शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

एमपी महाराष्ट्र बार्डर खवासा पर लगता जाम!


एमपी महाराष्ट्र बार्डर खवासा पर लगता जाम!

 (लिमटी खरे)

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है खवासा ग्राम, जहां मध्य प्रदेश सरकार के राजस्व और अफसरों के निजी खाते में जाने वाले राजस्व की प्राप्ति करोड़ों अरबों खरबों रूपयों में होती है। खवासा बार्डर सदा से ही चर्चा का केंद्र रही है। खवासा के इस बार्डर का सबसे दुखदाई पहलू यहां लगने वाला यातायात का जाम है। ट्रकों की लंबी कतारों को देखकर निजी वाहन वालों के पसीने आ जाते हैं। इस जाम के लगने के पीछे के कारणों पर अब तक ना तो किसी जिलाधिकारी ने ध्यान ही दिया है और ना ही ध्यान देने की जरूरत ही समझी है। वर्तमान जिला कलेक्टर भरत यादव ने एक साक्षात्कार में खवासा की सीमा चौकी पर छापे मारने की बात कही है जो प्रशंसनीय है।
देखा जाए तो खवासा में मुख्यतः परिवहन विभाग की जांच चौकी है जहां करोड़ों रूपयों के वारे न्यारे होते हैं। इस जांच चौकी के बारे में कहा जाता है कि यहां दक्षिण भारत सहित मध्य प्रदेश सहित देश के अनेक हिस्सों की कई ट्रांसपोर्ट कंपनियों द्वारा बाकायदा अपने माल वाहक वाहनों की सूची दी हुई है जिनसे निर्धारित से कम मात्रा में चौथ वसूली की जाती है। बाकी माल और यात्री वाहक वाहनों से हर माह चौथ वसूली के साथ ही साथ शासन द्वारा दिए गए लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उनका चालान भी काटा जाता है।
इस जांच चौकी के बारे में बताया जाता है कि यह जांच चौकी रिमोट कंट्रोल से संचालित होती है। अर्थात यहां तैनात परिवहन विभाग और पुलिस विभाग के प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारियों के अलावा निजी गुंडा नुमा लोगों के द्वारा यहां सरकारी काम को अंजाम दिया जाता है। वैसे तो निजी गुर्गे जिला कलेक्टर की नाक के नीचे पंजीयक लेण्ड रिकार्ड अर्थात जहां जमीनों की खरीदी बिक्री होती है वहां भी काम करते दिख जाते हैं।
सूत्रों की बातों पर गर यकीन किया जाए तो इन निजी कर्मचारियों के हाथों में एक रिमोट घंटी का बटन होता है। सड़क पर लाल या पीली बत्ती देखते ही ये बटन दबा देते हैं और चौकी के अंदर सभी काम नियमानुसार संचालित होना आरंभ हो जाता है। बताते हैं यहां समिष और निरामिष भोजन बहत ही लजीज बनता है। यहां एक कैंटीन का संचालन भी होता है जहां शाकाहारी और मांसाहारी भोजन की माकूल व्यवस्था है। यहां यह सब कुछ निशुल्क ही है। कहा जाता है कि हर माह की चढ़ोत्री के हिसाब में इसे भी जोड़ दिया जाता है।
अगर, जिला कलेटर भरत यादव बिना सूचना के अचानक ही इस जांच चौकी में पहुंच जांए तो उन्हें सबसे पहले पिछले दरवाजे पर एक रजिस्टर रखा मिलेगा जिसमें नेताओं, पत्रकारों और प्रभावशाली लोगों के नाम और उन्हें दी जाने वाली मासिक चौथ की सूची मिल जाएगी। मेले ठेले, धरना प्रदर्शन आदि के लिए दी जाने वाली राशि का ब्योरा भी इसी पंजी में दर्ज होता है। निश्चित तौर पर यह राशि परिवहन विभाग या यहां पुलिस से प्रतिनियुक्ति पर आए कर्मचारी अपनी जेब से तो देते नहीं होंगे। जो भी दिया जाता होगा वह वाहनों के स्वामी से ही वसूला जाता होगा।
इस तरह के भ्रष्टाचार के सागर में आकण्ठ डूबी है खवासा की जांच चौकी। खवासा में इसके अलावा मंडी, विक्रय कर आदि की जांच चौकियां भी हैं। यहां जाम क्यों लगता है इस बारे में कोई भी कुछ बताने को तैयार नहीं होता है। ज्यादा पूछताछ करने पर निजी गुण्डानुमा गुर्गों द्वारा हमला तक बोल दिया जाता है। मजे की बात तो यह है कि यहां पुलिस का एक सहायता केंद्र भी स्थापित है, पर सब कुछ हो रहा है ढके मुंदे नहीं उजागर तौर पर। यहां कभी भी पूरी तैनाती नहीं मिल पाती है। इस तरह की चौकियों में ईमानदारी पूरी पूरी बरती जाती है। एक एक सिपाही या हवलदार पखवाड़े तक घर पर आराम फरमाते हैं पर उनके हिस्से में कोई समझौता नहीं होता है। कहते हैं कि यहां से गुजरने वाले वाहनों से चौथ वसूली के उपरांत उन्हें गेट पास दिया जाता है, गेट पास के पहले उनकी डायरी में चिड़िया कौआ जैसी आकृति बना दी जाती है जो हर माह अलग शक्ल की होती है जिससे यह पता चल जाता है कि उस वाहन की एंट्री उस माह के लिए हो चुकी है।
असली मरण तो आम आदमी की होती है। सिवनी जिले के विधायक और सांसदों की कर्तव्यों के प्रति अनदेखी के चलते सिवनी की स्वास्थ्य सुविधाएं जो एक समय में महाकौशल संभाग में आर्युविज्ञान कालेज जबलपुर के बाद नंबर दो पर आती थी आज खुद आईसीसीयू में पड़ी कराह रही है, नतीजतन मरीजों को छोटी मोटी बीमारी होने पर भी सिवनी के प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय से नागपुर रिफर कर दिया जाता है। इसके पीछे चिकित्सकों को नागपुर के मंहगे अस्पतालों से मिलने वाला कमीशन ही बताया जा रहा है। जब मरीज नागपुर जाते हैं तो वे इस जाम में फंसकर नारकीय पीड़ा को भोगते हैं। स़क्षम लोग तो बरास्ता छिंदवाड़ा सौंसर होकर नागपुर पहुंच जाते हैं पर गरीब तो इसी रास्ते से जाने पर निर्भर हैं।
यहां यक्ष प्रश्न यह खड़ा हुआ है कि आखिर खवासा में एक साथ पचास से लेकर दो सौ ट्रकों की लाईन कैसे लग जाती है। अगर खवासा से महज दस किलोमीटर दूर महाराष्ट्र बार्डर की मानेगांव टेक चौकी से आप गुजरें तो वहां महज एकाध ट्रक ही खड़ा मिलता है। आखिर क्या वजह है कि महाराष्ट्र की जांच चौकी मिस्टर कलीन है और एमपी की जांच चौकी दागदार! मतलब साफ है कि दाल में कुछ काला है।

