रविवार, 10 नवंबर 2013

सज गया चुनावी मैदान, तैयार हैं योद्धा, माहौल में पसरा है सन्नाटा

सज गया चुनावी मैदान, तैयार हैं योद्धा, माहौल में पसरा है सन्नाटा

कुहासा हटा नहीं चारों विधानसभा में, आखिर किस करवट बैठेगा मतदाताओं के रूझान का ‘ऊंट‘

(लिमटी खरे)

विधानसभा चुनावों के लिए रणभेरी बजे समय बीत चुका है। नाम दाखिल करने का समय भी निकल गया है। अब नाम वापसी की अंतिम तारीख 11 नवंबर का इंतजार है। सभी इसकी राह देख रहे हैं कि कौन कौन सैट होकर या दबाव में आकर अपने अपने नामांकन वापस लेते हैं। असल तस्वीर 11 नवंबर के बाद ही स्पष्ट होगी। 11 तारीख के बाद 24 तारीख तक महज 13 दिनों का ही माना जाएगा विधानसभा चुनाव, क्योंकि 25 को मतदान है। वैसे तो पांच सालों का लेखा जोखा आवश्यक है पर कहा जाता है कि लोगों की याददाश्त बेहद कम होती है, अतः लोग पुरानी बातों पर धूल ही डाल दिया करते हैं। नेता इस बात से भली भांति परिचित हैं, अतः वे भी कम ही समय में अपना सारा करतब दिखा दिया करते हैं।

सिवनी विधानसभा में है जोर आजमाईश
सिवनी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस की ओर से 2003 के चुनाव में 15 हजार से अधिक से पराजित हो चुके राज कुमार खुराना मैदान में हैं। पेशे से व्यवसाई राज कुमार खुराना राजनीति के अलावा खेल गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। राजकुमार खुराना से जनता यह जानना अवश्य ही चाहेगी कि उन्होंने पिछले सालों में आम जनता के दुख दर्द और सिवनी के अधिकारों के लिए क्या जतन किए? वहीं, भाजपा से दो बार के विधायक रहे नरेश दिवाकर मैदान में हैं। नरेश दिवाकर जिला भाजपा के अध्यक्ष और महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (हो सकता है प्राधिकरण से वे त्यागपत्र दे चुके हों पर यह बात अभी तक उजागर नहीं हो पाई है) भी हैं। जनता के सामने उनके दस साल का बतौर विधायक तथा भाजपा के जिलाध्यक्ष के साथ ही साथ महाकौशल विकास प्राधिकरण का कार्यकाल भी है, इस नाते जनता उनके इस कार्यकाल का हिसाब भी रख रही होगी। नरेश दिवाकर ने 2003 में राजकुमार खुराना को नाकों चने चबवाए थे। इसके बाद 2008 में भाजपा ने उनकी टिकिट काटकर श्रीमति नीता पटेरिया को अपना उम्मीदवार बनाया था। वहीं तीसरी ताकत के रूप में पिछले विधानसभा चुुनावों में लगभग तीस हजार वोट लेने वाले दिनेश राय मैदान में हैं। वे निर्दलीय हैं। दिनेश राय मूलतः लखनादौन के रहने वाले माने जाते हैं, क्योंकि वे वर्तमान में लखनादौन बार एॅसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। इसके अलावा आशा भलावी, सालिगराम, अकबर खान, अजहर उल अलीम, एम.आर.खान, महमूद खान, राम प्रसाद डेहरिया, मुकेश कुमार सनोडिया, तीरथ सिंह, मो.अशफाक, निहाल सिंह, रामेश्वर, राजेश उपाध्याय एवं घासीदास सनोाडिया आदि भी मैदान में हैं।
सिवनी विधानसभा में जोर आजमाईश सबसे ज्यादा दिखाई दे रही है। इसका कारण यह है कि इस विधानसभा क्षेत्र में जिला मुख्यालय शामिल है। जिला मुख्यालय में किसके पक्ष में वोट डलते हैं या किसकी बयार बहती है, यह बात तो समय आने पर ही पता चलेगा किन्तु अभी सिवनी में सर्दी के मौसम में गिरते पारे के साथ ही चुनावी गर्माहाट भी महसूस नहीं की जा रही है।

हाईटेक प्रचार में पिछड़े प्रत्याशी
एक ओर जहां सोशल नेटवर्किंग वेब साईट्स लोगों विशेषकर युवाओं के सर चढ़कर बोल रहीं हैं, वहीं सिवनी में प्रमुख राजनैतिक दलों के अलावा निर्दलीय या अन्य राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों के द्वारा हाईटेक प्रचार में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है, संभवतः हो सकता है सोशल मीडिया को पेड न्यूज के दायरे में लाने की कवायद के चलते प्रत्याशी फूंक फूंक कर कदम रख रहे हों।

मीडिया से गायब है सरगर्मी
वहीं दूसरी ओर समाचार पत्र और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी चुनावी सुगबुगाहट अपेक्षाकृत कम ही दिखाई दे रही है। हो सकता है इस बार चुनाव आयोग के पेड न्यूज के संबंध में कड़े निर्देशों के बाद प्रत्याशियों द्वारा किसी किस्म का रिस्क मोल नहीं लिया जा रहा हो। अखबारों में भी जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्तियों को, खबरों के रूप में भरपूर स्थान मिल रहा है। एक के बाद एक कर, एमसीएमसी द्वारा दिए जाने वाले नोटिस से मीडिया भी खबरों के मामले में बेहद सावधानी ही बरतता दिख रहा है।

ये हो सकते हैं मुख्य मुद्दे!
इस बार चुनाव में वैसे तो मुद्दों का टोटा ही दिखाई पड़ रहा है, फिर भी स्थानीय स्तर पर भीमगढ़ जलावर्धन योजना का पूरा लाभ सिवनी को न मिल पाना, जिला मुख्यालय में नगर पालिका की लापरवाही से गंदा बदबूदार पानी मिलना, फोरलेन की राह के फच्चर (जिसके लिए कांग्रेस ने भाजपा को तो भाजपा ने कांग्रेस को ही दोषी ठहराया है), ब्रॉडगेज, उद्योग धंधों का अभाव, जिला चिकित्सालय सहित विधानसभा में स्वास्थ्य सुविधाओं की उखड़ती सांसें, आर्युविज्ञान महाविद्यालय (मेडीकल कॉलेज), नर्सिंग ट्रेनिंग सेंटर, खेल सुविधाओं का अभाव (विशेषकर क्रिकेट के लिए स्टेडियम न होना, हाकी के एस्ट्रोटर्फ का लंबे समय बाद लोकार्पण, बेडमिंटन हॉल के बनने के बाद भी लोकार्पण न होना, टेबिल टेनिस के लिए स्थानाभाव, दौड़ के लिए ट्रेक का अभाव, जल क्रीड़ाओं का शून्य होना आदि), बाग बगीचों के शहर में एक भी बगीचा बच्चों के लिए सही हालत में न होना, गांव गांव अवैध शराब का विक्रय, जंगलों में लगातार लगने वाली जुएं की फड़, युवाओं के लिए रचनात्मक शिक्षा और साधनों का अभाव, ट्रांसपोर्ट नगर का अभाव, टाउन एण्ड कंट्री प्लानिंग के स्पष्ट नजरिए का अभाव, फोरलेन के बाद भी एक्सीडेंट की स्थिति में फौरी मदद के लिए ट्रामा यूनिट का न बनना, फोरलेन की हाईवे पेट्रोलिंग का किराना ढोने के लिए होने वाला उपयोग, फोरलेन की एंबूलेंस कभी न दिखना, अधूरी सड़क पर जबरिया टोल का बोझ, अवैध उत्खनन आदि शामिल हैं।

