शनिवार, 28 सितंबर 2013

शक्ति के समर्थन में उमड़ा जनसैलाब

शक्ति के समर्थन में उमड़ा जनसैलाब

(विकराल सिंह बघेल)

केवलारी/छपारा (साई)। युवा एवं कद्दावर नेता कुंवर शक्ति सिंह के समर्थन में आज छपारा में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। आज खुर्सीपार के दंगल में पहुंचे शक्ति सिंह उर्फ अजीत भैया की अगवानी के लिए युवाओं का जोश देखते ही बन रहा था। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के रजनीश सिंह के खेमे में इस सैलाब को देखकर सन्नाटा पसरा रहा।
कुंवर शक्ति सिंह आज सुबह मोनी दादा के आश्रम देवघाट पहुंचे, जहां उन्होंने सिवनी की पुण्य सलिला बैनगंगा की पूजा अर्चना करने के उपरांत छपारा के लिए रवानगी डाली। कुंवर शक्ति सिंह के साथ लगभग 100 बाईक सवार और आधा सैकड़ा चौपहिया वाहनों का काफिला जिस भी गांव से गुजर रहा था, वहां लोग हैरत के साथ इसे देख रहे थे।
अपरान्ह जब यह काफिला छपारा शहर पहुंचा तो वहां लोगों ने दिल से शक्ति सिंह का स्वागत किया। बताया जाता है कि छपारा में आज फल फूल की दुकानें सूनी ही रहीं। शक्ति सिंह के समर्थकों द्वारा खुद ही सारे फल फ्रूट खरीदकर दंगल में ले जाकर उपस्थित लोगों के बीच बांटे गए।

दंगल में भी युवा हृदय सम्राट कुंवर शक्ति सिंह का तहेदिल से इस्तकबाल किया गया। दंगल में आए पहलवानों को पहलवानी के गुरू सिखाकर कुंवर शक्ति सिंह ने पहलवानी के प्रति अपने समर्पण का भी इजहार किया।

चिकित्सालय में तीन ही चिकित्सक लिखते हैं सही दवाएं: डॉ.सोनी

चिकित्सालय में तीन ही चिकित्सक लिखते हैं सही दवाएं: डॉ.सोनी

संचालनालय, कलेक्टर व सीएमओ के निर्देश मायने नहीं रखते डॉ.सत्यनारायण सोनी के लिए

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जिला चिकित्सालय में पदस्थ तीन विशेषज्ञ ही सही दवाएं लिखते हैं, बाकी चिकित्सकों की लिखी दवाओं पर भरोसा नही किया जा सकता है। पेंशनर्स को दवाएं अगर चाहिए तो इन्हीं तीन मेडीकल स्पेशलिस्ट को दिखाएं और इनसे दवाएं लिखवाएं। अगर ये चिकित्सक ओपीडी में नहीं मिलते हैं तो इनके मिलने तक पेंशनर्स इंतजार करें नहीं तो दूसरे या तीसरे दिन या रोज आकर इनका इंतजार करें, फिर दवाएं लिखवाएं।
उक्ताशय की बात जिला चिकित्सालय सिवनी के चर्चित सिविल सर्जन डॉ.सत्यनारायण सोनी द्वारा आज आरएमओ डॉ.पुरूषोत्तम सूर्या, डॉ.टीकाराम बांद्रे और डॉ.दीपक अग्निहोत्री की उपस्थिति में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कही गयीं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया द्वारा जब उनसे यह पूछा गया कि पेंशनर्स को दवाएं अस्पताल से मिलने की क्या व्यवस्था है? तो उन्होंने कहा कि अस्पताल से पेंशनर्स को दवाएं मिल रही हैं और अगर अस्पताल में नहीं हैं तो उन्हें खरीदकर दी जा रही हैं।

विशेषज्ञ हैं अधिकृत
डॉ.सत्यनारायण सोनी ने कहा कि उनके द्वारा पेंशनर्स को दवाएं लिखने के लिए भेषज विशेषज्ञों को अधिकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि चिकित्सालय में डॉ.ए.के.तिवारी, डॉ.एस.के.नेमा और डॉ.टीकाराम बांद्रे विशेषज्ञ के रूप में पदस्थ हैं। उन्होंने कहा कि पेंशनर्स को अगर दवाएं चाहिए या अस्पताल द्वारा बाजार से खरीदकर दवाएं दें तो इसके लिए पेंशनर्स को सिर्फ और सिर्फ विशेषज्ञों से दवाएं लिखवाना जरूरी है। अगर विशेषज्ञ दवाएं नहीं लिखते हैं, तो उन्हें बाजार से दवा खरीदकर कतई नहीं दी जाएगी।

विशेषज्ञ के अलावा भरोसा नहीं
जब डॉ.सत्यनारायण सोनी से यह पूछा गया कि उनकी इस बात का यह आशय निकाला जाए कि सिविल सर्जन को विशेषज्ञ के अलावा अन्य चिकित्सकों पर भरोसा नहीं है, और बाकी के चिकित्सक गलत दवाएं लिख रहे हैं? इस पर डॉ.सत्यनारायण सोनी ने कहा कि हो सकता है बाकी के चिकित्सक गलत दवाएं लिख रहे हों। जब डॉ.सत्यनारायण सोनी की इस बात पर डॉ.बांद्रे, डॉ.सूर्या और डॉ.अग्निहोत्री से पूछा गया कि क्या वे गलत दवाएं लिखते हैं तो तीनों महज मुस्कुरा दिए।

नहीं मिलते विशेषज्ञ
डॉ.सत्यनारायण सोनी के संज्ञान में यह बात लाई गई कि ओपीडी में बने विशेषज्ञ कक्ष जिसमें सिर्फ डॉ.ए.के.तिवारी के नाम की ही नेम प्लेटलगी है, में कोई विशेषज्ञ ही नहीं मिलता तो मरीज आखिर कहां जाए? इस पर उन्होंने छूटते ही कहा कि एक विशेषज्ञ अवकाश पर हैं, दूसरे राउंड पर होंगे तथा तीसरे डॉ.टीकाराम बांद्रे उनके सामने ही पुलिस के लिए कुछ जांच कर रहे हैं। डॉ.सत्यनारायण सोनी ने कहा कि डॉ.बांद्रे दो दिन पुराना काम निपटा रहे हैं, इस कदर कमी है चिकित्सकों की प्रियदर्शनी के नाम से सुशोभित जिला चिकित्सालय में!

