शुक्रवार, 24 मई 2013

एनएचएआई को जेब में रखे हुए हैं दरबार


एनएचएआई को जेब में रखे हुए हैं दरबार

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। शराब व्यवसाई रहे और लखनादौन मस्जिद के सरपरस्त दिनेश राय उर्फ मुनमुन से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी भी भयाक्रांत नजर आ रहे हैं। यही कारण है कि लखनादौन से सिवनी आते समय सड़क को भेदता एनएचएआई के बोर्ड के पीछे की ओर लगा एक बड़ा सा राय पेट्रोलियम का बोर्ड भी एनएचएआई के अधिकारियों को आते जाते अब तक नहीं दिख पाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लखनादौन से सिवनी मार्ग पर आने पर नरसिंहपुर की ओर जाने वाले रास्ते में एनएचएआई के मार्ग पर किलोमीटर और आगे का मार्ग बताने वाले साईन बोर्ड के पीछे तरफ राय पेट्रोलियम का एक बड़ा सा बोर्ड लगाया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह बोर्ड निश्चित तौर पर राय पेट्रोलियम की आय में बढोत्तरी की गरज से ही लगाया गया है।
इस संबंध में जब समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो ने एनएचएआई के परियोजना संचालक श्री सिंघई से उनके मोबाईल 9425426644 पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि वे नागपुर दौरे पर हैं, अभी वे कोई बात नहीं कर सकते हैं। उनसे जब यह पूछा गया कि वे वापस कब लौटेंगे? उनसे बात कब संभव है? इस पर उन्होने मोबाईल काट दिया।
जब इस बारे में एनएचएआई के अधिकारी दिलीप पुरी से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि विज्ञापन अगर कोई करना चाहता है तो वह आवेदन निश्चित तौर पर उनके कार्यालय से होकर ही गुजरेगा, और अब तक उन्होंने इस तरह का कोई आवेदन देखा नहीं है। श्री पुरी ने कहा कि हो सकता है कि यह नरसिंहपुर कार्यालय से मूव हुआ हो।
जब श्री पुरी के संज्ञान में इस बात को लाया गया कि यह एनएचएआई के संकेत बोर्ड के पीछे की ओर लाल रंग से पुता हुआ है तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है, वे स्वयं जाकर स्थल निरीक्षण कर कार्यवाही करेंगे।
इस संबंध में जब नरसिंहपुर में पदस्थ महेंद्र वाणी से उनके मोबाईल 9425180933 पर संपर्क किया गया तो उन्होने भी श्री पुरी की ही तरह इस बात से अनभिज्ञता ही प्रकट की कि इस तरह का कोई आवेदन स्वीकृति के लिए उन्होंने परियाजना संचालक के कार्यालय को भेजा हो। उन्होंने कहा कि उनके कार्यालय से इभी तक इस सड़क के लिए एक भी विज्ञापन हेतु अनुमति प्रदान नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि अभी वे कुछ करने की स्थिति में इसलिए नहीं हैं क्योंकि सड़क का रखरखाव एक साल तक सड़क के ठेकेदार के हाथों में ही है। अगर यह लखनादौन और सिवनी के बीच का मामला है तो सड़क का मैंटीनेंस मां लक्ष्मी यानी मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा किया जा रहा है।
इस अनियमितता के लिए क्या कार्यवाही की जाएगी, के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह तो देखना होगा, क्योंकि इस तरह का यह पहला मामला प्रकाश में आया है। इस पर सड़क के ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस दिया जाकर इस बोर्ड को बलात हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कोई शिकायत करनी है तो लिखित में करे, मौखिक शिकायतों पर कार्यवाही संभव नहीं है।
वहीं मीनाक्षी कंस्ट्रक्शन कंपनी के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि मित्रों में दरबार के नाम से मशहूर दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने मीनाक्षी के अनेक वेतनभोगी कर्मचारियों को साध रखा है संभवतः यही कारण है कि एनएचएआई के नियम कायदों को बलाए ताक रखकर यह काम किया गया हो।

लंबे समय तक कोषाध्यक्ष रहे हैं आपत्तिकर्ता


0 साईपुरम साई मंदिर भूमि विवाद

लंबे समय तक कोषाध्यक्ष रहे हैं आपत्तिकर्ता

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। नगझर स्थित साईपुरम के साई मंदिर की जमीन का विवाद अभी भी नहीं सुलझ सका है। किसकी जमीन पर यह मंदिर बना है इस बात पर से पर्दा नहीं उठ सका है। 22 मई को इस संबंध में अनुविभागीय दण्डाधिकारी के कार्यालय में हुई पेशी को अब 29 तारीख तक बढ़ा दिया गया है। इसमें आपत्तिकर्ता शरद अग्रवाल लंबे समय तक सांई मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष भी रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के द्वारा पीर फकीर के पास जाने की बात को लेकर की गई टिप्पणी के उपरांत साई मंदिर समिति नगझर के सचिव प्रसन्न चंद मालू द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया था कि साई भक्तों के धेर्य को, उनकी श्रृद्धा को, ऐसे तत्वों द्वारा गलत अंदाज में देखा जा रहा है। साई भक्त कतई भी कायर नहीं हैं, यदि कोई भी व्यक्ति हमारे (श्री मालू के) ईष्ट देवता के संबंध में गलत टिप्पणियां करेगा तो उसका माकूल जवाब दिया जाएगा।
इसके अगले दिन हिन्दु महासभा के प्रदेशाध्यक्ष संजय मण्डल ने एक विज्ञप्ति जारी कर साई मंदिर प्रबंधन को ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया था। इस विज्ञप्ति में संजय मण्डल द्वारा मंदिर प्रबंधन पर संगीन आरोप लगाए थे, जिनका जवाब इन पंक्तियों के लिखे जाने तक मंदिर प्रबंधन द्वारा नहीं दिया गया है, ना ही अपनी स्थिति ही स्पष्ट की है।
वहीं दूसरी ओर मंदिर के ट्रस्ट के पंजीयन के लिए राजपत्र में प्रकाशन के उपरांत कुछ कागजी कार्यवाही के लिए अनुविभागीय दण्डाधिकारी के कार्यालय भेजा गया, जहां इसकी जानकारी मिलने पर दूसरे पक्ष शरद अग्रवाल द्वारा अपने अधिवक्ता शैलू सक्सेना के माध्यम से एक आपत्ति पेश कर दी गई है।
शरद अग्रवाल का दावा है कि जिस स्थान पर मंदिर का निर्माण किया गया है वह भूमि 11 जून 1992 को श्री शिरडी साई संस्थान सिवनी के तत्कालीन अध्यक्ष अधिवक्ता दादू राघवेंद्र नाथ सिंह द्वारा खरीदी गई थी, इस भूमि पर आमजन के सहयोग से भव्य मंदिर का निर्माण किया गया था।
भूमि विवाद अब गहराने लगा है। ज्ञातव्य है कि गत 19 मई को अपनी विज्ञप्ति देने दैनिक हिन्द गजट कार्यालय आए साईं मंदिर समिति के सचिव प्रसन्न चंद मालू ने यह दावा किया था कि जिस भूमि पर मंदिर बना है उस भूमि को उन्होंने स्वयं के पैसों से खरीदकर मंदिर को दान दिया है।
वहीं, अब चर्चाओं का ना थमने वाला दौर भी आरंभ हो चुका है। चर्चाओं के अनुसार इस मंदिर के नए नाम से गठित होने वाले प्रस्तावित ट्रस्ट में आरंभ में भूमि खरीदने वाले अधिवक्ता दादू राघवेंद्र नाथ सिंह का नाम आखिर क्यों हटाया गया? इसके अलावा आर.के.शर्मा, श्रीमति सुषमा राय, बी.एस.ठाकुर, श्री आक्टे, वास्तु इंजीनियर दीपक अग्रवाल, पंडित तेजनारायण आदि जैसे साईभक्त जो इस मंदिर की पहली ईंट जुड़ने से साथ में थे को हाशिए पर रख दिया गया है।
वहीं, अब यह बात भी उभरकर सामने आ रही है कि आखिर क्या वजह है कि सालों साल मंदिर समिति के कोष का हिसाब किताब रखने वाले कोषाध्यक्ष शरद अग्रवाल अचानक ही इस मंदिर समिति से एकाएक विमुख हो गए और ना तो मंदिर के प्रस्तावित ट्रस्ट में ही उनका नाम है और ना ही मंदिर में दिखाई ही दे रहे हैं। शरद अग्रवाल के मंदिर से क्रियाकलापों से विमुख होने और मंदिर के ट्रस्ट में ही आपत्ति लगाने पर सभी को आश्चर्य हो रहा है।

