मंगलवार, 24 सितंबर 2013

दवाओं के लिए भटक रहे पैंशनर्स

(दादू अखिलेंद्र नाथ सिंह)

सिवनी (साई)। जिला चिकित्सालय में पैंशनर्स पिछले एक साल से दवाओं के लिए भटकने पर मजबूर हैं। जिला चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ.सत्य नारायण सोनी की लापरवाही के चलते पैंशनर्स को न तो दवाएं मिल पा रही हैं और न ही पैंशनर्स को चिकित्सकों द्वारा करीने से देखकर इलाज ही किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गत दिवस पैंशनर्स को बाहर की दवाएं न लिखने के लिए डॉ.सत्य नारायण सोनी द्वारा अघोषित तौर पर फरमान जारी किया गया था। बताया जाता है इसकी शिकायत जिला कलेक्टर से की गई तब उनकी फटकार के बाद, यह निर्णय अघोषित तौर पर किया गया कि पैंशनर्स को दस प्रतिशत की दवाएं बाजार से खरीदकर दी जाएं।दवाओं के लिए भटक रहे पैंशनर्स
इस निर्णय के बारे में पैंशनर्स को जानकरी नहीं दी गई। कुछ पैंशनर्स जब पिछले दिनों चिकित्सालय की ओपीडी पहुंचे तो वहां तैनात चिकित्सकों द्वारा उन्हें कहा गया कि वे किसी भेषज विशेषज्ञ से लिखवाएं तब जाकर उन्हें दवाएं मिल सकती हैं। वहीं जब एक महिला पैंशनर डॉ.नेमा के पास गईं तो बताया जाता है कि डॉ.नेमा ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि उन्हें इस तरह के किसी आदेश की जानकारी नहीं है। 
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दिनेश की खिलाफत से आगबबूला हुए मोहोड़

दिनेश की खिलाफत से आगबबूला हुए मोहोड़

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। ‘‘सिवनी जिले में किसका राज चल रहा है, भाजपा का या एक शराब कारोबारी का! हमसे जितना बना उतना किया, अब पानी सर के उपर आने लगा है। लखनादौन में भाजपा के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को एक शराब करोबारी के कहने पर प्रताड़ित किया जा रहा है। यदि आलम यही रहा तो लखनादौन सहित जिले में शराब ठेकेदार का गुण्डाराज कायम हो जाएगा।‘‘
बताया जाता है कि उक्ताशय की बातें गत दिवस मेजर ध्यानचंद सिंथेटिक हॉकी मैदान के उद्घाटन में आए प्रभारी मंत्री नाना भाऊ मोहोड़ को जब सुनने को मिलीं तो वे इसका आशय समझ गए कि लखनादौन का भाजपा मण्डल किसी और की नहीं शराब कारोबारी दिनेश राय उर्फ मुनमुन की शिकायत लेकर आया है। कहा जा रहा है कि शिकायत सुनते ही नाना भाऊ एकाएक आग बबूला हो उठे।
उद्घाटन समारोह में मौजूद भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि नाना भाऊ का मूड इसी बात से उखड़ा रहा। उन्होंने बताया कि भाजपा के प्रदेश स्तर के एक पदाधिकारी द्वारा दिनेश राय को स्टार प्रचारक माना जा रहा है, और इसी कारण उनके निर्देश हैं कि दिनेश राय के खिलाफ कोई भी कदम नहीं उठाए जाएं।
उक्त पदाधिकारी ने आगे कहा कि भाजपा के कार्यकर्ताओं के सम्मान को लखनादौन में नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष और शराब कारोबारी तथा लखनादौन मस्जिद के सरपरस्त (जबकि शराब इस्लाम में हराम मानी गई है), अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष तथा राय पेट्रोलियम के संचालक (जबकि एडव्होकेट एक्ट के तहत अधिवक्ता दूसरा कोई व्यवसाय नहीं कर सकता है) दिनेश राय द्वारा भाजपा के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया जा रहा है।

