शनिवार, 25 अगस्त 2012

रविवार को बंद रहेंगे 6 मेट्रो स्टेशन


रविवार को बंद रहेंगे 6 मेट्रो स्टेशन

(प्रियंका)

नई दिल्ली (साई)। दिल्ली मेट्रो के छह स्टेशन कल सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक बंद रहेंगे। ये मेट्रो स्टेशन हैं-केन्द्रीय सचिवालय, उद्योग भवन, पटेल चौक, रेसकोर्स, जोर बाग़ और खान मार्केट। दिल्ली मेट्रो की विज्ञप्ति में कहा गया है कि ऐसा सुरक्षा कारणों से दिल्ली पुलिस के निर्देश पर किया गया है। हालांकि यात्रियों को लाईन दो से लाईन छह की गाड़ी बदलने के लिए केन्द्रीय सचिवालय पर सुविधा उपलब्ध रहेगी।
समाजसेवी अन्ना हजारे के सहयोगी अरविंद केजरीवाल के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आवास पर धरना देने के आह्वान को देखते हुए रविवार को छह मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे। इसमें प्रधानमंत्री आवास के समीप के स्टेशन भी शामिल हैं।
एक अधिकारी ने शुक्रवार को समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को यह जानकारी दी। इसमें जहांगीरपुरी-गुड़गांव मार्ग पर स्थित पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, उद्योग भवन, रेस कोर्स, जोर बाग एवं बदरपुर कॉरिडोर पर खान मार्केट हैं। ये स्टेशन सुबह 800 बजे से शाम 600 बजे तक बंद रहेंगे।

राजस्थान में बचाव राहत काम तेज


राजस्थान में बचाव राहत काम तेज

(शैलेन्द्र)

नई दिल्ली (साई)। राजस्थान के वर्षा प्रभावित इलाकों में राहत कार्य जारी हैं। राज्य सरकार ने जयपुर, अजमेर, दौसा, सीकर और झुंझनू जिलों में राहत कार्य के लिए दो करोड़ चौंसठ लाख रुपए मंजूर किए हैं। पिछले तीन दिनों में राज्य के बारह जिलों में वर्षा से जुड़ी दुर्घटनाओं में ३३ लोगों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कल रात उच्चस्तरीय बैठक में स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित लोगों को सभी संभव सहायता देने के निर्देश दिए।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को प्राप्त जानकारी के मुताबिक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने झुंझनू और सीकर में राहत कार्यों में स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें भेजनें के निर्देश दिए। सरकार ने अतिवृष्टि के कारण मारे गए लोगों के परिजनों को दो लाख रूपये की सहायता देने की घोषणा की है।
इधर जयपुर में भी पांच राहत शिविरों में रह रहे दो हजार लोगों को पूरी मदद उपलध कराई जा रही है। इस बीच, राज्य में पिछले २४ घंटो में भारी वर्षा का दौर थमने से लोगों ने राहत की सांस ली है। हाल की वर्षा से राज्य के ३३ में से २७ जिले सामान्य वर्षा की श्रेणी में आ गये हैं।

सीएजी को ही कटघरे में खड़ा किया सरकार ने


सीएजी को ही कटघरे में खड़ा किया सरकार ने

(महेंद्र देशमुख)

नई दिल्ली (साई)। सीएजी एक बार फिर सरकार के निशाने पर आ गया है। सरकार ने कहा है कि नियंत्रक और महालेखा परीक्षक ने कोयला ब्लॉकों के आवंटन में नुकसान का जो अनुमान लगाया है, वह गलत है, क्योंकि इन खानों से कोयले का खनन हुआ ही नहीं है। मीडिया संबंधित मंत्री समूह के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने कहा कि नुकसान की बात तभी उठती है, जब कोयला निकाला गया हो और उसे किसी मूल्य पर बेचा गया हो।
संसद की कार्यवाही चलने देने के लिए विपक्ष से अपील करते हुए श्री चिदम्बरम ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी संसद को चलने नहीं दे रही है और ना ही किसी मुद्दे पर चर्चा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कोयला ब्लॉक आवंटन पर सी ए जी रिपोर्ट के संदर्भ में संसद में बयान देने को तैयार हैं।
चिदम्बर ने कहा कि वे सरकार की ओर से एक बार फिर विपक्ष से अपील करते हैं कि सोमवार को जब संसद की फिर से बैठक होगी तो हमें संसद को चलने देना चाहिए। जो पहला विषय वो उठाना चाहते हैं कोयला आवंटन पर सी ए जी रिपोर्ट के संदर्भ में हम तैयार हैं। और वो उस पर तब तक बहस कर सकते हैं जब तक वो चाहें।
कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ नेता की छवि को धूमिल करने के लिए एक षड़यंत्र के तहत देश की लोकतांत्रिक प्रणाली को बाधित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस तरीके से हॉउस को न चलने देना, देश के डेमोक्रेटिक प्रोसेस को रोक लेना, मैं तो मानता हूं कि यह एक साजिश है गवर्नमेंट को बदनाम करने की और देश के कुछ चंद निष्ठावान और ईमानदार नेताओं की छबि को टार्निश करने की।
ज्ञातव्य है कि कोयला खण्डों के आवंटन के मुद्दे पर कल चौथे दिन भी संसद में गतिरोध जारी रहा। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों ने शोर-शराबा किया और कार्यवाही नहीं चलने दी। इस कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सोमवार तक स्थगित कर दी गई।