ओपीडी के बाद करवाएं अन्य काम!
जब डॉ.सत्यनारायण सोनी से यह कहा गया कि अगर इस तरह के काम संपादित ही करवाना है तो बेहतर होगा कि ओपीडी के समय सुबह आठ से एक बजे के बाद इन कामों को संपादित करवाया जाए ताकि कम से कम पेंशनर्स को तो विशेषज्ञ की लिखी सही दवाएं मिल सकें। इस पर वे मुस्कुराते ही रहे।

रात भर की ड्यूटी अब देना है बयान
मौके पर उपस्थित डॉ.दीपक अग्निहोत्री से सीएस डॉ.सत्यनारायण सोनी कुछ वाद-विवाद कर रहे थे। बात मोबाईल के स्विच ऑफ होने की हो रही थी। जब डॉ.दीपक अग्निहोत्री से पूछा गया कि वे ओपीडी के समय डॉ.सत्यनारायण सोनी के दरबारमें क्या कर रहे हैं तो उन्होंने बताया कि उनकी नाईट ड्यूटी थी। वे रात भर ड्यिूटी कर सुबह घर गए थे, और फिर पेंशनर्स को दवाएं न लिखने की शिकायत पर संवदेनशील जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए आदेशों के उपरांत होने वाली जांच में बयान देने के लिए आए हैं। ज्ञातव्य है कि डॉ.दीपक अग्निहोत्री द्वारा वरिष्ठ पेंशनर डी.बी.नायर को दवा नहीं लिखने का कारण सिविल सर्जन डॉ.सत्यनारायण सोनी द्वारा मौखिक तौर पर दिए निर्देश बताया गया था। इसकी शिकायत डी.बी.नायर द्वारा जिला कलेक्टर से की गई थी। जिला कलेक्टर द्वारा इसकी जांच आहूत करवा दी है।

दवा काउंटर है खाली!

जब सिविल सर्जन डॉ.सत्यनारायण सोनी से यह पूछा गया कि दीनदयाल दवा वितरण कक्ष में बने पेंशनर्स के प्रथक काउंटर में कोई कर्मचारी नहीं रहता है? तो उन्होंने कहा कि पेंशनर्स भी तो घिसट घिसट कर आते हैं, अब कोई कर्मचारी आखिर कब तक उनकी रास्ता देखेगा। बाजू के सामान्य काउंटर में दवा मिलती है वहीं से ले ली जाए।

भाजपा के माथे पर कालिख!

भाजपा के माथे पर कालिख!

(शरद खरे)

सत्तारूढ़ भाजपा की पेशानी अब कीचड़ से सनी दिख रही है। कहीं संगठन के खिलाफ नारे लग रहे हैं तो कहीं, अपनी ही सरकार के खिलाफ चुने हुए प्रतिनिधि हड़ताल पर बैठे हैं। कहीं भाजपा के मण्डल अध्यक्ष को अधमरा कर दिया जाता है तो कहीं भाजपा के नगर मण्डल अध्यक्ष को दो घंटे तक थाने में निरूद्ध कर रखा जाता है। कुल मिलाकर भाजपा के राज में सिवनी में सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है।
भाजपा के नगर मण्डल अध्यक्ष लखनादौन को कोतवाली लखनादौन में दो घंटे बिठाकर रखा गया। बाद में नगर पंचायत लखनादौन के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राधेश्याम चौधरी द्वारा भाजपा के प्रस्तावित कार्यालय में बाधा उतपन्न करवाई जाती है। लखनादौन में आधी रात तक सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को धता बताकर कानफाडू डीजे के शोर में बार बालाएं नाचती हैं। लखनादौन में मुख्य मार्ग के निर्माण में ठेकेदार की मदद की जाती है। कृषि उपज मण्डी की जमीन पर बलात् कब्जा कर नगर पंचायत द्वाराा सब्जी मण्डी का निर्माण किया जाता है, वह भी माननीय न्यायालय के स्थगन के उपरांत। राष्ट्रीय राजमार्ग पर नाली निर्माण की अनुमति के बाद वहां कालम खड़े किए जाते हैं। भाजपा कुछ मामलों में अपनी शिकायत दर्ज कराकर पावती लेकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेती है। लखनादौन में निर्दलीय के नेतृत्व में नगर पंचायत काम कर रही है। लखनादौन के हालात देखकर लगता है मानो यह भारत गणराज्य का अंग ही नहीं रह गया है। लखनादौन में नगर पंचायत में भाजपा के पार्षद हैं, पर बैठकों में ये पार्षद अपना विरोध दर्ज नहीं कराते हैं।
इसी तरह मुंगवानी के भाजपा मण्डल अध्यक्ष अपनी ही सरकार के खिलाफ अमरण अनशन पर बैठे। मुंगवानी भाजपा मण्डल अध्यक्ष सतेंद्र सिंह ठाकुर का आरोप है कि चंदोरी खुर्द यानी बांकी सहकारी समिति के प्रबंधक द्वारा लगभग पांच करोड़ का गोलमाल किया गया है। इस घोटाले में भाजपा की निरीहता तो देखिए, बार बार जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराने के बाद भी उनकी शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं होने पर वे अनशन पर बैठने की तैयारी में लग गए। अपनी ही सरकार के सामने सीना ठोंककर खड़े हुए सतेंद्र सिंह ठाकुर। उन्होंने किसी की नहीं सुनी। जब तक उन्हें लिखित में आश्वासन नहीं मिला वे वहां से नहीं डिगे।
वहीं छपारा में मण्डल अध्यक्ष धर्मंेंद्र सिंह ठाकुर पर प्राणघातक हमला हुआ। धर्मंेंद्र ठाकुर ने इसे राजनैतिक हमला बताया और पूर्व युवा मोर्चा अध्यक्ष नवनीत सिंह ठाकुर को इसके लिए दोषी बताया। वहीं नवनीत सिंह ठाकुर का बयान आया कि वे बीच बचाव के लिए गए थे। भाजपा के ही लोगों का कहना है कि अगर नवनीत सिंह ठाकुर वक्त पर नहीं पहुंचते तो अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता था। कहा जा रहा है कि नवनीत सिंह ठाकुर को फंसाने के बजाए धर्मंेंद्र सिंह ठाकुर को उनका अहसान मानना चाहिए कि नवनीत के कारण ही वे बच पाए।
छपारा में चल रही चर्चाओं के अनुसार भाजपा मण्डल अध्यक्ष का काम कुछ आपत्तिजनक ही रहा है। उनके बारे में कहा जाता है कि एक मर्तबा बस स्टैंड पर ही उन्होंने तत्कालीन नगर निरीक्षक की, वर्दी में ही कालर पकड़ ली थी। इस पर नाराज पुलिस कर्मियों ने उनकी खासी मरम्मत की थी। कहा जाता है कि ठेकों में अवैध वसूली के संगीन आरोप भी हैं धर्मेंद्र सिंह ठाकुर पर। इतना ही नहीं छपारा में चल रही चर्चाओं को अगर सच माना जाए तो वहां बैनगंगा तट पर बना पीडब्लूडी का रेस्ट हाउस भी रात को मयखाने में तब्दील हो जाया करता है और देर रात तक वहां महफिलें सजती हैं। इन महफिलों में भी भाजपा के नेताओं का शुमार होता है।
कहा जा रहा है कि धर्मंेंद्र सिंह ठाकुर का असली विवाद लेनदेन का है। उनके बारे में चर्चा है कि वे हर काम में कमीशन की मांग किया करते रहे हैं। उनके ऊपर हुए हमले के बाद उनके पक्ष में सहानुभूति कम ही दिख रही है जिससे साफ हो रहा है कि वे कहीं न कहीं गलत रास्ते पर थे। वे सही थे या गलत यह तो वे ही जानें किन्तु भाजपा के मण्डल अध्यक्ष का प्रभार सौंपने के पहले क्या भाजपा द्वारा उनके बारे में पूरी तफ्तीश नहीं की गयी थी। जिसने भी उन्हें अध्यक्ष बनाने की सिफारिश की थी, क्या जिला भाजपा संगठन उस पर कार्यवाही करने का माद्दा दिखाएगा?
29 सितम्बर को प्रदेश के मुखिया का सिवनी आगमन होने जा रहा है। प्रदेश के मुखिया के सामने हो सकता है सिवनी में भाजपा की चरमराती स्थिति का बखान हो। भाजपा के अंदर एक संस्कृति पनपती दिख रही है, जो एक दूसरे पर लांछन लगाने की है। वैसे तो हर दल में एक दूसरे पर लांछन लगाये जाने की परंपरा नई नहीं है। किन्तु भाजपा काडर बेस्ड पार्टी हैै, और भाजपा को अनुशासित दल माना जाता रहा है।

