं सहित आठ से दस एजेन्सियां शामिल थी।
वित्त मंत्रालय को 16 नवंबर, 2007 को मिली शिकायत के आलोक में आय कर विभाग के आदेश पर तीन चरणों में कुल 180 दिन नीरा राडिया की टेलीफोन वार्ता रिकार्ड की गयी थी। वित्त मंत्रालय को मिली इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नीरा राडिया ने नौ साल के भीतर तीन सौ करोड़ का विशाल कारोबार खड़ा कर दिया है। नीरा राडिया के रिकार्ड की गयी टेलीफोन वार्ता के अंश मीडिया में प्रकाशित और प्रसारित होने के बाद रतन टाटा ने उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर ये टेप लीक होने की जांच कराने का अनुरोध किया था। रतन टाटा का कहना था कि सरकारी स्तर पर रिकार्ड की गयी टेलीफोन वार्ता के अंश लीक होने से उनके निजता के अधिकार का हनन हुआ है।