सोमवार, 21 फ़रवरी 2011

ड्यूरेबल हैं गांधी परिवार के वादे!

21 फरवरी 2011 को प्रकाशनार्थ
ये है दिल्ली मेरी जान
(लिमटी खरे)

ड्यूरेबल हैं गांधी परिवार के वादे!
देश पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस में नेहरू गांधी परिवार की अपनी अहमियत है। इस परिवार के पंडित जवाहर लाल नेहरू, श्रीमति इंदिरा गांधी, और राजीव गांधी ने लगभग चालीस साल देश पर शासन किया है। इनके बाद सत्ता की धुरी कहीं कहीं सोनिया और राहुल गांधी के इर्द गिर्द ही घूमती रही है। जाहिर है इतने सालों में लोगों को लुभाने के लिए इस परिवार ने वायदे भी किए होंगे। नेहरू गांधी परिवार के वायदे किसी नामी बेटरी की तरह सालों साल चलने वाले हैं। विश्वास नहीं होता न। पिछले दिनों कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के पालघर में अपनी स्वर्गीय दादी पूर्व प्रधानमंत्री के चोंतीस साल वायदे को अमली जामा पहनाया और खुद अपनी पीठ थपथपाई। नेहरू गांधी परिवार को महिमा मण्डित करने वाले मीडिया ने भी इसे पूरी तवज्जो दी। सूबे के आदिवासी बाहुल्य जिले ठाणे में युवराज ने 80 वर्षीय कलाकर सोमा माशे को जमीन के कागजात सौंपे जिसका वायदा प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी ने उन्हें देने के लिए किया था। इंदिरा जी के बाद राजीव जी देश के वजीरे आजम रहे, फिर सोनिया के हाथों सत्ता की चाबी रही, जो जल्द ही राहुल गांधी के हाथों में स्थानांतरित होने को आतुर है। अब देशवासी अंदाजा लगा सकते हैं कि यह वो परिवार है जिसे वायदा पूरा करने में चोंतीस साल लगते हैं, पर किया तो वायदा पूरा। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि सोनिया राहुल ने जो देशवासियों को जो सपने दिखाए हैं, वे नेहरू गांधी परिवार की आने वाली पीढ़ी अवश्य ही पूरा करेगी।

थामस को मिलेगा पुर्नवास
सीवीसी के पद पर थामस की नियुक्ति ने कांग्रेसनीत केंद्र सरकार को खासा हलाकान कर रखा है। थामस अब कांग्रेस के गले की फांस बन चुके हैं। कहा जा रहा है कि वे प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह की पसंद हैं। वेल्लारी चुनावों में रेड्डी बंधुओं की करीबी के चलते लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज भी सीवीसी के निशाने पर हैं, सो उनके तेवर उग्र होना स्वाभाविक ही हैं। स्वराज के रूख को देखकर लगने लगा है कि थामस की विदाई तय है। अब सवाल यह है कि थामस को कहां एडजस्ट किया जाए। इसलिए कांग्रेस के प्रबंधकों ने उनके लिए पुर्नवास पैकेज बनाना आरंभ कर दिया है। कांग्रेस की फांस बने थामस ने भी अब बारगेनिंग आरंभ कर दी है। कहा जा रहा है कि उन्हें योजना आयोग का सदस्य, पोर्ट ट्रस्ट का अध्यक्ष या फिर अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष का पद सौंपने का लालीपाप दिया गया है। चतुर सुजान थामस हैं कि वे किसी राज्य में राज्यपाल से कम पर तैयार होते दिख ही नहीं रहे हैं।

ये हैं हमारे विदेश मंत्री का हाल सखे
देश का अजीब दुर्भाग्य है। विदेश मंत्रालय पिछले कुछ सालों से चर्चाओं का केंद्र बनकर रह गया है। पहले विदेश राज्य मंत्री थरूर ने कांग्रेस की मट्टी खराब की और अब एस.एम.कृष्णा उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुरक्षा और विकास विषय पर बहस के दरम्यान एस.एम.कृष्णा ने पुर्तगाल के विदेश मंत्री का भाषण ही पढ़ मारा, वह भी पूरे एक सौ अस्सी सेकण्ड तक। बाद में एक राजनयिक के टोकने पर उन्होंने अपना भाषण पढ़ना आरंभ किया। देश का यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि देश के नीतिनिर्धारक भाषण देने के बजाए पढ़ा करते हैं। बाद में एस.एम.कृष्णा की सफाई भी जोरदार रही कि वहां बहुत सारे कागज बिखरे पड़े थे सो उनके हाथ में आए भाषण को ही उनके द्वारा पढ़ा गया। कांग्रेस को एस.एम.कृष्णा की पीठ थपथपानी चाहिए क्योंकि इंटरनेशनल मंच पर पहली बार किसी ने इतनी भयानक गल्ति की है। अच्छा हुआ एस.एम.कृष्णा ने यह दलील नहीं दी कि इस पर एक जांच आयोग बिठाया जाए और पता किया जाए कि किसने उनके कागजों में पुर्तगाल के विदेश मंत्री का भाषण रख दिया था।

