गुरुवार, 9 मई 2013

लाईन बदलने के नाम पर करोड़ों के वारे न्यारे!


लाईन बदलने के नाम पर करोड़ों के वारे न्यारे!

पुरानी सर्विस लाईन साथ ले जा रहे हैं कारिंदे: अर्थिंग भी नहीं डल रही करीने से

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। सिवनी शहर में बिजली के मीटर बाहर करने और नई सर्विस लाईन डालने के नाम पर करोड़ों की चपत सीधे सीधे मध्य प्रदेश विद्युत मण्डल को लगाई जा रही है। विद्युत मण्डल ने इस काम के लिए महज एक नोडल अधिकारी तैनात किया है, जिसके पास ना लाईन स्टाफ है और ना ही कोई अन्य सहायक। इन परिस्थितियों में वह अकेला घरों घर जाकर यह सुनिश्चित करने से रहा कि काम विद्युत मण्डल के मापदण्डों के हिसाब से हुआ अथवा नहीं।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की टीम को शहरवासियों ने बताया कि घरों में मीटर बाहर करवाने और सर्विस लाईन का काम चल रहा है। लोगों की शिकायत है कि इस काम को अंजाम देने वाले कारीगरों द्वारा अनेक घरों में नई सर्विस लाईन को इस तरह डाला गया है कि वह घरों में दीवाली दशहरे की झालरों के मानिंद दिख रही है।
लोगों की यह शिकायत आम हो गई है कि सर्विस लाईन बदलने पर पुरानी सर्विस लाईन को इस काम को अंजाम देने वाले अपने ही साथ ले जा रहे हैं। ज्ञातव्य है कि जब बिजली का कनेक्शन लिया जाता है तब सर्विस लाईन खरीदकर लाने की जवाबदेही उपभोक्ता पर ही आहूत होती है। इस सर्विस लाईन का क्या उपयोग किया जा रहा है इस बारे में कहा नहीं जा सकता है। कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि पुरानी सर्विस लाईन को इस काम को अंजाम देने वाले ठेकेदरों द्वारा बेच दिया जा रहा है।
वहीं, दूसरी ओर नई सर्विस लाईन के डालने पर अर्थिंग का काम भी मानक आधार पर नहीं किया जा रहा है। अनेक उपभोक्ताओं की शिकायत है कि अर्थिंग में डलने वाली तांबे की तार, कोयला, नमक आदि भी उसमें नहीं डलवाया जा रहा है। अर्थिंग के नाम पर महज खाना पूरी के लिए एक तार जमीन में एकाध फिट ही गाड़ा जा रहा है।
मध्य प्रदेश विद्युत मण्डल के संभागीय यंत्री कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस काम को अंजाम देने के लिए डीई कार्यालय में एक नोडल अधिकारी बनाया गया है। श्री मण्डलोई को इसका प्रभार दिया गया है। सूत्रों की मानें तो उनके पास ना तो कोई लाईनमेन है और ना ही अन्य कोई स्टाफ।
सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि सिवनी शहर के लगभग इक्कीस हजार उपभोक्ताओं में से सोलह हजार उपभोक्ताओं को आरएपी डीआरपी योजना के तहत सर्विस लाईन बदलने और मीटर बाहर करने के लिए चिन्हित किया गया है। इस काम का ठेका गुजरात के अहमदाबाद की मेसर्स मांटे कार्लो को प्रदाय किया गया है।
सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को यह भी बताया कि इस काम को अंजाम देने के लिए सर्विस लाईन की मद में 1200 रूपए तथा मीटर बाहर करवाने की मद में आठ सौ रूपए प्रतिमीटर का व्यय रखा गया है। लगभग दो हजार रूपए हर मीटर के लिए विद्युत मण्डल द्वारा मेसर्स मांटे कार्लो को प्रदाय किए जा रहे हैं।
सोलह हजार मीटर के लिए विद्युत मण्डल द्वारा दो हजार रूपए प्रति मीटर की दर से लगभग तीन करोड़ बीस लाख रूपए की राशि खर्च की जा रही है। कंगाल विद्युत मण्डल यह राशि निश्चित तौर पर उपभोक्ता की जेब से ही निकालेगा, पर इस खेल में मालामाल हो सकते हैं, गुजरात के मेसर्स मांटे कार्लो और विभाग के अफसर!

सूर्यनारायण के कहर में तड़पते प्यासे पशु पक्षी!


सूर्यनारायण के कहर में तड़पते प्यासे पशु पक्षी!

(लिमटी खरे)

