रविवार, 16 दिसंबर 2012

ठंड और कोहरे ने रोका जनजीवन!


ठंड और कोहरे ने रोका जनजीवन!

(शरद)

नई दिल्ली (साई)। उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में ठंड और कोहरे ने कोहराम मचाया हुआ है। दिल्ली आने जाने वाली रेल गाडियां इससे प्रभावित हुए बिना नहीं हैं। वहीं एयरपोर्ट पर कोहरे से निपटने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजामात किए जा रहे हैं। हिमाचल, उत्तराखण्ड सहित पूर्वोत्तर भारत में कोहरे और बर्फ की सफेद चादर पसरी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है।
लोगों की सुविधा के लिए रेल प्रशासन ने पूछताछ संख्या-139 के अलावा 011-23747110 जारी किया है, जिसपर फोन कर यात्री ट्रेनों की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा 9717631813 पर भी ट्रेन का पांच अंकों वाला नंबर एसएमएस कर दिल्ली क्षेत्र में आने-जाने वाली ट्रेनों के परिचालन की जानकारी ले सकते हैं। सारी सेवाएं तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई है। रेल प्रशासन का कहना है कि हमारे लिए ट्रेनों का समय पर परिचालन से ज्यादा महत्वपूर्ण उसमें बैठे सैकड़ों यात्रियों को सुरक्षित उनकी मंजिल तक पहुंचाना है। इसलिए हम कोई भी जोखिम नहीं ले सकते हैं।
वही दूसरी ओर आइजीआइ एयरपोर्ट पर कोहरे की वजह से विमान यात्रियों को परेशानी नहीं हो, इसके लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। वहां एयरपोर्ट आपरेशन कंट्रोल सेंटर (एओसीसी) स्थापित किया गया ह। इसमें दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल), एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) सहित तमाम विमानन कंपनियों के अधिकारी 24 घंटे मौजूद रहेंगे। सभी विभागों को बीच बेहतर समन्वय तय किया जाएगा, ताकि फ्लाइट रद व देर होने की सही सूचना समय पर यात्रियों को दी जा सके। यात्रियों को इसकी जानकारी एयरपोर्ट पर लगी फ्लाइट इंफोर्मेशन डिसप्ले सिस्टम (एओसीसी) की स्क्रीन पर मिलेगी। इसके अलावा कोहरे के कारण रद हुए विमान के यात्रियों के बैठने के लिए भी अलग से प्रबंध किए गए हैं।
सहीं एयरपोर्ट के मौसम विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान यह संभावना जताई कि इस वर्ष 20 दिसंबर से दिल्ली में घने कोहरे सीजन की शुरुआत होगी। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर मौसम की सटीक जानकारी के लिए 10 नए उपकरण सहित मुख्य रनवे पर दृष्टि नामक यंत्र स्थापित किया गया है। इनकी मदद से पिछले चार वर्ष में एयरपोर्ट पर विमान की देरी व रद होने के 30 फीसद मामले कम हुए हैं।
उत्तराखण्ड से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ब्यूरो से अर्जुन कुमार ने बताया कि राज्य में कोहरा और बर्फबारी जमकर हो रही है। चकराता से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के हवाले से अर्जुन कुमार ने बताया कि जौनसारी दीपावली के हिस्सा भिरुड़ी पर्व पर लोगों ने विभिन्न मंदिरों में देव दर्शन कर परिवार की सुख स्मृद्धि की मन्नतें मांगी। भिरुड़ी पर हर गांव में परिवार के मुखिया का मंदिर में दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है, दर्शन न करने पर देवता का दोष लगने की बात कही जाती है। शुक्रवार को बारिश के बावजूद सिमोग के प्राचीन मंदिर में श्रद्धालुओं ने शिलगुर, विजट व चूडु देवताओं के दर्शन कर मन्नतें मांगी।
कालसी ब्लाक के प्राचीन मंदिर सिमोग में देव पर्व भिरुड़ी पर बारिश के बाद भी देवदर्शन को श्रद्धालुओं का आना शुक्रवार सुबह से ही जारी रहा। मन्नतें मांगने के साथ ही श्रद्धालुओं ने माली बाकियो से प्रश्न लगाकर अपनी समस्याओं के हल के उपाय जाने। डिमऊ गांव में परशुराम देवता के प्राचीन मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने देव दर्शन किए। देवलग्नानुसार देव डोरिया, पालकी मंदिर परिसर में दर्शन को रखी गई थी। बारिश के कारण बढ़ी ठंड में श्रद्धालु ठिठुरते हुए देव दर्शन को उमड़े। मंदिर समिति अध्यक्ष केदार सिंह के अनुसार मौसम खराब होने के बावजूद श्रद्धालुओं का दर्शन करने का क्रम घंटों तक चलता रहा।
वहीं उत्तराखण्ड में पिछले तीन दिनों से बर्फबारी हो रही है। सभी इलाकों में बर्फ गिरने और निचले इलाकों में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ऊंचाई पर स्थित कई मोटर मार्गाे पर बर्फ के कारण आवाजाही बन्द रही। चमोली जिले में चमोली-केदारनाथ मार्ग पर धोतीधार से चोप्ता के बीच मोटरमार्ग पर बर्फ की परत जम जाने से यातायात बाधित रहा।
औली की स्कीईंग ढलाने भी बर्फ से ढक गई हैं। औली स्थित पर्यटन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक औली में अच्छा हिमपात हो रहा है। बृहस्पतिवार रात से शुरू हुआ हिमपात अभी भी जारी है । हिमपात के कारण औली की स्कीईंग ढलान बर्फ के खेल के लिए तैयार हो गई है। दूसरी और बर्फ गिरने के कारण औली को जोड़ने वाली जोशीमठ-औली मोटर मार्ग भी बर्फ से ढक गया है जिस पर यायायात बाधित हो गया है। यहां सरकारी सूत्रों से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को प्राप्त जानकारी के अनुसार श्रीबदरीनाथ धाम में भी बृहस्पतिवार से लगातार बर्फ गिर रही है। एक फुट से अधिक बर्फ जम गई है। बदरीनाथ के अलावा नन्दादेवी और फूलों की घाटी नैशनल पार्क के बड़ा हिस्सा बर्फ से ढक गया है।
हिमाचल प्रदेश से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से रीता वर्मा ने बताया कि बिलासपुर जिले के विभिन्न भागों में दिनभर आसमान में बादल छाए रहने के कारण ठंड और अधिक बढ़ गई है। इसका असर बिलासपुर शहर के बाजार, बस अड्डे एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर देखा गया। सार्वजनिक स्थानों पर जहां लोगों की कम आवाजाही देखी गई वहीं अधिकतर बसें भी खाली थीं। अधिकतर स्थानों पर लोग व स्कूली बच्चे ठिठुरते ठंड से बचने के लिए अलाव सेकते नजर आए। उधर, घुमारवीं, कुठेडा, बरठीं, शाहतलाई, स्वारघाट, घागस, बरमाणा, झंडूत्ता, जुखाला, नम्होल, कंदरौर, भगेड़ सहित अन्य क्षेत्रों में भी ठंड का असर देखा गया।
वहीं भारमौर के समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ब्यूरो के हवाले से उन्होंने बताया कि जनजातीय क्षेत्र में बर्फबारी का रिकार्ड कायम हो गया है। दिसंबर में शुरू हुई बर्फबारी के तीसरे दौर में अब तक करीब दो फुट बर्फ समूचे क्षेत्र में रिकार्ड की जा चुकी है। अगले चौबीस घंटे में बर्फबारी जारी रही तो भरमौर में तीन से चार फुट तक बर्फ रिकार्ड दर्ज हो सकती है।
मुख्यालय से आसपास के ग्रामीण इलाकों का संपर्क कट गया है। जबकि चंबा-भरमौर मार्ग पर भी यातायात प्रभावित हो रहा है। लगातार जारी हिमपात की वजह से लोग अपने घरों में दुबक गए हैं। भरमौर में तापमान शून्य डिग्री पर पहुंच गया है। यातायात ठप होने की वजह से लोगों को खासी परेशानियां पेश आ रही हैं। भरमौर में बिजली भी पिछले काफी समय से गुल है। जिसके चलते सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों को ठंड में दिनचर्या गुजारनी पड़ रही है। विभाग कर्मचारियों के लिए कोयले का प्रबंध नहीं कर पाया है। जनजातीय क्षेत्र के किसी भी सरकारी कार्यालय में अभी तक कोयला नहीं पहुंचा है। बिजली गुल होने की वजह से अब स्थानीय लोग हीटर में आग सेंकने से भी वंचित हो गए हैं। स्कूल रोजाना खुल रहे हैं, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है। लोगों ने प्रशासन से समय पर सर्दियों से निपटने के प्रबंध पुख्ता करने का आह्वान किया है। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को राहत पहुंचाई जा सके।
