सोमवार, 8 अक्टूबर 2012

छोटे पर्दे पर सबसे मंहगे अभिनेता बन गए हैं सलमान


छोटे पर्दे पर सबसे मंहगे अभिनेता बन गए हैं सलमान

(नेहा घई पण्डित)

मुंबई (साई)। बॉलीवुड के दबंग सलमान खान जहां बड़े पर्दे पर तो हाईएस्ट पेड एक्टर थे ही वहीं अब वे छोटे पर्दे के भी सबसे ज्यादा कमाई करने वाले एक्टर बन गए हैं। जहां सलमान ने टीवी रिएलिटी शो बिग बॉस के पछिले सीजन के लिए प्रति एपिसोड 2.8-3 करोड़ लिए थे वहीं इस बार वे एक एपिसोड का 3.8-4 करोड़ लेंगे।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल शो के मेन होस्ट संजय दत्त थे वहीं सल्लू ने केवल कुछ ही शो होस्ट किए थे। लेकिन इस बार सल्लू अकेले ही शो होस्ट करने जा रहे हैं और जिसके लिए वे चौनल से भारी रकम वसूल करने वाले हैं। इस शो के जरिए सल्लू छोटे पर्दे के भी हाइस्ट पेड एक्टर बन गए हैं।
बिग बॉस से सलमान काफी क्लोज हैं और उन्हें शो का कांसेप्ट भी बेहद पसंद है और इसी के चलते वे शो से जुडे हैं। उल्लेखनीय है कि यह शो टेलिविजन जगत में काफी पॉपुलर हैं और इसमे कोई दो राय नहीं कि सलमान के चलते शो की पॉपुलैरिटी काफी बड़ी है।

सुखोई से दूर ही रहेंगे सचिन


सुखोई से दूर ही रहेंगे सचिन

(आकाश कुमार)

नई दिल्ली (साई)। वायुसेना ने कहा है कि अब वह किसी खिलाड़ी या ग्लैमर की दुनिया से जुड़ी शख्सियत को मानद रैंक नहीं देगी। साथ ही ग्रुप कैप्टन सचिन तेंदुलकर और टीम इंडिया के कप्तान महेंद्रसिंह धोनी को भी सुखोई विमान में उड़ान नहीं भरने दी जाएगी।
वायुसेना के एक अधिकारी ने यह घोषणा की। सोमवार को एयरफोर्स डे मनाया जाना है। इस सिलसिले में एक समारोह में इस अधिकारी ने इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि हम इन्हें ये पदवी इसलिए देते हैं ताकि ये युवाओं को सेना की ओर आकर्षित करने की प्रेरणा दें। लेकिन सम्मान मिलने के बाद ये लोग पलटकर भी नहीं देखते। सचिन को हो लीजिए।
इन्हें दो साल पहले ग्रुप कैप्टन की पदवी दी गई थी। लेकिन एक बार भी इन्होंने वायुसेना की ओर मुड़कर नहीं देखा। जब इस अधिकारी से पूछा गया कि सचिन-धोनी की सुखोई उड़ान का क्या होगा? तो उन्होंने कहा कि हमारे पास और भी काम हैं करने को। सुखोई की कॉकपिट उनके लिए नहीं है।
दो साल पहले वायुसेना ने सचिन तेंदुलकर को अपने ग्रुप कैप्टन के अधिकारी की रैंक से नवाजा था। उसी समय यह घोषणा की गई थी कि उन्हें देश के अग्रिम पंक्ति के विमान सुखोई 30 एमकेआई में उड़ान भरने का मौका दिया जाएगा। देश के युवाओं को वायुसेना की ओर आकर्षित करने के मकसद से सितंबर 2010 में तत्कालीन वायुसेना प्रमुख पीवी नाईक ने सचिन को ग्रुप कैप्टन के मानद रैंक से नवाजा था।
पिछले वर्ष एकदिवसीय विश्व कप जीतने वाले महेंद्र सिंह धोनी को उन्होंने एयर हाउस में बुलाकर सम्मानित भी किया था। इन दोनों को सुखोई की सवारी कराने की भी घोषणा की गई थी। वायुसेना के एक शीर्षस्थ अधिकारी ने कहा कि ग्रुप कैप्टन ओहदा लेने के बाद सचिन ने वायुसेना की ओर मुड़कर भी नहीं देखा।
उन्होंने कहा कि दो साल हो गए हैं। हमारा तो सचिन से कोई सरोकार नहीं हुआ। अब ऐसे में किसी को भविष्य में मानद रैंक देने का औचित्य ही क्या है। यह पूछने पर कि ऐसे में सचिन और धोनी की सुखोई की उड़ान के बारे में क्या निर्णय लिया गया है, अधिकारी ने पलटकर कहा कि हमारे पास बहुत सारे गंभीर काम हैं। सुखोई की काकपिट इस काम के लिए नहीं है।
हाल ही में वायुसेना ने लंदन ओलंपिक में बैडमिंटन का कांस्य पदक जीतने वाली देश की नायिका सायना नेहवाल को आंध्र प्रदेश में डुंडीगल एयरफोर्स प्रशिक्षण अकादमी में बुलाया था और सूर्य किरण के करतबी विमान किरण में उनकी उड़ान हुई थी। रक्षा बिरादरी में इस बारे में कहा गया था कि वायुसेना को सचिन या धोनी के बजाए सायना को सुखोई में उड़ान भरने का अवसर देना चाहिए।
सुखोई विमान में अब तक किसी नागरिक या ग्लैमर की दुनिया की किसी हस्ती ने उड़ान नहीं भरी है। इस विमान में देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा देवी सिंह पाटिल तथा रक्षा राज्यमंत्री पल्लम राजू उड़ान भर चुके हैं।

केजरीवाल के हसीन सपने


केजरीवाल के हसीन सपने

(शेष नारायण सिंह / विस्फोट डॉट काम)

