शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

बीमारी से कराह रहा है जिला चिकित्सालय

बीमारी से कराह रहा है जिला चिकित्सालय

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। लगातार बारिश से, मौसम में संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिसके चलते बीमार होने वालों की तादाद में विस्फोटक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। लगातार बढ़ते मरीजों और चिकित्सक तथा पॅरा मेडीकल स्टाफ की मटरगश्ती से जिला चिकित्सालय भी बुरी तरह कराह रहा है।
एक अनुमान के अनुसार जिला चिकित्सालय में पिछले दिनों रोजाना लगभग पांच सौ मरीज अपना इलाज करवाने पहुंच रहे हैं, जिसमें से चार दर्जन से ज्यादा मरीज अस्पताल में दाखिल हो रहे हैं। अस्पताल में इतने मरीजों को भर्ती करने की क्षमता नहीं है, जिसके परिणाम स्वरूप वार्ड के फर्श पर मरीजों की रेलमपेल देखते ही बन रही है।

गंदगी से बजबजा रहे हैं संडास
जिला चिकित्सालय में मरीजों की बढ़ी तादाद से यहां के संडास पूरी तरह गंदगी से बजबजा रहे हैं। आलम यह है कि शौचालयों के साफ ना होने से संडास में जहां तहां मल पड़ा हुआ है। लेट्रिन भी पूरी तरह लबालब ही पड़ी हुई हैं। अस्पताल के कॉरीडोर में भी सीलन की बदबू लोगों को परेशान कर रही है।

दरबार लगाते हैं सिविल सर्जन
जिला चिकित्सालय में सिविल सर्जन के पद पर पदस्थ डॉ.सत्य नारायण सोनी का ध्यान भी जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं की ओर कतई नजर नहीं आता है। बताया जाता है कि आपरेशन के पहले बेहोश करने के एवज में मोटी रकम लेने के हजारों संगीन आरोप डॉ.सत्यनारायण सोनी पर हैं। बताते हैं कि डॉ.एस.एन.सोनी को दरबार लगाने का शौक है। जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन कक्ष में सदा ही कम से कम पांच चिकित्सक बैठे मिलते हैं जो डॉ.सोनी की हां में हां मिलाकर राग मल्हार गाते दिखते हैं। वहीं दूसरी ओर ओपीडी और वार्ड में मरीज कराहते पड़े रहते हैं।

लगातार बारिश बढ़ा रही मुसीबत
पिछले लगभग एक माह से लगातार होने वाली बारिश से लोग आजिज आ चुके हैं। सूर्यनारायण की बादलों के बीच लुकाछिपी के चलते बारिश के मौसम में कीट पतंगे तेजी से पनप रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इस मौसम में नंगी आंखों से ना देखे जा सकने वाले कीटाणु भी तेजी से ही पनपते हैं, जो रोगों के कारक होते हैं।

एडवाईज़री जारी करने में असफल स्वास्थ्य विभाग
बारिश के मौसम में किन किन सावधानियों को बरता जाए यह बताने में स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह ना केवल असफल है वरन् स्वास्थ्य विभाग ने इसकी एडवाईज़री भी जारी नहीं की है। केंद्र पोषित एनआरएचएम स्कीम के तहत करोड़ों रूपयों के आवंटन का स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्या किया गया है इस बारे में ना तो जिला प्रशासन को ही जानकारी है और ना ही आम जनता को। एनआरएचएम की मद को ही अगर सही उपयोग किया जाए तो शहर और जिले के हर व्यक्ति को घर बैठे पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं। विडम्बना यही है कि स्वास्थ्य विभाग इस ओर ध्यान देने के बजाए अपनी उदर पूर्ति में ही लगा हुआ है।

दूबरे पर दो आषाढ़ है डेंगू

पुरानी कहावत दूबरे पर दो आषाढ़ को डेंगू चरितार्थ कर रहा है। डेंगू के लार्वा रोज मिल रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग ने दस दिन बाद भी मीडिया के अथवा पंपलेट्स या मुनादी पिटवाकर डेंगू की एडवाईज़री जारी नहीं की है। जानकारों की मानें तो एडीज़ मच्छर का लार्वा लगभग 365 दिन यानी एक साल तक प्रभावी रहता है। ठण्ड के मौसम में डेंगू का कहर तेज होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।

भाजपा की बजाए हरवंश की पोल खोलते कांग्रेसी!

भाजपा की बजाए हरवंश की पोल खोलते कांग्रेसी!

प्रदेश कांग्रेस के पोल खोल निर्देश कूड़े में, हरवंश ने मेरा उपयोग कर उर्मिला सिंह को हरवाया: शक्ति सिंह, नीता पटेरिया को हमने आपने जिताया: राजा बघेल

