सोमवार, 26 अगस्त 2013

भाजपा विधायकों की टिकिट पर संकट के बादल!

भाजपा विधायकों की टिकिट पर संकट के बादल!

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई)। भारतीय जनता पार्टी और शिवराज सिंह चौहान अपनी हैट्रिक बनाने के चक्कर में अब नए नए फार्मूलों पर विचार कर रहे हैं। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि इस बार सत्तारूढ़ विधायकों में उन पर गाज गिरने की संभावना ज्यादा बताई जा रही है जिनकी जीत का अंतर पंद्रह हजार से कम रहा है।
भारतीय जनता पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि जिन विधायकों ने 15 हजार से कम जीत का अंतर दर्ज किया है, एवं विधानसभा क्षेत्र में जिनका परफार्मेंस पुअर रहा है उनकी टिकिट काटी जा सकती है। सूत्रों की मानें तो इस बार विधानसभा में अपने अपने क्षेत्र के प्रति विधायक प्रश्न पूछने में कितने ज्यादा जागरूक रहे हैं इसे भी क्राईटेरिया बनाया जा सकता है।
सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि विधायकों द्वारा विधानसभा में अपने विधानसभा क्ष़्ोत्र के प्रति पूरी तरह उदासीन रहने के कारण विधायकों के प्रति क्षेत्र में जमकर नाराजगी देखी जा रही है। यही कारण है कि जिन क्षेत्रों में सत्तारूढ़ विधायकों के खिलाफ माहौल खदबदा रहा है उन क्षेत्रों में नए चेहरों को प्रथमिकता दी जा सकती है।
सिवनी जिले की लखनादौन विधानसभा से शशि ठाकुर को वर्ष 2003 के चुनाव में 36313 मत मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वंदी राजेश्वरी उइके को 34617 मत मिले थे और श्रीमती शशि ठाकुर गोंगपा से महज 1696 वोटों से ही जीती थीं। वर्ष 2008 के चुनाव में श्रीमती शशि ठाकुर को 46209 मत मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी बेनी परते को 41211 मत मिले, इस हिसाब से 4998 मत से ही जीती।
ऐसी ही स्थिति सिवनी विधानसभा क्षेत्र की है, जहां वर्ष 2003 में भाजपा के नरेश दिवाकर को 53312 मत मिले थे, जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी रहे राजकुमार खुराना को 37958 मत मिले थे, जिसमें नरेश दिवाकर राजकुमार खुराना से 15 हजार 354 वोटों से जीते थे। 2008 में भाजपा ने नरेश दिवाकर की टिकिट काटकर श्रीमती नीता पटेरिया को दे दिया, जिसमें श्रीमती पटेरिया को 41928 मत मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी निर्दलीय चुनाव लड़े दिनेश राय मुनमुन को 29444 मत मिले। इस चुनाव में श्रीमती नीता पटेरिया  को 12 हजार 484 मतों से ही विजयी मिली।
भाजपा के बरघाट विधायक कमल मर्सकोले को 2008 में 61753 मत मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वंदी कांग्रेस के तीरथसिंह बट्टी को 45943 मत मिले थे, जिसमें कमल को 15810 वोटों से जीत मिली थी।

भाजपा ने अगर टिकिट देने में यह फार्मूला अपनाया तो श्रीमती नीता पटेरिया और शशि ठाकुर की टिकिट पर संकट के बादल मण्डरा सकते हैं। वहीं, विधानसभा में क्षेत्र के बारे में प्रश्न पूछने में तीनों ही विधायक पूरी तरह फिसड्डी ही साबित हुए हैं। हो सकता है टिकिट देने के क्राईटेरिए पर एकाध सप्ताह में गाईड लाईन तय हो जाए।

राख से पूरी तरह पट जाएगा घंसौर

आदिवासियों को छलने में लगे गौतम थापर . . . 6

राख से पूरी तरह पट जाएगा घंसौर

(ब्यूरो कार्यालय)

घंसौर (साई)। मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से महज सौ किलोमीटर दूर सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर तहसील में देश के उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर द्वारा प्रस्तावित बारह सौ साठ मेगावाट कोल आधारित पावर प्लांट की संस्थापना के पहले कंपनी को पर्यावरण की दृष्टि से वृक्षारोपण प्रस्तावित है। कंपनी इस मामले में पूरी तरह मौन है कि वह पर्यावरण को देखते हुए कितने, किस प्रजाति के, कहां पर पौधे लगाएगी।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के भरोसेमंद सूत्रों ने कहा कि प्रस्तावित संयंत्र द्वारा प्रतिदिन 853 टन राख उत्सर्जित की जाएगी, जिसे बायलर के पास से ही एकत्र किया जा सकेगा। समस्या लगभग 1000 फिट उंची चिमनी से उड़ने वाली राख (फ्लाई एश) की है। इससे रोजाना 3416 टन राख उड़कर आसपास के इलाकों में फैल जाएगी। 1000 फिट की उंचाई से उड़ने वाली राख कितने डाईमीटर में फैलेगी इस बात का अन्दाजा लगाने मात्र से सिहरन हो उठती है। सूत्रों का कहना है कि कंपनी ने अपने प्रतिवेदन में हवा का रूख जिस ओर दर्शाया है, संयंत्र के उस ओर बरगी बांध है।
जानकारों का कहना है कि 3416 टन राख प्रतिदिन उड़ेगी जो साल भर में 12 लाख 46 हजार 840 टन हो जाएगी। अब इतनी मात्रा में अगर राख बरगी बांध के जल भराव क्षेत्र में जाएगी तो चन्द सालों में ही बरगी बांध का जल भराव क्षेत्र मुटठी भर ही बचेगा। यह उड़ने वाली राख आसपास के खेत और जलाशयों पर क्या कहर बरपाएगी इसका अन्दाजा लगाना बहुत ही दुष्कर है। इस बारे में पावर प्लांट की निर्माता कंपनी ने मौन साध रखा है।
इतना ही नहीं प्रतिदिन बायलर के पास एकत्र होने वाली 853 टन राख जो प्रतिमाह में बढकर 26 हजार 443 और साल भर में 3 लाख 11 हजार टन हो जाएगी उसे कंपनी कहां रखेगी, या उसका परिवहन करेगी तो किस साधन से, इस बारे में भी झाबुआ पावर लिमिटेड ने चुप्पी ही साध रखी है। अगर राख को संयंत्र के आसपास ही डम्प कर रखा जाएगा तो वहां के खेतों की उर्वरक क्षमता प्रभावित हुए बिना नहीं रहेगी और अगर परिवहन किया जाता है तो घंसौर क्षेत्र की सड़कों के धुर्रे उड़ना स्वाभाविक ही है।

