बुधवार, 12 सितंबर 2012

सत्याग्रहियों को प्रदर्शन स्थल से हटाया


सत्याग्रहियों को प्रदर्शन स्थल से हटाया

(हरदा से लौटकर सोनल सूर्यवंशी)

भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश में पुलिस ने आज सवेरे हरदा जिले के खरदाना गांव में जल सत्याग्रहियों को प्रदर्शन स्थल से हटा दिया है। ये प्रदर्शनकारी इन्दिरा सागर बांध का जलस्तर कम करने की मांग कर रहे थे। वैसे गांव के लोग अपनी मांग पूरी होने तक जल सत्याग्रह जारी रखने पर अड़े हुए थे।
मौके पर जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए क्षेत्र में धारा १४४ लागू कर दी है। प्रशासन बांध के इस बैक वाटर क्षेत्र को खाली कराने के प्रयास भी कर रहा है। उधर आंदोलनकारी बांध के बैक वाटर में खड़े होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि उन्हें अधिग्रहित जमीन के बदले जमीन दी जाए और बांध का जलस्तर जो २६२ मीटर पहुंच गया है, उसे २६० मीटर किया जाए। दूसरी ओर जिला प्रशासन ने आंदोलनकारियों की १६ मांगों में से १४ मांग को मान लिया है।
इससे पहले मंगलवार को करीब 100 लोगों ने पानी में खड़े रहकर धरना दिया। एनबीए (नर्मदा बचाओ आंदोलन) और प्रशासन की वार्ता का फिलहाल कोई हल नहीं निकला। मंगलवार को ही प्रशासन ने खरदना में अचानक धारा 144 लगा दी। वहीं दिन में धरना स्थल पर तैनात किए गए 500 से अधिक पुलिस बल को देर रात हटा लिया गया। लेकिन, फिर आज सुबह उन्हें भेजकर सत्याग्रहियों को बाहर निकालने का काम शुरू हो गया।
मंगलवार को जल सत्याग्रहियों को समर्थन करने के लिए एनबीए कार्यकर्ताओं के अलावा टीम अन्ना के सदस्य, कांग्रेस नेता और मानवाधिकार संगठन के लोग पहुंचे। एनबीए के चित्ररूपा, हिमांशु कुमार, टीम अन्ना के शरद पी। कुमरे, विपिन कोठारी, डॉ। रमेश बेलावल ने भी पानी में उतरकर सत्याग्रहियों के समर्थन में नारे लगाए। उन्होंने कहा कि एक ही तरह की परेशानियों में दो नियम नहीं हो सकते।
कलेक्टर सुदामा खाड़े, एसपी अनुराग, एसडीएम मंजूषा राय आदि ने आंदोलन कर्ताओं से कई दौर की बातचीत की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। सत्याग्रही इंदिरा सागर बांध का जलस्तर कम करने की मांग पर अड़े हुए थे वहीं प्रशासन का कहना था कि इस मांग के संबंध में वह कुछ नहीं कर सकते।
- इंदिरा सागर बांध का जलस्तर 262 मीटर के बजाय 260 मीटर किया जाए।
- खरदना के 16 परिवार डूब प्रभावितों में शामिल नहीं किए गए हैं जबकि उनके खेत व मकान डूब गए हैं। प्रशासन उन्हें शामिल करें।
- जमीन के बदले जमीन मिले और वह भी प्रति प्रभावित परिवार कम से कम 5 एकड़ सिंचित जमीन।
- उचित पुनर्वास हो।
प्रशासन का तर्क - जमीन के बदले जमीन, दोबारा सर्वे और उचित पुनर्वास के लिए शासन ने घोषणा कर दी है। दोबारा सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। यदि कोई परिवार छूटा है तो उसे शामिल कर लिया जाएगा।

एमपी का एक दशक का हक मारा कमल नाथ ने: जोशी


एमपी का एक दशक का हक मारा कमल नाथ ने: जोशी

10 साल का कोटा तो कमलनाथ ही ले गए, अब मप्र के लिए कुछ नहीं

(राजेश शर्मा)