4 मई तक ज्यूडिशियल रिमांड पर सर्किल जेल का मेहमान बना फिरोज


4 मई तक ज्यूडिशियल रिमांड पर सर्किल जेल का मेहमान बना फिरोज

(संजीव प्रताप सिंह / नीलेश स्थापक)

लखनादौन / सिवनी (साई)। झाबुआ पावर लिमिटेड के कथित कर्मचारी फिरोज को चार मई तक के लिए ज्यूडिशियल रिमांड पर सर्किल जेल सिवनी भेजा गया है। पुलिस ने आरोपी की पुलिस रिमांड चाही थी किन्तु आरोपी को ज्यूडिशियल रिमांड दी गई है। आरोपी फिरोज आज शाम सात बजे लखनादौन के कोर्ट में पेश किया गया।
मौके पर मौजूद समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ब्यूरो से नीलेश स्थापक और सीएनबीसी संवाददाता काबिज खान ने दूरभाष पर बताया कि आरोपी को भारी पुलिस बल के बीच लखनादौन के न्यायालय में ले जाया गया। लखन कुंवर की नगरी लखनादौन के कोर्ट के बाहर लगी भीड़ को देखकर लोगों के आक्रोश का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता था।
जैसे ही आरोपी को लेकर पुलिस कोर्ट के पास पहुंची आक्रोशित भीड़ बेकाबू हो गई और उसने जूतों चप्पल से फिरोज की पिटाई करने का प्रयास किया। महिलाएं बच्चे, नौजवान इस कदर आक्रोश मे ंथे कि पुलिस को स्थिति काबू करने में पसीना आ गया। पुलिस ने हल्के बल प्रयोग से भीड़ को दूर भगाया।
लखनादौन में कोर्ट के आसपास लगी भीड़ को देखकर इस बात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि क्षेत्र के लोगों में इस दुधमुंही के साथ हुए दुष्कर्म से कितना आक्रोश है? वहीं जिले भर में सिवनी की गुडिया के साथ हुए दुष्कर्म की निंदा और भर्तस्ना का दौर जारी है।
ज्ञातव्य है कि देश के मशहूर उद्वद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड में एक पावर प्लांट की आधार शिला रखी जा रही है। इस पावर प्लांट के निर्माण के पूर्व हुई जनसुनवाई के दौरान संयंत्र प्रबंधन ने स्थानीय कुशल और अकुशल मजदूरों को रोजगार देने का वायदा प्रदेश सरकार से किया था।
इस पावर प्लांट में स्थानीय और महाकौशल के कांग्रेस और भाजपा के नेता नुमा ठेकेदारों ने संयंत्र प्रबंधन को बरगलाकर निर्माण कार्यों की धुरी अपने इर्द गिर्द समेट रखी है। पावर प्लांट के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस पावर प्लांट में मजदूरों की भर्ती एक स्थानीय नेतानुमा ठेकेदार की इजाजत के बिना नहीं होती है।
पुलिस सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी की गुडिया के दुष्कर्म का आरोपी फिरोज इसी पावर प्लांट का कर्मचारी है जबकि पावर प्लांट के रवींद्र सिंह ने गत दिवस चर्चा के दौरान फिरोज का पावर प्लांट का कर्मचारी होने से इंकार किया था। सवाल यह उठता है कि अगर वह पावर प्लांट का कर्मचारी नहीं था तो बिहार का निवासी फिरोज आखिर घंसौर में इतने दिनों तक कर क्या रहा था?
0 स्थति में नहीं हुआ कोई सुधार सिवनी की गुड़िया की
गत 17 अप्रैल को दरिदंगी का शिकार हुई घंसौर की मासूम गुडिय़ा नागपुर के केयर अस्पताल में अब भी बेहोशी की हालत में है। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के नागपुर ब्यूरो से आशीष कौशल ने खबर दी है कि मेडिकल बुलेटिन में चिकित्सकों ने बताया कि बच्ची की हालत में किसी प्रकार का सुधार नहीं है और न ही उसे चेकअप के लिए किसी अन्य अस्पताल में ले जाया जा सकता है। लगभग 08 दिनों से बेहोशी की हालत में पड़ी मासूम गुडिय़ा का ब्रेन और हार्ट ने भी काम करना बंद कर दिया है।

कमल नाथ पर बरसीं सुषमा


कमल नाथ पर बरसीं सुषमा

(रश्मि सिन्हा)

नई दिल्ली (साई)। कल तक कमल नाथ की कार्यप्रणाली पर खुशी का इजहार करने वाली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के तेवर अब कमल नाथ के प्रति तल्ख होते दिख रहे हैं। चाको के इस्तीफे को लेकर शुरू हुई जंग में सुषमा सवराज ने कमल नाथ के उस बयान जिसमें कमल नाथ ने कहा कि चाको इस्तीफा नहीं देंगे पर सुषमा ने तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा कि कमल नाथ को कोई अधिकार नहीं है कि इस तरह के बयान देने का कि जेपीसी के अध्यक्ष पी सी चाको इस्तिफा नहीं देंगें।
सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर दिए अपने संदेश में उन्होंने कहा कि पी सी चाको कांग्रेस के इशारे पर काम कर रहे है और कांग्रेस उन्हें बचा रही है मगर विपक्ष चाको का इस्तीफा लिए बगैर चुप नहीं बैठेगा। गौरतलब है कि जेपीसी के अध्यक्ष पीसी चाको का विपक्ष ने इस्तीफा मांगा है। जिसके बाद सुषमा का ये बयान सामने आया है।
वहीं, समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के दिल्ली ब्यूरो से राहुल अग्रवाल ने बताया कि  2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही जॉइंट पार्लियामेंटरी कमिटी (जेपीसी) के चेयरमैन पीसी चाको को पद से हटाने का दबाव बढ़ गया है। जेपीसी में शामिल विपक्षी पार्टी के सदस्यों ने लोकसभा स्पीकर मीरा सिंह को ज्ञापन सौंपकर उन्हें पद से हटाने की मांग की। विपक्षी सदस्यों का आरोप है कि चाको निष्पक्ष नहीं हैं।
जेपीसी में चाको समेत 30 सदस्य हैं। कांग्रेस से चेयरमैन चाको को मिलाकर 11, बीजेपी के छह, बीएसपी, जेडीयू और डीएमके के दो व एसपी, एआईडीएमके, एनसीपी, टीएमसी, बीजेडी, सीपीआई व सीआईएम के एक-एक सदस्य हैं। बताया जा रहा है कि चाको को छोड़ने के बाद बचे 29 में से 15 सदस्य उनके विरोध में हैं। विपक्षी सदस्य रिपोर्ट लीक होने और इसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री चिदंबरम को क्लीन चिट देने से नाराज हैं।
वहीं भाजपा के सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि बीजेपी की रणनीति है कि कमिटी में विपक्षी दलों के अन्य सदस्यों से तालमेल बिठाकर ऐसी स्थिति बनाई जाए कि जेपीसी पर बनी ड्राफ्ट रिपोर्ट को कमिटी ही खारिज कर दे। इस मामले में बीजेपी को विपक्ष के ज्यादातर विपक्षी सदस्यों का साथ मिलने की संभावना है, लेकिन समाजवादी पार्टी के रुख को लेकर वह आश्वस्त नहीं है।
भाजपा के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को आगे बताया कि बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने संकेत दिए हैं कि इस बार बीजेपी किसी भी हालत में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। नकवी ने प्रधानमंत्री को लुटेरों का लाट साहब बताते हुए कहा है कि बीजेपी उनके इस्तीफे से कम पर कुछ भी मानने के लिए तैयार नहीं है।
चुनाव मैनेजमेंट कमिटी की बैठक में उन्होंने कहा कि बजट सत्र, इस सरकार का विदाई सत्र साबित होने जा रहा है। भले ही कांग्रेस घोटालों के घंटाघर पर खड़े होकर दोबारा जनादेश मांग रही हो लेकिन देश की जनता अब इस राष्ट्रीय बोझ को सहने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने कुशासन और लूट के लाट साहबान को बचाने में जुटी है, लेकिन वह कामयाब नहीं होगी।

