शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

प्रतिदिन चलेगी छिंदवाड़ा दिल्ली रेल गाड़ी


प्रतिदिन चलेगी छिंदवाड़ा दिल्ली रेल गाड़ी

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। महाकौशल के क्षत्रप केंद्रीय मंत्री कमल नाथ द्वारा छिंदवाड़ा से नई दिल्ली के लिए प्रतिदिन एक एक्सप्रेस रेल गाड़ी की शुरूआत करवाने से क्षेत्र में हर्ष की लहर व्याप्त है। इसके पहले छिंदवाड़ा से भोपाल जाने वाली पेंचव्हेली फास्ट पैसेंजर को इंदौर तक बढ़ा देने से लोगों का आवागमन बहुत ही सुलभ हो गया है। छिंदवाड़ा से दिल्ली के लिए यह रेल 3 सितम्बर से रोजाना तो दिल्ली से छिंदवाड़ा की रेल 7 सितम्बर से रोजाना आरंभ होगी।
भारतीय रेल के इतिहास में संभवतः यह पहला ही प्रकरण होगा कि जब रेल खण्ड का निर्माण हुए बिना ही उसे विद्युतीकरण के लिए मंजूर कर दिया गया हो। आमला से बरास्ता परासिया, छिंदवाड़ा नागपुर के रेलखण्ड का विद्युतीकरण मंजूर कर दिया गया है, यह उपलब्धि कमल नाथ के ही खाते में जाएगी। गौरतलब है कि इटारसी से जबलपुर के रेलखण्ड के सालों पुराने होने के बाद भी इसका विद्युतीकरण अब तक लंबित है।
रेल मंत्रालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि भारत सरकार के रेल मंत्रालय ने छिंदवाड़ा जिले के परासिया रेल्वे स्टेशन को माडल स्टेशन बनाने और आमला छिंदवाड़ा नागपुर के रेलखण्ड के विद्युतीकरण की अनुमति प्रदान की है। उल्लेखनीय है कि नागपुर से छिंदवाड़ा रेल खण्ड के अमान परिवर्तन की पहल 2006 में रेल मंत्री के बतौर लालू प्रसाद यादव ने की थी।
लगभग 150 किलोमीटर की इस परियोजना की लागत उस वक्त 381 करोड़ रूपए बताई गई थी। इस परियोजना में मार्ग में पेंच, सतपुड़ा और मेलघाट टाईगर रिजर्व का कारीडोर आ रहा है किन्तु यात्रियों की सुविधाओं के मद्देनजर इस कारीडोर को भी अनदेखा कर एक नजीर पेश की गई है, जिसकी कहीं सराहना तो कहीं निंदा हो रही है।
3 सितम्बर को छिंदवाड़ा में आयोजित इस विशेष प्रोग्राम में रेल मंत्री मुकुल राय, छिंदवाड़ा के सांसद कमल नाथ मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर भी भाग लेंगे। यहां उल्लेखनीय है कि हरवंश सिंह ठाकुर छिंदवाड़ा में जन्मे हैं और बाद में वे सिवनी आकर यहीं बस गए। हरवंश सिंह ठाकुर सिवनी जिले के केवलारी विधानसभा से चौथी बार लगाता विजयी हुए हैं।
सिवनी जिले की सीमा से लगे छिंदवाड़ा, बालाघाट, नरसिंहपुर, जबलपुर एवं नागपुर जिलों में ब्राड गेज का संचालन किया जा रहा है। आदिवासी दृष्टि से पिछड़े मण्डला जिले में भी ब्राडगेज की पदचाप सुनाई देने लगी है। सिवनी में ब्राडगेज के बजाए हरवंश सिंह के नेतृत्व में हर बार कांग्रेस के नेता आश्वासन की सौगात सालों से लाकर बड़े बड़े बधाई और शुभकामनाओं के विज्ञापन छपवाकर जनता को बरगला रहे हैं।
वर्ष 2006 में लालू यादव ने छिंदवाड़ा से सिवनी होकर नैनपुर के रेलखण्ड के अमान परिवर्तन का आश्वासन दिया था, कांग्रेस भाजपा के नेताओं ने इसकी खूब वाहवाही लूटी। आज 6 सालों बाद भी एक इंच काम नहीं हुआ है, जिससे साबित होता है कि कांग्रेस के नेता और विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर ने सिवनी वासियों को किस कदर छला है।
3 सितम्बर को छिंदवाड़ा के प्रोग्राम में हरवंश सिंह एक बार फिर मौजूद रहे। जिला कांग्रेस कमेटी सिवनी में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के शासनकाल में स्वर्णिम चर्तुर्भुज सड़क परियोजना के अंग उत्तर दक्षिण फोरलेन गलियारे में वर्ष 2008 से रूका काम भी सिंह के इशारे पर ही रोका गया है।
वहीं दूसरी ओर छिंदवाड़ा से सिवनी और नरसिंहपुर से छिंदवाड़ा होकर नागपुर के मार्ग का काम युद्ध स्तर पर जारी है। यहां गौरतलब बात यह है कि सिवनी से नागपुर के मार्ग का काम इसलिए रोका गया है क्योंकि यह मार्ग पेंच कान्हा के काल्पनिक वाईल्ड लाईफ कारीडोर के बीच से होकर गुजर रहा है। वहीं दूसरी ओर छिंदवाड़ा से नागपुर का सड़क और रेल मार्ग सतपुड़ा पेंच और मेलघाट के वाईल्ड लाईफ कारीडोर को कई मर्तबा काट रहा है।
कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि चुनाव के पूर्व हरवंश सिंह विधानसभा उपाध्यक्ष का चोला उतारकर फेंकने के इच्छुक हैं। कहते हैं कि 2008 के बाद भाजपा का विरोध करने से बचने के लिए उन्होंने यह संवैधानिक पद धारण कर लिया था, किन्तु अब चुनाव आने के साथ ही वे सक्रिय होना चाह रहे हैं। यही कारण होगा कि वे अपने वर्तमान कथित राजनैतिक आका कमल नाथ को प्रसन्न करने के लिए सिवनी के हित संवंर्धन को त्यागकर छिंदवाड़ा के इस प्रोग्राम में तालीठोंकने जा रहे हैं।

आरएसएस सर्टिफाइड वेबसाइटों को ही विज्ञापन देगा मध्य प्रदेश जनसंपर्क


आरएसएस सर्टिफाइड वेबसाइटों को ही विज्ञापन देगा मध्य प्रदेश जनसंपर्क

(विस्फोट डॉट काम)