भोपाल (साई)। कोई अपने संसदीय क्षेत्र का ध्यान किस तरह रखे इस बात को 1980 से छिंदवाड़ा से लगातार (उपचुनाव को छोड़कर) छिंदवाड़ा का प्रतिनिधित्व करने वाले केंद्रीय मंत्री कमल नाथ से सीखना चाहिए। कमल नाथ ने भूतल परिवहन रहते हुए मध्य प्रदेश का दस साल तक का कोटा अपने विशेषाधिकार का उपयोग कर छिंदवाड़ा को आवंटिक कर दिया है। अब प्रदेश को दस साल तक भूतल परिवहन मंत्रालय की मद में शायद ही कुछ मिल पाए।
कोल ब्लॉक आवंटन के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरने आए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री सीपी जोशी को सड़कों के मुद्दे पर उन्हीं की पार्टी के विधायकों ने घेर लिया। कांग्रेस विधायकों ने जोशी से अपने क्षेत्र की सड़कें केंद्रीय निधि से बनाने की मांग की। जोशी ने अपनी मजबूरी जताते हुए कहा उनके पूर्ववर्ती कमलनाथ ने खुद के क्षेत्र के लिए 1600 करोड़ की सड़कें मंजूर कर लीं। पूरे प्रदेश का लगभग दस साल का कोटा एक ही क्षेत्र में खर्च होने से असामान्य स्थिति बनी है। अब मप्र को और अधिक राशि आवंटित करना संभव नहीं है।
कोल ब्लॉक आवंटन के मुद्दे पर भाजपा के मुकाबले के लिए कांग्रेस के सांसद, विधायकों को तैयार करने लिए पार्टी के सांसदों व विधायकों की बैठक रखी गई थी। जोशी खास तौर से इस बैठक के लिए आए थे। बैठक में अधिकतर विधायक मौजूद थे, जबकि पार्टी के केवल दो सांसदों प्रेमचंद गुड्डू और नारायण सिंह अमलावे ने ही बैठक में भाग लिया।
कांग्रेस कमेटी के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि केंद्रीय मंत्री सी.पी.जोशी का भाषण खत्म होने के बाद जब विधायकों को बोलने का मौका मिला तो ज्यादातर ने कोल ब्लॉक की बजाय सड़कों के मुद्दे पर उन्हें घेर लिया। डॉ. गोविंद सिंह, गोविंद राजपूत और अन्य विधायकों ने जोशी से कहा कि वे केंद्रीय सड़क निधि से राशि आवंटित कर उनके क्षेत्र में सड़कों का निर्माण कराएं।
कुछ विधायकों ने उनके क्षेत्र में पहले से मंजूर सड़कों का निर्माण अटका होने की बात भी उठाई। विधायक दल के उप नेता चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने कहा कि भाजपा राष्ट्रीय राजमार्ग के मुद्दे पर एक बार फिर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश कर सकती है। इसके लिए हमें तैयारी करना चाहिए। सड़कों का निर्माण शुरू करके उनके आरोपों का जवाब देना आसान होगा।
यहां उल्लेखनीय होगा कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से लगे हुए सिवनी जिले में एनएचएआई का काम बुरी तरह उलझाकर रखा गया है। लगभग साढ़े चार सौ साल पुरानी और शेरशाह सूरी के जमाने की उत्तर दक्षिण की जीवन रेखा को बंद कराने का कुत्सित प्रयास कांग्रेस भाजपा द्वारा किया जा रहा है। इस संबंध में आरोप है कि केंद्रीय मंत्री कमल नाथ ने भूतल परिवहन मंत्री रहते हुए इस सड़क का काम षणयंत्र के तहत अटका दिया था।
यह सड़क मण्डला सिवनी के कांग्रेसी सांसद बसोरी सिंह मसराम, बालाघाट सिवनी के सांसद के.डी.देशमुख, लखनादौन की भाजपा विधायक शशि ठाकुर, सिवनी की विधायिका और परिसीमन में समाप्त हुई सिवनी लोकसभा की अंतिम सांसद एवं मध्य प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष श्रीमति नीता पटेरिया, बरघाट के विधायक कमल मस्कोले एवं कांग्रेस के कद्दावर नेता तथा मध्य प्रदेश विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर के क्षेत्र से होकर गुजरती है। बावजूद इसके इस बैठक में ना तो हरवंश सिंह ने मुंह खोलने की जहमत उठाई और ना ही बसोरी सिंह मसराम ने।
इसके साथ ही साथ पन्ना विधायक श्रीकांत दुबे सहित कुछ अन्य विधायकों ने सुझाव दिया कि केंद्र से हर महीने एक केंद्रीय मंत्री को मप्र आना चाहिए। यहां भाजपा लगातार केंद सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाती है। केंद्रीय मंत्री इन आरोपों का जवाब बेहतर तरीके से दे सकते हैं। विधायकों ने कोल ब्लॉक आवंटन के संबंध में तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। बैठक को प्रभारी महासचिव बीके हरिप्रसाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया और नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भी संबोधित किया।
कांग्रेस के अंदर चल रही चर्चाओं के अनुसार मध्य प्रदेश के स्थानीय शासन मंत्री बाबू लाल गौर को साधकर कमल नाथ ने छिंदवाड़ा को पूरी तरह संपन्न बनाने का प्रयास अवश्य ही किया है किन्तु उन्होंने मध्य प्रदेश को इसमें पीछे धकेल दिया है। चर्चा है कि बाबू लाल गौर ही दिल्ली प्रवास पर सदा ही कमल नाथ से ना केवल मिलते हैं बल्कि खबरों में भी कमल नाथ के साथ फोटो में छाए रहते हैं। छिंदवाड़ा को केंद्र की जो इमदाद मिली है वह बाबू लाल गौर से छिपना मुश्किल ही बताई जा रही है।

मंगलवार, 11 सितंबर 2012

सूर्य नमस्कार से अलौकिक ज्ञान केसे प्राप्त करें..?


सूर्य नमस्कार से अलौकिक ज्ञान केसे प्राप्त करें..?

(पंडित दयानन्द शास्त्री)

नई दिल्ली (साई)। शांति  या सुख का अनुभव करना या बोध करना अलौकिक ज्ञान प्राप्त करने जैसा है, यह तभी संभव है, जब आप पूर्णतः स्वस्थ हों. अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करने के यंू को कई तरीके हैं, उनमें से ही एक आसान तरीका है सूर्य नमस्कार करना.
सूर्य नमस्कार योगासनों में सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया है. यह अकेला अभ्यास ही साधक को सम्पूर्ण योग व्यायाम का लाभ पहुंचाने में समर्थ है. इसके अभ्यास से साधक का शरीर निरोग और स्वस्थ होकर तेजस्वी हो जाता है. सूर्य नमस्कार स्त्री , पुरूष , बाल , युवा तथा वृद्धों के लिए भी उपयोगी बताया गया है. सूर्य नमस्कार का अभ्यास बारह स्थितियों में किया जाता है, जो निम्नलिखित है-
--- दोनों हाथों को जोड़कर सीधे खड़े हों. नेत्र बंद करें. ध्यान आज्ञा चक्र पर केंद्रित करके सूर्य भगवान का आव्हान मित्राय नमः मंत्र के द्वारा करें.
---- श्वास भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए उपर की ओर तानें तथा भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं. ध्यान को गर्दन के पीछे विशुद्धि चक्र पर केंद्रित करें.
---  तीसरी  स्थिति  श्वास को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकाएं. हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी  का स्पर्श करें.   घुटने सीधे रहें माथा घुटनों का स्पर्श करता हुआ ध्यान नाभि के पीछे मणिपूरक चक्र पर केंद्रित करते हुए कुछ क्षण इसी स्थिति में रूकें कमर एवं रीढ़ के दोष वाले साधक न करें.
---- इसी  स्थिति   में श्वास को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं. छाती को खींचकर आगे  की ओर तानें. गर्दन को अधिक पीछे की ओर झुकाएं. टांग तनी हुई सीधी पीछे की ओर खिंचाव और पैर का पंजा खड़ा हुआ. इस स्थिति में कुछ समय रूकें. ध्यान को स्वाधिष्ठान अथवा विशुद्धि चक्र पर ले जाएं मुखाकृति सामान्य रखें.
-----श्वास को धीरे-धीरे बाहर निष्कासित करते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं. दोनांे पैरों की एड़ियां परस्पर मिली  हुई हों. पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें और एड़ियों को पृथ्वी पर मिलाने का प्रयास करें. नितम्बों को अधिक से अधिक उपर उठाएं. गर्दन को नीचे झुकाकर ठोड़ी को कण्ठकूप में लगाएं. ध्यान सहस्रार चक्र पर केंद्रित करने का अभ्यास करें.
----श्वास भरते हुए शरीर को पृथ्वी के समानांतर, सीधा साष्टांग दण्डवत करें और पहले घुटने, छाती और माथा पृथ्वी पर लगा दें. नितम्बों को थोड़ा उपर उठा दें. श्वास छोड़ दें. ध्यानको अनान्हत चक्र पर टिका दें. श्वास की गति सामान्य करें.
----इस स्थिति में धीरें -धीरें श्वास को भरते हुए छाती को आगे की ओर खींचते हुए हाथें को सीधे कर दें गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं । घुटने पृथ्वी का स्पर्श करते हुए तथा पैरों के पंजे खड़े रहें। मूलाधार को खींचकर वहीं ध्यान को टिका दें।
----यह स्थिति - पांचवीं स्थिति के समान
----यह स्थिति - चौथी स्थिति के समान
-----यह स्थिति - तीसरी स्थिति के समान
------यह स्थिति - दूसरी स्थिति के समान
-----यह स्थिति - पहली स्थिति की भांति रहेगीं.