गर्मी इस साल भी अब पूरे शबाब पर है। गर्मी के मौसम में वैसे भी पेयजल की मांग बढ़ जाती है। गर्मी के इस मौसम में आदमी से लेकर जीव जंतु, पशु पक्षी भी छांव और पानी की तलाश में ही फिरते देखे जा सकते हैं। वन्यजीव भी पानी की तलाश में ही जंगल से निकलकर बाहर आ जाते हैं। हाल ही में बखारी के पास रामगढ़ में तेंदुआ घर में घुस गया था, वह भी शायद पानी की ही तलाश में जंगल से निकलकर बाहर आया था। गांव देहात में इस तरह की घटनाएं घटना आम बात है।
सिवनी जिले विशेषकर जिला मुख्यालय मेें मूक बधिर पशु पक्षी गर्मी में पानी के लिए तरसते देखे जा सकते हैं। आदि अनादि काल की कथाओं में इस बात का उल्लेख मिलता है कि लोग अपने अपने घरों में या आसपास पानी भण्डारण के लिए गड्ढ़े खोदा करते थे ताकि निस्तार का पानी वहां एकत्र हो जो पशु पक्षियों के काम आए। कालांतर में यह गड्ढ़े मच्छरों के लिए उपजाऊ माहौल तैयार करने लगे तब इन्हें बनाना बंद कर दिया गया।
सिवनी शहर में पशु पक्षियों के लिए पानी मुहैया करवाना वैसे तो नगर पालिका परिषद के जिम्मे है पर वह अपने कर्तव्यों के निर्वहन में पूरी तरह असफल ही नजर आ रहा है। जीव जंतुओं, पशु पक्षियों की रक्षा के लिए कृत संकल्पित समाज सेवा का दावा करने वाली संस्थाएं भी मौन ही हैं। कुछ जगहों पर दयालु प्रवृत्ति के लोगों ने पक्षियों के लिए अवश्य ही पानी की व्यवस्था की है। शहर में कमोबेश हर पानी के स्त्रोत चाहे वह हेण्ड पंप हो या सार्वजनिक नल, उसके पास पशुओं की भीड़ देखी जा सकती है।
हर नागरिक के जेहन में यह बात अवश्य ही कौंधती होगी कि सिवनी शहर में आवारा पशुओं को पकड़कर रखने के लिए बरघाट नाके के पास एक कांजी हाउस बनाया गया था। वह स्थान आज किसके कब्जे में है, वहां कितने जानवरों को रखा गया है, इस बारे में शायद ही दावे के साथ कोई बता सके। यह भी संभव है कि जिस वार्ड में यह है उस वार्ड के पार्षद को भी इसकी जानकारी ना हो।
एक दशक पहले तक नगर पालिका परिषद द्वारा भले ही रस्मअदायगी के लिए ही सही पर अपनी हाका गेंग को इस बात के लिए पाबंद किया जाता था कि वह शहर में घूम रहे आवारा मवेशियों को पकड़कर उन्हें कांजी हाउस मंें बंद करे। बाद में पशु के मालिक को जब वह उसे छुड़ाने आता था, तब समझाईश देकर और जुर्माना करके पशु उसे सौंप दिया जाता था। अब यह सब कुछ समाप्त हो गया है। शहर भर में आवारा मवेशी या तो सड़कों पर बैठे आवागमन बाधित करते नजर आते हैं या फिर किसी के घर की दहलान में घुसकर प्लास्टिक की बाल्टियां तोड़ते नजर आते हैं।
शहर में इस समय गाय, बैल, गधे के अलावा भारी तादाद में स्वाईन फ्लू के संवाहक सूअर घूमते दिख जाते हैं, जो नालियों में सनकर लोगों के घरों के आंगन को गंदा करते नजर आते हैं। नगर पालिका परिषद के सफाई कर्मी कभी कभी नालियों पर मेहरबान होकर कचरा निकलकर नालियों के किनारे रख दिया करते हैं। यह कचरा दो चार दिन तक टेक्टर और ट्रली की रास्ता देखता रहता है। जब तक टेक्टर ट्राली आती है तब तक सुअरों की फौज इस कचरे को दुबारा नाली में ही ढकेल देती है।
अभी प्रोढ़ होती पीढ़ी को याद होगा कि शहर के अंदर ना जाने कितने स्थानों पर मवेशियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था हेतु पक्के सीमेंटेड टांके बनवाए गए थे। इन टांकों में पालिका प्रशासन द्वारा हर रोज पानी भरा जाता था ताकि मूक पशु पक्षी गर्मी में पानी के लिए भटकते ना रह जाएं। लगता है कि आज के जनसेवक वाकई निष्ठुर हो चले हैं।
सिवनी की विधायिका श्रीमति नीता पटेरिया, केवलारी के विधायक हरवंश सिंह ठाकुर ने नगर पालिका के साथ ही साथ ग्राम पंचायतों को पेयजल के लिए टेंकर्स दिए। इन टेंकर्स की कीमतों में भारी अंतर है। क्या श्रीमति नीता पटेरिया, शशि ठाकुर, कमल मस्कोले और हरवंश सिंह ठाकुर ने अब तक पशु पक्षियों के पानी के लिए कोई प्रयास किए हैं। आखिर ये जनसेवक पशु पक्षियों की तरफ देखें भी क्यों? आखिर पशु पक्षी इन विधायकों के वोटर्स नहीं हैं।
जिला प्रशासन चाहे तो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देश दे कि शासन की योजना के तहत खुदने वाले नलकूपों के लिए प्लेटफार्म बनाते समय पानी की निकासी के मध्य एक टांका अवश्य ही बनाए जिसमें हेण्ड पंप से पानी भरने के दौरान व्यर्थ बहा पानी एकत्र हो सके। अगर सरकारी तौर पर खुदवाए गए हेण्ड पंप के पास इस तरह के कुछ बड़े टांके बन जाएं तो निश्चित तौर पर मूक मवेशियों को पानी का अच्छा साधन मुहैया हो सकता है। चूंकि इन हेण्ड पंप का उपयोग रोजाना ही होता है, अतः व्यर्थ पानी रोजना ही टंकी से होकर बह जाएगा। इस तरह बहते पानी में मच्छरों के पनपने की आशंका कम ही होती है।
पालिका प्रशासन द्वारा नगर के एतिहासिक दलसागर तालाब में फव्वारा चलाया जा रहा है। इससे किसी की आंखों को सुख और सुकून मिल रहा है या नहीं यह तो नहीं कहा जा सकता है, पर कचहरी चौक पर स्थित उद्यान में फव्वारा कभी कभार चलता ही दिखता है। पालिका प्रशासन अगर चाहे तो सीमेंट की कम उंचाई वाली टंकियां अथवा कुछ पक्के टांके तत्काल बनवाकर उनको दलसागर, बुधवारी तालाब से भर सकता है। यह काम एक छोटी मोटर लगाकर भी किया जा सकता है। इस काम में दिन भर में महज एक ही टेंकर इन टांकों को भर सकता है। हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि सकारात्मक सोच के अभाव में पशु पक्षियों की ओर देखने वाला कोई भी नहीं है। अभी गर्मी का आगाज हुआ है। लगभग दो माह तक गर्मी पूरे शबाब पर होगी। इस दर्मयान पशु पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना भी मनुष्य का ही काम है। वैसे इंसानों को सिवनी में पीने का पानी नसीब नहीं है तो फिर भला जानवरों की कौन सोचे!

बुधवार, 8 मई 2013

जानें उपभोक्ताओं के अधिकार


जानें उपभोक्ताओं के अधिकार

(डी.बी.नायर)