पांचाली बन गए कांग्रेस के कार्यकर्ता


पांचाली बन गए कांग्रेस के कार्यकर्ता

(सुजीत श्रीवास्तव)

मोहनखेड़ा (साई)। मध्य प्रदेश के कांग्रेस के कार्यकर्ता महाभारत काल की पांचाली बनकर रह गए हैं। जी हां, यह बात आज कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के द्वारा कार्यकर्ताओं से पूछने पर सामने आई। दरअसल, राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं से पूछा कि कांग्रेस में कितने गुट हैं, कार्यकर्ता कुछ देर तो खामोश रहे फिर बोले पांच हैं महाराज। इसके बाद उनके बीच कानाफूसी होने लगी कि पांच नेताओं के बीच कार्यकर्ता पांचाली की तरह ही बंट रहे हैं।
आज संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के निर्वाचित प्रतिनिधियों और पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने उनसे पार्टी के मामलों में बड़ी भूमिका निभाने को कहा। मध्य प्रदेश में कांग्रेस गुटबाजी से जूझ रही है और यही हाल रहा तो अगले विधानसभा चुनाव के बाद भी कांग्रेस को सत्ता नहीं मिल पाएगी। इस सच्चाई से पार्टी के प्रतिनिधियों ने कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अवगत करा दिया है। विभिन्न प्रतिनिधियों ने गांधी को बताया है कि राज्य में कांग्रेस पांच गुटों में बंटी हुई है।
राहुल गांधी बुधवार को मध्य प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर धार जिले के मोहनखेड़ा पहुंचे। गांधी ने इस दौरान युवक कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में हिस्सा लिया और पार्टी प्रतिनिधियों, सांसद, विधायक, चुनाव में हारे उम्मीदवारों और पंचायत व नगरीय निकाय के प्रतिनिधियों से चर्चा की। प्रतिनिधियों से चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने साफ तौर पर कहा कि वे केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का काम करें। पार्टी में किसी तरह की गुटबाजी नहीं होनी चाहिए।
राहुल ने प्रतिनिधियों से पूछा कि राज्य में कांग्रेस का क्या हाल है। इस पर कार्यकर्ता कुछ देर तो खामोश रहे, फिर कहा कि राज्य में गुटबाजी है। नेताओं का नाम लेने से प्रतिनिधि सकुचाए। प्रतिनिधियों को लगा कि नेताओं का नाम लेना ठीक नहीं होगा। इतने में राहुल ने कहा कि खुलकर बताएं कि राज्य में किस तरह की गुटबाजी है। फिर क्या था मौजूद प्रतिनिधियों ने खुलकर कहा कि राज्य में पांच गुट हैं। यहां कांग्रेस दिग्विजय, सिंधिया, कमलनाथ, भूरिया व पचौरी गुटों में बंटी है। राहुल ने प्रतिनिधियों से ही पूछ डाला कि इसे कैसे खत्म किया जा सकता है, तो प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि संभागीय स्तर पर पार्टी के कार्यक्रम हों और उन कार्यक्रमों में सभी नेताओं को एक मंच पर लाया जाए।
राहुल गांधी ने विभिन्न चरणों में पार्टी के तमाम जिम्मेदार लोगों से अलग-अलग चर्चा की और सभी से कहा कि वे गुटबाजी से अपने को दूर रखें। राहुल को कई प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि वे संगठन से जुड़े लोगों को निर्देशित करें कि वे पार्टी की मजबूती के लिए काम करें।
राहुल गांधी के दो दिवसीय दौरे के पहले दिन पार्टी के कई प्रमुख नेता भी मौजूद थे। इनमें प्रदेश प्रभारी बी. के. हरिप्रसाद, राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह, प्रदेशाध्यक्ष कांतिलाल भूरिया, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी, सज्जन सिंह वर्मा, मीनाक्षी नटराजन शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी ने कई नेताओं से अलग-अलग व बंद कमरे में भी चर्चा की। साथ ही उन्हें अपनी मंशा से भी अवगत करा दिया है।

सर्कस के बाजीगर ही निकल सकते हैं नेहरू रोड़ से


सर्कस के बाजीगर ही निकल सकते हैं नेहरू रोड़ से

(शिवेश नामदेव)

