शुक्रवार, 26 जुलाई 2013

कलेक्टर के निर्देश उड़ रहे हवा में!

कलेक्टर के निर्देश उड़ रहे हवा में!

(ब्यूरो कार्यालय)

छपारा (साई)। रपटा, पुल पुलिया पर अगर पानी है तो सड़क पार करना तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया जाए। उक्ताशय के सख्त निर्देश जिला कलेक्टर भरत यादव द्वारा दिए जाने के बाद भी गत दिवस सिवनी से लौट रहे एसएएफ का जवान पानी में बह गया, जिससे साबित हो रहा है कि जिला कलेक्टर के निर्देशों को उनके ही मातहत कितनी वजनदारी से ले रहे हैं।
घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार गत 23 जुलाई की रात गरठिया निवासी नवीन कुमार पाण्डेय 25 वर्ष की सिवनी से अपने गांव लौटते समय रपटे में बह जाने से मौत हो गई। नवीन सेवारत एसएफए जबलपुर में आईजी के गनमेन थे तथा 04 दिन की छुट्टी में अपने घर आये हुए थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार नवीन कुमार 23 जुलाई को सिवनी गया था। सिवनी से रात को गरठिया लौटते समय लगभग 9 बजे तेज बारिश भी हो रही थी। रिपटा पार करते समय गाड़ी फिसलने से वह रिपटे में बह गया, जिससे उसकी मौत हो गई। नवीन के रात्रि में घर न लौटने पर परिजनों ने सुबह खोज खबर की तो उन्हें रिपटा के आगे नवीन की गाड़ी मिली और उसके 1 किमी आगे झाड़ियों में फंसी उसकी लाश भी दिखाई दी।

घटना की जानकारी मिलते ही प्रधान आरक्षक नोखेलाल यादव घटना स्थल पर पहुंचे तथा लाश का पंचनामा बनाकर शव को पीएम के बाद परिजनों को सौंप दिया। नवीन का देह संस्कार 24 जुलाई को उनके ग्राम गरठिया मोक्षधाम में कर दिया गया। इस घटना के बाद पूरा ग्राम शोकमग्न है।

हम केवलारी से कांग्रेस प्रत्याशी हैं: शक्ति सिंह

हम केवलारी से कांग्रेस प्रत्याशी हैं: शक्ति सिंह

(प्रवीण सोनी)

लखनादौन (साई)। ‘‘हमें केवलारी विधानसभा क्षेत्र से टिकिट का उम्मीदवार नहीं कांग्रेस का प्रत्याशी समझा जाए।‘‘ उक्ताशय की बात घंसौर क्षेत्र में हुकुम के नाम से मशहूर कुंवर शक्ति सिंह ने आज मध्य प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष और सिवनी जिले के प्रभारी अबरार अहमद के समक्ष कही।
कांग्रेस के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि लखनादौन में आज मप्र कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं सिवनी जिले के प्रभारी अबरार अहमद ने ब्लाक अध्यक्षों की बैठक ली, जिसमें लखनादौन सहित घंसौर, धूमा, केदारपुर और आसपास के कांग्रेसी नेता शामिल हुए। इनमें पूर्व विधायक बेनी परते, श्रीमती गीता ठाकुर, ब्लॉक अध्यक्ष संजय यादव, धूमा के अध्यक्ष हीरा चौकसे, घंसौर से अजीत शक्तिसिंह, प्रेमदास शिवहरे, काशीप्रसाद तिवारी सरवैया सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ कांग्रेसी पहुंचे थे।
इस मौके पर अबरार अहमद ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी उन्हें जो एकता का पाठ पढ़ाया था, वहीं संदेश देने वह सिवनी जिले के सभी ब्लॉकों में घूम रहे हैं ताकि सभी कांग्रेसी एकजुटता का परिचय देते हुए एक ऐतिहासिक जीत दर्ज कर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाये। इस मौके पर अजीत शक्तिसिंह ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए। बैठक में संजय यादव, किशोर यादव, विजय तिवारी, नन्हेवीर यादव सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपनी बात रखते हुए विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं की भूमिका पर प्रकाश डाला।

सूत्रों का कहना था कि लखनादौन विधानसभा क्षेत्र के लिए योगेंद्र सिंह का नाम ही प्रमुखता के साथ सामने आया है। कुंवर शक्ति सिंह द्वारा योगेंद्र सिंह का नाम आगे बढ़ाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो कुंवर शक्ति सिंह इस बात से खासे खफा हैं कि सिवनी जिले में कांग्रेस की धुरी बने रहे हरवंश सिंह द्वारा उनके जरिए तत्कालीन क्षेत्रीय क्षत्रप उर्मिला सिंह की राजनैतिक हत्या करवाई थी। अब वे हरवंश सिंह के पुत्र रजनीश सिंह पर दबाव बनाकर लखनादौन से उर्मिला सिंह के पुत्र को टिकिट दिलवाने की जुगत लगा रहे हैं।

पावर सेक्टर में जबर्दस्त रिसेशन: मेंहदीरत्ता

पावर सेक्टर में जबर्दस्त रिसेशन: मेंहदीरत्ता

(अभय नायक)

