सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

जबर्दस्त चिंता में हैं वामदल


जबर्दस्त चिंता में हैं वामदल

भाकपा को तलाश है नए मुखिया की

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छिनने से वाम दलों के नेताओं की नींद में खलल पड़ गया है। आराम के आदी हो चुके नेता अब गहन मंथन में जुट गए हैं। वाम दलों के सुरक्षित गढ़ पश्चिम बंगाल के हाथ से जाने के बाद वाम दलों की नींद टूटी है। अब भाकपा के साथ ही साथ मार्कस्वादी कम्युनिस्ट पार्टी में भी आत्म मंथन का दौर आरंभ हो गया है।

माकपा और भाकपा के आला नेता अब एक दूसरे को कोसते नजर आ रहे हैं। पार्टी की दुर्दशा के लिए एक दूसरे को जिम्मेवार ठहराया जा रहा है। दोनों ही दलों के अंदर गहन मंत्रणाओं के कई दौर हो चुके हैं। भाकपा द्वारा विजन डाक्यूमेंट तैयार करवा लिया गया है। पार्टी ने अगले साल मार्च के दूसरे पखवाड़े में संभवतः तीसरे सप्ताह में पटना में पार्टी की जनरल काउंसिल की बैठक बुलाई है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि इसमें पार्टी द्वारा अपना नया महासचिव चुना जाएगा। इस जनरल कांउसिल की बैठक में पार्टी में अनेक निर्णय लिए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है जिसमें नीतिगत निर्णयों की संख्या सबसे अधिक होगी। पार्टी अब अपने पुराने ढर्रे से बाहर निकलकर नया खोल ओढ़ सकती है। कहा जा रहा है कि वर्तमान उप सचिव सुदावरम सुधाकर ही पार्टी के नए मुखिया हो सकते हैं।

स्वामी से नजदीकी खा जाएगी मन को


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 10

स्वामी से नजदीकी खा जाएगी मन को

सोनिया के घुर विरोधी हैं सुब्रम्हणयम स्वामी

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। नेहरू गांधी परिवार (महात्मा गांधी नहीं) के घुर विरोधी सुब्रम्हणयम स्वामी से वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह की नजदीकी कांग्रेस आलाकमान को बुरी तरह खल रही है। पीएम जब भी स्वामी से मिलते हैं बहुत ही गर्मजोशी और प्यार से मिलते हैं। दो अक्टूबर के एक प्रोग्राम में प्रधानमंत्री ने जब स्वामी को सोनिया गांधी के बाजू में बिठाने की हिमाकत की तो सोनिया का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया था।

गांधी जयंती पर आहूत एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के बाजू में सोनिया गांधी फिर उनके बाजू में प्रोफेसर रामगोपाल यादव बैठे थे। जब स्वामी वहां पहुंचे तो वजीरे आजम डॉ.सिंह ने अपने शागिर्द को इशारा कर उन्हें रामगोपाल यादव के बाजू में आसन देने को कहा। सोनिया चुपचाप सब कुछ देख रहीं थीं। सोनिया की भाव भंगिमाएं बता रहीं थीं कि उन्हें मनमोहन का यह काम पसंद नहीं आया।

सोनिया के करीबी सूत्रों का कहना है कि सोनिया के भाजपाई उच्च पदस्थ कनेक्शन्स ने उन्हें सूचना दी है कि स्वामी को भाजपा में भी मान सम्मान मिल रहा है। इसका कारण स्वामी का सोनिया और उनके परिवार पर सीधा निशाना साधना है। सूत्रों की मानें तो सोनिया को यह भी बताया गया है कि भाजपाध्यक्ष नितिन गड़करी के आवास पर स्वामी घंटों बिताते हैं। वहीं भाजपा के थिंक टेंक्स के द्वारा स्वामी के तरकश को सोनिया और उनके परिवार विरोधी तीरों से भरा जाता है। यह जानकारी मिलते ही सोनिया ने इसका और मनमोहन का स्वामी को तवज्जो देने के समीकरणों को जोड़कर देखा जाने लगा है।

(क्रमशः जारी)

शिंदे या मीरा हो सकती हैं मन की सक्सेसर


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

शिंदे या मीरा हो सकती हैं मन की सक्सेसर
सियासी गलियारों में प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह की बिदाई की उल्टी गिनती आरंभ हो चुकी है। अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि सोनिया गांधी के लिए मनमोहन के स्थान पर कौन सा चेहरा मुफीद होगा। एक तीर से कई शिकार करने के आदी कांग्रेस के रणनीतिकार अब मनमोहन के सक्सेसर के तौर पर लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार एवं बिजली मंत्री सुशील कुमार शिंदे के नामों से उपजने वाली स्थितियों का अध्ययन कर रहे हैं। दरअसल कांग्रेस चाह रही है कि प्रधानमंत्री बदलकर वह एक ओर तो घपले, घोटाले और भ्रष्टाचार की अपनी छवि से पीछा छुड़ा लेगी और दूसरी ओर दलित कार्ड खेलकर इसका लाभ उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में उठा लेगी। यूपी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राहुल और सोनिया गांधी का संसदीय क्षेत्र भी इसी सूबे में है, अगर वहां कांग्रेस अपनी नाक नहीं बचा पाई तो भद्द तो आखिर राजमाता और युवराज की ही पिटनी है।

वास्तु के फेर में अण्णा!
हिन्दुस्तान मूल का वास्तु जब पश्चिमी सभ्यता की सील लगाकर वापस आया है तबसे यह लोगों के सर चढ़कर बोल रहा है। क्या उद्योगपति, क्या लोकसेवक, क्या जनसेवक हर कोई वास्तुविदों की मंहगी फीस का भोगमान भोगकर अपने अपने घरों दुकानों का वास्तु दोष दूर करवा रहे हैं। इसी साल अगस्त के बाद चर्चाओं में आए अण्णा हजारे को भी वास्तुविदों ने घेर लिया और फिर क्या था अण्णा के घर का वास्तु ठीक करवाने में जुट गए वास्तुविद। दिल्ली से लौटे अण्णा को वास्तु दोष ठीक होने तक मजबूरी में पद्यावती मंदिर के गेस्ट हाउस को अपना आशियाना बनाकर रहना पड़ा। एक सप्ताह से अण्णा मौन व्रत धारण किए हुए अण्णा का जब पुराना आवास ठीक हुआ तब जाकर वे अब अपने यादव माता मंदिर वाले आवास में चले गए हैं।

मनमोहन और प्रणव का हनीमून समाप्त
कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी का केम्प छोड़कर प्रधानमंत्री के तारणहार बने वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी अब वजीरे आजम से खफा खफा नजर आ रहे हैं। मंत्रीमण्डल विस्तार के एन पहले इस तरह की चर्चाएं सियासी फिजां में छा गईं थीं कि मुखर्जी ने सोनिया का दामन छोड़ अब मन से मन मिला लिया है। कहा जा रहा है कि मनमोहन सिंह ने उन्हें उप प्रधानमंत्री बनाने का वायदा भी किया था जो गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम के त्यागपत्र की धमकी के कारण सपना ही रह गया। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा एक चिट्ठी को मीडिया में लीक किए जाने से प्रणव दा बुरी तरह आहत हुए और उन्होंने सोनिया गांधी से मिलकर सारी की सारी शिकायतें एक ही सांस में कह डाली। घपले, घोटाले, भ्रष्टाचार, बाबा रामदेव, अण्णा हजारे पर गूंगी गुड़िया बनीं सोनिया गांधी इसी इंतजार में थीं। उन्होंने प्रणव की बातें सुनकर मनमोहन को अल्टीमेटम देने का मन बना ही लिया है।

