गुरुवार, 3 फ़रवरी 2011

आड़वाणी, शरद यादव के भरोसे भ्रष्टाचार अभियान


विपक्ष तलाश रहा है सर्वमान्य नेता
नितीश पर लग सकता है दांव
 
देवगोड़ा भी हो गए हैं सक्रिय
 
(लिमटी खरे)
 
नई दिल्ली। हर मामले में बिखर चुका राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन अब कांग्रेसनीत केंद्र सरकार से भिड़ने के लिए एक सर्वमान्य नेता की तलाश कर रहा है, जिसके रहते विपक्ष अपनी भूमिका को जनता के सामने मजबूती से रख सके। उधर पूर्व प्रधानमंत्री हरदनहल्ली डड्डेगोड़ा देवगोड़ा भी एनडीए और यूपीए के विकल्प बनने की कोशिश में लगे हुए हैं।
भ्रष्टाचार से चौतरफा घिरी कांग्रेसनीत केंद्र सरकार को घेरने में विपक्ष अभी अपने आप को सहज महसूस नहीं कर पा रहा है। भाजपा को लगता है कि सक्षम नेतृत्व के अभाव में केंद्र सरकार को घेरने में विपक्ष पूरी तरह असफल ही रहा है। भाजपा में चल रही बयार के अनुसार अब विपक्ष को एसे सर्वमान्य नेता की तलाश है जिस तरह की भूमिका राजीव गांधी के खिलाफ बोफोर्स मामले में विश्वनाथ प्रताप सिंह ने निभाई थी।
गौरतलब है कि वर्तमान में राजग की ओर से सहयोगी दलों के बीच सामंजस्य बिठाने का काम एनडीए के कार्यकारी संयोजक शरद यादव द्वारा किया जा रहा है। उधर भ्रष्टाचार के मामले में लाल कृष्ण आड़वाणी की बेदाग छवि भी राजग के लिए लाभकारी ही साबित हो रही है। कहा जा रहा है कि आड़वाणी और शरद यादव के बीच सामंजस्य के अभाव के चलते राजग बिखराव की और बढ़ रहा है।
उधर कांग्रेस के अंदरखाने से बाहर आने वाली खबरों में कांग्रेस के रणनीतिकारों के हवाले से कहा जा रहा है राजग के पास कोई योग्य नेता नहीं होने के चलते केंद्र सरकार पर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों को विपक्ष भुना नहीं पाएगा। कांग्रेस के प्रबंधकों को डर है कि अगर राजग की कमान नितीश कुमार के हाथों चली जाती है तब विपक्ष का हल्ला बोल धारदार तरीके से हो सकता है।
उधर राजग के बिखरने के बाद जद एस के एच.डी.देवगोड़ा ने राजग और संप्रग का विकल्प बनने के अभियान को तेज कर दिया है। देवगोड़ा द्वारा एआईएडीएमके, वाम दल, आईएनएलडी, बीकेडी, आरएलडी जैसे दलों को साथ लेकर तीसरा मोर्चा बनाने का प्रयास भी किया जा रहा है।

लाल ड्रेगन की नजरें रसाई पर

रसोई पर भी नजरें डाल रहा लाल ड्रेगन
नई दिल्ली (ब्यूरो)। भारतीय अर्थव्यवस्था पर निरन्तर नजर रखकर उसे छिन्न भिन्न करने की फिराम में रहने वाले चीन ने अब गाजर के माध्यम से भारत के लोगों के रसोई में घुसपैठ करनी की कवायद आरंभ कर दी है। नेपाल से लगी खुली सीमा के रास्ते चीन प्रतिदिन लाखों रुपये मूल्य का गाजर भारतीय क्षेत्र में पहुंचा रहा है। आसपास के भारतीय किसानों पर इसका खराब असर दिखाई देने लगा है। चीनी सीमा पर इसकी बिक्री ने धूम मचा दी है, जल्द ही देश के अन्य भागों में भी इसके पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
ज्ञातव्य है कि इससे पहले चीन द्वारा सेब और प्याज को निर्यात कर भारतीय भारतीय अर्थव्यवस्था को तहस नहस करने की कोशिश की जा चुकी है। उसके इस कदम से सीमाई इलाकों के किसान हलकान हैं। भारत सरकार ने भी चीन की इस साजिश को को गंभीरता से लिया है, जिसके तहत खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हैं।
नेपाल से लगी लगभग 1751 किमी लंबी सीमा से सटे भारतीय क्षेत्र के जनपदों में इन दिनों चीनी गाजर ने धूम मचा रखी है। बेहद लाल और बड़े आकार वाली यह गाजर भारतीय क्षेत्र में 10 रुपये किग्रा बिक रही है। इसकी अपेक्षा छोटे आकार और मटमैले आकार की भारतीय गाजर को 15 रुपये किलो बिक रही है। उपभोक्ता के बीच चीनी गाजर की भारी मांग है।
भारतीय कृषि क्षेत्र पर चीन का यह आक्रमण नया नहीं है। इसके पहले वह अपने सेब के माध्यम से भारतीय बाजार पर कब्जा करने का प्रयास कर चुका है। आखिर चीन की गाजर की बिक्री का राज क्या हैए इस बारे में जिले के प्रगतिशील कृषक विजय सिंह का कहना है कि भारत सरकार औद्यानिक कृषि को बढ़ावा देने के प्रति उदासीन है, जबकि चीन अपने यहां कृषि को विज्ञान व टेक्नालाजी के बराबर महत्व दे रहा है।
गाजर तस्कर हैं सक्रिय
औसत गाजर से सुर्ख बेहद लाल रंग वाली चाइनीज गाजर चीन तिब्बत, के ल्हासा जिले से होकर नेपाल के खासा जिले में आती है। वहां से तस्करों के माध्यम से भारत नेपाल सीमा पर रात में चोरी छिपे लाकर डंप की जाती है और मौका देखकर उसे भारतीय क्षेत्र में पहुंचा दिया जाता है। चीनी गाजर सामान्यतः उन कच्चे मार्गाे से ट्रैक्टर ट्राली और साइकिल पर लाद कर लायी जाती है, जिनसे भारत से खाद नेपाल पहुंचाई जाती है।

अब निशाना पीएम पर साधा भाजपा ने


जेपीसी पर फिर अड़ी भाजपा

नई दिल्ली (ब्यूरो)। भारतीय जनता पार्टी जेपीसी से कम की मांग पर राजी होती दिखाई नहीं पड़ रही है। भाजपाध्यक्ष ने गुरुवार को कहा कि ए राजा और सुरेश कलमाड़ी को टूजी स्पेक्ट्रम तथा राष्ट्रमंडल खेल घोटालों में बली का बकरा नहीं बनाया जाए और चूंकि सभी फैसले केंद्रीय मंत्रिमंडल और प्रधानमंत्री ने किए हैं इसलिए संयुक्त संसदीय समिति की जाच से ही पूरी सचाई सामने आ सकती है।
पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने यहा कहा कि राजा और अन्य मंत्रियों ने केंद्रीय मंत्रिमंडल और प्रधानमंत्री की अनुमति से ही निर्णय किए। इसलिए देश के सामने इस बात का खुलासा होना चाहिए कि राजा का सरमायादार कौन है और इन घोटालों में और कौन कौन शामिल है। देश की जनता को यह जानने का हक है।
जेपीसी की माग दोहराते हुए उन्होंने कहा, जब तक इससे जाच नहीं कराई जाती है पूरी सचाई सामने नहीं आएगी। गडकरी ने कहा कि जब तक सारी सच्चाई सामने नहीं आती है और अंतिम बिंदु तक की जाच नहीं कराई जाती है राजा की गिरफ्तारी महज ढकोसला होगा।
काग्रेस और संप्रग पर 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन में शामिल होने का आरोप लगाते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा इनके बिना इतने बड़े पैमाने पर घोटाले होना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि राजा और कलमाड़ी को बली का बकरा बना कर अन्य दोषियों की बेदाग छवि बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। अपनी खाल बचाने के लिए सरकार दूसरों की बलि नहीं दे।
गडकरी ने कहा कि 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन के नीतिगत निर्णय के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि मुख्य सचिव ने मंत्रियों के समूह को लिखा था कि मूल्य प्रावधान को हटा दिए जाने से देश को नुकसान होगा। अगर प्रधानमंत्री ने उस समय इस बात को मान लिया होता, तो शायद यह हालात ही पैदा नहीं होते।

हबीबुल्लाह ने संभाला कार्यभार


हबीबुल्लाह ने संभाला कार्यभार
नई दिल्ली (ब्यूरो)। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के नवनियुक्त अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह ने गुरुवार को कार्यभार संभाल लिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश में अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों एवं हितों को सुनिश्चित करना उनकी सर्वाेच्च प्राथमिकता होगी।
कार्यभार संभालने के उपरांत संवाददाताओं से बातचीत में हबीबुल्लाह ने कहा कि संविधान के तहत अल्पसंख्यकों के अधिकारों और हितों के लिए जो भी जरूरी है, वह कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वे अपने सभी सदस्यों के साथ बैठक कर भविष्य की की योजनाएं बनाएंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद शफी कुरैशी थे, जिनका कार्यकाल बीते साल सितंबर में ही पूरा हो गया था। इसके बाद से यह पद खाली था। आज हबीबुल्लाह के साथ ही केकी एन दारूवाला ने आयोग के सदस्य के रूप में अपना कामकाज संभाला। कवि और लेखक दारूवाला का ताल्लुक पारसी समुदाय से है।
सच्चर कमिटी और रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर हबीबुल्लाह ने कहा कि सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों के बारे में पहले अध्ययन करेंगे तब ही कोई निर्णय ले पाएंगे। मालेगाव विस्फोट के संदर्भ में पकड़े गए मुस्लिम युवकों और स्वामी असीमानंद की ओर से उसमें संलिप्तता स्वीकार कर लिए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि अभी मैं इस बारे में उतना ही जानता हूं, जितना आप लोग जानते हैं। मैं इस बारे में जानकारी हासिल करूंगा।
हबीबुल्लाह देश के मुख्य सूचना आयुक्त रहने के साथ ही कुछ वक्त के लिए जम्मू-कश्मीर के भी सूचना आयुक्त रह चुके हैं। 65 वर्षीय हबीबुल्लाह वर्ष 1968 में भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुए थे। इसके बाद से वह कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारिया निभा चुके हैं।