सर्वशक्तिमान डॉ.सतीश दत्त गर्ग!


सर्वशक्तिमान डॉ.सतीश दत्त गर्ग!

(लिमटी खरे)

जिला आयुष अधिकारी के पद पर पदस्थ डॉ.सतीश दत्त गर्ग की हिम्मत की दाद देनी होगी। वे आदिवासी बाहुल्य लखनादौन तहसील के आदेगांव में पदस्थ रहे हैं। अपनी पदस्थापना के दौरान उन्होंने वहां जो गुल खिलाए हैं, अगर उनकी ईमानदारी से जांच हो जाए तो उनका निलंबन सुनिश्चित ही है। बावजूद इसके उन्हें निलंबित, पदावनत करने के बजाए जिला आयुष अधिकारी का प्रभार सौंपा जाना आश्चर्यजनक है।
डॉ.सतीश दत्त गर्ग जब कटनी में पदस्थ थे तब वहां अनेक शिकायतें उनके खिलाफ आईं। कटनी में डॉ.सतीश दत्त गर्ग पर आरोप है कि उन्होंनंे अधीनस्थ स्टाफ को जमकर परेशान किया है। इसकी शिकायत जब वहां के लोकल एमएलए संजय पाठक के संज्ञान मे लाई गई तो संजय पाठक ने उन्हें मिले जनादेश का पूरा पूरा सम्मान करते हुए मामले को विधानसभा में उठा दिया। संजय पाठक की चिंघाड़ पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इसमें पहल करना पड़ा। शिवराज सिंह चौहान ने सदन में कहा था कि इस मामले की जांच जबलपुर संभागायुक्त कर रहे हैं।
वहीं, स्थानांतरण नीति 2012 - 2013 का पालन किए बिना अनियमितताएं कर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के मनमाने स्थानांतरण करने के लिए कटनी के तत्कालीन जिला आयुष अधिकारी डॉ.सतीश दत्त गर्ग को संभागायुक्त डॉ.दीपक खाण्डेकर ने नोटिस जारी किया था। मुख्यमंत्री चौहान ने यह भी बताया था कि इस संबंध में महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता सोमवती जायस्वाल एवं गीता जायस्वाल के साथ ही साथ दवासाज शिवगोपाल व मुकेश कुमार बर्मन के तबादले निरस्त और संशोधित किए गए।
अगर मुख्यमंत्री ने सदन में यह जानकारी दी है तो इसका मतलब साफ है कि डॉ.सतीश दत्त गर्ग ने कर्तव्यों के निर्वहन में कोताही बरती है। अगर डॉ.सतीश दत्त गर्ग द्वारा किए गए स्थानांतरण निरस्त या संशोधित किए गए हैं तो डॉ.गर्ग ने अनियमितता की है। और ऐसा है तो उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए था।
जिला आयुष अधिकारी कार्यालय कटनी में तैनाती के दौरान डॉ.सतीश दत्त गर्ग को आयुष अधिकारी कटनी का प्रभार 7 नवंबर को दिया गया था, किन्तु इन्होंने गंभीर वित्तीय अनियमितता करते हुए सितम्बर एवं अक्टूबर माह का भी एनपीए एरियर का आहरण कर लिया।
इसके उपरांत डॉ.सतीश दत्त गर्ग जब आदेगांव में पदस्थ रहे तब आदेगांव निवासी राकेश जैन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री आनलाईन पर शिकायत भी की थी। इसकी जांच में डॉ.गर्ग को उक्त आलोच्य अवधि में अनुपस्थित होना पाया गया था। इतना ही नहीं आदेगांव औषधालय में दो हाजिरी पत्रक भी जप्त किए गए जिसमें एक में इन्होंने चिकित्सकीय अवकाश तो दूसरे में कर्तव्यों पर उपस्थिति दर्शाई थी।
डॉ.गर्ग के खिलाफ विभागीय कर्मचारियों विशेषकर महिला कर्मचारियों ने अभद्र व्यवहार की शिकायत प्रभारी मंत्री से भी की जा चुकी है। संभागीय आयुष अधिकारी डॉ.के.के.मिश्रा के पास आज भी जांच लंबित है। डॉ.सतीश दत्त गर्ग का प्रभाव इतना जबर्दस्त है कि उनकी जांच 30 अप्रेल को पूरी होने के बाद भी अब तक उच्चाधिकारियों तक नहीं भेजी जा सकी है।
बताते हैं कि एक बार फिर जिला आयुष अधिकारी का प्रभार लेने के बाद डॉ.सतीश दत्त गर्ग ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को हड़काना आरंभ कर दिया है। निश्चित तौर पर जिस कर्मचारी ने डॉ.सतीश दत्त गर्ग की शिकायत की होगी वह आज बुरी तरह डरा हुआ ही होगा, क्योंकि अब डॉ.सतीश दत्त गर्ग उसके जिला प्रमुख बनकर आ चुके हैं।
अब तो इस तरह की खबरें आम होने लगी हैं कि डॉ.सतीश दत्त गर्ग द्वारा अपने मातहतों को डराया धमकाया जा रहा है। इन परिस्थितियों में भय के वातावरण में सरकारी नुमाईंदे भला कैसे काम कर पाएंगे। लखनादौन विधायक श्रीमति शशि ठाकुर, सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन सिंह चंदेल से अपनी नजदीकी बताकर कर्मचारियों को भयाक्रांत करने वाले डॉ.सतीश दत्त गर्ग के हौसले बुलंद होना इसलिए भी स्वाभाविक ही माना जा रहा है क्योंकि उच्चाधिकारियों द्वारा प्रमाण होने पर भी उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है।
कर्मचारियों ने लामबंद होकर इसकी शिकायत जिला कलेक्टर, के साथ ही साथ प्रभारी मंत्री से भी की जा चुकी है। बावजूद इसके अब तक डॉ.सतीश दत्त गर्ग के खिलाफ कोई कार्यवाही ना होना आश्चर्यजनक ही है। परिस्थितियां इस ओर इशारा करने पर विवश हो रही हैं कि क्या जिला प्रशासन, मंत्री संत्री से बढ़कर हो चुके हैं डॉ.सतीश दत्त गर्ग!
सिवनी में इस तरह से एक आयुष अधिकारी ने नियम विरूद्ध काम किया और सिवनी जिले के विधायकों ने उसके खिलाफ कोई कार्यवाही भी प्रस्तावित नहीं की है। यह तब हुआ जब श्रीमति नीता पटेरिया के पति डॉ.एच.पी.पटेरिया जिला चिकित्सालय में और श्रीमति शशि ठाकुर के पति डॉ.ठाकुर मुख्य चिकित्सा अधिकारी हैं जो इन बातों को बेहतर समझ सकते हैं।
हालात देखकर लगने लगा है कि सिवनी में अब निरंकुशता चरम पर पहुंच चुकी है। भारतीय जनता पार्टी के बूते सरकारी अधिकारियों की मश्कें कसना नहीं बचा है। जरूर इसके पीछे कुछ और कारण हैं, वरना एक अदने से सरकारी कर्मचारी की हर स्तर पर शिकायतें होने के बाद भी वह सीना तानकर बैठा हुआ है। तरस तो उन तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों पर आ रहा है जिन्होंने अपने साथ हुए इस अन्याय की शिकायत की थी, और अब वे डॉ.सतीश दत्त गर्ग के कोप का भाजन होते दिख रहे हैं। संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव से इस संबंध में उचित और कठोर कार्यवाही की अपेक्षा है।