रायपुर (साई)। सिवनी जिले के घंसौर में डल रहे अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के निर्माणाधीन पावर प्लांट की ओर से लाईजनिंग, या मीडिया को विज्ञापन जारी करने के लिए कोई एजेंट नियुक्त नहीं किया गया है। अगर संयंत्र प्रबंधन की ओर से कोई विज्ञापन जारी करता है तो इसके लिए संयंत्र प्रबंधन की जवाबदेही नहीं होगी। पावर सेक्टर में जबर्दस्त रिसेशन है, इसलिए सभी का सहयोग अपेक्षित है।उक्ताशय की बात संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारी मेंहदीरत्ता ने आज समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कही।
श्री मेंहदीरत्ता ने कहा कि समूचे देश में पावर सेक्टर में बहुत परेशानी चल रही है, जिसके चलते संयंत्र प्रबंधन आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। इन परिस्थितियों में संयंत्र द्वारा किसी को भी किसी भी तरह से ओबलाईज किया जाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में यह बात लाई गई है कि सिवनी जिले के पत्रकार मनमर्जी से अपने अपने समाचार पत्रों में विज्ञापनों का प्रकाशन कर दिया करते हैं।
श्री मेंहदीरत्ता ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि आखिर इन समाचार पत्रों को विज्ञापन का भुगतान कैसे और कौन कर रहा है, जबकि संयंत्र प्रबंधन द्वारा इस तरह के विज्ञापनों की मद में भुगतान ही नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में यह बात आई है कि सिवनी में कुछ कथित लोग अपने आप को मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड का मध्यस्थ बताकर सक्रिय हुए हैं।
ज्ञातव्य है कि 2009 से सिवनी में निर्माणाधीन मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड का पावर प्लांट अपनी संस्थापना से ही चर्चाओं में आ चुका है। इस पावर प्लांट में घंसौर के कुछ नेता नुमा ठेकेदारों ने अपनी जबर्दस्त पैठ बना ली है। भोले भाले आदिवासियों को भड़काकर उनके विरोध की बैसाखी पर ये नेता नुमा ठेकेदार अब धन कुबेर भी बन चुके हैं, और मीडिया को भी अपने हिसाब से हांकने की जुगत में हैं। कुछ कथित मीडिया मुगल इन धनकुबेरों के हाथों की कठपुतली भी बनते नजर आ रहे हैं।

वहीं, दिल्ली से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ब्यूरो से आकाश कुमार ने सिवनी के घंसौर में डल रहे पावर प्लांट के मुख्यालय गुड़गांव और थापर हाउस के सूत्रों के हवाले से बताया कि अगर कोई विज्ञापन आदि झाबुआ पावर लिमिटेड के नाम से जारी होता है तो उस विज्ञापन के प्रकाशन के पूर्व झाबुआ पावर लिमिटेड की ओर से बाकायदा रिलीज़ आर्डर अवश्य प्राप्त कर लिया जाए अन्यथा संयंत्र प्रबंधन इसके भुगतान के लिए जवाबदेह नहीं होगा।

पालिका के लिए नहीं मायने रखते कलेक्टर के निर्देश!

पालिका के लिए नहीं मायने रखते कलेक्टर के निर्देश!

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। नगर पालिका प्रशासन इस कदर बेखौफ हो चुका है कि उसकी नजर में जिला कलेक्टर भरत यादव के निर्देश भी कोई अहमियत नहीं रखते हैं। मनमर्जी पर उतारू नगर पालिका प्रशासन कई बार जिला कलेक्टर के आदेशों को धता बता चुका है।
गौरतलब है कि हाल ही में जिला कलेक्टर भरत यादव द्वारा तहसीलदारों, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायतों के सीएमओ को तकीद किया था कि सड़कों के बीच में बैठकर अथवा सड़कों पर आवारा घूमकर आवागमन बाधित करने वाले जानवरों को पकड़कर कांजी हाउस भेजा जाए और इन जानवरों के मालिकों के खिलाफ कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
यहां उल्लेखनीय होगा कि जिला मुख्यालय में आवारा पशुओं का कोहराम देखते ही बन रहा है। शहर की शायद ही कोई सड़क ऐसी बची हो जिस सड़क पर आवारा पशु स्वच्छंद विचरित करते ना दिख जाएं। आवारा मवेशियों द्वारा बारिश के मौसम में शटर वाले सिवनी शहर‘ (नगर पालिका की मेहरबानी से सिवनी में घर कम शटर ज्यादा दिखाई देती हैं) के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के सामने गाय का गोबर, कुत्ते या सूअर का मल, या बकरी की लैंडी सुबह सवेरे मिलना आम बात है।
नगर पालिका परिषद के पास आवारा मवेशियों को पकड़ने के लिए बाकायदा हाका गैंग है। अगर कोई सूचना के अधिकार में इस बात को निकलवा ले कि यह हाका गैंग नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के कार्यकाल में कहां कहां गई और उसने अब तक अपने कर्तव्यों को क्या अंजाम दिया तो निश्चित तौर पर स्थानीय शासन मंत्री बाबू लाल गौर दांतों तले उंगली दबा लेंगे।
शहर भर में बारिश के मौसम में आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर है। एक मर्तबा एक न्यायधीश महोदय इन कुत्तों से परेशान हो गए थे, उस समय नगर पालिका प्रशासन ने माननीय न्यायधीश महोदय की नजरें तिरछी होने के भय से शहर के सारे कुत्तों को पकड़वाकर कुरई घाट में छोड़ दिया था। इसके बाद आज तक कोई कार्यवाही इस संबंध में नहीं हुई है।
नगर पालिका प्रशासन के पास आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए एक अदद सुसज्जित ट्राली है, पर वह भी नगर पालिका के फिल्टर प्लांट के मैदान में खड़ी होकर जंग खा रही है और कंडम होने का इंतजार कर रही है। कहा जा रहा है कि अब तक अनुपयोगी रही यह ट्राली कंडम होगी तो दूसरी खरीदी जाएगी जिसमें एक बार फिर खेला जाएगा कमीशन का गंदा खेल।
इसी तरह शहर भर में आवारा सुअरों ने लोगों का जीना दूभर कर रखा है। दस बारह से लेकर बीस की संख्या में आवारा घूमते सुअर लोगों के घरों में घुसकर उत्पात मचाते फिरते हैं। सालों से जिला चिकित्सालय में भी आवारा सुअरों द्वारा बच्चों को उठाए जाने की खबरें भी मीडिया की सुर्खियां बन चुकीं हैं।