सूर्य नमस्कार की उपरोक्त बारह स्थितियॉ हमारे शरीर को संपूर्ण अंगों की विकृतियों को दूर करके निरोग बना देती हैं. यह पूरी प्रक्रिया अत्यधिक लाभकारी है. इसके अभ्यासी के हाथों-पैरों के दर्द दूर होकर उनमें सबलता आ जाती है. गर्दन, फेफड़े तथा पसलियों की मांसपेशियां सशक्त हो जाती हैं, शरीर की फालतू चर्बी कम होकर शरीर हल्का-फुल्का हो जाता है. सूर्य नमस्कार के द्वारा त्वचा रोग समाप्त हो जाते हैं अथवा इनके होने की संभावना समाप्त हो जाती है. इस अभ्यास से कब्ज आदि उदर रोग समाप्त हो जाते हैं और पाचनतंत्र की क्रियाशीलता में वृद्धि हो जाती है. इस अभ्यास के द्वारा हमारे शरीर की छोटी-बड़ी सभी नस-नाड़ियां क्रियाशील हो जाती हैं, इसलिए आलस्य, अतिनिद्रा आदि विकार दूर हो जाते हैं. सूर्य नमस्कार की तीसरी व पांचवीं स्थितियां सर्वाइकल एवं स्लिप डिस्क वालें रोगियों के लिए वर्जित हैं. (साई फीचर्स)

अभिषेक के शहर में महज दो हजार हैं आईडिया उपभोक्ता


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  19

अभिषेक के शहर में महज दो हजार हैं आईडिया उपभोक्ता

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई) आईडिया के ब्रांड एम्बेसेडर बिग बी यानी सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के पुत्र जूनियर बी यानी अभिषेक बच्चन अपने शहर मुंबई में महज दो हजार लोगों को ही आईडिया की मोबाईल सेवाएं लेने के लिए लुभा पाए। आईडिया के सबसे कम उपभोक्ता मुंबई जैसे महानगर में ही हैं।
आईडिया के सूत्रों का कहना है कि आईडिया के उपभोक्ताओं के बारे में जानकारी जुटाई गई है जिसमें जो आंकड़ा सामने आया है उसके मुताबिक महाराष्ट्र और गोवा में 48 लाख 81 हजार 444, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 32 लाख 26 हजार 230, आंध्र प्रदेश में 32 लाख 52 हजार 35, केरला में 27 लाख चार हजार 888, तो गुजरात में 26 लाख 23हजार 72 उपभोक्ता हैं।
इसी तरह उत्तर प्रदेश (पश्चिम) में 25 लाख 68 हजार 279, उत्तर प्रदेश (पूर्व) में 9 लाख 67 हजार 862, दिल्ली में 18 लाख 97 हजार 693, हरियाणा में 9 लाख 80 हजार 760, राजस्थान में 8 लाख 24 हजार 805, हिमाचल प्रदेश में 74 हजार 505 और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में महज दो हजार उपभोक्ताओं ने ही आईडिया पर भरोसा जताया है।
गौरतलब है कि आईडिया के ब्रांड एम्बेसेडर अभिषेक बच्चन पर आईडिया कंपनी ने करोड़ों रूपयों का दांव लगाया था। अब सवाल यह उठता है कि मुंबई में ही जब मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आईडिया और अभिषेक पर लोगों ने भरोसा ही नहीं जताया तो बाकी देश में क्या हाल हो रहे होंगे इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

(क्रमशः जारी)

अमरबेल: गंजेपन का उपाय


हर्बल खजाना ----------------- 19

अमरबेल: गंजेपन का उपाय

(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। जंगलों, सडक, खेत खलिहानों के किनारे लगे वृक्षों पर परजीवी अमरबेल का जाल अक्सर देखा जा सकता है, वास्तव में जिस पेड पर यह लग जाती है, वह पेड धीरे धीरे सूखने लगता है। खैर, इसकी पत्तियों मे पर्णहरिम का अभाव होता है जिस वजह से यह पीले रंग की दिखाई देती है। इसके अनेक औषधिय गुण भी है।
अमरबेल का वानस्पतिक नाम कस्कूटा रिफ़्लेक्सा है। पूरे पौधे का काढा घाव धोने के लिए बेहतर है और यह टिंक्चर की तरह काम करता है। डाग गुजरात के आदिवासी हर्बल जानकार इसके बीजों और पूरे पौधे को कुचलकर आर्थराईटिस के रोगी को दर्द वाले हिस्सों पर पट्टी लगाकर बाँध दिया जाए तो काफ़ी फ़ायदा होता है।
गंजेपन को दूर करने के लिए पातालकोट के आदिवासी मानते है कि यदि आम के पेड पर लगी अमरबेल को पानी में उबाल लिया जाए और उस पानी से स्नान किया जाए तो बाल पुनःः उगने लगते है हलाँकि डाँग के आदिवासी अमरबेल को कूटकर उसे तिल के तेल में २० मिनट तक उबालते है और इस तेल को कम बाल या गंजे सर पर लगाने की सलाह देते है।
अमरबेल को कुचलकर इसमें शहद और घी मिलाकर पुराने घावों पर लगाया जाए तो घाव जल्दी भरने लगता है। आधुनिक अध्ययनों से पता चलता है कि इस पौधे का अर्क पेट के कैंसर से लड़ने में मदद कर सकता है। कई ग्रामीण अंचलों मे इसका काढा गर्भपात कराने के लिये दाईयों द्वारा दिया जाता है। (साई फीचर्स)

(लेखक हर्बल मामलों के जाने माने विशेषज्ञ हैं)

भ्रष्टमेव जयते !


भ्रष्टमेव जयते !

(असीम त्रिवेदी / विस्फोट डॉट काम)

