शुक्रवार, 16 अगस्त 2013

सद्भाव पर किया कलेक्टर ने ढाई करोड़ का जुर्माना

सद्भाव पर किया कलेक्टर ने ढाई करोड़ का जुर्माना

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी भरत य्ाादव ने शासकीय्ा भूमि पर गौण खनिज गिट्टी के अवैध भंडारण के लिय्ो मेसर्स सद्भाव इंजीनिय्ारिंग प्रा.लि. कंपनी, कैम्प बटवानी तहसील व जिला सिवनी पर २ करोड ४१ लाख ५0 हजार रूपय्ो का जुर्माना लगाय्ाा है।
जिला दंडाधिकारी न्य्ााय्ाालय्ा द्वारा १४ अगस्त को इस आशय्ा का आदेश पारित किय्ाा गय्ाा है। मध्य्ाप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) निय्ाम २00६ के अंतर्गत मेसर्स सद्भाव इंजीनिय्ारिंग प्रा.लि. कंपनी, कैम्प बटवानी, तहसील व जिला सिवनी पर लगाय्ाा गय्ाा य्ाह जुर्माना इस कंपनी द्वारा शासकीय्ा भूमि पर अवैध रूप से भंडारित एवं जब्त की गई ६९00 घनमीटर गौण खनिज गिट्टी के बाजार मूल्य्ा २४,१५,000 रूपय्ो के ठीक दस गुना के बराबर है।
कंपनी द्वारा अर्थदंड की राशि शासकीय्ा कोष में जमा करने के उपरांत ही प्रकरण में जब्त की गई गौण खनिज गिट्टी जब्ती से मुक्त कर कंपनी को सौंपने के आदेश जारी किय्ो गय्ो है। अर्थदंड की राशि जमा न करने पर जब्त गौण खनिज ६९00 घनमीटर गिट्टी शासन के पक्ष में राजसात कर ली जाय्ोगी।
प्रकरण कुछ य्ाूं है कि खनिज निरीक्षक सिवनी द्वारा ७ जुलाई २0११ को ग्राम फुलारा, तहसील व जिला सिवनी स्थित शासकीय्ा भूमि खसरा नंबर १८७ का निरीक्षण किय्ाा गय्ाा था। इस भूमि पर मेसर्स सद्भाव इंजीनिय्ारिंग प्रा.लि. कंपनी, कैम्प बटवानी द्वारा ६९00 घनमीटर गौण खनिज गिट्टी अवैध रूप से संग्रहित/भंडारित करना पाय्ाा गय्ाा। खनिज निरीक्षक ने जांच प्रतिवेदन तैय्ाार कर प्रकरण जिला दंडाधिकारी न्य्ााय्ाालय्ा सिवनी में लगा दिय्ाा। प्रतिवेदन/प्रकरण के आधार कंपनी को ६९00 घनमीटर गौण खनिज गिट्टी के बाजार मूल्य्ा २४,१५,000 रूपय्ो की दो गुना राशि अर्थात ४८,३0,000 का अर्थदंड लगाने के लिय्ो २२ नवंबर २0११ को शोकॉज नोटिस जारी किय्ाा गय्ाा।
कंपनी द्वारा नोटिस का लिखित उत्तर एक मार्च २0१२ को प्रस्तुत किय्ाा गय्ाा। जिसमें कंपनी ने जिला दंडाधिकारी न्य्ााय्ाालय्ा में गौण खनिज के भंडारण के लिय्ो अनुमति देने का आवेदन दिय्ाा, जो कि सुनवाई के उपरान्त तत्कालीन पीठासीन अधिकारी द्वारा निरस्त कर दिय्ाा गय्ाा। भंडारण की अनुमति प्राप्त न होने के बावजूद भी कम्पनी द्वारा शासकीय्ा भूमि पर अवैध भंडारण के लिय्ो की गई स्वीकारोक्ति के आधार पर अधिरोपित अर्थदंड की राशि जमा न करने और अवैधानिक रूप से गौण खनिज का भंडारण किय्ाा जाना प्रमाणित होने पर जिला दंडाधिकारी भरत य्ाादव द्वारा जब्त खनिज के बाजार मूल्य्ा की दुगनी राशि के स्थान पर बाजार मूल्य्ा की दस गुनी राशि का अर्थदंड लगाय्ाा गय्ाा है।

भाजपा का हुआ कांग्रेसीकरण

भाजपा का हुआ कांग्रेसीकरण

पदलोलुपता ने दिलाई संघ और भाजपा के सारे सिंद्धांतो को तिलांजलि

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। पार्टी विद डिफरेंस और स्वयं को कथित रूप से रा.स्व.संघ के अनुशासन और सिद्धांतों का ध्वजवाहक प्रचारित करने वाली भारतीय जनता पार्टी के सिद्धांतों की पोल सरे राह 13 अगस्त को सड़को पर खुलती दिखाई दी।
अवसर था प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर तीसरी बार सरकार बनाने के प्रयास में कार्यकर्ताओं में उर्जा भरने के आशय से विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन का जिसमें प्रदेश संगठन महामंत्री अरविदं मेनन और प्रदेश सरकार के पशुपालन मंत्री तथा पड़ौसी जबलपुर जिले की पाटन जो परिसीमन के पूर्व तक इसी सिवनी संसदीय क्षेत्र का अंग था के विधायक अजय विश्नोई को पंहुचना था किंतु परिस्थितियों को भांप कर अरविंद मैनन तो अपना कार्यक्रम निरस्त कर गये किंतु पूर्व से सिवनी से परिचित और किसी समय प्रदेश मंत्री के रूप में सिवनी जिले के प्रभारी रहे विश्नोई को इस मंशा से सिवनी भेज दिये कि शायद पूर्व परिचय के आधार पर वे जिले के कार्यकर्ताओं को समझाने में सफल हो जाायेंगे।
कहा जा रहा है कि नेताद्वय का वह पूर्वानुमान सार्थक नहीं हो पाया। लगातार कार्यक्रम बनाकर उसे तीन चार बार निरस्त कर चुके अरविंद मेनन की कार्यशैली और स्थानीय नेताओं की कार्यप्रणाली से कथित रूप से त्रस्त सिद्धांतवादी भाजपा के कार्यकर्ता इतने आक्रोशित हुए कि अपने ही नेताओं के हटाओं और मुर्दाबाद के नारे सड़को पर लगाने लगे।
जब से स्थानीय कार्यकर्तााओं का इस बात की भनक लगी है कि प्रदेश के संगठन महामंत्री के नाते टिकट वितरण के सर्वाधिक शक्तिसंपन्न अरविंद मैनन ने छिंदवाड़स में सिवनी विधानसभा के तीनों संभावित सवर्ण वर्र्गीय प्रत्याशियों को इस बार शंात रहने की फटकार लगाई है और प्रदेश के नेतृत्व इस बार किसी पिछड़ा वर्ग के नेता को सिवनी से उम्मीदवार बनाने पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रहा है तब से ही समूचे जिले के पिछ़ा वर्ग के तमाम नेता अपना पूरा ध्यान सिवनी पर केंद्रित कर चुके हैं।
माना जा रहा है कि उस की ही एक झलक गत 13 अगस्त को पैराडाइज लॉन में दिखाई दी थी। यद्यपि पिछड़ा वर्ग के नेताओं के प्रयासों और महत्वाकांक्षाओं को अनुचित नही कहा जा सकता किंतु अभिव्यक्ति का तरीका किसी भी द्रष्टि से सही नहीं माना जा सकता।
राजनीति में महत्वाकांक्षा एक अच्छा लक्षण माना जाता है किंतु उसे प्राप्त करने के लिये सीमाओं का उल्लंघन किसी भी सभ्य समाज विशेषकर सिद्धांतों पर आधारित राजनीति करने का दम भरने व वाली पार्टी के कार्यकर्ताओं को शोभ नहीं देता। 13 अगस्त की घटना से यह तो कुछ हद तक सामने आ गया है कि सत्ता के तामझाम के वशीभूत होकर बड़ी संख्या में ऐसे लोग भाजपा के परिवार में शामिल होते जा रहे हैं जिन्हे पार्टी के सिद्धांतों की न तो जानकारी है और न ही वे उसे समझना चाहते है।
इसके साथ ही पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों को भी इस बात पर गहन चिंतन करना नितांत आवष्यक है कि परिवार के विस्तार की अंधीदौड़ में वे ऐसे लोगों को बढ़ावा देने में लगे हुए हैं जो किसी भी समय स्वयं उनके लिये ही भस्मासुर बनने से नहीं चूकते हैं।
पार्टी के प्रति समर्पित और निःस्वार्थ रूप से सेवा करने वाले कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर अवसरवादी तत्वों को प्रोत्साहित करने का ऐसा खमियाजा तो नेताओं को भोगना ही पड़ता है और उसका प्रदर्शन 13 अगस्त की भंाति हो तो उसके लिये स्वयं नेताओं को ही आत्मावलोकन करना चाहिये।

