मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

42 लाख रूपये समेत बदमाश दबोचे


लूट के तीन घंटे बाद तीन बदमाश गिरफ्तार, 42 लाख की लूट का पर्दाफाश

42 लाख रूपये समेत बदमाश दबोचे

(सचिन धीमान)

मुजफ्फरनगर (साई)। जनपद में बदमाशों का आतंक थामने का नाम नहीं ले रहा है। जिसके चलते बदमाशों के हौंसले ओर भी ज्यादा बुलंद होते जा रहे है। जिसका अंजामा इस घटना से लगता है दिल्ली हरिद्वार हाइवे पर व्यापारी के मुनीम से 42 लाख रूपये लूटकर भाग रहे तीन बदमाषों को एसपी सिटी की टीम ने घेराबंदी करके दबोच लिया। बदमाशों के कब्जे से बुलेरो कार और 42 लाख रूपये नकद बरामद हुए हैं। एसएसपी ने पुलिस टीम की प्रशंसा करते हुए पांच हजार रूपये ईनाम दिया। वहीं व्यापारी ने भी पुलिस टीम को जल्द ही पुरस्कृत करने की घोषणा की।
एससपी डा। बीबी सिंह ने पुलिस लाइन सभाकक्ष में पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि जनपद के थाना शहर कोतवाली क्षेत्र के दक्षिणी खालापार निवासी योगेन्द्र कुमार ने देर रात जनपद के पुरकाजी थाने पर सूचना दी कि उसका मुनीम ब्रह्म सिंह व सुपरवाइजर कुलदीप तथा उनकी बुलेरो कार संख्या यूपी 12यू/0531 का चालक अषोक कुमार हरिद्वार व देहरादून से वसूली करके लौट रहे थे। तभी पुरकाजी से निकलते ही इंडिका कार सवार चार बदमाषों ने ओवरटेक करके उनकी कार को रूकवा लिया और चाकुओं से दोनों मुनीमों को घायल कर दिया और उनसे 41 लाख 58 हजार 550 रूपये लूट लिये।
घटना की जानकारी मिलते ही एसएसपी ने तुरंत एसपी सिटी राजकमल यादव के नेतृत्व में दो टीमों का गठन किया। जिसमें छपार थाने के दरोगा नरेन्द्रपाल सिंह, सिपाही सुरेष, सोमबीर, नौषाद तथा पुरकाजी एसओ अरूण कुमार त्यागी,  मनोज कुमार, चेतन सिंह, श्याम सुंदर व विजय को शामिल किया। एसपी सिटी राजकल यादव भी हाइवे पर बदमाषों की पकड़ने हेतु सक्रिय हो गये। रात्रि करीब दस बजे पुलिस को सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध लोग बरला से मांडला जाने वाले रास्ते पर राजवाहे के किनारे बुलेरो गाड़ी के साथ खड़े हैं।
सूचना मिलते ही एसपी सिटी दोनों टीमों के साथ वहां पहुंचे और घेराबंदी की। तीनों ने पुलिस पर जान से मारने की नीयत से फायर किये। पुलिस ने अपने बचाव में फायरिंग की और तीनों बदमाषो को धर दबोचा। बदमाषों ने अपने नाम मुकेष पुत्र ओमप्रकाष निवासी मुकीमपुर, थाना बिनौली, जिला बागपत हाल निवासी अलमासपुर चौराहे पर मोबाइल की दुकान, लाल सिंह पुत्र मोल्हड़ सिंह व अंकित पुत्र प्रहलाद निवासी ग्राम खोकनी, थाना ककरौली बताया। पुलिस ने बदमाषों के कब्जे से लूटी गई बुलेरो कार सहित 41 लाख 58 हजार 550 रूपये नकद, दो तमंचे व एक चाकू बरामद किया।
लुटेरों ने बताया कि अमित पुत्र प्रमोद निवासी खोकनी व रोहताष निवासी ग्राम वेदखेड़ी, थाना झिंझाना हाल निवासी अमित विहार, थाना नई मंडी अंधेरे का लाभ उठाकर भागने में कामयाब रहे। एसएसपी ने बताया कि पूछताछ में लुटेरों ने बताया कि व्यापारी योगेन्द्र कुमार का चालक अषोक व व्यपारी अषोक के भाई विनय का ड्राईवर  ने तीन दिन पहले मुकेष की मोबाइल की दुकान पर योजना बनाई थी कि जब भी अषोक व्यापारी के मुनीम वसूली करने जायेंगे तब इसकी जानकारी उन्हें दे दी जायेगी और लूट की जो रकम होगी वह आपस में बांट ली जायेगी।
कल जब मुनीम व सुपरवाईजर उत्तराखंड में वसूली के लिए गये थे तभी उक्त दोनों ड्राइवरों ने इसकी सूचना बदमाषों को दे दी। बदमाषों द्वारा घायल किये गये मुनीम व सुपरवाइजर को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।  वहीं बदमाषों का पीछा करते समय    गिर जाने से एसओजी प्रभारी सचिन मलिक घायल हो गये। उनके पैर की हड्डी टूट गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
एसएसपी ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में छपार थाने के दरोगा नरेन्द्रपाल सिंह की अहम भूमिका है। वहीं व्यापारी योगेन्द्र कुमार ने पुलिस टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है। एसएसपी के अनुसार फरार बदमाषों के गिरफ्तार होने पर कई अन्य वारदातों का भी खुलासा होने की संभावना है। प्रेसवार्ता में एसपी सिटी राजकमल यादव, आईपीएस सीओ सदर पूनम, एसओ पुरकाजी अरूण त्यागी मौजूद रहे।

अनशन पर बैठा छात्र बेहोश


अनशन पर बैठा छात्र बेहोश

(ब्यूरो कार्यालय)

मुजफ्फरनगर (साई)। डीएवी डिग्री कालेज में आमरण अनषन पर बैठे एक छात्र की हालत बिगड़ गई। छात्र के अनषन स्थल पर बेहोष हो जाने से पुलिस प्रषासन में हड़कम्प मच गया। छात्र को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराने के साथ ही अनषन पर बैठे सभी विद्याथियों का परीक्षण कराया गया।
वहीं डीएवी कालेज में पूर्व मंत्री योगराज सिंह ने पहुंचकर विद्यार्थियों को अपना समर्थन दिया और प्रदेष सरकार पर आरोप लगाये। पूर्व मंत्री योगराज सिंह ने कहा कि विद्याथियों की समस्याओं को विवि प्रषासन के समक्ष रखा जायेगा। उन्होंने इस बात को लेकर प्रदेष सरकार की निंदा की कि एक तरफ सरकार विद्यार्थियों को लैपटोप बांटने की तैयारी कर रही है वहीं कालेजामें विद्यार्थियों को प्रवेष नहीं मिल रहा है।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि कालेजों में प्रवेष प्रक्रिया में धांधली बरती गयी है। सवेरे के समय यहां पर आमरण अनषन पर बैठे छात्र शालू की हालत बिगड गई तथा वह बेहोष हो गया। यह देखकर छात्रों में हलचल मच गयी। अनषनकारी छात्र के बेहोष होने पर उसे तत्काल ही जिला चिकित्सालय ले जाकर भर्ती कराया गया। सूचना मिलने पर सीओ सिटी संजीव वाजपेयी मौके पर पहुंचे और आमरण अनान पर बैठे विद्यार्थियों का सरकारी चिकित्सक से परीक्षण कराया। वहीं एसडी डिग्री कालेज के छात्र छात्राओं ने डीएम कार्यालय पर प्रदर्षन किया। छात्रों ने एसडी डिग्री कालेज में विद्यार्थियों ने प्रवेष की मांग को लेकर प्रदर्षन करते हुए कक्षाओं में तालाबंदी की।

