गुरुवार, 1 अगस्त 2013

केवलारी में एटीएम बने शोभा की सुपारी

केवलारी में एटीएम बने शोभा की सुपारी

(अरूण चंद्रोल)

केवलारी (साई)। केवलारी में भारतीय स्टेट बैंक और सैंट्रल बैंक के एटीएम अब शोभा की सुपारी बन चुके हैं। इन एटीएम से पैसा निकालने जाने वालों को सदा ही परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन एटीएम में सदा ही सर्वर प्राब्लम का रोना रोया जाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार केवलारी शहर में दो एटीएम मशीने कार्य कर रही हैं। एक एसबीआई तो दूसरी सेंट्रल बैंक की है। इन एटीएम में जाकर पैसा निकालने वालों को कमोबेश हर समय ही परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोगों से एटीएम के सालाना चार्ज में बैंक द्वारा कोई कोताही नहीं बरती जाती है, पर जब सेवा देने की बारी आती है तो बैंक अपने कदम पीछे खींच लेता है।

स्थिति बेकाबू हो सकती है डेंगू, मलेरिया की!

स्थिति बेकाबू हो सकती है डेंगू, मलेरिया की!

समय रहते निकम्मी नगर पालिका ने उठाए होते कदम तो आज नागरिक नहीं होते हलाकान

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। सिवनी शहर में मलेरिया और डेंगू की स्थिति को बेकाबू होने में समय नहीं लगेगा। अभी डेंगू के चार मरीजों की पुष्टि प्रशासन ने की है तो एक मलेरिया के मरीज की मौत की खबर आ गई है। निकम्मी नगर पालिका प्रशासन के अड़ियल रवैए के चलते शहर पूरी तरह महामारी की जद में आ चुका है। साफ सफाई के अभाव में मच्छरों के प्रजनन के लिए बेहद अनुकूल वातावरण तैयार होता जा रहा है।

कहां थी फागिंग मशीन!
नगर पालिका परिषद के पास दो फागिंग मशीन हैं। ये दोनों ही मशीनें शोभा की सुपारी बनी हुई हैं। पार्षद तो इन मशीनों को सफेद हाथी ही आंकते हैं। इसका कारण यह है कि साल में गर्मी के मौसम में बमुश्किल पंद्रह से बीस दिन तक ये फागिंग मशीन बिना दवाई के धुआं उड़ाती दिख जाती है, वह भी व्हीव्हीआईपी एरियाज में। बाकी पूरा शहर मच्छरों से हलाकान ही रहता है। साल भर यह मशीन पालिका के स्टोर की शोभा बढ़ाती है।
मजे की बात तो यह है कि इस मशीन की खुराक के लिए साल भर का तेल और दवा की स्वीकृति पालिका के बजट में की जाती है। आश्चर्य तो इस बात पर है कि कांग्रेस के पार्षदों के वार्ड में यह मशीन नहीं घूमती पर जब इसके लिए राशि के आहरण का बजट प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है तो कांग्रेस के पार्षद भी मेजें थपथपाकर उसे पारित करवा देते हैं। कुल मिलाकर सभी की सहमति से नगर पालिका परिषद् में पैसों का बंदरबांट किया जाता है।

मलेरिया ने ली एक की जान
मुस्लिम धर्मावालंबियों के मुकद्दस रमजान माह और हिन्दुओं के पवित्र श्रावण मास में भी नगर पालिका प्रशासन द्वारा शहर की सुध नहीं ली गई है। समूचा शहर गंदगी से बजबजा रहा है। जगह जगह पानी जमा है जो मच्छरों के प्रजनन के लिए बेहद मुफीद माहौल को तैयार कर रहा है। शहर का कोई इलाका ऐसा नहीं होगा जहां मच्छरों की फौज लोगों को हलाकान ना कर रही हो। प्राप्त जानकारी के अनुसार छोटी मस्जिद चौक निवासी मुन्ना भाईजान के बीस साल के साहेबजादे बंटी को बुखार आया। बताया जाता है कि बंटी का मलेरिया पाजेटिव निकला। इलाज के दौरान ही बंटी का निधन हो गया।

विधायक पति हैं मलेरिया अधिकारी!
सिवनी में मशहूर काटूर्निस्ट ‘रिप्ले‘ का ‘मानो ना मानो‘ सीरियल जिसमें अजब गजब सच्ची चीजों का बखान होता था, एकदम सही बैठता है। जिला मलेरिया अधिकारी की कमान जिला चिकित्सालय में पदस्थ डॉ.एच.पी.पटेरिया के हाथों में है। अपनी लगभग समूची सरकारी सेवा एकमात्र सिवनी जिले में ही पूरी करने वाले डॉ.पटेरिया पूर्व सांसद एवं सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया के पति हैं।
श्रीमति पटेरिया द्वारा जनसेवा का दंभ सदा ही भरा जाता रहा है, उनके बारे में उनके परिचित और समर्थक यह कहते नहीं थकते कि वे संवेदनशील हैं। अब सवाल यह है कि अगर डॉ.पटेरिया के रहते सिवनी में मलेरिया से एक मौत हो जाए, और डेंगू जैसे खतरनाक रोग के चार मरीज मिलें तब क्या बतौर भाजपा विधायक श्रीमति नीता पटेरिया द्वारा अपने ही पति डॉ.पटेरिया और भाजपा के नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के खिलाफ कठोर कार्यवाही का पत्र मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को लिखकर कार्यवाही कराने का साहस किया जा सकेगा?

डेंगू का मच्छर नहीं पहचानता सीमा!
वहीं, दूसरी ओर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.वाय.एस.ठाकुर भी इसके लिए जिम्मेदार माने जा सकते हैं। डॉ.ठाकुर की पत्नि श्रीमति शशि ठाकुर लखनादौन की विधायक हैं। डॉ.ठाकुर के हस्ताक्षरों से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि विवेकानन्द वार्ड में डेंगू के दो मरीज मिले हैं। डेंगू प्रभावित वार्ड में टेमीफॉस नामक दवा, पानी के भराव वाले क्षेत्र में डाली जा रही है, ताकि मच्छरों के लार्वा को नष्ट किया जा सके। डॉ.ठाकुर शायद यह भूल रहे हैं कि मच्छर इंसान नहीं है कि वह भारत पाकिस्तान सीमा को पार नहीं करेंगे। मच्छर तो स्वच्छंद है और उसे किस वार्ड की सीमा क्या है, इस बारे में भान नहीं होता है।