कारण और परिणाम चाहे जो भी हों कितंु 13 अगस्त की घटनाये जिला विशेषकर सिवनी विधानसभा क्षेत्र कि लिये शुभ लक्षण नहीं मानी जा सकती। जिला मुख्यालय से चलने वाली बयार यदि जिले भर में फैल गई तो ऐसा न हो कि 1978 का इतिहास दोहरा जाये जब प्रदेश में तो जनता पार्टी की सरकार थी किंतु जिले की सभी पाचं सीटों पर कांग्रेस का परचम फहराया था, यदि जिले के लिये ऐसा दुर्भाग्यपूर्ण समय आया तो जिले के विकास का जो अपूर्णनीय नुकसान होगा उसके के लिये जिले की जनता सत्ताधारी दल के पदाधिकारयिां ओर कथित रूप से अपना अधिकार मांगने वाले नेतओं को कभी माफ नहीं करेगी।

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

जिले के लिए नासूर बन गया है बरेला का पावर प्लांट!

जिले के लिए नासूर बन गया है बरेला का पावर प्लांट!

(प्रेम कुमार जैन)

घंसौर (साई)। लखनादौन विधानसभा के अंतर्गत आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड के ग्राम बरेला में लगने वाले देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान् मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड का पावर प्लांट काम आरंभ करने के पहले ही सिवनी जिले के लोगों को करंट के झटके दे रहा है। कथित तौर पर घंसौर क्षेत्र के कुछ ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों के कब्जे में संयंत्र प्रबंधन पूरी तरह बेबस ही नजर आने लगा है।
बताया जाता है कि घंसौर क्षेत्र के कुछ ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों द्वारा क्षेत्र के भोले भाले आदिवासियों को जब चाहे तब गुमराह कर संयंत्र प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन पर बिठा दिया जाता हैं। बताया जाता है कि उक्त ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों द्वारा बाद में पावर प्लांट प्रबंधन से इन आदिवासियों को शांत कराने के एवज में लंबी रकम ऐंठ ली जाती है।
पिछले दिनों झाबुआ पावर लिमिटेड के इस पावर प्लांट को पानी प्रदाय करने के लिए बरगी बांध में गड़ाघाट से बरेला तक खींची जाने वाली पाईप लाईन के रास्ते में पड़ने वाले एक मंदिर को हटाने के लिए आदिवासी तैयार नहीं थे। संयंत्र के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस मंदिर को हटाने के एवज में किसी बिचौलिए द्वारा एक करोड़ की राशि की मांग रखी गई थी।
सूत्रों ने आगे बताया कि जब मामला नहीं सुलटा तब संयंत्र प्रबंधन ने थक हार कर ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों की शरण में अपने आप को ले जाया गया। चर्चा है कि उक्त ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों को इस काम के लिए पच्चीस लाख और आंदोलन करने वालों को पांच लाख रूपए की राशि दी गई है। इन बातों में कितनी सच्चाई है यह बात तो संयंत्र प्रबंधन जाने या नेता नुमा ठेकेदार, पर जबसे बरेला में यह पावर प्लांट संस्थापित होना आरंभ हुआ है घंसौर क्षेत्र का अमन चैन छिन गया है।
2009 में पहली लोकसुनवाई के समय संयंत्र प्रबंधन ने क्षेत्र के लोगों के लिए लोक लुभावने वायदे किए थे। उस वक्त कहा गया था कि संयंत्र की संस्थापना का काम आरंभ होते ही क्षेत्र में खुशहाली आ जाएगी। लोगों को रोजगार मिलेगा, बच्चों की पढ़ाई के लिए संयंत्र प्रबंधन द्वारा स्कूल खोले जाएंगे, बेहतर इलाज के लिए चिकित्सालय खोले जाएंगे।
जबसे काम आरंभ हुआ उसके बाद से घंसौर क्षेत्र के लोग अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि क्षेत्र के ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों ने संयंत्र प्रबंधन के साथ सांठगांठ कर आदिवासियों को छलना आरंभ कर दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि इस तरह के ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों द्वारा ग्रामीणों की भावनाएं भड़काकर उन्हें संयंत्र प्रबंधन के खिलाफ खड़ा कर दिया जाता है, और बाद में ग्रामीण जब आंदोलन करने लगते हैं तो ये लोग पीछे से हट जाते हैं और संयंत्र प्रबंधन से हाथ मिलकार अपना उल्लू सीधा कर लेते हैं।
ग्रामीणों में संयंत्र प्रबंधन और इस तरह के ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों के प्रति रोष और असंतोष जमकर पनप रहा है। अप्रैल माह में संयंत्र के एक कर्मचारी फिरोज द्वारा चार साल की मासूम बाला के साथ किए गए दुराचार के उपरांत उसकी मौत हो गई थी। मासूम गुडिया की मौत पर भी इन ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों ने दुख नहीं जताया और एक बार फिर जाकर संयंत्र प्रबंधन के साथ खड़े होकर अपना उल्लू सीधा किया।