ईदगाह के पास चला महाबली


ईदगाह के पास चला महाबली

(ब्यूरो कार्यालय)

मुजफ्फरनगर (साई)। नगर में चल रहे अतिक्रमण अभियान के तहत ईदगाह व चालीस फुटा रोड पर महाबली ने अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त किया। सरकारी जमीन व नालों पर अतिक्रमण  करने वाले दुकानदारों का चालान भी काटा गया। नगर मजिस्ट्रेट इन्द्रमणि त्रिपाठी पुलिस बल के साथ ईदगाह पहुंचे और अवैध अतिक्रमण को हटवाया।
भारी पुलिस बल देखकर ज्यादातर दुकानदारों ने खुद ही अपने हाथा में हथौड़ा संभाल लिया और अवैध अतिक्रमण हटाया। सड़क के किनारे व नाले के ऊपर किये गये  अतिक्रमण को बुलडोजर ने ध्वस्त किया। नगर मजिस्ट्रेट ने दुकानदारों को चेतावनी दी कि यदि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण किय तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जायेगी। अतिक्रमण हटाओ अभियान में अवैध अतिक्रमण तो हटाया रहा है लेकिन उससे पूरा शहर कूडे के ढेर में तब्दील हो गया है। नगरपालिका की टीम अभी तक उस मलबे को उठवा रही है जिससे नागरिकों को आने जाने में बेहद परेषानी का सामना करना पड़ रहा है।

केन्द्र सरकार है जनविरोधी: अषोक गोयल


केन्द्र सरकार है जनविरोधी: अषोक गोयल

(ब्यूरो कार्यालय)

मुजफ्फरनगर (साई)। भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेष संयोजक अशोक गोयल ने पार्टी कार्यालय पर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी व प्रदेष अध्यक्ष डा। लक्ष्मीकांत वाजपेयी की देवबंद रैली को सफल बनाने के लिए रणनीति बनाई।
अषोक गोयल ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान बताया कि दोनों नेता देवबंद में किसान व्यापारी रैली को सम्बोधित करेंगे उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार घोटालों और जनविरोधी सरकार है। एफडीआई लागू कर सरकार ने पांच करोड़ व्यापारियों को सड़क पर लाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जिस वालमार्ट कम्पनी का अमेरिका और जापान में विरोध हो रहा है उसे केद्र सरकार देष में व्यापारी करने की इजाजत दे रही है।
केन्द्र सरकार का यह निर्णय देष को गुलामी की ओर धकेल रहा है। एफडीआई और घोटालों को लेकर संसद से सड़क तक लड़ाई लड़ी जायेगी। बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष देवव्रत त्यागी तथा संचालन श्रीमोहन तायल ने किया। बैठक में पूर्व चेयरमैन कपिलदेव अग्रवाल, ब्रिजेष दीक्षित, विनोद अनेजा, कपिल मित्तल, संजय गोयल, शरद कपूर, देषबंधु तोमर, जगदीष पांचाल, अवधेष अग्रवाल, प्रदीप गुप्ता, समीर मित्तल आदि मौजूद रहे।

नगर मजिस्ट्रेट व चेयरमैन को किया सम्मानित

नगर मजिस्ट्रेट व चेयरमैन को किया सम्मानित

(ब्यूरो कार्यालय)

मुजफ्फरनगर (साई)। यूथ होस्टल एसोसिएषन ऑफ इंडिया द्वारा रायल सिनेमा पर ट्रैकिंग कैम्प लीडर कार्यषाला में ट्रेकर्स के साथ-साथ नगर मजिस्ट्रेट व नगरपालिका अध्यक्ष को सम्मानित किया गया। संगठन द्वारा आयोजित कार्यषाला में ट्रैकिंग के सम्बन्ध में जानकारी दी। इस मौके पर नगर मजिस्ट्रेट इन्द्रमणि त्रिपाठी व चेयरमैन पंकज अग्रवाल को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। रियासत गौर की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में अमित गर्ग, एसके बिट्टू, जेपी शर्मा, राजेष वर्मा, विजय जायसवाल, सुलेमान सिद्दीकी, आसिफ अली, रविन्द कुमार शर्मा आदि मौजूद रहे। कार्यषाला प्रभारी मुजम्मिल हुसैन व सूरज प्रकाष मलिक ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

एसएसपी ने किया नई मंडी थाने का मुआयना


एसएसपी ने किया नई मंडी थाने का मुआयना

(ब्यूरो कार्यालय)

मुजफ्फरनगर (साई)। एसएसपी डा। बीबी सिंह ने थाना नई मंडी का निरीक्षण किया और पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली को परखा। एसएसपी ने पत्रावलियों, लम्बित विवेचनाओं पर कड़ी नाराजगी जताते हुए पुलिसकर्मियों को जमकर हड़काया।  एसएसपी ने मालखाने में रखे हथियारों का भी निरीक्षण किया।
सुबह एसएसपी ने जनपद के नई मंडी थाने पहुंचकर सबसे पहले मालखाने में रखे सामान को देखा। बाद में उन्होंने कार्यालय में फाइलों का अवलोकन किया। पुलिस सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि उन्होंने थाने में तैनात दरोगाओं व पुलिसकर्मियों से कहा कि वे अपने क्षेत्र की पूरी जानकारी रखें तथा क्षेत्र में रहने वाले अपराधियों की गतिविधियों की सूचना एकत्र कर अपने अधिकारियों को अवगत कराते रहें। एसएसपी ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ निरोधात्मक कार्यवाही में कोताही न बरती जाये।

फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता खत्म करने को दिया ज्ञापन


फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता खत्म करने को दिया ज्ञापन

(ब्यूरो कार्यालय)