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। प्रदेश में सत्तारूढ़ होने का सपना देखने वाली कांग्रेस के आला नेताओं ने कांग्रेस के जिला स्तर और जमीनी संगठन को सक्रिय होकर भाजपा विधायक, सांसदों, मंत्रियों आदि की पोल खोलने के लिए पाबंद किया है। सिवनी में भाजपा नेताओं से पूरी तरह उपकृत कांग्रेस के नेताओं द्वारा भाजपा की पोल खोलने के बजाए कांग्रेस के क्षत्रप रहे स्व.हरवंश सिंह ठाकुर की ही पोल खोली जा रही है, जिसको लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाओं का कभी ना थमने वाला दौर आरंभ हो गया है।
गत दिवस भैरोगंज में कांग्रेस अध्यक्ष और शहर की प्रतिष्ठित फर्म मेसर्स हरगुनदास रामनाथ के सदस्य हीरा आसवानी और उपाध्यक्ष खुमान सिंह के बीच हुए वाद विवाद के बीच थप्पड़ की गूंजअब दिलीप कुमार अभिनीत कर्माचलचित्र में डॉ.डेंग को मारे गए थप्पड़ की गूंजएक बराबर ही मानी जा रही है। इसकी गूंज कहां तक जाएगी यह बात भविष्य के गर्भ में है किन्तु जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और शहर के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित व्यवसाई खानदान के हीरा आसवानी को सरेआम एक पार्टी के कार्यक्रम में थप्पड़ मारा जाना कांग्रेस के लिए शर्मनाक ही माना जा रहा है।
कहा जा रहा है कि कांग्रेस के क्षत्रप हरवंश सिंह द्वारा जिस तरह की गंदी राजनीति का श्रीगणेश किया गया था उसी की परिणिति है उनके अवसान के बाद कांग्रेस की वर्तमान हालत। कांग्रेस के अंदर अनुशासन नाम की चीज ही नहीं रह गई है। यद्यपि हरवंश सिंह के जीवित रहते समय भी कांग्रेस में अनुशासन बहुत ज्यादा नहीं था पर कम से कम इस तरह की घटनाएं सार्वजनिक तौर पर नहीं हुआ करती थीं।
अब तो कांग्रेस के नेता ही सरेआम यह कहने लगे हैं कि हरवंश सिंह ने उनका उपयोग कांग्रेस के फलां केंडीडेट को हराने और भाजपा के फलां केंडीडेट को जिताने के लिए किया था। कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि कांग्रेस के एक नेता और सिवनी के निर्दलीय प्रत्याशी दिनेश राय के बीच जब चुनाव के उपरांत बाहुबली चौक पर चर्चा हुई तो लोगों ने दांतों तले उंगली दबा ली।
दोनों की चर्चा में दिनेश राय ने उक्त कांग्रेसी नेता से कहा कि उन्होंने पिछले चुनाव में हरवंश सिंह के साफ निर्देश मिलने के बाद भी दिनेश राय का साथ नहीं दिया, यह तो गद्दारी है। इस पर छूटते ही उक्त कांग्रेसी नेता ने दिनेश राय से कहा कि वे मजबूर थे, क्योंकि हरवंश सिंह ने उन्हें दिनेश नहीं नीता भाभी (श्रीमती नीता पटेरिया) को जिताने की जवाबदेही सौंपी थी।
इसी तरह गत दिवस प्रदेश कांग्रेस के पर्यवेक्षक अबरार अहमद की उपस्थिति में कांग्रेस के एक अन्य उपाध्यक्ष कुंवर शक्ति सिंह ने तो साफ साफ कह दिया था कि हरवंश सिंह ने शक्ति सिंह का उपयोग कर, घंसौर की कद्दावर नेता और वर्तमान में उत्तराखण्ड की राज्यपाल उर्मिला सिंह को हराने का काम किया था। असहाय जिला कांग्रेस कमेटी अब शक्ति सिंह को शो काज नोटिस देने का साहस भी नहीं जुटा पा रही है।
कांग्रेस के अंदर उच्चश्रंखलता की बातें एकाएक बढ़ गई हैं। गत दिवस भैरोगंज में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं शहर के प्रतिष्ठित व्यवसाई हरगुनदास रामनाथ एण्ड संस परिवार के सदस्य हीरा आसवानी के साथ सरेआम हुई थप्पड़बाजी के बाद डूंडा सिवनी की एक सभा में राहुल गांधी के दूत राजा बघेल ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि श्रीमती नीता पटेरिया को हमने आपने सभी ने मिलकर जिताया है।

कांग्रेस के अंदरखाने से छन छन कर बाहर आ रही खबरों पर अगर यकीन किया जाए तो जिला कांग्रेस के तीसरी और चौथी पंक्ति के वे नेता जो हरवंश सिंह द्वारा पूरी तरह प्रताड़ित रहे हैं अब अपनी खुमारी उतार रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस भले ही भाजपा की पोल खोलने के निर्देश दे पर जिला कांग्रेस के नेता तो अपने ही क्षत्रप रहे स्व.हरवंश सिंह ठाकुर की ही पोल खोलने पर आमदा दिख रहे हैं, जिसका सीधा प्रभाव हरवंश सिंह की सियासी विरासत संभालने वाले रजनीश सिंह के सियासी कैरियर पर पड़ता दिख रहा है।

खवासा बार्डर का जाम!

खवासा बार्डर का जाम!

(शरद खरे)