गुरुवार, 23 मई 2013

साईपुरम का मंदिर किसकी भूमि पर!


साईपुरम का मंदिर किसकी भूमि पर!

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। शिर्डी के साईं बाबा के पूजन को लेकर उनके भक्तों के तौर-तरीकों पर अभी बातें चल ही रही थीं कि सिवनी के जबलपुर रोड स्थित भव्य साईं मंदिर की भूमि पर किसका अधिकार है... इस बात को लेकर विवाद उठना शुरू हो गया है। उल्लेखनीय है कि ओम श्री साईं मंदिर ट्रस्ट को पंजीकृत करने के लिये एक आवेदन ऊधवदास आसवानी व 10 अन्य लोगों द्वारा पंजीयक लोक न्यास के समक्ष दिया गया है।
आवेदन में उक्त भूमि को आवेदकों द्वारा अपने ट्रस्ट की अचल संपत्ति बताया गया है। जबकि इसके दूसरे पक्ष शरद अग्रवाल का दावा है कि ग्राम सिमरिया प.ह.न. 90 रा.नि.मं. सिवनी भाग-दो में स्थित उक्त भूमि जिसका खसरा नंबर 113/3 है, श्री शिरडी साईं संस्थान सिवनी की है।
उल्लेखनीय है कि ऊधवदास आसवानी और 10 अन्य व्यक्तियों द्वारा साईं मंदिर भूमि को ओम श्री साईं मंदिर ट्रस्ट सिवनी की अचल संपत्ति निरूपित करते हुए ट्रस्ट बनाये जाने हेतु एक आवेदन पंजीयक, लोक न्यास एवं अनुविभागीय दंडाधिकारी (राजस्व) के समक्ष प्रस्तुत किया गया है जिस पर प्रमुख रूप से शरद अग्रवाल आ. गोविंदप्रसाद अग्रवाल द्वारा आपत्ति लगायी गयी है।
शरद अग्रवाल की तरफ से लगायी गयी आपत्ति के अनुसार जिस भूमि पर साईं मंदिर बना हुआ है 11 जून 1992 को श्री शिर्डी साईं संस्थान सिवनी के तात्कालीन अध्यक्ष दादू राघवेन्द्रनाथ सिंह द्वारा क्रय की गयी थी, जिसमें आमजन के सहयोग से भव्य साईं मंदिर का निर्माण किया गया था। आपत्तिकर्ता का कहना है कि जिस भूमि पर आमजन के सहयोग से भव्य साईं मंदिर बना है वह कागजों में आज भी श्री शिर्डी संस्थान की है। ऐसे में ओम श्री साईं मंदिर ट्रस्ट कैसे इस भूमि को अपनी अचल संपत्ति निरूपित कर अपने ट्रस्ट के पंजीयन हेतु आवेदन दे रहा है।
आपत्तिकर्ताओं के अनुसार उक्त भूमि शिर्डी के साई बाबा के मंदिर निर्माण के लिये ही खरीदी गयी थी, और उसमें मंदिर ही बना है लेकिन कोई अन्य उक्त भूमि को अपनी निरूपित कर पंजीयक लोक न्यास के समक्ष ट्रस्ट बनाये जाने हेतु आवेदन करेगा तो उसका विरोध तो करना ही पड़ेगा। कुछ लोगों द्वारा दस्तावेजों की कूटरचना कर भूमि को केवल अपने अधिकार में लेने की कोशिश कर ट्रस्ट बनाये जाने की कार्यवाही कर रहे हैं ताकि बाद में इस ट्रस्ट का संचालन व मंदिर में दान के रूप में आने वाली संपत्ति को वे मनमाने ढंग से उपयोग कर सके।

