शुक्रवार, 23 अगस्त 2013

शहर आपके कदम की प्रतीक्षा कर रहा है राजेश त्रिवेदी जी

शहर आपके कदम की प्रतीक्षा कर रहा है राजेश त्रिवेदी जी

(लिमटी खरे)

शहर में आज धुंआधार पानी गिरा, पानी ने चारों ओर त्राही त्राही मचा दी। इस पानी ने आज जो गजब ढाया उससे साफ हो गया है कि सिवनी में नगर पालिका परिषद की व्यवस्थाएं आधी अधूरी और अपर्याप्त ही हैं। बुधवारी बाजार में पानी का जमावड़ा आज का नहीं है। हल्की सी बरसात में बुधवारी बाजार की सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं। आज भी वही हुआ। उधर, विवेकानंद वार्ड में लोगों के घरों में पानी की टंकी के क्षेत्र का पानी बहकर आया और घुस गया।
जबलपुर रोड़ पर स्थित डॉ.सलिल त्रिवेदी के घर में इस बरसात ने कहर बरपाया। उनके आवास के अंदर एक से डेढ़ फिट तक पानी भर गया है। यह पानी उसके घर के हर हिस्से में समान रूप से पहुंचा है। घर में अफरातफरी का माहौल था। मौके पर प्रथम नागरिक राजेश त्रिवेदी भी पहुंचे। राजेश त्रिवेदी का कहना था कि उनके आवास के आगे हाण्डा एजेंसी वालों ने नाले पर अतिक्रमण कर लिया है, इसलिए रिटर्न वाटर आ रहा है।
सवाल यह उठता है कि आखिर अतिक्रमण हटाने का काम किसका है। जब इसे हटाने के लिए जिम्मेदार नगर पालिका अध्यक्ष ही अपने आप को बेबस बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना चाहें तो आखिर आम आदमी उम्मीद करे तो किससे? विचारणीय प्रश्न यह है कि शहर में नालियों की क्या स्थिति है आज! जाहिर है पानी निकासी की मुकम्मल व्यवस्थाएं नहीं हैं। बारापत्थर में आज बाहुबली चौक से पालीटेक्निक वाले मार्ग पर पानी का जमावड़ा देखते ही बन रहा था। सड़क पर एक से डेढ़ फिट पानी था। लोगों के वाहन बंद हो रहे थे, पर इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था।
मराही माता के सामने का नाला ओवर फ्लो था। ज्यारत नाके के पास सड़कें पानी से सराबोर, मठ मंदिर के आसपास सड़कें दिखाई ही नहीं पड़ रही थीं। ललमटिया में घरों मेें पानी भर गया। हड्डी गोदाम क्षेत्र तालाब में तब्दील हो गया। आखिर किसकी सुने और कौन सुने! क्या यह सब कुछ नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के नेतृत्व वााले नगर पालिका के अमले को दिखाई नहीं दे रहा है। नगर पालिका अध्यक्ष खुद
मान लिया कि आज पानी बहुत तेज और ज्यादा तादाद में बरसा। पर प्रशासन द्वारा आपदा प्रबंधन का राग अलापा जाता है कहां है आपदा प्रबंधन! क्या सिर्फ सरकारी विज्ञप्तियों तक ही सीमित है आपदा प्रबंधन का राग! कहां हैं कांग्रेस के विज्ञप्तिवीर! क्या उनका दायित्व अब नहीं है कि वे इस बारे में विज्ञप्ति जारी करें। भाई भतीजावाद छोड़िए कमल के वीर सिपाहियों अब उठिए और करिए कुछ। शहर में त्राही त्राही मच गई है आज! निचली बस्तियों का हाल बेहाल है।
हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि नगर पालिका परिषद के निकम्मे और नपुंसक प्रशासन के चलते शहर बदहाल हो गया है। शहर में आम जनता कराह रही है, क्या यही है भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री शिवराज का सुराज! क्या यही है पंडित दीनदयाल के सपनों के भारत का सिवनी! क्या यही है अटल बिहारी बाजपेयी के भारतीय जनता पार्टी के संगठन के हालात। क्या भाजपा की विधायक श्रीमति नीता पटेरिया अब कुछ कहने का।
आज ना जाने कितने घरों मंें पानी भर गया होगा। रोज कमाने खाने वालों का अनाज और बिस्तर गीला हो गया होगा। वे कैसे रात काटेंगे और कैसे रात का खाना बनेगा, कैसे सोएंगे उनके मासूम बच्चे! स्थिति वाकई चिंताजनक है। जनप्रतिनिधि अपने कर्तव्यों से मुंह चुरा रहे हैं, वे तो रात को भरपेट खाना खाकर चैन से एयर कंडीशर चलाकर सो जाएंगे पर गरीब गुरबों की कौन सुध लेगा। अभी अगर कहीं पानी निकासी की बात होती और पालिका काम करवा रही होती तो दसियों फोटोग्राफर्स को बुलवाकर नगर पालिका प्रशासन के कारिंदों द्वारा मीडिया में वाहवाही लूट ली गई होती, पर आज किसी को निचली बस्तियों में जाकर सुध लेने की फुर्सत नहीं मिली।
सर्वाधिक आश्चर्य तो नगर पालिका परिषद के संवेदनशील उपाध्यक्ष राजिक अकील की चुप्पी पर हो रहा है। नगर पालिका में कांग्रेस के 12 पार्षद हैं। राजिक अकील भी पार्षद हैं, क्या इन सभी के वार्ड में पानी नहीं भरा! अगर भरा है तो ये खामोश क्यों हैं। नगर पालिका में कमीशनखोरी एक अलहदा बात है पर जो मामले जनता को सीधे सीधे प्रभावित करते हैं उन मामलों में तो संवदेनशील होने की महती जरूरत है।
आज हुई बारिश में शहरी सीमा से लगे लूघरवाड़ा में तीन दर्जन से ज्यादा मकानों में पानी भर गया और तीन मकान के गिरने की खबर है। वहां प्रशासन के अमले के साथ ही साथ लूघरवाड़ा स्पोर्टस क्लब के सदस्यों ने लोगों के घरों में जाकर उनका सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया और लोगों को राहत प्रदान की।