उक्त पदाधिकारी ने कहा कि लखनादौन से आए भाजपा कार्यकर्ता मुनई बाबा ने दो टूक शब्दों में प्रभारी मंत्री नाना भाऊ को कह दिया कि लखनादौन एसडीएम, एसडीओपी और कोतलवाली प्रभारी भी दारू ठेकेदार के इशारे पर काम करते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं को डरा धमका रहे हैं, यहां तक कि उनकी शिकायतों पर भी संज्ञान नहीं ले रहे हैं। भाजपा कार्यालय भी नियमानुसार निर्मित हो रहा था पर नगर परिषद् द्वारा इसके निर्माण को भी रूकवा दिया गया है।

अतिक्रमण से सख्ती से निपटें: भरत यादव

अतिक्रमण से सख्ती से निपटें: भरत यादव

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। जिला कलेक्टर भरत यादव ने तहसीलदार और नगर पालिका परिषद् के सीएमओ को निर्देशित किया है कि वे अतिक्रमण जैसी समस्या से सख्ती के साथ निपटें।
श्री य्ाादव ने जिला श्रम अधिकारी को निर्देशित किय्ाा कि विभिन्न य्ाोजनाओं के आनलाइन आवेदन की जानकारी हितग्राहिय्ाों को दी जाय्ो। केम्प लगाकर आनलाइन आवेदन भरवाय्ो जाकर हितग्राहिय्ाों को लाभांवित किय्ाा जाय्ो। श्री य्ाादव ने सी.एम.एच.ओ. को निर्देश दिय्ो कि पात्र नागरिकों को य्ाथाशीघ्र ग्रीन कार्ड दिय्ो जाय्ो ताकि परिवार निय्ाोजन अपनाने वाले दंपत्ति ग्रीन कार्ड के माध्य्ाम से विभिन्न य्ाोजनाओं का लाभ ले सकें।
विभिन्न हितग्राहिय्ाों को प्रति माह की १0 तारीख तक हर हाल में पेंशन वितरण के निर्देश श्री य्ाादव द्वारा सामाजिक न्य्ााय्ा उपसंचालक को दिय्ो गय्ो। श्री य्ाादव ने स्टेडिय्ाम के अतिक्रमण पर एक सप्ताह के अंदर सख्त कायर््ावाही करने के निर्देश तहसीलदार एवं सी.एम.ओ. नगरपालिका को दिय्ो। श्री य्ाादव ने आर.ई.एस. अधिकारी को निर्देश दिय्ो कि अभी से नलजल य्ाोजना के तहत अधिकाधिक कनेक्शन लेने हेतु नागरिकों को प्रोत्साहित किय्ाा जाय्ो ताकि अधिकाधिक लोगों को कारगर तरीके से स्वच्छ जल की आपूर्ति की जा सके। लोग गर्मिय्ाों में परेशान न हों।
श्री य्ाादव ने धान उपार्जन हेतु पंजीकृत किसानों के विभिन्न चरणों में होने वाले सत्य्ाापन को पूर्ण सतर्कता से करने के निर्देश दिय्ो। कलेक्टर श्री य्ाादव ने सभी सेक्टर अधिकारिय्ाों को मतदान केन्द्रों की सभी व्य्ावस्थाओं जैसे विद्युत, पेय्ाजल, रेम्प, पहुंच मार्ग आदि सुनिश्चित करने के निर्देश दिय्ो। श्री जैन ने सिविल सर्जन को निर्देश दिय्ो कि एम.सी.टी.एस. (मदर एंड चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम) के तहत मां एवं बच्चे का डाटाबेस तैय्ाार करें ताकि मां एवं बच्चे को विभिन्न स्वास्थ्य्ा सुविधाय्ों प्रदान की जा सके।
श्री य्ाादव ने सभी कायर््ाालय्ा प्रमुखों को सख्त निर्देश दिय्ो कि २५ सितंबर तक अनिवायर््ा रूप से अपनी-अपनी विधानसभा क्षेत्र में अपने विभाग के समस्त अधिकारिय्ाों एवं कर्मचारिय्ाों के नाम मतदाता सूची में जुडवा लें अन्य्ाथा नोटिस जारी एवं निलंबन जैसी सख्त कायर््ावाही के लिय्ो तैय्ाार रहें। चुनाव कायर््ाो में लगे सभी अधिकारी एवं कर्मचारी टीम भावना के साथ कायर््ा करें तथा मतदाता जागरूकता, एपिक अनुपात, लिंग अनुपात आदि बढ़ाने हेतु सक्रिय्ाता से कायर््ा करें। सभी तहसीलदार मतदाता सूची में नाम जुड़वाने एवं नाम कटवाने के कायर््ा को प्राथमिकता से करें।

