शनिवार, 15 दिसंबर 2012

सरकार में नंबर दो की भूमिका में आए कमल नाथ


सरकार में नंबर दो की भूमिका में आए कमल नाथ

एफडीआई ने बढ़ाया कमल नाथ का सियासी कद

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। संगठन में भले ही युवराज राहुल गांधी को राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी के बाद नंबर दो समझा जाता हो पर सरकार में नंबर दो की भूमिका में आ गए हैं कमल नाथ। केंद्रीय शहरी विकास और संसदीय कार्य मंत्री कमल नाथ ने साबित कर दिया है कि फ्लोर मेनेजमेंट में उनका कोई सानी नहीं है। हाल ही में एफडीआई मामले में कमल नाथ ने अकेले ही टीम मनमोहन की गाड़ी को खींचकर नैया पार लगवा दी। कांग्रेस के अंदर अब कमल नाथ का कद प्रधानमंत्री के उपरांत नंबर दो समझा जाने लगा है।
कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी की कमल नाथ के प्रति खासी नाराजगी के उपरांत भी मनमोहन सिंह ने वीटो का प्रयोग कर कमल नाथ को शहरी विकास के साथ ही साथ संसदीय कार्य मंत्रालय का प्रभार सौंपा। सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि राहुल गांधी चाह रहे थे कि कमल नाथ को कमजोर मंत्रालय का प्रभार दिया जाए।
अब जबकि एफडीआई मुद्दे पर शहरी विकास मंत्री का चहुंओर जयकारा लग रहा है तब राहुल गांधी की बोलती बंद हो गई है। उधर, पीएमओ के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री भी एफडीआई मामले में तहे दिल से ना केवल कमल नाथ का शुक्रिया अदा करना चाह रहे हैं बल्कि मनमोहन सिंह अब कमल नाथ के प्रबंधन कौशल के मुरीद हो चुके हैं।
उधर, संसद से छन छन कर बाहर आ रही खबरों पर अगर यकीन किया जाए तो कमल नाथ ने अपने लंबे संसदीय जीवन (1980 से वे लगातार सांसद हैं) का भरपूर उपयोग कर अपने राजनैतिक संपर्कों को जिंदा कर उनका तबियत से दोहन किया। कहा जा रहा है कि इसके पहले संसदीय कार्य मंत्री रहे पवन बंसल का फ्लोर मैनेजमेंट अगर होता तो सरकार कब की एफडीआई मसले पर धराशाई हो गई होती।
कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ (बतौर सांसद श्रीमति सोनिया गांधी को आवंटित सरकारी आवास) के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि दरअसल, भारत की राजनीति की सियासी डोर अमरिका के हाथ परोक्ष तौर पर है, दुनिया के चौधरी अमरीका द्वारा ही अपनी पसंद के व्यक्तित्व को ताकतवर बनाया जाता है। सूत्रों ने कहा कि 2004 में जब संप्रग सरकार अस्तित्व में आ रही थी तभी कमल नाथ को देश का वजीरे आजम बनाने का ताना बाना भी बुना गया था, किन्तु मनमोहन सिंह की छवि कमल नाथ पर भारी पड़ी।
कमल नाथ के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मायावती को एफडीआई के पक्ष में तैयार करने के लिए कमल नाथ को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। पहले तो लुटियन जोन में माया मेम साहिब के लिए कार्यालय की जगह फिर बाद में मायावती के एक सहयोगी की सीबीआई से मदद का हवाला भी दिया गया दोनों के बीच चर्चाओं के दौरान। सूत्रों ने बताया कि जब सिंह सीबीआई निदेशक थे तब माया मेम साहिब के एक करीबी की कमल नाथ ने आउट ऑफ वे जाकर मदद की गई थी।
कांग्रेस के अंदर कमल नाथ समर्थक अब इस बात को चटखारे लेकर कर रहे हैं कि चाहे कांग्रेस में श्रीमति सोनिया गांधी सुप्रीमो हों और उनके अपरिपक्व बेटे राहुल गांधी को नंबर दो की भूमिका में महिमा मण्डित किया जा रहा हो पर यह बात आईने की तरह साफ हो चुकी है कि सरकार में डॉ.मनमोहन सिंह सुप्रीमो हैं और कमल नाथ नंबर दो की पोजीशन में आ चुके हैं।
वैसे भी कमल नाथ 1980 से लगतार सांसद हैं जो सदा ही लोकसभा चुनाव लड़कर जीते हैं और उनकी सीनियारिटी को देखकर उनकी नंबर दो पोजीशन पर किसी को शक शुबहा नहीं होना चाहिए। सरकार के साथ ही साथ संगठन में भी इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि रीढ़ विहीन लोगों को महिमा मण्डित करने के बजाए अगर जनाधार वाले लोगों को आगे लाकर उन्हें ताकतवर बनाया जाता है तो कांग्रेस का फिर से उत्थान हो सकता है।

भूमि मालिक की सहमति अधिग्रहण के लिए अनिवार्य


भूमि मालिक की सहमति अधिग्रहण के लिए अनिवार्य

(शरद)

