सोमवार, 5 नवंबर 2012

मनरेगा में भुगतान की ईप्रणाली आरंभ


मनरेगा में भुगतान की ईप्रणाली आरंभ

(रहीम खान)

बालाघाट (साई)। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत मजदूरी के शीघ्र भुगतान के लिए ई-भुगतान प्रणाली लागू की गई है। इस नई और अभिनव व्यवस्था के साथ ही बालाघाट इस प्रणाली को लागू करने वाला देश का पहला जिला बन गया है।
सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मनरेगा के तहत हुए कार्यों के लिए तत्काल नुकसान के लिए बनाए गए इस आधुनिक तंत्र को डी थ्री भुगतान व्यवस्था नाम दिया गया है। इस व्यवस्था के जरिए जॉब कार्डधारियों को केंवल दस घंटे के अंदर भुगतान किया जा सकता है।
अब तक बालाघाट जिले की २०८ ग्राम पंचायतों को इस व्यवस्था से जोड़ा जा चुका है। वहीं जिले की सभी ग्राम पंचायतों को ई पेमेंट व्यवस्था से जोड़ने के लिए कार्य जारी है। ई पेमेंट के जरिए मजदूरी के भुगतान के लिए मस्टर रोल साफ्टवेयर में एंट्री की जाती है इसके लिए ८० ग्राम पंचायतों को लेपटॉप दिया गए हैं। इंटरनेट सुविधा के लिए ग्राम पंचायतें डेटा कार्ड का इस्तेमाल कर रही हैं।

मनरेगा में भुगतान की ईप्रणाली आरंभ


मनरेगा में भुगतान की ईप्रणाली आरंभ

(रहीम खान)

बालाघाट (साई)। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत मजदूरी के शीघ्र भुगतान के लिए ई-भुगतान प्रणाली लागू की गई है। इस नई और अभिनव व्यवस्था के साथ ही बालाघाट इस प्रणाली को लागू करने वाला देश का पहला जिला बन गया है।
सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मनरेगा के तहत हुए कार्यों के लिए तत्काल नुकसान के लिए बनाए गए इस आधुनिक तंत्र को डी थ्री भुगतान व्यवस्था नाम दिया गया है। इस व्यवस्था के जरिए जॉब कार्डधारियों को केंवल दस घंटे के अंदर भुगतान किया जा सकता है।
अब तक बालाघाट जिले की २०८ ग्राम पंचायतों को इस व्यवस्था से जोड़ा जा चुका है। वहीं जिले की सभी ग्राम पंचायतों को ई पेमेंट व्यवस्था से जोड़ने के लिए कार्य जारी है। ई पेमेंट के जरिए मजदूरी के भुगतान के लिए मस्टर रोल साफ्टवेयर में एंट्री की जाती है इसके लिए ८० ग्राम पंचायतों को लेपटॉप दिया गए हैं। इंटरनेट सुविधा के लिए ग्राम पंचायतें डेटा कार्ड का इस्तेमाल कर रही हैं।

विवेकानंद और दाउद एक समान: गड़करी


विवेकानंद और दाउद एक समान: गड़करी

(राजेश शर्मा)

