मंगलवार, 30 अगस्त 2011

सरकारी जमीन सिब्बल के नाम!

सरकारी जमीन सिब्बल के नाम!

ग्राम सभा की सरकारी जमीन छः साल बाद निकली सिब्बल के नाम

जमीन के मामले में जादूगर निकले सिब्बल के साहेब जादे

करोड़ों में बिक रहे सरकारी जमीन पर कटे प्लाट!

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दूसरे कार्यकाल में ट्रबल शूटर (तारण हार) की भूमिका में उभरे केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की मुश्किलें लगता है बढ़ने जा रही हैं। सूचना के अधिकार कानून के तहत निकली एक जानकारी यद्यपि अलिख सिब्बल के नाम पर है किन्तु यही जानकारी वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन सिंह के खासुलखास कपिल सिब्बल के गले की फांस बन सकती है, क्योंकि अखिल काई और नहीं कपिल सिब्बल के साहेब जादे जो ठहरे।

दक्षिण दिल्ली के वसंत बिहार क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि वर्ष 1998 - 1999 में राज्य सरकार द्वारा बसंत बिहार क्षेत्र के ग्राम रंगपुरी में ग्राम सभा के लिए एक हेक्टेयर से ज्यादा अर्थात लगभग साढ़े तीन एकड़ जमीन ली थी। राजस्व में दर्ज खसरा नंबर 1935 / 2 (3 - 16), 1936 (4 - 16) एवं 1937 / 2 (4 - 13) ली थी।

सूत्रों ने आगे कहा कि इसके छः साल बाद अर्थात 2005 में यही जमीन रहस्यमई तरीके से अखिल सिब्बल पुत्र कपिल सिब्बल के नाम पर दर्ज पाई गई। पहले ग्राम सभा और बाद में कपिल सिब्बल के नाम पर दर्ज इस बेशकीमती जमीन पर कालोनी बनाकर एक एक प्लाट को ही करोड़ों रूपयों में बेचा भी जा रहा है।

एक तरफ तो कपिल सिब्बल सरकारी लोकपाल की हिमायत करते नजर आते हैं वहीं उनके साहेब जादे द्वारा ग्राम सभा की सरकारी जमीन पर कालोनी काटकर बेचा जा रहा है। कहा तो यह भी जा रहा है कि कालोनी काटने की समस्त सरकारी औपचारिकताएं पूरी हैं। अब जमीन ही सरकार की हो तो औपचारिकताएं तो पूरी होनी ही हैं। रही बात मालिकाना हक की तो वह किस जादू की छड़ी से कपिल सिब्बल के साहेब जादे के नाम पर हो गया है यह शोध का विषय है।

सोमवार, 29 अगस्त 2011

वो थे राष्ट्रपिता ये हो सकते हैं राष्ट्रपति

ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

वो थे राष्ट्रपिता ये हो सकते हैं राष्ट्रपति
महात्मा गांधी ने सादगी के साथ गोरे अंग्रेजों को देश से खदेड़ दिया था। अब किशन बाबूराव हजारे ने देश के काले अंग्रेजों को अपनी सादगी के सामने झुका दिया है। महात्मा गांधी को समूचा देश आज नमन कर रहा है। देश की करंसी नोटों पर मोहन दास करमचंद गांधी की मुस्कुराती हुई तस्वीर है। अण्णा के आंदोलन के दौरान ही इंटरनेट पर अण्णा के मुस्कुराते चेहरे वाले करंसी नोट दिखने लगे। अण्णा के अनशन के समाप्त होने के उपरांत अब सियासी गलियारों में पार्ट टू के बारे में कयास लगाए जाने लगे हैं। लोगों का मानना है कि अण्णा हजारे को कांग्रेस द्वारा 2012 में देश के सर्वोच्च पद महामहिम राष्ट्रपति पर विराजमान करवाकर रायसीना हिल्स स्थित राष्ट्रपति भवन को उनका आशियाना बनवा दिया जाएगा। इससे यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस भ्रष्टाचार की पोषक नहीं है। सियासी गलियारों में बापू को राष्ट्रपिता और अण्णा को अगले साल के राष्ट्रपति के तौर पर देखा जा रहा है।

सादगी के सामने नतमस्तक हुए जनसेवक
अण्णा हजारे को देश का हर नागरिक सेल्यूट कर रहा है। अण्णा ने बहुत सादगी के साथ अनशन आरंभ किया और समूचे देश को एक सूत्र में पिरो दिया। संसद में बहस हुई कभी दो बजे तो कभी तीन बजे दिन में बहस अगले दिन पर टाल दी गई। किसी ने यह नहीं सोचा कि आप तो दो बजे यह कहकर बरी हो जाते हो कि कल चर्चा होगी, पर दो बजे से दूसरे दिन बारह बजे तक उस 74 साल के व्यक्ति पर क्या बीतती होगी? अण्णा ने जो कर दिखाया वह सचमुच अकल्पनीय है। आज के इस युग में 12 दिन लगातार अनशन करना बहुत बड़ी बात है उससे भी बड़ी बात इन शातिर राजनेताओं के रहते भी अनशन का ‘‘अहिंसक‘‘ रहना है। अण्णा की सदगी ने भाजपा को झुकाया और भाजपा के रूख से कांग्रेसनीत सरकार को घुटने टेकना पड़ा। कुल मिलाकर यह साफ हो गया है कि जनसेवक सब कुछ कर सकते हैं, पर वे चाहकर भी जनता के हितों की अनदेखी ही करते हैं।