नई दिल्ली (साई)। अन्ना हजारे के पूर्व शिष्य अरविंद केजरीवाल ने अपनी राजनीतिक पार्टी की शुरुआत कर दी है। नई दिल्ली के वीपी हाउस में अपने समर्थकों के बीच उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा के विधिवत शुभारंभ की घोषणा कर दी है। राजनीतिक दल का नामकरण भले ही २६ नवम्बर को होगा लेकिन पार्टी के माहौल बनाने का काम शुरू हो गया है। वीपी हाउस में पार्टी की घोषणा के वक्त अरविंद केजरीवाल के साथ कुछ ऐसे लोग भी आये जिनके बारे में माना जाता है कि वे गंभीर लोग हैं। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि २६ नवम्बर को जब उनकी पार्टी का ऐलान होगा तो कुछ नया ज़रूर होगा।
जिस वीपी हाउस में अरविन्द केजरीवाल ने पार्टी बनाने का हसीन सपना देखा है उस वीपी हाउस में बार बार राजनीतिक इतिहास लिखा गया है। यहाँ कई बार राजनीतिक परिवर्तन की इबारत लिखी गयी है। हो सकता है कि गांधी जयन्ती के दिन अरविंद केजरीवाल के जिन मित्रों का जमावड़ा हुआ था वे किसी नई राजनीतिक शक्ति की शुरुआत के कारण बनें भी लेकिन इस सम्मलेन में कुछ कागज़ पत्र भी जारी किये गए जिनके आधार पर करीब डेढ़ महीने तक बहस  होगी और उसके बाद राजनीतिक पार्टी के गठन की विधिवत घोषणा की जायेगी।
किसी भी पार्टी की घोषणा के पहले उसके बारे में कुछ कहना बहुत ही मुश्किल काम होता है। इसलिए अभी तो सिर्फ अरविंद केजरीवाल और वीपी हाउस में इकठ्ठा हुए उनके साथियों के सपनों के बारे में बात की जायेगी। देश भर के बड़े अखबारों ने केजरीवाल की पार्टी की शुरुआत को बहुत महत्व दिया है और देश के सबसे बड़े अखबार दैनिक जागरण ने अरविंद केजरीवाल की पार्टी की खबर को भी खूब प्राथमिकता दी है।
ज़ाहिर है, हिन्दी क्षेत्रों में इस पार्टी के बारे में बहस शुरू हो चुकी है। जिस दिन पार्टी की घोषणा हुई उसके अगले दिन अखबार ने लिखा था कि अन्ना की जगह महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री के पोस्टर लगे मंच से केजरीवाल ने कहा कि, श्सभी दलों ने मिलकर जन लोकपाल आंदोलन को बार-बार धोखा दिया। हमें चुनौती दी गई कि खुद चुनाव लड़कर बनवा लो। आज हम इस मंच से एलान करते हैं कि हम चुनावी राजनीति में कूद रहे हैं। जनता राजनीति में कूद रही है।श् उनके साथ मंच पर राजनीतिक चिन्तक योगेंद्र यादव भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि आज के ज़माने में राजनीति ज़रूरी है, इससे अलग नहीं रहा जा सकता।
केजरीवाल ने पार्टी के विज़न डाकुमेंट, एजेंडा और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया का मसौदा पेश किया है। अभी कल तक अन्ना हजारे की जयजयकार कर रहे अरविंद केजरीवाल ने उनके एक अहम सवाल का जवाब  भी दिया और अपने भाषण में ऐलान किया कि, श्बार-बार सवाल पूछा जा रहा है कि पैसा कहां से आएगा? लेकिन, ईमानदारी से चुनाव लड़ने के लिए पैसे की जरूरत नहीं होती। मौजूदा नेताओं ने ऐसा माहौल बना दिया है कि राजनीति सिर्फ गुंडों का काम बनकर रह गई है। हमें साबित करना है कि यह देशभक्तों का काम है।श्
जानकार बताते हैं कि उनकी नई पार्टी में केजरीवाल के अलावा प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, गोपाल राय, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को आलाकमान का रुतबा हासिल होगा। जो कागजपत्र पेश किये गए उन पर नज़र डालने से साफ़ समझ में आ जाता है कि अगर यह राजनीतिक पार्टी सत्ता में आ गयी तो बहुत जल्द एक ऐसी व्यवस्था कायम हो जायेगी जो हर तरह से आदर्श होगी।चुनाव में टिकट देने के मामले में इस पार्टी का बहुत ही साफ़ रुख होगा। एक परिवार के एक ही सदस्य चुनाव लड़ने दिया जाएगा। पार्टी का कोई भी सांसद, विधायक लाल बत्ती का इस्तेमाल नहीं करेगा। सांसद और विधायक सुरक्षा और सरकारी बंगला नहीं लेंगे। हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज पार्टी पदाधिकारियों पर लगने वाले आरोप की जांच किया करेगें। पार्टी को मिलने वाले सभी चन्दों का हिसाब पार्टी की वेबसाइट पर डाला जाएगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री से नाराज़ और बिजली के बिल में हो रही अनाप शनाप वृद्धि के खिलाफ दिल्ली में आन्दोलन छेड़ा जाएगा।
अरविंद केजरीवाल की पार्टी के बारे में जो कुछ भी अब तक पता चला है  उसके आधार पर उनकी प्रस्तावित पार्टी से बहुत उम्मीदें नहीं बनतीं। आम आदमी का नाम लेकर शुरू की जा रही पार्टी के शुरुआती कार्यक्रम में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके बल पर बहुत उम्मीद बन सके। लेकिन पार्टी के शुरू करने वालों को बहुत उम्मीदें हैं। केजरीवाल के साथी और गंभीर राजनीतिक कार्यकर्ता गोपाल राय से बात चीत करने का मौक़ा मिला।उनका कहना है कि इस देश में जब तक गाँवसभा में बैठे हुए आम आदमी को अपने आस पास का विकास करने का अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक इस देश में सही मायने में लोकशाही की स्थापना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों की नौकरशाही को जवाहरलाल नेहरू ने अपना लिया था। वहीं बहुत बड़ी गलती हो गयी थी। नौकरशाही के  बारे में उनकी पार्टी नए सिरे से विचार करेगी। लेकिन अभी यह साफ़ नहीं है कि नई नौकरशाही का स्वरुप क्या होगा। इस पर विचार चल रहा है। गोपाल राय से बात करके ऐसा लगता है कि केजरीवाल की पार्टी वही सब करना चाहती है जो महात्मा गाँधी के हिंद स्वराज और ग्राम स्वराज में राजनीतिक कार्य का मकसद बताया गया है। यह अलग बात है कि पूरी बातचीत में उन्होंने महात्मा गांधी का नाम एक बार भी नहीं लिया।
टीम केजरीवाल का आरोप है कि अभी जो व्यवस्था है उसमें सरकारें शुद्धरूप से वीआईपी का काम करती हैं। लेकिन यह ज़रूरी है कि उनको इस तरह से ढाला जाए कि वे आम आदमी का काम के लिए अपने आपको तैयार करें। पार्टी की तैयारी के बारे में भी अरविंद की टीम में काफी हद तक सहमति बन चुकी है। हरावल दस्ता तो वही होगा जो जनलोकपाल के लिए अन्ना हजारे के आन्दोलन में उनके साथ था। लेकिन इसमें उन लोगों को नहीं लिया जाएगा जो अब अलग हो चुके हैं। इस वर्ग में किरण बेदी जैसे लोगों का नाम है। रामदेव से भी अब इन लोगों का कोई लेना देना नहीं है। यह बात तो पहले ही साफ़ हो चुकी है जब टाइम्स नाउ चौनल पर रामदेव के ख़ास साथी वेद प्रताप वैदिक ने अरविंद और उनके साथियों का मजाक उड़ाया था। दूसरा वर्ग उन लोगों का होगा जो किसी भी तरह के जनांदोलनों में काम कर रहे हैं वे भी पार्टी में कार्यकर्ता के रूप में शामिल किये जायेगें। तीसरा वर्ग उन लोगों का होगा जो भ्रष्टाचार से ऊब चुके हैं और जो नई पार्टी एके साथ रहेगें लेकिन बहुत सक्रिय नहीं रहेगें। वास्तव में यही वर्ग पार्टी का जनाधार होगा।
अभी तक के अरविंद केजरीवाल की जो सोच है उसके लागू होने पर देश में एक बहुत बड़ा आन्दोलन शुरू हो सकता है। लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि  भारत का मध्यवर्ग इस पार्टी को कितनी गंभीरता से लेता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जो आन्दोलन चला था उसमें तो यह लोग सफल नहीं रहे थे। इनके ऊपर आरोप लगते रहे हैं कि इन्होने जनता के भ्रष्टाचार विरोधी गुस्से को शासक वर्गों के हित के लिए तबाह कर दिया था और आम आदमी में निराशा भर दी थी। अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन से देश के मध्य वर्ग में बहुत ही ज्यादा उत्साह जगा था और लगने लगा था कि भ्रष्टाचार पर आम आदमी की नज़र है, वह ऊब चुका है और अब निर्णायक प्रहार की मुद्रा में है। आम आदमी जब तक मैदान नहीं लेता, न तो उसका भविष्य बदलता है और न ही उसके देश या राष्ट्र का कल्याण होता है। शायद इसीलिए जब भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे ने आवाज़ बुलंद की तो पूरे देश में लोग उनकी हाँ में हां मिला बैठे। लगभग पूरा मध्यवर्ग अन्ना और अरविंद केजरीवाल के साथ था। भ्रष्टाचार के प्रतीक के रूप में केंद्र की कांग्रेस की सरकार को घेर कर जनमत की ताक़त हमले बोल रही थी लेकिन इसी बीच अन्ना हजारे के आन्दोलन की परतें खुलना शुरू हो गईं।
यह भी शक़ हुआ था कि कहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ उबल रहे जनआक्रोश को दिशा भ्रमित करने के लिए धन्नासेठों ने अन्ना हजारे और उनकी टीम के ज़रिये हस्तक्षेप किया हो। यह डर बेबुनियाद नहीं है क्योंकि ऐसा बार बार हुआ है। आम आदमी को अरविंद केजरीवाल की टीम से बहुत उम्मीदें हैं। यह तो भविष्य ही बताएगा कि आम आदमी अरविन्द केजरीवाल की पार्टी सिर्फ उनके हसीन सपना बनकर रह जाएगी या फिर वह आम आदमी के उम्मीदों को पूरा करेगी।