सूबे में चांबा के समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के हवाले से उन्होंने बताया कि बारिश व बर्फबारी से चंबा में जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। 24 घंटे से लगातार जारी बारिश ने निचले इलाकों में अपना खूब प्रभाव दिखाया है। बारिश के साथ ही चंबा में बिजली का भी संकट बना हुआ है। ऐसे में लोगों को सर्दियों की दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश की वजह से कई ग्रामीण इलाकों में भूस्खलन से यातायात प्रभावित हुआ है। चंबा-जोत मार्ग पर बर्फबारी की वजह से यातायात ठप हो गया है। जोत में घूमने निकले पर्यटकों समेत ढाबे व रेस्तरां चलाने वाले लोग बर्फबारी की वजह से फंस गए हैं। मौसम लगातार खराब रहने की वजह से जोत से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। उधर, चंबा-भरमौर मार्ग पर भी बारिश की वजह से आवाजाही प्रभावित हुई है। त्रिलोचन महादेव मंदिर के समीप बारिश की वजह से रूक-रूक कर पत्थर गिरते रहे। प्रशासन ने चंबा-भरमौर मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों को सावधान रहने की सलाह दी है। चंबा में मौसम लगातार खराब बना हुआ है व अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में भीषण बर्फबारी की वजह से निचले इलाकों में जबरदस्त शीतलहर महसूस की जा रही है।
चंबा शहर में पारा दस डिग्री सेल्सियस से नीचे लुढ़क गया है। जबकि रात के समय पारा शून्य डिग्री से नीचे पहुंच रहा है। लगातार बढ़ रही ठंड का असर सरकारी विभागों पर भी नजर आने लगा है। ज्यादातर सरकारी कार्यालयों में कोयला जलाने की इजाजत नहीं है और सभी कर्मचारियों को हीटर उपलब्ध करवाए गए हैं। लेकिन बिजली की चौपट व्यवस्था से उन्हें ठंड में अपना काम निपटाना पड़ रहा है। बारिश की वजह से चंबा का बाजार सूना हो गया है। शुक्रवार को लोग जगह-जगह आग सेंकते हुए नजर आए।
चंबा में बारिश व बर्फबारी का प्रभाव जनजीवन पर देखने को मिल रहा है। हालांकि मौसम के इस मिजाज से किसान व बागवान काफी खुश नजर आ रहे हैं। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोग भी बर्फबारी के बाद पर्यटकों की आमद बढ़ने की संभावनाओं को तलाश रहे हैं।
राज्य के ऊना से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से प्राप्त समाचार के अनुसार जिलेभर में वीरवार को भी शीत लहर का प्रकोप जारी रहा। जिले में न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। अधिकतम तापमान भी 20.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। दिनभर विभिन्न बाजारों से रौनक गायब रही और कई लोग समूहों में आग सेंकते देखे गए। आसमान पर बादल होने और देर शाम को बूंदाबांदी होने से ठंड का प्रकोप और बढ़ गया।
वहीं मनाली से साई ब्यूरो ने बताया कि कुल्लू, मनाली व लाहुल के ऊंची पहाड़ियां बर्फ से लद गई हैं। रोहतांग व बारालाचा दर्रे ने तीन फुट बर्फबारी हुई है। भारी हिमपात से दर्रे में वाहनों की रफ्तार थम गई है और मनाली-केलंग मार्ग भी अवरुद्ध हो गया है। रोहतांग में अब तक तीन फुट हिमापात हो चुका है। स्पीति को लाहुल व मनाली से जोड़ने वाले कुंजुम दर्रे सहित बारालाचा दर्रे में भी भारी हिमपात हुआ है। दर्रे सहित राहनीनाला व मढ़ी में ढाई फुट, ब्यासनाला में दो फुट, राहलाफाल में दो फुट, गुलाबा में पौने दो फुट, सोलंग व कोठी में नौ इंच, पलचान, मछाच व कुलंग में डेढ़ फुट, बाहंग, वशिष्ठ, मनाली गांव व डुंगरी में एक फुट जबकि पर्यटन नगरी मनाली में दस इंच हिमपात हुआ है। मनाली-कुल्लू मार्ग पर पतलीकुहल तक बर्फ के फाहे गिरे हैं। वामतट मार्ग के अलेऊ, जगतसुख, हरिपुर, नगर व घुड़दौड़ बर्फ के फाहों से सराबोर हुए हैं। कुल्लू के फोजल घाटी, नग्गर की पहाडियों, बिजली महादेव, मनीकर्ण की पहाड़ियों, सैंज व बंजार के जोत व जलोड़ी जोत में भी बर्फबारी का क्रम शुरु हो गया है। मनाली व कुल्लू शहर सहित समस्त क्षेत्र ठंड की चपेट में आ गए हैं।
दूसरी ओर लाहुल घाटी समस्त घाटी में बर्फबारी हुई है। कोकसर में एक फुट, सिसू में आधा फुट, दारचा में नौ इंच, जिस्पा में आठ इंच, सतींगरी में पांच इंच तथा केलंग में छह इंच हिमापात हुआ है। गोंधला, तांदी, गोशाल, ठोलंग, लोट, शांशा, जाहलमा, थिरोट, त्रिलोकनाथ, उदयपुर भी बर्फ के फाहों से सराबोर हो गई हैं। नैनगार व मयाड घाटी सहित पांगी, शौर, पूर्थी व किलाड़ घाटी में एक फुट से अधिक हिमपात हुआ है। बर्फबारी होने के चलते मनाली-केलंग मार्ग पर वाहनों की रफ्तार पूरी तरह से थम गई है। मढ़ी बचाव दल के प्रभारी अनिरुद्ध का कहना है कि मढ़ी में भारी हिमपात हो रहा है, जिस कारण वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है। कोकसर बचाव चौकी के प्रभारी लुदर चंद ने बताया कि बचाव दल मौसम की परिस्थितियों पर नजर रखे हुए हैं। मनाली के एसडीएम बलबीर ठाकुर ने कहा कि रोहतांग दर्रा हिमपात से बंद हो गया है। इसलिए कोई भी वाहन चालक जान-जोखिम में न डाले।
जम्मू से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो ने बताया कि राजौरी-पुंछ दोनों जिलों के अधिकतर पहाड़ बर्फ की सफेद चादर से पूरी तरह से ढंक चुके हैं। इसके साथ कुछ निचले क्षेत्रों में भी बर्फ गिरने का सिलसिला जारी है। इससे ठंड का प्रकोप काफी तेज हो चुका है। आमतौर पर दिसंबर में इतनी बर्फ नहीं गिरती है। लेकिन इस बार प्रकृति ने कुछ जल्दी दिखाई है।
बीती रात से छत्ता पानी, पोशाना, डुगरा, बफैलयाज, डेरा गली, दरहालटॉप, बीजी, जड़ा वाली गली, शाहदरा शरीफ, थन्ना मंडी बुद्धल, समोट आदि में भारी बर्फबारी हो रही है। इन क्षेत्रों के पहाड़ पूरी तरह से बर्फ से लद चुके हैं। वहीं, हिमपात की सूचना मिलते ही लोग डेरा गली व थन्ना क्षेत्र में पहुंचने लगे हैं। लोग वहां जारी हिमपात का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं। इस बर्फबारी से राजौरी डेरागली मार्ग बंद हो गया है और मुगल रोड पर भी काफी बर्फबारी हो रही है। अगले कई दिनों तक मुगल रोड पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप रहेगी।
वहीं, पहाड़ों पर लगातार जारी हिमपात से ठंड का प्रकोप काफी तेज हो गया है। इस कारण से लोगों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रजौरी में गुरूवार रात से शुरू हुई मूसलधार बारिश थमने का नाम हीं नहीं ले रही है। इस कारण क्षेत्र में ठंड का प्रकोप काफी तेज हो गया है। अधिकतर लोग दिनभर घर में ही रहे। केवल वहीं लोग सड़कों पर नजर आए जिन्हें कार्यालय या किसी जरूरी काम के लिए जाना था।
पिछले तीन दिनों से निचले क्षेत्रों में जारी बारिश व पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ के गिरने से ठंड का प्रकोप काफी तेज हो चुका है। आम लोगों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ठंड का प्रकोप बढ़ने के साथ ही बिजली की अघोषित कटौती भी काफी बढ़ चुकी है। क्षेत्र में मात्र चंद घंटे ही बिजली की सप्लाई दी जा रही है। अधिकतर समय बिजली की कटौती ही की जा रही है।
वहीं, ठंड से बचने के लिए शुक्रवार को हर क्षेत्र में लोग आग ही तापते हुए नजर आए। बाजारों में दुकानदार भी ग्राहकों का इंतजार ही करते रहे और ठंड से बचने के लिए आग का ही सहारा लेते नजर आए। बारिश से क्षेत्र में जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो चुका है।