धूमा डबल मर्डर में पांच गिरफ्तार


धूमा डबल मर्डर में पांच गिरफ्तार

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। धूमा के डबल मर्डर कांड में पुलिस के हाथ देर से ही सही बड़ी सफलता हाथ लगी है। सिवनी पुलिस ने दो तो नागपुर पुलिस ने तीन आरोपियों को पकड़ने मेें सफलता हासिल की है। आरोपियों में से एक के पास से एक सोने की अंगूठी और 3200 रूपए बरामद किए हैं।
ज्ञातव्य है कि गणतंत्रता दिवस की पूर्व रात्रि 25 जनवरी को धूमा के प्रतिष्ठित व्यवसायई विजय अग्रवाल और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गायत्री अग्रवाल को कुछ लोगों ने धारदार हथियार से मौत के घाट उतार दिया था, जिसकी जानकारी 26 जनवरी को लगी। हाई- प्रोफाइल मर्डर केस होने के कारण यह मामाल विधानसभा में भी गूंजा।
इस मर्डर के मामले में पुलिस ने 02 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जिनमें प्रमुख रूप से सप्पा उर्फ शफीक पिता अजीज सर्वर कालोनी नागपुर एवं दयाराम पिता हक्कू अहिरवार उम्र 36 वर्ष धूमा शामिल है। धूमा थाना प्रभारी आर.के.गुप्ता ने बताया कि सप्पा को पुलिस ने सिवनी में उसके मामा ससुर के घर से दबोचा है। दूसरा आरोपी दयाराम मृतक के घर के सामने ही जूता सुधारने की दुूकान चलाता था।
इस संबंध में धूमा थाना प्रभारी दुबे ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य आरोपी गौसअली उर्फ राजा है, जिसने लूटे हुए माल का बंटवारा किया था, इसलिए अभी तक यह पता नहीं चल पाया कि उक्त लूट में कितने का माल लूटा गया। उन्होंने बताया कि इस मर्डर केसर में धूमा के दयाराम पिता अक्कू अहिरवार को गौसअली ने 10 हजार रू. एवं एक सोने की अंगूठी दिया था।
उधर, नागपुर से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ब्यूरो से आशीष कौशल ने बताया कि नागपुर पुलिस ने इस संबंध में इमरान खान निवासी बड़ा ताजबाग, शमीम खान निवासी बड़ा ताजबाग एवं लाले उर्फ मुईन खान साकिन नागपुर को पकड़ लिया है, जिन्हें रिमांड पर ले लिया है।
पुलिस सूत्रों ने यह भी बताया कि इस मामले में अभी नागपुर बड़ा ताजबाग निवासी गौस अली उर्फ राजा एवं सत्येंद्र गुप्ता दोनों फरार हैं जिनकी तलाश पुलिस बड़ी शिद्दत से कर रही है। पुलिस ने इतने बड़े डबल मर्डर के बारे में मीडिया से आखिर दूरी क्यों बनाई है यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है।
पुलिस सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि इसमें मुख्य आरोपी सावधान ना हो जाएं इसलिए पुलिस ने इस खबर को दबाए रखा। बावजूद इसके सूत्रों के हवाले से खबर मीडिया को आखिर लग ही गई।

दागी अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही से कतराते अधिकारी!


दागी अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही से कतराते अधिकारी!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। सिवनी में पदस्थ जिला आयुष अधिकारी डॉ.एस.डी.गर्ग के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा होने के बाद भी आला अधिकारी उनके खिलाफ कार्यवाही करने से कतरा रहे हैं। विभाग के अनेक कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से इसकी शिकायत नेता मंत्री अधिकारियों को भी की है पर इसका कोई नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है।
विभागीय सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि 31 जुलाई से डॉ.गर्ग द्वारा जमकर अनियमितताएं की जा रही हैं, बावजूद इसके उनके खिलाफ कोई कार्यवाही ना होना आश्चर्य का ही विषय है। इसकी सूचना विभागीय मंत्री महेंद्र हार्डिया, प्रमुख सचिव प्रवीर कृष्ण, संचालक, आयुक्त राजस्व जबलपुर के साथ ही साथ जिला कलेक्टर सिवनी को अनेक मर्तबा की जा चुकी है पर इस पर कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है।
कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने 15 जनवरी को संयुक्त रूप से इसकी शिकायत जिला कलेक्टर को की थी, पर नतीजा सिफर ही है। बताया जाता है कि वे पिछले साल 31 जुलाई को जिले के आदेगांव औषधालय में अपनी उपस्थिति देने के बाद 1 अगस्त से 18 अगस्त तक लगातार अनुपस्थित रहे हैं। उनका यह अवकाश स्वीकृत नहीं हुआ है पर उन्होंने आहरण वितरण अधिकार होने के चलते अपना वेतन इस अवधि का निकाल लिया है।
आदेगांव निवासी राकेश जैन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री आनलाईन पर शिकायत भी की थी। इसकी जांच में डॉ.गर्ग को उक्त आलोच्य अवधि में अनुपस्थित होना पाया गया था। इतना ही नहीं आदेगांव औषधालय में दो हाजिरी पत्रक भी जप्त किए गए जिसमें एक में इन्होंने चिकित्सकीय अवकाश तो दूसरे में कर्तव्यों पर उपस्थिति दर्शाई थी।
सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि डॉ.गर्ग की सर्विस बुक में भी अनेक अनियमितताएं हैं। आरोपित है कि डॉ.गर्ग ने कटनी के जिला आयुष अधिकारी कार्यालय से स्वयं ही हस्तलिखित पत्र बनाया और हस्ताक्षर कर उसे अपने पास रख लिया है। डॉ.गर्ग कर्मचारी आचरण संहिता का खुला उल्लंघन करते हुए अपनी सेवा पुस्तिका भी अपने ही पास जुलाई 2012 से रखे हुए हैं।
उधर, कटनी से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो ने खबर दी है कि जिला आयुष अधिकारी के प्रभार में रहते हुए डॉ.गर्ग ने अपने पद का दुरूपयोग कर कर्मचारियों को उपकृत और प्रताड़ित करने की गरज से उनकी पदस्थापना की और इधर उधर कर्तव्यों के आदेश जारी किए।
साई न्यूज ब्यूरो ने बताया कि कटनी के कांग्रेस के विधायक संजय पाठक द्वारा इस संबंध में मामला विधानसभा में उठाया। विधानसभा के पटल पर मुख्यमंत्री ने जवाब में कहा था कि डॉ.एस.डी.गर्ग की जांच आयुक्त जबलपुर संभाग द्वारा करवाई जा रही है। जिला आयुष अधिकारी कार्यालय कटनी के सूत्रों ने साई न्यूज ब्यूरो को बताया कि डॉ.गर्ग को आयुष अधिकारी कटनी का प्रभार 7 नवंबर को दिया गया था, किन्तु इन्होंने गंभीर वित्तीय अनियमितता करते हुए सितम्बर एवं अक्टूबर माह का भी एनपीए एरियर का आहरण कर लिया।
डॉ.गर्ग के खिलाफ विभागीय कर्मचारियों विशेषकर महिला कर्मचारियों ने अभद्र व्यवहार की शिकायत प्रभारी मंत्री से भी की जा चुकी है। संभागीय आयुष अधिकारी डॉ.के.के.मिश्रा से जब साई न्यूज ब्यूरो ने उनके मोबाईल 942464401 पर संपर्क किया गया तो उन्होने बताया कि डॉ.गर्ग के खिलाफ शिकायतों की जांच 30 अप्रेल को पूरी की जा चुकी है, किन्तु वे वर्तमान में अपने पुत्र की शादी के सिलसिले में बाहर हैं, एवं 26 मई को वापस आने पर ही वे इस संबंध में कोई टिप्पणी कर पाएंगे।
उधर, जबलपुर से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ब्यूरो से सुरेंद्र जायस्वाल ने बताया कि डॉ.गर्ग के खिलाफ शिकायत की जांच पूरी होने के बाद डॉ.मिश्रा ने जानबूझकर उसे रोककर रखा गया है। इस संबंध में वे जांच प्रतिवेदन जान बूझकर उच्चाधिकारियों को भेजने में हीला हवाला कर रहे हैं।
0 कोर्इ्र मुख्यालय नहीं आएगा! देख लूंगा शिकायतकर्ताओं को!
जिला आयुष अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि एक बार फिर जिला आयुष अधिकारी का प्रभार लेने के बाद अब डॉ.गर्ग के तेवर काफी तल्ख हो गए हैं। उन्होंने अब कर्मचारियों को सीधे धमकाना आरंभ कर दिया है। बीते शनिवार लखनादौन और सोमवार तथा मंगलवार को सिवनी में कर्मचारियों के साथ बैठक में डॉ.गर्ग ने कर्मचारियों को जमकर लताड़ा।
सूत्रों ने बताया कि बैठक में डॉ.गर्ग ने चेतावनी दी है कि उनके खिलाफ शिकायत करने वालों को वे देख लेंगे। अगर किसी ने उनके खिलाफ शिकायत की तो वे उसकी सीआर तक बिगाड़ देंगे। डॉ.गर्ग ने साफ तौर पर कर्मचारियों को हिदायत दे दी है कि अगर किसी को कोई भी काम है तो वह डाक से आवेदन या पत्र भेजे, खुद मुख्यालय उपस्थित होने की कोई आवश्यक्ता नहीं है। इसका अनुपालन नहीं करने पर कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगीं
0 विधायकों ने नजदीकी बताते हैं डॉ.गर्ग
चर्चा है कि जिला आयुष अधिकारी डॉ.एस.डी.गर्ग अपने आप को जिले के भाजपाई विधायकों का करीबी बताने से नहीं चूक रहे हैं। चर्चा तो यहां तक भी है कि आदेगांव पदस्थाना के दौरान वे लखनादौन विधायक श्रीमति शशि ठाकुर के काफी नजदीक आ गए थे। इसी नजदीकी का फायदा उठाकर वे लोगों को धमकाने से नहीं चूक रहे हैं। वहीं शशि ठाकुर ने साई न्यूज से चर्चा के दौरान कहा कि अगर डॉ.गर्ग गलत हैं तो वे स्वयं कलेक्टर से उनके खिलाफ कार्यवाही को कहेंगी।