भोपाल (साई)। घपले, घोटाले में फंसे भारतीय जनता पार्टी के निजाम नितिन गड़करी का शनि वाकई काफी भारी चल रहा है। गड़करी पर एक के बाद एक आरोप लग रहे हैं, वहीं नितिन गड़करी की जुबान भी जमकर फिसली और उन्होंने प्रख्यात आध्यात्मिक संत स्वामी विवकानंद की तुलना कुख्यात अंतर्राष्ट्रीय अंडर वर्ल्ड डान दाउद इब्राहिम से कर दी।
देश के हृदय प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक स्थानीय पत्रिका की ओर से आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए गडकरी ने साइकॉलजी के आधार पर बुद्धि नापने का पैमाना इंटेलिजेंट कोसंट(आईक्यू) का हवाला देते हुए कहा, यदि दाऊद और विवेकानंद के आईक्यू को देखा जाए, तो एक समान पाई जाती। लेकिन एक ने इसका उपयोग गुनाह के लिए किया और दूसरे ने समाज के लिए।श्
उन्होंने कहा कि आईक्यू के बल पर नारी शक्ति ने अवसर मिलने पर खुद को श्रेष्ठ साबित किया है, लेकिन लंबे समय से समाज में धर्म, जाति, भाषा, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव होता रहा है,यह समाप्त करना होगा। विवेकानंद का उदाहरण देते हुए गडकरी ने कहा कि 21वीं सदी भारत की सदी होगी। उन्होंने कहा कि अठारहवीं सदी मुगलों, उन्नीसवीं सदी ब्रिटेन साम्राज्यवादी और बीसवीं सदी अमेरिका के उत्थान की थी, उसी प्रकार इस बात में कोई संदेह नहीं है कि इक्कीसवीं सदी भारत की होगी और इसमें महिलाओं की क्षमताओं को उल्लेखनीय योगदान होगा।
उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे इस मानसिकता से बाहर निकलें कि लिंग के आधार पर वे कमजोर हैं। पुरुष शक्ति का दायरा जहां खत्म होता है, वहीं उसे प्रकृति यानी नारी शक्ति का ही सहारा लेना पड़ता है। इसके लिए उन्होंने काली, दुर्गा और कई शक्तियों का उदाहरण दिया, जिन्होंने देवताओं के पराजित होने पर शुम्भ-निशुम्भ, महिषासुर आदि बुरी ताकतों का अंत किया।

भारत गणराज्य में तालिबानी फरमान!


भारत गणराज्य में तालिबानी फरमान!

(दीपांकर श्रीवास्तव)

लखनऊ (साई)। उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक गर्ल्स कॉलेज ने तालिबानी फरमान जारी किया है। वहां पढ़ने वाली छात्राओं के लिए बुर्का और स्कार्फ अनिवार्य कर दिया गया है। अब कॉलेज में मुस्लिम लड़कियां केवल बुर्का पहनकर ही आ सकती हैं। यहां तक कि कॉलेज में अब गर्ल्स सेलफोन लेकर भी नहीं आ सकती हैं। मुस्लिम जुबली गर्ल्स इंटर कॉलेज के मैनेजमेंट ने यह फरमान सुनाया है।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रबंधन ने आदेश दिया है कि इस नियम का सख्ती से पालन करना होगा। नए फरमान के खिलाफ जाने पर कॉलेज ने छात्राओं को निकालने की धमकी दी है। कॉलेज प्रशासन ने कहा कि यह फैसला इस्लामिक संस्कृति को प्रमोट करने के लिए किया गया है। स्कूल सोसायटी के एक मेंबर ने कहा कि इसमें गलत क्या है? यहां की ज्यादातर छात्राएं अपने मन से बुर्का पहन कर आती हैं।
इसके साथ यदि अलग से स्कार्फ ले लेंगी तो क्या फर्क पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि इस्लामिक देशों की लड़कियां हमेशा स्कार्फ रखती हैं। इसमें इस्लामिक संस्कृति की झलक मिलती है। उन्होंने मोबाइल के प्रतिबंध पर कहा कि इमर्जेंसी की हालात में गर्ल्स, कॉलेज के प्रिंसिपल से संपर्क कर सकती हैं। कॉलेज की ज्यादातर लड़कियों ने इस तालिबानी फरमान का विरोध किया है। लड़कियों ने सेल फोन बैन करने पर कहा कि यह हमारी सुरक्षा के लिए जरूरी है। हम इससे परिवार के संपर्क में हमेशा रहते हैं। उन्होंने स्कार्फ को भी अनिवार्य करने पर आपत्ति जतायी है।

बाल ठाकरे ने भारत पाक क्रिकेट पर उठाई उंगली!


बाल ठाकरे ने भारत पाक क्रिकेट पर उठाई उंगली!

(निधि गुप्ता)