ओला वृष्टि धनौरा के सर्वाधिक ४२ गांव प्रभावित


ओला वृष्टि धनौरा के सर्वाधिक ४२ गांव प्रभावित

(शिवेश नामदेव)

सिवनी (साई)। संयुक्त कलेक्टर एवं प्रभारी भू-अभिलेख शाखा चन्द्रशेखर शुक्ला ने आज यहां बताया कि ११ दिसंबर को अचानक हुई ओला वृष्टि एवं तेज वर्षा से जिले की धनौरा तहसील के ४२ गांव, केवलारी तहसील के लगभग ३५ गांव, छपारा तहसील के ९ गांव एवं लखनादौन तहसील के ८ गांव, इस प्रकार कुल ९४ गांवों में नेत्रांकन के आधार पर खरीफ एवं रबी फसल तथा कवेलू आदि की क्षति होने की जानकारी मिली है। विस्तृत सर्वे कराने के लिये राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का संयुक्त दल गठित कर दिया गया। उन्होंने राश्य शासन के राहत आयुक्त को प्रेषित जानकारी में कहा है कि सर्वेक्षण दल से जानकारी प्राप्त होते ही क्षति का आंकलन कर पीडित किसानों/व्यक्तियों को मुआवजा देने के लिये प्रकरण तैयार करने की कार्यवाही की जायेगी।     

निर्वाचन सामग्री 16 को लेने के निर्देश


निर्वाचन सामग्री 16 को लेने के निर्देश

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी (मंडी निर्वाचन) अजीत कुमार ने मंडी निर्वाचन के लिये नियुक्त सभी रिटघ्नग आफिसर्स निर्वाचन से संबंधित समस्त सामग्री सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग कार्यालय से प्राप्त कर लें। सभी रिटघ्नग आफिसर्स को निर्वाचन सामग्री एवं मतपत्र १६ दिसंबर को प्रातरू ११ बजे से वितरित किये जायेंगे। कृषि उपज मंडी निर्वाचन २०१२ के अंतर्गत रिटघ्नग आफिसर्स को निर्वाचन सामग्री के रूप में मंडी समितियों के कृषक सदस्यों के निर्वाचन संबंधी विविध सामग्री एवं मतपेटियां प्रभारी अधिकारी, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग द्वारा दी जायेगी। मतपत्र (कृषक सदस्य एवं हम्माल के चुनाव से संबंधित) प्रभारी अधिकारी, जिला कोषालय अधिकारी द्वारा दिये जायेंगे। कृषक सदस्य, व्यापारी/हम्माल से संबंधित मतपत्र १६ दिसंबर को ही प्रातरू ११ बजे से जिला कोषालय कार्यालय से वितरित किये जायेंगे। मतदान से संबंधित बेलेट पेपर की पेटी कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पुराना तहसील कार्यालय बींझावाडा से दिये जायेंगे। मानदेय राशि का वितरण स्थानीय निर्वाचन कार्यालय से होगा। जिला निर्वाचन अधिकारी ने इस संबंध में जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि रिटघ्नग आफिसर उपरोक्तानुसार सामग्री, मतपत्र, मतपेटियां एवं मानदेय व सभी संबंधित प्रभारी अधिकारियों के साथ ही साथ स्थानीय निर्वाचन कार्यालय से सम्पर्क कर अन्य जानकारी व आवश्यक विविध सामग्री प्राप्त करने के पश्चात ही प्रस्थान करें।  साथ ही इस आशय की पावती एवं प्रमाण पत्र संबंधित प्रभारी अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय निर्वाचन कार्यालय में भी प्रस्तुत करें कि उनके द्वारा चुनाव से संबंधित समस्त वांछित सामग्री/मतपत्र, मानदेय आदि भली भांति जांच कर सुव्यवस्थित ढंग व पूर्ण सुरक्षा से प्राप्त कर लिये गये हैं। 

घोटालेबाजी और कुकर्म को छुपाने का षडय़ंत्र


लाजपत ने लूट लिया जनसंपर्क ------------------ 27

घोटालेबाजी और कुकर्म को छुपाने का षडय़ंत्र

(विनय डेविड)