शिक्षा का गिरता स्तर, जिम्मेदार कौन?


शिक्षा का गिरता स्तर, जिम्मेदार कौन?

(लिमटी खरे)

सिवनी जिले में माध्यमिक शिक्षा मण्डल भोपाल के तहत संचालित सरकारी और निजी शालाओं का इस साल का दसवीं और बारहवीं का परीक्षा परिणाम निराशाजनक कहा जा सकता है। दोनों ही कक्षाओं में प्रदेश की प्रावीण्य सूची में सिवनी जिले का नामोनिशान ही नहीं है। इसके साथ ही साथ परीक्षा का परिणाम दसवीं में सरकारी स्कूल में 47.41 तो निजी शालाओं में 15.48 फीसदी रहा है। बारहवीं की परीक्षाओं में सरकारी स्कूल में यह 83.24 तो निजी शालाओं में 73.66 फीसदी है। बाहरवीं का परीक्षा परिणाम कुछ हद तक संतोषप्रद माना जा सकता है।
मध्य प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा मण्डल के हाई स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा (दसवीं) के निराशाजनक परीक्षा परिणामों को देखकर लगने लगा है कि अब मध्य प्रदेश सरकार और सिवनी के शिक्षा के क्षेत्र के आलंबरदारों को अपने शिक्षा तंत्र के बारे में सोचना आवश्यक हो गया है। एचएसएस परीक्षा परिणाम वैसे भी अनेक संकेत दे रहे हैं।
कितने आश्चर्य की बात है कि इस बार दसवीं में सरकारी स्कूलों में 47 तो निजी स्कूलों में 15 फीसदी विद्यार्थियों के हाथ सफलता ही लगी है। परिणामों की घोषणा के साथ ही समूचे जिले में मायूसी की लहर व्याप्त हो जाना स्वाभाविक ही है। दुनिया भर में पसरी आर्थिक मंदी से भारत अछूता नहीं है। इस मंहगाई के जमाने में मध्य प्रदेश में निवास करने वाले मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के सामने अपने बच्चों को शिक्षा दिलाना काफी दुष्कर ही प्रतीत हो रहा है। माध्यमिक शिक्षा मण्डल से संबद्ध शालाओं में अध्ययन करने वाले असफल विद्यार्थियों के परिवारों में उदासी और असंतोष के बीज पनपना जाहिर है।
मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को मानो जंग लग चुकी है। शिक्षक के पद पर भर्ती होकर अन्य विभागों में संविलियन के साथ ही साथ सरकारी शिक्षकों से पल्स पोलियो, नसबंदी, चुनाव जैसे कार्यों में बेगार करवाना निश्चित रूप से देश के नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ही कहा जाएगा।
कितने आश्चर्य की बात है कि प्रतिबंध के बावजूद भी शिक्षकों का अध्यापन से इतर अन्य कार्यों के निष्पादन के लिए अटेचमेंट आज भी बदस्तूर जारी है। पहुंच संपन्न शिक्षक शहरों की ओर रूख करते नजर आते हैं, गांव के स्कूल शिक्षक विहीन पड़े हुए हैं। न शासन और न प्रशासन यहां तक कि राजनेताओं को भी अपने वोट बैंक की खातिर इस ओर देखने की फुर्सत नहीं है।
ऐसा नहीं कि विभागीय उच्चाधिकारियों अथवा शासन में बैठे प्रमुख सचिव से लेकर सेक्शन के बाबू को इस बारे में माहिति न हो। जानते सभी हैं पर मजबूर हैं मौन रहने को। साल भर शालाओं का निरीक्षण चलता है, किन्तु रीते पद रीते ही रह जाते हैं। निरीक्षक की औपचारिकता कैसे पूरी होती हैं, यह बात सभी बेहतर तरीके से जानते हैं।
यहां आश्चर्यजनक पहलू यह भी है कि मोटी फीस लेकर अध्यापन को पेशा बनाने वाले अशासकीय स्कूलों में परीक्षा परिणाम प्रभावित क्यों हुए? इस तरह की शालाओं को तो चुनाव और अन्य बेगार के कामों से मुक्त रखा गया है। फिर आखिर ऐसी कौन सी वजह है कि इन शालाओं मेें भी विद्यार्थियों का प्रदर्शन ठीक नहीं रहा।
एक समय था जब शालाओं में शिक्षिकाएं बैठकर स्वेटर बुना करती थीं, पर तब भी उनके द्वारा कराया जाने वाला अध्यापन का काम वास्तव में उचित और करीने वाला होता था। कुछ सालों पहले तक शिक्षा का स्तर संतोषजनक कहा जा सकता था, पर अब यह स्तर तेजी से नीचे गिरा है, जो चिंतनीय ही कहा जाएगा।
सिवनी में निजी स्तर पर माध्यमिक शिक्षा मण्डल से मान्यता प्राप्त ना जाने कितने शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को गढ़ने के काम में लगे हुए हैं, पर उनके हाथ असफलता ही लगी है। कारण स्पष्ट है कि शिक्षकों ने इस साल मेहनत ना के बराबर ही की है। शिक्षकों के घरों पर ट्यूशन की भीड़ साफ कर देती है कि अब शिक्षा का पेशा धन कमाने का साधन बन चुका है।
जिला प्रशासन को चाहिए कि शिक्षा विभाग के प्रभारी उपजिलाध्यक्ष (ओआईसी) को इसके लिए पाबंद करे कि इस साल परीक्षा परिणाम सुधारे जा सकें। इसके लिए सरकारी और निजी विद्यालयों का औचक निरीक्षण डिप्टी कलेक्टर द्वारा समय समय पर किया जाए यह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही साथ शिक्षकों द्वारा घरों पर पढ़ाई जाने वाली ट्यूशन को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए ऐसे कुछ मार्ग निकालने होंगे, वरना इस साल की तरह पालक लुटते रहेंगे और विद्यार्थी पास तो हो जाएंगे पर उनका ज्ञानार्जन का सपना अधूरा ही रह जाएगा।