राजा के बाद जांच एजेंसी की नजरें कलमाड़ी पर


कलमाड़ी पर कस सकता है शिकंजा

नई दिल्ली (ब्यूरो)। भ्रष्टाचार से चौतरफा घिरी कांग्रेसनीत केंद्र सरकार द्वारा संसद का बजट सत्र चलाने और जनता के बीच अपनी छवि ठीक करने की कोशिश में पूर्व संचार मंत्री ए.राजा को सीखचों के पीछे पहुंचा दिया है। सूत्रों ने बताया कि कॉमनवेल्थ ऑॅर्गनाइजिंग कमिटी के अध्यक्ष पद से हटाए गए सुरेश कलमाड़ी को भी जल्दी ही गिरफ्तार किया जा सकता है। उधर कांग्रेस ने दावा किया है कि इस गिरफ्तारी से डीएमके और उसके संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
ज्ञातव्य है कि मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और डीएमके चीफ करुणानिधि के बीच हुई मुलाकात में राजा का भविष्य तय हो गया था। राजा की गिरफ्तारी से डीएमके को तमिलनाडु चुनाव में और कांग्रेस को उसके साथ होने वाले केरल, असम और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में फायदा होने की उम्मीद है। यूपीए की प्रमुख घटक टीएमसी पश्चिम बंगाल के चुनावों को देखते हुए भ्रष्टाचार पर कड़े कदम उठाने की मांग कर रही थी।
सूत्रों के अनुसार करुणानिधि ने राजा को उनकी गिरफ्तारी की जानकारी दे दी थी। सरकार को उम्मीद है कि राजा की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष के तेवर ढीले होंगे और बीजेपी और लेफ्ट में बजट सत्र के नहीं चलने देने के मुद्दे पर असहमति बढ़ेगी। सीपीएम के महासचिव प्रकाश कारत कह चुके हैं कि संसद को ज्यादा समय तक चलने से नहीं रोका जा सकता। बीजेपी और लेफ्ट ने संसद का शीतकालीन सत्र नहीं चलने दिया था।
राजा की गिरफ्तारी के जरिए यूपीए सरकार कई निशाने साधना चाहती है। सरकार की पहली प्राथमिकता बजट सत्र चलाना है। विपक्ष अभी भी जेपीसी की मांग पर अड़ा है। बीजेपी कह रही है कि जेपीसी नहीं तो संसद में काम नहीं। मगर अब लेफ्ट को एहसास हो रहा है कि विपक्ष की सारी जगह बीजेपी घेरती जा रही है। पश्चिम बंगाल के चुनाव उसके लिए भी बड़ी राजनीतिक लड़ाई हैं। बीजेपी के साथ सहयोग से उसकी छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
लोकसभा के नेता और विŸा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बजट सत्र में विपक्ष का सहयोग मांगने के लिए 8 फरवरी को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। सरकार को उम्मीद है कि कड़ी कार्रवाइयों के बाद विपक्ष पर संसद चलने देने का दबाव बढ़ेगा।

एमपी से एक पीडिता का खुला पत्र

एमपी से एक पीडिता का खुला पत्र 


सेवा  मे
        श्रीमान पुलिस महानिरीक्षक महांेदय
        रीवा रेन्ज, रीवा


संदर्भ- श्रीमान् पुलिस महानिरीक्षक महोदय हिदयत के बावजूद आरोपीयो द्वारा पुनः घटना कारित किय जाने के सम्बन्ध वाबत।
मान्यवर,
    प्रार्थिया की याचना निम्नानुसार है।
यह की दिनांक 16.11.2010 से आज दिनांक तक थाना प्रभारी सिविल लाईन द्वारा उच्चाधिकारियो के निर्देश के बाबजूद कोई कार्यवाही नही की गई जब की अरोपियो द्वारा मेरे साथ पांच पांच बार घटना कारित की गई जिसमे लूटपाट डकैती घर मे अपना कब्जा जमाने मारपीट करने भद्दी-भद्दी  गाली गलौज करने जान से मार देने की धमकी देने एवं घर मे घुसकर मेरे साथ मारपीट अभद्रता किया गया जिसके बाद भी थाना प्रभारी सिविल लाईन द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई मामला को दबाने का हर संभव प्रयास किया गया एवं अरोपियो को संरक्षण प्रदान कर उनका हौसला बुलंद किया गया जिसकी सूचना मेरे द्वारा थाना एवं सभी पुलिस अधिकारियेा को दी जा चुकी है। जिनकी छाया प्रतियां आवेदन के साथ संलग्न है।    
1ण्    यह की मेरे एवं मेरे पति के द्वारा दिये गये आवेदनो मे आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नही की गई मामला तक कायम नही किया गया जबकी मामला डकैती लूटपाट कर घर मे अपना कब्जा जमाने का है। जैसा की टी0 आई0 साहब द्वारा दिनांक 29.12.2010 को आई0 जी0 साहब के समक्ष मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिंह के पक्ष मे बोलने मे कोई कसर नही छोडी यहां तक की उनके द्वारा कहा गया की घटना के समय नितिन प्रताप सिंह थाने बैठा था। जबकी यह सरासर झूठ है। जबकी  उसके एवं उसके  साथियेा द्वारा मेरे घर को घेरकर दरबाजा तोड़ने का प्रयास किया गया था। जिसमे आई0 जी0 साहब द्वारा मेरी मदद की गई थी ।
2ण्    यह की थाना प्रभारी सिविल लाईन के द्वारा आज तक कोई कार्यवाही नही की गई मामले को दबाने का हर संभब प्रयास किया गया उनके द्वारा अधिकारियो के समक्ष भी झूठ का सहारा लेकर अरोपियो की हर संभब मदद की गई टी0 आई0 साहब द्वारा अधिकारियो से मामले को सिविल प्रकरण बताया गया । क्या किसी के घर मे डकैती डालकर सारा समान लूट ले जाना और घर मे दबंगइयी से कब्जा कर लेना सिविल प्रकरण है। क्या इस स्थित मे सीधा साधा आदमी सुरक्षित रह पायेगा। जब न्याय देने वाला ही अपराधियेा से मिल जाय।
3ण्    यह की थाना प्रभारी सिविल लाईन द्वारा मेरे और मेरे पति के साथ अरोपियो से मिलकर सणयंत्र किया गया जिसमे दो दिन रूक जाओ कह कह कर लगभग दो माह तक चक्कर लगबाते रहे। उसके बाद  आई0 जी0 साहब के निर्देश के बाद उनके द्वारा एस0 आई0 साकेत एवं अन्य चार पांच सिपाहियो को भेजकर दिनांक 24.12.2010 को ताला तोडबाकर मेरे परिबार को घर मे रूकने को कहा गया और आदेशानुसार दो सुरक्षा गार्ड तैनात किये गयेे। जो रात 10 बजे के बाद हमको एवं हमारे परिबार को अकेला छोड़ भाग खड़े हुए जिसके बाद अरोपियो द्वारा मेरा घर घेर लिया गया और हम लोग किसी तरह जान बचाकर थाना सिविललाईन पहुचे जहां टी0 आई0 साहब मौजूद नही थे जिसके बाद सूचना मेरे पति के द्वारा उनके मोबाईल पर दी गई तब उनके द्वारा यह कहा गया की इसका जिम्मेदार मैं नही हूं और मेरे पास यही बस काम नही है कह कर फोन काट दिया गया। उसके बाद टी0आई0 का दिनांक 25.12.2010 को सुबह करीब 11बजे मेरे पति के पास फोन आया की थाने आजाओ जब मेरे पति थाना सिविललाईन पहुचे तो देखा की मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिहं एवं उसके साथ मे कई लोग मौजूद थे। जिसमे एक पत्रकार महोदय भी सामिल थे। तब टी0आई0 द्वारा मेरे पति के ऊपर दबाब बनाया गया की समझौता करके घर उसके नाम करबादो जिसमे मेरे पति कोई प्रतिक्रिया दिये बगैर वापस आ गये जिसके बाद भी टी0आई0साहब का कई वार फोन आया जिसमे वही बात कही गई जिसमे मेरे पति के द्वारा दिनांक 29.12.2010 को साफ इंकर कर दिया गया जिसके कारण टी0आई0साहब काफी नाराज हो गये उसके बाद मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिंह का फोन आया की अगर तुम रजिस्ट्री नही करबाओगे तेा घर भी जाऐगा और जान भी जाएगी  तब मेरे पति के द्वारा यह कहां गया की क्या तुम जबरदस्ती किसी का घर ले लोगे जिस पर उसके द्वारा फोन पर गाली गलौज की गई और बोला गया अभी तेरे घर जाकर दरबाजा तोड़ डालूगा और जो मिला उसे गोली मार दूगां। अब देखता हूं तुझे और तेरे परिबार को कौन बचाता है और इसके बाद अरोपी नितिन प्रताप सिंह एवं उसके साथियों के द्वारा मेरे घर को घेरकर दरबाजा  तोड़ने का प्रयास किया गया। और भद्दी-भद्दी गालियो का प्रयोग किया गया। उस समय हम औरते घर मे अकेली थी। हमारे अंदर दहसत भर गई किसी तरह मेरे द्वारा आई0जी0 साहब को घटना के बारे मे फोन पर अबगत कराया गया । जिनके द्वारा पुलिस फोर्स भेजकर हमारी सुरक्षा की गई।
4ण्     यह की श्रीमान पुलिश महानिरीक्षक के द्वारा दिनांक 29.12.2010 को मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिंह की फोटो खिचाकर हिदायत दी गई थी की आज के बाद इन्हे किसी प्रकार से परेशान नही करोगे नही तुम्हारे लिऐ अच्छा नही होगा। जिसके वाद आरोपियो द्वारा हिदायत की अबहेलना  कर दिनांक 07.01.2011एवं 08.01.2011 के दर्मियान लगभग राति 12 बजे मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिंह अरूण प्रताप सिंह गुड्रडा सिंह पिंकू सिंह मनोज सिंह एवं अन्य पांच छ अरोपियो द्वारा मेरे घर मे घुसकर दरबाजा तोडकर मारपीट गाली गलौज एवं जान से मार देने का प्रयास किया गया। जिसके बाद हल्ला गोहार मचाने पर किसी तरह से हमारी जान बच पाई और उक्त आरोपी गण मेरे घर से भाग गये । जिसकी सूचना मेरे द्वारा थाना प्रभारी सिविललाईन को दिनांक 08.01.2011 को दी गई है।
5ण्    यह की दिनांक 08.01.2011 को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को घटना की सूचना दिये जाने के बाद उनके द्वारा थाना प्रभारी सिविल लाईन को बुलाकर कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया। जिस पर उनके द्वारा यह कथन दिया गया की ये महिला झूठ बोलती है । इस प्रकार की कोई घटना इसके साथ नही घटित हुई। ये सब बनाबटी है। इसी कारण आई0 जी0 साहब द्वारा अपने कार्यालय से इसे डाटकर भगा दिया गया था। जो थाना प्रभारी द्वारा सरासर झूठ बोलकर अधिकारियो को भ्रमित करते है। इस प्रकार की मेरे साथ कभी कोई घटना घटित नही हुई । की किसी अधिकारी द्वारा मुझे डाटकर भगा दिया गया हो। इसके बाद थाना प्रभारी की आरजू मिन्नत एवं निर्देश के बाद मेरे घर जाकर मौका मुआयना किया जा कर मामले की खाना पूर्ति की गई।
6ण्    यह की इस स्थित मे जब थाना प्रभारी ही आरोपियो से मिला हो उन्हे संरक्षण दे रहा हो एवं उनके बचाब मे झूठा कथन दे रहा हो। तो प्रार्थिया को न्याय क्या देगा । मुझे यह संका होती है। की अगर मेरे अथबा मेरे परिबार की आरोपियो द्वारा हत्या भी कर दी जाय तो थाना प्रभारी सिविललाइन द्वारा आरोपियो के पक्ष मे वचाव हेतु कोई कथन दे सकते हैं । और उस स्थित मे भी मुझे न्याय नही मिल पाऐगी ।इस तरह के पुलिस अधिकारियो के खिलाफ बोलना एवं शिकायत करना भी खतरनाक साबित  हो सकता है। उनके द्वारा मुझे एवं  मेरे परिवार का किसी झूठे मामले मुकदमे मे फसाया जा सकता है।
7ण्    यह की मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिंह एवं उसके साथियो के खिलाफ विभिन्न थाने मे मारपीट लूट एवं डकैती के कई मामले पंजीबद्ध हैं। मुख्य आरोपी नितिन प्रताप सिंह के ऊपर जिला बदर एवं 307  जैसे मामले चलाऐ जा चुके हैं । जिसकी जानकारी सभी पुलिसा अधिकारियेां एवं  श्री मान गृह मंत्री तक को हैं। जिनके द्वारा आरेापी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने का आदेश भी दिया जा चुका है। जिसके बाद भी उसके खिलाफ कोई कड़ी कार्यवाही नही की गई जिस से उसका मनेाबल काफी बढ़ा हुआ है। और वह कोई घटना कभी भी कारित कर सकता है।
8ण्    यह की मुझे एवं मेरे परिवार को पुलिस सुरक्षा प्रदान कराई जाये एवं मामला कायम कराया जाय । मेरे मामले की जांच किसी उच्चाधिकारी से कराई जाय। जिससे मेरे परिवार की जान माल की  सुरक्षा हो सके। इसके पहले भी मेरे द्वारा पुलिस सुरक्षा की मांग की जा चुकी हैं जिस पर कोई कार्यवाही नही हुई । अगर आपके द्वारा मुझे पुलिस सुरक्षा प्रदान नही की गई तो कभी भी कोई घटना घटित हो सकती है।
    अस्तु उपरोक्तानुसार फरियाद कर प्रर्थना करती हूु की आरोपियो के खिलाफ मामला कायम करा कर मुझे जानमाल की सुरक्षा प्रदान करने की कृपा की जाय।
          रीवा दिनांक 18.01.2011
   प्रार्थिया
        पद्मा मिश्रा
नारेन्द्र नगर मकान नं. 17/208 थाना
सिविल लाइन जिला रीवा म0प्र0)
       हाल निवाश रतहरा पेट्रोल पंप के पास
   माकान नं0 15/1719 रतहरा रीवा (म0 प्र0)