भोपाल (साई)। पत्रकार बचाओ आंदोलन के संयोजक विनय डेविड कहते हैं कि जनसंपर्क विभाग अपने आय व्यय को पारदर्शी इसलिए नहीं बनाना चाहता है क्योंकि इससे विभाग के अफसरों और कर्मचारियों के जो फर्जी अखबार और पत्रिकाएं इस बजट पर पल रहे हैं उनकी पोल खुल जाएगी। सरकार ने अपने कार्यकर्ताओं को उपकृत करने के लिए जनसंपर्क विभाग के बजट का इस्तेमाल जिस तरह किया है सरकार उस पर भी चुप्पी साधे रखना चाहती है। इसीलिए मुख्यमंत्री ने पत्रकार पंचायत करने की घोषणा तो की लेकिन बाद में वे खुद इस पर गोलमोल जवाब देने लगे।
जनसंपर्क के बजट के करोड़ों रूपयों की धांधली और राशि में अपने बाप की बपौती समझकर सरकारी बजट को अपने मंशानुसार बन्दरबाट कर की जाने वाले घोटालेबाजियों का खुलासा होने से बौखलाये जनसंपर्क के कुछ अधिकारी बौखला गये है। भाजपा शासन काल में अपनी कूटनीति के चलते प्रदेश के हजारों पत्रकारों को मानसिक और आर्थिक स्थिति का सामना करने को विवश कर दिया है। जनसंपर्क विभाग का बन्टाधार करने और अपने घर परिवार रिश्तेदार को भरने के अलावा चापलूसखोरों को पूरा का पूरा शासकीय बजट षडय़ंत्रपूर्वक निपटा गयेे है। पत्रकारों की अनेकों योजनाओं में अपनी भागीदारी बना कर नियमों की धज्जियां तो उड़ा ही रहे है वहीं भाजपा के तेजस्वी मुख्यमंत्री को भी मामू बना रहे है जबकि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के पत्रकारों ने कभी अपनी मंशा जाहिर नहीं की जिसका फायदा उठा कर ये अधिकारी वर्ग पत्रकारिता को उखाडऩे के मकसद से कार्य कर रहे है। जनसंपर्क विभाग की आखिर डूयुटी क्या है, ये नहीं समझ पा रहे है। वहीं घोटाले करते समय इनको ये पता नहीं होता की वे शासकीय बजट का दुरूपयोग कर रहे है और अपनी जेबों को भर रहे है। ये ऐसा विभाग है जिसकी जिम्मेदारी है कि वो जनता के सामने शासन की योजनाओं को प्रेषित करते है उन मीडिया कर्मियों के लिये भी व्यस्थित योजनाओं को बनाये और उनके जीवन यापन के लिये दिशा सुनिश्चित करें, परन्तु महालुटेरों ने कभी भी पत्रकारों के हितों में कोई शासकीय योजनाओं पर अमल नहीं किया, बल्कि अपने निजी स्वार्थों के लिये ही कार्य किया। आज मध्यप्रदेश के पत्रकारों की स्थिति एक मजदूरों से भी बदतर है। पत्रकारों की इस स्थिति के लिये जनसंपर्क में बैठे उच्चाधिकारी ही जिम्मेदार है, जो सत्ता के दलालों से सेटिंग कर पत्रकारों का शोषण कर रहे हैं। परन्तु अब समय आ गया है, कि इनकी पोले खुल गई हैं कि आज पत्रकार अपनी पहचान पाने को मध्यप्रदेश में परेशान हैं जबकि अन्य विधाओं में सभी को पंजीकरण होने की व्यवस्था हैं। पत्रकारों को भी अधिमान्यता दी जाने की व्यवस्था हैं परन्तु अधिकारियों की मूर्खनीति के चलते यह लाभ प्रदेश के पत्रकारों को नहीं मिल पा रहा है।
मध्यप्रदेश के समस्त पत्रकारों ने अपने हकों की मांगों को लेकर सडक़ों पर उतर गये हैं, पिछले दिनों 10 दिसम्बर को विधानसभा सत्र के दौरान पत्रकार भवन से बानगंगा चौराहे तक जंगी प्रदर्शन किया और अपनी हक की लड़ाई की शुरूआत कर जंग का बिगुल फुंका।
पत्रकारों के संयुक्त आंदोलन के लिए प्रदेश भर में समर्थन जुटने लगा है और जनसंपर्क संचालनालय का विरोध व्यापक होता जा रहा है। राजधानी से निकली बगावत की आवाज तमाम महानगरों, जिलों-कस्बों से होते हुए तहसील और गांवों तक जा पहुंची है और राज्य के कोने-कोने से जनसंपर्क संचालनालय की उन भेदभावपूर्ण तथा पक्षपातपूर्ण नीतियों के खिलाफ आवाज उठने लगी है। जिनके चलते प्रदेश का आम पत्रकार स्वाभिमान की जिदंगी जीने तक से मोहताज हैं। जनसंपर्क संचालनालय में विज्ञापनों के लिए किए जाने वाले भ्रष्टाचार, भाई- भतीजावाद और पहुंचवालों के दबदबे के विरोध में तमाम पत्रकार लामबंद होने लगे है। विभिन्न पत्रकार संघों के बैनर तले संचालित जिलों-नगरों में सक्रिय इकाइयों ने संगठित होकर भोपाल चलों का नारा दे दिया है और हजारों पत्रकारों पत्रकार भोपाल पहुंचे।
प्रदेश भर के पत्रकारों ने ठान लिया है कि राजधानी जाकर उन्हें अपनी आवाज जोरदार ढंग से बुलंद करनी है और अपना हक लेकर ही वापस लौटना है। फिर चाहे सरकार जेलों में डाले दें। एकजुटता का परिचय देते हुए सभी ने ऐलान कर दिया है कि हम अपने लिए अधिमान्यता किसी भी कीमत पर हासिल करेंगे। विज्ञापनों में अपना हिस्सा लेंगे और आवास, चिकित्सा, बीमा, बच्चों की शिक्षा और पेंशन जैसे मूलभूत अधिकार पाकर रहेंगे।
पत्रकारों के विरोध प्रदर्शन से जनसंपर्क विभाग सेटिंगबाज अधिकारी वर्ग घबराया हुआ है, भ्रष्टाचार से गले-गले तक डूबे इन अधिकारियों के संघ ने अपनी बौखलाहट का परिचय खुद ही दे दिया। इनके मध्यप्रदेश जनसंपर्क अधिकारी संघ जिसका पंजीकरण 01/01/01/19629/08 है और पता भी जनसंपर्क संचालनालय बाणगंगा रोड भोपाल है, अध्यक्ष देवेन्द्र जोशी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पत्रकारों को फर्जी घोषित कर दिया है वहीं अपनी भड़ास निकाली और पवित्र पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों के मूंह पर जूता मारा है, वही लघु एवं मध्यम समाचार पत्र-पत्रिकाओं के पत्रकारों पर फर्जी पत्रकार होने का आरोप ठोका है कि कोई पत्रकारिता से वास्ता नहीं। साईडजाब के रूप में इस पेशे को कलंकित कर रहे हैं।
