शनिवार, 12 अक्टूबर 2013

कौन लेगा मंडियों की सुध!

कौन लेगा मंडियों की सुध!

(शरद खरे)

सिवनी जिले में जितनी भी मंडियां वैध रूप से काम कर रही हैं, वे सारी की सारी बदहाल हैं। अवैध मंडियां यानी क्रिकेट सट्टा, जुंआ, देह व्यापार की मंडियां जो अवैध रूप से संचालित हैं, पूरी तरह गुलजार कही जा सकती हैं। मंडियों के हालात इस कदर खराब है कि बारिश के दिनों में यहां घुसना दुष्कर ही साबित होता है। जिले की हर मंडी चाहे वह फुटकर सब्जी मंडी हो, थोक सब्जी मण्डी या फिर कृषि उपज मण्डी, हर ओर अव्यवस्थाओं का आलम पसरा हुआ है।
सिवनी की थोक सब्जी मण्डी जीएन रोड़ पर स्थित है। इस मण्डी में माल लेकर आने वाले भारी वाहनों की धमाचौकड़ी से यातायात बुरी तरह प्रभावित होता है। यह सब जनता देखती है, नगर पालिका देखती है, पर नहीं दिखता तो यातायात पुलिस के कर्मचारियों को। वहीं फुटकर सब्जी मण्डी भी जीएन रोड पर ही स्थित है। इस सब्जी मण्डी में अगर आप बारिश के दिनों में घुस जाएं तो तीन दिन खाना खाने से परहेज ही करेंगे। इस कदर गंदगी से बजबजा रही है यह सब्जी मण्डी।
मजे की बात तो यह है कि दोनों ही सब्जी मण्डियों में आवारा मवेशी विशेषकर सुअरों का आतंक जबर्दस्त तरीके से है। स्वाईन फ्लू के लिए जवाबदेह सुअर, सब्जी मण्डी में फलों सब्जियों में मुंह मारकर उन्हें गंदा करने से नहीं चूकते हैं। आसमान छूते सब्जी के दामों के चलते सब्जी विक्रेता इन सुअर-कतरी सब्जियों को फेंकने के बजाए इन्हें सुआ (मिट्ठू) कतरी बताकर बेच दिया करते हैं।
इस सब्जी मण्डी के बाहर जीएन रोड़ पर खड़े ठेले और रेहड़ी वालों के आतंक के चलते यहां पार्किंंग की सुविधा नहीं हो पाती है। सड़कों पर लगने वाली दुकानों से नगर पालिका परिषद् द्वारा बकायदा अस्थाई दखल शुल्क वसूला जाता है, पर इसे अतिक्रमण मानकर कार्यवाही करने से सदा ही बचा जाता है। पार्किंंग के अभाव में सब्जी मण्डी के अंदर दो पहिया वाहन चालक अपने वाहनों में ही जाकर सब्जी खरीदने पर विवश हैं। सब्जी मण्डी की सकरी गलियों में वाहनों की रेलमपेल से पैदल सब्जी खरीद करने वालों को परेशानी उठानी पड़ती है। बारिश के दिनों में इस तरह से लोगों के कपड़े जब तब कीचड़ से सन जाया करते हैं।
पिछले दिनों प्रशासन द्वारा पुराने एलआईबी तिराहे से जीएन रोड़ मार्ग पर लगने वाले अस्थाई सब्जी बाजार (जो नगर पालिका की उदासीनता से लगभग पांच सालों से लग रहा था) को हटवाया गया। इसके बाद प्रशासन शांत हो गया और एक बार फिर वहां सब्जी की छिटपुट दुकानें लगना आरंभ हो गई हैं। इसी तरह का एक अस्थाई बाजार बारापत्थर में तिकोना पार्क से स्टेट बैंक जाने वाले मार्ग पर लगने लगा था।
दरअसल, सिवनी जिले में विकास के मायने यह हो गए हैं कि अपने घर पर एक दुकान खोल ली जाए। नपुंसक नगर पालिका प्रशासन के कारण सिवनी अब शटर्स का शहर बन गया है। जिस घर में देखो एक शटर अवश्य ही दिख जाएगी। पता नहीं वार्ड के पार्षद इस बात पर आपत्ति क्यों नहीं लेते। आखिर इन्हें अपने घर में व्यवसायिक गतिविधि संचालित करने की अनुमति कैसे मिल जाती है। क्या नगर पालिका प्रशासन ने अब तक इस बात को चिन्हित किया है कि शहर के कितने घरों में व्यवसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, अगर व्यवसायिक गतिविधि संचालित हो रही है, तो पालिका को चाहिए कि दूरसंचार विभाग और बिजली विभाग को इसकी सूचना दे, और यहां संस्थापित टेलीफोन और होने वाली बिजली की खपत को, व्यवसायिक टैरिफ से वसूला जाए।
सिवनी की थोक सब्जी मण्डी के हाल तो बुरी तरह बेहाल हैं। यहां आने वाले माल के बारे में किसी को भी पता नहीं होता है। यहां रोजाना लाखों रूपयों का धंधा होता है। इसमें से कितना आयकर, कितना विक्रयकर जमा किया जाता है, इस बारे में शायद ही कोई जानता होगा। यहां बैठे बड़े बड़े सब्जी व्यवसाईयों की मोनो पल्ली सालों से चली आ रही है। कोई नया व्यापारी अगर सब्जी के धंधे में उतरने का साहस करता है, तो इनकी साम, दाम, दण्ड और भेद की नीति की भेंट चढ़ जाता है बिचारा।
फुटकर और थोक सब्जी मण्डी में खराब हो चुकी सब्जी को व्यवसाईयों द्वारा सड़कों पर इस तरह फेंक दिया जाता है, मानो वह एक बड़ा सा डस्ट बिन हो। सड़कों पर सड़ रही सब्जियों में जब आवारा मवेशी विशेषकर सुअर टूट पड़ते हैं तब आने जाने वालों को इनके काटने और दुर्घटना का भय बना रहता है। सड़क किनारे पड़ी, सड़ी गली सब्जी को अगले दिन सुबह ही पालिका कर्मचारियों द्वारा साफ किया जाता है। दिन भर इससे उठने वाली दुर्गन्ध से राहगीर परेशान हुए बिना नहीं रहते हैं। इस तरह गंदगी फैलाती, सड़ी सब्जियों के लिए जिम्मेदार व्यापारियों के खिलाफ कार्यवाही करना या चालान बनाना नगर पालिका की शान के शायद खिलाफ ही है। थोक सब्जी मण्डी जाने वाले मार्ग का द्वार इतना सकरा है कि वहां से एक बार में अगर एक भारी वाहन आता है तो लगभग आधे घंटे के लिए पूरा यातायात अवरूद्ध हो जाता है। देखा जाए तो सुबह सात बजे के पहले यहां भारी वाहनों से सब्जी उतरना चाहिए किन्तु यहां तो दिन उगने से दिन ढलते तक यह सिलसिला जारी रहता है।
कुल मिलाकर सिवनी शहर की ही सब्जी मण्डियों के हाल बुरी तरह बेहाल हैं। विपक्ष में बैठी कांग्र्रेस के नेताओं को स्थानीय समस्याओं से शायद लेना देना नहीं रह गया है, यही कारण है कि वे हर समय प्रदेश स्तर के प्रवक्ताओं के काम में दखलंदाजी कर शिवराज सिंह चौहान को कोसते नजर आते हैं। स्थानीय विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, जिला भाजपाध्यक्ष नरेश दिवाकर सहित नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी एवं अन्य पार्षदों को भी आम जनता को होने वाली समस्याओं से ज्यादा लेना देना नहीं दिखता है। चुनाव की बेला में भाजपा द्वारा किसानों को नाराज किया जाना आश्चर्यजनक ही है।

शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

तीन वर्षीय बालिका से शिक्षाकर्मी ने किया दुष्कृत्य

तीन वर्षीय बालिका से शिक्षाकर्मी ने किया दुष्कृत्य

(ब्यूरो कार्यालय)

धनौरा (साई)। सिवनी जिले के आदिवासी विकासखण्ड धनौरा की शासकीय प्राथमिक शाला पाटनरैयत में पदस्थ शिक्षाकर्मी के द्वारा गांव की एक तीन वर्षीय बालिका के साथ दुष्कृत्य किये जाने का मामला प्रकाश में आया है।
धनौरा थाना प्रभारी एन.एस.धुर्वे ने बताया कि गत 1 अक्टूबर की सुबह पाटनरैयत गांव की प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षाकर्मी प्रहलाद पिता शम्भू कुमरे (25) वर्ष, जो गांव में निवास करता है, यहां रहने वाली आदिवासी समाज की एक तीन वर्षीय बालिका को अपने घर ले आया और उसके साथ दुष्कृत्य किया। इस घटना की जानकारी लगने पर आदिवासी सामाजिक पंचायत के द्वारा मामले को निपटाने का प्रयास किया गया, परन्तु पीड़ित पक्ष पंचायत के फैसले से संतुष्ट नहीं हुआ।
बताया गया है कि 9 अक्टूबर की शाम पीड़ित बालिका के परिजनों ने धनौरा थाना पहॅुचकर आरोपी शिक्षाकर्मी के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोपी प्रहलाद कुमरे के विरूद्ध धारा 376 भादंवि तथा लैंगिग अपराध बाल संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 3/4 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर, आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। बालिका का मेडीकल परीक्षण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र धनौरा में कराया गया, जिसमें दुष्कृत्य किये जाने की पुष्टि चिकित्सकों के द्वारा की गई है।

श्री धुर्वे ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपी प्रहलाद कुमरे ने स्वीकार किया है कि उसके द्वारा बालिका के साथ दुष्कृत्य किया गया है। प्रकरण में विवेचना कर आगे की कार्यवाही की जा रही है।

नेताओं ने भाजपा को तो जनता ने कांग्रेस को दिल से कोसा

नेताओं ने भाजपा को तो जनता ने कांग्रेस को दिल से कोसा

उत्तर पूर्व सिवनी विधानसभा में चुनावी माहौल, शेष सिवनी में पसरा रहा सन्नाटा

(पीयूष भार्गव/अखिलेश दुबे/अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। केंद्रीय मंत्रियों सहित एआईसीसी ओर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के लंबे चौड़े काफिले ने आज भले ही कांग्रेस के लोगों का आंग भर दिया हो, किन्तु स्कूली बच्चों, अस्पताल के मरीज और आम जनता इस आपाधापी के चलते पूरी तरह हलाकान ही रही। मिशन स्कूल के खचाखच भरे मैदान में सिवनी जिले के अलावा आसपास के जिलों से भीड़ को ढोकर लाया गया था। भीड़ में लोग खाने पीने की तंगी को लेकर अनाप शनाप बकते भी दिखे।
आज केंद्रीय मंत्री कमल नाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, सत्यव्रत चतुर्वेदी आदि एक साथ सिवनी पहुंचे। सुबह से ही सिवनी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को देखने सुनने कांग्रेस के लोगों में जबर्दस्त उत्साह दिख रहा था। वहीं कभी कभार दिखने वाले हेलीकॉप्टर को देखने भी जमकर भीड़ उमड़ी।

सिवनी को बना दूंगा छिंदवाड़ा: नाथ
केंद्रीय मंत्री और महाकौशल के क्षत्रप के चेहरे से, भीड़ देखकर संतोष साफ तौर पर झलक रहा था। उन्होंने चिरपरिचित अदा में कहा कि सिवनी से उनका पुराना संबंध है। भाजपा पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर मस्जिद में रोजगार नहीं मिलने वाला, रोजगार तो उद्योग धंधों से ही मिलेगा। उन्होंनें कहा कि सिवनी का युवा गुमराह जल्दी हो जाता है। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा और सिवनी में अंतर साफ दिखता है। कमल नाथ ने कहा कि चलिए इस बार सिवनी को भी छिंदवाड़ा बना देते हैं।

यह रही भाषण के दौरान चर्चा
कमल नाथ के भाषण के दौरान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में ही तत्काल प्रतिक्रिया आरंभ हो गई। लोगों का कहना था कि युवाओं पर उन्होंने बरगलाने का आरोप तो लगा दिया किन्तु फोरलेन, ब्रॉडगेज, पेंच परियोजना तो केंद्र की कांग्रेस और कमल नाथ के हाथ की ही बात है, उस मामले में आखिर वे अब तक मौन क्यों हैं? अगर सिवनी को छिंदवाड़ा बनाने की बात उन्होंने कही है तो बारंबार सिवनी को गोद ले चुके कमल नाथ अब तक सिवनी के साथ सौतेला व्यवहार कैसे कर रहे हैं।

युवातुर्क का स्वागत हुआ तालियों की गड़गड़हाट से
आकर्षक व्यक्तित्व के धनी ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे ही बोलने के लिए खड़े हुए उनका जबर्दस्त करतल ध्वनि से स्वागत किया गया। भाजपा पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि एमपी में एक महिला नेत्री आई थी, उनके खिलाफ षणयंत्र कर भाजाईयों ने ही उन्हें उत्तर प्रदेश वनवास पर भेज दिया। उन्होंने कहा कि चाल चरित्र और चेहरे का दावा करने वाली पार्टी के एक मंत्री द्वारा सीएम की अर्द्धांग्नी को अपशब्द कहे जाते हैं, उसे हटा दिया जाता है, फिर आदिवासियों को एकजुट होते देख पुनः उसे लाल बत्ती दे दी जाती है।