महिला उत्पीड़न से आहत हैं बेगम सलामा
सरकार चाहे जो भी दावे करे किन्तु भारत गणराज्य में महिलाओं की स्थिति चिंताजनक ही बनी हुई है, इस बात को नकारा नहीं जा सकता है। बीते दिनों दिल्ली के एक प्रोग्राम में शिकरत करने आईं महामहिम उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी की बेगम सलमा अंसारी की जुबान पर महिलाओं का दर्द ही गया। सलमा अंसारी ने यह कहकर सभी को चौंका दिया कि हमारा समाज अगर बेटियों को सुरक्षा नहीं प्रदान कर सकता है तो बेहतर होगा कि बेटियों के पैदा होते ही उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाए। बेगम का कथन मीडिया की सुर्खियां नहीं बन पाया। वर्तमान दौर में मीडिया की निष्पक्षता पर भी अनेक प्रश्न चिन्ह लग चुके हैं। भारत सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय और राज्यों में जनसंपर्क महकमे के विज्ञापन फीवर के चलते मीडिया वास्तविक चीजों को आम जनता तक नहीं परोस पा रहा है। बहरहाल बेगम सलमा अंसारी के वक्तव्य पर देशव्यापी बहस की आवश्यक्ता है। उनका कहना सच है कि आज समाज में महिलाओं का खेरख्वाह तो समाज ही बचा है और ही सरकारें।

. . . तो किसका काम है मंहगाई रोकना
देश में मंहगाई अपने पूरे शबाब पर है। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी और प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह द्वारा मंहगाई बढ़ने के कारणों में देश धर्म के बजाए गठबंधन धर्म की दुहाई दी जा रही है। कांग्रेस द्वारा परोक्ष तौर पर कृषि मंत्री शरद पवार को इसके लिए जिम्मेवार बताया जा रहा है, पर सत्ता की मलाई चखने के लिए कांग्रेस उन पर सीधा प्रहार करने से कतरा रही है। हाल ही में केद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने अपनी कमीज को यह कहकर झटक दिया कि उनका काम मंहगाई को रोकना नहीं है। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का कहना है कि उनका काम मूलतः यह देखना है कि कृषि उत्पादन को कैसे और अधिक बढ़ाया जा सकता है। अब गेंद एक बार फिर कांग्रेस के पाले में आकर गिर गई है। अब देखना यह है कि पवार के इस पैंतरे का कांग्रेसनीत कंेद्र सरकार और कांग्रेस क्या जवाबी हमला करती है।

हमारे इलाके से भी सांसद बन जाएं मदाम
कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में एक कांग्रेसी कार्यकर्ता को गैस का सिलंडर मिलना केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के लिए बुरा साबित हुआ। मामला सोनिया गांधी के दरबार पहुंचा और फिर क्या था घनघना गए फोन। आलम यह है कि पेट्रोलियम मंत्रालय के आला अफसरान भागे भागे सारे के सारे दस्तावेज लेकर पेट्रोलियम मंत्री के दरबार में हाजिरी बजा रहे हैं। सोनिया ने राजीव गांधी ग्रामीण एलपीजी वितरण योजना के बारे में जवाब तलब किया है। अधिकारियों ने हीला हवाला के लिए पूर्व पेट्रोलियम राज्यमंत्री को इसके लिए दोषी बता दिया। सोनिया के सामने यह सफाई काफी नहीं थी, उन्होंने कहा जिसे जो भी जवाब देने हों लिखित में दें। अब अफसरान सांसत में हैं, उनकी स्थिति सांप छछूंदर की सी हो गई है। एसी स्थिति में देश का हर वाशिंदा बरबस ही कह उठेगा, मदाम आप हमारे इलाके की सांसद बन जाएं, कम से कम गैस तो मिलने लगेगी समय पर।

