शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2013

मीडिया के सवालों पर निरूत्तर रहे कांग्रेस के नेता

मीडिया के सवालों पर निरूत्तर रहे कांग्रेस के नेता

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। केंद्रीय मंत्री कमल नाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री अरूण यादव, कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया 10 अक्टूबर को सिवनी आ रहे हैं। उक्ताशय की जानकारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राममूर्ति मिश्रा एवं सिवनी के प्रभारी मोहम्मद अबरार ने आज पत्रकार वार्ता में दी।
उन्होंने बताया कि 10 अक्टूबर को सिवनी में कांग्रेस की एक विशाल आमसभा का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन स्थल अभी तय नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश बलात्कार के मामले में नंबर वन बन चुका है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम जिला मुख्यालय में ही होगा।

जब पत्रकारों ने नेताओं से यह पूछा कि क्या कारण है कि जिला कांग्रेस स्थानीय स्तर के मुद्दे उठाने के बजाए प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर के प्रवक्ताओं की भूमिका में नजर आती है तो नेताद्वय बगलें झांकने लगे। साथ ही साथ एक संपादक द्वारा जब मोहम्मद अबरार से यह पूछा गया कि क्या उन्होंने बरघाट के किसी नेता को टिकिट के लिए आश्वस्त कर दिया है तो मो.अबरार ने इस बात को नकार दिया।

टेम्पटेशन गुप का नौ दिवसीय गरबा महोत्सव कल से

टेम्पटेशन गुप का नौ दिवसीय गरबा महोत्सव कल से

(पीयूष भार्गव)

सिवनंी (साई)। हर साल की तरह युवाओं के मध्य एक ही बात चल रही है-स्थान वही, समय वही, गरबे का आनन्द वही।जी हां, टेम्पटेशन गुप का नौ दिवसीय गरबा महोत्सव 05 सितम्बर से 13 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। प्रतिवर्षानुसार यह शाम सात बजे से रात्रि दस बजे तक आयोजित किया जाएगा।
गरबा महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष संदीप शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2007 में आरंभ किए गए टेम्पटेशन समूह के इस गरबा आयोजन को हर साल लोगों का जबर्दस्त सहयोग मिलता आया है। उन्होंने बताया कि इस गरबा आयोजन में, आयोजन समिति का यह प्रयास होता है कि इसमें पारिवारिक वातावरण में प्रतिभागी निडर होकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर पाएं।
आयोजन समिति के सचिव योगेश भिड़े ने बताया कि फूहड़ता, और अन्य गतिविधियों से दूर इस गरबा आयोजन की खासियत यह है कि यहां पुरूष और महिला प्रतिभागी पारिवारिक वातावरण में अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने बताया कि हर साल शहर के गणमान्य नागरिकों और अतिथियों द्वारा इस आयोजन को न केवल सराहा जाता है वरन् उनके परिवार के सदस्यों द्वारा भी इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया जाता है।
आयोजन समिति के अध्यक्ष ने आगे बताया कि गरबा महोत्सव का आयोजन शनिवार 5 सितम्बर से 13 सितम्बर तक पूर्व वर्षाें के अयोजन स्थल, तिकोना पार्क के सामने एवं शिक्षक सदन के पीछे, श्रीमंत सेठ गोपाल साव पूरन साव परमार्थ ट्रस्ट की भूमि में किया जा रहा है। उन्होने बताया कि इस गरबा महोत्सव में पुरूष और महिला प्रतिभागियों के लिए गरबा खेलने की व्यवस्थाएं प्रथक प्रथक की गई हैं।

आयोजन समिति द्वारा पूर्ववर्ती वर्षों में शहर के गणमान्य नागरिकों, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर पालिका, एवं अन्य संबंधित विभागों के सहयोग के लिए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित करते हुए इस वर्ष भी पूर्व की भांति सहयोग देने की अपील की है।

हवेली की हुकूमत से आज़ाद होने कलपता केवलारी

हवेली की हुकूमत से आज़ाद होने कलपता केवलारी

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। आज़ाद भारत में केवलारी विधानसभा पर अधिकांश समय कांग्रेस का ही राज रहा है। केवलारी में पहले सालों साल तक विमला वर्मा विधायक रहीं तो उनके बाद लंबे समय तक सिवनी में सत्ता और कांग्रेस की धुरी बने रहे हरवंश सिंह ठाकुर के इर्द गिर्द ही सत्ता की धुरी घूमती रही। आज़ादी के उपरांत भी सिवनी जिले का केवलारी विधानसभा क्षेत्र आज़ादी में सांसे लेने को बेताब दिख रहा है।
लगभग बीस सालों से बर्रा हवेलीके ठाकुर हरवंश सिंह केवलारी के विधायक रहे हैं। हरवंश सिंह ने लगभग हर चुनाव में आपने बनाया हमने निभायाकी बुकलेट बांटी, जिसमें उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों की फेहरिस्त जनता के सामने प्रस्तुत की गई। इस सूची में वे ही काम हुआ करते थे जिनकी स्वीकृति बर्रा नरेश द्वारा दी जाती थी। ग्रामीण अंचलों में विकास की किरण शायद नहीं पहुंच सकी, यह बात भी हकीकत ही है।

लंबे समय तक रहे प्रदेश में मंत्री
हरवंश सिंह ठाकुर का कद बेहद ही बड़ा हो गया था। पहली बार विधायक बनते ही हरवंश सिंह ठाकुर को मंत्री लीक से हटकर मंत्री बना दिया गया। जैसे ही हरवंश सिंह ठाकुर प्रदेश में मंत्री बने, केवलारी वासियों की उम्मीदें जागीं कि उसके उपरांत केवलारी का पिछड़ापन काफी हद तक दूर हो सकेगा। केवलारी से भोपाल के लिए सीधी बस सेवा आरंभ हुई तो केवलारी वासियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, पर धीरे धीरे लोगों को लगने लगा कि महज एक बस चलवाकर ही उनकी समस्याएं समाप्त नहीं होने वाली हैं।

सागर नदी का पुल बना परेशानी का सबब्
केवलारी से बालाघाट को जोड़ने वाले मार्ग पर सागर नदी के पुल का निर्माण सालों से प्रतिक्षित होने के बाद भी हरवंश सिंह ठाकुर द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। केवलारी से उगली मार्ग के निर्माण के समय लोगों को उम्मीद थी कि छोटे बड़े पुल पुलियों के निर्माण के साथ ही सागर नदी के पुल का भी जीर्णोद्धार होगा, किंतु उस वक्त कार्य न होने से लोगों में निराशा पसर गई।