का वर्षा जब कृषि सुखानी
बहुत पुरानी कहावत है ‘का वर्षा जब कृषि सुखानी‘ अर्थात जब खेती ही सूख चुकी है तब बारिश होने का क्या फायदा! इसी तरह नगर पालिका प्रशासन द्वारा अब तक मच्छरों से निपटने के उपाय नहीं किए गए अब जब हालात् बेकाबू होने को हैं तब फागिंग मशीन और दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। जिला कलेक्टर भरत यादव से अपेक्षा है कि डेंगू और मलेरिया के लिए नगर पालिका प्रशासन की जिम्मेदारी तय करते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करें।

कलेक्टर लें बैठक, दें कड़े निर्देश
जिला कलेक्टर भरत यादव के हुक्मों की तामील में सरकारी नुमाईंदे कितने संजीदा है यह बात शनैः शनैः उभरकर सामने आती जा रही है। इसलिए जिला कलेक्टर भरत यादव को चाहिए कि वे तुरंत स्वास्थ्य विभाग, पालिका प्रशासन की एक बैठक लेकर शहर की साफ सफाई, आवारा मवेशियों और जानवरों विशेषकर सुअर और कुत्तों की धरपकड़ के अभियान, बरसात के पानी के एकत्रीकरण को रोकने आदि के अभियान हेतु कड़े निर्देश जारी करें।

तय करना होगा समय सीमा
जिला कलेक्टर भरत यादव के निर्देशों की हुक्मउदूली की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। जिला कलेक्टर को चाहिए कि वे इस तरह के संगीन मामलों में अपने निर्देशों को निश्चित समय सीमा (टाईम फ्रेम) तय करें। समय सीमा बीतने पर हुक्म उदूली करने वाले कारिंदे के खिलाफ कठोर कार्यवाही कर नजीर पेश करें ताकि प्रशासन का भय कर्मचारी, अधिकारियों में बन सके।

जिम्मेदारी से ना भागें सियासी दल

शहर में विपदा आन पड़ी है और सियासी दलों के प्रवक्ता शांत हैं। केंद्र और प्रदेश की सियासी हलचलों पर तबियत से गोले दागने वाले भाजपा और कांग्रेस के प्रवक्ता यह भूल जाते हैं कि भोपाल और दिल्ली में उन्ही के दलों के प्रवक्ता नियुक्त हैं जिनके कामों में हस्ताक्षेप जिला प्रवक्ताओं को नहीं करना चाहिए। शहर की इस नाजुक और गंभीर हालत में कांग्रेस और भाजपा सहित समस्त सियासी दलों से यही अपेक्षा है कि वे चुने हुए जनप्रतिनिधियों से रिश्तेदारी निभाना छोड़कर जनता के प्रति अपना दायित्व निभाएं ना कि जिम्मेदारियों से भागें।

जल जनित रोगों का कहर और निष्ठुर प्रशासन

जल जनित रोगों का कहर और निष्ठुर प्रशासन

(शरद खरे)

शिव की नगरी सिवनी का यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि यहां लोगों को बुनियादी सुविधाएं ही मुहैया नहीं है। विधायक सांसद चाहे कांग्रेस के हों या भाजपा के किसी को भी शिव की नगरी के लोगों से लेना देना ही नहीं रह गया है। सिवनी के लोग नारकीय पीड़ा भोग रहे हैं और नगर पालिका के पार्षद, उपाध्यक्ष, अध्यक्ष द्वारा लोगों की मजबूरी पर अट्टहास लगाया जा रहा है। सांसद विधायकों सहित विपक्ष में बैठी कांग्रेस और सत्ताधारी भाजपा संगठन नागरिकों की बेबसी पर ताली पीट रहा है। जब तब विज्ञप्ति जारी कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाली गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, सिवनी नगर विकास मंच आदि भी इस मामले में मौन रहकर नगर पालिका परिषद को अपना समर्थन दे रहा है।
वैसे तो साल के 365 दिनों में सिवनी के लोगों को आंत्रशोध, अमीबाईसिस, अपच, खट्टी डकार, ऐसीडिटी, पीलिया, उल्टी दस्त, डिहाईड्रेशन जैसे जल जनित रोगों की जद में रहते हैं, पर बारिश के मौसम में इनका प्रकोप तेजी से बढ़ जाता है। बारिश के मौसम में जिला चिकित्सालय जल जनित रोगों के मरीजों से अटा पड़ा है। निजी चिकित्सालयों, चिकित्सकों के पास मरीजों की भीड़ देखकर इसकी भयावहता का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। लोग चिकित्सकों की मंहगी फीस और मंहगी दवाओं से लुट रहे हैं।
कहने को तो जिला कलेक्टर भरत यादव और प्रभारी कलेक्टर प्रियंका दास अनेक बार बैठकों में सरकारी नुमाईंदों को ताकीद कर चुके हैं कि जल जनित रोगों के प्रति संवेदनशील रहें, कोताही ना बरतें। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.वाय.एस.ठाकुर भी जनसंपर्क विभाग के माध्यम से विज्ञप्ति पर विज्ञप्ति जारी कर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से अपील कर चुके हैं कि जल की गुणवत्ता की रिपोर्ट उन्हें प्रतिदिन दी जाए।
हालात देखकर लगने लगा है मानो जिला कलेक्टर या प्रभारी कलेक्टर के निर्देशों का वजन अब शायद नहीं रह गया है। वरना क्या कारण है कि जिला मुख्यालय में गर्मी के मौसम में जो नल एक बूंद पानी नहीं उगलते थे, वे आज चौबीसोें घंटे मोटी धारा बहा रहे हैं। मतलब स्पष्ट है कि इन नलों में नालियों और गटर का ही गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है। नलों मेें अगर पानी का छन्ना लगाकर पानी भरा जाए तो छन्ने में बाल, केंचुए, सर्प के बच्चे, झींगुर एवं अन्य कीड़ों के शव, जिन्दा कीड़े, मट्टी, रेत आदि तैरते दिखाई दे जाएंगे।
एक बाल्टी पानी में अगर फिटकरी का टुकड़ा कुछ देर घुमाकर पानी को स्थिर छोड़ दिया जाए तो कुछ समय के अंतराल के बाद बाल्टी की तलहटी में कचरा बैठा हुआ साफ दिखाई दे जाएगा। इस बात से नगर पालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या पार्षद सहित प्रशासन के आला अफसरान् इसलिए वाकिफ नहीं होंगे क्योंकि उन्हें घरों में ना पीने का पानी भरना होता है और ना ही निस्तार का। इनके मातहत ही यह काम करते होंगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भी बरास्ता जनसंपर्क मीडिया के माध्यम से आम जनता को यह बात नहीं बताई कि पीएचई विभाग उन्हें जल की गुणवत्ता के बारे में क्या प्रतिवेदन भेज रहा है।
पीएचई विभाग के पास पानी के कीटाणु मारने के लिए रायसेन जिले के औद्योगिक क्षेत्र मण्डीदीप के रामश्री केमीकल्स प्राईवेट लिमिटेड का उत्पाद जर्मेक्स जिसमेें सोडियम हाईड्रोक्लोराईड सॉल्यूशन होता है और जो पानी को कीटाणु रहित करता है की सौ मिलीलीटर की असंख्य बाटल्स उपलब्ध हैं। यह जर्मेक्स जनता को निःशुल्क बांटने के लिए है। यह कितनी तादाद में बांटा जा रहा है इस बारे में किसी को कुछ भी नहीं पता है। कहा जा रहा है कि इस लिक्विड को किसानों को बेचा तक जा रहा है, ताकि वे अपने अपने कुंओं का पानी साफ कर सकें। चर्चा है कि पीएचई के आला अफसरान् नहाने के पानी में भी इसका प्रयोग कर रहे हैं।
विडम्बना ही कही जाएगी कि इस जर्मेक्स के बारे में शहर के प्रथम नागरिक राजेश त्रिवेदी को भी पता नहीं है। गत दिवस हिन्द गजट के कार्यालय में जब वे आए तो उन्हें इसके बारे में बताया गया। राजेश त्रिवेदी भी अपने घर में पानी के शोधन के लिए एक बॉटल हिन्द गजट कार्यालय से लेकर गए। यह हाल है नगर पालिका का। नगर पालिका करोड़ों अरबों रूपए खर्च कर शहरवासियों को साफ पानी पिलाने का काम कर रही है। देखा जाए तो पालिका द्वारा जनता के गाढ़े पसीने की कमाई के करोड़ों अरबों रूपए पानी साफ करने के बजाए पानी में ही बहाए जा रहे हैं।