नई दिल्ली (साई)। भूमि अधिग्रहण को लेकर होने वाले आंदोलनों ने सरकार की नींद उड़ा दी है। सरकार को मजबूरी में इस ओर ध्यान देना पड़ा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भूमि अधिग्रहण विधेयक का अनुमोदन कर दिया है। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में कल शाम हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इसके तहत निजी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने में ८० प्रतिशत भूमि मालिकों की सहमति अनिवार्य बना दी गई है।
निजी सार्वजनिक भागीदारी में भूमि अधिग्रहण के लिए ७० प्रतिशत भूमि मालिकों की सहमति जरूरी होगी। एक और बड़े फैसले में मंत्रिमंडल ने एक हजार करोड़ रुपए से अधिक लागत की परियोजनाओं की मंजूरी में तेजी लाने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में निवेश से सम्बद्ध मंत्रिमंडल की समिति गठित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने बताया कि परियोजनाओं को मंजूरी देते समय पर्यावरण मंत्रालय की सभी चिंताओं का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि हजार करोड़ के लगभग जो बड़े प्रोजेक्ट हैं अगर उसमें कोई दिक्कत या तकलीफ आ रही है या कहीं पर किसी कानून में डेडलाइन दी गई है उसको मीट नहीं किया जा रहा या उसको पूरा नहीं किया जा रहा तो कैबिनेट कमिटी ऑन इन्वेस्टमेंट उन प्रोजेक्ट्स को देखेगी।
वहीं पीएमओ के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के साथ चर्चा के दौरान कहा कि सुरक्षा से सम्बद्ध मंत्रिमंडल की समिति ने तटीय सुरक्षा मजबूत करने के लिए दो हजार १५० करोड़ रुपए का प्रस्ताव मंजूर कर लिया है। इसका उद्देश्य २६ नवंबर जैसे मुंबई आतंकी हमलों को रोकना है। प्रस्ताव के तहत तटरक्षक बल के लिए एक हजार पांच सौ करोड़ रुपए की लागत से समुद्र में गश्त लगाने वाले पांच पोत खरीदे जाएंगे। समुद्री सुरक्षा नेटवर्क के दूसरे दौर में ३८ रडार लगाए जाएंगे जिनकी मदद से समूचे समुद्री क्षेत्र में इलेक्ट्रानिक प्रणाली से निगरानी रखी जाएगी।
सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को आगे बताया कि आर्थिक मामलों से सम्बद्ध मंत्रिमंडल की समिति ने उर्वरक कंपनियों को नए संयंत्र लगाने और अपनी मौजूदा क्षमता बढ़ाने में प्रोत्साहन देने के लिए यूरिया निवेश नीति मंजूर कर दी है। वहीं,, बुनियादी ढांचे से सम्बद्ध मंत्रिमंडल की समिति ने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना के चौथे चरण में बनाओ, चालू करो और हस्तांतरित करो की नीति यानी बी.ओ.टी. के अंतर्गत चार हजार किलोमीटर की चार लेन की परियोजना को बढ़ाकर आठ हजार किलोमीटर करने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। मंत्रिमंडल ने दिल्ली, मुम्बई, कर्नाटक और राजस्थान में १८ सौ मेगाहटर्ज बैंड टू जी स्पैक्ट्रम नीलामी के आरक्षित आधार मूल्य में तीस प्रतिशत की कटौती का भी अनुमोदन कर दिया है। इन मंडलों के लिए नवम्बर में किसी भी कंपनी ने बोली नहीं लगाई थी।
वहीं आई एण्ड बी मिनिस्ट्री के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने मल्टी सिस्टम ऑपरेटरों और लोकल केबल ऑपरेटरों की एकाधिकारवादी प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण -ट्राई की राय मांगी है।
सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय ने ट्राई से कहा है कि उचित प्रतिस्पर्धा, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और समानता सुनिश्चित करने के लिए अपनी सिफारिशें दे। मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क विनियम कानून १९९५ में संशोधन के लिए भी सुझाव मांगे हैं। कुछ राज्यों में केबल टेलीविजन के प्रसारण और वितरण पर कुछ कंपनियों ने एकाधिकार कर लिया है और पूरे राज्य में केवल एक ही केबल टी.वी. नेटवर्क का कारोबार हो रहा है।
उधर, आवास मंत्री अजय माकन के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि सरकार ने कहा है कि फेरीवालों का जीवन स्तर सुधारने के लिए प्रभावी कानून बनाना सरकार की पहली प्राथमिकता है। कल नई दिल्ली में आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री अजय माकन ने बताया कि फेरीवालों के बारे में पिछले सत्र में लोकसभा में एक विधेयक पेश किया गया था। माकन ने बताया कि उनका मंत्रालय शीघ्र ही इनके लिए एक ऋण योजना शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत देशभर में फेरीवालों के कल्याण और आर्थिक उत्थान के लिए पर्याप्त धनराशि दी गई है। 

सेवानिवृत्त अतिरिक्त संचालक का हो रहा प्रतिमाह 51 हजार का टीका!


लाजपत ने लूट लिया जनसंपर्क ------------------ 26

सेवानिवृत्त अतिरिक्त संचालक का हो रहा प्रतिमाह 51 हजार का टीका!

सूचना सहायक कर रहे पीआरओ का काम, जनसंपर्क अधिकारी संघ को नहीं परवाह!

(राजेश शर्मा)

भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश में सूबे की जनता को जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार के लिए पाबंद मध्य प्रदेश जनसंपर्क सांचलनालय पिछले लंबे अरसे से चर्चा का केंद्र बिन्दु बना हुआ है। कहा जा रहा है कि जनसंपर्क विभाग में सरकार पर संगठन बुरी तरह हावी हो चुका है। एक तरफ सूचना सहायकों द्वारा पीआरओ का काम किया जा रहा है वहीं जनसंपर्क अधिकारी संघ इस बारे में सरकार से मांग करने के स्थान पर पत्रकारों को असली और फर्जी में उलझाने का कुत्सित प्रयास कर रहा है।
राजधानी में बाणगंगा स्थित जनसंपर्क संचालनालय के आयुक्त के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि आयुक्त की रजामंदी के बिना संगठन के दबाव में एक अतिरिक्त संचालक की सेवा निवृत्ति के काफी बाद उनकी सेवाएं एक बार फिर कांट्रेक्ट पर विभाग को सौंप दी गई है।
अपने सेवाकाल में चर्चाओं और विवादों के केंद्र बिन्दू रहे उक्त अधिकारी को सरकार के बजाए संगठन की सेवा के पारितोषक के बतौर उनकी सेवाएं विभाग को सौंपे जाने की तरह तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है कि बिना किसी प्रभार वाले उक्त अधिकारी को मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग से इक्यावन हजार रूपए प्रतिमाह का मानदेय भी प्रदाया किया जा रहा है।
जनसंपर्क विभाग में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार उक्त अधिकारी अपने सेवाकाल के अंतिम दिनों में कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और मुख्य सचिव के.एस.शर्मा के करीबी रहे तो भाजपा के आते ही उक्त अधिकारी ने अपना पाला बदल लिया और वे संगठन के तारणहार बन गए। उक्त अधिकारी के द्वारा सरकारी काम से ज्यादा दिलचस्पी संगठन के कामों में लिए जाने संबंधी खबरें भी सुर्खियां बनी थीं।
ज्ञातव्य है कि प्रदेश भर में अनेक जिले एसे हैं जहां जिला जनसंपर्क अधिकारियों की पदस्थापना नहीं होने से वहां पीआरओ का काम सूचना सहायक ही प्रभारी के बतौर कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि जनसंपर्क अधिकारी संघ ने पिछले दिनों सीएम, जनसंपर्क मंत्री और मुख्य सचिव को जो ज्ञापन सौंपा था उसमें फर्जी पत्रकारों पर चिंता जाहिर की थी। जनसंपर्क संचालनालय में चल रही चर्चाओं के अनुसार जनसंपर्क अधिकारी संघ अगर इसके साथ ही साथ मुख्यालय में अधिकारियों की भरमर के बाद पुनः 51 हजार रूपए में छः माहों के लिए सेवाएं लेेने की बात और प्रदेश में जनसंपर्क अधिकारियों की भर्ती की बात उठाता तो बात हजम होती।
जनसंपर्क विभाग की आधिकारिक वेब साईट में बेतूल, हरदा, विदिशा, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, दतिया, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, पन्ना, टीकमगढ़, सतना, अनुपपुर आदि जिलों में ना तो सहायक संचालक पदस्थ हैं ना ही कोई और यहां का प्रभार और जिलों में जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार का काम सूचना सहायक या सहायक सूचना अधिकारी संभाले हुए हैं।
चर्चाओं के अनुसार जनसंपर्क विभाग में खाली दिमाग शैतान का घर के लिए विख्यात कुछ विघ्न संतोषियों द्वारा विभाग के बारे में सोचने के बजाए अपनी दुकान कैसे चले इस बारे में ही तिकड़म लगाईं जाकर जनसंपर्क अधिकारी संघ का दुरूपयोग किया जा रहा है। प्रदेश में जहां अनेक पीआरओ का काम सूचना सहायक चला रहे हों, इसके लिए आवाज उठाने के बजाए रक्षात्मक मुद्रा में आया अधिकारी संघ भी उपहास का ही पात्र बन चुका है।

अचानक गायब हो गए निर्मल बाबा!


अचानक गायब हो गए निर्मल बाबा!