संचार मंत्री नहीं कर पाए ट्वीट


संचार मंत्री नहीं कर पाए ट्वीट

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। कांग्रेस के सांसदों पर अब सोशल नेटवर्किंग वेब साईट ट्वीटर का जादू सर चढ़कर बोल रहा है। एक समय था जब केंद्रीय मंत्री रहते हुए कांग्रेस के सांसद शशि थरूर इसी ट्वीटर के चलते चर्चाओं में आए थे, अब संचार मंत्री मिलिंद देवड़ा ट्वीटर के कारण चर्चाओं के केंद्र में आ गए हैं।
दरअसल, भड़काऊ सामग्री के चलते सरकार ने कई ट्विटर अकाउंट बंद करवाए लेकिन इस बीच संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री मिलिंद देवड़ा का ट्विटर अकाउंट भी बंद हो गया था। हालांकि मिलिंद देवड़ा ने अपने चहेतों को एसएमएस के जरिए बताया कि उनका अकाउंट ब्लॉक नहीं किया गया है बल्कि वेरिफिकेशन तक सस्पेंड किया गया है।
बताते हैं कि पांच एसएमएस की सीमा के चलते मिलिंद भी झंुझला गए जब उनके एसएमएस नहीं जा पा रहे थे। बाद में मिलिंद देवड़ा के ऑफिस के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि ट्विटर ने एक ईमेल के जरिए अकाउंट बंद करने पर खेद जताया है और अकाउंट को फिर से बहाल कर दिया है।
23 अगस्त को रात 954 बजे मिलिंद देवड़ा ने ट्विटर पर सरकार द्वारा कुछ ट्विटर अकाउंट बंद कराए जाने की सफाई दी थी। मिलिंद ने ट्वीट में कहा था, वे यह साफ करना चाहते हैं कि सरकार का मकसद सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म की आजादी पर पाबंदी लगाना नहीं है। इस ट्वीट के बाद मिलिंद का अकाउंट सस्पेंड हो गया था।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी से लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने सुरक्षा और घृणा फैलाने से रोकने के नाम पर केंद्र सरकार द्वारा ट्विटर के कई अकाउंट को बंद करने के फैसले की कड़ी आलोचना की। नरेंद्र मोदी ने अपने अकाउंट पर पूरे काले रंग की तस्वीर लगा दी।
उधर, सरकार ने कल कहा कि केवल उन सोशल मीडिया खातों को ब्लाक किया जायेगा, जिन पर आपत्तिजनक और भड़काउ सामग्री है। गृह मंत्री सुशील कुमार शिन्दे ने आश्वासन दिया कि अन्य लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार अन्य सोशल मीडिया खातों पर बिना कारण कोई पाबंदी नहीं लगायेगी, चाहे वे एस एम एस हों या फेसबुक या ट्विटर।
बिलकुल सेंसरशिप नहीं कर रही है, जिस तरह से बाहर की पिक्चर बताये थे, बर्मा की पिक्चर बताये थे और उससे यहां इस देश में कुछ दंगा फसाद हो रहा था इसके लिए हमने वो निर्णय ले लिया। इस तरह की हम कोई चीज नहीं कर रहे है, आप आश्वस्त रहीये विशेषकर प्रेस और हमारे जनतंत्र में इस तरह की कोई नहीं बातें हो रही।
संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने स्पष्ट किया है कि सरकार सोशल मीडिया के व्यक्तिगत एकाउंट अथवा वेबसाइटों को निशाना नहीं बना रही है और ना ही सही उपभोक्ताओं पर कोई रोक लगाना चाहती है। श्री सिब्बल ने बताया कि फेसबुक और गूगल सरकार के साथ सहयोग कर रहे हैं।

पैसा हुआ बहुत अब पावर चाहते हैं मुकेश अंबानी!


