शुक्रवार, 22 जून 2012

कांग्रेस को ग्लेमरस बनाने की जवाबदेही राजीव शुक्ला पर!


कांग्रेस को ग्लेमरस बनाने की जवाबदेही राजीव शुक्ला पर!

पुराने चेहरों से उब चुके कार्यकर्ता चाह रहे नए लोकलुभावने चेहरे!

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। सवा सौ साल पुरानी और देश पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में उन्हीं पुराने चेहरों को देखकर कार्यकर्ता भी अब उबने लगे हैं। समरसता की स्थिति को तोड़ने के लिए कांग्रेस के रणनीतिकारों ने नए ग्लेमरस चेहरों को समाजवादी पार्टी की तर्ज पर पार्टी से जोड़ने का जतन आरंभ किया है, ताकि कार्यकर्ताओं विशेषकर नए युवाओं को पार्टी की ओर आकर्षित किया जा सके।
इक्कीसवीं सदी के आगाज तक कांग्रेस में रणीनीति बनाने के लिए कुंवर अर्जुन सिंह को पार्टी के अंदर चाणक्य कहा जाता रहा, फिर उनके सक्रिय राजनीति से किनारा करने के साथ ही प्रणव मुखर्जी ने पार्टी को संकट से उबारने की कमान संभाल रखी थी। प्रणव मुखर्जी के महामहिम राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनने के बाद अब कांग्रेस के अंदर संकटमोचक की खोज तेजी से आरंभ हाो चुकी है।
कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ (कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को बतौर सांसद आवंटित सरकारी आवास) के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस की राजमाता को यह मशविरा दिया गया था कि कांग्रेस में पुराने उबाऊ चेहरों के बजाए अब नए ग्लेमरस चेहरों को सामने लाया जाए ताकि कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी की ताजपोशी के मार्ग प्रशस्त हो सकें।
सूत्रों ने कहा कि इस कवायद के लिए पहले तो राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी राजी नहीं थीं, बाद में उन्होंने इसके लिए अपनी सहमति दे दी। जब दिखने और बिकने वाले चेहरों को कांग्रेस से जोड़ने की बात सामने आई तो इन्हें खीचकर लाने के लिए किसे पाबंद किया जाए इस बारे में कांग्रेस के अंदर विमर्श आरंभ हुआ।
सूत्रों ने कहा कि इसके लिए कुछ नेताओं ने सपा से टूटकर अलग हुए अमर सिंह का नाम सुझाया। जैसे ही अमर सिंह का नाम सामने आया तो सोनिया सहित अनेक नेताओं का मुंह कसैला हो गया। फिर मशविरे के बाद यह तय किया गया कि पार्टी के अंदर ही इस काम को करने के लिए किसी कुशल प्रबंधक और लाईजनर को पाबंद किया जाए।
सूत्रों के अनुसार इसके लिए कांग्रेस के संकट मोचक प्रणव मुखर्जी के समक्ष प्रस्ताव रखा जिसे उन्हें आग्रह कि साथ ठुकरा दिया। इसके बाद अहमद पटेल और सुरेश पचौरी के नाम पर विमर्श आरंभ हुआ, किन्तु मामला परवान नहीं चढ़ पाया। तभी कांग्रेस के एक चतुर सुजान ने मूलतः पत्रकार (अब अपने पेशे से विमुख होकर लाल बत्ती पा चुके) राजीव शुक्ला का नाम सुझाया।
फिर क्या था राजीव शुक्ला के नाम पर मुहर लगा दी गई। कहा जाता है कि इसके बाद से पार्टी के अंदर राजीव शुक्ला की पीठ पीछे को अमर सिंह कहकर ही बुलाया जाता है। यह अलहदा बात है कि राजीव शुक्ला को अमर सिंह का चरित्र कभी भी रास नहीं आया। कहा जाता है कि राजीव शुक्ला काफी हद तक अमर सिंह को नापसंद ही करते हैं।
पिछले दिनों पार्टी से ग्लेमरस चेहरे के रूप में गुजरे जमाने की अभिनेत्री रेखा और तथाकथित तौर पर क्रिकेट के भगवान की उपाधि पा चुके सचिन तेंदुलकर को कांग्रेस की ओर से राज्य सभा में लाकर राजीव शुक्ला ने एक तरह से कांग्रेस के लिए अमर सिंह का किरदार बखूबी निभाया है।
सूत्रों की मानें तो राजीव शुक्ला अब दादा यानी प्रणव मुखर्जी के रायसीना हिल्स पहुंचने के मार्ग प्रशस्त करने के लिए समाजवादी क्षत्रप मुलायम सिंह यादव से डील में जुटे हैं। कहा जाता है कि वे राजीव शुक्ला ही थे जिन्होंने ममता और मुलायम के बीच खाई खोदकर मुलायम को दादा के पक्ष में राजी किया है।
कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि मुलायम सिंह यादव और राजीव शुक्ला के बीच हुई गुप्त डील का ही नतीजा था कि कन्नोज में कांगेस ने डिंपल यादव के खिलाफ कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा था। अब राष्ट्रपति चुनावों में प्रणव मुखर्जी को समर्थन देने के एवज में मुलायम सिंह यादव ने अपनी खासी शर्तें कांग्रेस के सामने रख दी हैं।
सूत्रों की मानें तो महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को दूसरा कार्यकाल देने के पक्ष में कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी कतई नहीं हैं। यही कारण है कि प्रतिभा देवी के स्थान पर कांग्रेस ने प्रणव मुखर्जी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना दिया है।
वहीं दूसरी ओर अब मुलायम सिंह यादव अपने भाई राम गोपाल यादव को भारत गणराज्य का उप राष्ट्रपति बनाना चाह रहे हैं। सचिन तेंदुलकर के शपथ ग्रहण समारोह में राजीव शुक्ला के साथ रामगोपाल यादव को देखकर यह चर्चा चल पड़ी थी कि मुलायम ने अपने भाई को उप राष्ट्रपति बनाने की आखिर ना केवल ठानी है, वरन रामगोपाल को सही हाथों में भी सौंप दिया है। वहीं कांग्रेस के व्ही.किशोर चंद देव भी इस पद के लिए लाबिंग करते नजर आ रहे हैं।

