मंगलवार, 27 अप्रैल 2010

अक्षय को मदद चाहिए....

अक्षय को मदद चाहिए....

एक युवा जो जीवन जीने के लिये संघर्ष कर रहा है जी हां मैं अक्षय कात्यानी जिसके इलाज़ हेतु मात्र दो लाख रुपयों की ज़रूरत है विस्तृत जानकारी इन लिंक्स पर प्राप्त की जाए और अविनाश जी की तरह हम मदद कर सकतें है

अविनाश वाचस्पति - कुछ दिनों से देख पढ़ रहा हूं। पर आज इस पोस्‍ट में खाता संख्‍या संबंधी निम्‍न जानकारी मिल गई है।

Name- Sudhir Kumar Katyayani,

Account No.- 09322011002264,

Bank Name- Oriental Bank of Commerce,

Branch- Arera Colony Branch, Bhopal (M.P.)

कल मतलब मंगलवार को ही मैं इसमें एक हजार रुपये जमा कर रहा हूं। एक शुरूआत है। आप भी अगर आर्थिक रूप से सक्षम हैं तो ऐसा ही नेक कदम उठाएं। मैं अतुल पाठक से तो परिचित नहीं हूं परन्‍तु मदद करने के लिए परिचितता आवश्‍यक नहीं है। मुझे यह भी नहीं लगता कि कोई सरकारी मदद मिल सकती है, मिल सकेगी। पर उसकी उम्‍मीद क्‍यों करें हम, हम तो बस शुरू हो जाएं अभी।

जो भी सक्षम हैं और मदद करने का जज्‍बा रखते हैं। हम अपनी बेमर्जी से अपनी जेब तो कटवा सकते हैं। अपना वर्षों से संचित माल-असबाब तो लुटवा सकते हैं। पर ऐसे मौकों पर चुप्‍पी क्‍यों साध लेते हैं ? वैसे निश्चित रूप से मदद पहुंचना आरंभ हो चुकी होगी।

तो हाथ मत बांधिए

कतार बांधिए

और बांधिए बंधन ऐसा

जिस पर मानवता

कर सके गर्व

ऐसा निभायें धर्म

सबसे बड़ा मानवधर्म

इसे अनदेखा मत कीजिए

अपने मन से पूछिए

वो आपकी नेक विचारों की

अवश्‍य तस्‍दीक करेगा।

यह मत सोचिए कि मेरे एक हजार रुपये से क्‍या होगा ? एक हजार भी नहीं चाहिए सिर्फ एक हजार रुपये देने वाले 200 इंसान चाहिएं। नुक्‍कड़ पर अवश्‍य ही 50 इंसान तो मिल सकेंगे। चाहते तो सब होंगे मदद करना। पर 50 ने भी कर दी तो हो गई है शुरूआत। न भी हो, पर मैं क्‍यों रूकूं, मैं तो अपना कर्म करता चलूं। मालूम नहीं दिन कितने हैं, पर दिनों की प्रतीक्षा क्‍यों करें, आज ही इस नेक काम को क्‍यों नहीं करें

BLOGER MITRA GIRESH BILLORE SAYS :

मेरी सारी उम्र ले ले यम राज़ किंतु एक मां को संतान का तिल तिल जीवन रसता न दिखाये आज सारे ब्लागर्स जो जितना भी कर रहें है उनको प्रणाम . अक्षय कौन है किसका बेता क्या है सब सेकण्डरी हो गया बस लगता है धन्वंतरी कहें:”आयुष्मान भव:” 
टीवी पत्रकार अक्षय को बचा लीजिए, वह जीना चाहता है

अक्षय कात्यानी की मदद हेतु एकाउंट नम्बर  09322011002264 of ORIENTAL BANK OF COMMERSE में सहयोग राशि जमा कीजिये


योगेश पाण्डेय - 09826591082,

सुधीर कत्यानी (अक्षय के पिता) - 09329632420,

अंकित जोशी (अक्षय के मित्र) - 09827743380,09669527866

जब भोपाल भर के पत्रकार इस साथी की हालत को लेकर निद्रामग्न थे....एक चैनल के पत्रकार की स्टोरी को उस क्षेत्रीय चैनल ने ड्रॉप कर दिया....तब सीएनईबी के भोपाल संवाददाता ने इस ख़बर को न केवल कवर किया....बल्कि चैनल ने अपने नैतिक दायित्व को भली भांति निभाते हुए इस मार्मिक व्यथा गाथा को अपील के साथ प्रसारित किया...जिसका असर भी दिखना शुरू हो गया है....सीएनईबी न्यूज़ के संवाददाता...से....सम्पादक तक सभी इसके लिए बधाई के पात्र हैं.....

सोमवार, 26 अप्रैल 2010

अडवाणी युग की समाप्ति का आगाज

ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

अडवाणी युग की समाप्ति का आगाज

1980 में अस्तित्व में आई भाजपा ने अब अटल आडवाणी युग की बिदाई का आगाज कर ही दिया है। भाजपा के पितृ संगठन संघ को लगने लगा था कि अटल आडवाणी का नाम पार्टी से बडा होकर उभर रहा था, संघ काफी दिनों से इस प्रतीक्षा में था कि भाजपा के प्रतीक चिन्ह कमल के इन नेताओं के समक्ष बौने होते स्वरूप को एक बार फिर विशालकाय बनाकर समूचे दल को इसकी छत्रछाया में आकार दिया जाए। पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह के समय भी इस तरह के प्रयास किए गए पर सफल नहीं हो पाए। इस बार नितिन गडकरी के पहले प्रभावी प्रदर्शन में मंच पर पहली मर्तबा अटल आडवाणी सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के चित्रों के स्थान पर कमल का फूल ही दिखाई दिया, जिसे अटल आडवाणी युग के औपचारिक पूर्ण विराम के तौर पर देखा जा रहा है। पहली बार भाजपा के कार्यकर्ताओं ने किसी नेता विशेष के नारे लगाने से परहेज किया, और भाजपा ज़िन्दाबाद और भारत माता की जय के गगनभेदी नारे लगाए। इसके अलाव इस रैली में एक और महत्वपूर्ण बात उभर कर सामने आई है, वह है गडकरी का सबसे अन्त में दिया गया भाषण। अमूमन अन्त में सबसे वरिष्ठ नेता का उद्बोधन हुआ करता रहा है। यह पहला मौका था जबकि आडवाणी की उपस्थिति के बावजूद भी नितिन गडकरी ने सबसे अन्त में अपनी बात रखी। पार्टी में चल रही चर्चाओं के अनुसार अटल जी अब सक्रिय रहे नहीं और आडवाणी को उनकी मर्जी के खिलाफ ही बलात ही पाश्र्व में ढकेलने की तैयारी चल रही है।
 
कमल नाथ का दांव रमेश चित्त

जब देश के भूतल परिवहन मन्त्री कमल नाथ को सरफेस ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री मिली तब लोग मान रहे थे कि यह नाथ के पर कतरने के लिए उनके कद से छोटा विभाग दिया गया है, साथ ही इस मन्त्रालय से जहाजरानी को अलग कर दिया गया था। कहा जा रहा है कि दस जनपथ में अपनी खासी दखल का लाभ उठाकर रमेश ने कमल नाथ के पर कतरने का प्रयास किया था। चूंकि पिछली बार नाथ वाणिज्य मन्त्री थे, तो रमेश उनके अधीन राज्य मन्त्री। अब रमेश वन एवं पर्यावरण मन्त्री जैसे महात्वपूर्ण विभाग को पाकर कमल नाथ के आगे वाली कुर्सी पर काबिज हो गए हैं। पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि कमल नाथ ने अपनी राजनैतिक चाल से अब वन एवं पर्यावरण मन्त्रालय को दो फाड करने का बीजारोपण कर दिया है। पीएमओ ने इसके लिए सैद्धान्तिक सहमति दे दी है। आने वाले समय में रमेश के पास या तो वन बचेगा या पर्यावरण महकमा।
 
किसे सच माने किसे माने झूठ

देश का दुर्भाग्य है कि नौकरशाहों के भरोसे पर चलने वाले जनसेवकों द्वारा विरोधाभासी वक्तव्यों की बौछार की जाती है, देश की जनता संशय में है कि किस वक्तव्य को वह सच माने किसे माने झूठ। मामला देश के वन एवं पर्यावरण मन्त्री जयराम रमेश के श्रीमुख से निकले वक्तव्यों का है। कुछ दिनों पूर्व जयराम रमेश ने बिना दस्ताने पहने यूनियन काबाZईड के कचरे को हाथ में उठाकर मीडिया को फोटो जारी करते हुए कहा था कि इससे कोई खतरा नहीं है। अब राज्य सभा में अपनी ही उस बात से वे पलट गए हैं। रमेश ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा है कि केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड ने भोपाल गैस त्रासदी स्थल के आसपास की जमीन, भूमीगत जल में पाए जाने वाले तत्वों का अध्ययन किया और पाया है कि वहां धातुओं, कीटनाशकों और कुछ हानिकारक जैव योगिक मौजूद हैं। अब समझ में नहीं आता कि भारत गणराज्य के वन एवं पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण ओहदे पर बैठे एक जिम्मेदार मन्त्री के भोपाल यात्रा के दौरान दिए वक्तव्य को सच माना जाए या राज्य सभा में कही बात को।
 
मितव्ययता : मन्त्रियों का विदेश दौरा खटाई में

पहली बार विपक्ष सरकार को पूरी तरह घेरने के मूड में दिखाई दे रहा है। इस बार विपक्ष ने कटौती के प्रस्ताव की तैयारियां आरम्भ कर दी हैं। विपक्ष की इस कवायद ने सरकार के पसीने छुडा दिए हैं। सबसे ज्यादा वे जनसेवक मन्त्री खौफजदा हैं, जिनका आधे से ज्यादा समय सरकारी दौरों के नाम पर विदेशों के सैर सपाटे में गुजरता है। विपक्ष के तीखे तेवर देखकर लगने लगा है कि कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी की साख का प्रश्न बन चुके महिला आरक्षण बिल और प्रधानमन्त्री की प्रतिष्ठा से जुडे नाभिकीय क्षतिपूर्ति उत्तरदायित्व विधेयक शायद ही इस बार परवान चढ सके। सरकार की पहली प्राथमिकता इस बार वित्त विधेयक को पास करावाने की है। कांग्रेस के मैनेजरों को निर्देश दिए गए हैं कि वित्त विधेयक के पास होते समय एक एक मन्त्री सांसद को सदन में अनिवार्य तौर पर उपस्थित रखा जाए। वजीरे आजम 28 और 29 अप्रेल को दक्षेस सम्मेलन के लिए भूटान में तो विदेश मन्त्री कृष्णा 27 को थिंपू में और मिल्लकार्जुन खडगे भी विदेश यात्रा पर रहेंगे। इसके अलावा अनेक मन्त्रियों की विदेश यात्रा के प्रस्ताव पीएमओ के पास लंबित हैं। पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि जब तक वित्त विधेयक पास नहीं होता किसी भी मन्त्री को सदन से किसी भी कीमत पर गैरहाजिर नहीं रहने दिया जाएगा।
 
रतन खत्री को पीछे छोडा मोदी ने

देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई से चलने वाले सट्टा न केवल महाराष्ट्र को अपनी जद में लिए हुए है, वरन् आसपास के सूबों में भी इसका जोर है। इसको चलाता है रतन खत्री नामका एक शख्स। रात नौ बजे ओपन तो बारह बजे क्लोज। एक अंक अगर लग गया तो एक का नौ गुना और अगर दोनों अंक अर्थात जोडी आ गई तो सवा रूपए के सौ रूपए। है न फायदे का सौदा। अरे हुजूर सवा रूपए में सौ कण्डे भी नहीं आते हैं। आईपीएल के विवादित कमिश्नर ललित मोदी के दमाद गौरव बर्मन ने सारे नियम कायदे ताक पर रख दिए हैं। आईपीएल के आधिकारिक मीडिया पार्टनर ग्लोबल क्रिकेट वेंचर्स (जीसीवी) की वेवसाईट पर सरेआम सट्टा खिलाया जा रहा है। जीसीवी की वेवसाईट क्रिकेट डाट काम पर चलने वाले सट्टे में टीमों के भाव अलग अलग तय किए जाते हैं, जो समय के साथ बदलते रहते हैं। मजे की बात यह है कि जीसीवी में ललित मोदी के दमाद गौरव बर्मन की बडी हिस्सेदारी है। अरे भई कहावत है न समरथ को नहीं दोष गोसाईं, सो मोदी और बर्मन पर कार्यवाही होने की उम्मीद करना बेमानी ही है।
 
अब लगा न तीर कलेजे पर

देश के गरीब गुरबे बिजली के बिना किस तरह की परेशानी झेलते हैं, इस बात का अहसास देश की सबसे बडी पंचायत में जनसेवकों को भी हुआ और उनका पसीने से हाल बेहाल हो गया। सोमवार 19 अप्रेल को संसद के चलते समय एक दर्जन से अधिक बार बिजली गोल हुई। कल तक गरमी की मार झेलने वाले आज एयर कण्डीशनर के बिना पग न धरने वाले जनसेवकों के तेवर इस दौरान देखते ही बने। यद्यपि यह कटौती सीपीडब्लूडी के बिजली स्टेशन में तकनीकि गडबडी के कारण हुई बताई जा रही है, पर गरमी में बिजली के बिना पसीने के दो चार सांसदों के हाल बेहाल हो गए। वैसे देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में बिजली की आंख मिचौली नई बात नहीं है। संसद में जब बिजली ने अपना ताण्डव दिखाया तो बिहार के सांसद के मुंह से बरबस ही निकल पडा ``अब तीर लगा कलेजे पर, अरे भई अब तो अहसास कर लो कि देश के गरीब गुरबे किस तरह बिजली के बिना परेशान होते होंगे।

आई पी के परिणाम : विद्या पास, कुलपति फेल!

