मंगलवार, 5 जून 2012

केरल में मानसून की दस्‍तक, दिल्‍ली नहाई

केरल में मानसून की दस्‍तक, दिल्‍ली नहाई 

 

(महेश रावलानी)

नई दिल्‍ली(साई)। मॉनसून ने केरल में मंगलवार को दस्तक दे दी और रिमझिम बरसती बूंदों से किसानों को राहत मिली। वहीं, दिल्ली में भी मौसम ने कुछ करवट बदली है। साउथ दिल्ली में ओलों के साथ तेज बारिश हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दिल्ली में अब गर्म हवाएं नहीं चलेंगी।
केरल में मॉनसून पर भारतीय मौसम विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, 'मॉनसून केरल पहुंच गया।' केरल में आमतौर पर मॉनसून की बारिश एक जून से होती है लेकिन वैज्ञानिकों ने कहा कि परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि पूर्वानुमानों के अनुसार, मौसमी बारिश की प्रक्रिया अच्छी है। राष्ट्रीय जलवायु केंद्र के निदेशक और मॉनसून का पूर्वानुमान जताने वाले मुख्य अधिकारी डी. शिवानंद पई ने बताया, अभी तक मॉनसून की स्थिति बहुत अच्छी है और केरल तथा दक्षिणी कर्नाटक के हिस्सों में अगले दो-तीन दिनों तक बारिश होगी। मॉनसून के अन्य इलाकों में बढ़ने के लिए अनुकूल स्थिति है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि तूफान मवार की वजह से मॉनसून के आने में देरी हुई।
1 जून को केरल आना था मॉनसून

साल 2005 के बाद यह पहला मौका है जब वहां मॉनसून लेट हुआ है। इससे पहले 2005 में यह 7 जून को केरल पहुंचा था। इसके बाद हर साल मई के आखिर तक केरल पहुंच गया था। साल 2009 में तो यह 23 मई को ही वहां पहुंच गया। इस साल 1 जून को मॉनसून के केरल पहुंचने के आसार थे।

पवार ने लिया जायजा
भारत की करीब 55 फीसदी खेती बारिश पर निर्भर है। पिछले कुछ साल से मॉनसून सामान्य रहने से अनाज की बंपर पैदावार हो रही है। कृषि मंत्री शरद पवार ने हालात का जायजा लेने के लिए सोमवार को मौसम वैज्ञानिकों से बात की। मौजूदा फसली सीजन में अनाज की पैदावार 25 करोड़ टन तक पहुंचने के संकेत हैं। यह पिछली बार से करीब 50 लाख टन ज्यादा है। पवार का मानना है कि पैदावार की रफ्तार बरकरार रखने के लिए मॉनसून का अच्छा होना जरूरी है।

मॉनसून का ऐलान कब
वैज्ञानिकों के मुताबिक केरल में मॉनसून के पहुंचने का ऐलान तभी किया जाता है जब राज्य और लक्षद्वीप आईलैंड के कुल 14 ऑब्जर्वेशन स्टेशनों में 7 से लगातार 48 घंटों तक बारिश होने की रिपोर्ट आ जाए। भारतीय मौसम विभाग के लक्ष्मण सिंह राठौर ने बताया, केरल में मॉनसून के दस्तक देने की सामान्य तारीख 1 जून है, लेकिन तय डेट से 5 दिन पहले या 5 दिन बाद इसकी दस्तक सामान्य मानी जाती है, क्योंकि फोरकास्ट के मॉडल में इतना एरर आ सकता है।

संकट में हैं राहुल का चश्मा!


संकट में हैं राहुल का चश्मा!