गर्मियों में एक मर्तबा पानी की किल्लत पर एक पार्षद राजेश साहू ने अपना दुखड़ा रोया और कहा कि नगर पालिका में किसी की कोई सुन नहीं रहा है! हमने उन्हें एक ही मशविरा दिया था, कि राजेश भाई अगर जनता को साफ पानी नहीं पिला सकते तो बेहतर होगा त्यागपत्र दे दिया जाए। हमारा कहना महज इतना ही है कि जनप्रतिनिधि वास्तव में जनता का सेवक होता है। उसका काम अपनी रियाया का दुखदर्द देखना सुनना है। दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि सिवनी में जनप्रतिनिधि जनता के सेवक नहीं निरंकुश शासक बन बैठे हैं। पक्ष विपक्ष के प्रतिनिधियों ने अपना एक सिंडीकेट बना लिया है। इसमें मीडिया को भी मिला लिया गया है। इन तीनों के त्रिफला के बन जाने से आम जनता हलाकान हो रही है, होती रहे किसी को क्या लेना देना। पर अंत में हम नगर के प्रथम नागरिक राजेश त्रिवेदी जी से एक ही आग्रह करना चाह रहे हैं कि बाकी सारी चीजें ठीक हैं कम से कम इस बात के पुख्ता इंतजामात मुकम्मल कर लिए जाएं कि आम जनता को कम से कम बुनियादी सुविधाएं तो मुहैया हो सकें। आप विधानसभा चुनाव लड़ना चाह रहे हैं, उपर वाले से कामना है कि आपको टिकिट बख्शे पर जनता आज आपके सख्त कदम का रास्ता देख रही है, आशा है आप सिवनी के उन नागरिकों की भावनाओं का सम्मान कर सख्त कदम उठाते हुए जनता के जनादेश का सम्मान अवश्य ही करेंगे. . .।

विकास की दुहाई की आड़ में हो रही काली कमाई!

विकास की दुहाई की आड़ में हो रही काली कमाई!

बात निकली है तो दूर तलक जाएगी, निविदा निकाले बिना हो रहा काम!, न्यायालय के स्थगन की नही है किसी को परवाह!

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनंी (साई)। लखन कुंवर की नगरी में विकास की बातें तो की जा रही हैं पर इस विकास की बिसात पर वास्तव में किसका विकास हो रहा है इस बात से लखनादौन की जनता अनजान ही नजर आ रही है। लखनादौन में कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा विकास की राह में कुछ नेताओं और अखबारों के रोढ़ा होने की बात प्रचारित की जा रही है, पर पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही कहत नजर आ रही है।
ठेकेदारी व्यवसाय में लिप्त एक ठेकेदार ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि विकास का ढिंढोरा अवश्य पीटा जा रहा है पर विकास की दुहाई की आड़ की काली कमाई पर किसी की नजरें नही जा रही हैं। उन्होंने बताया कि लखनादौन में एक करोड़ नब्बे लाख रूपए से अधिक लागत से बनने वाली सड़क के निर्माण की निविदा के लिए जब उन्होंने प्रपत्र खरीदा तो लखनादौन के एक नेतानुमा ठेकेदार की खबर उनके पास आई।
उक्त ठेकेदार ने कहा कि उनसे बीस फीसदी कमीशन की मांग की गई, तब ठेके में भाग लेने की बात कही गई। उनके अनुसार नगर पालिकाओं में सात से दस प्रतिशत कमीशन का चलन है, इस लिहाज से बीस प्रतिशत राशि बहुत अधिक होने से उन्होंने ठेके में भाग नहीं लिया। इस काम को नगर परिषद के प्रतिनिधि के परिजन के ससुराल के एक ठेकेदार को दिया गया बताया जा रहा है।
इसी तरह कृषि उपज मंडी की कथित जमीन पर नगर परिषद लखनादौन द्वारा 18 लाख रूपए की लागत से सब्जी मण्डी का निर्माण करवा दिया गया। इस जमीन पर माननीय उच्च न्यायालय के साथ ही साथ अनुविभागीय दण्डाधिकारी लखनादौन का स्थगन बताया जा रहा है। स्थगन के बाद भी दबंगई के साथ नगर परिषद लखनादौन द्वारा मण्डी का ना केवल निर्माण करवाया गया वरन् उसका गाजे बाजे के साथ उद्घाटन भी करवा दिया गया।

14 को हुआ है एग्रीमेंट
नगर परिषद लखनादौन के सीएमओ राधेश्याम चौधरी (9424380458) ने समाचार एजेेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा थाा कि ठेकेदार के साथ अनुबंध 14 अगस्त को हो गया है, जबकि दैनिक हिन्द गजट द्वारा अपने 11 अगस्त के अंक में फोटो सहित समाचार प्रकाशित किया था जिसमें खुदी सड़क के साथ ही साथ वहां मुरम डस्ट आदि डाली साफ दिखाई दे रही थी।

14 के बाद का ही होगा मेजरमेंट
नियमानुसार अब 14 अगस्त के उपरांत के कामों का ही नगर परिषद लखनादौन में पदस्थ उपयंत्री या सहायक यंत्री मेजरमेंट कर सकेंगे और उसका ही भुगतान किया जा सकेगा। अब सवाल यह उठता है कि 10 अगस्त को खीची गई फोटो में खुदी सड़क किसने खोदी, मुरम डस्ट किसने डाली? इस बारे में क्या किया जाएगा? क्या नगर परिषद ने खुद ही ठेकेदार की मदद के लिए सड़क खोदी गई? क्या ठेकेदार को एग्रीमेंट के पूर्व ही सड़क खोदने की अनुमति दे दी गई? इन प्रश्नों के उत्तर आज भी भविष्य के गर्भ में ही हैं।

नप सकते हैं उप, सहायक यंत्री
इस मामले में सहायक यंत्री या उप यंत्री पर गाज गिर सकती है। मामला विकास का अवश्य है पर विकास को नगर नियम कायदों को परवान चढ़ाकर किया जाएगा तो शायद ही इसे कोई पचा पाए। इस विकास के पीछे कमीशन के गंदे खेल की बू भी आ रही है। 14 अगस्त को एग्रीमेंट के पहले खुदी सड़क की फोटो खिंचकर प्रकाशित होना अपने आप में इतना बड़ा सबूत है जिसे कागजी घोड़े दौड़ाकर मिटाया नहीं जा सकता है।

बात निकली है तो दूर तलक जाएगी!
बात निकली है तो दूर तलक जाएगी की तर्ज पर अब इस मामले की सुगबुगाहट राजधानी भोपाल तक में होने लगी है। सत्ताधारी भाजपा में भी इस बात को लेकर अब चर्चा तेज हो गई है। कहा जा रहा है कि लखनादौन नगर परिषद के अध्यक्ष के चुनावों में पूरी तरह मुंह की खाने के बाद भी नगर परिषद के अवैध कामों में भाजपा संगठन द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जाना आने वाले चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बनाया जा सकता है सिवनी में।