सिवनी जिला मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर अवस्थित है। जिले में खवासा में इकलौती बॉर्डर है जो मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को विभाजित करती है। इस बॉर्डर पर सालों से लोग जाम से जूझ रहे हैं। खवासा बॉर्डर का जाम ना तो जिला प्रशासन को दिखता है और ना ही पुलिस प्रशासन हो। इस बॉर्डर में परिवहन विभाग की चेक पोस्ट में पीछे की ओर एक तौल कांटा भी है। इस तौल कांटे की ओर से अगर प्रवेश किया जाए तो बाएं हाथ पर एक रजिस्टर रखा होता है। उस रजिस्टर को अगर पलटा लिया जाए तो लोग दांतों तले उंगली दबा लेंगे। इस रजिस्टर में सिवनी से लेकर भोपाल और दिल्ली तक मुख्य मंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक, नेता पत्रकार, सोशल वर्कर्स आदि को हर माह दी जाने वाली राशि का खुलेआम उल्लेख होता है। इस रजिस्टर को कोई भी देख सकता है।
वैसे तो खवासा की आबादी ज्यादा नहीं है पर यहां परिवहन, कृषि उपज मंडी, विक्रयकर आदि की जांच चौकियों के चलते यह एरिया सदा ही आबाद रहता है। यहां पदस्थ सरकारी कर्मचारियों के साथ ही साथ गुण्डों की बड़ी फौज भी यहां चौबीसों घंटे मण्डराती रहती है। गुण्डों की यह फौज आने जाने वाले वाहनों से एक नंबर में राशि लेने के साथ ही साथ चौथ वसूली का काम नायाब तरीके से अंजाम देती है।
कहते हैं यहां की जांच चौकियां रिमोट कंट्रोल से संचालित होती हैं। जैसे ही कोई लाल पीली बत्ती का वाहन आता दिखता है वैसे ही इन जांच चौकियों में दो नंबर का काम बंद, एक नंबर का काम चालूकी तर्ज पर काम आरंभ हो जाता है। यहां दो नंबर का काम धड़ल्ले से और इतनी सफाई से होता है कि मजाल है कोई इसे पकड़ ले। और तो और आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि दशकों बीत गए पर खवासा की परिवहन, मण्डी या सेल्स टेक्स आदि की जांच चौकियोें में किसी भी जिम्मेदार सरकारी विभाग ने छापा मारने की जहमत नहीं उठाई है।
जिला कलेक्टर भरत यादव और जिला पुलिस अधीक्षक मिथलेश शुक्ला की सिवनी में तैनाती के ठीक बाद जब समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया द्वारा इन दोनों ही अधिकारियों का साक्षात्कार लिया गया था और इन्हें खवासा के जाम के बारे में बताया गया था तो दोनों ही अधिकारियों ने एक पखवाड़े के अंदर ही यहां छापा मारकर व्यवस्था सुधारने की बात कही थी। विडम्बना ही कही जाएगी कि एक नहीं कई पखवाड़े बीत गए पर स्थिति जस की तस ही बनी हुई है।
दोनों ही वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में इस बात को भी लाया गया था कि खवासा से महज दस किलोमीटर दूर महाराष्ट्र की सीमा में मानेगांव टेक की जांच चौकी में वहां के परिवहन विभाग की एक एम्बेसिडर के अलावा कोई वाहन खड़ा नहीं मिलता है जबकि एमपी में जाम लगा रहता है, पर दोनों ही अधिकारियों द्वारा दिखवाते हैंकहकर बात को समाप्त कर दिया गया था। आखिर क्या कारण है कि मानेगांव टेक पर एक भी वाहन नहीं और खवासा में वाहनों की लंबी कभी समाप्त ना होने वाली कतार!
कहते हैं कि सेल्स टेक्स में आजकल कर, ऑन लाईन जमा होने लगा है। कई बार ऑन लाईन जमा की रसीद और इंटरनेट पर अद्यतन स्थिति का मिलान नहीं होता है जिससे वहां देर लगती है। सवाल यह है कि आखिर ऑन लाईन या ऑफ लाईन व्यवस्था से आम जनता को क्या लेना देना? वह तो बस सड़क क्लीयर चाहती है। अब सड़क को क्लियर कैसे किया जाए यह सोचना जिला प्रशासन का काम है।
चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कुछ समय के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के बतौर इस चेक पोस्ट को मेटेवानी में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया है। वैसे रिड्डी टेक के पास नवीन चेक पोस्ट का काम पिछले बीस सालों से युद्ध स्तरपर जारी है। हालत देखकर लग रहा है मानो मध्य प्रदेश महाराष्ट्र की सीमा पर चेक पोस्ट नहीं, आगरा में ताज महल का निर्माण हो रहा है। बीस साल पहले इस चेक पोस्ट के निर्माण के लिए 11 करोड़ रूपए की राशि की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी थी, पर इसका काम आरंभ नहीं हो सका।
दरअसल, नेता, मंत्री, सांसद विधायक, सरकारी अधिकारी और पत्रकार सभी के लिए कामधेनु है यह चेक पोस्ट। इस चेक पोस्ट में नमक स्वादानुसारकी तर्ज पर सभी को पांच सौ रूपए से पचास हजार रूपए प्रतिमाह की चंदीबेरोकटोक या तो घर पहुंच सेवा में उपलब्ध है या फिर जाकर लेना होता है। अब अगर किसी को घर बैठे बिना हाथ पांव हिलाए पैसा मिल रहा हो तो भला वह इसकी मुखालफत क्यों करने लगा?
सिवनी को हस्तिनापुर कहा जा सकता है क्योंकि यहां रियाया का दुखदर्द देखने, उन्हें सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए पाबंध सांसद, विधायक और सरकारी कर्मचारी तथा इन्हें पथभ्रष्ट होने से बचाने के लिए जिम्मेदार मीडिया ही धृतराष्ट्र की भूमिका में आ चुका है। इन परिस्थितियों में जनता अब किसी पर उम्मीद लगाने के बाजए अपने दोनों हाथ करमयानी माथे पर रखकर अपनी लाचारी दर्शा रही है।

खवासा का जाम नासूर बन चुका है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। कुरई थाने में पदस्थ आधा दर्जन में से दो सिपाही खवासा में तैनात हैं, जो व्यवस्था बनाने के बजाए चौथ वसूली में कहीं गड़बड़झाला तो नहीं कर रहा है वाहन चालक, यह देखने में व्यस्त है। कुल मिलाकर समूचे कुंए में ही भांग घुली हुई है इसलिए अब उम्मीद उपर वाले से ही की जा सकती है. . .।

गुरुवार, 8 अगस्त 2013

बारिश तो कट जाएगी पर ठण्ड में होगी मुश्किल!

बारिश तो कट जाएगी पर ठण्ड में होगी मुश्किल!