जेसिका लाल प्रकरण में देश की सबसे बडी अदालत उधर अपना फैसला सुना रही थी, वहीं इससे महज एक किलोमीटर दूर गुरू गोविन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में जेसिका पर ही बन रही फिल्म ``नो वन किल्ड जेसिका`` पर जबर्दस्त हंगामा हुआ। दरअसल यूनिवर्सिटी के अन्दर निदेशक राज कुमार गुप्ता और अभिनेत्री विद्या बालान शूटिंग में व्यस्त थे। यूनिवर्सिटी का दरवाजा बन्द था, और वहां तैनात थे मसल मेन। इसी बीच वहां के कुलपति आन पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद भी दरवाजा नहीं खोला गया। कुलपति प्रो.डी.के.बन्दोपाध्याय का पारा सातवें आसमान पर जा पहुंचा। उन्होंने अन्दर बैठे अधिकारियों से संपर्क किया तब जाकर कुलपति को अपने ही विश्वविद्यालय में प्रवेश मिल सका। उधर चर्चा है कि सेंटर फार मीडिया स्टेडीज के एक कंसलटेंट ने शूटिंग के लिए पन्द्रह लाख रूपए लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को अंधेरे में रखकर इस कारनामे को अंजाम दिया है। बहरहाल जो भी हो विश्वविद्यालय के छात्र पूरे प्रसंग के बाद कुटिल मुस्कान के साथ यह कहते जरूर नज़र आए कि आईपी यूनिवर्सिटी का रिजल्ट आ गया। विद्या बालान पास और प्रो.डी.के.बन्दोपाध्याय फेल।
 
रेल में पानी नहीं था तो कौन सा पहाडा टूट गया!

देश के एक जिम्मेदार मन्त्री कमल नाथ कहते हैं कि देश के लोग ज्यादा खाने लगे हैं सो मंहगाई बढ रही है, मंहगी चीनी पर शरद पंवार कहते हैं कि ज्यादा चीनी खाने से शुगर हो जाती है, और अब रेल मन्त्री ममता बनर्जी ने भी इसी परंपरा को आगे बढाते हुए कह दिया कि रेल में अगर पानी नहीं था तो कौन सा पहाड टूट पडा है। मामला राज्यसभा में माकपा की वृन्दा करात ने उठाया कि विकलांग दिल्ली प्रदर्शन करने आ रहे थे, इसके लिए उन्होंने 17 लाख रूपए में विशेष रेलगाडी बुक की थी। इस गाडी में शौचालयों में पानी तक नहीं था, और वह 12 घंटे विलंब से पहुंची, इसके बावजूद भी ममता बनर्जी महादुरन्तो चलाने की बात करती हैं। वृन्दा के आरोप से बोखलाकर ममता बनर्जी तैश में आ गईं और बोली अगर रेल में पानी नहीं था तो कौन सी आफत आ गई। अरे कोई तो ममता दीदी को समझाए कि जब कोई पैसा देकर किसी चीज को लेता है तो वह उपभोक्ता हो जाता है और उपभोक्ता को पूरा सन्तोष देना किसी ओर का नहीं सेवा प्रदाता का ही काम है। अगर विकलांगों ने उपभोक्ता फोरम का सहारा ले लिया तो लेने के देने भी पड सकते हैं ममता दी।
 
मैं तो पीकर टुल्ली हो गया यारां

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सरमायादार प्रफुल्ल पटेल के अधीन काम करने वाले ड्राईवर और ट्रक चालकों के बीच अब कोई समानता नहीं रह गई है। ट्रक चलाने वाले भी दारू के नशे में टुन्न होकर गाडी चलाते हैं और आसमान में हवाई जहाज उडाने वाले पायलट भी नियम कायदों को ताक पर रखकर दारू में टुल्ली होकर हवाई यात्रियों की जान जोखम में डालने से नहीं चूक रहे हैं। जी हां यह बात झूठ नहीं है, संचालक नागर विमानन (डीजीसीए) ने पिछले साल विभिन्न एयर लाईंस के 42 पायलट्स को नशे में टुन्न होकर विमान उडाते पाया। सूचना के अधिकार कानून के तहत यह जानकारी सामने आई है। यद्यपि डीजीसीए ने एयरलाईंस के नामों का खुलासा नहीं किया है, पर यह गम्भीर चूक की श्रेणी में ही आता है। सावधानी घटी दुघZटना घटी का जुमला सडक, रेल, पानी या आकाश मार्ग से यात्रा करने पर चालकों के लिए ही लागू होता है। वैसे एयरक्रफ्ट नियम 24 के अनुसार उडान के 12 घंटे पहले क्रू के सदस्यों के लिए मद्यपान प्रतिबंधित है। और एसा करते पाए जाने पर न्यूनतम चार सप्ताह के लिए ग्राउण्डेड कर दिया जाता है।

प्रियंका से क्या पे्ररणा ली नलिनी ने

राजीव गांधी की हत्या के समय चर्चा में आई नलिनी धीरे धीरे चर्चाओं से गायब हो गई थी। वह एक बार फिर चर्चा में तब आई जब कांग्रेस की नज़रों में देश की युवरानी प्रियंका वढेरा उससे मिलने जेल में गई। प्रियंका किस उद्देश्य से वहां गई थी, यह बात तो वे ही जाने पर कांग्रेस के मीडिया मैनेजरों ने इस बात को खासी पब्लिसिटी दिला दी। फिर एक बार राजीव गांधी की हत्या के आरोप में उमर केद काट रही नलिनी वेल्लूर की उच्च सुरक्षा वाली जेल में गुमनामी में खो गई। हाल ही में वह एक बार फिर चर्चा में आ गई है, उच्च सुरक्षा वाली जेल की अभैद्य सुरक्षा में सेंध लग गई है। नियमित जांच के दौरान नलिनी के पास एक मोबाईल मिला है, जिससे उसने विदेशों में काल किया है। अब वह मोबाईल उसके पास प्रियंका की मुलाकात के पहले ही था या उसके बाद में आया यह प्रश्न शोध का विषय है। लोग तो यहां तक कहने से नहीं चूक रहे हैं कि प्रियंका ही उससे मिलने गई थी, दोनों सखियां बन गई होंगी सो अब नलिनी अपनी सखी प्रियंका वढेरा से ही बतियाती होगी।
 
नितीश का अंग्रेजी प्रेम

बिहार के मुख्यमन्त्री नितीश कुमार और ब्रितानी हुकूमतकर्ताओं में क्या सामनता है। दोनों में कम से कम एक समानता तो है कि ब्रितानी अपनी मातृभाषा अंग्रेजी को बहुत प्यार करते हैं और नितीश को भी अंग्रेजी से बेहद लगाव है। यकीन नहीं होता न। जनाब मुख्यमन्त्री नितीश कुमार ब्लागर बन गए हैं। वे भी ब्लाग लिखने या लिखवाने लगे हैं। नितीशस्पीक्स डाट ब्लागस्पाट डाट काम पर िक्लक करिए और बिहार के मुख्यमन्त्री नितीश कुमार से रूबरू होईए। हिन्दुस्तान में ब्लाग बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। देश के अनेक ब्लागरों के प्रयास से आज इंटरनेट पर हिन्दी खासी न केवल लोकप्रिय हुई है वरन् हिन्दी को अहम स्थान भी मिल चुका है। आज देश में हिन्दी में लिखने वालों ब्लागर्स की तादाद लाख की तीन दहाई तक पहुंच गई है। इस सबके बाद लोगों को अफसोस यह जानकर होगा कि नितीश ने अपना ब्लाग सिर्फ और सिर्फ एलीट क्लास के लिए बनाया है, मतलब साफ है कि यह आंग्ल भाषा में है। बिहार के गरीब गुरबे क्या इसे पढ पाएंगे इस पर संशय ही है।
 
सांसदों का विदेशी वस्तु प्रेम

महात्मा गांधी जिन्होंने आधी लंगोटी पहनकर देश को ब्रितानियों से मुक्त कराया और स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित किया, क्या आप यकीन कर सकते हैं कि उसी गांधी के देश में आज के जनसेवक सांसद विदेशी वस्तुओं से प्रेम जताने से नहीं चूक रहे हैं। जी हां यह सच है, एक सैकडा से अधिक सांसदों ने विदेशी हथियारों को खरीदकर जता दिया है कि उन्हें देश में बने हथियारों पर कितना यकीन है। सूचना के अधिकार के तहत निकाली गई जानकारी में यह बात उभरकर सामने आई है। पिछले दस सालों में अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर जनसेवकों ने विदेशी हथियारों को जमकर खरीदा। केद्रीय मन्त्री जयप्रकाश जायस्वाल, जनार्दन द्विवेदी, विनोद खन्ना, परनीत कौर, योगानन्द शास्त्री, अबू आसिम आजमी आदि सहित एक सौ से अधिक सांसदों ने विदशी हथियारों पर इत्तेफाक जताया है। दरअसल विदेशों से अवैध तरीके से लाए जाने वाले हथियारों की जप्ती कर राजस्व खुफिया महानिदेशालय, सीमा शुल्क और पुलिस आदि द्वारा इन हथियारों को केवल सरकारी उपयोग के लिए अथवा वित्त मन्त्रालय की स्वीकृति के उपरान्त इनकी नीलामी की जाती है। मजे की बात यह है कि औने पौने दामों में मिलने वाले इन हथियारों को खरीदने के पहले सांसद को इस बात को लिखित तौर पर देना होता है कि उनके पास खरीदी के समय कोई हथियार नहीं है।
 
क्या गौमांस अवैध है हिन्दुस्तान में!