बैठक में उपस्थित जिला पंचाय्ात सीईओ श्रीमती प्रिय्ांका दास ने जनसुनवाई आवेदनों पर कायर््ावाही की समीक्षा कर संबंधित अधिकारिय्ाों को त्वरित कायर््ावाही करने के निर्देश दिय्ो। ए.डी.एम. जे.समीर लकरा ने सभी अधिकारिय्ाों को निर्वाचन संबंधी जानकारी एवं निर्देश दिय्ो। बैठक में सभी कायर््ाालय्ा प्रमुख उपस्थित थे। श्री य्ाादव द्वारा आर.ई.एस., कृषि, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, मत्स्य्ा, पशु चिकित्सा, मध्य्ाप्रदेश विद्युत मंडल, सहित अन्य्ा विभागों के समय्ा सीमा पत्रों की समीक्षा की जाकर आवश्य्ाक दिशा निर्देश दिय्ो गय्ो।

डेंगू पर सख्त हुए संवेदनशील कलेक्टर भरत यादव

डेंगू पर सख्त हुए संवेदनशील कलेक्टर भरत यादव


समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया ने दिया था जुर्माने का सुझाव, चुनाव की आपाधापी में कहीं खो न जाएं कलेक्टर के कड़क निर्देश!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। अंततः सिवनी जिले के संवेदनशील जिलाधिकारी भरत यादव ने डेंगू के मसले में अब सख्त कदम उठाने का मन बना ही लिया है। बार बार मीडिया में डेंगू की स्थिति की जानकारी प्रशासन के ध्यान में लाने के बाद जब संबंधित महकमों द्वारा इससे निपटने में कोताही बरती गई तो जिला कलेक्टर ने समय सीमा (टीएल) की बैठक में अधिकारियों के रवैए पर नाराजगी जताते हुए डेंगू के मामले में अपना रूख स्पष्ट कर दिया है।
कलेक्टर कायर््ाालय्ा स्थित सभाकक्ष में कलेक्टर भरत य्ाादव की अध्य्ाक्षता में समय्ा सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक के दौरान श्री य्ाादव ने निर्देश दिय्ो कि स्वास्थ्य्ा एवं राजस्व विभाग अमला डेंगू से बचाव हेतु जनता में जागरूकता पैदा करें कि अपने घरों में तथा आसपास पानी के जमाव को खत्म करें ताकि डेंगू फैलाने वाला मच्छर पैदा ही न हो पाय्ो।

करें जुर्माने की कार्यवाही
स्वास्थ्य्ा विभाग एवं स्थानीय्ा निकाय्ा के कर्मचारिय्ाों की एक समिति गठित कर लोगों के घर जाकर उनके घरों में ७ दिन से अधिक दिन तक जमा पानी की निकासी करवाय्ों तथा दुबारा य्ाही स्थिति मिलने पर ऐसे लोगों पर जुर्माने जैसी सख्त कायर््ा कायर््ावाही की जाय्ो। स्वास्थ्य्ा विभाग डेंगू के मरीजों का प्राथमिकता के साथ उपचार करें, लोगों को डेंगू के लक्षण एवं बचाव के संबंध में जानकारी दें।