सिवनी (साई)। एक समय में शहर को दो हिस्सों में बांटने वाली नेहरू रोड़ आज बदहाली के कगार पर पहुंच चुकी है। इस सड़क से चौपहिया क्या दो पहिया वाहनों का गुजरना भी अब दुष्कर हो गया है। पैदल चलते राहगीरों को भी स्थान तलाशते हुए ही यहां से गुजरने पर मजबूर होना पड़ता है।
नगर के अति व्यस्ततम क्षेत्र नेहरू रोड में यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन सक्रिय नहीं है, जिसके चलते नेहरू रोड में स्थित दुकानों के सामने वाहनों की लंबी- लंबी लाईन लगे रहती है, जिसके चलते वहां से गुजरने वाले लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन दिनों सोने की कीमत में आई कमी को देखते हुए ज्वेलरी की दुकानो में अच्छी- खासी भीड़ इकत्र हो रही है। ज्वेलरी खरीदने जाने के लिए जाने वाले ग्राहक अपने वाहनों को सड़क के किनारे अव्यवस्थित खड़े कर देते हैं, जिसके चलते नेहरू रोड से गुजरने वाले अन्य लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
अस्सी के दशक में जिला कोतवाली का पिकप वाहन जब इस सड़क पर निकलता था तब दुकानदार भय के चलते सायकलों को हटवा देते थे, जो नहीं हटवा पाते थे उनकी साईकल जप्त कर थाने ले जाई जाती थीं, जो बाद में चालान के उपरांत ही छोड़ी जाती थीं। अस्सी के दशक के उपरांत पुलिस ने भी इस ओर दिलचस्पी लेना बंद ही कर दिया।
अमूमन देखा गया है कि दुकानदार अपनी दुकान का सामान नेहरू रोड़ के एक डेढ़ फिट के फुटपाथ पर सजा देते हैं, इसके बाद बची जगहों पर उनकी दुकानों में खरीददारी के लिए आए ग्राहकों के वाहन खड़े हो जाते हैं। कई बार तो यहां सड़क पर खड़े चौपाया वाहन आवागमन को अवरूद्ध कर देते हैं।
प्रोढ़ हो चुकी पीढ़ी को याद होगा कि वर्तमान में जहां आनंद होटल संचालित हो रहा है वहां पर नेशनल बस सर्विस का गैराज हुआ करता था, इस गैराज में इस बस कंपनी की यात्री बसों की आवाजाही हुआ करती थी। महावीर व्यायामशाला वाली गली में ये यात्री बस कुछ मुश्किल के साथ पर घुस जाया करती थीं।
इस प्रसंग का उल्लेख करने का कारण यह है कि एक समय था जब इस मार्ग पर यात्री बस तक चल जाया करती थी, आज इस मार्ग में अतिक्रमण का जो आलम है उससे यहां पैदल चलना भी दुष्कर है। इससे साबित हो जाता है कि अगर नगर पालिका और यातायात पुलिस ने इस मार्ग पर अतिक्रमण से निपटने कोई कार्यवाही नहीं की है, नतीजतन आज सालों साल में अतिक्रमण स्थाई हो चुके हैं।
नेहरू रोड में अव्यवस्थित खड़े वाहनों को लेकर यातायात महकमा कभी भी गंभीर नहीं हुआ। यातायात महकमे की कार्यवाही छिंदवाड़ा चौक से शुरू होती है और बाहुबली चौक में जाकर खत्म हो जाती है, लेकिन आज तक जो भी यातायात प्रभारी रहे हैं, उन्होंने नेहरू रोड को नजरअंदाज ही किया है। यातायात को अवरूद्ध करने का कारनामा सिर्फ नेहरू रोड में ही किया जाता  है, ऐसा नहीं है।
सिवनी की अधिकांश बैंकों के सामने भी वाहन बेतरतीब खड़े कर दिये जाते हैं, जिस ओर बैंक प्रबंधन भी ध्यान नहीं देता। शुक्रवारी स्थित महाराष्ट्र बैंक, यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, कचहरी चौक की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा आदि ऐसी बैंक है, जिनके सामने वाहन पार्किंग की व्यवस्था नहीं है और न ही इन बैंकों और दुकानदारों ने कोई ऐसी व्यवस्था भी नहीं की है कि इन वाहनों को सुव्यवस्थित खड़े कर सके।
ऐसे में सिवनी की यातायात व्यवस्था को सुधारने की बात सिर्फ और सिर्फ बेईमानी ही लगती है। देखना यह है कि नवागत कलेक्टर भरत यादव और पुलिस अधीक्षक मिथलेश शुक्ला शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए कृत संकल्पित दिख रहे हैं, अब देखना है कि उनकी मुहिम किस स्तर तक परवान चढ़ पाती है।

आखिरकार चीनी मिल और सरकार के बीच हुए समझौते की खुली कलई


आखिरकार चीनी मिल और सरकार के बीच हुए समझौते की खुली कलई

(सचिन धीमान)

मुजफ्फरनगर (साई)। आज चीनी मिल मालिको और सरकार के बीच हो रहे आपसी समझौते की क्लई उस वक्त खुल गयी जब वीएम सिंह की किसान हितैषी जनहित याचिका को खारिज कराने के लिए प्रदेश सरकार के सोलीसिटर ही खडे नजर आये।
चालू पेरोई सत्र 2012-13 का चीनी मिलों ने गन्ना किसानों का लगभग साढे सात हजार करोड रूपये से अधिक भुगतान रोक रखा है। जिस पर वीएम सिंह ने एक जनहित याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बैंच में दायर करते हुए अपील की थी कि चालू पेराई सत्र में गन्ना किसानों का चीनी मिलों ने साढे सात हजार करोड रूपये से अधिक पैसा रोक रखा है। जिसे तत्काल 15 फीसदी ब्याज सहित दिलवाया जावे। ऐसा न करने पर मिलों की आरसी काट दी जाये। इसके साथ ही जब तक गन्ना किसान का भुगतान नहीं हो जाता। तब तक गन्ना किसान से किसी भी प्रकार के कृषि ऋण की वसूली स्थगित रखी जाये। साथ ही दलील देते हुए जनहित याचिका में यह भी कहा गया कि जहां मिलों की आरसी कटते ही मिले तत्काल गन्ना किसानों का भुगतान करेंगी वहीं प्रदेश सरकार को भी आरसी काटने के बाद 800 करोड का राजस्व प्राप्त होगा।
आज इस जनहित याचिका का विरोध करने के लिए कई दर्जन अधिवक्ता न्यायधीश उमानाथ की बैंच में उपस्थित थे। इस मामले में उस वक्त अजीब स्थिति देखने को मिली जब प्रदेश सरकार की ओर से ए.ए.जी. (एडिशनल सोलीसिटर) श्रीमति बुलबुल गुलियाल ने ही अजीब तर्क देते हुए वीएम सिंह के हल्फनामे में तकनीकी त्रुटि बताकर उसे खारिज करने तक की अपील कर डाली। सरकार वकील का यह कृत्य निश्चित तौर पर मिल मालिकांे के पक्ष में जाता दिखाई दिया। वीएम सिंह ने इस पर दलील देते हुए कहा कि माननीय उच्च न्यायालय का स्पष्ट आदेश है कि जनहित याचिका में तकनीकी त्रुटि नहीं देखी जाती। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ओर गन्ना आयुक्त का यह दायित्व है कि वह गन्ना किसानों का भुगतान ब्याज सहित तत्काल दिलाये। ऐसा न कर पाने पर मिलों की आरसी काटने का निर्देश गन्ना आयुक्त जारी करें। परंतु ऐसा करने के स्थान पर ये याचिका निरस्त कराने का काम किया जा रहा है।
अदालत में उस समय सनसनी फैल गयी जब न्यायमूर्ति उमानाथ ने ऑफ दि रिकार्ड यह तक कह डाला कि ये लोग तब तक गन्ना किसानों का भुगतान ब्याज सहित नहीं करेंगे और न ही तब तक आरसी काटेंगे जब तक दो-चार अधिकारी जेल नहीं चले जाते। सारी दलील सुनने के बाद उमानाथ की नेतृत्व वाली बैंच ने 2 मई को अगली सुनवाई का आदेश दिया। वीएम सिंह ने कहा कि मालिक ने चाहा तो गन्ना किसानों का बकाया भुगतान ब्याज सहित शीघ्र ही मिल जायेगा ओर उनकी आरसी भी रूकेंगी। अदालत ने वीएम सिंह के साथ विकास बालियान भी उपस्थित थे। 

सत्य सांई कॉलेज के लेक्चरार पर आईपीएल सट्टे में कार्यवाही


सत्य सांई कॉलेज के लेक्चरार पर आईपीएल सट्टे में कार्यवाही

(ब्यूरो कार्यालय)