सौंफ़: सिर्फ़ एक मसाल नहीं


हर्बल खजाना ----------------- 29

सौंफ़: सिर्फ़ एक मसाल नहीं

(डॉ दीपक आचार्य)

अहमदाबाद (साई)। भोजन संपन्न होने के बाद खाना पचाने के तौर पर ली जाने वाली सौंफ़ गजब के औषधिय गुणों वाली होती है। सौंफ़ को लगभग हर भारतीय घरों में किचन में मसाले की तरह और पानदान मुखवास की तरह देखा जा सकता है। सौंफ़ का वानस्पतिक नाम फ़ीनीकुलम वलगेयर है।
सौंफ में कैल्शियम, सोडियम, फास्फोरस, आयरन और पोटेशियम जैसे कई अहम तत्व पाए जाते हैं। आदिवासियों का मानना है कि सौंफ़ के निरन्तर उपयोग से आखों की रौशनी बढती है और मोतियाबिन्द की शिकायत नहीं होती। प्रतिदिन दिन में तीन से चार बार सौंफ के बीजों की कुछ मात्रा चबाने से खून साफ होता है और त्वचा का रंग भी साफ हो जाता है।
डाँग गुजरात के अनुसार सौंफ़ के नित सेवन से शरीर पर चर्बी नही चढती और कोलेस्ट्राल भी काफ़ी हद तक काबू किया जा सकता है और इस बात की प्रमाणिकता आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है। अपचन और खाँसी होने की दशा में एक कप पानी में एक चम्मच सौंफ को उबालकर दिन में तीन से चार बार पिया जाए तो समस्या समाप्त हो जाती है।
हाथ-पाँव में जलन की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया के बीजों और मिश्री को कूट कर खाना खाने के पश्चात 5-6 ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम हो जाता है। (साई फीचर्स)

(लेखक हर्बल मामलों के जाने माने विशेषज्ञ हैं)

अवैध रूप से लगे हैं आईडिया के टावर!


एक आईडिया जो बदल दे आपकी दुनिया . . .  29

अवैध रूप से लगे हैं आईडिया के टावर!