मौसम ठण्डा होते ही तेज हो सकता है डेंगू के मच्छरों का हमला

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सिवनी में सरकारी तौर पर डेंगू के पांच मरीजों के होने की पुष्टि की गई है जबकि आठ मरीजों के डेंगू प्रभावित होने की खबर है। कुछ मरीजों को निजी चिकित्सकों द्वारा डेंगू की पुष्टि या संभावना होने पर नागपुर या जबलपुर भेजा गया है। बारिश का मौसम तो जैसे तैसे कट ही जाएगा, पर ठण्ड में डेंगू का डंक अपना तेज असर दिखा सकता है।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के दिल्ली ब्यूरो से सोनाली खरे ने बताया कि दिल्ली में डेंगू का प्रकोप ठण्ड में चरम पर रहता है। शीत ऋतु में दिल्ली के अस्पतालों में डेंगू के मरीजों की तादाद आम दिनों से कई गुना अधिक रहती है। दरअसल ठण्ड के दिनों में लोग पंखा आदि चलाकर नहीं सोते हैं, रात को नींद में उनके अंग खुले रह जाते हैं जिससे इन्हें मच्छर अपना शिकार आसानी से बना लेते हैं।
जानकारों का कहना है कि सिवनी में डेंगू के लिए जिम्मेदार मच्छर का मिलना वाकई बेहद खतरनाक है। स्वास्थ्य विभाग की टीम रोजाना ही विवेकानंद वार्ड और शहीद वार्ड में घरों में एकत्र पानी में मच्छरों के लार्वा की जांच कर रही है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि सिवनी में विवेकानन्द वार्ड और शहीद वार्ड में रोजाना डेंगू और मलेरिया के लिए जिम्मेदार मच्छरों का लार्वा मिल रहा है, जो वाकई चिंता की बात है।
रोजाना लार्वा मिलने से स्वास्थ्य विभाग, मलेरिया विभाग और नगर पालिका परिषद् के अधिकारियों की सेहत पर भले ही कोई असर नहीं हो रहा हो, पर सिवनी की जनता की पेशानी पर पसीने की बूंदे छलक रही हैं। इससे प्रभावित लोगों के परिजनों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिला चिकित्सालय में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध ना होने के कारण बेचारे मरीजों की तीमारदारी के लिए वे उन्हें कहां ले जाएं।
जिला चिकित्सालय में रोजाना औसतन साढ़े तीन दर्जन मरीज भर्ती हो रहे हैं। जिला चिकित्सालय में मरीजों की तादाद क्षमता से अधिक होने पर मरीज जमीन पर बिना किसी सही उपचार के पड़े हुए हैं। जिला चिकित्सालय में सिविल सर्जन डॉ.सत्य नारायण सोनी का कमजोर प्रशासन ही माना जाएगा कि वार्ड में मरीजों को बाजार से दवाएं खरीदने, बाहर से टेस्ट करवाने, बात बात में पैसे मांगने आदि की शिकायतें अब आम हो गई हैं।

जिला चिकित्सालय में जिला कलेक्टर के आदेश और कड़े निर्देशको कितनी तरजीह दी जा रही है इस बात का सबूत चिकित्सकों की उपस्थिति से ही मिलता है। बताया जाता है कि सिविल सर्जन डॉ.सत्य नारायण सोनी को दरबार लगाने का शौक है, और चिकित्सालय में पदस्थ अधिकांश चिकित्सक ड्यूटी के समय मरीज देखने के बजाए डॉ.सोनी के कक्ष में बैठकर वाह वाहकरते ही नजर आते हैं।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष उपाध्यक्ष के बीच हुई हाथापाई!

जिला कांग्रेस अध्यक्ष उपाध्यक्ष के बीच हुई हाथापाई!

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हीरा आसवानी और उपाध्यक्ष खुमान सिंह के बीच आज हुई हाथापाई आज चर्चा का केंद्र बनी रही। भैरोगंज में नुक्कड़ सभा के दरम्यान घटी इस घटना को अगामी विधानसभा चुनावों में सिवनी विधानसभा से प्रत्याशी चयन को लेकर भी देखा जा रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भैरोगंज में जब नुक्कड़ सभा समापन की ओर थी, और प्रोटोकाल के हिसाब से जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हीरा आसवानी भी अपना उद्बोधन दे चुके थे, तब जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष खुमान सिंह अपनी मोटर साईकल पर वहां पहुंचे।
बताया जाता है कि खुमान सिंह ने वहां पहुंचने के साथ ही अपना उद्बोधन देने के लिए दबाव बनाना आरंभ किया। इस पर वहां मौजूद जिला कांग्रेस के पदाधिकारियों ने खुमान सिंह को प्रोटोकाल का हवाला देते हुए उनसे इसके उपरांत डूंडा सिवनी में आयोजित होने वाली नुक्कड़ सभा में अपनी बात रखने की बात कही गई।
बताया जाता है कि इस पर खुमान सिंह आग बबूला हो गए और वहीं उन्होंने अपशब्दों का प्रयोग आरंभ कर दिया। जैसे ही स्थिति बिगड़ती दिखी वैसे ही जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हीरा आसवानी ने उन्हें वहां से कुछ दूर ले जाया गया। वहां दोनों के बीच गर्मागर्म बहस भी हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों के बीच बहस इस कदर बढ़ गई कि जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने एक दूसरे की कालर तक पकड़ ली। जैसे ही ममला गर्माया वैसे ही कांग्रेस के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने दोनों को अलग अलग किया। बताते हैं इसी बीच दोनों ही ने एक दूसरे को दो चार थप्पड़ तक रसीद कर दिए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस मामले को शांत करवाने में नंदू यादव की भूमिका सराहनीय रही। किन्तु कांग्रेस के अंदर चल रही चर्चा के अनुसार सिवनी कांग्रेस के क्षत्रप हरवंश सिंह ठाकुर के अवसान के साथ ही जिला कांग्रेस में अनुशासनहीनता की घटनाओं में तेजी से बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है, जिसे शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है।
कहा जा रहा है कि यह मामला अनुशासनहीनता के एक मामले की परणीति थी। बताया जाता है कि हरवंश सिंह ठाकुर के अस्थि कलश जब केवलारी गए थे, उस समय माईक छीनने को लेकर हीरा आसवानी द्वारा खुमान सिंह को एक शो कॉज नोटिस सर्व किया गया था, और खुमान सिंह इस नोटिस से आहत थे। मौके पर उन्होने अपशब्दों के साथ यह तक कहा कि कुछ लोग चाहते हैं कि खुमान सिंह को कांग्रेस से ही बाहर कर दिया जाए।
वही, कांग्रेस के अंदर यह बात भी तेजी से चल रही है कि इस मामले में दरअसल, विधानसभा चुनाव में टिकिट की दावेदारी गर्भनाल  में है। कहा जा रहा है कि हरवंश सिंह के अवसान के उपरांत अब कांग्रेस में कार्यकर्ता और नेताओं को किसी का भय नहीं बचा है। देखा जाए तो सिवनी में कांग्रेस की नैया बिना किसी खिवैया के मझधार में डोल रही है।
जून माह में सिवनी की इस डोलती नैया को थामने के लिए केंद्रीय मंत्री कमल नाथ सिवनी आए थे, किन्तु उनके आगमन के बाद भी सिवनी जिले के हित में किसी तरह की घोषणा ना होने से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में मायूसी का आलम पसर गया था। इसके बाद एक बार फिर कांग्रेस के कार्यकर्ता इधर उधर बिखरने लगे हैं।