गाय हमारी माता है, गाय की रक्षा के लिए राजनैतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा जब तब बयानबाजी की जाती है, पर लगता है दिल्ली सरकार इससे इत्तेफाक नहीं रखती है। कामन वेल्थ गेम्स के दौरान अतिथियों को गोमांस परोसे जाने को लेकर पिछले दिनों दिल्ली विधानसभा में जमकर रार हुई। शीला दीक्षित सरकार पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने गेम्स के दौरान आने वाले विदेशी महमानों को गोमांस परोसे जाने की सहमति गुपचुप तरीके से दे दी है। विपक्ष का तर्क था कि जब दिल्ली में गोमांस रखने और परोसने तक पर पाबन्दी है तब दिल्ली के मुख्य सचिव कैसे इसकी अनुमति दे सकते हैं। पहले भी गेम्स के दौरान गो मांस परोसे जाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में काफी हद तक जद्दोजहद हो चुकी है।

पुच्छल तारा

देश में निर्वतमान विदेश राज्य मन्त्री शशि थुरूर और आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी के आईपीएल को लेकर हुए विवाद की धूम मची हुई है। हर जगह आईपीएल आईपीएल का ही शोर नज़र आ रहा है। एसी परिस्थियों पर सटीक व्यंग्य करते हुए रायपुर से एन.के.श्रीवास्तव ने ईमेल भेजा है कि देश कह रहा है गरीबी रेखा के नीचे अर्थात बीपीएल बीपीएल, पर नेता हैं कि मानते ही नहीं वे चिल्ला रहे हैं आईपीएल, आईपीएल। गांधी तेरा देश महान।

शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

फोर लेन प्रकरण में मेरा कोई हाथ नहीं :: कमल नाथ


फोर लेन प्रकरण में मेरा कोई हाथ नहीं :: कमल नाथ
 
राजेश ने समस्याओं से आवगत कराया भूतल परिवहन मन्त्री को
 
मुख्यमन्त्री ने किया सिवनी आने का वादा

(लिमटी खरे)
नई दिल्ली 23 अप्रेल। अटल बिहारी बाजपेयी के कार्यकाल की महात्वाकांक्षी स्विर्णम चतुभुZज परियोजना के अंग उत्तर दक्षिण गलियारे में सिवनी जिले में चल रही भ्रामक स्थिति के बारे में पहली बार किसी जनसेवक ने भूतल परिवहन मन्त्री कमल नाथ से बेबाक चर्चा करने का साहस किया है। नगर पालिका परिषद सिवनी के युवा एवं उत्साही अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने भाजपा की दिल्ली रेली के उपरान्त अगले दिन मध्य प्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान और भूतल परिवहन मन्त्री कमल नाथ से चर्चा की।
 
बुधवार को चाणक्यपुरी स्थित मध्य प्रदेश भवन में शाम को मध्य प्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह से राजेश त्रिवेदी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमण्डल ने भेंट की। राजेश त्रिवेदी के साथ भाजपा के नगर उपाध्यक्ष सन्तोष नगपुरे एवं युवा भाजपाई पवन मेंहदीरत्ता ने मुख्यमन्त्री को सिवनी की स्थिति के बारे में आवगत कराया। इस दौरान प्रतिनिधमण्डल ने नगर पालिका परिषद द्वारा नगर विकास, अतिक्रमण विरोधी अभियान, पेयजल योजना, साफ सफाई आदि के बारे में सविस्तार जानकारी दी। राजेश त्रिवेदी द्वारा चिल्हर सब्जी मण्डी के लिए सरकार से दो करोड रूपयों की मांग भी की गई। साथ ही साथ प्रतिनिधिमण्डल ने मुख्यमन्त्री को सिवनी आने का आमन्त्रण दिया। मुख्यमन्त्री ने मुस्कुराते हुए इस आमन्त्रण स्वीकार कर भविष्य में जल्द ही सिवनी आने का आश्वासन दिया गया।
 
गुरूवार अपरान्ह नगर पालिका परिषद सिवनी के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने केन्द्रीय भूतल परिवहन मन्त्री कमल नाथ से चर्चा भी की। कमल नाथ से चर्चा के दौरान सिवनी नगर में ट्रांसपोर्ट नगर की आवश्यकता पर बल देती हुए इसकी मांग रखी। कमल नाथ को सिवनी की सडकों की जानकारी विस्तार से देते हुए राजेश त्रिवेदी ने कहा कि नवीन बायपास के जबलपुर की ओर वाले सिरे से शहर के अन्दर होकर नागपुर वाले सिरे तक जाने वाली सडक को ``माडल रोड`` बनाकर उसका रखरखाव किया जाए। शहर की समस्या को वजनदारी से रेखांकित करते हुए राजेश त्रिवेदी ने कहा कि वर्तमान में चालू एस.के.बनर्जी द्वारा निर्मित बायपास से भारी वाहनों की रसीद काटकर विशेषकर रात में उन्हें शहर के अन्दर से होकर गुजरने की छूट प्रदान की जा रही है, जिससे शहर की सडकें का कचूमर निकल रहा है, इसलिए नवीन बायपास को तत्काल प्रभाव से आरम्भ कराने की मांग उनके द्वारा रखी गई।
 
कमल नाथ के करीबी भरोसेमन्द सूत्रों का दावा है कि सिवनी के दर्द को पहली बार किसी जनसेवक ने कमल नाथ के समक्ष रखा। नपा अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने कमल नाथ से कहा कि जिले की जनता फोरलेन विवाद के लिए कमल नाथ को दोषी मानती है। इस पर कमल नाथ ने छूटते ही कहा कि इस प्रश्न का उत्तर अगर चाहिए तो सिवनी वालों को वन एवं पर्यावरण मन्त्री जयराम रमेश से इसका जवाब लेना चाहिए। कमल नाथ ने कहा कि फोर लेन विवाद प्रकरण में उनका कोई हाथ नहीं है। वे चाहते हैं कि फोरलेन सिवनी से होकर ही जाए, पर पर्यावरण के अडंगे से मामला खटाई में है। इसके अलावा बंजारी घाट में फोंर लेन के रूके काम को जल्द ही आरम्भ कराने का आश्वासन भी कमल नाथ द्वारा दिया गया। कमल नाथ ने कहा कि लखनादौन से बरास्ता जबलपुर रीवा मार्ग के फोरलेन करने की स्वीकृति के बाद इसका प्राक्कलन तैयार करवाया गया है।

गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

मप्र के पांच अन्य अधिकारी पुरस्कृत

मध्यप्रदेश में वन अधिकार अधिनियम 2006 के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिये

मप्र के पांच अन्य अधिकारी पुरस्कृत

प्रधानमन्त्री डा0 मनमोहन सिंह द्वारा सिविल सर्विस डे पर सात अधिकारी सम्मानित

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली, 21 अपै्रल। प्रधानमन्त्री डा0 मनमोहन सिंह ने सिविल सर्वित डे पर आज यहां विज्ञान भवन में उत्कृष्ट कायोंZ के लिये मध्यप्रदेश के सात अधिकारियों को सम्मानित किया। प्रधानमन्त्री डा0 सिंह ने जिन अधिकारियों को सम्मानित किया उनमें अपर मुख्य सचिव श्री ओ0पी0 रावत, प्रमुख सचिव

श्री जयदीप गोविन्द, श्री संजय दुबे, श्रीमती रिश्म शमी, श्री गुलशन बामरा, श्री अनिल ओबेराय और आदिम जाति कल्याण विभाग के अपर संचालक श्री अशोक उपाध्याय शामिल हैं। वन अधिकार अधिनियम 2006 के उत्कृष्ट क्रियान्वयन में श्री ओ0पी0 रावत के नेतृत्व में श्री जयदीप गोविन्द, श्रीमती रिश्म शमी, श्री अनिल ओबेराय और श्री अशोक उपाध्याय ने सराहनीय भूमिका निभाई। वन अधिकार अधिनियम 2006 का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश में बहुत अच्छा हुआ है। मध्यप्रदेश में हुए अच्छे काम को देखने के लिए महाराष्ट्र और गुजरात की टीम ने भी मध्यप्रदेश का दौरा किया था और कार्य को सराहा था।

श्री ओ0पी0 रावत वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन के समय प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण विभाग और श्री जयदीप गोविन्द, आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग के पद पर कार्यरत थे। श्रीमती रिश्म शमी, श्री अनिल ओबेराय और श्री अशोक उपाध्याय वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन के समय आदिम जाति कल्याण विभाग में पदस्थ थे। इन सभी अधिकारियों को संयुक्त रूप से पुरस्कृत किया गया है।

व्यक्तिगत श्रेणी में तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर श्री संजय दुबे को विभिन्न धमोंZ के बीच साम्प्रदायिक सौहार्द बनाने और धार्मिक इमारतों के अतिक्रमण हटाये जाने पर और तत्कालीन कलेक्टर बालाघाट श्री गुलशन बामरा को नक्सल प्रभावित क्षेत्र मेें राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अन्तर्गत आम आदमी की सहभागिता करने पर प्रधानमन्त्री डा0 मनमोहन सिंह ने पुरस्कृत किया।

राष्ट्रपति से मिले चौहान और रोहाणी

राष्ट्रपति से मिले चौहान और रोहाणी

स्विर्णम मध्यप्रदेश बनाने विधानसभा के विशेष सत्र को सम्बोधन के लिए आमन्त्रण

(ब्यूरो कार्यालय)

नई दिल्ली, 22 अपै्रल। मुख्यमन्त्री श्री शिवराज सिंह चौहान और विधानसभा अध्यक्ष श्री ईश्वरदास रोहाणी ने आज यहां नई दिल्ली में राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल से सौजन्य भेंट की। राष्ट्रपति भवन में हुई मुलाकात के अवसर पर संसदीय कार्यमन्त्री श्री नरोत्तम मिश्रा भी उपस्थित थे।

श्री चौहान और श्री रोहाणी ने राष्ट्रपति श्रीमती पाटिल से स्विर्णम मध्यप्रदेश बनाने के लिए विशेष सत्र को सम्बोधित कर मार्गदर्शन देने का अनुरोध किया। राष्ट्रपति महोदया को अवगत कराया गया कि विधानसभा की सर्वदलीय कार्य मन्त्रणा समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय कर राष्ट्रपति जी को विशेष सत्र में बुलाने का आग्रह किया है।

मुख्यमन्त्री श्री चौहान और विधानसभा अध्यक्ष श्री रोहाणी ने श्रीमती पाटिल को अवगत कराया कि मध्यप्रदेश विधानसभा की कार्यवाही के सुचारू संचालन में सभी दलों के नेता दलीय निष्ठा से ऊपर उठकर सहयोग करते हैं। इस कारण विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मार्शल का उपयोग नहीं किया गया। सभी दलों के रचनात्मक सहयोग के कारण विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सभी दलों के विधायक लोकतन्त्रीय अनुशासन में रहकर जनहित की समस्याओं पर विधानसभा में व्यापक बहस करते हैं। राष्ट्रपति श्रीमती पाटिल ने मध्यप्रदेश विधानसभा की गौरवशाली परम्परा की सराहना की।

बुधवार, 21 अप्रैल 2010

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा . . .

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा . . .

कहां गई सुराही, छागल, मटके

पानी का व्यवसायीकरण बनाम राजनैतिक दिवालियापन

पानी माफिया की मुट्ठी में कैद है हिन्दुस्तान की सियासत

(लिमटी खरे)

ब्रितानी जब हिन्दुस्तान पर राज किया करते थे, तब उन्होंने साफ कहा था कि आवाम को पानी मुहैया कराना उनकी जवाबदारियों में शामिल नहीं है। जिसे पानी की दरकार हो वह अपने घर पर कुंआ खोदे और पानी पिए। यही कारण था कि पुराने घरों में पानी के स्त्रोत के तौर पर एक कुआ अवश्य ही होता था। ईश्वर की नायाब रचना है मनुष्य और मनुष्य हर चीज के बिना गुजारा कर सकता है, पर बिना पानी के वह जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता। आज चान्द या मंगल पर जीवन की खोज की जा रही है। इन ग्रहों पर यही खोजा जा रहा है कि अगर वहां पानी होगा तो वहां जीवन भी हो सकता है।

देश की विडम्बना तो देखिए आज देश को ब्रितानियों के हाथों से आजाद हुए छ: दशक से भी ज्यादा का समय बीत चुका है, किन्तु आज भी पानी के लिए सुदूर इलाकों के लोग तरस रहे हैं। अरे दूर क्यों जाते हैं, देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में अलह सुब्बह चार बजे से ही भोर होते होते लोग घरों के बर्तन लेकर नलों पर जाकर पानी भरकर लाने पर मजबूर हैं। दिल्ली के दो चेहरे आपको देखने को मिल जाएंगे। एक तरफ संपन्न लोगों की जमात है जिनके घरों पर पानी के टेंकर हरियाली सींच रहे हैं, तो दूसरी ओर गरीब गुरबे हैं जिनकी दिनचर्या पानी की तलाश से आरम्भ होकर वहीं समाप्त भी हो जाती है।