पेंच का पेंच फंसा जुलानिया के गले में
मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच ग्यारह साल से झूला झूल रही मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और सिवनी जिले की महात्वाकांक्षी पेंच परियोजना वैसे तो पच्चीस साल से अधिक उमर की हो चुकी है। चुनावों के दौरान राजनैतिक दल इसे उछालकर अपना मतलब साध लिया करते हैं बाद में मामला ठंडे बस्ते के हवाले ही कर दिया जाता है। हाल ही में भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी राधेश्याम जुलानिया जो एमपी में ईरीगेशन के पीएस भी हैं का सार्वजनिक अभिनंदन होते होते बचा सिवनी में। दिल्ली में डीओपीटी यानी कार्मिक विभाग के एक अधिकारी कक्ष में चल रही चर्चा के अनुसार एमपी विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह जो कि कांग्रेसी नेता हैं से चर्चा में मशगूल जुलानिया द्वारा सूबे की सत्ताधारी भाजपा के नेताओं को अंडर एस्टीमेट कर दिया। फिर क्या था जनता उग्र हो गई। किसी तरह जुलानिया वहां से अपनी इज्जत बचाकर भागे।

नायर को राजभवन के लिए सोनिया की हरी झंडी
सोनिया गांधी पीएमओ में सबसे ज्यादा किसी से खफा थीं तो वह थे प्रमुख सचिव टी.के.नायर से। उनकी सेवानिवृति के उपरांत उन्हें पीएम ने अपना सलाहकार बना लिया। इससे सोनिया का गुस्सा सातवें आसमान पर आ गया। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने जब सोनिया को बताया कि उनके और चिदम्बरम के बीच रार को भड़काने में नायर की भूमिका अच्छी खासी रही है तो सोनिया ने आनन फानन उन्हें वहां से हटाने का निर्देश दे दिया। अब समस्या यह है कि नायर को आखिर भेजा कहां जाए। अमूमन बड़े नौकरशाह सेवा निवृति के बाद भी सारी सुविधाएं चाहते हैं। इसलिए सोनिया को कहा गया कि नायर को राज्यपाल बना दिया जाए तो उचित होगा। पहले तो सोनिया इसके लिए तैयार नहीं हुईं बाद में राजस्थान राजभवन के लिए उन्होंने नायर के नाम पर अपनी सहमति दे ही दी।

दादा की लाड़ली होंगी अब उत्तराधिकारी
दादा यानी राजग के पीएम इन वेटिंग रहे एल.के.आड़वाणी की लाड़ली यानी प्रतिभा उनके साथ अब राजनैतिक तौर पर सक्रिय हो चुकी हैं। वे दादा की संभावित अंतिम रथ यात्रा में उनका कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। प्रत्यक्षतः तो वे दादा का ख्याल रखने उनके साथ चल रही हैं किन्तु इसके कई अनेक मायने और हैं। दादा के साफ निर्देश हैं कि रथ यात्रा में अभिवादन वे और उनकी लाड़ली ही स्वीकार करेंगी। देश भर में दादा की रथ यात्रा के बहाने प्रतिभा भी सर्व स्वीकार्य ही हो जाएं एसी चाहत है दादा की। सालों साल राजनीति करने वाले तिरासी बसंत देख चुके एल.के.आड़वाणी की सेहत अब जवाब देने लगी है। वे समय रहते अपना राजनैतिक उत्तराधिकारी नियुक्त करना चाह रहे हैं। उनके पुत्र की दिलचस्पी राजनीति में ज्यादा नहीं है, सो बिटिया ही दादा का नाम रोशन करेंगीं।

. . . तो क्यों दौड़े गए थे दिल्ली
अगस्त 2011 से देश में चर्चा का केंद्र बन चुके गांधी वादी समाजसेवी अण्णा हजारे और उनके गांव रालेगण सिद्धि पर अब समूचे विश्व की नजर है। अगस्त में लोग अण्णा में गांधी की छवि देख रहे थे। उसके बाद टीम अण्णा की हरकतों के कारण वे विवादित होते गए। अण्णा के गांव के सरपंच सुरेश पठारे को पता नहीं क्या सूझी कि वे अपने साथियों के साथ दिल्ली कूच कर गए और जाते जाते मीडिया को स्कूप दे गए कि कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के बुलावे पर वे दिल्ली जा रहे हैं। सरपंच दिल्ली आए और बेआबरू होकर वापस लौट गए। राहुल गांधी ने उनसे मिलने की जहमत नहीं उठाई। कहा जा रहा है कि सांसद पी.टी.थामस ने यह मुलाकात अरेंज करवाई थी। राहुल के करीबियों का कहना था कि मिलना था तो मीडिया को मिलने के बाद बताना था, पहले से हल्ला कर मिलने का क्या मतलब!

क्या चिटनिस पर होगी कार्यवाही!
मध्य प्रदेश की शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस सरकारी दौरे पर दिल्ली आईं और कोहराम मचाकर चली गईं। चिटनिस ने शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में भारतीय मूल की शिक्षा पद्यति को जमकर सराहा और उसे अपनाने की बातें कहकर देशप्रेम जताया। वहीं चौबीस घंटे भी नहीं बीते और अर्चना चिटनिस एक ब्रितानी संस्था के प्रोग्राम की चीफ गेस्ट की आसंदी पर जा बैठीं। ब्रिटिश काउंसिल द्वारा शिक्षकों और शालाओं को पुरूस्कार दिए जाने वाले इस प्रोग्राम में उनके सूबे का एक भी शाला या शिक्षक स्थान नहीं पा सका। देश के हृदय प्रदेश की शिक्षा मंत्री के चोबीस घंटे में ही दो चेहरे देखकर दिल्लीवासी हतप्रभ हैं। सियासी गलियारों में यह बात जमकर उछल रही है कि क्या शिक्षा मंत्री इस तरह से दो चेहरे जनता को दिखाएंगी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ ही साथ संगठन क्या यह सब महाराज ध्रतराष्ट्र के मानिंद देखकर मौन रहेंगे।

ये रहे एलआईसी के दो चेहरे!
जीवन के साथ भी जीवन के बाद भी का नारा बुलंद करने वाले भारतीय जीवन बीमा निगम के दो चेहरे अब जनता के सामने आए हैं। लोगों का जीवन बचाने के लिए उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाली सरकारी कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम ने तीन मार्च तक तीन सिगरेट कंपनियों में 3561 करोड़ रूपए का निवेश किया है। एलआईसी ने इंडियन टुबेको कंपनी, गुटखा कंपनी धर्मपाल लिमिटेड और एक अन्य को आर्थिक इमदाद दी है। जनकल्याणकारी संस्था एलआईसी का मौखटा उतारने पर पता चलता है कि वह लोगों को कैंसर के मुंह में ढकेल रही है इसके लिए उसने आईटीसी में अपना निवेश दुगना कर दिया है। सरकारी कंपनी ने अपने निवेशकों को बताए बिना ही पैसा जनसंहार के हथियार में लगा दिया है।