पैसा हुआ बहुत अब पावर चाहते हैं मुकेश अंबानी!

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। मीडिया के साथ ही साथ दुनिया के चौधरी अमरीका की ओर मशहूर उद्योगपति मुकेश अंबानी की दिलचस्पी को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि उनके पास लक्ष्मी का भण्डार तो पर्याप्त मात्रा में हो चुका है अब वे पावर की तलाश में आगे बढ़ रहे हैं। मुल्क के सबसे दौलतमंद मुकेश अब मीडिया और दुनिया के चौधरी अमरीका की ओर देख रहे हैं।
मुकेश अंबानी के करीबी सूत्रों का दावा है कि धनकुबेर मुकेश अंबानी ने अब मीडिया में निवेश करने के अपने सपनों को पंख लगाना आरंभ कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि मुकेश का मानना है कि उनके मीडिया संस्थान को एक ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाएगा। इस ट्रस्ट में देश के नामचीन पत्रकारों को भी जगह मिलना तय है।
सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि दरअसल, मुकेश अंबानी मीडिया की ताकत से बेहतर तरीके से वाकिफ होने के साथ ही साथ उसका बेहतरीन उपयोग करना भी जानते हैं। मुकेश अपने मीडिया की लांचिग और उसकी पालिसीज को अंतिम रूप दे रहे हैं। मीडिया आपरेशन और प्रिंट, वेब एवं इलेक्ट्रानिक क्षेत्र में किस तरह से उतरा जाए इस बारे में भी विमर्श अंतिम दौर में ही है।
सूत्रों की मानें तो मुकेश चाहते हैं कि उनका मीडिया दो हिस्सों में बंटा रहे। पहला अंग समाचार प्रभाग के बतौर तो दूसरा अंग मनोरंजन के लिए काम करे। इसके संचालन के लिए मुकेश अंबानी द्वारा अमरीका में रहकर पत्रकारिता करने वाले भारतीय मूल के लोगों का बायोडाटा खंगाला जा रहा है, ताकि अमरीका में उनके संपर्कों का लाभ उठाया जा सके।
सूत्रों ने संकेत दिए कि वैश्विक मंदी के दौर में जब भारत में औद्योगिक विकास कमजोर पड़ता जा रहा है, तब घपले, घोटाले, भ्रष्टाचार में उलझे भारत में निवेश करने का मुकेश का मन नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि मुकेश इस समय देश से बाहर विशेषकर अमरीका को टारगेट बनाकर निवेश करने की योजना पर काम कर रहे हैं। निवेश के हिसाब से मुकेश को अमरीका ही सबसे ज्यादा मुफीद लग रहा है।
मुकेश अंबानी के विश्वस्त सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑॅफ इंडिया को बताया कि मुकेश के दोनों बेटे अमरीका में ही शिक्षा दीक्षा पा रहे हैं। उनकी देखरेख के चलते मुकेश और उनकी पत्नि नीता का अधिकांश समय अमरीका में ही गुजर रहा है। विशुद्ध व्यापारिक बुद्धि के धनी मुकेश ने अपने पुत्रों की परवरिश के दौरान अमरीका में कटने वाले अपने समय का सदुपयोग भी बेहतर ढंग से किया है।
स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय से केमीकल इंजीनियार मुकेश का याराना विश्व प्रसिद्ध बिल गेट्स के साथ किसी से इसलिए नहीं छिपा है क्योंकि दोनों ही एक साथ कालेज में पढ़ा करते थे। मुकेश और बिल गेट्स भी मिलकर किसी प्रोजेक्ट पर जूझ रहे बताए जा रहे हैं। यह परियोजना परवान कब चढ़ेगी यह तो दोनों ही जानें पर अमरीका प्रवास के दौरान मुकेश हर बार गेट्स से मिल ही लेते हैं।
मुकेश अंबानी ने अमरीका की चुनिंदा कंपनियों का अधिग्रहण किया है। इनमें से ज्यादातर तेल कंपनी ही हैं। भारत के अलावा अमरीका में निवेश पर बारीक नजर रखने वाले मुकेश अंबानी ने बिल गेट्स की बैसाखी पर चलकर दुनिया भर की शक्ति के केंद्र व्हाईट हाउस में भी खासी आमदरफत बना ली है। ओबामा के अनेक डिनर में अब मुकेश की भागीदारी आम हो चुकी है।