हाल ही में संयंत्र के एक सुरक्षा कर्मी ने आठवीं की एक कोमलांगी बाला को न केवल अश्लील इशारे किए वरन् उसके सामने सड़क पर नग्न भी हो गया था। इस मामले में भी घंसौर क्षेत्र में रोष पनप रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के ब्लेकमेलर नेता नुमा ठेकेदारों द्वारा क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन को साध कर रखा गया है, जिसके चलते पुलिस और प्रशासन द्वारा गौतम थापर के स्वामित्व वाले इस पावर प्लांट के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती है। इसी के चलते शांति का टापू घंसौर क्षेत्र अब आपराधिक गतिविधियों का केंद्र बनकर रह गया है।

एक दूसरे का दौना लुढ़काने में लगे भाजपाई

एक दूसरे का दौना लुढ़काने में लगे भाजपाई

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। भाजपा के संगठन महामंत्री अरविंद मेनन मंगलवार को सिवनी आ रहे हैं, वे कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे। भाजपा के बीच चल रही है चर्चाओं के अनुसार अरविंद मेनन 13 अगस्त को प्राथमिक तौर पर सिवनी के चारों विधानसभा क्षेत्र के कुछ उम्मीदवारों की टिकिट लेकर आ रहे हैं।
अरविंद मेनन के सिवनी आगमन को लेकर भाजपा में दो दिनों से सुगबुगाहट व्याप्त है। दो दिनों से जिला मुख्यालय सिवनी वाली विधानसभा के उम्मीदवारों के बीच रस्साकशी तेज हो गई है। सिवनी सीट के लिए मुख्य रूप से वर्तमान विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, जिला भाजपाध्यक्ष नरेश दिवाकर, नगर पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी, पूर्व जिला भाजपाध्यक्ष सुजीत जैन आदि के नाम सामने आ रहे हैं।
इन सभी संभावित दावेदारों के बीच अब एक नया प्रयोग चल रहा है जो सबसे अधिक चर्चित हो रहा है। इस प्रयोग में एक दूसरे पर कीचड़ उछालने के लिए अब भाजपा के क्षत्रपों ने मीडिया मैनेजमेंट आरंभ कर दिया है। मीडिया में एक दूसरे के खिलाफ खबरें प्लांट कर उसकी कटिंग के सहारे अपनी दावेदारी की फाईल मोटी करने के स्थान पर वे विरोधियों की दावेदारी ना हो पाए इसकी चिंता में तेजी से काम कर रहे हैं।
पिछले दिनों मीडिया में नीता पटेरिया, नरेश दिवाकर, राजेश त्रिवेदी आदि के कारनामे सुर्खियों में रहे हैं। रोजाना प्रदेश कार्यालय से लेकर दिल्ली कार्यालय में बैठे अपने आकाओं को अखबारों की इन कतरनों से आवगत कराया जा रहा है। साथ ही साथ यह अवश्य ही कहा जा रहा है कि भाई साहब भले ही हमारी टिकिट पक्की ना हो पर फलां की टिकिट कटना जरूरी है।
भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि पिछले दिनों सिवनी के एक प्रतिनिधि मण्डल से चर्चा के दौरान अरविंद मेनन सिवनी में भाजपा संगठन और कार्यकर्ताओं के प्रति अपनी राय दे चुके हैं। सूत्रों ने कहा कि अरविंद मेनन का कहना था कि जिला भाजपाध्यक्ष नरेश दिवाकर ने उनके द्वारा भेजे गए बी फार्म पर शंका जाहिर की है।
सूत्रों ने कहा कि इसके अलावा वर्तमान विधायक श्रीमति नीता पटेरिया के बारे मे अरविंद मेनन का कहना था कि उनका ‘‘कमिटमेंट‘‘ पूरा हो चुका है, अब उनसे कुछ लेना देना बाकी नहीं रह गया है। रही बात राजेश त्रिवेदी की तो अरविंद मेनन ने राजेश त्रिवेदी को अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल निरूपित किया है। इतना ही नहीं अरविंद मेनन का मानना है कि जितनी देर में वे सिवनी में झगड़े सुलझाएंगे उतनी देर में तो वे कम से कम तीन जिलों का काम निपटा लेंगे।
इन बातों में सच्चाई कितनी है यह बात तो अरविंद मेनन ही जानते होंगे या फिर भाजपा का यह त्रिफला। पर भाजपा संगठन के लोगों की जुबान पर इस वाक्ये की चर्चाएं तेजी से हो रही हैं। भाजपा के अंदरखाने से छन छन कर बाहर आ रही खबरों पर अगर यकीन किया जाए तो कांग्रेस के क्षत्रप हरवंश सिंह के अवसान के साथ ही भाजपा जिले में दिशा भ्रमित हो गई है। चर्चा तो यहां तक भी है कि सिवनी में भाजपा के संगठन को सालों साल तक हरवंश सिंह ने अपने हिसाब से हांका है।
वहीं, अब यह चर्चा भी तेज हो रही है कि सिवनी में भाजपाईयों की आपसी सर फटव्वल से आजिज आकर हो सकता है कि शीर्ष नेतृत्व सिवनी में नए चेहरे को उतारने का मन बना लें। नए चेहरे की संभावनाओं पर अरविंद मेनन के करीबी सूत्रों का कहना है कि सिवनी से निर्दलीय प्रत्याशी रहे दिनेश राय उर्फ मुनमुन उनकी नजरों में सबसे मुफीद प्रत्याशी हो सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार ‘मनी पावर‘ एण्ड ‘मसल पावर‘ दोनों ही में दिनेश राय सिवनी के भाजपा नेताओं पर बीस बैठ रहे हैं। 13 जून को केंद्रीय मंत्री कमल नाथ के सिवनी आगमन के उपरांत कांग्रेस के दरवाजे दिनेश राय के लिए बंद हो गए बताए जा रहे हैं। इसके पूर्व भाजपा के एक युवा नेता के साथ दिनेश राय के दिल्ली में अनेक नेताओं की देहरी पर मत्था टेकने की चर्चाएं भी सिवनी के सियासी गलियारों में चल रही हैं।

एक वरिष्ठ भाजपाई ने नाम उजागर ना करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि दिनेश राय को अगर भाजपा में लाया जाता है तो उनका विरोध करने का दावा करने वाले ही उनके आगे पीछे घूमते नजर आएंगे। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में नीता पटेरिया को टिकिट मिलने पर भाजपा के अनेक नेताओं ने दिनेश राय के चुनाव चिन्ह कप प्लेट का काम किया था। नीता पटेरिया का विरोध जबर्दस्त था पर वे चुनाव जीत गईं। अब दिनेश राय अगर भाजपा में आते हैं और उनका विरोध होता है तो उसका ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं है। दिनेश राय भाजपा से सिवनी विधानसभा का चुनाव आराम से जीत जाएंगे।

जिले में शिक्षा का दयनीय स्तर

जिले में शिक्षा का दयनीय स्तर

(शरद खरे)