टीम राहुल की असलियत आने लगी युवराज के सामने

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। लगभग आठ साल पहले चांदी का चम्मच लेकर सक्रिय राजनीति में आए कांग्रेस के युवराज राहुल घांदी को घेरकर उन्हें महिमा मण्डित करने वालों की कलई एक एक कर खुलने लगी है। उत्तर प्रदेश चुनावों के तत्काल बाद युवराज के अघोषित राजनैतिक गुरू राजा दिग्विजय सिंह को बारह तुगलक लेन (बतौर सांसद राहुल का सरकारी आवास) से बाहर का रास्ता दिखाने के बाद अब राहुल के आंख, नाक, कान बने कनिष्क सिंह पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
वर्ष 2004 और 2009 में उत्तर प्रदेश के अमेठी से लोकसभा चुनाव जीतने वाले नेहरू घांदी परिवार की पांचवीं पीढ़ी के चिराग राहुल को राजनैतिक सूझबूझ ना होने का सबसे अधिक फायदा राजपूत क्षत्रिय लाबी ने उठाया। राहुल की आंख पर पट्टी बांधकर एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय के अलावा राजस्थान मूल के कनिष्क सिंह ने जमकर नचाया। दिग्गी राजा को तो यूपी चुनावों के परिणाम के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, पर कनिष्क सिंह की तूती 12, तुगलक लेन में जमकर बजती रही।
राहुल से उमर में आठ साल छोटे कनिष्क के पिता एस.के.सिंह भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी थे। उन्होंने भारत के राजूदत के बतौर अफगानिस्तान और पाकिस्तान में काम किया। उनकी सेवाओं का सम्मान करते हुए उन्हें महामहिम राज्यपाल बना दिया गया। वे आंध्र प्रदेश और राजस्थान के राज्यपाल रहे।
उधर, कनिष्क सिंह स्वदेश वापस आने के बाद 2003 में दिल्ली में शीला दीक्षित के लिए चुनाव में काम करने के इच्छुक थे। अपने पिता के संपर्कों और उनकी नेहरू गांधी परिवार की नजदीकी का लाभ उठाकर कनिष्क ने राहुल के 2004 में सांसद बनते ही टीम राहुल का सदस्य बनना स्वीकार कर लिया। इसके बाद कनिष्क ने पीछे मुडकर नहीं देखा और वे राहुल के आंख, नाक, कान बनकर रह गए।
कनिष्क सिंह को राहुल गांधी का चश्मा भी कहा जाता है। कहते हैं राहुल गांधी उसी रंग की दुनिया देखते हैं जिस रंग का चश्मा कनिष्क सिंह द्वारा राहुल को लगवाया जाता है। 12, तुगलक लेन में कनिष्क सिंह की तूती जमकर बोला करती है। लोग कनिष्क की तुलना सोनिया और राजीव के दरबार के शुरूआती दिनों में उनके सहायक विसेंट जार्ज के रूप में करते हैं। कहा जाता है कि कनिष्क भी जार्ज जितने ही ताकतवर हैं।
उत्तर प्रदेश जिसमें सोनिया और राहुल घांदी का संसदीय क्षेत्र समाहित है के चुनावों में कांग्रेस के औंधे मुंह गिरने के बाद होने वाली समीक्षाओं में निशाने पर दोनों ही ठाकुर क्षत्रप राजा दिग्विजय सिंह और कनिष्क सिंह थे। लोगों ने टिकिट बंटवारे में अनियमितताओं और गलत सलाहों के लिए दोनों ही को जमकर दोषी ठहराया।
बिहार के कांग्रेस के नेताओं ने कनिष्क सिंह की जमकर शिकायतें की हैं। बताया जाता है कि बिहार में पीसीसी चीफ के चयन के मामले में कनिष्क सिंह को बतौर एक अडंगा पेश किया गया है। बिहार से आए एक नेता ने पहचान उजागर ना करने की शर्त पर सनसनीखेज खुलासे किए हैं।
उक्त नेता ने बताया कि जब उमेश राय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमण्डल युवराज राहुल घांदी से मिलने पहुंचा तो 12, तुगलक लेन की परंपराओं के अनुसार उसे कनिष्क सिंह की चौखट पर हाजिरी भरना पड़ा। इस प्रतिनिधिमण्डल के मुंह में अपनी जुबान डालते हुए कनिष्क ने उन्हें मशविरा दिया कि वे बिहार में राजपूत क्षत्रिय नेता अवधेश सिंह का नाम आगे करें। इस तरह जातिवाद को प्रश्रय देने के आरोप के लिए मशहूर कनिष्क ने एक बार फिर ठाकुर लाबी को सामने कर दिया।
उक्त नेता ने आगे कहा कि जब यह प्रतिनिधिमण्डल राहुल से मिला तो उसने कनिष्क की इन हरकतों से राहुल को रूबरू करवाते हुए कहा कि कनिष्क सिंह द्वारा कांग्रेस की लुटिया डुबोने के काम को बखूबी अंजाम दिया जा रहा है। इतना ही नहीं कनिष्क और राहुल से भेंट के बीच के समय का सदुपयोग कर कुछ नेताओं ने अवधेश सिंह की जन्म कुण्डली की पता साजी कर डाली।
उन्होंने कहा कि राहुल को जब यह बताया गया कि कनिष्क सिंह जिसके नाम की लाबिंग करवा रहे हैं वे आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं तो उनके हाव भाव बदल गए। राहुल ने तत्काल ही अपने उपर के जेब से एक कागज निकालकर उसमें कुछ लिखकर होंठ भींच लिए। राहुल की भाव भंगिमाएं और सख्त उस वक्त हो गईं जब उन्हें यह बताया गया कि अवधेश सिंह का नाम कनिष्क सिंह द्वारा आगे इसलिए बढ़ाया जा रहा है क्योंकि वे राजपूत क्षत्रिय वर्ग से हैं।
सियासी बियावान में इन दिनों राहुल गांधी के दोनों खास ओपनर बल्लेबाज (राजा दिग्विजय सिंह और कनिष्क सिंह) के खिलाफ ससबूत प्रमाण राहुल के सामने पेश किए जाने, राहुल घांदी द्वारा सोनिया के राजनैतिक सलाहकार और दिग्विजय सिंह के घुर विरोधी अहमद पटेल को खास तवज्जो देने के निहितार्थ खोजे जा रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राहुल घांदी के चश्मे (सलाहकार) बदलने वाले ही हैं।