इन परिस्थितियों में अब लोग यह कहने पर मजबूर हैं कि नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के नेतृत्व में नगर पालिका परिषद का प्रशासन सत्ता के मद में इतना मगरूर हो चुका है कि उसे ना तो जिला मुख्यालय के निवासियों के अमन चैन और सुख सुविधाओं की ही चिंता है और ना ही जिला कलेक्टर के आदेश की ही कोई परवाह है। लगता है सियासी जड़ें गहरी जमा चुके पालिका के नुमाईंदे जिला कलेक्टर के निर्देशों को भी कचरे की टोकरी में डालने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।

मोबाईल और अश्लीलता

मोबाईल और अश्लीलता

(शरद खरे)

वाकई संचार क्रांति ने आज हमें बहुत ही तेजी से अत्याधुनिक युग की ओर अग्रसर कर दिया है। दो ढाई दशक पहले जिस बात की कल्पना भी नहीं होती थी आज की पीढ़ी उसका उपभोग भी करने लगी है। अस्सी के दशक के आरंभ में कलर फोटो खिंचवाना अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट हुआ करता था। उस वक्त ब्लेक एण्ड व्हाईट केमरे से फोटो खीची जाकर उसमंे क्रत्रिम तौर पर रंग भरे जाते थे। यह बहुत ही मेहनत का काम होता था। उस दौर में वीडियो फिल्म बनाना स्वप्न देखने के मानिंद ही हुआ करता था।
उस दौर में चलती फिरती चीजें पर्दे पर देखना मतलब फिल्म देखना ही होता था। 1981 तक देश में टीवी भी श्वेत श्याम ही हुआ करता था। 1982 के एशियाड में देश में टीवी भी कलर वाला आया। फिर वीडियो आया। लोगों की जिज्ञासा थी कि आखिर वीडियो होता कैसा है? बाद में पता चला कि यह तो कलर्ड टीवी ही है। इस समय तक कलर कैमरे से फोटो खीची जाने लगी। शनैः शनैः और प्रगति हुई तब बड़े आकार के कैमरों से वीडियो फिल्म बनाना भी आरंभ हुआ। विलासिता प्रेमी धनाड्य लोगों द्वारा शादी ब्याह आदि के अवसर पर वीडियो बनवाना प्रिय शगल बन गया था। वीडियो बनाने के बाद उसकी एडीटिंग आदि का अपना अलग ही आनंद हुआ करता था।
कालांतर में वीडियो कैसेट इतिहास में समा गई और आया सीडी का युग। सीडी भी एक समय बाद इतिहास में शामिल होती गई और डीवीडी ने उसका स्थान ले लिया। मोबाईल आने के बाद तो मानो प्रगति को पंख लग गए। मोबाईल में पहले बल्व वाला मोबाईल अर्थात जिसमें पीली रोशनी हुआ करती थी, के बाद ट्यूब लाईट वाला मोबाईल जिसकी एलसीडी सफेद चमका करती थी, वह आया। धीरे से मोबाईल में कैमरा तो वीडियो कैमरा भी आ गया। अब तो चार इंच के मोबाईल से घंटों की वीडियो फिल्म बनाई जा सकती है।
प्रगति के ये सारे सौपान देखने वाली आज की प्रौढ़ होने वाली पीढ़ी अपने आप को खुशकिस्मत मान रही होगी, क्योंकि बाबा आदम के जमाने से वर्तमान परिवेश के वे साक्षात गवाह जो ठहरे। तरक्की अपने साथ अच्छी और बुरी दोनों ही बातें लाती है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। अस्सी के दशक के बाद तेजी से हुए विकास के भी अनेक दुष्परिणाम सामने आए और अनवरत आते ही जा रहे हैं।
आज मोबाईल झूठ बोलने का सबसे बड़ा कारक बनता जा रहा है। माता पिता को धोखा देकर बच्चियां, युवतियां यहां तक शादी शुदा महिलाएं भी झूठ पर झूठ बोल रही हैं। वे होती कहीं और हैं और बताती कहीं और हैं। मां बाप यह सोचते हैं कि उनके बच्चे स्कूल कालेज में पढ़ रहे हैं, वस्तुतः इनमें से कुछ बच्चे अपने आवारा मित्रों के साथ कहीं और मस्ती में झूम रहे होते हैं। कल तक अश्लील फोटो खींचने पर उसे धुलवाने के दौरान लीक होने का जोखिम होता था, पर आज तो ना रोल धुलवाने की झंझट ना एक्सपोज करवाने की।
आज अनेक वेब साईट्स अश्लील एमएमएस से पटी पड़ी हैं। पहले विदेशी बालाओं के इस तरह के चित्र दिखते थे, पर अब तो देशी बालाएं इसमें नजर आ रही हैं। यहां तक कि सुनने में तो यह भी आया है कि जिला मुख्यालय सहित सिवनी जिले की अनेक बालाओं के अश्लील एमएमएस तक लोगों के मोबाईल की शोभा बढ़ा रहे हैं। नशे की हालत में युवा अपनी डींग मारने के चक्कर में प्यार में फांसी गई इन बालाओं के अश्लील एमएमएस ना केवल दिखाते हैं वरन् मेरी घोडी बड़ी की तर्ज पर ये एक दूसरे के साथ मोबाईल पर शेयर भी कर देते हैं।
इस तरह के अश्लील वीडियो का अंजाम हत्या तक पहुंचना स्वाभाविक ही है। बीते दिनों बरघाट में पुलिस द्वारा मारे गए एक छापे में अश्लील एमएमएस या क्लिपिंग्स का जखीरा मिला है जो उपरोक्त वर्णित सारी बातों का जीवंत रोजनामचा कहा जा सकता है। जिला मुख्यालय सिवनी में ना जाने कितने लोग मोबाईल के लिए डाउनलोडिंग आदि का काम कर रहे हैं। इन लोगों के पास ना जाने कितने एमएमएस होंगे कहा नहीं जा सकता है। सिवनी की फिजां में युवाओं के मोबाईल पर वित्त मंत्री रहे राघवजी, जस्सी जैसी कोई नहीं की मोना सिंह सहित अनेक लोगों यहां तक कि सिवनी की स्थानीय बालाओं के नग्न और आपत्ति जनक एमएमएस शोभा बढ़ा रहे हैं।
आठवीं कक्षा के उपरांत बच्चों में शारीरिक बदलवा तेजी से होते हैं, उस दौर में अगर माता पिता ने अपने बच्चे पर बारीक नजर नहीं रखी तो उसका पांव फिसलने में देर नहीं लगती। गलत तरीके से पैसा कमाने वाले युवा दिखने में तो भोले दिखते हैं और आसानी से इन बालाओं को अपने आगोश में ले लेते हैं। जब इन बालाओं के सामने इन युवाओं की हकीकत आती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इसके बाद बालाओं के पास पछताने के अलावा और कुछ नहीं होता है। इसलिए मोबाईल का उपयोग सावधानी से किया जाना जरूरी है। पालकों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों के मोबाईल और आचरण पर नजर रखें वरना उनके हाथ भी पछतावे के अलावा और कुछ नहीं लगने वाला।