केवलारी में है रोचक मुकाबला!
सिवनी जिले की दूसरी सामान्य विधानसभा सीट केवलारी में मुकाबला रोचक होता दिख रहा है। केवलारी में पिछली बार पराजित हुए चार बार के (परिसीमन के पूर्व बरघाट सामान्य से) विधायक एवं राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष (हो सकता है आयोग से वे त्यागपत्र दे चुके हों पर यह बात अभी तक उजागर नहीं हो पाई है) डॉ.ढाल सिंह बिसेन पर भाजपा ने दुबारा दांव आजमाया है। वहीं, कांग्रेस द्वारा चार बार से केवलारी में कांग्रेस के परचम फहराने वाले स्व.हरवंश सिंह ठाकुर के ज्येष्ठ पुत्र ठाकुर रजनीश सिंह को मैदान में उतारा गया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही में कशमकश का दौर चल रहा है। केवलारी विधानसभा के लोग यहां के विकास या अविकसित केवलारी विधानसभा को ही प्रमुख रूप से देख रहे हैं। कुछ लोग आज़ादी के उपरांत केवलारी के द्वारा विकास के सौपान तय किए जाने की कहानियां गढ़ रहे हैं, तो कुछ अविकसित केवलारी का ही राग अलाप रहे हैं। यद्यपि यह सब उजागर तौर पर नहीं हो रहा है, पर सुगबुगाहट कुछ इसी तरह की नजर आ रही है।
इसके अलावा जिला पंचायत के उपाध्यक्ष रहे और कांग्रेस के महामंत्री शक्ति सिंह ने भी केवलारी से बतौर निर्दलीय नामांकन भरा है। शक्ति सिंह के अलावा मूलचंद पटेल, केशव, हिहमायत, रामप्रसाद डेहरिया, अहमद सईद कुरैशी, आनंद, कुसुम ठाकुर, मो.हसीब, रामगुलाम बत्तेलाल, राकेश, श्रीमति मानवती, मंगल सिंह किरार, धर्मराज ठाकुर ओर हेमंतकुमार आदि मैदान में हैं।
देखा जाए तो केवलारी विधानसभा सीट आजादी के उपरांत लगभग कांग्रेस के कब्जे में ही रही है। इस सीट से कांग्रेस की सुश्री विमला वर्मा सबसे अधिक समय तक विधायक रही हैं। विमला वर्मा के उपरांत भाजपा की मुखर नेत्री श्रीमति नेहा सिंह (अब कांग्रेस में) ने भी इस सीट से प्रतिनिधित्व किया है। इसके उपरांत हरवंश सिंह यहां से विधायक रहे हैं। केवलारी विधानसभा क्षेत्र में विकास की गंगा बहाई गई है या फिर अभी भी विकास होना बाकी है, इस बारे में जनता जनार्दन ही बेहतर फैसला कर सकती है। एक तरफ अनुभवी डॉ.ढाल सिंह बिसेन हैं तो दूसरी ओर पहली बार चुनावी समर में उतरे ठाकुर रजनीश ंिसंह हैं।

ये हो सकते हैं चुनावी मुद्दे!
केवलारी विधानसभा क्षेत्र में चुनावी मुद्दों का टोटा नजर आ रहा है। वैसे केवलारी मेें भीमगढ़ बांध का भरपूर पानी होने के बाद भी किसानों को राहत नहीं है। इसके अलावा दो दर्जन से ज्यादा गांव में आज़ादी के बाद बिजली का न आ पाना भी एक मुद्दा है। साथ ही साथ क्षेत्र की अंदरूनी सड़कों और पुल पुलियों के अभाव में बच्चे और नागरिक कहीं पानी में नांव की सवारी गांठ रहे हैं तो कहीं रेल्वे ट्रेक पर चलकर रास्ता नाप रहे हैं, यहां भी ब्रॉडगेज एक मुद्दे से कम नहीं है, शिक्षा के क्षेत्र में भी इस क्षेत्र को पिछड़ा ही कहा जा सकता है। नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास भी एक मुद्दा हो सकता है। केवलारी क्षेत्र में बेरोजगारी सबसे बड़ा अभिशाप बनकर उभरी है, क्षेत्र में उद्योग धंधों के अभाव में मजदूर पलायन पर मजबूर हैं। यहां स्वास्थ्य सुविधाएं भी बदहाल ही हैं, आज़ादी के लगभग साढ़े छः दशकों बाद भी केवलारी की तस्वीर सही तरीके से नहीं उकेरी जा सकी है, क्षेत्र में जगह जगह बिकने वाली अवैध शराब भी लोगों के लिए सरदर्द से कम नहीं है। फोरलेन इस विधानसभा से होकर भी गुजर रही है, अतः फोरलेन के रिसते धाव यहां भी दिखाई दे जाएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इस तरह के अनेक मुद्दे आज भी जीवंत बने लग रहे हैं।

बरघाट की तस्वीर
सिवनी की पूर्व सामान्य और परिसीमन के बाद आरक्षित हुए विधानसभा क्षेत्र बरघाट में भाजपा का वर्चस्व लंबे समय से बना हुआ है। यहां से चार बार डॉ.ढाल सिंह बिसेन ने परचम लहराया तो उसके बाद कमल मर्सकोले ने भाजपा के गढ़ को बचाए रखा। इस बार भी कमल मर्सकोले को ही उम्मीदवार बनाया गया है। कमल मर्सकोले के पांच साल के कामों का हिसाब जनता के पास होगा और वह भी मायने ही रखेगा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से अर्जुन काकोड़िया मैदान में हैं। इसके अलावा दिनेश सिंह, रामनरेश सिंह, सीता राजेंद्र सिंह, बिहारी लाल, अशोक सिरसाम, हंसराम आदि भी मैदान में हैं। बरघाट में कांग्रेस के उम्मीदवार कई बार पराजय का सामना कर चुके हैं तो भाजपा के उम्मीदवार को अपने पांच सालों का हिसाब जनता के समक्ष रखना होगा। दोनों ही प्रमुख राजनैतिक दलों में भीतराघात के कयास तेज हो गए हैं।

ये हो सकते हैं चुनावी मुद्दे!
बरघाट विधानसभा वैसे तो पवार बाहुल्य मानी जाती है पर इसमें अरी से लेकर कुरई तक के बेल्ट के जुड़ने से इसमें आदिवासी समुदाय का वर्चस्व देखने को मिल रहा है। बरघाट विधानसभा में चावल उत्पादक किसान की भरमार है, अतः राईस मिल और चावल उत्पादकों की समस्याएं यहां प्रमुख रूप से सामने आ सकती हैं, इसके अलावा क्षेत्र की अंदरूनी सड़कें, जर्जर स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा के क्षेत्र में पसरी अराजकता, रोजगार आदि प्रमुख रूप से मुद्दे बन सकते हैं। इसके अलावा फोरलेन इस क्षेत्र के कुरई अंचल से होकर गुजरती है, जो सबसे खराब स्थिति में है। यह मामला सबसे तेजी से इस विधानसभा क्षेत्र में उभर सकता है।

लखनादौन की बिसात!
जिले की दूसरी आरक्षित विधानसभा सीट लखनादौन में भाजपा ने दो बार की विधायक श्रीमति शशि ठाकुर पर पुनः विश्वास जताया है। वहीं कांग्रेस ने पहले सूची में बेनी कुंदन परते का नाम तय किया बाद में नाटकीय तरीके से उसे बदलकर अब हिमाचल की राज्यपाल उर्मिला सिंह के सुपुत्र योगेंद्र बाबा के नाम पर मुहर लगाई है। कांग्रेस के लिए यह दूसरा मौका है जब लखनादौन में कांग्रेस ने टिकिट बदली है। इसके पहले बेनी परते की टिकिट काटकर शोभाराम भलावी को मैदान में उतारा गया था, तब कांग्रेस ने यहां मुंह की खाई थी। इन दोनों के अलावा बेनी कुंदन परते अभी निर्दलीय बतौर मैदान में हैं, साथ ही साथ आनंद इनवाती, सौरभ उईके, देवी प्रसाद कुसराम, रामनरेश सरेयाम, सुखलाल, राजेश्वरी उईके, कांतिलाल धुर्वे, नेपाल सिंह, दशोदी उईके, असाढू आदि भी मैदान में हैं। इस बार श्रीमति शशि ठाकुर को अपने दस साल के कार्यकाल का हिसाब लोगों को देना होगा। इसके अलावा उर्मिला सिंह के पुत्र योगेंद्र बाबा के लिए भी राह आसान नहीं है। उन्हें क्षेत्र में मेहनत करना जरूरी है। रही बात बेनी कुंदन परते की तो अगर वे निर्दलीय के बतौर मैदान में हैं और राजेश्वरी उईके भी मैदान में हैं। दोनों को भी वेतरणी पार करने के लिए मशक्कत करना पड़ सकता है।