वेलंटाईन डे: सर ने मांगा गिफ्ट में किस
प्रेम का इजहार होता है 14 फरवरी यानी वेलंटाईन डे पर। इस दिन प्रेमी युगल एक दूसरे में खोना चाहते हैं। दिल्ली के पास मेरठ में इस दिन एक अजीब वाक्या हुआ जिसने शिक्षक विद्यार्थी के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया। मेरठ सिटी के मावना रोड स्थित एक पब्लिक स्कूल की छात्रा ने अपने टीचर को फोन कर परीक्षा में मिले अंकों की जानकारी चाही। शिक्षक ने कहा नंबर कम हैं घर आकर मिलो। छात्रा ने भाई के साथ आने की बात कही तो टीचर ने उसे मना कर दिया। बाद में वह अपनी दो सहेलियों के साथ घर पहुंची। सर ने उसे अकेले अंदर बुलाया और उसके साथ अश्लील हरकतें कीं, और मोबाईल से कुछ फोटो भी खीचनें की खबरें हैं। साथ ही कहा कि अगर वह छात्रा उसे एक किस दे और केंडल लाईट डिनर पर ले जाए तो वे उसे पास कर सकते हैं। बाद में जब पीडित छात्रा ने अपनी मां से इसकी शिकायत की तो मामला पहुंच गया थाने। अब शिक्षक महोदय फरार हैं और पुलिस उनके दरवाजे बैठकर उनकी वापसी का इंतजार कर रही है।

अभी एक मार्च तक झेलो अवांछनीय काल
आपके मोबाईल पर आने वाली अवांछनीय काल से आपको फौरी राहत नहीं मिलने वाली है। दूरसंचार नियामक ट्राई ने इसकी अवधि एक मार्च तक के लिए बढ़ा दी है। ट्राई ने मोबाईल पर आने वाले काल और एसएमएस से छुटकारा दिलाने संबंधी दिशा निर्देशों की समय सीमा एक मार्च तक बढ़ा दी है। ट्राई ने पहले इसके लिए एक जनवरी तक समय दिया था, जो समयावधि बाद में बढ़ाकर 31 जनवरी कर दी गई थी। ट्राई के सूत्रों का कहना है कि ट्राई ने दूरसंचार विभाग को बताया है कि टेलीमार्केटिंग कंपनियों के लिए फोन की श्रंखला 70 के स्थान पर 140 की जा रही है जिसकी व्यवस्था करने में मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों को और वक्त की दरकार है। कहा जा रहा है कि टेलीमार्केटिंग के जरिए मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों की जेब में भी राजस्व तगड़ा जाता है जिसके चलते वे इस पर लगाम लगाए जाने से खुश नहीं हैं।

बलिदानी राय की श्रृद्धांजली की हकीकत
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के नेशनल हेडक्वार्टर में इन दिनों पंजाब में कांग्रेसियों द्वारा किए गए एक कारनामे को चटखारे लेकर सुनाया जा रहा है। धर्म की रक्षा के लिए अपने आप को कुर्बान करने वाले वीर हकीकत राय को अमृतसर में श्रृद्धांजली अर्पित की गई। वीर हकीकत राय शहीदी दिवस प्रोग्राम में कांग्रेस के नुमाईंदों ने जो किया वह कांग्रेस और मानवता को शर्मसार करने के लिए काफी है। इस प्रोग्राम में शहीद की फोटो पर माला चढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं थी, बाद में पास ही शादी के लिए सज रही एक गाड़ी से मालाएं निकालकर शहीद को समर्पित की गईं। हद तो तब हो गई जब पब्लिसिटी के भूखे कांग्रेसियों ने फूलों से लदी फदी फोटो के साथ फोटो सेशन करना आरंभ किया। बाद में पता चला कि जिस फोटो पर माला चढ़ाई जा रहीं थीं, वह हकीकत राय के बजाय भगवान महावीर की थी।