सीएम की घोषणा, नहीं बनी नगर पंचायत
केवलारी विधानसभा क्षेत्र के मुख्यालय केवलारी को नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिल पाने से केवलारी के निवासियों का कांग्रेस के प्रति अब मोह भंग होने लगा है। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में केवलारी को नगर पंचायत बनाने की घोषणा की गई थी। कांग्रेस के कद्दावर नेता तथा प्रदेश में लंबे समय तक ताकतवर मंत्री रहे हरवंश सिंह भी केवलारी को नगर पंचायत नहीं बनवा सके। कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि केवलारी के विधायक रहे हरवंश सिंह चाहते तो केवलारी को नगर पंचायत का दर्जा एक दिन में मिल सकता था, किन्तु उन्होंने कभी दिल से केवलारी का विकास चाहा ही नहीं।

दुर्दशा पर आंसू बहा रहा बस स्टैंड
केवलारी बस स्टैंड की हालत किसी से छिपी नहीं है। केवलारी का बस स्टैंड सालों से अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। केवलारी में बस स्टेंड के बाजू वाला क्लब भवन पिछले साल काफी जर्जर हालत में था। इस भवन की हालत इतनी जर्जर थी कि यहां सांप बिच्छू ने अपना डेरा जमा लिया था। इस भवन या बस स्टैंड की ओर तत्कालीन विधायक हरवंश सिंह ठाकुर द्वारा कभी ध्यान नहीं दिया गया।

विकास की दौड़ में पिछड़ गया केवलारी
केवलारी अंचल के वाशिंदों के सामने अनेकानेक समस्याएं आज भी सुरसा की तरह मुंह उठाए खड़ी हैं। जिले से बाहर जाकर जीविकोपार्जन करने वाली की संख्या अगर देखी जाए तो एक अनुमान के अनुसार केवलारी से सबसे ज्यादा तादाद में लोग बाहर जाकर कमाने पर मजबूर हैं। इसका कारण केवलारी का उद्योग विहीन होना है। लोगों को इस बात का आश्चर्य है कि केवलारी विधायक हरवंश सिंह के कारण केवलारी क्षेत्र को जाना जाता रहा है। इसके अलावा केंद्र में उद्योग एवं अन्य विभागों के कद्दावर मंत्री रहे कमल नाथ से हरवंश सिंह का जुड़ाव किसी से छिपा नहीं है। कमल नाथ केंद्र में उद्योग मंत्री भी रहे हैं। बावजूद इसके केवलारी क्षेत्र सहित सिवनी जिले में उद्योग धंधों का न होना इस बात का परिचायक है कि उन्होंने अपने प्रभावों का इस्तेमाल कभी भी सिवनी जिले या केवलारी को विकसित करने नहीं किया है।

केवलारी के अंदरूनी मार्ग हो चुके हैं जर्जर
केवलारी विधानसभा क्षेत्र के अंदरूनी मार्गों की दशा देखकर बाहर से आने वाले आगंतुकों को पसीना आ सकता है, यह सच है। केवलारी में बरघाट कान्हीवाड़ा मार्ग की हालत वाकई दर्दनाक ही रही है। साथ ही साथ केवलारी से डुंगरिया मार्ग बेहद ही बुरी स्थिति में पहुंच चुका था। वहीं पलारी से छपारा मार्ग के धुर्रे उड़ चुके। साथ ही साथ पलारी से घंसौर मार्ग पर चलना तो सर्कस के बाजीगरों के ही बस की बात रही।

नांव में जाते हैं स्कूल
केवलारी क्षेत्र के आधा दर्जन गांव के बच्चे आज भी बरसात के मौसम में सड़कों के अभाव में या तो रेल की पांते पार कर स्कूल जाते हैं या फिर नदी से ही आना जाना करते हैं। ये समस्याएं तत्कालीन विधायक हरवंश सिंह ठाकुर के संज्ञान में लाने के बाद भी जस की तस बनी रहना वाकई दुखद ही है।

हवेली की जद से निकलने को बेताब!

केवलारी के लोगों का कहना है कि अब हरवंश सिंह के अवसान के उपरांत कांग्रेस के आला नेताओं ने केवलारी में उनके ज्येष्ठ पुत्र रजनीश सिंह ठाकुर को यहां से टिकिट देने का मन बनाया है। केवलारी क्षेत्र के लोगों विशेषकर युवाओं का कहना है कि समस्याओं के मकड़जाल में उलझा केवलारी विधानसभा क्षेत्र अब बर्रा की हवेलीकी जद से बाहर आने को बेताब ही नजर आ रहा है।

नरेंद्र गुड्डू को साधुवाद

नरेंद्र गुड्डू को साधुवाद

(शरद खरे)