सिवनी (साई)। उपभोक्ता संरक्षण के लिये यह बात जरूरी है कि उपभोक्ताओें द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं तथा प्राप्त की जाने वाली सेवाओं के मामले में तौल तथा माप सहीं हो। उपभोक्ता को किसी भी सेवा में शिकायत होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ता अदालतों में प्रकरण दर्ज करना चाहिये।
उपभोक्ताओं के हित में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी निम्नानुसार है।
1. अगर सामान में खराबी या सेवा में कमी के कारण आपको हानि/क्षति हुई है अथवा किसी व्यापारी द्वारा अनुचित/प्रतिबंधात्मक पद्धति का प्रयोग किया है अथवा उनको हुई हानि या क्षति के लिये पर्याप्त क्षतिपूर्ति नहीं दी गई है अथवा आपकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया गया है तो अपने जिले के उपभोक्ता फोरम में शिकायत करने में न हिचकिचायें।
शिकायत कौन कर सकते हैं-
उपभोक्ता, कोई स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन जो कंपनी अधिनियम 1956 अथवा फिलहाल लागू किसी अन्य विधि के अधीन पंजीकृत है। केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार, एक अथवा एक से अधिक उपभोक्ता, उपभोक्ता की मृत्यु की दिशा में उसके कानूनी अथवा प्रतिनिधि
शिकायत कैसे की जाए-
शिकायत सादे कागज पर की जा सकती है। शिकायत में निम्नलिखित विवरण होना चाहिये-
शिकायतकर्ता तथा विपरीत पार्टी के नाम का विवरण तथा पता, शिकायत से संबंधित तथ्य एवं घटना के स्थान व तिथि का विवरण, शिकायत में उल्लेखित आरोपों के समर्थन में दस्तावेज, शिकायत पर शिकायतकर्ता अथवा उसके प्राधिकृत एजेंट के हस्ताक्षर होने चाहिये, शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी वकील की अनिवार्यता नहीं है।
नाममात्र शुल्क-
अः एक लाख रूपये तक - 100 रू,
बः एक लाख रूपये और उससे ऊपर किंतु पांच लाख रूपये से कम - 200 रू.
सः पांच लाख रूपये और उससे ऊपर किंतु दस लाख रूपये से कम - 400 रू.
दः दस लाख रूपये और उससे ऊपर किंतु बीस लाख रूपये से कम - 500 रू,
शिकायत कहां की जाए -
यह सामान अथवा सेवाओं की लागत, मांगी गई क्षतिपूर्ति एवं क्षेत्र पर निर्भर करता है। यदि यह 20 लाख रू. से कम है- जिला फोरम में। यदि यह 20 लाख रू. से अधिक लेकिन एक करोड़ से कम है- राज्य आयोग के समक्ष। यदि एक करोड़ रू. से अधिक है-राष्ट्रीय आयोग के समक्ष।

अपराधियों को प्रश्रय दे रहे हुकुम


अपराधियों को प्रश्रय दे रहे हुकुम

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड से निकलकर जिला पंचायत के उपाध्यक्ष तक का सफर करने वाले कुंवर शक्ति सिंह जो क्षेत्र में हुकुम के नाम से जाने पहचाने जाते हैं इन दिनों अपराधियों को प्रश्रय देते नजर आ रहे हैं।
घंसौर क्षेत्र में जहां देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा दो चरणों में पावर प्लांट की संस्थापना का काम तेजी से चल रहा है में हुकुम की वजनदारी आज भी बरकरार ही है।
बताया जाता है कि जब बनारस में हुकुम ने अपना मौन वृत किया और उसे नवरात्र के अंतिम दिन 19 अप्रेल को छोड़ा तब उस अवसर के बजाए 06 मई को उन्हें बधाई देकर उनका अभिनंदन किया गया। हुकुम का अभिनंदन करने वालों में सबसे पहला नाम सामने आया है क्षत्रिय महासभा के समरजीत सिंह सोलंकी का। इसके अलावा अधिवक्ता संग्राम सिंह सिसोदिया, अधिवक्ता महेंद्र सिंह सोलंकी, ठेकेदार रंजीत चौहान एवं विनय नाथन आदि के नाम भी उभरकर सामने आए हैं।
बताया जाता है कि समरजीत सिंह सौलंकी के खिलाफ धारा 324 का प्रकरण पंजीबद्ध है और पुलिस रिकर्ड में समरजीत सिंह सौलंकी फरार हैं। क्षेत्र में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार समरजीत सिंह सौलंकी जैसे आपराधिक चरित्र के व्यक्ति से अपना अभिवादन करवाने वाले हुकुम यानी कुंवर शक्ति सिंह क्या अपराधियों को घंसौर क्षेत्र में संरक्षण दे रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि बीते दिनों घंसौर के मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के एक वेल्डर फिरोज द्वारा गांव की ही एक चार साल की दुधमुंही गुड़िया के साथ दुष्कर्म किया था, जिसने बाद में नागपुर में दम तोड़ दिया था। चर्चा तो यहां तक है कि झाबुआ पावर लिमिटेड में बाहर से आकर काम करने वाले मजदूरों के बारे में पतासाजी की जाए तो अधिकांश यहां फरारी काट रहे मुजरिम हो सकते हैं।

कानून और व्यवस्था की स्थिति में होगा आपेक्षित सुधार: शुक्ला


कानून और व्यवस्था की स्थिति में होगा आपेक्षित सुधार: शुक्ला

सिवनी (साई)। सिवनी जिले की कानून और व्यवस्था की स्थिति में बेहतर सुधार करने का प्रयास किया जाएगा। जिले में अपराधों की रोकथाम सुनिश्चित की जाएगी ताकि जनता अमन चैन के साथ रह सके। पुलिस की छवि जनता के बीच मित्र की तो अपराधियों में पुलिस का खौफ कायम हो यह प्रयास होगा। सिवनी जिले में पहले एसपी बी.पी..दुबे थे तो अब 47वें जिला पुलिस अधीक्षक के पद पर पदस्थ मिथलेश शुक्ला ने उक्ताश की बात समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के सिवनी ब्यूरो टीम जिसमें संजीव प्रताप सिंह, शरद खरे एवं महेश रावलानी का समावेश था से चर्चा के दौरान कही। प्रस्तुत है एसपी मिथलेश शुक्ला के साथ हुई चर्चा के मुख्य अंश:

साई न्यूज: सिवनी की कानून व्यवस्था के बारे में आपका क्या सोचना है?
श्री शुक्ला: सिवनी में दुर्भाग्यवश कुछ अनहोनी घटनाएं घटी हैं। त्योहार के लगातार रहने के चलते पुलिस पर कानून और व्यवस्था बनाने हेतु अतिरिक्त दबाव रहा। सिवनी में कानून और व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसमें नागरिकों का और मीडिया का सहयोग लिया जाएगा।
साई न्यूज: धूमा डकैती के मामले में भी अभी तक कोई प्रगति होती नहीं दिख रही है. . .।
श्री शुक्ला: इसके लिए नवागत पुलिस महानिरीक्षक ने एक दल का गठन किया है। उम्मीद है कि एक पखवाड़े में आरोपी पुलिस की पकड़ में होंगे।
साई न्यूज: यह राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर बसा है इन परिस्थितियों में अपराध की गुंजाईश ज्यादा रहती है?
श्री शुकला: इस बात को विशेष तौर पर ध्यान में रखा जाएगा कि सिवनी हाईवे पर है। दरअसल, वाहनों और बल की कमी के चलते पुलिस पर अतिरिक्त भार होता है। हाईवे पेट्रोल के लिए भी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
साई न्यूज: शहर की बिगड़ेल यातायात व्यवस्था के बारे में क्या कुछ योजना है?
श्री शुक्ला: हां यातायात समिति की बैठक के लिए मुद्दे एकत्र हो रहे हैं। शहर का यातायात कैसे सुव्यवस्थित हो इसका प्रयास अवश्य किया जाएगा। शहर में अनेक बस स्टेंड बनने की जानकारी भी आई है। जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। शहर के अंदर से गुजरने वाली अवैध बसों की नकेल कसने का प्रयास किया जाएगा। अगर किसी के पास कोई जानकारी है तो वह दे हम उस पर कार्यवाही करेंगे और जानकारी देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा।
साई न्यूज: शहर में निजी भवनों में संचालित होने वाले बैंक्स के पास पार्किंग का आभाव है इससे यातायात प्रभावित होता है!
श्री शुक्ला: जी, यह बात भी संज्ञान में लाई गई है। इसकी सूची बनाकर संबंधित बैंक्स को पार्किंग सुनिश्चित करने को कहा जाएगा, नहीं तो कार्यवाही की जाएगी।
साई न्यूज: कानून और व्यवस्था बनाने के बारे में नई योजनाएं क्या हैं?
श्री शुक्ला: अभी हम प्राथमिकताएं तय कर रहे हैं। बाहर से आने वाले लोगों की मुसाफिरी दर्ज करवाई जाए, पीसी रोल, और हिस्ट्रीशीटर्स के साथ ही साथ संदिग्ध लोगों पर नजर रखी जाए। किराएदारों की जानकारी पुलिस को देना और सत्यापन कराना अब मकान मालिक की जवाबदेही बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
साई न्यूज: होली के पूर्व सिवनी में अप्रिय घटनाएं घटी और कर्फयू लगा दिया गया, मीडिया को घरों में कैद कर दिया, अखबार तक नहीं बटने दिए गए?
श्री शुक्ला: अगर एसा हुआ है तो गलत है? उस समय क्या परिस्थितियां थीं, तत्कालीन अफसरों ने किस आधार पर किया इस बारे में टिप्पणी करना मुश्किल है। कई बार मर्ज ठीक करने के लिए कड़वी दवा भी खानी होती है। कानून और व्यवस्था बनाने के लिए कई बार ना चाहते हुए भी कठोर कदम उठाने पड़ते हैं।
साई न्यूज: सिवनी में बम पकड़ाए कुछ सरगना भी, इन्हें एटीएस की टीम ने पकड़ा क्या इसे इंटेलिजेंस फेल्युअर माना जाए स्थानीय स्तर पर पुलिस का!
श्री शुक्ला: कुछ मायनों में कहा जा सकता है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस का सूचना तंत्र कामयाब नहीं रहा। किन्तु जब एटीएस की कार्यवाही हुई तब सिवनी पुलिस की भूमिका को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। सिवनी पुलिस ने शानदार परफार्मेंस दिखाया है।
साई न्यूज: सिवनी की जनता, मीडिया आदि से आप क्या अपेक्षा रखते हैं?
श्री शुक्ला: अपेक्षा बस यही है कि अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान ना दें। अगर कोई सूचना कहीं की भी मिलती है तो उसे तत्काल पुलिस को दें और एक अच्छे नागरिक होने का फर्ज अदा करें। बेकार गलत सूचनाओं को पुलिस तक पहुंचाकर पुलिस का समय ना नष्ट करें। पुलिस आपकी सुरक्षा के लिए आपकी मित्र है। रही बात मीडिया की तो जनसंपर्क कार्यालय से पत्रकारों की एक सूची बुलवा ली है। मीडिया भी अनावश्यक और तनाव फैलाने वाली खबरों से परहेज करे तो बेहतर होगा।
(यह साक्षात्कार, घंसौर की गुड़िया के दुष्कर्म की घटना के पहले का है अतः इसमें उसका उल्लेख नहीं है)

हरवंश के संरक्षण में केवलारी हो गया सत्यानाश: गोंगपा


हरवंश के संरक्षण में केवलारी हो गया सत्यानाश: गोंगपा

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार और कांग्रेस पार्टी विपक्ष की भ्ूामिका में बैठकर दोनों मिलजुलकर रोटी, बेटी व संस्कृति को समाप्त करने का ठेका मिलकर चला रहे है । मध्य प्रदेश में रोटी-बेटी-संस्कृति को बचाने के लिये गोंडवाना रत्न, गोंडवाना समग्र क्रांति आंदोलन के महानायक दादा हीरा सिंह मरकाम के गोंडवाना आंदोलन के मिशन को कामयाब बनाना होगा।
भाजपा के संरक्षण में कांग्रेस विधायक के राज में केवलारी में सुरसा की तरह बढ़ रहे भ्रष्टाचार, अन्याय, अत्याचार, शोषण रूपी क्षल कपट वृक्ष के लिये केवलारी के अर्थानुसार यहां पर केवल आरी ही सफाया बन सकती है और इसके लिये चुनावी प्रबंधन एवं चुनावी प्रशिक्षण के माध्यम से ही कार्यकर्ताओं को आरी की पैनी धार के माफिक प्रशिक्षित करना बहुत जरूरी हो गया है ताकि केवलारी विधानसभा क्षेत्र से क्षलकपट वृक्ष को जड़ सहित उखाड़कर फैंक सके उक्त बाते गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में गोंगपा के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम ने कान्हीवाड़ा जोनल कमेटी के अंतर्गत आने वाले ग्राम प्रभारी, मतदान केंद्र प्रभारी, मतदान एजेण्ट, सेक्टर प्रभारी, जोनल प्रभारी एवं रोको, टोको, ठोको समिति के अध्यक्षों को ग्राम बम्हनी में भीषण गर्मी में खुले मंच में पेड़ों के नीचे बैठे हुये कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुये कही।
उन्होंने कहा कि मिशन 2013 के चुनाव में इस बार केवलारी विधानसभा में गोंगपा का कब्जा प्रत्येक कार्यकर्ता को अपना तन, मन, धन लगाकर करना ही होगा। ग्राम समिति, मतदान केंद्र समिति, सेक्टर समिति, जोनल कमेटी  में प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को ही जिम्मेदारी सौंपा जायेगा बिना प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को चुनावी प्रबंधन संबंधी कोई भी जिम्मेदारी नहीं दिये जाने के लिये जिला अध्यक्ष हरिश्चंद उईके को निर्देशित किया। प्रत्येक ग्राम में रोको-टोको-ठोकों के लिये दस युवाओं, दस युवतियों, दस मातृशक्ति एवं दस पितृशक्ति की नियुक्ती, ग्राम प्रभारी, मतदान केंद्र कमेटी, सेक्टर कमेटी, जोनल कमेटी का गठन 15 जून 2013 तक तैयार करके 24 जून 2013 रानी दुर्गावती बलिदान दिवस तक सूची बनाकर अंतिम रूप दे दिया जाये।
विगत माह पूर्व बरघाट में आदिवासी युवा मंच के कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते, बरघाट विधायक कमल मर्सकोले व लखनादौन विधायक श्रीमती शशि ठाकुर के द्वारा आदिवासी समाज के समक्ष किये गये झूठा वायदा करने वालों को आने वाले 2013 के चुनाव में तो सबक सिखाना ही है लेकिन उसके पहले अभी से उनका विरोध करने के लिये कार्यक्रम की सीडी का गांव गांव में वितरण प्रारंभ किये जाने के निर्देश जिला अध्यक्ष को दिये है ताकि इनकी आदिवासी हितेषी होने की हकीकत सामने आ सके। जिला अध्यक्ष हरिश्चंद उईके को जून माह के पहले तीन-तीन दिवस का प्रशिक्षण कार्यक्रम केवलारी विधानसभा, सहित सिवनी, लखनादौन, बरघाट विधानसभा में प्रत्येक सेक्टर में अलग अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम कराने के निर्देश दिये है।