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के बीच हुई मारपीट, झूमाझपटी, कालर पकड़ने की इस घटना से कांग्रेस के अंदर एक तूफान सा खड़ा होता दिख रहा है। हरवंश सिंह के समय जिले के कांग्रेस के कार्यकर्ता भले ही उनकी नीतियों की पीठ पीछे बुराई करते थे, किन्तु इस तरह अध्यक्ष के साथ सार्वजनिक मंच पर मारपीट की घटना का क्या परिणाम होगा यह तो वक्त ही बताएगा।

रेल सुविधा के लिए कोई तो हुआ फिकरमंद

रेल सुविधा के लिए कोई तो हुआ फिकरमंद

(शरद खरे)

सिवनी में रेल सुविधाएं कष्टकारी हैं। यहां ब्रॉडगेज किसी सपने से कम नहीं है। सालों से कांग्रेस के नेता सिवनी के लोगों को ब्रॉडगेज का झूला झुलाते आ रहे हैं। जब भाजपा के सांसद बने तब भाजपा ने भी कांग्रेस की परंपरा को ही आगे बढ़ाया है। ब्रॉडगेज आज तक आई नहीं पर ब्रॉडगेज के नाम पर कांग्रेस भाजपा के नेताओं ने विज्ञापन छपवा-छपवाकर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ अवश्य ही किया है।
2006 में जब लालू यादव केंद्र में रेल मंत्री थे, उस वक्त कांग्रेस के जिले के क्षत्रप हरवंश सिंह ठाकुर जो कांग्रेस को अपने हिसाब से हांका करते थे, ने जिला कांग्रेस के प्रतिनिधिमण्डल को बस से दिल्ली ले जाया जाकर अनेक नेताओं से मिलवाया। यह प्रतिनिधि मण्डल उस समय कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से भी मिला था। लालू यादव जब छिंदवाड़ा आए तब उनसे भी प्रतिनिधिमण्डल को मिलवाया गया।
इसके बाद कांग्रेस और भाजपा कीए विज्ञापनों के प्रकाशन की होड़ देखते ही बनी। लालू यादव ने बतौर रेल मंत्री यह कह दिया कि छिंदवाड़ा नैनपुर जैसेरेलखण्ड का अमान परिवर्तन भी किया जाएगा। फिर क्या था कांग्रेस भाजपा के नेताओं मय हरवंश सिंह केपिल पड़े श्रेय लेने की होड़ में। उस वक्त मीडिया की सुर्खियों को देखकर लग रहा था मानों 2007 का सूरज बड़ी रेल लाईन पर ही निकलेगा।
2007 तो क्या 2013 का सूर्य भी निकल आया और ब्राडगेज का अता पता नहीं है। लोग निराश हैं, क्या करें समझ नहीं पा रहे हैं। ब्रॉडगेज के संघर्ष के लिए खुमान ंिसंह ठाकुर ने प्रयास किए। सिवनी से छिंदवाड़ा की पदयात्रा का आगाज़ किया। बाद में सिवनी की कांग्रेस की राजनीति के चाणक्य के जाल में फंसकर खुमान सिंह भी कांग्रेस के उपाध्यक्ष बनकर शांत हो गए। कांग्रेस के उपाध्यक्ष बनने के बाद खुमान सिंह की धार भी बोथरी ही हो गई है।
रेल सुविधाओं या अमान परिवर्तन के लिए सिवनी के किसी भी सांसद ने अपनी ओर से सिवनी की आवाज को संसद में गुंजायमान नहीं किया है। वर्तमान में सिवनी के सांसदों में सुश्री विमला वर्मा, प्रहलाद सिंह पटेल, नीता पटेरिया, ही हैं एवं वर्तमान में के.डी.देशमुख तथा बसोरी सिह मसराम सिवनी के सांसद हैं। ये वर्तमान और पूर्व सांसद अपने अपने दिलों पर हाथ रखकर क्या इस बात को कह पाएंगे कि इन्होंने सिवनी जिले की जनता के द्वारा इन्हें दिए गए जनादेश का सम्मान किया है।
क्या कारण है कि आज तक छिंदवाड़ा से सिवनी होकर नैनपुर और जबलपुर के अमान परिवर्तन की बात जिले के सांसदों द्वारा पुरजोर तरीके से उठाई नहीं गई है? क्या कारण है कि यह रेल खण्ड आज भी बाबा आदम के जमाने की नैरोगेज के सहारे है? क्या कारण है कि एक के बाद एक करके यहां छोटी लाईन के डिब्बे कम होते जा रहे हैं और सांसद खामोश बैठे हैं? क्या यह सब बसोरी सिंह मसराम और के.डी.देशमुख को दिखाई नहीं पड़ता है? क्या बसोरी सिंह का संसदीय क्षेत्र महज मण्डला जिला है और के.डी.देशमुख महज बालाघाट जिले के सांसद हैं?
सिवनी में रहने वाले लोगों के जो रिश्तेदार बाहर हैं उनके लिए यह नेरोगेज रेल वाकई एक अजूबा है। नेरोगेज रेल को बाहर वाले आज की दौड़ती भागती दुनिया में अजब गजब चीज ही मानते हैं। सांसदों की अनदेखी का ही परिणाम है कि सिवनी जिले की सीमा से सटे जिलों में मण्डला को छोड़कर नागपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर यहां तक कि बालाघाट में भी ब्रॉडगेज की सीटी की आवाज सुनाई देने लगी है। सिवनी के लोग आज भी ब्रॉडगेज की सीटी को तरस रहे हैं।
बिलासपुर में गत दिवस संपन्न हुई रेल परामर्शदात्री समिति की बैठक में उपभोक्ता कांग्रेस के अध्यक्ष डी.बी.नायर ने अपने सुझाव रखकर कम से कम सिवनी का जिकर तो किया। डी.बी.नायर ने बताया कि छिंदवाड़ा से इंदौर के लिए तो आरक्षण की सुविधा है पर इंदौर से छिंदवाड़ा के लिए आरक्षण की सुविधा ही नहीं है। सिवनी में रेल्वे प्लेटफॉर्म पर शेड नहीं है। डी.बी.नायर ने वरिष्ठ नागरिकों को आरक्षण में कोटा निर्धारित करने की मांग भी रखी।
वस्तुतः ये सारे काम सिवनी जिले के सांसद द्वय बसोरी सिंह मसराम और के.डी.देशमुख के हैं। विडम्बना है कि कांग्रेस और भाजपा के सांसद गहन निंद्रा में हैं और उनका काम उपभोक्ता कांग्रेस के अध्यक्ष डी.बी.नायर कर रहे हैं। यह वाकई सिवनी का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि सियासी दलों के नेताओं द्वारा सिवनी के नागरिकों को सदा से ही ब्रॉडगेज के नाम पर भरमाया जा रहा है। सिवनी से छिंदवाड़ा और नैनपुर की ओर ब्रॉडगेज का काम आरंभ हुआ भी है और नहीं भी हुआ है।