सिवनी शहर जल जनित रोगों की जद में है। संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव के सख्त निर्देश और प्रशासन के दावे खोखले ही साबित हो रहे हैं। जनता कराह रही है, उल्टी दस्त के मरीजों से अस्पताल हाऊस फुल हो रहा है। चिकित्सालय के संडास में मल उपर तक भर चुका है। लोग गटर का गंदा पानी पीने पर मजबूर हैं। नगर पालिका प्रशासन के चुने हुए नुमाईंदे आम जनता को साफ पानी देने के बाजाए ‘कमीशन के गंदे धंधे‘ और विधान सभा चुनावों की टिकिट की जुगाड़ में घूम रहे हैं। चर्चा है कि भाजपा से पूरी तरह उपकृत कांग्रेस के विज्ञप्तिवीर अपनी कलम रेत में गड़ा चुके हैं। भाजपा के जिलाध्यक्ष नरेश दिवाकर भी अपने एक कार्यकर्ता, भले ही वह नगर का प्रथम नागरिक हो की मश्कें कसने में अपने आप को बौना ही पा रहे हैं। कथित मीडिया मुगल भी विज्ञापन लेकर अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़ रहे हैं। स्थिति परिस्थित देखकर हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अगर रियाया को साफ पानी नहीं पिला सकते तो नगर पालिका के चुने हुए प्रतिनिधियों को पदों पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह जाता है भले ही वे हमारे अनुज राजेश त्रिवेदी क्यों ना हों।

बुधवार, 31 जुलाई 2013

सिवनी में मिले खतरनाक डेंगू के चार मरीज!

सिवनी में मिले खतरनाक डेंगू के चार मरीज!

विवेकानन्द वार्ड में 552 घरों के 1764 कंटेनर्स में 255 में मिले खतरनाक लार्वा: रियाया की जान से कर रही नगर पालिका जमकर खिलवाड़: विपक्ष में बैठी कांग्रेस देख रही चुपचाप तमाशा

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। जिला मुख्यालय सिवनी में घोषित तौर पर डेंगू के चार मरीजों के मिलने से हड़कंप मच गया है। साफ सफाई के अभाव में शहर भर में मच्छरों के लिए उपजाऊ माहौल पैदा हो रहा है, पर नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के नेतृत्व में पार्षद और पालिका प्रशासन ‘कमीशन के गंदे धंधे‘ में ही उलझा हुआ है। डेंगू रेपिड टेस्ट में 13 संभावित डेंगू के मरीजों की जांच में चार नमूने पॉजिटिव पाए गए हैं। खतरनाक डेंगू के लिहाज से अब सिवनी जिला भी ‘हाई अलर्ट‘ पर आ गया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.वाय.एस.ठाकुर के हस्ताक्षरों से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिला चिकित्सालय में डेंगू रेपिड किट से 13 संभावित डेंगू मरीजों की जांच की गई है, जिससे किट में चार मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। इन चारों का रक्त नमूना लेकर क्षेत्रीय आर्युविज्ञान शोध केंद्र (आरएमआरसी) जबलपुर भेजा गया था।
डॉ.ठाकुर ने बताया कि आरएमआरसी द्वारा विवेकानन्द वार्ड के संभावित डेंगू के नमूनों की 26 जुलाई को ही पुष्टि कर दी गई थी। शेष दो में अभी आरएमआरसी की राय आना शेष है।
उन्होंने बताया कि इसके उपरांत जबलपुर के कीट विज्ञानी डॉ.मनमोहन माहुलिया एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.वाय.एस.ठाकुर के द्वारा स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का दल बनाकर उन्हें बाकायदा प्रशिक्षित किया जाकर विवेकानन्द वार्ड में रवाना किया गया।
सीएमओ डॉ.ठाकुर का दावा है कि उनके द्वारा विवेकानन्द वार्ड के लिए 32 कर्मचारियों का दल बनाया गया है, जो घर घर जाकर लार्वा का सर्वे कर रहा है। जिन घरों में बुखार के पीड़ित मिल रहे हैं उन्हें मौके पर ही रक्त पट्टिका बनाकर त्वरित उपचार दिया जा रहा है।
इसके साथ ही साथ मकानों में जहां पानी जमा हो सकता है या हो रहा है इस तरह के कंटेनर्स को खाली करवाया जा रहा है। इन कंटेनर्स में टेमोफॉस नामक दवा डाली जा रही है ताकि मच्छरों का लार्वा नष्ट हो सके। डेंगू प्रभावित और संभावित विवेकानन्द वार्ड में फागिंग मशीन से धुंआ भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मच्छरों से सावधान रहने और सावधानियां बरतने के लिए विभाग द्वारा मुनादी पिटवाकर पर्चे भी बांटे जा रहे हैं।
डॉ.ठाकुर के अनुसार मंगलवार को इस विशेष दल ने डेंगू प्रभावित या संभावित वार्ड के 552 घरों का निरीक्षण किया। दल ने आज 1764 कंटेनर्स को देखा जिसमें से 255 में लार्वा पाए गए। इन कंटेनर्स को खाली कराया गया और दवा डाली गई। आज बनाई गई सारी रक्त पट्टिकाएं नकारात्मक ही पाई गईं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार अभी तक सिवनी जिले में डेंगू से मृत्यु के समाचार नहीं मिले हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों में रखे कंटेनर्स जिसमें पानी भरा रहता हो, उसे सात दिवस के अंदर एक बार अवश्य ही खाली कर लिया करें।
प्रदेश में मण्डला जिले के बाद सिवनी में डेंगू की खतरनाक स्थिति से हड़कंप मचना स्वाभाविक ही है। अब तक सिवनी के लोग समाचार माध्यमों के जरिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में डेंगू की बद से बदतर स्थिति और इससे होने वाली पीड़ा एवं मौत के आंकड़े देखा करते थे, अब इस जानलेवा और दर्दनाक डेंगू ने सिवनी में भी अपनी जड़ें गहरी कर ली हैं।
दरअसल, नगर पालिका परिषद के निकम्मेपन के चलते शहर भर में मच्छरों के प्रजनन के लिए उपजाऊ माहौल तैयार हो गया है। नगर पालिका परिषद में ‘कमीशन के गंदे धंधे‘ के चलते ना तो अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी, ना ही उपाध्यक्ष राजिक अकील और ना ही किसी पार्षद को नागरिकों के स्वास्थ्य की परवाह ही रह गई है।