गुरुवार, 25 जुलाई 2013

आरटीई का पालन नहीं करने वाली शालाओं को नोटिस

आरटीई का पालन नहीं करने वाली शालाओं को नोटिस

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत वंचित/कमजोर वर्ग के बच्चों को अशासकीय विद्यालय की प्रथम प्रवेशित कक्षा में न्यूनतम 25 प्रतिशत सीटों पर निःशुल्क प्रवेश देने के निर्देश दिए गए थे, किन्तु जिले में 75 ऐसी अशासकीय शालायें हैं जिन्होंने अभी तक उनके विद्यालय की प्रथम प्रवेशित कक्षा में निःशुल्क प्रवेश हेतु सत्र 2013-14 में घोषित निर्धारित सीटों पर प्रवेश पूर्ण नहीं किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार यह बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 का उल्लंघन है। जिला कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लिया है। इन अशासकीय विद्यालयों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया जाकर तीन दिवस के भीतर जवाब चाहा गया है। संतोषजनक जवाब प्राप्त न होने पर बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009 के उल्लंघन के कारण संबंधित अशासकीय विद्यालयों की आगामी वर्षों की मान्यता वृद्धि नहीं की जावेगी, जिसके लिए संस्था प्रधान स्वयं जिम्मेदार होंगे।