राज्यसभा की फिराक में निशंक
उत्तराखण्ड में मुख्यमंत्री की हाट सीट से उतरने के बाद रमेश पोखरियाल निशंक के तेवर कुछ तल्ख समझ में आ रहे हैं। निशंक के करीबी आला कमान पर दबाव बना रहे हैं कि उन्हें राज्यसभा के रास्ते केंद्रीय राजनीति में भेजा जाए। उधर आला कमान निशंक का उपयोग राज्य में दुबारा सत्ता पाने के लिए करना चाह रहा है। निशंक नुकसान न पहुंचाएं और उनका उपयोग भी हो जाए इसलिए पार्टी चाह रही है कि निशंक को विधानसभा अध्यक्ष बना दिया जाए। अगर निशंक स्पीकर बनते हैं तो स्पीकर को खण्डूरी मंत्रीमण्डल में कबीना मंत्री बना दिया जाएगा। दरअसल पार्टी की नेशनल लेबल की दूसरी लाईन को नेताओं को भय है कि निशंक अगर केंद्र में आए तो उनकी लाईन छोटी हो सकती है।

आईएएस देंगे तिहाड़ के आधा दर्जन कैदी!
सत्तर के दशक के उत्तरार्ध मोरारजी देसाई के प्रधानमंत्रित्वकाल में जब इंदिरा गांधी को तिहाड़ जेल भेजा गया था तबसे जबर्दस्त चर्चाओं में आया तिहाड़। इस जेल में राजनेताओं के साथ ही साथ एक से एक जरायमपेशा लोग बंद रहे हैं। तिहाड़ की जेल नंबर तीन में हत्या अपहरण, लूट, धोखाधड़ी की सजा काट रहे छः कैदियों द्वारा नया इतिहास लिखने की तैयारी की जा रही है। जेल प्रशासन भी इन कैदियों के जज़़्बे को सलाम करता नजर आ रहा है। जेल प्रशासन द्वारा भी इन कैदियों के लिए परीक्षा की तैयारियों के लिए जरूरी पाठ्य सामग्री मुहैया करवाई जा रही है। 2009 में बलात्कार के मामले में सजा काटने वाले एक कैदी को सिविल सेवा की परीक्षा पास करने पर रिहा भी किया गया था। सरकारी प्रचार के लिए जिम्मेदार पीआईबी या राज्यों के जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों का नेता प्रेम बड़ा कारण है कि जेल का यह दूसरा चेहरा कम ही लोगों के सामने आ पाता है।

इतनी गत तो मत करिए फ्रीडम फाईटर्स की!
देश को गोरे ब्रितानियों के हाथों मुक्त करवाने वाले आजादी के परवाने दीवाने स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों की तादाद आज मुट्ठी भर भी नहीं बची है। इनको सम्मान देने के बजाए भारतीय रेल अपने उपर एक बोझ स्वरूप ही इन्हें महसूस कर रहा है। स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों को मानार्थ रेल्वे पास जारी किए जाते हैं जिसके आधार पर वे निशुल्क यात्रा के अधिकारी हो जाते हैं। केंद्र सरकार के रेल मंत्री खुद लोकसभा में इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि अंडमान के राजनैतिक कैदियों को छोड़कर शेष स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों के पास राजधानी, शताब्दी और दुरन्तो गाडियों में वैध नहीं हैं। जनसेवकों के लिए अब इन मुट्ठी भर सैनानियों के वोट भी मायने नहीं रखते। कम से कम सवा सौ साल पुरानी कांग्रेस तो इनके बलिदान और जज़्बे को सलाम कर इस दिशा में कुछ प्रयास करती।

पुच्छल तारा
मैं भी अण्णा तू भी अण्णा, अगस्त में अण्णा हजारे के पक्ष में चली बयार अब लोग गुनगुनाते नजर आते हैं। यवतमाल से राहुल तेलरांधे ने ईमेल भेजकर रोचक सच्ची जानकारी भेजी है। राहुल लिखते हैं कि जनसेवक और लोकसेवकों का हवाईजहाज और हेलीकाप्टर का लोभ समझ में आता है, पर गांधीवादी अण्णा हजारे आखिर किस लोभ में पुष्पक विमान की सवारी गांठ रहे हैं। अब तो अण्णा भी चार्टर्ड प्लेन और हेलीकाप्टर का लोभ नहीं छोड़ पा रहे हैं। पिछले दिनों अण्णा की सेवा में एक राजनेता के करीबी के स्वामित्व वाली निजी एविएशन कंपनी का चार्टर्ड प्लेन अण्णा की चाकरी में लगा था। अण्णा भी मजे से मुस्कुराते हुए इस हवाई जहाज की सवारी गांठकर हवा हवाई हो गए।

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

भूटान नरेश ने शादी में नहीं बुलाया सोनिया को


भूटान नरेश ने शादी में नहीं बुलाया सोनिया को

युवा तुर्क राहुल और दुष्यंत को किया निजी तौर पर आमंत्रित

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भूटान नरेश ने अपनी शादी में भारत की सत्ता और शक्ति की केंद्र श्रीमति सोनिया गांधी को आमंत्रित नहीं किया जिसके मायने राजनैतिक वीथिकाओं में खोजे जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को निजी तौर पर विवाह का निमंत्रण भेजा गया था। वजीरे आजम डॉ.मनमोहन सिंह भी विवाह का न्योता नहीं पा सके।

विदेश के मामलों में जानकारी रखने की इच्छा रखने वाले लोग इन दिनों इस नए समीकरण के निहितार्थ खोज रहे हैं कि देश के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह और कांग्रेस सुप्रीमो श्रीमति सोनिया गांधी की अनदेखी कर सोनिया पुत्र राहुल और वसुंधरा पुत्र दुष्यंत को आमंत्रित करने के पीछे कया वजह हो सकती है। देखा जाए तो भारत और चीन से सटे भूटान के राजघराने के विवाह में पीएम और सोनिया को विवाह का न्योता अवश्य ही मिलना चाहिए था।

चीन के करीब होने के कारण इस देश में दुनिया के चौधरी अमेरिका की खासी दिलचस्पी है। जानकारों की मानें तो अमेरिका भूटान में अपना एक बेस तैयार करना चाह रहा है जहां से वह चीन पर नियंत्रण का ताना बाना बुन सके। वैसे भी भूटान राजघराने के नार्वे, डेनमार्क और ग्रेट ब्रिटेन के राजघरानों से अच्छे ताल्लुकात किसी से छिपे नहीं हैं। अमेरिका को अगर भूटान से सीधी दखल नहीं मिल पाई तो वह इन राजघरानों के माध्यम से वहां प्रवेश करने की कोशिश कर सकता है।

भारत इस समय उहापोह की स्थिति में है। अगर भारत इस मामले में लचीला रूख अपनाता है और अमेरिका भूटान में घुसकर चीन को नियंत्रित करने का प्रयास करता है तो इसके दुष्प्रभाव भारत को ही भोगने होंगे क्योंकि उन परिस्थितियों में चीन भारत पर दबाव बनाना आरंभ कर देगा। अगर भूटान अमेरिका की सेना का बेस बनता है तो फिर भारत को चीन और अमेरिका दोनों ही से जूझना पड़ सकता है।