नगर पालिका परिषद के पास फागिंग मशीन है इस फागिंग मशीन का तेल और दवा दोनों ही का बिल पालिका के बजट सत्र में पारित होता है, इसमें किसी भी पार्षद द्वारा अब तक अपनी आपत्ति दर्ज नहीं कराया जाना आश्चर्यजनक है कि जब मशीन किसी वार्ड में चलती ही नहीं दिखी तो फिर इसके देयक का भुगतान कैसा? कुल मिलाकर सभी, नागरिकों की चिंता छोड़ पैसा बनाने में जुट चुके हैं।

निरीह नागरिक, निकम्मी नगर पालिका!

निरीह नागरिक, निकम्मी नगर पालिका!

(शरद खरे)

नगर पालिका परिषद सिवनी अपने मूल काम से भटक चुकी है। नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराना, उनके मौलिक अधिकारों  का संरक्षण, बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम मूलतः नगर पालिका का होता है। नगर पालिका के जिम्मे शहर की साफ सफाई, शुद्ध पेयजल, अंदरूनी मार्गों का रखरखाव, जल निकासी के लिए नालियों की व्यवस्था, सड़कों पर प्रकाश की व्यवस्था आदि का होता है। पिछले कुछ सालों से नगर पालिका परिषद सिवनी अपने मूल उद्देश्य से भटककर चुने हुए प्रतिनिधियों और सरकारी नुमाईंदों के लिए पैसा कमाने का चारागाह बन चुकी है।
पालिका के नुमाईंदों ने मीडिया को भी अपने साथ मिला लिया है जो बहुत ही खतरनाक संकेत है। मीडिया को विज्ञापन का प्रलोभन देकर नगर पालिका के नुमाईंदों द्वारा सच्चाई पर पर्दा डालने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है जो निंदनीय है। माना जाता है कि अभिजात्य वर्ग के लोग शहरों में अधिक तादाद में निवास करते हैं। शहर का आदमी अपेक्षाकृत अधिक पढ़ा लिखा होता है। जिला मुख्यालय सिवनी में रहने वाले नगर पालिका परिषद की स्थिति, नागरिकों के अधिकारों के प्रति उसकी जवाबदेही और निर्वहन से वह भली भांति परिचित है।
मीडिया में इस बात को पता नहीं क्यों स्थान नहीं मिल पाया है कि नगर पालिका शहर में लोगों को गटर का गंदा पानी पिलाकर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। कहीं भवन की अनुज्ञा मिल पाई या नहीं इस बात से आम जनता को लेना देना नहीं है। शहर में स्वीमिंग पूल है अथवा नहीं इससे आम आदमी पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता। वैसे भी स्वीमिंग पूल को रईसों का प्यारा शगल माना जाता है। आम जनता को तो बस साफ पानी चाहिए, उसके घर के आसपास कचरे के ढेर ना हों, प्रकाश की उचित व्यवस्था हो, घरों के पानी की निकासी की नालियां गंदगी से ना बजबजा रही हों, यही उम्मीद रहती है आम आदमी की नगर पालिका परिषद से।
विडम्बना ही कही जाएगी कि नगर पालिका में बैठे कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों का ध्यान इस ओर क्यों नहीं जाता है। दलसागर तालाब के आसपास सौंदर्यीकरण के नाम पर एक करोड़ रूपयों में आग लगा दी गई। नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी अगर वाकई सिवनी की जनता के प्रति जवाबदेह होते तो निश्चित तौर पर वे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और स्थानीय शासन मंत्री बाबू लाल गौर से (जिनसे करीबी का वे दावा करते हैं) दलसागर के सौंदर्यीकरण के लिए राशि बाद में मांगते पहले सिवनी के वाशिंदों को दो नहीं तो कम से कम एक वक्त साफ पानी मुहैया करवाने की योजना स्वीकृत करवाते। सिवनी की जल मल निकासी की योजना के लिए प्रदेश शासन से धन की मांग करते। वस्तुतः ऐसा हुआ नहीं।
अगर इन योजनाओं की स्वीकृति मिलती तो इनको अमली जामा पहनाते समय सभी का निर्धारित हिस्सा (कमीशन) मिलता ही, पर आम जनता राजेश त्रिवेदी और भारतीय जनता पार्टी को दिल से साधुवाद देती, पर आज स्थिति उलट ही है। आज जनता के मन में भाजपा की छवि प्रतिकूल बनती जा रही है। शहर में भारतीय जनता पार्टी का कार्यालय बारापत्थर में है। इस कार्यालय में भाजपा के लोग साफ सुथरा पानी पी रहे हैं।
भापजा विधायकों द्वारा उपकृत कांग्रेस के नेता, इस बात को जनता के समक्ष लाने में पता नहीं क्यों हिचकिचा रहे हैं कि भाजपा के लोग उनके धन से (विधायक निधि) से खनित किए गए नलकूप जो संभवतः आम जनता के उपयोगार्थ होना चाहिए (वस्तुतः ऐसा है नहीं, नलकूूप को सीधे भाजपा कार्यालय के अंदर ले जाया गया है) का साफ सुथरा पानी पी रहे हैं। इस नलकूप के खनन के लिए विधायक निधि से एक लाख रूपए की राशि का आहरण किया गया है। यह नैतिकता है जनता की सेवा करने का दावा करने वाली भाजपा और विपक्ष में बैठी कांग्रेस की।
अभी मामला अगर शिवराज सिंह चौहान से संबंधित होता तो कांग्रेस के विज्ञप्तिवीरों की तोपें भोपाल की ओर तन चुकी होतीं। एक दैनिक समाचार पत्र द्वारा विधायक निधि की राशि की बंदरबांट में नाम उजागर कर बेहद अनुकरणीय कदम उठाया जा रहा है। आश्चर्य तो उस समय हुआ जब कांग्रेस के नेताओं के परिजनों, मीडिया से जुड़े लोगों के नाम इस निधि की राशि में प्रकाश में आए। इस तरह के काम से सेवा भाव वाले मूल आदर्श की सियासत और पत्रकारिता कलंकित ही हो रही है, पर जिनका दीन ईमान ही पैसा हो गया हो, उन्हें क्या मतलब कि नैतिकता किस चिड़िया का नाम है!