देह व्यापार को मान्यता की हिमायती प्रिया
देश में सेक्स वर्कर्स के लिए खुशखबरी है कि उत्तर मुंबई की संसद सदस्य प्रिया दत्त देह व्यापार को कानूनी मान्यता देने की पक्षधर हैं। हाल ही में उन्होंने कहा है कि देह व्यापार को कानूनी मान्यता देने पर सेक्स वर्कर्स की जिंदगी बेहतर बनाई जा सकती है। मुंबई के रेड लाईट एरिया की महिलाओं पर रिसर्च कर चुकी प्रिया का मानना है कि हर एक महिला की कहानी अलग है। प्रश्न यह है कि सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस जिसकी लगाम वर्तमान में सोनिया गांधी के हाथों में है भी महिला ही हैं। यक्ष प्रश्न तो यह है कि देश पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस की एक नुमाईंदी द्वारा महिलाओं के पुर्नुद्धार के बजाए वेश्यावृति जैसी प्रवृति को बढ़ावा देने की बात करना कहां तक उचित है। पहले इस तरह की संस्कृति कांग्रेस का अंग नहीं रही है, किन्तु सोनिया राहुल के काल में सब कुछ संभव है।

पानी संकट से दो चार हुए माननीय
इस सप्ताह दिल्ली में पानी का गंभीर संकट आन खड़ा हुआ। इस संकट से देश के माननीय सांसद महोदयों को भी दो चार होना पड़ा है। संसद भवन में पानी का संकट इतना जबर्दस्त रहा कि संसद भवन के कक्ष में आने वाले माननीय सांसदों और पूर्व सांसदों को चाय काफी भी नसीब नहीं हो सकी। देश के नीति निर्धारकों को भला यह बात कैसे गवारा होती कि उनकी सेवा में चाय काफी पेश की जाए। बस फिर क्या था कुछ सांसदों ने अधिकारियों को आड़े हाथों ले ही लिया और निर्देश दे दिए कि पानी का संकट चलता है तो चलता रहे उनकी सेवा में गुस्ताखी माफ नहीं की जा सकती है। चाय काफी के लिए मंहगे मिनरल वाटर का प्रयोग किया जाए पर उन्हें चाय काफी अवश्य ही उपलब्ध कराई जाए। यह है भारत के गरीबों के जनादेश पाने वाले माननीयों की असली तस्वीर।

अब कांग्रेस के निशाने पर हैं वकील
देश में सस्ती न्याय व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध कांग्रेस के निशाने पर अब मंहगी फीस लेकर मुकदमा लड़ने वाले वकील गए हैं। राजस्थान में कांग्रेस विधि सम्मेलन में शिरकत के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय में वकीलों की फीस इतनी ज्यादा है कि आम आदमी इसके बारे में सोच ही नहीं सकता है। गहलोत का कहना सच है कि देश को एसी व्यवस्था विकसित करनी होगी ताकि बड़े और नामी वकील गरीबों के प्रकरण लड़ने पर मजबूर हो जाएं। आज आलम यह है कि उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में गरीब जाने से बहुत ही हिचकता है, वह जानता है कि अगर वह बड़ी अदालत में गया तो उसके खप्पर तक बिक जाएंगे।

नंबर प्लेट पर तिरंगा, कटे चालान
दिल्ली पुलिस ने पहली मर्तबा कोई अच्छा काम किया है। फेसबुक पर जब पुलिस की ही शिकायतें मिलने लगीं तो पुलिस को मजबूरन देश की आन बान और शान का प्रतीक तिरंगा को नंबर प्लेट पर चस्पा करवाने वालों को सबक सिखाना पड़ा। नंबर प्लेट को निर्धारित के बजाए अपनी मनमर्जी से पुतवाने वालों के जब चालान काटे गए तब जाकर कुछ नेता नुमा लोगों की तंद्रा टूटी। पुलिस ने वाहन पर तिरंगा, रंगीन पट्टी, राजनीतिक दल का नाम, प्रेस, पुलिस, वकील और डाक्टर्स का चिन्ह आदि देखकर फटाफट चालाना काट दिए गए। वैसे भी इस तरह का काम यातायात पुलिस के नियमों के खिलाफ ही है। संभवतः पहली मर्तबा पुलिस ने इसकी सुध ली है। माना जा रहा है कि देश भर की यातायात पुलिस को इसे नजीर मानते हुए देश भर में इस तरह का अभियान चलाया जाना चाहिए।