विकास की दौड़ में पिछड़ा एमपी सीजी


विकास की दौड़ में पिछड़ा एमपी सीजी

एमपी में 75 फीसदी घरों में नहीं हैं शौचालय

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। शिवराज सिंह चौहान और डॉ.रमन सिंह चाहे कितने भी दावें करें किन्तु विकास की दौड़ में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पिछड़ चुके हें। दोनों ही सूबों में विपक्ष में विपक्ष में बैठी कांग्रेस इसके खिलाफ आवाज बुलंद करने में असफल ही रही है, जिससे उस पर भाजपा से मैनेज होने के आरोपों को बल मिल रहा है। भाजपा शासित राज्य विकास की दौड़ में पिछड़ रहे हैं। इस बात का खुलासा योजना आयोग के उपाध्यक्ष एम.एस.अहलूवालिया द्वारा जारी मानव विकास प्रतिवेदन में किया गया है।

देश में मानव विकास सूचकांक में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि स्वास्थ्य, पोषण तथा स्वच्छता का मुद्दा भारत के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लायड मैनपावर रिसर्च द्वारा तैयार मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट 2011 में यह निष्कर्ष निकाला गया है। इसमें सूचकांक में उच्चतम साक्षरता दर, गुणवत्तापरक स्वास्थ्य सेवा तथा लोगों के उपभोग खर्च के आधार पर केरल को शीर्ष पर रखा गया है। इसके बाद दिल्ली को दूसरे, हिमाचल को दूसरे तथा गोवा को तीसरे स्थन पर रखा गया है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश के दो तिहाई परिवार पक्के घरों में रहते हैं जबकि तीन चौथाई परिवारों को घरेलू इस्तेमाल के लिए बिजली मिल रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के मानव विकास सूचकांक में बीते दशक में प्रभावी सुधार हुआ है। सूचकांक 2007-08 में 21 प्रतिशत बढ़कर 0.467 हो गया है जो 1999-2000 में 0.387 था। साथ ही इसमें रेखांकित किया गया है कि मानव विकास सूचकांक के मानकों पर छत्तीसगढ़, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, झारखंड, राजस्थान व असम अब भी पिछड़े हैं और ये 0.467 के राष्ट्रीय औसत से नीचे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य के क्षेत्र में राजस्थान छत्तीसगढ़, उड़ीसा और बिहार जैसे राज्यों के साथ काफी कमजोर स्थिति में है और इसका प्रदर्शन मानव विकास के राष्ट्रीय औसत से भी नीचे है। इतना ही नहीं खाद्य और पोषण के मामले में भी स्थिति खासी खराब है। आधारभूत विकास के मामले में प्रदेशों का प्रदर्शन खासा खराब रहा है। रिपोर्ट में इस बात का भी हवाला दिया गया है कि मध्यप्रदेश, बिहार और झारखंड की तरह राजस्थान के भी 75 फीसदी घरों में आज भी शौचालय तक नहीं हैं।

सबसे बेहतर प्रदर्शन करनेवाले राज्य

केरल, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, गोवा, पंजाब।

ख़राब प्रदर्शन करनेवाले राज्य

छत्तीसगढ, उड़ीसा, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान।

सीनियर आईएएस जुलानिया ने दिखाई दंबगई


सीनियर आईएएस जुलानिया ने दिखाई दंबगई

मौके पर अनुपस्थित उपयंत्री ने कराई पुलिस में एफआईआर

(हिमांशु कौशल)

सिवनी, 22 अक्टू. विभागीय परियोजना की समीक्षा पर आये जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव राधेश्याम जूलानिया को जनमंच एवं किसानों के तीखे आक्रोश का सामना करना पड़ा गया क्योंकि सर्किट हाउस में बहुत से किसान उनके इंतजार में बैठे थे और वे अंदर विधानसभा उपाध्यक्ष से बंद कमरे में लगातार बात कर रहे थे. जनमंच और किसानों का इस बात पर से इतना आक्रोश बढ़ गया कि अगर पूर्व मंत्री डाँ. ढालसिंह बिसेन बीच में न आ गये होते तो नौबत मारा पिटाई तक की आ गयी थी.

विदित हो कि जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव राधेश्याम जूलानिया आज विभागीय परियोजना की समीक्षा हेतु सिवनी आये हुए थे. बताया जाता है कि जिस दौरान वे कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक ले रहे थे उसी समय उन्हें विधानसभा उपाध्यक्ष ठाकुर हरवंश सिंह का फोन आ गया और वे बीच में ही आधी बैठक छोड़ उनसे मिलने सर्किट हाउस आ गये. इस बात की खबर जनमंच के संजय तिवारी, भोजराज मदने एवं अन्य भाजपा नेता व कुछ किसानों को लग गयी तो वे भी जूलानिया से बात करने सर्किट हाउस पहुँच गये.

सर्किट हाउस के एक कक्ष में जूलानिया और विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह बहुत देर तक आपस में बात करते रहे जिससे बाहर इंतजार कर रहे लोगों के बीच यह बात उठनी शुरू हो गयी कि हरवंश सिंह तो कभी भी जूलानिया से बात कर सकते हैं वे तो उन्हें कभी भी बर्रा बुला सकते हैं पर अभी तो कुछ देर जनता को उनसे मुखातिब होने का मौका मिल जाये. लोगों ने यह भी कहा कि सिंह स्वयं ही जूलानिया साहब से उन्हें मिलवा दें और उनके लिये जो ज्ञापन लाये हैं उन्हें सौंपने का मौका दे दें. ये सब बातें बाहर चलते रही.

इसके बाद भी जब बहुत देर तक जूलानिया कमरे के बाहर नहीं निकले तो कुछ लोगों ने अंदर जाने का प्रयास किया पर मौके पर मौजूद हरवंश सिंह के स्टाफ ने उन्हें रोक दिया. इसके बाद लोगों का आक्रोश और बढ़ गया कि हम यहाँ इतने देर से बैठे हैं और हरवंश सिंह और जूलानिया साहब की बात ही खत्म नहीं हो रही है.

इसके बाद भाजपा मंडल अध्यक्ष सुनील बघेल कमरे के अंदर घुस गये जिन्हें देखते ही जूलानिया भड़क गये. सुनील बघेल ने जूलानिया से निवेदन किया कि दो मिनिट हमारी बात सुन लीजिये इनसे तो आप कभी भी मिल सकते हैं हमारा ज्ञापन ले लीजिये पर जिस प्रकार बघेल ने कमरे में प्रवेश किया था उससे जूलानिया बहुत क्रोधित हो गये थे और उन्होंने डाँट कर सुनील बघेल को कमरे से बाहर जाने को कह दिया. इसके बाद सुनील बघेल कमरे से तो बाहर आ गये पर बाहर बैठे लोगों में आक्रोश और तेजी से बढ़े गया और लोग जूलानिया और हरवंश सिंह के बाहर निकलने का इंतजार ही करने लगे.

इसके बाद कमरे का दरवाजा खुला और जूलानिया तेज कदमों से गेट की ओर बढ़े और उनके पीछे पीछे पूरे लोग जो काफी देर से उनका इंतजार कर रहे थे  सर, एक मिनिट सर, एक मिनिट रूकिया कहते हुए उनके पीछे दौड़े. पर जूलानिया नहीं रूके. जब वे सर्किट हाउस की सीढ़ियों से नीचे उतर डामर सड़क पर आये गये तो पीछे से तिवारी ने आवाज दी कि सर आपको बात तो सुननी ही पड़ेगी आप बैठकर दस मिनिट बात कर लीजिये.