नगर पालिका सिवनी में अफसरशाही, नेतागिरी, भ्रष्टाचार, अनाचार, रिश्वतखोरी, अनैतिकता, के बेलगाम घोड़े दौड़ रहे हैं। नगर पालिका कार्यालय के अंदर बिड़ी सिगरेट के टोंटे इस कदर बिखरे पड़े रहते हैं मानो यह बियर बार हो। केंद्र सरकार द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान की बंदिश का कानून बनाया है पर आज कानून की परवाह किसे रह गई है! नगर पालिका पर भारतीय जनता पार्टी का शासन है, पालिका प्रशासन की हरकतों से भारतीय जनता पार्टी की साख पर बट्टा लग रहा है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। भाजपा के जिलाध्यक्ष नरेश दिवाकर भी इस मामले में खामोश हैं, जिससे नागरिकों को लगने लगा है कि पालिका की इन हरकतों में उनकी मौन सहमति है, वरना क्या कारण है कि निकम्मी नगर पालिका मनमानी पर उतारू है, निरीह नागरिक कराह रहे हैं और शासन प्रशासन एवं भाजपा संगठन अपने आप को किसी तरह की कार्यवाही करने में अपने आप को पालिका के चंद नुमाईंदों के सामने बौना पा रहा है।

मंगलवार, 30 जुलाई 2013

आयुष विभाग का वेतन रूका!

आयुष विभाग का वेतन रूका!

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। आयुष विभाग के कर्मचारियों का माह जून का वेतन एक बार फिर रूक गया है। जिला कोषालय द्वारा वेतन देयकों में अनावश्यक कांट छांट कर सफेदा लगाने से वेतन पत्रक को पुनः आयुष विभाग को लौटा दिए हैं।
जिला कोषालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि आयुष विभाग के माह जून के वेतन देयक जिला कोषालय में प्रस्तुत किए गए थे। इन वेतन देयकों में जबर्दस्त तरीके से छेड़छाड़ कर सफेदा लगाकर करेक्शन किए गए थे। इन करेक्शन से वेतन देयक संदिग्ध प्रतीत हो रहे थे।
उधर, आयुष विभाग के सूत्रों का कहना है कि जिला आयुष अधिकारी सतीश चंद्र गर्ग द्वारा कुछ कर्मचारियों के वेतन रोकने की मंशा से उनके वेतन पत्रक में अनावश्यक कांट छांट की गई थी। इस तरह कांट छांट कर उसमें सफेदा लगाकर ओवर राईटिंग की गई थी।

इधर, आयुष्ज्ञ विभाग के कर्मचारियों को त्योहारों के मौसम में जून माह का वेतन ना मिल पाने से छोटे कर्मचारियों के घर काफी हद तक तकलीफों की बाढ़ आ गई है। जिला प्रशासन से उचित कार्यवाही की अपेक्षा है।

अगले 48 घंटे में भारी बारिश की चेतावनी

अगले 48 घंटे में भारी बारिश की चेतावनी

(ब्यूरो कार्यालय)