विकासखण्ड सिवनी जनशिक्षा केंद्र
बंडोलः- संस्कार विद्या निकेतन बंडोल, सरस्वती ज्ञानमंदिर बंडोल, रत्नदीप विद्या.मंदिर बांकी।
गोपालगंजः- संस्कार विद्या मंदिर गोपालगंज।
नेताजी सुभाष चंद्र बोसः- मॉर्डन हा.से.स्कूल सिवनी, सरमाउन्ट प.स्कूल सिवनी, दून ब्लासम छिंदवाड़ा रोड सिवनी।
महारानी लक्ष्मी बाई कन्या शालाः- विनर कॉन्वेंट परतापुर रोड भैरोगंज, दिव्य ज्योति विद्या.मंदिर भैरोगंज, स्वामी विवेकानंद शिशु मंदिर भैरोगंज, केम्बि.ज.प.स्कूल बारापत्थर, रॉयल लॉर्ड प.स्कूल बारापत्थर, पब्लिक स्कूल डिवा कैरे. बारापत्थर, इन्टरनेशनल पब्लिक स्कूल बारापत्थर, उदय पब्लिक स्कूल बींझावाड़ा, सरस्वती ज्ञानमंदिर बींझावाड़ा, जैक एण्ड जिल बारापत्थर, लिटिल फ्लॉवर बारापत्थर, ऑलसेंट पब्लिक स्कूल बींझावाड़ा।
शास.कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उर्दू सिवनीः- श्रीराम आदर्श विद्यालय कटंगी रोड, साकेत हाईस्कूल डूंडासिवनी, सरस्वती शिशु मंदिर बरघाट रोड डूंडा सिवनी, क्वीन मेरीज कॉन्वेंट स्कूल सिवनी, आयडियल पब्लिक बोरदई।
सागरः- सरस्वती शिशु मंदिर बखारी, ज्ञानपीठ शिशुमंदिर जाम।
मंुगवानीः- सरस्वती शिशुमंदिर जाम।
क.कान्हीवाड़ाः- रामानुजन शिवहरी, इंडियन इंग्लिश स्कूल कान्हीवाड़ा।
खैररांजीः- सरस्वती शिशुमंदिर खैररांजी, सरस्वती शिशुमंदिर देहवानी, नवोदित शिशु निकेतन सुनेहरा।
खैरापलारीः- प्रतिभा खापाबाजार, रामानुजन खैरापलारी, सरस्वती शिशुमंदिर लोपा, सूर्योदय विद्यामंदिर खैरापलारी, जागृति चिरचिराटोला।

विकासखंड केवलारी
बा.केवलारीः- भारत ज्ञानपीठ केवलारी, सरस्वती शिशुमंदिर केवलारी, सरस्वती शिशुमंदिर अहरवाड़ा, सरस्वती शिशुमंदिर केवलारी, दीप ज्योति केवलारी।
मोहबर्राः- गायत्री ज्ञान मंदिर रूमाल।
पांड्या छपाराः- मॉडल पब्लिक स्कूल पा.छपारा, प्रेरणा शिशुमंदिर जेवनारा, जागृति शिशुमंदिर खुरसुरा, आदर्श ज्ञानमंदिर पा.छपारा।
उगलीः- श्रृद्धा शिशुमंदिर घूरवाड़ा।
छींदाः- सरस्वती शिशुमंदिर टाली।

विकास खंड घंसौर
रानी दुर्गावती कॉन्वेंट स्कूल घंसौर, भावा अकादमी घंसौर, सरस्वती शिशु विद्या.मंदिर गोरखपुर,

विकासखंड धनौरा
सरस्वती शिशुमंदिर पिपरिया भसूड़ा पि., स्वामी विवेकानंद मझगंवा, शांति विद्यापीठ देवरीटीका, ज्ञानोदय विद्यापीठ धनौरा।

विकासखंड लखनादौन
क.लखनादौनः- लिटिल फ्लॉवर स्कूल लखनादौन, सरस्वती शिशुमंदिर निवारीटोला लखनादौन।
बा.लखनादौनः- सूर्योदय विद्यामंदिर लखनादौन।
गनेशगंजः- क्वीन मेरीज कॉन्वेंट शाला बाम्हनवाड़ा।
आदेगांवः- सरस्वती ज्ञानमंदिर आदेगांव, सरस्वती ज्ञानमंदिर विद्या.प्रेमनगर आदेगांव।
गनेशगंजः- क्वीन मेरीज कॉन्वेंट शाला गनेशगंज।
क.लखनादौनः- नेशनल स्टार लखनादौन।
सिहोराः- सरस्वती शिशुमंदिर सिहोरा।
बा.लखनादौनः- रेडीमंट इंग्लिश स्कूल लखनादौन।
लखनादौनः- चित्रांश विद्या निकेतन आदेगांव।

विकासखंड छपारा
चमारीखुर्दः- नवजागृति विद्या.चमारीखुर्द।

विकासखंड बरघाट
गंगेरूआः- अमरदीप पब्लिक विद्या.ताखलाकला।
अरीः- अमरदीप विद्या. अरी।
बुढ़ैनाकलाः- अखंडदीप विद्या.पखारा, सांई पब्लिक स्कूल विजयपानी।
बोरीकलाः- आइडियल पब्लिक स्कूल पिंडरईखुर्द।

धारनाकलाः- सरस्वती शिशुमंदिर धारनाकला।

अटल ज्योति छपारा में बनी अटक ज्योति

अटल ज्योति छपारा में बनी अटक ज्योति

(गजेंद्र ठाकुर)