इन परिस्थितियों में पर्यावरण के नुकसान को आंकने का काम मध्य प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण मण्डल का था। बताया जाता है कि बिना प्रस्तावित वृक्षारोपण के ही, कागजों पर वृक्ष लगाकर कंपनी ने पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को साधकर उससे अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया है।

डेंगू का निर्दयी डंक और निष्ठुर प्रशासन

डेंगू का निर्दयी डंक और निष्ठुर प्रशासन

(शरद खरे)

सिवनी जिले में डेंगू की दस्तक वाकई दुखदायी है। डेंगू का कहर सिवनी के निवासियों ने मीडिया के माध्यम से ही देखा और सुना होगा। डेंगू का डंक वाकई बेहद खतरनाक होता है। मलेरिया से तो जिलावासी रूबरू हो चुके हैं पर अब डेंगू का डंक उनकी परेशानी का सबब बन चुका है। स्वास्थ्य प्रशासन भले ही इस मामले में शुतुरमुर्ग के मानिंद रेत में सर गड़ाकर अपने आप को पाक साफ बताने का प्रयास कर रहा हो पर जमीनी हकीकत है हाल ही में हुई डेंगू से एक मौत!
सिवनी में मलेरिया और डेंगू के मरीज मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। ये दोनों ही मच्छर जनित रोग हैं। इसके साथ ही साथ मच्छर जनित चिकन गुनिया भी बेहद ही पीड़ा दायक रोग है। न ही नगर पालिका को न ही स्थानीय निकाय की अन्य शाखाओं को और न ही स्वास्थ्य विभाग ने इसकी रोकथाम के लिए कोई उपाय किए हैं। यही कारण है कि जिले में स्थिति भयावह हो चुकी है। जिला मुख्यालय सिवनी में जहां देखो वहां पानी के डबरे, पोखर भरे पड़े हैं। लोगों के घरों में भी पानी रूका हुआ है। कहा जाता है कि ठहरा हुआ पानी जानलेवा मलेरिया के लिए जिम्मेदार मच्छरों के लिए उपजाऊ माहौल तैयार करता है। जिला चिकित्सालय में पानी के डबरे निश्चित तौर पर इनके लिए संजीवनी का काम ही कर रहे हैं।
कम ही लोग जानते होंगे कि भारत की आजादी वाले साल यानी 1947 में मलेरिया जैसी घातक जानलेवा बीमारी ने देश में दस लाख से ज्यादा लोगों की इहलीला समाप्त कर दी थी। तब से 2006 तक लगभग आठ लाख 12 हजार लोग इसकी चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं। चाहे महानगर हो या छोटा सा कस्बा, लोग आज भी इसके आगोश में हैं।
दरअसल मादा एनाफिलीस़ मच्छर जब इंसान को काटती है, तब वह एक विशेष तरह का वायरस मनुष्य के अंदर प्रविष्ट करा देती है। यही वायरस मलेरिया को जन्म देता है। इस मादा मच्छर के पास इंसानी त्वचा को भेदने के लिए एक विशेष तरह का हथियार होता है। शोध बताता है कि इसके पास पतले डंक के अंत में सुईनुमा जुड़वा अस्त्र होता है।
यह मादा, इंसान के शरीर में इसे प्रविष्ट कराकर रक्त वाहनियों की तलाश करती है। नहीं मिलने पर यह क्रम जारी रखती है। नस मिलने पर यह मादा इंसान का कुछ रक्त चूस लेती है, और फिर डंक को बाहर निकालने के पहले इसमें एक विशेष तरह का एंजाईम उसमें छोड़ देती है। शोधकर्ताओं की मानें तो यह मादा मच्छर दो दिन में ही 30 से 150 तक अंडे देती है। इन अंडों को सेने के लिए उसे मानव रक्त की आवश्यक्ता होती है।
मलेरिया का स्वरूप विश्व भर में इतना विकराल हो गया है कि इसे दुनिया की तीसरे नंबर की सबसे बड़ी महामारी का दर्जा मिल गया है। कहा जाता है कि एड्स से 15 सालों में जितनी जानें जाती हैं, उतनी जान मलेरिया रोग के कारण महज एक साल में ही चली जाती हैं। मलेरिया का सबसे अधिक प्रकोप पांच साल से कम के बच्चों पर होता है। औसतन हर साल दुनिया भर में 25 लाख से अधिक लोग इस भयानक बीमारी से अपने प्राण गंवा देते हैं।
विश्व हेल्थ आर्गनाईजेशन (डब्लूएचओ) का प्रतिवेदन साफ तौर पर बताता है कि मलेरिया के मरीजों की वृद्धि की दर हर साल 16 फीसदी आंकी गई है। यह तथ्य निश्चित रूप से चिंता का विषय कहा जा सकता है। मलेरिया कितनी गंभीर बीमारी है यह इस बात से ही साफ हो जाता है कि हर साल विश्व भर में 2 अरब डालर से ज्यादा इस पर खर्च कर दिया जाता है। इतना ही नहीं मलेरिया को लेकर होने वाले शोधों पर हर साल 580 लाख डालर खर्च किया जाता है।
भारत सरकार इस रोग को लेकर कितनी संजीदा है, यह इस बात से साफ हो जाता है कि देश के स्वास्थ्य बजट का 25 फीसदी हिस्सा मलेरिया की रोकथाम के लिए सुरक्षित रखा जाता है। भारत सरकार के स्वास्थ्य महकमे द्वारा नब्बे के दशक के उत्तरार्ध तक राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम को पृथक से चलाया जाता था। इसके तहत देश के हर जिले मंे मलेरिया नियंत्रण की एक पृथक यूनिट हुआ करती थी।
शनैःशनैः मलेरिया की इकाईयों में कार्यरत सरकारी कर्मियों को शिक्षकों की तरह ही जनसंख्या, पल्स पोलियो आदि के काम में बेगार के तौर पर उपयोग किया जाने लगा। इसके चलते देश भर में एक बार फिर मलेरिया बुरी तरह पैर पसारने लगा है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे समग्र स्वच्छता अभियान में भी भ्रष्टाचार का दीमक पूरी तरह लग चुका है। मलेरिया फैलने की मुख्य वजह अज्ञानता मानी जा सकती है। अज्ञानता के चलते साफ सफाई न रख पाने तथा छोटे छोटे पानी के स्त्रोतों के कारण मच्छरों को प्रजनन का उपजाऊ माहौल मिल जाता है।