भाजपा के युवा और ऊर्जावान नेता नरेंद्र गुड्डू ठाकुर ने सूबे के निज़ाम को 21 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है। नरेंद्र का यह ज्ञापन अपने आप में सिवनी की समूची समस्याओं को न केवल समाहित किए हुए है, वरन् यह ज्ञापन सिवनी के कांग्रेस और भाजपा के उन नेताओं को आईना दिखाने के लिए पर्याप्त माना जा सकता है जो सिवनी के हितों के संवर्धन का स्वांग रचकर लोगों को भरमाने का प्रयास करते आए हैं। नरेंद्र के ज्ञापन में छोटे और बड़े कमोबेश हर मुद्दे को शामिल किया गया है। सिवनी के नेताओं ने इन मुद्दों को चर्चाओं में तो स्थान दिया है, किन्तु जब ठोस कार्यवाही की बात आती है तो वे अपने आप को, इन मामलों से पीछे ही खींच लिया करते हैं।
फोरलेन के लिए 2009 में प्रयास हुए हैं इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। जनमंच सिवनी, लखनादौन और कुरई ने अपने अपने स्तर पर प्रयास किए हैं। जनमंच सिवनी पांच बार सीएम से इसके लिए मिल चुका है (जैसा कि प्रचारित किया जा रहा है)। केंद्रीय मंत्री कमल नाथ को इसके लिए जवाबदेह बताया गया जनमंच द्वारा। कमल नाथ 13 जून को सिवनी आए तो उन्हें जनमंच ने काले झंडे दिखाए, पर अचानक जनमंच को सूबे के निज़ाम शिवराज सिंह चौहान से क्या अनुराग उमड़ा कि काले झंडे दिखाने के बजाए महज ज्ञापन सौंपकर ही अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। जनमंच का गठन संघर्ष के लिए किया गया था, विडम्बना यह है कि जनमंच ही खुद संघर्ष से पीछे हटकर जिला वासियों से अपने स्तर पर विरोधकी बात पर उतर आया। जनमंच को आत्म मंथन की आवश्यकता है। फोरलेन बनने तक विरोध का झंडा जनमंच के पास था, पर यह किसी विशेष दिशा में जाता दिखाई देने लगा।
इसी तरह सिवनी के लिए पेंच परियोजना भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस परियोजना में भी दो दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी पानी सिवनी को नहीं मिल सका है। कभी इसके बंद करने की बात सुनाई देती है तो कभी शहरी विकास मंत्रालय के अधीन काम करने वाली मेट्रो रेल परियोजना की मशीनों से छिंदवाड़ा में दु्रत गति से काम करने की बात प्रकाश में आती हैं। कुल मिलाकर स्थिति पूरी तरह अस्पष्ट ही है। बीस साल बीतने के बाद भी इस परियोजना का एक बूंद पानी भी सिवनी को न मिल पाना, निश्चित तौर पर सिवनी के कांग्रेस भाजपा के सांसद विधायकों के चेहरे पर बदनुमा दाग से कम नहीं है, जिन्होंने संसद या विधानसभा में इस मामले को नेता विशेषको प्रसन्न करने नहीं गुंजायमान किया।
यही आलम औद्योगिक क्षेत्र बवरिया और भुरखुलखापा का है। लोगों ने अपने अपने सियासी प्रभावों का इस्तेमाल कर यहां माटी मोल जमीनें तो हथिया लीं, किन्तु सालों से यहां उद्योग आरंभ नहीं किए हैं। आज ये जमीनें बेशकीमती हो चुकी हैं। जिला उद्योग केंद्र में अब तक पदस्थ रहे अधिकारियों पर इसके लिए कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए कि आखिर क्या कारण है कि यहां उद्योग आरंभ नहीं किए जाने के बाद भी इन अधिकारियों ने जमीन वापसी की कार्यवाही सालों साल तक क्यों नहीं की। वहीं, भुरखुलखापा में भी जमीनें आवंटित हो चुकी हैं किन्तु स्थानीय स्तर पर रोजगार के नाम पर मामला सिफर ही है।
युवा भाजपा नेता नरेंद्र ठाकुर ने लगभग तीन दशकों से प्रियदर्शनी के नाम से सुशोभित जिला चिकित्सालय में पदस्थ सिविल सर्जन डॉ.सत्यनारायण सोनी को हटाने की मांग उठाई है। बीमार जिला चिकित्सालय की सेहत सुधारने की गुहार लगाने के लिए नरेंद्र गुड्डू बधाई के पात्र हैं। उन्होंने बर्न यूनिट, आईसीसीयू को शासन के स्वास्थ्य महकमे में दर्ज करवाकर स्थापना व्यय बढ़वाने का अनुरोध किया है। साथ ही साथ ट्रामा यूनिट को भी अस्पताल के अंदर के बजाए सड़क किनारे स्थापित करने की मांग की है। क्या सिविल सर्जन या सीएमओ ट्रामा यूनिट के महत्व और उसकी कार्यप्रणाली से अपरिचित हैं, जाहिर है नहीं? तब क्या कारण है कि इस यूनिट को अंदर घुमावदार रास्तों के बाद स्थापित किया जा रहा है।
उच्च शिक्षा के लिए नरेंद्र गुड्डू की सोच जबर्दस्त है। नरेंद्र का कहना स्वागत योग्य है कि शासकीय स्नात्कोत्तर महाविद्यालय में प्रथम तल पर कक्षाओं के निर्माण के साथ ही साथ यहां पर्याप्त मात्रा में स्टाफ की भर्ती की जाए। साथ ही साथ यहां नए संकाय भी आरंभ किए जाएं। इसी तरह नरेंद्र ने खेल के क्षेत्र में भी अपनी गुहार सीएम से लगाई है। उनका कहना है कि क्रिकेट के लिए स्टेडियम का निर्माण करवाया जाए। ब्रॉडगेज और संभाग के लिए भी उन्होंने अपनी बात रखी है। उन्होंने जिले में मनचाहे धार्मिक स्थलों पर सरकारी रिसीवर बिठाने की मांग की है। काले हिरण की सेंचुरी, तालाबों के संरक्षण, कलेक्टोरेट के निर्माण, झाबुआ पॉवर की लोकसुनवाई की जांच, अवैध उत्खनन, शहर के अंदर की सड़कों आदि पर भी अपनी बात बेबाकी के साथ नरेंद्र ठाकुर ने शिवराज सिंह चौहान के समक्ष रखी है।

वस्तुतः देखा जाए तो यह काम सांसद विधायक का अथवा विपक्ष में बैठी कांग्रेस का है। कांग्रेस को इन मुद्दों को उठाना चाहिए था, पर लगता है चूंकि ये मुद्दे स्थानीय हैं और स्थानीय मामलों को उठाने से कांग्रेस अब तक बचती ही आई है इसलिए उसने शायद इन मामलों को न उठाया हो, वहीं ये मामले अगर प्रदेश स्तर के होते तो कांग्रेस के प्रवक्ता झट से प्रदेश स्तर के प्रवक्ताओं के अधिकारों पर अतिक्रमण कर इन्हें उठा चुके होते। अब चूंकि नरेंद्र ठाकुर ने इन मामलों को उठा ही दिया है, तब कांग्रेस और भाजपा के नेता श्रेय लेने के चक्कर में इन मुद्दों को आने वाले दिनों में अवश्य ही उठाएंगे, पर श्रेय तो नरेंद्र गुड्डू ठाकुर की झोली में जा ही चुका है।

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2013

साहब यहां रीचार्ज वॉऊचर मिलता है क्या?

साहब यहां रीचार्ज वॉऊचर मिलता है क्या?