राजा का वनवास लगभग पूरा: बन सकते हैं मंत्री


राजा का वनवास लगभग पूरा: बन सकते हैं मंत्री

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। मध्य प्रदेश में दस साल तक लगातार राज करने वाले राघोगढ़ राजघराने के वंशज राजा दिग्विजय सिंह का वनवास लगभग पूरा होने को है। 2003 में चुनाव हारते ही सक्रिय राजनीति से दस सालों के वनवास की घोषणा को दिग्विजय सिंह ने निभाया और उनका वनवास इस साल के अंत में पूरा हो रहा है।
राजा दिग्विजय सिंह ने भले ही सक्रिय राजनीति से सन्यास लिया हो, पर कांग्रेस के संगठनात्मक पदों पर वे बने रहे और अपने विवादित बयानों के चलते मीडिया की सुर्खियां भी खूब बटोरी हैं राजा दिग्विजय सिंह ने। ज्ञातव्य है कि 2003 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के पूर्व राजा दिग्विजय सिंह ने कहा था कि अगर वे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार नहीं बनवा पाए तो दस साल के लिए वे राजनीति से दूर रहेंगे।
इधर कांग्रेस के अंदरखाने से छन छन कर बाहर आ रही खबरों के अनुसार कांग्रेस अब बदलाव की बयार बहाने को तैयार है और वह अपने अंदर कामराज योजना को लागू करने का मन बना रही है, जिसके तहत संगठन के कुछ पदाधिकारियों को लाल बत्ती से नवाजकर सरकार में हिस्सेदारी दी जाएगी।
कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि एआईसीसी चीफ सोनिया गांधी ने राजा दिग्विजय सिंह को यह संकेत भी दिया है कि वे केंद्र में मंत्री बनने को तैयार रहें। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को ठिकाने लगाने के आरोपों के बाद भी राजा दिग्विजय सिंह को सांसद ना रहते हुए भी दिल्ली में साउथ एवेन्यू के स्थान पर बड़ा बंग्ला देने की तैयारी की जा रही है जो इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में राजा की तूती केंद्र में बोलने वाली है।
ज्ञातव्य है कि गत मई माह में ही राजा दिग्विजय सिंह साउथ एवेन्यू के अपने बंग्ले को छोड़कर लोधी स्टेट में 64 नंबर की कोठी जो केंद्रीय मंत्री व्ही.किशोर चंद देव के नाम से आवंटित है। केंद्र सरकार द्वारा सरकारी खर्च पर इस बंग्ले में रंग रोगन और इसकी साज सज्जा करवाई जा रही है। कहा जा रहा है कि अगले फेरबदल में राजा दिग्विजय सिंह को केंद्र में लाल बत्ती से नवाजा जाना लगभग तय ही है।