बुधवार, 22 मई 2013

धर्म के प्रति षणयंत्र घातक: जगतगुरू


धर्म के प्रति षणयंत्र घातक: जगतगुरू

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि शिर्डी के साईं बाबा का वर्णन हमारे किसी भी वेद या पुराण में नहीं है। एवं किसी महापुरूष को भगवान के रूप में पूजा जाना हमारे सनातन धर्म में संभव नहीं है, तथा यह धर्म को भ्रष्ट करने का सीधा-सीधा षणयंत्र है। विभिन्न जगहों पर भंडारों में बांटे जाने वाले पुलाव आदि के बारे में बोलते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यह सब हमारे सनातन धर्म को भ्रष्ट करने का प्रयास हो रहा है।
मातृधाम में शंकराचार्य ने कहा कि प्रसाद ग्रहण करने के पूर्व यह ज्ञात होना आवश्यक होता है कि प्रसाद बनाने वाले की मंशा क्या है, और प्रसाद को तैयार करते वक्त पवित्रता का ध्यान रखा गया अथवा नहीं। शंकराचार्य ने उपस्थित भक्तगणों से इस बात को समर्थन देने का निर्देश दिया कि वे न तो किसी ऐसे स्थल पर जायेंगे जहां मृत आत्मा को भगवान बनाकर पूजा जाता है। एवं प्रसाद के रूप में लहसुन प्याज से बना हुआ पुलाव बांटा जाता हो।

सद्भाव ने नहीं बनाया ट्रामा यूनिट!


सद्भाव ने नहीं बनाया ट्रामा यूनिट!

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले से होकर गुजरने वाले चतुष्गामी मार्ग के निर्माण में एक के बाद एक घपले हुए हैं। पांच सालों तक सिवनी से नागपुर मार्ग को खस्ताहाल रखा गया तो निर्माण करने वाली सद्भाव कंस्ट्रक्शन कंपनी ने ट्रामा यूनिट की स्थापना करना ही मुनासिब नहीं समझा।
एनएचएआई के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि एनएचएआई और सद्भाव के बीच हुए करार में इस बात का उल्लेख किया गया था कि सद्भाव कंपनी को सड़क निर्माण के साथ ही साथ स्कूल, ट्रक ले वे, इसके दोनों ओर ढाबे, अस्पताल विशेषकर एक ट्रामा यूनिट की स्थापना सिवनी में करना था।
सद्भाव कंपनी ने शीलादेही में बनाए गए ट्रक ले बे में भी कोई सुविधाएं प्रदाय नहीं की हैं। इतना ही नहीं सिवनी में इस कंपनी ने ट्रामा यूनिट की स्थापना भी नहीं की है। इस संबंध में कंपनी के सूत्रों ने साई न्यूज को बताया कि तत्कालीन जिलाधिकारी के साथ ही साथ विधायक सांसदों ने यह दलील दी थी कि चूंकि ट्रामा यूनिट जिला चिकित्साल मे।प्रस्तावित है अतः इसे बनाने की आवश्यक्ता नहीं है।
अगर कंपनी के सूत्रों की बात सच है तो यक्ष प्रश्न यही खड़ा हुआ है कि क्या एनएचएआई के करार को बदलने के लिए जिला कलेक्टर और विधायक सांसद अधिकृत हैं! अगर, कंपनी ने सिवनी में ट्रामा यूनिट की आधार शिला नहीं रखी तो क्या जिला प्रशासन अब इस कंपनी पर शस्ति निरूपित करने की कार्यवाही करेगा?
बताया जाता है कि सिवनी जिले में एनएचएआई के इस फोरलेन मार्ग पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायलों को जिला चिकित्सालय लाया जाता है जहां चिकित्सा सुविधा के अभाव में उन्हें नागपुर ही रिफर किया जा रहा है, जिससे नागरिक नागपुर में मंहगे इलाज में लुटने पर मजबूर हैं।