चुनावी मुद्दों की है भरमार
लखनादौन विधानसभा क्षेत्र में चुनावी मुद्दे भरे पड़े हैं। क्षेत्र में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार, ब्रॉडगेज और फोरलेन का है। फोरलेन यहां आधी अधूरी पड़ी है। ब्रॉडगेज का भी कमोबेश यही हाल है। रोजगार के लिए साधन नहीं हैं। देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पॉवर लिमिटेड द्वारा यहां 1260 मेगावाट का पॉवर प्लांट डाला जा रहा है। इस पॉवर प्लांट की संस्थापना में अनेकानेक विसंगतियां हैं, मीडिया के माध्यम से चीख चीख कर इन विसंगतियों को उजागर किया गया था। इसके बावजूद विधायक श्रीमति शशि ठाकुर सहित विपक्ष में बैठी कांग्रेस के नुमाईंदों ने कोई पहल नहीं की। क्षेत्र के आदिवासियों को लूटा गया पर सियासी दल खामोश रहे। क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाएं आदि आदि के बुरे हाल हैं। लखनादौन शहर में अनेक काम नियम विरूद्ध हुए पर कांग्रेस भाजपा खामोश बैठी रहीं। भाजपा के मण्डल अध्यक्ष को थाने में अकारण निरूद्ध किया गया, पर भाजपा के संगठन ने इस बारे में कोई कार्यवाही नहीं की।
कुल मिलाकर चारों विधानसभा में स्थिति, नाम वापसी के उपरांत ही स्पष्ट हो पाएगी। नाम वापसी के बाद की तस्वीर को देखकर ही राजनैतिक पंडित अनुमान लगा सकते हैं। अभी तो यह स्पष्ट नहीं है कि कौन चुनाव लड़ेगा और कौन नामांकन वापिस लेगा।  इस सबके बाद भी कार्यकर्ता और मतदाता अपना मौन अभी तक बरकरार रखे हुए हैं जो प्रत्याशियों की हृदयगति को बढ़ाए हुए है। प्रदेश में दस सालों से भाजपा की सरकार है। विपक्ष में बैठी कांग्रेस को भी अपना लेखा जोखा प्रस्तुत करना होगा। इस नाते अब अंतिम क्षणों में यही देखना बाकी है कि ऊंट आखिर किस करवट बैठने वाला है।

बुधवार, 6 नवंबर 2013

सुबह 11 बजे आरओ केवलारी के कार्यालय में उपस्थित होकर बयान रिकार्ड कराएं हिन्द गजट के संपादक!

सुबह 11 बजे आरओ केवलारी के कार्यालय में उपस्थित होकर बयान रिकार्ड कराएं हिन्द गजट के संपादक!

रात लगभग साढे़ सात बजे फोन पर दिया आरओ केवलारी ने समाचार पत्र के संपादक को आदेश, आज जारी किया नोटिस, नहीं दिया 48 घंटे का नियमानुसार मिलने वाला समय!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। चार नवंबर की रात लगभग सवा सात बजे हिन्द गजट के संपादक के मोबाईल पर 8989867665 नंबर से एक फोन आया। फोनकर्ता ने अपने आप को रिटर्निंग ऑफिसर केवलारी बताया और कहा कि अगले दिन यानी 5 नवंबर को सुबह ग्याहर बजे सिवनी स्थित आरओ (रिटर्निंग ऑफिसर), केवलारी के कार्यालय पहुंचकर बयान रिकार्ड करवाएं। इस तरह के आदेशात्मक फोन से संपादक सकते में आ गए।
दैनिक हिन्द गजट के संपादक ने बताया कि उनके कुछ बाल सखा दीप पर्व पर सिवनी आए हुए थे। वे अपने मित्रों के साथ पुरानी यादें ताजा कर रहे थे। इसी बीच रात्रि सवा सात बजे एक फोन आया जिसमें फोनकर्ता ने उनसे कहा कि वे आरओ केवलारी बोल रहे हैं। और उन्होंने संपादक को अगली सुबह ग्यारह बजे आरओ केवलारी के सिवनी कार्यालय पहुंचकर बयान दर्ज कराने का निर्देश दे दिया।
जब संपादक द्वारा उनसे कहा गया कि मसला क्या है? तब उन्होंने कहा कि उनकी एक शिकायत आरओ के पास है और उसमें कुछ धाराओं के तहत नोटिस जारी किया गया है। जब इस संबंध में संपादक द्वारा कहा गया कि अगर कोई शिकायत है तो आरओ केवलारी को नियमानुसार नोटिस जारी कर 48 घंटे का समय दिया जाना चाहिए। चूंकि वे लॉ ग्रेजुएट नहीं हैं अतः धाराओं की जानकारी उन्हें नहीं है। वे कैसे बिना जानकारी के बयान रिकार्ड करवा सकते हैं।
साथ ही साथ संपादक द्वारा यह बात भी आरओ केवलारी के संज्ञान में ला दी गई कि 03 और 04 नवंबर कार्यालय का अवकाश है अतः 05 नवंबर को ही वे इस संबंध में कोई कार्यवाही कर पाएंगे। साथ ही साथ यह भी कहा गया कि 04 नवंबर को कांग्रेस के एक महामंत्री द्वारा उनसे इस नोटिस के बारे में कुछ पूछताछ की गई थी। जिस पर हिन्द गजट के व्यवस्थापक द्वारा अपनी भावनाओं से लिखित रूप में अपनी बात से एमसीएमसी और जिला निर्वाचन अधिकारी को आवगत करा दिया गया था। इस पर आरओ केवलारी द्वारा फोन पर ही कहा गया कि एमसीएमसी और जिला निर्वाचन अधिकारी कौन होते हैं? हम आरओ केवलारी हैं और आप हमारे समक्ष कल 11 बजे उपस्थित होकर बयान दर्ज करवाएं।
संपादक द्वारा इस संबंध में आरओ केवलारी से यह पूछा गया कि शिकायतकर्ता कौन है? शिकायत की क्या प्रकृति है? इस बारे में उन्हें लिखित रूप में अवगत कराया जाए तब वे अपना जवाब दे सकेंगे। इस पर आरओ केवलारी ने फोन पर ही कहा कि वे अपने रिकार्ड में इस बात को ले रहे हैं कि संपादक को फोन पर ही सूचना दे दी गई है। इस पर संपादक द्वारा उनसे कहा गया कि आपकी नोटशीट है, आपका पैन है आप जो चाहे लिख सकते हैं, इसमें संपादक भला क्या कर सकता है। इस पर आरओ केवलारी द्वारा फोन पर कहा गया कि फोन पर दी गई सूचना ही पर्याप्त है और संपादक को सुबह 11 बजे उपस्थित होना ही होगा।
दैनिक हिन्द गजट के संपादक द्वारा इस मामले में उनसे निवेदन किया गया कि वे कायस्थ हैं और 05 नवंबर को यमद्वितीया एवं भाई दूज का पर्व होता है। इस दिन सुबह से लेकर शाम तक भगवान चित्रगुप्त का पूजन किया जाता है। इस दिन का महत्व कायस्थ समाज के लिए बेहद अधिक है अतः नोटिस भेजकर कम से कम 48 घंटे का समय दिया जाए। इन सारी बातों को दरकिनार कर फोनकर्ता आरओ केवलारी द्वारा अंत में साफ तौर पर कहा गया कि वे इस बात को अपने रिकार्ड में ले रहे हैं कि उनके द्वारा फोन पर सूचना तामील कर दी गई है।