बुधवार, 2 फ़रवरी 2011

कैसे हो आंतरिक सुरक्षा

विकराल चुनौति बन गई है आंतरिक सुरक्षा 
सरकारों की अनदेखी से समस्या हुई बेकाबू
 
राज्य और केंद्र के बीच बनाना होगा समन्वय
 
दलगत भावना को परे रख, सर्वोपरि रखना होगा राष्ट्रधर्म
 
आंतरिक सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं रहीं सरकारें
 
(लिमटी खरे)

केंद्र और राज्यों की सरकारों के बीच समन्वय के अभाव का परिणाम आज साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। अस्सी के दशक से आंतरिक सुरक्षा में गड़बड़ियां प्रकाश में आने लगी थीं। जम्मू काश्मीर के साथ ही साथ पंजाब, असम बुरी तरह सुलगा। कंेद्र सरकार ने इसके शमन के लिए प्रयास किए। मामला शांत हुआ। इसके बाद देश मंे अलगाववाद, क्षेत्रवाद, माओवाद, भाषावाद, नक्सलवाद ने तेजी से पैर पसारे।
 
नक्सलवाद को खाद पानी कहां से मिलता है, इस बारे में सरकारें बहुत ही अच्छी तरह वाकिफ हैं। आर्थिक विषमता ही किसी भी लड़ाई का प्रमुख कारक हुआ करती है। अस्सी के दशक में संयुक्त मध्य प्रदेश में नक्सलवाद की जड़ें काफी हद तक गहरी हो चली थीं। अलगाववाद, क्षेत्रवाद, माओवाद, भाषावाद, नक्सलवाद आदि के पनपने के पीछे कारण क्या है? क्या शासक इस बात से अंजान हैं? जाहिर है इसका उत्तर होगा सरकारें सब कुछ जानती हैं।
 
नक्सलवाद प्रभावित बालाघाट और मण्डला जिलों के जंगलों, आदिवासियों आदि से चर्चा के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि इस सबके पीछे सिर्फ और सिर्फ सरकारी तंत्र ही जवाबदार है। नक्सलवादियों के निशाने पर कौन हैं? जाहिर है पुलिस, वन, राजस्व महकमे के लोग। आखिर इन विभागों को नक्सलवादियों ने क्यों चुना है? हालात बताते हैं कि इन तीनों ही महकमों का आम जनता से रोजाना ही वास्ता पड़ता है। यह बात भी जगजाहिर है कि इन तीनों ही महकमों के लोगों को चढ़ोत्री चढ़ाए बिना कोई काम संभव नहीं है।
 
जब आम जनता को यह पता चलता है कि उनका शोषण करने वालों को ‘कोई‘ दण्ड दे रहा है तो उसका इस ‘कोई‘ का साथ देना वाजिब है। उन्हें लगने लगता है कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए कोई तो आगे आया है। वरना कोई अनजान आदमी आकर समूचे गांव को अपने बस में कैसे कर लेता है? गांव के गांव इनका साथ देने कैसे तैयार हो जाते हैं? कैसे इनकी फौज के लिए जुझारू सिपाही मिलते हैं जो मरने मारने को तैयार हो जाते हैं? हमारे नीति निर्धारकों को इस बारे में सोचना होगा?
 
आंतरिक सुरक्षा के संबंध में समाज, आम आदमी और सरकार की भूमिका क्या और कैसी होना चाहिए? इस बारे में अब तक चिंतन नहीं होना दुर्भाग्य का ही विषय माना जाएगा। सरकारों, गैर सरकारी संगठनों, राजनैतिक दलों आदि की संगोष्ठियों में भी इस गंभीर विषय पर चर्चा नहीं किए जाने से साफ जाहिर हो जाता है कि इन सभी को आम आदमी की कितनी परवाह है।
 
आंतरिक सुरक्षा के लिए सरकारी तंत्र को जवाबदार इसलिए ठहराया जा रहा है क्योंकि विसंगतियां सरकारी तंत्र के कारण ही उपज रही हैं। आजादी के पहले के परिदृश्य में अंग्रेजों की लालफीताशाही के कारण समाज एकजुट हुआ, इतिहास साक्षी है इसी दौरान गांव में धनाड्य वर्ग ने जब भी कहर बरपाया है, इससे डकैतों की उत्पत्ति हुई है। कुल मिलाकर सामाजिक व्यवस्था का ढांचा जब भी गड़बड़ाया है तब तब अनैतिक रास्तों को अपनाकर अपना शासन स्थापित करने के प्रयास हुए हैं।
 