ढहाया प्रियंका वढ़ेरा का बंग्ला!
कांग्रेस की राजकुमारी प्रियंका वढ़ेरा इन दिनों असहज ही नजर आ रही हैं। वे एक के बाद एक आर्कीटेक्ट के संपर्क में हैं। उनका शिमला में छराबड़ा का बंग्ला बनने के पहले ही ढहा दिया गया है। यह जमीन प्रियंका ने छः साल पहले खरीदी थी। इस क्षेत्र में सिख परिवार की जमीन भी सुरक्षा कारणों से बेकार पड़ी थी, जिसे प्रियंका ने ओने पोने दाम में खरीद लिया। देश की रियाया के पास सर छिपाने की जगह नहीं है और राजकुमारी प्रियंका के पास इस अतिविशिष्ट इलाके में आठ बीघा से ज्यादा जगह है। उनका बंग्ला बनकर लगभग तैयार ही था कि राजकुमारी प्रियंका को डिजाईन पसंद नहीं आया। लीजिए जनाब ढहा दिया गया मकान। इसके पहले तीन मर्तबा तो रसोई को तोड़ा जा चुका है। तीन गुना ज्यादा सीमेंट से बने इस मकान को ध्वस्त करने में मजदूरों को नाकों चने चबाने पड़ गए। अब सोचिए जनता भूखों मर रही है पर राजकुमारी मकान बनाकर तोड़कर फिर बनाने जा रही हैं।

लोकपाल से होगा क्या!
देश की व्यवस्था को भ्रष्टाचार का कीड़ा पूरी तरह कुतर चुका है। हर कदम पर भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार नजर आ रहा है। अण्णा की हुंकार से कुछ तो असर होता दिख रहा है। सरकार का झुकना इस बात के संकेत दे रहा है कि अण्णा की मुहिम कुछ हद तक रंग लाएगी। लोग मजाक भी कर रहे हैं कि लोकपाल आने तक कर लो भ्रष्टाचार फिर तो रिश्वत का लेन देन भी चेक और डीडी से ही होगा। अण्णा के अनशन के बीच खबर आई कि लखनऊ नगर निगम में छसौ रूपए के लालच में कर्मचारियों ने किशन बाबूराव उर्फ अण्णा हाजरे का जन्म प्रमाण पत्र बना दिया, जिसमें अण्णा के पते के स्थान पर लखनऊ के जिलाधिकारी के निवास का पता डाला गया है। यह उस वक्त हुआ जब देश भर में मीडिया में किशन बाबूराव अण्णा हजारे छाए हुए थे।

हदें लांघती कांग्रेस
गांधीवादी समाजसेवी अण्णा हजारे के अनशन से घबराई कांग्रेसनीत सरकार ने अण्णा के खिलाफ घटिया से घटिया अस्त्र का प्रयोग भी किया, पर अण्णा कतई विचलित नहीं हुए। कांग्रेस प्रवक्ता ने अण्णा के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। तिवारी के आरोप थे कि अण्णा सर से पांव तक भ्रष्टाचार में डूबे हैं, और कांग्रेस के भगोड़े हैं। सूचना के अधिकार में निकाली गई जानकारी ने मनीष तिवारी के सारे आरोपों को झुटला दिया है। जानकारी में कहा गया है कि सेना में रहते हुए न तो अण्णा को कोई सजा दी गई न ही सेना से निकाला गया है। बारह साल की सेवा के उपरांत वे ससम्मान सेवानिवृत हुए और उन्हें पांच पदक भी मिले हैं। अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस का मीडिया प्रभाग किस तर भ्रामक जानकारियों से देशवासियों को बरगलाने पर आमादा है और विपक्ष खामोश।

पीआर कंपनियों की पौबारह
जनसेवकों द्वारा इमेज बिल्डिंग पर खासा ध्यान दिया जाने लगा है। पहले रूपहले पर्दे के सितारों ने अपनी छवि बनाने के लिए पब्लिक रिलेशन कंपनियों की मदद ली जाती रही है। अब जनसेवक इनकी देहरी पर हैं। कुछ राज्यों के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के युवराज खुद इसी तरह के जतन कर रहे हैं। खबर है कि करोड़ों रूपए पानी में बहाकर 2013 के आम चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी की छवि निर्माण का काम आरंभ किया गया है। इमेज बिल्डिंग कंपनियों के उम्दा किस्म मे पेशेवर अब राहुल के लिए सर जोड़कर बैठ चुके हैं। उधर भाजपा के नरेंद्र मोदी, शिवराज सिंह चौहान, सुषमा स्वराज यहां तक कि खुद नितिन गड़करी भी इनकी शरण में हैं। राहुल के करीबी सूत्रों का कहना है कि उनके कथित राजनैतिक गुरू राजा दिग्विजय सिंह के करीबी मध्य प्रदेश काडर के एक आईएएस ने परोक्ष तौर पर इस आपरेशन की कमान संभाली हुई है।

अड़वाणी के दर पर उमा!
बमुश्किल भाजपा में वापस आई उमा भारती अपने आप को बेहद उपेक्षित महसूस कर रही हैं। उमा को मध्य प्रदेश से प्रथक रहने के साफ और कड़े निर्देश दिए गए हैं। उन्हें कहा गया है कि वे उत्तर प्रदेश में अपना ध्यान केंद्रित रखें। यूपी में राजनाथ सिंह, के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता है। उत्तर प्रदेश भाजपा में ठाकुरवाद जमकर हावी है। समूची भाजपा ठाकुरवाद की जद में है। वहां उमा की कोई सुनने वाला नहीं है। यूपी में हर जगह उमा को तिरस्कार ही झेलना पड़ रहा है। अपनी उपेक्षा से दुखी उमा भारती ने अपनी व्यथा अपने आका एल.के.आड़वाणी को सुनाने का मन बनाया और पहूंच गईं उनके दर पर। आड़वाणी ने राजनाथ के खिलाफ सारा चिट्ठा सुना। उमा का मन हल्का हुआ पर वे सकते में आ गईं जब आड़वाणी दबे सुर में बोले -‘‘ठीक है में इस बारे में गड़करी जी से बात करूंगा।‘‘