मुंबई (साई)। शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने धमकी दी है कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच अगले महीने प्रस्तावित क्रिकेट सीरीज नहीं होने देंगे। पार्टी के मुखपत्र श्सामनाश् के संपादकीय में बाल ठाकरे ने केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के ‘जो कुछ हुआ उसे भूल जाएं और पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलें‘ बयान की भी जमकर आलोचना की है।
ठाकरे में लिखा है, ‘शिंदे ने अगर हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच का श्निर्लज्जश् बयान वापस नहीं लिया तो वह लोगों से पाकिस्तान को जहां-जहां खेलना है, वहां मैच न होने देने और इन मैचों को उखाड़ फेंकने की अपील करेंगे।‘
ठाकरे ने शिंदे पर सवाल दागते हुए लिखा है कि वह आखिर पाकिस्तान को भारत में क्रिकेट खिलाने की नादानी क्यों कर रहे हैं? शिंदे कहते हैं कि सबकुछ भूल जाओ, लेकिन पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई में जो कहर बरपाया उसे भूला कैसे जाए। 26/11 के घाव अभी भी ताजा हैं।
गौरतलब है कि पिछले दिनों गृह मंत्रालय ने भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट सीरीज को हरी झंडी दी थी। दोनों देशों के बीच 5 साल बाद होने वाली यह सीरीज दिसंबर के आखिर में प्रस्तावित है। हालांकि भारत-पाक सीरीज का एक भी मैच मुंबई में नहीं रखा गया है, लेकिन ठाकरे के इस बयान से सीरीज पर संकट जरूर छा सकता है। 

सीआईएसएफ के दो जवानों की हत्या!


सीआईएसएफ के दो जवानों की हत्या!

(अभय नायक)

रायपुर (साई)। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के दो जवानों की हत्या कर दी। नक्सलियों ने जिला स्थित नैशनल मिनरल डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन (एनडीएमसी) खदान पर हमला किया और गोलीबारी में जवानों की मौत हो गई। सीआईएसएफ के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, वारदात सुबह आठ बजे के आसपास हुई। जवानों की हत्या के अलावा नक्सली उनके हथियार भी लूटकर ले गए। इसमें एक एके-47 और एक इंसास राइफल है। हादसे के बाद सीआरपीएफ और सीआईएसएफ की जॉइंट टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ नक्सलियों की तलाशी का अभियान शुरू कर दिया है। 

पेंच का काम आरंभ: पाटकर नजरबंद


पेंच का काम आरंभ: पाटकर नजरबंद

(प्रदीप माथुर)

छिंदवाड़ा (साई)। लगभग ढाई दशकों से राजनीतिक बियावान में हिचकोले खाने के बाद अंततः छिंदवाड़ा जिले की महात्वाकांक्षी पेंच व्यपवर्तन परियोजना का काम आरंभ हो ही गया। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में डूब प्रभावित ग्रामीणों के विरोध के बीच रविवार को पुलिस की मौजूदगी में बांध का निर्माण शुरू हो गया। इस परियोजना का विरोध करने पहुंचीं सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को नजरबंद कर लिया गया है।
चौरई विकास खंड के माचागोरा में प्रस्तावित पेंच परियोजना का काम लंबे अरसे से लंबित है। प्रशासन ने शनिवार को बांध के निर्माण का कार्य शुरू करना चाहा, मगर प्रभावित ग्रामीणों ने विरोध किया। सैकड़ों प्रभावित लोग जब निर्माण स्थल पर पहुंचे तो प्रशासन को बड़ी संख्या में पुलिस बल को बुलाना पड़ा। अंततरू शनिवार को काम शुरू नहीं हो पाया।
प्रस्तावित बांध का विरोध करने रविवार को सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर जब छिंदवाड़ा पहुंचीं तो प्रशासन ने उन्हें बांध स्थल की ओर जाने से रोका और उन्हें नजरबंद कर लिया। इसके चलते मेधा पाटकर पूरे दिन छापाखाना इलाके से आगे नहीं बढ़ पाईं। उन्होंने प्रशासन व सरकार पर नियम-कायदों को ताक पर रखकर बांध का निर्माण कराने का आरोप लगाया। इससे पहले शनिवार को पुलिस ने आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं अनुराधा भार्गव को हिरासत में ले लिया था।
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को प्राप्त जानकारी के अनुसार, बांध निर्माण स्थल पर 1400 से ज्यादा पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए हैं। निर्माण स्थल पर प्रशासनिक अमले, पुलिस बल और कामगारों के अलावा किसी को नहीं जाने दिया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि इस बांध के बनने से चौरई थाना क्षेत्र के लगभग 31 गांव प्रभावित हो रहे हैं। प्रभावित ग्रामीण सरकार द्वारा मुआवजा नहीं दिए जाने और पुनर्वास की व्यवस्था नहीं किए जाने से भी नाराज हैं। पुलिस नियंत्रण कक्ष के मुताबिक, रविवार को बांध का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है।

