शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

एमपी की प्राथमिकताओं को फिर भूले शिवराज


एमपी की प्राथमिकताओं को फिर भूले शिवराज

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। मध्य प्रदेष के निजाम षिवराज सिंह चौहान ने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर उनसे मध्य प्रदेष के संबंध में चर्चा की। इस बार चौहान ने मध्य प्रदेष के कोटे के मंत्रियों कमल नाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया से दूरी बनाकर रखी गई। गौरतलब है कि हाल ही में मेट्रो मैन के नाम से मषहूर श्रीधरन के मध्य प्रदेष दौरे के बावजूद भी चौहान ने इस मामले में दिलचस्पी लेना मुनासिब नहीं समझा। वहीं वन मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कमल नाथ से इसी दिन सोजन्य भेंट की।

मध्य प्रदेश में बार बार केंद्र के सौतेले व्यवहार का रोना रोने वाले चौहान ने अपनी इस यात्रा में पिछले साल दिसंबर माह में ओला पाला से पीड़ित किसानों के मुआवजे के लिए गठित जीओएम की बैठक के लिए भी कोई प्रयास नहीं किए। इतना ही नहीं, एनएचएआई के लखनादौन से महाराष्ट्र सीमा तक के मार्ग के लिए भी उन्होंने भूतल परिवहन मंत्री सी.पी.जोशी से भेंट करना उचित नहीं समझा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री षिवराज सिंह चौहान ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार से भी मुलाकात की। उन्होंने श्री पवार से एन एम बोरलोग कृषि अनुसंधान संस्थान को मध्यप्रदेश में खोलने का आग्रह किया जिसको केन्द्रीय मंत्री ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। प्रदेश में भण्डारण की स्थिति से निपटने के लिए श्री चौहान ने केन्द्रीय कृषि मंत्री से पी पी पी मॉडल पर आधारित सात साल के अनुबंध पर भण्डार गृह खोलने का सुझाव दिया। इससे प्रदेश में हो रही भण्डार समस्या से निजात मिलेगी और साथ ही खाद्यान्न भी बर्वाद नहीं होंगे।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री चौहान ने यहां केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में एक हजार की आबादी वाले गॉंवों को प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत जोड़ने की मांग को दोहराया। उन्होंने मनरेगा के तहत नक्सलवाद से निपटने के लिए इंदिरा आवास योजना के तहत स्थायी सम्पत्ति बनाने की भी मांग की।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्रीकान्त जैना से भी मुलाकात कर प्रदेश में डी ए पी खाद की आपूर्ति के लिए आग्रह किया। सरकारी विज्ञप्ति मेें कहा गया है कि केन्द्रीय मंत्रियों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और अपने-अपने मंत्रालयों से हर संभव शीघ्र सहायता देने  का आश्वासन दिया।

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