पुच्छल तारा
मध्य प्रदेश में पाले से किसानों की खड़ी फसलों को बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। कर्ज से दबे किसान आत्महत्या पर मजबूर हो रहे हैं। प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान की सरकार और कांग्रेस दोनों ही मिलकर इस मामले पर राजनीति की कोशिश में लगे हैं। शिवराज प्रधानमंत्री से मिले और फिर खबर आई कि इसके लिए ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स का गठन किया जा रहा है। जबलपुर से अरूणा सन्याल ने ईमेल भेजा है कि पता नहीं कब जीओएम गठित होगा, हो सकता है इसके गठन में दो चार माह लग जाएं। फिर जीओएम का गठन शायद इसलिए किया जा रहा है कि अगले सालों में पाले से होने वाले नुकसान को आंका जा सके और उन्हें मुआवजा मिल सके। इस साल के मुआवजे की बात तो कोई कर ही नहीं रहा है।

सुशासन जनता का हक: राष्ट्रपति

सुशासन जनता का हक: राष्ट्रपति
 
(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार से महामहिम राष्ट्रपति श्रीमति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल भी बुरी तरह आहत हैं। संसद के बजट सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा है कि भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। देश की जनता सुशासन की हकदार है। अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति ने काला धन, खाद्य सुरक्षा, भ्रष्टाचार, मंहगाई, सड़क, बिजली, सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार का रवैया स्पष्ट किया।
15वीं लोकसभा के बजट सत्र को संबोधित करते हुए महामहिम राष्ट्रपति ने कहा कि लद्दख में बादल फटने के बाद सरकार ने बडी ही संजीदगी के साथ वहां राहत और पुर्नवास का काम किया है। पंडित भीमसेन जोशी के अवसान पर उन्हें श्रृद्धांजली देते हुए उन्होंने कहा कि उनके निधन से हुई क्षति की भरपाई मुश्किल है। कामन वेल्थ गेम्स की सफलता का श्रेय उन्होंने दिल्लीवासियों के शिष्टाचार को दिया। हिंसा के मसले पर कड़ा रूख अपनाते हुए महामहिम ने कहा कि किसी भी रूप में हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
सरकार की प्राथमिकताएं गिनाते हुए उन्होंने कहा कि मुद्रा स्फीती की वृद्धि दर को रोकना, खाद्यान मंहगाई को काबू में लाना, सामाजिक जीवन में ईमानदारी और सत्यता की कमी से निपटना, गरीबों और कमजोर तबके के लोगों के विकास आदि जैसे प्रमुख लक्ष्य इस सरकार की प्राथमिकताएं हैं। श्रीमति पाटिल ने कहा कि धान का समर्थन मूल्य 550 रूपए से बढ़ाकर 1000 रूपए प्रति क्विंटल और गेंहूं का 650 रूपए से बढ़ाकर 1100 रूपए किया गया है। इसी तरह गन्ने के समर्थन मूल्य में भी पचास फीसदी से ज्यादा की बढोत्तरी की गई है। इसी तरह राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में 35 हजार करोड़ का निवेश किया गया है, जिससे देश भर में हरित क्रांति का आगाज हो सकेगा।
दूरसंचार के मामले मंे संतोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि देश भर में अस्सी करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं की संख्या होना अपने आप में एक मिसाल है। अब सरकार ने एक लाख तक की आबादी वाले शहरों में निजी स्तर पर एफएम रेडियो की स्थापना की प्रस्तावना में 283 शहरों में 806 से ज्यादा एफएम रेडियो की स्थापना का लक्ष्य है। मोबाईल ब्राडबेण्ड का विस्तार ग्रामीण स्तर तक किए जाने पर महामहिम ने जोर दिया। साथ ही बिजली के उत्पादन को बढ़ाने की बात भी उनके द्वारा कही गई।
आतंकवाद और जातीय हिंसा है बड़ी चुनौति
महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने माना कि आतंकवाद, कट्टरवाद, जातीय हिंसा देश में बड़ी चुनौति के रूप में उभरकर सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि मुंबई हमले के बाद सरकार द्वारा सुरक्षा मानकों में व्यापक स्तर पर बदलाव किए हैं। अभी राष्ट्रीय जांच एजेंसी और सुरक्षा बलों की लगभग सौ बटालियन की स्थापना भी किया जाना प्रस्तावित है।