क्या है मामला
दरअसल, सालों साल से समाचार पत्रों की अघोषित चली आ रही परंपरानुसार इस साल दैनिक हिन्द गजट द्वारा दीपोत्सव पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और माता सरस्वती के चित्रों से युक्त एक रंगीन छायाचित्र निःशुल्क वितरण के लिए प्रकाशित किया गया था। अमूमन हर समाचार पत्र द्वारा इसका प्रकाशन किया जाना आम बात है। अमूमन इसे समाचार पत्र का ही अंग माना जाता है अतः इसके प्रकाशन में अलग से संपादक, प्रकाशक, मुद्रक के नाम अथवा प्रसार संख्या का उल्लेख नहीं होता है। इस छायाचित्र में (देखें फोटो) विज्ञापनों का प्रकाशन सामान्य बात है। इस बार इसके प्रकाशन के साथ इसमें कुंवर शक्ति सिंह का फोटो और उनकी ओर से दीप पर्व की बधाई का प्रकाशन किया गया था।
एसडीएम कार्यालय केवलारी के सूत्रों की मानें तो एसडीएम केवलारी द्वारा इसे पंपलेट की श्रेणी में रखा जा रहा है, एवं इसमें संपादक को प्रिंटिंग एक्ट के उल्लंघन का नोटिस जारी किया जा रहा है। अगर दैनिक हिन्द गजट के साथ प्रसारित इस रंगीन छायाचित्र को उनके द्वारा अवैध माना जा रहा है तो शेष समाचार पत्रों द्वारा इसी प्रकृति के वितरित छायाचित्र क्या वैध हैं यही यक्ष अनुत्तरित ही है, क्योंकि उनमें भी न तो यह लिखा है कि फलां अखबार के साथ प्रकाशित या प्रसारित! हिन्द गजट द्वारा तो 03 नवंबर के अंक के साथ प्रथम पृष्ठ पर यह सूचना भी हाईलाईटेड कर प्रकाशित की गई थी कि 03 नवंबर के अंक के साथ उक्त छायाचित्र दिया जा रहा है जिसे पाठक अपने हाकर्स से अवश्य ही ले लें। इन परिस्थितियों में इसे पंपलेट मानना उचित नहीं कहा जा सकता है।
दैनिक हिन्द गजट के व्यवस्थापक द्वारा आज जिला निर्वाचन अधिकारी को एक पत्र लिखकर संपूर्ण घटनाक्रम से उन्हें अवगत करवाया है। साथ ही साथ उन्होंनें जिला निर्वाचन अधिकारी से आग्रह किया है कि नियमानुसार जवाब के लिए मिलने वाले 48 घंटों के लिए जिले की समस्त विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचन अधिकारियों को पाबंद किया जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया है अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया जाए कि वे समाचार पत्र के संपादकों या प्रतिनिधियों से इस तरह का बर्ताव कतई न करें मानों मीडिया से जुड़े लोग सरकारी मुलाजिम हों।
व्यवस्थापक द्वारा अपने पत्र में जिला निर्वाचन अधिकारी से यह भी आग्रह किया है कि आरओ केवलारी से इस बात का स्पष्टीकरण भी मांगा जाए कि आखिर उन्होंने किस आधार पर एक जिम्मेदार समाचार पत्र के जिम्मेदार संपादक को रात लगभग सवा सात बजे यह आदेशित किया कि वे अगले दिन ग्यारह बजे (महज सोलह घंटे बाद) उनके कार्यालय में उपस्थित होकर बयान दर्ज करवाएं। जबकि संपादक ने 05 नवंबर को होने वाली पूजा का हवाला भी दिया था।
इसके साथ ही साथ भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक को भी इसकी एक प्रति भेजकर मार्गदर्शन मांगा है कि क्या समाचार पत्र के साथ समय समय पर निशुल्क प्रसारित और वितरित की जाने वाली सामग्री में क्या प्रथक से प्रकाशक, संपादक या मुद्रक का नाम प्रकाशित करना अनिवार्य है? क्या इसमें प्रसार संख्या का उल्लेख किया जाना आवश्यक है?
इसके अलावा भारतीय प्रेस परिषद् के अध्यक्ष को भेजी गई प्रति में व्यवस्थापक द्वारा उनसे मार्गदर्शन भी मांगा है जिसमें आग्रह किया गया है कि बिना पर्याप्त समय दिए फोन पर ही आदेशात्मक तरीके से बातचीत कर बयान दर्ज करवाने के लिए बुलवाने का दवाब डालना क्या न्यायोचित है? क्या यह प्रेस की स्वतंत्रता के हनन की श्रेणी में नहीं आता है? अगर आता है तो इस पर उचित कार्यवाही का आग्रह किया गया है।
इसकी प्रति भारत निर्वाचन आयोग तथा राज्य निर्वाचन आयोग को भी भेजकर अनुरोध किया गया है कि इस पूरे मामले की जांच करवाई जाए। आचार संहिता के उल्लंघन के नाम पर समाचार पत्र के संपादक को मौखिक आदेश देकर वह भी अखबार के अवकाश वाली रात्रि में, देकर नियमानुसार 48 घंटे का समय दिए और लिखित नोटिए दिए बिना ही, उपस्थिति के लिए बाध्य करना क्या न्यायोचित है?
अंत में जिला दण्डाधिकारी से अनुरोध कर मार्गदर्शन चाहा गया है कि क्या प्रिंटिंग एक्ट सिर्फ चुनाव की आचार संहिता के दरम्यान ही प्रभावी होता है? अगर यह साल भर प्रभावी होता है तो सिवनी से प्रकाशित होने वाले उन समाचार पत्रों पर अब तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं की गई है जो भारत के समाचार पत्रों की शीर्षक (अस्थाई और स्थाई) में शामिल नहीं हैं। इसके साथ ही साथ क्या संपूर्ण सिवनी जिले में दीपोत्सव के पर्व पर अन्य समाचार पत्रों के द्वारा बांटे गए माता लक्ष्मी, माता सरस्वती, भगवान गणेश के पोस्टर्स जिनमें प्रकाशक, मुद्रक का नाम और प्रसार संख्या नहीं है, पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है?

शक्ति सिंह को जारी हुआ फरमान आठ बजे तक दो हाजिरी!
वहीं, बताया जाता है कि कांग्रेस के महसचिव कुंवर शक्ति सिंह को आरओ केवलारी ने 04 नवंबर को ही एक नोटिस जारी कर उसी रात आठ बजे तक आरओ केवलारी के केवलारी स्थित कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब देने को कहा गया। बताया जाता है कि इस नोटिस से शक्ति सिंह असमंजस में थे कि आखिर हुआ क्या है जो आनन फानन 48 घंटे के बजाए तत्काल ही उपस्थ्ति होकर जवाब चाहा गया है।

दिया शक्ति सिंह ने अपना जवाब
बताया जाता है कि एसडीएम केवलारी के कार्यालय में रात में निर्धारित अवधि में कुंवर शक्ति सिंह ने नियमों का अनुपालन करते हुए पांच कंडिकाओं में अपना जवाब प्रस्तुत किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार शक्ति सिंह द्वारा दिए गए लिखित जवाब में कंडिका नंबर एक में कहा गया है कि इस तरह का कोई काम उनके द्वारा नहीं किया गया है।
अपने लिखित जवाब की दूसरी कंडिका में उन्होंने कहा है कि संभवतः उनके किसी मित्र या समर्थक द्वारा इस आशयक काम किया गया हो, इस संबंध में उन्होंने कहा कि वे अपने मित्र या शुभचिंतकों से पूछकर 24 घंटे के अंदर आरओ केवलारी को अवश्य ही सूचित कर देंगे।
कंडिका तीन में इस बात का उल्लेख किया गया है कि वे जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री हैं, और उन्होंने किस हैसियत से या आधार पर उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी निरूपित किया गया है। उन्होंने कहा है कि उनके द्वारा वर्तमान में न तो आरओ केवलारी और न ही आरओ सिवनी के कार्यालय में नामांकन प्रस्तुत नहीं किया है, अतः वे वर्तमान में जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री हैं।
कंडिका चार में उन्होंने कहा है कि इस संबंध में वे संबंधित समाचार पत्र से जानकारी चौबीस घंटों के अंदर आरओ केवलारी को अवगत कराएंगे।
बताया जाता है कि अंत में कुंवर शक्ति सिंह ने कहा है कि अगर वे विधानसभा चुनाव मंें उम्मीदवारी करते हैं और उनके किसी समर्थक या मित्र द्वारा विज्ञापन दिया गया है तो उक्त विज्ञापन की राशि उनके व्यय में शामिल कर ली जाए। उन्होंने आगे कहा कि उम्मीदवारी के बाद (अगर वे करते हैं तो) उनके द्वारा इस विज्ञापन के व्यय को उसमें शामिल कर संबंधित आरओ को इससे अवगत करा दिया जाएगा।