मुजफ्फरनगर (साई)। मैडिकल स्टोरों पर फार्मेसिस्ट की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर जिला कैमिस्ट ऐसासिएषन के पदाधिकारियों ने डीएम को डज्ञापन दिया। इसमें मांग की गई है कि अंग्रेजी काले कानून को समाप्त किया जाये। ज्ञापन में कहा गया कि कैमिस्ट शाप पर फार्मेसिस्ट की  जरूरत उस समय थी जब हकीम नुस्खे लिखकर देते थे और उन दवाओं को मिक्चर बनाकर दिया जाता था।
1964 में यह कानून खत्म कर दिया गया था। अब दवा की दुकानों पर सीधे दवाई दी जाती है। ऐसे में अब फार्मेसिस्टों की आवष्यकता नहीं है। उनकी मांग थी कि पांच वर्ष से अधिक समय से चल रहे मैडिकल स्टोरों पर कोई अनिवार्यता पूरी तरह समाप्त होनी चाहिए। ज्ञापन देने वालों में रविन्द्र चौधरी,  प्रमोद मित्तल, दीपक अग्रवाल, सतपाल सिंह, श्रीमोहन तायल, रवि चौधरी, आषीष अग्रवाल व अजय कुमार आदि शामिल थे।

अखिलेश की सपा सरकार ने लिया बसपा से सबक

अखिलेश की सपा सरकार ने लिया बसपा से सबक

नहीं बांटी प्रदेश में रेवडियों की लाल बत्ती

(ब्यूरो कार्यालय)

मुजफ्फरनगर (साई)। उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ पार्टी अखिलेश यादव की सपा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री बहन मायावती की बसपा सरकार से सबक लेते हुए अपनी पार्टी में न तो पार्टी के सत्ता में आने के बाद किसी अन्य पार्टी के पदाधिकारियों या कार्यकर्ताओं को मेम्बरशीप दी है और न ही पार्टी के किसी भी पदाधिकारियों या कार्यकर्ताओं को अनावश्यक रूप से लाल बत्ती बांटी।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के पूर्ण बहुमत से रिकार्डतोड जीत हासिल करने के बाद उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार बनायी जिसके बाद बसपा सुप्रीमों एवं उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने जहां बसपा के सत्ता में आते ही पार्टी में दूसरी अन्य पार्टियों के पदाधिकारियों व सदस्यों को बसपा की सदस्यता दिलाते हुए उन्हें जहां पार्टी में पद दिये वहीं मायावती ने बसपा के बडे नेताओं सहित छुटभैया नेताओं को भी जमकर रेवडियों की तरह लाल बत्तियां बांट डाली थी और जिसके बाद बसपाई खुलकर बसपा के नाम का प्रयोग करते हुए थानों व अन्य सरकारी कार्यालयों में अपनी दबंगई दिखाई। जिसका परिणाम बसपा को विगत चुनाव में उस समय भुगतना पडा जब बसपा को प्रदेश की जनता ने वोटिंग के समय नकार दिया और बसपा की सत्ता से छुट्टी कर दी। वहीं इस बार विधानसभा चुनाव में सपा को प्रदेश की जनता चुना और सपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में आयी जिसके बाद सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव ने प्रदेशवासियों को युवा मुख्यमंत्री देते हुए अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री की शपथ दिलायी। अखिलेश यादव के शपथ लेने के बाद मंत्रियों को विभागों का बंटवारा किया गया परंतु इस बीच अखिलेश की सपा सरकार ने बसपा से सबक लेते हुए सपा के पदाधिकारियों को प्रदेश में लाल बत्तियां न बांटते हुए पार्टी में नये लोगों को सदस्यता दिये जाने पर रोक भी लगा दी। साथ ही पार्टी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को इस बात का पाठ पढा दिया गया कि यदि जिलाध्यक्ष के अलावा कोई पार्टी कार्यकर्ता अपनी गाडी पर पार्टी का झंडा लगाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी जिससे प्रदेश भर के सपा कार्यकर्ता अनुशासन में अपने कार्य में जुटकर सपा की नीतियों पर खरे उतरते दिखाई दे रहे है।

नहीं रही सबसे उमर दराज महिला


नहीं रही सबसे उमर दराज महिला

(यशवंत)

वाशिंग्टन डीसी (साई)। दुनिया की सबसे उमर दराज महिला अब हमारे बीच नहीं रही। दुनिया की सबसे बुजुर्ग व्यक्ति मानी जाने वाली जॉर्जिया की महिला का 132 साल की उम्र में निधन हो गया. जॉर्जिया के सचिनो गांव की रहने वाली एंतिसा खविचावा ने दोनों विश्व युद्ध और रुस की क्रांति देखी है.
एंतिसा के पास सोवियत का दस्तावेज था जिसमें लिखा था कि उनकी जन्म आठ जुलाई 1880 में हुआ लेकिन उनके उम्र को लेकर हमेश विवाद रहा और उसे कभी साबित नहीं किया जा सका. एक स्थानीय समाचार पत्र की खबर के अनुसार, वह अपने 42 वर्षीय पोते के साथ रहती थीं.
उन्होंने 85 वर्ष की उम्र में चाय की पत्तियों चुनने और मक्के दाने छांटने के अपने काम से अवकाश ग्रहण कर लिया था. उनके परिवार में उनके बाद की चार पीढियों के बच्चे रह रहे थे. एंतिसा अपने अच्छे स्वास्थ्य का श्रेय स्थानीय ब्रांडी को देती थीं. वह रोज थोडी ब्रांडी पीती थीं.

बड़े काम की है अरण्डी


हर्बल खजाना ----------------- 30

बड़े काम की है अरण्डी

(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। अरण्डी की खेती भारत के अनेक हिस्सों में की जाती है। आयुर्वेद में अरण्डी के एक विरेचक औषधि के तौर पर उत्तम माना गया है। अरण्डी का वानस्पतिक नाम रिसिनस कम्युनिस है। अरण्डी के तेल को मुख्यतः जुलाब लेने के लिए उपयोग में लिया जाता है।
एक कप दूध में २ चम्मच तेल डालकर सोते समय पीना चाहिए। असर न होने पर इसकी मात्रा दूसरे दिन बढ़ाकर लेना चाहिए। स्तनों की शिथिलता दूर करने के लिए एरण्ड के पत्तों को सिरके या नीबू रस में पीसकर स्तनों पर गाढ़ा लेप करने से कुछ ही दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है।
अरण्डी पुराने मल को निकालकर पेट को हल्का करती है। यह वात, साइटिका, पेट में पानी की अधिकता, समस्त वायुरोगों की नाशक है। इसके पत्ते, जड़ और बीज उसका तेल सभी औषधि के रूप में इस्तेमाल किए जाते है। डाँग- गुजरात के आदिवासियों के अनुसार अरण्डी के फूल ठंड से उत्पन्न रोग जैसे खांसी, जुकाम और बलगम तथा पेट दर्द संबधी बीमारी का नाश करते है।
पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकार ऐसे शिशु जिनके सिर पर बाल नहीं उगते हो या बहुत कम हो या ऐसे पुरुष-स्त्री जिनकी पलकों व भौंहों पर बहुत कम बाल हों तो उन्हें एरंड के तेल की मालिश नियमित रूप से सोते समय करने की सलाह देते है। अरण्डी की जड़ का काढ़ा छानकर एक-एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करें, ऐसा करने से मोटापा कम हो जाता है। (साई फीचर्स)