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। महानगरों की तर्ज पर सिवनी में कोतवाली परिसर के मुख्य द्वार पर एक निजी सेवा प्रदाता मोबाईल कंपनी द्वारा प्रायोजित साईन बोर्ड लोगों के लिए कोतुहल का विषय बना हुआ है। सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर भी यह मुद्दा बहस का विषय बन चुका है।
सिवनी कोतवाली में मोबाईल की एक निजी सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा एक साईन बोर्ड लगाया गया है। इस साईन बोर्ड का प्रस्ताव किसे दिया गया? किसने इसकी अनुमति दी? नगर पालिका से एनओसी मिली अथवा नहीं? ये सारी बातें अभी किसी को पता नहीं हैं, किन्तु इसके लगते ही चर्चाओं का न थमने वाला दौर आरंभ हो गया है।
कहा जा रहा है कि महज कुछ हजार खर्च कर फ्लेक्स वाले ग्लो साईन बोर्ड के जरिए निजी सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा अपना विज्ञापन करवाया जा रहा है। इस विज्ञापन के एवज में वह नगर पालिका परिषद् या पुलिस विभाग को क्या दे रहा है यह बात भी किसी के संज्ञान में नहीं ही बताई जा रही है।
इस ग्लो साईन बोर्ड के अंदर ट्यूब लाईट लगी हुई हैं। कहा जा रहा है कि अपने विज्ञापन के लिए सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा तबियत से इसमें ट्यूब लाईट लगाई गई हैं। इन ट्यूब लाईट के रात भर जलने से भाग मिल्खा भाग की तर्ज पर घूमने वाले बिजली के मीटर का भोगमान कौन भोगेगा यह बात भी कोई नहीं जानता है!
एक पुलिस कर्मी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से कहा कि अब तो कोतवाली पुलिस की सरदर्दी और अधिक इसलिए बढ़ गई है क्योंकि निजी सेवा प्रदाता कंपनी ने अपनी कंपनी का नाम बहुत ही बड़े अक्षरों में तो कोतवाली थाना, सिवनीबेहद बारीक अक्षरों में लिखवाया है।

उक्त पुलिस कर्मी का कहना था कि लोग कोतवाली को मोबाईल सेक्टर की उक्त सेवा प्रदाता कंपनी का कार्यालय ही समझने लगे हैं। उसने बताया कि गत दिवस तो दो तीन ग्रामीण मोबाईल उपभोक्ताओं ने यहां तक पूछताछ कर ली कि ‘‘साहब, यहां उक्त कंपनी के रीचार्ज वॉऊचर मिलते हैं क्या?

कहीं प्रायोजित तो नहीं था गनपत प्रसंग!

कहीं प्रायोजित तो नहीं था गनपत प्रसंग!

प्रभारी मंत्री नाना भाऊ झाड़ते रहे बार बार अपना आसन!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। दशहरा मैदान में आज आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक विकलांग युवक को न केवल अपनी कुर्सी पर बिठाया वरन् उसे पचास हजार रूपए का चेक भी प्रदान किया। भाजपाई खेमें में चल रही चर्चा को अगर सच माना जाए तो यह कार्यक्रम सिवनी विधायक श्रीमती नीता पटेरिया द्वारा प्रायोजित ही था।
भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से कहा कि अपने दोनों पैरों से विकलांग उगली पठार निवासी गनपत धुर्वे, बीती रात्रि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिलने आया था, परंतु भाजपा के टाईट शैड्यूलके कारण वह सीएम शिवराज सिंह चौहान से नहीं मिल सका।
आज जब मुख्यमंत्री दशहरा मैदान पहुंचे और उनकी नजर नीचे बैठे गनपत पर पड़ी तो उन्होंने उसे न केवल मंच पर बुलाया वरन् जिला कलेक्टर को तत्काल आदेशित कर उसे पचास हजार रूपए की राशि का धनादेश (चेक) प्रदाय किया गया। सूबे के निज़ाम शिवराज सिंह चौहान की सहृदयता और पारखी नजर मीडिया की सुर्खियां बन सकती हैं, किन्तु अनेक सवाल अभी अनुत्तरित ही हैं।
उक्त पदाधिकारी ने बताया कि इसके पूर्व उज्जैन में भी मुख्यमंत्री ने सभा मंच से एक वृद्धा को मंच पर बुलाकर बिठाया और उसे आर्थिक इमदाद भी दी थी। बाद में पता चला था कि वह महिला प्रायोजित तरीके से भीड़ का हिस्सा बनाई गई थी। उक्त पदाधिकारी का कहना है कि कुछ लोगों ने जब उससे पूछा कि वह कहां का रहने वाला है, तो उसने छूटते ही नीता पटेरिया की ओर इशारा करते हुए कहा कि उसके बारे में पटेरिया मेडम को सब कुछ पता है।

प्रभारी मंत्री झाड़ते रहे आसनी
मुख्यमंत्री ने गनपत को नीचे से बुलवाकर अपने आसन पर बिठा दिया था। वहीं बाजू में प्रभारी मंत्री नाना भाऊ सफेद झक कपड़ों में बैठे थे। गनपत के बैठने के उपरांत प्रभारी मंत्री बार बार उठकर रूमाल से अपनी कुर्सी झाड़ते देखे गए। मंच पर मौजूद भाजपा के एक नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि दरअसल, गनपत नीचे बैठा था अतः धूल मिट्टी, घास फूस चिपककर उसके कपड़ों के जरिए कुर्सी पर आन पड़ी थी, संभवतः उसे ही साफ करने की गरज से प्रभारी मंत्री बार बार अपनी कुर्सी साफ कर रहे थे।

मीडिया से बनाई दूरी
गत दिवस दशहरा मैदान में आयोजित सभा में सूबे के निज़ाम शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया के लोगों से मुखातिब होकर कहा था कि वे मीडिया में आज और कल सिवनी में हैं। आज वे सिवनी से बिदा हो गए पर मीडिया से चर्चा का समय उन्हें नहीं मिल पाया। कल मीडिया के लोगों को सीएम के कार्यक्रम के लिए जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा चुन चुन कर बुलाये जाने पर भी मीडिया के लोगों में नाराजगी का आलम था। बताया जाता है कि रविवार को सीएम के आगमन के पूर्व जिला जनसंपर्क कार्यालय में, मीडिया के चुनिंदा प्रतिनिधियों के लिए भोज की व्यवस्था भी रखी गई थी।

मिलती है पांच हजार रूपए की राशि
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के भोपाल ब्यूरो से सोनल सूर्यवंशी ने बाणगंगा स्थित जनसंपर्क संचालनालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि जब भी सूबे के निज़ाम किसी भी जिले के प्रवास पर होते हैं, उस समय संबंधित जनसंपर्क अधिकारी को पांच हजार रूपए की राशि तत्काल ही मीडिया मैनेजमेंट के लिए आवंटित कर दी जाती है। अब तक सीएम के सिवनी आगमन पर यह राशि हर बार जारी हुई होगी। इस राशि को किसके उपर खर्च किया गया, यह भी शोध का ही विषय बना हुआ है।