साई न्यूज ने उठाया था मुद्दा
गौरतलब है कि समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया द्वारा पूर्व में लंबे समय से सिवनी जिले में डेंगू के तेजी से फैलते डैनों के बारे में लगातार खबरें जारी कर इसकी भयावहता के बारे में लोगों को चेताया था। इतना ही नहीं साई न्यूज द्वारा बार बार यह बात कही जा रही थी कि स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकायों द्वारा डेंगू के बारे में एडवाईजरी तक जारी नहीं की गई है। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया द्वारा पूर्व में डेंगू के कारण और निवारण के बारे में भी पाठकों को विस्तार से जानकारी दी गई थी। साई न्यूज ने ही सबसे पहले दिल्ली ब्यूरो के हवाले से यह बात उठाई थी कि प्रशासन को चाहिए कि इसके लिए जनता को जागरूक करने के साथ ही साथ जुर्माने का प्रावधान भी किया जाए।

अब तक जारी नहीं हो सकी है एडवाईजरी
यहां एक बात उल्लेखनीय है कि जिस दिन मलेरिया विभाग द्वारा जागरूकता रैली का आयोजन किया गया था ऐन उसके बाद से ही सिवनी में डेंगू के संभावित मरीजों के मिलने का सिलसिला आरंभ हो गया था। इससे साबित हो जाता है कि जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा महज कागजों पर ही अभियान चलाया जाकर इसके लिए आने वाली राशि को डकार लिया जाता है। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि बारिश का मौसम समाप्ति की ओर है और अब तक नगर पालिका परिषद् सिवनी सहित अन्य स्थानीय निकायों और स्वास्थ्य विभाग या मलेरिया विभाग द्वारा न तो मुनादी ही पिटवाई गई और न ही इश्तेहार के जरिए डेंगू के बारे में नागरिकांे को जागरूक किया गया।

जिला मुख्यालय में मिल रहा लार्वा
इस मसले का सबसे दुखदायी पहलू यह है कि बार बार मीडिया में डेंगू और मलेरिया जैसे मच्छर जनित रोगों के बारे में खबरों के प्रकाशन और प्रसारण के उपरांत भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। डेंगू का लार्वा सबसे पहले विवेकानंद वार्ड और उसके उपरांत शहीद वार्ड में मिला था। अब डेंगू का लार्वा इन दोनों वार्ड से निकलकर सारे जिला मुख्यालय सहित केवलारी, छपारा आदि सहित समूचे जिले में पहुंच चुका है।

हो चुकी हैं मौतें
डेंगू के संभावित मरीजों में से कुछ की मौत के समाचार भी हैं। साधन संपन्न लोग तो इसके उपचार के लिए जबलपुर नागपुर जाकर अपना इलाज करवा ले रहे हैं पर साधनहीन कहां जाकर इलाज करवाएं यह यक्ष प्रश्न अभी भी अनुत्तरित ही है।

सबसे पहले हो कार्यालयों की जांच
डेंगू या मलेरिया के मच्छरों का लार्वा समूचे जिले में खोजा जाना बेहद जरूरी है। सबसे पहले सरकारी कार्यालयों के प्रांगड़, रिक्त पड़े भूखंडों में भरे पानी आदि में इसकी जांच की जानी चाहिए। जिला चिकित्सालय में ही अनेक स्थानों पर पानी भरा हुआ है। वहीं दूसरी ओर एसपी बंग्ले और सीईओ जिला पंचायत के आवास के आसपास रिक्त पड़े बड़े भूभाग में भी बारिश का पानी भरा हुआ है। इस तरह के पानी में डेंगू के मच्छरों के लार्वा के मिलने से इंकार नही किया जा सकता है।