सफेदपोश धोखेबाज हैं दिनेश राय: भीष्म पेट्रोलियम


सफेदपोश धोखेबाज हैं दिनेश राय: भीष्म पेट्रोलियम

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। सफेदपोश खद्दरधारी नेता के रूप में दिनेश राय उर्फ मुनमुन एक बहुत ही बड़े धोखेबाज हैं। इन्होने धोखाधड़ी कर पेट्रोल पंप हासिल किया है, और हमारे पेट्रोल पंप को बंद कराने में भी इनका बहुत बड़ा हाथ है।उक्ताशय की बात आज दूरभाष पर चर्चा के दौरान भीष्म पेट्रोलियम के संचालक द्वारा हिन्द गजट के साथ चर्चा के दौरान कही गई।
संचालक ने कहा कि एनएचएआई का एक सर्कुलर है कि टोल नाके चौारहे या जहां से सड़क में डिवाईडर समाप्त हो रहा हो वहां से एक किलोमीटर की दूरी में कोई भी पेट्रोल पंप स्थापित नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि दिनेश राय के नाम से आवंटित राय पेट्रोलियम की स्थापना ही एनएचएआई के नियम कायदों के प्रतिकूल की गई है।
संचालक के अनुसार अगर लखनादौन बायपास और टोल प्लाजा से राय पेट्रोलियम की दूरी नाप ली जाए तो यह एक किलोमीटर से कम ही निकलती है। बावजूद इसके राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने दिनेश राय के पेट्रोल पंप को आखिर अनुमति किस आधार पर दी है, यह शोध का विषय है।
भीष्म पेट्रोलियम के संचालक ने बताया कि 26 नवंबर को एचपीसीएल का डिपो ड्राय होने वाला है, यह सूचना उन्हें राय पेट्रोलिय के संचालक दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने ही दी थी। दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने उनसे स्टाक में माल रखने की बात कही और यह भी कहा था कि एक टेंकर बुलवाकर आधा आधा स्टाक में रख लेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि अगले ही दिन एचपीसीएल की टीम उनके प्रतिष्ठान पर आई ओर टीम ने उनकी एक ना सुनी। संचालक ने उनके पेट्रोल पंप में मौजूद स्टाक का कारण भी बताया पर टीम ने उनका पंप बंद कर सस्पेंड कर दिया। इस तरह एकतरफा कार्यावाही निश्चित तौर पर किसी व्यक्ति विशेष के कहने पर ही संपन्न हुई होगी।
चर्चा है कि इसके बाद उपरी दिखावा करते हुए दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने भीष्म पेट्रोलियम के संचालक के साथ हमदर्दी दिखाई और एचपीसीएल के आला अफसरान को अपने राजनैतिक रसूख का हवाला देकर देख लेने की बात कही गई। बताते हैं कि भीष्म पेट्रोलियम के संचालक दिनेश राय उर्फ मुनमुन की चिकनी चुपड़ी बातों में आ गए।
उधर एचपीसीएल के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जब भीष्म पेट्रोलियम को बंद कर दिया गया तो उसके बाद एचपीासीएल ने सिवनी जिले के अपने समस्त डीलर्स को पत्र लिखकर उनसे इस पंप को चलाने हेतु प्रस्ताव मांगे। सिवनी जिले के हर डीलर ने बिजनिस एथिक्स को ध्यान में रखकर एचपीसीएल को प्रस्ताव नहीं भेजा।
सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि कल तक भीष्म पेट्रोलियम के साथ हमदर्दी दिखाने वाले पूर्व में शराब व्यवसाई रहे और वर्तमान में लखनादौन मस्जिद के सरपरस्त दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने इस प्रतिष्ठान के संचालन के लिए अपनी सहमति देकर सभी को चौंका दिया। चर्चा है कि छपास के रोगी बन चुके उक्त नेता नुमा ठेकेदार और पेट्रोल पंप संचालक लखनादौन नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष दिनेश राय उर्फ मुनमुन एक ओर तो भीष्म पेट्रोलियम के संचालकों के साथ हमदर्दी जताने का नाटक करते रहे वहीं दूसरी ओर बिजनिस एथिक्स को तोड़कर उन्होंने भीष्म पेट्रोलियम के संचालकों की पीठ पर छुरा घोंप दिया।
एनएचएआई के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि एनएचएआई में पूर्व में पाण्डे सीजेएम पदस्थ रहे हैं जिनका कनेक्शन लखनादौन से काफी पुराना है। पाण्डे के आगे नतमस्तक होकर ही राय पेट्रोलियम को छूट प्रदान की गई है। अगर इसकी जांच करवा ली जाए तो आज भी राय पेट्रोलियम का लाईसेंस ही रद्द हो सकता है।

कैसे आए सिवनी की बिगडै़ल यातयात व्यवस्था पटरी पर!


कैसे आए सिवनी की बिगडै़ल यातयात व्यवस्था पटरी पर!

(लिमटी खरे)