स्थानीय मुद्दों को छूकर दिल जीता सिंधिया ने
कांग्रेस के नेताओं ने सिवनी के स्थानीय स्तर के मुद्दों पर अपने ओंठ सिले रखे। सिर्फ और सिर्फ ज्योतिरादित्य सिंधिया ही एक ऐसे नेता थे जिन्होंने सिवनी जिले के मामले में कुछ बोलकर लोगों का दिल जीत लिया। युवा तुर्क ने मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के घंसौर में डलने वाले पावर प्लांट के बारे में कहा कि पावर प्लांट द्वारा आदिवासियों की जमीनें हड़प ली गईं हैं पर एक भी आदिवासी को रोजगार नहीं दिया गया है।

भाषण के दौरान रही इसकी चर्चा
ज्योतिरादित्य सिंधिया के आकर्षक और लुभावने व्यक्तित्व की चर्चा चहुंओर मची रही। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में सबसे ज्यादा चाह ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामीप्य पाने और उनसे आई कांटेक्ट की देखी गई। वहीं सिवनी के झाबुआ पावर के बारे में चर्चा कर लोगों का मन तो उन्होंने मोहा किन्तु लोगों का कहना था कि वे केंद्र में मंत्री हैं, पर केंद्र सरकार ही झाबुआ पावर पर सबसे ज्यादा मेहरबान नजर आ रही है।

हिन्द गजट ने उठाई थी आवाज!
ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी सूत्रों का कहना है कि समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया में झाबुआ पावर के बारे में लगातार प्रसारित हो रही खबरों पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा सिवनी की सभा में झाबुआ पावर लिमिटेड के खिलाफ आवाज उठाई गई। ज्योतिरादित्य सिंधिया के द्वारा इस मामले में संज्ञान लेने से, अब जिला कांग्रेस कमेटी पशोपेश में है, क्योंकि लगातार शिवराज सिंह चौहान को कोसकर स्थानीय समस्याओं की उपेक्षा करने वाली कांग्रेस को मजबूरी में झाबुआ पावर लिमिटेड के खिलाफ मुहिम छेड़ना होगा। माना जा रहा है कि अगर जिला कांग्रेस इस मामले में सदा की ही तरह मौन धारित करे रखती है, तो आने वाले समय में यही संदेश जाएगा कि भले ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रदेश में कांग्रेस का परचम लहराने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया को आगे किया जा रहा हो, किन्तु जिला कांग्रेस कमेटी को न तो एआईसीसी और न ही ज्योतिरादित्य सिंधिया ही की कोई परवाह है।

बोले दिग्गी, शतायु हों विमला वर्मा
कांग्रेस के महासचिव राजा दिग्विजय सिंह ने भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया और कहा कि शिवराज सिंह चौहान को आज भी सपने में दिग्विजय सिंह आते हैं, और उनकी तंद्रा टूट जाती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर पद की भर्ती के लिए अलग अलग रेट तय किए गए हैं। राजा दिग्विजय सिंह अकेले ऐसे वक्ता रहे जिन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा के स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए उनके शतायु होने की कामना की।

ऐसे होते कंत तो क्यों पीसते अंत
दिग्गी राजा के द्वारा भ्रष्टाचार पर बोलने पर जनता का कहना था कि अगर राजा दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री रहते हुए भ्रष्टाचार, अनाचार पर अंकुश लगा दिया होता तो आज प्रदेश में भाजपा नहीं कांग्रेस ही सत्ता में रहती।

पचास हजार मां बहनों के साथ हुआ बलात्कार
प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कांति लाल भूरिया ने कहा कि प्रदेश में सुशासन नहीं कुशासन है। प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के राज में पचास हजार महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ है, और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज सुशासन का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा ने आदिवासियों तक को नहीं बख्शा है और जंगलों से बेदखल कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान ने पचास हजार तक का कर्ज माफ करने की बात कही थी, पर क्या आज लोगों का कर्ज माफ हो पाया? उन्होंने कहा कि एक लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषण से मर चुके हैं।

संसद और विधानसभा में क्यों मौन है कांग्रेस
लोगों का कहना था कि अगर भाजपा द्वारा यह अनाचार, भ्रष्टाचार किया जा रहा है तो फिर क्या कारण था कि अब तक लोकसभा और विधानसभा में कांग्रेस के सांसद विधायकों ने भाजपा के भ्रष्टाचार को आखिर उजागर क्यों नहीं किया। लोगों का मानना था कि क्या भाजपा का भ्रष्टाचार, अनाचार सिर्फ जनता को भरमाने के लिए है। आखिर क्या वजह है कि सदन में कांग्रेस इन मामलों में मौन रह जाती है।

घोड़ी के पीछे आकर प्रसन्न मालू घायल
हेलीपेड के रास्ते में अपने आवास के पास नेताओं की तैयारियों का जायजा ले रहे पिछले विधानसभा में सिवनी विधानसभा से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे प्रसन्न चंद मालू बुरी तरह घायल हो गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग एक दर्जन घोड़ों के जरिए नेताओं के स्वागत हेतु जा रहे काफिले में से एक घोड़े के पीछे प्रसन्न मालू क्या आए उसने दुल्लती मारकर उन्हें घायल कर दिया। उन्हें कुछ देर घर में विश्राम करवाकर चिकित्सकीय में परीक्षण करवाया गया।

उत्तर सिवनी विधानसभा में हो रहा चुनाव
आज शहर भर में इस बात की ही चर्चा रही कि क्या चुनाव महज सिवनी शहर के उत्तर पूर्व हिस्से में ही हो रहा है। दरअसल, गांधी भवन से लेकर ज्यारत नाके और पॉलीटेक्निक कालेज तक के क्षेत्र में ही बॅनर पोस्टर अटे पड़े थे। गांधी भवन के बाद शहर में एक भी बॅनर पोस्टर दिखाई नहीं दिए। लोग यह कहते ही पाए गए कि शायद विधानसभा क्षेत्र सिवनी के मुख्यालय में बारापत्थर के गांधी भवन से पॉलीटेक्टिनक कालेज और ज्यारत नाका क्षेत्र, जिसे लोग उत्तर पूर्व सिवनी विधानसभा क्षेत्र का नाम दे रहे थे, में ही चुनाव हो रहे हों।

आभार तक नहीं जताया कांग्रेस ने
जिला कांग्रेस के लिए यह बहुत ही बड़ा आयोजन माना जा सकता है। इस आयोजन में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के नाम पर बड़ी तादाद में लोग नेताओं को सुनने पहुंचे निश्चित तौर पर यह कांग्रेस की ऐतिहासिक रैली रही। बावजूद इसके न तो नगर कांग्रेस और न ही जिला कांग्रेस द्वारा सभा में आए अथवा लाए गए कांग्रेस जनों का आभार तक व्यक्त नहीं किया गया है।

बुधवार, 9 अक्टूबर 2013

रिलायंस से बड़ा याराना लगता है वन विभाग का!