सिवनी में आम आदमी कराह रहा है। ऐसा नहीं है कि भाजपा संगठन को इन सारी बातों की माहिती न हो। भाजपा संगठन सब कुछ, देख सुन रहा है। रोज डेंगू के मरीजों की खबरें मिल रही हैं, पर भाजपा का संगठन स्वास्थ्य विभाग की मश्कें इसलिए नहीं कस पा रहा होगा क्योंकि भाजपा के दो विधायकों के पतियों के हाथ में स्वास्थ्य विभाग की कमान जो ठहरी। भाजपा को जब कमल का चिन्ह आवंटित हुआ था उस वक्त भाजपाई ही कहा करते थे कि देश को कांग्रेस ने कीचड़ में तब्दील कर दिया है और कीचड़ में ही कमल खिला करते है। सिवनी में यह उक्ति चरितार्थ तो होती दिख रही है किन्तु सिवनी में भाजपा के कमल द्वारा ही कीचड़ मचाया जा रहा है, जो चिंता का विषय है। भाजपा संगठन को संभलना होगा, जिला वासियों की समस्याओं के लिए सिर्फ पत्र लिखकर अपनी नस्ती मोटी करने से कोई लाभ नहीं, क्योंकि समस्याएं जस की तस ही हैं। जरूरत है पत्र लिखने के बजाए कदम उठाने की, वरना आने वाले चुनावों में जनता का मूड अगर बदला तो . . .।

शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

शिव की नगरी में रात रूकेंगे शिवराज

शिव की नगरी में रात रूकेंगे शिवराज

असंतुष्ट पड़ सकते हैं सत्तारूढ़ भाजपा के कारिंदों पर भारी

(नन्द किशोर/पीयूष भार्गव)

भोपाल/सिवनी (साई)। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को अंततः सिवनी की सुध आ ही गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार शिवराज सिंह चौहान रविवार को दिन भर जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में भ्रमण के उपरांत रात सिवनी शहर में बिताएंगे। शिवराज सिंह चौहान का रात्रि विश्राम लंबे समय बाद हो रहा है, और उनकी नींद में खलल डालने के लिए नीता नरेश हटाओमुहिम एक बार फिर तेज हो सकती है।
मुख्य्ामंत्री शिवराज सिंह चौहान २९ सितंबर को ११.४५ बजे नरसिंहपुर के मुंगवानी से हेलीकॉप्टर द्वारा प्रस्थान कर १२.0५ बजे लखनादौन आदेगांव आय्ोंगे एवं स्थानीय्ा कायर््ाक्रम में शामिल होंगे। १.0५ बजे आदेगांव से हेलीकॉप्टर द्वारा प्रस्थान कर १.३0 बजे केवलारी पहुंचेंगे एवं आमसभा में सम्मिलित होंगे। केवलारी से २.३0 बजे जनआशीर्वाद रथ य्ाात्रा कान्हीवाड़ा होते हुए बरघाट पहुंचेगी। जहां मुख्य्ामंत्री आमसभा में शामिल होंगे। बरघाट से रथय्ाात्रा डूंडासिवनी पहुंचेगी एवं मुख्य्ामंत्री य्ाहां आमसभा में शामिल होंगे। डूंडासिवनी से रथय्ाात्रा सिवनी पहुंचेगी। य्ाहां पहुंचकर मुख्य्ामंत्री आमसभा में शामिल होंगे। रात्रि ११ बजे सिवनी में विश्राम करेंगे। मुख्य्ामंत्री चौहान ३0 सितंबर को ८.३0 बजे सिवनी से हेलीकॉप्टर द्वारा प्रस्थान कर ९.३0 बजे भोपाल पहुंचेंगे।

कार्यकर्ताओं में है जमकर आक्रोश!
सिवनी में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों एवं अन्य जनसेवकों सहित संगठन की कार्यप्रणाली से कार्यकर्ता एक लंबे समय से असंतुष्ट हैं। कार्यकर्ताओं के आरोप हैं कि विधायक और अन्य चुने हुए भाजपाईयों द्वारा उनके सम्मान को बुरी तरह कुचला जा रहा है। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बाद कार्यकर्ता अपने आप को उपेक्षित ही महसूस करता आया है। कार्यकर्ताओं को लगने लगा है कि मनराखनलाल बनने के चक्कर में विधायक एवं अन्य चुने हुए प्रतिनिधियों सहित संगठन ने भी भाजपा से ज्यादा तवज्जो कांग्रेस के लोगों को दी है।

नेताओं के आने पर हुआ आसमान गुंजायमान
विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सिवनी में जब भी बड़े नेताओं का आगमन हुआ, उस वक्त कार्यक्रम स्थल पर नरेश नीता हटाओ, भाजपा बचाओके नारों से आसमान गूंज उठा। भोपाल में भी प्रदेश कार्यालय में इस तरह के नारे जमकर लगे। इसके उपरांत असंतुष्ट गुट को शांत करने, पूर्व सांसद प्रहलाद सिंह पटेल सिवनी आए और श्रीवनी में उन्होंने असंतुष्ट नेताओं को समझाईश दी। यद्यपि श्रीवनी में न तो भाजपाध्यक्ष नरेश दिवाकर पहुंचे और न ही विधायक श्रीमती नीता पटेरिया, पर भाजपा के अंदर यह संदेश अवश्य ही प्रसारित हुआ कि प्रहलाद सिंह पटेल को चाहिए था कि वे जिला भाजपा कार्यालय में आकर कार्यकर्ताओं को अन्य पदाधिकारी और विधायकों की उपस्थिति में समझाईश देते।