सीहोर (साई)। जिला मुख्यालय पर क्रिकेट का सट्टा जोरों पर चलता है इस बात की पुष्टि आज पुलिस द्वारा आइपीएल क्रिकेट पर सट्टा लिखते हुए एक युवक को पकड़ा है। युवक सत्य सांई कॉलेज में लेक्चरार है। सत्य सांई कॉलेज द्वारा उपरोक्त लेक्चरार को निलबिंत कर दिया गया है।
कोतवाली पुलिस से मिली जानकारी अनुसार गुरुवार की सुबह सत्य सांई कॉलेज के बाहर आइपीएल क्रिकेट पर सट्टा लगाते हुए सत्य सांई के लेक्चरार मनीष शर्मा को पकड़ा गया है। मोबाइल पर स्थानीय ब्रोकर को क्रिकेट का सट्टा लगाते हुए मनीष सर को पकड़ा गया है। उनके पास से मोबाइल जब्त किया जाकर करीब आठ हजार दो सौ रुपए नकद जब्त किए गए है।
कोतवाली टीआई सतीश महलवाला द्वारा बताया गया कि सत्य सांई कालेज के बाहर से मनीष को पकड़ा गया है उनसे पूछताछ की जा रही जिसके बाद अन्य क्रिकेट सटोरियों के नामों का खुलासा होने की संभावना है। सत्य सांई कॉलेज के डीन मुकेश तिवारी ने बताया कि मनीष शर्मा को निलबिंत किया गया है। 

सीहोर में मामा की दुधमुही भानजी हुई हैवानियत का शिकार


सीहोर में मामा की दुधमुही भानजी हुई हैवानियत का शिकार

(सरवन मवई)

सीहोर (साई)। दिल्ली के बाद सिवनी में चार साल की अबोध बच्ची के साथ हैवानियत का मामला अभी सुलझा नहीं है और राजधानी भोपाल से लगे सीहोर जिले की आष्टा तहसील के ग्राम मैना की एक छह वर्षीय मासूम को दरिंदे ने अपनी हवस का शिकार बना डाला। मामला सामने आने पर पुलिस ने मासूम का आष्टा अस्पताल मे मेडिकल करवाया। मासूम की हालत खराब होने के कारण उसे सीहोर अस्पताल रैफर किया गया है। अभी तक आरोपी की शिनाख्त नही हो सकी है।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम पांच बजे के आसपास ग्राम मैना मे एक पेड़ के नीचे दो बच्चों के साथ खेल रही छह वर्षीय मासूम को अज्ञात आरोपी चाकलेट का लालच देकर सुनसान क्षेत्र मे ले गया। यहां उसके द्वारा मासूम को अपनी वासना का शिकार बनाकर रोता-बिलखता छोड़ दिया गया।
रोती मासूम को देखकर कुछ ग्रामीण उसे वापस गांव तक लाए। मामला सामने आने पर मासूम को आष्टा अस्पताल लाया गया जहां से उसे सीहोर अस्पताल रैफर कर दिया गया। हालत खराब होने के कारण मासूम कुछ बोल नही पा रही है। इधर पुलिस उन दो मासूमों से भी पूछताछ कर रही है जो उस समय इस बच्ची के साथ खेल रहे थे।

कलेक्टर-एसपी पहुंचे अस्पताल

मामले की जानकारी मिलते ही मासूम के जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही कलेक्टर कविन्द्र कियावत व एसपी केबी शर्मा अस्पताल पहुंच गए थे। कलेक्टर कियावत ने पूरी गोपनीयता बरतने व मासूम के पु ता उपचार के निर्देश चिकित्सकों को दिए, इधर एसपी शर्मा ने आरोपी की गिर तारी के लिए कई टीमों को क्षेत्र मे सर्चिग के लिए रवाना किया है। 

गुरुवार, 25 अप्रैल 2013

बधाई पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्यवाही के लिए


बधाई पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्यवाही के लिए

(एस.के.खरे )