रिलायंस से बड़ा याराना लगता है वन विभाग का!

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले में फोर जी केबल डाल रही मोबाईल और वायर्ड लाईन के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की सेवा प्रदाता कंपनी रिलायंसपर वन विभाग ज्यादा ही मेहरबान नजर आ रहा है। जंगल की छाती छलनी कर रही रिलायंस कंपनी के खिलाफ शिकायत के लगभग तीन सप्ताह बाद वन विभाग का अमला हरकत में आया और उसने जांच के लिए अधिकारी रवाना किए।
ज्ञातव्य है कि छपारा और बंजारी के बीच रिलायंस कंपनी द्वारा फोर जी भूमिगत केबल डालने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। यह वही भूभाग है जिस पर सड़क निर्माण के लिए केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी फोरलेन के लिए अभी तक प्राप्त नहीं हो सकी है।
उत्तर सिवनी सामान्य वन मण्डलाधिकारी वाय.पी.सिंह के करीबी सूत्रों का कहना है कि इस भूभाग में सड़क के किनारे मशीनों से हो रही खुदाई की शिकायत, पत्रकार राजेश स्थापक द्वारा 20 सितम्बर को लिखित तौर पर की गई थी। इस शिकायत के बाद भी वन विभाग द्वारा इस संबंध में कोई कार्यवाही न करते हुए रिलायंस कंपनी को अपना काम संपादित करने के लिए अघोषित तौर पर खुली छूट प्रदान कर दी गई थी।
उल्लेखनीय होगा कि 23 सितम्बर को समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया और हिन्द गजट द्वारा रक्षित वन क्षेत्र में धडल्ले से हो रही खुदाईशीर्षक से खबर प्रसारित और प्रकाशित की गई थी। सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि जब बार-बार सोशल मीडिया में यह मामला उछला तो मजबूरी में वन विभाग को इस पर एक्शन लेना पड़ा।
डीएफओ वाई.पी.सिंह के करीबी सूत्रों का कहना है कि अत्याधिक दबाव के बाद उन्होंने आज एसडीओ वन को इसकी जांच के लिए मौके पर भेजा है। सूत्रों की मानें तो डीएफओ वाई.पी.सिंह द्वारा जांच अधिकारी को यह भी निर्देशित किया गया है कि सड़क के किनारे वन विभाग के आधिपत्य वाली जमीन पर पचास इंच के बाद खुदाई की अनुमति दी गई है, किन्तु दो स्थानों पर कंपनी ने पचास के बजाए पचहत्तर इंच खोद दिया गया है, उसे ओवरलुककर दिया जाए। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक यह पता नहीं चल सका है कि जांच अधिकारी ने मौके पर क्या देखा और क्या पाया?
वहीं विभाग में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि अरबों खरबों के स्वामित्व वाली रिलायंस कंपनी का वन विभाग से ऐसा कैसा याराना है कि वन विभाग द्वारा शिकायत के पूरे तीन सप्ताह तक इस मामले में संज्ञान नहीं लिया गया! हो सकता है कि इस मामले में कहीं सैटिंग का भी समावेश किया गया हो।

सोई कांग्रेस नहीं भुना पा रही भीड़ जुटाने का मामला!

सोई कांग्रेस नहीं भुना पा रही भीड़ जुटाने का मामला!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की जिला इकाई की तंद्रा चुनाव की घोषणा के बाद भी टूट नहीं सकी है। जिला कांग्रेस के हाथ चुनावी बेला में आए एक शानदार मुद्दे को उसके द्वारा भुनाने का प्रयास भी न किया जाना आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है। जिला कांग्रेस ने अब तक इस मामले में न तो कोई ज्ञापन ही जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपा है और न ही धरना प्रदर्शन जैसी कोई कवायद ही की है।
ज्ञातव्य है कि 29 सितम्बर को सिवनी आई, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा, विवादों में आ गई है। मुख्यमंत्री की इस यात्रा के लिए प्रशासन के आदेश पर लोगों की भीड़ जुटाने का मामला सामने आया है। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के पास आए दस्तावेजों के अनुसार सिवनी ज़िले में 29 सितंबर को हुईं उनकी रैलियों के लिए भीड़ जुटाने का काम प्रशासन ने किया था।
गौरतलब है कि सिवनी ज़िले की धनौरा जनपद के सीईओ की ओर से सभी पंचायतों के सरंपच और सचिवों को लिखित में आदेश जारी किया गया था, इस आदेश में उन्हें हर पंचायत से कम से कम 150 लोगों की भीड़ लाने के लिए कहा गया। इतना ही नहीं बल्कि लोगों को लाने ले जाने के लिए गाड़ियों का इंतजाम करने तक के लिए कहा गया। इस आदेश पत्र में जिला पंचायत सीईओ के निर्देश पर इसे जारी करने का जिक्र भी किया गया है।
जनपद सीईओ की ओर से जारी इस आदेश की एक-एक प्रति जिला कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और एसडीएम को भी भेजी गई थी। इस मामले में जब आदेश जारी करने वाले जनपद के सीईओ से बात करने की कोशिश को तो उन्होंने साफ़ इनकार कर दिया।
इस बारे में एक निजी चेनल से बातचीत में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने कहा कि इस संबंध में उनके द्वारा कोई निर्देश नहीं दिए गए हैं। प्रकरण को आयुक्त जबलपुर के पास भेज दिया गया है। साथ ही साथ उन्होंने बताया कि कलेक्टर सिवनी ने सीईओ धनौरा से चुनावी कार्य लेकर उसे तहसीलदार को सौंप दिया है। वहीं जिला कलेक्टर भरत यादव ने सीईओ धनौरा की मानसिक हालत पर ही प्रश्नवाचक चिन्ह लगा दिया है।

भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश दिवाकर ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की इच्छा होती है कि मुख्यमंत्री का आगमन हो रहा है वह उनका कार्यक्रम अच्छे से अच्छा करें, ज्यादा से ज्यादा लोग मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को सुनने पहुंचे। वहीं दूसरी ओर कांग्रेसी नेता राजकुमार खुराना ने कहा कि उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग को इस संबंध में शिकायत की है, और वे ये मांग करते हैं कि चुनाव आयोग इस मामले में स्वयं संज्ञान लेकर इस अधिकारी के खिलाफ कड़ा क़दम उठाए।

पैसों की मांग को लेकर दादू निखिलेंद्र ने, व्यक्तिगत विद्वेष के कारण लगाए अनर्गल आरोप: राजेश त्रिवेदी

पैसों की मांग को लेकर दादू निखिलेंद्र ने, व्यक्तिगत विद्वेष के कारण लगाए अनर्गल आरोप: राजेश त्रिवेदी