पराजित खा रहे हैं मलाई शिव के राज में
कहा जाता है कि जो जीता वही सिकंदर, किन्तु देश के हृदय प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के राज में कुछ और कैसट ही बज रहा है। शिव के राज में एमपी में जीते हुए विधायकों को तो कुछ भी नहीं मिला पर हारे हुए विधान सभा प्रत्याशियों (पूर्व विधायक नरेश दिवाकर को छोड़कर) अधिकांश को निगम मण्डलों में अध्यक्ष उपाध्यक्ष बनाकर लाल बत्ती से नवाज दिया गया है। दो बार चुनाव हारे अखण्ड प्रताप सिंह को विंध्य विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष, कमलेश्वर को बीज निगम का उपाध्यक्ष, तीन बार हारे रामदास मिश्रा को विंध्य विकास का उपाध्यक्ष, रामपाल सिंह को हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष, रूस्तम सिंह को पिछड़ा वर्ग का अध्यक्ष, रामलाल को अजा आयोग का अध्यक्ष बना दिया गया है। ये सभी चुनाव लोग एक से ज्यादा बार चुनाव हारे हुए हैं। भाजपा में चर्चा है कि जीते तो आजीवन पैंशन और हारे तो लाल बत्ती तो तय ही है मध्य प्रदेश में।

. . . मतलब कानून तोड़ते आए हैं निजाम!!!
राज्यों में मुख्यमंत्रियों द्वारा स्वविवेक के आधार पर जमीने बांटी गईं हैं। इनमें अपनों को रेवड़ी बांटकर उपकृत करने के अनेक मामले सामने आए हैं। कई बार तो इसमें भ्रष्टाचार की बू भी आती है। देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्टने इस बारे में नई व्यवस्था दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री किसी भी व्यक्ति को सीधे जमीन नहीं दे सकता है। यह कानून के उल्लंघन के समतुल्य है। कोर्ट ने कहा है कि मुख्यमंत्री द्वारा अधिकारियों का काम अपने हाथ में नहीं लिया जा सकता है। यह अधिकारों का उल्लंघन है। आजादी के बाद अब तक राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा माले मुफ्त की तरह जमीनें बांटी गईं हैं। इस तरह तो सारी जमीनें अवैध तौर पर बांटी गईं हैं, और निजामों ने कानून तोड़ा है।

नाथ का पीछा नहीं छोड़ रहा 84 का जिन्न
1984 में प्रियदर्शनी स्व.श्रीमति इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए देश व्यापी दंगों की आग 27 साल बाद भी शांत नहीं हुई है। उपर राख अवश्य ही ठंडी पड़ गई हो, पर कुरेदने पर कोयले सुलगते दिख जाते हैं। 84 के दंगों में आहत हुए सिख समुदाय के मानवाधिकार समूह सिख्ख फॉर जस्टिससंगठन ने फिर कहा है कि वे अमेरिका कोर्ट से शहरी विकास मंत्री कमल नाथ के खिलाफ समन जारी करने का आग्रह करेंगे। संगठन का आरोप है कि 84 के सुनियोजित सिख विरोधी दंगों में कमल नाथ लिप्त थे। 27 सालों में तो कमल नाथ को इससे तकलीफ नहीं हुई होगी किन्तु 2014 के लोकसभा चुनाव में इस बार उन्हें इस मामले से कुछ परेशानी हो सकती है। इसका कारण यह है कि उनके संसदीय क्षेत्र जिला छिंदवाड़ा में सिख मतदाताओं की खासी तादा है, और अब तक कमल नाथ के द्वारा अपने संसदीय क्षेत्र में सिख परिवारों को राजनैतिक तौर पर कभी उपकृत नहीं किया है।

11 साल से अनशन पर शर्मिला
अण्णा हजारे ने 12 दिन में ही सरकार को घुटनों पर आने मजबूर कर दिया। देश के मीडिया की सुर्खियां बना अण्णा का आंदोलन। वहीं दूसरी ओर इंफाल में पिछले 11 साल से आंदोलन कर रही शर्मिला पर किसी की नजरें नहीं है। अण्णा को जब इस बात की जानकारी मिली उन्होंने रामलीला मैदान से ही शर्मिला को पत्र लिखकर दिल्ली आकर अनशन में साथ देने का न्योता दिया। 34 साल की शर्मिला ने कहा कि वे कैद में हैं इसलिए नहीं आ सकतीं हैं। शर्मिला की मांग है कि आर्मड फोर्स एक्ट 1958 को समाप्त किया जाए। पुलिस ने इसे तो समाप्त नहीं किया किन्तु शर्मिला को धारा 309 के तहत धर पकड़ा। शर्मिला ने पानी की एक बूंद भी गले से नहीं गटकी। उनकी नाक में लगी नली से ही उन्हें फुड सप्लिमेंट दिए जा रहे हैं।

इधर दावतें उधर भूखे पेट पड़े रहे जवान
दिल्ली में देश के नीति निर्धारकों द्वारा रोजाना ही दावतें उड़ाई जा रहीं थीं, देर रात तक जाम टकराए जाते रहे पर किसी को भी दुर्गम राहों पर चलने वाले जवानों की चिंता नहीं थी। दिल्ली में अर्ध सैनिक बलों के अधिकारियों के बीच चल रही चर्चा के अनुसार वे सभी राजनेताओं से खासे खफा हैं। इसका कारण यह है कि छत्तीसगढ़ में जगदलपुर और बीजापुर में नक्सलप्रभावित इलाकों में सेना के जवान भूखे पेट लड़ रहे थे पर किसी को भी उनके लिए खाना पहुंचाने की चिंता नहीं थी। पीड़ित मानवता की सेवा का कौल लेने वाले चिकित्सकों का मन भी नहीं पसीजा। शहरों में चिकित्सा की दुकानेंखोलकर अपने निहित स्वार्थों को पूरा करने वाले डॉक्टर्स के अभाव में जवान बीमारी से तड़पते रहे और दम तोड़ते रहे पर किसी ने उनकी सुध नहीं ली। छग में इतना सब कुछ चल रहा था और देश के जनसेवक मजे से दावतें उड़ा रहे थे।