नई दिल्ली (साई)। मध्य प्रदेश जनसंपर्क पूरी तरह से आरएसएस के रंग में रंगता जा रहा है। न केवल उसके रंग रूप में भगवा भारी हो चला है बल्कि अब अंदरखाने में विज्ञापन के मामले में भी उन्हीं वेबसाइटों को तरजीह दी जा रही है जिनके ऊपर भगवा रंग चढ़ा है। अब विज्ञापन के लिए बाकायदा आरएसएस की सहमति वाला सर्टिफिकेट लाना जरूरी हो गया है।
देश के हिन्दीभाषी राज्यों में फिलहाल मध्य प्रदेश जनसंपर्क ही एकमात्र ऐसा जनसंपर्क है जो वेबसाइटवालों से संपर्क में रहता है। अभी तक जनसंपर्क पर आरोप लगता था कि वहां बैठे कमीशनखोरअपनी अपनी पसंद की वेबसाइटों को विज्ञापन दिलाते हैं। शिकायतें इतनी बढ़ गई कि मीडिया मामलों में विशेष रूचि रखनेवाले मध्य प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा ने हस्तक्षेप किया। न सिर्फ हस्तक्षेप किया बल्कि अपनी पसंद के एक व्यक्ति लाजपत आहूजा को जनसंपर्क में विज्ञापन और जनसंपर्क का प्रभार भी दिलवा दिया। लाजपत आहूजा अपने आपको आरएसएस का समर्पित वर्कर बताते हैं और मिलनेवालों को आरएसएस के करीबी होने का किस्सा भी सुनाते हैं।
इसके बाद अगले चरण में मध्य प्रदेश और लखनऊ दिल्ली की कुछ वेबसाइटों को मीडिया चौपाल के बहाने भोपाल बुलाया गया। दिनभर की मीटिंग हुई। इस मीटिंग में जो जो वेबसाइट संचालक शामिल हुए थे उन्होंने अपनी आर्थिक बदहाली बताई। हालांकि इस मीटिंग से कुछ महत्वपूर्ण वेबसाइटों के संचालक दूर ही रहे लेकिन जो आये उसमें ज्यादातर आरएसएस के समर्थक थे, या यह भी कह सकते हैं कि उन्हीं को बुलाया गया जो विचारधाराके लिए काम करने को प्रतिबद्ध थे।
इस मीटिंग की कहानी तो अलग लेकिन इस मीटिंग के बाद बिना डाक की एक चिट जनसंपर्क पहुंची है। यह चिट कोई सरकारी नोटशीट का हिस्सा तो नहीं है लेकिन इसकी अहमियत किसी सरकारी नोटशीट से ज्यादा है। बताते हैं कि खुद सीपीआर महोदय इस चिट का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। चिट क्या यह एक लिस्ट है जिसमें कुछ वेबसाइटों के नाम भेजे गये हैं। अब खबर है कि यह लिस्ट जनसंपर्क विभाग पहुंचा दी गई है जिसे एक बार फिर प्रभात झा के करीबी व्यक्ति ने तैयार किया है। चिट के साथ मौखिक संदेश यह भेजा गया है कि जो जो वेबसाइटें इसमें शामिल हैं उन्हें एक निश्चित रकम अदा की जाएगी।
इस लिस्ट को तैयार करने के पीछे लंबी अवधि की योजना क्या है यह तो पता नहीं चल पाया है लेकिन इस लिस्ट को लेकर जनसंपर्क में काफी गहमा गहमी है। जिस जनसंपर्क में एकबार को संबंधित मंत्री की चिट्ठी को भी किनारे रख दिया जाता है उस जनसंपर्क में इस चिट को इतना महत्वपूर्ण क्यों मान लिया गया है? वही लाजपत आहूजा इस लिस्ट को प्रभारी मत्री की चिट्ठी से ज्यादा अहमियत दे रहे हैं जिनकी नियुक्ति में प्रभात झा का बहुत बड़ा रोल रहा है। उम्मीद है कि इस लिस्ट के अनुसार ही अगले कुछ दिनों में जनता का पैसा प्रभात झा समर्थक उन वेबसाइटों को बांटना शुरू कर दिया जाएगा जिसमें से एक दो के संचालक खुद प्रभात झा के कर्मचारी रह चुके हैं।
इस तरह, अब मध्य प्रदेश जनसंपर्क की नई अघोषित विज्ञापन नीति यह बन गई है कि उन्हीं वेबसाइटों को विज्ञापन दिया जाएगा जो विचारधारा को आगे बढ़ायेंगी और प्रदेश में बतौर नेता प्रभात झा को प्रोजेक्ट करेंगे।

सौंधिया खदान कमलनाथ की बहन को!


सौंधिया खदान कमलनाथ की बहन को!

मोजर वियर की मालिक हैं नाथ की बहनें!

(आंचल झा)

रायपुर (साई)। प्रदेश के कोल खदान आवंटन को लेकर सरकार पर उठ रही उंगलियों को देखते हुए खनिज प्रभारी एवं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने मंत्रिमंडल के समक्ष पूरी स्थिति स्पष्ट की। मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री व खनिज विभाग द्वारा अपनायी गयी प्रक्रिया पर विश्वास जताते हुए कांग्रेस का जबर्दस्त जवाब देने की बात कही। कहा जा रहा है कि मोजर वियरनाम की नामी गिरानी कंपनी की मालिक केंद्रीय मंत्री कमल नाथ की बहने हैं।
करीब एक माह के अंतराल बाद हुई मंत्रिमंडल की बैठक करीब डेढ़ घंटे चली। मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इसमें आधिकारिक निर्णयों के बाद अफसरों की अनुपस्थिति में मंत्रिमंडल के राजनीति मामलों की समिति की बैठक की।
इस बैठक में लोक निर्माण मंत्री बृजमोहन अग्रवाल राजस्थान प्रवास और स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल अस्वस्थ्यता के कारण शामिल नहीं हुए। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कोल खदान आवंटन को लेकर राज्य शासन की कार्यवाही पर न केवल साथी मंत्रियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया बल्कि उन्हें संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां भी उपलब्ध कराया ताकि वे भी दौरों के समय तथ्यों का खुलासा कर सके।
डॉ. सिंह ने भटगांव खदान आवंटन और भाजपाध्यक्ष गडकरी के करीबी संचेती ब्रदर्स की कंपनी एसएमएस इन्फ्रा स्ट्रक्चर्स को खनन पार्टनर बनाए जाने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी। इसी तरह से सरगुजा के सौंधिया खदान मोजरबियर को देने की सिफारिश की भी जानकारी दी। बैठक में मंत्रियों ने प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए विश्वास जताया।
चर्चा के दौरान गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने मंत्रिमंडल में खुलासा किया कि सौंधिया खदान केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ की बहन की कंपनी मोजरबियर को दी गयी है। उन्होंने कहा कि अधिकांश खदान व संयंत्र के मालिक कांग्रेसी है जो 50-60 साल से कमा रहे हैं और ऐसे लोग भाजपा में आरोप लगा रहे हैं। श्री कंवर ने पूरे प्रदेश में जिले-जिले में कांग्रेसियों का विरोध करने की बात कही।

प्रबंधक बन गए पत्रकार: प्रभात झा


प्रबंधक बन गए पत्रकार: प्रभात झा

(पूनम वैभव)

दमोह (साई)। एक दिवसीय प्रवास पर दमोह आए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने स्थानीय सर्किट हाउस में एक पत्रकार वार्ता का आयोजन किया। पत्रकारों से रुबरु हुए प्रभात झा ने अपने विचार प्रकट करते हुए प्रदेश की राजनैतिक उथल-पुथल पर प्रकाश डाला, वहीं आगामी प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर भी चर्चा की।
श्री झा ने बताया कि इस कार्यक्रम के बाद प्रदेश के 230 विस क्षेत्रों में उनके संपर्क शुरू हो जाएंगे। उनकी यह बात आगामी प्रदेश प्रतिनिधियों की ओर इशारा कर रही है,जिनसे उनके दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनने का सपना तैयार है। भाजपा का प्रतिनिधित्व कर रहे झा प्रदेश में आईएएस अफसरों द्वारा की जा रही प्रतिनियुक्ति की मांग पर टिप्पणी करने से हिचकिचाते नजर आए और अपने जवाब में कहा कि आईएएस अधिकारी प्रतिनियुक्तियों के लिए उतावले क्यों हैं, इस बात का उत्तर तो सरकार ही दे सकती है।  
पत्रकार वार्ता में पत्रकारों के हितैषी बने प्रभात झा ने कहा कि आज का पत्रकार सुरक्षित नहीं है, बल्कि उसकी भूमिका महज एक प्रबंधक की रह गई है। श्री झा ने अपने विचारों की प्रस्तुति करते हुए कहा कि जब वह पत्रकार जीवन जी रहे थे, तब उनसे किसी ने नहीं कहा कि ऐसा क्यों लिख रहे हो।
अपने अनुभव बता रहे झा ने कहा कि आज का पत्रकार लिखने के लिए प्रतिबंधित है, उसे बताया जाता है कि किसके विरुद्ध नहीं लिखना और किसके खिलाफ क्या लिखना है, यह कोई पत्रकारिता नहीं। पत्रकारों को अपना समझ रहे प्रभात झा ने कहा कि पत्रकार का जीवन सुरक्षित नहीं है और न ही उसके कार्य की कोई गारंटी है।
भावावेश में बोलते हुए मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष प्रभात झा यह भूल गए कि उनकी ही पार्टी की मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क महकमे द्वारा संघ या भाजपा विचारधारा वाले पत्रकारों को तबियत से उपकृत किए जाने की खबरें राष्ट्रीय स्तर पर उछल रही हैं। जनसंपर्क विभाग द्वारा विज्ञापन भी चीन्ह चीन्ह कर दिए जाने के आरोप सार्वजनिक हो रहे हैं।
संघ परिवार का एकाउंट बंद करने के लिए टेलीकॉम मिनिस्ट्री द्वारा इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को दिए गए निर्देश पर अपनी टिप्पणी करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा ने कहा कि सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम आपात काल की शुरुआत है। श्री झा ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई कर सरकार ने अपनी हठधर्मिता का परिचय दिया है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में इस तरह के इंटरनेट एकाउंट शामिल हैं। लेकिन यह तो तानाशाही है कि संघ परिवार का एकाउंट बंद कर दिया गया।

असम में जनजीवन सामान्य



असम में जनजीवन सामान्य

(पुरबालिका हजारिका)