छत्तीसगढ़ जैसा कदम देश भर में उठ जाए तो हो जाएग गजब का आईडिया

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई) आदित्य बिरला और कुमार मंगलम बिरला के स्वामित्व वाली निजी क्षेत्र की मोबाईल सेवा प्रदाता कंपनी आईडिया के टावर देश भर में अवैध तौर पर ही काम कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकाय की तर्ज पर अगर कार्यवाही को अंजाम दिया गया तो आने वाले समय में आईडिया के उपभोक्ता नेटवर्क के लिए तरस सकते हैं।
ज्ञातव्य है कि पिछले दिनों सूरजपुर की नगर पालिका परिषद ने नगर में संचालित आईडिया कंपनी के पांच टावरों को सील कर दिया है। सील किये गए टावरों में 2 अवैध रूप से संचालित व 3 टावर बिना नियमितीकरण के चल रहे थे। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के निर्देश पर टावरों के संदर्भ में मिले मार्गदर्शन के तहत नगर पालिका परिषद ने उक्त कार्रवाई की। टावरों को सील करने की कार्रवाई के संबंध में सी.एम.ओ. व लोक निर्माण विभाग के सभापति ने बताया कि अवैध व बिना अनुमति के चल रहे टावरों पर दूसरी बंडी कार्रवाई की गई है।
बताया जाता है कि यहां इसके पूर्व एयरटेल के 02 अवैध टावरों को सील किया गया था। इसके उपरांत आईडिया कंपनी के राष्ट्रीय राजमार्ग, भैयाथान रोड, महगवां, केतका रोड, शंकर लॉज परिसर में स्थित टावरों को न.पा. दस्ते के द्वारा सील किया गया है। इस संबंध में बताया जाता है कि अकेले आईडिया कंपनी के उपर शासन के नियमानुसार 15 से 50 गुना समझौता शुल्क के तहत रूपये 60 लाख से उपर बकाया है।
इतना ही नहीं इन टावरों पर दिगर कम्पनियों के भी बी.टी.एस. लगे होने के मामले में भी नगरपालिका कंपनी के खिलाफ अमानत में खयानत का मामला दर्ज कराने की मंशा में है। उल्लेखनीय है कि नगरपालिका के द्वारा आईडिया कंपनी को पूर्व में 10-15 बार पत्र जारी कर नियमतिकरण तथा अवैध टावरों की अनुज्ञा प्राप्त करने के लिए पत्र लिखा था परन्तु आईडिया की ओर से कोई पहल न होने पर परिषद ने निर्णय लेते हुए 48 घंटे का अंतिम नोटिस टावरों में चस्पा एवं कंपनी के अधिकारियों को प्रेषित कर टावर सील की कार्रवाई की।

(क्रमशः जारी)

श्राद्ध कर्म

श्राद्ध कर्म

(पंडित दयानन्द शास्त्री)

नई दिल्ली (साई)। पितृ अत्यंत दयालु तथा कृपालु होते हैं, वह अपने पुत्र-पौत्रों से पिण्डदान तथा तर्पण की आकांक्षा रखते हैं। श्राद्ध तर्पण आदि द्वारा पितृ को बहुत प्रसन्नता एवं संतुष्टि मिलती है। पितृगण प्रसन्न होकर दीर्घ आयु, संतान सुख, धन-धान्य, विद्या, राजसुख, यश-कीर्ति, पुष्टि, शक्ति, स्वर्ग एवं मोक्ष तक प्रदान करते हैं।
कैसे प्राप्त होता है श्राद्घ
यह जिज्ञासा स्वाभाविक है कि श्राद्घ में दी गई अन्न आदि सामग्री पितरों को कैसे प्राप्त होती है। विभिन्न कर्मों के अनुसार मृत्यु के बाद जीव को भिन्न योनियां प्राप्त होती हैं। कोई देवता, पितृ, प्रेत, हाथी, चींटी तथा कोई चिनार का वृक्ष या तृण बनता है। श्राद्घ में दिए गए छोटे से पिंड से हाथी का पेट कैसे भर सकता है। छोटी-सी चींटी इतना बड़ा पिंड कैसे खा सकती है और देवता तो अमृत से तृप्त होते हैं। पिंड से उन्हें कैसे तृप्ति मिल सकती है।
शास्त्रों का निर्देश है कि माता-पिता आदि के निमित्त उनके नाम और गोत्र का उच्चारण कर मंत्रों द्वारा जो अन्न आदि अर्पित किया जाता है, वह उनको प्राप्त हो जाता है। यदि अपने कर्मों के अनुसार उनको देव योनि प्राप्त होती है तो वह अमृत रूप में उनको प्राप्त होता है। उन्हें गन्धर्व लोक प्राप्त होने पर भोग्य रूप में, पशु योनि में तृण रूप में, सर्प योनि में वायु रूप में, यक्ष रूप में पेय रूप में, दानव योनि में मांस के रूप में, प्रेत योनि में रुधिर के रूप में और मनुष्य योनि में अन्न आदि के रूप में उपलब्ध होता है।
जब पित्तर यह सुनते हैं कि श्राद्घकाल उपस्थित हो गया है, तो वे एक-दूसरे का स्मरण करते हुए मनोनय रूप से श्राद्घस्थल पर उपस्थित हो जाते हैं और ब्राह्मणों के साथ वायु रूप में भोजन करते हैं। यह भी कहा गया है कि जब सूर्य कन्या राशि में आते हैं तब पित्तर अपने पुत्र-पौत्रों के यहां आते हैं।
विशेषतः आश्विन-अमावस्या के दिन वे दरवाजे पर आकर बैठ जाते हैं। यदि उस दिन उनका श्राद्घ नहीं किया जाता तब वे श्राप देकर लौट जाते हैं। अतः उस दिन पत्र-पुष्प-फल और जल-तर्पण से यथाशक्ति उनको तृप्त करना चाहिए। श्राद्घ विमुख नहीं होना चाहिए। (साई फीचर्स)

शुक्रवार, 5 अक्टूबर 2012

12 तक रहेगी किंगफिशर में तालाबंदी


12 तक रहेगी किंगफिशर में तालाबंदी

(महेंद्र देशमुख)