(लेखक हर्बल मामलों के जाने माने विशेषज्ञ हैं)

दर दर भटक रहा आईडिया का उपभोक्ता


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . . 30

दर दर भटक रहा आईडिया का उपभोक्ता

पता नहीं कौन उपयोग कर रहा है सिम

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई) एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया के स्लोगन वाली आदित्य बिरला के स्वामित्व वाली आईडिया सेल्यूलर की नजरों में उसके उपभोक्ता की इज्जत दो कौड़ी की भी नहीं है। मध्य प्रदेश से आए एक उपभोक्ता ने बताया कि उसने लगभग तीन माह पूर्व आईडिया का नेट सेटर लिया था। उसका नेट सेटर और सिम दोनों ने ही काम करना बंद कर दिया। बार बार आईडिया की देहरी चूमने के बाद भी उपभोक्ता को न्याय नहीं मिल सका है।
एक उपभोक्ता द्वारा लिए गए नेट कनेक्शन को लगभग तीन माह बाद भी उसे नहीं सौंपा जाना आश्चर्य का विषय ही माना जा रहा है। नेट के बेहद धीरे होने की शिकायत महाकौशल के हर जिले में आम हो गई है। उक्त उपभोक्ता द्वारा दूरभाष पर बताया गया कि उसने आईडिया का नेट कनेक्शन लिया था। नेट तो आरंभ से ही इतनी धीमी गति में चल रहा है मानो आकाशवाणी का सवा तीन बजे का धीमी गति का समाचार हो। नेट पर सर्फिंग करने पर उसे साईट खोलने में घंटों ही लग जाते हैं। जैसे तैसे मेल चेक करने की बारी आती है तब लागिन करने पर ही कनेक्शन दम तोड़ देता है।
वहीं सिवनी जिले के एक उपभोक्ता ने बताया कि उसने आईडिया का नेट सैटर के साथ कनेक्शन लिया था। उसका सिम नंबर 89917851010105568677 एवं मोबाईल नंबर 9617664970 प्रदाय किया गया था। उसने सिम ली ओर नेट आरंभ किया एक दिन बाद वह बंद हो गया। इसकी शिकायत के लिए वह दर दर भटका अंत में दुकान जाकर उसने पूछा तो पता चला कि उसके दस्तावेज पूर्ण नहीं थे। जब उस उपभोक्ता ने बारीकी से जांच की तो ज्ञात हुआ कि उसके दस्तावेज तो पूर्ण थे। उसका नेट सेटर और सिम दोनों ही आईडिया के कारिंदों ने रख ली है जो उसे दो माह बाद भी नहीं मिल पाई है।
उक्त उपभोक्ता ने कहा कि उसके द्वारा ही बार बार आईडिया के टीम लीडर और एरिया सेल्स मेनेजर के मोबाईल नंबर 9826070095 पर संपर्क किया जाता रहा है, पर आईडिया की ओर से एक बार भी उससे अपनी तरफ से बात नहीं की गई है। उसने कहा कि उसकी आईडी प्रूफ पर जारी सिम किसके पास चल रही है इस बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है। उक्त उपभोक्ता ने आशंका व्यक्त की है कि कहीं उसकी सिम का दुरूपयोग न हो।

(क्रमशः जारी)

पितृ दोष और श्राद्ध पक्ष मैं केसे करें उनका निवारण


पितृ दोष और श्राद्ध पक्ष मैं केसे करें उनका निवारण

(पंडित दयानन्द शास्त्री)