देश की भद्र दिखने वालीं किन्तु साधारण और जमीनी सोच की धनी रेलमन्त्री ममता बनर्जी ने रेल यात्रियों को सस्ता पानी मुहैया कराने की ठानी है। उनके इस कदम की मुक्त कंठ से प्रशंसा की जानी चाहिए कि कम से कम किसी शासक ने तो आवाम की बुनियादी आवश्यक्ता पर नज़रें इनायत की। देखा जाए तो पूर्व रेलमन्त्री और स्वयंभू प्रबंधन गुरू लालू प्रसाद यादव ने रेल में गरीब गुरबों के लिए जनता भोजन आरम्भ किया था। दस रूपए में यात्रियों को पुडी और सब्जी के पेकेट मिलने लगे। हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं कि लालू प्रसाद यादव की कुल्हड में चाय और जनता भोजन की योजना सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई। वास्तविक धरातल पर अगर देखा जाए तो आम यात्री को न कुल्हड में चाय नसीब है और न ही जनता खाना ही मुहैया हो पा रहा है। चुंनिन्दा रेल्वे स्टेशन पर जनता खाना दिखाकर उसकी तस्वीरों से रेल मन्त्रियों को सन्तुष्ट किया जाता है।

कितने आश्चर्य की बात है कि रेल में जनता खाना कहने को दस रूपए का है, और पीने के पानी की बोतल 12 से 15 रूपए की। इस तरह की विसंगति की ओर किसी का ध्यान गया क्यों नहीं। बहरहाल रेल मन्त्री ने अपने यात्रियों को पांच या छ: रूपए में पानी की बोतल मुहैया करवाने के लिए वाटर फिल्टर और पैकेजिंग प्लांट की शुरूआत कर एक अच्छा कदम उठाया है। देखा जाए तो रेल मन्त्री ममता बनर्जी की इस पहल के दूसरे पहलू पर भी गोर किया जाना चाहिए। जब भारतीय रेल अपने यात्रियों को आधी से कम दर में पानी मुहैया कराने का सोच सकती है तो समझा जा सकता है कि देश में पानी का माफिया कितना हावी हो चुका है कि सरकार पानी जैसी मूल भूत सुविधा के सामने पानी माफिया के आगे घुटने टेके खडी हुई है।

चालीस के पेटे में पहुंच चुकी पीढी के दिलोदिमाग से अभी यह बात विस्मृत नहीं हुई होगी जब वे परिवार के साथ सफर किया करते थे तो साथ में पानी के लिए सुराही या छागल (एक विशेष मोटे कपडे की बनी थैली जिसमें पानी ठण्डा रहता था) अवश्य ही रखी जाती थी। राजकुमार अभिनीत मशहूर फिल्म ``पाकीजा`` में जब राजकुमार रेलगाडी में चढता है तो मीना कुमारी के पास रखी सुराही से पानी पीता है। कहने का तात्पर्य यह कि उस वक्त पानी बेमोल था, आज पानी अनमोल है पर इसका मोल बहुत ज्यादा हो गया है।

कितने आश्चर्य की बात है कि करोडों रूपयों के लाभ को दर्शाने वाली भारतीय रेल अपने यात्रियों पर इतनी दिलदार और मेहरबान नहीं हो सकती है कि वह उन्हें निशुल्क पानी जैसी सुविधा भी उपलब्ध करा सके। आईएसओ प्राप्त भोपाल एक्सपे्रस सहित कुछ रेलगाडियों में वाटर प्यूरीफायर लगाए गए थे, जिसमें एक रूपए में एक लीटर तो पांच रूपए में एक लीटर ठण्डा पानी उपलब्ध था। समय के साथ रखरखाव के अभाव में ये मशीनें अब शोभा की सुपारी बनकर रह गईं हैं।

देश के शासकों द्वारा अस्सी के दशक तक पानी के लिए चिन्ता जाहिर की जाती रही है। पूर्व प्रधानमन्त्री चन्द्रशेखर ने अपनी भारत यात्रा में स्वच्छ पेयजल को देश की सबसे बडी समस्या बताया था। स्व.राजीव गांधी ने तो स्वच्छ पेयजल के लिए एक मिशन की स्थापना ही कर दी थी। इसके बाद अटल बिहारी बाजपेयी ने पानी के महत्व को समझा और गांवों में पेयजल मुहैया करवाने पर अपनी चिन्ता जाहिर की थी। वर्तमान में कांग्रेस के नेतृत्व में ही सरकार चल रही है। इसके पहले नरसिंहराव भी कांग्रेस के ही प्रधानमन्त्री रहे हैं। आश्चर्य तो तब होता है जब राजीव गांधी द्वारा आरम्भ किए गए मिशन के बावजूद उनकी ही कांग्रेस द्वारा बीस सालों में भी स्वच्छ पेयजल जैसी न्यूनतम सुविधा तक उपलब्ध नहीं कराई गई है।

आज पानी का व्यवसायीकरण हो गया है। उद्योगपति अब नदियों तालाबों को खरीदने आगे आकर सरकार पर दबाव बनाने लगे हैंं क्या हो गया है महात्मा गांधी के देश के लोगों को! कहां गई नैतिकता, जिसके चलते आधी धोती पहनकर बापू ने उन अंग्रेजों केा खदेडा था, जिनके बारे में कहा जाता था कि ब्रितानियों के राज में सूरज डूबता नहीं है। सरकार अगर नहीं चेती तो वह दिन दूर नहीं जब देश में केंसर की तरह पनपता माफिया लोगों के सांस लेने की कीमत भी उनसे वसूल करेगा।

दिग्गी के जहर बुझे तीर के निहितार्थ

दिग्गी के जहर बुझे तीर के निहितार्थ

चिदम्बरम को साईज में लाने आलकमान ने की है कवायद

कांग्रेस की इंटरनल केमिस्ट्री से बेहतर वाकिफ हैं राजा

थुरूर प्रकरण से ध्यान हटाने की थी कोशिश

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली 21 अप्रेल। व्यापार जगत की खबरों को देने वाले एक समाचार पत्र में नक्सलवाद पर अपना आलेख छपवाकर दिग्गी राजा ने ठहरे पानी में कंकर मारकर हलचल तो पैदा कर दी है। राजनैतिक विश्लेषक अब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमन्त्री राजा दिग्विजय सिंह के इस जहर बुझे तीर के पीछे के मन्तव्य खोजने में लगे हैं। वैसे दिग्विजय सिंह के राजनैतिक जीवन के हिसाब से कहा जा सकता है कि राजा ने यह तीर भले ही निकाला अपने तरकश से हो, पर इसको रोशन करने वाले तार दस जनपथ की ही बैटरी में जाकर जुडेंगे, जहां से इसे उर्जा मिल रही है।

दस जनपथ के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी के बाद कांग्रेस के नंबर दो ताकतवर महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने यह कदम कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी से विचार विमर्श के उपरान्त ही उठाया है। सूत्रों ने कहा कि गृह मन्त्री बनने के बाद पलनिअप्पम चिदम्बरम की लोकप्रियता का ग्राफ बहुत ही तेजी से उपर आया है। उनकी कार्यप्रणाली के चलते अब गुप्तचर संस्थाएं सीधे उन्हें रिपोर्ट करने लगीं हैं। सरकार में नंबर दो पोजीशन पा चुके चिदम्बरम के पर कतरकर उन्हें साईज में लाने आलाकमान ने अपने विश्वस्त राजा दिग्विजय सिंह के मार्फत यह कदम उठाया है।

इस मामले में यह तर्क भी दिया जा रहा है कि राजा दिग्विजय सिंह कांग्रेस की रग रग से वाकिफ हैं, यही कारण है कि कभी राजनीति में कांग्रेस के चाणक्य रहे कुंवर अर्जुन सिंह के शागिर्द राजा दिग्विजय सिंह ने तिवारी कांग्रेस के गठन के वक्त भी उस नाजुक दौर में न केवल अर्जुन सिंह को साधे रखा था, वरन् कांग्रेस में भी मध्य प्रदेश जैसे सूबे में अपनी कुर्सी सलामत रखी थी। राजा दिग्विजय सिंह के बारे में कहा जाता है कि वे कांग्रेस का अन्दरूनी रसायन शास्त्र बखूबी जानते हैं, वे जानते हैं कि किससे किसे मिलाने पर क्या समीकरण बन सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि शशि थुरूर प्रकरण में कांग्रेस की बुरी तरह भद्द पिट रही थी, इसी के चलते राजा दिग्विजय सिंह ने ही सोनिया गांधी को मशविरा दिया था कि इस तरह का एक आलेख अगर वे अपने नाम से प्रकाशित करवा देते हैं तो लोगों का ध्यान इससे बट जाएगा। राजा ने इसके लिए व्यापार की खबरों वाला अखबार इसलिए चुना क्योंकि राजनीति में रूचि रखने वाले लोग कम ही पढा करते हैं, और आलेख के प्रकाशन तक गोपनीयता बनी रहेगी। अगले दिन जब उस अखबार के रिफरेंस से बडे अखबारों में खबर छपी तक जाकर लोग चेते और मामले ने तूल पकडा।

इसके बाद एक के बाद एक खबरें मीडिया जगत में तय रणनीति के मुताबिक प्लांट की जाती रहीं ताकि चिदम्बरम को अहसास हो जाए कि आलाकमान उनकी सक्रियता से खफा है। लोगों को आश्चर्य तो तब हुआ जब सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस के एक जिम्मेदार महासचिव ने यह बात पार्टी फोरम के बजाए अखबार के माध्यम से की और उन पर अनुशासनात्मक कार्यवाही का नाम तक नहीं लिया गया, सिर्फ चेताया गया, वह भी इतने गम्भीर मसले पर। शनै: शनै: सबको समझ में आ गया कि राजा अगर गुर्राया है तो इसके पीछे चाबी कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केन्द्र 10 जनपथ से ही भरी गई है।

वैसे मीडिया में प्लांट की गई इस खबर में दम लगने लगा है कि छत्तीसगढ और उडीसा में नक्सली कार्यवाही की आड में चिदम्बरम खनन कंपनियों का हित साध रहे हैं। इन क्षेत्रों में खनन का काम करने वाली वेदान्ता कम्पनी के एक संचालकों में देश के गृह मन्त्री पलनिअप्पम चिदम्बरम भी रह चुके हैं। राज्य सभा के रास्ते संसदीय सौंध पहुंचे मणि शंकर अय्यर ने तो साफ तौर पर यह बात कह दी थी कि यूपीए सरकार की नक्सल नीति वेदान्ता, एस्सार, पोस्को और मित्तल जैसे बडे व्यवसायिक घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई है।

मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

मील का पत्थर साबित होगी न्याय की यह जीत

मील का पत्थर साबित होगी न्याय की यह जीत
 
रसूखदारों के हाथ की लौण्डी नहीं है भारत की कानून व्यवस्था
 
फैसले से रियाया का कानून पर भरोसा बढा
 
जनसेवक बरकरार रखें जनता के भरोसे को
(लिमटी खरे)

जेसिका लाल हत्याकाण्ड मामले में देश की सबसे बडी अदालत द्वारा जो फैसला दिया गया, उससे भारत की न्याय व्यवस्था पर आम आदमी का भरोसा और अधिक बढ जाएगा। आम तौर पर यह माना जाता रहा है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, अनेक फिल्मों में भी इस डायलाग को सैकडों बार दुहराया जा चुका है। वहीं दूसरी ओर आजाद हिन्दुस्तान में लोगों के मन में एक और धारणा घर कर गई है कि काननू के हाथ चाहे जितने मर्जी लंबे हो पर वे हाथ रसूखदार, धनाड्य, संपन्न, ताकतवर लोगों को छू भी नहीं पाते हैं। इसी अवधारणा के चलते आम आदमी मान रहा था कि इस मामले में आरोपियों को सजा मिलना मुश्किल ही नहीं नामूमकिन ही है, वस्तुत: एसा हुआ नहीं। ग्यारह साल के लंबे इन्तजार के बावजूद ही सही पर न्याय मिलने पर सभी सन्तुष्ट नज़र आ रहे हैं।
जेसिका लाल जैसे हत्याकाण्ड दरअसल अधकचरी पश्चिमी संस्कृति की विकृति का लबादा ओढने की परिणीति ही हैं। महानगरों में परिवारों के अन्दर शर्म हया बची ही नहीं है। बाप बेटे के साथ शराब गटक रहा है तो बेटी मां के सामने ही सिगरेट के छल्ले उडा रही है। जब सांस्कृतिक रूप से हमारा नैतिक पतन होगा तो उसमें से पैदा होंगे जेसिका लाल हत्याकाण्ड जैसे वाक्ये।
 