नई दिल्ली (साई)। खरबपति विजय माल्या के स्वामित्व वाले और आर्थिक खस्ताहाली से जूझ रही किंगफिशर एयरलाइंस ने अपनी आंशिक तालाबंदी १२ अक्तूबर तक बढ़ा दी है। कम्पनी प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच वेतन का भुगतान न होने के मुद्दे पर चल रहा गतिरोध अभी तक खत्म नहीं हो पाया है।
कर्मचारियों को पिछले सात महीने से वेतन नहीं मिला है जिसके विरोध में वे हड़ताल पर चले गए हैं। कर्मचारियों के एक वर्ग की हड़ताल को अवैध बताते हुए किंगफिशर प्रबंधन ने अपनी विज्ञप्ति में कहा है कि अभी तक कम्पनी का कामकाज सामान्य नहीं हो पाया है इसलिए आंशिक तालाबंदी १२ अक्तूबर तक बढ़ानी पड़ी है।
यह तालाबंदी सोमवार शाम से शुरू हुई थी। कम्पनी के बढ़ते संकट से चिंतित किंगफिशर के कर्जदाताओं की मुंबई में आपात बैठक हुई जिसमें स्थिति पर चर्चा की गई। इस बीच, किंगफिशर एयरलाइंस को कुछ राहत देते हुए बैंकों ने कुछ और कर्ज देना मंजूर कर लिया है।

एफडीआई का बढ़ गया दायरा


एफडीआई का बढ़ गया दायरा

(शरद खरे)

नई दिल्ली (साई)। आर्थिक सुधारों के दूसरे दौर को आगे बढ़ाते हुए केन्द्र सरकार ने बीमा और पेंशन क्षेत्रों में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के महत्वपूर्ण विधेयकों में संशोधनो को मंजूरी दे दी है। बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को बढ़ावा देने तथा तेज और समावेशी विकास के अन्य उपायों को भी केंद्र की हरी झंडी मिल गई है। प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में उनके निवास ७ रेसकोर्स रोड पर कल शाम हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ये निर्णय लिये गये।
मंत्रिमंडल ने बीमा कानून संशोधन विधेयक, पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण विधेयक तथा प्रतिस्पर्धा कानून में आवश्यक संशोधनों को मंजूरी दे दी है। बैठक के बाद वित्तमंत्री पी. चिदम्बरम ने पत्रकारों को बताया कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा मौजूदा २६ प्रतिशत से बढ़ाकर ४९ प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है।
चिदम्बरम ने कहा कि हमें लगता है कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को ४९ प्रतिशत तक बढ़ाना चाहिए। पिछले दिनों बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा था कि बीमा क्षेत्र में काफी पूंजी की जरूरत है और यह तभी संभव हो सकता है, जब हम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा को ४९ प्रतिशत तक बढ़ाए।
उन्होंने कहा कि हमने एफडीआई सीमा को ४९ प्रतिशत तक बढ़ाने का पुरजोर समर्थन किया है। श्री चिदंबरम ने कहा कि इससे निजी बीमा कंपनियों की पूंजी की बढ़ती ज$रूरते पूरी की जा सकेंगी । प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की जो सीमा बीमा क्षेत्र के लिए रखी गई है वह पेंशन क्षेत्र पर भी लागू होगी।
मंत्रिमंडल ने वायदा कारोबार नियमन संशोधन विधेयक में संशोधन की भी मंजूरी दी है। इस संशोधन का उद्देश्य फारवर्ड मार्केट आयोग को एक नियामक के रूप में स्वायत्तता से काम करने का अवसर देना और सार्वजनिक जवाबदेही बढ़ाना है। इन प्रस्तावित संशोधनों से पहली बार वायदा बाजारों में कई विकल्प की अनुमति मिलेगी जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिल सकेगा।
आर्थिक मामलों से संबद्ध मंत्रिमंडलीय समिति ने ढांचागत ऋण कोष गठित करने के त्रिपक्षीय समझौते के मॉडल को भी मंजूरी दे दी है। समिति ने प्रतिस्पर्धा कानून में संशोधन को भी मंजूरी दे दी जिनका प्रस्ताव कॉर्पाेरेट मामलों के मंत्रालय ने किया था। इन संशोधनों में कंपनियों के विलय और अधिग्रहण के तौर तरीके तय किए हैं। मंत्रिमंडल ने वन्य जीव संरक्षण कानून में संशोधन को भी मंजूरी दे दी है, जिनसे वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण में ग्राम सभाओं और पंचायतों को अधिक अधिकार मिल जाएंगे। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने १२वीं योजना का दस्तावेज स्वीकार कर लिया है, जिसमें औसत आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य आठ प्रतिशत रखा गया है।
वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने बताया कि यूपीए सरकार के सभी फैसले राष्ट्र हित में है और विदेशी मुद्राओं के मुकाबले भारतीय रुपया स्थिर होता जा रहा है। उन्होंने राजनीतिक दलों और मुख्य रूप से मुख्य विपक्षी दल से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि सरकार के फैसलों पर चर्चा की जा सकती है और ये संसद की मंजूरी से ही लागू किये जाएंगे। श्री चिदंबरम ने बताया कि मंत्रिमंडल ने पांच हवाई अड्डों को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित किया है।
कैबिनेट ने पांच हवाई अड्डों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने की मंजूरी दी है। इनमें लखनऊ में चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डा, वाराणसी में लालबहादुर शास्त्री हवाई अड्डा तथा त्रिचुनापल्ली में मैगंलोर में और कोयम्बटूर के हवाई अड्डे शामिल है। इन हवाई अड्डों में अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए आधारभूत ढांचा मौजूद है। मंत्रिमंडल ने २०वें विधि आयोग को तीन वर्ष के लिए गठित करने की भी मंजूरी दे दी है।
श्री पी चिदंबरम ने बताया कि सरकार ने खाद्य तेल के निर्यात पर प्रतिबंध को जारी रखने और सब्सिडी वाली आयातित दलहनों को बीपीएल परिवारों को देने के लिए राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों को सस्ते दरों पर आपूर्ति की योजना को भी मंजूरी दे दी है। मंत्रिमंडल ने भारत की लाभ में हिस्सेदारी की पहुंच के लिये नागोया प्रोटोकॉल के समर्थन की भी अनुमति दे दी हैं। भारत ने ११ मई २०११ में नागोया प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किये थे।