गोवहाटी (साई)। असम में हिंसा प्रभावित बोडोलैंड प्रादेशिक जिला क्षेत्रों और धुबरी जिले के अधिकतर स्कूलों में पढ़ाई आज से शुरू होने की संभावना है। धुबरी में कुल १७० स्कूलों में से ४५ में पहले ही कक्षाएं आरंभ हो चुकी हैं। राज्य सरकार ने इसके लिए अस्थाई इंतजाम किए हैं, क्योंकि कुछ शिक्षा संस्थानों में राहत शिविर चल रहे हैं। असम सरकार बंगलौर लौटने वाले सभी लोगों के रेल टिकट का खर्च वहन करेगी।
सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि यह सुविधा उन छात्रों को दी जाएगी जो फर्जी एसएमएस धमकियों के कारण कर्नाटक से असम लौट आए थे। सरकारी सूत्रों के अनुसार हेल्पलाइन के जरिए रजिस्ट्रेशन करने वाले लोगों के लिए मुफ्त टिकट आरक्षण किया जाएगा।
वहीं भारतीय रेल भी असम सरकार के साथ इस मामले में कंधे से कंधा मिलाकर खडा है। पूर्वाेत्तर, सीमांतर रेलवे शनिवार को गुवाहाटी और बंगलौर के बीच एक अतिरिक्त रेलगाड़ी चलाएगी। इस बीच आज गुवाहाटी और आसपास के इलाकों में पूर्वाेत्तर छात्र संघ के रैली के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

नेताओं को कैसे दिखाएंगे आईना


नेताओं को कैसे दिखाएंगे आईना

(दिव्या शर्मा)

नई दिल्ली (साई)। किसी ने कहा है मैं आईना हूं मेरी अपनी जवाबदारी है, जिसे कुबूल न हो सामने से हट जाए। अब वक्त आ गया है कि सियासत में बैठा हर नेता भागने की बजाए आईने का सामना करे और संसद देष और जनता के प्रति जवाबदेह बने। अगर वह अपनी नैतिक जिम्मेदारियां पूरी तरह भूल चुके हैं तो हमारी कानूनी व्यवस्था के जरिए आवाम को इन्हें आईना दिखाना होगा। सीएजी जैसे स्वतंत्र निकाय यह काम कर रहे हैं जिसके जरिए कोल ब्लॉक आवंटन और कई बड़े घोटाले सामने आए हैं। इसी तरह सीबीआई को भी सरकारी दबाव से बाहर लाना बेहद जरूरी हो चुका है। कब तक प्रगति और विकास के नाम पर रोज नए घोटाले सामने आते रहेंगे। कब तक चर्चा के नाम पर खानापूर्ति कर संसदीय सत्र का समय और पैसा बर्बाद होता रहेगा। बहस में उलझा कर कब तक सत्ता पक्ष खुद को पाक साफ बताकर निकल जाएगी। रिमोट कंट्रोल्ड जांच एजेंसिया बनाकर कब तक जनता को भ्रमित किया जाता रहेगा।
मौजूदा हालात बता रहे हैं कि एक और सत्र घोटाले की भेंट चढ़ जाएगा और सभी नेतागण 2014 के लिए अपने अपने समीकरण बनाने में जुट जाएंगे। मोटी रकम और ब्लैकमेलिंग जैसे षब्दों को मुद्दा बनाकर डायवर्षन की सियासत कर रही कांग्रेस षायद यह भूल गई है कि उनके नेताओं ने भी सभ्य संसदीय आचरण का उदाहरण नहीं दिया है। जीरो लॉस की दलील देने वाली सरकार 2जी और कॉमनवैल्थ घोटाले में मुंह की खा चुकी है और अब कोयला आवंटन में भी उसके हाथ काले नज़र आ रहे हैं। वहीं कोयले पर कोहराम की कालख विपक्ष के दामन पर भी है। भाजपा नैतिक जिम्मेदारी लेकर प्रधानमंत्री से इस्तिफा मांग रही है। वहीं कांग्रेस का आरोप है कि विपक्ष बहस करने से डर रही है। जवाबी हमले में विपक्ष का कहना है कि कांग्रेस को जांच से डर क्यों? ब्लैकमेल वही होता है जिसने कोई अनैतिक काम किया हो। बेषक कोयला आवंटन जिस स्क्रीनिंग कमेटी ने किया है वह कांग्रेस की है इसलिए वह इन आरोपो से पलड़ा नहीं झाड़ सकते लेकिन इसमें एनडीए भी बेदाग नहीं हैं। ऐसे मंे प्रधानमंत्री की ईराक यात्रा से क्या उपलब्धि हासिल होगी ये देखने लायक होगा।
कोल वॉर के बाद से कभी एनडीए में फूट तो कभी मुलायम का कांग्रेस का साथ छोड़ने जैसे खबरे गरमा रही हैं । अब पक्ष और विपक्ष इस कोल वॉर को सड़क पर लाकर 2014 और उससे पहले हिमाचल और गुजरात के चुनावों में फायदा उठाने की तैयारी में हैैं। इससे ज्यादा नेताओं को कोई लेना-देना नहीं है कि इन घोटालों से देष को कितना आर्थिक नुकसान हुआ है।
इन सबके बीच हर भारतीय के मन में यही सवाल खड़े हो रहे हैं कि पूरी सियासती बस्ती ने संसद को स्वार्थपूर्ति का आखाड़ा बना रखा है ऐसे में गणतांत्रिक मर्यादाएं कब तक बची रहेंगी। क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ देष में उठे जनआंदोलन मौजूदा तस्वीर बदल पाएंगे? कब आम आदमी विष्वास कर पाएगा कि हमारी कानूनी प्रणाली सियासती लोगों पर भी षिकंजा कस सकती है और भ्रष्ट नीतियों पर लगाम लगा सकती है । इसके लिए बेहद ज़रूरी है कि सीबीआई को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए ताकि हर बार की तरह उजागर हुए घोटालों मंे लिप्त रसूखदार सियासती लोग सीबीआई जांच की आड़ में खुद पर लगे आरोपों का इतिश्री न कर पाएं। सीबीआई जैसी जांच एजेंसियांे का काम सिर्फ सरकार के इषारों पर उनके खिलाफ आवाज उठाने वालों पर षिकंजा कसना ही न रह जाए। सियासती जमात को आईना दिखाने के लिए सीबीआई को स्वतंत्र करना बेहद जरूरी हो चुका है।

चिरोटा: फ़ोडे- फ़ुन्सियों मे असरदार



हर्बल खजाना ----------------- 16

चिरोटा: फ़ोडे- फ़ुन्सियों मे असरदार

(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। खेत- खलिहानों, मैदानी भागों, सडक के किनारे और जंगलों में प्रचुरता से पाए जाने वाले इस पौधे में अनेक औषधिय गुणों की भरमार है। इसका वानस्पतिक नाम केस्सिया टोरा है। आदिवासी अंचलों में इसकी पत्तियों का उपयोग भाजी के तौर पर भी होता है और ऐसा माना जाता है कि यह भाजी अत्यधिक पौष्टिक होती है।
चिरोटा की पत्तियों और बीजों का उपयोग अनेक रोगों जैसे दाद-खाज, खुजली, कोढ, पेट में मरोड और दर्द आदि के निवारण के लिये किया जाता है। पत्तियों का उपयोग खाँसी और मवाद के साथ बने त्वचा घावों को खत्म करने के लिये भी होता है। पातालकोट के आदिवासी मुर्गी के अंडों से एल्बूमिन (अंडे के अंदर का चिपचिपा तरल पदार्थ) के साथ पत्तियों को अच्छी तरह से फ़ेंट कर टूटी हुयी हड्डियों के ऊपर प्लास्टर की तरह लगाते है, इनका मानना है कि ये हड्डियों को जोडने का कार्य करता है।
पत्तियों के काढे को दाँतों पर लगाने से दाँतों की समस्या जैसे दाँत दर्द आदि में आराम मिलता है। पीलिया होने पर डाँग- गुजरात के हर्बल जानकार चिरोटा की पत्तियों और बीजों का काढा रोगी को देते है। फ़ोडे और फ़ुन्सियाँ होने पर पत्तियों को कुचलकर लेपित किया जाए तो अतिशीघ्र आराम मिलता है। यदि किसी व्यक्ति को दाद-खाज और खुजली की समस्या हो तो चिरोटा के बीजों को पानी में कुचलकर रोग-ग्रस्त अंग पर लगाने से फ़ायदा होता है। आधुनिक विज्ञान भी इसके एंटी-बैक्टिरियल गुणों को साबित कर चुका है। (साई फीचर्स)