चुनाव नजदीक हैं इसे देखकर ब्रॉडगेज का लालीपॉप पकड़ा दिया गया है। चुनाव तक छिंदवाड़ा से नैनपुर के रेलखण्ड में एक इंच भी काम नहीं होने वाला है। विधानसभा चुनावों के बाद एक बार पुनः लालीपॉप दिया जाएगा, तदोपरान्त लोकसभा के चुनावों के बाद यह मामला पांच साल के लिए ठण्डे बस्ते के हवाले कर दिया जाएगा। अभी संसद का सत्र चल रहा है। सिवनी के कांग्रेस के सांसद बसोरी सिंह मसराम और भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख दिल्ली में चाहें तो देश की सबसे बड़ी पंचायत में छिंदवाड़ा से नैनपुर के अमान परिवर्तन को समय सीमा में बांधने, अब तक के आवंटन और आने वाले समय में अधिक आवंटन की मांग पुरजोर तरीके से उठा सकते हैं, पर वास्तव में इन दोनों के द्वारा ऐसा शायद ही किया जाए।

बुधवार, 7 अगस्त 2013

नासूर बना खवासा बार्डर का जाम!

नासूर बना खवासा बार्डर का जाम!

चेम्बर ऑफ कामर्स ने खवासा बार्डर में ट्रेफिक जाम को लेकर सौंपा ज्ञापन

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। मध्य प्रदेश महाराष्ट्र सीमा पर खवासा बार्डर में वाहनों की अनावश्यक कतार से लगने वाले जाम से सभी परेशान हो चुके हैं। इस जाम में नेता, पत्रकार, व्यवसाई, आम आदमी सभी फंसकर हलाकान हो जाते हैं। मजे की बात तो यह है कि खवासा बार्डर से महज दस किलोमीटर दूर महाराष्ट्र की मानेगांव टेक परिवहन जांच चौकी में एक भी वाहन खड़ा नहीं दिखता।
लोगों का कहना है कि खवासा की जांच चौकियों में वाहन चालकों से सौदेबाजी के चलते वाहनों का जाम लगता है, वरना क्या कारण है कि मानेगांव टेक में रास्ता पूरी तरह साफ ही नजर आता है। कहा जा रहा है कि खवासा में होने वाली अवैध वूसली का हिस्सा प्रदेश सरकार के आला नेताओं, अधिकारियों सहित जिले में समान रूप से बांटा जाता है इसीलिए इस दिशा में अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
यहां यह उल्लेखनीय होगा कि अप्रेल माह में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया द्वारा जिला कलेक्टर भरत यादव एवं जिला पुलिस अधीक्षक मिथलेश शुक्ला के अलग अलग लिए गए साक्षात्कार में खवासा के जाम को प्रमुख रूप से उठाया था। अधिकारी द्वय ने अपने अपने जवाब में कहा था कि वे एक पखवाड़े के अंदर ही इस जाम से लोगों को निजात दिलवा देंगे। जिला कलेक्टर ने कहा था कि वे इसके लिए छापामार दल भी गठित करेंगे जो खवासा चौकी पर जाकर छापे मारेगा, ताकि वहां भ्रष्टाचार ना हो सके।
वहीं, एनएच पर स्थित खवासा बार्डर पर ट्रेफिक व्यवस्था सुचारू रूप से किये जाने हेतु सिवनी चेम्बर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के द्वारा एक ज्ञापन आज जिला कलेक्टर, एसपी एवं विक्रय कर विभाग को सौंपा गया।
सौपें गये ज्ञापन में मुख्य रूप से खवासा बार्ड पर छोटे वाहन, एम्बूलेंस आदि को बार्डर की ट्रेफिक व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं होने के कारण होने वाली परेशानियों से जिले के कलेक्टर को अवगत कराते हुए जनहित में शीघ्र अतिशीघ्र उक्त व्यवस्था को ठीक कराये जाने का निवेदन किया गया है, जिसमें प्रतिनिधिमंडल ने अपनी ओर से कुछ सुझाव भी प्रेषित किये हैं।

प्रतिनिधि मंडल में चेंबर के संरक्षक अनिल सिंघानिया, चेंबर के उपाध्यक्ष उधवदास आसवानी, सचिव संतोष अग्रवाल, कोषाध्यक्ष विनोद अग्रवाल, सराफा एसो. के अध्यक्ष अतुल मालू, प्रकाश टेंभरे, सुनील नाहर, प्रवेश भालोटिया आदि का समावेश था।

थम नहीं रहा डेंगू के लार्वा मिलने का सिलसिला!

थम नहीं रहा डेंगू के लार्वा मिलने का सिलसिला!