(मणिका सोनल)

नई दिल्ली (साई)। निजी समाचार चेनल्स का टाईम स्लाट खरीदकर लोगों के घरों में जमकर पैठ बनाने वाले चमत्कारी गुरू निर्मल बाबा लगभग एक माह से लापता ही नजर आ रहे हैं। निर्मल बाबा कहां हैं, पिछले एक माह से पता नहीं चल पा रहा है। सात नवंबर को दिल्ली में उनका आखिरी समागम हुआ। इसके बाद उनका दर्शन भक्तों को नहीं हुआ है।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया द्वारा जब निर्मल बाबा के बारे में नेहरू प्लेस स्थित चिरंजीवी टावर स्थित निर्मल दरबार स्थित कार्यालय से चर्चा की तो उन्होंने बस यही कहा कि एक एक पखवाड़े में फोन करते रहें। बाबा जी की जानकारी जल्द ही मिल जाएगी। जब इस प्रतिनिधित ने नेहरू प्लेस जाकर चर्चा करनी चाही तो वहां उपस्थित सुरक्षा कर्मियों ने इस प्रतिनिधि को निर्मल दरबार में प्रवेश ही नहीं करने दिया गया।
निर्मल बाबा के एक बेहद करीबी ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि अरबों रूपए कमा चुके निर्मल बाबा पर शनि की कुदृष्टि पड़ गई और उनकी धर्म की चलती दुकान में ताले लग गए। बाबा अब भारत से कूच कर विदेश में बसने का मन बना चुके हैं।
उन्होंने कहा कि बाबा संभवतः थाईलेण्ड में बसने की योजना बना रहे हैं। बाबा थाईलेण्ड में ही जमीन की खरीद फरोख्त के बारे में कुछ समय से चिंतित नजर आ रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबा उस वक्त बेहद नाराज हो गए थे जब थाईलेण्ड से वापसी के समय बाबा को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट किसी ने उनकी फोटो ले ली थी।
खबर यह भी है कि निर्मल बाबा के समागम में हिस्सा लेने के लिए भक्तों की बुकिंग भी बंद कर दी गयी है। न तो वेबसाइट पर इसकी कोई जानकारी दी गयी है और न ही कार्यालय से स्पष्ट रूप से कुछ बताया जा रहा है। निर्मल बाबा के बारे में हुए खुलासे के बाद टीवी पर उनका पेड विज्ञापन बंद हो गया है।

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

गैस सिलेण्डर के लिए देना होगा सौ का पत्ता ज्यादा!


गैस सिलेण्डर के लिए देना होगा सौ का पत्ता ज्यादा!

(महेश)

नई दिल्ली (साई)। आसमान छूती मंहगाई में कोढ में खाज जैसे ही अब रसोई गैस के सिलेण्डर पर एक सौ का पत्ता ज्यादा देना पड़ सकता है। नई कीमतें रियायती सब्सीडाईज्ड गैस सिलेण्डर पर लागू होंगीं। ये दरें गुजरात चुनावों के एन बाद लागू हो सकती हैं। ये कीमतें सब्सीडाईज्ड गैस के सिलेण्डर की तादाद बढ़ाने के एवज में लागू होंगी।
आर.के.पुरम स्थित गैस अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड के मुख्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि गुजरात चुनाव के बाद सब्सिडी वाले सिलिंडर की संख्या 6 से 9 होगी। सिलिंडरों की संख्या 6 से 9 करने से सरकार पर 9,000 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। लिहाजा 9,000 करोड़ रुपये का बोझ खत्म करने के लिए ही दाम बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
उधर, 24 अकबर रोड़ स्थित कांग्रेस मुख्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इसी हफ्ते कांग्रेस की कोर कमेटी में रसोई गैस सिलिंडर के दाम बढ़ाये जाने पर राजनीतिक फैसला लिये जाने की संभावना है। कांग्रेस कोर कमेटी में फैसला लेने के बाद रसोई गैस सिलिंडर के दाम बढ़ाये जाने पर अंतिम फैसला कैबिनेट में लिया जायेगा। आचार संहिता के कारण गुजरात चुनाव के बाद ही रसोई गैस सिलिंडर के दाम बढ़ाये जाने पर फैसला होगा।

एसएससी निकालेगा लाखों वैकेंसी


एसएससी निकालेगा लाखों वैकेंसी

(ज़ाकिया ज़रीन)

हैदराबाद (साई)। स्टाफ सेलेक्शन कमिशन (एसएससी) साल 2013-14 में करीब एक लाख भर्तियों के लिए विज्ञापन निकाल सकता है। एसएससी के चेयरमैन एन. के. रघुपति ने हैदराबाद में कहा कि अभी हम जिन भी नौकरियों के लिए विज्ञापन दे रहे हैं उन सभी पर भर्तियां हो रही हैं। हमें उम्मीद है कि अगले साल हम एक लाख भर्तियां करेंगे। कंपिटिशन बढ़ रहा है और इसलिए हमें उम्मीद है कि नौकरी के आवेदनों की संख्या भी 1.5 करोड़ तक पहुंच जाएगी।
भारत सरकार की भर्तियों के अलावा एसएससी सरकारी संगठनों जैसे कि फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और प्रसार भारती के लिए भी भर्तियां करवा रहा है। रघुपति के मुताबिक, एक लाख नौकरियों के आंकड़े में ऐसे संस्थानों की भर्तियां भी शामिल होंगी। अगर पूरे देश के स्तर पर भर्ती के आंकड़े को देखें तो हर 102 आवेदनों पर एक भर्ती हो रही है। फिलहाल 15 दिसंबर को एसएससी देश भर में 22,000 पदों के लिए आवेदन मांगेगा। 

ओलावृष्टि:पात्रों को मिलेगा मुआवजा


ओलावृष्टि:पात्रों को मिलेगा मुआवजा

(एस.के.खरे)

सिवनी (साई)। जिले के कुछ अंचलों में गत ११ दिसंबर को अचानक हुई ओला वृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जा रहा है। यह सर्वे राजस्व एवं कृषि विभाग के मैदानी अमले द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। नुकसान का आंकलन कर किसानों को मुआवजा दिलाने के लिये राजस्व पुस्तक परिपत्र ६(४) के तहत राहत प्रकरण तैयार कर पात्र किसानों/व्यक्तियों को राहत दिलाई जायेगी।
 कलेक्टर अजीत कुमार ने यह जानकारी देते हुए यहां बताया कि ओला वृष्टि के कारण फसल हानि (खडी या कटी रखी फसल दोनों), पशु हानि, जन हानि या किसी प्रकार की रिहायशी संपत्ति की हानि होने का पटवारियों एवं कृषि विभाग के आर।ए।ई।ओ। व अन्य मैदानी अमले से संयुक्त मुआयना कराया जा रहा है। उन्होंने ओला वृष्टि से पीडितों के प्रति अपनी संवदेनाएं व्यक्त करते हुए कहा है कि जिला प्रशासन किसानों के साथ है। मुआयने के पश्चात जिस किसी प्रकार की भी हानि चिन्हित होगी, पीडित किसानों या व्यक्तियों को राजस्व पुस्तक परिपत्र ६ (४) में उल्लेखित प्रावधानों के अनुरूप राहत प्रकरण तैयार कर उन्हें पात्रतानुसार राहत राशि दी जायेगी। उन्होंने बताया कि राजस्व एवं कृषि अमले की कमी के कारण सर्वे में कुछ वक्त लग सकता है, परन्तु जल्द से जल्द सर्वे का कार्य पूरा कर लिया जायेगा। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए अधीक्षक भू-अभिलेख मिश्रा ने बताया कि केवलारी, धनौरा एवं छपारा तहसील क्षेत्र के करीब ८६ गांव ओलावृष्टि से प्रभावित हुए हैं, जिनमें तुअर व धान की खडी फसलों में आंशिक नुकसान होने की सूचना मिली है।