छपारा (साई)। 22 जून को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सिवनी आए और अटल ज्योति अभियान की शुरूआत कर गए। इस योजना के तहत मध्य प्रदेश में हर जगह चौबीसों घंटे बिजली देने का प्रावधान किया गया है। अटल ज्योति अभियान प्रदेश भर में अटक ज्योति अभियान में तब्दील हो चुका है। सिवनी के विकास खण्ड मुख्यालय छपारा में कल रात से बिजली का अता पता ही नहीं है।
बैनगंगा के तट पर बसे छपारा के निवासियों का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि वह हमेशा नारकीय जीवन भोगनें पर ही मजबूर हैं। ग्राम पंचायत द्वारा साफ-सफाई न करने के कारण गंदगी से परेशानी, मोटर खराब हो जाने से पानी न मिलना एक परेशानी, शराब की दुकान रिहायशी क्षेत्र में लगने से परेशानी, इन सब परेशानियों के बीच विद्युत मंडल के अधिकारियों की दयादृष्टि से 12-12 घंटे अंधेरे में रहने से भी परेशानी। कुल मिलाकर इन दिनों छपारा क्षेत्र के लोग सिर्फ परेशान हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बीती रात्रि 08 बजे से छपारा में बिजली गुल है, जिस ओर बिजली विभाग का कोई भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहा। आज अपरान्ह थोड़ी देर के लिए अवश्य लाईट आई फिर गायब हो गई। इस संबंध में जब कुछ लोग छपारा में पदस्थ बिजली विभाग के अफसरों से जानकारी लेने का प्रयास करते हैं तो उनकी तरफ से वही रटा-रटाया जवाब मिलता है कि लखनादौन से बिजली गुल है, परंतु कोई यह बताने की जहमत नहीं उठाता कि बिजली गुल होने का कारण क्या है?

वैसे अटल ज्योति योजना के शुभारंभ के बाद, अंधेरा कायम रहने के इस सिलसिले के चलते, शिवराज सिंह चौहान की कथनी और करनी में फर्क साफ ही दिखाई दे रहा है। जनचर्चा का विषय है कि अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर छपारावासी चुनाव में कुछ अलग ही करेंगे। छपारा में इन पंक्तियों के लिखे जाने तक बिजली वापस नहीं लौटी थी।

क्या नाव किराए पर लेगी नगर पालिका!

क्या नाव किराए पर लेगी नगर पालिका!

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। शहर में यह चर्चा आम हो गई है कि अपने कर्तव्यों के निर्वहन में पूरी तरह असफल नगर पालिका परिषद को अब नाव किराए पर ले लेनी चाहिए, क्योंकि जरा सी बारिश होने पर सारा शहर तालाब में तब्दील हो जाता है। सड़कों पर भरे पानी के कारण सड़कों के गड्ढ़े दिखाई नहीं पड़ते हैं और लोग दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं।
ज्ञातव्य है कि शहर में लगातार हो रही बारिश के कारण शहर की अधिकांश सड़कें जलमग्न हो जाया करती हैं। कहा जा रहा है कि दूरदृष्टि के अभाव में पहले आओ पहले पाओ (कमीशन) के चलते जहां देखो वहां मनमर्जी की सीमेंट की कमजोर सड़कें बन चुकी हैं। इन सड़कों के आजू बाजू नालियां ही नहीं हैं। जहां नालियों के टेंडर हो चुके हैं वहां महीनों से नालियां नहीं बन पाई हैं।
वार्डवासियों के अनुसार जब नालियों का टेंडर लेने वाले ठेेकेदार से पूछा जाता है तो उनके द्वारा स्पष्ट कहा जाता है कि टेंडर लेने से क्या होता है। अध्यक्ष जी ने मना किया है कि फलां वार्ड का पार्षद, फलां पत्रकार, फलां नेता बदमाश है उसके वार्ड में, उसके घर के पास काम अभी नहीं करना है।
इसी के चलते नालियां ना होने, होने तो सफाई ना हो पाने के कारण गंदा बदबूदार पानी सड़कों पर से बहकर बीमारी को न्योता दे रहा है। दुर्गाचौक में मंदिर के सामने से नेहरू रोड़ को जोड़ने वाले मार्ग पर तो जरा सी बारिश में पानी सड़क के उपर लबालब हो जाता है जिसमें नाली की गंदगी उतराती दिख जाती है।
सड़कों पर भरे पानी के कारण दुपहिया वाहन सवारों को यह अंदाज लगाना मुश्किल होता है कि सड़क पर कहां, कितना बड़ा, कितना गहरा गड्ढ़ा है, और फिर क्या छपाकवाहन गड्ढ़े में जाकर समा जाता है एवं सवार गंदे पानी में ढेर। स्कूली छात्र छात्राओं को कमोबेश रोजना ही इस तरह की समस्याओं से दो चार होना पड़ रहा है।
सावन आने के पहले अषाढ़ माह में ही इंद्रदेव पहले तो मेहरबान दिखे पर फिर लगा कि प्रकृति से छेड़छाड़ से वे कुपित हो गए हैं और धरती वासियों को अपने कोप का भाजन बना रहे हैं। अषाढ़ में हुई अनवरत बारिश से शहर जब तब तालाब में तब्दील हो चुका है।

शहर की इस बदहाल स्थिति को देखकर अब लोग मन ही मन यह कहने पर मजबूर हो रहे हैं कि नगर पालिका परिषद को चाहिए कि लोकल ट्रांसपोटेशन (स्थानीय परिवहन) के लिए पालिका को अब बारिश के चार माह के लिए नाव किराए पर ले लेना चहिए, ताकि लोग नाव से एक मोहल्ले से दूसरे मोहल्ले आ-जा सकें, इससे लोगों के वाहन के तेल की बचत के साथ ही साथ दुर्घटनाएं भी कम हो जाएंगी।

सिवनी जिले में खुल सकता है डॉस बार!

सिवनी जिले में खुल सकता है डॉस बार!