स्वास्थ्य विभाग ने अब तक नहीं जारी की जानलेवा डेंगू, मलेरिया की एडवाईज़री

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। मच्छर जनित जानलेवा डेंगू के लार्वा मिलने का सिलसिला थम ही नहीं पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनेक दल द्वारा सतत् रूप से विवेकानंद और शहीद वार्ड में घरों में एकत्र पानी में मच्छरों के लार्वा की खोज कर उन्हें नष्ट किए जाने का काम किया जा रहा है। नगर पालिका की अकर्मण्यता के चलते सिवनी जिला मुख्यालय डेंगू की चपेट में आ चुका है। अब तक डेंगू के प्रभावित सात मरीजों के मिलने की खबर है।

अस्पताल भरा, मरीज जमीन पर
जिला चिकित्सालय इन दिनों मरीजों से ओवर फ्लो चल रहे हैं। अस्पताल में मरीजों के लिए पलंग खाली नहीं है। आलम यह है कि मरीज जमीन पर पड़े कराह रहे हैं। कहा जा रहा है कि जबसे जिला चिकित्सालय की कमान सिविल सर्जन डॉ.सत्यनारायण सोनी के हाथों में आई है तबसे जिला चिकित्सालय खुद ही आईसीयू में भर्ती हो गया है। जिला चिकित्सालय में बुखार, सर्दी खांसी के मरीजों की हालत देखकर लग रहा है मानो बारिश अपना असर दिखा रही है।

यही है मलेरिया जागरूकता रैली का परिणाम
कुछ दिनों पूर्व जिला मलेरिया अधिकारी के निर्देशन में मलेरिया विभाग द्वारा एक जन जागरूकता रैली का आयोजन किया गया था। इस रैली में मच्छर जनित रोगों के बारे में उनके प्रभाव, लक्षण, होने के कारण, बचाव के उपाय आदि के बारे में विस्तार से बताए जाने की बात जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में कही गई थी।
बताया जाता है कि इससे उलट यह रैली शहर के विभिन्न भागों में भ्रमण करने के बजाए जिला चिकित्सालय में अवस्थित जिला मलेरिया कार्यालय से निकलकर महज बाहुबली चौक तक आकर वापस लौट गई थी। इस जन जागरूकता रैली में स्वास्थ्य विभाग के मुट्ठी भर लोगों ने शिरकत की थी।

कागजों में चल रही योजनाएं
मच्छर जनित रोगों के लिए केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में राष्ट्रीय मलेरिया उन्नमूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा था। इसके तहत जिलों में मलेरिया के यूनिट स्थापित थे। बाद में मलेरिया के कर्मचारियों को परिवार नियोजन आदि के काम में संलग्न कर दिया गया। आज भी मलेरिया विभाग में पंप मैकेनिक, लेब टेक्निशियन आदि के पदों के एवज में वेतन निकल रहा है।

बाकी वार्ड में नहीं है ध्यान!
स्वास्थ्य विभाग के डेंगू एवं मलेरिया के विनिष्टीकरण अभियान का पूरा जोर जिला मुख्यालय में महज विवेकानन्द वार्ड और शहीद वार्ड में ही है। इन दोनों वार्ड के अलावा भी अन्य वार्ड में डेंगू या मलेरिया के लिए जिम्मेदार मच्छरों के लार्वा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है, पर स्वास्थ्य विभाग का ध्यान इस ओर ना होना आश्चर्यजनक है।

नहीं जारी हुई एडवाईज़री!
स्वास्थ्य विभाग द्वारा 30 जुलाई को जनसंपर्क विभाग के माध्यम से विज्ञप्ति जारी कर स्वीकार किया गया था कि शहर में दो मरीज डेंगू प्रभावित हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक डेंगू और मलेरिया के लिए एडवाईज़री जारी ना करना आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है। लगता है स्वास्थ्य विभाग यह मानकर चल रहा है कि सिवनी जिला मुख्यालय के सारे लोग डेंगू और मलेरिया के कारण, लक्षण, बचाव के उपाय आदि से भली भांति परिचित हैं।

ठण्ड में कहर बरपाएगा डेंगू!
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के दिल्ली ब्यूरो से मणिका सोनल ने भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सूत्रों के हवाले से बताया कि डेंगू के लिए जवाबदेह मच्छर का कहर ठण्ड के बढ़ते ही तेज हो जाता है। ठण्ड के मौसम में डेंगू का मच्छर अपने पूरे शवाब पर होता है। चूंकि ठण्ड के मौसम में पंखे आदि नहीं चलते इसलिए मच्छर के काटने की संभावनाएं और अधिक बढ़ जाती हैं।

दिन में काटता है डेंगू का मच्छर
डेंगू के लिए जवाबदेह मच्छर, दिन में ही लोगों को अपना शिकार बनाता है। इस लिहाज से दिन में संचालित होने वाली शिक्षण संस्थाओं और कार्यालयों में भी मच्छर को भगाने के पर्याप्त उपाय करना जरूरी हो गया है। जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि वह नगर पालिका प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को यह निर्देश दे कि सभी वार्ड में जांच दल बनवाकर घरों घर मच्छरों के लार्वा की जांच और विनिष्टीकरण की कार्यवाही करने के निर्देश दे।

सुनिश्चित की जाए जनभागीदारी

जानलेवा डेंगू के सातवें मरीज मिलने के बाद अब इसका कहर बढ़ने की उम्मीद से इंकार नही किया जा सकता है। अब इससे निपटने के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक हो गया है। जिला प्रशासन को चाहिए कि इसके लिए गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की मदद ली जाकर, घरों घर अनेक प्रचार माध्यमों से जनजागरूकता फैलाएं।

स्कूल बस, फायदे का धंधा

स्कूल बस, फायदे का धंधा

(शरद खरे)