वर्तमान में आंतरिक सुरक्षा एक अत्यंत गंभीर प्रश्न बनकर उभर चुकी है, जिसकी तरफ सरकार का ध्यान गया तो है, पर हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं कि अपने वोट बैंक की जुगत में सरकारों ने इस मुद्दे के शमन के लिए गंभीरता से प्रयास नहीं किए हैं। यही कारण है कि देश में आतंकवाद, अलगाववाद, नक्सलवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद आदि का जहर तेजी से फैल चुका है। आप अगर महाराष्ट्र का ही उदहारण लें तो वहां शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मराठी वाद के चलते लोगों का जीना मुहाल हुए बिना नहीं है। वोट बैंक के चलते सरकार मौन साधे हुए है।
 
हमारे विचार से इस मामले में काफी हद तक समाज भी दोषी है। समाज को भी इस तरह की व्यवस्था का प्रतिकार करना चाहिए। आम आदमी को भी इसके विरोध में स्वर बुलंद करने की आवश्यक्ता है। आखिर क्या कारण है कि आम आदमी अपना काम बिना रिश्वत के करवाने में अक्षम है। इसका उत्तर आईने की तरह साफ है। आज हमें भी जल्दी और नियम विरूद्ध काम करवाने की आदत सी हो गई है। हम कहीं भी जाते हैं तो चाहते हैं कि हमारा काम औरों से पहले, जल्दी और सुविधा के साथ हो जाए, इसके लिए हम हर कीमत देने को तैयार होते हैं। इसका भोगमान गरीब गुरबों को भुगतना होता है, जिनके पास संसाधनों का अभाव है।
 
देश की संवैधानिक व्यवस्था भी इसके लिए काफी हद तक दोषी करार दी जानी चाहिए। देश में आरक्षण को आजादी के उपरांत दस साल के लिए लागू किया गया था, जिसे आज 62 सालों बाद भी बदस्तूर जारी रखा गया है। 62 वर्षों में एक आदमी वृद्धावस्था को पा लेता है। सरकारी नौकर को भी 62 साल में सेवानिवृत किया जाता है। हमें यह कारण खोजना होगा कि आखिर क्या वजह है कि छः दशकों बाद भी हम आरक्षण पाने वालों को समाज और राष्ट्र की मुख्यधारा में नहीं ला पाए हैं? हमें इस मसले को गंभीरता के साथ लेकर सोचना होगा, मनन करना होगा और फिर प्रयास करने हांेगे कि हम इस विसंगति को दूर करें।
 
आखिर क्या वजह है कि आज देश में जाति के बजाए आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा रहा है? आखिर क्या वजह है कि सरकारी नौकरों को सेवानिवृत्ति के उपरांत पेंशन देने से परहेज किया जा रहा है और जनप्रतिनिधियों को आज भी भारी भरकम पेंशन दी जा रही है। सवाल यह है कि आखिर यह पैसा आता कहां से है? जनता के गाढ़े पसीने की कमाई ही है यह जिस पर जनता के नुमाईंदे एश किया करते हैं।
 
बहरहाल लंबे समय के उपरांत केंद्र सरकार ने आंतरिक सुरक्षा की सुध ली है। मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह ने जिन बातों को रेखांकित किया वे संभवतः गैरजरूरी ही थीं। वस्तुतः आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ सुरक्षा बल, खुफिया एजेंसियों का सूचना तंत्र है, जो तहस नहस ही पड़ा हुआ है। जनता और पुलिस के बीच संवादहीनता के चलते जरायमपेशा लोगों के लिए बेहतर उपजाउ माहौल तैयार हो रहा है। छोटे मोटे अपराध से ग्रसित आम जनता थाने की चारदीवारी लांघने से डरती है। अपराधियों में पुलिस का खौफ न के बराबर है, पर जनता के मानस पटल पर पुलिस का कहर आतंक बरपा रहा है। जब तक जनता और पुलिस के बीच दूरी कम नहीं होगी, आंतरिक सुरक्षा के लिए लाख कोशिशें कर ली जाएं बेकार ही होंगी।
 
वैसे प्रधानमंत्री का यह कहना शत प्रतिशत सही है कि आज समाज की सुरक्षा पुराने पड़ गए कानूनों के माध्यम से ही की जा रही है। पुलिस सुधार के लिए न जाने कितनी कमेटियां, न जाने कितने आयोग बैठ चुके हैं, इन सबकी सिफारिशें धूल खा रही हैं। मनमोहन सिंह किस बात से डर रहे हैं। उनके पास पुलिस सुधार की सिफारिशें हैं तो उन्हें लागू किया जाना चाहिए। वजीरे आजम इसके लिए किस महूर्त का इंतजार कर रहे हैं, यह बात समझ से ही परे है।
 
भारत गणराज्य के महाराष्ट्र सूबे में शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के गुर्गे सरेराह आतंक बरपाते घूम रहे हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश के निवासियों को वहां से भाग कर आना पड़ रहा है, उधर कांग्रेस को इसके पीछे भी सियासत की ही पड़ी है। बाला साहेब ठाकरे और राज ठाकरे ने दिखा दिया है कि आजाद भारत में तंत्र का नहीं उनका राज कायम है। किसी में इतनी दम नहीं कि राज या बाला साहेब की लगाम कस सकें।
 
आंतरिक सुरक्षा के मामले में देश में सभी राज्यों को एक ही लाठी से हांका जाता है, जो अनुचित है। पूर्वोत्तर क्षेत्रों की जमीनी हकीकत और भोगोलिक परिस्थियां अलग है, तो दक्षिण, पश्चिम की अलग। आज विदेशी ताकतें सूचना और प्रोद्योगिकी का इस्तेमाल कर अपने रास्ते आसान करती जा रहीं हैं, और हमारे सुरक्षा बल या पुलिस वही बाबा आदम के जमाने में ही जी रहे हैं। हमें इसे बदलना ही होगा।
 
पुलिस या सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली को इक्कीसवीं सदी के हिसाब से ढाले बिना आंतरिक सुरक्षा की चर्चा बेमानी है। अगर हम एसा नहीं कर पाए तो इस तरह मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को आहूत कर करोड़ों रूपयों को बहाने के अलावा हम कुछ और नहीं करने वाले। इसका नतीजा निश्चित तौर पर सिफर ही होगा।
 
कुल मिलाकर अगर किसी भी राज्य में आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया जाना है तो उसके लिए राज्य को बाकायदा अपनी एक ठोस नीति बनाना सुनिश्चित करना होगा। महज नीति बनाने से कुछ होने वाला नहीं, इसके लिए उस नीति का ईमानदारी से पालन कैसे हो? इस बारे में कठोर कदम उठाने की जरूरत होगी। इस सबके लिए जरूरी है सरकार में बैठे नुमाईंदो, राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि और समाज के पायोनियर (अगुआ) की ईमानदार पहल की, जिसकी गुंजाईश बहुत ज्यादा दिखाई नहीं पड़ती।

उमरदराज नेताओं को सन्यास की नसीहत दी सोनिया ने


जल्द ही हो सकती है युवराज की ताजपोशी 
बुजुर्गवार बांध लें बोरिया बिस्तर
 
युवा नजर आ सकती है सोनिया की कार्यकारिणी
 
खुद सोनिया हैं 64 साल की
 
(लिमटी खरे)
 
नई दिल्ली। सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस का चेहरा अब युवा हो सकता है। बारह साल के कार्यकाल में पहली मर्तबा सोनिया गांधी ने संगठनात्मक फेरबदल के पहले तीखे तेवर दिखाए हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चौधरी रणबीर सिंह की स्मृति में डाक टिकिट जारी करते समय सोनिया गांधी ने इशारों ही इशारों में उमरदराज हो चुके नेताओं को स्वेच्छिक सेवानिवृति लेने की बात कह डाली। जानकार सोनिया के इस बयान को राहुल की संभावित ताजपोशी से भी जोड़कर देख रहे हैं।
 
कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी ने रणबीर सिंह का उदहारण देते हुए कहा कि उन्होंने 64 साल में स्वेच्दा से राजनीति से सन्यास ले लिया था। सोनिया ने कहा कि आज समय है हम सभी को सोचना ही होगा कि आखिर आने वाली नई पीढ़ी के सामने हम कौन सा आदर्श छोड़ रहे हैं। सोनिया जब रणबीर सिंह के 64 साल का बखान कर रहीं थीं, तभी पिछली पंक्ति में सोनिया गांधी के 64 बसंत पूरे करने की चर्चाएं चल रहीं थीं। गौरतलब है कि 9 दिसंबर 1946 को जन्मीं सोनिया खुद 64 की हो चुकी हैं, लोगों का कहना था कि नैतिकता बघारने के पहले सोनिया को खुद ही स्वेच्छा से राजनीति त्याग देना चाहिए।
 
वहीं दूसरी ओर सोनिया गांधी की इस बात का आशय यह भी लगाया जा रहा है कि जल्द ही सोनिया गांधी संगठन की जवाबदारी से खुद को पृथक करने का मन बना रही हैं। इसी के साथ ही साथ साठ से अधिक उम्र के नेताओं को रास्ते से हटाकर राहुल गांधी के लिए नए जवान मजबूत कांधों के मार्ग प्रशस्त करती नजर आ रही हैं सोनिया।
 
कांग्रेस की सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र दस जनपथ से छन छन कर बाहर आ रही खबरों पर अगर यकीन किया जाए तो सोनिया जल्द ही संगठन में फेरबदल कर युवाओं को आगे लाएंगी, इसके उपरांत जैसे ही संसद का बजट सत्र निपटेगा उसके तुरंत बाद ही सत्ता से भी उन मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा जो साठ की उम्र पूरी कर चुके हैं। कांग्रेस के वायोवृद्ध नेताओं में सोनिया के इस तरह के इशारे को लेकर हडकम्प मचा हुआ है।
दिग्गी के एजेंडे पर सोनिया राहुल
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजा दिग्विजय सिंह के एजेंडे पर कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी चलते नजर आ रहे हैं। गौरतलब होगा कि दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में दिल्ली में हुए पार्टी के महाधिवेशन में कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा था कि पार्टी की कमान नई पीढ़ी को सौंपी जानी चाहिए, इसके साथ ही उन्होंने अपने सरीखे नेताओं को एक्सपायरी डेट की केटेगरी में रख दिया था।