सिवनी में डेंगू के मरीजों की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग द्वारा आधिकारिक तौर पर की जा चुकी है। अब तो डेंगू से दो मरीज की मौत की खबर भी आ गई है। छपारा विकासखण्ड के ग्राम केकड़ा में डेंगू से भाई बहन की मौत से मातम पसरा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.वाय.एस.ठाकुर एवं जिला मलेरिया अधिकारी डॉ.एच.पी.पटेरिया को शायद इस खबर से अंतर न पड़े, पर आने वाला समय भयावह है जिससे इंकार नहीं किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के निष्ठुर प्रशासन द्वारा गांव गांव में दवाओं के छिड़काव की बात कही जा रही है। वास्तव में दवाओं का छिड़काव कागजों तक ही सीमित है। अगर ऐसा नहीं होता तो लोगों के बीमार पड़ने या मरने की खबरें नहीं आतीं। अब लोग संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव के कड़े निर्देशोंके स्थान पर ठोस कदमकी ही प्रतीक्षा कर रहे हैं।

रविवार, 25 अगस्त 2013

हवा हवाई वायदों से ठगा आदिवासियों को

आदिवासियों को छलने में लगे गौतम थापर . . . 5

हवा हवाई वायदों से ठगा आदिवासियों को

नौकरी का प्रलोभन दे हड़प ली आदिवासियों की जमीन

(ब्यूरो कार्यालय)

घंसौर (साई)। देश की मशहूर उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से संस्कारधानी जबलपुर से महज सौ किलोमीटर दूर स्थापित होने वाले 1260 मेगावाट के पावर प्लांट में आदिवासियों की जमीनें हवा हवाई वायदों से लेने की शिकायतें आम हो रही हैं।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक कंपनी द्वारा यह प्रलोभन दिया गया था कि जिन परिवारों की भूमि को अधिग्रहित किया जा रहा है उनके परिवार के एक सदस्य को कंपनी द्वारा पात्रतानुसार नौकरी में प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें यह साफ नहीं किया गया है कि उस परिवार के सदस्य को स्किल्ड या अनस्किल्ड लेकर की नौकरी दी जाएगी। अगर अनिस्किल्ड लेबर की श्रेणी में परिवार के सदस्य को नौकरी दी जाती है तो उसकी दिहाड़ी बेहद ही कम बैठने की उम्मीद है। आज प्रबंधन पांच सालों से अपनी बात से पलटता ही दिख रहा है।
आदिवासियों ने बताया कि इसी तरह कंपनी ने यह भी प्रलोभन दिया था कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के पुनर्वास की योजना को भी प्रोजेक्ट में शामिल किया जाएगा। इसका तातपर्य यह है कि जरूरी नहीं है कि उनके स्थायी पुनर्वास की कोई ठोस व्यवस्था की जाए।
कंपनी ने यह भी कहा है कि भू अर्जन अधिनियम के अंतर्गत भू अर्जन की जा रही भूमि के मूल्यांकन के आधार पर शत प्रतिशत राशि के साथ ही साथ दस फीसदी राशि जमा कराए जाने के संबंधी कार्य संबंधित कलेक्टर्स के द्वारा भू अर्जन अधिनियम तथा संबंधित विधिक उपबंधों और शासनादेशों के अंतर्गमत दिए गए प्रावधानों तथा शर्तों के आधार पर किया जाएगा।
कंपनी ने यह भी कहा है कि भूमि का भूअर्जन जिस उपयोग के लिए किया जा रहा है कंपनी उसका उपयोग वही करेगी। इसके लिए कंपनी द्वारा उपयोग में परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा। इस भूमि पर निर्माण के दौरान कंपनी इस बात का पूरा ध्यान रखेगी कि सामान्य जनता को निस्तार आदि में असुविधा न हो।
कंपनी ने शासन को यह भी आश्वासन दिया है कि कंपनी को दी गई भूमि या उसके किसी भाग अथवा उस पर निर्मित किसी भी निर्माण अथवा भवन आदि को कंपनी बेचने, बंधक रखने, दान देने, पट्टे पर देने या अन्य प्रकार से अन्तरित करने का काम नहीं करेगी।

आदिवासियों ने बताया कि संयंत्र के निर्माण के शुरूआती दिनों में प्रलोभनों में फंसकर आदिवासियों द्वारा अपनी जमीने दे दी गई थीं, इसके बाद से संयंत्र प्रबंधन से वायदे मनवाने के लिए उनके द्वारा लगातार संयंत्र के चक्कर लगाए जा रहे हैं, पर संयंत्र प्रबंधन टस से मस होने को राजी नहीं है। अब तो संयंत्र प्रबंधन ने संयंत्र क्षेत्र के चारों ओर चारदीवारी भी बनवा दी है, द्वार पर द्वारपाल भी हैं जो आदिवासियों को ना केवल संयंत्र में प्रवेश से रोकते हैं, वरन् उन्हें दुत्कारने से भी नहीं चूक रहे हैं।

उपेक्षा से आहत हैं इमरान!