29 अप्रेल 199 को भी यही हुआ था। दक्षिणी दिल्ली के कुतुब कोलोनेड रेस्टारेंट की मालिकिन बीना रमानी द्वारा दी गई पार्टी में माडल जेसिका लाल को शराब बांटने की जवाबदारी सौंपी गई थी। आधी रात बीतने के बाद मनु शर्म अपने दोस्तों के साथ वहां आया और दो बजे उसने शराब की मांग की। चौथे पहर के आगाज के साथ अगर कोई शराब मांगे तो उसकी और उसके परिवार की मानसिकता को बेहतर समझा जा सकता है। जेसीका द्वारा मना करने पर मनु ने हवाई फायर किया और फिर जेसिका के सिर में घुसा दी एक गोली। बाद में वे वहां से भाग निकले और चौथे पहर में ही अपनी टाटा सफारी को वहां से उठवा लिया। पुलिस ने 2 मई को बरामद किया। मामला पंजीबद्ध हुआ, गवाहों में अनेक लोग सामने आए, पर चूंकि मनु हरियाणा के बाहूबली नेता विनोद शर्मा के पुत्र हैं, इसलिए वही हुआ जिसका अन्दाजा था। अदालत में श्यान मुंशी, शिवदास, करन राजपूत सहित चश्मदीद अपने अपने दर्ज बयानों से मुकर गए।
 
इसके बाद लगने लगा था कि मामला ठण्डे बस्ते के हवाले ही होने वाला है। गवाही के अभाव में 21 फरवरी 2006 को सभी नौ आरोपियों को बरी कर दिया गया। दिल्ली पुलिस ने मामले को घटना के सात साल बाद 13 मार्च को उच्च न्यायालय में पेश किया। 18 दिसम्बर 2006 को एक बार फिर मनु शर्मा, विकास यादव और अमरदीप को दोषी करार देते हुए 20 दिसम्बर 2006 को फैसला सुनाया जिसमें मनु को उमर कैद और विकास एवं अमरदीप को चार चार साल की कैद की सजा सुनाई। 02 फरवरी 2007 को मनु शर्मा ने उच्चतम न्यायालय में अपनी अपील पेश की, और अन्त में सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा।
 
इस पूरे मामले में मीडिया और सामाजिक संस्थाओं की जितनी भी तारीफ की जाए कम होगी, क्योंकि इन्ही के माध्यम से यह प्रकरण लोगों की स्मृति से विस्मृत न हो सका। मीडिया अगर उस वक्त अभियान न छेडता तो आज मनु सहित विकास ओर अमरदीप खुले साण्ड की तरह तबाही मचा रहे होते। जेसिका को लगी गोली को बदलकर भी अदालत को गुमराह करने का कुित्सत प्रयास किया गया, पर उच्च न्यायालय ने पारखी नज़रों से सच्चाई का पता लगा ही लिया।
 
एसा नहीं कि रसूखदारों के द्वारा पहली बार इस तरह के प्रयास किए गए हों। इससे पहले 2 जुलाई 1995 को दिल्ली युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुशील शर्मा ने अपनी पित्न नैना साहनी को मारकर तन्दूर में डाल दिया था, तब तन्दूर काण्ड जमकर उछला। 03 नवंबर 2003 को अदालत ने सुशील शर्मा को दोषी पाते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई। उच्च न्यायालय ने भी निचली अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए उसे बरकरार रखा।
 
इसी तरह 17 फरवरी को बहुचर्चित नेता डी.पी.यादव की बेटी भारती के मित्र नितीश कटारा की हत्या कर दी गई थी। अदालत ने दोनों को आजीवन कैद की सजा सुनाई। 23 जनवरी 1999 को इण्डियन एक्सपे्रस अखबार की पत्रकार शिवानी भटनागर की हत्या में शक की सुई दिल्ली में पदस्थ भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी आर.के.शर्मा के इर्द गिर्द घूमी। अदालत ने इस मामले में शर्मा और दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जनवरी 1995 में कानून की पढाई करने वाली प्रियदर्शनी भट्ट के साथ बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गई थी। आरोपी सन्तोष कुमार सिंह पुलिस के रसूखदार का बेटा था। जाहिर था पुलिस ने उसका साथ दिया। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उसे छोड दिया। मीडिया ने जब हो हल्ला मचाया तब दुबारा केस खुला और दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसे फांसी की सजा सुनाई।
 
कुल मिलाकर यह सब जागरूकता के चलते ही सम्भव हो सका। आज आवश्यक्ता इस बात की है कि अगर कहीं कोई अन्याय हो रहा है तो हम कम से कम उसके खिलाफ आवाज उठाने का साहस तो करें। प्रसिद्ध विचारक शिव खेडा द्वारा उद्यत एक कोटेशन का जिकर यहां लाजिमी होगा कि अगर कोई आपके पडोसी पर अत्याचार कर रहा है, और आप शान्त हैं तो उसके बाद नंबर आपका ही आने वाला है।

अब थुरूर की नागरिका पर सवालिया निशान!

अब थुरूर की नागरिका पर सवालिया निशान!

एक पत्रकार ने मांगी आरटीआई के तहत जानकारी

बढ सकतीं हैं कांग्रेस और थुरूर की मुश्किलें

लौटानी पड सकती है खर्च की पाई पाई

छोडना पडेगा बंग्ला, नार्थ या साउथ ब्लाक होगा आशियाना

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। सोशल नेटविर्कंग वेव साईट टि्वटर के माध्यम से अघोषित तौर पर लोकप्रिय विवादित शिख्सयत का खिताब पाने वाले निर्वतमान विदेश राज्य मन्त्री शशि थुरूर को भारत सरकार ने जरूर अपने कुनबे से बाहर का रास्ता दिखा दिया हो पर थुरूर की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं हैं। केरल के एक मलयाली भाषा के समाचार पोर्टल चलाने वाले एक पत्रकार ने अब सूचना के अधिकार के माध्यम से शशि थुरूर की भारतीय नागरिकता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। थुरूर अगर अपनी नागरिकता को प्रमाणित नहीं कर पाए तो उनके मन्त्री पद के बाद सांसद की कुर्सी भी उनसे छीनी जा सकती है। उस स्थिति में बतौर सांसद उन्होंने भारत गणराज्य की सरकार का जो भी धन खर्च किया होगा उसकी वसूली भी उनसे सम्भव है।

एक समाचार पोर्टल से जुडे ए.के.वर्मा ने शशि थुरूर द्वारा केरल राज्य के तिरअनन्तपुरम की मतदाता सूची में नाम जुडवाने का प्रमाणपत्र की प्रमाणिक प्रतिलिपी मांगकर सनसनी फैला दी है। केरल सरकार के सूत्रों का कहना है कि शशि थुरूर ने लोकसभा चुनावों के पहले 27 अक्टूबर 2008 को भारतीय निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची में नाम जुडवाने का आवेदन दिया था। वर्मा ने उस पर सवालिया निशान लगाते हुए पूछा है कि क्या आवेदन करते समय शशि थुरूर भारत के सामान्य नागरिक थे। कहा जा रहा है कि इसी दिन शशि थुरूर ने अपने मकान मालिक के साथ किराएनामा अनुबंध (रेंटल लीज एग्रीमेंट) निष्पादित किया था।

मामले का पेंच कई जगह उलझता प्रतीत हो रहा है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि शशि थुरूर की तिरूअनन्तपुरम की नागरिकता के बारे में अभी स्पष्ट तौर पर कुछ भी कहा नहीं जा सकता है। सूत्रों ने आगे बताया कि तिरूअनन्तपुरम की नगर पालिका निगम के कोवाडियार वार्ड के पार्षद ए.सुनील कुमार ने अपने लेटर हेड पर निगम के सचिव को पत्र लिखा था, जिसमें इबारत के बतौर यह उल्लेख किया गया था कि शशि थुरूर टी.सी./9/277/(2) कोवाडियार वार्ड के निवासी हैं, और उन्हें राशन कार्ड में नाम शामिल कराना है, अत: शशि थुरूर को निवास प्रमाण पत्र जारी किया जाए। इससे स्वत: ही स्पष्ट हो जाता है कि सालों साल हिन्दुस्तान की सरजमीं से बाहर रहकर नौकरी करने वाले थुरूर के पास न तो भारत की नागरिकता है, न राशन कार्ड और न ही निवास प्रमाण पत्र।

इस मामले की गुत्थी तब और उलझती नज़र आती है जब निगम की पंजी में यह दर्ज है कि वे अति विशिष्ट व्यक्ति (व्हीव्हीआईपी) हैं, और अतिविशिष्ट व्यक्ति आवासीय समझौते और तिरूअनन्तपुरम नगर निगम प्रमाण पत्र क्रमांक 3175 दिनांक 06 नवंबर 2008 के अनुसार वे उपरोक्त विर्णत पते के निवासी हैं। देखा जाए तो मतदाता सूची में नाम पंजीबद्ध करवाने के लिए आवेदक को उस संसदीय क्षेत्र का मूल निवासी होना अत्यावश्यक होता है, साथ ही साथ मतदाता सूची में नाम शामिल करवाने के लिए आवेदक को फार्म 06 भी भरकर देना होता है, साथ ही थुरूर ने फार्म की धारा चार को भी नहीं भरा है जिसमें आवेदक को इस बात का उल्लेख करना होता है कि वह उस पते पर कब से निवास कर रहा है।

लगने लगा है कि विवाद और शशि थुरूर दोनों ही का चोली दामन का साथ है। शशि थुरूर ने होटल ताज में जो गुलछरेZ उडाए हैं, वे किसी से छिपे नहीं हैं। एआईसीसी मुख्यालय में चल रही चर्चाओ के अनुसार पता नहीं शशि थुरूर में क्या खासियत है जो कांग्रेस की राजमाता भी उनसे यह पूछने का साहस नहीं कर पा रहीं हैं कि होटल में दो माह तक मेहमानी का भोगमान किसने भोगा है। अब इस नई आफत के चलते एक बार फिर कांग्रेस और थुरूर की फजीहत होने ही वाली है।

उधर मन्त्रीपद गंवाने के बाद शशि थुरूर को बडे सरकारी बंग्ले को रिक्त करना होगा। वे पहली बार संसद बने हैं, इसलिए बडे बंग्ले की उन्हें पात्रता नहीं है। संसद के सूत्रों का कहना है कि पहली बार बने संसद सदस्यों को अमूमन नार्थ या सउथ ब्लाक में ही आवास दिया जाता है। लंबे राजनैैतिक अनुभवों को देखकर पहली बार संसद पहुंचे सदस्यों को अवश्य कोठियां दी गईं हैं।

सोमवार, 19 अप्रैल 2010

मोदी का सिक्सर, थुरूर मैदान के बाहर

कब तक क्षमा करोगे शिशुपाल को - - -(3)
 
मोदी का सिक्सर, थुरूर मैदान के बाहर
 
ट्वंटी ट्वंटी अब निर्याणक मोड पर
 
मन्त्री ने दिया सांसद की हैसियत से बयान
 
बडे बेआबरू होकर तेरे कूचे से थुरूर निकले
(लिमटी खरे)

आजाद भारत के एक जिम्मेदार मन्त्री शशि थुरूर और आईपीएल के चेयरपर्सन ललित मोदी के बीच आरम्भ हुए अन्तहीन विवाद में रोजाना ही कोई न कोई रोचक मोड आता जा रहा है। अब भारत गणराज्य के मन्त्री शशि थुरूर ने देश की सबसे बडी पंचायत में अपनी सफाई बतौर मन्त्री न देकर बतौर सांसद देकर नए विवाद को जन्म दे दिया है। थुरूर के इस कदम से न केवल उनकी खुद की वरन् समूची कांग्रेस की भद्द पिटती नज़र आ रही है। प्रधानमन्त्री ने अप्रिय और कडा कदम उठाते हुए शशि थुरूर को मन्त्रीमण्डल से रूखसत कर दिया है।
 