स्कूल बस का संचालन वाकई एक फायदे का सौदा साबित हो रहा है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय, केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन, परिवहन विभाग चाहे जो निर्देश जारी करें पर स्कूल बस संचालकों की मोटी खाल पर इसका कोई असर नहीं होता है। लगता है उपर से नीचे तक कड़े निर्देश जारी करना उसी तरह की एक परंपरा बन चुका है जिस तरह कि इन निर्देशों को हवा में उड़ाने की परंपरा बन चुकी है।
स्कूल बस संचालन के लिए न्यायालयों के साथ ही साथ केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा समय समय पर कड़े दिशा निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। निहित स्वार्थ और पैसा कमाने की अंधी प्रतिस्पर्धा में उलझे परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को इन स्कूल बस संचालकों की मश्कें कसने की फुर्सत शायद नहीं है। कभी कभार निरीह आटो चालकों पर अवश्य ही यातायात पुलिस की सख्ती दिख जाती है।
देखा जाए तो स्कूल बस संचालन के नियम कायदे बेहद कड़े हैं। चूंकि इसमें देश के नौनिहाल और भविष्य, घरों से शाला तक का सफर तय करते हैं इसलिए इनकी सुरक्षा चाक चौबंद होना जरूरी ही है। दिल्ली सहित महानगरों में आए दिन स्कूल बस के हादसे, बसों में बच्चों के साथ यौन छेड़छाड़ आदि की शिकायतें मीडिया में पटी पड़ी हैं। बावजूद इसके सिवनी जिले मंें ना तो जिला प्रशासन ही इसके लिए संजीदा दिख रहा है ना ही शाला प्रबंधन।
ज्ञातव्य है कि पिछले साल मार्च में प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण संचालनालय ने स्कूल बसों के लिए एक नई गाइड लाइन तय की थी। दरअसल, स्कूल बसों के लगातार हादसों ने स्कूल शिक्षा विभाग के मोटी चमड़ी वाले आला अफसरान को जगाया था। 2012 में मार्च माह मेें ही प्रदेश शासन ने मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों का पालन कराने के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देशों को अमल में लाने के लिए स्कूल बस के लिए जो दिशा निर्देश जारी किए हैं, उसमें इस बात का विशेष ख्याल रखा गया था कि जिस स्कूल बस में बच्चों को स्कूल तक लाने ले जाने का काम किया जाएगा वह बस कितनी महफूज होगी? उस बस में हर उस परिस्थिति से निपटने की तैयारी रहेगी जो रास्ते में किसी भी वक्त किसी के भी साथ घटित हो सकती है। किसी भी परिस्थिति से निपटने के सारे इंतजाम बस में उपलब्ध रहेंगे ताकि हर परिस्थिति से स्कूल बस में बैठे बच्चों को सुरक्षित बचाया जा सके।
उक्त समस्याओं पर विचार कर स्कूल बसों के लिए नियम-कायदों की गाइड लाइन तैयार की गई एवं इसे नवीन शिक्षण सत्र में समस्त स्कूल संचालकों के लिए जारी किया गया है। इसके अनुसार बस के आगे और पीछे बड़े अक्षरों में, सुवाच्य अक्षरों में स्कूल बस लिखा जाए। यदि बस किराये की है तो उस पर आगे एवं पीछे विद्यालयीन सेवा लिखा जाए। विद्यालय के लिए उपयोग में लायी जाने वाली किसी भी बस में निर्धारित सीटों से अधिक संख्या में बच्चे नहीं बैठाए जाएं। प्रत्येक बस में अनिवार्य रूप से फर्स्ट एड् बाक्स की व्यवस्था हो। बस की खिड़कियों में आधी पट्टियां अनिवार्य रूप से फिट कराई जाएं। प्रत्येक बस में अग्नि शमन यंत्र की व्यवस्था हो। बस में स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर चस्पा हांे। बस के दरवाजे पर सुरक्षित चिटकनी लगी हो। वाहन चालक को भारी वाहन चलाने का न्यूनतम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए तथा पूर्व में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का दोषी नहीं ठहराया गया होना चाहिए। मोटर वाहन नियम 17 के अनुसार प्रत्येक बस में बस चालक के अतिरिक्त एक अन्य योग्य व्यक्ति की व्यवस्था की जाए। बच्चों के बस्ते रखने के लिए सीटों के नीचे जगह की व्यवस्था की जानी चाहिये। सुरक्षा की दृष्टि से बच्चों को लाते-ले जाते समय बस में एक व्यक्ति यथासंभव स्कूल के एक शिक्षक की व्यवस्था की जाए।
वहीं, सीबीएसई (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन) स्कूलों की बसों में अनपढ़ चालक-परिचालकों के हाथों में स्टेयरिंग नहीं थमाए जाने के निर्देश जारी किए गए थे। ड्राइवर 12 वीं व कंडक्टर के लिए 10 वीं पास होना अनिवार्य कर दिया है। कोई स्कूल संचालक या बस मालिक नियमों का उल्लंघन करता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड सचिव विनीत जोशी द्वारा स्कूलों को इस संबंध में अवगत कराया जा चुका है। स्कूलों को निर्देश जारी किए गए हैं कि यदि ड्राइवर तेज गति से गाड़ी चलाने, शराब पीकर गाड़ी चलाने व खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने को लेकर एक भी बार परिवहन विभाग की ओर से हुई चालान की कार्रवाई का दोषी होगा तो उसे काम पर नहीं रखा जाएगा। इसके साथ ही साथ सागर जिला कलेक्टर ने तो स्कूल बस में सीसीटीवी कैमरे लगाने की अनिवार्यता कर दी है।

इन दिशा निर्देशों का कितना पालन सिवनी में हो रहा है यह बात वाकई देखने योग्य है। सिवनी में सुबह सुबह बच्चों को लेकर शाला जाने वाली स्कूल बस या आटो चालकों का अगर यातायात पुलिस या आरटीओ विभाग ब्रीदिंग एनलाईजर लगाकर टेस्ट करें तो नब्बे फीसदी चालकों के मुंह से वैसे ही शराब का भपका आता मिलेगा, वह भी ब्रीदिंग एनलाईजर्स के बिना। यातायात पुलिस और आरटीओ से अपेक्षा है कि वे पैसा कमाने की अंधी दौड़ में अपने आप को इतना मशगूल ना कर लें कि देश के नौनिहालों के परिवहन की व्यवस्था को ही भूल जाएं। जिला कलेक्टर भरत यादव और जिला पुलिस अधीक्षक मिथलेश शुक्ला से भी इस संवेदनशील मामले में ध्यानाकर्षण की अपेक्षा की जा रही है।