विधायक पतियों के हैं मजे

सिवनी में स्वास्थ्य महकमे में लखनादौन विधायक श्रीमती शशि ठाकुर के पति डॉ.वाय.एस.ठाकुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर तो सिवनी विधायक श्रीमती नीता पटेरिया के पति डॉ.एच.पी.पटेरिया, मलेरिया और डेंगू से निपटने के लिए पाबंद जिला मलेरिया अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। जानकारों का कहना है कि दोनों ही भाजपा विधायक हैं और अगर वे अपने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करतीं तो सिवनी में योग्य चिकित्सकों की तैनाती कब की हो चुकी होती। साथ ही साथ मलेरिया और डेंगू से निपटने के लिए वे अतिरिक्त मद और प्रशिक्षित अमला भी सरकार से मांग सकती थीं, वस्तुतः ऐसा हुआ नहीं हैं। भाजपा के एक अन्य विधायक कमल मर्सकोले भी हैं। तीनों सत्ताधारी दल के विधायक चाहते तो सिवनी में डेंगू प्राथमिक लक्षण मिलते ही सरकार को हिलाकर रख देते और मई माह में ही डेंगू को सिवनी से विदा कर दिया गया होता। पर माना जा रहा है कि तीनों विधायक आने वाले विधानसभा चुनावों में अपनी अपनी टिकिट पक्की कराने के चक्कर में अपने मतदाताओं से प्राप्त जनादेश को ही भूल गए।

अश्लीलता की ओर युवा

अश्लीलता की ओर युवा

(शरद खरे)