मिला हिन्द गजट को नोटिस
इस संबंध में आज अपरान्ह लगभग दो बजे हिन्द गजट को अनुविभागीय अधिकारी/रिटर्निंग ऑफिसर, विधानसभा क्षेत्र 116, केवलारी के हस्ताक्षरों से जारी नोटिस लगभग ढाई बजे तामील किया गया। इस नोटिस में उल्लेख किया गया है कि 03 नवंबर के अंक में विधानसभा क्षेत्र 116 के निर्दलीय प्रत्याशी शक्ति सिंह के फोटो युक्त दीपावली शुभकामना संदेश आपके द्वारा प्रसारित कर वितरित किया गया है। उक्त संबंध में शक्ति सिंह ने आरओ केवलारी के समक्ष उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत किया गया है कि उनके द्वारा किसी भी प्रकार का शुभकामना संदेश प्रसारित नहीं करवाया गया है।
नोटिस में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 127 क (1) में प्रावधान है कि निर्वाचन से संबंधित किसी भी पैम्पलेट, पोस्टर आदि के ऊपर मुद्रक और प्रकाशक का नाम व पता एवं मुद्रित प्रतियों की संख्या छपी होनी चाहिए। आपके द्वारा प्रसारित शुभकामना संदेश में मुद्रक व प्रकाशक का नाम व पता, मुद्रित संख्या अंकित नहीं की गई है, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 127 क (1) का उल्लंघन है।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि आपके द्वारा जिला जनसम्पर्क अधिकारी सिवनी के माध्यम से एम.सी.एम.सी. सिवनी को 4 नवंबर को लिखे पत्र में लेख किया गया है कि कांग्रेस के जिला महामंत्री शक्तिसिंह द्वारा विज्ञापन आदेश दिया गया था, जिसका बिल भी आपके द्वारा भेजा गया।
नोटिस में कहा गया है कि निर्वाचन आचार संहिता के दौरान राष्ट्रीय राजनैतिक दल के पदाधिकारी द्वारा जिन्होंने मेरे समक्ष निर्दलीय प्रत्याशी होने का दावा किया है, अपने फोटोयुक्त विज्ञापन छपवाना आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है। छपवाये गये विज्ञापन में प्रकाशक एवं मुद्रक का नाम, प्रकाशित विज्ञापन की संख्या का मुद्रण किया जाना आवश्यक था, जो नहीं किया गया है। उक्त पोस्टर में ‘‘हिन्द गजट‘‘ के माध्यम निःशुल्क प्रसारित लेख किया गया है।
अतः क्यों न आपके विरूद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 127 क (1) तथा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171 (छ) के तहत कार्यवाही की जावे। आप दिनांक 06/11/2013 को दोपहर 12.00 बजे (जबकि नोटिस 5 नवंबर को अपरान्ह दो बजे तामील किया गया है इस हिसाब से 48 घंटों का समय 7 नवंबर 2013 को अपरान्ह दो बजे के लगभग होता है) न्यायालय कलेक्टर कक्ष सिवनी में मेरे समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखें कि आपके द्वारा किस विज्ञापनदाता द्वारा कब और कितनी प्रतियों में पोस्टर प्रकाशित कराने हेतु विज्ञापन दिया। विज्ञापन आदेश की सत्यप्रतिलिपि प्रस्तुत करें, साथ ही यह भी बतायें कि आपके द्वारा प्रमाणित विज्ञापन में प्रकाशक व मुद्रक का नाम तथा मुद्रित प्रतियों की संख्या क्यों नहीं मुद्रित की गईं। आपकी अनुपस्थिति की दशा में एकपक्षीय कार्यवाही कर दी जावेगी।

शक्ति सिंह ने पुनः दिया जवाब
बताया जाता है कि आज देर रात एसडीएम केवलारी के कार्यालय में अपना वायदा निभाते हुए शक्ति सिंह द्वारा संबंधित समाचार पत्र और अपने मित्र समर्थकों से पूछकर यह जानकारी दे दी गई है कि उनके किसी समर्थक ने इस आशय के विज्ञापन का प्रकाशन कराया गया है। साथ ही साथ शक्ति सिंह ने इस बावत अपनी लिखित सहमति भी आरओ केवलारी को दे दी है।

गौरतलब है कि गत दिवस शक्ति सिंह द्वारा इस आशय के विज्ञापन के संबंध में अनिभिज्ञता व्यक्त करते हुए कहा गया था कि वे 24 घंटे के अंदर इस मामले में अपने समर्थकों और मित्रों सहित समाचार पत्र से पूछकर जवाब दे देगें।

गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

पत्रकार वार्ता में आधी अधूरी जानकारी दी मीडिया को!

पेड न्यूज के दायरे में सोशल मीडिया. . .

पत्रकार वार्ता में आधी अधूरी जानकारी दी मीडिया को!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सोशल मीडिया को पेड न्यूज के दायरे में लाए जाने के निर्णय के उपरांत आज जिला कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में संपन्न हुई पत्रकार वार्ता में न तो पेड न्यूज पर से ही कुहासा हट सका और न ही पत्रकार वार्ता लेने वाले अधिकारी और बरघाट और केवलारी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव पर होने वाले व्यय पर नजर रखने आए पर्यवेक्षक ही कुछ बता पाए। पत्रकारों के सवालों पर जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमति प्रियंका दास ने कहा कि वे वीसी (वीडियो कांफ्रेंसिंग) में पत्रकारों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का जवाब उपरसे बुलवाकर देंगीं।
कलेक्टर सभाकक्ष में आज अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी जे.समीर लकरा की अध्य्ाक्षता में प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिय्ाा को विधानसभा चुनाव २0१३ के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। इस अवसर पर केन्द्रीय्ा जागरूकता प्रेक्षक अरविन्द सुदर्शन सीईओ जिला पंचाय्ात श्रीमती प्रिय्ांका दास, कोषालय्ा अधिकारी कु.नेहा कलचुरी, पेंशन अधिकारी समदेकर, सहाय्ाक संचालक जनसंपर्क श्रीमती बबीता मिश्रा सहित अन्य्ा अधिकारी उपस्थित थे।
अपर कलेक्टर एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी जे.समीर लकरा ने बताय्ाा कि पेड न्य्ाूज (एम.सी.एम.सी.) मीडिय्ाा सर्टिफिकेशन एवं मानिटरिंग सेल बनाई गई है, जो २४ घंटे पेड न्य्ाूज हेतु प्रिन्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक की मानीटरिंग कर रहा है। पेड न्य्ाूज एवं प्री सर्टिफिकेशन संबंधित जानकारी एवं शिकाय्ात हेतु फोन नंबर २२६४५६ (जो अभी खराब है) पर कॉल कर सकते हैं।