क्या संसद के लिए समय निकाल पाएंगे सचिन


क्या संसद के लिए समय निकाल पाएंगे सचिन

संसद के हर सत्र में रहेगा क्रिकेट का मौसम शबाब पर

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। क्रिकेट के तथाकथित भगवान सचिन तेंदुलकर ने देश की सबसे बड़ी पंचायत (संसद) के पंच (सांसद) के बतौर शपथ ले ली है। कांग्रेस द्वारा नियम कायदों को कथित तौपर शिथिल कर सचिन को राज्य सभा में एंट्री देकर एक नजीर पेश की है। माना जा रहा है कि कांग्रेस की गिरती साख को बचाने के लिए सचिन का सहारा लिया जा रहा है। चार जून को सचिन द्वारा शपथ लेने के बाद अब सियासी फिजां में यह बात पूछी जा रही है कि क्या सचिन देश की सर्वोच्च पंचायत के लिए अपने व्यस्त क्षणों में से समय निकाल पाएंगे या फिर शोभा की सुपारी बनकर रह जाएंगे!
ज्ञातव्य है कि इससे पहले सियासी फिजां में यह बात तैर गई थी कि शर्मीले सचिन सबके सामने शपथ लेने में हिचक रहे हैं इसलिए वे सदन में सबके सामने शपथ लेने के बजाए उपराष्ट्रपति के कक्ष में शपथ लेने की मंशा रखते हैं। इन परिस्थितियों में उनकी आलोचना आरंभ हो गई थी कि सचिन को राज्य सभा सांसद बनाने का क्या ओचित्य जब वे खेल और खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व ही ना कर पाएं, और कांग्रेस का मुखौटा बनकर रह जाएं।
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस की गिरती साख और घपलों, घोटालों, भ्रष्टाचार, उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा तो दिल्ली में नगर निगम चुनावों में मुंह की खाने के बाद कांग्रेस ने लोगों का ध्यान इससे हटाने की गरज से जया बच्चन के साथ ही साथ रेखा को राज्य सभा से भेज दिया है ताकि कुछ दिन तक मीडिया की सुर्खियां रेखा बटोर सकें और लोगों का ध्यान कांग्रेस के काले कारनामों से हट जाए। इसी कड़ी में राहुल को स्थापित करने के लिए मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को राज्य सभा से भेजा गया है।
कहा जा रहा है कि जब संसद का सत्र चलेगा तब सचिन घरेलू और विदेश दौरे पर जाने वाले भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य के बतौर सदन के बाहर ही रहेंगे। गौरतलब है कि जब सदन का वर्षाकालीन सत्र चलेगा तब टीम इंडिया श्रीलंका के दौरे पर होगी। इस दर्मयान टीम इंडिया तीन टेस्ट सीरिज खेलेगी। इसके अलावा सदन के शीतकालीन सत्र में टीम इंडिया इंग्लैण्ड के खिलाफ चार टेस्ट सीरिज खेलेगी। अगले साल के बजट सत्र के दर्मयान टीम इंडिया आस्ट्रेलिया के खिलाफ 4 टेस्ट सीरिज खेलने जा रही है।
इन परिस्थितियों में सचिन के घोषित पहले प्यार क्रिकेट के सामने देश की सबसे बड़ी पंचायत का बौना होना स्वाभाविक ही है। सचिन अगर देश की पंचायत को समय नहीं देने की स्थिति में हैं तो फिर उनको राज्य सभा सांसद बनाने का क्या फायदा? संभवतः सचिन का चेहरा अगले आम चुनावों में कांग्रेस के बेनर पोस्टर्स में इस्तेमाल करने के लिए कांग्रेस द्वारा यह आत्मघाती कदम उठाया गया है।
कहा जा रहा है कि कांग्रेस ने बैठे बिठाए विपक्ष को एक मुद्दा दे दिया है, जब सदन में सचिन की उपस्थिति ना के बराबर होगी तब उनको लेकर जमकर हायतौबा मचा सकता है विपक्ष! इन परिस्थितियों में कांग्रेस और सचिन की खासी भद्द पिट सकती है। वहीं दूसरी ओर हर मसले पर कांग्रेस से सैट नजर आने वाली भाजपा और अन्य विपक्षी दल शायद ही हाथ आने वाले इस मौके को कैश करा पाएं।