नई दिल्ली (साई)। कुछ ज्योतिषी यह मानते हैं जातक ने अपने पूर्वजों के मृत्योपरांत किये जाने वाले संस्कार तथा श्राद्ध आदि उचित प्रकार से नहीं किये होते जिसके चलते जातक के पूर्वज अर्थात पित्र उसे शाप देते हैं जो पित्र दोष बनकर जातक की कुंडली में उपस्थित हो जाता है तथा जातक के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याएं उत्पन्न करता है।ऐसे ज्योतिषी पित्र दोष के निवारण के लिए पित्रों के श्राद्ध कर्म आदि करने, पिंड दान करने तथा नारायण पूजा, आदि का सुझाव देते हैं जबकि वास्तविकता में इन उपायों को करने वाले जातकों को पित्र दोष कुंडली में सूर्य अथवा कुंडली के नौवें घर पर एक अथवा एक से अधिक अशुभ ग्रहों के प्रभाव से बनता है तथा पित्र दोष निवारण पूजा करवाने के लिए सबसे पहले यह पता होना आवश्यक है कि कुंडली में पित्र दोष बनाने वाला ग्रह कौन सा है। हम यह मान लेते हैं कि कुंडली विशेष में राहु के सूर्य पर अशुभ प्रभाव होने के कारण कुंडली में पित्र दोष बनता है तथा  वेदों के अनुसार पित्रों के लिए किये गये चार प्रकार के विशेष कर्म श्राद्ध कर्म कहलाते हैं तथा ये कर्म हैं हवन, पिंड दान, तर्पण और ब्राह्मण भोजन। इस प्रकार यह देखा जा सकता है कि अधिकतर जातकों द्वारा किया जाने वाला ब्राह्मण भोजन का कर्म भी एक प्रकार का श्राद्ध कर्म है किन्तु यह कर्म अपने आप में संपूर्ण श्राद्ध नहीं है। वेदों के अनुसार उपर बताये गये चारों प्रकार के श्राद्ध कर्मों का अपना विशेष महत्व है तथा यथासंभव प्रत्येक परिवार में से एक व्यक्ति को पितृ पक्ष के समय अपने मृतक पूर्वजों के लिए ये चारों श्राद्ध कर्म करने चाहिएं।
ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब।-09024390067 ) के अनुसार शास्त्रो में मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण कहे गए है। देव ऋण ,ऋषि ऋण व पितृ ऋण। इसमें से पितृ ऋण के निवारण के लिए पितृ यज्ञ का वर्णन किया गया है। पितृ यज्ञ का दुसरा नाम ही श्राद्ध कर्म है। श्रद्धायंा इदम् श्राद्ध। अर्थात पितरो के उदेश्य से जो कर्म श्रद्धापूर्वक किया जाए,वही श्राद्ध है। महर्षि बृहस्पति के अनुसार जिस कर्म विशेष में अच्छी प्रकार से पकाए हुए उत्तम व्यंजन को दुग्ध घृत और शहद के साथ श्रद्धापूर्वक पितरो के उदेश्य से ब्राह्मणादि को प्रदान किया जाए वही श्राद्ध है।
भारतीय संस्कृति में माता पिता को देवता तुल्य माना जाता है। इसलिए शास्त्र वचन है कि पितरो के प्रसन्न होने पर सारे देव प्रसन्न हो जाते है। ब्रह्मपूराण के अनुसार श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने वाला मनुष्य अपने पितरो के अलावा ब्रह्म, इन्द्र, रूद्र, अश्विनी कुमार, सुर्य, अग्नि, वायु, विश्वेदेव, एवं मनुष्यगण को भी प्रसन्न कर देता है।  मृत्यु के पश्चात हमारा स्थूल शरीर तो यही रह जाता है। परंतु सूक्ष्म शरीर यानि आत्मा मनुष्य के शुभाशुभ कर्माे के अनुसार किसी लोक विशेष को जाती है। शुभकर्माे से युक्त आत्मा अपने प्रकाश के कारण ब्रह्मलोक, विष्णुलोक एवं स्वर्गलोक को जाती है। परंतु पापकर्म युक्त आत्मा पितृलोक की ओर जाती है। इस यात्रा में उन्हे भी शक्ति की आवश्यकता होती है जिनकी पूर्ति हम पिंड दान द्वारा करते है।
ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री पंडित दयानन्द शास्त्री(मोब।-09024390067 ) के अनुसार  परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत परिवारजनों द्वारा जब उसकी इच्छाओं एवं उसके द्वाराछुटे अधुरे कार्यों को परिवारजनों द्वारा पुरा नही किया जाता। तब उसकी आत्मा वही भटकती रहती है एवं उन कार्याे को पुरा करवाने के लिए परिवारजनों पर दबाव डालती है। इसी कारणपरिवार में शुभ कार्याे में कमी एवं अशुभता बढती जाती है। इन अशुभताओं का कारण पितृदोष माना गया है। इसके निवारण के लिए श्राद्धपक्ष में पितर शांति एवं पिंडदान करना शुभ रहता हैं। भारतीय धर्म शास्त्रों के अनुसार    ’’पुन्नाम नरकात् त्रायते इति पुत्रम‘‘ एवं ’’पुत्रहीनो गतिर्नास्ति‘‘ अर्थात पुत्रहीन व्यक्तियों की गति नही होती व पुत नाम के नरक से जो बचाता है, वह पुत्र है। इसलिए सभी लोग पुत्र प्राप्ति की अपेक्षा करते है। वर्तमान में पुत्र एवं पुत्री को एक समान माने जाने के कारण इस भावना में सामान्य कमी आई है परन्तु पुत्र प्राप्ति की इच्छा सबको अवश्य ही बनी रहती है जब पुत्र प्राप्ति की संभावना नही हो तब ही आधुनिक विचारधारा वाले लोग भी पुत्री को पुत्र के समान स्वीकारते है। इसमे जरा भी संशय नही है।(साई फीचर्स)

राष्ट्रीय लूट की बेमिसाल मिसाल


राष्ट्रीय लूट की बेमिसाल मिसाल

(पुण्य प्रसून बाजपेयी / विस्फोट डॉट काम)