अनाथ हो गई सिवनी, भूल गए राजनेता


अनाथ हो गई सिवनी, भूल गए राजनेता

मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन के नक्शे से गायब हुआ सिवनी!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। पता नहीं पर शायद 1990 के उपरांत सिवनी को किसी ना किसी की तो नजर लगी है। 1990 के उपरांत सिवनी का जीवन मानो ठहर सा गया है। ना उद्योग धंधे और ना विकास। जो उद्योग धंधे आ भी रहे हैं उनमें कुछ नेतानुमा ठेकेदार ही अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। इस सबके बाद भी सिवनी के सांसद विधायक नीरो के मानिंद चैन की बंसी ही बजा रहे हैं, जैसे सब कुछ ठीक ठाक चल रहा हो।
अपने निज और निहित स्वार्थों के चलते कांग्रेस और भाजपा के आला नेता, सांसद और विधायकों ने सिवनी जिले को अपने आकाओं के पास गिरवी रख दिया है। सिवनी के खाते में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुश्री विमला वर्मा के कार्यकाल के अलावा हरवंश सिंह द्वारा अपने तत्कालीन आका अर्जुन सिंह के संचार मंत्री रहते सिवनी को दिलाई गई एसटीडी सुविधा के अलावा और किसी के खाते में कोई उपलब्धि नहीं है।
हाल ही में एक बार फिर सिवनी को छला गया है। बार बार मध्य प्रदेश सरकार के छलने और कांग्रेस के इसके छद्म विरोध से साफ हो जाता है कि यह कांग्रेस भाजपा की नूरा कुश्ती से कम नहीं है। इसी तरह केंद्र में कांग्रेस द्वारा सिवनी को ठगने पर भाजपा के दिखावटी विरोध से भी षणयंत्र की ही बू आने लगती है।
मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा आरंभ की गई अभिनव तीर्थ-दर्शन योजना में 60 वर्ष से अधिक उम्र के तीर्थ-यात्रियों को लेकर 5 अक्टूबर को उज्जैन से और 8 अक्टूबर को जबलपुर से ट्रेन रवाना होगी। उज्जैन से जाने वाली ट्रेन 9 अक्टूबर को और जबलपुर से जाने वाली ट्रेन 12 अक्टूबर को वापस आएगी।
उज्जैन से रवाना होने वाली ट्रेन में जिला उज्जैन के 226, देवास के 177, शाजापुर के 171, रतलाम के 164, मंदसौर के 151 और नीमच के 93 तीर्थ-यात्री जाएँगे। इसी तरह जबलपुर से जाने वाली ट्रेन में जिला जबलपुर के 346, बालाघाट के 239, डिंडोरी के 98, मण्डला के 147 और नरसिंहपुर जिला के 153 बुजुर्ग वैष्णो देवी जाएँगे। तीर्थ-यात्रियों के सहयोग के लिए अन्य कर्मचारी भी जाएंगे।
इस आधिकारिक विज्ञप्ति से साफ हो जाता है कि जबलपुर से जाने वाली रेलगाड़ी में सिवनी जिले के यात्रियों को नहीं जोड़ा गया है। मध्य प्रदेश सरकार के सूत्रों का कहना है कि इस योजना के तहत अभी रेलगाड़ी संभागीय मुख्यालयों से ही ले जाई जा रही हैं। इस तरह अब मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना में भी सिवनी जिले का तिरस्कार कर दिया गया है।
यह सब देखने सुनने के बाद भी सिवनी का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस के बसोरी सिंह मसराम और भाजपा के केशव दयाल देशमुख, विधानसभा में प्रतिनिधित्व करने वाले भाजपा की श्रीमति नीता पटेरिया, शशि ठाकुर, कमल मस्कोले तो अपना मुंह सिले बैठे ही हैं साथ ही साथ कांग्रेस के महाबली और प्रशंसकों के बीच दादा ठाकुर के नाम से पहचाने जाने वाले हरवंश सिंह ठाकुर ने भी सदा की भांति अपना मौन तोड़ना उचित नहीं समझा है।
सब कुछ देखने सुनने के बाद लगने लगा है कि सिवनी का अब कोई धनी धोरी नहीं रह गया है। एक तरह से सिवनी अब पूरी तरह अनाथ ही हो चुका है। ना सिवनी में ब्राडगेज है और ना ही फोरलेन ही बची है। कांग्रेस भाजपा का झंडा डंडा उठाने वाले 2006 से ब्राडगेज तो 2008 से फोरलेन लाने का दिवा स्वप्न दिखाकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। हालात जनता के सामने हैं। सिवनी को इन नेताओं और उनके लग्गू भग्गुओं ने गिरवी ही रख दिया है।
सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि केंद्रीय मंत्री कमल नाथ के दबाव में मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार जल्द ही मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत एक विशेष रैक छिंदवाड़ा से भिजवाने का इंतजाम करने वाली है। जिस तरह से सिवनी में फोरलेन के मामले में कमल नाथ की सांकेतिक शवयात्रा निकालकर उस शवयात्रा के साथ हर तरह का दुर्व्यवहार यहां तक कि जूतों की माला तक पहनाई गई थी, उसके उपरांत छिंदवाड़ा के एक कार्यक्रम में कमल नाथ द्वारा सिवनी के दादा ठाकुर हरवंश सिंह पर व्यंगात्मक लहजे में यह कहा गया कि सिवनी का कितना विकास हुआ पूछ लो हरवंश सिंह से?
इसके जवाब में जब हरवंश सिंह ने सिवनी के हक को मांगने के बजाए हथियार डालते हुए अपने उद्बोधन में यह तक कह डाला कि वे स्वयं भी छिंदवाड़ा के हैं से यह बात भी साफ होने लगी है कि अब हरवंश सिंह ठाकुर का केवलारी से मोहभंग होने लगा  है और वे नए विधानसभा या संसदीय क्षेत्र की तलाश में तेजी से जुट चुके हैं। ज्ञातव्य है कि पिछले दो सालों में केवलारी विधानसभा क्षेत्र की जिस तरह से उपेक्षा हो रही है उससे इन आशंकाओं को बल मिल रहा है कि हरवंश सिंह अब इस सीट से चुनाव लड़ने में इच्छुक नहीं बचे हैं।

दीपा के खिलाफ बनने लगा है माहौल!