तलाशने होंगे टिकाउ रहन सहन के तरीके: सिंह


तलाशने होंगे टिकाउ रहन सहन के तरीके: सिंह

(टी.विश्वनाथन)

रीयो डि जिनेरियो (साई)। प्रधानमंत्री ने औद्योगिक देशों के उपभोग के मौजूदा तौर तरीकों को अस्थाई बताते हुए टिकाऊ रहन-सहन के नये रास्ते तलाशने की आवश्यकता पर बल दिया है। कल रात ब्राजील में रियो डि जिनेरियो में रियो प्लस-ट्वेन्टी शिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र में डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिये महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय सौर मिशन लागू कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर अतिरिक्त वित्तीय साधन और प्रौद्योगिकी उपलब्ध होती तो अनेक देश उत्सर्जन घटाने के लिए ज्यादा प्रयास कर सकते थे।
डॉ.सिंह ने कहा कि बहुत से देशों के पास अगर अतिरिक्त वित्त और तकनीक उपलब्ध हो तो वो और भी काफी कुछ कर सकते हैं। महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में औद्योगिक देशों द्वारा सहयोग के बहुत कम साक्ष्य मिलते हैं। टिकाऊ विकास के घटक के रूप में आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश और पर्यावरणीय स्थिरता सभी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें जो भविष्य चाहिए उसमें सबके लिए टिकाऊ वृद्धि के वास्ते अनुकूल पारिस्थितिकी और आर्थिक जगह होनी चाहिए। रियो प्लस-ट्वेन्टी शिखर सम्मेलन में पृथ्वी शिखर सम्मेलन के साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारी और बराबरी के सिद्धांत की फिर से पुष्टि किये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका अर्थ  यह नहीं है कि देशों को टिकाऊ विकास को प्रोत्साहन देने के लिए खुद प्रेरित होकर उपाय नहीं करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर हमारा दृष्टिकोण समान भागीदारी के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। इसी कारण प्रथम रियो शिखर सम्मेलन में समान किंतु अलग-अलग उत्तरदायित्व का सिद्धांत रखा गया। मुझे खुशी है कि हमने शिखर सम्मेलन के दौरान इस सिद्धांत के साथ ही समानता के सिद्धांत की भी पुनः पुष्टि की है।
टिकाऊ विकास के लिए भारत द्वारा अपनी ओर से किये गए उपायों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले दो दशकों में भारत के प्रयासों के रचनात्मक परिणाम हासिल हुए हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकासशील देशों में विकास के लिए समावेशी वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष १९९२ में रियो शिखर सम्मेलन में इस बात का उल्लेख किया गया था कि ग़रीबी उन्मूलन विकासशील देशों की सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उधर, प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने श्रीलंका सरकार से आज अनुरोध किया कि उसे यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए कि तमिल समुदाय गरिमा के साथ सामान्य जीवन बिता सके। प्रधानमंत्री ने रियो शिखर सम्मेलन के अवसर पर अलग से श्रीलंका के राष्ट्रपति महिन्दा राजपक्से के साथ द्विपक्षीय बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठाया।
पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए विदेश सचिव रंजन मथाई ने कहा कि श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा  कि विस्थापित तमिलों के पुनर्वास का काम चल रहा है और केवल तीन हजार लोग शिविरों में रह रहे हैं। ये शिविर लड़ाई खत्म होने के बाद स्थापित किए गए थे। श्री मथाई ने कहा कि श्रीलंका के राष्ट्रपति ने सत्ता के विकेन्द्रीकरण के मुद्दे पर विभिन्न दलों के साथ हुए विचार-विमर्श से भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने श्रीलंका के राष्ट्रपति को आर्थिक क्षेत्र में सभी द्विपक्षीय सहायता कार्यक्रमों में सहयोग का आश्वासन दिया।