भवनों में निःशक्तों के लिये रैम्प भी बनाये जायें


भवनों में निःशक्तों के लिये रैम्प भी बनाये जायें

(शिवेश नामदेव)

सिवनी (साई)। केन्द्र सरकार द्वारा निरूशक्त व्यक्ति (समान अवसर अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम १९९५ की धारा ४४-४६ में राश्य सरकारों से यह अपेक्षा की गई है कि विभिन्न प्रकार के निर्माणों को निरूशक्त व्यक्तियों के लिये पूर्ण बाधारहित बनाया जायें। अधिनियम के प्रावधानों को पूरा करने के लिये शासकीय कार्यालयों एवं सार्वजनिक भवनों में रैम्प (ढलावदार रास्तों) भी बनाये जायें। शासकीय कार्यालयों में बनने वाले शौचालयों को व्हील चेयर का उपयोग करने वाले व्यक्तियों के अनुरूप बनाया जायें। लिफ्ट में ब्रेल लिपि के प्रतीक तथा ध्वनिसूचक सिग्नल लगाये जायें। अस्पताल, प्रमुख स्वास्थ्य केन्द्र तथा अन्य चिकित्सीय परिसरों में भी रैम्प (ढलावदार रास्तों) का निर्माण किया जाये। सार्वजनिक स्थानों, जैसे बस स्टेण्ड आदि में भी बाधारहित आवागमन की व्यवस्था हो। स्थानीय तौर पर नगरीय निकायों को निर्माण कार्याे की अनुमति देते समय बाधारहित वातावरण के बगैर नवीन भवन का डिजाईन अनुमोदित नहीं किया जाये।
            इसी तारतम्य में सामाजिक न्याय विभाग की राश्य स्तरीय कार्यकारिणी समिति की गत ३१ अगस्त १२ को संपन्न बैठक में भी बाधारहित वातावरण के बगैर नवीन भवन का डिजाईन अनुमोदित न करने, सभी नवीन शासकीय भवनों में निरूशक्तजनों के लिये बाधारहित वातावरण उपलब्ध कराने, सभी रेल्वे स्टेशनों को भी बाधारहित बनाये जाने हेतु एवं शासकीय एवं अशासकीय भवनों, जिनमें लिफ्ट लगाई जाती है जिससे उनमें व्हील चेयर नहीं आ पाती है, ऐसी लिफ्ट को व्हील चेयर भी जाने लायक बनाने तथा निरूशक्तजनों के लिये पृथक से बाथरूम एवं टॉयलेट भी बनाये जाने का निर्णय लिया गया है।
 जिलों में निरूशक्तजनों के लिये पूर्ण बाधारहित वातावरण बनाये जाने की जिम्मेदारी जिला कलेक्टर्स को दी गई है। राश्य शासन द्वारा प्रदेश के समस्त कलेक्टर्स, जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों एवं सामाजिक न्याय विभाग के सभी संयुक्त संचालकों व जिलों में पदस्थ उपसंचालकों से कहा गया है कि वे निरूशक्त व्यक्ति (समान अवसर अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम १९९५ के तहत उपर उल्लेखित कार्यवाही करें।

सब्जी व्यापारियों की काली करतूस दे रही लोगों को हरा जहर


सब्जी व्यापारियों की काली करतूस दे रही लोगों को हरा जहर

(सचिन धीमान)

मुजफ्फरनगर। (साई)। बे-मौसम हरी सब्जियों के देख कर मन प्रसन्न हो जाता है। बैंगनी बैंगन और हरे मटर को देख हर किसी का जी ललचा उठता है। इनकी चमक दुकान की तरफ अपने आप बरबस खींच लेती है और इंसान के पैर भी दुकान की ओर खींचे चले जाते है और जाने अनजाने में हरा जहर खरीदकर ही अपने घरों को लौटते है। परंतु इस बात से ग्राहक अनभिज्ञ है कि हरी सब्जियों की इस चमक के पीछे कुछ लोगों की काली करतूत छिपी है जो आपको हरा जहर दे रही है। जी हां, इन रंगीन और चमकदार सब्जियों को कृत्रिम रूप से तैयार किया जाता है। जिसे सुनकर आप वास्तविक रूप से दंग रह जायेंगे और अपने दांतों तले अंगूली दबा लेंगे।
बेमौसम हरी सब्जियों को बाज़ार में खुलेआम औने-पौने दामों में बेचा जाता है। इससे जेब तो कटती ही है, स्वास्थ्य पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। हरी सब्जियों को आकर्षक और चमकदार बनाने के लिए घातक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है। उसी तरह समय से समय से पहले इन्हें तैयार करने के लिए जहरीले आक्सीटोसिन इंजेक्शन को भी लगाया जाता है। जनपद की सब्जि मंडियों में रोजाना हज़ारों लोग ताज़ी सब्जियां लेने आते हैं। लेकिन रोज ही उनकी इन उम्मीद पर पानी फिर जाता है। बाहर से देखने में हरी-ताज़ी सब्जी रंग से रंगी हुई होती है। इन सब्जियों को हरा-भरा रखने के लिए इनको रंग के पानी तक में डुबो दिया जाता है। सब्जी बेचने वाले हरे रंग को पानी में मिलकर उसमे सब्जी को डालकर हरा कर रहे है।
वहीं दूसरी ओर सब्जी बेचने वाले दुकानों की माने तो उनकी दुकानों पर आने वाला प्रत्येक ग्राहक को ताजा व हरी सब्जियां चाहिए होती है जो सभी को मिलनी नामुमकिन है और यदि उनकी सब्जियां नहीं बिकती है तो उन्हें भी काफी नुकसान होता है इसलिए व कृत्रिम विधि का प्रयोग करना पडता है। क्योंकि ग्राहक हरी सब्जी ही पसंद करता है, इसलिए हरी सब्जियों को रंग में डालकर बेचा जाता है। हर आदमी सब्जियां धो कर खाता है, इसलिए कोई दिक्कत भी नहीं होती है।
इन सब्ज़ियो को हरा और चमकदार बनाने के लिए सबसे पहले इनको एक बड़े से बर्तन या फिर ड्रम मे डाला जात है। केमिकल रंगों में परवल और तरोई को अच्छी तरह से डाल कर रंगा जाता है। करीब 15 मिनट के बाद इन सब्ज़ियों को टब से बाहर निकालकर कर सुखा लिया जाता है। आधे घंटे की मसकत के बाद यह पीली और सूख चुकी सब्जी, परवल और तरोई फिर से ताजी हो जाती है।
0 हरी सब्जी नहीं हम खा रहे कैमिकल
डाक्टरों की माने तो सब्जियों में पाए जाने वाले पेस्टिसाइड और मेटल्स पर अलग-अलग  इस्तेमाल करते है और इनके इस्तेमाल से सब्जियों के साथ हम कई प्रकार के पेस्टिसाइड और मेटल खा रहे हैं। इनमें केडमियम, सीसा, कॉपर और क्रोमियम जैसी खतरनाक धातुएं और एंडोसल्फान, एचसीएच व एल्ड्रिन जैसे घातक पेस्टीसाइड शामिल हैं। सब्जियों के साथ शरीर में जाकर ये स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। सब्जियां तो हजम हो जाती हैं लेकिन यह जहर शरीर के विभिन्न संवेदनशील अंगों में जमा होता रहता है। इससे उल्टी-दस्त, किडनी फेल, कैंसर जैसी बीमारियां सामने आती हैं। पालक, आलू, फूल गोभी, बैंगन, टमाटर आदि में इस तरह का जहर पाया गया है। शोध के अनुसार खेतों में फसलों पर रासायनिक पेस्टिसाइड का उपयोग बहुतायत में किया जा रहा है। इस रासायनिक जहर में एंडोसल्फान जैसे खतरनाक पेस्टिसाइड का उपयोग आम है।
0 फूलगोभी सबसे ज्यादा है प्रदूषित
खेतों में फसलों पर रासायनिक पेस्टिसाइड का उपयोग बहुता ज्यादा मात्रा में किया जा रहा है। इस रासायनिक जहर में एंडोसल्फान जैसे खतरनाक पेस्टिसाइड का उपयोग आम है। टमाटरों के 28 नमूनों में से 4643 प्रतिशत नमूनों में पेस्टिसाइड ज्यादा पाया गया। भिंडी के 25 में से 32, आलू के 17 में से 2353, पत्ता गोभी के 39 में से 28, बैंगन के 46 में से 50 प्रतिशत नमूने प्रदूषित पाए गए। फूल गोभी सर्वाधिक प्रदूषित पाई गई, जिसके 27 में 5185 प्रतिशत नमूनों में यह जहर था।
0 ये हो सकती हैं ये बीमारियां
सब्जियों के साथ शरीर में जाकर एंडोसल्फान, एचसीएच व एल्ड्रिन जैसे पेस्टिसाइड वसा उत्तकों में जम जाते हैं। बायोमैनीफिकेशन प्रक्रिया से शरीर में इनकी मात्रा बढ़ती रहती है। यह लंग्स, किडनी और कई बार दिल को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं। इनकी अधिक मात्रा जानलेवा बन जाती है। इसी तरह मेटल के कारण भी कई गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। केडमियम धातु लीवर, किडनी में जमा होकर इन्हें डेमेज करती है। यह धातु प्रोटीन के साथ जुड़कर उसका असर खत्म कर देता है। इससे कैंसर का खतरा रहता है। इटाई-इटाई नामक बीमारी होने से हड्डियां मुड़ जाती हैं। इस बीमारी को ब्रिटल बोन भी कहा जाता है। जापान में सबसे पहले यह तथ्य सामने आया था, जहां इसे इटाई-इटाई नाम दिया गया।
जिंक से उल्टी-दस्त, घबराहट होना आम है। ज्यादा मात्रा में जमा होने पर लीवर पैन की शिकायत हो जाती है। ज्यादा मात्रा होने पर इसे जिंकचीली कहा जाता है। सीसा की मात्रा शरीर में ज्यादा होने पर असहनीय दर्द होता है। किडनी पर इसका असर सीधा होता है और वह फेल हो सकती है। मानसिक संतुलन भी बिगड़ सकता है। खून में इसकी मात्रा बढ़ने पर एनिमिया हो जाता है। लीवर को भी यह प्रभावित करता है। इससे लकवा होने की आशंका भी रहती है। क्रोमियम से चर्मरोग व श्वास संबंधी बीमारियों के साथ शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म होने की समस्या रहती है। कैंसर होने की संभावना भी बनती है। कॉपर से एलर्जी, चर्मरोग, आंखों के कॉर्निया का प्रभावित होना, उल्टी-दस्त, लीवर डेमेज, हाइपर टेंशन की शिकायत मिलती है। मात्रा बढ़ने पर व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है। हिमोग्लोबिन के साथ जुड़कर यह उसे कम कर देता है।