उपेक्षा से आहत हैं इमरान!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सिवनी को केंद्र पोषित योजना के तहम 47 करोड़ 36 लाख रूपए की राशि मिलने से भले ही कांग्रेस के अंदर जश्न का माहौल हो पर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष इमरान पटेल इससे आहत बताए जा रहे हैं।
हुआ दरअसल यह कि केंद्रीय मंत्री कमल नाथ ने 13 जून को सिवनी आगमन पर सिवनी जिले को अपने मंत्रालय से सौ करोड़ रूपए देने की घोषणा की थी। इस घोषणा को अमली जामा पहनाते हुए केंद्रीय मंत्री कमल नाथ ने सिवनी को 47 करोड़ 36 लाख रूपए की राशि का आवंटन जारी कर दिया है।
इस आवंटन के जारी होते ही एक विज्ञप्ति मीडिया (हिन्द गजट को नहीं) को प्रेषित में इस आवंटन के लिए कांग्रेस के सिवनी जिले के नेताओं द्वारा केंद्रीय मंत्री कमल नाथ का धन्यवाद ज्ञापित किया गया है। इसमें उल्लेखनीय तथ्य यह है कि यह मामला सिवनी शहर का है, इस लिहाज से इस विज्ञप्ति को शहर कांग्रेस के प्रवक्ता की ओर से जारी किया जाना चाहिए था, जो नहीं हुआ।
इसके अलावा इस विज्ञप्ति में नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इमरान पटेल के नाम का समावेश नहीं किया जाना आश्चर्यजनक माना जा रहा है। उधर, कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि दरअसल, 13 जून को केंद्रीय मंत्री कमल नाथ के सिवनी आगमन पर इमरान पटेल द्वारा मंच से सिवनी में कांग्रेस कार्यालय की मांग की गई, जिसे तत्काल ही कमल नाथ द्वारा मान लिया गया।
सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि कांग्रेस कार्यालय भवन का श्रेय सीधे सीधे शहर कांग्रेस के अध्यक्ष इमरान पटेल को मिलने से कांग्रेस के अनेक स्थापित क्षत्रपों की भुकटियां इमरान पटेल की ओर तन गईं। उधर, इमरान पटेल से इस संबंध में पूछने पर उनका मोबाईल (9584676107) बंद मिला जिससे उनका पक्ष नहीं जाना जा सका।
किन्तु इमरान पटेल के करीबी सूत्रों का कहना है कि इमरान पटेल का नाम इस विज्ञप्ति से षणयंत्र पूर्वक ही कटवाया गया है, ताकि उन्हें हताश किया जा सके। चुनाव के नजदीक आते ही कांग्रेस पार्टी के अंदर भी टिकिट को लेकर शह और मात का खेल तेज हो गया है। इमरान पटेल की मार पकड़ अल्प संख्यकों में अच्छी खासी है, तथा अब तक वे शहर के हर मामले में पूरी तरह मुस्तैदी के साथ कांग्रेस का झंडा लिए खड़े रहे हैं।

एक और बात इमरान पटेल के पक्ष में जाती है कि इमरान पटेल की टीम द्वारा भारतीय जनता पार्टी की गलत नीतियों को समय समय पर उजागर किया है। मामला चाहे श्रीमति नीता पटेरिया द्वारा पुरोहित की थाली से दो सौ रूपए उठाने का हो, भाजपा कार्यालय में विधायक निधि से खुदे नलकूप का या कोई और। टीम इमरान द्वारा सदा ही अपने अधिकार क्षेत्र को ही लक्ष्य बनाकर विज्ञप्तियां जारी की हैं, जबकि जिला कांग्रेस द्वारा जिले की समस्याओं से मुंह चुराकर शिवराज सिंह चौहान को अपना लक्ष्य बनाया जाकर प्रदेश प्रवक्ताओं के अधिकार क्षेत्र में दखलंदाजी की जाती रही है।

आवारा मवेशी, सुअर, कुत्तों का है शिव की नगरी में राज!

आवारा मवेशी, सुअर, कुत्तों का है शिव की नगरी में राज!

(महेश रावलानी/इंजी.उदित कपूर/अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सिवनी शहर को भगवान शिव की नगरी भी कहा जाता है। शिव के गणों की तादाद बेहद ज्यादा होती है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। शिव के गणों में हर कोई आता है। सिवनी का यह दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि यहां आवारा मवेशियों ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। जिनके आंगन में बाउंड्री वाल नही है, वे परेशान है सुअरों से जो उनके घरों में जब चाहे तब घुस आती है। दुकानदार परेशान हैं आवारा मवेशियों से जो उनके प्रतिष्ठानों के सामने गोबर कर जाती है। शहर के कमोबेश हर मोहल्ले के निवासी परेशान हैं आवारा कुत्तों से जो राहगीरों को ना केवल भौंकते हैं वरन उन्हें काटते भी हैं। नगर पालिका अपने मूल दायित्वों को छोड़कर पैसा कमाने के अड्डे में तब्दील हो चुकी है।
सिवनी शहरी सीमा के अंदर ना जाने कितने आवारा मवेशी सड़कों पर आवागमन को प्रभावित करते नजर आते हैं। जिला कलेक्टर के कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही आवारा मवेशी सड़क पर आराम फरमाते नजर आते हैं। बारिश के मौसम में कुत्तों की फौज मोहल्लों में छोटे बच्चों का जीना दूभर किए हुए है। आवारा सुअर का तो मत ही पूछिए, मोहल्लों के कचरों के ढ़ेर और नालियों को उलट पलट सुअर गंदगी को और बुरी तरह फैलाती नजर आती है।