दादू राघवेंद्र नाथ सिंह की जमीन पर सड़क बनाने पालिका से मांगे पैसे, दादू धर्मशाला पर बकाया है करोड़ों

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। अधिवक्ता दादू निखिलेंद्र नाथ सिंह के द्वारा गत दिवस दिए गए राजेश त्रिवेदी के खिलाफ लोकायुक्त में प्रकरण दर्जशीर्षक से प्रकाशित समाचार में, सिवनी नगर के प्रथम नागरिक राजेश त्रिवेदी द्वारा अपना पक्ष रखा गया है। नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी द्वारा जारी विज्ञप्ति अक्षरशः इस प्रकार है।
आज कुछ समाचार पत्र्ाों में प्रकाशित समाचार लोकाय्ाुक्त में प्रकरण दर्ज के विषय्ा में आम जनता को सच्चाई से अवगत कराने हेतु य्ाह प्रेस विज्ञप्ति पहली बार मेरे द्वारा दी जा रही है। य्ाह कि दादू निखिलेंद्र नाथ सिंह जो कि व्य्ाक्तिगत मुझ्ा पर आए  दिन आरोप-प्रत्य्ाारोप लगाते चले आ रहे हैं। इनके संपूर्ण वाक्य्ाा से जनता को रूबरू होना अतिआवश्य्ाक हो गय्ाा है। य्ाह कि एफसीआई रोड जिसमें हजारों लोग रहते हैं उनकी भावनाओं को लेकर य्ाह विवाद शुरू हुआ, य्ाह रोड इनके कहे अनुसार इनकी पैतृक संपत्ति है और वहां के लोगों के द्वारा य्ाह कहा जाता है कि य्ाह दान में आमजनता के सुखाधिकार हेतु दी गई है, जब हम य्ाह रोड के मामले को सुलझ्ााने पहुंचे तो इनके द्वारा हमसे लिखित रूप से 4,79, 106.10 रू. की मांग की गई जिसकी छाय्ााप्रति भी इस पत्र्ा के साथ संलगन है।
उक्ताशय्ा की प्रतिक्रिय्ाा देते हुए राजेश त्र्ािवेदी ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताय्ाा है कि दादू निखिलेंद्रनाथ सिंह के ऊपर भगतसिंह वार्ड स्थित दादू धर्मशाला में भी लाखों रू. का टैक्स बकाय्ाा है, जिसे भी समाय्ाोजित करने हेतु इनके द्वारा मेरे ऊपर लगातार दबाव बनाय्ाा गय्ाा। जब मेरे द्वारा इन महोदय्ा की इस इच्छापूर्ति के लिए मना किय्ाा गय्ाा तो इन्होंने कभी मेरा पुतला जलाय्ाा, तो कभी फेसबुक में मुझ्ो गधा, नालाय्ाक, सुअर, आवारा जानवर, अनपढ़, भ्रष्टाचारी जैसे शब्द लिखे तो कभी इन्होंने व्य्ाक्तिगत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भला बुरा कहा। इसके बाद इनके द्वारा लगभग 60 सूचना के अधिकार के तहत आवेदन नगर पालिका में लगाय्ो गय्ो एवं इसके बाद से हमने जो भी कायर््ा नगर विकास के लिए किए, सभी मंे हमें तरह-तरह के आरोपों से सुसज्जित किय्ाा।
दलसागर तालाब जो आज हमने किनारे पर इतना सौंदयर््ाीकरण किय्ाा वहां पर जो सुलभ बनवा रहे थे, उसमें भी इन महोदय्ा के द्वारा ही कानूनन स्टे की प्रक्रिय्ाा से इसे रोका गय्ाा, जब इससे भी दिल नहीं भरा तब इन्होंने मुझ्ा पर एवं मेरे परिवार पर तरह- तरह के झ्ाूठे आरोप लगाकर 5.7.2013 को लोकाय्ाुक्त में शिकाय्ात की गई जिसके संपूर्ण जवाब भी मेरे द्वारा दिय्ो जा चुके हैं। अब मैं आम जनता और आप सभी से पूछना चाहता हूं कि क्य्ाा मेरे द्वारा नगर विकास के संपूर्ण कायर््ा सिर्फ इन महोदय्ा को रोकने से बंद कर देना चाहिए य्ाा इनको य्ाह राशि देकर इनका मुंह बंद करके आगे काम करना चाहिए। य्ादि आम जनता इस बात का इनका समर्थन करती है। एफसीआई रोड के रहने वाले लोग इस बात का समर्थन करें तो बात आम जनता के हाथों में छोड़ता हूं।

य्ाह कि मैं भाजपा की प्रेरणा से ओत-प्रोत होकर काम करने वाला कायर््ाकर्ता हूं, हमारी पार्टी द्वारा लगातार विकास कायर््ा किय्ो जा रहे हैं, य्ो अपनी कांग्रेस पार्टी को गर्त में देखकर मुझ्ा पर एवं मेरी पार्टी पर जो आरोप लगा रहे हैं, वे पूर्णतः अनर्गल हैं। उपरोक्त शिकाय्ात आज से लगभग 6 माह पूर्व की गई थी पर आज चुनाव को नजदीक देखते हुए य्ो महोदय्ा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आपको भटका रहे हैं एवं मुझ्ो एवं मेरी पार्टी की छवि को धूमिल करने का प्रय्ाास कर रहे हैं, जिसका जवाब जनता इन्हें तीसरी बार हार के स्वरूप में देगी, ऐसा ही मुझ्ो पूर्ण विश्वास है।

नरेंद्र के स्वागत योग्य सुझाव

नरेंद्र के स्वागत योग्य सुझाव

(शरद खरे)