शिक्षा के क्षेत्र में सिवनी जिले की स्थिति बेहद ही दयनीय प्रतीत हो रही है। मामला चाहे सरकारी स्तर पर संचालित शालाओं का हो या निजी तौर पर संचालित शालाओं का, हर जगह गफलत ही गफलत नजर आ रही है। संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव द्वारा जिले में शिक्षा के स्तर को उंचा उठाने के लिए लगातार ‘कठोर कदम‘ उठाने की बात कहकर ‘कड़े निर्देश‘ जारी किए जा रहे हैं, पर शिक्षा विभाग के कारिंदे हैं कि जिले के प्रशासनिक प्रमुख के निर्देशों को ही धता बताने से नहीं चूक रहे हैं।
जिले में कहीं भी चले जाएं वहां बच्चों विशेषकर प्राथमिक शाला के बच्चों के अध्ययन कक्षों को देखकर आपकी रूह कांप उठेगी। जर्जर शाला भवनों में कहीं पानी टपक रहा है, कहीं सीलन भरी है तो कहीं कंबल कीड़े बच्चों पर गिर रहे हैं। सरकारी और गैर सरकारी शालाओं में न तो खेल मैदान हैं न प्रयोगशालाएं और न ही कंप्यूटर लैब से सुसज्जित है स्कूल। कहने को शाला है, पर यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों से पूछिए कि वे किस कदर नारकीय पीड़ा के बीच अध्ययन् ग्रहण कर रहे हैं।
एक समय था जब अध्ययन् अध्यापन के स्थान को ‘गुरूकुल‘ की संज्ञा दी जाती थी। इस गुरूकुल में बच्चों को पढ़ाई लिखाई के साथ ही साथ संस्कार आधारित व्यवहारिक शिक्षा भी दी जाती थी। उस वक्त राजा हो या रंक अगर उसका पुत्र शिक्षा ग्रहण करने गुरूकुल गया है तो उसे गुरूकुल के नियम कायदों को मानना ही होता था। उस समय बच्चों को जंगल से लकड़ी काटना, गाय दुहना, दहलान लीपना, भोजन बनाना आदि अनिवार्य होता था, ताकि वे व्यवहारिक शिक्षा ले सकें। उस समय यह आवश्यक था।
समय बदलता गया गुरूकुलों का स्थान अंग्रेजी स्कूलों ने ले लिया। मूल्य आधारित व्यवहारिक शिक्षा हाशिए में ही चली गई। अब तो आम आदमी एक ही बात सोचता है कि वह अगर पैसा कमा रहा है तो बस दो बातों के लिए। एक तो हारी बीमारी में चिकित्सक को देने के लिए और दूसरा बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए। आज के समय में बच्चों की पढ़ाई एक मिशन है। कल तक मकान बनाना और बच्ची की शादी करना एक मिशन माना जाता था, आज इसके मायने बदल चुके हैं।
जिले भर में संचालित सरकारी और गैर सरकारी स्कूल में ‘दुकान विशेष‘ से कॉपी किताबें या यूनीफॉर्म खरीदने के लिए बच्चों को बाध्य किया जाता है। अब तो शालाओं में बच्चों को हाउस, समूह या ग्रुप में बांटकर उनकी पोशाक भी प्रथक रंग की कर दी गई है। इस पोषाक का लोअर बाजार में तीन से पांच सौ रूपए तथा टी शर्ट दो से पांच सौ रूपए में मिल पाती है। इस पर उस शाला का मोनो चस्पा होता है। इन टी शर्ट और लोअर की कीमत जालंधर या दिल्ली में महज तीस से पचास रूपए होती है। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें यूनीफॉर्म बेचने के लिए शाला प्रबंधन को मोटी रिश्वत देनी होती है तो वे भला कहां से निकालेंगे पैसे? जाहिर है जेब पालक की ही कटनी है।
मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता तो बस मत पूछिए। जिला कलेक्टर खुद कई स्थानों पर मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता चेक कर चुके हैं। आखिर क्या कारण है कि मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता के लिए जिम्मेदार सरकारी मुलाज़िम अपने कर्त्तव्यों के बजाए पैसा कमाने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं। ग्राम पंचायत, जनपद या जिला पंचायत के नुमाईंदे, यहां तक कि सांसद विधायक आखिर मौन क्यों हैं? क्या सांसद विधायक बता पाएंगे कि आज तक उन्होंने कितनी शालाओं में जाकर मध्यान्ह भोजन का निरीक्षण किया।
कांग्रेस भाजपा के संगठन प्रमुखों से लेकर मंत्री सांसद विधायक भी साल में दो तीन बार बच्चों के बीच बैठकर ‘लज़ीज‘ मध्यान्ह भोजन का लुत्फ उठाते हुए फोटो में मीडिया की सुर्खी बन जाते हैं पर क्या वे अपने दिल पर हाथ रखकर इस बात को बता सकते हैं कि कितनी मर्तबा उन्होंने शालाओं में जाकर बन रहे मध्यान्ह भोजन का औचक निरीक्षण किया। क्या जिला पंचायत अध्यक्ष सहित अन्य नुर्माइंंदे, जनपद या ग्राम पंचायत के लोग कभी शाला जाकर इसके निरीक्षण का समय निकाल पाए?
जिले में सरकारी शालाओं में शिक्षकों की कमी साफ दिखाई पड़ती है। ग्रामीण अंचलों में पदस्थ सिवनी में रहने वाले शिक्षक रोज आना जाना करते हैं, क्या आदेगांव या शिकारा में पदस्थ शिक्षक सिवनी से बस का सफर तय कर वहां पहुंचने के बाद इस काबिल बचता होगा कि वह बच्चों को पढ़ा सके। शाम ढलते ही आखिरी बस का टाईम मिलाने के चक्कर में वह बच्चों को पढ़ाने के बजाए बार बार घड़ी ही देखता नजर आता है।
शालाओं में इंटरनेट और कंप्यूटर लेब होना जरूरी है। जिला मुख्यालय में ही इंटरनेट पार्लर्स में बच्चे प्रोजेक्ट की चीजें पार्लर संचालक से मांगते नजर आते हैं। एक बार पुनः अभिभावक की ही जेब तराशी होती है। क्या जिला शिक्षा अधिकारी ने कभी शालाओं विशेषकर निजी शालाओं में जाकर इस बात की जानकारी ली है कि निर्धारित मापदण्डों के हिसाब से उनकी कंप्यूटर लेब और इंटरनेट काम कर रहा है या नहीं। जब इस मद में निजी शिक्षण संस्थाएं अभिभावकों से शुल्क लेती हैं तो इसका उपयोग बच्चों को करने देने के बजाए उन्हें प्राजेक्ट के लिए बाहर क्यों भेजा जाता है?

जिले के प्रभारी मंत्री नाना भाऊ माहोड़ के पास स्कूल शिक्षा विभाग है। जिले का सौभाग्य है कि संवेदनशील कलेक्टर भरत यादव की तैनाती यहां हुई है, नियम कायदों पर चलने वाले जिला शिक्षा अधिकारी रवि बघेल यहां पदस्थ हैं तब तो कम से कम जिले में शिक्षा का स्तर रसातल में नहीं जाना चाहिए। अगर यह हो रहा है तो जरूरत है आत्म मंथन की . . .।

सोमवार, 12 अगस्त 2013

सरकारी संपत्ति से छेड़छाड़, मौन हैं अधिकारी नेता

सरकारी संपत्ति से छेड़छाड़, मौन हैं अधिकारी नेता

एग्रीमेंट हुआ नहीं, तो किसने खोदी लखनादौन की मुख्य सड़क!, गोंगपा कराएगी प्राथमिकी दर्ज, अरविंद मेनन के सामने भाजपाई उठा सकते हैं संगठन के लचीले रवैये का मामला!