सिवनी (साई)। जबलपुर संभाग में अगले चौबीस घंटे और बारिश का कहर बना रह सकता है। हिन्द गजट ने सोमवार 29 जुलाई के अंक में ‘सावन की झड़ी ने रूलाया सभी को‘ शीर्षक से प्रकाशित समाचार में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के भोपाल ब्यूरो सोनल सूर्यवंशी द्वारा मौसम विभाग के सूत्रों के हवाले से यह खबर प्रकाशित की थी कि अगले 48 घंटों में जबलपुर सहित अनेक संभागों में भारी बारिश होने की संभावना है।
वहीं, प्रभारी कलेक्टर एवं सीईओ. जिला पंचाय्ात श्रीमती प्रिय्ांका दास की अध्य्ाक्षता में आज कलेक्ट्रेट के सभाकक्ष में जिले के सभी विभाग प्रमुखों की साप्ताहिक विभागीय्ा समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में सभी जिलाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में प्रभारी कलेक्टर श्रीमती दास ने मौसम विभाग भोपाल द्वारा जबलपुर संभाग में अगले ४८ घंटों में भारी बारिश होने की चेतावनी/अलर्ट जारी करने की जानकारी देते हुए जिले के सभी तहसीलदारों को निर्देशित किय्ाा है कि वे अतिवृष्टि की आशंका के चलते सचेत रहें, सदैव सतर्क रहें।
उन्होंने कहा कि बाढ से हुई नुकसानी का सर्वे करा लें और पात्र्ाों को मुआवजे का भुगतान करें। प्रभारी कलेक्टर ने कहा कि सभी एस.डी.एम. अपने-अपने क्षेत्र्ाों में मध्य्ाान्ह भोजन पर विशेष निगरानी रखकर स्कूलों में हैंडवाश य्ाूनिट स्थापित कराय्ों। उन्होंने कहा कि सभी एस.डी.एम. अपने क्षेत्र्ाों में पेय्ाजल स्त्र्ाोतों की साफ-सफाई कराय्ों, क्लोरीनेशन कराय्ों, गांवों मेंसाफ-सफाई की समुचित व्य्ावस्था के अधीनस्थ अमले को ताकीद करें और इस कायर््ा की सतत् रूप से मानीटरिंग भी करें।
इसके साथ ही साथ सभी एस.डी.एम. अभिय्ाान चलाकर फल, सब्जी विक्रेताओं, मिठाई प्रतिष्ठानों और मेडीकल स्टोर्स आदि की औचक रूप से जांच करें। उन्होंने कहा कि जिले के सभी आश्रम, छात्र्ाावासों और आवासीय्ा विद्यालय्ाों में वर्षाकाल को देखते हुए शुद्ध पेय्ाजल, परिसर की साफ-सफाई एवं मौसमी संक्रामक बीमारिय्ाों की रोकथाम के लिय्ो सभी उपाय्ा किय्ो जाय्ांे। साथ ही इन संस्थाओं में जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारिय्ाों के फोन नम्बर्स भी लिखवाय्ों जाय्ों।
दीपक खाण्डेकर तीन को करेंगे निरीक्षण
बैठक में प्रभारी कलेक्टर श्रीमती दास ने जानकारी दी कि कमिश्नर जबलपुर संभाग दीपक खांडेकर ३ अगस्त को जिले के प्रवास पर आय्ोंगे। कमिश्नर श्री खांडेकर केवलारी के बाढ़ प्रभावित गांवों मोहगांवमाल, खैरापलारी एवं चिरचिरा का भ्रमण करते हुए घंसौर और धनौरा विकासखंड क्षेत्र्ा के गांवों का भी दौरा करेंगे। इस संबंध में प्रभारी कलेक्टर ने एस.डी.एम. केवलारी, एस.डी.एम. घंसौर, सी.एम.एच.ओ., महिला एवं बाल विकास विभाग, उपसंचालक कृषि, मत्स्य्ाोद्योग, पशु चिकित्सा को निर्देशित किय्ाा कि वे कमिश्नर के दौरे को लेकर समस्त व्य्ावस्थाय्ों/रूट चार्ट तैय्ाार कर लें।

भीमगढ़ का पानी, पूर्व सूचना के बाद छोड़ें

बैठक में प्रभारी कलेक्टर ने कायर््ापालन य्ांत्र्ाी तिलवारा बाय्ाी तट नहर संभाग को निर्देशित किय्ाा कि भीमगढ बांध से जब भी पानी छोड़ा जाय्ो, तो उसकी सूचना सर्व संबंधितों को पूर्व में ही दी जाय्ो। प्रभारी अधिकारी राहत संबंधित बालाघाट, गोंदिय्ाा, भंडारा जिले के प्रभारी अधिकारी राहत य्ाा अपर कलेक्टर को इसकी सूचना दूरभाष पर दें।

होटलों में धड़ल्ले से हो रहा घरेलू गैस का प्रयोग!

होटलों में धड़ल्ले से हो रहा घरेलू गैस का प्रयोग!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। जिले भर में होटल, ढाबों, चाय की दुकानों में घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है, पर इसकी रोकथाम के लिए निर्धारित खाद्य विभाग हाथ पर हाथ रखे ही बैठा है। दिखाने को दो एक माह में खाद्य विभाग द्वारा एकाध बार कार्यवाही कर विज्ञप्ति जारी करवाकर वाहवाही लूट ली जाती है पर जमीनी हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है।
ज्ञातव्य है कि कुछ दिन पूर्व खाद्य विभाग द्वारा मारे गए छापे में नौ गैस के सिलेन्डर, रेग्यूलेटर, गैस चूल्हा अनेक प्रतिष्ठानों से जप्त किए गए थे। इसके पहले और इसके बाद खाद्य विभाग एक बार फिर सुसुप्तावस्था में चला गया है। जब खाद्य विभाग द्वारा यह छापा मारा गया तो उसके उपरांत विभाग द्वारा बड़े ही गर्व के साथ बताया गया था कि जिला कलेक्टर भरत यादव के निर्देशानुसार उक्त कार्यवाही की गई है।
बताया जाता है कि जिले भर में विशेषकर जिला मुख्यालय में संचालित होटल, ढ़ाबे, चाय की दुकानों में सरेराह घरेलू गैस के सिलेन्डर के माध्यम से व्यवसाय किया जा रहा है, जबकि व्यवसायिक उपयोग के लिए कमर्शियल सिलेन्डर लेने का प्रावधान है। यक्ष प्रश्न तो यह है कि जब आम उपभोक्ता गैस एजेंसी जाकर घरेलू गैस के उपयोग के लिए सिलेंडर की मांग करता है तब उसे एक सौ एक नियम कायदे बताकर हैरान परेशान किया जाता है और दूसरी ओर व्यवसायिक उपयोग के लिए हाथों हाथ सिलेंडर किस तरह मिल रहे हैं!
बताया जाता है कि शादी ब्याह, मेले ठेले, पार्टी आयोजनों में भी एकाध कमर्शियल सिलेंडर दिखाने के लिए रख दिया जाता है बाकी का सारा काम घरेलू सब्सिडाईज्ड गैस सिलेंडर के माध्यम से ही किया जाता है। छोटे बड़े दुकानदारों का साहस इतना बढ़ गया है कि वे सड़कोें पर ही लाल रंग के सब्सिडाईज्ड सिलेंडर ही रखकर अपना व्यवसाय कर रहे हैं। मजे की बात तो यह है कि खाद्य विभाग के जिम्मेदार कारिंदे इन चाय की गुमटियों पर लाल रंग का सिलेंडर देखने के बाद भी वहां चाय की चुस्कियां बड़े स्वाद के साथ लेते नजर आते हैं।

जिले भर में ना जाने पेट्रोल से चलने वाले ऐसे कितने वाहन हैं जिनमें गैस की किट लगी हुई है। गैस से चलने वाले अधिकांश वाहन घरेलू उपयोग की रसाई गैस से ही संचालित हो रहे हैं। शहर भर में अनेक स्थानों पर ‘टंकी पलटाने‘ अर्थात घरेलू उपयोग की रसोई गैस को वाहन की गैस टंकी में भरने का खतरनाक काम किया जा रहा है। यह सब धड़ल्ले से हो रहा है और खाद्य विभाग ध्रतराष्ट्र बनकर बैठा हुआ है।

मुखालफत करने वालों से चुन चुन कर लिया जा रहा है बदला!