नई दिल्ली (साई)। विदर्भ के जिन खुदकुशी करते किसानों का रोना बीजेपी अध्यक्ष नीतिन गडकरी यह कहते हुये रो रहे हैं कि गोसीखुर्द परियोजना पूरी कराने के लिये वह जल संसाधन मंत्री पवन बंसल को दस और चिट्ठी लिखने को तैयार हैं, असल में वही गोसीखुर्द परियोजना बीते 24 बरस से सिर्फ लूट की योजना बनी हुई है। जबकि इस दौर में क्या दिल्ली क्या महाराष्ट्र हर जगह सत्ता में बीजेपी भी आई लेकिन गोसीखुर्द का मतलब करोड़ों डकारने का ही खेल रहा।
1995 से 1999 तक अगर महाराष्ट्र की सत्ता में शिवसेना के साथ बीजेपी थी और गडकरी हैसियत वाले मंत्री थे तो केन्द्र में भी 1999 से 2004 के दौरान वाजपेयी सरकार ने भी गोसीखुर्द को कागजों पर विदर्भ के विकास से जरुर जोड़ा। काफी पैसा रिलीज भी किया लेकिन परियोजना पूरी हुई नहीं और राजनीति को साधने वाले ठेकेदार गोसीखुर्द के पैसे से नेता जरुर बन गये। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेसी नेता भी गोसीखुर्द परियोजना को पूरा करने से ज्यादा इंदिरा-राजीव की भावनाओं से ही खुद को जोड़ कर तरे। जबकि गोसीखुर्द के कुल 70 राजनीतिक ठकेदारों में से नौ ठेकेदार नागपुर-चन्द्रपुर में कांग्रेस की ही राजनीति करते हैं। और इन सबके बीच विदर्भ के करीब 22 हजार किसानों ने खुदकुशी कर ली और हर किसी ने राजनीति आह भरी।
असल में देश की महत्वपूर्ण चौदह राष्ट्रीय योजनाओं में से एक गोसीखुर्द परियोजना अपने आप में राष्ट्रीय लूट की मिसाल है। क्योंकि 1983 में इंदिरा गांधी के दौर में गोसीखुर्द परियोजना का नोटिफिकेशन हुआ। लागत 372 करोड़ बतायी गई। और नोटिफिकेशन के पांच बरस बाद जब 22 अप्रैल 1988 को राजीव गांधी ने गोसीखुर्द परियोजना का भूमिपूजन किया तब भी परियोजना की लागत 372 करोड़ ही बतायी गई। परियोजना को पांच बरस में पूरा करने का लक्ष्य भी रखा गया। और राजीव गांधी ने 200 करोड रुपये रिलीज भी कर दिये। गोसीखुर्द का काम शुरु होता उससे पहले ही परियोजना की 22358 हेक्टेयर जमीन पर बसे 200 गांव के 15 हजार परिवारों को नोटिस दे दिया गया कि वह जमीन खाली कर दें। यानी एक तरफ मुआवजे और पुनर्वास का आंदोलन तो दूसरी तरफ आंदोलन की आड़ में ठेकेदारों की लूट का खुला खेल गोसीखुर्द में शुरु हुआ। 1994 में गोसीखुर्द प्रकल्प संघर्ष समिति के अध्यक्ष विलास भोंगाडे ने उचित मुआवजा और विस्थापितों के लिये खेती की जमीन की मांग की और संघर्ष तेज किया तो कांग्रेस की कान में जूं रेंगी। और 1995 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव गोसीखुर्द जा पहुंचे। मुआवजे और पुनर्वास से निपटने के लिये राज्य सरकार को कहा तो गोसीखुर्द परियोजना को इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का सपना बताते हुये तत्काल वाकी पैसा रिलीज करने का भरोसा दिया। लेकिन तब नरसिंह राव को बताया गया कि गोसीखुर्द की लागत 372 करोड़ से बढ़कर 3768 करोड़ हो गई है। बावजूद इसके पीवी नरसिंह राव के दौर में 2341 करोड़ रिलीज किये गये। जो भी पैसा आया वह कहां गया और गोसीखुर्द परियोजना की जमीन जस की तस क्यों पड़ी है, इसकी छानबीन वाजपेयी सरकार के दौर में हुई। जो रिपोर्ट बनायी गई उसमें ठेकेदारों का रोना ही रोया गया कि जितनी परियोजना की लागत है, उसका आधा पैसा भी नहीं आया है और ठेकेदारों का पैसा अटका हुआ है। 2001 में परियोजना की लागत 8734 करोड़ हो गई। केन्द्र सरकार यानी वाजपेयी सरकार ने भी माना कि विदर्भ के लिये योजना महत्वपूर्ण है और किसानों की खुदकुशी के मद्देनजर गोसीखुर्द परियोजना से भंडारा, चन्द्रपुर और नागपुर की ढाई लाख हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई हो सकेगी। और 1345 करोड़ तुरंत रिलीज किये गये। बाकि किस्तों में देने की बात कही गई।
पैसा जाता रहा और ठेकेदार उसे डकारते गये। दिल्ली में सत्ता बदली और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने तो विदर्भ के मरते किसानों की याद उनको भी आई। 1 जुलाई 2006 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह विदर्भ की यात्रा पर गये तो किसानों की विधवाओं के साथ मुलाकात की और गोसीखुर्द परियोजना की भी खबर ली। मनमोहन सिंह ने गोसीखुर्द को राजीव गाधी का सपना बताया और बेहद भावुक होकर हर हाल में जल्द से जल्द पूरा कर विदर्भ के कायाकल्प की बात कही। लेकिन तब उन्हे बताया गया कि गोसीखुर्द परियोजना की लागत 12 हजार करोड़ से ज्यादा की हो गई है। बावजूद इसके उन्होने तत्काल केन्द्र का पैसा रिलीज करने की बात कही और राष्ट्रीय परियोजना के मद्देनजर गोसीखुर्द को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी बताया। इसके बाद साल दर साल पैसा रिलीज होने लगा। आखिरी बार पैसा 2010-11 में दो किस्तों में भेजा गया। पहली किस्त 635.28 करोड़ की तो दूसरी किस्त 777.66 करोड़ की। लेकिन इस पूरे दौर में गोसीखुर्द परियोजना को लेकर कई स्तर पर ठेकेदार लगातार जुड़ते गये। चूंकि केन्द्र से लगातार पैसा आ रहा ता तो ठेकेदारों को कागजों पर काफी कुछ दिखाना भी था। तो हालात यहां तक आ गये कि परियोजना का काम तो पूरा हुआ नहीं। उल्टे परियोजना के दायरे में पानी टंकी बनाने से लेकर नाली बनाने और सड़क बनाने का काम भी शुरु होता दिखाया गया। करीब दो सौ से ज्यादा छोटे बड़े ठेकेदार प्रभाव डालने वाले नेताओं की चिट्ठी पाकर गोसीखुर्द परियोजना की लूट में शामिल हो गये। इन सबके बीच गोसीखुर्द परियोजना के नाम पर जो भी काम हुआ तो वडनेरे कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में ठेकेदारों की लूट का खुले तौर पर यह कहकर जिक्र किया किया काम का स्तर बेहद घटिया है।
सेन्ट्रल वाटर कमीशन ने भी प्रोजेक्ट में इस्तेमाल मेटेरियल को घटिया दर्जे का बताते हुये काम कर रही कंपनियों पर रोक लगाने तक की बात कही। वहीं वडनेरे कमेटी ने भी ठेकेदारों के दस्तावेजों के जरीये लगातार परियोजना की बढ़ती लागत पर भी अंगुली उठायी। यानी जांच रिपोर्ट को लेकर सवाल यह भी उठा कि क्या ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द कर दिये जाने चाहिये और जिस बकाया की बात ठेकेदार लगातार कर रहे हैं, उल्टे उनसे पैसों की वसूली की जानी चाहिये। लेकिन ठेकेदार से राजनेता बन चुके गोसीखुर्द परियोजना से जुड़ी कंपनियों का कोई बाल बांका भी क्या करता। क्योंकि भंडारा और नागपुर जिले के 16 नेताओं की कंपनियों को परियोजना के ठेके मिले हुये हैं। योजना से प्रभावित होने वाले तीन जिलों के 45 पार्षदों की ठेकेदारी भी इसी योजना के तहत जारी है। इसलिये मनमानी से ज्यादा सत्ता की ठसक में परियोजना की लागत बढाने और पैसा ना मिलने की एवज में काम रोकने का सिलसिला ही चला । और बीजेपी सांसद अजय संचेती की एसएमएस कस्ट्रक्शन कंपनी हो या बीजेपी के एमएलसी मितेश बांगडिया की एम.जी बांगडिया व महेन्द्र कंस्ट्रक्शन कंपनी या फिर इसी तरह की दो दर्जन कंपनी जो सीधे गोसीखुर्द परियोजना में डैम बनाने से जुड़ी हैं, उन्होंने ही और पैसा रिलीज करने का दवाब बनाया। और ऐसे मोड़ पर बीजेपी अध्यक्ष नीतिन गडकरी ने जब पवन बंसल को पत्र लिखकर विदर्भ के लिये जरुरी गोसीखुर्द के बकाया पैसों के रिलीज का सवाल उठाया तो विदर्भ में नीतिन गडकरी को लेकर पहला सवाल यही उठा कि चूंकि भंडारा में नीतिन गडकरी ने शुगर फैक्ट्री लगायी है तो उन्हें अपनी फैक्ट्री के लिये पानी चाहिये इसलिये अचानक गोसीखुर्द परियोजना की याद आई है। तो दूसरी तरफ खुदकुशी करते किसानों के बीच काम करते किशोर तिवारी ने कहा जब जांच रिपोर्ट में ठेकेदारों पर ही अंगुली उठी है तो बीजेपी अध्यक्ष को तो ठेकेदारों से पैसा वसूलने और लाइसेंस रद्द करने की मांग करनी चाहिये थी। जिससे प्रोजेक्ट पूरा होता। उल्टे ठेकेदारों को पैसा देने का सवाल उठा कर नीतिन गडकरी परियोजना पूरी ना करने वाले ठेकेदारों को चढ़ावा चढ़ाकर बढ़ावा ही दे रहे हैं। क्योंकि 1988 में 382 करोड़ की गोसीखुर्द परियोजना 2012 में 14000 करोड़ पार कर गई है।