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। लखन कुंवर की नगरी लखनादौन में सरकारी संपत्ति के साथ सरेआम छेड़छाड़ हो रही है और अधिकारी तथा नेता हाथ पर हाथ रखे चुपचाप सब देख रहे हैं। नगर परिषद् में मुंह की खाने के बाद भी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी का मौन आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है। वहीं, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा इस मामले की सच्चाई सोमवार को पता कर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कही गयी है।
बताया जाता है कि लखनादौन शहर में नगर परिषद् द्वारा सब्जी मण्डी का निर्माण करवाया जा रहा है। इस मण्डी के निर्माण में अनुविभागीय दण्डाधिकारी द्वारा स्थगन दिए जाने की खबर है। इसके बावजूद भी इस मण्डी का काम युद्ध स्तर पर जारी है। इस संबंध में लखनादौन मण्डल अध्यक्ष और पार्षद नरेश सेन का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में लिखित तौर पर अनुविभागीय दण्डाधिकारी लखनादौन, जिला कलेक्टर सिवनी यहां तक कि भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष नरेश दिवाकर के संज्ञान में यह बात लाई थी। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद भी अब तक इस संबंध में कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

कांग्रेस रणछोड़दास, भाजपा को लेना चाहिए हार का बदला!
यहां यह उल्लेखनीय होगा कि नगर पंचायत लखनादौन के अध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी ने बी फॉर्म जमा करने के पहले ही मैदान छोड़ दिया था। वहीं निर्दलीय सुधा राय ने भाजपा की प्रत्याशी को चारों खाने चित् कर दिया था। लखनादौन और सिवनी में चल रही चर्चाओं के अनुसार कांग्रेस तो रणछोड़दास अपने आप को साबित करने में लगी ही है पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा तो कम से अपनी सरकार और पराजय की लाज बचाने के लिए इस संबंध में संज्ञान लेकर कार्यवाही की जानी थी।

बारिश में भी सुस्सुप्तावस्था में कांग्रेस!
लखनादौन के प्रकरण में कांग्रेस के मौन रवैए को देखकर अब यह चर्चा तेज हो गई है कि वैसे तो बारिश में मेंढक भी अपनी सुस्सुप्तावस्था त्याग देता है पर कांग्रेस है कि चुनावों को देखकर भी अपनी तंद्रा नहीं तोड़ रही है। कांग्रेस के नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से कहा कि अगर मामला शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ सिवनी छोड़कर प्रदेश में कहीं भी घटा होता तो कांग्रेस के प्रवक्ताओं की फौज अब तक पूरी तरह चार्ज होकर गोलीबारी आरंभ कर चुकी होती, पर स्थानीय मामलों में सदा ही बोलने से बचने वाली कांग्रेस इस बार भी अपने चिरपरिचित अंदाज में खामोश ही नजर आ रही है। यही आलम जनपद अध्यक्ष कंचन डोंगरे की गिरफ्तारी के समय कांग्रेस का था। कांग्रेस द्वारा भाजपा के भ्रष्टाचारी अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास तक नहीं किया जाना आश्चर्यजनक ही माना जा रहा है।

व्हीव्हीआईपीज रहते हैं इस सड़क पर!
वहीं, दूसरी ओर लखनादौन शहर के अंदर जिस मार्ग पर अनुविभागीय दण्डाधिकारी लता पाठक, विधायक श्रीमती शशि ठाकुर सहित अन्य वरिष्ठ लोगों के आवास हैं उस मार्ग का ठेका अनुबंध किए बिना ही उस पर काम आरंभ करवा दिया गया है। इस मार्ग में सड़क की खुदाई आरंभ हो चुकी है। यह सरकारी संपत्ति के नुकसान का मामला है।
यह माना जा सकता है कि जिस ठेकेदार को काम मिला है वह इस पर काम कर सकता है, किन्तु नियमानुसार ठेका अनुबंध होने के उपरांत पांच परसेंट परफार्मेंस गारंटी राशि जमा करने के उपरांत ही इस सड़क पर ठेकेदार हाथ लगा सकता है। चर्चा है कि नगर परिषद् लखनादौन में अब सरकारी टकसाल के सिक्कों के बजाए ‘चमड़े के सिक्के‘ चल रहे हैं।

नेता विशेष से भयाक्रांत हैं लोग
वहीं यह चर्चा भी जोरों पर है कि नगर परिषद् द्वारा किए जा रहे नियम विरूद्ध काम करने के खिलाफ आवाज बुलंद करने का साहस किसी में नहीं है। कहा तो यहां तक भी जा रहा है कि नेता विशेष की दबंगई के चलते लखनादौन में कांग्रेस और भाजपा के कार्यकर्ता और नेता जो बाहर तो शेर बने घूमते हैं पर नगर परिषद् के मामलों में अपनी पूंछ दबाकर भीगी बिल्ली बन जाते हैं।

गोंगपा ने लिया संज्ञान
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिलाध्यक्ष हरीश चंद उईके ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि उनके संज्ञान में यह बात आ गई है और वे लखनादौन के नेताओं को निर्देश दे रहे हैं कि अगर इस काम का अनुबंध नहीं हुआ है और कोई काम कर रहा है तो उसके खिलाफ लखनादौन थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई जाए। वहीं लखनादौन के निवासी तथा गोंगपा के जिला उपाध्यक्ष सुरेश पंद्रे ने तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा कि वे अभी लखनादौन से बाहर हैं और अगर नियम विरूद्ध किसी ने भी काम किया है तो वे वस्तु स्थिति का पता लगाने के उपरांत अगर गलत मिलता है तो इसके खिलाफ कार्यवाही अवश्य करेंगे, यहां तक कि वे कोतवाली लखनादौन में प्राथमिकी दर्ज करवाने से भी नहीं चूकेंगे।
माना जा रहा है कि सोमवार को लखनादौन थाने में इस काम की प्राथमिकी दर्ज हो सकती है। वहीं गोंगपा प्रवक्ता विवेक डहेेरिया ने आज हिन्द गजट कार्यालय में चर्चा के दौरान कहा कि सोमवार को वे स्वयं लखनादौन जाएंगे और अगर इस काम का एग्रीमेंट नहीं हुआ है तो वे भी इस संबंध में कार्यवाही करेंगे।

मेनन के सामने उठ सकता है मामला!

13 अगस्त को भाजपा के संगठन महामंत्री अरविंद मेनन सिवनी आ रहे हैं। माना जा रहा है कि लखनादौन में नगर परिषद् द्वारा सरेआम नियम विरूद्ध किए जाने वाले कामों की फेहरिस्त बनाकर कुछ भाजपाई इसे अरविंद मेनन के समक्ष रख सकते हैं। एक भाजपा नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर यह भी कहा कि एक निर्दलीय ने पहले विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशी नीता पटेरिया को नाकों चने चबवाए। उस समय जिला संगठन पर भाजपा की मुखालफत के आरोप लगे थे। इसके उपरांत उक्त निर्दलीय प्रत्याशी की माताजी ने लखनादौन नगर पंचायत के अध्यक्ष के चुनावों में भाजपा को चारों खाने चित् कर दिया। अब जबकि नगर परिषद् के खिलाफ भाजपा के हाथ कोई मामला आया है तब भाजपा खामोश बैठी है। इस मामले को निश्चित तौर पर संगठन महामंत्री अरविंद मेनन के समक्ष रखा ही जाना चाहिए।

नकली खाद बीज और किसान!