मेरे संज्ञान में सड़क और मण्डी दोनों का मामला है। प्रथम दृष्टया नगर पंचायत की जवाबदेही है कि नियमों का पालन हो। इस संबंध में लखनादौन विधायक और मण्डल भाजपाध्यक्ष से मेरी चर्चा हो चुकी है, दोनों ने अपने अपने स्तर पर जांच की कार्यवाहियां की हैं। इस संबंध में जिला कलेक्टर तथा एसडीएम लखनादौन से चर्चा कर कार्यवाही की बात की जाएगी। इस मसले में प्रशासन क्या कार्यवाही करता है, इस संबंध में एक दो दिन में आपको आवगत अवश्य कराउंगा।

नरेश दिवाकर, जिलाध्यक्ष, भाजपा सिवनी

थापर के सामने ठगा सा महसूस कर रहे हैं घंसौर के आदिवासी

आदिवासियों को छलने में लगे गौतम थापर . . . 3

थापर के सामने ठगा सा महसूस कर रहे हैं घंसौर के आदिवासी

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। मध्य प्रदेश में बिजली की कमी और क्षेत्र के विकास के लिए सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड में स्थापित होने वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड के पावर प्लांट में आदिवासियों के साथ धोखा किए जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। आदिवासियों की जमीन खरीदने के साथ किए जाने वाले समझौते के मामले में कंपनी प्रबंधन मौन ही नजर आ रहा है।
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा आवश्यक और निर्धारित प्रक्रिया से जांच कर इस बात की संतुष्टि कर ली गई है कि झाबुआ पावर लिमिटेड की प्रस्तावित विद्युत परियोजना राज्य में विद्युत की कमी की पूर्ति और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है। इस परियोजना से क्षेत्र का किस तरह का, कैसा और कितनी समयावधि में विकास होगा इस बारे में भी शिवराज सिंह चौहान ने मौन ही साध रखा है। कहा जा रहा है कि झाबुआ पावर लिमिटेड को इसी साल (2013) में फरवरी माह से ही विद्युत उत्पादन आरंभ कर देना चाहिए था।
वहीं, झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा ब्रितानी हुकुमत के दौरान अखण्ड भारत पर शासन करने वाले अंग्रेाजों द्वारा बनाए गए भू अर्जन अधिनियम 1894 की धारा 41 के अंतर्गत विहित प्रावधान के अनुरूप अनुबंध निष्पादित किया है। अंग्रेजों के समय भारतीयों से जमीन अधिग्रहण के दौरान हिन्दुस्तानियों को कम से कम फायदा होने की गरज से कानून बनाए गए थे। भारत गणराज्य की स्थापना के बाद आज भी देश में अनेक कानून की कंडिकाएं उन्हीं के मुताबिक जस की तस ही हैं।

जबसे झाबुआ पावर लिमिटेड ने सिवनी जिले के घंसौर में कदम रखा है उसके बाद से आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड में आदिवासियों की जमीन पर लोगों की निगाहें गड़ गईं हैं। क्षेत्र में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार कंपनी ने आदिवासियों को प्रलोभन देकर उनकी जमीन हड़प ली है। भोले भाले आदिवासी अब कंपनी प्रबंधन के आगे पीछे घूमकर उन लुभावने प्रस्तावों को पूरा करवाना चाह रहे हैं तो उन्हें झिड़की के अलावा और कुछ नहीं मिल रहा है।

प्रसूताओं को नहीं मिल पाए निश्चेतक!

प्रसूताओं को नहीं मिल पाए निश्चेतक!

(अखिलेश दुबे)

सिवनंी (साई)। प्रियदर्शनी के नाम से सुशोभित जिला चिकित्सालय में सिविल सर्जन का प्रभार अस्सी के दशक से सिवनी में पदस्थ निश्चेतक डॉ.सत्य नारायण सोनी के होते हुए भी गत दिवस चिकित्सालय में प्रसूताओं को निश्चेतक यानी बेहोश करने के लिए एनेस्थिसिया वाले चिकित्सक उपलब्ध नहीं हो पाए जिससे प्रसूताएं दिन भर परेशान होती रहीं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार और मंगलवार की दर्मयानी रात से इन पंक्तियों के लिखे जाने तक जिला चिकित्सालय में प्रसूताओं को भारी परेशानी का सामना इसलिए करना पड़ा क्योंकि निश्चेतक डॉ.सत्यनाराण सोनी के कांधों पर सिविल सर्जन जैसी प्रशासनिक जिम्मेदारी है, और वे इसके चलते अपने मूल काम पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं।
जिला चिकित्सालय का प्रसूती वार्ड वैसे भी सदा से ही चर्चाओं का केंद्र रहा है। इस वार्ड में अव्यवस्थाएं चरम पर हैं। इस वार्ड में प्रसूताओं के साथ अमानवीय व्यवहार की खबरें आम ही हैं। कहा जाता है कि इस वार्ड में बिना पैसे लिए कोई भी काम नहीं होता है। ऐसा नहीं कि इस बारे में सिविल सर्जन अनजान हों, सिविल सर्जन डॉ.सत्य नारायण सोनी पर ही बेहोश करने के लिए पैसे लेने के अनगिनत आरोप हैं, पर उंची सियासी पकड़ के चलते वे लगभग तीन दशकों से सिवनी में ही अपनी आसनी जमाए हुए हैं।
मरीजों के अनुसार प्रसूती वार्ड की प्रभारी डॉ.मनीषा सिरसाम तो अपने काम को मुस्तैदी के साथ अंजाम दे रही हैं वे नार्मल डिलेवरी तो करवा रही हैं किन्तु सीजर से होने वाली डिलेवरी के लिए उन्हें मरीज को बेहोश करना होता है और मरीज को बेहोश कौन करे की समस्या से वे दो चार हो रही हैं।
कहा जा रहा है कि चिकित्सालय के इकलौते निश्चेतक डॉ.सत्यनारायण सोनी आठ दिनों के अवकाश पर चले गए हैं, जिससे अब सीजर वाले मरीजों के परिजनों की जेब निजी चिकित्सालयों में काटी जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार निजी चिकित्सालयों में एक डिलेवरी के लिए बीस से चालीस हजार रूपए शुल्क लिया जाता है। संपन्न लोगों का तो ठीक है पर गरीब गुरबे तो उपर वाले के भरोसे ही जिला चिकित्सालय में पड़े रहने पर मजबूर हैं।