(आशीष कौशल)

नागपुर (साई)। सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के प्रकाश में अब डॉस बार एक बार फिर आबाद हो सकते हैं। वहीं महाराष्ट्र के गृह मंत्री द्वारा नया अध्यादेश लाकर डॉस बार नहीं खुलने देने की बात कही गई है। चर्चा है कि नेशनल हाईवे पर सिवनी जिले में डॉस बार खोलने की तैयारी की जा रही है।
नागपुर पुलिस के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि सिवनी जिले के आधा दर्जन लोग इस बात के लिए खासे फिकर मंद हैं कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के प्रकाश में सिवनी जिले में डॉस बार संचालित किए जाएं। वैसे भी डॉस बार कमाई का खासा जरिया माने जाते हैं।
वहीं, सिवनी में चल रही चर्चाओं के अनुसार डॉस बार के लिए लोगों को पेंच नेशनल पार्क में टुरिया के आसपास, जिला मुख्यालय की सीमा के क्षेत्र सहित खवासा से लखनादौन तक सड़क किनारे इन डॉस बार के लिए जगह मुफीद लग रही है। इसके लिए लोगों द्वारा बने बनाए होटल्स को चिन्हित किया जा रहा है।
वहीं, मुंबई से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो से अतुल खरे ने मुंबई पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि सिवनी के व्हाईट कालर नेता नुमा ठेकेदारों द्वारा मुंबई में बार बालाओं से संपर्क कर उन्हें सिवनी जाकर मुजरा करने का सौदा भी किया जा रहा है। इस सौदे में वर्तमान में बात सतही तौर पर ही भाव ताव तय करने तक ही सीमित है।
चर्चा तो यहां तक है कि सुरा और सुंदरीके शौकीन धनपतियों द्वारा इस काम के लिए आगे आए लोगों की हौसला अफजाई भी की जा रही है। सिवनी जिले की सीमा में खवासा से लखनादौन तक हाल ही के सालों में निर्मित किए गए होटलों (ढाबे नहीं) के संचालकों द्वारा अपने होटल किराए पर देकर पर्दे के पीछे रहकर डॉस बार खुलवाने का काम किए जाने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

वहीं, सामाजिक तौर पर डॉस बार खुलने की खबरों से लोगों की पेशानी पर चिंता की बूंदे स्पष्ट दिखाई देने लगी हैं। एक सज्जन ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर कहा कि हद हो गई, अभी तक तो कमर में बंदूक टांगकर सिवनी को बिहार बनाने की जुगत में थे लोग पर अब तो डॉस बार खुलवाकर ये लोग सिवनी को गर्म गोश्तकी मण्डी बनाने पर तुल गए हैं। अगर ऐसा हुआ तो सिवनी में बाहर से जरायमपेशा लोग बहुतायत में आने लगेंगे और सिवनी का बचा खुचा अमन चैन भी छिन जाएगा।

फोरलेन का दुखड़ा

फोरलेन का दुखड़ा

(शरद खरे)