प्लास्टिक के तिरंगों को रेड सिग्नल


प्लास्टिक के तिरंगों को रेड सिग्नल

(महेंद्र देशमुख)

नई दिल्ली (साई)। पर्यावरण संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार छोटे प्लास्टिक के राष्ट्रीय ध्वजों के निर्माण पर प्रतिबंध लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इन झंडों का स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस के अवसर पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही यह सुनिश्चित कराया जाएगा कि केवल कागज निर्मित झंडों का ही इस्तेमाल हो।
सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों और केंद्र शासित राज्यों को भेजी गई एडवाइजरी में गृहमंत्रालय ने प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों का उल्लेख करते हुए सभी की राय मांगी गई है। गृहमंत्रालय ने कहा है कि ऐसे छोटे झंडे को कार्यक्रमों के बाद न तो जमीन पर फेंका जाना चाहिए और न ही फाड़ा जाना चाहिए।
प्लास्टिक के झंडे जल्दी नष्ट नहीं होते है, जिससे राष्ट्र ध्वज का अपमान होता है। हालांकि मंत्रालय ने इस बारे में कोई डेडलाइन निर्धारित नहीं की है। मंत्रालय ने संबंधित पक्षों से इस मसले पर उनके सुझाव मांगे हैं। यदि केंद्र के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया तो पर्यावरण को बढ़ावा देने की दिशा में यह बड़ी कोशिश होगी। गणतंत्र और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय महत्व के पर्वों के बाद बड़ी संख्या में प्लास्टिक के झंडे जमीन पर फेंक दिए जाते हैं। जल्द नष्ट नहीं होने की वजह से राष्ट्र ध्वज का अपमान होता रहता है।

रंगराजन रिपोर्ट किसान हित में नहीं: सिंह


रंगराजन रिपोर्ट किसान हित में नहीं: सिंह

(सचिन धीमान)

मुजफ्फरनगर (साई)। रंगराजन रिपोर्ट चीनी मिल मालिकों को लाभ पहुंचाने के लिए है। 20 साल से लगातार चीनी मिले कोर्ट के आदेश के बावजूद बड़ी मुश्किलों से गन्ना किसानों का बकाया देती है। ऐसे में निरंकुश होकर तो वो किसानों का खून चूस लेंगी और 50 साल पीछे धकेल देगी। उक्त बात राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व विधायक वी.एम. सिंह नेे जाट कालोनी स्थित विकास बालियान के आवास पर कहीं।
वीएम सिंह मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के मंडल संयोजक विकास बालियान की कुशल क्षेम पूछने के लिए आये थे। वहीं उन्होंने रंगराजन कमेटी की रिपोर्ट को किसान विरोधी बताते हुए, किसानों से उसके विरूद्ध लामबंद हो जाने का आह्नान भी किया।
वी.एम. सिंह ने कहा कि बड़े से बड़ा वकील करने के बावजूद जब चीनी मिले अपने पक्ष में कोई फैसला हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट से नहीं करा पाई और यह समझ गई के वी।एम। सिंह जिन्दा रहे या मारा जाए अब फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि अदालत के फैसले नजीर बन चुके हैं और अब किसानों का शोषण नहीं किया जा सकता। तब चीनी मिलों ने सरकार से मिलकर ये हल ढूंढा है कि मौजूदा गन्ना प्रणाली को समाप्त करा दिया जाए, ये प्रणाली समाप्त हो जाएगी तो सारे कानूनी फैसले भी अपना अस्तित्व खो देंगे। इसी सोच के चलते जैसे ही 17 जनवरी को चीनी मिले इस वर्ष अदालत में अपनी आखिरी लड़ाई भी वी।एम। सिंह के सामने हारी और उन्हें केन्द्र द्वारा तय 145 रूपये के स्थान पर राज्य सरकार द्वारा तय किया गया 240 रूपये गन्ना मुल्य देना पड़ा। तब एक साजिश रची गई और 20 जनवरी 2012 को देश में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी आर्थिक सलाहकार समिति के सदस्य रंगराजन समेत 7 व्यक्तियों की एक समिति का गठन कर दिया। इसमें भी उल्लेखनीय है 7 में से 6 तो कृषि के बारे में कुछ जानते ही नहीं।
इस कमेटी ने 5 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंप दी, जिसे देश के केन्द्रीय खाद्य मंत्री थोमस ने स्वीकार किये जाने की बात भी कर दी। इस रिपोर्ट को वी0एम0 सिंह ने सिरे से खारिज किया। पूर्व जनरल वी।के। सिंह के साथ दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस कर इसे लागू ना करने की चेतावनी भी केन्द्र सरकार को दी और कहा कि ऐसा होता है तो 4 दिसम्बर को दिल्ली पारलियामेंट का घेराव किया जाएगा।
वी.एम. सिंह ने कहा कि दक्षिण के राज्यों में गन्ने की पैदावार प्रति एकड़ उत्तर के राज्यों के मुकाबले 30 प्रतिशत ज्यादा है, वहीं रिकवरी 14 प्रतिशत तक होती है, जबकि उत्तर के राज्यों में गन्ने से चीनी की रिकवरी 9 प्रतिशत तक होती है। अगर रंगराजन रिपोर्ट लागू हो जाए तो राज्य सरकार को गन्ने का मूल्य तय करने का अधिकार नहीं रहेगा। केन्द्र का रेट तय होगा वहीं किसानों को मिलेगा, अगर इस बार केन्द्र एफ।आर।पी। 170 तय करती है, तो दक्षिण के राज्यों में जहां रंगराजन रिपोर्ट के बाद गन्ना मूल्य 250 से ज्यादा रहेगा, वहीं यू।पी। के किसानों को केवल 180 रूपये तक मिलेगा। यह सरासर अन्याय है।