दीपा के खिलाफ बनने लगा है माहौल!

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। एक समय में कांग्रेस के तारणहार रहे प्रियरंजन दासमुंशी आज कहां हैं यह कम ही कांग्रेस जन जानते हैं। सालों से अचेतावस्था में दिल्ली के मथुरा रोड़ स्थित अपोलो अस्पताल में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे दासमुंशी को देखने अब शायद ही कोई जाता हो, यहां तक कि उनकी पत्नि दीपा दासमुंशी ने भी अपने पति से किनारा करने की बातें अब अस्पताल प्रबंधन द्वारा की जा रही हैं।
एक समय में कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रियरंजन दासमुंशी अक्टूबर 2008 में जैसे ही बीमार पड़े थे वे सुर्खियों में थे। उसके उपरांत कांग्रेस ने उन्हें भुला ही दिया। कांग्रेस के आला नेताओ ंने भी अपोलो की ओर रूख नहीं किया। अगर कभी किया भी तो अपने परिजनों या रिश्तेदार परिचितों की तीमारदारी के लिए।
अपोलो अस्पताल प्रबंधन के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि अब तो कई महीने हो गए प्रियरंजन दास मुंशी से मिलने कोई नहीं आया। उन्हें अपोलो अस्पताल के एक प्राईवेट वार्ड में रखा गया है। सूत्रों की मानें तो सालों से प्रियरंजन दासमुंशी अचेतावस्था में ही जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे हैं।
सूत्रों ने कहा कि अपोलो प्रबंधन भी चाह रहा है कि दासमुंशी को उनके परिजन वापस ले जाएं, क्योंकि दासमुंशी के स्वस्थ्य होने की सारी संभावनाएं समाप्त हो चुकी हैं। दासमुंशी को स्टेम सेल ट्रीटमेंट के लिए जर्मनी भी ले जाया गया था पर इसका कोई फायदा नहीं हुआ है। अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि व्हीव्हीआईपी के चलते दासमंुशी को 2008 में अस्पताल में दाखिल करवाया गया था किन्तु उसके उपरांत लंबा समय बीत जाने के बाद जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और उनकी तीमारदारी में भी लोगों ने आना बंद कर दिया है तब अस्पताल प्रबंधन अब इस बात के लिए परेशान चल रहा है कि आखिर उनके कमरे के भाड़े का भोगमान कौन भोगेगा?
पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के कुछ समाचार पत्रों में प्रियरंजन दास मुंशी के निरीह दीन हीन अवस्था में पड़े होने की खबरें और फोटो प्रकाशित होने पर कांग्रेस में बवाल मच गया था। प्रियरंजन दासमुंशी की अर्धांग्नी दीपा दासमुंशी के करीबी सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि चूंकि दीपा दासमुंशी ने त्रणमूल कांग्रेस के विरोध का झंडा उठाया हुआ है, अतः त्रणमूल के नेता इस तरह के घिनौने प्रचार को अस्त्र बना रहे हैं।
सूत्रों ने कहा कि दीपा दासमुंशी का नाम केंद्र में मंत्री पद के लिए चल रहा है इसलिए त्रणमूल के नेता इस हथकंडे को अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि दीपा दासमुंशी के संज्ञान में इस बात को लाया गया है कि त्रणमूल के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय अपने अभिन्न मित्र कुणाल घोष के साथ अपोलो अस्पताल गए और वहां प्रियरंजन दास मुंशी के कमरे में जाकर उनके ना केवल फोटो ले आए वरन् अस्पताल प्रबंधन की खीझ को भी बेहतर तरीके से बंगाल के अखबारों में रेखांकित करवा चुके हैं।
इस बात में सच्चाई कितनी है यह बात या तो प्रियरंजन दासमुंशी की पत्नि दीपा दासमुंशी जानती होंगी या फिर त्रणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय पर इस बात में काफी सच्चाई नजर आती है कि कांग्रेस की सालों साल सेवा करने वाले प्रियरंजन दासमुंशी की सुध पिछले चार सालों से कांग्रेस द्वारा नहीं ली गई है। अब तो उनकी पत्नि दीपा दासमुंशी ने भी अपोलो की ओर रूख करना कम कर दिया है।

गुरुवार, 4 अक्टूबर 2012

अपनी ही घोषणा भूले शिवराज!


अपनी ही घोषणा भूले शिवराज!

(संजीव प्रताप सिंह)