नकली खाद बीज और किसान!

(शरद खरे)

किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है इस बात को आजादी के पहले से नेता कहते आए हैं। किसान असली अन्नदाता है। अगर किसान मेहनत करना छोड़ दे तो लोग भूखे मर जाएं। किसानों की बदहाली भी आजादी के उपरांत किसी से छिपी नहीं है। किसानों की दुर्दशा पर आंसू बहाने की फुर्सत किसी को नहीं है। किसानों के हित की बातें राजनेताओं के भाषणों में तो स्थान पा जाती हैं, पर जब अमली जामा पहनाने की बारी आती है तो मामला ठंडे बस्ते के हवाले हो जाता है।
सिवनी जिले में नकली खाद बीज बिकने की खबरें सालों से सुनी जाती रही हैं। आश्चर्य तो इस बात पर होता है कि प्रदेश सरकार की ओर से नकली खाद बीज रोकने की जवाबदेही जिन सरकारी अमलों पर आहूत होती है उन्हीं के द्वारा नकली खाद बीज प्रदाय किया जाए। पिछले दिनों छपारा में नकली खाद बीज बिकने की खबर आई वह भी सरकारी सिस्टम से। जैसे ही यह बात सामने आई वैसे ही देश की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ किसान की रूह कांप गई। अगर बीज ही नकली और घटिया क्वालिटी का होगा तो भला किसान को उपज का पूरा पैसा कैसे मिल सकेगा?
यह सब तब हो रहा है जबकि जिला कलेक्टर भरत यादव पूरी तरह संवदेनशील हैं और वे कई बार स्पष्ट निर्देश दे चुकेे हैं कि घटिया खाद बीज अगर बेचा गया तो अधिकारियों की खैर नहीं। कलेक्टर के निर्देश पर संबंधितों की टीम बनाकर भी जांच की जाने की बातें प्रकाश में आई हैं।
वहीं, शिकायतें यह भी हैं कि एफ वन क्वालिटी की गुणवत्ता वाले बीजों के स्थान पर एफ टू क्वालिटी की गुणवत्ता के बीज किसानों को बांटे जा रहे हैं। किसानों को बीज की क्वालिटी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है पर अधिकारी जो इसके विशेषज्ञ हैं वे तो हर बात से वाकिफ हैं, फिर आखिर इस धांधली को कैसे अंजाम दिया जा रहा है।
कहा जा रहा है कि सालों से किसानों को सरकारी नुमाईंदे छलते आ रहे हैं। किसानों का हक मारा जा रहा है और जिला प्रशासन भी मूक दर्शक बना ही बैठा है। वैसे यह बात संतोषजनक मानी जाएगी कि युवा एवं उर्जावान जिला कलेक्टर भरत यादव द्वारा इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी कर इसे रोकने की बात कही है।
जिला कलेक्टर खुद तो एक एक सोसायटी में जाकर इसे देख नहीं सकते हैं। इसे देखने का काम तो जमीनी स्तर के अधिकारी कर्मचारियों को ही करना है। पर जब सारे कुंए में ही भांग घुली हो तो किया भी क्या जा सकता है। कलेक्टर के अधीन अनुविभागीय दण्डाधिकारी होते हैं।
एसडीएम के पास काम का बोझ होता है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है, किन्तु एसडीएम के मातहत तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी आदि तो इस काम को अंजाम दे सकते हैं, पर वे भी नीरो के मानिंद चैन की बंसी बजा रहे हैं मानो कुछ हुआ ही नहीं हो।
सुरसा की तरह बढ़ती मंहगाई के चलते किसानों की कमर पहले से ही टूटी पड़ी है। किसान किसी तरह जोड़ तगाड़ कर अपना घर चलाते हुए पैदावार बढ़ाने का जतन कर रहे हैं। किसानों को पानी के अभाव का सामना करना पड़ता है उपर से दूबरे पर दो आषाढ़ की कहावत चरितार्थ कर उन्हें नकली खाद और बीज टिकाया जाए तो उनकी पैदावार कैसे बढ़ेगी?
वैसे भी किसानों का ज्यादातर पैसा साहूकारों की तिजोरियों में ही ब्याज़ भरते भरते चला जाता है। प्राकृतिक आपदाएं भी किसानों की रीढ़ तोड़कर रख देती हैं। आपदाओं के चलते शासन द्वारा तय की जाने वाली आनावारी भी किसानों के बीच की लागत तक नहीं निकाल पाती है। इन परिस्थितियों में किसान आखिर जाए तो जाए कहां?
एक ओर तो प्रदेश और केंद्र सरकार अपने बड़े बड़े विज्ञापनों में अपने आप को किसान हितैषी बताने से नहीं चूक रही है वहीं दूसरी ओर उनके ही कारिंदे अगर थाली में छेद पर आमादा हैं तो फिर गलती तो निश्चित तौर पर निज़ामों की ही मानी जाएगी, क्योंकि उनके राज में कसावट का अभाव है।
बहरहाल, किसानों के साथ सिवनी जिले में होने वाले इस छल के लिए जवाबदेह अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ जिला प्रशासन समयसीमा में कठोर कार्यवाही करे ताकि आने वाले समय में कोई भी सरकारी नुमाईंदा किसानों को छलने की बात सपने में भी न सोच सके।

लगता है सिवनी में राजनीति अब प्रशासन पर भारी पड़ चुकी है। वरना क्या कारण है कि जिले का प्रशासनिक प्रमुख स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी करे और उनके मातहत उनकी हुकुम उदूली करें। किसान हैरान परेशान है बीज तो जैसे तैसे उसने बो दिया है, पर बारिश की मार से फसल चौपट होने की आशंका सता रही है। जिनकी फसलें बची हैं वे खाद के नकली होने पर आशंकित हैं। कुल मिलाकर देश के अन्नदाता किसान की सुध लेने की फुर्सत न तो प्रशासन के अमले को है और न ही चुने हुए जनसेवकों को। अब इन परिस्थितियों में किसान अपनी पीड़ा का इजहार करे तो किससे?