श्री तिवारी के इन शब्दों को सुनकर जाते जाते जूलानिया रूक गये और पीछे मुड़कर पुनः तिवारी के पास आये और कहा बात नहीं सुनुंगा तो क्या दादागिरी करोगे. इस पर तिवारी ने कहा कि कोई दादागिरी नहीं है सर. इसके बाद अनेक लोग कुछ न कुछ कहने लगे जिसपर जूलानिया ने तेज स्वर में चिल्लाया एक मिनिट. कुछ क्षणों की खामोशी छा गयी. फिर जूलानिया ने सुनील बघेल की ओर मुखातिब होकर कहा कि अंदर कमरे में घुस आये ये बद्तमीजी नहीं है, ये दादागिरी नहीं है, ये तरीका है तुम्हारा.

इस पर आक्रोश में सुनील बघेल ने उंगली उठाते हुए कहा कि बिल्कुल दादागिरी नहीं है तो जूलानिया ने चिल्लाते हुए कहा कि हाथ नहीं उठाओगे, बिल्कुल उंगली उठाकर बात नहीं करोगे तुम. इस पर सुनील बघेल ने भी  कह दिया गया कि आप भी हाथ नहीं उठायेंगे. फिर जूलानिया ने पुनः डाँटने वाले तेज स्वर में कहा कि अंदर घुस आये तुम, अंदर घुस आये तुम ये हरकत है तुम्हारी. इस पर बघेल ने कहा कि मैने निवेदन करके अंदर घुसा था.

इसी बीच संजय तिवारी ने बात को संभालने की कोशिश की कि सर वो निवेदन करने गया था कि आप हमें भी सुन ले. जिस पर जूलानिया ने कह दिया अच्छा रोक लो मेरे को देख लो मै तुम्हारी नहीं सुनुंगा तो तिवारी ने कहा कि मत सुनिये जाइये. तिवारी के ऐसा कहते ही दो क्षण के लिये जूलानिया स्वतः शांत हो गये फिर कहा कि मैं आपसे मिलने यहाँ नहीं आया हूँ. तो तिवारी ने कहा कि मैं निवेदन कर रहा हूँ आपसे. इस पर जूलानिया ने कहा कि आप निवेदन नहीं कर रहे हैं, दादागिरी है यह. फिर संजय तिवारी ने कहा कि सर सुनील बघेल आपसे निवेदन करने गया था तो जूलानिया ने कहा कि कौन सी बड़ी तोप हैं ये ? इस पर तिवारी आक्रोश में आ गये उन्होंने कहा कि तोप इस देश में नागरिक ही हैं इसी बीच दूसरे लोग भी जोर जोर से चिल्लाने लगे. तिवारी ने कहा कि नागरिक ही तोप हैं इस देश में आप और शासन नहीं.

इसके बाद तो लोगों का चिल्लाना इतना बढ़ा कि जूलानिया घेरा तोड़कर आगे बढ़ने लगे और तिवारी व अन्य लोग उनके पीछे पीछे चिल्लाते हुए जाने लगे बीच बीच में जूलानिया उनकी बातों का जवाब भी दे देते फिर यह हुआ कि जनता ने उन्हें पुनः घेर लिया और भीड़ में सभी लोग जिससे जो बना बोलता गया न जूलानिया की समझ में आ रहा था न ही आस पास खड़े लोगों की कि क्या बोला जा रहा है. इसी बीच विधानसभा उपाध्यक्ष महोदय सर्किट हाउस की गैलरी में आकर खड़े हुए और देखा कि मामला गर्म है तो पुनः अंदर कमरे में चले गये.

इसके बाद फिर जूलानिया ने कहा कि ये क्या है, ये दादागिरी है. फिर संजय तिवारी एवं कुछ लोगों ने क्षमा मांगी तो जूलानिया ने कहा कि ये कोई क्षमा मांगने का तरीका है. तभी बीच में एक ने लोगों से कहा कि लाइये लाइये ज्ञापन दीजिये तो जूलानिया ने कहा कि कोई ज्ञापन नहीं लूंगा मैं. पहले आप बात करने का तरीका सीखिये, ये कोई तरीका है बात करने का. आप मेरे साथ इस ढंग से बात कर रहे हैं, मेरे उपयंत्री के साथ आप क्या करते होंगे.

इस पर तिवारी ने कहा कि अरे छोड़िये सर, किसी के साथ हम कुछ नहीं करत.े इस पर जूलानिया पुनः तिवारी की ओर मुड़े और कहा कि ये ठीक नहीं कर रहे हैं आप और ये तरीका सहीं नहीं है आपके बात करने का, कमरे में भी चिल्लाकर घुस आये आप.
इस पर तिवारी ने हरवंश सिंह की ओर इशारा करते हुए कहा कि आप जिन लोगों से बातचीत कर रहे हैं उनसे आप भोपाल में भी मिल सकते हैं. इस पर जूलानिया ने कहा कि मैं कहीं भी मिलूँ ये आप तय नहीं करेंगे तो तिवारी ने कहा कि चलिये आप डिसाइड कर लीजिये, हमको बता दीजिये कि आप कब हमसे मिलेंगे तो जूलानिया ने कहा कि शाम को चार बजे कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आइये आप लोग. और इस तरह की बद्तमीजी बिल्कुल नहीं चलेगी.

इस पर सुनील बघेल ने पुनः कहा कि कौन सी बद्तमीजी कर दी सर हमने चलिये आप बताये की कौन सी बद्तमीजी की हमने. बघेल के ऐसा कहने पर े पुनः विवाद शुरू हो गया और पुनः संजय तिवारी ने कहा कि कोई बद्तमाजी नहीं है सर ये. इस देश के नागरिक हैं हम लोग, ये बता दें आपको.

पूर्व मंत्री डाँ. ढालसिंह बिसेन का आगमन और बातचीत

इसके बाद पूर्व मंत्री डाँक्टर ढालसिंह बिसेन का आगमन हो गया जिनके आने के कारण ही परिस्थिति संभली. उन्होंने धीरे से जूलानिया का हाथ थामा कि उनका गुस्सा शांत हो और कहा कि दो मिनिट इन लोगों की बात सुन लो न साहब ये लोग भी परेशान है, दो मिनिट इन लोगों की बात सुनने में क्या चले जायेगा. पहले तो जूलानिया बिसेन से लोगों की शिकायत की कि फिर धीरे से वे लोगों की बात सुनने को राजी हो गये.

श्री ढालसिंह बिसेन ने कहा कि जैसे ही बात यहाँ मीडिया में आयी कि पेंच के ऊपर सरकार का यह पत्र चला है कि पेंच नहीं बनेगी तो मैने ऊपर बात की तो बताया गया कि हाँ साहब एक पत्र हमारा चले गया है कि पेंच परियोजना नहीं बनेगी. इस पर जूलानिया द्वारा कहा गया कि पत्र नहीं गया है, ऐसा कोई पत्र गया ही नहीं है. उन्होंने पूछा आपको किसने बता दिया कि ऐसा पत्र गया है तो ढालसिंह बिसेन ने कहा कि पेपर में आया है कि जूलानिया साहब का पत्र गया है. इसके बाद हम लोगों द्वारा सी.एम. स्तर पर बात की गयी, छिंदवाड़ा में भी मामला उठाया गया.