औसत एक दर्जन प्रसव रोजाना
बताया जाता है कि जिला चिकित्सालय में औसतन एक दर्जन प्रसव रोजना होते हैं इस औसत के हिसाब से लगभग चार सौ प्रसव प्रतिमाह होते हैं। इनमें से आधे से ज्यादा प्रसव आपरेशन से होते हैं। इन परिस्थितियों में चिकित्सालय में निश्चेतक की मांग सबसे ज्यादा होती है।

विधायक हैं मौन!
विडम्बना यह है कि जिला चिकित्सालय में लखनादौन विधायक श्रीमति शशि ठाकुर के पति डॉ.वाय.एस.ठाकुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तो सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया के पति डॉ.एच.पी.पटेरिया जिला मलेरिया अधिकारी के प्रभार में हैं। दो दो विधायक पतियों के होते हुए भी जिला चिकित्सायल के खुद आईसीसीयू में होने से पता चल ही जाता है कि दोनों विधायक अपने कर्तव्यों के प्रति कितने सजग हैं।

कांग्रेस को नहीं है लेना देना
जिला कांग्रेस कमेटी या नगर कांग्रेस कमेटी को जिला वासियों से अब कोई लेना देना बाकी नहीं रह गया है। जिला चिकित्सालय में मरीजों को सुविधाएं मिलें ना मिलें, पैंशनर्स दवाओं के लिए भटकते हैं तो भटकते रहें, मरीजों को बदहाली के दौर से गुजरना हो तो गुजरते रहें, चिकित्सालय में पदस्थ चिकित्सक अपने कर्तव्यों का निर्वहन चिकित्सालय के बजाए घरों या निजी क्लीनिक रूपी दुकानों में करते हों तो करते रहें, पर कांग्रेस अपनी कुंभकर्णीय निंद्रा में बनी हुई है। कांग्रेस के जागरूक, प्रबुद्ध, समझदार, संवेदनशील प्रवक्ता भी जिलों की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाए शिवराज सिंह चौहान की नीतियों की आलोचना कर अपने कर्तव्यों की इतीश्री कर रहे हैं।

भाजपा को नहीं है परवाह!
जिला चिकित्सालय की दुर्दशा पर भारतीय जनता पार्टी संगठन भी बैठकर ताली पीटता नजर आ रहा है। भाजपा संगठन के जिलाध्यक्ष नरेश दिवाकर भी अपनी ही पार्टी के विधायकों के निष्क्रीय रवैए के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। भाजपा का नगर संगठन भी इस मामले में मौन ही है। देखा जाए तो यह भाजपा सरकार की विफलता ही है कि दो दो विधायकों के पतियों की पदस्थापना के बाद भी जिला चिकित्सालय बदहाल है। भाजपा के प्रवक्ता भी जिले की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाए राष्ट्रीय प्रवक्ताओं के कार्यक्षेत्र में हस्ताक्षेप कर मनमोहन सिंह सरकार को कोसते नजर आते हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश दिवाकर भी उन्हें जिले की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश देने से बचते नजर आते हैं।

नूरा कुश्ती जारी है।

कांग्रेस के प्रवक्ता प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को तो भाजपा के प्रवक्ता प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह को कोस रहे हैं। कुल मिलाकर जिले में कांग्रेस भाजपा संगठन में नूरा कुश्ती जारी है। स्थानीय स्तर पर समस्याएं खदबदा रही हैं, पर कांग्रेस भाजपा को इससे लेना देना नहीं नजर आ रहा है, वह भी तब जब चुनाव सर पर हैं। कांग्रेस के संपन्न लोगों के नाम भाजपा विधायक निधि से प्रदत्त महज दो पांच हजार रूपए की राशि में सामने आ रहे हैं और दोनों ही दलों के नेता बेशर्मी के साथ खींसे निपोरते नजर आ रहे हैं।

गुरुवार, 22 अगस्त 2013

प्रतिवर्ष 32 लाख टन कोयला जलेगा पावर प्लांट में

आदिवासियों को छलने में लगे गौतम थापर . . . 2

प्रतिवर्ष 32 लाख टन कोयला जलेगा पावर प्लांट में

थापर ग्रुप के लिए सजेगा रीवा लखनादौन राजमार्ग

रेल्वे में लोडिंग अनलोडिंग की है समस्या

(ब्यूरो कार्यालय)

घंसौर (साई)। देश की ख्यातिलब्ध थापर गु्रप की सहयोगी कंपनी झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा सिवनी जिले की आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील के बरेला में डाले जा रहे पावर प्लांट में अनूपपुर से प्रतिवर्ष 32 लाख टन कोयला आपूर्ति की जाएगी। वैसे तो कोलकता के दसवीं ओसी गांगुली सारनी, के मेकमेट हाउस की सातवीं मंजिल में मूल कार्यालय वाले झाबुआ पावर प्लांट ने अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट में कोयले का परिवहन रेल मार्ग से होना दर्शाया है किन्तु कोयला ब्राडगेज से जबलपुर आकर फिर नेरो गेज से घंसौर पहंुचता है तो जबलपुर में लोडिंग अनलोडिंग में कंपनी की जेब ढीली हो जाएगी।
कंपनी की इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट में अनेक तकनीकि पेंच हैं, जिन्हें पूरी तरह से नज़र अन्दाज ही किया गया है। अव्वल तो यह कि अगर ब्राड गेज से कोयला अनूपपुर से ढुलकर जबलपुर आ भी गया तो जबलपुर के ब्राड गेज के यार्ड से उसे नेरो गेज के यार्ड तक कैसे लाया जाएगा। या तो उन्हें ब्राड गेज के यार्ड से नैरो गेज के यार्ड तक लाईन बिछानी पडेगी या फिर ट्रक के माध्यम से नैरो गेज तक ढोना पडेगा। इतना ही नहीं आने वाले समय में जब बालाघाट से जबलपुर अमान परिवर्तन का काम आरम्भ हो जाएगा तब नैरो गेज की पटरियां उखाड दी जाएंगी, एसी परिस्थिति में फिर कोयला परिवहन का वैकल्पिक साधन बच जाएगा सडक मार्ग। वैसे भी लोडिंग अनलोडिंग की प्रक्रिया झाबुआ पावर लिमिटेड के लिए काफी खर्चीली और समय की बरबादी वाली ही होगी।
उधर रेल्वे के सूत्रों का दावा है कि अवंथा गु्रप द्वारा अपने एक व्यवसायी कम राजनेता मित्र के माध्यम से रेल्वे पर यह दबाव बनाया जा रहा है कि जबलपुर से बालाघाट बरास्ता नैनपुर के रेल खण्ड का अमान परिवर्तन तत्काल जबलपुर के सिरे से आरंभ करवा दिया जाए ताकि झाबुआ पावर के कोयले के रेक सीधे घंसौर तक पहुंच सकें जिसमें उनका परिवहन व्यय कम हो सके। इसके लिए जबलपुर से घंसौर तक लाईन तुरंत ही डालने का काम भी आरंभ किया जाने वाला है।
घंसौर से जबलपुर के बीच जगह जगह पर स्लीपर भी गिरा दिए गए हैं। रेल्वे बोर्ड की हरी झंडी मिलते ही यह काम युद्ध स्तर पर जारी हो जाएगा। घंसौर से नैनुपर और बालाघाट तक का काम किस सन तक पूरा किया जा सकेगा इस मामले मं रेल्वे बोर्ड के सूत्र मौन हैं पर उनका कहना है कि अवंथा गु्रप के राजनैतिक और व्यवसायी मित्र ने रेल मंत्री पर इस काम को तत्काल अंजाम देने के लिए दबाव बना दिया है।