असीम त्रिवेदी ने यह लेख तब लिखा था जब उनकी कार्टून साइट को मुंबई के एक कांग्रेसी नेता की शिकायत पर बैन कर दिया गया था। असीम त्रिवेदी का यह लेख आशीष वशिष्ठ की कोशिशों का परिणाम था जिसे 8 जनवरी 2012 को जनज्वार पर प्रकाशित किया गया था। इस लेख में असीम ने सिलसिलेवार तरीके से उन घटनाओं का जिक्र किया है कि कैसे कांग्रेस के एक नेता आर पी पाण्डेय के इशारे पर गुनहगार बनाया गया है।
कार्टूनिस्ट के बारे में भारत में बड़ी गलतफहमी फ़ैली हुई है कि कार्टूनिस्ट का काम है लोगों को हँसाना। पर दोस्तों, कार्टूनिस्ट और जोकर में फर्क होता है। कार्टूनिस्ट का काम लोगों को हंसाना नहीं बल्कि बुराइयों पर चोट करना है। कार्टूनिस्ट आज के समय का कबीर है। कबीर कहता था ष्सुखिया सब संसार है, खावे और सोवे।।।दुखिया दास कबीर है, जागे और रोवे।ष् कार्टूनिस्ट जागता है, वो कुछ कर नहीं सकता पर वो सच्ची तस्वीर सामने लाता है, जिससे लोग जागें और बदलाव की कोशिश करें।
बचपन में स्कूल में पढ़ा था, ष्साहित्य समाज का दर्पण है।ष् पढ़ा होगा उन्होंने भी, जिन्होंने साईट बैन की है और मुझ पर देशद्रोह का केस किया है। पर वो भूल गए, उन सारी बातों की तरह जो हमें बचपन में स्कूल में सिखाई गयी थीं, जैसे चोरी न करना, झूठ न बोलना, गालियाँ न बकना। शायद वो बातें हमें इसीलिये पढ़ाई जाती हैं कि बड़े होकर सब भूल जायें। तो साहित्य और दर्पण का मामला ये है कि आईने में आपको अपना चेहरा वैसा ही तो दिखाई देगा जैसा कि वो वाकई में है।
ये तो ऐसा है कि आप शीशे पर ये आरोप लगायें कि भाई तुम बहुत बदसूरत सकल दिखा रहे हो और गुस्से में आकर शीशा तोड़ दें। इससे तो जो शीशा था वो भी गया, जो सुधार की गुन्जाईस थी वो भी गयी। हर आदमी शीशे में देखता है कि कहाँ चेहरा गन्दा है, कहाँ बाल नहीं ठीक हैं। ये वो काम था जो करना चाहिए था और सुधारना चाहिए था देश को, पर ऐसा हुआ नहीं। आईने पर देशद्रोह का मामला लगा दिया गया। आइने को तोड़ने की तैयारी है। इसीलिये हमारी तरफ एक कहावत है, बन्दर को शीशा नहीं दिखाना चाहिए। पर सवाल दूसरे का होता तो छोड़ देते, ये मामला तो हमारे घर का है। शीशा तो दिखाना ही पड़ेगा। और रही बात अंजाम की तो वो भी कबीर बता गया, ष्जो घर फूंके आपना, साथ हमारे आये।ष्
कहा जा रहा है, मैंने राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान किया है। मेरा ज़वाब है कि जब मैंने कहीं वास्तविक प्रतीकों का इस्तेमाल ही नहीं किया तो भला अपमान कैसे हो गया। मैंने तो बस ये बताया कि अगर हम आज के परिवेश में राष्ट्रीय प्रतीकों का पुनर्निर्धारण करें तो हमारे नए प्रतीक कैसे होने चाहिए। प्रतीकों का निर्धारण वास्तविकता के आधार पर होता है। यदि आप से कहा जाये कि शांति का प्रतीक ए के 47 रायफल है तो क्या आप मान लेंगे ? वही स्थिति है हमारे प्रतीकों की, देश में कही भी सत्य नहीं जीत रहा, जीत रहा है भ्रष्ट।
तो क्या हमारे नए प्रतीक में सत्यमेव जयते कि जगह भ्रष्टमेव जयते नहीं हो जाना चाहिए। आरोप है कि मैंने संसद को नेशनल टोइलेट बना दिया है, पर अपने दिल से पूछिए कि संसद को नेशनल टोइलेट किसने बनाया है ? मैंने या फिर लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाने वाले नेताओं ने, रुपये लेकर सवाल पूछने वाले जन प्रतिनिधियों ने, भारी भारी घोटाले करके भी संसद में पहुच जाने वाले लोगों ने और खुद को जनता का सेवक नहीं बल्कि राजा समझने वाले सांसदों ने। आरजेडी सांसद राम कृपाल यादव राज्यसभा में ये कार्टून लहराकर बताते हैं कि लोकतंत्र का अपमान है।
मुझे खबरों के जरिये पता चला कि मेरे कार्टूनों से आहत होकर आरपी पाण्डेय नाम के किसी वकील ने मेरी वेबसाइट को मुंबई अपराध शाखा में शिकायत कर बंद कराया है। लेकिन वकील आरपी पाण्डेय के जो पोस्टर मुंबई में बड़े-बड़े होर्डिंगों के जरिये गवाही दे रहे हैं उससे साफ़ है कि सबसे पहले वे एक कांग्रेसी नेता हैं और उन्होंने अपनी ताकत का इस्तेमाल कर हमारी वेबसाइट को बंद कराया है।
उन्हें लोकतंत्र का अपमान तब नज़र नहीं आता जब उन्ही की पार्टी के राजनीती यादव उसी सदन में लोकपाल बिल की कापी फाड़ते हैं, जब उन्ही की पार्टी के अध्यक्ष लालू प्रसाद खुले आम बयान देते हैं कि भारत में चुनाव मुद्दों से नहीं, धर्म और जाति के समीकरणों से जीते जाते हैं जब पूरी संसद देश के 125 करोड़ लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करके लोकपाल के नाम पर जोकपाल लेकर आती है और उसे भी पास नहीं होने देती। मेरे एक और कार्टून पर लोगों को आपत्ति है जिसमे मैंने भारत माँ का गैंग रेप दिखाया है। दोस्तों कभी आपने सोचा है कि भारत माता कौन है ? भारत माता कोई धार्मिक या पौराणिक देवी नहीं हैं, कि मंदिर बना कर उसमे अगरबत्ती सुलगाएं और प्रसाद चढ़ाएं। डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया में नेहरू जी लिखते है, ष्कोई और नहीं बल्कि हम आप और भारत के सारे नागरिक ही भारत माता हैं।
भारत माता की जय का मतलब है इन्ही देशवासियों कि जय।।!ष् और इसलिए इन देशवाशियों पर अत्याचार का मतलब है भारत माता पर अत्याचार। मैंने वही तो कार्टून में दिखाया है कि किस तरह राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी भारत माँ पर अत्याचार कर रहे हैं। फिर इसमें गलत क्या है। क्या सच दिखाना गलत है। अगर आपको इस तस्वीर से आपत्ति है तो जाइये देश को बदलिए ये तस्वीर आपने आप सुधर जायेगी।
जगजीत सिंह की एक नज़्म बहुत हिट थी।। बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी। भारत सरकार ने इसे बहुत गहरे से ले लिया और तय किया कि वो बात को निकलने ही नहीं देंगे। अब बात निकलेगी नहीं, आपके मुह में ही दब जायेगी। मुझे इस बात का एहसास तब हुआ जब अन्ना जी के अनशन के पहले ही दिन मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच द्वारा मेरी एंटी करप्शन वेब साईट को बैन कर दिया गया और सबसे ख़ास बात ये रही कि ये फैसला लेने के पहले मुझसे एक बार बात करना तक मुनासिब नहीं समझा गया।
एक पुलिस अधिकारी ने स्वयं को संविधान मानते हुए निर्णय लिया कि साईट पर मौजूद कार्टून्स आपत्तिजनक हैं और तुरंत साईट को बैन करा दिया। ये सब इतनी तेज़ी से हुआ कि अन्ना जी के अनशन के पहले दिन दोपहर १२ बजे तक ये साईट बैन हो चुकी थी। बाद में पता लगा कि एक वकील आर आरपी पांडेय की अर्जी पर हुआ जो कि वकील होने के अलावा मुंबई कांग्रेस के उत्तरी जिला महासचिव भी हैं।
अगर इतनी तेज़ी प्रशासन ने भ्रस्टाचार के मामलों में दिखाई होती तो हमें कभी इस तरह करप्शन के खिलाफ सड़क पर न उतरना पड़ता। मुझ पर आरोप है कि मैंने संविधान का अपमान किया है तो जो मुंबई पुलिस ने किया वो क्या है। मेरे डोमेन प्रोवाईडर बिग रॉक का कहना है कि जब तक पुलिस उन्हें आदेश नहीं देगी वो साईट नहीं चालू करेंगे। मै समझ नहीं पा रहा हूँ कि एक आर्टिस्ट का काम क्या एक पुलिस ऑफीसर की सहमति का मोहताज़ है, क्या हमें कोई भी कार्टून बनाकर पहले पुलिस डिपार्टमेंट से पास कराना पडेगा।
पुलिस ने खुद ही आरोप बनाया, खुद ही जांच कर ली और खुद ही सज़ा दे दी, वो भी मुझे एक छोटा सा एसएम्एस तक किये बिना। मेरी सारी मेहनत उस साईट के साथ दफन हो गयी होती अगर मेरे पास उसका बैकअप न होता। ये ऐसा है कि पुलिस को मै बता दूँ कि आपने चोरी कि है और पुलिस बिना मामला दर्ज किये, बिना आपसे बात किये सीधे आपको गोली मार दे। क्या इसे लोकतंत्र कहते हैं, क्या यही है हमारा संविधान ?
लोकतंत्र में ही नहीं राजशाही में भी कलाकारों का महत्व रहा है। चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने भी अपने दरबार में नवरत्न रखे थे। अकबर के समय भी बीरबल बादशाह-सलामत की गलतियों पर अपने व्यंग्य से चोट किया करते थे। और यहाँ तो कोई सम्राट भी नहीं है। आज तो लोकतंत्र है। हम सब राजा हैं, हम सब सम्राट हैं। कबीर कहता था ष्निंदक नियरे राखिये, आगन कुटी छबाय।ष् गनीमत है कि कबीर के टाइम में इंटरनेट नहीं था वरना सबसे पहले कबीर की ही वेबसाईट बैन होती फिर उसके मुह पर भी बैन लग जाता। जैसे-जैसे दूसरे देशों में फ्री स्पीच को समर्थन मिलता गया, हमारे यहाँ उलटा होता गया। और रही बात मेरी इंटेशन की तो ये कार्टून्स देखकर कोई बच्चा भी बता सकता है कि इनका कारण देशद्रोह नहीं देशप्रेम है और इनका मकसद हकीकत सामने लाकर लोगों को भ्रस्टाचार के खिलाफ एकजुट करना है।।! इधर इस मामले से खामखा टीम अन्ना को जोड़ा जा रहा है।
ये जो भी कार्टून्स मैंने बनाये हैं, सिर्फ अपनी सोच से बनाये हैं और इनके परिणाम के लिए भी सिर्फ मै भागी होउंगा। इनमे टीम अन्ना की कोई प्रेरणा या सहमति नहीं है।।।मै अन्ना जी का तहे दिल से सम्मान करता हूँ और उनका समर्थक होने के नाते मै कभी नहीं चाहूँगा कि इन कार्टून्स को उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जाये और आन्दोलन को कमज़ोर करने की साजिश रची जाये।