शिव उमा में मंथन


शिव और उमा के बीच पिघल रही है बर्फ

किसानों के बहाने दोनों ने की बंद कमरे में चर्चा
 
(लिमटी खरे)
 
नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के किसानों की बदहाली के चलते मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और वर्तमान निजाम शिवराज सिंह चौहान के बीच दूरियां कम होती नजर आ रही हैं। मंगलवार रात में मध्य प्रदेश भवन में दोनों ही नेताओं के बीच लगभग एक घंटे मंत्रणा हुई। उमा शिव के बीच हुई गुफ्तगंू के बाद भाजपा में सियासत गर्मा गई है।
गौरतलब है कि भाजपा में उमा भारती की वापसी पर सबसे बड़े अडंगे के तौर पर शिवराज सिंह चौहान सहित मध्य प्रदेश भाजपा के अनेक नेता सामने आ रहे थे। इसी बीच राजग के पीएम इन वेटिंग एल.के.आड़वाणी और भाजपाध्यक्ष नितिन गड़करी ने उमा भारती की वापसी की संभावनाओं को बल देकर ठहरे हुए पानी में लहरें पैदा कर दी थीं।
जैसे ही फिजां में उमा की घर वापसी की खबरें तैरीं वैसे ही उनके विरोधियों ने लामबंद होकर इसका विरोध करना आरंभ कर दिया था। भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि आड़वाणी ने उमा भारती की वापसी का रोड़मेप वहाया उत्तर प्रदेश निकाला, किन्तु यूपी के भाजपाई उमा भारती को झेलने को तैयार नहीं हैं। यही कारण है कि उमा भारती अब मध्य प्रदेश में अपने घुर विरोधियों से हाथ मिलाने से नहीं चूक रहीं हैं।
बताया जाता है कि आड़वाणी के निर्देश पर ही शिवराज सिंह चौहान ने अपने सहयोगियों के साथ उमा भारती की मिजाज पुरसी उस वक्त अस्पताल में जाकर की थी जब वे दुर्घटना में घायल हो गईं थीं। गत दिवस एमपी भवन में भाजपा के दो विपरीत धु्रवों के बीच हुई मंत्रणा के बाद उमा भारती के चेहरे पर सकून के भाव इस बात की ओर साफ इशारा कर रहे थे कि वे शिवराज को साधने में काफी हद तक सफल रहीं हैं।

2जी मामले में नप गए राजा


2जी मामले में नप गए राजा
नई दिल्ली (ब्यूरो)। 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई ने संचार मंत्री एण्डीमुत्थू राजा को गिरफ्तार कर लिया है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक हालांकि अभी तक सीबीआई की ओर से आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है, फिर भी सीबीआइ्र के सूत्रों ने कहा है कि राजा सीबीआई हिरासत में हैं।
राजा के पूर्व निजी सचिव आर. के. चंदोलिया और पूर्व टेलिकॉम सचिव सिद्दार्थ बेहुरा को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। राजा के भाई के. पेरूमल पर भी सीबाआई ने शिकंजा कसा है। राजा पर आपराधिक दुर्व्यवहार और टेलिकॉम कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नीतियों के उल्लंघन का मामला बनाया गया है।
राजा की गिरफ्तारी पर भाजपा ने कहा है कि यह कदम काफी देरी से उठाया गया और इसका श्रेय सरकार को कतई नहीं जाता। भाजपा का कहना है कि यह गिरफ्तारी 2009 में हो जानी चाहिए थी।
इस गिरफ्तारी पर कांग्रेस का कहना है कि इस गिरफ्तारी का डीएमके के साथ गठबंधन में कोई असर नहीं पड़ेगा। वहीं वाम दलों का कहना है कि इस गिरफ्तारी से साफ होता है कि घोटाला हुआ है और इसकी जड़ें अदंर तक हैं। वाम दलों सहित भाजपा ने जेपीसी जांच की मांग की है।

मनरेगा की बढ़ेगी मजदूरी


मनरेगा की बढ़ेगी मजदूरी
नई दिल्ली (ब्यूरो)। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज कहा कि सरकार की महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत श्रमिकों को महंगाई के अनुसार अधिक मजदूरी दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने इस योजना की पांचवीं वर्षगांठ पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि हमने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में हुई वृद्धि के आधार पर पारिश्रमिक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
डॉ.सिंह ने कहा कि 2006 में जब यह योजना शुरू हुई थी तो एक श्रमिक की न्यूनतम दैनिक मजदूरी 65 रुपये थी। उन्होंने कहा कि अब न्यूनतम दैनिक मजदूरी 100 रुपये है, जो अपने आप में एक बड़ी वृद्धि है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया ने कहा कि इस योजना में व्याप्त खामियों पर मंथन करने और नई दिशाओं में बढ़ने का समय आ गया है। सोनिया ने कहा कि यह योजना ग्रामीण लोगों के लिए रोजगार पैदा करने में बहुत सफल रही है, खासतौर से कमजोर वर्गाे एवं महिलाओं के लिए। लेकिन इस योजना में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की भी शिकायतें है। उन्होंने कहा कि योजना के क्रियान्वयन में व्याप्त कमियों का विश्लेषण करनेए नई दिशाओं की योजना बनाने और आगे बढ़ने का यह एक अवसर है।
मनमोहन सिंह ने कहा कि मनरेगा के लाभार्थियों का एक बड़ा वर्ग अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं का है। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में समर्थ साबित हुई है। सिंह ने कहा कि यह योजनाए गरीबी मिटाने के महात्मा गांधी के सपने को पूरा करने के लिए संप्रग सरकार का एक बड़ा कदम है।

एयर शो नौ को

नौ फरवरी से सबसे बड़े एयर शो का आयोजन
नई दिल्ली (ब्यूरो)। भारत नौ फरवरी से बेंगलूर में अपने सबसे बड़े एयर शो का आयोजन करेगा जिसमें 30 देश अपने नवीनतम अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उत्पादनों का प्रदर्शन करेंगे। शो में लड़ाकू, परिवहन और असैन्य विमान भी शामिल होंगे।

अखिल भारतीय हॉकी 16 से

अखिल भारतीय हॉकी प्रतियोगिता का भव्य आयोजन16 से

धनराज पिल्ले सहित अनेक मंत्री रहेंगे उद्घाटन अवसर पर , एतिहासिक होगा नगर पालिका गोल्ड कप


(मनोज मर्दन त्रिवेदी)

सिवनी यशो-:  अखिल भारतीय गोल्ड कप हॉकी प्रतियोगिता सिवनी नगरपालिका परिषद द्वारा आगामी १६ फरवरी से २६ फरवरी तक सिवनी नगर में आयोजित की जायेगी। इस एतिहासिक निर्णय की जानकारी सिवनी नगरपालिका के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने नगर पालिका कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदान की। इस अवसर पर जिला कलेक्टर मनोहर दुबे, पुलिस अधीक्षक आर.के. जैन, नगरपालिका उपाध्यक्ष राजिक अकली, अनेक पार्षद जिला हॉकी संघ के पदाधिकारी, और पत्रकार उपस्थित थे। नगरपालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि सिवनी जिले की पहचान हॉकी से है और हॉकी को इस जिले ने राष्ट्रीय स्तर के भी खिलाड़ी उपलब्ध कराये है। हॉकी के क्षेत्र में ऐसी प्रतिभाओं को इस प्रकार के एतिहासिक आयोजन से सम्बल प्रदान होगा आर्थिक आर्थिक परेशानियों के कारण हॉकी के भव्य आयोजन सम्भव नहीं हो पा रहे थे खिलाडिय़ों एवं खेल प्रेमियों की भावनाओं के अनुरूप सिवनी नगरपालिका परिषद ने सर्व सम्मत्ति से यह निर्णय लिया है कि हर वर्ष सिवनी नगर पालिका परिषद अखिल भारतीय गोल्ड कप हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन करेगी और इस एतिहासिक निर्णय का आगाज १६ फरवरी से प्रारंभ होगा। उद्घाटन अवसर पर भारतीय हॉकी के सरताज धनराज पिल्ले को आमत्रित किया गया है, उद्घाटन के अवसर पर म.प्र. शासन के कुछ मंत्री और खेल से सम्बन्धित अनेक प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहेंगे नगरपालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने बताया कि ऐसे भव्य आयोजन की सफलता के लिए संरक्षक मंडल भी बनाया गया है, जिसमें सिवनी बालाघाट सांसद के.डी. देशमुख, सिवनी विधायक श्रीमती नीता पटेरिया,  जिला कलेक्टर मनोहर दुबे, पुलिस अधीक्षक आर.के. जैन का समावेश है। जिला हॉकी संघ इस आयोजन का आयोजक रहेगा प्रतियोगिता में सभी टीमों को आमंत्रित करने की जिम्मेदारी जिला हॉकी संघ को सौंपी गई है। जिला हॉकी संघ के डी.एल. गौर ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए २० टीमों की स्वीकृति प्राप्त हो गई है सभी राष्ट्र स्तर की टीमें हैं। उन्होंने जानकारी दी है कि जिन टीमों की स्वीकृति प्राप्त हुई है उनमें यूनाईटेड लखनऊ, ई.एम.ई. जालंधर, सेल पाम्पोस राऊरकेला, आर.सी.एफ. बाम्बे, डी.एल.डब्ल्यू. बनारस, बी.ई.जी. पूना, टाउन हाल बल्व शाहजहानंपुर, एस.सी.ई. रेल्वे बिलासपुर, सांई हास्टल राजनांदगांव, स्टेअ अकादमी भोपाल, डब्ल्यू.सी.आर. भोपाल, सांई हास्टल भोपाल, सेन्ट्रल रेल्वे नागपुर, जिला हॉकी संघ ब्रम्हपुरी, जिला हॉकी संघ जबलपुर, जिला हॉकी संघ बालाघाट, अमरावती इलेवन स्टार, मऊ ब्लूज, जिन्दल स्टील अकादमी रायगढ़, डब्ल्यू.सी.ओ. हुगली बेंगलोर की टीमों ने प्रतियोगिता में शामिल होने की स्वीकृति प्रदान कर दी है।

मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

धनकुबेरों के सामने घुटने टेकती सरकार


‘गोरों‘ के पास जमा है भ्रष्टाचारियों का ‘काला‘ धन

आखिर सरकार डर क्यों रही है हमारा ही पैसा वापस लाने से

नाम सार्वजनिक कर राष्ट्रदोहियों की सजा हो मुकर्रर

(लिमटी खरे)

भारत गणराज्य की सरकारों के लिए इससे अधिक शर्म की बात और क्या होगी कि देश के हर एक आदमी के गाढ़े पसीने की कमाई पर सरेआम डाका डालकर धनपति बने लोगांे ने अपनी अकूत दौलत को देश से बाहर के बैंकों में जमा कर रखा है, और सरकार उनके सामने बौनी ही नजर आ रही है। स्वयंभू योग गुरू बाबा रामदेव ने पिछले दो सालों से स्विस बैंक में जमा काला धन वापस स्वदेश लाने की हिमायत की जा रही थी। पहले तो लोगों को लगता था कि बाबा रामदेव की मति फिर गई है, बाद में जब बाबा ने गांव गांव में इस अलख को जगाया तब लगा कि वाकई हमारे कर्णधारों ने कितना काला धन विदेशों जमा कर रखा है।

भ्रष्टाचार, अनाचार, योनाचार, घपले घोटाले अब तो किंवदतीं से बनकर रह गए है। चालीस के पेटे में पहुंच चुके लोगों की स्मृति पटल से पराधीनता और आजादी के किस्से विस्मृत नहीं हुए होंगे। उन्हें यकीनन लगता होगा कि सालों साल देश पर राज करने के बाद भी महमूद गजनवी या ब्रितानियों ने देश को इस कदर नहीं लूटा होगा जिस कदर आजादी के उपरांत हमारे अपने ही लोगों द्वारा सतत लूटा जा रहा है। देखा जाए तो सरकार की जवाबदारी होती है हर नागरिक को हर तरीके से सुरक्षा प्रदाय करने की। विडम्बना ही कही जाएगी कि भारत सरकार देश के नागरिकों को आर्थिक, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में पूरी तरह अक्षम रही है।

यक्ष प्रश्न तो यह है कि आखिर इन धनपतियों के पास अकूत दौलत आई कहां से? क्या इनके पास कोई टकसाल है? जी नहीं आम भारत वासी सुबह उठकर जो चाय पीता है वहां से लेकर रात को सोने तक चाय, पानी, बिजली, परिवहन, खान पान आदि पर जो कर देता है, उससे ही देश चलता है, उसी से देश के जनसेवकों के एशो आराम की सुविधाएं जुगाड़ी जाती हैं। उसी से देश के विकास के प्रोग्राम का खाका खीचा जाता है, फिर उसमंे भ्रष्टाचार कर पैसा बनाया जाता है, जो काले धन के तौर पर देश और विदेश के बैंकों में जमा होता है।

कितने आश्चर्य की बात है कि देश की शीर्ष अदालत को इस बारे मेें सरकार से जवाब तलब करना पड़ा। देश के जाने माने अधिवक्ता राम जेठमलानी कहते हैं कि वे जानते हैं कि किसका कितना काला धन विदेशों में जमा है। सवाल फिर वही है कि अगर जेठमलानी जानते हैं तो वे किस मुहूर्त का इंतजार कर रहे हैं इन राष्ट्रदोहियों के नाम सार्वजनिक करने में। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार से पूछा है कि अगर सरकार को पता चलता है कि एक गरीब आदमी ने बेहिसाब पैसा विदेशी बैंकों में जमा करवाया है तो वह उस आदमी का क्या करेगी? क्या सिर्फ उससे टेक्स वसूलकर ही उसे छोड़ दिया जाएग? क्या सरकार इस धन के स्त्रोत को पता करने का प्रयास नहीं करेगी? क्या इस पैसे का उपयोग देश के खिलाफ षणयंत्रों में नहीं हो सकता? और भी न जाने कितने प्रश्न आज भी अनुत्तरित ही हैं।

दुनिया के चौधरी अमेरिका ने इस मामले में बहुत ही सख्त नियम बनाकर रखे हैं। अमेरिका के यूएसएस पेट्रियाट एक्ट के तहत विदेशों में जमा करने वालों का खुलासा करने का प्रावधान है। इसमें अमरिकी नागरिक की संपत्ति तक जप्त करने का प्रावधान भी है। वहां की सरकार बैंकों से अपने नागरिकों के जमा धन का ब्योरा मांग सकती है। यही कारण है कि अमेरिकी नागरिक विदेशों में जमा काले धन के मामले में काफी हद तक निचली पायदान पर हैं।

एक अनुमान के अनुसार भारत का 1400 अरब डालर, चीन का 96 अरब डाल, यूक्रेन का 100 अरब डालर, इंग्लेण्ड का 390 अरब डालर, रूस का 470 अरब डालर स्विस बैंक में जमा है। आंकड़ों पर अगर गौर फरमाया जाए तो भारत गणराज्य का साढ़े बाईस लाख करोड़ रूपया विदेशों में जमा करवाया गया है, जिसका दो तिहाई हिस्सा इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में जमा करवाया गया है।

बाबा रामदेव के काले धन को वापस लाने के एजेंडे पर अब कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी भी चल पड़े हैं। राहुल गांधी ने भी काले धन को विदेशों में छुपाने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की वकालत की है। उन्होंने कहा है कि हमें सुनिश्चित करना होगा कि देश का पैसा देश में ही रहे विदेश मंे न भेजा जाए। लाख टके का सवाल यही है कि नेहरू गांधी परिवार के इशारे पर ठुमके लगाने वाली केंद्र सरकार को क्या सोनिया और राहुल गांधी कड़े कदम उठाने पर बाध्य कर पाएंगे। हालात देखकर तो यही लगता है कि बाबा रामदेव को विदेश के काले धन एजेंडे में मिलने वाले पालीटिकल माईलेज से घबराकर राहुल गांधी ने भी यही आलाप छेड़ दिया है।

बहरहाल केंद्र सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय संधि का रोना रोकर उच्च न्यायलय में हाथ खड़े कर दिए हैं, जिसकी निंदा की जानी चाहिए। केंद्र ने बेहिसाब संपत्ति की घोषणा के लिए स्वेच्छा के दरवाजे खोलने के संकेत दिए हैं। लगता है सरकार इस मामले की गंभीरता को समझने के बजाए लोगों का ध्यान इससे भटकाना चाह रही है। देश में भ्रष्टाचार चरम पर है। देश का कोई भी सूबा एसा नहीं है जहां कि राजनेताओं, नौकरशाहों, व्यापारियों की तिजोरियों नोट न उगल रही हों। लगता है कि सरकार ने इनकी सहूलियत के लिए ही पांच सौ और एक हजार के नोट प्रचलन में लाए हैं, ताकि अधिक राशि को कम स्थान पर संग्रहित किया जा सके। सरकार की इच्छा शक्ति अगर तगड़ी है तो उसे पांच सौ और एक हजार के नोटों का चलन तत्काल ही बंद कर देना चाहिए वह भी बिना किसी नोटिस के, क्योंकि पांच सौ और एक हजार तक के नोट आम आदमी के काम के हैं ही नहीं। फिर वही स्थिति बनेगी जो पहले बनी थी, जब दस हजार के नोट बंद कर दिए गए थे। कालाबाजारियों ने बेकार हो चुके दस हजार के नोटों को जलाकर आग तापी थी। आज भी कमोबेश वही स्थिति बनी हुई है। सरकार अगर समय रहते कदम उठा ले तो ठीक वरना हालात के विस्फोटक होने में समय नहीं लगने वाला।

भाजपा का तीन दिनी चिंतन शिवर 8 से नागपुर में


भाजपा का तीन दिनी चिंतन शिवर 8 से नागपुर में

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। एक अर्से से सुसुप्तावस्था में पड़ी भारतीय जनता पार्टी में जान फूंकने के लिए तीन दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन आठ फरवरी से महाराष्ट्र की संस्कारधानी नागपुर में किया जाने वाला है, जिसमें देश भर के भाजपा के सांसद, विधायक, प्रदेशाध्यक्ष हिस्सा लेंगे। शिविर में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमति सुषमा स्वराज, राज्यसभा के अरूण जेतली और भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद मार्गदर्शक के बतौर उपस्थित रहेंगे।

भाजपा के आला दर्जे के सूत्रों ने उक्ताशय की जानकारी देते हुए बताया कि चिंतन शिविर का उद्घाटन 8 फरवरी को भाजपाध्यक्ष नितिन गड़करी द्वारा नागपुर के रेशम बाग मैदान में तो 9 और दस फरवरी का शिविर देशपांडे सभागार में होगा, जिसका समापन राजग के पीएम इन वेटिंग लाल कृष्ण आड़वाणी करेंगे।

सूत्रों ने संकेत दिए कि इस शिविर में मंहगाई, भ्रष्टाचार, घोटालों, काले धन आदि मामलों में भाजपा की धार पैनी करने पर विमर्श किया जाएगा, साथ ही साथ राजग गठबंधन को छोड़कर गए दलों को वापस लाने के लिए भी कोर कमेटी का गठन किया जाएगा। उत्तर प्रदेश चुनावों के मद्देनजर संगठन की मजबूती के मसले पर भी विमर्श होने की उम्मीद है। इसमें सबसे अहम मसला यह होगा कि जिन सूबों में भाजपा के विवादस्पद मंत्री हैं, उनकी मश्कें कैसे कसी जाएं।