अब जूलानिया ने डाँ ढालसिंह बिसेन से कहा कि सर जो लोग बांध विरोधी है ये सब बाते उन लोगों द्वारा फैलायी गयी बाते हैं. वे ऐसी बाते फैलाते हैं.

श्री जूलानिया ने कहा कि प्रोजेक्ट में जो सुप्रीम कोर्ट का स्टे था वह मैने हटवाया. उसके बाद पुराने ठेकेदार को हटाया फिर जो नया टेंडर हुआ उसमें पुनः सुप्रीम कोर्ट का स्टे लग गया फिर मैने दूसरा वकील लगाकर उस स्टे को खाली करवाया फिर मैने नया टेंडर लगवाया, नयी एजेंसी तय की और लगातार में लगा हुआ हूँ कि यह प्रोजेक्ट बने. नाबार्ड से 400 कुछ करोड़ का लोन मैने सेंक्शन कराया और आज लोग मुझसे कह रहे हैं कि मैने प्रोजेक्ट बंद करवा दिया.

श्री ढालसिंह बिसेन ने  कहा कि मेरी भी कुछ अधिकारियों से बातचीत हुई थी उन्होंने भी बताया था. यह भी जानकारी आ रही है कि वहाँ के कुछ समुदाय विशेष के लोग और कमलनाथ जी की ओर से गड़बड़ हो रही है.

इस पर जूलानिया द्वारा कहा गया कि किसी भी राजनैतिक पदाधिकारी के बारे में मैं कोई टीका टिप्पणी कभी नहीं करूंगा और ये मेरा काम भी नहीं है. जूलानिया ने कहा कि राजनैतिक पदाधिकारी एक दूसरे के बारे में क्या कहते हैं, क्या करते हैं मैं उस व्यवसाय में नहीं हूँ. मेरा प्रशासनिक काम है, प्रदेश की सभी परियोजनाओं को मुझे पूरा करना है. पेंच ही एक मात्र ऐसी परियोजना है जो किसी न किसी कारण से उलझी है. अब उस उलझन को दूर करने के लिये सबसे पहले जो बात थी कि जो ठेका दिया था उस ठेके में उस ठेकेदार का फर्जी एफ.डी.आर. निकला. मैने एफ.डी.आर. के मुद्दे को निपटाया उसके बाद नाबार्ड के जी.एम. से मैने बात की और इस प्रोजेक्ट को पूरा करना चाहा.

श्री जूलानिया ने आगे बताया कि इसके बाद मैने आंध्रा की एक बहुत अच्छी कंपनी को जिसका नाम मुझे अभी याद नहीं आ रहा को ठेका दिया है. जिसे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जो मंत्री मंडल की विशेष बैठक होती है. जिस बैठक में 100 करोड़ से ऊपर के ठेके आते हैं. उस बैठक में कंपनी के इस ठेके को स्वीकृति मिली है. उसके मिनिट्स भी बन कर आ चुके हैं तो सरकार की तरफ से पूरी तैयारी है कि यह योजना बने.

श्री जूलानिया ने आगे बताया कि अब इस पे जो पानी उपलब्ध है उस पानी का भी हमने आंकलन किया जिससे हमने यह निष्कर्ष निकाला कि हमें इसकी नहरों को भी पक्की करना है क्योंकि नहरे अगर कच्ची रहती हैं तो 50 हजार हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई होती है और अगर नहरे हमने पक्की कर ली तो 10 से 15 हजार हेक्टेयर सिंचाई इससे बढ़ जायेगी.

श्री जूलानिया ने यह भी बताया कि लागत से लेकर सभी तकनीकी मापदंडों से इस तरह से है कि अगर हमें मात्र 2 साल का भी समय मिल गया तो हम इस परियोजना को पूरा कर लेंगे मतलब अगर हमें अभी से काम करने मिल जाये तो दो साल के वर्किंग पीरियेड में हम इस प्रोजेक्ट को 2013 तक पूरा कर लेंगे.

आपने बताया कि प्रोजेक्ट में तीन गाँव हैं तीनों गाँव की जो भूमि अर्जन करना है वह हम कर चुके हैं. भू अर्जन के बाद किसानों ने सारा पेमेंट ले लिया और पेमेंट लेने के बाद ये सारी समस्या खड़ी हुई है. जूलानिया ने कहा कि उसके बाद भी मुख्यमंत्री जी से मैने दो महीने पहले ही अनुमति ले ली थी कि मंत्री परिषद में विशेष प्रस्ताव लाकर आज की कलेक्ट्रेट रेट के हिसाब से अंतर की राशि किसानों को  अनुदान के रूप में और दे दें. आपने कहा तो इस तरह किसान की जो जायज समस्या है वह हम हल करने को तैयार है लेकिन अगर कोई कहे कि मेरी जमीन का तो 1 करोड़ रूपये मुआवजा मिलना चाहिये तो वो असंभव है पर वर्तमान कलेक्ट्रेट दर के हिसाब से मुआवजा देने के लिये अभी जिला कलेक्टर को और प्रशासन को मुख्यमंत्री जी ने परसों हुई वीडियो कांफ्रेंसिग में पुनः निर्देशित करते हुए कहा है कि काम शुरू कर दो.

आपने कहा कि अगर हमें काम बंद करना होता तो हम कंपनी को पहले ही कह देते कि भैया तुम जाओ. क्योंकि बिना काम के जो पेनाल्टी लगती है वह बहुत ज्यादा आ जाती. आपने कहा कि सरकार की तरफ से कहीं भी किसी प्रोजेक्ट का काम नहीं रूक रहा है और ऐसा कैसे हो सकता है कि पूरे प्रदेश में केवल पेंच ही रूके और बाकी सारे प्रोजेक्ट चालू रहें. आपने कहा कि बाणसागर में 9 हजार 12 हजार हेक्टेयर में सिचाँई होती थी डेढ़ साल पहले मैं आया तो अब 99 हजार हेक्टेयर पर सिँचाई होने लगी है.

श्री जूलानिया ने जानकारी दी कि सिवनी में नहर 60 प्रतिशत पूरी हो चुकी हैं. अगर बांध का काम करने में अड़चने पूरी हट जाती तो अगले साल तक इसी समय तक नहरे हमारी पूरी चालू हो जाती. आपने बताया कि पेंच का भी जो हमने ठेका दिया है वह इस प्रकार से दिया है कि दो वर्ष में काम पूरा हो जाये और अगर जरूरत पड़ी तो हमारे पास विभाग की बड़ी बड़ी मशीने हैं उन्हें भी हम मोबीलाइज कर लेंगे और हमारी मशीने इतनी बड़ी है कि जो व्यक्ति खड़े होकर चलाता है उसे नीचे वाला नहीं दिखता. बिल्कुल साक्षात राक्षस जैसी मशीने हैं.

श्री जूलानिया ने कहा कि छिंदवाड़ा में जो परियोजना का विरोध है राजनैतिक रूप से उसका आप राजनैतिक लोग मिलकर निराकरण करें. आपने कहा कि हर आदमी इंसान भी है, किसान भी है, नेता भी है, अफसर भी है. आप जो भी लोग राजनीति करते हैं वे अपनी राजनीति का उपयोग कर समस्या का निराकरण निकाले. जो कोई भी पार्टी ये कर रही है उन्हें भी समझाये कि विकास में बाधा न बने. जो जायज बातें है वो सब मानने के लिये सरकार तैयार है जो ना जायज बाते हैं उन्हें तो कोई नहीं मान सकता कि साहब करोड़ रूपये मुआवजा दीजिये. आपने कहा कि पहले मुआवजा 110 करोड़ रूपये का बना था अब वर्तमान कलेक्टर गाइड लाइन से मुआवजा 310 करोड़ के लगभग बना है याने कि 200 करोड़ रूपये सरकार अतिरिक्त देने को तैयार है. अब लोग 1500 करोड़ मांगेगे तो कहाँ से काम होगा.