सोशल मीडिया के संबंध में दिशानिर्देश जारी
जिला पंचाय्ात के मुख्य्ा कायर््ापालन अधिकारी श्रीमति प्रिय्ांका दास ने बताय्ाा कि सोशल मीडिय्ाा के संबंध में चुनाव आय्ाोग ने विस्तृत निर्देश जारी किय्ो हैं। सोशल मीडिय्ाा की परिभाषा में विकिपीडिय्ाा, ट्वीटर, य्ाू-ट्यूब, फेसबुक, एप्पस आदि उदाहरणों को शामिल करते हुए चुनाव आय्ाोग ने निर्देशित किय्ाा है कि चुनाव प्रचार संबंधी सभी कानूनी प्रावधान सोशल मीडिय्ाा पर भी उसी तरह लागू हैं, जिस तरह किसी भी अन्य्ा इलेक्ट्रॉनिक माध्य्ाम पर।
इन निर्देशों में आय्ाोग ने कहा है कि नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्य्ााशी फार्म २६ के साथ एफिडेविट दाखिल करेंगे, फार्म २६ के पैरा ३ में अभ्य्ार्थी को अपनी ई-मेल आई.डी. (य्ादि कोई है) से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। फार्म -२६ का पैरा (३) को भी भरना अति आवश्य्ाक है। कॉलम खाली होने की स्थिति में अभ्य्ार्थी नामांकन रिटर्निंग अधिकारी द्वारा निरस्त भी किय्ाा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर प्रत्याशी द्वारा एक आईडी बताकर अन्य छिपाई जाती है तो भी रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उसका नामांकन निरस्त किया जा सकता है। आय्ाोग ने पूर्व से ही निर्देशित करते हुए कहा है कि प्रत्य्ोक पंजीकृत राष्ट्रीय्ा एवं राज्य्ा स्तरीय्ा राजनैतिक दलों एवं प्रत्य्ोक अभ्य्ार्थी को इलेक्ट्रॉनिक मीडिय्ाा में प्रसारित करने से पूर्व राजनैतिक विज्ञापनों की अनुमति ली जाना अनिवायर््ा है। इसी में आगे संशोधन करते हुए आय्ाोग ने कहा है कि एम.सी.एम.सी. कमेटी को विभिन्न स्तरों पर इस तरह के विज्ञापनों के प्रीसर्टिफिकेशन एवं पेड न्य्ाूज पर मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है।

पोस्ट या विज्ञापन का जुड़ेगा व्यय?
जब पत्रकारों द्वारा इस संबंध में यह पूछा गया कि क्या वेब साईट के मेन पेज के विज्ञापन का व्यय जुड़ेगा या किसी पोस्ट में विज्ञापन डाला जाता है उसका व्यय जुड़ेगा? इस पर वहां मौजूद अधिकारियों ने कहा कि इस संबंध में स्पष्ट निर्देश नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार जब कोई बात पहली मर्तबा होती है तो उसको समझने में समय लग ही जाता है। उल्लेखनीय होगा कि वर्तमान में चुनाव को महज 26 दिन ही बचे हैं। इन परिस्थितियों में अगर समझते समझते ही समय निकल गया तो मतदान की तिथि ही आ जाएगी।
पत्रकार वार्ता के अंत में यही बात उभरकर सामने आई कि आधी अधूरी जानकारी के जरिए ही उपर से आए निर्देशों को ही मीडिया में बंटवाया गया है। जब श्रीमति प्रियंका दास से यह पूछा गया कि यह जानकारी मीडिया के लोगों के ही पल्ले नहीं पड़ रही है तो आम जनता तक क्या प्रसारित किया जाएगा? इस पर उन्होंने कहा कि वे उपरवीसी के जरिए बात कर स्थिति स्पष्ट करेंगी। मीडिया में इस बात की चर्चा रही कि पत्रकार वार्ता लेने वाले अधिकारियों को ही इस मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
बहरहाल, आय्ाोग ने इसे आवश्य्ाक माना है कि सोशल मीडिय्ाा एकाउंट के संबंध में जानकारी अभ्य्ार्थी द्वारा आय्ाोग के समक्ष प्रस्तुत की जानी चाहिय्ो। चूंकि सोशल मीडिय्ाा को भी एक तरह से इलेक्ट्रॉनिक मीडिय्ाा के रूप में ही परिभाषित किय्ाा गय्ाा है, अतः प्री-सर्टिफिकेशन एवं पेड न्य्ाूज संबंधी समस्त निर्देश इंटरनेट/वेबसाईट आधारित सोशल मीडिय्ाा पर भी उसी तरह से लागू होगी जिस तरह इलेक्ट्रॉनिक मीडिय्ाा पर।
किसी भी प्रकार का राजनैतिक विज्ञापन तथा प्रचार किसी भी मीडिय्ाा इंटरनेट अथवा सोशल मीडिय्ाा वेबसाइटों के माध्य्ाम से किय्ो जाने के पूर्व सक्षम अधिकारी से प्री- सर्टिफिकेशन अनिवायर््ा है। प्री- सर्टिफिकेशन के निय्ाम एवं शर्तें पूर्व से निर्धारित है। उसी प्रक्रिय्ाा को अपनाते हुए सोशल मीडिय्ाा का उपय्ाोग किय्ाा जाना होगा।
सोशल मीडिय्ाा के माध्य्ाम से अभ्य्ार्थी द्वारा अपने सोशल एकाउंट पर जारी किय्ो गय्ो विज्ञापनों आदि का व्य्ाय्ा भी अभ्य्ार्थी के खाते में जोडे़ जाने के निर्देश, आय्ाोग द्वारा दिय्ो गय्ो हैं। प्रत्य्ोक प्रत्य्ााशी का दाय्ाित्व है कि सोशल मीडिय्ाा के माध्य्ाम से किय्ो जा रहे चुनाव का प्रचार-प्रसार का रिकार्ड संधारित करें, एवं रिटर्निंग अधिकारी/व्य्ाय्ा प्रेक्षक द्वारा रिकार्ड मांगे जाने पर प्रस्तुत भी करना होगा।

सोशल मीडिय्ाा के व्य्ाय्ा में क्य्ाा क्य्ाा शामिल होगा
सोशल मीडिय्ाा के अंतर्गत इंटरनेट के माध्य्ाम से जो विज्ञापन जारी करने के लिय्ो व्य्ाय्ा आ रहा है इस प्रकार होगा पार्टी अथवा प्रत्य्ााशी द्वारा विज्ञापन हेतु वेब-स्पेस हेतु वेबसाइट कंपनी को किय्ाा गय्ाा भुगतान, पार्टी अथवा प्रत्य्ााशी द्वारा विज्ञापन हेतु विज्ञापन तैय्ाार करने वाले व्य्ाक्ति दल/कंपनी को दी जाने वाली राशि/पार्टी अथवा प्रत्य्ााशी द्वारा निय्ाुक्त किय्ो गय्ो ऑपरेटर/अन्य्ा सहय्ाोग जिनके माध्य्ाम से गतिविधिय्ाों का संचालन किय्ाा जा रहा है। उनका वेतन/मानदेय्ा पारिश्रमिक भी शामिल होगा।

आदर्श आचार संहिता में सोशल मीडिय्ाा को भी शामिल किय्ाा गय्ाा है। आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान जो निर्देश इलेक्ट्रॉनिक मीडिय्ाा/प्रिन्ट मीडिय्ाा पर प्रतिबंधित य्ाा वर्जित है। वह सोशल मीडिय्ाा पर भी लागू होगी। सोशल मीडिय्ाा में जो भी विज्ञापन अपलोड किय्ाा जाय्ोगा, उसमें किसी भी प्रकार से आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं होना चाहिय्ो। सोशल मीडिय्ाा पर किसी प्रकार का आचार संहिता का उल्लंघन पाय्ो जाने पर सुसंगत धाराओं के अंतर्गत एवं साय्ाबर क्राइम मानते हुए प्रकरण पंजीबद्व किय्ाा जाय्ोगा।

मनमर्जी पर उतारू रिलायंस

मनमर्जी पर उतारू रिलायंस

(शरद खरे)