हरवंश सिंह को थी क्लीन चिट

हरवंश सिंह को थी क्लीन चिट की जल्दी
लेकिन फरियादी ने लगायी  शीघ्र सुनवायी की अर्जी  
मनोज मर्दन त्रिवेदी
  सिवनी। आमानाला जीमन घोटाले मामले में विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह और उनके पुत्र रजनीश सिह के बरी हो जाने का मामला राजनैतिक हल्कों में चर्चित हैं। हरवंश सिंह को तो मामले में क्लीन चिट लेने की जल्दी समझ में आती हैं लेकिन अदालत में शीघ्र सुनवायी की गुहार फरियादी द्वारा की जाना समझ से परे हैं। जिस फरियादी ने अदालत में परिवाद दायर कर हरवंश सिंह और उनके पुत्र पर आरोप लगाये थे उसी फरियादी द्वारा उन्हें आरोप मुक्त करने में जल्दी सियासी हल्कों में चर्चित है। झूठे आरोप लगाकर परिवाद पेश कर आरोपी बनाने वाले फरियादी के खिलाफ हरवंश सिंह द्वारा कोई कार्यवाही नही किये जाने की घोषणा के कई अर्थ लगाये जा रहें हैं।
  उल्लेखनीय है कि बहुचर्चित आमानाला जमीन घोटाले में फरियादी मो. शाह ने लखनादौन के न्यायालय में 18 मई 2010 को एक परिवाद धारा 156(3) के अंर्तगत पेशकर अभियुक्त न्याज अली,रजनीश सिंह और हरवंश सिंह के विरुद्ध 420,506,294,120बी के तहत प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही करने की गुहार लगायी थी। कोर्ट के बार बार आदेश देने के बाद भी रजनीश सिंह एवं हरवंश सिंह के खिलाफ पुलिस ने मामला पंजीबद्ध नहीं किया था। अंततः 28 जून 2010 को इनके खिलाफ मामला पंजीबद्ध करने की सूचना कोर्ट को दी गयी थी। फरियादी ने कोर्ट में बयान देकर यह कहा था कि उसकी हरी महाराज ने रजनीश सिंह से फोन पर बात करायी थी। फरियादी ने यह भी कहा था कि रजनीश सिंह ने उससे कहा था कि बैठकर फैसला कर लेते हैं। अन्य सभी खातेदारों के साथ बैठ कर बात कर लो। ऐसा करते करते 3 माह गुजर गये लेकिन कोई भी सह खातेदार ने मेरे साथ बैठकर बात नहीं की हैं। यहां यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं कि फरियादी की पुश्तैनी जमीन सादकसिवनी निवासी रवी नारायण शर्मा ने खरीदी हैं जिनके हरवंश सिंह से नजदीकी संबंधों की चर्चा भी होती रही हैं।
  सियासी हल्कों में व्याप्त चर्चा के अनुसार हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष का चयन होना हैं। नेता प्रतिपक्ष के चयन का काम तो फरवरी माह में ही किये जाने की संभावना है। राजनैतिक क्षेत्रों में चर्चित हैं कि हरवंश सिंह भी इस दौड़ में शामिल हैं। इसीलिये वे प्रयासरत थे कि अदालत में पंजीबद्ध धोखाधड़ी के मामलें में उन्हें जल्द ही क्लीन चिट मिल जाये क्योंकि इस मामले शिकायत जिले के वरिष्ठ इंका नेता आशुतोष वर्मा आला कमान को कर चुके थे। लेकिन फरियादी द्वारा कोर्ट में जल्दी सुनवायी की गुहार करना लोगों को समझ में नहीं आ रहा हैं। उल्लेखनीय है कि प्रकरण की खारिजी पर विचार हेतु कोर्ट मामले को 7 फरवरी 2011 को सुनवायी के लिये नियत कर चुकी थी लेकिन कोर्ट में उपस्थित फरियादी ने एक आवेदन पत्र देकर प्रार्थना की कि आज ही याने 28 जनवरी को ही सुनवायी कर ली जाये। इस अर्जी को स्वीकार करते हुये कोर्ट ने उसी दिन प्रकरण में खारिजी लगा दी। खारिजी के संबंध फरियादी ने अदालत में अपनी सहमति जतायी तथा अपने बयान में कहा कि,“ मेरा कोई विवाद शोष नही  है।“फरियादी का अदालत में दिया यह कथन भी बहुअर्थी माना जा रहा है।