शिवराज के सामने हो सकता है विरोध प्रदर्शन
माना जा रहा है कि असंतुष्ट नेताओं के मन से अभी विरोध का गुबार शांत नहीं हुआ है। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि असंतुष्ट गुट, शिवराज सिंह चौहान या प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र तोमर के सिवनी आगमन की रास्ता ही देख रहा है। लखनादौन में भाजपा के कार्यकर्ताओं के सम्मान को जिस तरह कुचला गया, और जिला संगठन द्वारा इस संबंध में ठोस कार्यवाही न किए जाने से भी भाजपा का आम कार्यकर्ता का मनोबल बुरी तरह टूटा हुआ ही लग रहा है। हो सकता है यह मामला भी मुख्यमंत्री के सिवनी आगमन पर उछले।

भाजपा की बैठक आज
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के 29 सितम्बर को जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान सिवनी आगमन को देखते हुए जिला भाजपा की एक आवश्यक बैठक शुक्रवार 27 सितम्बर को प्रातः 11 बजे भाजपा कार्यालय में आयोजित की जा रही है। पार्टी जिलाध्यक्ष श्री नरेश दिवाकर द्वारा इस बैठक में जिला भाजपा के पदाधिकारियों, सभी मंडलों के अध्यक्षों, प्रबंध समिति के सदस्यों, विधायकगण, सांसद, पूर्व जिलाध्यक्षों एवं सभी विधानसभा के प्रभारियों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में संगठन मंत्री श्री अविनाश राणे भी उपस्थित रहेंगें। भाजपा मीडिया प्रभारी श्रीकांत अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री की इस जन आशीर्वाद यात्रा को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाने के साथ ही इसके व्यापक प्रचार प्रसार हेतु बैठक में चर्चा की जावेगी।

पैंशनर्स को मशविरा: निःशुल्क दवा चाहिए तो शिकायत कीजिए!

पैंशनर्स को मशविरा: निःशुल्क दवा चाहिए तो शिकायत कीजिए!

(पीयूष भार्गव)

सिवनंी (साई)। अगर आप मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की सरकार में पैंशनभोगी हैं, और आपको सरकारी अस्पताल से अपने रोग के लिए दवा चाहिए, आपको देने में चिकित्सालय प्रशासन आनाकानी कर रहा है तो बस उठाईए कलम और कर दीजिए संवेदनशील जिला कलेक्टर को एक शिकायत। आपको सौ दो सौ नहीं चार पांच हजार रूपए प्रतिमाह तक की दवाएं भी चिकित्सालय प्रशासन खरीदकर देगा।
जी हां, यह सच है। गौरतलब है कि लगभग दो सालों से सिवनी जिले में पैंशनर्स दवाओं के लिए यत्र तत्र भटक रहे हैं। जिला चिकित्सालय के स्टोर में दवाओं का बजट समाप्त हो गया है, का बोर्ड भी महीनों से दिखाई नहीं दे रहा है। जिला चिकित्सालय में दवाओं की खरीद में कमीशनबाजी चरम पर है। वरना क्या कारण है कि जनरल पूल में खरीदी जाने वाली मल्टी विटामिन और एसिडिटी की दवाएं भी पैंशनर्स की मद में आई राशि से खरीदी जा रही हैं।

जबरन छकाया जा रहा है पैंशनर्स को
पिछले दिनों जिला पैंशनर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य डी.बी.नायर जब जिला चिकित्सालय पहुंचे थे (वर्तमान में उनके पैर में फेक्चर है और वे अपने निवास पर ही स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं), जहां चिकित्सकों ने उन्हें चिकित्सालय में उपलब्ध दवाओं मेें से ही दवाएं देने की बात कही। इस पर उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि जो दवाएं उन्हें जरूरी हैं अगर वे दवाएं स्टोर में नहीं हैं तो वे क्या करेंगे?

दरबार का शौक है सीएस को
बताया जाता है कि इस पर ओपीडी में मौजूद चिकित्सक ने साफ तौर पर कह दिया गया था कि अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ.सत्य नारायण सोनी के मौखिक निर्देश हैं कि बाहर की दवाएं बिल्कुल न लिखी जाएं। जब इस संबंध में डॉ.सत्यनारायण सोनी से उनका पक्ष जानना चाहा तो वे सिविल सर्जन कक्ष में चार पांच चिकित्सकों का दरबार लगाए (जबकि चिकित्सालय के समय में चिकित्सकों को दरबार के बजाए ओपीडी में जाने की नसीहत दी जानी चाहिए) हंसी ठठ्ठा में व्यस्त थे।

कलेक्टर से की शिकायत
बताया जाता है कि इस संबंध में पैंशनर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य डी.बी.नायर द्वारा संवेदनशील जिला कलेक्टर से शिकायत की गई। जिला कलेक्टर ने पैंशनर्स की इस समस्या पर संजीदगी दिखाते हुए स्वास्थ्य विभाग को तत्काल निर्देश जारी कर कहा कि पैंशनर्स को दवाओं के मामले में परेशानी न हो इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए। इसके बाद ही उन्हें व उनकी पैंशनर पत्नि को बाजार से दवाएं खरीदकर अस्पताल प्रशासन द्वारा दी गई।

कहां जाएं पेंशनर्स
एक वयोवृद्ध पेंशनर ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि अस्पताल के स्टोर में उपलब्ध दवाओं के भरोसे तो पेंशनर नहीं रह सकता। बावजूद इसके अस्पताल में दवा वितरण केंद्र में पेंशनर्स के लिए बनाई गई एक प्रथक खिड़की में न तो कोई कर्मचारी दवा वितरण के लिए मौजूद रहता है न ही पेंशनर्स की कोई सुनता है। बताया जाता है कि पिछले दिनों दवा वितरण केंद्र में पदस्थ श्री अंसारी द्वारा सिविल सर्जन डॉ.सत्य नारायण सोनी को ही दो टूक शब्दों में यह कहकर कि वे लिखापढ़ी में व्यस्त हैं, किसी ओर को काउंटर में बिठाओ लताड़ दिया था। उस वक्त वहां मीडिया के कुछ कर्मी भी मौजूद थे। अपने अधीनस्थ एक अदने से कर्मचारी की लताड़ सुनकर भी डॉ.सत्यनारायण सोनी उसे प्रसाद समझकर पी गए और मुस्कुराते हुए वहां से रूखसत हो गए, यह है डॉ.सत्यनारायण सोनी की प्रशासनिक कुशलता।