बीजेपी को लगा केजरीवाल का करंट


बीजेपी को लगा केजरीवाल का करंट

(विस्फोट डॉट काम)

नई दिल्ली (साई)। बिजली की बढ़ी दरों का जो आंदोलन अरविन्द केजरीवाल ने शीला दीक्षित सरकार के खिलाफ शुरू किया था उसका पहला झटका सोमवार को भाजपा को लग गया. सोमवार को भाजपा के दिल्ली छाप नेता विजय गोयल काली टोपी पहनकर पहुंच गये विजली नियामक प्राधिकरण के दफ्तर में विरोध करने. लेकिन अचानक यहां पहुंचे अरविन्द केजरीवाल ने बीजेपी का सारा खेल खराब कर दिया.
अरविन्द केजरीवाल पिछले कुछ दिनों से शीला दीक्षित का करीबी होने का दाग धो रहे हैं. अरविन्द पर आरोप है कि वे आगामी विधानसभा में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने के लिए विरोधी वोटों को बांटने का खेल कर रहे हैं. खुद अरविन्द केजरीवाल क्या खेल कर रहे हैं इसे अरविन्द से बेहतर दूसरा शायद ही कोई जानता हो लेकिन जो दिख रहा है वह यह कि वे इस वक्त नाना कर्म करते हुए अन्ना को निपटाने में लगे हैं.
लेकिन बिजली वाला मुद्दा तो ऐसा है कि इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल सकता था लेकिन अरविन्द द्वारा इस आग में कूद जाने के बाद भाजपा के हाथ जलने लगे. कारण यह कि अगर विरोध का परचम अरविन्द केजरीवाल फहरायेंगे तो भाजपावाले कहां जाएंगे? सो, पहले ही टूटी फूटी भाजपा में एक नेता उभर आये. विजय गोयल. विजय गोयल वैसे तो बड़े नेताओं के आगे पीछे घूमने को ही नेतागीरी मानते हैं लेकिन साल में एकाध बार धरना प्रदर्शन भी कर लेते हैं. वे अपने आपको दिल्ली छाप नेता भी मानने लगे हैं इसलिए आव देखा न ताव काली टोपी सिलवाई और अरविन्द की लगाई आग में जनसुनवाई के बहाने कूद पड़े. पर्चे पोस्टर छपवाकर रातों रात दिल्ली में कई जगह चिपका दिये गये और डीईआरसी दफ्तर पहुंच गये. पहुंच तो गये लेकिन समझ में नहीं आये कि करे क्या. सो तय किया कि चेयरमैन को बंधक बना लेंगे. कुछ कुछ अन्नागीरी स्टाइल में.
लेकिन बात बिगड़ी उस मंच पर जहां अरविन्द केजरीवाल भी छापामार शैली में जा पहुंचे. बीजेपी के सजाए मंच पर अरविन्द केजरीवाल ने बीजेपी को ही दोषी ठहरा दिया. केजरीवाल ने कहा कि तीन साल से यह सब हो रहा है तो बीजेपीवाले चुप क्यों बैठे रहे? दिल्ली के भाजपा अध्यक्ष को तो पिछले दो साल से आरटीआई के जरिए सारी जानकारी मिली हुई है फिर उन्होंने यह मुद्दा विधानसभा या लोकसभा में क्यों नहीं उठाया? अब क्या था. अरविन्द तो बोलकर चले गये लेकिन बगल में खड़े विजय गोयल बोलने लगे तो आंसू निकल आये. हाय। कितना दर्द। दिल्लीवालों के लिए इस दिल्ली छाप नेता के दिल में कितनी पीड़ा है। किसी बूढ़ी का जिक्र भी किया जिसका बिल बहुत ज्यादा आ गया था और वह मोमबत्ती जलाकर रात का अंधेरा दूर करती है.
हालांकि इस रुदन प्रसंग के थोड़ी ही देर बाद गोयल साहब हंसते हुए वहां से चले गये क्योंकि उन्हें जो मीडिया कवरेज चाहिए था वह मिल चुका था. दिल्ली वालों के दिल पर बिजली का बिल चाहे जो बिजली गिराये इससे किसी विजय गोयल को कोई फर्क नहीं पड़ता है. फर्क पड़ता है तब जब कोई अरविन्द केजरीवाल आकर खड़ा हो जाता है. लेकिन अरविन्द भी कोई कम राजनीतिक प्राणी नहीं है. उन्होंने भी भाजपा के मंच पर पहुंचकर भाजपा नेता को ऐसा करंट मारा कि गोयल साहब को रोना आ गया.

कांग्रेस, कोयला और कालिख


कांग्रेस, कोयला और कालिख

(अनिल सौमित्र)