भ्रष्टमेव जयते !


भ्रष्टमेव जयते !

(असीम त्रिवेदी / विस्फोट डॉट काम)

असीम त्रिवेदी ने यह लेख तब लिखा था जब उनकी कार्टून साइट को मुंबई के एक कांग्रेसी नेता की शिकायत पर बैन कर दिया गया था। असीम त्रिवेदी का यह लेख आशीष वशिष्ठ की कोशिशों का परिणाम था जिसे 8 जनवरी 2012 को जनज्वार पर प्रकाशित किया गया था। इस लेख में असीम ने सिलसिलेवार तरीके से उन घटनाओं का जिक्र किया है कि कैसे कांग्रेस के एक नेता आर पी पाण्डेय के इशारे पर गुनहगार बनाया गया है।
कार्टूनिस्ट के बारे में भारत में बड़ी गलतफहमी फ़ैली हुई है कि कार्टूनिस्ट का काम है लोगों को हँसाना। पर दोस्तों, कार्टूनिस्ट और जोकर में फर्क होता है। कार्टूनिस्ट का काम लोगों को हंसाना नहीं बल्कि बुराइयों पर चोट करना है। कार्टूनिस्ट आज के समय का कबीर है। कबीर कहता था ष्सुखिया सब संसार है, खावे और सोवे।।।दुखिया दास कबीर है, जागे और रोवे।ष् कार्टूनिस्ट जागता है, वो कुछ कर नहीं सकता पर वो सच्ची तस्वीर सामने लाता है, जिससे लोग जागें और बदलाव की कोशिश करें।
बचपन में स्कूल में पढ़ा था, ष्साहित्य समाज का दर्पण है।ष् पढ़ा होगा उन्होंने भी, जिन्होंने साईट बैन की है और मुझ पर देशद्रोह का केस किया है। पर वो भूल गए, उन सारी बातों की तरह जो हमें बचपन में स्कूल में सिखाई गयी थीं, जैसे चोरी न करना, झूठ न बोलना, गालियाँ न बकना। शायद वो बातें हमें इसीलिये पढ़ाई जाती हैं कि बड़े होकर सब भूल जायें। तो साहित्य और दर्पण का मामला ये है कि आईने में आपको अपना चेहरा वैसा ही तो दिखाई देगा जैसा कि वो वाकई में है।
ये तो ऐसा है कि आप शीशे पर ये आरोप लगायें कि भाई तुम बहुत बदसूरत सकल दिखा रहे हो और गुस्से में आकर शीशा तोड़ दें। इससे तो जो शीशा था वो भी गया, जो सुधार की गुन्जाईस थी वो भी गयी। हर आदमी शीशे में देखता है कि कहाँ चेहरा गन्दा है, कहाँ बाल नहीं ठीक हैं। ये वो काम था जो करना चाहिए था और सुधारना चाहिए था देश को, पर ऐसा हुआ नहीं। आईने पर देशद्रोह का मामला लगा दिया गया। आइने को तोड़ने की तैयारी है। इसीलिये हमारी तरफ एक कहावत है, बन्दर को शीशा नहीं दिखाना चाहिए। पर सवाल दूसरे का होता तो छोड़ देते, ये मामला तो हमारे घर का है। शीशा तो दिखाना ही पड़ेगा। और रही बात अंजाम की तो वो भी कबीर बता गया, ष्जो घर फूंके आपना, साथ हमारे आये।ष्
कहा जा रहा है, मैंने राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान किया है। मेरा ज़वाब है कि जब मैंने कहीं वास्तविक प्रतीकों का इस्तेमाल ही नहीं किया तो भला अपमान कैसे हो गया। मैंने तो बस ये बताया कि अगर हम आज के परिवेश में राष्ट्रीय प्रतीकों का पुनर्निर्धारण करें तो हमारे नए प्रतीक कैसे होने चाहिए। प्रतीकों का निर्धारण वास्तविकता के आधार पर होता है। यदि आप से कहा जाये कि शांति का प्रतीक ए के 47 रायफल है तो क्या आप मान लेंगे ? वही स्थिति है हमारे प्रतीकों की, देश में कही भी सत्य नहीं जीत रहा, जीत रहा है भ्रष्ट।
तो क्या हमारे नए प्रतीक में सत्यमेव जयते कि जगह भ्रष्टमेव जयते नहीं हो जाना चाहिए। आरोप है कि मैंने संसद को नेशनल टोइलेट बना दिया है, पर अपने दिल से पूछिए कि संसद को नेशनल टोइलेट किसने बनाया है ? मैंने या फिर लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाने वाले नेताओं ने, रुपये लेकर सवाल पूछने वाले जन प्रतिनिधियों ने, भारी भारी घोटाले करके भी संसद में पहुच जाने वाले लोगों ने और खुद को जनता का सेवक नहीं बल्कि राजा समझने वाले सांसदों ने। आरजेडी सांसद राम कृपाल यादव राज्यसभा में ये कार्टून लहराकर बताते हैं कि लोकतंत्र का अपमान है।
मुझे खबरों के जरिये पता चला कि मेरे कार्टूनों से आहत होकर आरपी पाण्डेय नाम के किसी वकील ने मेरी वेबसाइट को मुंबई अपराध शाखा में शिकायत कर बंद कराया है। लेकिन वकील आरपी पाण्डेय के जो पोस्टर मुंबई में बड़े-बड़े होर्डिंगों के जरिये गवाही दे रहे हैं उससे साफ़ है कि सबसे पहले वे एक कांग्रेसी नेता हैं और उन्होंने अपनी ताकत का इस्तेमाल कर हमारी वेबसाइट को बंद कराया है।