इसके बाद पूर्व मंत्री डाँ. ढालसिंह बिसेन ने कहा कि बैठक के बाद जब आप जाने लगें तो इन सब जानकारियों की एक सरकारी विज्ञप्ति अपने सरकारी पी.आर.ओ. से जारी करवा देना.

प्रमुख सचिव जूलानिया और पत्रकारों के बीच हुई बात

पूर्व मंत्री डाँ ढालसिंह बिसेन  से फुर्सत होकर प्रमुख सचिव जूलानिया जब अपने गाड़ी की ओर बढ़े तो पुनः उन्हें पत्रकारों ने घेर लिया. पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए जूलानिया ने कहा कि पेंच परियोजना बनेगी सरकार इसे बनाना चाहती है. आपने बताया कि पहले सुप्रीम कोर्ट ने ठेका तय नहीं करने दिया. सुप्रीम कोर्ट से स्टे के कारण काम हम नहीं करा सकते थे. आपने कहा कि अगर हमने काम अभी शुरू करवा दिया तो हम 2013 में इस योजना को पूरा कर देंगे पर हमें छिंदवाड़ा के किसानों के साथ बैठक कर तय करना है कि अब उनकी क्या समस्याएं है.

आपने बताया कि जो काम रुका था उसका कारण था कि सबसे पहले जो वहाँ एस.के. जैन एंड कंपनी थी उसकी एफ.डी.आर. फर्जी थी और वह फर्जी एफ.डी.आर. मैने ही पकड़ी थी. कहीं से कोई गुमनाम शिकायत आयी थी कि ऐसा हुआ है उस गुमनाम बिना हस्ताक्षर की शिकायत पर मैने जाँच की थी. जाँच में जो एफ.डी. मौके पर पायी गयी वह असली थी जब डीटेल में गये कि यह सहीं एफ.डी. है तो फिर फर्जी की शिकायत क्यों तो पता चला था कि जो फर्जी एफ.डी. थी उसका 9-10 महीने का जो टेन्योर था वह खत्म हो चुका था उसका बहाना लेकर जो नयी एफ.डी. बनायी गयी थी वह सहीं थी. इसके बाद हमने निकाला कि जो पुरानी एफ.डी. थी जिसके आधार पर एग्रीमेंट साइन हुआ था वह सहीं है या फर्जी तो हमने एक्सिस बैंक से पूछा तो एक्सिस बैंक ने लिख कर देने से इंकार कर दिया. फिर बैंक को प्रेशर पड़ा कि आपको बताना ही पड़ेगा कि यह एफ.डी. असली है या फर्जी तो बैंक ने यह लिखकर दिया कि ऐसी एफ.डी. हमने जारी नहीं की. तो फर्जी एफ.डी. होने के कारण हमने सबसे पहले उस एग्रीमेंट को कैंसिल किया. इसके बाद थाने में एफ.आई.आर. दर्ज करवायी. इसके बाद दूसरा ठेका देने के लिये हमने नयी एजेंसी बनायी उसने लगभग 35-40 लाख रूपये का काम किया ईएनसी ने उसका इन्सपेक्शन किया तो उसने काम को रिजेक्ट कर दिया.

प्रेस ने जब जूलानिया से पूछा कि इसके पीछे का राजनैतिक कारण क्या है तो पहले तो जूलानिया ने बात को टालना चाहा पर जब प्रेस वाले नहीं माने तो उन्होंने कहा कि इसका एक राजनैतिक पक्ष बांध के निर्माण में विरोध पैदा कर रहा है ऐसा माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपने भाषण में कहा है. उन्होंने दोबारा कहा मुख्यमंत्री जी ने कहा है मैने नहीं कहा. इतनी बात करने के बाद जूलानिया पुनः कलेक्ट्रेट सभाकक्ष की ओर रवाना हो गये जहाँ से वे अपनी अधूरी बैठक छोड़कर विधानसभा उपाध्यक्ष से बात करने सर्किट हाउस आये थे

शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

भाजपा कसेगी निशंक पर शिकंजा


भाजपा कसेगी निशंक पर शिकंजा

राज्यसभा से संसदीय सौंध पहुंचना चाह रहे हैं निशंक

पार्टी चाहती है सूबे तक ही सीमित रहें निशंक

विधानसभाध्यक्ष बन सकते हैं निशंक

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। उत्तराखण्ड की सत्ता से उतार फेंके गए मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को साईज में लाने के लिए भाजपा नेतृत्व लामबंद होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री खण्डूरी की सिफारिशों के बाद नेतृत्व कुछ हरकत में आता दिखाई दे रहा है। निशंक चाहते हैं कि शाहला मसूद हत्याकांड में नाम आने के बाद विवादित हुए तरूण विजय जब सीट रिक्त करे तो उस पर वे काबिज हो जाएं। उधर नेतृत्व उन्हें साईज में लाकर उत्तराखण्ड तक ही सीमित रखना चाह रहा है।

उत्तराखण्ड की सत्ता से अचानक ही बाहर हुए निशंक की नजर अब केंद्रीय राजनीति पर है। उनकी चाहत है कि वे तरूण विजय की राज्य सभा सीट किसी भी तरह हथिया लें। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि निशंक को मशविरा दिया गया है कि आज नहीं तो कल शहला मसूद मामले में नाम घसीटे जाने के उपरांत राज्य सभा सांसद तरूण विजय को त्यागपत्र देना ही होगा। इसलिए वे अभी से इस सीट के लिए लाबिंग आरंभ कर दें।

भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व और आल नेता निशंक को केंद्र में झेलने की स्थिति में नहीं हैं। अरूण जेतली, सुषमा स्वराज जैसे नेताओं ने निशंक को उत्तराखण्ड में ही घेरकर रखने के प्रयास आरंभ कर दिए हैं। सूत्रों की मानें तो अब निशंक को उत्तराखण्ड विधानसभा का अध्यक्ष बनवाने की मुहिम चलाई जा रही है। मौजूदा विधानसभाध्यक्ष को सरकार में कबीना मंत्री बनाया जा सकता है। दरअसल केंद्रीय नेतृत्व को भनक मिली है कि अगर निशंक को व्यस्त नहीं रखा गया तो बौखलाए निशंक सूबे में विधानसभा चुनावों में एक दर्जन सीटों पर नुकसान करने की स्थिति में हैं। यही बात मुख्यमंत्री खण्डूरी ने आला कमान को बताई हुई है।

दिग्वियज सिंह से बुरी तरह भयाक्रांत हैं मनमोहन


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 9

दिग्वियज सिंह से बुरी तरह भयाक्रांत हैं मनमोहन

दिग्गी राजा के जहर बुझे तीरों की काट नहीं है मन के पास

अहमद पटेल को साधकर मन की मुक्ति के मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं दिग्गी