दो वामपंथी प्रणव के पक्ष में


दो वामपंथी प्रणव के पक्ष में

(प्रियंका श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ यू पी ए के उम्मीदवार और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को कल दो वामपंथी दलों का समर्थन प्राप्त हुआ। श्री मुखर्जी को समर्थन देने के मुद्दे पर विपक्षी एन डी ए और वाम पंथी दल विभाजित हैं। एन डी ए के दो घटक दल जनता दल-यूनाइटेड और शिव सेना ने श्री मुखर्जी को समर्थन देने का फैसला किया है।
वाम दलों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और फॉरवर्ड ब्लॉक ने श्री मुखर्जी का समर्थन करने का निर्णय लिया है, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और आर एस पी ने मतदान से अनुपस्थित रहने की घोषणा की है। एन डी ए के संयोजक तथा जनता दल-यूनाइटेड प्रमुख शरद यादव ने कहा कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति पद के लिए श्री मुखर्जी के पक्ष में है।
पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल-सेक्युलर प्रमुख एच. डी. देवेगौड़ा ने कहा है कि उनकी पार्टी श्री प्रणब मुखर्जी का समर्थन करेगी। भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव में पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी. ए. संगमा के नाम की घोषणा की है। यह घोषणा पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने की।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता प्रकाश कारात ने कहा है कि उनकी पार्टी श्री मुखर्जी की उम्मीदवारी का समर्थन करेगी। यू पी ए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी २८ जून को अपना नामांकन-पत्र भरेंगे। कल शाम आकाशवाणी के साथ बातचीत में संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने इसकी पुष्टि की। नामांकन-पत्र भरने का काम १६ जून को शुरू हुआ जो ३० जून तक चलेगा।

विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के लिए संजीदा हैं शर्मा


विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के लिए संजीदा हैं शर्मा

(महेश रावलानी)

नई दिल्ली (साई)। वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनन्द शर्मा ने ओड़ीशा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में ५१ प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति देने के सरकार के निर्णय को जल्द लागू करने के लिए समर्थन मांगा है। श्री शर्मा ने अपने पत्र में कहा है कि मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश से कृषि मूल्यों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए निवेश, प्रौद्योगिकी और दक्षता में बढ़ोतरी होगी।
सरकार मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र को खोलने के राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे पर आम सहमति बनाने का प्रयास कर रही है। इससे पहले कई राज्य सरकारों और यूपीए की सहयोगी तृणमूल कांग्रेस के विरोध के कारण मल्टी ब्रांड क्षेत्र को खोलने के फैसले को स्थगित कर दिया गया था।  सरकार ने करीब पांच सौ पचास अरब डॉलर के बाजार को वैश्विक खुदरा कारोबारियों के लिए खोलने पर आम सहमति बनाने के लिए नये सिरे से प्रयास शुरू कर दिये हैं।