युवा एवं उत्साही भाजपा कार्यकर्ता नरेंद्र ठाकुर की सकारात्मक सोच का एक और नायाब उदाहरण सामने आया है। नरेंद्र ठाकुर ने इस बार चुनावों के दौरान बिल पर शराब बेचने की बात कही है। नरेंद्र का यह सुझाव स्वागत योग्य है। चुनावों के दौरान शराब देकर प्रलोभन देना नई बात नहीं है। आजादी के उपरांत कुछ दशकों के बाद ही नेताओं द्वारा मतदाताओं को रिझाने के लिए शराब का सहारा लिया जाने लगा। एक रात के क्षणिक नशे के लिए लोगों द्वारा अपने जमीर को भी गिरवी रखा जाने लगा। शराब इस तरह की चीज है कि लोग इसके मोहपाश से अपने आपको दूर नहीं रख पाते हैं।
नरेंद्र ठाकुर का कहना सही है कि कम से कम चुनाव के दौरान ही सही प्रशासन को शराब के विक्रय पर नजर रखनी चाहिए। वैसे तो आबकारी महकमा इसके लिए पर्याप्त माना जा सकता है, किन्तु आबकारी विभाग में भी बड़े बड़े छेद हैं। आबकारी विभाग अगर अपने कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाता तो शायद ही शराब ठेकेदार अवैध शराब बेचकर धन्ना सेठ बने होते। अवैध शराब जो कई बार जहरीली भी होती है, से न जाने कितने लोग आज तक काल कलवित हो चुके हैं।
सिवनी में जनसंपर्क विभाग द्वारा जिला कलेक्टर भरत यादव के हवाले से यह भी कहा गया, कि कलेक्टर द्वारा चुनाव को देखते हुए, अवैध शराब के विक्रय को जिला कलेेक्टर द्वारा पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। लोग आश्चर्यचकित हैं कि क्या चुनाव पूर्व अवैध शराब बेचने पर पाबंदी नहीं थी। सरकारी विज्ञप्ति जारी करने के लिए जनसंपर्क विभाग को अधिकृत किया गया है। जनसंपर्क विभाग में भारी तनख्वाह लेने वालों की लंबी चौड़ी फौज कार्यरत है। इन कर्मचारियों के जिम्मे बस एक ही काम है, कि सरकारी योजनाओं और सूचनाओं को मीडिया के जरिए जनता तक पहुंचाया जाए। जिला जनसंपर्क अधिकारी के पद के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक या स्नात्कोत्तर की उपाधि आवश्यक होती है। पत्रकारिता महाविद्यालय में पत्रकारिता की बारीकियां समझाई और सिखाई जाती हैं। बावजूद इसके पता नहीं इस तरह की भूल, भला कैसे हो जाती है सरकारी नुमाईंदों से।
सिवनी में अवैध शराब का वितरण एक अनुमान के अनुसार प्रदेश में सबसे ज्यादा होता है। सिवनी में कुछ विशेष शराब ठेकेदारों द्वारा निर्धारित दुकानों के अलावा गांव गांव में चौपहिया वाहन खड़े करवाकर शराब बेची जा रही है, जो पूरी तरह अवैध ही है। आबकारी विभाग द्वारा लगभग डेढ़ दशक के पहले तक लगातार अवैध शराब पकड़ी जाती रही है। सालों से इक्का दुक्का मामलों में ही आबकारी विभाग द्वारा अवैध शराब पकड़ने के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। एक समय था जब लहान और शराब जप्त करने की खबरों से समाचार पत्र पटे रहते थे, आज महीनों इस तरह की खबरें, अखबारों की सुर्खियां नहीं बन पाती हैं।
नरेंद्र ठाकुर का यह सुझाव स्वागत योग्य है कि चुनाव तक तो कम से कम शराब को बिल पर ही बेचा जाए। इससे अनेक तरह के प्रतिबंध लग जाएंगे। अव्वल तो यह कि आज युवा और नाबालिग पीढ़ी जो शराब के प्रति आकर्षित हो रही है, वह बिल के डर से कम से कम दुकान में जाने से कतराएगी। वहीं दूसरी ओर बल्क में एक साथ शराब खरीदने वालों को भी डर ही रहेगा कि अगर शराब कहीं पकड़ी गई तो क्या जवाब देंगे। इतना ही नहीं पकड़ी गई शराब किस दुकान या ठेकेदार के पास से खरीदी गई है, यह बात भी पता चल जाएगी जिससे उसके खिलाफ भी कार्यवाही हो सकेगी।
वर्तमान में तो अवैध शराब पकड़ ली जाती है। उसके बाद न तो आबकारी न पुलिस और न ही प्रशासन द्वारा यह पता करने का प्रयास शायद ही किया जाता हो कि वह शराब आखिर आई तो आई किस ठेकेदार के पास से। इसका कारण यह है कि शराब गेंहू चावल नहीं या परचून नहीं है, जो हर जगह मिल पाए। शराब अगर सिवनी जिले में प्रवेश कराई गई है तो वह निश्चित तौर पर किसी न किसी शराब ठेकेदार के वैध या अवैध परमिट पर ही लाई गई होगी। अवैध शराब ले जाने वाले से ज्यादा दोष उस शराब ठेकेदार का है, जो इसे बेच रहा है।
अगर आप जाकर एक या दो पेटी यानी 12 या 24 बोतल शराब एक साथ शराब दुकान से उठाएंगे तो शराब के ठेकेदार सहित वहां मौजूद लोग आपको आश्चर्य के साथ देखेंगे। अगर आप निर्धारित मात्रा से ज्यादा शराब ले जा रहे हों तो आपको उसके लिए अलग से परमिट लेना ही होगा। बिना परिमिट के निर्धारित मात्रा में शराब ले जाना, अवैध शराब परिवहन की श्रेणी में ही आता है। अवैध शराब ले जाने वाले से यह पूछना जरूरी है कि आखिर उसके पास शराब आई कहां से!
वैसे चुनाव तक पेट्रोल और डीजल को भी बिल पर ही बेचा जाना चाहिए। जिले भर के शराब ठेकेदारों सहित पेट्रोल पंप संचालकों को भी यह निर्देश दिए जाने चाहिए कि वे भी बिना बिल काटे एक बूंद शराब या डीजल, पेट्रोल न बेचें। इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारी को स्वतः ही संज्ञान लेना होगा। चुनाव के चलते जिले भर के ढाबों और होटलों की भी औचक और सघन चेकिंग की जाकर अवैध रूप से संग्रहित शराब को पकड़ा जाना जरूरी है। शराब को पकड़ने के बाद उन संस्थानों के नामों के साथ जनसंपर्क विभाग के द्वारा समाचार जारी किए जाएं, ताकि बदनामी के डर से ये होटल ढाबा संचालक अवैध रूप से संग्रहित शराब रखने के लिए हतोत्साहित होंगे।

सब कुछ निर्भर करता है प्रशासन की मंशा पर। नरेंद्र उर्फ गुड्डू ठाकुर एक आम नागरिक हैं, और जिम्मेदार नागरिक के बतौर उन्होंने अपना सुझाव समाचार पत्र के माध्यम से सार्वजनिक किया है, जिसकी प्रशंसा की जानी चाहिए। जिला प्रशासन से कड़े कदमों की अपेक्षा की जा सकती है।

मंगलवार, 8 अक्टूबर 2013

राजेश त्रिवेदी के खिलाफ लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज: दादू निखिलेंद्र नाथ सिंह

राजेश त्रिवेदी के खिलाफ लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज: दादू निखिलेंद्र नाथ सिंह