  यहां यह भी उल्लेखनीय हें कि आरोपी ने जिस तेजी से आरोप लगाये थे उसी तेजी से स्वयं ही अरोप वापस लेने की जल्दी चर्चा का विषय बनी हुयी हैं। कुछ लोगों का तो यह मानना है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि फोन पर हुयी चर्चा के अनुसार अदालत के बाहर कहीं कोई बैठक हुई हो और मामला सुलट गया हो इसीलिये फरियादी ने अपने बयान में यह कहा हो कि मेरा कोई विवाद शेष नहीं है। कुछ लोगों का तो यह भी मानना हैं कि जिले में हो रहे बेनामी जमीनों के सौदे की तरह ही यह मामला ना हो।
  इस निर्णय की जानकारी देने के लिये बुलायी गयी प्रेस कांफ्रेंस में जब हरवंश से यह पूछा गया कि झूठे आरोप लगाकर आपकी छवि खराब करने वाले फरियादी मों. शाह के विरुद्ध झूठी शिकायत करने और मानहानी का क्या आप दावा करेंगें तो हरवंश सिंह ने साफ मना कर दिया कि वे ऐसी कोई कार्यवाही नहीं करेगें। उनके इस जवाब से भी लोग भैंचक हैं कि आखिर ऐसे आदमी के खिलाफ कोई कार्यवाही करने से वे क्यों हिचक रहें हैं?  
  अब इस सब में सच्चायी क्या हैं? यह तो पर्दे के पीछे ही हैं। लेकिन इस मामले के निपट जाने से विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह को राजनैतिक रूप से काफी राहत मिल गयी हैं।
घोखाधड़ी का यह तीसरा मामला था हरवंश परसिवनी। लंबे राजनैतिक जीवन में विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के ऊपर यह घोखाधड़ी करने का तीसरा मामला हैं। पहला मामला पिछड़ेवर्ग की एक विधवा महिला था जिसने अपनी जमीन हड़प लेने का आरोप लगयाथा। दूसरा मामला आदिवासियों को पैसे लेकर सिंचाई पंप ना देने का था जिसमें धोखाध्ड़ी का आरोप प्रमाणित पाने पर उप पंजीयक सहकारी संस्थाओं ने सिवनी पुलिस थाने को अपराध पंजीबद्ध कर कार्यवाही करने हेतु लिखित पत्र भेजा था। तीसरा आरोप एक फकीर मुस्लिम ने लगाया और अदालत में मेरा कोई विवाद शेष नहीं का बयान दियाऔर मामला खारिज हो गया। यह भी एक विचारणीय प्रश्न हैं कि बार बार हरवंश सिंह पर धोखाधड़ी के आरोप लगते क्यों हैं?
क्या बेनामी खरीद का मामला है?
सिवनी। फरियादी की पुश्तैनी जमीन के 22 खातेदारों में से 19 खातेदारों ने अपनी जमीन सादकसिवनी निवासी रविनारायण शर्मा ने 29 जनवरी 2010 को खरीद ली थी। इस सौदे की रजिस्ट्री भी मामले में जांच में आयी थी। विक्रय पत्र की फोटो कापी भी ली गयी थी। बताया जाता हैं कि क्रेता रविनारायण और हरवंश सिंह के बीच घनिष्ठ संबंध हैं। इसी आधार पर कई लोगों का यह भी मानना हैं कि जिले में इस चल रहें गोरख धंधें के समान ही यह भी एक बेनामी सौदा ना हो?
सात महीने दस दिनों में निपटी कार्यवाही
सिवनी। विस उपाध्यक्ष हरवंश सिंह के विरुद्ध परिवाद पत्र के द्वारा अदालत में पेश किये गये मामले का निर्णय होने में सात महीने दस दिनों का समय लगा। उल्लेखनीय हैं कि यह परिवाद मो. शाह ने 18 मई 2010 को पेश कर हरवंश सिंह धोखाधड़ी के आरोप चस्पा कियं थे और 28 जनवरी 2011 को अदालत में मेरा कोई विवाद शेष नहीं हैं का बयान दिया जिसके आधार पर अदालत ने खारिजी मंजूर कर दी।
कार्यवाही करने में क्यों हिचक रहें हैं हरवंश
सिवनी। झूठे आरोप लगाकर इलेक्ट्रानिक मीडिया और प्रिंट मीडिया में सुर्खियां बनने वाले हरवंश सिंह अब मामले के झुठे साबित  हो जाने के बाद फरियादी मो. शाह के खिलाफ झूठी शिकायत करने के लिये आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही करने और मानहानि का दावा करने से क्यों साफ साफ मना कर रहे हैं? उनके इस इंकार में मामले को सुलटाने की कोई गुत्थी तो नहीं उलझ रही है?