गायब है सोनिया का स्वास्थ्य बुलेटिन
कांग्रेस के अंदर एक बात चल पड़ी है कि क्या कांग्रेस में सोनिया की अहमियत एकदम से कम हो गई है या फिर किसी खास रणनीति के तहत सोनिया के बारे में मौन साधा जा रहा है। सोनिया अमेरिका में शल्य चिकित्सा के उपरांत स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। सोनिया की तबियत के बारे में कांग्रेस पूरी तरह मौन साधे हुए है। सोनिया के बारे में एक ही बार कांग्रेस ने बुलेटिन जारी की, जिसमें उनकी बीमारी या शल्य चिकित्सा के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया। राजा दिग्विजय सिंह भी परिदृश्य से गायब हैं। इसे किसी खास रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि जरूर युवराज राहुल गांधी के विवाह की तैयारियां गुपचुप तरीके से जारी हैं। बीच में खबर आई थी कि राहुल के लिए इटली की ही दुल्हन लाने के पक्ष में हैं सोनिया और प्रियंका।

मनमोहन को डुबाते उनके पंच प्यारे
मनमोहन सिंह के पांच प्यारे सितारे ही उनकी नैया को बिना पतवार हांक रहे हैं। अब तक तो मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार को उनके पांच प्यारों द्वारा चलाए जाने के आरोप लगाए जाते रहे हैं, पर अब मनमोहन पर यह आरोप आहूत हो रहा है। सियासी गलियारों मे ंचर्चा चल पड़ी है कि सोनिया के साथ दूरी बनने के बाद मनमोहन ने अपनी जुंडाली का नेतृत्व पांच नेताओं को दे दिया है। मनमोहन के 5 सलाहकारों कपिल सिब्बल, पलनिअप्पम चिदम्बरम, पवन बंसल, सलमान खुर्शीद और राजीव शुक्ला से कांग्रेस के अंदर के और देश के लोग खासे खफा नजर आ रहे हैं। कहा जाता है कि गुजरात में नरेंद्र मोदी की सरकार को छलोग तो शिवराज सरकार को पांच लोग चला रहे हैं। इसी तर्ज पर यह भी कहा जाने लगा है कि देश को अब मनमोहन नहीं उनके पांच लोग चला रहे हैं।

पुच्छल तारा
अण्णा हजारे अण्णा हजारों यही बात सबकी जुबान पर है। इस रामलीला मैदान दो अनशन का हाल ही में गवाह बना। एक रणछोड़दास सांस फुला देने वाले बाबा रामदेव के और दूसरे अण्णा के सीना फुला देने वाले आंदोलन का। अण्णा के आंदोलन में कांग्रेस की जो भद्द पिटी वह किसी से छिपा नहीं है। रामलीला मैदान पर बाबा रामदेव और अण्णा हजारे दोनों ही के मामले में सोनिया गांधी खामोश रहीं। कनाडा के टोरंटो शहर से उदय राजपुत ने एक ईमेल भेजा है। उदय लिखते हैं कि एक आदमी सड़क पर खड़े खड़े चिल्ला रहा था, सरकार चोर है, सरकार चोर है। उधर से दिग्विजय सिंह गुजरे। उन्होंने उसे एक झापड मारा, वो बोला मैं तो अमेरिका की सरकार को चोर बता रहा था। दिग्गी राजा ने फिर एक चपत लगाई और बोले -‘‘साले जैसे हमें पता नहीं कहां की सरकार चोर है?‘‘

शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

रामनरेश यादव होंगे एमपी के लाट साहेब

रामनरेश यादव होंगे एमपी के लाट साहेब

रामेश्वर ठाकुर को दिया गया विश्राम

महामहिम ने जारी की लाट साहेबों की पदस्थापना और स्थानांतरण सूची

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। महामहिम राष्ट्रपति ने अंततः कुछ राज्यपालों की नियुक्ति और स्थानांतरण की सूची जारी कर ही दी है। मध्य प्रदेश के नए लाट साहब रामनरेश यादव होंगे। एमओएच फारूख को झारखण्ड से केरल, वेक्कम पुरूषोत्तम को मिजोरम, के.रोसैया को तमिलनाडू, डाॅ.सईद अहमद को झारखण्ड, के.शंकर नारायण को महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के महामहिम राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। 01 जुलाई 1928 को जनम्मे रामनरेश यादव को ठाकुर के स्थान पर मध्य प्रदेश के का राज्यपाल बनाया गया है। गौरतलब है कि यादव उत्तर प्रदेश में 23 जुलाई 1977 से 27 फरवरी 79 तक मुख्यमंत्री रहे हैं। विधानसभा में विश्वास मत हासिल न कर पाने के चलते जनता पार्टी के मुख्यमंत्री रहे यादव को हटा दिया गया था।

इनके उपरांत बनारसी दास को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था। जब ये मुख्यमंत्री बने तब इन्हें प्रशासनिक अनुभव बिल्कुल भी नहीं था। आजमगढ़ में पैदा हुए रामनरेश यादव के पिता मूलतः शिक्षक थे।

घोटालों ने बैठाया घुटनों के बल


गुरुवार, 25 अगस्त 2011

अण्णा मामले में सरकार का यू टर्न


अण्णा मामले में सरकार का यू टर्न

टीम अण्णा और सरकार में आरोप प्रत्यारोप आरंभ

सरकार को परवाह नहीं अण्णा की सेहत की

दिल्ली पुलिस कसने जा रही अपना शिकंजा

सरकार ने सौंपी कुटिल रणनीतिकारों को कमान

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। किशन बाबूराव उर्फ अण्णा हजारे का अनशन आज दसवें दिन भी जारी है। मंगलवार को संजीदा दिखने वाली सरकार ने अचानक ही इस मामले में यू टर्न लेते हुए टीम अण्णा को उसके हाल पर छोड़ दिया है। सरकार की ओर से टीम अण्णा से निपटने के लिए अब कुटिल रणनीतिकारों की मदद लेना आरंभ कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने अब शिकंजा कसना आरंभ कर दिया है। कानून के उल्लंघन के अनेक मामलों की वीडियो क्लीपिंग्स पुलिस ने कब्जे में लेकर मंत्रणा की तैयारी कर ली है।