मुखालफत करने वालों से चुन चुन कर लिया जा रहा है बदला!

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। नगर पालिका परिषद का काम वैसे तो नगर के लोगों के अमन चैन, साफ सफाई, प्रकाश, बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाने का होता है पर सिवनी की नगर पालिका परिषद में उलट बंसी ही बजती दिख रही है। नगर पालिका में उन वार्ड में काम नहीं करवाए जा रहे हैं जिन वार्ड के पार्षद नगर पालिका के नेतृत्व के खिलाफ हैं या जिन वार्ड से नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी को जनादेश नहीं मिल पाया है।
बताया जाता है कि जबसे नगर पालिका परिषद की कमान युवा नेता राजेश त्रिवेदी के हाथों में आई है नगर पालिका परिषद में अराजकता पसर गई है। अनेक वार्डों में जहां गर्मी के मौसम में नल एक बूंद भी पानी नहीं उगलते थे, वहां अब चौबीसों घंटे नलों से पानी आ रहा है। जाहिर है यह पानी नगर पालिका की पानी की टंकी से तो नहीं ही आ रहा है। यह भूमिगत पाईप लाईन के माध्यम से गटर और नाली का गंदा पानी ही आ रहा है जिसे पीकर लोग डायरिया, आंत्रशोध, पीलिया जैसी गंभीर बीमारियों की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं।
वहीं, बबरिया के निवासियों का कहना है कि वार्ड में बारिश के मौसम में व्याप्त गंदगी, नालियां ओवर फ्लो होकर पानी घरों में घुसने आदि की शिकायत लेकर जब वे नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के पास गए तो राजेश त्रिवेदी ने दो टूक शब्दों में यह कह दिया कि उस वार्ड से उन्हें (राजेश त्रिवेदी को) वोट ही नहीं मिले तो वे उस वार्ड के लिए काम क्यों करें?
पालीटेक्निक कालेज के पीछे बबरिया टोला में गंदगी का आलम यह है कि यहां लोग मलेरिया, हैजा, आंत्रशोध, पीलिया, उल्टी दस्त जैसी बीमारियों से ग्रसित होते जा रहे हैं। वार्ड में अनेक स्थानों पर गर्मी के मौसम में नल ना आने की शिकायत आम होती थी, पर अब तो चौबीसों घंटे नलों सें पानी का धल्ला बह रहा है। लोगों के अनुसार नल इस पानी में केंचुए, कचरा, मिट्टी, सांप के बच्चे, झींगुर, बाल आदि उगल रहे हैं। यह पानी निश्चित तौर पर नालियों का गंदा या गटर का ही पानी है जिसका उपभोग यहां तक कि पीने के लिए भी करने के लिए नगर वासी मजबूर हैं।
यहां उल्लेखनीय होगा कि परिसीमन के पहले बबरिया टोला ग्राम पंचायत बबरिया की हिस्सा था। इस ग्राम पंचायत में लंबे समय तक वार्ड पार्षद श्रीमति सीमा चौरसिया के पति संजय चौरसिया सरपंच रहे हैं। उनके कार्यकाल में ग्राम पंचायत बवरिया ने प्रगति के नए आयाम स्थापित किए थे।
उधर, वार्ड पार्षद श्रीमति सीमा चौरसिया ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि उनका पुत्र बीमार था, जिसे लेकर वे नागपुर गईं थीं। नागपुर में उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो वे दिल्ली गईं और लगभग एक पखवाड़े तक अपने पुत्र का इलाज करवाकर वे कल ही वापस लौटीं हैं।
श्रीमति सीमा चौरसिया ने कहा कि दरअसल, षणयंत्र के तहत वार्ड के जमादार संतोष डागोरिया का यहां से स्थानांतरण कर दिया गया है, जिससे सफाई व्यवस्था लड़खड़ा गई है। इसके साथ ही साथ उन्होंने बताया कि उनके वार्ड में पहले ट्रेक्टर ट्राली से कचरा उठवाया जाता था, उसे भी नगर पालिका परिषद द्वारा हटा लिया गया है। अब उनके वार्ड में हाथ से धकेलने वाली ट्राली से कचरा उठवाया जा रहा है जिसके चलते यह समस्या उत्पन्न हुई है।

शहर में चल रही चर्चाओं के अनुसार लोगों को राहत देने के बजाए, अपने विरोधियों या गलत बातों को इंगित करने वालों के खिलाफ माहौल बनवाने की बात तर्कसंगत प्रतीत नहीं होती है। सियासत में मित्र शत्रु होना जुदा बात है, वर्चस्व की जंग अपने आप में सही है पर इसका असर अगर नगर की रियाया पर पड़ने लगे तो सियासत करने वाले को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह जाता है।

झाबुआ पावर, विकास और रासलीला!

झाबुआ पावर, विकास और रासलीला!

(शरद खरे)