साढ़े छः दशकों से रहे अंधेरे में


साढ़े छः दशकों से रहे अंधेरे में

(विपिन सिंह राजपूत)

सिवनी (साई)। एक तरफ तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एमपी में अटल ज्योति योजना का आगाज कर चौबीसों घंटे बिजली देने का प्रयास कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर ठाकुर हरवंश सिंह के विधानसभा क्षेत्र केवलारी में आधा दर्जन से भी ज्यादा ऐसे गांव है जहां एक दो नहीं 66 साल से लाईट का अता पता नहीं है।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को मिली जानकारी के अनुसार केवलारी विधानसभा के पीपरदौन, हीर्रीटोला, कोपीझोला, चिरईडोंगरी, पांडरवानी में आजादी के बाद से आज तक बिजली नहीं पहुंची यानि की आधा दर्ज गांव ऐसे हैं, जहां 66 वर्षाे से लोग बिजली के लिये तरस रहे हैं, जिस ओर न तो स्थानीय विधायकों ने ध्यान दिया और न ही मप्र शासन ने। वही बरघाट विधानसभा क्षेत्र के गुंजई गांव की भी यही हालत है। ऐसी परिस्थिति में जब मप्र के मुखिया शिवराज सिंह चौहान जिले के वनग्राम को बिजली नहीं दे पा रहे हैं, वह अटल ज्योति योजना के तहत 24 घंटे बिजली कैसे देंगे।
लगभग इन आधा दर्जन गांव के लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार इसकी शिकायत मौजूदा जिला प्रशासन के मुखिया को भी की और शासन के मंत्रियों को भी अवगत कराया, बावजूद इसके आज तक किसी ने भी रोशनी से दूर इन गांव में रोशनी फैलाने का काम नही कर पाये। पीपरदौन, हिर्रीटोला, कोपीझोला, चिरईडोंगरी, पांडरवानी, गुंजई के लोगों को नये संवेदनशील कलेक्टर से उम्मीद है कि कम से कम वह प्रयास कर गांव में प्रकाश पहुंचाने प्रयास करेंगे। वहीं 17 मई को आने वाले प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान अटल ज्योति योजना के शुभारंभ मौके पर कम से कम बिजली से दूर इन गांवों में रोशनी फैलाने का काम करें, ऐसी भी ग्रामीणों ने अपेक्षा व्यक्त की है।
यहां यह बात उल्लेखनीय है कि बरघाट विधानसभा का प्रतिनिधित्व भाजपा के डॉ.ढाल सिंह बिसेन जो वर्तमान में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष हैं ने चार बार किया है। वहीं केवलारी विधानसभा का प्रतिनिधित्व लगातार चौथी बार हरवंश सिंह ठाकुर कर रहे हैं जो वर्तमान में मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हैं।

सिवनी सहित 6 एसपी पर गिर सकती है गाज!


सिवनी सहित 6 एसपी पर गिर सकती है गाज!

चुनाव आयोग नान आईपीएस को जिलों की कमान सौंपने से है खफा

(राजेश शर्मा)

भोपाल (साई)। अगर सियासी दखलंदाजी ज्यादा ना हुई तो आने वाले समय में सिवनी सहित आधा दर्जन जिलों के पुलिस अधीक्षक बदले जा सकते हैं। चुनाव आयोग ने राज्य पुलिस सेवा के अफसरों को जिलों की कमान सौंपे जाने पर सख्त एतराज जताया है। चुनाव आयोग ने सरकार को निर्देश दिया है कि नान आईपीएस अफसरों को काडर पोस्ट से हटाया जाए।
पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि वर्तमान में मिथलेश शुक्ला सिवनी, मनीष कपूरिया नरसिंहपुर, शशिकांत शुक्ला रायसेन, विनीत खन्ना पन्ना, तिलकसिंह अनूपपुर और राजेश हिंगणकार कटनी जिले के एसपी है, जो राज्य पुलिस सेवा के होते हुए भी इन्हें जिलों की कमान सौंपी गई है।
यहां उल्लेखनीय होगा कि सिवनी में रमन सिंह सिकरवार, राकेश जैन के बाद मिथलेश शुक्ला तीसरे पुलिस अधीक्षक हैं जो नान आईपीएस हैं। इनमें से रमन सिंह सिकरवार और राकेश जैन को सिवनी तैनाती के दौरान ही आईपीएस अवार्ड हुआ था। वैसे 18 मार्च को पदभार ग्रहण करने के महज डेढ़ माह के भीतर ही श्री शुक्ला ने गौकशी, जुआं, सट्टा और अवैध शराब बिक्री पर अंकुश लगाया है, जिसकी सर्वत्र प्रशंसा ही हो रही है।
0 सीनियर अफसर की है सिवनी में दरकार
अतिसंवेदनशील जिलों की फेहरिस्त में शामिल सिवनी जिले में सीनियर आईपीएस अफसर की दरकार है। कम से कम एक जिला करने के बाद ही सिवनी में शीर्ष अधिकारियों की पदस्थापना की जानी चाहिए, किन्तु कांग्रेस के शासनकाल से ही यहां नए अफसरों को पहला जिला सौंपने की परंपरा का आगाज किया गया था। वैसे देखा जाए तो मिथलेश शुक्ला का जबलपुर का कार्यकाल काफी हद तक सफल रहा है, साथ ही पुलिस सेवा में उनकी तैनाती दो दशक से ज्यादा यानी 22 साल की है।
0 डीपीसी में हैं दो एसपी के नाम
राज्य सचिवालय वल्लभ भवन में सामान्य प्रशासन विभाग के सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि इस साल आईपीएस के सात पदों के लिए डीपीसी होना है। इसमें सात अफसरों की लाटरी लग सकती है। सूत्रों की मानें तो इस सूची में कटनी एसपी राजेश हिंगणकर और नरसिंहपुर के मनीष कपूरिया का नाम फेहरिस्त में शामिल है।
0 चमक सकती है किस्मत बहुगुणा की
परीवीक्षा अवधि में सिवनी में अनुविभागीय अधिकारी पुलिस के पद पर पदस्थ सिद्धार्थ बहुगुणा को समय से पूर्व ही जिले की कमान मिलने की संभावनाएं जताई जा रही है। वर्ष 2010 के आईपीएस अफसरों में सिद्धार्थ बहुगुणा के अलावा आबिद खान, गौरव तिवारी, निमीष अग्रवाल, आशुतोष प्रताप, युसूफ कुरैशी, डी कल्याण वर्तमान में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर परीवीक्षा अवधि में पदस्थ हैं। इन्हें जिलों की कमान सौंपे जाने पर विचार चल रहा है। वैसे आईपीएस अफसरों की परीवीक्षा अवधि पूरी होने पर इन्हें पीएचक्यू में बतौर सहायक पुलिस महानिरीक्षक पदस्थ किया जाता रहा है।

गौर क्या सिर्फ नागोर के लिए!