(लेखक हर्बल मामलों के जाने माने विशेषज्ञ हैं)

आदित्य बिरला की मोबाइल कंपनी आईडिया द्वारा ठगी


आदित्य बिरला की मोबाइल कंपनी आईडिया द्वारा ठगी

डायलर ट्यून भी अपने आप हो रही इंस्टाल

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई) मशहूर उद्योगपति आदित्य बिरला की मोबाइल कंपनी आईडिया अपने उपभोक्ताओ के साथ ठगी कर रही है, उक्ताशय की शिकायत निजी क्षेत्र की मोबाईल सेवा प्रदाता आईडिया कंपनी के एक उपभोक्ता ने सार्वजनिक तौर पर लगाए हैं। इंटरनेट पर पड़ी एक शिकायत में इस बात का खुलासा किया गया है। इस शिकायत में कहा गया है कि उसके पैसे उसके खाते में डाले ही नहीं गए हैं। इसके साथ ही साथ डायलर ट्यून भी अपने आप ही इंस्टाल होना और उसके प्रतिमाह पैसे कटने की बात भी बताई जा रही है।
शिकायत में कहा गया है कि तीन जून को आईडिया मोबाइल नम्बर 9616501364 पर 25 रुपये का ई- टॉप अप डलवाया गया और कंपनी की तरफ़ से जवाब आया कि 23 रुपये 6 पैसे उपलब्ध करा दिए गए है। जब की वास्तविक अकाउंट में एक भी रुपया नही आया। कस्टमर केयर से बात करने पर बताया गया की सर्वर डाउन होने कारण आपके अकाउंट में 24 घंटे में रुपया आ जाएगा।
24 घंटे व्यतीत हो जाने के बाद कंपनी के कस्टमर केयर ने बताया की आप के मोबाइल में टॉप अप के बजाये टैरिफ वाउचर डाल दिया गया है जबकि वास्तव में मोबाइल अकाउंट में टैरिफ वाउचर भी नही डाला है और कंपनी के कस्टमर केयर पर टेलीफोन मिलाने पर कंप्यूटर टेप का उत्तर यह आता है की कस्टमर केयर के सभी अधिकारी व्यस्त है अभी आप की बात सम्भव नही है। इस तरह आदित्य बिरला की कंपनी आईडिया अपने उपभोक्ताओ के साथ धोखा-धडी कर रही है जिन - जिन लोगो ने प्राइवेट कंपनियों के सिम ले रखे है उनके साथ यह बड़ी - बड़ी कंपनिया धोखा - धड़ी फ्राड कर रही है। केन्द्र की कांग्रेस सरकार इन्ही कंपनियों के चंदो से चुनी गई है इसलिए कोई कार्यवाही सम्भव नही हो पाती है।
देश भर में उपभोक्ताओं की शिकायत है कि उनके मोबाईल पर अपने आप वह ट्यून जो दूसरे व्यक्ति के डायल करने पर घंटी के स्थान पर सुनाई देती है (डायलर ट्यून) अपने ही आप इंस्टाल हो जाती है, जिसका पैसा भी अपने ही आप कटना आरंभ हो जाता है। इतना ही नहीं मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियांे ने कुछ एसा भी सिस्टम बनाकर रखा हुआ है जिससे दो दो तीन तीन डायलर ट्यन अपने आप इंस्टाल हो जाती है और उससे पैसा कटने लगता है।

(क्रमशः जारी)

वास्तुशास्त्र का प्रभाव, उपयोगिता एवं प्रासंगिकता


वास्तुशास्त्र का प्रभाव, उपयोगिता एवं प्रासंगिकता

(पंडित दयानन्द शास्त्री)