नर्मदा कुंभ पर पड़ेगा शिविर का साया

मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की छत्रछाया में पुण्य सलिला मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में मां नर्मदा सामाजिक कुंभ पर इस चिंतन शिवर की परछाईं पड़ने की आशंका जताई जा रही है। गौरतलब होगा कि यह कुंभ 10 से 12 फरवरी तक प्रस्तावित है, साथ ही नागपुर का चिंतन शिविर 8 से 10 फरवरी तक संपन्न होगा।

केंद्र पर भेदभाव के आरोप लगाए शिवराज ने


दिग्विजय का नाम आते ही असहज हो जाते हैं शिवराज


नई दिल्ली (ब्यूरो)। आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र सरकार पर जमकर बरसे। मध्य प्रदेश भवन में मीडिया से रूबरू शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेसनीत केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए मध्य प्रदेश के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करने का आरोप लगाया। जैसे ही कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के आरोपों का जिक्र आया, वैसे ही शिवराज सिंह बिदक गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एमपी में 34 लाख किसानों की 35 लाख हेक्टेयर खड़ी फसल पाले ने चौपट कर दी है, जिससे लगभग साढ़े सात हजार करोड़ रूपए का नुकसान होने का अनुमान है। राज्य ने इसके लिए केंद्र से चोबीस सौ करोड़ रूपए की मांग की है। श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने इसके लिए तत्काल 600 करोड़ रूपए स्वीकृत किए हैं।

संवाददाताओं द्वारा जब मुख्यमंत्री से धार्मिक आतंकवाद के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम के बयान के बारे में पूछा गया तो शिवराज सिंह चौहान सहज नहीं थे। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह केवल राजनीति करते हैं। मध्य प्रदेश धार्मिक आतंकवाद की जद में नहीं है। उन्होंने कहा कि वे दिग्विजय सिंह की बातों पर टिप्पणी करना मुनासिब नहीं समझते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में किसानों की फसलें जिस तरह से तबाह हुई हैं, उसे देखकर उनकी मदद करना अत्यावश्यक है, वरना आने वाले समय में खाने पीने के लाले के चलते ये किसान ही कानून व्यवस्था बिगाड़ सकते हैं। श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश में बंग्लादेशी घुसपेठिए एक बड़ी समस्या बनकर उभरे हैं। लूट, डकैती, राहजनी आदि की अनेक वारदातों में बंग्लादेश के नागरिकों को भी पकड़ा गया है।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधि तथा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2010 भी केंद्र के पास भेजा गया है, जिस पर केंद्र अपनी मुहर लगाकर वापस भेज दे ताकि सूबे में इसे कारगर तरीके से लागू किया जा सके। इसके अलावा भोपाल के समीप डीएसपी स्तर के अधिकारियों के प्रशिक्षण स्कूल के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है और सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के लिए बालाघाट जिले में भूमि की खोज जारी है। केंद्र सरकार अन्य सुरक्षा इकाईयों को मध्य प्रदेश में स्थापित करना चाहे तो सूबा उसका स्वागत करेगा।

रेल में मिलेंगे डिस्पोजेबल बिस्तर


अब गंदे बेडरोल को बाय कहिए

यूज एण्ड थ्रो स्कीम का सफल परीक्षण

नई दिल्ली (ब्यूरो)। भारतीय रेल में वातानुकूलिए श्रेणी में यात्रा करने वालों के लिए एक खुशखबरी है, कि आने वाले समय में उन्हें बदबूदार गंदे तौलिए, तकिए, चादर आदि से निजात मिलने वाली है। रेल विभाग ने यात्रियों को डिस्पोजेबल बेड रोल देने की योजना का आगाज किया है।

बताया जाता है कि रेल्वे द्वारा यात्रियों को टिश्यू पेपर से निर्मित तकिया और तोलिया प्रदाय किया जाना प्रस्तावित किया जा रहा है। इस योजना के परीक्षण के परिणाम बेहद ही सफल और उत्साहजनक आने के उपरांत रेल्वे ने इस माह के अंत में इसे गुवहाटी राजधानी में लागू करने का मन बनाया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यात्रियों को डिस्पोजेबल बेड रोल समस्त राजधानी एक्सप्रेस, गरीब रथ, दुरंतो, सुपर फास्ट और चुनिंदा मेल एक्सप्रेस में भी प्रदाय किए जाएंगे। वर्तमान में यात्रियों को कपड़े की चादर, कंबल, के साथ ही साथ टिश्यू पेपर से निर्मित तकिया का गिलाफ और तौलिया प्रदाय किया जाएगा। भविष्य में इसी का चादर भी यात्रियों को मिल सकेगा।

आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन


किसानों में अशांति से भी देश में आंतरिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है

मुख्यमंत्री श्री चौहान की प्रधानमंत्री से किसानों के लिए 2442 करोड़ रूपये के पैकेज की मांग

नई दिल्ली, (ब्यूरो) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहां नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आंतरिक सुरक्षा पर आयोजित मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए देश के सभी मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि किसानों को उनकी फसलांे का उचित एवं लाभकारी मूल्य दिलाया जाए। किसानों की फसलों को नुकसान होने पर उन्हें फसल बीमा योजना और अन्य राहत एवं सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएं। बीमा योजना को इस प्रकार व्यवहारिक बनाया जाए जिससे किसानों को उनकी फसलों का नुकसान होने पर बीमा का लाभ मिल सके। देश का किसान अगर असंतुष्ट और अशांत रहेगा तो इससे देश में आंतरिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। श्री चौहान ने आज मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह और अन्य केन्द्रीय मंत्रियों का ध्यान आकर्षित किया कि प्रदेश में पाला पड़ने के कारण 34 लाख किसानों की 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसल बर्वाद हो गयी है। प्रदेश के 50 में से 46 जिलों में पाला पड़ने से 7500 करोड़ रूपये की फसलों का नुकसान हुआ है। फसलों के खराब होने से किसानों में सदमे की स्थिति है।

श्री चौहान ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि शीघ्र ही केन्द्रीय अध्ययन दल भेजकर फसलों को हुए नुकसान का आंकलन कराया जाए और किसानों को राहत दी जाए। श्री चौहान ने प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन दिया जिसमें 2442 करोड़ रूपये के पैकेज की मांग की। मध्यप्रदेश सरकार ने अपने बजट से 600 करोड़ रूपये की राशि किसानों को राहत देने के लिए स्वीकृत की है। किसानों के सहकारी ऋण माफ कर दिये गये हैं और सहकारी ऋणों का ब्याज सरकार भरेगी। अगले वित्त वर्ष से किसानों को एक प्रतिशत की ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जायेगा। राष्ट्रीयकृत बैंकों के किसानों के ऋण माफ करने के लिए केन्द्र सरकार आदेश प्रदान करे। किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ दिलाया जाए। किसानों को समर्थन मूल्य के बजाय लाभकारी मूल्य दिया जाए क्योंकि फसल की लागत बढ़ गयी है।

श्री चौहान ने भ्रष्टाचार को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि इस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कानून बनाया जा रहा है जिसमें भ्रष्ट तरीके से एकत्रित की गयी सम्पत्ति को राजसात करने का प्रावधान किया जा रहा है। भ्रष्टाचार के मामलों में एक साल में न्यायालयों द्वारा निर्णय दिया जायेगा। प्रदेश में आम नागरिकों के काम समय सीमा में हो सकें इसके लिए मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम बनाया गया है। समय सीमा में नागरिकों के काम नहीं होने पर अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जायेगा और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जायेगी। श्री चौहान ने काले धन की रोकथाम के लिए हजार और पांच सौ रूपये के नोटों को बंद करने का भी आग्रह किया। इससे जाली नोटों पर भी अंकुश लग सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बैठक में बताया कि प्रदेश में पांच हजार सिपाहियों की भर्ती की जा रही है। भूतपूर्व सैनिकों की भी एक बटालियन बनायी जा रही है। इंडियन रिजर्व बटालियन के गठन की केन्द्र सरकार से अभी तक स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। प्रदेश में राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल की एक बटालियन भी शीघ्र गठित की जा रही है। श्री चौहान ने नक्सली प्रभावित प्रदेश के सात जिलों को भी एस.आर.ई. योजना में शामिल करने का आग्रह किया है। अभी केवल बालाघाट जिला इसमें शामिल किया गया है।

श्री चौहान ने कहा कि देश में आतंकवादी घटनाओं से निपटने के लिए कठोर कानून बनाने की आवश्यकता है। विश्व में अन्य प्रजातांत्रिक देशों ने भी अपनी सुरक्षा एवं आतंकवादी घटनाओं से अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाए हैं। प्रदेश में संगठित अपराधों की रोकथाम के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने एक विधेयक केन्द्र सरकार के पास स्वीकृति के लिए भेजा है जो काफी समय से लंबित है। इस सम्बन्ध में राज्य विधानसभा द्वारा मध्यप्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधि तथा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2010 पारित कर केन्द्र सरकार को अनुमोदन के लिए भेजा गया है। श्री चौहान ने इसको शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने की आवश्यकता को दोहराया।

श्री चौहान ने पड़ोसी राज्यों से अनधिकृत बंगलादेशी घुसपैठियों की समस्या के बारे में ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में लोग प्रदेश के अनेक स्थानों पर श्रमिकों के रूप में मजदूरी करने के लिए आते हैं जिससे हमारे श्रम बाजार पर विपरीत असर पड़ता है। घुसपैठियों द्वारा पहचान पत्र बनवाकर भारतीय नागरिकों का हक भी प्राप्त कर लेते हैं। श्री चौहान ने आग्रह किया कि यू.आई.डी. कार्ड सघन जांच के बाद ही बनाये जाएं।