वाकई संचार क्रांति ने आज हमें बहुत ही तेजी से अत्याधुनिक युग की ओर अग्रसर कर दिया है। दो ढाई दशक पहले जिस बात की कल्पना भी नहीं होती थी आज की पीढ़ी उसका उपभोग भी करने लगी है। अस्सी के दशक के आरंभ में कलर फोटो खिंचवाना अपने आप में एक बहुत बड़ा प्रोजॅक्ट हुआ करता था। उस वक्त ब्लेक एण्ड व्हाईट केमरे से फोटो खींची जाकर उसमंे क्रत्रिम तौर पर रंग भरे जाते थे। यह बहुत ही मेहनत का काम होता था। उस दौर में वीडियो फिल्म बनाना स्वप्न देखने के मानिंद ही हुआ करता था। उस दौर में चलती फिरती चीजें पर्दे पर देखना मतलब फिल्म देखना ही होता था। 1981 तक देश में टीवी भी श्वेत श्याम ही हुआ करता था। 1982 के एशियाड में देश में टीवी भी कलर वाला आया, फिर वीडियो आया। लोगों की जिज्ञासा थी कि आखिर वीडियो होता कैसा है? बाद में पता चला कि यह तो कलर्ड टीवी ही है। इस समय तक कलर कैमरे से फोटो खींची जाने लगी। शनैः शनैः और प्रगति हुई तब बड़े आकार के कैमरों से वीडियो फिल्म बनाना भी आरंभ हुआ। विलासिता प्रेमी धनाड्य लोगों द्वारा शादी ब्याह आदि के अवसर पर वीडियो बनवाना प्रिय शगल बन गया था। वीडियो बनाने के बाद उसकी एडीटिंग आदि का अपना अलग ही आनंद हुआ करता था।
कालांतर में वीडियो कैसेट इतिहास में समा गई और आया सीडी का युग। सीडी भी एक समय बाद इतिहास में शामिल होती गई और डीवीडी ने उसका स्थान ले लिया। मोबाईल आने के बाद तो मानो प्रगति को पंख लग गए। मोबाईल में पहले बल्व वाला मोबाईल अर्थात जिसमें पीली रोशनी हुआ करती थी, के बाद ट्यूब लाईट वाला मोबाईल जिसकी एलसीडी सफेद चमका करती थी, वह आया। धीरे से मोबाईल में कैमरा तो वीडियो कैमरा भी आ गया। अब तो चार इंच के मोबाईल से घंटों की वीडियो फिल्म बनाई जा सकती है। प्रगति के ये सारे सौपान देखने वाली आज की प्रौढ़ होने वाली पीढ़ी अपने आप को खुशकिस्मत मान रही होगी, क्योंकि बाबा आदम के जमाने से वर्तमान परिवेश के वे साक्षात गवाह जो ठहरे। तरक्की अपने साथ अच्छी और बुरी दोनों ही बातें लाती है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। अस्सी के दशक के बाद तेजी से हुए विकास के भी अनेक दुष्परिणाम सामने आए और अनवरत आते ही जा रहे हैं।
आज मोबाईल झूठ बोलने का सबसे बड़ा कारक बनता जा रहा है। माता पिता को धोखा देकर बच्चियां, युवतियां यहां तक शादी शुदा महिलाएं भी झूठ पर झूठ बोल रही हैं। वे होती कहीं और हैं और बताती कहीं और हैं। मां बाप यह सोचते हैं कि उनके बच्चे स्कूल कॉलेज में पढ़ रहे हैं, वस्तुतः इनमें से कुछ बच्चे अपने आवारा मित्रों के साथ कहीं और मस्ती में झूम रहे होते हैं। कल तक अश्लील फोटो खींचने पर उसे धुलवाने के दौरान लीक होने का जोखिम होता था, पर आज तो न रोल धुलवाने की झंझट न एक्सपोज करवाने की। आज अनेक वेब साईट्स अश्लील एमएमएस से पटी पड़ी हैं। पहले विदेशी बालाओं के इस तरह के चित्र दिखते थे, पर अब तो देशी बालाएं इसमें नजर आ रही हैं। यहां तक कि सुनने में तो यह भी आया है कि जिला मुख्यालय सहित सिवनी जिले की अनेक बालाओं के अश्लील एमएमएस तक लोगों के मोबाईल की शोभा बढ़ा रहे हैं। नशे की हालत में युवा अपनी डींग मारने के चक्कर में प्यार में फांसी गई इन बालाओं के अश्लील एमएमएस न केवल दिखाते हैं वरन् मेरी घोड़ी बड़ी की तर्ज पर ये एक दूसरे के साथ मोबाईल पर शेयर भी कर देते हैं।
इस तरह के अश्लील वीडियो का अंजाम हत्या तक पहुंचना स्वाभाविक ही है। बीते दिनों बरघाट में पुलिस द्वारा मारे गए एक छापे में अश्लील एमएमएस या क्लिपिंग्स का जखीरा मिला था, जो उपरोक्त वर्णित सारी बातों का जीवंत रोजनामचा कहा जा सकता है। जिला मुख्यालय सिवनी में न जाने कितने लोग मोबाईल के लिए डाउनलोडिंग आदि का काम कर रहे हैं। इन लोगों के पास न जाने कितने एमएमएस होंगे कहा नहीं जा सकता है। सिवनी की फिजां में युवाओं के मोबाईल पर वित्त मंत्री रहे राघवजी, जस्सी जैसी कोई नहीं की मोना सिंह सहित अनेक लोगों यहां तक कि सिवनी की स्थानीय बालाओं के नग्न और आपत्ति जनक एमएमएस शोभा बढ़ा रहे हैं।
बरघाट में युवाओं के द्वारा अपने ही साथी को ब्लेकमेल करने की बात सामने आई है। यह सब कुछ अय्याशी के चक्कर में होना बताया जा रहा है। अगर घटना में लेश मात्र की भी सच्चाई है तो यह समाज के लिए चिंता का विषय है। इसका कारण है कि युवा आज किस दिशा में जा रहा है? यह सोचना वाकई पालकों का काम है। हो सकता है अपनी औलाद के गलत कामों पर वे पर्दा डालें पर उन्हें सोचना होगा कि वे अपने बच्चों के गलत काम पर पर्दा डालकर उसका हौसला ही बढ़ा रहे हैं।

वैसे भी, आठवीं कक्षा के उपरांत बच्चों में शारीरिक बदलवा तेजी से होते हैं, उस दौर में अगर माता पिता ने अपने बच्चे पर बारीक नजर नहीं रखी तो उसका पांव फिसलने में देर नहीं लगती। गलत तरीके से पैसा कमाने वाले युवा दिखने में तो भोले दिखते हैं और आसानी से इन बालाओं को अपने आगोश में ले लेते हैं। जब इन बालाओं के सामने इन युवाओं की हकीकत आती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इसके बाद बालाओं के पास पछताने के अलावा और कुछ नहीं होता है। इसलिए मोबाईल का उपयोग सावधानी से किया जाना जरूरी है। पालकों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों के मोबाईल और आचरण पर नजर रखें वरना उनके हाथ भी पछतावे के अलावा और कुछ नहीं लगने वाला।