दवा चाहिए तो करें शिकायत
जिला चिकित्सालय में पदस्थ एक पॅरामेडीकल स्टाफ ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिविल सर्जन डॉ.सत्यनारायण सोनी पर शल्य क्रिया के पूर्व बेहोश करने के लिए मरीज के परिजनों से रिश्वत लेने के संगीन आरोप हैं। कई बार तो पैसा नहीं मिलने पर मारपीट तक की नौबत आ चुकी है। डॉ.सत्यनारायण सोनी सिवनी में अस्सी के दशक से पदस्थ हैं, जबकि सरकारी अधिकारियों का तबादला तीन साल में हो जाना चाहिए, वहीं डॉ.सत्य नारायण सोनी तीन साल क्या तीन दशक पूरे करने वाले हैं। उक्त कर्मचारी का कहना था कि डॉ.सत्य नारायण सोनी ने साफ तौर पर किन्तु अघोषित तौर पर चिकित्सकों सहित स्टोर के कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि पेंशनर्स में से दवाएं उन्हें ही खरीदकर दी जाएं जिनकी सिफारिश जिला कलेक्टर द्वारा की जाए। उक्त कर्मचारी का कहना है कि अगर किसी पेंशनर को अपने मौलिक अधिकारवाली निःशुल्क दवा चाहिए तो वह चिकित्सालय जाकर चप्पलें घिसने के बजाए जिला कलेक्टर के पास जाए। पता नहीं डॉ.सत्यनारायण सोनी अपने कर्तव्यों का सीधा सीधा निर्वहन करने के बजाए संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव का सरदर्द क्यों बढ़ाने पर तुले हुए हैं।

जनरल पूल की दवाएं पेंशनर्स कोटे में
जिला चिकित्सालय के स्टोर के सूत्रों का कहना है कि डॉ.सत्यनारायण सोनी चमड़े के सिक्के चलाने पर आमदा नजर आ रहे हैं। पेंशनर्स कोटे के आवंटन की मद में जनरल पूल की दवाएं खरीदकर इस मद की राशि को हवा में उड़ाया जा रहा है। इतना ही नहीं रक्तचाप के लिए लगभग डेढ़ सैकड़ा दवाएं चलन मेें होने के बाद भी एटेन और लोसार नामक दवाएं ही पैंशनर्स मद की राशि से खरीदी जा रही हैं। यही आलम मल्टी विटामिन और एसीडिटी आदि की दवाओं का है।

कहां गई दो साल की राशि?
पेंशनर्स एसोसिएशन के एक सदस्य ने बताया कि पेंशनर्स को दवाएं देने की मद में आई राशि का पिछले दो सालों में क्या हुआ इसकी तो सीबीआई जांच होनी चाहिए। पिछले दो सालों से पेंशनर्स को उनकी जरूरत के मुताबिक बाहर से दवाएं खरीदकर नहीं दी जा रही हैं। आखिर पैंशनर्स की मद में आने वाली बड़ी राशि का स्वास्थ्य विभाग प्रशासन द्वारा क्या उपयोग किया गया है इसकी जांच की जानी चाहिए।

मजे में हैं अवैध बसाहट के जिम्मेदार!

मजे में हैं अवैध बसाहट के जिम्मेदार!

(शरद खरे)

अवैध कॉलोनी या बसाहट मानवता के प्रति एक जुर्म से कम नहीं है। अवैध कॉलोनी बसाकर कॉलोनाईजर्स मोटा माल कमाते हैं इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता हैै। लोगों को तरह तरह के प्रलोभन देकर आकर्षित करने से नहीं चूकते हैं कॉलोनाईजर्स, जब लोग इनके जाल में फंस जाते हैं तब ये अपना असली चेहरा दिखाकर लोगों को बेवकूफ बना देते हैं। लाखों रूपए फंसाने के बाद लुटा पिटा उपभोक्ता कहीं जाकर शिकायत करने की स्थिति में भी नहीं होता है। वह मजबूरी में उस अवैध कॉलोनी या बसाहट में मकान बनाकर रहना आरंभ कर देता है। गर्मी और सर्दी का मौसम तो जैसे तैसे निकल जाता है पर बारिश में जब पहुंच मार्ग ही नहीं होता है तब वह हैरान परेशान हो उठता है। गंदे पानी की निकासी के लिए नाली न होने से उसके घर के आसपास ही गंदगी बजबजाती रहती है। पानी के पोखरों में तब्दील यह गंदगी शहर में घूम रहे आवारा सुअरों के स्वीमिंग पूल के रूप मेें प्रयोग में आता है।
सिवनी शहर में ही दर्जनों कॉलोनियां अवैध रूप से अस्तित्व में हैं। खुद नगर पालिका परिषद् इस बात को स्वीकार कर चुकी है। आखिर क्या कारण है कि अवैध कॉलोनियां एक एक कर अस्तित्व में आती जा रही हैं। क्या इसके लिए किसी की जवाबदेही नहीं है? क्या जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार सरकारी नुर्माइंंदे हाथ पर हाथ रखे गलत काम होता देख रहे हैं? अगर सिवनी के किसी वार्ड में अवैध निर्माण हो रहे हैं तो उस वार्ड का पार्षद, नगर पालिका की निर्माण शाखा और शहर के पटवारी क्या मदकके नशे में चूर थे? क्या कारण है कि अब तक जिला प्रशासन ने इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर स्थानीय निकाय के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, पार्षद, पंच सरपंच सहित स्थानीय निकाय के जिम्मेदार अधिकारियों, राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की अवैध निर्माण के प्रति जवाबदेही निर्धारित नहीं की है?
छपारा शहर में प्रस्तावित गोविंद धामके कॉलोनाईजर्स ने तो सारी हदें ही पार कर ली हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान पिछली मर्तबा कॉलोनाईजर के गुर्गे ने साफ कहा था के जिला प्रशासन चाहकर भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है क्योंकि उसके संचालकों की सियासी पहुंच बहुत उपर तक है। यही कारण है कि मीडिया के कुछ लोगों को साथ लेकर उनके संचालकों द्वारा तहसीलदार को भी साध लिया गया है। जिसे गोविंद धामके बारे मेें जो छापना हो छाप ले। जिला प्रशासन भी उसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर पाएगा! वस्तुतः कॉलोनाईजर के गुर्गे की बात में दम दिख रहा है। लगभग तीन माह पहले समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया द्वारा गोविंद धामके कॉलोनाईजर के द्वारा जरूरी अनुमतियों के बिना ही प्लाट बेचे जाने की खबरें प्रसारित की थीं, पर इस संबंध में जिला प्रशासन या एसडीओ राजस्व, तहसीलदार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
किसी भी कॉलोनाईजर द्वारा जब कॉलोनी काटी जाती है तो अमूमन ग्रीन बेल्ट पर ही कुछ पत्थर गाड़कर उन्हें चूने से रंगकर प्लाट की स्थिति, मनगढंत, पार्क, पानी की टंकी, सड़क, वृक्षारोपण, खेल का मैदान, धर्मस्थल, ड्रेनेज आदि को नक्शे पर इस तरह उकेरा जाता है मानो देखने वाला परीलोक में आ गया हो। प्लाट के मानचित्र (कागजों पर) में पहले से ही कुछ प्लाट पर लाल स्याही से चिन्हित कर दिया जाता है, जब खरीददार द्वारा उसके बारे में पूछा जाता है तो कॉलोनाईजर्स द्वारा बहुत ही करीने से उन प्लाट्स को बिका हुआ दर्शा दिया जाता है। साल छः माह में जितने प्लाट बुक होते हैं उन प्लाट्स के हिसाब से नए नक्शे में लाल रंग के बिके हुए प्लाट्स की स्थिति बदल दी जाती है। अर्थात शुरूआत में बिके हुए प्लाट्स अब नई कीमतों पर (कॉलोनी में कुछ प्लाट बिकने पर दाम बढ़ना स्वाभाविक ही है) बिकने के लिए तैयार हो जाते हैं। मजे की बात तो यह है कि इस समय तक भी आधे से ज्यादा कॉलोनियों के पास जरूरी सरकारी अनुमति ही नहीं होती है।
प्लाट की बुकिंग राशि, पहली, दूसरी किश्त लेकर कॉलोनाईजर्स द्वारा जरूरी सरकारी अनुमति लेने का काम किया जाता है। कहा जाता है तब तक भी वह भूखण्ड जो ग्रीन बेल्ट का है, का डायवर्शन तक नहीं हो पाता है और वह कॉलोनाईजर के नाम पर भी नहीं चढ़ पाता है। अगर सारी अनुमति मिल गई तो ठीक वरना उसी स्थिति में ही कॉलोनाईजर द्वारा भूखण्ड के असली मालिक को बुलवाकर खरीददार के पक्ष में रजिस्ट्री करवा दी जाती है। रजिस्ट्री होते ही खरीददार द्वारा अपने स्वामित्व वाले भूखण्ड पर मकान निर्माण का नक्शा तैयार करवाया जाता है। तब तक कॉलोनी के लगभग सारे प्लाट बिक चुके होते हैं। जैसे ही खरीददार स्थानीय निकाय में नक्शा पास करवाने जाता है उसे पता चलता है कि कॉलोनी तो अवैध है। तब उसके पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाती है। उस वक्त तक वह बड़ी राशि खर्च कर चुका होता है। इसके बाद वह ले देकर काम करवाकर मकान का निर्माण कर लेता है। चूंकि कॉलोनी वैध ही नहीं है इसलिए वहां नाली सड़क, सफाई, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं होती हैं। मजबूरी में वह नारकीय जीवन जीने पर मजबूर हो जाता है।