परेशान हैं दुकानदार!
जिन दुकानदारों के प्रतिष्ठान के सामने बारिश की बौछार से बचने छत है, वे बारिश के मौसम में खासे परेशान रहते हैं। इसका कारण यह है कि इन प्रतिष्ठानों के बंद होने के उपरांत यहां रात में बारिश से बचने आवारा मवेशी आकर बैठ जाते हैं। सुबह उठते वक्त ये वहीं गोबर और मूत्र विसर्जन करते हैं और चलते बनते हैं। दुकानदार जब प्रतिष्ठान खोलने आते हैं तब सबसे पहले उन्हे पानी लाना होता है, फिर गोबर हटाकर उस स्थान को धोना होता है, वरना ग्राहकों की चप्पल में लगा गोबर उनके प्रतिष्ठान में दिन भर मख्खियों के बजबजाने का अड्डा बनकर रह जाता है। बारापत्थर के इकलौते वाजिब कांपलेक्स स्मृति धर्मशाला काम्पलेक्सके दुकानदार तो इस बार मंगलवार को जनसुनवाई के वक्त इस समस्या को लेकर जिला कलेक्टर से मिलने का मन भी बना चुके हैं।

जिला दण्डाधिकारी दे चुके हैं स्पष्ट निर्देश!
जिले के युवा एवं संवेदनशील जिलाधिकारी भरत यादव ने अनेक बार बैठकों के दौरान इस आशय के कड़ेनिर्देश जारी किए जा चुके हैं कि आवारा मवेशियों की धरपकड़ की जाए। ये मवेशी आवागमन में बाधा ना बनें इस बारे में भी जिला कलेक्टर ने नगर पालिका, नगर पंचायत, ग्राम पंचायतों को स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं। अब समस्या यह सामने आ रही है कि जिला कलेक्टर के निर्देशों की हुक्म उदूली जिला मुख्यालय में नगर पालिका द्वारा ही की जा रही हो तो भला बाकी इलाकों की कौन कहे।

26 जुलाई को की गई थी कार्यवाही!
नगर पालिका परिषद सिवनी द्वारा 26 जुलाई को अवश्य ही एक दिन के लिए आवारा कुत्तों की धर पकड़ की कार्यवाही की थी। पालिका की यह कार्यवाही दिखावा ही साबित हुई क्योंकि उसके बाद पालिका ने इस काम से अपने हाथ ही खींच लिए थे।

काले जानवर दे रहे दुर्घटनाओं को न्योता
शहर भर में सड़कों पर बैठे जानवर, विशेषकर काले या स्याह रंग के मवेशी आने जाने वालों को दिखाई नहीं पड़ते और वाहन चालक इनसे टकराकर गिरकर चोटिल हो रहे हैं।

हो रही कलेक्टर की हुक्म उदूली!
जिला कलेक्टर के साफ और स्पष्ट निर्देश के बाद भी शहर में आवारा मवेशी, सुअर, कुत्ते जिस तरह कोहराम मचा रहे हैं उससे लगने लगा है कि कलेक्टर के आदेश की हुक्म उदूली में ही नगर पालिका परिषद को बेहद मजा आ रहा है। पालिका पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है, इस लिहाज से अब सिवनी के लोग यह मानने लगे हैं कि नगर पालिका परिषद के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी संगठन भी लोगों के धेर्य की परीक्षा लेने पर उतर आया है।

डरे हुए हैं छात्र छात्राएं
मुंह अंधेरे सुबह साढ़े छः बजे से शहर की शालाओं के विद्यार्थियों को लाने ले जाने वाले आटो घरों घर से बच्चों को एकत्र कर शाला की ओर प्रस्थान करते हैं। मोहल्लों में अपने आटो या बस का इंतजार करने वाले बच्चों को इन आवारा कुत्तों से सदा ही खतरा बना रहता है। ये आवारा कुत्ते छोटे बच्चों की ओर भौंकते हुए दौड़ते हैं। डर के कारण भागते बच्चे कई बार गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। अनेक बच्चों को इन आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने की खबरें भी मिली हैं।

स्वाईन फ्लू को बढ़ावा दे रही पालिका
यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि स्वाईन फ्लू का वायरस सुअरों के माध्यम से ही तेजी से फैलता है। शहर में मलेरिया के उपरांत डेंगू के मरीज मिलने से हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, दूसरी ओर शहर में आवारा घूमते सुअरों से स्वाईन फ्लू के खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता है। जाने अनजाने में राजेश त्रिवेदी के नेतृत्व में नगर पालिका प्रशासन लोगों को बहुत बड़ी बीमारी की मुश्किल में ढकेलता नजर आ रहा है।
24 घंटे बीत गए, घूम रहे हैं सुअर!
नगर पालिका परिषद द्वारा शुक्रवार को जिला जनसंपर्क कार्यालय के माध्यम से एक आदेश की कापी वितरित करवाई गई थी जिसमें सुअर पालकों को 24 घंटे के अंदर सुअरों को शहर से बाहर खदेड़ने की बात कही गई थी। चौबीस घंटे बीत गए और नगर पालिका परिषद की मोटी चमड़ी वाले चुने हुए जनसेवकों के साथ ही साथ पालिका प्रशासन भी इस मामले में मौन ही साधे हुए है। यहां तक कि जिला चिकित्सालय में ही आज आवारा मवेशी और सुअरों का झुण्ड कोहराम मचाता देखा गया।

प्रजनन के मौसम में होते हैं आक्रमक
बारिश को कुत्तों के प्रजनन का मौसम माना जाता है। इस मौसम में कुत्ते वंशवृद्धि के लिए अपना जीवनसाथी चुनते हैं। अमूमन कुत्ते एक झुण्ड बनाकर ही प्रजनन के लिए साथी तलाशते हैं। इनमें ताकतवर नर श्वान ही सहवास कर पाता है। ताकत की जंग में कुत्तों में आपस में लड़ाई आम बात है। इस लड़ाई में अनेक कुत्ते घायल भी हो जाते हैं। इन कुत्तों के बीच में फंसकर पालतू कुत्ते भी अनेक बार घायल हुए हैं। अक्सर इस तरह के कुत्ते 10 से तीस कुत्तों के झुण्ड में घूमतेे दिख जाएं तो आम बात ही है। शहर की कथित वैध और अवैध कालोनियों में इन कुत्तों का आतंक देखते ही बनता है। इस तरह झुण्ड में घूमने वाले कुत्तों द्वारा अपनी भूख मिटाने के लिए पालतू मुर्गे मुर्गियां, बकरी, सुअर, आदि को भी अपना शिकार बनाया जाता है। ये कुत्ते घरों के खुले दरवाजे देखकर, घरों में घुसकर आतंक बरपाते नजर आते हैं।