सूत्रों ने तो यहां तक कहा कि इस मामले में मण्डला सिवनी संसदीय क्षेत्र के सांसद बसोरी सिंह मसराम से भी रेल मंत्री पर दबाव बनवाया गया है, कि उनके संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आदिवासी विकासखण्ड मुख्यालय घंसौर को तत्काल ही संभागीय मुख्यालय जबलपुर से रेल से जोड़ा जाए। घंसौर से नैनपुर तक का रेलखण्ड भी मसराम के संसदीय क्षेत्र का ही हिस्सा है पर उसके लिए सांसद मसराम ने मौन ही साध रखा है। मसराम ने इस काम को नैनपुर वाले सिरे से आरंभ करवाने की बात पर भी जोर न दिया जाना आश्चर्यजनक ही माना जाएगा।

विकास में रोढ़ा ना बने हिन्द गजट: भूपेंद्र

विकास में रोढ़ा ना बने हिन्द गजट: भूपेंद्र

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनंी (साई)। लखन कुंवर की नगरी में लखनादौन नगर परिषद द्वारा विकास के काम संचालित किए जा रहे हैं, इन विकास के कामों की खामियां उजागर कर हिन्द गजटसमाचार पत्र विकास में रोढ़ा ना बने।उक्ताशय की बात आज किसी भूपेंद्र (9713720147) द्वारा दैनिक हिन्द गजट से चर्चा के दौरान कही।
आज सुबह हिन्द गजट के विशेष प्रतिनिधि अखिलेश दुबे को उक्त मोबाईल नंबर से फोन आया, जिसमें कहा गया कि लखनादौन नगर परिषद के समाचारों के संबंध में वे चर्चा करना चाह रहे हैं, उन्हें कुछ समाचार और देने हैं जिस संबंध में किसी जिम्मेदार व्यक्ति से चर्चा करना चाहते हैं।
कुछ देर के बाद पुनः इसी नंबर से एक फोन आया और उन्होंने अपना नाम भूपेंद्र और खुद को लखनादौन के छविदर्शन स्टूडियो का संचालक बताया। उन्होंने कहा कि वे पिछले एक माह के हिन्द गजट की प्रतियां चाह रहे हैं, ताकि वे लखनादौन नगर परिषद के समाचारों की डीप स्टेडी कर उसमें सही और गलत समाचारों की व्याख्या कर सकें। उन्हें इस पर सिवनी के कार्यालय आकर प्रतियां लेने का अथवा लखनादौन में ब्यूरो कार्यालय प्रभारी प्रवीण सोनी से प्रतियां ली जा सकती हैं।
इस पर उक्त कथित भूपेंद्र नामक व्यक्ति ने कहा कि उनकी बात प्रवीण सोनी से नहीं होती है। और लखनादौन नगर परिषद द्वारा अगर कोई विकास का काम किया जा रहा है तो हिन्द गजट उसमें रोढ़ा ना बने। जब उनसे यह कहा गया कि लखनादौन में नगर परिषद के नियमों के प्रतिकूल होने वाले कामों में किसका विकास हो रहा है यह बात जनता के सामने लाने का काम मीडिया का है और हिन्द गजट अपनी जवाबदेही का बखूबी निर्वहन कर रहा है, तो उन्होंने कहा कि हिन्द गजट में छपी कुछ बातें बिल्कुल निराधार हैं।
जब उनसे पूछा गया कि कौन सी बात निराधार हैं? इस पर उनका कहना था कि वे पहले समाचार पत्र के एक माह की प्रतियां ले लें और उनकी स्टेडी कर लें फिर बता पाएंगे कि कौन सी बात नगर परिषद लखनादौन के बारे में निराधार प्रकाशित की जा रही है हिन्द गजट द्वारा। वहीं उनके द्वारा यह भी कहा गया कि उनसे एक माह की प्रतियां लखनादौन नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष दिनेश राय मुनमुन के खासुलखास ने एकत्र करने को कहा है।
उक्त कथित भूपेंद्र नामक व्यक्ति का कहना था कि भले ही काम नियम विरूद्ध हो रहे हों पर विकास तो हो रहा है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या अवैध शराब बेचकर, सट्टा खिलवाकर, रंडी नचवाकर, अवैध धंधे कर कोई धनपति बनना चाहे या विकास करना चाहे तो क्या इस तरह का विकास उचित होगा? इस पर उन्होंने कहा जी बिल्कुल, विकास तो विकास है।

ज्ञातव्य है कि गातांकों में हिन्द गजट द्वारा लखनादौन नगर परिषद विशेषकर सीएमओ राधेश्याम चौधरी एवं स्वच्छ, भद्र महिला एवं ग्रहणी की छवि वाली नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमति सुधा राय की दबंगई के चलते कथित तौर पर कृषि उपज मंडी की जमीन पर बिना निविदा काल किए हुए 18 लाख का काम करवाने, संबंधी के ससुराल के एक ठेकेदार को सड़क का काम दिलवाने और बिना एग्रीमेंट, परफार्मेंस गारंटी जमा करवाए ही ठेकेदार को काम चालू करवाने की खबरें प्रकाशित की थीं।

पुलिस पस्त, चोर मस्त

पुलिस पस्त, चोर मस्त

(शरद खरे)