रविवार, 11 अगस्त 2013

सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रेक्टिस हुई प्रतिबंधित

सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रेक्टिस हुई प्रतिबं
धित

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई)। चिकित्सा विभाग में कार्यरत सभी डॉक्टरोें द्वारा की जाने वाली निजी प्रैक्टिस पर लगाम लगाने के लिये, प्रदेश शासन द्वारा एक नया आदेश जारी करते हुये स्पष्ट किया गया है कि अब शासकीय चिकित्सक अपने घरों से संचालित होने वाले क्लिनिक पर केवल मरीजों की जांच कर उन्हें परामर्श मात्र दे सकेंगे।
ज्ञातव्य है कि वर्तमान में सिवनी जिले के लगभग सभी शासकीय चिकित्सक अपने आवास पर नर्सिंग होम तथा अन्य तरह की सुविधायें उपलब्ध कराकर मरीजों की जांच के साथ ही साथ पैथॉलॉजी, सोनोग्राफी, एक्स-रे तथा विभिन्न रोगों की जांच संबंधी कार्य भी संचालित कर रहे थे। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों से आ रही लगातार शिकायतें आ रहीं थी कि शासकीय चिकित्सक अस्पतालों की बजाये घरों पर ही ज्यादा समय व्यतीत करते हुये मरीजों की जांच करने में लापरवाही बरत रहे थे।
ऐसी ही शिकायतों के चलते जिनमें सिवनी जिला चिकित्सालय सहित संपूर्ण विकासखंडों में संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ शासकीय चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों का इलाज करने में लगातार लापरवाहियां हो रही थी, जिसके परिणाम स्वरूप शासन द्वारा अरबों रूपये से संचालित चिकित्सा विभाग में उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का लाभ डॉक्टरों की अनुपस्थिति के चलते आम मरीजों को नहीं मिल पा रहा था।
गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शासकीय अस्पताल तो स्थापित कर दिये गये हैं, लेकिन उन ग्रामीण क्षेत्रों में न तो समय पर पदस्थ चिकित्सक उपस्थित रहते हैं और न ही अन्य कर्मचारी। बीते वर्षों में ऐसी कई घटनायें प्रकाश में आई हैं जहां गंभीर मरीजों को समय पर इलाज न मिलने के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी, ऐसी खबरें संपूर्ण प्रदेश से प्राप्त हो रही थी, इसी के परिणाम स्वरूप शासन ने शासकीय चिकित्सकों द्वारा घर पर की जाने वाली निजी प्रैक्टिस पर लगाम लगाने हेतु नये आदेश जारी कर दिये हैं।

अब देखने वाली बात यह है कि सिवनी जिले के इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय में पदस्थ सीएमएचओ द्वारा दिये गये निर्देर्शों का पालन कितनी सख्ती से करवाया जाता है।

वर्क ऑर्डर जारी हुआ नहीं किसने लखन कुंवर की नगरी की खोदी सड़क!

वर्क ऑर्डर जारी हुआ नहीं किसने लखन कुंवर की नगरी की खोदी सड़क!

नगर परिषद् लखनादौन के इंजीनियर किसके काम का कर रहे निरीक्षण! वाहवाही लूटने के चक्कर में हो रहे नियम विरूद्ध काम, लखनादौन एसडीएम से प्रकरण पंजीबद्ध करने की मांग, एक दो दिन में होग वर्क ऑर्डर जारी: सीएमओ चौधरी

(नन्द किशोर/दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

भोपाल/सिवनी (साई)। नगर परिषद् लखनादौन की अध्यक्ष श्रीमती सुधा राय द्वारा वाहवाही लूटने के चक्कर में एक ऐसी सड़क का भूमिपूजन कर काम आरंभ करवा दिया गया है जिसकी ना तो तकनीकि स्वीकृति मिली है, ना ठेकेदार के साथ अनुबंध हुआ है, ना वर्क ऑर्डर जारी किया गया है और ना ही अन्य औपचारिकताएं ही पूरी की गई हैं। ठेकेदार द्वारा नियम विरूद्ध तरीके से इस सड़क को खोद दिया गया है और नगर परिषद् के ‘कर्तव्यपरायण‘ एवं ‘ईमानदार‘ मुख्य नगर पालिका अधिकरी तथा इंजीनियर्स इस काम को मॉनीटर करने में जुट गए हैं। लखनादौन अनुविभागीय दण्डाधिकारी से इस मामले में संज्ञान लेकर प्रकरण पंजीबद्ध करने की मांग की जा रही है ताकि नियम विरूद्ध तरीके से हो रहे इस काम को तत्काल प्रभाव से रोका जा सके।

एक साल पूरा होने पर ठोंकी थी अपनी पीठ!
ज्ञातव्य है कि गत 06 अगस्त को शराब व्यवसाई रहे, लखनादौन मस्जिद के सरपरस्त, बार एसोसिएशन लखनादौन के अध्यक्ष, राय पेट्रोलियम के संचालक एवं नगर परिषद् लखनादौन के पूर्व अध्यक्ष दिनेश राय उर्फ मुनमुन की माता जी श्रीमती सुधा राय के बतौर नगर परिषद् अध्यक्ष लखनादौन, एक साल का कार्यकाल पूरा किए जाने पर जनता की अदालत में कथित रूप से जाने का स्वांग रचा गया था।
इस दौरान अनेक कामों के साथ ही साथ तय कार्यक्रम के अनुसार शाम चार बजे नगर के प्रमुख मार्ग पेट्रोल पंप चौराहे से रोटानाला पुल तक दो करोड़ रूपयों की लागत से बनने वाली टू लेन सड़क का भूमि पूजन नगर परिषद् अध्यक्ष श्रीमती सुधा राय द्वारा बाजे गाजे के साथ किया गया। इसके साथ ही साथ यह काफिला यहां भूमिपूजन के उपरांत जुलूस की शक्ल में सब्जी मण्डी पहुंचा जहां नवनिर्मित सब्जी मण्डी में सुधा राय जनता की अदालत में पेश हुईं। बताया जाता है कि इस सब्जी मण्डी को अनुविभागीय दण्डाधिकारी द्वारा इसके पहले ही स्थगन प्रदाय कर दिया गया है।

हटा के ठेकेदार को मिला है काम
यहां उल्लेखनीय तथ्य यह है कि पेेट्रोल पंप से अग्रवाल स्टोर्स तिराहे तक की सड़क के भाग का निर्माण कार्य मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना के तहत कराया जा रहा है। इस कार्य की निविदा नियमानुसार निकाली गई थी, जिसे दमोह जिले के तहसील मुख्यालय हटा की बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी को ठेका दिया गया है। बताया जाता है कि इसका काम लखनादौन के ही एक ठेकेदार राहुल जैन (9893818161) को प्रदाय किया गया है। इस संबंध में आज जब राहुल जैन से चर्चा कर वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बताया कि वे सिनेमा हाल में हैं और चलचित्र का आनंद उठा रहे हैं अतः इस बारे में बाद में चर्चा की जाए।

भोपाल में लंबित है मामला
भोपाल में शिवाजी नगर स्थित स्थानीय प्रशासन के संचालनालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस सड़क के निर्माण के लिए नगर परिषद् लखनादौन ने निविदा बुलाई थी। यह निविदा हटा की एक कंपनी को दी गई है। यह निविदा अभी पूर्ण नहीं है। इस निविदा में अभी भोपाल में तकनीकि बोर्ड की स्वीकृति के लिए लंबित है। इसकी स्वीकृति के उपरांत निविदा की दरों का अनुमोदन किया जाएगा।
जब भोपाल स्तर पर यह कार्यवाही मुकम्मल हो जाएगी इसके उपरांत निविदा को वापस लखनादौन भेजा जाएगा। लखनादौन में नगर परिषद् द्वारा इस सड़क के ठेकेदार के साथ अनुबंध कराने के पूर्व कुल लागत का पांच प्रतिशत अर्थात दस लाख रूपए की राशि परफार्मेंस गारंटी के तहत जमा करवाई जाएगी। इसके उपरांत बारी आएगी अनुबंध की। अनुबंध के उपरांत ठेकेदार इस सड़क को खोदकर काम आरंभ कर सकता है।