थुरूर की इस बचकानी हरकत पर मन्त्रीमण्डल के एक अन्य सहयोगी फारूख अबदुल्ला ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर वे थुरूर की जगह होते तो देश और सरकार की गरिमा को बचाने के लिए वे त्यागपत्र दे देते। फारूख अब्दुल्ला का कहना था कि शशि थुरूर को सुनन्दा से अपने रिश्ते छिपाना नहीं चाहिए था। अब्दुल्ला के बयान को कांग्रेस ने काफी गम्भीरता से लिया है। कांग्रेस को डर था कि शशि थुरूर के मामले में अगर ज्यादा लोगों के मुंह खुल गए तो उसे परेशानी उठानी पड सकती है।
 
शशि थुरूर की रूखसती के बाद अब ललित मोदी को धोबीघाट पर कपडे की तरह धुलाई की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस इस मामले में बेकफुट पर है और अब मोदी जिस करवट मिलेंगे उस करवट ही उनकी धुनाई होगी। मामला आगे न बढे इसलिए अब ललित मोदी के जानने वालों पर भी गाज गिराकर मोदी को भयाक्रान्त करने का प्रयास किया जाएगा। उधर आयकर का शिकंजा भी मोदी मण्डली पर जमकर कसने की उम्मीद से इंकार नहीं किया जा सकता है। रान्देवू स्पोर्टस केे सीईओ शैलेन्द्र गायकवाड के भाई रवि गायकवाड जो क्षेत्रीय उप परिवहन अधिकारी हैं, एवं उनका स्थानान्तरण मराठवाडा से बीड कर दिया गया था, को निलंबित करने की प्रक्रिया महाराष्ट्र की कांग्रेसनीत सरकार ने आरम्भ कर ही दी है।
 
सबसे अधिक आश्चर्य तो उन खबरों पर होता है, जिनमें कहा जा रहा है कि आईपीएल विवाद उभरने के पहले ही केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को जो रिपोर्ट सोंपी गई थी उसमें मोदी के रिश्तेदारों के नामों सहित अनेक नामों को विवादित माना गया था। इतना ही नहीं तीन सालों में मोदी की संपत्ति में बेतहाशा बढोत्तरी की बात भी इस रिपोर्ट में थी। बावजूद इसके केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड आखिर कार्यवाही के लिए किसकी हरी झण्डी का इन्तजार कर रहा था, जो इस विवाद के बाद सक्रिय हुआ।
 
भाजपा ने भी एक तीर से कई निशाने साधते हुए थुरूर को पलनिअप्पम चिदंबर से सबक लेने की नसीहत दे डाली है। भाजपा का कहना है कि नरसिंहराव सरकार में जब चिदम्बरम वाणिज्य मन्त्री थे, तब उन पर उनकी पित्न को एक कंपनी के शेयर बाजार से कम कीमत पर देने के आरोप लगे थे, तब चिदम्बरम ने तत्काल नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र दे दिया था, पर थुरूर कुर्सी से चिपके रहे और आखिरकार उन्हें बेइज्जत होकर जाना पडा।
 
टि्वटर से चर्चा में आए थुरूर का विवादों से गहरा नाता रहा है। कांग्रेस की सदस्यता लेते वक्त शशि थुरूर ने कोिच्च में शशि थुरूर ने देश के राष्ट्रगान का सरासर अपमान किया था। अमूमन राष्ट्रगीत के बजते, गाते, सुनते समय हर भारतवासी सावधान की मुद्रा में रहता है, पर विदेशों में ज्यादा समय बिताने वाले शशि थुरूर ने सावधान की मुद्रा को न अपनाकर दुनिया के चौधरी अमेरिका की तर्ज पर दिल पर हाथ रखकर इसे न केवल खुद गाया वरन् लोगों को भी एसा करने प्रेरित किया।
 
पिछले साल वैश्विक स्तर पर आर्थिक मन्दी के चलते हर जगह फिजूलखर्ची पर रोक के बावजूद भी शशि थुरूर ने सरकारी खर्च पर फाईव स्टार होटल को अपना आशियाना बना लिया था। सितम्बर 2009 में होटल ताज के फाईव स्टार सूट में दो माह रहने के बाद आज तक यह बात सार्वजनिक नहीं हो सकी है कि उस होटल का भोगमान (बिल) किसने भोगा, भारत सरकार ने, थुरूर ने या उनके किसी मित्र ने। इस मामले के उजागर होने पर कांग्रेस को बहुत जिल्लत झेलनी पडी थी।
 
इसी माह शशि थुरूर ने एक और हंगामा खडा किया। देशवासियों को दिखाने के लिए जब कांग्रेस की राजमाता ने देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली से व्यवसायिक राजधानी मुम्बई तक का हवाई सफर 20 सीटों को खाली करवाकर इकानामी क्लास में किया तब दूसरे ही दिन थुरूर ने सोशल नेटविर्कंग वेवसाईट टि्वटर पर हवाई जहाज की इकानामी क्लास को केटल क्लास (मवेशी का बाडा) की संज्ञा दे दी। इसके बाद कांग्रेस को खून का घूंट पीना पडा क्योंकि इसके सोनिया गांधी की यात्रा से जोडकर देखा जा रहा था।
 
दिसम्बर 2009 में जब केन्द्रीय गृह मन्त्रालय ने वीजा सम्बंधी नियमों को कडे करने का फैसला लिया तब फिर शशि थुरूर ने इसे गैरवाजिब बताया। दरअसल यह फैसला इसलिए लिया गया था, क्योंकि 26/11 की साजिश में शामिल आरोपी डेविड हेडली और तहव्वूर राणा को लांग टर्म मल्टी एंट्री वीजा मिला हुआ था। इस पर भी थुरूर की टि्वट ने सरकार के खिलाफ ही जहर उगला था।
 
देश के पहले प्रधानमन्त्री और कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के परनाना जवाहर लाल नेहरू को भी शशि थुरूर ने नहीं बख्शा। 8 जनवरी 2010 को लार्ड भीखू पारेख के एक प्रोग्राम मे शशि थुरूर का कहना था कि गांधी के योगदान और नेहरू की नीतियों से देश की स्थिति मजबूत तो हुई है, किन्तु इससे विश्व के सामने हमारी नकारात्मक छवि बनी है। हम वैश्विक मसलों पर नैतिकता को रगडते रहते हैं। इतना ही नहीं देश जिस मोहनदास करमचन्द गांधी को राष्ट्र का पिता मानकर नमन करता है उनकी जयन्ती पर शशि थुरूर का मानना है कि गांधी जयन्ती पर घर पर न बैठा जाए, काम किया जाए।
 
शशि थुरूर के ग्यारह महीनों के कार्यकाल में उन्होंने कांग्रेस को तबियत से नुकसान पहुंचाया है, फिर भी कांग्रेस की राजमता श्रीमति सोनिया गांधी और वजीरे आजम डॉ.मन मोहन सिंह ने उन्हें गले से लगाकर रखा एवं शिशुपाल की तरह उनकी गिल्तयों को भी माफ किया। कांग्रेस ने एसा क्यों किया यह तो वह ही जाने पर शशि थुरूर कांग्रेस के उजले दामन पर एक बदनुमा दाग बनकर इतिहास में सदा कांग्रेस के लिए खटकेगा। आने वाले चुनावों में भी शशि थुरूर का मामला एक मुद्दे की तरह उछाला जाए तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

सिहांसन पर बोने ही नज़र आ रहे हैं गडकरी

सिहांसन पर बोने ही नज़र आ रहे हैं गडकरी

गद्दी सम्भालने में हो रही परेशानी
 
गुटबाजी आ रही काम में आडे
 21 की रेली बनी प्रतिष्ठा का प्रश्न
(लिमटी खरे)

नई दिल्ली 19 अप्रेल। सूबाई राजनीति से निकलकर एकाएक राष्ट्रीय परिदृश्य में बिठा दिए गए भाजपा के नए निजाम नितन गडकरी को अब गद्दी सम्भालना मुश्किल हो रहा है। सालों से केन्द्र की राजनीति में जमे जकडे नेताओं के काकस में वे धीरे धीरे घिरते नज़र आ रहे हैं। भाजपा में फैली गुटबाजी और सत्ता के लिए ललक के साथ ही महात्वाकांक्षी नेताओं ने गडकरी को बोना ही साबित करना आरम्भ कर दिया है। 21 अप्रेल को आहूत रेली की सफलता पर उनका आने वाला समय कैसा होगा यह काफी हद तक निर्भर करेगा।
 
भाजपा को घुन की तरह खाने वाले नेताओं के तेवरों को देखकर नितिन गडकरी को अपने अनेक फैसले खुद ही बदलने पड रहे हैं। भाजपा के नेताओं को अपने अपने क्षेत्रों में माह में कम से कम आठ दिन रहने के निर्देश के बाद उसे बदलकर आठ दिन करना गडकरी की मजबूरी हो गई थी। इसके अलावा 21 अप्रेल की रेली में दस लाख लोगों के जमावडे के लक्ष्य को भी घटाकर साढे तीन लाख पर लाकर खडा करना पडा। यह सब इन्ही घाघ नेताओं के कदम तालों के चलते हुआ है।
 
गौरतलब है कि गडकरी ने अध्यक्ष बनने के बाद यह कहा था कि वे अपनी टीम में उन्हीं लोगों को स्थान देंगे जो हर माह कम से कम दस दिन अपने क्षेत्र को समय देंगे। जब ``टीम गडकरी`` का गठन हुआ तो उसमें पुराने पदाधिकारियों को देखकर हर कोई इसे नई बोतल में पुरानी शराब की संज्ञा देने से नहीं चूका। टीम गडकरी के गठन के साथ ही साथ असन्तोष की खिचडी भी खदबदाने लगी है। लोग इसमें रूपहले पर्दे के अनुभवहीन अदाकारों को शोभा की सुपारी बनाए जाने से खासे खफा नज़र आ रहे हैं।
 
उधर नितिन गडकरी ने अब सूबों के अध्यक्षों की मश्कें कसना आरम्भ कर दिया है। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्र बताते हैं कि गडकरी ने एक फरमान जारी किया है जिसमें साफ कहा गया है कि पार्टी के कार्यकर्ता अपनी समस्या के लिए पार्टी अध्यक्ष के कार्यालय के बाहर कतई न जाएं। अपनी समस्याएं पार्टी अध्यक्ष को न बताकर उन्हें दल के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष रखने पर वे खासे नाराज नज़र आ रहे हैं।
 
नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी मुद्दे को सिर्फ और सिर्फ पार्टी अध्यक्ष के दफ्तर में ही उठाया जा सकेगा, एवं पार्टी अध्यक्ष का कार्यालय ही उस पर कार्यवाही करेगा। शिकायतों को अब सीधे वरिष्ठ नेताओं तक ले जाने की मनाही है। सूत्रों ने साफ किया कि कार्यकर्ता चाहे तो वरिष्ठ नेता से मिल सकता है, किन्तु अपनी समस्या के बारे में वह नेता से चर्चा नहीं करेगा। गडकरी का यह कदम पार्टी को वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव और गणेश परिक्रमा से मुक्त कराने के तौर पर देखा जा रहा है। संघ भी गडकरी की इस अभिनव पहल में उसके साथ ही खडा दिखाई दे रहा है।