जनसंपर्क अधिकारियों के विज्ञप्त भाषा से आम पत्रकारों का कुठाराघात हुआ है वहीं मानसिक क्षति हुई है, क्योंकि ऐसी भाषा का उपयोग उस समय किया गया जब इन घोटालेबाज अधिकारियों की काली करतूतें सामने आने लगी हैं। जब अपना हक मांगने के लिए पत्रकारों ने प्रदर्शन किया तो इनकी चूले हिल गई। अपनी करतूतों को छिपाने के लिए कई पत्रकारों को फर्जी कह डाला और आरोप लगा दिया की संघ के अनुसार इनमें अधिकांश ऐसे फर्जी पत्रकार है जिन्हें पत्रकारिता का न तो कोई अनुभव है और न ही वे सामाजिक मूल्यों और जन सामान्य के हितों की पत्रकारिता से कोई जुड़ाव रखते है। ये सिर्फ शासकीय विज्ञापनों की राशि को अपनी अतिरिक्त आमदनी का साधन मानते है और सिर्फ स्वार्थ साधने के लिये इस पेशे में आये है। प्रश्र उठता है कि हम भी आन्दोलित होकर इनसे यह पूछना चाहते है कि आखिर वो फर्जी पत्रकार कौन है...? जिनको जनसंपर्क के अधिकारी लाभ देकर लाभ कमा रहे है यहीं तो प्रश्र खड़ा है संघ की पहले उन फर्जी पत्रकारों की सूची प्रदर्शन करनी चाहिए जिनको वे ऐसा मानते है, आखिर इतने पत्रकारों को शासकीय विज्ञापन जनसंपर्क ने दिये, उनकी भाजपा शासन काल में जारी विज्ञापन सूची, जारी कर दें। जिससे दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा।
जनसंपर्क संघ की जारी विज्ञप्ति ने यह बता दिया है कि प्रदेश और राजधानी के पत्रकारों का स्तर क्या है और वे पत्रकारों के लिए क्या सोचते हैं। पत्रकारों को खुले कटघरे में खड़ा कर दिया है और उनकी औकात दिखा दी है, संघ ने हस्ताक्षर सहित जारी प्रेस विज्ञप्ति में आरोप ठोका है कि प्रेस वार्त्ताओं, विभिन्न सरकारी आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में बिन बुलाये ही फर्जी पत्रकार अग्रिम पंत्ती में पहुंच जाते हैं, जिससे महत्वपूर्ण समाचार पत्र पत्रिकाओं के संपादक और संवाददाताओं तथा ब्यूरों-प्रतिनिधियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। पत्रकारों के नाम पर फर्जी पत्रकारों द्वारा किये गये कारनामों के लिये अन्य वरिष्ठ पत्रकारगण को उनके कार्य में असुविधा होती है। यहां ‘‘पत्रकार बचाओ आंदोलन’’ यही बताना चाहता है कि हमारी पहली मांग ही यहीं है कि पत्रकारों को सूचीबद्ध करंे जिससे सही और गलत का मापदण्ड तय किया जा सके। अब जब वर्षों से अधिकारी ए.सी. कमरों में बैठ कर गप्पे मारने और शासकीय बजट को घर परिवार रिश्तेदारों और चापलूसकारों में विज्ञापन बाट दिया तो वे अब कैसे अपने काले धब्बे छुटाने पर उतारू हो गये। यहां ‘‘पत्रकार बचाओ आन्दोलन’’ कारियों ने उन पत्रकारों की सूची भी जारी करने को कहा है जो फर्जी पत्रकार बन कर प्रेस वार्त्ताओं सरकारी आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में बिना बुलाये पहुंच कर असुविधा फैलाते हैं।
जनसम्पर्क की पोल खुलने के बाद हुई छि-छि लीदड होने के बाद शुतुरमुर्ग चाले चली जा रही है जनसंपर्क अधिकारी संघ की विज्ञप्ति भाषा ही पूरी की पूरी समस्त पत्रकारिता जगत को अपमानित करने वाली है। इनके अनुसार पत्रकारों और उनके द्वारा स्थापित संगठनों द्वारा पिछले अरसे में धरना, प्रदर्शन और पुतला जलाने जैसे कृत्यों के जरिये विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाब बनाने की कृत्सित कोशिशें की जा रही है। इनको कृत्य मानकर इन कोशिशें की कड़ी निन्दा की (इस खबर को कई समाचार पत्रों ने इनकी भाषा की प्रमुखता से प्रकाशित किया है) प्रश्र यहां खड़ा होता है कि अगर जनसंपर्क विभाग नीतियों का परीपालन सटीक दिशा में करता तो ये दिन नहीं देखना पड़ते और इनको ‘‘पत्रकार बचाओ आंदोलन’’ यह बताना चाहता है कि ये प्रदर्शन लोकतांत्रिक है और अपनी बातें मांगों से अवगत कराने और काली करतूतों को उजागर करने का तरीका है। इसे कृत्य कहने वाले फिर अपने गिरेवा मैं झांके और पत्रकारों को भुखा नंगा कहने के पहले अपनी थाली देखले, सरकारी माल पर हुकूमत जमा कर लूटने का कृत्य ज्यादा दिनों का नहीं होता। छापा पड़ते ही सभी हकीकत सामने आ जाती है।
भाजपा के शासन की दूसरी पारी अवधि समाप्त होने की कगार पर पहुंचती जा रही है वहीं वर्षों सोते रहने वाले अधिकारी को आज भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक की याद आ रही है जबकि वो देश और राज्यों की जानकारी बेबपॉेर्टल पर दे देते है कम से कम राज्य के अधिकारियों की तरह हवा में नहीं रहते, उनके पास आंकड़े है और हर विधा पारदर्शी है यही कार्य मध्यप्रदेश जनसंपर्क कर लेता तो आज ये पंजीयक के आंकड़ों का सहारा नहीं लेना पड़ता।  मध्यप्रदेश के पत्र पत्रिकाओं और सही-गलत पत्रकारों की जानकारी दे पाते। यहां बता दे प्रदेश सरकार ने कभी प्रयास नहीं किया की जनसंपर्क को आड़े हाथों लेकर इनसे कर्त्तव्य निर्वाहन कराया जाये। यहां तक तो कुछ अधिकारी अपने बाप की बपौती समझकर सब मनमर्जी लाभ उठा रहे है।  ‘‘पत्रकार बचाओ आन्दोलन’’ शीघ्र ही जनसंपर्क में हो रही कार्यप्रणाली और बन्दरबाट की शिकायत सी.बी.आई से कर पूरे 10 वर्षों में किये गये बजटों की जांच की मांग करेगा। वहीं जिनको फर्जी मानने के बाद भी लगातार लाभ दिया गया जांच करवाने की गुजारिश करेगा।