वाहन चोरी का मामला संदिग्ध!


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  94

वाहन चोरी का मामला संदिग्ध!

नेतानुमा ठेकेदार की कार्यप्रणाली चर्चाओं में

(शिवेश नामदेव)

सिवनी (साई)। आदिवासी बाहुल्य सिवनी जिले के घंसौर विकासखण्ड में देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड में इन दिनों वाहन चोरी के मामले को चटखारे लेकर सुनाए जा रहे हैं। घंसौर के एक नेता नुमा ठेकेदार की कार्यप्रणाली और इस मामले में उनकी संलिप्तता की खबरों ने माहौल को गर्मा दिया है।
बताया जाता है कि घंसौर के करीब ग्राम बरेला में लगने वाले इस संयंत्र से दो जेसीवी कंपनी की बड़ी मशीनें, डंपर और अन्य वाहन रातों रात चोरी हो गए थे। संयंत्र प्रबंधन के सूत्रों ने बताया कि इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवा दी गई थी। पुलिस ने भी इसकी जांच में लीपापोती कर अपना प्रतिवेदन सौंप दिया था।
चर्चाओं पर अगर यकीन किया जाए तो इस काम में क्षेत्र के एक नेता नुमा ठेकेदार की संलिप्पता है। कहा जा रहा है कि उक्त काम के उपरांत पुलिस की जांच की औपचारिकताओं को पूरा करते ही बीमा कंपनी से इन वाहनों का मुआवजा भी प्राप्त कर लिया गया है। इस संबंध में संयंत्र प्रबंधन से चर्चा करने का प्रयास किया गया किन्तु संयंत्र प्रबंधन की ओर से कोई भी उपलब्ध नहीं हो सका।
मांग की जा रही है कि सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखण्ड घंसौर में देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा लगाए जा रहे 1200 अथवा 1260 मेगावाट के पावर प्लांट में चल रही अनियमितताओं और शासन को सीधे एवं परोक्ष तौर पर पहुंचाई जाने वाली क्षति की अविलंब जांच करवाई जाए।

(क्रमशः जारी)

यूपीए भ्रष्टाचार से निपटने प्रतिबद्ध: मनमोहन


यूपीए भ्रष्टाचार से निपटने प्रतिबद्ध: मनमोहन

(प्रियंका श्रीवास्तव)

नई दिल्ली (साई)। घपले घोटालों और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार अब बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है। सरकार ने अब भ्रष्टाचार और पारदर्शिता के मामले को उकेरना आरंभ किया है। प्रधानमंत्री डॉ० मनमोहन सिंह ने कहा है कि यूपीए सरकार भ्रष्टाचार की समस्या से निपटने और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कल नई दिल्ली में कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में डॉ० मनमोहन सिंह ने कहा कि विपक्ष के हताश तत्व दुष्प्रचार कर रहे हैं, जिससे प्रभावकारी ढंग से निपटा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार के टीम अन्ना के आरोपों को खारिज कर दिया है। प्रधानमंत्री ने बड़ी मात्रा में विदेशों में जमा कालेधन को एक ही झटके में स्वदेश लाने के सामाजिक संगठनों के दावों को भी खारिज कर दिया।
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्यकारी समिति की बैठक में प्रधानमंत्री, यूपीए सरकार तथा कांगेस पर विपक्ष और समाज के सदस्यों के आरोपों को आधारहीन और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। बाद में पार्टी नेता जर्नादन द्विवेदी ने पत्रकारों को बताया कि कार्यसमिति ने राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार तय करने का अधिकार पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप दिया है।