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में घटित तीन मामलों में पुलिस ने जिस तरह की तत्परता दिखाई है उससे वह निश्चित तौर पर बधाई की पात्र है। पहला मामला घंसौर का है जहां चार वर्ष की बालिका के साथ दुराचार किया गया था। दुराचार के उपरांत आरोपी सदा की भांति फरार हो गए थे। पुलिस ने बालिका को स्थानीय स्तर पर उपचार के बाद जबलपुर ले जाया गया जहां से उसे बाद में महाराष्ट्र की संस्कारधानी नागपुर के केयर अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। नागपुर में सिवनी की इस गुडिया की हालत नाजुक बनी हुई है। पुलिस महानिरीक्षक संजय झा के अनुसार आरोपी बिहार का रहने वाला था संयोग से संजय झा भी बिहार से ही हैं। संजय झा ने इसके लिए विशेष रणीनीति बनाई और अनेक टीमें बिहार कोलकता दिल्ली आदि भेजीं।
इस मामले में मीडिया का रूख बहुत ही सकारात्मक रहा जिससे वह बधाई की पात्र है। मीडिया विशेषकर इलेक्ट्रानिक मीडिया में आरोपी फिरोज के चित्र बार बार दिखाए जाने, पुलिस की रणनीति के अनुसार आरोपी के चित्र वाले पंप्लेट्स और पोस्टर्स वहां चिपकाए जाने से वहां के स्थानीय लोगों में जागरूकता आई और भीड़ ने आरोपी को घेर लिया। बताते हैं कि चेनल्स पर पुलिस के मोबाईल और अन्य नंबर्स दिखाए जा रहे थे, जिनका उपयोग जनता ने किया। जनता ने सिवनी के युवा एसपी मिथलेश शुक्ला को फोन पर इसकी सूचना दी।
दूसरा मामला अरी थाने का है जहां ग्राम टिकारी में साढ़े पांच साल की एक बच्ची के साथ छेड़छाड़ और गंदी हरकत करने की सूचना अरी थाने में दर्ज की गई। पुलिस ने इस मामले में धारा 363, 376 (2) (ज) (झ) तथा 8 लेंगिग अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के तहत मामला पंजीबद्ध कर कार्यवाही करते हुए आरोपी मेहतलाल उईके को धर दबोचा। इसी तरह किंदरई में दर्ज अपराध में भी एक साढ़े पांच साल की बच्ची के साथ किए गए दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने जनता के सहयोग से आरोपी स्वरूप लाल को पकड़ लिया।
इन तीनों मामलों में पुलिस की तत्परता वाकई काबिले तारीफ है किन्तु जब बात आती है इन अपराधों के घटने की तो ये अपराध क्यों घटित हुए इस मामले में अगर गहराई से देखा जाए तो पहले मामले में पुलिस का दोष साफ नजर आता है। वर्ष 2008 से आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड में देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा लगभग सात हजार करोड़ रूपयों की लागत से कोल आधारित पावर प्लांट की स्थापना की जा रही है।
जाहिर है इतने बड़े पावर प्लांट की संस्थापना के लिए जो मेन पावर की जरूरत होगी उसमें स्किल्ड और अनस्किल्ड मेनपावर सिवनी के अलावा बाहर से लाना ही होगा। विडम्बना ही कही जाएगी कि प्रदेश सरकार को जमा कराए गए कार्यकारी सारांश में संयंत्र प्रबंधन ने सिवनी के मेन पावर को रोजगार देने का वायदा किया था, किन्तु वह अपना वायदा निभाने में असफल ही साबित हुआ है।
इसका प्रत्यक्ष उदहारण घंसौर की गुडिया के पिता हैं, जो अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर पूना में नौकरी कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर महाकौशल अंचल और स्थानीय स्तर पर नेता नुमा ठेकेदारों ने इस संयंत्र पर कब्जा जमा लिया है। कृत्रिम विरोध कराकर ये पहले संयंत्र प्रबंधन को भयाक्रांत करते हैं और बाद में अपनी मनमानी पर उतारू हो जाते हैं। य़क्ष प्रश्न तो यह है कि इतना बड़ा संयंत्र यहां स्थापित हो रहा है और गुडिया के पिता को महाराष्ट्र के पूना जाकर नौकरी करने की क्या आवश्यक्ता?
संयंत्र प्रबंधन बहुत ही दावे के साथ सीना ठोंककर सामाजिक जिम्मेदारी के निर्वहन की बात कहता है। प्रबंधन कहता है कि उसने घंसौर में आईटीआई खुलवाया है। अगर घंसौर में आईटीआई खुला है तो 2008 के पांच सालों बाद यहां से प्रशिक्षित लोगों में से कितने लोागों को संयंत्र प्रबंधन ने आज तक रोजगार दिया है? वैसे घंसौर में आईटीआई पहले से ही चल रहा था। संयंत्र प्रबंधन द्वारा कुछ गैर संरकारी संगठन (एनजीओ) के माध्यम से सामाजिक जिम्मेदारी की रस्म अदायगी भी की जा रही है। संयंत्र प्रबंधन यह बताने में असफल है कि उसने प्राईमरी स्तर की शिक्षा का क्या प्रबंध किया है। देखा जाए तो अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के कांधों पर यह जिम्मेवारी आती है कि वह यह सब कुछ सुनिश्चित करवाए।
वहीं दूसरी ओर पुलिस के सर पर यह जवाबदेही है कि वह नागरिकों की सुरक्षा के माकूल इंतजामात पुख्ता करे। पुलिस के अधिकारी यह कहकर अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकते कि उनके पूर्ववर्ती थानेदारों या अफसरों ने एसा नहीं किया उनकी तैनाती अभी अभी हुई है। 2008 के उपरांत घंसोर थाने में पदस्थ रहे समस्त थानेदारों, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस के खिलाफ इस बात को लेकर कार्यवाही होना चाहिए कि उन्होंने बाहर से आए आगंतुकों की आमद पुलिस थाने में दर्ज क्यों नहीं करवाई।
पुलिस को चाहिए कि वह अपराधियों में कानून का भय पैदा करे। इसके लिए उसे कुछ मिसालें पेश करना ही होगा। घंसौर में घटित इस दिल दहला देने वाले मामले में पुलिस अगर कठोर कार्यवाही करती है तो इसका बहुत अच्छा संदेश जा सकता है। इसके लिए पुलिस को चाहिए कि वह संयंत्र प्रबंधन पर शिकंजा कसे, उसके बाद संयंत्र प्रबंधन से ठेकेदार और ठेकेदारों से पेटी कांट्रेक्टर्स की सूची लेकर उन पर इस मामले में कार्यवाही करे के बाहर से आकर यहां नौकरी करने वालों की सूचना पुलिस को आखिर दी क्यों नही गई। मामला बहुत सीधा साधा नहीं होगा। चूंकि इसके मालिक गौतम थापर का इकबाल सियासी बियावान में जमकर बुलंद है अतः उन पर हाथ डालना आसान नहीं होगा। (साई फीचर्स)