शनिवार, 15 दिसंबर 2012

सरकार में नंबर दो की भूमिका में आए कमल नाथ


सरकार में नंबर दो की भूमिका में आए कमल नाथ

एफडीआई ने बढ़ाया कमल नाथ का सियासी कद

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। संगठन में भले ही युवराज राहुल गांधी को राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी के बाद नंबर दो समझा जाता हो पर सरकार में नंबर दो की भूमिका में आ गए हैं कमल नाथ। केंद्रीय शहरी विकास और संसदीय कार्य मंत्री कमल नाथ ने साबित कर दिया है कि फ्लोर मेनेजमेंट में उनका कोई सानी नहीं है। हाल ही में एफडीआई मामले में कमल नाथ ने अकेले ही टीम मनमोहन की गाड़ी को खींचकर नैया पार लगवा दी। कांग्रेस के अंदर अब कमल नाथ का कद प्रधानमंत्री के उपरांत नंबर दो समझा जाने लगा है।
कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी की कमल नाथ के प्रति खासी नाराजगी के उपरांत भी मनमोहन सिंह ने वीटो का प्रयोग कर कमल नाथ को शहरी विकास के साथ ही साथ संसदीय कार्य मंत्रालय का प्रभार सौंपा। सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि राहुल गांधी चाह रहे थे कि कमल नाथ को कमजोर मंत्रालय का प्रभार दिया जाए।
अब जबकि एफडीआई मुद्दे पर शहरी विकास मंत्री का चहुंओर जयकारा लग रहा है तब राहुल गांधी की बोलती बंद हो गई है। उधर, पीएमओ के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री भी एफडीआई मामले में तहे दिल से ना केवल कमल नाथ का शुक्रिया अदा करना चाह रहे हैं बल्कि मनमोहन सिंह अब कमल नाथ के प्रबंधन कौशल के मुरीद हो चुके हैं।
उधर, संसद से छन छन कर बाहर आ रही खबरों पर अगर यकीन किया जाए तो कमल नाथ ने अपने लंबे संसदीय जीवन (1980 से वे लगातार सांसद हैं) का भरपूर उपयोग कर अपने राजनैतिक संपर्कों को जिंदा कर उनका तबियत से दोहन किया। कहा जा रहा है कि इसके पहले संसदीय कार्य मंत्री रहे पवन बंसल का फ्लोर मैनेजमेंट अगर होता तो सरकार कब की एफडीआई मसले पर धराशाई हो गई होती।
कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ (बतौर सांसद श्रीमति सोनिया गांधी को आवंटित सरकारी आवास) के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि दरअसल, भारत की राजनीति की सियासी डोर अमरिका के हाथ परोक्ष तौर पर है, दुनिया के चौधरी अमरीका द्वारा ही अपनी पसंद के व्यक्तित्व को ताकतवर बनाया जाता है। सूत्रों ने कहा कि 2004 में जब संप्रग सरकार अस्तित्व में आ रही थी तभी कमल नाथ को देश का वजीरे आजम बनाने का ताना बाना भी बुना गया था, किन्तु मनमोहन सिंह की छवि कमल नाथ पर भारी पड़ी।
कमल नाथ के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मायावती को एफडीआई के पक्ष में तैयार करने के लिए कमल नाथ को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। पहले तो लुटियन जोन में माया मेम साहिब के लिए कार्यालय की जगह फिर बाद में मायावती के एक सहयोगी की सीबीआई से मदद का हवाला भी दिया गया दोनों के बीच चर्चाओं के दौरान। सूत्रों ने बताया कि जब सिंह सीबीआई निदेशक थे तब माया मेम साहिब के एक करीबी की कमल नाथ ने आउट ऑफ वे जाकर मदद की गई थी।
कांग्रेस के अंदर कमल नाथ समर्थक अब इस बात को चटखारे लेकर कर रहे हैं कि चाहे कांग्रेस में श्रीमति सोनिया गांधी सुप्रीमो हों और उनके अपरिपक्व बेटे राहुल गांधी को नंबर दो की भूमिका में महिमा मण्डित किया जा रहा हो पर यह बात आईने की तरह साफ हो चुकी है कि सरकार में डॉ.मनमोहन सिंह सुप्रीमो हैं और कमल नाथ नंबर दो की पोजीशन में आ चुके हैं।
वैसे भी कमल नाथ 1980 से लगतार सांसद हैं जो सदा ही लोकसभा चुनाव लड़कर जीते हैं और उनकी सीनियारिटी को देखकर उनकी नंबर दो पोजीशन पर किसी को शक शुबहा नहीं होना चाहिए। सरकार के साथ ही साथ संगठन में भी इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि रीढ़ विहीन लोगों को महिमा मण्डित करने के बजाए अगर जनाधार वाले लोगों को आगे लाकर उन्हें ताकतवर बनाया जाता है तो कांग्रेस का फिर से उत्थान हो सकता है।

भूमि मालिक की सहमति अधिग्रहण के लिए अनिवार्य


भूमि मालिक की सहमति अधिग्रहण के लिए अनिवार्य

(शरद)

नई दिल्ली (साई)। भूमि अधिग्रहण को लेकर होने वाले आंदोलनों ने सरकार की नींद उड़ा दी है। सरकार को मजबूरी में इस ओर ध्यान देना पड़ा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भूमि अधिग्रहण विधेयक का अनुमोदन कर दिया है। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कल शाम हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इसके तहत निजी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने में ८० प्रतिशत भूमि मालिकों की सहमति अनिवार्य बना दी गई है।
निजी सार्वजनिक भागीदारी में भूमि अधिग्रहण के लिए ७० प्रतिशत भूमि मालिकों की सहमति जरूरी होगी। एक और बड़े फैसले में मंत्रिमंडल ने एक हजार करोड़ रुपए से अधिक लागत की परियोजनाओं की मंजूरी में तेजी लाने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में निवेश से सम्बद्ध मंत्रिमंडल की समिति गठित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने बताया कि परियोजनाओं को मंजूरी देते समय पर्यावरण मंत्रालय की सभी चिंताओं का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि हजार करोड़ के लगभग जो बड़े प्रोजेक्ट हैं अगर उसमें कोई दिक्कत या तकलीफ आ रही है या कहीं पर किसी कानून में डेडलाइन दी गई है उसको मीट नहीं किया जा रहा या उसको पूरा नहीं किया जा रहा तो कैबिनेट कमिटी ऑन इन्वेस्टमेंट उन प्रोजेक्ट्स को देखेगी।
वहीं पीएमओ के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के साथ चर्चा के दौरान कहा कि सुरक्षा से सम्बद्ध मंत्रिमंडल की समिति ने तटीय सुरक्षा मजबूत करने के लिए दो हजार १५० करोड़ रुपए का प्रस्ताव मंजूर कर लिया है। इसका उद्देश्य २६ नवंबर जैसे मुंबई आतंकी हमलों को रोकना है। प्रस्ताव के तहत तटरक्षक बल के लिए एक हजार पांच सौ करोड़ रुपए की लागत से समुद्र में गश्त लगाने वाले पांच पोत खरीदे जाएंगे। समुद्री सुरक्षा नेटवर्क के दूसरे दौर में ३८ रडार लगाए जाएंगे जिनकी मदद से समूचे समुद्री क्षेत्र में इलेक्ट्रानिक प्रणाली से निगरानी रखी जाएगी।
सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को आगे बताया कि आर्थिक मामलों से सम्बद्ध मंत्रिमंडल की समिति ने उर्वरक कंपनियों को नए संयंत्र लगाने और अपनी मौजूदा क्षमता बढ़ाने में प्रोत्साहन देने के लिए यूरिया निवेश नीति मंजूर कर दी है। वहीं,, बुनियादी ढांचे से सम्बद्ध मंत्रिमंडल की समिति ने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना के चौथे चरण में बनाओ, चालू करो और हस्तांतरित करो की नीति यानी बी.ओ.टी. के अंतर्गत चार हजार किलोमीटर की चार लेन की परियोजना को बढ़ाकर आठ हजार किलोमीटर करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। मंत्रिमंडल ने दिल्ली, मुम्बई, कर्नाटक और राजस्थान में १८ सौ मेगाहटर्ज बैंड टू जी स्पैक्ट्रम नीलामी के आरक्षित आधार मूल्य में तीस प्रतिशत की कटौती का भी अनुमोदन कर दिया है। इन मंडलों के लिए नवम्बर में किसी भी कंपनी ने बोली नहीं लगाई थी।
वहीं आई एण्ड बी मिनिस्ट्री के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों और लोकल केबल ऑपरेटरों की एकाधिकारवादी प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण -ट्राई की राय मांगी है।
सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय ने ट्राई से कहा है कि उचित प्रतिस्पर्धा, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और समानता सुनिश्चित करने के लिए अपनी सिफारिशें दे। मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क विनियम कानून १९९५ में संशोधन के लिए भी सुझाव मांगे हैं। कुछ राज्यों में केबल टेलीविजन के प्रसारण और वितरण पर कुछ कंपनियों ने एकाधिकार कर लिया है और पूरे राज्य में केवल एक ही केबल टी.वी. नेटवर्क का कारोबार हो रहा है।
उधर, आवास मंत्री अजय माकन के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि सरकार ने कहा है कि फेरीवालों का जीवन स्तर सुधारने के लिए प्रभावी कानून बनाना सरकार की पहली प्राथमिकता है। कल नई दिल्ली में आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री अजय माकन ने बताया कि फेरीवालों के बारे में पिछले सत्र में लोकसभा में एक विधेयक पेश किया गया था। माकन ने बताया कि उनका मंत्रालय शीघ्र ही इनके लिए एक ऋण योजना शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत देशभर में फेरीवालों के कल्याण और आर्थिक उत्थान के लिए पर्याप्त धनराशि दी गई है। 

सेवानिवृत्त अतिरिक्त संचालक का हो रहा प्रतिमाह 51 हजार का टीका!