सोमवार, 23 सितंबर 2013

अय्याशी में डूबा युवा: पांच लाख की वसूली की चर्चाएं

अय्याशी में डूबा युवा: पांच लाख की वसूली की चर्चाएं

(अपराध ब्यूरो)

सिवनी (साई)। युवाओं में इन दिनों इंटरनेट मोबाईल का जुनून सवार है। इसी तारतम्य में बरघाट नगर के 17 से 18 वर्ष के कुछ युवाओं द्वारा अय्याशी करने और अपने ही मित्र को दगा देकर पांच लाख रूपए की राशि वसूलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। आज मामला बरघाट थाने पहुंचकर वहां से भी वापस आने की खबर है।
बरघाट शहर में व्याप्त चर्चाओं के अनुसार 17 या 18 साल के कमसिन विद्यार्थियों, जो कि सिवनी में पुलिस अधीक्षक निवास के पीछे रामनगर कॉलोनी में रहते हैं, के द्वारा सिवनी के एक निजी विद्यालय में अध्ययन किया जा रहा है। बताया जाता है कि इन युवाओं द्वारा अपने इसी रामनगर कॉलोनी में रहने वाले मित्र के यहां जाकर अय्याशी की जाती रही है।
इसी बीच युवाओं ने अपने ही बीच के एक मित्र को यह कहकर ब्लेकमेल करना आरंभ किया कि उन्होंने उसका एक अश्लील एमएमएस बना लिया है, जो वे सार्वजनिक करने वाले हैं। चर्चा है कि इसके एवज में उन युवाओं के द्वारा उक्त एक युवा से लगातार राशि की मांग की जाती रही।
बताया जाता है कि टुकड़ों टुकड़ों में चार से पांच लाख रूपए की राशि वसूली कर ली गई थी। पिछले दिनों जब एक बार फिर उक्त युवाओं ने इस पीड़ित युवा से राशि की मांग की और उक्त पीड़ित युवा के पास राशि का इंतजाम नहीं हुआ तो उक्त युवा ने एक पत्र लिखकर फांसी लगाने का प्रयास किया गया। बताया जाता है कि उक्त कृत्य को उसके पिता ने देख लिया।
बाद में जब पीड़ित के पिता के सामने पूरी घटना आई तो वे अवाक रह गए। उक्त पीड़ित युवा सिवनी के एक निजी स्कूल में अध्ययनरत है और बरघाट का ही रहने वाला है। जब उक्त पीड़ित युवा के पिता ने धमकाने वाले युवाओं के परिजनों के साथ बैठकर बातचीत की तो धमकाने वाले युवाओं ने उक्त पीड़ित युवा पर आरोप लगा दिया कि आईपीएल क्रिकेट सट्टे में वह पांच लाख रूपए हार चुका है जिसकी वे वसूली कर रहे हैं।

बताया जाता है कि इस मामले से नाराज होकर पीड़ित युवा के पिता ने बरघाट कोतवाली जाकर इस मामले में एक लिखित आवेदन देकर कार्यवाही की मांग की। वहीं पुलिस सूत्रों का कहना है कि धमकाने वाले युवाओं के परिजनों द्वारा, कोतवाली जाकर पीड़ित युवा के पिता पर दबाव बनाकर, उसका आवेदन वापस लेने पर उसे मजबूर कर दिया। इस संबंध में बरघाट कोतवाली (07692 250226) पर मुस्तैद कर्मचारी ने बताया कि इस तरह का कुछ वाक्या हुआ तो है पर उभय पक्ष कोतवाली के बाहर ही अपना झगड़ा निपटा रहे हैं।

आचार संहिता के भय से ही सही मिला तो सिंथेटिक हॉकी मैदान!

आचार संहिता के भय से ही सही मिला तो सिंथेटिक हॉकी मैदान!