जरूरी है कुत्तों की नसबंदी
आवारा कुत्ते पकड़ने का काम मूलतः नगर पालिका परिषद का ही है, किन्तु कमीशन के चक्कर में उलझे नगर पालिका के कारिंदों का ध्यान इस ओर नहीं जाता है। सारे शहर में एक ही चर्चा तेज है कि नगर पालिका परिषद में चल रहा कमीशनका गंदा धंधालोगों का अमन चैन छीन रहा है। सारा शहर नरक बन चुका है पर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी द्वारा कभी पार्षदों के साथ ना देने का रोना रोया जाता है तो कभी संगठन द्वारा कथित तौर पर उंगलीकरने की बात कही जाती है। नगर पालिका परिषद ने अब तक कितने श्वान पकड़े और कितनों की नसंबदी कराकर उन्हें कहां छोड़ा इस बारे मेें कोई जानकारी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं कराई जाती है।

नहीं पिटवाई जाती मुनादी
नगर पालिका परिषद में कमीशन के गंदे धंधे के चलते पालतू पशुओं को घरों में बांधकर रखने की ना तो मुनादी पीटी जाती है और ना ही समाचार पत्रों में इस तरह की सूचनाएं ही प्रकाशित करवाई जाती हैं। हालात देखकर लगने लगा है मानो नगर पालिका परिषद द्वारा आम जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के स्थान पर निर्माण कार्य, खरीदी आदि को ही सर्वोच्च प्राथमिकता बना लिया गया है। कहा जाता है कि इस काम में एक बार फिर कमीशन का गंदा धंधा ही कारिंदों को फायदा दिलाता है।

कांजी हाउस पर कितना खर्च!
शहर के अंदर नगर पालिका परिषद के स्वामित्व में एक कांजी हाउस भी है। यह कहां है इस बारे में आज की युवा पीढ़ी को शायद ही पता हो। इस कांजी हाउस पर नगर पालिका प्रशासन द्वारा हर साल कितना खर्च किया जाता है इस बारे में भी शायद ही किसी को कोई जानकारी हो। इस कांजी हाउस में नगर पालिका की कमान राजेश त्रिवेदी के संभालने के उपरांत कितने मवेशी पकड़कर रखे गए हैं इस बारे में भी नगर पालिका के पास शायद ही कोई रिकार्ड हो।

शनिवार, 24 अगस्त 2013

भीमगढ़ के खोले गए 10 गेट

भीमगढ़ के खोले गए 10 गेट

(पवन आरसे)

भीमगढ़ (साई)। तेज बारिश के चलते लबालब भर चुके भीमगढ़ बांध के रात्रि के समय 10 गेट खोले गये, ताकि पानी खतरे के निशान से ऊपर न आ सके। भीमगढ़ बांध के 10 गेट खोलकर 01 लाख घनफुट प्रति सेकेण्ड पानी छोड़ा गया।
लगातार हो रही तेज बारिश से चिंतित जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से कालोनी में पुलिस बल तैनात कर दिया, वहीं खापा की ओर बज्र वाहन खड़ा किया ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके। बताया जाता है कि भीमगढ़ बांध के 10 गेट खुलने से  पानी का बहाव इतना तेज था कि भीमगढ़ की ओर जाने के लिए बने पुल से 4-5 फिट की ऊंचाई से पानी बहने लगा, जिसके चलते कालोनी की ओर जाने वाला रास्ता बंद हो गया।

बताया जाता है कि सुबह 8 बजे तक पानी का एक सा बहाव था, लेकिन बाद ें पानी के बहाव को कम कर दिया गया ताकि आवागमन प्रारंभ हो सके। बताया जाता है कि भीमगढ़ के 10 गेट खोले जाने के कारण जिले सहित बालाघाट, गोंदिया और भंडारा में भी हाईअलर्ट घोषित कर दिया गया था। 

निचली बस्तियां जलमग्न, खुली आपदा प्रबंधन की पोल!

निचली बस्तियां जलमग्न, खुली आपदा प्रबंधन की पोल!


(अखिलेश दुबे)