सवाल यह उठता है कि जब कॉलोनी काटने के विज्ञापन जारी होते हैं, रजिस्ट्री होती है, मकान बन रहा होता है तब स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि और जिम्मेदार सरकारी अधिकारी कहां होते हैं? बिना बुनियादी सुविधाओं के कॉलोनी काटना क्या उचित है? यह मानवता के प्रति अपराध से कम नहीं है! कुल मिलाकर जन प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों और कॉलोनाईजर्स के त्रिफला ने आम उपभोक्ता जो प्लाट खरीदता है की सेहत बुरी तरह बिगाड़ रखी है। संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव से ही आम जनता को अब उम्मीदें बचीं हैं।

गुरुवार, 26 सितंबर 2013

मनमर्जी के मालिक हो गए हैं आयुष अधिकारी डॉ.गर्ग

मनमर्जी के मालिक हो गए हैं आयुष अधिकारी डॉ.गर्ग

(गजेंद्र ठाकुर)

छपारा (साई)। जिला आयुष विभाग के चर्चित विभाग प्रमुख डॉ.एस.डी.गर्ग द्वारा शासन के नियम कायदों को धता बताते हुए मनमर्जी से कार्यों को संपादित किया जा रहा है। अपनी उच्च स्तरीय राजनैतिक पहुंच के चलते डॉ.गर्ग का कोई बाल भी बांका नहीं कर पा रहा है।
विकास खण्ड छपारा के ग्राम केकड़ा में पदस्थ औषधालय सेवक परसराम राजपूत को जिला आयुष अधिकारी डॉ.गर्ग द्वारा 6 अगस्त को आदेश क्रमांक स्था./2013/1211 के तहत शासकीय औषधालय रमली जिला सिवनी में पदस्थ कर दिया गया है। बताया जाता है कि उक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के खिलाफ डॉ.गर्ग द्वारा व्यक्तिगत खुंदक निकालते हुए उसे प्रताड़ित किया जा रहा है।
संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव को प्रेषित आवेदन में परसराम राजपूत ने कहा है कि यह आदेश नियमों के प्रतिकूल किया गया है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी परसराम राजपूत का कहना है कि उसने अपने स्वयं के व्यय पर 14 जुलाई 2012 को अपना तबादला सिवनी जिले के घंसौर विकास खण्ड के भिलाई औषधालय से केकड़ा करवाया था।
इसके पीछे उसने दलील दी है कि उसके माता पिता वयोवृद्ध हो चुके हैं। जिनका स्वास्थ्य खराब रहता है और उनका इलाज छपारा एवं सिवनी में चल रहा है। परसराम राजपूत ने जिला कलेक्टर को सौंपे आवेदन में कहा है कि उसका गृह ग्राम बर्रा है और केकड़ा, बर्रा के करीब होने के कारण वह अपने सरकारी दायित्वों के निर्वहन के साथ ही साथ पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन भी बेहतर तरीके से कर पा रहा था।
औषधालय सेवक परसराम राजपूत ने कहा है कि उसके वयोवृद्ध माता पिता जो कि सादक सिवनी (बर्रा) में निवासरत हैं से रमली की दूरी 135 किलोमीटर है, जहां से बार बार आने जाने और अपने माता पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखने में उसे काफी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। इससे उसे अपने शासकीय दायित्वों का बेहतर तरीके से निर्वहन करने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। साथ ही साथ इन परिस्थितियों में वह शारीरिक, आर्थिक मानसिक परेशानियों से अलग जूझेगा।

सरपंच की तल्ख नाराजगी

वहीं ग्राम पंचायत केकड़ा के सरपंच और ग्रामवासियों ने भी संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव को लिखे पत्र में कहा है कि केकड़ा के आसपास के गांवों में फैली बीमारियों के उपचार के लिए चिकित्सकों द्वारा केकड़ा को ही मुख्यालय बनाकर चिकित्सकीय कार्य किया जा रहा है। केकड़ा में महज दो ही कर्मचारी हैं जिनमें से एक कर्मचारी की तैनाती केकड़ा से अन्यत्र कर दी गई है, जो अनुचित है।

अवैध कॉलोनी काटने पर सात साल की सजा!

अवैध कॉलोनी काटने पर सात साल की सजा!