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के खिलाफ लोकायुक्त में प्रकरण पंजीबद्ध कर दिया गया है। उक्ताशय की जानकारी अधिवक्ता दादू निखिलेंद्र नाथ सिंह द्वारा दी गई है। लोकायुक्त की इस कार्यवाही से नगर पालिका परिषद् में कांग्रेस के चुने हुए पार्षदों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
दादू निखिलेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि लोकायुक्त कार्यालय में पदस्थ अवर सचिव बसंत कुंभारे के हस्ताक्षरों से जारी पत्र क्रमांक 2839 / जाप्र 136 /13 के द्वारा उन्हें सूचित किया गया है कि उनके द्वारा अध्यक्ष नगर पालिका परिषद् राजेश त्रिवेदी एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी सिवनी (तत्कालीन एवं वर्तमान) एवं कर्मचारी अधिकारीगण नगर पालिका परिषद् सिवनी के खिलाफ की गई शिकायत पर लोकायुक्त कार्यालय ने संज्ञान लेते हुए प्रकरण क्रमांक 136/13 पंजीबद्ध कर जांच करवाई जा रही है।
उन्होंने बताया कि नगर पालिका परिषद् में हुए भ्रष्टाचार एवं अनियमितता की 25 बिन्दुओं पर शिकायत, उन्होंने लोकायुक्त से की थी। इस शिकायत में उनके द्वारा फायर वाहन के दुरूपयोग, क्रोसोलिक एवं फीनोलिक पाउडर की खरीदी में हुए भ्रष्टाचार, अवैध कॉलोनियों के बारे में, वाहनों की बैटरी के संबंध के साथ ही साथ दलसागर तालाब के सौंदर्यीकरण में घटिया पेवर ब्लॉक लगाने की शिकायत की थी।
अपनी विज्ञप्ति में दादू निखिलेंद्र नाथ सिंह ने आगे कहा है कि उनके शिकायत पत्र में हाथ ठिलिया की खरीदी में भ्रष्टाचार, नगर पालिका द्वारा समाचार पत्रों को जारी विज्ञापनों में जमकर घोटाले की बात का भी उल्लेख किया गया है। इस शिकायत में डीएवीपी या सीपीआर से अनुमोदित दरों से अधिक दरों पर विज्ञापन प्रदाय किए गए हैं। इतना ही नहीं नगर पालिका परिषद् द्वारा उन समाचार पत्रों को भी विज्ञापन दिए गए हैं, जो भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक कार्यालय में पंजीकृत ही नहीं हैं। पालिका द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक की राशि के विज्ञापन राजेश त्रिवेदी के शपथ ग्रहण समारोह, नरेश दिवाकर के स्वागत समारोह एवं विधान सभा अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी के समारोह हेतु जारी किए गए हैं।
दादू निखिलेंद्र नाथ सिंह ने आगे कहा कि उनके द्वारा नगर पालिका परिषद् की आलमारी आदि खरीदी की शिकायत भी की गई है। इसके अलावा बीआरजीएफ राशि के दुरूपयोग की शिकायत का भी इसमें समावेश किया गया है। इस शिकायत में कांच के सामान और कारपेट खरीदी के बारे में भी शिकायत की गई है।
अपने 25 बिन्दुओं के शिकायत पत्र में उन्होंने टॉयलेट निर्माण, कपड़े और पर्दे खरीद, एनएच सात पर नगर के अंदर नेशनल लॉन के सामने के नाले के निर्माण, पार्षद राजा पराते से संबंधित अभिलेख और नस्ती को कार्यालय से गायब किए जाने, पाईप खरीदी के संबंध में, बोरिंग के बारे में, कीटनाशक मच्छरमार पाउडर की खरीदी के बारे में, दलसागर तालाब के विसर्जन घाट के संबंध में, हाउसिंग बोर्ड के सैप्टिक टैंक के बारे में, टैगोर वार्ड में एमपीईबी ऑफिस (पुराना पॉवर हाउस) के सामने से एसपी बंग्ले बबरिया रोड तक के सीमेंट कांक्रीट सड़क निर्माण के बारे में शिकायतें की गई हैं।
दादू निखिलेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि उनके द्वारा लोकायुक्त को की गई शिकायत में नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के द्वारा आय से अधिक संपत्ति को विधि के विरूद्ध तरीके से अर्जित करने की शिकायत भी की गई है।

संदेह के दायरे में कांग्रेस के पार्षद
दादू निखिलेंद्र नाथ सिंह द्वारा की गई इस कवायद के बाद जब लोकायुक्त द्वारा नगर पालिका परिषद् के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी सहित तत्कालीन एवं वर्तमान सीएमओ के खिलाफ मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है, तब इन परिस्थितियों में नगर पालिका परिषद् में बैठे कांग्रेस के पार्षदों पर शक की सुई घूमना लाजिमी है। नगर पालिका परिषद की न जाने कितनी बैठकें अब तक संपन्न हो चुकी हैं, पर कांग्रेस के पार्षदों द्वारा सत्तारूढ़ भाजपा या नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ मोर्चा न खोला जाना भी अपने आप में अनेक सवालों को जन्म दे रहा है। वहीं, यह मामला नगर का है, अतः इस मामले में नगर कांग्रेस कमेटी का मौन भी आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है। जिले में हर जगह कांग्रेस भाजपा की जुगलबंदी दिखाई दे रही है, उसी तर्ज पर नगर पालिका परिषद् में भी कांग्रेस और भाजपा की अनोखी जुगलबंदी देखकर सिवनी की जनता दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर है।

जांच प्रभावित कर सकती है राजेश का सियासी कैरियर

सिवनी में हरवंश सिंह ठाकुर के उपरांत राजेश त्रिवेदी संभवतः दूसरे ही राजनेता होंगे जिनके खिलाफ लोकायुक्त ने संज्ञान लिया है। इसके पहले हरवंश सिंह ठाकुर के खिलाफ भाजपा नेता ओम दुबे द्वारा शिकायतें की गईं थी। बताया जाता है कि वे शिकायतें हरवंश सिंह की सियासी पहुंच के कारण परवान नहीं चढ़ पाईं थीं। अब राजेश त्रिवेदी के खिलाफ लोकायुक्त में मामला पंजीबद्ध होने से उनके सियासी कैरियर पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। चुनाव की रणभेरी के साथ ही यह मामला उजागर होने से उनकी उम्मीदवारी पर भी इसका प्रभाव पड़े बिना नहीं रहने वाला है।

आरोप प्रत्यारोप के दौर आरंभ

आरोप प्रत्यारोप के दौर आरंभ

(शरद खरे)