मंगलवार को टीम अण्णा और सरकार के बीच हुई बातचीत को सौहाद्रपूर्ण का दावा किया जा रहा था, वह अचानक ही बुधवार को रणभूमि में तब्दील हो गई। बैठक से लौटकर टीम अण्णा के सदस्य प्रशांत भूषण, अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी ने सरकार पर धमकाने का आरोप लगाया। टीम अण्णा का आरोप था कि सरकार द्वारा साफ कह दिया गया है कि अण्णा का अनशन सरकार का सरदर्द नहीं है। सरकार के इस रूख से टीम अण्णा की पेशानी पर पसीने की बूंदे छलक आई हैं।

दूसरी तरफ सरकार की ओर से सलमान खुर्शीद का कहना है कि सरकार बातचीत को तैयार है, टीम अण्णा आए और चर्चा करे। खुर्शीद ने आरोप लगाया कि टीम अण्णा ही बातचीत छोड़कर गई थी। टीम अण्णा के आरोपों के जवाब में खुर्शीद ने कहा कि टीम अण्णा खुद ही तय करे कि उसे किससे बात करनी है। उन्होंने कहा कि सरकार क्या खामोशी से सारी बातें सुनने और मानने के लिए है? क्या सरकार को बोलने का हक नहीं है? सरकार अगर कुछ बोलती है तो टीम अण्णा उसे गलत तरीके से जनता के सामने लाती है।

कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि टीम अण्णा को मिलने वाले व्यापक जनसमर्थन से घबराकर अब सरकार ने टीम अण्णा से निपटने की जवाबदारी शातिर और कुटिल रणनीतिकारों को सौंप दी है। सूत्रों ने बताया कि इन्हीं के निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने कानून तोड़ने के कुछ मामलों की फेहरिस्त बनाना आरंभ कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने सर्वोच्च न्यायालय के रात दस बजे के बाद स्पीकर न बजाने के निर्देश का उल्लंघन, दिल्ली में वादे बावजूद भी मशाल जलूस निकालने और रामलीला मैदान में भड़काउ भाषण की वीडियो रिकार्डिंग अपने कब्जे में कर ली है। आज अपरान्ह आईटीओ स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय में इस मसले पर आला अधिकारी सर जोड़कर बैठने वाले हैं।

बुधवार, 24 अगस्त 2011

घुटनों पर खड़ी केंद्र सरकार


घुटनों पर खड़ी केंद्र सरकार

(लिमटी खरे)

गांधीवादी अण्णा हजारे की एक अपील पर देश के बच्चे, युवा, प्रौढ़, बुजुर्ग, वयोवृद्ध सभी सड़कों पर निकल आए। 16 अगस्त की सुबह से ही इलेक्ट्रानिक मीडिया की फीस्ट‘ (लज़ीज भोजन) चल रही है। एंकर्स रिपोर्टस जगह जगह एकत्र भीड़ के साथ अपने अपने चेनल्स की टीआरपी बढ़ाने और ब्रेकिंग न्यूज देने का जतन कर रहे हैं। लोग भी घरों में दुबके बारिश के मौसम में चाय पकौड़ों के साथ दिल्ली का हाल जान रहे हैं। शाम ढलते ही चियर्सकी आवाज के साथ फिर लोग टीवी पर ही आंखें गड़ा देते हैं। मयखानों में भी टीवी की भारी डिमांड हो गई है। चहुंओर अण्णा ही अण्णा नजर आ रहे हैं। अण्णा के अनशन के आठ दिन बाद मोटी चमड़ी वाले मंत्रियों को कुछ शर्म महसूस हुई और वजीरे आजम ने बैठकों का कभी न थमने वाला दौर आरंभ किया। अण्णा की हालत बिगड़ती जा रही है, पर प्रधानमंत्री बैठकों में व्यस्त हैं। वैसे यह शुभ संकेत से कम नहीं है कि अण्णा के अनशन के आठ दिनों बाद ही सही कम से कम बेशर्म, नपुंसक, निरंकुश, भ्रष्ट सरकार घुटनों पर खड़ी तो दिखाई दे रही है। देश में हुए घोटालों की शुरूआत आजादी के साथ ही आरंभ हो गई थी जो आज भी अनवरत ही जारी है।


देश ही नहीं विदेशों में भी यह प्रश्न आम हो चुका है कि क्या एक लोकपाल आने से भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा? जाहिर है सभी का उत्तर है, नहीं। फिर यह हाय तौबा क्यों? क्यों भारत गणराज्य का हर आदमी एक सीधे सादे शांत सुशील बुजुर्गवार किशन बाबू राव हजारे उर्फ अण्णा हजारे के पीछे एक सप्ताह से ज्यादा समय से भाग रहा है। सबसे अधिक आश्चर्य तो इस बात पर हो रहा है कि अण्णा हजारे जो महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि नामक गांव के निवासी हैं के पीछे समूचा देश भेड़चाल चल रहा है, वह भी इतने शातिर राजनेताओं के होते हुए अहिंसक तरीके से! मतलब साफ है कि एक लोकपाल के आने से भ्रष्टाचार तो नहीं मिटने वाला पर देश की जनता अपने जनसेवकों के तौर तरीकों और नूरा कुश्ती से आज़िज आ चुकी है।