उन्हें लोकतंत्र का अपमान तब नज़र नहीं आता जब उन्ही की पार्टी के राजनीती यादव उसी सदन में लोकपाल बिल की कापी फाड़ते हैं, जब उन्ही की पार्टी के अध्यक्ष लालू प्रसाद खुले आम बयान देते हैं कि भारत में चुनाव मुद्दों से नहीं, धर्म और जाति के समीकरणों से जीते जाते हैं जब पूरी संसद देश के 125 करोड़ लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करके लोकपाल के नाम पर जोकपाल लेकर आती है और उसे भी पास नहीं होने देती। मेरे एक और कार्टून पर लोगों को आपत्ति है जिसमे मैंने भारत माँ का गैंग रेप दिखाया है। दोस्तों कभी आपने सोचा है कि भारत माता कौन है ? भारत माता कोई धार्मिक या पौराणिक देवी नहीं हैं, कि मंदिर बना कर उसमे अगरबत्ती सुलगाएं और प्रसाद चढ़ाएं। डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया में नेहरू जी लिखते है, ष्कोई और नहीं बल्कि हम आप और भारत के सारे नागरिक ही भारत माता हैं।
भारत माता की जय का मतलब है इन्ही देशवासियों कि जय।।!ष् और इसलिए इन देशवाशियों पर अत्याचार का मतलब है भारत माता पर अत्याचार। मैंने वही तो कार्टून में दिखाया है कि किस तरह राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी भारत माँ पर अत्याचार कर रहे हैं। फिर इसमें गलत क्या है। क्या सच दिखाना गलत है। अगर आपको इस तस्वीर से आपत्ति है तो जाइये देश को बदलिए ये तस्वीर आपने आप सुधर जायेगी।
जगजीत सिंह की एक नज़्म बहुत हिट थी।। बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी। भारत सरकार ने इसे बहुत गहरे से ले लिया और तय किया कि वो बात को निकलने ही नहीं देंगे। अब बात निकलेगी नहीं, आपके मुह में ही दब जायेगी। मुझे इस बात का एहसास तब हुआ जब अन्ना जी के अनशन के पहले ही दिन मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच द्वारा मेरी एंटी करप्शन वेब साईट को बैन कर दिया गया और सबसे ख़ास बात ये रही कि ये फैसला लेने के पहले मुझसे एक बार बात करना तक मुनासिब नहीं समझा गया।
एक पुलिस अधिकारी ने स्वयं को संविधान मानते हुए निर्णय लिया कि साईट पर मौजूद कार्टून्स आपत्तिजनक हैं और तुरंत साईट को बैन करा दिया। ये सब इतनी तेज़ी से हुआ कि अन्ना जी के अनशन के पहले दिन दोपहर १२ बजे तक ये साईट बैन हो चुकी थी। बाद में पता लगा कि एक वकील आर आरपी पांडेय की अर्जी पर हुआ जो कि वकील होने के अलावा मुंबई कांग्रेस के उत्तरी जिला महासचिव भी हैं।
अगर इतनी तेज़ी प्रशासन ने भ्रस्टाचार के मामलों में दिखाई होती तो हमें कभी इस तरह करप्शन के खिलाफ सड़क पर न उतरना पड़ता। मुझ पर आरोप है कि मैंने संविधान का अपमान किया है तो जो मुंबई पुलिस ने किया वो क्या है। मेरे डोमेन प्रोवाईडर बिग रॉक का कहना है कि जब तक पुलिस उन्हें आदेश नहीं देगी वो साईट नहीं चालू करेंगे। मै समझ नहीं पा रहा हूँ कि एक आर्टिस्ट का काम क्या एक पुलिस ऑफीसर की सहमति का मोहताज़ है, क्या हमें कोई भी कार्टून बनाकर पहले पुलिस डिपार्टमेंट से पास कराना पडेगा।
पुलिस ने खुद ही आरोप बनाया, खुद ही जांच कर ली और खुद ही सज़ा दे दी, वो भी मुझे एक छोटा सा एसएम्एस तक किये बिना। मेरी सारी मेहनत उस साईट के साथ दफन हो गयी होती अगर मेरे पास उसका बैकअप न होता। ये ऐसा है कि पुलिस को मै बता दूँ कि आपने चोरी कि है और पुलिस बिना मामला दर्ज किये, बिना आपसे बात किये सीधे आपको गोली मार दे। क्या इसे लोकतंत्र कहते हैं, क्या यही है हमारा संविधान ?
लोकतंत्र में ही नहीं राजशाही में भी कलाकारों का महत्व रहा है। चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने भी अपने दरबार में नवरत्न रखे थे। अकबर के समय भी बीरबल बादशाह-सलामत की गलतियों पर अपने व्यंग्य से चोट किया करते थे। और यहाँ तो कोई सम्राट भी नहीं है। आज तो लोकतंत्र है। हम सब राजा हैं, हम सब सम्राट हैं। कबीर कहता था ष्निंदक नियरे राखिये, आगन कुटी छबाय।ष् गनीमत है कि कबीर के टाइम में इंटरनेट नहीं था वरना सबसे पहले कबीर की ही वेबसाईट बैन होती फिर उसके मुह पर भी बैन लग जाता। जैसे-जैसे दूसरे देशों में फ्री स्पीच को समर्थन मिलता गया, हमारे यहाँ उलटा होता गया। और रही बात मेरी इंटेशन की तो ये कार्टून्स देखकर कोई बच्चा भी बता सकता है कि इनका कारण देशद्रोह नहीं देशप्रेम है और इनका मकसद हकीकत सामने लाकर लोगों को भ्रस्टाचार के खिलाफ एकजुट करना है।।! इधर इस मामले से खामखा टीम अन्ना को जोड़ा जा रहा है।
ये जो भी कार्टून्स मैंने बनाये हैं, सिर्फ अपनी सोच से बनाये हैं और इनके परिणाम के लिए भी सिर्फ मै भागी होउंगा। इनमे टीम अन्ना की कोई प्रेरणा या सहमति नहीं है।।।मै अन्ना जी का तहे दिल से सम्मान करता हूँ और उनका समर्थक होने के नाते मै कभी नहीं चाहूँगा कि इन कार्टून्स को उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जाये और आन्दोलन को कमज़ोर करने की साजिश रची जाये।