जिला मुख्यालय सिवनी के लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन हराम हो गया है। दिन में अगर घर पर ताला लगाकर दस मिनिट को गए नहीं कि ताला टूट जाता है। रात में अगर देर रात तक घर में ताला लगा है तब रात में ताला टूटने का भय बना रहता है। चोरों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि लोगों का भरोसा अब पुलिस पर से उठता ही प्रतीत हो रहा है। आए दिन होने वाली चोरी की वारदातों ने लोगों को हिलाकर रख दिया है।
शहर के व्हीव्हीआईपी बंग्लों के आसपास के लोग भी अब चोरों की कारस्तानियों से नहीं बच पा रहे हैं तो बाकी की कौन कहे। जिला कलेक्टर के घर जहां चौबीसों घंटे एक चार की गार्ड पहरा देती है, उस बंग्ले के सामने से चार महीने में चार बार चेन स्नेचिंग हो जाए तो इसे क्या कहा जाएगा? जबकि बंग्ले के ठीक सामने पुलिस लाईन है। कहा जा रहा है कि शाम ढलते ही पुलिस लाईन में पुलिसियों की गिनती के उपरांत इलाका सूनसान हो जाता है। कलेक्टर बंग्ले के सामने पुलिस लाईन्स तो पूर्व में रेस्ट हाउस, सर्किट हाउस एवं पश्चिम में सिन्धी कालोनी है। पुलिस लाईन और रेस्ट हाउस वाला इलाका शाम ढलते ही सन्नाटे में डूब जाता है। सिन्धी कालोनी के रहवासी इक्का दुक्का इस सड़क से होकर गुजरते हैं। यह माहौल चोरों विशेषकर राहजनी, चेन स्नेचिंग आदि के कारिंदों के लिए मुफीद होता है।
यही आमल जिले की सुरक्षा के लिए पाबंद जिला पुलिस अधीक्षक के आवास के आसपास का है। जिला कलेक्टर के आवास पर तो नगर सेना के सुरक्षा कर्मी तैनात होते हैं, किन्तु जिला पुलिस अधीक्षक के आवास पर तो बाकायदा पुलिस के जवान तैनात होते हैं, बावजूद इसके पुलिस अधीक्षक के आवास के आसपास राहजनी, चोरी, छेड़छाड़ जैसी घटनाएं आए दिन घट रही हों तो क्या इसे शिव के राजका सुराजमाना जाएगा? जाहिर है नहीं, सिवनी में अराजकता पूरी तरह हावी होती दिख रही है। आला अधिकारियों की विभागों पर पकड़ ढीली पड़ने लगी है।
एसपी बंग्ले के ठीक सामने से दिन दहाड़े अधिवक्ता राजेंद्र सिसोदिया की अर्धांग्नी के गले से सोने की चेन छीनकर भाग जाते हैं लुटेरे! एसपी बंग्ले पर तैनान सुरक्षा कर्मी मूकदर्शक बने खड़े रह जाते हैं? क्या उनका दायित्व महज बंग्ले की सुरक्षा का ही है? एसपी बंग्ले से सटे बाबूजी नगर में चोरियां जमकर हो रही हैं। बीते दिनों एसपी बंग्ले से महज सौ मीटर की दूरी पर नवल टेलीकाम के संचालक के घर से पांच लाख रूपए की चोरी हो जाती है। पुलिस की रात्रि गश्त शोभा की सुपारी ही प्रतीत होती है।
लगता है कि दिखाने के लिए ही पुलिस द्वारा बस स्टेंड, बाहुबली चौराहे, शुक्रवारी चौराहे पर ही अपनी पूरी ताकत झोंकी जाती है। पुलिस के पास चीता मोबाईल (अब ब्रेकर मोबाईल) है, जो मोटर साईकल से गश्त करती है? क्या कभी आला अधिकारियों ने इनसे हिसाब लिया है कि आखिर ये दिन रात कहां घूमकर पेट्रोल फूंक रहे हैं। जिस रात नवल टेलीकाम या अन्य स्थानों पर चोरी की वारदात हुई हैं, उन रातों में कोतवाली पुलिस के नाईट गश्त अधिकारीसे जवाब तलब किया गया है? क्या जिस दिन कलेक्टर बंग्ले के सामने से चेन स्नेचिंग हुई, उस दिन उस बीट के इंचार्ज से पूछताछ हुई? इन सवालों के जवाब तो जिम्मेदार पुलिस अधिकारी ही दे सकेंगे।
शहर के पॉश इलाके में इन दिनों कोचिंग क्लासेस की धूम मची हुई है। शालाओं में अध्यापन के गिरते स्तर से इन कोचिंग संस्थाओं के संचालकों की बन आई है। क्या कभी सांसद, विधायक, जिला प्रशासन, जिला शिक्षा अधिकारी ने इस बात पर चिंतन किया है कि आखिर कोचिंग क्लासेस में भीड़ दिन ब दिन क्यों बढ़ रही है? यह फैशन नहीं है जनाब, कोई भी अभिभावक अपने गाढ़े पसीने की कमाई इस तरह व्यर्थ जाया नहीं करेगा! मतलब साफ है कि शिक्षण संस्थानों में अध्यापन का स्तर हद दरजे तक गिर चुका है। इन कोचिंग क्लासेस में जाने वाली कोमलांगी बालाओं को धुआं उड़ाते नाबालिग, बालिग बाईक सवार अपने जाल में फंसा रहे हैं, फब्तियां कस रहे हैं, अंधेरे का लाभ उठाकर उनके अंगों पर हाथ मार रहे हैं, कभी कभार रोककर कुछ पैसा भी थमा रहे हैं। यह सब हो रहा है, अभिभावक मजबूर है, पर पुलिस इनकी मजबूरी पर अट्टहास लगाती दिख रही है।
जिले में जुंए, सट्टे, विशेषकर क्रिकेट सट्टे, अवैध मदिरा के कारोबार, गर्म गोश्त के व्यापार का जमकर जोर है। जब तब पुलिस द्वारा इस तरह की वारदातों मंें लिप्त लोगों के पकड़े जाने की विज्ञप्तियां जारी कर पुलिस अपनी पीठ थपथपा लेती है, किन्तु क्या जमीनी हकीकत से पुलिस के आला अधिकारी अनजान हैं? जाहिर है नहीं, पुलिस के पास अपना खुफिया तंत्र होता है। एक वाक्ये का जिकर यहां लाजिमी होगा, पूर्व में प्रशिक्षु आईपीएस सिद्धार्थ बहुगुणा की तैनाती के दौरान एक सिपाही इसलिए निलंबित हुआ क्योंकि उसने एसडीओपी सिद्धार्थ बहुगुणा के नाम से एक कबाड़ी से रिश्वत ले ली थी। बात बढ़ी और ईमानदार अधिकारी ने किसी के सामने घुटने नहीं टेके और सिपाही को निलंबित किया। इस तरह के अनेक मामले हैं जो आला अधिकारियों के संज्ञान में आते होंगे पर उन पर पता नहीं क्यों कार्यवाही नहीं हो पाती है।