इंटेलीजेंस विंग के सुदृढणीकरण के लिए 331 पदों की स्वीकृति दी जा चुकी है। इस शाखा के कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए तीन वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा की है- सर्वश्रेष्ठ टीम वर्क के लिए गनीमी कावा पुरस्कार, पूरे वर्ष में सतत इंटेलीजेंस संबंधी अच्छे कार्य के लिए चाणक्य पुरस्कार और तीसरा किसी सर्वोत्कृष्ट विशेष कार्य के लिए छत्रसाल पुरस्कार दिया जायेगा।

बैठक में प्रदेश के गृहमंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता, मुख्य सचिव श्री अवनि वैश्य, पुलिस महानिदेशक श्री एस.के. राउत, अतिरिक्त महानिदेशक श्री ऋषि कुमार शुक्ला, गृह सचिव श्री सर्वजीत सिंह और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

Chief Ministers Conference on Internal Security

Dissatisfaction among Farmers will threaten Internal Security



Relief Package to the tune of Rs. 2442 crore for Farmers



New Delhi, February 1, 2011. Shri Chouhan called upon the centre to immediately provide relief to the state to the tune of Rs. 2442 crore as relief package for the 34 lakhs farmers whose crops have been damaged by severe cold wave and frost. Almost 46 of the 50 districts of the state has been affected. The effect of recent tragedy of loss of crops coupled with the rising prices has doubled their sufferings and their economic conditions have become very alarming. If adequate and immediate aid to such farmers is not provided, it will breed dissatisfaction in the people and will threaten internal security of the country. Shri Chouhan was speaking at the conference of Chief Minister on Internal Security called by Union Home Minister Shri P. Chidamberam and chaired by the Prime Minister Dr. Manmohan Singh. The conference was attended by Chief Minister of other states. Shri Chouhan was acompanied by State Home Minister Shri Uma Shankar Gupta, Chief Secetary Shri Avani Vaish, DGP Shri S.K. Rout and other senior officials.



Madhya Pradesh Chief Minister Shri Shivraj Singh Chouhan called for making a strict anti-terrorism law for the country like other democracies of the world, who have enacted strict laws to protect their citizens from terrorist activities and to ensure their securities. He said that there is a need to have tough effective laws and political will to deal with.



Pointing at the large and illegal infiltration from bordering states to M.P., Shri Chouhan said that this has adversely affected the labour market and provided fertile grounds for anti national activities. He called for an urgent need to check infiltration as this can pose a grave danger for the future if some how they are able to get UID cards Shri Chouhan called for a strict monitoring before issuing census UID cards. He informed that at state level, strict instructions have been issued to identify and extradite such infiltrations. ...........2



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Shri Chouhan said that control over the activities of various organised crime cartels is essential to ensure internal security. For effective action against terrorist activities and organised crime, Shri Chouhan said that the state Vidhan Sabha has passed the "M.P. Terrorist and Disruptive Activities and Organised Crime Control Act 2010" and is pending with Government of India for its approval. Shri Chouhan urged for its early approval.

Reiterating the State Government's commitment on Internal Security & law and order, he said that an atmosphere of security coupled with an effective delivery system lends impetus to development. Informing about the steps taken by State Government in this direction he said that strict laws are enacted to check corruption in Public Services. The "M.P. Special Court Act" is slated to be placed in the coming Vidhan Sabha Session, increasing the strength of police force, till now about 4500 post have been sanctioned and in next 3 years 6500 additional post will be created as per the ratio of population, formation of ex-service man battalion and State Industrial Security Force (SISF) and formation of a new I.R. Battalion has been sent to the centre for approval, sanctioned 331 posts for strengthening of Intelligence wing. 3 annual award has been announced for best team work Ganimi Kava continuous good works- Chanakya award and special achievement awards for motivating the staff, a subsidiary Multi Agency Centre (SMAC) has been established, the system needs to be improved for better and effective co-ordination between agencies of various states and central agencies formulating as Establishment Board and police complaint Authority in compliance to the Supreme Court directions on Police Reforms, the drafting of a new Police Act is also underway. The Police modernisation plan has been in place for the last 10 years.

विधानसभा उपाध्यक्ष के विधानसभा क्षेत्र और महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले में महिलाओं पर ऐसे होते हैं अत्याचार

सिवनी जिले में चल रही ऐसी गुण्डागर्दी

 दबंगों ने विधवा महिला को दौड़ा-दौड़कर बीच बाजार में पीटा

 पुलिस ने रिपोर्ट भी दबंगों से पूछकर लिखी

(मनोज मर्दन त्रिवेदी)

सिवनी कान्हीवाड़ा थाना मुख्यालय के ग्राम में एक महिला को एक साहू परिवार एवं अन्य सहयोगी सदस्यों द्वारा दिन दहाड़े दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। कान्हीवाड़ा का एक भी व्यक्ति उस महिला के बचाव में खड़ा नहीं हुआ महिला को जहां-तहां पूरे शरीर में चोट के निशान हैं और सिर पर गंभीर चोट आयी है १४ टॉके सिर में लगे होने की बताई गई। जिस निर्ममता से उक्त महिला की पिटाई की गई है वैसा यू.पी. बिहार जैसे क्षेत्रों में भले ही आम बात हो परंतुु म.प्र. के अंदर महिलाओं के साथ इस प्रकार का दुव्र्यवहार  नहीं होता  परंतु थाना कान्हीवाड़ा के अंतर्गत इस प्रकार की घटना घटित हुई और पुलिस ने महिला की रिपोर्ट को लिखने में भी  कंजूसी दिखाई महिला का सरे बाजार  अपमान किया गया। सार्वजनिक रूप से जूते, चप्पलों से साहू परिवार के व्यक्तियों द्वारा पीटा गया यहां तक कि पुलिस विभाग के कर्मचारी के घर में वह घूसकर अपने प्राणों की रक्षा की गुहार लगा रही थी उसे लग रहा था कि वह पुलिसवाले के घर में सुरक्षित हो जायेगी परंतु गुण्डागर्दी पर आमदा दबंगों ने उक्त महिला की पुलिस वाले के घर के अंदर घुस कर लात, जूतों से पिटाई की।
महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती नीता पटेरिया के गृह जिले और म.प्र. विधानसभा के उपाध्यक्ष ठाकुर हरवंश सिंह के विधानसभा क्षेत्र में महिलाओं की इस प्रकार की दुर्दशा क्या स्वर्णिम म.प्र. की कल्पना के अनुरूप कही जा सकती है। मिली जानकारी के अनुसार जब पूरे म.प्र. में गणतंत्र दिवस का जयघोष किया जा रहा था, उसी समय कान्हीवाड़ा थाना मुख्यालय में एक विधवा महिला अनीता सोनी के बच्चों के आपसी विवाद को दबंग साहू परिवार के व्यक्तियों द्वारा इतना तूल दिया गया कि वे उक्त विधवा महिला को कान्हीवाड़ा छोड़कर जाने का दबाव देने लगे, विरोध करने पर अनीता सोनी के साथ साहू परिवार के लड़कों ने जमकर मार-पीट की इसकी पुलिस रिपोर्ट लिखाने जब वह थाने पहुंची तो रिपोर्ट दजर््ा नहीं की गई। अलबत्ता थाने से लौटते वक्त उक्त महिला को बीच बाजार में साहू परिवार के लड़कों द्वारा मारा जाने लगा। वह ऐसी अपमान जनक स्थिति से बचने के लिए भागी और एक पुलिस वाले के  घर में शरण ली वहंा भी साहू परिवार के लड़को  ने उसकी लात जूतो से पिटाई की और उसके सिर में जान लेवा हमला किया, बुरी तरह लहूलुहान महिला बेहोश हो गई, और उसके पश्चात से वह अपने आप को जिला चिकित्सालय में पा रही है। थाना कान्हीवाड़ा से जानकारी लेने पर पहले तो कोई जानकारी नहीं दी गई। बमुश्किल एक आरक्षक द्वारा बताया गया है कि साहू परिवार एवं उक्त महिला के बच्चों का कोई झगड़ा था, जिसको लेकर कोई विवाद हुआ है, दोनो पर कांउटर केस दर्ज किया गया है। महिला ने एक साहू लड़के को बुरी तरह हाथ में काटा है आरक्षक द्वारा यह भी बताया गया है कि उक्त महिला विक्षिप्त प्रकृति की है। जबकि महिला जो जिला चिकित्सालय में ईलाज करा रही है, कहीं से कहीं तक विक्षिप्त नजर नहीं आती। विक्षिप्त महिला के साथ भी इस प्रकार का अत्याचार किया जाये तो यह महिला क्रूरता  के दायरे में आता है और इतने घिनोने कृत्य पर थाना कान्हीवाड़ा द्वारा मात्र धारा ३२४ का अपराध पंजीबद्ध किया गया है। वह भी दोनो के ऊपर। इस प्रकार की कार्यवाही पुलिस की छवि को कैसे निष्पक्ष रख पायेगी यह विचारर्णीय प्रश्र है? म.प्र. विधानसभा के उपाध्यक्ष ठाकुर हरवंशसिंह के विधानसभा क्षेत्र में दबंग व्यक्तियों द्वारा एक विधवा महिला के साथ सार्वजनिक रूप से मार पिटाई की जाये। सिर पर जान लेवा वार किया जाये और आरोपियों पर मात्र धारा ३२४ का अपराध पंजीबद्ध होना, दबंगों को खुला संरक्षण ही समझ आता है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष के  गृह जिले में ही महिलाओं की दुर्दशा  पर इस प्रकार की कार्यवाही निंदनीय और दुखद है। जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा है कि सारे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर विधवा महिला को न्याय प्रदान किया जाये।