वर्ष 2008 के उपरांत सड़कों के मामले में सिवनी वासियों की किस्मत बेहद खराब मानी जा सकती है। 2008 के विधानसभा चुनावों के दौरान ही सिवनी में एनएचएआई के फोरलेन पर षणयंत्र का ताना बाना बुना गया। इस ताने बाने में तत्कालीन जिला कलेक्टर पिरकीपण्डला नरहरि की भूमिका भी संदिग्ध ही मानी जा सकती है क्योंकि उस समय बिना किसी को विश्वास में लिए ही 18 दिसंबर 2008 को पिरकीपण्डला नरहरि ने एक आदेश जारी कर सड़क निर्माण में आने वाली वन और गैर वन भूमि पर से पेड़ों की कटाई प्रतिबंधित कर दी थी।
इसके बाद 2009 की गर्मियों में जनमंच का गठन हुआ। जनमंच ने इस सड़क को बनवाने के हर संभव प्रयास आरंभ में किए, किन्तु शनैः शनैः जनमंच से भी लोगों का भरोसा उठने लगा और इसके बाद लोगों की रूचि इस दिशा में लगभग समाप्त ही हो गई। कोई ना कोई राजनैतिक शक्ति भले ही वह कांग्रेस या भाजपा से जुड़ी रही हो ने इस सड़क के लिए हुए हर आंदोलन में दिशा भटकाने का ना केवल जबर्दस्त काम किया है, वरन् वह अपने इरादों में सफल भी रही है। इसी बीच शराब व्यवसाई रहे और लखनादौन मस्जिद के सरपरस्त, वरिष्ठ अधिवक्ता तथा राय पेट्रोलियम के संचालक दिनेश राय के नेतृत्व में लखनादौन जनमंच का गठन भी किया गया। इस संगठन ने भी दिल्ली लखनादौन एक कर दिया, पैसा पानी की तरह बहाया। अपने काम को जस्टीफाई करने के लिए पत्रकारों के दल को कई बार अज्ञात व्यक्ति के खर्च पर दिल्ली की सैर करवाई गई। चर्चा और चटखारों में पत्रकारों के दल को आईपीएलकी टीम की संज्ञा भी दी गई, क्योंकि शराब उत्पादक विजय माल्या ने आईपीएल में टीम खरीदी थी और यहां शराब व्यवसाई पत्रकारों को कथित तौर पर खरीद रहा था। एक बार हाईवे जाम करने पर तत्कालीन एडीएम अलका श्रीवास्तव ने लिखित आश्वासन दिया था इस सड़क को बनाने का। इस तरह का प्रचार मीडिया में हुआ था। एडीएम अलका श्रीवास्तव का वह पत्र या तो दिनेश राय की बैठक की शोभा बढ़ा रहा होगा या फिर रद्दी की टोकरी में पड़ा होगा पर सड़क नहीं बन पाई यही अंतिम सत्य है।
इस सड़क का काम जिला कलेक्टर के आदेश से रोका गया था। कलेक्टर के आदेश को कमिश्नर या राजस्व मण्डल में चुनौति दी जा सकती थी। चुनौति दी भी गई पर प्रतीकात्मक। बताते हैं, तत्कालीन आयुक्त ने ऑफ द रिकार्ड कह दिया अरे सब जानते तो हैं, उपर से प्रेशर है। बस हो गया चुनौति का निराकरण। प्रदेश में भाजपा सरकार है, कांग्रेस विपक्ष में है। केंद्र में बिल्कुल उलट स्थिति है। बावजूद इसके इस सड़क को बनवाने के लिए ना कांग्रेस संजीदा है ना ही भाजपा फिकरमंद नजर आती है।
इस सड़क पर सैकड़ों निरीह, निरपराध लोगों की जान जा चुकी है। इनकी गैर इरादतन हत्याओं का पाप किसके सर मढ़ा जाएगा? निहित स्वार्थों की पूर्ति होने पर सभी अपने अपने बिलों में दुबककर बैठ जाते हैं नहीं हुई तो सड़कों पर शेर बनकर गरजते नजर आते हैं। दरअसल, इस तरह के लोग शतुर्मुग के मानिंद होते हैं। जो समझते हैं दुनिया के बाकी लोग बेवकूफ और अंधे हैं, उन्हें कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा है। वे शतुर्मुग की तरह अपना सर रेत में गड़ाकर समझते हैं कि उन्हें कोई देख नहीं रहा है।
सिवनी का सौभाग्य था कि एक बड़े अफसरान की तैनाती जबलपुर में हुई और किस्मत से वे नागपुर के रहने वाले निकले। दो तीन बार सड़क मार्ग से जाने पर उन्हें इसकी जर्जरावस्था का अहसास हुआ। कहते हैं कि उन्होंने तत्कालीन जिला कलेक्टर अजीत कुमार सहित अपने विभाग के आला अफसरान को बुलाया और सड़क को निश्चित समय सीमा में सुधारने का फरमान जारी कर दिया। साथ ही साथ इस सड़क के आवश्यक सुधार के लिए कोर्ट में परिवाद लगाने का मशविरा भी दिया। कहा जाता है कि एक अधिकारी ने इसकी खबर जनमंच को भी दी पर परिवाद नहीं लगाया जा सका, क्योंकि पुराने परिवाद ही लंबित थे। अगर नया परिवाद लगाया जाता तो आज स्थिति कुछ ओर होती। सिवनी के एक वरिष्ठ अधिवक्ता इस पूरे वाक्ये के साक्षात गवाह भी हैं।
बहरहाल, जबलपुर में तैनात उक्त वरिष्ठ अधिकारी जो सिवनी मूल के निवासी नहीं थे, की व्यक्तिगत रूचि के चलते सिवनी से खवासा का सड़क का हिस्सा मोटरेबल हो गया। इससे स्पष्ट हो जाता है कि अगर नेता, स्वयंसेवी संगठन, सांसद विधायक, एनएचएआई, जिला प्रशासन चाहता तो यह हिस्सा 2008 से ही चलने लायक रहता। अगर नहीं हुआ तो सभी की नियत पर संदेह करना वाजिब है! अब हर कोई इसके 2013 तक मोटरेबल ना हो पाने के लिए अपने अपने तरीके से अपनी सफाई पेश करे पर अंतिम सत्य यही है कि 2008 के बाद एक अधिकारी जो सिवनी मूल का नहीं था की व्यक्तिगत रूचि के चलते यह मार्ग 2013 में ही मोटरेबल हो पाया, जबकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2012 जनवरी में ही प्रकरण अपने पास से डिस्पोज कर दिया गया था। हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं कि सिवनी के नेता, यहां तक कि निहित स्वार्थों को मूल मंत्र मानकर मीडिया के पेशे में आए चुनिंदा कथित मीडिया मुगल भी पूंजीपति धनाड्य नेतानुमा ठेकेदारों के हाथों की कठपुतली बने रहे।
एक बार फिर यह सड़क मार्ग बुरी तरह जर्जर हो चुका है। समाजसेवी नरेंद्र ठाकुर ने इसके सुधार के लिए कलेक्टर से गुहार लगाकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की मांग की है। देर आयद दुरूस्त आयदकी तर्ज पर नरेंद्र ठाकुर का यह कदम स्वागत योग्य है। जिला कलेक्टर से अपेक्षा है कि इस सड़क के इस दर्द को अपने कठोर शब्दों वाले डीओ लेटर के रूप में एनएचएआई के आला अधिकारियों को भेजें और जमीनी हकीकत से आवगत कराते हुए भविष्य के खतरे के प्रति आगाह करवाएं।