देश में घपलों घोटालों की फेहरिस्त बहुत ही लंबी है। इनमें सबसे अधिक कांग्रेस की झोली में जाते हैं। 1948 में वी.के.कृष्णा मेनन का अस्सी लाख का जीप घोटाला। 1956 में पचास लाख का बीएचयू फंड घोटाला। 1957 मंे हरिदास मुंद्रा का सवा करोड़ रूपए का घोटाला। 1960 में जयंत धर्मा तेजा का लोन घोटाला जो 22 करोड़ रूपए का था के बाद 1976 में इंडियन ऑयल का ऑयल डील का दो करोड़ दो लाख का घोटाला। 1981 में अब्दुल रहमान अंतुले का ट्रस्ट घोटाला तो 1987 में बोफोर्स तोप सौदे का 64 करोड़ एवं एचडीडब्लू कमीशन घोटाला बीस करोड़ रूपए का हुआ था। बोफोर्स तोप घोटाले के बाद राजीव गांधी को सत्ता से बाहर फेंक दिया गया था। बाद में कांग्रेस के दांव पेंच के चलते मामले का खात्मा ही लगा दिया गया।

1989 में सेट किट्स जालसाजी पौने दस करोड़ रूपए की एवं इस समय का बड़ा घोटाला दो हजार करोड़ का एयर बस घोटाला था। इसके बाद घोटाले करोड़ों रूपयों में तो हुए किन्तु वे हजारों करोड़ में तब्दील हो चुके थे। 1992 में बिग बुल हर्षद मेहता ने पांच हजार करोड़ का घोटाला कर सुर्खियां बटोरीं। इसके बाद बारी आती है साढ़े छः सौ करोड़ रूपए के चीनी घोटाले की जो 1994 में हुआ। 1995 में हुए घोटालों की फेहरिस्त काफी लंबी कही जा सकती है। इस साल 43 करोड़ रूपए का कस्टम एण्ड टेक्स घोटाला हुआ जिसे वीरेंद रस्तोगी ने किया। मेघालय में तीन सौ करोड़ का वन घोटाला, पांच हजार करोड़ का प्रीफेशियल एलाटमेंट घोटाला, चार सौ करोड़ रूपए का यूगोस्लेव दिनार घोटाला, एक हजार करोड़ का कॉबलर घोटाला भी इसी साल हुआ।

1996 का वर्ष लालू यादव के नाम हो जाता है। इस साल साढ़े नौ सौ करोड़ का चारा घोटाला हुआ लालू के शासन काल में। इसके अलावा यूरिया घोटाला 133 करोड़ रूपए और तेरह सौ करोड़ रूपए का उर्वरक आयात घोटाला भी हुआ। 1997 में हुए सुखराम टेलीकाम घोटाले में 15 सौ करोड़ रूपए के लेन देन की आशंका थी। यह पहला मामला था जब किसी राजनेता को सजा हुई हो। इसी साल बारह सौ करोड़ रूपए का म्यूचुअल फंड घोटाला, 374 करोड़ रूपए का एनसी पावर प्रोजेक्ट घोटाला एवं हवाला के सूत्रधार जैन बंधुओ का बिहार भूमि घोटाला चार सौ करोड़ रूपयों का हुआ। 1998 मंे आठ हजार करोड़ रूपयों का टीक प्लांटेशन और दो सौ दस करोड़ रूपयों का उदय गोयल का एग्रीकल्चर घोटाला हुआ।

2001 में केतन पारिख का प्रतिभूति घोटाला एक हजार करोड़, यूटीआई घोटाला 32 करोड़, दिनेश डालमिया का शेयर घोटाला 595 करोड़ रूपयों का हुआ। 2002 में संजय अग्रवाल के गृह निवेश में छः सौ करोड़ रूपए और कलकत्ता स्टाक एक्सचेंज का एक सौ बीस करोड़ रूपयों का घोटाला सामने आया। इसके बाद 2003 में तो गजब ही हो गया। इस साल तेलगी ने धूम मचा दी। तेलगी ने बीस हजार करोड़ रूपयों का स्टाम्प घोटाला कर सभी को चौंका दिया। 2005 में डीमेट घोटाले के खाते में एक हजार करोड़ रूपए तो बिहार बाढ़ आपदा का छोटा सा सत्रह करोड़ रूपए का घोटाला तथा स्कॉर्पियन पनडुब्बी का 18 हजार 978 करोड़ का घोटाला हुआ। 2006 में पंद्रह सौ करोड़ रूपए का पंजाब सिटी सेंटर प्रोजेक्ट घोटाला, 175 करोड़ रूपए का ताज कारीडोर घोटाला हुआ।

2008 के उपरांत घोटालों की बाढ़ सी आ गई। इस साल हसन अली का पचास हजार करोड़ का जो 39 हजार 120 करोड़ का बताया जा रहा है के अलावा स्विस बैंक में जमा काला धन लगभग 21 लाख करोड़ रूपए, 95 करोड़ का सोराष्ट्र बैंक घोटाला, पांच हजार करोड़ रूपए का सैन्य राशन घोटाला, आठ हजार करोड़ रूपए का रामलिंगा राजू का सत्यम घोटाला प्रकाश में आया। 2009 में ढाई हजार करोड़ रूपए का चावल निर्यात घोटाला, सात हजार करोड़ रूपए का उड़ीसा खदान घोटाला, चार हजार करोड़ का झारखण्ड खदान घोटाला और एक सौ तीस करोड़ रूपए का झारखण्ड मेडीकल घोटाला सामने अया। पिछले साल यानी 2010 में एक लाख 76 हजार करोड़ का टूजी घोटाला, सत्तर हजार करोड़ रूपए का कामन वेल्थ गेम्स घोटाला, साढ़े नौ अरब का आदर्श सोसायटी घोटाला, दो लाख करोड़ का एस बैण्ड तो पेंतीस हजार करोड़ का खाद्यान्न घोटाला सामने आया है। इस तरह आजादी के बाद से अब तक खरबों करोड़ के घोटाले हो चुके हैं जिनमें से कुछ ही प्रकाश में आ सके हैं।