भ्रष्टमेव जयते !


भ्रष्टमेव जयते !

(असीम त्रिवेदी / विस्फोट डॉट काम)

असीम त्रिवेदी ने यह लेख तब लिखा था जब उनकी कार्टून साइट को मुंबई के एक कांग्रेसी नेता की शिकायत पर बैन कर दिया गया था। असीम त्रिवेदी का यह लेख आशीष वशिष्ठ की कोशिशों का परिणाम था जिसे 8 जनवरी 2012 को जनज्वार पर प्रकाशित किया गया था। इस लेख में असीम ने सिलसिलेवार तरीके से उन घटनाओं का जिक्र किया है कि कैसे कांग्रेस के एक नेता आर पी पाण्डेय के इशारे पर गुनहगार बनाया गया है।
कार्टूनिस्ट के बारे में भारत में बड़ी गलतफहमी फ़ैली हुई है कि कार्टूनिस्ट का काम है लोगों को हँसाना। पर दोस्तों, कार्टूनिस्ट और जोकर में फर्क होता है। कार्टूनिस्ट का काम लोगों को हंसाना नहीं बल्कि बुराइयों पर चोट करना है। कार्टूनिस्ट आज के समय का कबीर है। कबीर कहता था ष्सुखिया सब संसार है, खावे और सोवे।।।दुखिया दास कबीर है, जागे और रोवे।ष् कार्टूनिस्ट जागता है, वो कुछ कर नहीं सकता पर वो सच्ची तस्वीर सामने लाता है, जिससे लोग जागें और बदलाव की कोशिश करें।
बचपन में स्कूल में पढ़ा था, ष्साहित्य समाज का दर्पण है।ष् पढ़ा होगा उन्होंने भी, जिन्होंने साईट बैन की है और मुझ पर देशद्रोह का केस किया है। पर वो भूल गए, उन सारी बातों की तरह जो हमें बचपन में स्कूल में सिखाई गयी थीं, जैसे चोरी न करना, झूठ न बोलना, गालियाँ न बकना। शायद वो बातें हमें इसीलिये पढ़ाई जाती हैं कि बड़े होकर सब भूल जायें। तो साहित्य और दर्पण का मामला ये है कि आईने में आपको अपना चेहरा वैसा ही तो दिखाई देगा जैसा कि वो वाकई में है।
ये तो ऐसा है कि आप शीशे पर ये आरोप लगायें कि भाई तुम बहुत बदसूरत सकल दिखा रहे हो और गुस्से में आकर शीशा तोड़ दें। इससे तो जो शीशा था वो भी गया, जो सुधार की गुन्जाईस थी वो भी गयी। हर आदमी शीशे में देखता है कि कहाँ चेहरा गन्दा है, कहाँ बाल नहीं ठीक हैं। ये वो काम था जो करना चाहिए था और सुधारना चाहिए था देश को, पर ऐसा हुआ नहीं। आईने पर देशद्रोह का मामला लगा दिया गया। आइने को तोड़ने की तैयारी है। इसीलिये हमारी तरफ एक कहावत है, बन्दर को शीशा नहीं दिखाना चाहिए। पर सवाल दूसरे का होता तो छोड़ देते, ये मामला तो हमारे घर का है। शीशा तो दिखाना ही पड़ेगा। और रही बात अंजाम की तो वो भी कबीर बता गया, ष्जो घर फूंके आपना, साथ हमारे आये।ष्
कहा जा रहा है, मैंने राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान किया है। मेरा ज़वाब है कि जब मैंने कहीं वास्तविक प्रतीकों का इस्तेमाल ही नहीं किया तो भला अपमान कैसे हो गया। मैंने तो बस ये बताया कि अगर हम आज के परिवेश में राष्ट्रीय प्रतीकों का पुनर्निर्धारण करें तो हमारे नए प्रतीक कैसे होने चाहिए। प्रतीकों का निर्धारण वास्तविकता के आधार पर होता है। यदि आप से कहा जाये कि शांति का प्रतीक ए के 47 रायफल है तो क्या आप मान लेंगे ? वही स्थिति है हमारे प्रतीकों की, देश में कही भी सत्य नहीं जीत रहा, जीत रहा है भ्रष्ट।
तो क्या हमारे नए प्रतीक में सत्यमेव जयते कि जगह भ्रष्टमेव जयते नहीं हो जाना चाहिए। आरोप है कि मैंने संसद को नेशनल टोइलेट बना दिया है, पर अपने दिल से पूछिए कि संसद को नेशनल टोइलेट किसने बनाया है ? मैंने या फिर लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाने वाले नेताओं ने, रुपये लेकर सवाल पूछने वाले जन प्रतिनिधियों ने, भारी भारी घोटाले करके भी संसद में पहुच जाने वाले लोगों ने और खुद को जनता का सेवक नहीं बल्कि राजा समझने वाले सांसदों ने। आरजेडी सांसद राम कृपाल यादव राज्यसभा में ये कार्टून लहराकर बताते हैं कि लोकतंत्र का अपमान है।
मुझे खबरों के जरिये पता चला कि मेरे कार्टूनों से आहत होकर आरपी पाण्डेय नाम के किसी वकील ने मेरी वेबसाइट को मुंबई अपराध शाखा में शिकायत कर बंद कराया है। लेकिन वकील आरपी पाण्डेय के जो पोस्टर मुंबई में बड़े-बड़े होर्डिंगों के जरिये गवाही दे रहे हैं उससे साफ़ है कि सबसे पहले वे एक कांग्रेसी नेता हैं और उन्होंने अपनी ताकत का इस्तेमाल कर हमारी वेबसाइट को बंद कराया है।