नई दिल्ली (साई)। वास्तुशास्त्र जीवन के संतुलन का प्रतिपादन करता है। यह संतुलन बिगड़ते ही मानव एकाकी और समग्र रूप से कई प्रकार की कठिनाइयों और समस्याओं का शिकार हो जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार पंचमहाभूतों- पृथ्वी ,जल , वायु , अग्नि और आकाश के विधिवत उपयोग से बने आवास में पंचतत्व से निर्मित प्राणी की क्षमताओं को विकसित करने की शक्ति स्वतरू स्फूर्त हो जाती है।
पृथ्वी मानवता और प्राणी मात्र का पृथ्वी तत्व (मिट्टी) से स्वाभाविक और भावनात्मक संबंध है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। इसमें गुरूत्वाकर्षण और चुम्बकीय शक्ति है। यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि पृथ्वी एक विशालकाय चुम्बकीय पिण्ड है। एक चुम्बकीय पिण्ड होने के कारण पृथ्वी के दो ध्रुव उत्तर और दक्षिण ध्रुव हैं। पृथ्वी पर रहने वाले सभी प्राणी , सभी जड़ और चेतन वस्तुएं पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण से प्रभावित होते हैं।वास्तुशास्त्र भवन में पंचमहाभूतों का सही संतुलन और सामंजस्य पैदा कर घर के सभी सदस्यों के लिए सौहार्दपूर्ण वातावरण पैदा करता है। आजकल घरों में साज-सज्जा के बेहतरीन नमूने और अत्याधुनिक उपकरणों की कोई कमी नहीं पाई जाती। अगर कमी होती है, तो प्राकृतिक प्रकाश , वायु और पंचतत्वों के सही संतुलन की। एक घर में सही स्थान पर बनी एक बड़ी खिड़की की उपयोगिता कीमती और अलंकृत साजसज्जा से कहीं ज्यादा है।
भाग्य का निर्माण केवल ज्योतिष और वास्तु से ही नहीं होता, वरन् इनके साथ कर्म का योग होना भी अति आवश्यक है। इसलिए ज्योतिषीय एवं वास्तुसम्मत ज्ञान के साथ-साथ विभिन्न दैवीय साधनाओं, वास्तु पूजन एवं ज्योतिष व वास्तु के धार्मिक पहलुओं पर भी विचार करना अत्यंत आवश्यक है। भाग्यवृद्धि में वास्तु शास्त्र का महत्व वास्तु विद्या बहुत ही प्राचीन विद्या है। ज्योतिष शास्त्र के ज्ञान के साथ-साथ वास्तु शास्त्र का ज्ञान भी उतना ही आवश्यक है जितना कि ज्योतिष शास्त्र का ज्ञान। विश्व के प्राचीनतम् ग्रंथ ऋग्वेद में भी इसका उल्लेख मिलता है। वास्तु के गृह वास्तु, प्रासाद वास्तु, नगर वास्तु, पुर वास्तु, दुर्गवास्तु आदि अनेक भेद हैं। भाग्य वृद्धि के लिए वास्तु शास्त्र के नियमों का महत्व भी कम नहीं है। घर या ऑफिस का वास्तु ठीक न हो तो भाग्य बाधित होता है। वास्तु और भाग्य का जीवन में कितना संयोग है? क्या वास्तु के द्वारा भाग्य बदलना संभव है? इस प्रश्न के उत्तर के लिए यह जानना आवश्यक है कि भाग्य का निर्माण वास्तु से नहीं अपितु कर्म से होता है और वास्तु का जीवन में उपयोग एक कर्म है और इस कर्म की सफलता का आधार वास्तुशास्त्रीय ज्ञान है। पांच आधारभूत पदार्थों भूमि, जल, अग्नि, वायु और आकाश से यह ब्रह्मांड निर्मित है और ये पांचों पदार्थ ही पंच महाभूत कहे जाते हैं। इन पांचों पदार्थों के प्रभावों को समझकर उनके अनुसार अपने भवनों का निर्माण कर मनुष्य अपने जीवन और कार्यक्षेत्र को अधिक सुखी और सुविधा संपन्न कर सकता है। प्राचीन महर्षियों व आधुनिक विद्वानों ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि आकाशस्थ ग्रहों के रूप, रंग, गुण, धर्म, स्वभाव व लक्षण आदि का प्रभाव एक-दूसरे से भिन्न है। प्रत्येक ग्रह अपने गुण धर्म के अनुसार माता के गर्भ में शिशु पिंड पर अपना प्रभाव प्रथम मास में दिखाते हैं। जैसे प्रथम मास में शुक्र, द्वितीय मास में मंगल, तृतीय मास में गुरु, चतुर्थ मास में सूर्य, पंचम मास में चंद्र, षष्ठ मास में शनि, सप्तम मास में बुध, अष्टम मास में लग्नेश और नवम मास में पुनः चंद्र का प्रभाव पड़ने पर बालक का जन्म होता है। इस कारण प्रत्येक मनुष्य में भिन्न-भिन्न रूप रंग, गुण, धर्म, स्वभावादि दिखाई देते हैं। उक्त ग्रहों के आधार पर भी वास्तुशास्त्रीय उपाय किये जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के ज्ञान से मनुष्य पूर्व जन्मों के शुभाशुभ कर्मों का ज्ञान प्राप्त कर सकता है और वास्तु शास्त्रीय ज्ञान प्रगति की ओर उन्मुख होने में सबंध मिलता है। कुछ आधुनिक विचारधारा के लोग यह आक्षेप लगाते हैं कि ईश्वर निर्मित घटनाओं का होना निश्चित है तो उसे जानकर ज्योतिषीय या वास्तुशास्त्रीय उपाय करने से क्या लाभ होगा? इसका उत्तर यह है कि मनुष्य को भविष्य में होने वाले अशुभ घटनाओं का ज्ञान यदि उसे पूर्व में ही प्राप्त हो जाए तो उन घटनाओं के प्रतिकार के लिए उपाय निश्चित करने में सहायता नहीं मिलेगी? आने वाले अशुभ प्रसंगों से वह सावधान व सतर्क रहना संभव नहीं होगा? सूर्य चंद्रमादि अन्य ग्रहों और तारों आदि का पृथ्वी के वातावरण पर कितना प्रभाव पड़ता है, यह स्पष्ट है।
जिस प्रकार पृथ्वी अनेक तत्वों और अनेक प्रकार के खनिजों जैसे लोहा , तांबा , इत्यादि से भरपूर है उसी प्रकार हमारे शरीर में भी अन्य धातुओं के अलावा लौह धातु भी विद्यमान है। कहने का तात्पर्य है कि हमारा शरीर भी चुम्बकीय है और पृथ्वी की चुम्बकीय शक्ति से प्रभावित होता है। वास्तु के इसी सिद्धांत के कारण यह कहा जाता है कि दक्षिण की ओर सिर करके सोना चाहिए। इस प्रकार सोते समय हमारा शरीर ब्रह्मांड से अधिक से अधिक शक्ति को ग्रहण करता है और एक चुम्बकीय लय में सोने की स्थिति से मनुष्य अत्यंत शांतिप्रिय नींद को प्राप्त होता है और सुबह उठने पर तरोताजा महसूस करता है।
वास्तु का प्रभाव चिरस्थायी है, क्योंकि पृथ्वी का यह झुकाव शाश्वत है, ब्रह्माण्ड में ग्रहों आदि की चुम्बकीय शक्तियों के आधारभूत सिध्दांत पर यह निर्भर है और सारे विश्व में व्याप्त है इसलिए वास्तुशास्त्र के नियम भी शाश्वत है, सिध्दांत आधारित, विश्वव्यापी एवं सर्वग्राहा हैं। किसी भी विज्ञान के लिए अनिवार्य सभी गुण तर्क संगतता, साध्यता, स्थायित्व, सिध्दांत परकता एवं लाभदायकता वास्तु के स्थायी गुण हैं। अतः वास्तु को हम बेहिचक वास्तु विज्ञान कह सकते हैं।
जैसे आरोग्यशास्त्र के नियमों का विधिवत् पालन करके मनुष्य सदैव स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकता है, उसी प्रकार वास्तुशास्त्र के सिध्दांतों के अनुसार भवन निर्माण करके प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन को सुखी बना सकता है। चिकित्साशास्त्र में जैसे डाक्टर असाध्य रोग पीड़ित रोगी को उचित औषधि में एवं आपरेशन द्वारा मरने से बचा लेता है उसी प्रकार रोग, तनाव और अशांति देने वाले पहले के बने मकानों को वास्तुशास्त्र के सिध्दांतों के अनुसार ठीक करवा लेने पर मनुष्य जीवन में पुनः आरोग्य, शांति और सम्पन्नता प्राप्त कर सकता है।
हमारे ग्रंथों के अनुसार----
शास्तेन सर्वस्य लोकस्य परमं सुखम्
चतुवर्ग फलाप्राप्ति सलोकश्च भवेध्युवम्
शिल्पशास्त्र परिज्ञान मृत्योअपि सुजेतांव्रजेत्
परमानन्द जनक देवानामिद मीरितम्
शिल्पं बिना नहि देवानामिद मीरितम्
शिल्पं बिना नहि जगतेषु लोकेषु विद्यते।
जगत् बिना न शिल्पा च वतंते वासवप्रभोःघ्
विश्व के प्रथम विद्वान वास्तुविद् विश्वकर्मा के अनुसार शास्त्र सम्मत निर्मित भवन विश्व को सम्पूर्ण सुख, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति कराता है। वास्तु शिल्पशास्त्र का ज्ञान मृत्यु पर भी विजय प्राप्त कराकर लोक में परमानन्द उत्पन्न करता है, अतः वास्तु शिल्प ज्ञान के बिना निवास करने का संसार में कोई महत्व नहीं है। जगत और वास्तु शिल्पज्ञान परस्पर पर्याय हैं।