कार्यवाही के अभाव में सजा की परवाह नहीं है सिवनी के कॉलोनाईजर्स को

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सिवनी में जमीन का धंधा जोरों पर चल रहा है। अगर आपके पास एक एकड़ भी जमीन है तो आप करोड़पति बन सकते हैं। जी हां, सिवनी में कॉलोनाईजर्स द्वारा जगह जगह जमीनों पर अवैध कॉलोनी काटकर प्लाट बेच दिए जाते हैं। स्थानीय निकाय विभाग की नजरों में अवैध होने वाली कॉलोनियों में विकास नहीं कराया जाता है। नतीजतन वहां के रहवासी नारकीय जीवन जीने पर मजबूर होते है, और कॉलोनाईजर की चांदी हो जाती है।
जिला मुख्यालय सिवनी में ही अवैध रूप से काटी गई दर्जनों कॉलोनियां मौजूद हैं। इन कॉलोनियों को वैध कराने के लिए नगर पालिका द्वारा भी जमकर मुंह फाड़ा जाता है। अब चूंकि यहां लोग मकान बनाकर रहने लगे होते हैं अतः उनकी मजबूरी ही होती है कि कॉलोनाईजर को छोड़ वे ही आपस में चंदा कर कॉलोनी के विकास के लिए नगर पालिका की चिरौरी करते नजर आते हैं। पता नहीं क्यों राजस्व विभाग के एसडीओ, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी के साथ ही साथ स्थानीय निकायों के पार्षद, पंच आदि इस मामले में किस दबाव में अपना मुंह खोलने से गुरेज ही करते नजर आते हैं।

सिवनी छपारा में है इनका जोर
सिवनी और छपारा में अवैध रूप से कटने वाली कॉलोनियों की तादाद सबसे ज्यादा है। सिवनी में तो दर्जनों जगहों पर कॉलोनी काटे जाने के आकर्षक विज्ञापन होर्डिंग्स आदि दिखाई दे जाते हैं। इनमें पूर्णतः विकसित, हर विभाग की अनुमति प्राप्त, इतने मीटर चौड़ी सड़क, पार्किंग, खेल का मैदान, शैल्टरलेस के लिए आवास आदि का हवाला दिया जाता है। वास्तव में जिस जमीन पर इन कॉलोनियों का निर्माण होना दर्शाया जाता है वह जमीन कॉलोनाईजर के नाम पर होती ही नहीं है। छपारा के गोविंद धाम के बारे में बताया जाता है कि अभी तक इस कॉलोनी के लिए जरूरी अनुमतियां नही मिली हैं, पर कॉलोनी में प्लाट आज भी बदस्तूर बेचे जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि कॉलोनी के कॉलोनाईजर्स द्वारा तहसीलदार को साध लिया गया है तभी इस मामले में कोई कार्यवाही अब तक नहीं हो सकी है।

खरीददार से ही बनते हैं धन्ना सेठ!
कहा जाता है कि कॉलोनी काटने वाले लोग कॉलोनी में प्लाट खरीदने वालों से ही पूंजी अर्जित कर पैसा कमाते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्लाट की बुकिंग वाले एमाउंट पर ही ये कॉलोनाईजर्स सारा खेल करते हैं। इसी राशि से वे धीरे धीरे ही सारी सरकारी विभागों की अनुमतियों को जुगाड़ते हैं। बाद में दूसरी तीसरी किश्त में ही पूरा खेल खेल लिया जाता है। शेष बची किश्तें सीधे सीधे कॉलोनाईजर्स की जेब में जाती हैं।

दर्जनों कॉलोनियां हैं अवैध!
नगर पालिका परिषद् सिवनी की ही फेहरिस्त में, शहरी सीमा में अनेक कॉलोनियां आज भी अवैध हैं, जहां के निवासी नगर पालिका द्वारा उनकी कॉलोनी में विकास न करने के चलते नारकीय जीवन जीने पर मजबूर हैं। कहीं कॉलोनी अवैध होने के कारण निवासियों को अस्थाई बिजली का कनेक्शन लेना पड़ रहा है तो कहीं पानी निकासी की नाली न होने, कहीं सड़क न होने के कारण लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है।

हो गया है संशोधन
प्रदेश के पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम (1993) में पहली मर्तबा संशोधन किया गया है। इस संशोधन में अवैध कॉलोनी काटने या बसाहट करने पर अगर कॉलोनाईजर दोषी पाया जाता है तो अब उसे छः माह के बजाए कम से कम तीन और अधिक से अधिक सात साल के लिए जेल सहित अर्थदण्ड का प्रावधान किया गया है।

एसडीओ पर भी होगी कार्यवाही
इतना ही नहीं इस महत्वपूर्ण संशोधन में अब यह व्यवस्था दी गई है कि अगर इस मामले में संबंधित अनुभाग के एसडीओ राजस्व भी दोषी पाए जाते हैं, वे अगर कार्यवाही नहीं करते हैं और कार्यवाही को प्रभावित करते हैं तो उसे भी तीन साल की सजा का प्रावधान किया गया है।

यह है नई व्यवस्था
समाचार एजेसंी ऑफ इंडिया के भोपाल ब्यूरो से संतोष पारदसानी ने राजस्व विभाग के सूत्रों के हवाले से बताया कि अगर किसी के द्वारा अवैध कॉलोनी काटे जाने की शिकायत एसडीओ या तहसीलदार को की जाती है तो दोनों ही अधिकारियों को उस पर त्वरित कार्यवाही करना ही होगा। अगर शिकायतकर्ता जांच से संतुष्ट नहीं है तो वह इस मामले में परिवाद भी दायर करने के लिए स्वतंत्र होगा। यद्यपि यह व्यवस्था पहले भी थी, किन्तु अब इसमें सजा का प्रावधान होने से दायर परिवाद पर तुरंत ही कार्यवाही की जाएगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही होगी जिसमें कम से कम तीन माह की जेल और दस हजार रूपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

दिखाया जाता है सपना

प्रदेश भर सहित सिवनी जिले में कॉलोनाईजर्स द्वारा लोगों को कॉलोनी या टाउनशिप के नाम पर सब्ज़बाग दिखाए जाकर प्लाट बेच दिए जाते हैं। प्लाट के बिक जाने या उस पर मकान बन जाने के उपरांत सरकार को, इसकी अनदेखी मुश्किल ही होती है। मजबूरी में सरकार को इन्हें या तो नियमित करना होता है या अन्य तरीके इजाद करने होते हैं। अभी तक महज छः माह की सजा या कुछ रूपयों के अर्थदण्ड के चलते कॉलोनाईजर्स द्वारा प्लाट बेचकर अपना उल्लू सीधा कर लिया जाता है।

पेंशनर्स और निःशुल्क दवाएं

पेंशनर्स और निःशुल्क दवाएं

(शरद खरे)