किसकी इजाजत से किसने खोदी सड़क
वस्तुतः मामला अभी भोपाल स्तर पर ही लंबित है और ठेकेदार ने लखनादौन की सड़क का सीना छलनी कर दिया है। सड़क पर निर्माण कार्य आरंभ करने के पहले जेसीवी मशीन से इसकी खुदाई आरंभ की गई बताई जा रही है। यह काम नगर परिषद् लखनादौन के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राधेश्याम चौधरी एवं परिषद में तैनात इंजीनियर्स की देखरेख में किया जा रहा है। स्थानीय शासन एवं विकास विभाग के संचालनालय में तकनीकि शाखा के सूत्रों का कहना है कि जब इस सड़क का अनुबंध का काम पूरा होगा उसके बाद ही इस सड़क पर ठेकेदार द्वारा हाथ लगाया जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि अगर आज अनुबंध के बिना ही इस सड़क को खोदा जा रहा है तो इस पर नगर परिषद् प्रशासन को सड़क खोदने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था के खिलाफ दण्डात्मक कार्यवाही कर पुलिस में इसकी प्राथमिकी दर्ज कराई जानी चाहिए।
सूत्रों का कहना है कि वस्तुतः काम का स्टेटस तो उस वक्त से माना जाएगा जबकि ठेकेदार और नगर परिषद् के बीच अनुबंध हो जाए। अगर अनुबंध नहीं हुआ है तो किस काम की देखरेख कर रहे हैं नगर परिषद् के सीएमओ और इंजीनियर्स। यहां तक कि उस वार्ड के पार्षद और नगर परिषद् अध्यक्ष स्वयं भी इस काम के निष्पादित होने के लिए दोषी माने जाएंगे। आखिर सारी बातें नगर परिषद् के अध्यक्ष, सीएमओ, पार्षद, इंजीनियर्स एवं अन्य लोगों के संज्ञान में हैं फिर इस तरह से नियम विरूद्ध काम किस तरह संपन्न हो रहे हैं यह आश्चर्य का ही विषय है।

एक दो दिन में हो जाएगा वर्क ऑर्डर जारी: सीएमओ
वहीं दूसरी ओर नगर परिषद् लखनादौन के मुख्य कार्यपलन अधिकारी राधेश्याम चौधरी (9424380458) ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि दो करोड़ रूपए की राशि से यह काम मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास की मद से कराया जा रहा है। इसकी निविदा बुलाई गई थी। इसका काम दमोह जिले के हटा के बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया है। इस काम की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए मामला अभी भोपाल गया हुआ है।
सीएमओ का कहना है कि इसका टेंडर हो चुका है। अभी सिर्फ इसका भूमिपूजन किया गया है। उन्होंने कहा कि इसकी औपचारिकताएं भोपाल से पूरी कर आ चुकी हैं। बकौल राधेश्याम चौधरी एक दो दिन यानी सोमवार तक इसका एग्रीमेंट किया जाकर वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा। सड़क खोदने की बात पर सीएमओ एकदम भड़क उठे और उन्होंने कहा कि अभी सड़क की खुदाई नहीं की गई है। अभी ठेकेदार द्वारा महज साफ सफाई का काम करवाया जा रहा होगा।

वाहवाही लूटने करा दिया चालू काम
वहीं, दूसरी ओर चर्चा यह भी तेज हो गई है कि ‘झूठी वाहवाही‘ लूटने के चक्कर में नगर परिषद् की अध्यक्ष श्रीमती सुधा राय द्वारा अपने एक साल पूरे होने के एवज में सड़क का भूमि पूजन करवाकर बिना टेंडर स्वीकृति, बिना एग्रीमेंट, बिना परफार्मेंस राशि जमा करवाए ही ठेकेदार से काम आरंभ करवा दिया गया है। नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी राधेश्याम चौधरी सहित सभी कारिंदे भी इस मामले में आंख बंद किए बैठे हैं।

अनुविभागीय दण्डाधिकारी पर टिकी निगाहें
नियम विरूद्ध बिना एग्रीमेंट के हो रहे इस काम को रोकने के मामले में अब लोगों की निगाहें लखनादौन में पदस्थ अनुविभागीय दण्डाधिकारी पर जाकर टिक गई हैं। लोगों में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार इस काम को रोकने में अब सिर्फ एसडीएम ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। चूंकि लखनादौन में कुछ लोगों का ‘रसूख‘ इतना तगड़ा है कि उनके खिलाफ जाने में आम जनता की रूह कांपती है। अपेक्षा व्यक्त की जा रही है कि इस मामले में एसडीएम स्वयं संज्ञान लेकर नगर पंचायत प्रशासन से इसकी पूछताछ करें। चूंकि कल रविवार है अतः कागजों में हेराफेरी या अन्य गफलत रविवार को संभव नहीं है अतः इस मामले में अगर कार्यवाही होती है तो दूध का दूध पानी का पानी हो सकता है। यहां उल्लेखनीय होगा कि एसडीएम का निवास भी इसी मार्ग पर अवस्थित है।

दर्ज हो थाने में प्राथमिकी
बिना एग्रीमेंट सड़क पर जेसीवी किसने चलवाई? किसने सड़क के किनारे निर्माण सामग्री डाली? इस बारे में पतासाजी जरूरी है। चित्र में देखने से एक जेसीवी सड़क पर काम करती दिख रही है। नगर परिषद् लखनादौन को चाहिए कि अगर वाकई एग्रीमेंट आज 10 अगस्त तक संपादित नहीं हुआ है तो इस सड़क पर काम करने वाली जेसीवी को तत्काल जप्त करवाकर कोतवाली लखनादौन में प्राथमिकी दर्ज कराए कि आखिर वे कौन हैं जो लखनादौन की इस सड़क का सीना छलनी कर रहे हैं।

विधायक भी लें व्यक्गित रूचि
इस मामले में स्थानीय विधायक श्रीमती शशि ठाकुर से भी कार्यवाही की अपेक्षा की जा रही है। श्रीमती शशि ठाकुर का आवास भी इसी मार्ग पर है। अतः वे भी एसडीएम से इस मामले में कार्यवाही के लिए कह सकती हैं। साई न्यूज से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि वे अभी जबलपुर से लौटी हैं और उनके संज्ञान में यह बात लाई गई है। वे इस संबंध में वस्तुस्थिति का पता करके एसडीएम से कार्यवाही के लिए कहेंगे। अगर एग्रीमेंट के बिना सड़क खोदी जा रही है तो इसकी प्राथमिकी नगर परिषद् को थाने में दर्ज कराई जाना चाहिए। इस संबंध में जब एसडीएम से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका मोबाईल बंद ही मिला।