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। घपालों, घोटालों और भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक की अघोषित उपमा पा चुके वजीरे आजम डॉक्टर मनमोहन सिंह की बिदाई की बेला नजदीक ही नजर आ रही है। मनमोहन सिंह की बिदाई में कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा, सोनिया के सचिव विसेंट जार्ज के अलावा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह महती भूमिका में नजर आ रहे हैं।

कांग्रेस की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी के नाक, कान, आंख और मस्तिष्क बने उनके अघोषित राजनैतिक गुरू राजा दिग्विजय सिंह कांग्रेस के लिए भस्मासुर की भूमिका में ही नजर आ रहे हैं। जिस तरह कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी और राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र वाले उत्तर प्रदेश, सोनिया के राजनैतिक सचिव अहमद पटेल के सूबे गुजरात और राजा दिग्विजय सिंह के गृह प्रदेश मध्य प्रदेश में कांग्रेस का नामलेवा नहीं बचा है उसी तरह अब केंद्र में भी यही हाल होने के संकेत मिले हैं।

अपनी मुखालफत से आहत प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह का खेमा भी अब सक्रिय होता नजर आ रहा है। मनमोहन मण्डली ने अब अपने विरोधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मनमोहन मण्डली के शब्द बाणों का असर साफ दिखने लगा है। कांग्रेस के अंदखाने में चल रही चर्चाओं के अनुसार अब तो सोनिया, राहुल गांधी, अहमद पटेल और दिग्विजय सिंह से ही यह पूछा जाना चाहिए कि उनके सूबों में कांग्रेस औंधे मुंह क्यों गिरी है? जब वे अपना घर ही नहीं संभाल सकते तो फिर किस मुंह से देश में कांग्रेस का परचम लहराने की बात कर रहे हैं। अब मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के बीच आर पार की लड़ाई आरंभ हो चुकी है।

(क्रमशः जारी)

तकनीकि खराबी से उपजा भ्रम!


उत्तराधिकारी हेतु रथ यात्रा . . . 4

तकनीकि खराबी से उपजा भ्रम!

जेतली हुए बेहोश तो ठाकुर, सुषमा को आई मितली

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। एल.के.आड़वाणी अपनी पुत्री प्रतिभा को राजनीति में स्थापित करने की गरज से रथ यात्रा पर निकले हैं। इस तरह की चर्चाओं का बाजार जमकर गर्मा चुका है। आड़वाणी का रथ पूणे में तैयार करवाया गया था। यह रथ आड़वाणी के छिपे हुए हनुमान प्रकाश जावड़ेकर ने तैयार करवाया था। आड़वाणी की मंशा के अनुरूप इसमें दो जेनरेटर, वाल्वी साउंड सिस्टम, एक लिफ्ट, हाईड्रोलिक दरवाजे आदि से सुसज्जित किया गया है।

दिल्ली की लो फ्लोर बस के मानिंद इसके दरवाजे रथ के चालू होते ही अपने आप बंद हो जाते हैं। रथ यात्रा में अपशकुन तब आया जब इसका एक एक्जास्ट फेन ही टूटकर गिर गया। एग्जास्ट क्या टूटा, जनरेटर का धुंआ एसी की डक्ट से अंदर भरने लगा। धुएं ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया। बताते हैं कि उस वक्त वहां अरूण जेतली सो रहे थे, जो सोते सोते ही बेहोश हो गए। धुंए से सी.पी.ठाकुर और सुषमा स्वराज को मितली आने लगी। उन्होंने रथ के अंदर ही उल्टियां करना आरंभ कर दिया।

रथ के दरवाजे उसके रूकने पर ही खुल सकते थे। आड़वाणी रथ रोकने के पक्ष में नहीं थे। जब हालात काबू से बाहर हुए तो रथ को रूकवाया गया। रथ के साथ एक भी वाहन नहीं था। राजीव प्रताप रूढी जो आगे चल रहे थे वे काफी फासले पर थे। काफी देर बाद चिकित्सकों से संपर्क कर उन्हें मौके पर बुलवाया गया। चिकित्सकों ने जेतली और सुषमा को रात में यात्रा करने की अनुमति नहीं दी। बाद में आड़वाणी को छोड़कर अन्य नेताओं को अलग अलग वाहनों से अलग अलग जगह भेजा गया। रथ में आड़वाणी और उनकी विरासत संभालने वाली प्रतिभा ही बचीं।
(क्रमशः जारी)


जिला प्रशासन की ढील का फायदा उठा रहा है आईडिया


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  6

जिला प्रशासन की ढील का फायदा उठा रहा है आईडिया

बिना आईडी बांटी जा रही हैं सिम

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। निजी क्षेत्र की बड़ी मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आईडिया द्वारा समूचे देश में जिला प्रशासन की अनदेखी का लाभ सबसे तेजी से लिया जा रहा है। बिना आईडेंटीफिकेशन प्रूफ के ही आईडिया द्वारा सिम बांटी जा रही हैं। यह भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।

गौरतलब है कि यमुना नगर के जिलाधीश कार्यालय द्वारा जारी आदेशों के तहत उन मोबाईल फोन कम्पनियों को चेताया गया है, जो बिना किसी आवासीय प्रमाण, फोटो और ग्राहकों के स्थाई पतों की जांच पड़ताल के बिना ही मोबाइल फोन धारकों को मोबाइल फोन के सिम उपलब्ध करवा रही है। मोबाईल फोन की कम्पनियां अगर ऐसा करेगी तो आदेशों कीअवहेलना करने वाली कंपनियों/सिम बेचने वाले एजेंट के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अतिरिक्त उपायुक्त दिनेश सिंह यादव ने बताया कि जिलाधीश कार्यालय द्वारा पहले से ही जारी किए गए भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि देखने में आया है कि भारतीय दूर संचार निगम लि., एयरटैल, वोडाफोन, आईडिया, रिलायंस, इन्फोकोम व टाटा आदि मोबाईल कम्पनियों के एजेंट लोगों को उनके आवासीय प्रमाण, फोटोग्राफ व उनके आवास के पतों की जांच पडताल करवाए बिना ही ग्राहकों को मोबाइल फोन के सिम उपलब्ध करवा रही है।

ऐसे ग्राहक उक्त मोबाइल फोन का आपराधिक व राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में प्रयोग कर रही है। ऐसे समाज विरोधी तत्व इन मोबाइल सिमं के जरिए से समाज में अशांति फैलाते है और लोगों की जान माल के लिए भी खतरा पैदा करते है। अतिरिक्त उपायुक्त ने स्पष्ट किया गया है कि कोई भी मोबाइल कम्पनी लोगों को बिना आवासीय प्रमाण पत्रों के कोई भी मोबाइल सिम कनेक्शन जारी न करे। उन्होंने मोबाईल फोन विक्रेताओं को भी आगाह किया कि वह ग्राहकों से पुराने मोबाइल खरीदते हुए व उन्हे पुराने मोबाइल बेचते हुए भी सावधानी बरतें। उन्होंने एसटीडी बूथ चलाने वाले लोगों से भी अपील की कि वह उनके बूथों से की जा रही कॉल का पूर्ण ब्योरा लिखित रूप में रखें।

बावजूद इसके देश भर के निन्यानवे फीसदी जिलों में जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा इस तरह का कोई आदेश सार्वजनिक तौर पर जारी नहीं किए जाने से निजी और सरकारी मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनियों द्वारा बिना आईडी प्रूफ के ही सिमों का वितरण किया जा रहा है।
(क्रमशः जारी)