आज सिवनी में पेश किया जाएगा वहशी फिरोज को


आज सिवनी में पेश किया जाएगा वहशी फिरोज को

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। महज चार साल की दुधमुंही बच्ची के साथ घिनौना कृत्य करने वाले आरोपी फिरोज को गुरूवार 25 अप्रेल को सिवनी लाया जाकर कोर्ट में पेश किया जाएगा। मूंछ कटाकर भेष बदलकर बिहार के मुजाहिदपुर थाने में रहने वाले फिरोज खान को पुलिस ने स्थानीय लोगों के सहयोग से पकड़ लिया। 01 मई से पुलिस सिवनी में मुसाफिरी अभियान का पालन सख्ती से करवाने वाली है।
उक्ताशय की बात आज यहां पुलिस अधीक्षक कक्ष में संपन्न पत्रकार वार्ता में जबलपुर जोन के पुलिस महानिरीक्षक संजय झा ने व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस ने सायबर सेल की मदद इसलिए नहीं ली जा सकी क्योंकि आरोपी मोबाईल का उपयोग ही नहीं कर रहा था।
उन्होंने कहा कि आरोपी का पता उसके बैंक के एकांउट के माध्यम से लिया गया था। गौरतलब है कि मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा निर्माणाधीन संयंत्र में उक्त आरोपी कार्यरत था और संयंत्र प्रबंधन या उसके ठेकेदार के पास भी इसकी पहचान का कोई प्रमाण ना होना आर्श्चजनक ही है। आईजी ने आगे बताया कि आरोपी ने वारदात करने के बाद घंसौर से ही एक मोबाईल भी खरीदा था।
मूलतः बिहार के निवासी पुलिस महानिरीक्षक संजय झा ने कहा कि बिहार की जनता ने इस मामले में जो जागरूकता दिखाई है उसकी उम्मीद वैसे तो नहीं की जाती है किन्तु इस मामले में विशेषकर माईनारिटी समूह द्वारा दिखाई गई जागरूकता निस्संदेह तारीफे काबिल है।
दो इलेक्ट्रानिक चेनल्स का आभार मानते हुए उन्होंने कहा कि इन चेनल्स पर फिरोज का फोटो और संपर्क वाले मोबाईल नंबर्स प्रदर्शित हो रहे थे, जिन्हें देखकर वहां से एसपी सिवनी को मोबाईल पर फिरोज की सूचना दी गई। उन्होंने कहा कि फिरोज के लिए फांसी तक की सजा दिलवाने का प्रयास करेगी पुलिस।
आईजी झा ने कहा कि प्रदेश में 3407 बलात्कार के मामलों में अधिकतर मामलों में रिश्तेदार, जानपहचान वाले या पड़ोसी ही हैं। उन्होंने कहा कि धारा 376, 354, 509 जैसे मामलों में सजायाफ्ता लोगों के जिला बदर की कार्यवाही भी पुलिस द्वारा किया जाना प्रस्तावित है।
संजय झा ने कहा कि एक मई से सिवनी पुलिस द्वारा विशेष अभियान चलाया जाकर बाहर के प्रांतों से आने वाले लोगों की मुसाफिरी दर्ज करवाने का काम सख्ती से आरंभ किया जाएगा। साथ ही साथ किराएदारी का सत्यापन भी कराए जाने की बात उनके द्वारा कही गई।
वहीं बिहार से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से प्रतिभा सिंह ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया है कि भागलपुर के मुजाहिदपुर थाना अंतर्गत हुसैनाबाद मुहल्ला में फिरोज खान को उसके मौसा सलाहुद्दीन के घर से स्थानीय लोगों के सहयोग से गिरफ्तार कर लिया गया।
बांका जिला के अमरपुर थाना अंतर्गत ढिमरा गांव का निवासी फिरोज खान (35) मध्य प्रदेश के झाबुआ पावर प्लांट लिमिटेड बरेला में वेल्डर का काम करता था।  फिरोज की तलाश में बांका जिले में खाक छानने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सुपौल जिले में भी डेरा जमा लिया था। दरअसल, आरोपी फिरोज के नेपाल भाग जाने की आशंका से ऐसा किया गया था। लेकिन बिहार पुलिस के सहयोग से ऐसा नहीं हो सका और आरोपी फिरोज भागलपुर से गिरफ्तार किया जा सका।
साई न्यूज के बिहार ब्यूरो ने बताया कि मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के घनसौर थाना क्षेत्र में गत 17 अप्रैल को एक पांच वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार के आरोपी फिरोज खान को आज भागलपुर जिले की एक अदालत ने तीन दिनों के ट्रांजिट रिमांड पर मध्य प्रदेश ले जाने की अनुमति प्रदान कर दी। फिरोज खान को आज सुबह भागलपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आर सी मालवीय के समक्ष पेश किया गया, जिन्होने खान को तीन दिनों के ट्रांजिट रिमांड पर मध्य प्रदेश से आयी पुलिस टीम को ले जाने की अनुमति प्रदान कर दी।
0 मां के बाद मौसी ने कहा आग लगा देती
फिरोज खान जब हुसैनाबाद में रहने वाली इसकी मौसी (खाला) के घर गया था, उस समय उसकी मौसी के घर के आसपास रहने वाले लोगों ने उसे पहचान लिया, उस समय मीडिया के सामने फिरोज की खाला ने कहा कि उसे नही मालूम था कि फिरोज ने इंसानियत को शर्मसार करने जैसा काम किया है, वरना मैं उसे चूल्हे की लकड़ी जैसे जला देती।
0 मासूम बच्ची को दे दी जाये इनाम की राशि
बिहार प्रदेश में एक तरफ तो फिरोज जैसे वहशी दरिंदों ने बिहार को बदनाम किया। वहीं बिहार की ही जनता ने उसे पकड़कर कुछ हद तक अपने माथे में लगे दाग को धोने का काम किया है। सबसे तारीफ की बात तो यह है कि आरोपी फिरोज के ऊपर 01 लाख का ईनाम था। ईनाम किसको दिया जाये, इस सवाल के जवाब में फिरोज में पकडऩे वाली जनता ने यह कहा कि ईनाम की राशि उनकी ओर से पीड़ित बच्ची को दे दिया जाए। उल्लेखनीय है कि फिरोज को मुस्लिम समाज के लोगों ने ही पकड़कर पुलिस के हवाले कर यह साबित कर दिया कि वहशी दरिंदे और शैतान किसी धर्म- मजहब के नहीं होते।
0 मुस्लिम समुदाय ने पकड़ा आरोपी को
श्री झा ने बताया कि हुस्नाबाद बड़ी मस्जिद के पास जब फिरोज घूम रहा था, तब वहां लोगों ने उसे पहचान लिया और उसे पकड़ा, जिसमें मुस्लिम समाज की तादाद अधिक थी, जिन्होंने फिरोज नामक आरोपी को पकड़ा।
0 1 मई से छेड़ेंगे मुहिम
जिले में बाहर से आकर रहने वाले व्यवसाई और संदिग्ध लोगों की पतासाजी और मुसाफिरी दर्ज करने की मुहिम 01 मई से छेड़ी जायेगी। झा ने कहा कि अलग- अलग कंपनियों के जो ठेकेदार बाहर से जो मजदूर और कर्मचारी लाते हैं, उनकी पूरी जानकारी देना उनका कर्तव्य होगा। अन्यथा संबंधित लोगों के ऊपर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जायेगी।
0 लाडली लक्ष्मी सुरक्षा अभियान का हुआ शुभारंभ
मासूम बिटिया को दरिंदो से बचाने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के लिए लाडली लक्ष्मी अभियान का शुभारंभ किया गया। बताया जाता है कि इस योजना के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और पुलिस विभाग के अधिकारी- कर्मचारी लोगों के बीच पहुंचकर अपनी बिटिया को हर तरह से सुरक्षा प्रदान किये जाने हेतु जनजागृति फैलायेंगे।
इसके लिए उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की सूचना के लिए पुलिस अधीक्षक के मोबाईल नं. 9479998001, अति. पुलिस अधीक्षक  9479998002, एसडीओपी सिवनी 9479998003, थाना प्रभारी सिवनी 9425157508 एवं महिला डेस्क प्रभारी 94245851394 में जानकारी देने की बात भी कही। 

ग्राम पंचायत सारंगी हुई सम्मानित


ग्राम पंचायत सारंगी हुई सम्मानित

(आकाश कुमार)