दृष्टिहीनों ने दिखाया जौहर


दृष्टिहीनों ने दिखाया जौहर

(श्वेता यादव)

बंग्लुरू। (साई)। भारत ने पहला दृष्टिहीन ट्वेंटी-ट्वेंटी क्रिकेट विश्व कप जीत लिया है। कल बंगलुरू में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को २९ रन से पराजित किया। केतनभाई पटेल के ९८ रन की बदौलत भारत ने निर्धारित २० ओवर में २५८ रन बनाए। जवाब में पाकिस्तान की टीम नौ विकेट पर दो सौ २९ रन ही बना सकी।
मेजबान भारत ने पाकिस्तान को 29 रन से हराकर नेत्रहीनों के लिये यहां आयोजित टी-20 विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट जीत लिया। केतन भाई पटेल की 98 रन की शानदार पारी के सहयोग से भारत ने 258 रन बनाये और फिर मेजबान टीम ने पाकिस्तान को निर्धारित 20 ओवर में नौ विकेट पर 229 रन बनाने दिये।
पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के लिये प्रकाश जयरमैया ने 42 रन बनाये जबकि उपकप्तान अली मुर्तजा ने 38 और मुहम्मद अकरम ने 32 रन का योगदान दिया। भारत ने ग्रुप मुकाबलों में लगातार आठ मुकाबले जीते। भारत की ग्रुप मुकाबलों में एकमात्र हार पाकिस्तान से हुई थी। सेमीफाइनल मुकाबलों में भारत ने श्रीलंका को और पाकिस्तान ने इंग्लैंड को हरा कर फाइनल में प्रवेश किया था।

दरोगा कहे निजाम से - चोरों करें परेशान


शिवराज से मीडिया का पंगा कराने पर अमादा जनसंपर्क

दरोगा कहे निजाम से - चोरों करें परेशान

(लिमटी खरे)

मीडिया का ग्लेमर हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। मीडिया सच्चा है या फर्जी इस बारे में निर्णय कौन करे? जाहिर है राज्यों का सरकारी वजीफा पाने वाला जनसंपर्क महकमा ही बता सकता है कि कौन है सच्चा कौन है झूठादेश के हृदय प्रदेश में अजीब ही माहौल बन गया है। यहां मीडिया का एक वर्ग और जनसंपर्क विभाग आमने सामने हैं। मीडिया के इस वर्ग ने भोपाल में एक रैली निकाली और जनसंपर्क की दमनकारी नीतियों को उजागर किया तो इसके जवाब में जनसंपर्क अधिकारी संघ ने मीडिया को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री या सरकार को यह पता होगा कि कौन सा पत्रकार सही है और कौन फर्जी? जब जनसंपर्क विभाग ही फर्जी पत्रकारों से बचाने की गुहार मुख्यमंत्री से लगाने लगे तो निश्चित तौर पर यही कहा जा सकता है कि नगर दरोगा अपने निजाम से यह कहे कि नगर में चोर बहुत परेशान कर रहे हैं! अरे दरोगा का काम ही चोरी पर अंकुश लगाना है, फिर भला किसी से शिकायत का स्वांग आखिर क्यों?

