गुरुवार, 1 नवंबर 2012

शील भंग करने पर 25 किलो चांवर प्रतिमाह की सजा!


शील भंग करने पर 25 किलो चांवर प्रतिमाह की सजा!

(आंचल झा)

रायपुर (साई)। एक युवती की अस्मत लूटने पर सजा के तौर पर चांवल देने का अनोखा मामला प्रकाश में आया है। कसडोल में एक युवती की इज्जत लूटने की सजा क्या हो सकती है? कानून में भले ही इसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है। लेकिन, यही मामला समाज के प्रमुख लोगों के बीच बेहद मामूली कैसे हो सकता है। इसकी ताजा मिसाल कसडोल में देखने को मिली है।
यहां समाज के ठेकेदारों ने बलात्कार के आरोपी को महज 250 रूपए महीना और 25 किलो प्रतिमाह चावल पीडिता को देने की सजा दी है। बलात्कार जैसी गंभीर घटना की ये अदना सजा किसी मजाक से कम नहीं हो सकती, वह भी उस स्थिति में जब पीडिता छह माह के गर्भ से है। हाल ही में आहूत निषाद समाज की बैठक में कुछ इसी तरह का फैसला आरोपी को सुनाया गया। जहां एक 65 वर्षीय वृद्ध को अपनी नातिन की उम्र की युवती का बलात्कार करने और लगातार उसका आठ माह तक दैहिक शोषण करने की यही सजा सुनाई गई।
युवती के गर्भवती होने पर गांव में बुलाई गई बैठक में आरोपी ने अपना अपराध कबूल करते हुए युवती को अपनाने की बात कही। लेकिन बाद में वह अपने वादे से मुकर गया। समाज के प्रमुख लोगों ने बैठक में आरोपी के प्रति दरियादिली दिखाते हुए युवती को हर माह मात्र 200 रूपए और 25 किलो चावल देने का फरमान जारी कर दिया। किसी ने पीडित युवती के पेट में पल रहे छह माह बच्चे की सुध नहीं ली।
थाने में रिपोर्ट लिखाने गई पीडित युवती को पुलिस ने डांट-डपटकर भगा दिया। पत्रिका के हस्तक्षेप के बाद थाने में आरोपी के खिलाफ धारा 376 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया। दरअसल, कसडोल से 65 किमी दूर रामपुर (कोट) में कोल फील्ड के रिटायर कर्मचारी बालाराम केंवट (65) ने अपने गांव की नातिन की उम्र की दूर की रिश्तेदार से बलात्कार किया और शादी का झांसा देकर आठ माह तक दैहिक शोषण करता रहा।

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