राजा का काटा नहीं मागता है पानी

ये है दिल्ली मेरी जान
 (लिमटी खरे)
राजा का काटा नहीं मागता है पानी
देश के हृदय प्रदेश में दस साल लगातार राज करने वाले कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह को इक्कीसवीं सदी में कांग्रेस के आधुनिक चाणक्य की उपाधि से अघोषित तौर पर नवाजा जाता है। मध्य प्रदेश में अपने शासनकाल में उन्होंने संयुक्त मध्य प्रदेश में विद्याचरण, श्यामाचरण शुक्ल, अर्जुन सिंह, स्व.माधव राव सिंधिया, अजीत जोगी, कमल नाथ जैसे दिग्गजों को धूल चटा दी थी। इसके बाद 2003 में कांग्रेस के औंधे मुंह गिरने के बाद उन्होंने केन्द्र की राजनीति की ओर रूख किया है। आज की तारीख में राजा दिग्विजय िंसंह कांग्रेस के सबसे ताकतवर महासचिव राहुल गांधी के बाद दूसरी पायदान पर विराजे हैं। पिछले दिनों एक अखबार में उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ गृहमन्त्री पी.चिदम्बरम के खिलाफ टीका टिप्पणी कर ठहरे हुए पानी में हलचल मचा दी है। सियासी हल्कों में चल रही बयार के अनुसार दिग्विजय के इस कदम के पीछे राहुल गांधी का समर्थन था। उधर कांग्रेस की राजमाता को भी भरोसे में लिया गया था। यह अलहदा बात है कि तय रणनीति के अनुसार बाद में कांग्रेस ने इस बात से पल्ला झाड लिया, पर दिग्गी राजा के जहर बुझे तीर का ही कमाल था कि पलनिअप्पम चिदम्बरम को आनन फानन अपना त्यागपत्र पेश करना पडा था।
सोनिया से सियासी गणित बिठाने में लगीं ममता
पश्चिम बंगाल में रेल्वे के विज्ञापनों से कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और प्रधानमन्त्री मन मोहन सिंह के फोटो यह कहकर निकालने वालीं कि रेलवे के विज्ञापनों में मनमोहन सोनिया का क्या काम, ममता बनर्जी अब सोनिया गांधी से राजनैतिक गणित ठीक ठाक करने में जुट गईं हैं। इसी तारतम्य में ममता बनर्जी ने उत्तर रेल्वे द्वारा सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को अपना ब्राण्ड एम्बेसेडर बनाने की कवायद को ठण्डे बस्ते में डाल दिया है। रेल्वे के सूत्रोें का कहना है कि मानव रहित रेल्वे क्रासिंग पर होने वाली दुघZटनाओं को रोकने के लिए उत्तर रेल्वे ने यह प्रस्ताव दिया था कि अमिताभ बच्चन को ब्राण्ड एम्बेसेडर बनाकर बिना मानव वाली रेल्वे क्रासिंग के खतरों के बारे में आगाह करें तो लोग उनका अनुसरण आसानी से कर लेंगे। बताते हैं कि अमिताभ इसके लिए तैयार भी हो गए थे, तभी ममता दीदी को किसी ने बताया कि बिग बी की एंट्री से सोनिया खफा हो सकतीं हैं, सो ममता ने तत्काल इस मामले को लंबित करने के निर्देश दे दिए। अब ममता चाहतीं हैं कि 22 अप्रेल को बंटने वाले रेल मन्त्री पुरूस्कार को सोनिया के हाथों बटवाया जाए, पर 10 जनपथ की महारानी इसके लिए तैयार होती नहीं दिख रहीं हैं।
गोविन्दाचार्य ने दिखाए तेवर
भाजपा छोडकर गए दो नेताओं गोविन्दाचार्य और उमा भारती ने अपने द्वारा बनाई गई पार्टियों से त्यागपत्र देकर एक मिसाल कायम की है। इन दोनों ही नेताओं की भाजपा में वापसी को लेकर अटकलों और अफवाहों के न थमने वाले दौर चल पडे हैं। दोनों ही नेताओं की घर वापसी में उनको पसन्द न करने वाले नेताओं ने रोढे अटकाने आरम्भ कर दिए हैं। इसी बीच भाजपा के नए निजाम ने गोविन्दाचार्य की घर वापसी के लिए प्रायशचित की शर्त से गोविन्दाचार्य बुरी तरह भडक गए हैं। उन्होंने भाजपाध्यक्ष नितिन गडकरी को जुबान पर लगाम लगाने की नसीहत तक दे डाली है। कभी भाजपा के थिंक टेंक रहे गोविन्दाचार्य के बारे में नए नवेले और सूबाई राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में पहुंचने वाले नितिन गडकरी को वैसे सोच समझकर ही बयान जारी करना चाहिए था। उन्होंने गडकरी को उनकी औकात दिखाते हुए कहा कि गडकरी को वाणी में संयम रखने की जरूरत है, जिससे उनकी छवि अनर्गल बोलने वाले और सतही एवं अक्षम नेता की न बन सके। गोविन्दाचार्य का कहना है कि उन्हें पार्टी से निकाला नहीं गया था, वे 9 सितम्बर 2000 को अध्ययनावकाश पर गए थे और 2003 के बाद उन्होंने प्राथमिक सदस्यता का नवीनीकरण नहीं कराया है।
घर के लडका गोंही चूसें, मामा खाएं अमावट
बहुत पुरानी बुन्देलखण्डी कहावत -``घर के लडका गोंही (आम की गुठली) चूसें, मामा खाएं अमावट (आम के रस से बनने वाला एक स्वादिष्ट पदार्थ) को चरितार्थ करते हुए, वैश्विक मन्दी के इस दौर में एक और जहां देश की आधी से अधिक आबादी को एक जून की रोटी भी मयस्सर नहीं है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रमण्डल खेलों से जुडी परियोजनाओं की समीक्षाओं को लेकर सुरेश कलमाडी की अध्यक्षता आयोजित 57 बैठकों में ही महज 29 लाख 26 हजार रूपए का नाश्ता गटक गए अधिकारी। है न अचरज की बात। कार्यकारी बोर्ड की एक दिन में हुई बैठक मे ंनाश्ते का कुल खर्च सिर्फ एक लाख 75 हजार रूपए आया है। यह बात सूचना के अधिकार में निकाली गई जानकारी में सामने आई हैं पहले तो सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देखकर अधिकारियों के हाथ पांव ही फूल गए थे। काफी समय ना नुकुर करने के बाद जब आला अधिकारियों ने निर्देश दिया तब पांच महीनों बाद यह जानकारी मुहैया करवाई गई। नियमानुसार एक माह में जानकारी देने का प्रावधान है।
सज्जन की राह पर कमल नाथ!
चोरासी के दंगों की फाईलें बन्द होने का नाम ही नहीं ले रहीं हैं। छब्बीस साल बाद भी अगर दंगों के बारे में प्रकरण चल रहे हों तो भारत सरकार और कानून व्यवस्था को सलाम ही करना बेहतर होगा। साल दर साल प्रकरण चल रहे हैं, मीडिया में उछल रहे हैं। विपक्ष में बैठी भाजपा ने छ: साल लगातार शासन भी किया, फिर भी नतीजा ढाक के तीन पात। जाहिर है केन्द्र की सत्ता में चाहे कांग्रेस सत्तारूढ हो या भाजपा, दोनों मिलकर नूरा कुश्ती ही खेलते हैं, जनता तमाशबीन खडी चुपचाप सब कुछ देखती सुनती रहती है। सज्जन कुमार को इसमें बुरी तरह लपेट दिया गया है। इससे पहले कमल नाथ सहित अनेक नेताओं को क्लीन चिट दे दी गई थी। कमल नाथ का दुर्भाग्य तो देखिए कि जब वे अमेरिका में थे, तभी वहां की एक संघीय अदालत में न्यूयार्क के एक सिख संगठन सिख्ख फॉर जस्टिस की ओर से जसबीर सिंह और महिन्दर सिंह ने मामला दर्ज कराते हुए एलियन टॉटर्स क्लेम्स अधिनियम के तहत कमल नाथ को दण्ड देने और मुआवजा दिलाने की मांग की है। जसबीर ने अपने परिवार के 24 सदस्य खोए हैं तो उस वक्त दो साल के रहे महिन्दर ने अपने पिता को गंवाया था।
सूख गई मैया दाई की बाण गंगा
प्रकृति से लगातार हो रही छेडछाड से पर्यावरण का असन्तुल साफ दिखाई देने लगा है। कभी भीषण गर्मी तो कभी हाड कपाने वाली ठण्ड, और तो और सबसे अधिक बारिश वाले चेरापूंजी के सर से खिताब भी छिनने लगा है कि वहां सबसे ज्यादा पानी गिरता है। चहुं ओर हाहाकार मचा हुआ है। त्रिकुटा पर्वत पर विराजीं माता वेष्णो देवी के चरणों को धोने वाली बाणगंगा अब पूरी तरह सूख चुकी है। माता रानी के दर्शन को जाने वाले श्रृद्धालु इस पवित्र नदी में डुबकी अवश्य लगाते हैं। यह नदी समाखल क्षेत्र के 200 फुट उंचे पहाड के मध्य से प्रकट हुई है। इस नदी में माता रानी की गुफा से आने वाला झरना आगे जाकर मिल जाता है। बारिश की कमी से समाखल का तालाब पूरी तरह सूख चुका है। बाण गंगा के बारे में कहा जाता है कि अब तक यह नदी कभी भी नहीं सूखी यह पहला मौका है जब नदी सूख गई है। श्रृद्धालु इसे प्रलय का आगज ही मान रहे हैं।
पत्रकारों को रिझाया ममता ने
मीडिया को प्रजातन्त्र का चौथा स्तंभ माना गया है। मीडिया की ताकत से राजनेता अनजान नहीं है। मीडिया चाहे तो सरकार बना दे चाहे तो गिरा दे। आज मीडिया पथभ्रष्ट हो गया है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। मीडिया को रिझाने के लिए ममता बनर्जी ने पत्रकारों के साथ साथ साल में एक बार उसकी अर्धांग्नी को भी ले जाने की छूट प्रदान की थी। इससे वे तलाकशुदा, कंवारे और वे पत्रकार नाराज थे, जिनकी अर्धांग्नी अल्लाह को प्यारी हो गईं, सो ममता ने पत्रकारों के किसी भी सहचर को साल में एक बार आधे किराए पर यात्रा की अनुमति दे दी। अब ममता ने एक नया पांसा फेंका है, जिसके मुताबिक पत्रकारों के 18 साल तक के आश्रित बच्चे भी साल में एक बार पचास फीसदी किराए में यात्रा कर सकेंगे। वर्तमान में राजधानी शताब्दी एक्सपे्रस सहित सभी रेल गाडियों में पत्रकारों को पचास फीसदी किराए में असीमित यात्रा की सुविधा प्राप्त है। पत्रकार हैरान न हों, पश्चिम बंगाल चुनाव तक ममता बनर्जी पत्रकारों पर यूं ही मेहरबान रहने वालीं हैं।
राशि गरीबों या कलेक्टर के विकास के लिए
महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना की राशि गरीबों को रोजगार मुहैया कराने खर्च हो रही है या फिर कलेक्टर बंगलों को भव्य बनाने के लिए इस बात पर अब बहस चल पडी है। पहली बार मन्त्री बने ग्रामीण विकास राज्यमन्त्री प्रदीप जैन ने मध्य प्रदेश सरकार पर गम्भीर आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार द्वारा इस मद में दी जाने वाली राशि का दुरूपयोग हो रहा है। जिलों में जिलाधिकारियों के बंग्लों का रख रखाव इस मद की राशि से किया जा रहा है। प्रदीप जैन का आरोप है कि वर्ष 2009 - 10 में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत केन्द्र सरकार द्वारा 72061.418 लाख रूपए की राशि दी गई थी, जिसमें से राज्य द्वारा महज 53379.327 लाख रूपए ही खर्च किए हैं। इस मद में 15 सौ करोड रूपए की राशि तो मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने खर्च ही नहीं की। मजे की बात तो यह है कि मध्य प्रदेश कोटे से मन्त्री बने कमल नाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कान्तिलाल भूरिया, अरूण यादव सहित कांग्रेस के सांसदों ने कभी इस पहलू पर गौर ही नहीं फरमाया कि केन्द्र पोषित योजनाओं से उनके संसदीय क्षेत्र में चल रही योजनाओ में क्या घालमेल हो रहे है, वे ध्यान दें तो क्यों! आखिर 2013 में ही तो उन्हें दोबरा जनता के सामने जाना है, तब तक जनता सब कुछ भूल ही चुकी होगी।
आडवाणी आउट : मोदी इन
भारतीय जनता पार्टी का स्टेयरिंग सम्भालने वाले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने अब आने वाले आम चुनावोें के लिए भूमिका बांधन आरम्भ कर दिया है। हाल ही में संघ ने कहा है कि आगामी लोकसभा चुनावों में गुजरात के मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी ही भाजपा की ओर से प्रधानमन्त्री के दावेदार होंगे। इसके पहले एसआईटी द्वारा मोदी को तलब करने के मसले पर भाजपा के नए निजाम नितिन गडकरी ने कहा था कि मोदी प्रधानमन्त्री बनने के योग्य हैं और वे इन सब झंझटों से पार पा लेंगे। मोदी की तारीफों में गडकरी और संघ की एक सी सुरताल से अडवाणी की भजन मण्डली सकते में है। आडवाणी की मण्डली को अभी भी उम्मीद है कि आने वाले चुनावों में राजग एक बार फिर से आडवाणी पर दांव लगाएगा, पर संघ गडकरी की जुगलबन्दी से उनकी आशाओं पर तुषारापात होता लग रहा है। दूसरी ओर पीएम इन वेटिंग की राह में दूसरी सबसे सशक्त दावेदार सुषमा स्वराज द्वारा भी इस तरह की चाल चलकर आडवाणी को पाश्र्व में ढकेला जा सकता है।
बेटी के चक्कर में बेटों को दुश्मन न बना लें शिवराज
मध्य प्रदेश सूबे में बेटियों को बहुत ही सम्मान से देखा जाने लगा है। महिलाओं का हितैषी बन चुका है देश का हृदय प्रदेश, यह बात सोलह आने सच है। मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान भी बिटियों के लिए दीवाने बावले दिख रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय में एक नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर एक वाक्या सुनाया। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में एक कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान भावावेश में कुछ ज्यादा ही कह गए। उनके अनुसार कल तक यह मान्यता थी कि बेटा बुढापे की लाठी है, पर आज यह मिथक टूट गया है, बेटों की हरकतों को देखकर उन पर अविश्वास होने लगा है। अरे भले मानस अगर आज से 50, 55 साल पहले अगर इसी बात को सोचा गया होता तो आज मध्य प्रदेश को शिवराज सिंह चौहान जैसा योग्य मुख्यमन्त्री कैसे मिलता। शिवराज जी बेटियों की चाहत में जाने अनजाने में कहीं आप बेटों के मन में विरोध तो नहीं जगाने लगे हैं।
``आल इज नाट वेल`` विदिन बिग बी एण्ड अमर
समाजवादी पार्टी से बखाZस्त किए गए शातिर राजनेता अमर सिंह और सदी के महानायक बिग बी के बीच सब कुछ ठीक ठाक नहीं है। इस बार मुम्बई यात्रा पर आए अमर सिंह ने पहली दफा अमिताभ बच्चन के घर न रूककर सन्देश दे दिया है कि उनके बीच कुछ न कुछ गडबड अवश्य ही है। अमर सिंह ने अपने ब्लाग में लिखा है कि 9 अप्रेल को अपनी मुम्बई यात्रा के दौरान वे पहली बार अमिताभ बच्चन के घर नहीं रूके। अमूमन हर बार वे होटल में कमरा बुक अवश्य ही करवाते थे, पर अमिताभ के घर रात जरूर गुजारते थे। वैसे जया बच्चन के जन्म दिन पर वे बाकायदा उनके घर गए और शुभकामनाएं दीं। सदा ही खामोश रहकर वार करने वाले सदी के महानायक अमिताभ बच्चन इस मामले में पूरी तरह खामोश हैं। अमर सिंह अपनी ओर से अवश्य बार बार यह संकेत दे रहे हैं कि उनके और बिग बी के बीच अब सब कुछ सामान्य नहीं है।
सिलिकॉन इंप्लांट, जरा संभल कर
अपनी खूबसूरती को बढाने और शरीर को सुडोल आकार देने के लिए महानगरों में सिलिकॉन इम्पलांट का जोर है। पर अब यही बालओं के लिए खतरे की घंटी बजा रही है। दरअसल हवाई अड्डों पर सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लगऐ स्केनर अब महिलाओं के द्वारा शरीर में सिलिकॉन इम्पलांट करने पर जोर से बीप बजाने लगता है। यह सिलिकॉन को एक मेटल की तरह डिटेक्ट करता है। वैसे इस तरह की घटनाएं कम ही प्रकाश में आईं हैं पर लोगों की प्राईवेसी के मद्देनज़र महिलाओं की चेकिंग के लिए अलग से कक्ष और मशीन के चीखने पर महिला सुरक्षा कर्मी शरीर की किसी अन्य बन्द कमरे में जांच कर पुष्टि करेंगी कि महिला ने सिलिकॉन इम्पलांट करवाया है या फिर कोई अस्त्र शस्त्र छुपाकर रखा है।
पुच्छल तारा
पिछले दिनों बस्तर में हुए अब तक के सबसे बडे नक्सली हमले के बाद पूरे देश में इनके समर्थन ओर विरोध पर चर्चाएं चल पडीं हैं। इसी बीच एक खबर आई कि दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में भी नक्सल विचारधारा के पोषक लोग हैं। गुजरात के वापी शहर से अनन्त अग्रवाल ई मेल भेजते हैं कि देश भर में कुकुर मुत्ते की तरह गली गली में स्कूल कालेज खुल गए हैं, तब नक्सलवादी अपना स्कूल या कालेज क्यों नहीं चलते, उनके पास जेनएयू है तो. . . .।