देश भर में अब प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में मीडिया की पढाई को अहम माना जाने लगा है। पहले जनसंचार के बारे में सरकारी विश्वविद्यालयों में बहुत ही सीमित सीट्स हुआ करती थीं। लोग इस क्षेत्र में आना नहीं चाहते थे। सत्तर के दशक तक तो शहरों में पत्रकारों की तादाद गिनतियों में ही हुआ करती थी। अस्सी के दशक तक मीडिया को लोग बेहद सम्मान की नजरों से देखते थे। नब्बे के दशक के आगाज के साथ ही मीडिया में धनपतियों और घराना पत्रकारिता करने वाले सेठ साहूकारों ने कदम रखा।
मीडिया में युवाओं का आकर्षण इसलिए काफी कम होता था क्यों कि उस वक्त मीडिया में पारिश्रमिक बेहद कम हुआ करता था। उस वक्त पत्रकार को अपना घर चलाने में मशक्कत करनी होती थी, इसका कारण सिद्धांत आधारित पत्रकारिता थी। उस समय पेड न्यूज या ब्लेक मेलिंग का चलन नहीं था। कालांतर में मीडिया भी मुनाफे की दुकान में तब्दील हो गई। अपने निहित स्वार्थो के लिए मीडिया की दिशा और दशा ही बदल दी गई।
अस्सी के दशक तक पत्रकारों का काम सिर्फ खबरें भेजना होता था। इसके बाद अखबार मालिकों ने हाकर कम पत्रकार बना दिए। इन पत्रकारों पर बिजनिस का टारगेट लाद दिया गया। इतना ही नहीं अनेक संस्थानों ने तो बकायदा अधोषित तौर पर अपने समाचार पत्रों के निर्धारित पन्ने ही मासिक तौर पर बेचने आरंभ कर दिए। इस घटिया और अवैध तरीके से धन कमाने की गलत परंपरा के कारण पीत पत्रकारिता ने अपने पांव इस कदर पसारे कि गैर पत्रकार जिनका कलम से दूर दूर तक कोई नाता नहीं रहा, वे भी संपादक बन गए।
देशबन्धु के मालिक स्व.मायाराम सुरजन, राजस्थान पत्रिका के मालिक गुलाब कोठारी, पंजाब केसरी के मालिक अश्विनी कुमार जैसे गिनती के ही अखबार मालिक हैं जो अपनी कलम का उपयोग निरंतर ही करते रहे हैं या करते हैं, कमोबेश, शेष अखबार मालिक या कथित तौर पर प्रधान संपादकतो बस राज्य सरकारों या केंद्र सरकार के पत्र सूचना कार्यालय से अधिमान्यता पाने और प्रधानमंत्री या मंत्रियों के साथ विदेश यात्रा अथवा अपने व्यवसायिक हित साधने के लिए ही मीडिया का लबादा ओढ़े हुए हैं।
आज देश भर के पत्रकार संघों की हालत अत्यंत दयनीय है। अनेक स्थानों पर चाय पान ठेलों पर पत्रकार संघ का आईडी कार्ड गले में डाले लोग दिख जाते हैं। ये पत्रकार हैं या नहीं यह बात सभी जानते हैं, ये महज चंद रूपए की सदस्यता शुल्क देकर एक आईडी हासिल कर लेते हैं। शर्म तो उन पत्रकारों को आनी चाहिए जो इन गैर पत्रकारों को आईडी प्रदान कर पत्रकारिता जैसे पावन पेशे को बदनाम कर रहे हैं।
यहां गौरतलब होगा कि पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा है कि उनकी हमेशा से धारणा रही है कि पत्रकारों की पहली निष्ठा देश की जनता के प्रति होना चाहिए। कलाम ने यह बात भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘एक पत्रकार को स्वतंत्र होना चाहिए और उसे किन्ही भी व्यक्तियों, पार्टियों एवं संगठनों से सम्बद्ध नहीं होना चाहिए’’। इससे साफ है कि डॉ.कलाम स्वयं भी इस बात के पोषक हैं कि पत्रकार किसी भी दल का सदस्य हो सकता है या उसकी सोच किसी दल विशेष की हो सकती है, किन्तु उसकी सोच उसके अखबार या चेनल में कहीं से कहीं तक नहीं झलकनी चाहिए।
मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग का काम देखा जाए तो राज्य शासन की जनकल्याणकारी नीतियों को मीडिया के माध्यम से जन जन तक पहुंचाने का है। पिछले सालों में जनसंपर्क विभाग ने यह काम बखूबी अंजाम तक पहुंचाया है। पर लगने लगा है कि 2011 से जनसंपर्क विभाग कुछ अभिमान से ग्रसित हो गया है। पहले जनसंपर्क विभाग के दिल्ली स्थित सूचना केंद्र के प्रभारी रहे एक अधिकारी सरकार के बजाए भाजपा संगठन का काम करने उसकी पत्र विज्ञप्तियों आदि को बांटने और भाजपा के सांसद विधायकों की सेवा टहल के चलते चर्चित रहे, फिर जनसंपर्क मुख्यालय ही विवादों के घेरे में आ गया।
मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के पास एक जबर्दस्त अस्त्र है, और वह अस्त्र है विज्ञापनों का। ंअंधा बांटे रेवड़ी और चीन्ह चीन्ह कर देयकी कहावत चरितार्थ करते हुए जनसंपर्क विभाग द्वारा विज्ञापनों में भी भाई भतीजावाद जमकर किया गया। सूचना के अधिकार में जब जानकारी मांगी जाती है तब विभाग बगलें झाकने लगता है। एक वेब साईट को पंद्रह लाख रूपए का विज्ञापन और एडवांस चेक देकर जनसंपर्क विभाग विवादों में आ गया वहीं जनसंपर्क मंत्री की विज्ञापन देने की अनुशंसा को कचरे की टोकरी में ही डाल दिया गया। यही आलम प्रदेश सरकार की अधिमान्यता का है। अधिमान्यता में भी जमकर गफलत की जाती है। संभवतः यही कारण है कि मध्य प्रदेश जनसंपर्क की आधिकारिक वेब साईट जो भगवा रंग में रंग चुकी है, में से अधिमान्य पत्रकारों की सूची को ही हटा दिया गया है।
मध्य प्रदेश में जनसंपर्क विभाग की गलत नीतियों का विरोध करते हुए पत्रकार बचाओ आंदोलन समिति द्वारा दस दिसंबर को राजधानी भोपाल में एक विशाल रैली निकाली गई। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम अनेक मांगों का एक ज्ञापन भी सौंपा गया। रेली के संयोजक डेविड विनय का आरोप था कि जबसे जनसंपर्क विभाग की धुरी अतिरिक्त संचालक लाजपत आहूजा के इर्दगिर्द आकर सिमटी है तबसे पत्रकारों का शोषण आरंभ हुआ है।