कैसे हो युवराज के विरोध का शमन?


ये है दिल्ली मेरी जान

(लिमटी खरे)

कैसे हो युवराज के विरोध का शमन?
कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी का जादू अब कांग्रेस के आम कार्यकर्ता के मानस पटल से उतरता जा रहा है। एक के बाद एक घपले घोटाले और भ्रष्टाचार के महाकांड के बाद भी राहुल गांधी ने अपना मुंह नहीं खोला तो जमीनी कार्यकर्ताओं का राहुल गांधी से मोह भंग होने लगा है। बड़े क्षत्रप जब अपने अपने क्षेत्रों में जाते हैं तब उन्हें कार्यकर्ताओं के तीखे तीरों का सामना करना पड़ता है जिसमें देश को बेचने तक के आरोप लगाए जाते हैं। सोनिया के राजनैतिक पंडितों ने यह स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि इन परिस्थितियों में राहुल गांधी को कोई भी भूमिका नहीं दी जाए वरना यह सीधा संदेश चला जाएगा कि राहुल गांधी नेतृत्व करने में सक्षम नहीं हैं। टीम मनमोहन में भी राहुल को इसी रणनीति के तहत शामिल नहीं किया गया है। आने वाले दिनों में राहुल गाध्ंाी को बड़ी भूमिका देकर सरकार की छवि ईमानदार दिखाने का प्रयास जरूर किया जाएगा, ताकि राहुल का कांग्रेस के अंदर हो रहा विरोध दबाया जा सके।

अता ना पता कहां की लता!
त्रणमूल कांग्रेस ने केंद्र से अपने संबंध क्या तोड़े उसका शनि भारी हो गया है। अब कांग्रेस भी ममता बनर्जी को भाव नहीं दे रही है। ममता के पास लोकसभा के 19 और राज्य सभा के 7 सांसद हैं। देश को दो दो रेल मंत्री देने वाली त्रणमूल कांग्रेस की इससे बड़ी विडम्बना क्या होगी कि दिल्ली में उसका कोई अता पता ठिकाना ही नहीं है। कल तक त्रणमूल कांग्रेस का कार्यालय ममता के दिल्ली स्थित निवास से चलता था पर अब वहां से त्रणमूल का बोरिया बिस्तर भी उठ चुका है। हद तो यह है कि त्रणमूल के पास संसद भवन में भी बैठने की जगह नहीं बची है। जब तक रेल मंत्रालय त्रणमूल के पास रहा उसके सदस्यों ने रेल मंत्रालय को ही त्रणमूल के कार्यालय के बतौर इस्तेमाल किया है। अब त्रणमूल के पास दिल्ली के साथ ही साथ संसद में भी बैठने तक की जगह नहीं बची है।