प्रेस क्लबने सौंपा ज्ञापन
जिला प्रशासन और भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री के आगमन पर मीडिया के साथ किए गए दोयम दर्जे के व्यवहार से क्षुब्ध होकर प्रेस क्लब (पत्रकार हितों के लिए संघर्ष का दावा करने वाले शेष पत्रकार संगठन, पत्रकारों की उपेक्षा के बावजूद भी सदा की ही भांति मौन रहे) द्वारा लिखित रूप में मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में इस बात को रेखांकित किया गया कि चुनावों के मद्देनजर भी सिवनी के मीडिया को मुख्यमंत्री के 29 एवं 30 सितम्बर की जन आर्शीवाद यात्रा के बारे में जानकारी से महरूम रखा गया।
प्रेस क्लब के सक्रिय सदस्य काबिज खान ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि नाराज मीडिया कर्मियों ने अपने अपने कैमरे और कलब आज के मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बंद कर दिए गए थे। काबिज खान ने बताया कि सीएम ने प्रेस क्लब के ज्ञापन को पूरा पढ़ा और जिला प्रशासन ने मीडिया के लिए विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए। बकौल अब्दुल काबिज खान, सीएम ने ज्ञापन को पढ़कर अपनी जेब के हवाले कर दिया और मंच से उतरकर मीडिया से रूबरू हुए एवं इन मामलों को संज्ञान में लेकर कार्यवाही की बात भी कही गई।

अपनी सुनाई, पर मीडिया से रखा परहेज
शिवराज सिंह चौहान सिर्फ अपनी बात सुनाना चाहते हैं, अन्य किसी की बात वह सुनने को तैयार नहीं, तभी तो अक्सर वह स्थानीय मीडिया से परहेज करते हैं। शिवराज सिंह चौहान ने रात्रि विश्राम सिवनी में ही किया और सुबह 10.30 बजे ही वह यहां से निकल गये, लेकिन इस बीच वह मीडिया से बचते रहे। मीडिया में चल रही चर्चाओं के अनुसार शिवराज सिंह चौहान सिवनी में मीडिया से इसलिए बचते रहे क्योंकि अगर मीडिया उनके पहले कार्यकाल से लेकर अब तक की घोषणाओं की बखिया उधेड़ना आरंभ कर देता तो शायद ही शिवराज सिंह चौहान उसका जवाब दे पाते!

कांग्रेस ने खोया उम्दा मौका!
वहीं दूसरी ओर विपक्ष में बैठकर लगातार शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश की भाजपा सरकार को कोसने वाली कांग्रेस ने भी एक बेहतर मौका गंवा दिया है जो उसके लिए आगामी चुनावों में बेहतरीन प्लेटफार्म दे जाता। कहा जा रहा है कि शिवराज सिंह चौहान के आगमन के पूर्व ही अगर कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री की घोषणाओं की फेहरिस्त बनाकर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन कर लिया जाता तो बात ही कुछ ओर होती। इतना ही नहीं अगर आज सीएम के जाने के उपरांत भी मीडिया से रूबरू होकर कांग्रेस के नेता सीएम के आने के प्रयोजन को जनता से पूछ लेते तो भी भाजपा की किरकिरी हो जाती।

वहीं कांग्रेस के अंदर यह चर्चा तेज हो चुकी है कि आखिर क्या कारण है कि लगातार शिवराज सिंह चौहान और भाजपा सरकार के खिलाफ विष उगलने वाले कांग्रेस के प्रवक्ता शिवराज के सिवनी आगमन पर मौन धारित कर गए? शिवराज सिंह चौहान के जाने के उपरांत अब एक बार फिर कांग्रेस के प्रवक्ताओं की तोपें अगर भाजपा (जिला स्तर नहीं, प्रदेश स्तर पर) गरजीं तो लोग यही मान लेंगे कि यह विरोध छद्म है, कांग्रेस विरोध के बजाए विज्ञप्तियां जारी कर जनता को भरमाना ही चाहती है।

आखिर क्यों आए शिवराज!

आखिर क्यों आए शिवराज!

(शरद खरे)