जिला मुख्यालय सिवनी में यातायात का बुरा हाल है। हर दस कदम पर एक बस स्टेंड है। हर सड़क पर यात्री वाहन रेंगते चलते हैं। रास्ते में सवारी मिल जाने पर वाहन किनारे करने की जहमत तक नहीं उठाते हैं बस चालक। बीच सड़क पर ही बस रोककर सवारी भरी जाती हैं। यहां बस सड़क पर यातायात के नियमों को तोड़ती नजर आती है वहीं दूसरी ओर यातायात पुलिस के दरोगा सिपाही दस कदम की दूरी पर पूरी मुस्तैदी के साथ दुपहिया वाहन चालकों या फिर ट्रेक्टर टक्सियों से चौथ वसूली में लगे रहते हैं।
सिवनी की बिगड़ैल यातायात व्यवस्था की स्थिति दिन प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है। शहर की सड़कों का सीना रोंदती टेक्सी, ट्रेक्टर, भारी वाहन, बस, दुपहिया और अर्थमूवर्स भी आवागमन को बाधित करने के साथ ही साथ यातायात के नियमों को धता बताती नजर आती है।
सिवनी की सड़कें अब अतिक्रमण के चलते तंग गलियों में तब्दील हो गई हैं। रात होते ही चौड़ी सड़कें सूरज के निकलने के बाद सकरी गलियों में तब्दील होने लगती हैं। सड़कों के किनारों का फुटपाथ अतिक्रमण की भेंट चढ़ गया है। शहर के बाजार में बुरे हाल हैं। व्यापारियों ने अपने अपने प्रतिष्ठान के सामने की सड़क पर सामान बिखरा रखा है। सड़क का उपयोग पार्किंग के लिए किया जा रहा है।
हिन्द गजट को दिए पहले साक्षात्कार में जिला कलेक्टर भरत यादव एवं जिला पुलिस अधीक्षक मिथलेश शुक्ला ने शहर की यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ठोस पहल का आश्वासन दिया था। इस संबंधमें यातायात व्यवस्था को लेकर एक अहम बैठक का आयोजन भी किया गया था, किन्तु दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि नतीजा सिफर ही रहा।
नेशनल परमिट पर अवैध रूप से स्टेट कैरिज के रूप में यात्री वाहनों का संचालन होता है। नेशनल या टूरिस्ट परमिट में एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रियों को ले जाने के लिए अर्थात ओरिजनेशन टू डेस्टीनेशन के लिए होता है। स्टेट कैरिज में वाहन उन स्थानो।पर रूककर यात्रियों को उतार और चढ़ा सकता है जहां जहां का परिमट उसे परिवहन आयुक्त द्वारा दिया जाता है।
अवैध रूप से चलने वाली वीडियो कोच यात्री बसों के चलते मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम का बट्टा बैठ चुका है। अस्सी के दशक के आरंभ के साथ ही अवैध टूरिस्ट परमिट बसों का संचालन सिवनी में आरंभ हुआ था। उस समय तारा ट्रेवल्स रीवा की नागपुर इलाहाबाद और प्रयाग ट्रेवल्स की परासिया इलाहाबाद बस संचालित होती थी। ये बस एक मिनिट को सिवनी में बस स्टेंड पर रूका करती थीं। उस दौर में इन पर कोई सख्ती नहीं की गई। आज ना जाने कितनी अवैध बसें सड़कों का सीना चीर रही हैं। यही कारण है कि मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम तालाबंदी की ओर अग्रसर हुआ।
आज यातायात पुलिस की नजरों के सामने से बस स्टेंड पर एक दरवाजे वाली बस आती जाती हैं। इतना ही नहीं स्लीपर कोच भी अवैध रूप से ही संचालित हो रही हैं। बस स्टेंड परिसर के अंदर ही यातायात पुलिस की चौकी भी स्थापित है, क्या यातायात पुलिस के नुमाईंदों को एक दरवाजे वाली बस दिखाई नहीं देती है? अगर दिखाई दे रही है तो इस पर कार्यवाही क्यों नहीं की जाती? क्या जिला पुलिस अधीक्षक मिथलेश शुक्ल अपने मातहत यातायात प्रभारी से यह पूछने की जहमत उठाएंगे कि अब तक कितनी एक दरवाजे वाली बस के चालान किए गए?
यातायात पुलिस महज रस्म अदायगी के लिए दो पहिया वाहन चालकों का चालान बनाकर उनसे राजस्व वसूली का काम करती है। यात्री बसों का एक चालान हर महीने का तय है। क्या कारण है कि हर महीने बस एक चालान कर ही यातायात पुलिस मौन साध लेती है?
बस स्टेंड पर भी अराजकता साफ दिखाई देती है। जिसका जहां मन आता है वहां वाहन खड़ा कर देता है। सोहाने पेट्रोल पंप के पीछे की ओर मेक्सी कैब का कब्जा है तो मुख्य बस स्टेंड वैध और अवैध यात्री बसों का कोहराम मचा हुआ है। प्राईवेट बस स्टेंड पर नागपुर और जबलपुर जाने वाली अवैध बस धमाचौकड़ी मचाती रहती हैं।
शहर के उपनगरीय इलाकों में नाकों पर नगर सेना के जवान तैनात हैं जिन पर आरोप है कि दस बीस रूपए की रिश्वत में ही ये ट्रेक्टर ट्राली, ट्रक आदि को शहर के अंदर आने की इजाजत दे देते हैं। शहर के अंदर तेजी से दौड़ते डंपर दुर्घटनाओं को न्योता देते नजर आते हैं। गांधी चौक पर अहिंसा स्तंभ में दबकर नारायण नामक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के भृत्य का निधन बस से दबकर हो गया था। सब्जी मंडी के पास वैशाली का निधन भी इसी बिगड़ेल यातायात के चलते ही हुआ था।
शहर के पाश इलाके बारपत्थर में नवधनाड्य और अन्य लोगों के साहेबजादे तेज रफ्तार में दो पहिया वाहन उड़ाते दिख जाते हैं। यातायात पुलिस कभी कभार बारापत्थर के मुख्य चौराहे पर वाहनों की चेकिंग की रस्म अदायगी करते नजर आते हैं। गले में लाल पीले हरे नीले स्कार्फ डाले युवा बारापत्थर में तेजी से वाहन चलाते हुए युवतियों पर फब्तियां भी कसते नजर आते हैं। इन आताताईयों के चलते अनेक नवयोवनाएं डर के मारे घर से निकलने में भी कतराती हैं। जिला प्रशासन समय रहते उचित कदम उठाए वरना आने वाले समय में सिवनी की यातायात व्यवस्था को संभालना एक टेड़ी खीर ही साबित होगा।

मंगलवार, 21 मई 2013

गोंडवाना, बसपा और सपा ही बचती हैं दिनेश के लिए


गोंडवाना, बसपा और सपा ही बचती हैं दिनेश के लिए

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रत्याशी प्रसन्न चंद मालू की जमानत जप्त करवाकर दूसरी पायदान पर रहने वाले दिनेश राय उर्फ मुनमुन अब भाजपा में नहीं जा पाएंगे। संभवतः यही कारण है कि दिनेश राय उर्फ मुनमुन अब गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी में संभावनाएं टटोल रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि वर्ष 2008 में दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने नगर पंचायत लखनादौन के अध्यक्ष रहते हुए सिवनी विधानसभा से चुनाव लड़ा था। इस समय लखनादौन में यह चर्चा आम होने लगी थी कि आखिर क्या वजह थी कि लखनादौन नगर पंचायत के अध्यक्ष रहने के बाद भी वे लखनादौन से पलायन कर सिवनी से विधानसभा चुनाव लड़ने आए थे।
उस समय सिवनी में यह चर्चा भी आम थी कि चूंकि दिनेश राय उर्फ मुनमुन का इंवालवमेंट शराब के व्यापार में था अतः उनका साथ ना दिया जाए। वैसे भी हर समाज हर वर्ग में शराब को सामाजिक बुराई माना जाता है। इसके चलते दिनेश राय उर्फ मुनमुन को अपेक्षित जनसमर्थन नहीं मिल पाया।
बताया जाता है कि 2008 के उपरांत लगातार सिवनी से दूरी बनाए रखने वाले दिनेश राय उर्फ मुनमुन ने कांग्रेस और भाजपा पर भी डोरे डाले पर दोनों ही सियासी दलों में शराब के कारोबार से जुड़े रहने के चलते इनका भारी विरोध हुआ और दिनेश राय उर्फ मुनमुन को मुंह की खानी पड़ी।
दिनेश राय उर्फ मुनमुन के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि उन्हें सलाह दी गई है कि इस बार उनके पक्ष में सिवनी विधानसभा विशेषकर सिवनी शहर में वैसा अंडर करेंट नहीं है। इसलिए संभव हो तो किसी राजनैतिक पार्टी का सिंबाल ले आया जाए।
इसके पीछे यह धारणा बताई जा रही है कि निर्दलीय की गिनती शून्य से आरंभ होती है पर राजनैतिक दलों के लिए प्रतिबद्ध मतदाताओं की कुछ तो संख्या होती है। यही कारण है कि बार बार दिनेश राय उर्फ मुनमुन के कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा में जाने की खबरें सियासी फिजां में तैरने लगती हैं।
चर्चा तो यहां तक है कि अब समाजवादी पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, या बहुतन समाज पार्टी की टिकिट पाने की जुगत दिनेश राय उर्फ मुनमुन द्वारा लगाई जा सकती है ताकि वे सिवनी में उस पार्टी के कुछ परंपरागत वोटों से अपना खाता खोल सकें।