विधानसभा चुनावों की रणभेरी बज चुकी है। अभी चुनाव की तिथियों की घोषणा हुई है, पर गजट नोटिफिकेशन 01 नवंबर को होगा। आचार संहिता तो लागू हो गई है पर यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि आदर्श आचार संहिता लागू हुई है अथवा नहीं। इस बार नकारात्मक वोटिंग का बटन भी होगा। पर अगर किसी स्थान पर सबसे अधिक मत पाने वाले प्रत्याशी से अधिक लोगों द्वारा नोटाबटन दबा दिया गया तो उस परिस्थिति में क्या चुनाव निरस्त होगा, या सबसे अधिक मत पाने वाले (भले ही वह नोटा से कम वोट पाए) को विजयी घोषित कर दिया जाएगा। कमोबेश यही स्थिति पेड न्यूज की है। पेड न्यूज के बारे में भी सिवनी में निर्वाचन अयोग, जनसंपर्क विभाग आदि ने कोई स्पष्ट गाईड लाईन जारी नहीं की है। इन परिस्थितियों में पेड न्यूज की इबारत समझ पाना सिवनी के मीडिया के लिए दुष्कर ही साबित होगा। आवश्यकता इस बात की है कि जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा पत्रकार बिरादरी को पेड न्यूज के बारे में सविस्तार जानकारी दी जाए।
वैसे चुनाव की आहट के साथ ही साथ सियासी दलों में भी आरोप प्रत्यारोप के दौर आरंभ हो गए हैं। सिवनी में राजनीति चाहे वह कांग्रेस की हो, भाजपा की या अन्य किसी दल की, दो दशकों तक धुरी बने रहे हरवंश सिंह ठाकुर के अवसान के बाद अब कांग्रेस भाजपा सहित अन्य सियासी दल दिग्भ्रिमित ही दिख रहे हैं। सियासी दलों ने आरोप प्रत्यारोप का कभी न थमने वाला युद्ध छेड़ दिया है। मजे की बात तो यह है कि कांग्रेस ने भाजपा और भाजपा ने कांग्रेस के खिलाफ इस युद्ध का आगाज न कर, अपने ही दलों के क्षत्रपों के खिलाफ तलवारें पजाना आरंभ कर दिया है।
भाजपा में नरेश नीता हटाओ, भाजपा बचाओके नारे आसमान में गुंजायमान हुए। नरेश दिवाकर दस साल तक भाजपा के विधायक रहे और वर्तमान में भाजपाध्यक्ष हैं, तो नीता पटेरिया पांच साल सांसद तो पांच साल से विधायक हैं। दोनों ही के पास अपने अपने कार्यकर्ताओं सहित अन्य लोगों को उपकृत करने का पर्याप्त अवसर और संसाधन रहे हैं। विडम्बना ही कही जाएगी कि दोनों ही नेताओं के पास आज की तारीख में हार्डकोरकार्यकर्ताओं का अभाव नजर आता है। जब नरेश दिवाकर की टिकिट कटी और नीता पटेरिया को विधायक की टिकिट दी गई तब नरेश दिवाकर पर आरोप लगे कि उन्होंने निर्दलीय दिनेश राय के पक्ष में अपने समर्थकों को मोबलाईज किया। इन बातों में कितनी सच्चाई है यह तो वे ही जानें, पर नरेश दिवाकर सिटिंग एमएलए होने के बाद उनकी टिकिट कटने की पीड़ा आज भी उन्हें रह रहकर दर्द दे जाती होगी।
रही बात नीता पटेरिया की तो उन पर पिछले विधानसभा चुनावों में कमीशन खोरी के आरोप इतने संगीन लगे थे कि हर कोई उन्हें मेडम परसेंटेजके नाम से जानने लगा था। यह तो कांग्रेस की तलवार में धार नहीं थी वरना नीता पटेरिया तो कब का मैदान छोड़कर जा चुकी होतीं। श्रीमती पटेरिया पर कमीशन लेने के आरोप नए नहीं है। उन पर घटिया टेंकर वितरण का आरोप भी है, वह भी अधिक कीमत पर खरीदी करके। टेंकर कांड का दर्द नरेश दिवाकर को भी होता होगा, उनके विधायक रहते हुए टेंकर कांड भी जमकर उछला था।
नीता पटेरया पर टेंकर वितरण कार्यक्रम में पुरोहित की थाली से दो सौ रूपए चुराने का आरोप है। उन पर आरोप है कि उनका मकान ही अतिक्रमण कर बनाया गया है। श्रीमती पटेरिया पर आरोप है कि उन्होंने सीएमओ के ईयर मार्क आवास पर जबरिया कब्जा जमाया हुआ है। श्रीमती पटेरिया ने नैतिकता इस कदर खो दी है कि विधायक निधि जो सार्वजनिक कामों के लिए होती है, से एक लाख रूपए निकालकर भाजपा कार्यालय के बाजू में नलकूप खुदवा दिया। इसका उपयोग विशुद्ध रूप से भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा बेशर्मी के साथ किया जा रहा है। यह निधि श्रीमती पटेरिया के वेतन की नहीं है, यह जनता का पैसा है। हाल ही में मारबोड़ी की सरपंच ने नीता पटेरिया पर दस परसेंट कमीशन लेने का सनसनीखेज आरोप मढ़ा है। यह आरोप एक बार फिर नीता पटेरिया को मेडम परसेंटेजके नाम से मशहूर कर दे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
बरघाट विधायक कमल मर्सकोले का अपना अलग जलवा है। मुस्कुराकर अभिवादन करना उनकी फितरत में है। बरघाट विधानसभा क्षेत्र के लोग कमल मर्सकोले का चेहरा ही भूल चुके हैं। हां उनकी विधानसभा क्षेत्र में अगर किसी को कमल मर्सकोले का चेहरा याद है तो वह है खवासा बार्डर पर तैनात अमले को, जो बिना नागा हर महीने की पहली तारीख को कमल मर्सकोले के दरबार में हाजिरी लगा जाता है। कमल मर्सकोले के बारे में यह प्रसिद्ध हो गया है कि वे भाजपा के बजाए कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की ज्यादा सुनते हैं और कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेताओं से सलाह मशविरा कर अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों को साधते हैं।
कमोबेश यही आलम लखनादौन विधायक श्रीमती शशि ठाकुर का है। उनके पति लंबे समय तक सिवनी में सीएमओ पदस्थ रहे हैं। श्रीमती शशि ठाकुर काफी हद तक कमजोर प्रतीत होती हैं। उन्होंने सिवनी की स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कोई प्रयास नहीं किए। उनके विधानसभा क्षेत्र मुख्यालय लखनादौन में नगर परिषद् ने अत्त मचाई, पर वे खामोश ही रहीं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश हवा में उड़े, यहां तक कि भाजपा का कार्यालय बनने से रोका नगर परिषद् ने, पर शशि ठाकुर द्वारा अपने चिर परिचित अंदाज में अपने आप को असहाय ही बताया गया। वे भूल जाती थीं कि वे विधायक हैं, और विधायक के पास असीमित अधिकार होते हैं। उनके पास विधानसभा का सशक्त मंच है। पर सिवनी के सारे जनसेवक अपने मंच का उपयोग निहित स्वार्थ के लिए ही करते आए हैं, जनता की परवाह शायद ही किसी को रही हो. . .।