सिवनी (साई)। देश के हृदय प्रदेश के निजाम शिवराज सिंह चौहान द्वारा लगभग तीन साल पहले पुण्य सलिला बैनगंगा के उद्गम स्थल मुण्डारा के समीप बसे गोपालगंज में तेंदूपत्ता वितरण प्रोग्राम के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई थी, और वह घोषणा थी छिंदवाड़ा, बालाघाट और सिवनी को एक साथ मिलाकर नए संभाग के गठन की। तीन साल बीत जाने के उपरांत भी ना तो सरकार ने ही इस बारे में कोई पहल की है और ना ही इस संभाग को कर्मभूमि बनाने वाले आला नेताओं नें।
गौरतलब है कि बालाघाट, सिवनी और मण्डला को आधार बनाकर राजनीति करने वाले भाजपा के नेताओं में पूर्व सांसद प्रहलाद सिंह पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते, मध्य प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष श्रीमति नीता पटेरिया, वित्त विकास निगम के अध्यक्ष डॉ.ढाल सिंह बिसेन, महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेश दिवाकर, बालाघाट कोटे से प्रदेश में मंत्री गौरी शंकर बिसेन, छिंदवाड़ा कोटे से मंत्री नाना भाउ माहौड़ हैं पर विडम्बना है कि इनमें से किसी ने भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को उनकी घोषणा याद दिलाना उचित नहीं समझा है।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से जिन लोगों को इस संभाग के बनने से फायदा मिल सकता है उनमें केंद्रीय मंत्री कमल नाथ, मध्य प्रदेश विधानसभा के उपाध्यक्ष हरवंश सिंह, वरिष्ठ विधायक दीपक सक्सेना, तेजी लाल सरेयाम, प्रदीप जायस्वाल विश्वेश्वर भगत, चोधरी मेर सिंह का शुमार है। इन सांसद विधायकों ने भी सतपुड़ा को संभाग बनाने की पहल नहीं की है। शिवराज सिंह चौहान के करीबी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के एक आला क्षत्रप के दबाव में सतपुड़ा संभाग को अस्तित्व में आने से शिवराज सिंह चौहान रोक रहे हैं।
वहीं दूसरी और मध्य्र प्रदेश जनसंपर्क द्वारा जारी खबर में कहा गया है कि मध्यप्रदेश में ‘गण’ का ‘तन्त्र’ बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा बहुविध प्रयास किए जा रहे हैं। इसका एक प्रमाण है गत चार वर्ष में राज्य में दो नए संभाग, दो नए जिले, सात राजस्व अनुभाग और 80 नई तहसील का गठन। प्रदेश में सन् 1956 में गठन के बाद यह पहली बार है कि मात्र चार साल की छोटी अवधि में करीब 100 नई राजस्व प्रशासन इकाइयाँ गठित हुई हैं। इन इकाइयों के गठन से प्रदेश में अब कुल 10 राजस्व संभाग, 50 जिले और 352 तहसीलें हो गई हैं।
वर्ष 2008 में प्रदेश में शहडोल और नर्मदापुरम दो नए संभाग का निर्माण होने के साथ ही अलीराजपुर और सिंगरौली जिले अस्तित्व में आए। वहीं फरवरी, 2011 में बुरहानपुर जिले में नेपानगर को और जून, 2012 में नरसिंहपुर जिले के तेन्दूखेड़ा, बालाघाट के कटंगी, छिन्दवाड़ा के चौरई, सागर के बीना और विदिशा के लटेरी एवं शमशाबाद को राजस्व अनुभाग का दर्जा मिला।
प्रदेश में मई, 2008 से अब तक 80 नई तहसील सृजित की जा चुकी हैं। ये तहसीलें हैं हरदा जिले में सिराली, रहटगाँव और हंडिया, गुना जिले में बम्होरी, मकसूदनगढ़ और शाडोरा, बैतूल जिले में आठनेर, घोड़ाडोंगरी और चिचोली, मंदसौर जिले में शामगढ़ एवं दलौदा, पन्ना जिले में रेपुरा, अमानगंज, देवेन्द्र नगर, विदिशा जिले में शमशाबाद, त्यौदा और गुलाबगंज, छिन्दवाड़ा जिले में उमरेठ, चांद, मोहखेड़ और हर्रई, सतना जिले में कोटर और बिरसिंहपुर, उमरिया जिले में चंदिया और नौरोजाबाद, छतरपुर जिले में महाराजपुर, बक्सवाहा, चंदला और घुवारा, शिवपुरी जिले में बदरवास, बड़वानी जिले में अंजड़, पाटी और बरला, राजगढ़ जिले में पचोर, सीहोर जिले में रेहटी, जावर और श्यामपुर, रीवा जिले में मनगवां, सेमरिया, नईगढ़ी और जवां, सागर जिले में मालथोन और शाहगढ़, रायसेन जिले में बाड़ी, देवास जिले में हाटपिपलिया और सतवास, टीकमगढ़ जिले में ओरछा, खरगापुर, मोहनगढ़ और लिधौरा, जबलपुर जिले में पनागर, सिवनी जिले में छपारा और धनोरा, धार जिले में डही, ग्वालियर जिले में चिनौर, इंदौर जिले में हातोद, खरगोन जिले में गौगाँव, खण्डवा जिले में पुनासा, खालवा, श्योपुर में बड़ोदा, बीरपुर, नीमच जिले में सिंगौली, जीरन और रामपुरा, मण्डला जिले में नारायणगंज और घुघरी, बालाघाट जिले में परसवाड़ा, तिरोड़ी और बिरसा, दतिया जिले में इंदरगढ़, होशंगाबाद जिले में डोलरिया, रतलाम जिले में ताल, रावटी, भिण्ड जिले में गोरमी, शहडोल जिले में बुढार और गोहपारू, सिंगरौली जिले में सरई और माड़ा और अलीराजपुर जिले में कठ्ठीवाड़ा और सोण्डवा तहसीलें शामिल हैं।

कसाब की पैरवी का पैसा बटेगा शहीदों के परिजनों में


कसाब की पैरवी का पैसा बटेगा शहीदों के परिजनों में

(मणिका सोनल)

नई दिल्ली (साई)। सर्वाेच्च न्यायालय ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब के वकील का शुल्क 14.5 लाख रुपये मुम्बई हमले में शहीद रहे सुरक्षाकर्मियों के सम्बंधियों को दिया जाए। कसाब के वकील ने शुल्क लेने से इंकार किया है।
न्यायालय के आदेश के उपरांत इस राशि को  शहीद सुरक्षाकर्मियों के परिवारों को समान अनुपात में बांटा जाएगा। मुम्बई आतंकवादी हमले में 166 लोग मारे गए थे। कसाब इस हमले का एक मात्र जीवित पकड़ा गया आतंकवादी था। कसाब को मृत्युदंड के खिलाफ अदालत में याचिका लगाने में मदद करने वाले वकील राजू रामचंद्रन और गौरव अग्रवाल ने कहा था कि वे अपनी सेवा के लिए 14.5 लाख रुपये का शुल्क नहीं लेना चाहते हैं।
उन्होंने सलाह दी थी कि यह राशि नेशनल लीग सर्विसेज अथॉरिटी या महाराष्ट्र स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को दिया जा सकता है। न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद की पीठ ने वकीलों के फैसले की सराहना करते हुए निर्देश दिया कि 14.5 लाख रुपये की राशि शहीद सुरक्षाकर्मियों के परिवारों को वितरित की जाए।