शनिवार, 17 अप्रैल 2010

पंवार पर बरसे राजनाथ

पंवार पर बरसे राजनाथ

छ: माह में पहली मर्तबा सर उठाया भाजपा ने
 
गडकरी को पीछे छोडने की तैयारी में राजनाथ
 
अपने कार्यकाल में नहीं पद छोडने के बाद दिखाए तीखे तेवर
 
(लिमटी खरे)

नई दिल्ली 17 अप्रेल। भाजपाध्यक्ष के पद से उतरने के बाद अब राजनाथ सिंह ने नितिन गडकरी की निष्क्रीयता का फायदा उठाकर एक बार फिर सक्रिय रोल अदा करने की ठान ली है। सालों साल मौनी बाबा बने रहने वाले राजनाथ सिंह ने अचानक ही कांग्रेस के कद्दावर संसद सदस्य अवतार सिंह भडाना के संसदीय क्षेत्र फरीदाबाद में जाकर भारतीय खाद्य निगम के गौदामों का औचक निरीक्षण कर सबको चौंका दिया।

फरीदाबाद और पलवल में जाकर राजनाथ सिंह ने गोदामों में सड रहे गेंहूं के बारे में अपनी चिन्ता को सार्वजनिक किया। एफसीआई के गौदाम में रखरखाव के अभाव में सड रहे गेंहूं को देखकर राजनाथ सिंह हत्थे से उखड गए। उन्होंने कहा कि सक्सेना कमेटी का प्रतिवेदन कहता है कि देश में 51 फीसदी से ज्यादा लोग गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीवनयापन करते हैं। सरकारी तन्त्र को आडे हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि बेलगाम अफसरशाही और बिगडेल बाबूराज के चलते बीपीएल कार्ड ही गरीबों को नसीब नहीं हो पा रहे हैं। जहां बीपीएल कार्डधारकों को अनाज मिल भी रहा है, वहां उन्हें सडा गेंहू मिलाकर दिया जा रहा है।
 
राजनाथ सिंह का आरोप था कि पिछले दो सालों में रखखरवाव और भण्डारण के अभाव मेें बहत्तर लाख 36 हजार 235 टन गेंहूं सड गया। इस तरह सडे गेंहू के नमूने सदन में पेश किए जाएंगे, और सांसदों की समिति बनाकर गेंहूं के सडने के कारणों का पता लगाने, जवाबदेही तय करने और खाद्य सुरक्षा विधेयक लाने की मांग की जाएगी।
 
राजनाथ के एकाएक सक्रिय होने से भाजपा के आला नेताओं के कान खडे हो गए हैं। राजनाथ सिंह के करीबी सूत्रों का कहना है कि सितम्बर माह से भाजपा के नए निजाम के चुनने और ताजपोशी का उपक्रम किया जा रहा था। इसके बाद अब तक पिछले छ: माहों में केन्द्र सरकार की मनमानियों के खिलाफ भाजपा की धार बोथरी ही रही है। इसी बात को राजनाथ सिंह को समझाया गया है कि जब गडकरी सक्रिय होकर आगे आएं तब तक तो आप अपना काम युद्ध स्तर पर जारी रखिए। गौरतलब होगा कि अपने खुद के कार्यकाल में राजनाथ सिंह पूरी तरह मौनी बाबा के रोल में नज़र आए थे।

रैली के खर्च को लेकर देशमुख परेशान

रैली के खर्च को लेकर देशमुख परेशान

दो जिलों के लोगों का भार पडेगा केडी भाउ पर
 
साढे तीन लाख लोग जुटेंगे महारैली में
 
दो करोड रूपए का खाना खा जाएंगे भाजपाई
 

दिल्ली प्रदेश भाजपा के फूले हान्थ पांव
लिमटी खरे
नई दिल्ली 17 अप्रेल। भाजपा की प्रस्तावित 21 अप्रेल की रैली को लेकर मध्य प्रदेश के बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद के.डी.देशमुख की तबियत कुछ नासाज होती दिख रही है। परिसीमन के उपरान्त उनके संसदीय क्षेत्र जिला बालाघाट में विलोपित की गई सिवनी लोकसभा की सिवनी और बरघाट विधानसभा को जोड दिया गया है। अब उनके मत्थे सिवनी और बालाघाट के भाजपाईयों के रूकने खाने की व्यवस्था का भार सहना पड सकता है।
 
भाजपा के राष्ट्रीय मुख्यालय 11 अशोक रोड के सूत्रों का कहना है कि इस रेली में लगभग साढे तीन लाख लोगों के आने की उम्मीद है। इसमं से उत्तर प्रदेश से एक लाख, बिहार, हरियाणा और राजस्थान से पेन्तीस हजार, मध्य प्रदेश से 25 हजार, छत्तीसगढ, गुजरात और महाराष्ट्र से 15 हजार, पंजाब से 12 हजार, हिमाचल, उत्तराखण्ड और कर्नाटक से दस हजार लोगों के आने की संभावना है। इस रेली को भव्य बनाने के लिए भाजपा के मीडिया मैनेजरों ने कमर कस ली है।
 
इस रैली में मेजबानी करने के लिए दिल्ली प्रदेश भाजपा के कांधों पर जबर्दस्त भार डाल दिया गया है। साढे तीन लाख लोगों के लिए व्यस्था करने में प्रदेश भाजपा को पसीना आ रहा है। जब तब शीला दीक्षित की सरकार को मंहगाई के लिए घेरने वाली भाजपा अब खुद आन्तरिक तौर पर मंहगाई से जूझ रही है। इस रैली में आने वाले लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था सबसे बडा सरदर्द बनने जा रहा है भाजपा के लिए।
 
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि चूंकि रेली दिल्ली में आहूत हा रही है, इसलिए देश भर में जहां जहां से भी भाजपा के उम्मीदवार जीतकर सांसद बने हैं, वहां वहां उनके संसदीय क्षेत्र वाले जिलों से आने वाले कार्यकर्ताओं के रहने खाने की जवाबदारी उन संसद सदस्यों के जिम्मे कर दी गई है। भाजपा के एक पदाधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि इसे वे संसद सदस्य सबसे ज्यादा परेशान हैं जिनके संसदीय क्षेत्र में एक से ज्यादा जिले आते हैं। वैसे जहां जहां भाजपा की सरकार है, वहां अप्रत्यक्ष तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं को मदद करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। मध्य प्रदेश के बाालाघाट संसदीय क्षेत्र के सांसद के.डी.देशमुख के जिम्मे सिवनी और बालाघाट जिलों की कमान सौंपी गई है।
 
प्राप्त जानकारी के अनुसार सिवनी और बालाघाट से आने वाले कुल कार्यकर्ता और पदाधिकारियों की संख्या लगभग 1000 हो रही है, जिनका रूकना और खाने का इन्तजाम करने की बात से के.डी.देशमुख की पेशानी पर पसीने की बून्दे छलक रहीं है। इस सम्बंध में जब के.डी.देशमुख से उनके मोबाईल 9013180120 और 9425403008 पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनके दोनों ही मोबाईल ऑउट ऑफ कवरेज का गाना गाते मिले। कहा जा रहा है कि कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के आने की खबर और उनके इन्तजाम अली बनाए जाने से घबराकर उन्होंने अपने मोबाईल ही स्विच ऑफ कर लिए हैं।
 
उधर दिल्ली भाजपा के सूत्रों की मानें तो दिल्ली भाजपा के हर जिलाध्यक्ष को दस दस हजार रूपए जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। रेली के बाद प्रदेश भाजपा के गठन की कवायद भी की जानी है, अत: पहल फुर्सत में ही जिलाध्यक्षों ने बिना ना नुकुर के ही अपना अंशदान जमा करवा दिया। सूत्रों की मानें तो दिल्ली भाजपा को यह रेली दो करोड रूपए की चोट देकर जाने वाली है।