उन्हें लोकतंत्र का अपमान तब नज़र नहीं आता जब उन्ही की पार्टी के राजनीती यादव उसी सदन में लोकपाल बिल की कापी फाड़ते हैं, जब उन्ही की पार्टी के अध्यक्ष लालू प्रसाद खुले आम बयान देते हैं कि भारत में चुनाव मुद्दों से नहीं, धर्म और जाति के समीकरणों से जीते जाते हैं जब पूरी संसद देश के 125 करोड़ लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करके लोकपाल के नाम पर जोकपाल लेकर आती है और उसे भी पास नहीं होने देती। मेरे एक और कार्टून पर लोगों को आपत्ति है जिसमे मैंने भारत माँ का गैंग रेप दिखाया है। दोस्तों कभी आपने सोचा है कि भारत माता कौन है ? भारत माता कोई धार्मिक या पौराणिक देवी नहीं हैं, कि मंदिर बना कर उसमे अगरबत्ती सुलगाएं और प्रसाद चढ़ाएं। डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया में नेहरू जी लिखते है, ष्कोई और नहीं बल्कि हम आप और भारत के सारे नागरिक ही भारत माता हैं।
भारत माता की जय का मतलब है इन्ही देशवासियों कि जय।।!ष् और इसलिए इन देशवाशियों पर अत्याचार का मतलब है भारत माता पर अत्याचार। मैंने वही तो कार्टून में दिखाया है कि किस तरह राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी भारत माँ पर अत्याचार कर रहे हैं। फिर इसमें गलत क्या है। क्या सच दिखाना गलत है। अगर आपको इस तस्वीर से आपत्ति है तो जाइये देश को बदलिए ये तस्वीर आपने आप सुधर जायेगी।
जगजीत सिंह की एक नज़्म बहुत हिट थी।। बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी। भारत सरकार ने इसे बहुत गहरे से ले लिया और तय किया कि वो बात को निकलने ही नहीं देंगे। अब बात निकलेगी नहीं, आपके मुह में ही दब जायेगी। मुझे इस बात का एहसास तब हुआ जब अन्ना जी के अनशन के पहले ही दिन मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच द्वारा मेरी एंटी करप्शन वेब साईट को बैन कर दिया गया और सबसे ख़ास बात ये रही कि ये फैसला लेने के पहले मुझसे एक बार बात करना तक मुनासिब नहीं समझा गया।
एक पुलिस अधिकारी ने स्वयं को संविधान मानते हुए निर्णय लिया कि साईट पर मौजूद कार्टून्स आपत्तिजनक हैं और तुरंत साईट को बैन करा दिया। ये सब इतनी तेज़ी से हुआ कि अन्ना जी के अनशन के पहले दिन दोपहर १२ बजे तक ये साईट बैन हो चुकी थी। बाद में पता लगा कि एक वकील आर आरपी पांडेय की अर्जी पर हुआ जो कि वकील होने के अलावा मुंबई कांग्रेस के उत्तरी जिला महासचिव भी हैं।
अगर इतनी तेज़ी प्रशासन ने भ्रस्टाचार के मामलों में दिखाई होती तो हमें कभी इस तरह करप्शन के खिलाफ सड़क पर न उतरना पड़ता। मुझ पर आरोप है कि मैंने संविधान का अपमान किया है तो जो मुंबई पुलिस ने किया वो क्या है। मेरे डोमेन प्रोवाईडर बिग रॉक का कहना है कि जब तक पुलिस उन्हें आदेश नहीं देगी वो साईट नहीं चालू करेंगे। मै समझ नहीं पा रहा हूँ कि एक आर्टिस्ट का काम क्या एक पुलिस ऑफीसर की सहमति का मोहताज़ है, क्या हमें कोई भी कार्टून बनाकर पहले पुलिस डिपार्टमेंट से पास कराना पडेगा।
पुलिस ने खुद ही आरोप बनाया, खुद ही जांच कर ली और खुद ही सज़ा दे दी, वो भी मुझे एक छोटा सा एसएम्एस तक किये बिना। मेरी सारी मेहनत उस साईट के साथ दफन हो गयी होती अगर मेरे पास उसका बैकअप न होता। ये ऐसा है कि पुलिस को मै बता दूँ कि आपने चोरी कि है और पुलिस बिना मामला दर्ज किये, बिना आपसे बात किये सीधे आपको गोली मार दे। क्या इसे लोकतंत्र कहते हैं, क्या यही है हमारा संविधान ?
लोकतंत्र में ही नहीं राजशाही में भी कलाकारों का महत्व रहा है। चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने भी अपने दरबार में नवरत्न रखे थे। अकबर के समय भी बीरबल बादशाह-सलामत की गलतियों पर अपने व्यंग्य से चोट किया करते थे। और यहाँ तो कोई सम्राट भी नहीं है। आज तो लोकतंत्र है। हम सब राजा हैं, हम सब सम्राट हैं। कबीर कहता था ष्निंदक नियरे राखिये, आगन कुटी छबाय।ष् गनीमत है कि कबीर के टाइम में इंटरनेट नहीं था वरना सबसे पहले कबीर की ही वेबसाईट बैन होती फिर उसके मुह पर भी बैन लग जाता। जैसे-जैसे दूसरे देशों में फ्री स्पीच को समर्थन मिलता गया, हमारे यहाँ उलटा होता गया। और रही बात मेरी इंटेशन की तो ये कार्टून्स देखकर कोई बच्चा भी बता सकता है कि इनका कारण देशद्रोह नहीं देशप्रेम है और इनका मकसद हकीकत सामने लाकर लोगों को भ्रस्टाचार के खिलाफ एकजुट करना है।।! इधर इस मामले से खामखा टीम अन्ना को जोड़ा जा रहा है।
ये जो भी कार्टून्स मैंने बनाये हैं, सिर्फ अपनी सोच से बनाये हैं और इनके परिणाम के लिए भी सिर्फ मै भागी होउंगा। इनमे टीम अन्ना की कोई प्रेरणा या सहमति नहीं है।।।मै अन्ना जी का तहे दिल से सम्मान करता हूँ और उनका समर्थक होने के नाते मै कभी नहीं चाहूँगा कि इन कार्टून्स को उनके खिलाफ इस्तेमाल किया जाये और आन्दोलन को कमज़ोर करने की साजिश रची जाये।