सिवनंी (साई)। लगातार अड़तालीस घंटों से हो रही बारिश ने आपदा प्रबंध की कलई खोलकर रख दी है। सरकारी विज्ञप्तियों में आपदा प्रबंधन का राग जमकर गाया जाता है पर सिवनी में आपदा प्रबंधन की हवा निकल गई है। गरीब गुरबों की बन आई है, ना खाने को बचा है और ना ही सोने को बिछौना ही बचा है उनके पास।
सोमवार से लगातार सिवनी में बारिश का तांडव जारी है। श्रावण मास के अंतिम दिन बदरा झूम कर बरसे। राखी की पूर्व संध्या से जो बारिश आरंभ हुई वह इन पंक्तियों के लिखे जाने तक नहीं थम सकी है। गुरूवार को अपरान्ह हुई जोरदार बारिश ने शहर को तर बतर कर दिया। शहर के हर इलाके में जमकर पानी भर गया।
बारापत्थर में बाहुबली चौक से पुराने आरटीओ मार्ग पर लगभग डेढ़ फिट पानी सड़क के उपर बहता रहा। नालियां की गंदगी, कचरे के बजबजाते ढेर सड़कों पर बह रहे थे। दुकानों के अंदर पानी घुस गया। अस्पताल में बनी दुकानों में पानी भर गया। सीमेंट की दुकानों में सीमेंट में पानी भर गया, जिससे काफी नुकसान उठाना पड़ा है दुकानदारों को।
शहर के हर इलाके में नालियों से पानी उपर तक लबालब होकर बह रहा था। बारिश की तीव्रता का अंदाजा सड़क पर बहते पानी से सहज ही लगाया जा सकता था। सवाल यही खड़ा है कि क्या निर्ल्लज नगर पालिका प्रशासन को इस बात का अनुमान नहीं था कि बारिश अगर तेज हुई तो शहर की क्या स्थिति हो सकती है? जाहिर है कि निर्माण एवं अन्य कामों में कमीशन और वर्चस्व की जंग में पालिका के मोटी चमड़ी वाले नुमाईंदे यह भूल गए हैं कि उन्हें जनता ने अपनी सेवा के लिए ही चुनकर भेजा है।
कांग्रेस की चुप्पी पर किसी को आश्चर्य नहीं हो रहा है, इसका कारण यह है कि कांग्रेस की तोपें स्थानीय स्तर पर विधायक सांसदों की नीतियों की आलोचना या उनकी कमी उजागर करने के बजाए प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कोसती नजर आती हैं। वस्तुतः यह काम प्रदेश के प्रवक्ताओं का है, जिस पर बेजा अतिक्रमण किया हुआ है सिवनी के प्रवक्ताओं ने।
ललमटिया क्षेत्र, हड्डी गोदाम, विवेकानन्द वार्ड, शहीद वार्ड, लूघरवाड़ा, डूंडा सिवनी आदि क्षेत्र की निचली बस्तियों में लोगों के घरों में घुसे पानी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। लंबे समय बाद लोगों ने इस तरह की जबर्दस्त बारिश का सामना किया है। लोग इसके लिए कतई तैयार नहीं दिख रहे थे।
शहर के मुख्य बाजार बुधवारी में तो देखने लायक आलम था। समूची बुधवारी एक तालाब में तब्दील हो गई थी, दोपहर में। सड़क किनारे बैठकर व्यवसाय करने वालों के उदास चेहरों को देखकर लग रहा था मानों इन्हें रात के खाने की चिंता सता रही है कि घर पर बच्चे भूखे होंगे उन्हें भला क्या खरीदकर ले जाया जाएगा, और पकाकर खिलाया जाएगा?
पानी की टंकी के क्षेत्र का पानी चूना भट्टी के रास्ते विवेकानन्द वार्ड में प्रवेश करता है। इस वार्ड में आर्शीवाद भवन के बाद नाले को रहवासियों द्वारा बंद कर दिया गया है, जिससे पानी सड़क पर बुरी तरह पसर जाता है। वेग से आते पानी ने लोगों के घरों में जमकर कोहराम मचाया। लोग देर रात तक घरों से पानी उलीचते देखे गए।
नगर पालिका प्रशासन को पता नहीं क्यों नालों, नालियों पर अतिक्रमण होता नहीं दिखता है। नगर पालिका के पास जेसीवी मशीन के साथ पर्याप्त अमला है, पर सगा सौतेला के चक्कर में पालिका प्रशासन द्वारा इन नालियों के उपर के अतिक्रमण को नहीं तोड़ा जा रहा है, जिससे शहर में जलप्लावन की स्थिति निर्मित हो रही है।

चेचक के मानिंद उभर आए गड्ढे
जबर्दस्त बारिश ने नगर पालिका परिषद की लीपापोती को भी उजागर कर दिया है। बारिश में सड़कों पर गड्ढों में डाली गई सामग्री बह गई है और शहर की सड़कों पर एक बार फिर से चेचक की तरह से गड्ढे उभरकर सामने आ गए हैं, जिनमें बारिश का पानी भरा होने से इनका अनुमान नहीं लग पाता है और वाहन सवार इनमें गिरकर घायल हो रहे हैं।

अब तक १३३५.८  मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

जिले में अबतक १३३५.८ मि.मी. औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। भू-अभिलेख कायर््ाालय्ा से प्राप्त तहसीलवार वर्षा की जानकारी के अनुसार २३ अगस्त तक सिवनी में ११७६.२ मि.मी., कुरई में १३४३.0 मि.मी., बरघाट में ११५५.६ मि.मी., केवलारी में १२२६.0 मि.मी., छपारा में १२२0.९ मि.मी., लखनादौन में १२६८.५ मि.मी, धनौरा में १६00.0 मि.मी., घंसौर में १६९६.0 मि.मी., कुल १0६८६.२ मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। सिवनी जिले में २३ अगस्त को कुल ५३४.७ मि.मी. वर्षा दर्ज की गई। ज्ञात हो कि गत वर्ष इस अवधि तक जिले में मात्र्ा ७८७.८ मि.मी. औसत वर्षा ही दर्ज की गई थी।

भगवान को भी नहीं बख्शा गौतम थापर ने

आदिवासियों को छलने में लगे गौतम थापर . . . 4

भगवान को भी नहीं बख्शा गौतम थापर ने

(ब्यूरो कार्यालय)

घंसौर (साई)। देश के मशहूर उद्योगपति गौतम थापर की पैसा कमाने की हवस कही जाए या कुछ और कि सिवनी जिले में डलने वाले एक पावर प्लांट के लिए उन्होंने सीताराम मंदिर की जमीन तक को नहीं बख्शा है।
मध्य प्रदेश में बिजली की कमी और क्षेत्र के विकास के लिए सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य घंसौर विकासखण्ड में स्थापित होने वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान झाबुआ पावर लिमिटेड के पावर प्लांट ने गोरखपुर में अनुसूचित जाति के लोगों की जमीन के साथ ही साथ सीताराम के मंदिर की जमीन को भी नहीं बख्शा है। इस मंदिर के प्रबंधक के बतौर जिला कलेक्टर को बताया गया है। सिवनी में एसे कितने निजी मंदिर हैं जिनके प्रबंधक जिला कलेक्टर हैं? अनेक कथित सार्वजनिक  धार्मिक स्थानों में लोगों के एकाधिकार की शिकायतों के बाद भी प्रशासन द्वारा इस ओर ध्यान न दिया जाना आश्चर्यजनक ही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार झाबुआ पावर प्लांट के निर्माण से प्रभावित ग्राम गोरखपुर की निजी अनुसूचित जनजाति एवं सीताराम जी के मंदिर सरवराहकार एवं प्रबंधक जिला कलेक्टर सिवनी की कृषि भूमि एवं उस पर स्थित संरचनाओं के प्रस्तुत अर्जन प्रस्ताव पर 24 जनवरी 1996 को संपन्न भू अर्जन समिति की बैठक में लिए गए निर्णयानुसार तहसील घंसौर जिला सिवनी के ग्राम गोरखपुर की निजी अनुसूचित जाति एवं सीताराम जी के मंदिर सरवाहकार एवं प्रबंधक जिला कलेक्टर सिवनी की कृषि भूमि जिसका क्षेत्रफल 12.66 हेक्टेयर है वह और उस पर स्थित संरचनाओं के संबंध में भूअर्जन अधिनियम 1894 के प्रावधानों के तहत भूअर्जन किए जाने संबंधी स्वीकृति प्रदन की है।
यहां 24 जनवरी 1996 को हुई बैठक का दस्तावेजों में उल्लेख संदेहास्पद ही माना जा रहा है। इसका कारण यह है कि उस वक्त मध्य प्रदेश में राजा दिग्विजय सिंह पहली पारी में मुख्यमंत्री थे, एवं घंसौर से उर्मिला सिंह विधायक और मंत्री थीं। मध्य प्रदेश में भू अर्जन कानून और प्रक्रिया इतनी जटिल नहीं है कि उसके पूरे होने में सोलह साल लग जाएं। अगर 1996 में भूअर्जन समिति की बैठक हुई थी तो उस वक्त इसकी मुनादी क्यों नहीं पीटी गई। अनुसूचित जनजति के किसानों को जो मुआवजा दिया जा रहा है वह आज की दर से दिया जा रहा है अथवा 1996 की दरों से इस बारे में भी झाबुआ पावर लिमिटेड का प्रबंधन पूरी तरह मौन ही है।