इतने घपले घोटाले करने के बाद भी मोटी चमड़ी वाले राजनेताओं को शर्म नहीं आई कि उन्होंने जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से एकत्र राजस्व की खुली लूट की है। इसमें सभी राजनैतिक पार्टियों की बराबर की भागीदारी है। कोई भी पार्टी अपने निहित स्वार्थों को तजकर देश की जनता के लिए कुछ करने का प्रयास नहीं करती है। संसद के अंदर नूरा कुश्ती का दौर आजादी के उपरांत से ही आरंभ हो गया था। इतिहास साक्षी है जब भी कोई घोटाला सामने आता है उसी वक्त केंद्र सरकार द्वारा इससे बचने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों के दामों को बढ़ा दिया जाता है ताकि आम जनता का ध्यान इससे हट सके।

जनता अब जाग चुकी है। वैसे कहा जा रहा है कि अण्णा हजारे के आंदोलन को शीला दीक्षित द्वारा हवा दी जा रही है क्योंकि अब कामन वेल्थ गेम्स घोटालों की लपटें उन्हें घेरने लगी हैं। अण्णा के आंदोलन के बहाने विपक्ष और जनता का ध्यान कुछ समय के लिए ही सही इससे हट गया है। खैर जो भी हो देश की जनता ने अहिंसक तरीके से सड़कों को अण्णा के लिए थाम लिया है। अण्णा की सदगी, सच्चाई, पारदर्शिता, विनम्रता, दृढ़ता के सामने सारे राजनेता नतमस्तक ही नजर आ रहे हैं। जनता अण्णा को सर माथे पर बिठाए है। इसलिए क्योंकि अण्णा के साथ उनका कोई निहित स्वार्थ नहीं जुड़ा दिख रहा है। कुछ समय पहले बाबा रामदेव का आंदोलन इसी रामलीला मैदान पर हुआ। सरकार ने बाबा के साथ बल प्रयोग किया और बाबा रामदेव रणछोड़दासहो गए।

अण्णा के अनशन के नौ दिनांे बाद सरकार अब बैठकों के दौर से गुजर रही है। साफ दिखने लगा है कि अण्णा एक अकेले नहीं हजारों हजारों करोड़ों अण्णा में तब्दील हो गए हैं। अब कड़वे वचन बोलने वाले कपिल सिब्बल और पलनिअप्पम चिदम्बरम एवं मनीष तिवारी समचार चेनल्स से एकदम गायब हो चुके हैं। हालात देखकर लगने लगा है कि आधा दर्जन राष्ट्रों हुई क्रांति के बाद अब भारत का नंबर है। सरकार खुद वार्ता की पहल कर अण्णा की शर्तें मान रही है, इसे शुभ संकेत माना जाएगा। सरकार घुटनों के बल खड़ी है, यह सफलता अण्णा हजारे की नहीं वरन् 121 करोड़ आम हिन्दुस्तानियों की है। इलेक्ट्रानिक मीडिया की इसमें अहम भूमिका है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। कहा जा रहा है कि इलेक्ट्रानिक मीडिया को लाखों करोड़ रूपए के पैकेज की तैयारी की जा रही है, ताकि आंदोलन का रूख बदला जा सके। हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं कि अगर अब इस आंदोलन के शमन के प्रयास हुए तो इसके परिणाम बहुत अच्छे नहीं सामने आएंगे। सवाल यही है कि अगर सरकार को कथित सिविल सोसायटी की बातें माननी ही थीं तो फिर 16 अगस्त से अब तक इस तरह के सर्कस का क्या ओचित्य था? जाहिर है सरकार की मंशा में खोट है।

अण्णा की चाभी ग्राम सभा के पास


अण्णा की चाभी ग्राम सभा के पास

सरकार की गेंद विपक्ष के पाले में

सर्वदलीय बैठक के बाद ही होगा निर्णय!

तीस हजारी के जज ने थाम अण्णा का झंडा

यशवंत ने की त्यागपत्र की पेशकश

रोजा अफ्तार बना पीएम के गले की फांस

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। ‘‘बहुत पुरानी कहावत है कि राजा की जान तोते में, तोते के पर काटो राजा के हाथ कट जाएंगे।‘‘ मनमोहन सरकार राजा यानी अण्णा हजारे के लिए इसी तरह के अस्त्र की खोज की जा रही है। लगता है सरकार के हाथ वह अस्त्र लग गया है। अण्णा के अनशन को समाप्त करने की चाबी उनके गांव राणेगांव सिद्धि की ग्राम सभा के पास है। अण्णा के लिए वहां की ग्राम सभा का आदेश भगवान के आदेश के तुल्य है।
पीएमओ के सूत्रों का कहना है कि सरकार द्वारा अब महाराष्ट्र सरकार के मार्फत यह दबाव बनाया जा रहा है कि अण्णा के गांव के लोग ग्राम सभा बुलाकर अण्णा से अनशन समाप्त करने का निवेदन करें। इसके पीछे अण्णा की बिगड़ती सेहत का हवाला दिया जा रहा है। सरकार का खुफिया तंत्र और प्रबंधक इस दिशा में अपने प्रयास तेज कर चुके हैं।

सूत्रों ने आगे कहा है कि अण्णा के समर्थन में जुटे देश भर में जनसमर्थन के बाद खुफिया सूत्रों ने सरकार को जो सूचनाएं दी हैं उससे सरकार के हाथ पांव फूल गए हैं। सरकार को डर है कि अगर अण्णा की सेहत बिगड़ी तो स्थिति बेकाबू हो जाएगी। इसलिए सरकार ने मंगलवार और बुधवार की दर्मयानी रात में बैठकों के अनेक दौर चलाए, जिसमें सीसीपीए और मंत्रियों की बैठक का शुमार था।

सरकार ने गेंद विपक्ष के पाले में डालते हुए संकेत दिए कि अगर विपक्ष चाहे तो संसद का सत्र आगे बढ़ा दिया जाएगा, जिससे अण्णा की इसी संसद सत्र में लोकपाल बिल की मांग को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है। सरकार ने प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने का आश्वासन दे दिया है। साथ ही न्यायधीशों के लिए अलग से कानून लाने पर भी सहमत हो गई है जो टीम अण्णा की एक बड़ी जीत मानी जा सकती है।