गौर क्या सिर्फ नागोर के लिए!

(संजीव प्रताप सिंह)

 उत्तर प्रदेश के नागौर गांव के हैं प्रदेश के स्थानीय शासन विकास मंत्री बाबू लाल गौर। उमा भारती सत्ता से बाहर हुंईं और जब वे मुख्यमंत्री बने तब उन्हें अपने गांव की याद आई और उत्तर प्रदेश के नागौर गांव जाकर उन्होंने वहां के विकास के लिए मध्य प्रदेश का खजाना लुटा दिया। उन्हें माटी का कर्ज याद आया। नब्बे के दशक के आरंभ में सुंदर लाल पटवा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में बाबू लाल गौर ने जो चमत्कार किया वह हर किसी के बस की बात नहीं थी। गौर ने प्रदेश के अनेक जिलों की संकरी गलियों को चौड़ा कर दिया। लोग संकरी गलियों से जब गुजरते थे तो नारकीय पीड़ा भोगा करते थे, पर 1992 के बाद इन सड़कों पर दुपहिया तो छोड़िए चौपहिया वाहन फर्राटे भरने लगे।
शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने के बाद बाबू लाल गौर की यह दूसरी सिवनी यात्रा थी। इसके पहले वे बरघाट आए थे। बाबू लाल गौर की सिवनी यात्रा से सिवनी को क्या फायदा हुआ यह बात कोई भी नहीं बता सकता है। उनकी सिवनी यात्रा से बस एक दिन के लिए सिवनी शहर साफ सुथरा दिखाई दिया है। इसके अलावा और कोई दूसरा लाभ प्रत्यक्षतः तो प्रतीत नहीं होता है। बाबूलाल गौर ने सिवनी के लोगों को सब्ज बाग दिखाए। उन्होंने ना जाने कितनी सौगातें देने की बात कही है। सवाल यह उठता है कि उनके द्वारा रेवड़ी की तरह बांटी गई सौगाते क्या वास्तव में अमली जामा पहन सकेंगी।
इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव हैं। सितम्बर या अक्टूबर में आचार संहिता लग जाएगी। मई का माह समाप्त होने को है। इन परिस्थितियों में तीन माह ही बचते हैं काम करने के लिए। इसमें से जून के दूसरे सप्ताह से मानसून की दस्तक सुनाई देने लगेगी। तब बाबू लाल गौर की घोषणाओं का क्या होगा यह कहना मुश्किल है। लगता है बाबू लाल गौर भाजपा के हिडन एजेंडे पर ही काम कर रहे हैं। शहरी आबादी काफी हद तक बढ़ चुकी है और यह कम से कम एक विधानसभा के लिए निर्णायक की भूमिका अदा करती है।
बाबूलाल गौर जहां भी जा रहे हैं वहां अगर भाजपा का नगर पालिका या नगर निगम का अध्यक्ष है तो वे उसकी तारीफों में कसीदे पढ़ने से नहीं चूकते। मतलब साफ है कि नगर पालिका या नगर निगम की अर्कमण्यता का खामियाजा उस विधानसभा क्षेत्र की जनता भाजपा को ना भोगवाए। सिवनी में भी कमोबेश यही स्थिति है। सिवनी में भाजपा की नगर पालिका है। सिवनी का दुर्भाग्य है कि जिला मुख्यालय के निवासी साफ पानी पीने को तरस रहे हैं।
बाबूलाल गौर ने एक करोड़ तीन लाख रूपए की राशि एक सप्ताह यानी दस मई तक नगर पालिका सिवनी को उपलब्ध कराने की बात कही है। यक्ष प्रश्न तो यह है कि जब पीने को ही पानी नहीं मिल पा रहा है तो आखिर स्वीमिंग पूल में पानी कहां से भरा जाएगा? बाबूलाल गौर सड़क मार्ग से हरवंश सिंह ठाकुर द्वारा आहूत रामकथा सुनकर लौटे, जाहिर है उन्हें उनकी गाड़ी में बैठे नेताओं ने बायीं ओर का भीमगढ़ तालाब तो दाईं ओर श्रीवनी फिल्टर प्लांट अवश्य दिखाया होगा। दोनों को देखने और फिर लंबा रास्ता तय कर सिवनी पहुंचने के बाद क्या बाबूलाल गौर के मन में यह प्रश्न नहीं कौंधा कि आखिर 22 किलोमीटर दूर तक फिल्टर्ड पानी कैसे पहुंच रहा होगा?
इसी अवसर पर सिवनी की विधायक श्रीमति नीता पटेरिया ने अवैध कालोनियों के विकास का मामला उठाया। शायद श्रीमति पटेरिया यह भूल गई होंगी कि वह मंच इस मामले को उठाने के लिए माकूल नहीं था। सिवनी की जनता ने एक बार उन्हें देश की सबसे बड़ी पंचायत में सांसद बनाकर भेजा और अब वे सिवनी की विधायक हैं, इस नाते इस तरह की बातें उठाने का सही मंच विधानसभा ही होता है क्योंकि वहां सब कुछ रिकार्डेड रहता है। जरूरी नहीं है कि जिस मंच से उन्होंने बात उठाई वहां से उनकी बात को बाबूलाल गौर भोपाल पहुंचने के बाद तवज्जो दें।
मौका सिवनी में आयोजित प्रोग्राम का और सिवनी तथा बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद के.डी.देशमुख बात करें बालाघाट की तो वाकई आश्चर्य ही होता है। क्या बाबूलाल गौर बालाघाट नहीं जाते? सांसद देशमुख की मांग पर बाबूलाल गौर ने बालाघाट जिले के कटंगी नगर परिषद के लिए 37 लाख रूपए मंजूर किए। वाकई आश्चर्यजनक बात तो यह रही कि बाबूलाल गौर की इस घोषणा पर वहां उपस्थित सिवनी जिले के भाजपा के साथ ही साथ कांग्रेस के नेता भी तालियां पीटते रहे। कम से कम कांग्रेस के पार्षदों को तो उनसे यह प्रश्न करना था कि आखिर 2008 में विधानसभा चुनावों के बाद सिवनी नगर पालिका को शासन ने क्या दिया? कम से कम सिवनी नगर पालिका परिषद के पिछले और इस कार्यकाल के कारनामों की शिकायतों पर आखिर प्रदेश शासन मौन क्यों है इस बात को उठाना था। विडम्बना ही कही जाएगी कि कांग्रेस के पार्षद भी कठपुतली के मानिंद वहां सम्मोहित होकर तालियां ही बजाते रहे।
हालात देखकर लगता है कि बाबूलाल गौर जादूगर के मानिंद आए, अपना हिडन मूल एजेंडा निपटाया, नगर पालिका के कार्यक्रम में शामिल हुए, घोषणाएं की और चलते बने। सिवनी जिले में बाबूलाल गौर ने अपनी इस यात्रा में सड़क मार्ग से जो दूरी तय की है वह सिवनी से भोपाल की दूरी से ज्यादा है, इन परिस्थितियों में क्या उन्हें सरकारी उड़न खटोले की मंहगी सवारी गांठने की दरकार थी? निश्चित तौर पर नहीं, पर कोई कर भी क्या सकता है? पक्षाघात की शिकार विपक्ष में बैठी कांग्रेस को प्रदेश से जिला स्तर तक छद्म विरोध कर ही जनता को तमाशा जो दिखा रही है।