प्रदेश के निज़ाम शिवराज सिंह चौहान 29 सितम्बर को सिवनी आए और रात्रि विश्राम कर 30 सितम्बर को वापस चले गए। सिवनी के हर व्यक्ति के दिलो दिमाग में यही प्रश्न कौंध रहा है कि आखिर शिवराज सिवनी आए तो आए क्यों? उनके सिवनी आने की वजह क्या थी। न वे सिवनी को कुछ देकर गए न कुछ लेकर गए। हां सिवनी के भाजपाई नेताओं की बेनर पोस्टर्स, होर्डिंंग्स, विज्ञापन में जेबें जरूर ढीली हुई हैं।
आदि अनादि काल से जब घर का मुखिया घर आता रहा है, घर के हर सदस्य को उससे कुछ न कुछ उपहार की अपेक्षा रही ही है। यही मानव स्वभाव भी है। पिता या पालक जब परदेस में नौकरी कर, अवकाश में घर आता है तो पूरे परिवार के लिए कुछ न कुछ लाता ही है। छोटे बच्चे के लिए भले ही वह अठन्नी की एक पेंसिल ही लाता रहा हो पर वह किसी की भावनाएं कतई आहत नहीं करता रहा है।
शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के निज़ाम हैं, प्रदेश के मुखिया हैं। वे समूचे प्रदेश में घूम रहे हैं। जनता के गाढ़े पसीने से संचित राजस्व के धन से संग्रहित सरकारी कोष में से बेदर्दी के साथ निकाली गई राशि से शिवराज सिंह चौहान का भ्रमण जारी है। यह भ्रमण क्यों और किसलिए हो रहा है, इस बात का शायद ही कोई उत्तर दे पाए! शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के मुखिया हैं, इस नाते वे जिस भी जिले में जा रहे हैं वहां की जनता उनसे आस लगाए बैठी है। शिवराज कह रहे हैं कि वे घोषणा इसलिए नहीं कर रहे हैं क्योंकि आचार संहिता कभी भी लग सकती है, और आचार संहिता के लगने के बाद उनकी घोषणाओं को अमली जामा नहीं पहनाया जा सकता है।
शिवराज सिंह चौहान सुलझे हुए राजनेता हैं, उनका कहना वाजिब है कि अब की गई घोषणाएं चुनावी ही मानी जाएंगी। पर प्रदेश के बच्चों के शिवराज मामा आप शायद भूल रहे हैं कि सिवनी जिले को आपने सदा घोषणाओं से ही लादा है। आचार संहिता पिछले चार सालों से नहीं लगी है, पर घोषणाओं को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है! आखिर क्या कारण है इसका। क्या आपने कभी भाजपा के सिवनी के विधायक श्रीमती नीता पटेरिया, शशि ठाकुर और कमल मर्सकोले सहित भाजपा के संगठन से पूछने की जहमत उठाई है कि सिवनी जिले में क्या चल रहा है? क्या सिवनी की जनता शिव के राज में सुखी है? क्या सिवनी की जनता के समक्ष की गई उनकी घोषणाएं पूरी कर दी गई हैं?
शिवराज जी, आपकी हरी झंडी के अभाव में जिले की हॉकी प्रतिभाओं को हॉकी के मैदान के तैयार होने के बाद भी 22 माह तक इंतजार करना पड़ा। अगर आपको इसका फीता नहीं ही काटना था तो पहले ही बता दिया होता, कम से कम सिवनी की हॉकी प्रतिभाएं तो बाईस माह पहले से ही निखरना आरंभ हो जातीं। ‘‘शिव‘‘ मामा, सिवनी भी आपके ही ‘‘राज‘‘ में है, और यहां के निवासी भी आपकी रियाया ही है।
पहली पारी खेलते हुए 02 फरवरी 2008 को आपने ही लखनादौन अस्पताल के उन्नयन, कान्हीवाड़ा को उप तहसील का दर्जा, 27 अप्रेल को सिवनी आने पर आकाशवाणी केंद्र खोले जाने की घोषणा, इसके अलावा 2008 में ही केवलारी को नगर पंचायत का दर्जा, पलारी को उप तहसील, कान्हीवाड़ा को पूर्ण तहसील और विकास खण्ड की घोषणा की थी। सिवनी के भाजपा और कांग्रेस के नेता अवश्य इन घोषणाओं को पांच साल तक भूले रहे हों, पर सिवनी की जनता को आज भी शिवराज मामा की इन कोरी घोषणाओं के बारे में सब कुछ शब्दशः याद है। मामा ने कहा था कि अगर उन्हें जिताया गया तो ये घोषणाएं अमली जामा पहन सकेंगी। इस बार भी शिवराज मामा ने कुछ इसी तरह की बात कही है। मतलब साफ है कि अगर वे जीते तो 2018 के विधानसभा चुनावों तक भी सिवनी के लोग विकास को तरसते ही रह जाएंगे।
चुनाव जीतने के उपरांत शिवराज फिर सिवनी आए और घोषणाओं के अंबार लगा गए। सिवनी में दलसागर को महत्वपूर्ण स्थान बताकर उन्होंने कहा था कि यह सिवनी के लिए गर्व का कारक है। एक करोड़ नौ लाख रूपए पानी में बहाने के बाद भी दलसागर गर्व के कारक की बजाए शर्म का विषय अवश्य बन गया है। लीजिए पौने दो करोड़ फिर आ गए इस तालाब के पानी में डुबाने के लिए। शिवराज ने कहा था कि सूरज भले ही पश्चिम से निकल जाए पर फोरलेन सिवनी से ही होकर जाएगा! शिव गर्जना भी चार साल बाद बिल्ली की म्याऊं साबित हो रही है। सूरज पूर्व से ही निकल रहा है और फोरलेन . . .। कांग्रेस को भी शिवराज की घोषणाओं से लेना देना नहीं है, वह भी अपनी मदमस्त चाल में ही मस्त है।
कुल मिलाकर अब सिवनी के लोग यह सोचने पर मजबूर होंगे कि आखिर सरकारी धन की होली खेलकर शिवराज मामा सिवनी क्यों आए? उन्हें आना था तो पहले आकर सिंथेटिक हॉकी मैदान का लोकार्पण कर जाते। जितने लोकार्पण या पत्थर लगाए गए हैं वे तो प्रभारी मंत्री ही लगा देते। रही बात शिवराज के सुशासन का ढिंढोरा पीटने की, तो उसके लिए सिवनी में भाजपा का संगठन और तीन तीन विधायक मौजूद हैं। लगता है शिवराज को न तो संगठन पर ही भरोसा बचा है और न ही अपने विधायकों पर! तभी तो उनके सहारे अपने कामों की वाहवाही लूटने के बजाए शिवराज ने खुद ही सरकारी धन की होली खेलकर जनता के बीच जाने की कवायद की है। शिवराज का आना और जाना तो ठीक है, पर सिवनी के निवासियों जिनमें भाजपा के कार्यकर्ता भी शामिल हैं यह सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर शिवराज सिवनी आए तो आए किस गरज से थे?

सोमवार, 30 सितंबर 2013

प्राचार्य बोरकर ने किया भगत सिंह का अपमान!

प्राचार्य बोरकर ने किया भगत सिंह का अपमान!

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सीसी टीवी केमरे की निगरानी वाले जिला मुख्यालय के पहले स्कूल उत्कृष्ठ विद्यालय के प्राचार्य द्वारा शहीद भगत सिंह के अपमान का एक मामला प्रकाश में आया है। मामला शहीद भगत सिंह की जयंती समारोह से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गत 28 सितम्बर को शहीद भगत सिंह की जयंती उत्कृष्ठ विद्यालय में मनाई गई। इस समारोह में शहीद भगत सिंह की प्रतिमा का माल्यार्पण प्रातः ग्याहर बजे प्रार्थना मंच पर शहीदे आजम भगत सिंह की प्रतिमा का माल्यार्पण एवं अन्य कार्यक्रम संपन्न किया गया।

बताया जाता है कि उक्त समारोह में मंच पर शहीदे आजम भगत सिंह के माल्यार्पण के वक्त उत्कृष्ठ विद्यालय के प्राचार्य आर.बी.बोरकर द्वारा जूते उतारे बिना किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों सहित शिक्षकों ने इस बात का पुरजोर विरोध किया। जिला प्रशासन से इस संबंध में उचित कार्यवाही की जनापेक्षा है।

लखनादौन मण्डल के लिए समय नहीं है सीएम के पास!

लखनादौन मण्डल के लिए समय नहीं है सीएम के पास!