सिवनी जिले में नेतृत्व का अभाव नब्बे के दशक से साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। जब तक पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा सक्रिय राजनीति में थीं तब तक सिवनी के विकास के जो सौपान तय किए गए उसे आज प्रौढ़ और उमरदराज हो रही पीढ़ी भली भांति जानती है। विध्न संतोषियों ने सुश्री विमला वर्मा को कथित तौर पर षणयंत्र के तहत सक्रिय राजनीति से किनारे होने पर मजबूर कर दिया। इसके उपरांत सिवनी में पूरी तरह गैर मूल्य आधारित निहित स्वार्थ वाली राजनीति का आगाज हो गया।
सिवनी के विकास पर इसी के उपरांत ग्रहण लगना आरंभ हुआ। सिवनी में सियासी हल्कों में हल्कापन तेजी से पसर गया और फिर विकास का रथ अवरूद्ध होता चला गया। इसके बाद विकास के मायने ही बदल गए। सिवनी में एक एक करके पुराने उद्योग धंधे बंद होते चले गए पर ना किसी सांसद ना विधायक ने इस ओर ध्यान देना उचित नहीं समझा। सिवनी की शराब डिस्टलरी भी बंद हो गई।
सिवनी में एनटीपीसी का पावर ग्रिड स्थापित हुआ। शहरी सीमा से महज चार किलोमीटर दूर जबलपुर रोड़ पर एनटीपीसी ने अपने वितरण केंद्र की संस्थापना करवाई हैै। करोड़ों रूपयों की लागत वाले इस वितरण केंद्र के लिए सैकड़ों एकड़ जमीन एनटीपीसी को दी गई है। यहां वितरण केंद्र के अंदर कर्मचारियों को रहने की व्यवस्था भी है। यह वितरण केंद्र सिवनी के लिए शोभा की सुपारी से कम नहीं है। इस वितरण केंद्र से सिवनी को क्या फायदा है, यह बात सिवनी के विकास का ठेका लेने वाले अगर बता दें तो मेहरबानी से कम नहीं होगा।
जब घोषित और अघोषित बिजली कटौती होती रही है तब भी इस वितरण केंद्र के अंदर सोडियम लेंप जगमगाते रहे हैं। क्या सिवनी को इससे विद्युत आपूर्ति हो रही है? क्या यहां रहने वालों से नगर पालिका या किसी ग्राम पंचायत को कर के रूप में कुछ आवक हो रही है? क्या इसका कोई लाभ सिवनी को मिल रहा है? जाहिर है तमाम प्रश्नों के उत्तर नकारात्मक ही होंगे। फिर क्या वजह है कि सिवनी जिले की भूमि इसके लिए दे दी गई। निश्चित तौर पर यह राष्ट्रीय विकास का मसला है पर इसमें सिवनी की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी, वस्तुतः ऐसा हुआ नहीं।
अब घंसौर में देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह जो शराब निर्माण से लेकर शिक्षा के क्षेत्र में भी अपनी गहरी पैठ रखता है के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा एक पावर प्लांट लगाया जा रहा है। यह पावर लगभग सात हजार करोड़ रूपयों की लागत से लगने वाले इस पावर प्लांट के लिए घंसौर के नेता नुमा ठेकेदारों ने अपना कब्जा जमा लिया है। संयंत्र प्रबंधन इनके इशारों पर कत्थक कर रहा है। सिवनी के कथित मीडिया मुगलों को ये नेता नुमा ठेकेदार पैसों के बल पर अपनी देहरी पर कत्थक करवा रहे हैं। मीडिया के गुणधर्म, एथिक्स को भूलकर मीडिया को दुकान समझने वाले ये कथित मीडिया मुगल इनकी देहरी पर कत्थक करने को अपनी शान समझ रहे हैं।
वर्ष 2009 से सिवनी में गौतम थापर के इस पावर प्लांट की संस्थापना की नींव रखी गई है। आरंभ से ही यह पावर प्लांट विवादों में घिरा रहा है। सिवनी का यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि सिवनी जिले में लगने वाले इस पावर प्लांट का एक भी कार्यालय जिला मुख्यालय सिवनी में नहीं है। अगर किसी को कोई सूचना का आदन प्रदान करना हो तो उसे सिवनी से लगभग सौ किलोमीटर का सफर तय कर घंसौर के बरेला जाना होता है। जिला प्रशासन ने भी इस दिशा में अब तक कोई पहल नहीं की है कि सिवनी में लगने वाले पावर प्लांट का कार्यालय सिवनी के बजाए जबलपुर में क्यों?
पावर प्लांट के एक कर्ताधार्ता अधिकारी मेंहदीरत्ता जी से अगर उनके मोबाईल (जो आसानी से उपलब्ध नहीं है, सिवनी में चुनिंदा बिचौलियों के पास ही है, हमें भी बमुश्किल ही मिल पाया है) 9977802499 पर संपर्क कर पूछा जाए तो वे यही कहते पाए जाएंगे कि जबलपुर संयंत्र स्थल से पास है अतः वहां कार्यालय है। अगर ऐसा ही था तो पावर प्लांट जबलपुर जिले में ही लगवा लिया जाता उसके लिए सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील का सीना क्यों छलनी किया जा रहा है?
इस संयंत्र में कितने लोग कहां कहां से आकर काम कर रहे हैं यह बात संयंत्र प्रबंधन ही जानता है। पिछले दिनों घंसौर में चार साल की मासूम गुड़िया के साथ इसी पावर प्लांट के एक वेल्डर ने दुराचार किया। अंत में गुड़िया की इहलीला समाप्त हो गई। यह सब होने के बाद ना प्रशासन चेता ना पुलिस। संयंत्र प्रबंधन तो बस किसी तरह काम निकल जाए की तर्ज पर काम कर ही रहा है। हाल ही में संयंत्र में कार्यरत एक सुरक्षा कर्मी ने महज तेरह साल की कोमलांगी बाला के सामने अपने कपड़े उतार दिए। अब तक ना जाने कितने लोग इस संयंत्र में निर्माण के दौरान दम तोड़ चुके हैं। इसकी जानकारी घंसौर पुलिस को नहीं है ऐसा नहीं है पर माता लक्ष्मी में बहुत दम होती है इस बात का साक्षात उदहारण देखने को मिल रहा है घंसौर में।

आखिर हो क्या रहा है इस संयंत्र में! आखिर देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर अपने गुर्गों से क्या करवाना चाह रहे हैं सिवनी में? आखिर पुलिस ने अब तक दर्ज मामलों में गौतम थापर के खिलाफ मामला पंजीबद्ध क्यों नहीं किया? आखिर गौतम थापर इस कंपनी के सीधे सीधे मालिक हैं, यह जवाबदेही गौतम थापर की बनती है कि वे अपने संस्थान में अच्छे और चरित्रवान कर्मचारी रखें। इधर पुलिस की जवाबदेही है कि अगर गौतम थापर ऐसा नहीं कर रहे हैं तो उन्हें कटघरे में खड़ा करें। गौतम थापर खरबपति हैं तो क्या हुआ? क्या भारत गणराज्य का कानून अमीर गरीब में भेद करता है? घंसौर पुलिस को चाहिए कि वह गौतम थापर के खिलाफ भी कार्यवाही करते हुए उनकी हाजिरी घंसौर थाने में लगवाए तभी गौतम थापर अपने संयंत्र की जमीनी हकीकत से रूबरू हो पाएंगे और सिवनी की बालाएं गौतम थापर के छोड़े गए इन नरपिशाचों से बच पाएंगी!