शुक्रवार, 3 मई 2013

डायवर्शन हुआ नहीं और प्लाट बिक रहे कैलाश वाटिका में!


डायवर्शन हुआ नहीं और प्लाट बिक रहे कैलाश वाटिका में!

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। शहर के उपनगरीय क्षेत्र डूंडा सिवनी में प्राईम लोकेशन पर बस स्टेंड से महज पांच मिनिट की दूरी पर कवर्ड केंपस में सर्वसुविधायुक्त पालट बेचने का दावा करने वाले साई बिल्डर्स एण्ड डवलपर्स द्वारा उपभोक्ताओं को सब्ज बाग दिखाकर ठगा जा रहा है। प्लाट की बुकिंग जारी है पर अहर्ताएं पूरी ना हो पाने के कारण इन प्लाट्स की रजिस्ट्री दो तीन माह बाद करवाने का आश्वासन दिया जा रहा है। भोपाल में इसके रजिस्टर्ड आफिस से महेंद्र ने बताया कि अभी जमीन का डायवर्शन नहीं हुआ है जब डायवर्शन होगा तब प्लाट की रजिस्ट्री की जाएगी।
हिन्द गजट के ब्यूरो ने जब एक ग्राहक बनकर 9407014702 पर संपर्क साधा गया तो वहां किसी कटरे द्वारा फोन उठाया गया। उन्होंने बताया कि उनका साईट आफिस बरघाट रोड़ पर एफसीआई के गोदाम के साथ ही लगा हुआ है। उनके अनुसार एक एकड़ के भूखण्ड में 44000 स्कैवयर फिट होते हैं और इसमें उन्होंने 22 प्लाट काटे हैं जिनमें से 14 प्लाट्स की बुकिंग और अग्रिम उन्हें प्राप्त हो गया है। अब वहां आठ प्लाट शेष बचे हैं।
श्री कटरे ने आगे कहा कि उनके द्वारा अभी साईट को डवलप करवाना आरंभ नहीं किया गया है, शीघ्र ही साईट डव्हलप की जाएगी। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या साईट देखी जा सकती है तो उन्होंने कहा कि अभी तो साईट खेत के रूप में है देखा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि राजधानी भोपाल की गुलमोहर कालोनी के प्लाट नंबर 6 में कैलाश बिल्डर्स का रजिस्टर्ड आफिस है, और उनका भान्जा इसका सर्वे सर्वा है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या साईट पर 20 फिट की आरसीसी रोड़ का निर्माण हो चुका है? इस पर उन्होंने कहा कि अभी यह नहीं किया गया है।
जब उनसे यह पूछा गया कि कलश वाटिका में कैलाश बिल्डर्स और डेवलपर्स ने दावा किया है कि वहां परफेक्ट सीवेज ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाएगा, तो क्या यह पूरा हो गया है। उन्होंने इसके जवाब में सीधे सीधे कहा कि अभी कोई भी काम नहीं हुआ है। इसी तरह बिजली की व्यवस्था भरपूर पानी और गार्डन तथा मिनी शापिंग माल के सवाल के जवाब में भी कोई संतोषजन उत्तर नहीं दे पाए।
हमारे प्रतिनिधि ने जब आगे गहराई तक पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि पहले तो कच्ची रजिस्ट्र हो जाया करती थी किन्तु अब हाई कोर्ट के सख्त आदेश के बाद दस हजार फिट से ज्यादा की रजस्ट्री सारी अनुमतियों के उपरांत ही की जा सकती हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि पूर्व में बुक कराए गए प्लाट्स पर कितना पैसा खरीददार को ज्यादा लगेगा? इस पर उन्होंने कहा कि लगभग 15 प्रतिशत तो सीधे सीधे सरकार को जाएगा और फिर रजिस्टार आफिस में लगने वाला खर्च पांच प्रतिशत अलग से वसूला जाएगा खरीददार से।
जब उनसे पूछा गया कि रजिस्टार कार्यालय का खर्च से क्या तातपर्य है, तो उन्होंने हंसते हुए कहा कि रजिस्टार आफिस नहीं गए हैं क्या कभी? अरे भई रजिस्टार आफिस में बिना चढ़ोत्री के कोई रजिस्ट्री पास नहीं होती है और यह खर्च कुल राशि का पांच प्रतिशत तक बैठता है।
ज्ञातव्य है कि रजिस्टार का कार्यालय जिला कलेक्टर की नाक के नीचे कलेक्टरेट प्रांगण में ही है जहां दलालों के जाल और बाहरी व्यक्तियों द्वारा सरकारी काम किए जाने की शिकायतें जब तब मिला करती हैं। बाहरी व्यक्तियों द्वारा रजिस्ट्री को चेक करना, सील लगाने आदि का काम किया जाता है। कहा जाता है कि लेन देन का काम भी इन्हीं बाहरी व्यक्तियों के द्वारा किया जाता है ताकि कभी छापा पड़ने की स्थित में इस कार्यालय के लोग अपनी खाल बचा सकें।
बहरहाल, गहरी पूछताछ पर संभवतः कटरे को कुछ शक हुआ होगा, इसके कुछ देर बाद हिन्द गजट के कार्यालय में कैलाश बिल्डर्स और डव्हलपर्स के एक विज्ञापन में उल्लेखित 9039782344 से किसी महेंद्र का फोन आया और धमकाने वाले अंदाज में उन्होंने कहा कि वे दैनिक भास्कर भोपाल से बोल रहे हैं कैलाश बिल्डर का क्या मसला है?
जब उनसे कटरे के साथ हुए संवाद के बारे में बताया गया और पैसा देने पर तत्काल रजिस्ट्री क्यों नहीं की जा रही है की बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी जमीन का डायवर्शन ही नहीं हुआ है तो भला रजिस्ट्री कैसे की जा सकती है? जमीन का डायवर्शन करने के उपरांत ही रजिस्ट्री की जाएगी अभी तो महज बुकिंग ही चालू है।
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सोनकेशरिया ने बताया कि अगर किसी प्लाट का डायवर्शन नहीं हुआ है तो उसे कैसे बैचा जा सकता है? अगर उस भूखण्ड को बेचने का प्रपोगंडा भी किया जाता है तो वह भी असंवैधानिक ही माना जाएगा।