वहीं दूसरी ओर जनसंपर्क अधिकारी संघ ने मुख्यंत्री, मुख्य सचिव और जनसंपर्क मंत्री को ज्ञापन भेजकर पत्रकारिता के क्षेत्र में फर्जी लोगों के प्रवेश और सरकारी विज्ञापनों पर दबिश देने की बढती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि जनसंपर्क अधिकारियों का ऐसे माहौल में काम करना दूभर होता जा रहा है। इस तरह के तत्वों और फर्जी संगठनों की जांच करना चाहिए।
मध्य प्रदेश जनसंपर्क अधिकारी संघ के अनुसार इनमें से अधिकांश ऐसे फर्जी पत्रकार हैं जिन्हें पत्रकारिता का अनुभव ही नहीं है। सिर्फ सरकारी विज्ञापनों को अतिरिक्त आय का साधन समझने वाले एसे पत्रकारों की मश्कें कसना चाहिए। संघ ने कहा है कि प्रदेश के करीब 27 हजार से अधिक पत्र पत्रिकाएं आरएनआई में रजिस्टर्ड हैं, अनियमितताओं की वजह से लगभग 18 हजार पत्र पत्रिकाओं को आरएनआई द्वारा डी ब्लाक की सूची में डालना पड़ा है।
यक्ष प्रश्न तो यह है कि पत्र पत्रिकाओं या पत्रकारों का जिला स्तर से संभाग और प्रदेश स्तर तक लेखा जोखा रखने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? जिला कलेक्टर की, संभागायुक्त की, मंत्री, मुख्य सचिव या मुख्यमंत्री की? उत्तर होगा जिला जनसंपर्क अधिकारी से लेकर जनसंपर्क आयुक्त तक के आला अफसरान की! जब जवाबदेही ही आपकी है तो आप फिर अपनी जवाबदेही को पूरा ना करके शासन से क्या अपेक्षा करते हो, क्या मुख्मंत्री शिवराज सिंह चौहान या जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा मीडिया या कथित मीडिया से पंगा लें?
जनसंपर्क अधिकारी संघ की अखबारों में प्रकाशित विज्ञप्ति से साबित हो रहा है कि जिन भी मीडिया संस्थानों को अभी विज्ञापन जारी किया जा रहा है और जो पत्रकार मध्य प्रदेश सरकार से वर्तमान में अधिमान्य हैं वे सभी वास्तविक और सही है, अन्य जो भी विज्ञापन या अधिमान्यता चाह रहे हैं वे सभी फर्जी की श्रेणी में हैं। क्या जनसंपर्क महकमा यही कहना चाह रहा है? जनसंपर्क महकमा पहले अपने दामन में झांककर देखे और इस बात का ही जवाब दे कि काफी पीछे रेंकिंग वाली एक वेब साईट को आखिर पंद्रह लाख रूपए का विज्ञापन किस आधार पर जारी किया जाता है?
जनसंपर्क विभाग एमपीइंफो डॉट ओआरजी वाली अपनी वेब साईट पर पडी जनसंपर्क नीति और अधिमान्यता नियम का अध्ययन अवश्य कर ले। क्या सारे अधिमान्य पत्रकार इन नियम कायदों में सही बैठ रहे हैं? क्या जनसंपर्क द्वारा जारी विज्ञापन सही नीति के तहत दिए जा रहे हैं? क्या एक भी अधिमान्य पत्रकार या विज्ञापन जारी किए जाने वाले अखबारों के मालिकों पर कोई प्रकरण दर्ज नहीं है? अगर है तो जनसंपर्क विभाग की इस दोषपूर्ण नीति के लिए क्या सजा तय की जाए यह आला अधिकारी खुद ही तय कर लें?
हर मामले में पेंच इतने हैं कि गिनाते गिनाते सारी उमर ही बीत जाएगी? एक पत्रकार सम्मेलन में हमने अपने उद्बोधन में इस बात को रेखांकित किया था कि हर जिले में वही नीति अपनाई जानी चाहिए जो जनसंपर्क विभाग या पत्र सूचना कार्यालय द्वारा अधिमान्यता देने या नवीनीकरण के समय अपनाई जाती है। अगर उसी नीति का पालन सुनिश्चित हो गया तो आने वाले समय में जिलों में फर्जी पत्रकारों पर अंकुश अपने आप ही लग जाएगा? पर सवाल वही है कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे।
जनसंपर्क विभाग के शातिर दिमाग रणनीतिकारों ने जनसंपर्क अधिकारी संघ के कंधे पर बंदूक रखकर गेंद को शिवराज सिंह चौहान के पाले में फेंक दिया है। फर्जी और सही पत्रकार को चिन्हित करने की जवाबदेही जनसंपर्क विभाग की है ना कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की! सूबे के लोकप्रिय निजाम शिवराज सिंह चौहान से यही अपेक्षा की जा सकती है कि जनसंपर्क विभाग के इन शातिर आकाओं से सावधान रहकर जनसंपर्क विभाग को यही नसीहत दें कि वे अपना काम खुद ही करें। आखिर क्या वजह है कि असली और फर्जी पत्रकारों में जनसंपर्क विभाग भेद नहीं कर पा रहा है? क्यों जनसंपर्क मंत्री की अनुशंसाओं को दबाकर रख दिया जाता है और मनमर्जी से लाखों करोड़ों रूपयों के विज्ञापन जारी कर दिए जाते हैं?
जनसंपर्क विभाग द्वारा पत्रकारों की सेवा टहल पर किए जाने वाले भारी भरकम खर्च को पत्रकार के नाम से प्रदर्शित कर अपनी वेब साईट पर क्यों नहीं डाला जाता? ताकि पता तो चल सके कि किस असली या किस फर्जी पत्रकार की सेवा टहल में जनसंपर्क विभाग ने जनता के खून पसीने की कमाई को उड़ाया है? क्यों जनसंपर्क विभाग द्वारा अपनी वेब साईट पर मीडिया को जारी विज्ञापनो के बारे में उनकी दरें और राशि के साथ विज्ञापन देने के आधार सहित सूचना नहीं डाली जाती? जाहिर है जनसंपर्क विभाग अपने बजाए शिवराज सिंह चौहान के सर पर ठीकरा जो फोड़ना चाह रहा है? यहां एक बात और शोध का विषय है कि आखिर किसके इशारे पर या कहने पर मीडिया और शिवराज सिंह चौहान के बीच खाई खोदने का काम कर रहा है मध्य प्रदेश का जनसंपर्क महकमा? (साई फीचर्स)