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की पीड़ा सुनने के लिए सूबे के निज़ाम शिवराज सिंह चौहान के पास समय नहीं है। जी हां, यह सच है। कुछ इसी तरह की चर्चाएं लखनादौन नगर और ग्रामीण मण्डल में चल रही हैं। लखनादौन मण्डल के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि एक शराब माफिया के कहने पर लखनादौन में भाजपा के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लखनादौन मण्डल के कार्यकर्ताओं द्वारा अपने सम्मान को कुचले जाने की बात पर तल्ख नाराजगी जाहिर की गई थी। सिंथेटिक हॉकी मैदान के लोकार्पण में आए प्रभारी मंत्री ने जब कार्यकर्ताओं का आक्रोश देखा तो उन्होंने इस मामले में त्वरित कार्यवाही करते हुए एसडीएम लखनादौन लता पाठक को वहां से बिदा करवा दिया।

बताया जाता है कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी अभी भी समाप्त नहीं हुई है, क्योंकि नगर परिषद् द्वारा दबंगई दिखाकर भाजपा के लखनादौन कार्यालय के काम को रूकवा दिया गया है। भाजपा के लखनादौन मण्डल के कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के रवैए और अपनी भावनाओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराना चाहा, किन्तु मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा लखनादौन मण्डल के कार्यकर्ताओं को समय ही नहीं दिया गया।

शिवराज को हराने पर ही तुला प्रशासन!

शिवराज को हराने पर ही तुला प्रशासन!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। मुख्यमंत्री की जन आर्शीवाद यात्रा को लेकर जिला मुख्यालय में मीडिया जगत में रोष और असंतोष देखा गया। बताया जाता है कि जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा सीएम की यात्रा के लिए पत्रकारों के दल को ले जाया जाना सुनिश्चित किया गया था।
इस दल में कौन कौन शामिल होगा, इस बात को लेकर तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। कहा जा रहा है कि जो मीडिया पर्सन्स अक्सर जिला जनसंपर्क कार्यालय में जाकर हाजिरी लगाते हैं उनकी आज खासी पूछ परख रही। शनिवार को जिला मुख्यालय में कुछ चुनिंदा मीडिया से जुड़े लोगों को जनसंपर्क विभाग द्वारा फोन कर सूचित किया गया था कि सुबह जनसंपर्क कार्यालय से मुख्यमंत्री की यात्रा के कव्हरेज के लिए विशेष वाहन की व्यवस्था की गई है।
इस संबंध में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया और दैनिक हिन्द गजट को किसी तरह की सूचना न तो शनिवार को ही दी गई और न ही रविवार को ही दी गई। जब इस संबंध में जिला जनसंपर्क अधिकारी से संपर्क साधा गया तो उन्होंने कहा कि हो सकता है समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया और हिन्द गजट का नाम जनसंपर्क कार्यालय की सूची में न हो।
जब पीआरओ को यह बताया गया कि जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा ही हिन्द गजट को जुलाई में निरंतरता का प्रमाण पत्र दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि कम से कम हिन्द गजट का नाम तो जनसंपर्क कार्यालय की सूची में शामिल है, पर बावजूद इसके हिन्द गजट को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से वंचित रखा जाना आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है। इतना सब होने के बाद भी पीआरओ द्वारा हिन्द गजट और समाचार एजेंसी को उस वक्त भी सीएम के कार्यक्रम के कव्हरेज के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है।
ज्ञातव्य है कि समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया देश की पहली डिजिटल समाचार एजेंसी है, जो निरंतर खबरों का प्रसारण करती है। इसकी खबरें देश के ख्यातिलब्ध समाचार पत्रों, समाचार वेब पोर्टल्स, विभिन्न मीडिया माध्यमों द्वारा प्रकाशित और प्रसारित की जाती हैं, साथ ही साथ हिन्द गजट सिवनी जिले का प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र है। इन दोनों ही मीडिया के प्रतिष्ठानों की इस तरह उपेक्षा की शिकायत मुख्यमंत्री, जनसंपर्क मंत्री, जनसंपर्क आयुक्त आदि से की गई है।

वहीं, आज दिन भर जिला जनसंपर्क कार्यालय की चीन्ह चीन्हकर बांटी गई आमंत्रण की रेवड़ी की चर्चाएं तेज रहीं। लोगों का कहना था जब चुनाव सर पर हों उस समय अगर शासन, प्रशासन और मीडिया के बीच सेतु का काम करने वाला जनसंपर्क विभाग ही इस तरह की हरकत करे तो इसे यही समझा जाए कि प्रशासन ही शिवराज सिंह चौहान की हार के मार्ग प्रशस्त करने पर अमादा हो गया है।

विरोध की नायाब राजनीति

विरोध की नायाब राजनीति

(शरद खरे)