पायल उमर में बढ़ रही दूरियां!
केंद्रीय मंत्री फारूख अब्दुल्ला के सुपुत्र और जम्मू काश्मीर के निजाम उमर अब्दुल्ला का पायल के साथ तलाक हो चुका है। दोनों अलग अलग ही बसर कर रहे हैं। उमर की अम्मी चाहतीं थीं कि पायल और उमर दोनों एक बार फिर एक हो जाएं। उमर के करीबियों का कहना है उमर और पायल के एक होने में काफी अड़चनें हैं। दोनों के बीच वैचारिक मतभेद इस कदर हैं कि इनका एक होना संभव ही नहीं लगता है। राहुल के करीबी सूत्रों का कहना है कि इसे महज संयोग ही कहा जा सकता है कि उमर अब्दुल्ला और पायल को अक्सर एक साथ विमान से विदेश जाते देखा गया है। आखिर क्या यह महज संयोग है कि दोनों ही तलाकशुदा लोगों की एक ही टाईमिंग सेट हो। बताते हैं कि एक मर्तबा तो जिस हवाई जहाज से पायल और उमर अब्दुल्ला सिंगापुर की ओर उड़ान भर रहे थे उसी हवाई जहाज में कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी भी सवार थे।

बिखर रहा है नेताजी का कुनबा
उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के परिवार में सब कुछ ठीक ठाक नहीं है। मुलायम सिंह यादव के अनुज शिवपाल को हाशिए पर लाने की कवायद तेज हो गई है। शिवपाल यादव अनेक स्थानों पर सरकारी कार्यक्रमों से गायब रहे हैं, जिससे लोग आश्चर्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों का कहन है कि रह विभाग को यह निर्देश दिया गया है कि शिवपाल के विभाग लोक कर्म और सिंचाई को छोड़कर अन्य विभागों में उनकी दखल को ना सुना जाए। अनेक मामलों में उनकी सिफारिशों पर अमल ना होने से शिवपाल भी अपने आप को असहज ही महसूस कर रहे हैं। हाल ही में अखिलेश यादव द्वारा शिवपाल के घुर विरोधी अमर सिंह पर लगे आरोपों और मुकदमों से उन्हें बरी कर दिया है, जिससे शिवपाल अब जख्मी नाग के मानिंद फन पटक रहे बताए जाते हैं। मुलायम सिंह यादव यह सब देखने के बाद भी खामोशी के साथ बनते बिगड़ते समीकरणों पर नजर रखे हुए हैं।

सुर भी नहीं मिल पा रहे संदीप के!
दिल्ली की निजाम श्रीमति शीला दीक्षित के सांसद सुपुत्र संदीप दीक्षित को कांग्रेस ने अपनी मीडिया की टीम में शामिल किया था पर वे मीडिया टीम में आने के बाद भी पहले ही की तरह मीडिया से बराबर दूरी बनाकर रखे रहे। कांग्रेस के नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और दमाद राबर्ट वढेरा पर हुए भ्रष्टाचार के हमलों के बाद भी संदीप दीक्षित की तंद्रा नहीं टूटी। पता नहीं संदीप दीक्षित किस दुनिया में खोए हुए हैं। वैसे संदीप दीक्षित को मीडिया बिरादरी में मीडिया फ्रेंडली कतई नहीं माना जाता है। पूर्व में जब संदीप दीक्षित की भोपाल यात्रा के दौरान उनके पास से दस लाख रूपए गुमे थे और बाद में मिल गए थे, तब भी संदीप ने मीडिया को संतुष्ट नहीं किया था। कांग्रेस के अंदरखाने में चल रही चर्चाओं के अनुसार अन्ना आंदोलन में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले संदीप दीक्षित प्रवक्ताओं की फौज में शामिल अवश्य हो गए हैं पर गांधी परिवार पर हमले के दौरान वे मीडिया से गायब क्यों रहे?