लाजपत ने लूट लिया जनसंपर्क ------------------ 26

सेवानिवृत्त अतिरिक्त संचालक का हो रहा प्रतिमाह 51 हजार का टीका!

सूचना सहायक कर रहे पीआरओ का काम, जनसंपर्क अधिकारी संघ को नहीं परवाह!

(राजेश शर्मा)

भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश में सूबे की जनता को जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार के लिए पाबंद मध्य प्रदेश जनसंपर्क सांचलनालय पिछले लंबे अरसे से चर्चा का केंद्र बिन्दु बना हुआ है। कहा जा रहा है कि जनसंपर्क विभाग में सरकार पर संगठन बुरी तरह हावी हो चुका है। एक तरफ सूचना सहायकों द्वारा पीआरओ का काम किया जा रहा है वहीं जनसंपर्क अधिकारी संघ इस बारे में सरकार से मांग करने के स्थान पर पत्रकारों को असली और फर्जी में उलझाने का कुत्सित प्रयास कर रहा है।
राजधानी में बाणगंगा स्थित जनसंपर्क संचालनालय के आयुक्त के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि आयुक्त की रजामंदी के बिना संगठन के दबाव में एक अतिरिक्त संचालक की सेवा निवृत्ति के काफी बाद उनकी सेवाएं एक बार फिर कांट्रेक्ट पर विभाग को सौंप दी गई है।
अपने सेवाकाल में चर्चाओं और विवादों के केंद्र बिन्दू रहे उक्त अधिकारी को सरकार के बजाए संगठन की सेवा के पारितोषक के बतौर उनकी सेवाएं विभाग को सौंपे जाने की तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि बिना किसी प्रभार वाले उक्त अधिकारी को मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग से इक्यावन हजार रूपए प्रतिमाह का मानदेय भी प्रदाया किया जा रहा है।
जनसंपर्क विभाग में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार उक्त अधिकारी अपने सेवाकाल के अंतिम दिनों में कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और मुख्य सचिव के.एस.शर्मा के करीबी रहे तो भाजपा के आते ही उक्त अधिकारी ने अपना पाला बदल लिया और वे संगठन के तारणहार बन गए। उक्त अधिकारी के द्वारा सरकारी काम से ज्यादा दिलचस्पी संगठन के कामों में लिए जाने संबंधी खबरें भी सुर्खियां बनी थीं।
ज्ञातव्य है कि प्रदेश भर में अनेक जिले एसे हैं जहां जिला जनसंपर्क अधिकारियों की पदस्थापना नहीं होने से वहां पीआरओ का काम सूचना सहायक ही प्रभारी के बतौर कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि जनसंपर्क अधिकारी संघ ने पिछले दिनों सीएम, जनसंपर्क मंत्री और मुख्य सचिव को जो ज्ञापन सौंपा था उसमें फर्जी पत्रकारों पर चिंता जाहिर की थी। जनसंपर्क संचालनालय में चल रही चर्चाओं के अनुसार जनसंपर्क अधिकारी संघ अगर इसके साथ ही साथ मुख्यालय में अधिकारियों की भरमर के बाद पुनः 51 हजार रूपए में छः माहों के लिए सेवाएं लेेने की बात और प्रदेश में जनसंपर्क अधिकारियों की भर्ती की बात उठाता तो बात हजम होती।
जनसंपर्क विभाग की आधिकारिक वेब साईट में बेतूल, हरदा, विदिशा, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, दतिया, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, पन्ना, टीकमगढ़, सतना, अनुपपुर आदि जिलों में ना तो सहायक संचालक पदस्थ हैं ना ही कोई और यहां का प्रभार और जिलों में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार का काम सूचना सहायक या सहायक सूचना अधिकारी संभाले हुए हैं।
चर्चाओं के अनुसार जनसंपर्क विभाग में खाली दिमाग शैतान का घर के लिए विख्यात कुछ विघ्न संतोषियों द्वारा विभाग के बारे में सोचने के बजाए अपनी दुकान कैसे चले इस बारे में ही तिकड़म लगाईं जाकर जनसंपर्क अधिकारी संघ का दुरूपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में जहां अनेक पीआरओ का काम सूचना सहायक चला रहे हों, इसके लिए आवाज उठाने के बजाए रक्षात्मक मुद्रा में आया अधिकारी संघ भी उपहास का ही पात्र बन चुका है।

अचानक गायब हो गए निर्मल बाबा!


अचानक गायब हो गए निर्मल बाबा!

(मणिका सोनल)

नई दिल्ली (साई)। निजी समाचार चेनल्स का टाईम स्लाट खरीदकर लोगों के घरों में जमकर पैठ बनाने वाले चमत्कारी गुरू निर्मल बाबा लगभग एक माह से लापता ही नजर आ रहे हैं। निर्मल बाबा कहां हैं, पिछले एक माह से पता नहीं चल पा रहा है। सात नवंबर को दिल्ली में उनका आखिरी समागम हुआ। इसके बाद उनका दर्शन भक्तों को नहीं हुआ है।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया द्वारा जब निर्मल बाबा के बारे में नेहरू प्लेस स्थित चिरंजीवी टावर स्थित निर्मल दरबार स्थित कार्यालय से चर्चा की तो उन्होंने बस यही कहा कि एक एक पखवाड़े में फोन करते रहें। बाबा जी की जानकारी जल्द ही मिल जाएगी। जब इस प्रतिनिधित ने नेहरू प्लेस जाकर चर्चा करनी चाही तो वहां उपस्थित सुरक्षा कर्मियों ने इस प्रतिनिधि को निर्मल दरबार में प्रवेश ही नहीं करने दिया गया।
निर्मल बाबा के एक बेहद करीबी ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि अरबों रूपए कमा चुके निर्मल बाबा पर शनि की कुदृष्टि पड़ गई और उनकी धर्म की चलती दुकान में ताले लग गए। बाबा अब भारत से कूच कर विदेश में बसने का मन बना चुके हैं।
उन्होंने कहा कि बाबा संभवतः थाईलेण्ड में बसने की योजना बना रहे हैं। बाबा थाईलेण्ड में ही जमीन की खरीद फरोख्त के बारे में कुछ समय से चिंतित नजर आ रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबा उस वक्त बेहद नाराज हो गए थे जब थाईलेण्ड से वापसी के समय बाबा को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट किसी ने उनकी फोटो ले ली थी।
खबर यह भी है कि निर्मल बाबा के समागम में हिस्सा लेने के लिए भक्तों की बुकिंग भी बंद कर दी गयी है। न तो वेबसाइट पर इसकी कोई जानकारी दी गयी है और न ही कार्यालय से स्पष्ट रूप से कुछ बताया जा रहा है। निर्मल बाबा के बारे में हुए खुलासे के बाद टीवी पर उनका पेड विज्ञापन बंद हो गया है।

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

गैस सिलेण्डर के लिए देना होगा सौ का पत्ता ज्यादा!


गैस सिलेण्डर के लिए देना होगा सौ का पत्ता ज्यादा!