मीनाक्षी से बड़ा याराना लगता है जनमंच का?: एड.सोनकेशरिया


मीनाक्षी से बड़ा याराना लगता है जनमंच का?: एड.सोनकेशरिया

वाहवाही लूटने के बजाए बताएं सड़क क्यों नहीं बनी चार सालों में

(ब्यूरो)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले से होकर गुजरने वाले फोरलेन को बनवाने के लिए गठित जनमंच द्वारा इस सड़क का निर्माण नहीं करवाया जा सका है, अपने मूल काम को आधे अधूरे में छोड़कर ही जनमंच कभी हज के मामले में तो कभी पेंच परियोजना के मामले में कूदकर आखिर क्या साबित करना चाह रहा है? आखिर क्या कारण है कि 2009 में गठित जनमंच में अब ना प्रवक्ता बचा है और ना ही अन्य कोई कार्यकर्ता। सिवनी के हजारों लोगों के साथ आरंभ हुआ जनमंच अब महज गिनती के लोगों में तब्दील क्यों हो चुका है इस बात पर विचार अवश्य करें जनमंच के कथित शिरोमणि। क्या कारण है कि जनमंच सिर्फ सद्भाव कंपनी के ही कारनामे उजागर कर रहा है, क्या मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी से जनमंच की खासी दोस्ती हो चुकी है? उक्ताशय की बात अधिवक्ता वीरेंद्र सोनकेशरिया ने आज यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कही है।
अडव्होकेट वीरेंद्र सोनकेशरिया ने कहा कि 2009 में गठित जनमंच को कितना चंदा मिला उस चंदे का उसने क्या किया इस बारे में जनमंच खामोश है? एक बार पत्रकार वार्ता में जनमंच द्वारा दिए गए हिसाब में भी अनेक विसंगतियां हैं, यथा - अगर कोई अपने पैसों से दिल्ली यात्रा पर गया तो वह उसका निजी खर्च माना जाएगा या फिर जनमंच के खाते में जुडेगा, अगर जनमंच के खाते में जुडेगा तो उस रकम को शामिल कर कुल कितना चंदा हुआ और कितना खर्च यह बात भी जनता के सामने लाई जाए। अधिवक्ता सोनकेशरिया ने साफ कहा कि जब वाहवाही लूटने के चक्कर में शुरूआत में यह बात प्रचारित कर प्रकाशित करवाई गई थी कि दिल्ली के अधिवक्ता अपनी फीस नहीं लेंगे तब लाखों रूपए चंदे की राशि आखिर कहां गई?
उन्होंने कहा कि इस चंदे के धंधे में हैं अनेक फंदे, उन्होंने कहा कि इस चंदे से ही अगर फोटोकापी और सूचना के अधिकार में प्रपत्र एकत्र किए गए हैं तो वे आखिर हैं कहां? जनमंच का कार्यालय है कहां जहां ये सब रखे हुए हैं? क्यों पत्रकारों को इनकी एक एक प्रति फोटोकापी करवाकर नहीं दी जा रही है? सिवनी में विध्न संतोषी होने का दावा करने वाले जनमंच शिरोमणि यह बताएंगे कि क्या ये सार्वजनिक धन से एकत्र ये सारे प्रपत्र किसी व्यक्ति विशेष की प्रापर्टी है? जनमंच के आंदोलन का खर्च आखिर कैसे चल रहा है इस बात को सार्वजनिक करने से क्यों डर रहे हैं जनमंच के शिरोमणि? अण्णा हजारे और अरविंद केजरीवाल तक अपने अंदोलन के बारे में सब कुछ सार्वजनिक कर रहे हैं। कहते हैं जनमंच के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता भी केजरीवाल के एक आला नेता से भोपाल में जाकर भेंट कर चुके हैं।
आखिर क्या कारण है कि पिछली पत्रकार वार्ता में जनमंच के कथित शिरोमणि द्वारा एक विशेष बस आपरेटर का नाम इंगित कर उसके द्वारा सहयोग ना देने की बात कही जाती है? क्या सिवनी में सिर्फ और सिर्फ नंदन ट्रेवल्स की बस ही संचालित हो रही हैं, जिस पर जनमंच के शिरोमणि द्वारा साथ ना देने के आरोप लगे? आखिर क्या वजह है कि अन्य किसी बस आपरेटर के पास जनमंच के शिरोमणि नहीं गए? इन बातों का जवाब है क्या जनमंच के शिरोमणि के पास।
अधिवक्ता सोनकेशरिया ने कहा कि जनमंच के शिरोमणि पत्रकार वार्ता लेकर अपनी गलत बातों को सही साबित करने का प्रयास ना करें? क्या जनमंच शिरोमणि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रमन सिंह सिकरवार के निवास पर आयोजित बैठक में जनमंच के बेनर तले नगर पालिका चुनाव लडने की बात को पत्रकार वार्ता में कहने का साहस कर पाएंगे? उन्होंने कहा कि जनमंच द्वारा सिर्फ और सिर्फ कमल नाथ और कांग्रेस को ही इस मामले में दोषी बताया जाता है, क्या कारण है कि जनमंच द्वारा सांसद के.डी.देशमुख और सांसद बसोरी सिंह मसराम के सिवनी प्रवेश पर उनका विरोध नहीं किया जाता है, क्या कारण है कि हरवंश सिंह, नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, शशि ठाकुर के सिवनी आगमन पर इनका विरोध नहीं किया जाता, क्योंकि इन्होंने विधानसभा लोकसभा में सडक की बात नहीं उठाई।
क्या कारण है कि जनमंच के शिरोमणि निर्णय लेते हैं कि किसी नेता के दरवाजे नही जाएंगे, फिर अचानक ही राहुल गांधी की जी हजूरी करने सर्किट हाउस पहुंच जाया जाता है? क्या कारण है कि दिल्ली में सर्वोच्च न्यालयालय में चलने वाले प्रकरण के बारे में आज तक गोपनीयता बरती गई, सिवनी में विध्न संतोषी होने का आरोप लगाने वाले जनमंच शिरोमणि बताएंगे कि क्या कारण हैै कि आज तक इसका केस नंबर तक किसी को नहीं बताया गया? क्या यह जनमंच शिरोमणि के घर के सामने की सडक का मामला है? या सार्वजनिक शेरशाह सूरी के जमाने की सड़क का? अधिवक्ता सोनकेशरिया ने कहा कि प्रश्न तो हजारों की तादाद में हैं सिवनी के लोगों के जेहन मेें, पर सभी शांत हैं। श्रेय चाहे जो ले पर क्या जनमंच शिरोमणि यह बताने की जुर्रत करेंगे कि सिवनी में क्या सिर्फ सदभाव कंपनी ही सडक निर्माण का काम कर रही है? क्या कारण है कि सिवनी से नरसिंहपुर तक के खण्ड को बनाने वाली मीनाक्षी कंपनी के बारे में जनमंच शिरोमणि मौन हैं? क्या इन कंपनियों से किसी के व्यवसायिक हित सध रहे हैं? अधिवक्ता वीरेंद्र सोनकेशरिया ने कहा कि जिसे जो व्यवसायिक, निजी लाभ लेना हो लेता रहे पर कम से कम यह तो बता दे कि आखिर चार सालों में यह सडक क्यों नहीं बन पाई। जब इस समय इस सडक में गडढे भरने और पेंच रिपेयर का काम हो रहा है तो यह पिछले चार सालों में क्यों नहीं हो पाया है? क्यों जनमंच द्वारा पिछले चार सालों में सिवनी में इस सडक (समूचे सिवनी जिले में) को बनवाने की बात नहीं की जाती है?
अधिवक्ता वीरेंद्र सोनकेसरिया ने कहा कि सदभाव के खिलाफ हुई बारह करोड़ 90 लाख 24 हजार रूपए के जर्माना प्रकरण में जनमंच, संजय तिवारी जी, अथवा भोजराज मदने जी द्वारा हाईकोर्ट, जिला दण्डाधिकारी अथवा अनुविभागीय दण्डाधिकारी कोर्ट में कोई आवेदन प्रस्तुत किया हो अथवा उपस्थित हुए हों तो इसका प्रमाण वाहवाही लूटने के दौरान अवश्य प्रस्तुत करें। उन्होने कहा कि उनके पास प्रमाण हैं कि जो विज्ञप्ति जनमंच की ओर से जारी हुई है उसमें उठाए गए बिन्दू पूर्व में सदभाव कंपनी द्वारा न्यायालय में उठाए गए थे, जिन्हें अनुविभागीय दण्डाधिकारी ने खारिज कर दिया। इससे क्या यह प्रतीत नहीं होता कि सिवनी में सडक नहीं बन पाने की दोषी सदभाव कंपनी की पैरवी नहीं कर रहा है जनमंच।

घटेगी आकाश की कीमत


घटेगी आकाश की कीमत

(महेश)

नई दिल्ली (साई)। दूरसंचार तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि आकाश टेबलेट का मूल्य जल्द ही ४९ डॉलर से घटकर ३५ डॉलर या एक हजार नौ सौ रूपये हो जाएगा। सिब्बल ने बताया कि आकाश के अगले संस्करण में स्काईप सुविधा भी होगी, जिससे इंटरनेट के जरिये वॉयस कॉल की जा सकेंगी। इसके लिए सिमकार्ड की जरूरत नहीं होती।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार भारत में ५० लाख आकाश टेबलेट बनाने के लिए मंत्रिमण्डल की मंजूरी लेने की प्रक्रिया में है। उसके बाद आकाश के उत्पादन के लिए अंतर्राष्ट्रीय निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि बड़ी मात्रा में इसके बनने से इसकी कीमत में और कमी आयेगी।