इस ब्रह्माण्ड में अनेक ग्रह हैं किन्तु जीवन केवल पृथ्वी पर ही है, ऐसा क्यों? इसका कारण यही है केवल पृथ्वी पर ही इन पंचमहाभूतों का सही संतुलन है। वर्तमान परिवेश में विश्व के सभी देशों में हिंसा और आतंकवाद का बोलबाला है। प्रतिदिन स्थान-स्थान पर दिन दहाड़े होने वाले अमानुषिक कृत्य, हिंसा, हत्या, लूटपाट, जलाने-मारने की घटनायें मानव को सदैव आतंकित और तानवग्रस्त रखती हैं। मानवीय संवेदनाएं लुप्त हो रही है। ईमानदारी और नैतिकता की बातें व्यक्ति को बुरी लगती है। मूल्यहीनता के वातावरण में मानव में सहयोग, सद्भाव, संवेदना और भाईचारे के स्थान पर असहयोग, अलगावर्, ईष्या तथा पारस्परिक विद्वेष पनप रहा है। ऐसी स्थिति में हमारे लिए वास्तुशास्त्र ही एक मात्र आधार है जिसका अध्ययन और अनुकरण करके हम विश्व में पुनः शांति स्थापित कर सकते हैं। सच पूछा जाये तो यह तनाव, अशांति एवं अमानवीय कृत्य सम्पूर्ण विश्व में वास्तु सिध्दांतों की अवहेलना करने के कारण ही दिनों-दिन बढ़ते जा रहे हैं।
वास्तुशास्त्र भारत का अत्यन्त प्राचीन शास्त्र है। वैदिक काल में इसे स्थापत्यवेद की संज्ञा दी गयी। वेदों के प्रति हमारी श्रध्दा और विश्वास आज भी उतने ही दृढ़ हैं जितने पहले थे किन्तु वर्तमान में इस शास्त्र क प्रति संदेह व्यक्त किये जाते हैं जबकि स्थान-स्थान पर खुदाई में प्राप्त प्राचीन बस्तियों के भग्नावेश इस बात के साक्षी हैं कि प्राचीन समय में मंदिर, प्रासाद, बस्तियों एवं नगरों का निर्माण वास्तुशास्त्र के सिध्दांतों के अनुसार ही होता था और इसी कारण लोग अपेक्षाकृत अधिक सुखी थे।
वास्तुविद्या में भवन पर सूर्य रश्मियों का वही प्रभाव डालने का प्रयास है जो सूर्य रश्मियों का इस पृथ्वी पर है। पृथ्वी अपनी धुरी पर पूर्व की ओर 23।50 डिग्री झुकी हुई है। इस कारण उसका उत्तर भाग, ईशान और पूर्वी भाग पूर्व की ओर झुक गये हैं दक्षिण, नैऋत्य एवं पश्चिम भाग कुछ ऊंचे उठ गये हैं। भवन निर्माण में इसी सिध्दांत के अनुसार भूखण्ड और ढलान पूर्व, उत्तर एवं ईशान और होना तथा भूखण्ड का दक्षिणी भाग, नैऋत्य तथा पश्चिमी भाग ऊंचा होना निर्दिष्ट है। अनुभव से ही यही बात सिध्द होती है कि भवन दक्षिण पश्चिम में ऊंचे तथा ऊंचाई पर निर्मित होते हैं तथा जिनका ढलान पूर्व, उत्तर एवं ईशान की ओर होता है अर्थात् जिनक, प्रयोग लाया गया जल एवं वर्षा का जल ईशान कोण से अथवा पूर्व उत्तर की ओर से बहकर बाहर निकलता हो वहां के निवासी आरोग्य, समृध्दि एवं पारिवारिक शांति का अनुभव करते हैं तथा इससे विपरीत दिशा वालें संकट और विघ्नों से घिरे रहते हैं।
मानव सभ्यता के विकास एवं विज्ञान की उन्नति के साथ भवन निर्माण कला में अनेकानेक परिवर्तन होते गये। जनसंख्या में द्रूतगति से होती वृध्दि और भूखण्डों की सीमित संख्या जनसामान्य की अशिक्षा और वास्तुग्रंथों के संस्कृत में लिखे होने एवं मुद्रण प्रणाली के विकसित न होने के कारण इस शास्त्र की उत्तरोत्तर अवहेलना होगी गयी। विदेशी शासकों के बार-बार हुए आक्रमणों एवं अंग्रेजों के भारत में आगमन के पश्चात् पाश्चात्य सभ्यता के अंधानुकरण में हम अपने समृध्द ज्ञान के भंडार पर पूर्णरूप से अविश्वास कर इसे कपोल कल्पित, भ्रामक एवं अंधविश्वास समझने लगे।
सूर्य इस ब्रह्मांड की आत्मा है और ऊर्जा का मुखय स्त्रोत भी है। सूर्य और अन्य तारों से प्राप्त ऊष्मा और प्रकाश सभी आकाशीय पिंडों की परस्पर आकर्षण शक्ति, पृथ्वी पर उत्पन्न चुंबकीय बल क्षेत्र और इस प्रकार के अन्य भौतिक कारकों का पृथ्वी की भौतिक दशा, वातावरण और जलवायु पर निश्चित प्रभाव पड़ता है और इन सबका मानव जीवन पर अनुकूल या प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अतः वास्तु शास्त्र का ज्योतिष और खगोल से निकट संबंध है। मनुष्य के रहन-सहन को ज्योतिष और खगोलीय कारक प्रभावित करते हैं। जहां प्राचीन शास्त्रों में वर्णित सिद्धांतों के अनुसार भवन, मंदिर, प्रासाद आदि निर्मित किए गए हैं और उनसे संबंधित सभी व्यक्तियों को सभी प्रकार से सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति हुई है। दूसरी ओर, ऐसे भवन भी है। जो वास्तु सम्मत नहीं बने हैं। उनमें रहने वाले व्यक्तियों को भयंकर कष्ट सहने पड़े हैं। धन और स्वास्थ्य की हानि, परिवार जनों की मृत्यु, सुख-शांति का अभाव, गरीबी, पीड़ा आदि से जूझना पड़ा है। विश्वकर्मा वास्तुशास्त्र के अनुसार, श्श्वास्तु शास्त्र के कारण ही समस्त ब्रह्मांड, सुख, वैभव और समृद्धि प्राप्त करता है। मनुष्य को देवत्व प्राप्त होता है। शिल्प-शास्त्र के ज्ञान और संसार के अस्तित्व में निकट का सह-संबंध है। वास्तु शास्त्र के अनुपालन करने वालों को न केवल सांसारिक सुख की प्राप्ति होती है, वरन् उन्हें नैसर्गिक सुख-शांति का भी अनुभव होता है। आज के युग में वैज्ञानिकों ने भी माना है कि सूर्य की महत्ता का विशेष प्रतिपादन सत्य है, क्योंकि उन्होंने भी यह सिद्ध कर दिया कि सूर्य महाप्राण जब शरीर क्षेत्र में अवतीर्ण होता है तो आरोग्य, आयुष्य, तेज, ओज, बल, उत्साह, स््फूर्ति, पुरुषार्थ और विभिन्न महानता मानव में परिणत होने लगती है। आज भी वैज्ञानिक मानते हैं कि सूर्य की प्रातःकालीन अल्ट्रावॉयलेट रश्मियों में विटामिन डी प्रचुर मात्रा में होता है। इन किरणों के प्रभाव से मानव, जीवों तथा पेड़-पौधों में ऊर्जा का विकास होता है। इनसे शारीरिक एवं मानसिक दृष्टि से अनेक लाभ होते हैं। आज भी वास्तु विज्ञान में भवन निर्माण के तहत पूर्व दिशा को मुखय स्थान दिया गया है जिससे सूर्य की प्रातःकालीन किरणें भवन के अंदर अधिक से अधिक प्रवेश कर सकें और उसमें रहने वाले मानव स्वास्थ्य एवं मानसिक दृष्टिकोण से उन्नत रहें। वास्तु शास्त्र की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पंचमहाभूतों से निर्मित प्राणी के जीवन में इन महाभूतों से निर्मित वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने को प्राथमिकता देता है और मानव मात्र की शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं को उन्नत करता है। इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर अपने नियमों एवं सिद्धांतों का प्रतिपादन एवं विवेचन करता है। कहा जाता है कि वास्तु के नियम के विपरीत यदि कोई भवन निर्माण करता है तो प्राकृतिक शक्तियों का कोप उसे झेलना पड़ता है। यदि वास्तु के नियम के अनुसार भवन का निर्माण होता है तो प्राकृतिक शक्तियों का आशिर्वाद भवन के स्वामी को सत्ता प्राप्त होता रहता है, ऐसा विद्वानों का मानना है। भवन निर्माण इन सभी मूल आधार शक्तियों को ध्यान में रखकर किया जाता है ताकि भवन में रहने वाला जीव इन शक्तियों से वंचित न रहे, क्योंकि इन्हीं शक्तियों के आधार पर ही उसका तन मन एवं जीवन संतुिलत एवं र्स्फूत रहता है, भाग्य वृद्धि होती है।
अपने देश भारत के मानचित्र पर दृष्टिपात करें। भारत के उत्तर में विश्व में सर्वाधिक उच्च पर्वत नगाधिराज हिमालय औरर दक्षिण में नीची भूमि वाला हिन्द महासागर है। इसके आग्नेय, नैऋत्य और पश्चिम में भी जल है परिणामस्वरूप यहां सदैव गृहयुध्द, आक्रमण, विदेशियों द्वारा लूटपाट धन सम्पत्ति का हरण और नाश होता रहा है। दक्षिण में जल होने के कारण यहां की महिलाएं सदैव दुःखी रही है, वे जलने मरने को बाध्य हैं चाहे जौहर के रूप में, सती के रूप में या अब दहेज की बलिदेवी पर।