(महेश)

नई दिल्ली (साई)। आसमान छूती मंहगाई में कोढ में खाज जैसे ही अब रसोई गैस के सिलेण्डर पर एक सौ का पत्ता ज्यादा देना पड़ सकता है। नई कीमतें रियायती सब्सीडाईज्ड गैस सिलेण्डर पर लागू होंगीं। ये दरें गुजरात चुनावों के एन बाद लागू हो सकती हैं। ये कीमतें सब्सीडाईज्ड गैस के सिलेण्डर की तादाद बढ़ाने के एवज में लागू होंगी।
आर.के.पुरम स्थित गैस अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड के मुख्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि गुजरात चुनाव के बाद सब्सिडी वाले सिलिंडर की संख्या 6 से 9 होगी। सिलिंडरों की संख्या 6 से 9 करने से सरकार पर 9,000 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। लिहाजा 9,000 करोड़ रुपये का बोझ खत्म करने के लिए ही दाम बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
उधर, 24 अकबर रोड़ स्थित कांग्रेस मुख्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इसी हफ्ते कांग्रेस की कोर कमेटी में रसोई गैस सिलिंडर के दाम बढ़ाये जाने पर राजनीतिक फैसला लिये जाने की संभावना है। कांग्रेस कोर कमेटी में फैसला लेने के बाद रसोई गैस सिलिंडर के दाम बढ़ाये जाने पर अंतिम फैसला कैबिनेट में लिया जायेगा। आचार संहिता के कारण गुजरात चुनाव के बाद ही रसोई गैस सिलिंडर के दाम बढ़ाये जाने पर फैसला होगा।

एसएससी निकालेगा लाखों वैकेंसी


एसएससी निकालेगा लाखों वैकेंसी

(ज़ाकिया ज़रीन)

हैदराबाद (साई)। स्टाफ सेलेक्शन कमिशन (एसएससी) साल 2013-14 में करीब एक लाख भर्तियों के लिए विज्ञापन निकाल सकता है। एसएससी के चेयरमैन एन. के. रघुपति ने हैदराबाद में कहा कि अभी हम जिन भी नौकरियों के लिए विज्ञापन दे रहे हैं उन सभी पर भर्तियां हो रही हैं। हमें उम्मीद है कि अगले साल हम एक लाख भर्तियां करेंगे। कंपिटिशन बढ़ रहा है और इसलिए हमें उम्मीद है कि नौकरी के आवेदनों की संख्या भी 1.5 करोड़ तक पहुंच जाएगी।
भारत सरकार की भर्तियों के अलावा एसएससी सरकारी संगठनों जैसे कि फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और प्रसार भारती के लिए भी भर्तियां करवा रहा है। रघुपति के मुताबिक, एक लाख नौकरियों के आंकड़े में ऐसे संस्थानों की भर्तियां भी शामिल होंगी। अगर पूरे देश के स्तर पर भर्ती के आंकड़े को देखें तो हर 102 आवेदनों पर एक भर्ती हो रही है। फिलहाल 15 दिसंबर को एसएससी देश भर में 22,000 पदों के लिए आवेदन मांगेगा। 

ओलावृष्टि:पात्रों को मिलेगा मुआवजा


ओलावृष्टि:पात्रों को मिलेगा मुआवजा

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। जिले के कुछ अंचलों में गत ११ दिसंबर को अचानक हुई ओला वृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जा रहा है। यह सर्वे राजस्व एवं कृषि विभाग के मैदानी अमले द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। नुकसान का आंकलन कर किसानों को मुआवजा दिलाने के लिये राजस्व पुस्तक परिपत्र ६(४) के तहत राहत प्रकरण तैयार कर पात्र किसानों/व्यक्तियों को राहत दिलाई जायेगी।
 कलेक्टर अजीत कुमार ने यह जानकारी देते हुए यहां बताया कि ओला वृष्टि के कारण फसल हानि (खडी या कटी रखी फसल दोनों), पशु हानि, जन हानि या किसी प्रकार की रिहायशी संपत्ति की हानि होने का पटवारियों एवं कृषि विभाग के आर।ए।ई।ओ। व अन्य मैदानी अमले से संयुक्त मुआयना कराया जा रहा है। उन्होंने ओला वृष्टि से पीडितों के प्रति अपनी संवदेनाएं व्यक्त करते हुए कहा है कि जिला प्रशासन किसानों के साथ है। मुआयने के पश्चात जिस किसी प्रकार की भी हानि चिन्हित होगी, पीडित किसानों या व्यक्तियों को राजस्व पुस्तक परिपत्र ६ (४) में उल्लेखित प्रावधानों के अनुरूप राहत प्रकरण तैयार कर उन्हें पात्रतानुसार राहत राशि दी जायेगी। उन्होंने बताया कि राजस्व एवं कृषि अमले की कमी के कारण सर्वे में कुछ वक्त लग सकता है, परन्तु जल्द से जल्द सर्वे का कार्य पूरा कर लिया जायेगा। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए अधीक्षक भू-अभिलेख मिश्रा ने बताया कि केवलारी, धनौरा एवं छपारा तहसील क्षेत्र के करीब ८६ गांव ओलावृष्टि से प्रभावित हुए हैं, जिनमें तुअर व धान की खडी फसलों में आंशिक नुकसान होने की सूचना मिली है।

भवनों में निःशक्तों के लिये रैम्प भी बनाये जायें


भवनों में निःशक्तों के लिये रैम्प भी बनाये जायें

(शिवेश नामदेव)

सिवनी (साई)। केन्द्र सरकार द्वारा निरूशक्त व्यक्ति (समान अवसर अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम १९९५ की धारा ४४-४६ में राश्य सरकारों से यह अपेक्षा की गई है कि विभिन्न प्रकार के निर्माणों को निरूशक्त व्यक्तियों के लिये पूर्ण बाधारहित बनाया जायें। अधिनियम के प्रावधानों को पूरा करने के लिये शासकीय कार्यालयों एवं सार्वजनिक भवनों में रैम्प (ढलावदार रास्तों) भी बनाये जायें। शासकीय कार्यालयों में बनने वाले शौचालयों को व्हील चेयर का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के अनुरूप बनाया जायें। लिफ्ट में ब्रेल लिपि के प्रतीक तथा ध्वनिसूचक सिग्नल लगाये जायें। अस्पताल, प्रमुख स्वास्थ्य केन्द्र तथा अन्य चिकित्सीय परिसरों में भी रैम्प (ढलावदार रास्तों) का निर्माण किया जाये। सार्वजनिक स्थानों, जैसे बस स्टेण्ड आदि में भी बाधारहित आवागमन की व्यवस्था हो। स्थानीय तौर पर नगरीय निकायों को निर्माण कार्याे की अनुमति देते समय बाधारहित वातावरण के बगैर नवीन भवन का डिजाईन अनुमोदित नहीं किया जाये।
            इसी तारतम्य में सामाजिक न्याय विभाग की राश्य स्तरीय कार्यकारिणी समिति की गत ३१ अगस्त १२ को संपन्न बैठक में भी बाधारहित वातावरण के बगैर नवीन भवन का डिजाईन अनुमोदित न करने, सभी नवीन शासकीय भवनों में निरूशक्तजनों के लिये बाधारहित वातावरण उपलब्ध कराने, सभी रेल्वे स्टेशनों को भी बाधारहित बनाये जाने हेतु एवं शासकीय एवं अशासकीय भवनों, जिनमें लिफ्ट लगाई जाती है जिससे उनमें व्हील चेयर नहीं आ पाती है, ऐसी लिफ्ट को व्हील चेयर भी जाने लायक बनाने तथा निरूशक्तजनों के लिये पृथक से बाथरूम एवं टॉयलेट भी बनाये जाने का निर्णय लिया गया है।
 जिलों में निरूशक्तजनों के लिये पूर्ण बाधारहित वातावरण बनाये जाने की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर्स को दी गई है। राश्य शासन द्वारा प्रदेश के समस्त कलेक्टर्स, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों एवं सामाजिक न्याय विभाग के सभी संयुक्त संचालकों व जिलों में पदस्थ उपसंचालकों से कहा गया है कि वे निरूशक्त व्यक्ति (समान अवसर अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम १९९५ के तहत उपर उल्लेखित कार्यवाही करें।