सिवनी में सियासी दलों का नया चलन सामने आया है। सिवनी जिले में कांग्रेस द्वारा भारतीय जनता पार्टी को और भाजपा द्वारा कांग्रेस को जमकर कोसा जाता है। इस कोसने की लक्ष्मण रेखा तय है। वह लक्ष्मण रेखा, सिवनी जिले की सीमा रेखा के बाहर ही है। सिवनी में भाजपा और कांग्रेस द्वारा गजब का सामंजस्य दिखाया जाता रहा है। कांग्रेस ने कभी भी भाजपा संगठन अथवा भाजपा के विधायकों का विरोध नहीं किया है। वहीं, दूसरी ओर भाजपा ने भी कांग्रेस को जिला स्तर पर कभी भी कटघरे में खड़ा नहीं किया है। कुल मिलाकर सिवनी में रहने वाले सारे नेता एक दूसरे से परस्पर सामंजस्य स्थापित कर चल रहे हैं। दोनों ही प्रमुख दलों के अलावा शेष सियासी दल मृत प्राय ही हैं। शेष सियासी दलों की आवाज गाहे बगाहे सुनाई पड़ जाती है।
पिछले लगभग पांच सालों से भारतीय जनता पार्टी द्वारा केंद्र की कांग्रेसनीत संप्रग सरकार को जमकर कोसा जाता रहा है। केंद्र की कांग्रेस की नीतियों पर कांग्रेस ने इस कदर वार किए हैं कि प्रदेश के प्रवक्ता मुकेश नायक और केंद्र में अजय माकन भी शर्मसार हो जाएं, पर जब बात सिवनी जिले की आती है तो भाजपा मुंह सिल लेती है। सिवनी में फोरलेन न बन पाने के लिए भाजपा ने भी जनमंच का साथ देते हुए केंद्रीय मंत्री कमल नाथ को इसके लिए दोषी ठहराया था। कमल नाथ की प्रतीकात्मक शवयात्राएं सिवनी में निकाली गईं। कमल नाथ को जमकर कोसा गया। उसके उपरांत कचहरी चौक पर सद्बुद्धि यज्ञ हुआ। इसमें कांग्रेस के नेताओं के पोस्टर्स लगाए गए। कांग्रेस के नेता भी इसमें साथ थे। हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं कि भाजपा की छांह बनते दिख रहे जनमंच को बेलेंस करने के लिए कांग्रेस नेता राजा बघेल द्वारा शिवराज सिंह चौहान का फोटो भी लगाने की बात कही गई तो जमकर विवाद हो गया था उस वक्त। बाद में मजबूरी में शिवराज सिंह चौहान का फोटो भी बेमन से लगाया गया। 13 जून को जब कमल नाथ सिवनी आए तो भाजपा के एक धड़े ने उन्हें काले गुब्बारे दिखाए। भाजपाई पार्षदों ने अपनी पहचान उजागर न करने की शर्त पर साफ कहा कि भाजपा के जिला संगठन द्वारा कार्यकर्ताओं को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमल नाथ की खिलाफत के लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए हैं। नतीजतन 13 जून को जिला भाजपा ने कमल नाथ के प्रति अपना अघोषित अनुराग दर्शा ही दिया। कमोबेश यही अनुराग और प्रेम पूर्व में सालों से जिला भाजपा द्वारा कांग्रेस के कद्दावर नेता हरवंश सिंह के साथ भी दिखाया जाता रहा है। जिला भाजपा ने कभी हरवंश सिंह का विरोध नहीं किया। हरवंश सिंह प्रदेश में मंत्री रहे या विपक्ष में रहकर विधानसभा उपाध्यक्ष रहे इस मामले में भाजपा द्वारा सदा ही मौन धारित किए रहा गया। जिला मुख्यालय के लोगों की प्यास बुझाने के लिए दो वक्त का पानी मुहैया करवाने हेतु दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में भीमगढ़ जलावर्धन योजना का आगाज हुआ। उस वक्त सिवनी के विधायक नरेश दिवाकर हुआ करते थे। नरेश दिवाकर लगातार दस साल तक विधायक रहे। आज भीमगढ़ जलावर्धन योजना से गंदा, बदबूदार, बीमार कर देने वाला पानी सिवनी के लोगों को मिल रहा है, किन्तु विधानसभा में नरेश दिवाकर और उनके उपरांत विधायक बनीं नीता पटेरिया ने कभी प्रश्न नहीं उठाया, आखिर क्यों? क्या वजह थी कि नरेश दिवाकर और नीता पटेरिया ने हरवंश सिंह की मुखालफत से खुद को दूर रखा? क्या दोनों के पास इसका कोई जवाब है? अगर है तो सिवनी की जनता को दिया जाए? मनमोहन सरकार को कोसने के लिए तो देश के सवा छः सौ जिले हैं पर जिले के अंदर क्या हो रहा है इस बारे में भी तो ध्यान दिया जाए।
कमोबेश यही आलम कांग्रेस का है। कांग्रेस के सुधि तीन तीन प्रवक्ताओं ने भी कभी भाजपा के जिला संगठन या विधायकों को कटघरे में खड़ा नहीं किया है। क्या है इसकी वजह? लोग कहते हैं कि भाजपा मानसिकता वाले कांग्रेस में आए एक प्रवक्ता राम दास ठाकुर द्वारा कभी डॉ.ढाल सिंह बिसेन के खिलाफ कलम नहीं उठाई जा सकती है? वहीं ओ.पी.तिवारी कभी विधायक श्रीमती नीता पटेरिया के खिलाफ नहीं बोल सकते हैं? क्या ये महज अफवाहें हैं? हो सकता है नहीं, क्योंकि इतिहास इसी बात की ओर संकेत कर रहा है कि इन्होंने अपने आप को इन विवादस्पद मामलों से दूर ही रखा है। जिला मुख्यालय से प्रकाशित एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र द्वारा विधायक श्रीमती नीता पटेरिया के द्वारा दी जाने वाली जनसंपर्क निधि की राशि का खुलासा किया गया। इस खुलासे में कुछ पत्रकारों के साथ ही साथ कांग्रेस के नामचीन लोगों या उनके परिजनों के नाम भी हैं, वह भी महज दो से पांच हजार रूपए की राशि के लिए! क्या दो से पांच हजार रूपए की राशि में कांग्रेस ने अपने आप को भाजपा के हाथों गिरवी रख दिया है। हमने मई माह में ही एक सूचना के जरिए साफ कहा था कि हम वो ही विज्ञप्तियां प्रकाशित करेंगे जिसमें सिवनी का उल्लेख हो। भोपाल में प्रादेशिक और दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर की विज्ञप्तियां जारी करने के लिए कांग्रेस और भाजपा के प्रवक्ता है, उन्हें उनका काम करने दिया जाए। उनकी नौकरी में सिवनी के प्रवक्ता हस्तक्षेप न करें तो उचित ही होगा।

सिवनी में सड़क की लड़ाई के लिए बना जनमंच भी लोगों से अपने स्तर पर विरोध की बात कह रहा है। यह वही जनमंच है जिसके बेनर तले 21 अगस्त 2009 को सिवनी में जनता कफर््यू लगा था। अब कहां गया वह लड़ने का माद्दा। क्या आज जनमंच की ताकत कम हो गई है जो खुद शिवराज सिंह चौहान का विरोध करने के बजाए लोगों से विरोध करने को कह रहा है? क्या इसके पीछे सियासी मकसद छिपा है? अगर नहीं है तो आगे आएं जनमंच से जुड़े संजय तिवारी, भोजराज मदने, राकेश पाल सिंह, पंकज शर्मा, वीरेंद्र सोनकेसरिया, राज कुमार खुराना, आशुतोष वर्मा, घनश्याम जाड़ेजा, विधायक कमल मर्सकोले (कुरई में हड़ताल पर बैठे थे), श्रीमती नीता पटेरिया (कचहरी चौक पर पूर्णाहुती डालने र्गइंं थीं) नरेंद्र ठाकुर और दिखाएं शिवराज को काले झंडे। अगर नहीं तो यही माना जाएगा कि ये सारे लोग शिवराज सिंह चौहान का विरोध इसलिए नहीं कर सकते हैं क्योंकि इन्हें अभी टिकिट की लालसा है और सिवनी की जनता के प्रति इनका कोई कर्तव्य नहीं बाकी रह गया है. . .।