उन पर सदैव अत्याचार होते रहे हैं। भारत के ईशान और पूर्वी भाग पश्चिम से कुछ नीचे झुके हुए तथा बढ़े हुए होने के कारण ही यह देश अपने आध्यात्म, संस्कृति दर्शन तथा उच्च जीवन मूल्यों एवं धर्म से समस्त विश्व को सदैव प्रभावित करता रहा है। वास्तु का प्रभाव मंदिरों पर भी होता है, विश्व प्रसिध्द तिरूपति बालाजी का मंदिर वास्तु सिध्दांतों का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है, वास्तुशास्त्र की दृष्टि से यह मंदिर शत प्रतिशत सही बना हुआ है।
इसी कारण यह संसार का सबसे धनी एवं ऐश्वर्य सम्पन्न मंदिर है जिसकी मासिक आप करोड़ों रुपये है। यह मंदिर तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है किन्तु उत्तर और ईशान नीचा है। वहां पुष्करणी नदी है, उत्तर में आकाश गंगा तालाब स्थित है जिसके जल से नित्य भगवान की मूर्ति को सन कराया जाता है। मंदिरों पूर्वमुखी है और मूर्ति पश्चिम में पूर्व मुखी रखी गई है।
इसके ठीक विपरीत कोणार्क का सूर्य मंदिर है। अपनी जीवनदायिनी किरणों से समस्त विश्व को ऊर्जा, ताप और तेज प्रदान करने वाले भुवन भास्कर सूर्य के इस प्राचीन अत्यन्त भव्य मंदिर की वह भव्यता, वैभव और समृध्दि अधिक समय तक क्यों नहीं टिक पायीं? इसका कारण वहां पर पाये गये अनेक वास्तु दोष हैं। मुख्यतः मंदिर का निर्माण स्थल अपने चारों ओर के क्षेत्र से नीचा है। मंदिर के भूखण्ड में उत्तरी वायव्य एवं दक्षिणी नैऋत्य बढ़ा हुआ है जिनसे उत्तरी ईशान एवं दक्षिणी आग्नेय छोटे हो गये हैं। रथनुमा आकार के कारण मंदिर का ईशान और आग्नेय कट गये हैं तथा आग्नेय में कुआं है। इसी कारण भव्य और समृध्द होने पर भी इस मंदिर की ख्याति, मान्यता एवं लोकप्रियता नहीं बढ़ सकी।
इसी प्रकार विश्व के मानचित्र पर स्थित सभी देशों को वास्तुशास्त्र के आधार पर परखा जा सकता है और सभी देशों के मुख्य स्थलों को भी, जिनके निरीक्षण, अध्ययन और परखने पर हमें वास्तुशास्त्र के सिध्दांतों की सत्यता और उपयोगिता के दर्शन होते हैं और इसके प्रति हमारा विश्वास और भी दृढ़ हो जाता है।
जनसंख्या के आधिक्य एवं विज्ञान की प्रगति के कारण आज समस्त विश्व में बहुमंजिली इमारतों का निर्माण किया जा रहा है। जनसामान्य वास्तु सिध्दांतों के विरुध्द बने छोटे-छोटे फ्लेट्स में रहने के लिए बाध्य है। कहा जाता है कि इन्हें वास्तुशास्त्र के अनुरूप नहीं बनाया जा सकता।
पर यदि राज्य सरकारें वास्तुशास्त्र के सिध्दांतों के अनुसार कॉलोनी निर्माण करने की ठान ही लें और भूखण्डों को आड़े, तिरछे, तिकाने, छकोने न काटकर सही दिशाओं के अनुरूप वर्गाकार या आयताकार काटें, मार्गों को सीधा निकालें एवं कॉलोनाइजर्स का बाध्य करें कि उन्हें वास्तुशास्त्र के सिध्दांतों का अनुपालन करते हुए ही बहुमंजिली इमारतें तथा अन्य भवन बनाने हैं तो शत-प्रतिशत तो न सही पर साठ प्रतिशत तक तो वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुसार नगर, कॉलोनी, बस्ती, भवनों, औद्योगिक-व्यापारिक केन्द्रों तथा अन्य का निर्माण किया जा सकता है जिसके फलस्वरूप जन सामान्य सुख, शांति पूर्ण एवं अरोग्यमय, तनाव रहित जीवन व्यतीत कर सकता है।
हमारे प्राचीन साहित्य में वास्तु का अथाह महासागर विद्यमान है। आवश्यकता है केवल खोजी दृष्टि रखने वाले सजग गोताखोर की जो उस विशाल सागर में अवगाहन कर सत्य के माणिक मोती निकाल सके और उस अमृत प्रसाद को समान रूप से जन सामान्य में वितरित कर सुख और समृध्दि का अप्रतिम भण्डार भेंट कर सकें, तभी वास्तुशास्त्र की सही उपयोगिता होगी।
जनसामान्य वास्तु सिध्दांतों के विरुध्द बने छोटे-छोटे फ्लेट्स में रहने के लिए बाध्य है। कहा जाता है कि इन्हें वास्तुशास्त्र के अनुरूप नहीं बनाया जा सकता।यदि राज्य सरकारें वास्तुशास्त्र के सिध्दांतों के अनुसार कॉलोनी निर्माण करने की ठान ही लें और भूखण्डों को आड़े, तिरछे, तिकाने, छकोने न काटकर सही दिशाओं के अनुरूप वर्गाकार या आयताकार काटें, मार्गों को सीधा निकालें एवं कॉलोनाइजर्स का बाध्य करें कि उन्हें वास्तुशास्त्र के सिध्दांतों का अनुपालन करते हुए ही बहुमंजिली इमारतें तथा अन्य भवन बनाने हैं तो शत-प्रतिशत तो न सही पर साठ प्रतिशत तक तो वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुसार नगर, कॉलोनी, बस्ती, भवनों, औद्योगिक-व्यापारिक केन्द्रों तथा अन्य का निर्माण किया जा सकता है जिसके फलस्वरूप जन सामान्य सुख, शांति पूर्ण एवं अरोग्यमय, तनाव रहित जीवन व्यतीत कर सकता है।
वास्तु शास्त्र एवं ज्योतिष शास्त्र दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं क्योंकि दोनों एक-दूसरे के अभिन्न अंग हैं। जैसे शरीर का अपने विविध अंगों के साथ अटूट संबंध होता है। ठीक उसी प्रकार ज्योतिष शास्त्र का अपनी सभी शाखायें प्रश्न शास्त्र, अंक शास्त्र, वास्तु शास्त्र आदि के साथ अटूट संबंध है। ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र के बीच निकटता का कारण यह है कि दोनों का उद्भव वैदिक संहितायों से हुआ है। दोनों शास्त्रों का लक्ष्य मानव मात्र को प्रगति एवं उन्नति की राह पर अग्रसर कराना है एवं सुरक्षा देना है। अतः प्रत्येक मनुष्य को वास्तु के अनुसार भवन का निर्माण करना चाहिए एवं ज्योतिषीय उपचार (मंत्र, तंत्र एवं यंत्र के द्वारा) समय-समय पर करते रहना चाहिए, क्योंकि ग्रहों के बदलते चक्र के अनुसार बदल-बदल कर ज्योतिषीय उपचार करना पड़ता है। वास्तु तीन प्रकार के होते हैं- त्र आवासीय - मकान एवं फ्लैट त्र व्यावसायिक -व्यापारिक एवं औद्योगिक त्र धार्मिक- धर्मशाला, जलाशय एवं धार्मिक संस्थान। वास्तु में भूमि का विशेष महत्व है। भूमि चयन करते समय भूमि या मिट्टी की गुणवत्ता का विचार कर लेना चाहिए। भूमि परीक्षण के लिये भूखंड के मध्य में भूस्वामी के हाथ के बराबर एक हाथ गहरा, एक हाथ लंबा एवं एक हाथ चौड़ा गड्ढा खोदकर उसमें से मिट्टी निकालने के पश्चात् उसी मिट्टी को पुनः उस गड्ढे में भर देना चाहिए। ऐसा करने से यदि मिट्टी शेष रहे तो भूमि उत्तम, यदि पूरा भर जाये तो मध्यम और यदि कम पड़ जाये तो अधम अर्थात् हानिप्रद है। अधम भूमि पर भवन निर्माण नहीं करना चाहिये। इसी प्रकार पहले के अनुसार नाप से गड्ढा खोद कर उसमें जल भरते हैं, यदि जल उसमें तत्काल शोषित न हो तो उत्तम और यदि तत्काल शोषित हो जाए तो समझें कि भूमि अधम है। भूमि के खुदाई में यदि हड्डी, कोयला इत्यादि मिले तो ऐसे भूमि पर भवन नहीं बनाना चाहिए। यदि खुदाई में ईंट पत्थर निकले तो ऐसा भूमि लाभ देने वाला होता है। भूमि का परीक्षण बीज बोकर भी किया जाता है। जिस भूमि पर वनस्पति समय पर उगता हो और बीज समय पर अंकुरित होता हो तो वैसा भूमि उत्तम है। जिस भूखंड पर थके होकर व्यक्ति को बैठने से शांति मिलती हो तो वह भूमि भवन निर्माण करने योग्य है। वास्तु शास्त्र में भूमि के आकार पर भी विशेष ध्यान रखने को कहा गया है। वर्गाकार भूमि सर्वाेत्तम, आयताकार भी शुभ होता है। इसके अतिरिक्त सिंह मुखी एवं गोमुखि भूखंड भी ठीक होता है। सिंह मुखी व्यावसायिक एवं गोमुखी आवासीय दृष्टि उपयोग के लिए ठीक होता है। किसी भी भवन में प्राकृतिक शक्तियों का प्रवाह दिशा के अनुसार होता है अतः यदि भवन सही दिशा में बना हो तो उस भवन में रहने वाला व्यक्ति प्राकृतिक शक्तियों का सही लाभ उठा सकेगा, किसकी भाग्य वृद्धि होगी। किसी भी भवन में कक्षों का दिशाओं के अनुसार स्थान इस प्रकार होता है।