यह जिले का सौभाग्य है कि जिला कलेक्टर भरत यादव एवं जिला पुलिस अधीक्षक मिथलेश शुक्ला ना केवल संवेदनशील वरन् दूरदृष्टा भी हैं। एसपी मिथलेश शुक्ला को लंबा प्रशासनिक अनुभव है, उनकी तैनाती के उपरांत लग रहा था कि जिले में अमन चैन कायम हो सकेगा, और कुछ हद तक हुआ भी। दोनों ही विभागीय प्रमुखों से यही अपेक्षा की जा सकती है कि कम से कम नागरिकों का दिन का चैन और रात की नींद बरकरार रहे ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित अवश्य की जाए . . .।

बुधवार, 21 अगस्त 2013

चोर मस्त, पुलिस पस्त, हो गई पांच लाख की चोरी

चोर मस्त, पुलिस पस्त, हो गई पांच लाख की चोरी

एसपी बंगले से महज सौ मीटर दूर हुई चोरी की वारदात, कलेक्टर बंगले के सामने हो चुकी चार बार चैन स्नेचिंग

(जितेश अवधवाल)

सिवनी (साई)। सिवनी शहर में चोरों के हौसले दिन ब दिन बुलंद होते जा रहे हैं। कोतवाली पुलिस पूरी तरह मुस्तैद होने का दावा करते हैं, नगर कोतवाल शिवराज सिंह। जिले के दो वरिष्ठ अधिकारियों के आवास के आसपास ही चोर और लुटेरे घटनाओं को कारित कर पुलिस की व्यवस्थाओं को सरेआम चुनौति देकर उसके के दावों की पोल खोल रहे हैं।
सिवनी में चुस्त और मुस्तैद पुलिसिंग की कलई उस वक्त खुल गई जब अज्ञात चोर, एसपी बंगले से महज 100 मीटर दूरी पर स्थित एक सूने घर का ताला तोड़कर वहां से लगभग 5 लाख रूपए नगद ले उड़े। यह वारदात रात लगभग एक से दो बजे के बीच की बताई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार एसपी बंगले के सामने महज कुछ दूरी पर नवल टेलीकॉम के संचालक नवल किशोर ठाकुर निवास करते हैं। पिछले लगभग आठ दस दिन से उनका परिवार नागपुर में था। उनके एक मकान का निर्माण अन्यत्र हो रहा है जिसके लिए वे रोजाना सुबह ही घर से चले जाया करते थे।
नवल किशोर ने बताया कि वे अपने परिवार को लेने नागपुर गए थे। अमूमन वे जब भी बाहर जाया करते थे रात्रि में बारह बजे तक आ ही जाया करते थे। गत रात्रि नागपुर में बसों में जबर्दस्त भीड़ होने के चलते उन्हें काफी देर बाद बस मिली और वे उसमें बैठकर सिवनी आए। सिवनी में बस ने यात्रियों को बायपास पर उतार दिया। (सिवनी में बस द्वारा यात्रियों को बायपास पर उतारा जाना साफ करता है कि न्यायालयों के रोक के आदेश के उपरांत भी सिवनी से होकर अवैध यात्री बसों का संचालन बेखटके जारी है)
प्राप्त जानकारी के अनुसार जैसे ही नवल ठाकुर वहां उतरे उन्हें उनके एक परिचित पुलिस कर्मी मिल गए जिनके साथ वे घर आए। उन्होंने बताया कि लगभग चार बजे वे घर पहुंचे तो उन्होंने घर के बाजू की लाईट जली देखी। वे आशंकित हो गए और बाजू के दहलान से पीछे अंदर झांका तो उन्हें वहां की लाईट भी जली मिली।
उनके साथ आए पुलिस कर्मी के साथ वे राड लेकर अंदर घुसे तो उन्होंने पाया कि घर के मुख्य द्वार के दो ताले जिसमें एक सेंटर लॉक था टूटा हुआ था एवं घर का सारा सामान बिखरा हुआ था। उन्होंने बताया कि उनके घर में अलमारी में रखे चार लाख पचहत्तर हजार रूपए तथा लगभग पच्चीस हजार रूपए जो अन्य रखे थे वह चोर ले उड़े। चोरों ने उनके घर की एक एक दराज, एक एक सूटकेस यहां तक कि खाद्य सामग्री की भी तबियत से तलाशी ली।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस चोरी में मुख्य द्वार के दरवाजे के दो ताले जिस तरह से तोड़े गए हैं उसे देखकर लग रहा है कि यह किसी एक्पर्ट चोर गेंग का ही कारनामा है। मुख्य द्वार का कुंदा ही तोड़ दिया गया है। इसके साथ ही साथ गोदरेज कंपनी का सेंटर लॉक भी जो काफी मजबूत माना जाता है को पूरी तरह उखाड़ दिया गया है।
वहीं दूसरी ओर नवल ठाकुर के घर के सामने स्थित प्लाई जोनके सीसी टीवी केमरे के फुटेज में एक अर्मडा जैसा दिखने वाला चार पहिया वाहन कुछ देर के लिए नवल ठाकुर के घर के सामने रूकता प्रतीत हो रहा बताया जा रहा है। कंप्यूटर की घड़ी में उस समय एक बजकर नौ मिनिट होना बताया जा रहा है। इसके बाद एक बजकर चौदह मिनिट पर नवल ठाकुर के बाजू की लाईट जलना बताया जा रहा है।
अपरान्ह लगभग दो बजे तक पुलिस का दल एक बार मौके पर जाकर वापस आ गया था। बाद में नगर निरीक्षक शिवराज सिंह (9425149768) से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि डॉग स्कॉट इसलिए मौके पर नहीं भेजा जा सकता है, क्योंकि डॉग बीमार है एवं इलाज के लिए भोपाल गया है। साथ ही फिंगर पिं्रट एक्सपर्ट के संबंध में नगर निरीक्षक ने कहा कि वह देहात गया है, वापस आते ही मौके पर पहुंच जाएगा। लगभग ढाई बजे फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट वहां पहुंचे और अपना काम किया।

बारापत्थर में हुई चोरी ने एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। गौरतलब है कि 15 अगस्त को कटंगी रोड में स्थित फईम खान के सूने मकान में भी चोरों ने ताला तोड़कर जेवर ले उड़ा थे। इस चोरी से इस बात पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है कि क्या रात में पुलिस गश्त महज शोभा की सुपारी बनी हुई है।

अदालत का भी खौफ नहीं रहा नगर परिषद् लखनादौन को!