मोबाईल के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की सेवा प्रदाता कंपनी रिलायंस इन दिनों मनमर्जी पर उतारू नजर आ रही है। रिलायंस कंपनी द्वारा सिवनी जिले का सीना छलनी किया जा रहा है। दरअसल, देश की मशहूर कंपनी रिलायंस द्वारा सिवनी जिले में टेलीफोन केबल के लिए खोदी जा रही नाली के कारण, आज बीएसएनएल की ऑप्टीकल फायबर कनेक्टिंग केबल (ओएफसी) कट जाने से सिवनी में बीएसएनएल की सेवाएं दिन भर प्रभावित रहीं। ज्ञातव्य है कि एक ओर जहां फोरलेन सड़क निर्माण के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है, वहीं एक निजी सेवा प्रदाता टेलीफोन कंपनी द्वारा पता नहीं किसकी अनुमति से रक्षित वन क्षेत्र के उस हिस्से में वन विभाग के मुनारे के अंदर खुदाई की जा रही है।
यह सर्वविदित है कि सिवनी से जबलपुर रोड पर बंजारी और छपारा के बीच फोरलेन सड़क के निर्माण का काम इसलिए रूका हुआ है क्योंकि इसे केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से क्लियरेंस नहीं मिल सका है। यह मामला वर्ष 2008 से मंत्रालय की सीढ़ियां चढ़-उतर रहा है। गत दिवस बंजारी से छपारा के बीच के जंगल में सड़क से लगे हिस्से में एक निजी सेवा प्रदाता टेलीफोन कंपनी के केबल संभवतः ओएफसी डालने के लिए, खुदाई युद्ध स्तर पर जारी है। इस संबंध में अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि जब सड़क निर्माण के लिए वन विभाग की स्वीकृति नहीं मिल पाई है तो फिर निजी कंपनी को किस आधार पर खुदाई की अनुमति प्रदाय कर दी गई है, अथवा बिना किसी की अनुमति के इस कंपनी के कारिंदों द्वारा वन विभाग के मुनारे के अंदर ही खुदाई के काम को अंजाम दिया जा रहा है।
जब मामला समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ने उछाला तो देश भर में अनेक समाचार वेब पोर्टल्स, अखबारों की सुर्खियों में सिवनी जिले का नाम रिलायंस के इस कृत्य के कारण आ गया। जब मामले ने तूल पकड़ना आरंभ किया तो वन विभाग की तंद्रा टूटी। वन विभाग द्वारा अपने अधिकारियों को जांच के लिए मौके पर भेजा गया। पत्रकार राजेश स्थापक के अनुसार संबंधित वनमण्डलाधिकारी ने यह स्वीकार किया है कि रिलायंस द्वारा की जा रही खुदाई, वन विभाग के क्षेत्र के अंदर नियम विरूद्ध की जा रही है। अगर यह बात सत्य है तो फिर वन विभाग द्वारा रिलायंस के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए किस मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा है।
गत दिवस, दिन भर बीएसएनएल के मोबाईल और फिक्सड लाईन पूरी तरह प्रभावित ही रहीं। आलम यह था कि डब्लूएलएल का नेटवर्क तो सुबह से ही बंद रहा है। इस संबंध में शाम को जब बीएसएनएल के जिला अभियंता से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि रिलायंस कंपनी द्वारा केबल डालने के लिए जमीन की खुदाई की जा रही है। इसी खुदाई के चलते बीएसएनएल की ओएफसी केबल कट गई है जिससे बीएसएनएल का नेटवर्क प्रभावित हुआ है।
देखा जाए तो बीएसएनएल के ओएफसी केबल जहां जहां से गुजरा है वहां केबल डालते समय इस बात का ऐहतियात रखा जाता है कि भविष्य में अगर कोई खुदाई करे तो उसे यह भान हो जाए कि नीचे से बीएसएनएल का ओएफसी केबल गुजर रहा है। कई स्थानों पर तो बाकायदा बोर्ड तक लगे होते हैं। इतना सब होने के बाद भी रिलायंस के द्वारा आखिर किसकी शह पर खुलेआम वन क्षेत्र में नियम विरूद्ध खुदाई करवाई जा रही है। इतना ही नहीं बीएसएनएल का केबल भी काट दिया जाता है और पहले से ही लंगड़ाकर चलने वाले भारत संचार निगम लिमिटेड के आला अधिकारी अपनी चुप्पी भी इस मामले में बरकरार रखे हुए हैं। पता नहीं बीएसएनएल के अधिकारियों पर उपरया टेबिल के नीचेका कौन सा दबाव है जिसके चलते वे रिलायंस के खिलाफ कार्यवाही से कतरा ही रहे हैं।
अगर किसी आम आदमी के द्वारा सरकारी संपत्ति के साथ छेड़छाड़ की गई होती तो अब तक तो बीएसएनएल का पूरा का पूरा अमला ही कूदकर आम आदमी की हवा गरम कर देता, पर मामला जब रिलायंस जैसी नामचीन कंपनी का आया तो सरकारी महकमे को मानो सन्निपात (लकवा मार गया) हो गया हो।
वैसे भी रिलायंस सालों से निजी क्षेत्र में मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी है। रिलायंस के कारिंदों को यह भान अवश्य ही होगा कि ओएफसी आदि डालते समय किस बात की सावधानी बरतना आवश्यक है। अगर रिलायंस के कारिंदों ने लापरवाही के चलते केबल काटी है तो उन पर सरकारी संपत्ति के साथ छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। मामला चूंकि भारत सरकार के साथ जुड़ा हुआ है, अतः इस मामले में सांसदों का भी दायित्व बनता है कि वे संज्ञान लेकर कार्यवाही करें।
इसके पहले भी पिछले साल एक निजी क्षेत्र की सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा सिवनी शहर का सीना छलनी किया गया था। उस कंपनी द्वारा भी जगह जगह गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए थे। बारिश के मौसम में खोदे गए गड्ढों में अनेक राहगीर गिरकर चोटिल हुए तो वहीं दूसरी ओर अनेक वाहन गड्ढ़ों में फंसे जिससे उनमें टूट फूट हुई थी। इसकी शिकायत करने पर भी ठेकेदारों और कंपनी की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया।
अगर रिलायंस द्वारा केबल काटी गई है और बीएसएनएल के अधिकारियों के संज्ञान में यह बात आ चुकी है तो सेवा प्रदाता कंपनी बीएसएनएल द्वारा निजी क्षेत्र की सेवा प्रदाता कंपनी रिलायंस पर भारी जुर्माना ठोका जाना चाहिए क्योंकि अगर बीएसएनएल के ग्राहकों ने बीएसएनएल पर, सेवा में कमी का मुकदमा दायर कर दिया तो विभाग के लेने के देने पड़ जाएंगे। बीएसएनएल का सीडीएमए इससे, सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। सूत्रों की मानें तो टीएम के प्रभावित होने के कारण अब रायपुर की ओर से शायद लाईन को क्लीयर कराकर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
देखा जाए तो परोक्ष तौर पर वन विभाग द्वारा देश की मशहूर रिलायंस कंपनी को अपना काम समाप्त करने (चाहे वह नियम विरूद्ध क्योें न हो रहा हो) के लिए पर्याप्त समय दिया जाना ही प्रथम दृष्टया प्रतीत हो रहा है। रिलायंस कंपनी द्वारा मशीनों द्वारा ताबड़तोड़ खुदाई की जा रही है।

बुधवार, 30 अक्टूबर 2013

पंडित दीनदयाल के विचार छाए रहे भाजपा कार्यालय में!

पंडित दीनदयाल के विचार छाए रहे भाजपा कार्यालय में!

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई)। चुनाव पूर्व प्रत्याशी चयन की सरगर्मियां तेज होने के साथ ही अब संभावित दावेदारों के समर्थन और विरोध का सिलसिला भी तेज होने लगा है। पार्टी के आला नेताओं ने जब भाजपा के कुछ चुनिंदा नेताओं के विरोध को कांग्रेस द्वारा प्रायोजित बताकर मामले को कुचलने का प्रयास किया तो विरोध करने वालों ने भी इसका तोड़ निकाल लिया है।
हबीबगंज रेल्वे स्टेशन के सामने स्थित भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय में रविवार से ही गहमा गहमी का वातावरण देखने को मिल रहा है। बताया जाता है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार प्रदेश भाजपा के नेताओं से नाराज हैं तो दूसरी ओर कुछ भाजपा नेताओं पर अपने वर्चस्व के लिए पार्टी लाईन को भी दरकिनार करने के आरोप लग रहे हैं।
पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में बीते दिवस का एक पर्चा, मीडिया की सुर्खियों में बना हुआ है। इस पर्चे पर भाजपा के पितृ पुरूष पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचार लिखे हुए हैं। इस पर्चे पर लिखा हुआ है कि अगर पार्टी गलत प्रत्याशी का चयन करती है, तो कार्यकर्ताओं को चाहिए कि उसे हरा दिया जाए।