हमारे प्राचीन साहित्य में वास्तु का अथाह महासागर विद्यमान है। आवश्यकता है केवल खोजी दृष्टि रखने वाले सजग गोताखोर की जो उस विशाल सागर में अवगाहन कर सत्य के माणिक मोती निकाल सके और उस अमृत प्रसाद को समान रूप से जन सामान्य में वितरित कर सुख और समृध्दि का अप्रतिम भण्डार भेंट कर सकें, तभी वास्तुशास्त्र की सही उपयोगिता होगी।
हमारे ऋषियों का सारगर्भित निष्कर्ष है , श् यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे। श् जिन पंचमहाभूतों से पूर्ण ब्रह्मांड संरचित है उन्हीं तत्वों से हमारा शरीर निर्मित है और मनुष्य की पांचों इंद्रियां भी इन्हीं प्राकृतिक तत्वों से पूर्णतया प्रभावित हैं। आनंदमय , शांतिपूर्ण और स्वस्थ जीवन के लिए शारीरिक तत्वों का ब्रह्मांड और प्रकृति में व्याप्त पंचमहाभूतों से एक सामंजस्य स्थापित करना ही वास्तुशास्त्र की विशेषता है।
वास्तुशास्त्र को लेकर हर प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है। भूखण्ड एवं भवन के दोषपूर्ण होने पर उसे उचित प्रकार से वास्तुनुसार साध्य बनाया जा सकता है। हमने अपने अनुभव से जाना है कि जिन घरों के दक्षिण में कुआं पाया गया उन घरों की गृहस्वामिनी का असामयिक निधन आकस्मिक रूप से हो गया तथा घर की बहुएं चिरकालीन बीमारी से पीड़ित मिली। जिन घरों या औद्योगिक संस्थानों ने नैऋत्य में बोरिंग या कुआं पाया गया वहां निरन्तर धन नाश होता रहा, वे राजा से रंक बन गये, सुख समृध्दि वहां से कोसों दूर रही, औद्योगिक संस्थानों पर ताले पड़ गये। जिन घरों या संस्थानों के ईशान कोण कटे अथवा भग्न मिले वहां तो संकट ही संकट पाया गया। यहां तक कि उस गृहस्वामी अथवा उद्योगपति की संतान तक विकलांग पायी गयी। जिन घरों के ईशान में रसोई पायी गयी उन दम्पत्तियों के यहां कन्याओं को जन्म अधिक मिला या फिर वे गृह कलह से त्रस्त मिले। जिन घरों में पश्चिम तल नीचा होता है तथा पश्चिमी नैऋत्य में मुख्य द्वार होती है, उनके पुत्र मेधावी होने पर भी निकम्मे तथा उल्टी-सीधी बातों में लिप्त मिले हैं।
वास्तु शास्त्र के आर्षग्रन्थों में बृहत्संहिता के बाद वशिष्ठसंहिता की भी बड़ी मान्यता है तथा दक्षिण भारत के वास्तु शास्त्री इसे ही प्रमुख मानते हैं। इस संहिता ग्रंथ के अनुसार विशेष वशिष्ठ संहिता के अनुसार अध्ययन कक्ष निवृत्ति से वरुण के मध्य होना चाहिए। वास्तु मंडल में निऋति एवं वरुण के मध्य दौवारिक एवं सुग्रीव के पद होते हैं। दौवारिक का अर्थ होता है पहरेदार तथा सुग्रीव का अर्थ है सुंदर कंठ वाला। दौवारिक की प्रकृति चुस्त एवं चौकन्नी होती है। उसमें आलस्य नहीं होती है। अतः दौवारिक पद पर अध्ययन कक्ष के निर्माण से विद्यार्थी चुस्त एवं चौकन्ना रहकर अध्ययन कर सकता है तथा क्षेत्र विशेष में सफलता प्राप्त कर सकता है। पश्चिम एवं र्नैत्य कोण के बीच अध्ययन कक्ष के प्रशस्त मानने के पीछे एक कारण यह भी है कि यह क्षेत्र गुरु, बुध एवं चंद्र के प्रभाव क्षेत्र में आता है। बुध बुद्धि प्रदान करने वाला, गुरु ज्ञान पिपासा को बढ़ाकर विद्या प्रदान करने वाला ग्रह है। चंद्र मस्तिष्क को शीतलता प्रदान करता है। अतः इस स्थान पर विद्याभ्यास करने से निश्चित रूप से सफलता मिलती है। टोडरमल ने अपने श्वास्तु सौखयम्श् नामक ग्रंथ में वर्णन किया है कि उत्तर में जलाशय जलकूप या बोरिंग करने से धन वृद्धि कारक तथा ईशान कोण में हो तो संतान वृद्धि कारक होता है। राजा भोज के समयंत्रण सूत्रधार में जल की स्थापना का वर्णन इस प्रकार किया-श्पर्जन्यनामा यश्चाय् वृष्टिमानम्बुदाधिपश्। पर्जन्य के स्थान पर कूप का निर्माण उत्तम होता है, क्योंकि पर्जन्य भी जल के स्वामी हैं। विश्वकर्मा भगवान ने कहा है कि र्नैत्य, दक्षिण, अग्नि और वायव्य कोण को छोड़कर शेष सभी दिशाओं में जलाशय बनाना चाहिये। तिजोरी हमेशा उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में रहना चाहिए। इसके अतिरिक्त आग्नेय दक्षिणा, र्नैत्य पश्चिम एवं वायव्य कोण में धन का तिजोरी रखने से हानि होता है। ड्राईंग रूम को हमेशा भवन के उत्तर दिशा की ओर रखना श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि उत्तर दिशा के स्वामी ग्रह बुध एवं देवता कुबेर हैं। वाणी को प्रिय, मधुर एवं संतुलित बनाने में बुध हमारी सहायता करता है। वाणी यदि मीठी और संतुलित हो तो वह व्यक्ति पर प्रभाव डालती है और दो व्यक्तियों के बीच जुड़ाव पैदा करती है। र्नैत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में वास्तु पुरुष के पैर होते हैं। अतः इस दिशा में भारी निर्माण कर भवन को मजबूती प्रदान किया जा सकता है, जिससे भवन को नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से बचाकर सकारात्मक शक्तियों का प्रवेश कराया जा सकता है। अतः गोदाम (स्टोर) एवं गैरेज का निर्माण र्नैत्य कोण में करते हैं। जिस भूखंड का ईशान कोण बढ़ा हुआ हो तो वैसे भूखंड में कार्यालय बनाना शुभ होता है। वर्गाकार, आयताकार, सिंह मुखी, षट्कोणीय भूखंड पर कार्यालय बनाना शुभ होता है। कार्यालय का द्वार उत्तर दिशा में होने पर अति उत्तम होता है। पूर्वाेत्तर दिशा में अस्पताल बनाना शुभ होता है। रोगियों का प्रतीक्षालय दक्षिण दिशा में होना चाहिए। रोगियों को देखने के लिए डॉक्टर का कमरा उत्तर दिशा में होना चाहिए। डॉक्टर मरीजों की जांच पूर्व या उत्तर दिशा में बैठकर करना चाहिए। आपातकाल कक्ष की व्यवस्था वायव्य कोण में होना चाहिए। यदि कोई भूखंड आयताकार या वर्गाकार न हो तो भवन का निर्माण आयताकार या वर्गाकार जमीन में करके बाकी जमीन को खाली छोड़ दें या फिर उसमें पार्क आदि बना दें। भवन को वास्तु के नियम से बनाने के साथ-साथ भाग्यवृद्धि एवं सफलता के लिए व्यक्ति को ज्योतिषीय उपचार भी करना चाहिए। सर्वप्रथम किसी भी घर में श्री यंत्र एवं वास्तु यंत्र का होना अति आवश्यक है। श्री यंत्र के पूजन से लक्ष्मी का आगमन होता रहता है तथा वास्तु यंत्र के दर्शन एवं पूजन से घर में वास्तु दोष का निवारण होता है। इसके अतिरिक्त गणपति यंत्र के दर्शन एवं पूजन से सभी प्रकार के विघ्न-बाधा दूर हो जाते हैं। ज्योतिष एवं वास्तु एक-दूसरे के पूरक हैं। बिना प्रारंभिक ज्योतिषीय ज्ञान के वास्तु शास्त्रीय ज्ञान प्राप्त नहीं किया जा सकता और बिना श्कर्मश् के इन दोनों के आत्मसात ही नहीं किया जा सकता। इन दोनों के ज्ञान के बिना भाग्य वृद्धि हेतु किसी भी प्रकार के कोई भी उपाय नहीं किए जा सकते।
वास्तुविद्या मकान को एक शांत , सुसंस्कृत और सुसज्जित घर में तब्दील करती है। यह घर परिवार के सभी सदस्यों को एक हर्षपूर्ण , संतुलित और समृद्धि जीवन शैली की ओर ले जाता है। मकान में अपनी ज़रूरत से अधिक अनावश्यक निर्माण और फिर उन फ्लोर या कमरों को उपयोग में न लाना ,बेवजह के सामान से कमरों को ठूंसे रखना भवन के आकाश तत्व को दूषित करता है। नकारात्मक शक्तियों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए सुझाव है कि भवन में उतना ही निर्माण करें जितना आवश्यक हो। (साई फीचर्स)