अदालत का भी खौफ नहीं रहा नगर परिषद् लखनादौन को!

स्थगन के बाद चलता रहा काम, एसडीएम, विधायक रहे मूकदर्शक, दबंगई के साथ काम कर रही नगर परिषद् लखनादौन!

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनंी (साई)। लखन कुंवर की नगरी लखनादौन की नगर परिषद् पूरी दबंगई पर उतर आई है और इसकी दबंगई के सामने लखनादौन में पदस्थ अनुविभागीय दण्डाधिकारी लता पाठक के साथ ही साथ विधायक श्रीमती शशि ठाकुर भी अपने आप को असहाय ही महसूस कर रही हैं।
वैसे तो नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती सुधा राय की छवि एक बेहतर ग्रहणी और समझदार भद्र महिला की है, किन्तु चर्चा है कि नगर परिषद् लखनादौन के अध्यक्ष पद पर बैठी एक महिला श्रीमती सुधा राय की दबंगई इस कदर बढ़ गई है कि उसके सामने दो महिलाएं (एसडीएम लता पाठक और विधायक शशि ठाकुर) कुछ भी करने कहने में सक्षम नजर नहीं आ रही हैं। मामला चाहे पेट्रोल पंप चौराहे से रोटा नाला तक के सड़क निर्माण का हो या सब्जी मण्डी के निर्माण का, हर मामले में नगर परिषद् की दबंगई से सभी हत्प्रभ हैं।

सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का!
नगर परिषद् लखनादौन के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि दरअसल, जिस स्थान पर नगर परिषद् द्वारा सब्जी मण्डी का निर्माण करवाया जा रहा है वह जगह कृषि उपज मण्डी के स्वामित्व वाली है। इस जमीन पर पूर्व में तत्कालीन नगर परिषद् अध्यक्ष दिनेश राय उर्फ मुनमुन के कार्यकाल में अतिक्रमण कर लिया गया था, जबकि नगर परिषद् का काम अतिक्रमण हटाने का होता है। लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने वाले ही अतिक्रमण पर अमादा हो जाएं तो कहना ही पड़ेगा, कि सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का।

महज 6 महीने के लिए ली थी जमीन
उधर, कृषि उपज मण्डी समिति लखनादौन के सूत्रों का कहना है कि तत्कालीन नगर परिषद् अध्यक्ष दिनेश राय उर्फ मुनमुन के अध्यक्षीय कार्यकाल में जब इस मण्डी का मामला गर्माया तब नगर परिषद् लखनादौन ने बैक फुट पर आकर इस जमीन को कृषि उपज मण्डी से महज 6 माह के लिए उपयोगार्थ चाही गई थी। सूत्रों की मानें तो अपने कौलके पक्के दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने इस जमीन को 6 माह के उपयोग के बाद कृषि उपज मण्डी लखनादौन को वापस करने का लिखित आश्वासन भी दिया था, सूत्रों ने कहा कि वे अपना वचन नहीं निभा पाए।

पहले बिल्ली फिर बन गए शेर
नगर परिषद् लखनादौन द्वारा कथित तौर पर कृषि उपज मण्डी लखनादौन की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। जब यह मामला उलझा तब नगर परिषद् लखनादौन ने अपने आप को निरीह दीन हीन बताया और भीगी बिल्ली बन गया, और इसके उपरांत एक बार फिर परिस्थितियां बदलते ही नगर परिषद् शेर की तरह दहाड़ मारने लगी। चर्चा तो यहां तक है कि लखन कुंवर की नगरी के एक चर्चित ठेकेदार ने यह तक कह डाला है कि नहीं होगी जमीन वापस जो उखाड़ते बने उखाड़ लो

हाई कोर्ट, एसडीएम कोर्ट का है स्थगन!
जिस जमीन पर लखनादौन नगर परिषद् की अध्यक्ष श्रीमती सुधा राय ने गाजे बाजे के साथ कार्यक्रम किया है, जिस सब्जी मण्डी का लोकार्पण होकर मीडिया में समाचार और फोटो छपवाए गए हैं, उस सब्जी मण्डी पर माननीय उच्च न्यायालय और एसडीएम कोर्ट का स्थगन है। लखनादौन नगर परिषद् शायद भारत गणराज्य का हिस्सा नहीं है तभी तो दो दो अदालतों के स्थगन को दरकिनार कर नगर परिषद् अध्यक्ष श्रीमती सुधा राय ने इसका न केवल लोकार्पण कर दिया वरन् बताते हैं कि स्थगन के बाद भी वहां काम जारी रखा। इस मामले को एसडीएम लता पाठक के संज्ञान में लाने के बाद भी नतीजा सिफर ही निकला है।

रातों रात हुआ काम, एसडीएम बनीं शोभा की सुपारी
कृषि उपज मण्डी समिति लखनादौन के सूत्रों ने बताया कि एसडीएम कोर्ट के स्थगन मिलने के साथ ही नगर परिषद् लखनादौन की अध्यक्ष श्रीमती सुधा राय ने इस मण्डी को नगर परिषद् की संपत्ति मानकर रातों रात काम करवाने के आदेश दिए। एसडीएम कोर्ट के निर्देश को धता बताकर श्रीमती सुधा राय ने दबंगई के साथ लखनादौन में नियम विरूद्ध काम करवाते हुए कृषि उपज मण्डी की जमीन पर सब्जी मण्डी का निर्माण करवा दिया।

आडिट में कैसे होगा पास!

अब दूसरे की जमीन के मालिकाना हक के बाद इसमें नगर परिषद् द्वारा कराए गए काम को अंकेक्षण विभाग (आडिट डिपार्टमेंट) के सामने आखिर नगर परिषद् इसे कैसे दर्शाएगी। इस काम का भुगतान भी हो गया बताया जा रहा है, जबकि इस जमीन का मालिकाना हक कृषि उपज मण्डी का बताया जा रहा है। नगर परिषद् लखनादौन की अध्यक्ष श्रीमती सुधा राय की दबंगई के सामने दो अन्य महिलाएं पहली एसडीएम लता पाठक और दूसरी विधायक श्रीमती शशि ठाकुर भी अपने आप को असहाय ही महसूस कर रही हैं।