दस्तावेजों में मंदिर का प्रबंधक कलेक्टर को दर्शाया जाना आश्चर्यजनक है। जिले में न जाने कितने धार्मिक स्थानों पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। नियमानुसार अगर किसी धार्मिक स्थान का ट्रस्ट बनाकर उसे पंजीकृत नहीं कराया जाता है तो जिला प्रशासन उस पर अपना रिसीवर बिठा सकता है। वस्तुतः सिवनी में एसा कुछ भी होता नहीं दिख रहा है।

पता नहीं कब दी गई, सुअर पालकों को चेतावनी!

पता नहीं कब दी गई, सुअर पालकों को चेतावनी!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। नगर पालिका प्रशासन शहर के आवारा सुअरों को लेकर पता नहीं कैसे एकाएक हरकत में आ गया है। सुअर पालकों को चेतावनी दी गई है कि वे आवारा घूमते सुअरों को चौबीस घंटे के अंदर शहर से बाहर कर दें अन्यथा उनके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
जिला जनसंपर्क कार्यालय सिवनी के माध्यम से आज यह पत्र समाचार पत्रों को प्रेषित किया गया है। इस पत्र की विशेषता यह है कि इसमें ना तो पत्र का क्रमांक ही अंकित है और ना ही जारी किए जाने की तिथि, जिससे लग रहा है मानो नगर पालिका का निर्लज्ज प्रशासन महज रस्म अदायगी और कागजी खाना पूर्ती की गरज से ऐसा कर रहा है।
बहरहाल, विज्ञप्ति पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पत्र क्रमांक पुअसि / जिविशा / 181 / 2013 का उल्लेख किया गया है जो आज से पांच माह पहले 26 मार्च को जारी किया गया था। इसमें कहा गया है कि समस्त सूअर पालकों को सूचित किया जाता है कि आपके द्वारा पोषित सुअरों के द्वारा शहरी क्षेत्र में कफी गंदगी और धमाचौकड़ी मचा रहे हैं, जिससे आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस पत्र में आगे कहा गया है कि मौसम को देखते हुए अत्याधिक बारिश से जहां तहां सुअर (शब्द अस्पष्ट हैं) जिससे डेंगू, मलेरिया, स्वाईन फ्लू जैसी घातक बीमारियों के फैलने की आशंका बनी हुई है। वर्तमान में कुछ मरीज डेंगू के भी पाए गए हैं, जिनका इलाज जिला चिकित्सालय में किया जा रहा है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि आपके द्वारा पालतू सुअरों के द्वारा गंदगी फैलाई जा रही है, पूर्व में भी आपको सूचित किया जा चुका है, कि आपके पशुओं को नगर सीमा के बाहर करें, किन्तु आपके द्वारा ऐसा नहीं किया गया है। आपके द्वारा सूचना की खुलेआम अव्हेलना की जा रही है।
पत्र के अंत में कहा गया है कि आप 24 घंटे के भीतर अपने पालतू पशु सुअरों को नगर सीमा के बाहर करें अन्यथा आपके विरूद्ध पशुपालन अधिनियम 1961 की धारा 253 के अंतर्गत प्रशासनिक (शब्द अस्पष्ट हैं) प्रसतावित कर पुलिस कार्यवाही कर सुअर पालकों के नाम भेजे जाएंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी आपकी होगी।
इस पत्र में मुख्य नगर पालिका अधिकारी के हस्ताक्षर हैं पर कहीं भी तिथि का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इसकी प्रति जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला मलेरिया अधिकारी, सहायक संचालक जनसंपर्क, के साथ ही साथ किसी वाहन चालक को शहर के 24 वार्ड में ध्वनि विस्तारक यंत्र के माध्यम से मुनादी हेतु भेजा गया है।

बताया जा रहा है कि इस तरह नगर पालिका प्रशासन द्वारा आवारा सुअरों के खिलाफ कार्यवाही का एक स्वांग रचा गया है। उल्लेखनीय होगा कि संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव पूर्व में आवारा सुअर, मवेशियों को पकड़ने के लिए साफ तौर पर कड़े निर्देश दे चुके हैं। बावजूद इसके पालिका को कलेक्टर के आदेश की धज्जियां उड़ाने में ज्यादा मजा आता दिख रहा है। कुछ दिन पूर्व आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान पालिका ने अवश्य ही चलाया था, जिसमें पालिका अध्यक्ष ने वाहन में बैठकर फोटो खिचवाकर वाहवाही लूटी थी। यह अभियान एक दिन के बाद ही टॉय टॉय फिस्स हो गया था।