टापू बन जाएगी मोगली की कर्मभूमि!
प्रसिद्ध ब्रितानी घुमंतू और पत्रकार रूडयार्ड किपलिंग की ‘जंगल बुक‘ के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हीरो ‘मोगली‘ की कर्मभूमि एवं सनातन पंथी हिन्दु धर्म के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी सरस्वती की जन्मभूमि मध्य प्रदेश के सिवनी जिले को एक बार फिर छलने की तैयारी पूरी हो चुकी है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि जनसेवकों, नौकरशाहों की विलासिता से देश का खजाना खाली हो रहा है। मजबूरी में वित्त मंत्रालय को विकास की योजनाओं को रोकने की कवायद करनी पड़ रही है। सूत्रों ने कहा कि भारतीय रेल की उन परियोजनाओं को जिनकी घोषणा तो हो गई है पर उन पर काम आरंभ नहीं हुआ है, की समीक्षा कर उन नस्तियों को बंद करने का मशविरा वित्त मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम ने रेल मंत्री को दिया है। ओन गोईंग परियोजनाएं जिन पर काम बंद है वे अब शायद ही आगे बढ़ पाएं।

बज गई गड़करी की बिदाई की डुगडुगी
भाजपाध्यक्ष नितिन गड़करी का सूर्य अस्ताचल की ओर बढ़ता ही दिख रहा है। आने वाले समय में मीडिया में अगर गड़करी की मुखालफत नहीं रूकी तो जल्द ही उनके वारिस को देश के सामने लाया जा सकता है। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि गड़करी के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद अब संघ रक्षात्मक मुद्रा में आ गया है, क्योंकि अगला आम चुनाव भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ही केंद्रित होगा। इसके साथ ही साथ हिमाचल के नतीजे भी गड़करी के भाग्य का निर्धारण करेंगे, गुजरात में तो मोदी ने अपनी छवि पर ही सारा चुनाव केंद्रित रखा इसलिए वहां के नतीजे गड़करी को शायद ही प्रभावित कर पाएं। संघ के सूत्रों का कहना है कि संघ का शीर्ष नेतृत्व अब सर जोड़कर बैठा हुआ है। संघ नेतृत्व का मानना है कि अगर गड़करी के भ्रष्टाचार की बात मीडिया में ज्यादा उछली तो मजबूरी में पहले टर्म की समाप्ति के बाद गड़करी को दूसरा मौका नहीं दिया जाए।

आखिर क्या खासियत है लाजपत आहूजा की!
मध्य प्रदेश का जनसंपर्क महकमा इन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मध्य प्रदेश में जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा से कहीं ज्यादा ताकतवर हैं जनसंपर्क के अपर आयुक्त लाजपत आहूजा। यूं तो विज्ञापनों की बात करने पर आहूजा अपने आप को इससे दूर बताते हैं पर जब विज्ञापन शाखा में बात की जाए तो सीधे आहूजा जी से संपर्क करने का मशविरा मिलता है। हाल ही में जनसंपर्क महकमें ने एक गजब का कमाल किया है। आदेश नंबर डी-72316 के जरिए एक वेब साईट को 17 अगस्त को 15 लाख रूपए का विज्ञापन जारी किया गया और 25 अगस्त को जमा देयक का ई भुगतान 11 अक्टूबर को 14 लाख सत्तर हजार कर दिया गया। मीडिया बिरादरी अचंभित है कि आखिर एक वेब साईट पर अचानक ही जनसंपर्क विभाग कैसे मेहरबान हो गया है। अब मीडिया के अन्य लोग भी लाजपत आहूजा को सिद्ध करने का मंत्र ढूंढने में लग गए हैं।

फ्लोर मैनेजमेंट में माहिर हैं कमल नाथ
1980 से लगातार छिंदवाड़ा का प्रतिनिधित्व करने वाले कमल नाथ को अब संसदीय कार्य मंत्रालय की जवाबदेही सौंपी गई है। कमल नाथ का प्रबंधन वाकई गजब का है। सभी दलों के नेताओं के बीच कमल नाथ की स्वीकार्यता भी है। कमल नाथ के इस कौशल का उपयोग कांग्रेस नेतृत्व ने काफी अरसे बाद किया है जिससे लगने लगा है कि अब संसद के सत्रों में हंगामा कम ही देखने को मिलेगा। देखा जाए तो कमल नाथ के अंदर प्रशासिनक और संगठनात्मक क्षमता का कोई सानी नहीं है। पर्यवरण मंत्री रहते कमल नाथ ने दुनिया भर में भारत का सर उंचा किया तो कांग्रेस के महासचिव बनने के उपरांत उन्होंने असम में कांग्रेस की सरकार बनवाने के मार्ग प्रशस्त किए। माना जा रहा है कि कमल नाथ के संसदीय मंत्री बनने के उपरांत अब सभी राजनैतिक दलों के बीच सामंजस्य के अभाव की रिक्तता को भरा जा सकेगा।