यह पर्चा भाजपा के आला नेताओं के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। विरोध करने वालों के लिए यह एक नायाब अस्त्र ही साबित होता दिख रहा है। कहा जा रहा है कि अगर कुछ कार्यकर्ताओं के पसंदीदा उम्मीवारों को टिकिट नहीं दी जाती है और वे भीतराघात करते पकड़ाए जाते हैं, तो भाजपा के पितृपुरूष पंडित दीनदयाल उपाध्याय का ब्रम्हवाक्य उनके बचाव के लिए ब्रम्हास्त्र साबित हो सकता है।

मनमर्जी पर उतारू रिलायंस

मनमर्जी पर उतारू रिलायंस

(शरद खरे)

मोबाईल के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की सेवा प्रदाता कंपनी रिलायंस इन दिनों मनमर्जी पर उतारू नजर आ रही है। रिलायंस कंपनी द्वारा सिवनी जिले का सीना छलनी किया जा रहा है। दरअसल, देश की मशहूर कंपनी रिलायंस द्वारा सिवनी जिले में टेलीफोन केबल के लिए खोदी जा रही नाली के कारण, आज बीएसएनएल की ऑप्टीकल फायबर कनेक्टिंग केबल (ओएफसी) कट जाने से सिवनी में बीएसएनएल की सेवाएं दिन भर प्रभावित रहीं। ज्ञातव्य है कि एक ओर जहां फोरलेन सड़क निर्माण के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है, वहीं एक निजी सेवा प्रदाता टेलीफोन कंपनी द्वारा पता नहीं किसकी अनुमति से रक्षित वन क्षेत्र के उस हिस्से में वन विभाग के मुनारे के अंदर खुदाई की जा रही है।
यह सर्वविदित है कि सिवनी से जबलपुर रोड पर बंजारी और छपारा के बीच फोरलेन सड़क के निर्माण का काम इसलिए रूका हुआ है क्योंकि इसे केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से क्लियरेंस नहीं मिल सका है। यह मामला वर्ष 2008 से मंत्रालय की सीढ़ियां चढ़-उतर रहा है। गत दिवस बंजारी से छपारा के बीच के जंगल में सड़क से लगे हिस्से में एक निजी सेवा प्रदाता टेलीफोन कंपनी के केबल संभवतः ओएफसी डालने के लिए, खुदाई युद्ध स्तर पर जारी है। इस संबंध में अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि जब सड़क निर्माण के लिए वन विभाग की स्वीकृति नहीं मिल पाई है तो फिर निजी कंपनी को किस आधार पर खुदाई की अनुमति प्रदाय कर दी गई है, अथवा बिना किसी की अनुमति के इस कंपनी के कारिंदों द्वारा वन विभाग के मुनारे के अंदर ही खुदाई के काम को अंजाम दिया जा रहा है।
जब मामला समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ने उछाला तो देश भर में अनेक समाचार वेब पोर्टल्स, अखबारों की सुर्खियों में सिवनी जिले का नाम रिलायंस के इस कृत्य के कारण आ गया। जब मामले ने तूल पकड़ना आरंभ किया तो वन विभाग की तंद्रा टूटी। वन विभाग द्वारा अपने अधिकारियों को जांच के लिए मौके पर भेजा गया। पत्रकार राजेश स्थापक के अनुसार संबंधित वनमण्डलाधिकारी ने यह स्वीकार किया है कि रिलायंस द्वारा की जा रही खुदाई, वन विभाग के क्षेत्र के अंदर नियम विरूद्ध की जा रही है। अगर यह बात सत्य है तो फिर वन विभाग द्वारा रिलायंस के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए किस मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा है।
गत दिवस, दिन भर बीएसएनएल के मोबाईल और फिक्सड लाईन पूरी तरह प्रभावित ही रहीं। आलम यह था कि डब्लूएलएल का नेटवर्क तो सुबह से ही बंद रहा है। इस संबंध में शाम को जब बीएसएनएल के जिला अभियंता से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि रिलायंस कंपनी द्वारा केबल डालने के लिए जमीन की खुदाई की जा रही है। इसी खुदाई के चलते बीएसएनएल की ओएफसी केबल कट गई है जिससे बीएसएनएल का नेटवर्क प्रभावित हुआ है।
देखा जाए तो बीएसएनएल के ओएफसी केबल जहां जहां से गुजरा है वहां केबल डालते समय इस बात का ऐहतियात रखा जाता है कि भविष्य में अगर कोई खुदाई करे तो उसे यह भान हो जाए कि नीचे से बीएसएनएल का ओएफसी केबल गुजर रहा है। कई स्थानों पर तो बाकायदा बोर्ड तक लगे होते हैं। इतना सब होने के बाद भी रिलायंस के द्वारा आखिर किसकी शह पर खुलेआम वन क्षेत्र में नियम विरूद्ध खुदाई करवाई जा रही है। इतना ही नहीं बीएसएनएल का केबल भी काट दिया जाता है और पहले से ही लंगड़ाकर चलने वाले भारत संचार निगम लिमिटेड के आला अधिकारी अपनी चुप्पी भी इस मामले में बरकरार रखे हुए हैं। पता नहीं बीएसएनएल के अधिकारियों पर उपरया टेबिल के नीचेका कौन सा दबाव है जिसके चलते वे रिलायंस के खिलाफ कार्यवाही से कतरा ही रहे हैं।
अगर किसी आम आदमी के द्वारा सरकारी संपत्ति के साथ छेड़छाड़ की गई होती तो अब तक तो बीएसएनएल का पूरा का पूरा अमला ही कूदकर आम आदमी की हवा गरम कर देता, पर मामला जब रिलायंस जैसी नामचीन कंपनी का आया तो सरकारी महकमे को मानो सन्निपात (लकवा मार गया) हो गया हो।
वैसे भी रिलायंस सालों से निजी क्षेत्र में मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी है। रिलायंस के कारिंदों को यह भान अवश्य ही होगा कि ओएफसी आदि डालते समय किस बात की सावधानी बरतना आवश्यक है। अगर रिलायंस के कारिंदों ने लापरवाही के चलते केबल काटी है तो उन पर सरकारी संपत्ति के साथ छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। मामला चूंकि भारत सरकार के साथ जुड़ा हुआ है, अतः इस मामले में सांसदों का भी दायित्व बनता है कि वे संज्ञान लेकर कार्यवाही करें।
इसके पहले भी पिछले साल एक निजी क्षेत्र की सेवा प्रदाता कंपनी द्वारा सिवनी शहर का सीना छलनी किया गया था। उस कंपनी द्वारा भी जगह जगह गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए थे। बारिश के मौसम में खोदे गए गड्ढों में अनेक राहगीर गिरकर चोटिल हुए तो वहीं दूसरी ओर अनेक वाहन गड्ढ़ों में फंसे जिससे उनमें टूट फूट हुई थी। इसकी शिकायत करने पर भी ठेकेदारों और कंपनी की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया।
अगर रिलायंस द्वारा केबल काटी गई है और बीएसएनएल के अधिकारियों के संज्ञान में यह बात आ चुकी है तो सेवा प्रदाता कंपनी बीएसएनएल द्वारा निजी क्षेत्र की सेवा प्रदाता कंपनी रिलायंस पर भारी जुर्माना ठोका जाना चाहिए क्योंकि अगर बीएसएनएल के ग्राहकों ने बीएसएनएल पर, सेवा में कमी का मुकदमा दायर कर दिया तो विभाग के लेने के देने पड़ जाएंगे। बीएसएनएल का सीडीएमए इससे, सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। सूत्रों की मानें तो टीएम के प्रभावित होने के कारण अब रायपुर की ओर से शायद लाईन को क्लीयर कराकर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
देखा जाए तो परोक्ष तौर पर वन विभाग द्वारा देश की मशहूर रिलायंस कंपनी को अपना काम समाप्त करने (चाहे वह नियम विरूद्ध क्योें न हो रहा हो) के लिए पर्याप्त समय दिया जाना ही प्रथम दृष्टया प्रतीत हो रहा है। रिलायंस कंपनी द्वारा मशीनों द्वारा ताबड़तोड़ खुदाई की जा रही है।