शराब के पैसे से विधायक बनने की चाह!


शराब के पैसे से विधायक बनने की चाह!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। सिवनी में अप्रेल माह में लगातार दो एसी घटनाएं घटीं जिन्होंने मानवता को शर्मसार कर दिया। एक सिवनी की गुड़िया के साथ और दूसरी एक बछिया के साथ दुष्कर्म की। दोनों ही घटनाएं घंसौर और धनोरा क्षेत्र में घटित हुई हैं। इस तरह की वहशियाना हरकतों के पीछे शराब को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
ज्ञातव्य है कि इंसान से हैवान बनाने वाली शराब ही होती है। शराब वह चीज है जो महज चंद मिनिट में ही आदमी को शैतान बना देती है। शराब पीने के उपरांत व्यक्ति का अपने दिमाग पर काबू नहीं रह पाता है। शराब के दाम कितने भी बढ़ा दिए जों पर अवैध रूप से बिकने वाली शराब आज भी ठेके से सस्ती ही मिल रही है।
लखनादौन, घंसौर और धनोरा क्षेत्र में आबकारी और पुलिस विभाग की मिली भगत से अवैध शराब का कारोबार फल फूल रहा है। शराब आसवानियों से अवैध रूप से निकलने वाली शराब कम कीमत पर मिल जाया करती है क्योंकि इस पर आबकारी और वेट शुल्क का प्रावधान ही नहीं होता है।
बताया जाता है कि क्षेत्र के एक युवा और उर्जावान नेता के इशारों पर लखनादौन, घंसौर और धनोरा क्षेत्र में शराब का व्यवसाय किया जा रहा है। चंद सिक्कों की खनक के बूते सिवनी में मीडिया को अपने कब्जे में करने का दावा करने वाले उक्त नेता द्वारा यूं तो जिले के वरिष्ठ नेताओं, पत्रकारों और गणमान्य लोगों के सबके सामने पैर पड़े जाते हैं पर पीठ फिरते ही उनको अश्लील गालियां देने से गुरेज नहीं करते हैं ये उर्जावान नेता।
पैसों के दम पर दिल्ली सिवनी की दूरी को चंद मिनिटों में तय करने वाले उर्जावान नेता द्वारा कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा के दलाल नुमा नेताओं को साधकर अपनी पहुंच कांग्रेस और भाजपा दरबार में बनाने की जुगत लगाई जाती है। कभी कांग्रेस के नेताओं के जरिए राहुल गांधी की दरबार तो कभी भाजपा की सीढ़ी के सहारे तत्कालीन अध्यक्ष नितिन गड़करी की देहरी चूमने का असफल प्रयास उक्त नेता द्वारा लंबे समय तक किया गया है।
कहा जा रहा है कि उक्त उर्जावान नेता के संरक्षण में ही लखनादौन, घंसौर और धनोरा क्षेत्र में अवैध शराब की बिकावली चरम पर है। अवैध शराब चूंकि सस्ती होती है अतः इसे ज्यादा मात्रा में पीकर लोग अपने होश खो बैठते हैं, और घंसौर में सिवनी की गुडिया अथवा धनोरा में पशु के साथ अमानवीय घटनाओं को अंजाम दे दिया जाता है।
आरोपित है कि सिवनी जिले के शराब ठेकेदारों द्वारा भी ऑफ द रिकार्ड मीडिया को अक्सर विदेशी मदिरा की वो बोतलें दिखाई जाती हैं जो लखनादौन, घंसौर, धनोरा, धूमा, आदेगांव क्षेत्र में बिक रही हैं। इन बोतलों पर साफ लिखा होताा है कि फार सेल इन दमन एण्ड द्वीव ओनली। अर्थात वह शराब दमन और द्वीव में बेचने के लिए ही है।
चूंकि दमन और द्वीव में किसी भी प्रकार का कर पर्यटन विकास की दृष्टि से शराब पर नहीं लगाया गया है अतः वहां शराब सस्ती होती है। इस बिना कर वाली सस्ती शराब को सिवनी लाकर शराब के कथित ठेकेदारों द्वारा अवैध रूप से बेचकर मुनाफा कमाया जा रहा है।
एक शराब ठेकेदार ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि दवा खरीदते समय तो उपभोक्ता द्वारा बाकयदा कीमत, मेनीफेक्चरिंग, एक्सपाईरी आदि देखी जाती है पर रात के अंधेरे में शराब खरीदने और उसे वापरने के समय शराब की बोतल पर कहां की बनी कहां बिकेगी, कितनी कीमत आदि देखना वह मुनासिब नहीं समझता है।
चूंकि भारत के सभ्य समाज में शराब को आज भी अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता है अतः शराब के ठेके पर जाकर शराब क्रय कर उपभोक्ता बिना हुज्जत वहां से भागने में ही भलाई समझता है। यही कारण है कि सिवनी में आबकारी विभाग और पुलिस की सांठगांठ से शासन के राजस्व को क्षति पहुंचाकर कथित ठेकेदार द्वारा सिवनी जिले में जहर खुलेआम बेचा जा रहा है।
कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि इस जहर को बेचकर संचित धन का उपयोग जल्द ही मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में उक्त ठेकेदार द्वारा अपनी उम्मीदवारी को किसी राजनैतिक दल से संबद्ध करने नहीं मिलने पर निर्दलीय रूप में ही मैदान में ताल ठोंककर मतदाताओं को रिझाने के लिए किया जाने वाला है। अब देखना यह है कि शराब के पैसों से विधायक बनने का सपना मन में संजोए उक्त कथित ठेकेदार का यह हलाल या हराम का पैसा हिन्दु, मुस्लिम, सिख्ख, ईसाई सहित सारे धर्म के लोग स्वीकार कर पाएंगे या फिर . . .।