कांग्रेस से रही है त्रणमूल के अंडे!
कहा जाता है कि कोयल अपने अंडे कौए के घोंसले में चोरी छिपे देती है। मादा कौआ उन अंडों को सेती (अंडे से बच्चे निकलने के दौरान पक्षी द्वारा उस पर बैठकर दी जाने वाली गर्मी) है और बच्चे निकलने पर उनकी परवरिश भी करती है। चूंकि कौआ और कोयल दोनों ही काले होते हैं अतः कौआ को बच्चों में अंतर समझ में नहीं आता है। ठीक इसी तर्ज पर त्रणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा नियुक्त किए गए देश भर के बीस रेल्वे बोर्ड के अध्यक्षों को कांग्रेस अभी तक हटा नहीं सकी है। ज्ञातव्य है कि जब ममता बनर्जी ने रेल मंत्रालय संभाला था उसी समय ममता ने लालू प्रसाद यादव ़द्वारा नियुक्त किए गए रेल्वे बोर्ड के अध्यक्षों को तत्काल प्रभार से हटाकर अपनी पसंद के अध्यक्ष बिठा दिए थे। अब जबकि त्रणमूल कांग्रेस के पास से रेल मंत्रालय हटकर कांग्रेस के पास आ चुका है तब भी कांग्रेस ममता बनर्जी के बनाए अध्यक्षों पर ही भरोसा कर उन्हें कंटीन्यू कर रही है।

इन हत्याओं का पाप किसके सर!
देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाला और उद्योग जगत में देश के स्थापित अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में स्थापित किए जाने वाले 1260 मेगावाट के पावर प्लांट में सुरक्षा मानकों की सीधी सीधी अव्हेलना की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि इस संयंत्र में 1000 फिट उंची चिमनी के निर्माण कार्य में अब तक डेढ़ दर्जन से ज्यादा मजदूरों की गिरकर मौत हो चुकी है। ये मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के बताए जाते हैं। संयंत्र के एक जिम्मेदार कर्मचारी ने पहचान उजागर ना करने की शर्त पर कहा कि यहां हो रहे कामों का जिम्मा जबलपुर और नरसिंहपुर के कांग्रेस भाजपा नेताओं के पास है, जिससे संयंत्र में होने वाली गड़बडियों की जांच दबा दी जाती है। विगत दिवस भी लगभग सौ फिट उंची चिमनी पर चढ़कर काम करने वाले 21 वर्षीय गाजियाबाद निवासी विजय पिता चतर सिंह का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे जमीन पर जा गिरा। बताया जाता है कि गिरते ही उसके प्राण पखेरू उड़ चुके थे। इन मजदूरों की इस तरह असावधानी से मौत को हत्या ही माना जा सकता है, पर इन हत्याओं का पाप किसके सर होगा?

पुच्छल तारा
करवा चौथ का व्रत भारत देश में महिलाएं अपने पति के दीर्घ जीवन की कामना के लिए करती हैं। रात को महिलाएं चलनी में चांद और पति दोनों ही के दर्शन करती हैं, फिर इसके बाद ही अन्न जल ग्रहण करती हैं। भारत देश में नेताओं की बुरी स्थिति है। कांग्रेस और भाजपा की मिली भगत से लगने लगा है मानो अब शासकों का काम सिर्फ और सिर्फ लूटना ही रह गया है। देश को लूटकर गिरवी रखने की तैयारी हो चुकी है। नेता एक के बाद एक जेल जा रहे हैं पर जेल में उनके मजे भी हैं। नेताओं का जेल जाना और करवाचौथ को रेखांकित करते हुए जयपुर से श्रेयांश चौधरी ने ईमेल भेजा है। श्रेयांश लिखते हैं कि जेल में नेताजी की पत्नि करवा चौथ का व्रत खोलने आई तो द्वारपाल ने सलाखों को चलनी के समदर्श बताते हुए कहा -‘‘आ जाईए बहनजी, यह चलनी जैसा ही है, और इसके पीछे वो रहा आपका प्रियतम, भ्रष्टतम चांद।‘‘