अण्णा के स्वास्थ्य पर नजर रखने वाले डॉ.नरेश त्रेहान ने कहा कि अण्णा का केटोपोलिज्म बढ़ रहा है जो चिंता का कारण है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि इससे अण्णा की किडनी पर असर हो सकता है। उधर अण्णा ने कहा कि अगर उनकी किडनी खराब होती है तो देशवासियों में से कोई भी अपनी एक किडनी सहर्ष उन्हें दे देगा। अण्णा का गिरता स्वास्थ्य सरकार के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है।

उधर भाजपा के गांधी रामलीला मैदान पर पहुंचे और अण्णा से न मिलकर वे उनके समर्थकों के साथ जाकर बैठ गए। वरूण गांधी का यह कदम मीडिया के लिए सुर्खियों का कारक बना। मीडिया पर्सन्स वरूण को घेरकर उनसे सवाल जवाब करने लगे। वरूण ने बडी ही शालीनता के साथ अण्णा के समर्थन की बात कही।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद यशवंत सिन्हा ने भी भाजपा का रूख अण्णा मामले में साफ न होने पर त्यागपत्र देने की पेशकश कर डाली है। रामलीला मैदान पर लोग तब हतप्रभ रह गए जब दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के एक जज अजय पांडे ने अण्णा का झंडा थामकर न्यायपालिका को भी लोकपाल के दायरे में लाने की बात कह डाली। अजय पाण्डे ने अपने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि वे कशमकश में थे कि अगर वे अण्णा का साथ देते हैं तो इसके क्या परिणाम होंगे, अंत मंे अतंरात्मा की आवाज पर उन्होंने अनिष्ट की आशंका के बाद भी यह कदम उठा ही लिया।

पीएमओ के सूत्रों का कहना है आज शाम को ही प्रधानमंत्री ने रोजा अफ्तारी रखी है। प्रधानमंत्री पशोपेश में हैं कि एक गांधीवादी जब नौ दिन से भूखा प्यासा बैठा है तब वे इस प्रोग्राम को रखते हैं तो इसका गलत संदेश जाएगा। यही कारण है कि सरकार ने अण्णा के अनशन को तुड़वाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

अण्णा ने लटकाई पीसीसी


अण्णा ने लटकाई पीसीसी

पांच अध्यक्षों की घोषणा

छिंदवाड़ा अभी भी खटाई में

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। अण्णा हजारे के अनशन के चलते मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में टीम भूरिया को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। आज इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर के जिलाध्यक्षों की घोषणा अवश्य ही कर दी गई किन्तु मध्य प्रदेश के क्षत्रप और केंद्रीय मंत्री कमल नाथ के संसदीय क्षेत्र जिला छिंदवाड़ा में जिलाध्यक्ष्ज्ञ के नाम पर सहमति नहीं बन सकी है। लंबी जद्दोजहद के बाद भूरिया अपनी सूची को अंतिम रूप देने में तो सफल रहे किन्तु अण्णा प्रकरण के कारण उसे जारी नहीं कर पा रहे हैं।

कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि भोपाल शहर में पीसी शर्मा, ग्वालियर में हरेंद्र यादव, जबलपुर में दिनेश यादव, इंदौर ग्रामीण अतर सिंह के नाम पर मुहर लगा दी गई है। उधर टीम भूरिया के लिए अंतिम तौर पर सूची तैयार की जा चुकी है। विशेष आमंत्रितों के नाम पर अभी सहमति नहीं बन पाई है।

सूत्रों ने आगे कहा कि पहली सूची में कमल नाथ, दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी, अरूण यादव और अजय सिंह के समर्थकों को स्थान दिया जा रहा है। इसमें उपाध्यक्ष, सचिव और महामंत्रियों की घोषणा की जा सकती है। सूत्रों ने यह भी कहा कि भूरिया ने अपनी टीम में महिलाओं के लिए 33 फीसदी स्थान सुरक्षित रखा है। प्रदेश प्रभारी बी.के.हरिप्रसाद के करीबी सूत्रों का कहना है कि टीम भूरिया की पहली सूची पर उनकी मुहर लग चुकी है।

कनाड़ा में अण्णा के समर्थन में गूंजी सिवनी की आवाज


कनाड़ा में अण्णा के समर्थन में गूंजी सिवनी की आवाज

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ अण्णा हजारे का आव्हान देश ही नहीं वरन् विदेशों में भी सर चढ़कर बोल रहा है। कनाड़ा के टोरंटो शहर में रहने वाली पेशे से चिकित्सक डॉ.जया राजपूत चौहान और उदय सिंह चौहान ने अण्णा के समर्थन में टोरंटो में भारतवंशियों को एक सूत्र में पिरोकर प्रदर्शन किया।

मूलतः सिवनी निवासी डॉ.जया का विवाह इंदौर निवासी इंजीनियर उदय के साथ हुआ है। दोनों ही टोरंटों में निवास कर रहे हैं। जया के पिता व्ही.एस.राजपूत सिवनी के मुंगवानी में ग्रामीण बैंक में शाखा प्रबंधक हैं। केयर कंप्यूटर सिवनी के संचालक विपिन सिंह राजपूत ने बताया कि उनकी अनुजा को समाचार चेनल्स और इंटरनेट के माध्यम से टोरंटो में अण्णा के अनशन के बारे में पता चला।

इस संवाददाता से दूरभाष पर चर्चा के दौरान डॉ.जया ने कहा कि अण्णा के भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम की जानकारी मिलते ही उन्होने भारत वंशियों को वहां एकत्र किया और उनसे इस संबंध में चर्चा की। उन्होंने कहा कि वहां रह रहे भारत वंशियों का मानना है कि भारत के घपलों और घोटालों की खबरें जब कनाडा में सुखियां बनती हैं तो उनका सर शर्म से झुक जाता है। यही कारण है कि सभी ने एक साथ मिलकर अण्णा के समर्थन में प्रदर्शन करने का निर्णया लिया।