नई दिल्ली (साई)। प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने कहा है कि पंचायतों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि लोग पंचायतों को मजबूत करके राजनीति के बारे में ज्यादा जागरूक हुए हैं। नई दिल्ली में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस समारोह में डॉ० सिंह ने कहा कि १५ राज्यों ने पंचायतों में महिलाओं के लिए पचास प्रतिशत सीटे आरक्षित की हैं।
उन्होंने कहा कि कई राज्यों में अपनी लोकल बॉडिज में अन्य पिछड़े वर्गों और महिलाओं के आरक्षण के लिए कानून बनाये हैं जो महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से हकदार बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम हो सकता है। प्रधानमंत्री ने देश भर में पंचायती राज संस्थाओं को और मजबूत करने को कहा।
पंचायतों को मजबूत बनाने की राज्य सरकारों की कोशिशों में मदद करने के लिए हमने १२वीं योजना में पहले से कहीं ज्यादा राशि मुकरर की है। इस मकसद के लिए बजटीय सहायता करीबन १० गुना बढ़ाकर ११वीं पंचवर्षीय योजना के छः सौ अठासठ करोड़ रूपये की तुलना में छह हजार चार सौ सैंतीस करोड़ रूपये बढ़ा दी गई।
डॉ. मनमोहन सिंह ने आशा व्यक्त की कि राज्य स्थानीय स्वायत्त संस्थानों को मजबूत करने के लिए इस राशि का पूरी तरह से इस्तेमाल करेंगे। प्रधानमंत्री ने विकास प्रक्रिया को ज्यादा समावेशी और सतत्घ् बनाने के लिए राज्यों को केन्द्र से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। डा० सिंह ने राज्यों से ये सुनिश्चित करने को कहा कि पंचायती राज व्यवस्था के तहत सही मायनों में सत्ता का विकेन्द्रीकरण हो और निर्वाचित प्रतिनिधियों को उनके अधिकार और जिम्मेदारियां पूरी तरह से मिलें।
उन्होने कहा कि ये ख्याल रखना होगा कि पंचायती राज का मकसद डी-सैंट्रलाइजेशन है। जिसमें लोगों को खुद शासन की व्यवस्था चलाने का असली हक मिल पायेगा। इसके लिए हमें सही मायनों में शक्तियां और जिम्मेदारियां निर्वाचित प्रतिनिधियों को देनी होंगी। इन शिकायतों के बारे में कि केन्द्र और राज्य स्तर पर अधिकारी स्थानीय निकायों के साथ सत्ता बांटने में आनाकानी करते हैं, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस रवैये में परिवर्तन किये जाने की जरूरत है।
इस अवसर पर  मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के पेटलावद विकास खंड की ग्राम पंचायत सारंगी की ग्राम सभा को ग्राम विकास में दायित्वों के श्रेष्ठतम निर्वहन के लिए वर्ष 2012-13 के लिए राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय पंचायत दिवस के उपलक्ष में आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने ग्राम पंचायत सारंगी की सरपंच फुदीबाई मैदा को सम्मानित किया। सम्मान में  8 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
समारोह में मध्यप्रदेश की चयनित श्रेष्ठ त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं को दो करोड़ दो लाख रुपये के पुरस्कार प्रदान किये गये। पंचायतों का सशक्तिकरण और जवाबदेही पुरस्कार योजना 2013 में राष्ट्रीय स्तर पर चयनित जिला पंचायत इंदौर और सागर को सम्मानित किया गया तथा प्रत्येक को 40 लाख पुरस्कार राशि के रूप में दिये गये। जनपद पंचायत हरदा और खरगौन को पुरस्कार के रूप में दो-दो लाख रुपये दिये गये। इसके अलावा मध्यप्रदेश की श्रेष्ठ 12 ग्राम पंचायतों को भी पुरस्कृत किया गया। इन सब को 6-6 लाख रुपये पुरस्कार राशि के रूप में दिये गये। इनमें खरगौन जिले की ग्राम पंचायत लिक्खी, बड़गांव और भोरठ, हरदा जिले की ग्राम पंचायत रायबोर और भाटपरेतिया, नरसिंहपुर जिले की ग्राम पंचायत आंगनबाड़ा, उमरिया और गोगावरी, सागर जिले की ग्राम पंचायत रामपुर और बरखेड़ा गोठन तथा मंडला जिले की इन्द्री ग्राम पंचायत शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश की कुल 23 हजार 6 ग्राम पंचायत, 313 जनपद पंचायत और 50 जिला पंचायत ग्रामीण अंचलों के विकास में सशक्त भूमिका निभा रही हैं। राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के सुचारू क्रियान्वयन के जरिये ग्रामीण अंचलों में जहां तरक्की की रफ्तार तेज हुई है वहीं ग्रामीणों को आर्थिक विकास के व्यापक अवसर मिले हैं। 

भोर होते तक चला कवि सम्मेलन


भोर होते तक चला कवि सम्मेलन

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। भगवान महावीर स्वामी के जन्मोत्सव के अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज सिवनी द्वारा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के अवसर पर कवियों ने श्रोताओं को गुदगुदाया, हंसाया, चिंतन के साथ साथ तत्कालिक घटनाओं पर आधारित रचनाओं से मंच को जोड़ा, किसी भी संवेदनशील विषय को न छेड़ते हुए राजनीति पर करारे व्यंग्यों के माध्यम से रात्रि के तीसरे पहर तक काव्य रसिकों ने इसका भरपूर आनंद लिया। कवियों का स्वागत एवं परिचय पारस जैन ने कराया, जबकि आभार संजय जैन संजू ने व्यक्त किया।
कार्यक्रम के संचालक ग्वालियर से आये अतुल अजनबी ने दिल्ली एवं सिवनी के घंसौर में घटित घटना पर अपनी बात रखते हुए कहा कि हवस के हाथों तितली के पर भी नोच लिये, बिना परो के फिजा में वह उड़ नहीं पाती, इसलिए तो रूखसत हुई है दुनिया से कि जिंदा रहके बहारो से उड़ नही पाती।्य ओज हास्य के सशक्त हस्ताक्षर धार से आये संदीप शर्मा ने जहां हास्य पर आधारित वाहवाहके कई जुमले दिये वही ओज की रचना देते हुए कहा कि अरे त्याग का रंग, राष्ट्र कलंगी नहीं हो सकता, कुछ भी हो जाये, भगवा आतंकी नहीं हो सकता।
झांसी से आये देवेंद्र नटखट ने आध्यात्म से ओतप्रोत रचना के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि दल को नहीं दिलों को रंग ले, तू अबीर बन जायेगा, चीर नहीं रे पीर हरे तू शूरबीर बन जायेगा, सत्य अहिंसा, अपरिग्रह से तपकर शुद्ध हुआ तो सच कहता हूं तू युग का महावीर बन जायेगा।
श्रृंगार से ओतप्रोत रचना के माध्यम से भिण्ड से पधारे राजेश शर्मा ने कहा कि उन्हीं बेदर्द लहरों के इशारों पर लिखा होगा, किसी ने नाम मेरा, जब किनारों पर लिखा होगा, दिलों पर अब भी लिखा लो ढाई आखर प्रेम का, वरना यहां खुशहाल बस्ती थी, नजारों पर लिखा होगा।
संवेदना से ओत प्रोम रचना के माध्यम से अपनी बात रखते हुए रविंद्र रवि ने कहा कि बहारे लाख हो पर पतझड़ों को भूल मत जाना, बुलंदी पाके तू अपनी जड़ों को भूल मत जाना, दुआ करते हैं ये अक्सर तुम्हारी कामयाबी की, कभी भी भूलकर अपने बड़ों को भूल मत जाना।
इंदौर से पधारी कोकिला कण्ठ कवियित्री अंजली सराफ ने मां के चरणों का वंदन करते हुए अपनी बात रखते हुए कहा कि जन्नत के फेरे मेरे सुबहों शाम हो गये, दुनिया के सारे पुण्य मेरे नाम हो गये, जब- जब भी मुझको मां ने यूं लगा लिया गले, भगवान की कसम है चारो धाम हो गये।
महाराष्ट्र के मालेगांव से आये सुंदर मालेगांवी ने जहां लोगों को अपनी छोटी बड़ी रचनाओं से हंसाया, गुदगुदाया तथा पारिवारिक जुमलों से हास्य की बात करते हुए कहा कि इश्त तो बेहिसाब कर डाला, खुद को बासी कबाब कर डाला, घेरकर मुझको मेरे सालों ने अगला पिछला हिसाब कर डाला। इस दौरान वारासिवनी से पधारे मनोज पाराशर ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से चिंतन छोड़ा। अंत में श्रोताओं ने यह कहने से भी नहीं चूक े कि गरिमा के अनुकूल लंबे समय बाद कवि सम्मेलन सुनने तथा कविता का आनंद मिला है।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विनोद कौशल, चंदू वैसाखिया, दिनेश जैन, पारस जैन, सुनील जैन, सुनील कुमार, प्रभात जैन, विपनेश जैन, नीलेंद्र जैन, प्रभात बीडी जैन, आनंद जैन, प्रशांत जैन, सिद्धार्थ जैन, नीरज जैन, संजय नायक, संजय जैन का सराहनीय योगदान रहा।