नई दिल्ली (साई)। कांग्रेस के नेता भले ही कुछ भी कहें, उनके प्रवक्ता मीडिया में कुछ भी बोलें, वे चाहे कितनी ही सफाई क्यों न दें- एक बात तो पक्की है- कांग्रेस बदनाम हो गई है। कांग्रेस का नाम लेते ही, उसका नाम सुनते ही कोयला, कालिख, करप्सन, कलई, कलि, कालिमा, कलंक, कंटक, कुटिल, कपट, कपटी, कलह, कठोर, कलियुग, कलुष-कलुषा, कुख्यात, कलंदरी, कशमकश, कसाई, कसैला, कसूरवार, कारागाह, कायर आदि और ऐसे ही कई समानार्थी शब्दों की छवि बनती है।
एक ऐसी पार्टी या संगठन जिसकी स्थापना जरूर एक अंग्रेज ने की थी, लेकिन अनेक वर्षों तक वह देशभक्तों और राष्ट्रवादियों के सेवा का माध्यम बनी। अंग्रेजों के जाने के बाद गांधीजी ने कांग्रेस को भंग करने का सुझाव दिया था। कुछ स्वार्थी नेताओं ने उनकी एक न सुनी। देशभक्त नेताओं की पुण्याई और सद्कर्मों का फल नेहरू जैसे कुछ स्वार्थी नेता खाना चाहते थे। इसलिए आजादी के बाद भी कांग्रेस का लाभ उठाया जाता रहा। तब न सही, लेकिन आज जो कांग्रेस को गांधी की राय न मानने का श्राप लग चुका है। वर्तमान कांग्रेस अध्यक्ष अपने नाम के आगे ‘गांधी’ जरूर लगाती हैं, लेकिन उनमें गांधी के व्यक्तित्व का अंशमात्र भी नहीं है। वे रंचमात्र भी गांधी के विचारों की उत्तराधिकारी नहीं हैं।
कांग्रेस जहां सरकार में वहां वह अंग्रेजों की सोच और नीति का अनुशरण कर रही है। जहां वह विपक्ष में है वह जनता और जनमानस से कोसों दूर है। गांधीजी का पूरा जीवन विदेशियों और विदेशपरस्ती से लड़ते हुए बीता। लेकिन सोनिया माइनो गांधी का संपूर्ण जीवन ही विदेशपरस्त है। कमोबेश यही कांग्रेस के नेताओं का भी है। जो नेता विदेशपरस्त या भ्रष्ट नहीं हैं वे दरकिनार कर दिए गए हैं, वे हाशिए पर हैं। कांग्रेस देश और देशवासियों की हालत से बेपरवाह है। उसे सिर्फ अपने और अपनों की परवाह है। कांग्रेस के अपने वे हैं जो या तो उनके सगे हैं, या देशी-विदेशी रिश्तेदार। कांग्रेस ने जैसे देशी लोगों को विदेशी नेतृत्व के भरोसे छोड़ दिया है, वैसे ही भारत के देशी बाजार को विदेशी कंपनियों और पूंजीपतियों के हाथों में सौंप दिया है। खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश हो या पेट्रो-उत्पादों (तेल) की कीमतें बढ़ाने का मामला कांग्रेस ने विपक्ष की एक न सुनी, अपने सहयोगी दलों को छोड़ देना मुनासिब समझा, देश की जनता को भले ही गुमराह करना पड़े, लेकिन वह अमेरिकापरस्ती नहीं छोड़ सकती। कांग्रेस को देश की जनता से बस सत्ता चाहिए। कैसे भी, किसी भी कीमत पर। एक बार सत्ता मिल जाये, जनता जाये भाड़ में। देश आर्थिक संकटों से घिरा हुआ है, किन्तु केन्द्र सरकार की फिजूलर्खी का आलम यह है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मंत्रियों ने 678 करोड़ उड़ा दिए। यह व्यय पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 12 गुना अधिक है।
कांग्रेसी बेशर्म भी हो गए हैं। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुशील शिंदे ने इसका उदाहरण दे दिया। केन्द्र सरकार के तीसरे गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सोच-समझकर बेतुका बयान दिया। उन्होंने कहा कि कोयले से हाथ काले हो जायें तो पानी से धोने पर फिर साफ हो जोते हैं। जनता जिस तरह बोफोर्स घोटाले को भूल गई, कोयला घोटाले को भी भूल जायेगी। जनता भूले, न भूले कांग्रेस जरूर भूल जाती है। जनता तो घोटाले नहीं, छठी का दूध भी याद दिला देती है। कांग्रेस को भी याद होना चाहिए, जनता ने 1984 में कांग्रेस को 400 से अधिक सीटें दी थी। लेकिन उसके बाद उसी जनता ने उसका ऐसा हश्र किया कि उसे आज तक पूर्ण बहुमत से मोहताज कर दिया। आवाम को यह भी याद नहीं है कि बीते कुछ वर्षों में कांग्रेस की सरकार ने लोक-लुभावन और लोक-कल्याणकारी कौन-से कदम उठाये। काफी समय से ऐसा ही हो रहा है कि जनता आह! आह! कर रही है, ये कराहने की आवाजें हैं। काश! कि कांग्रेस के लिए जनता वाह!वाह करती।
कांग्रेस का यही हाल मध्यप्रदेश में भी है। दिग्विजय सिंह ने अपने कार्यकाल में प्रदेश का ऐसा बंटाधार किया कि जनता ने उनके समेत कांग्रेस को प्रदेश से बेदखल कर दिया। यहां कांग्रेस कलह की शिकार है। मुद्दाविहीन है। कांग्रेस को विपक्ष में बैठे 10 वर्ष होने का आया। वह खामोश है। उसे सत्ता तो दिख रही है, लेकिन जनता के लिए संघर्ष का इरादा नहीं। गुटों और आंतरिक कुटिलता की शिकार कांग्रेस भाजपा की सरकार और संगठन की सक्रियता के आगे भीगी बिल्ली हो गई है। उसके पास न तो अपने कार्यकर्ताओं के सवालों का जवाब है और न ही केन्द्र सरकार के निर्णयों से हो रही जनता की तकलीफों का उपाए। कांग्रेस सत्ता और विपक्ष दोनों रूपों में पिट रही है। कांग्रसी नेताओं का खलनायकों का इतिहास पीछा नहीं छोड़ रहा है। वे राजे-रजवाड़ों और सामंत प्रवृति से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। आमजन की आवाजों से कोसों दूर अपने ही कोलाहल में डूबे कांग्रेसी सत्ता के लिए मारी-मारी तो कर सकते हैं, लेकिन वे जनता का विश्वास नहीं जीत सकते। कांग्रेस जनता का विश्वास हार चुकी है। कांग्रेस के नेता आत्मविश्वास खो चुके हैं। जनता उनसे और वे जनता से दूरी बना चुकी है। यह खाई बड़ी है और बढ़ती ही जा रही है। कांग्रेस के लिए इस खाई को पाटना दूर की कौड़ी है।
कांग्रेस का आलाकमान तो कोयले की कालिख से कलंकित है। उसका प्रदेश नेतृत्व अपने रसूख और जायदाद को बचाने की जुगत में फ्रिकमंद है। प्रदेश की भाजपा सरकार के साथ कांग्रेस की धींगामुश्ती इसी फ्रि़क्र के कारण है। जनता के लिए अपनी फ्रिक्र को कांग्रेस बहुत पहले दफन कर चुकी है। इसी महीने खंडवा में हुई कार्यसमिति में भाजपा अध्यक्ष ने तीसरी बार सरकार बनाने के लिए तैयारी करने का आह्वान किया है। हरियाणा के सूरजकुंड में हुई भाजपा की राष्ट्रीय परिषद् भी निर्णायक सिद्ध हुई है। भाजपा ने केन्द्र में एनडीए के विस्तार का संकल्प लिया है और प्रदेश में तीसरी बार सरकार बनाने का नारा दिया है। भाजपा का नेतृत्व, नारा और कार्यकर्ता एक है। इस मामले में कांग्रेस अनेक है। भाजपा सक्रिय है, कांग्रेस निष्क्रिय। भाजपा कार्यकर्ता आत्मविश्वास से लबरेज, लेकिन कांग्रेस के कार्यकर्ता सशंकित और नेतृत्व की गुटबाजी के कारण कशमकश में। प्रदेश की जनता देश में परिवर्तन और और मध्यप्रदेश में निरन्तर होने की बाटजोह रही है।
(लेखक चरावेती के संपादक हैं)