सरकारी नौकर अर्थात लोकसेवक, जनता का सेवक, जो अपने जीवन के महत्वपूर्ण तीस से चालीस साल सरकार में रहकर जनता की सेवा में बिता देता है। पहले 58, अब साठ या बासठ साल की आयु में वह सेवानिवृत होता है। साठ साल की आयु को पा लेने के उपरांत उर्जावानका तमगा तो सियासी लोगों को ही मिलता है। वास्तव में साठ की आयु के उपरांत शरीर में वह जोश नहीं रह पाता, शरीर शिथिल होने लगता है, काम में स्फूर्ति नहीं रह जाती है। वैसे भी आदि अनादि काल से मानव शरीर को कर्म के हिसाब से अनेक आश्रमों में बांटा गया है। साठ की आयु के उपरांत मनुष्य को वानप्रस्थ आश्रम में जाने की सलाह दी जाती है। अर्थात साठ के उपरांत आराम और प्रभु में ध्यान लगाया जाए।
राजनेता भले ही 45 से 65 वर्ष की आयु को अघोषित तौर पर यौवन की अवस्था मानते हों पर वास्तव में यह अवस्था यौवन की नहीं वरन् प्रौढ़ावस्था के आगाज की मानी जाती है। प्राचीन काल में साठ की आयु में मनुष्य नाती पोतों वाला हो जाता था, तब युवा पीढ़ी जीविकोपार्जन के काम में लग जाया करती थी तो साठ की आयु के बाद वाले नाती पोतों की सेवा टहल में अपना समय बिताते। सठियानावाली कहावत तो सभी ने सुनी होगी। साठ के बाद के लोगों को भूलने की बीमारी भी हो जाती है। तभी कहा जाता है फलां आदमी सठिया गया है। अर्थात साठ के पार के लोगों को आराम की आवश्यक्ता अधिक होती है।
वैसे सरकार के लिए अपनी जवानी और प्रौढ़ावस्था न्यौछावर करने वाले नुमाईंदों को अब आने वाले समय में कुछ भी मिलने की उम्मीद बेमानी ही होगी। इसका कारण यह है कि वर्ष 2003 के उपरांत नई भर्ती में अखिल भारतीय सेवाओं के साथ ही साथ कुछ अन्य सेवाओं को छोड़कर शेष में पैंशन तक की पात्रता समाप्त कर दी गई है। विडम्बना देखिए कि महज पांच साल के लिए सांसद या विधायक बनने वाला आजीवन पैंशन का हकदार होता है, पर सारा जीवन सरकार की सेवा करने वाले को पैंशन से वंचित ही रखा जा रहा है।
इसी तरह पैंशनर्स को दवाओं के मामले में भी बहुत ही रूलाया जा रहा है। सिवनी जिले में पैंशनर्स खून के आंसू रो रहे हैं। पैंशनर्स की मानें तो जबसे जिला चिकित्सालय में डॉ.सत्यनारायण सोनी ने सीएस का प्रभार संभाला है तबसे पैंशनर्स की स्थिति बेहद खराब हो गई है। पैंशनर्स दवा के लिए इस तरह लालायित हैं मानो उन्हें उनका अधिकार नहीं भीख दी जा रही हो। वहीं जिला चिकित्सालय में व्याप्त चर्चाएं कह रही हैं कि डॉ.सत्यनारायण सोनी ने सात अंकों की बड़ी राशि खर्च कर सिविल सर्जन का पद पाया है, जब तक वे उसकी भरपाई न कर लें तब तक यह क्रम बदस्तूर जारी रहेगा। इन बातों में कितनी सच्चाई है यह बात या तो डॉ.सोनी ही जानते होंगे या स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी, पर जिला चिकित्सालय में जिस तरह की अराजकता व्याप्त है उससे तो इन बातों में दम प्रतीत हो रहा है।
जिला चिकित्सालय में पहले पैंशनर्स के लिए दवाओं की खरीदी के लिए लोकल परचेस वाले दवा विक्रेता के पास से दवाएं खरीदी जाती रही हैं। इसके उपरांत टीएमसी पेटर्न को अपनाया गया। इसके बाद अब दवाओं की खरीद भी स्थानीय स्तर पर बंद कर दी गई। अब तो वे ही दवाएं पैंशनर्स को मिल सकती हैं जो अस्पताल प्रशासन ने लालफीताशाही के चलते खरीदी हैं। कहा जाता है कि जिन दवाओं में कमीशन ज्यादा होता है उन्हें ही खरीदा जाता है। साठ की आयु के बाद रक्तचाप की बीमारी होना आम बात है। इसके लिए डेढ़ सौ से अधिक तरह की दवाएं आती हैं, बाजार में, पर पैंशनर्स को महज लोसार ही मिल पाती है, क्योंकि शेष दवाएं स्टाक में हैं ही नहीं।
डॉ.सत्यनारायण सोनी की गुण्डागर्दी तो देखिए! पिछले दिनों कलेक्टर को पैंशनर्स ने शिकायत कर कहा कि डॉ.सोनी ने पैंशनर्स को बाहर की दवाएं नहीं लिखने की हिदायत दी है। कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलटा, पर यह क्या? हाल ही में डॉ.नेमा ने ही इस तरह के किसी आदेश के अस्तित्व में होने से इंकार कर दिया। बेचारे पैंशनर्स दवाओं के लिए वृद्धावस्था में भटक रहे हैं। दवा वितरण के लिए अस्पताल में पैंशनर्स का अलग काउंटर है। यहां पदस्थ एक कर्मचारी ने बीते दिनों डॉ.सोनी के सामने ही दो टूक शब्दों में पैंशनर को दवा देने से मना कर दिया। डॉ.सत्यनारायण सोनी खामोश रहे। पैंशनर के परिजन ने भला बुरा कहा। यहां तक कह डाला कि दवाओं की खरीदी में कमीशन खाया जाता है तभी तो अदना सा कर्मचारी सिविल सर्जन के सामने ही दवा न देने की बात कहने का साहस जुटा पा रहा है! डॉ.सत्यनारायण सोनी की खामोशी बता रही थी कि वे उस अदने से कर्मचारी से जरूर किसी न किसी बात पर दबे अवश्य ही हैं।

जिला चिकित्सालय में पैंशनर्स परेशान हैं, उनकी परेशानी का कारण साफ है कि उन्हें दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। कई तो असाध्य गंभीर रोग से पीड़ित हैं, जिनकी सारी पैंशन ही दवाओं में जा रही है। यह आलम तब है जब जिला चिकित्सालय में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.वाय.एस.ठाकुर की पत्नि श्रीमती शशि ठाकुर लखनादौन तो जिला मलेरिया अधिकारी के प्रभार वाले डॉ.एच.पी.पटेरिया की पत्नि श्रीमती नीता पटेरिया सिवनी विधायक हैं। दोनों ही चिकित्सक लंबे समय से सिवनी में ही पदस्थ हैं। निहित स्वार्थ में उलझे चिकित्सकों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे भी कल सेवानिवृत होंगे और उनके पेंशनर बनने के बाद उनके साथ भी इसी तरह का सुलूक अगर किया गया तो . . .।