नरेशमय हो गया था लोकार्पण समारोह, असहज ही दिखीं नीता पटेरिया, यशोधरा को भूला खेल युवक कल्याण विभाग, मीडिया से चर्चा में कतराए प्रभारी मंत्री

(अखिलेश दुबे/अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। अंततः हॉकी प्रेमियों के ख्वाब पूरे हो ही गए। सिवनी को एक सिंथेटिक हॉकी स्टेडियम की सौगात मिल ही गई। लगभग चार करोड़ रूपए की लागत से बना यह स्टेडियम लंबे समय से कथित तौर पर तैयार था, पर सूबे के निज़ाम शिवराज सिंह चौहान के इंतजार में हॉकी प्रेमी शराबी फिल्म का ‘इंतेहा हो गई इंतजार की, आई न कुछ खबर मेरे यार की. . .‘ गाने पर मजबूर थे। हॉकी के सीनियर खिलाड़ियों का मानना है कि आचार संहिता के भय से ही सही, कम से कम सिंथेटिक हॉकी मैदान का उद्घाटन हो तो गया। आज का कार्यक्रम पूरी तरह नरेश दिवाकर मय ही दिखा। वहीं मंच पर उपेक्षित सी रहने वाली सिवनी विधायक नीता पटेरिया पूरी तरह असहज ही दिखीं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की टीम ने जब एस्ट्रोटर्फ मैदान का निरीक्षण किया तब पाया कि स्टेडियम अभी भी आधा अधूरा ही था।
आज सिवनी जिले में नय्ो बस स्टेंड के पीछे मेजर ध्य्ाानचंद सिंथेटिक हॉकी स्टेडिय्ाम का शुभारंभ स्कूल शिक्षा राज्य्ामंत्र्ाी एवं जिले के प्रभारी मंत्र्ाी नानाभाऊ मोहोड़ द्वारा किय्ाा गय्ाा।
इस अवसर पर कलेक्टर भरत य्ाादव, महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्य्ाक्ष नरेश दिवाकर, राज्य्ा वित्त आय्ाोग के अध्य्ाक्ष डॉ.ढालसिंह बिसेन, विधाय्ाक सिवनी श्रीमती नीता पटेरिय्ाा, विधाय्ाक लखनादौन श्रीमती शशि ठाकुर, सहकारी बैंक के अध्य्ाक्ष अशोक तेकाम, नगरपालिका अध्य्ाक्ष राजेश त्र्ािवेदी, पूर्व भाजपा अध्य्ाक्ष सुजीत जैन, अजय्ा डागोरिय्ाा, एवं जिला खेल एवं य्ाुवा कल्य्ााण अधिकारी श्रीमती मकसूदा मिर्जा एवं गणमान्य्ा नागरिकगण उपस्थित थे।
प्रभारी मंत्र्ाी मोहोड़ ने कहा कि य्ाह अत्य्ांत हर्ष का विषय्ा है कि मुख्य्ामंत्र्ाी द्वारा बनाई गई य्ाोजना द्वारा संचालनालय्ा खेल एवं य्ाुवा कल्य्ााण मध्य्ाप्रदेश के सौजन्य्ा से सिवनी के खेल प्रेमी जनता को अंतर्राष्ट्रीय्ा मापदंडों के अनुरूप सिंथेटिक हॉकी स्टेडिय्ाम की उपलब्धि हासिल हुई है। फलस्वरूप हॉकी खिलाड़िय्ाों की बहुप्रतीक्षित मांग पूर्ण हुई है। कलेक्टर भरत य्ाादव के अथक प्रय्ाास से शीघ्र ही मेजर ध्य्ाानचंद सिंथेटिक हॉकी स्टेडिय्ाम का लोकार्पण संभव हो सका है।
उपस्थित सभी गणमान्य्ा नागरिकों को कलेक्टर भरत य्ाादव एवं श्रीमती मकसूदा मिर्जा जिला एवं य्ाुवा कल्य्ााण अधिकारी द्वारा पुष्पमाला एवं स्मृति चिन्ह भेंट किय्ाा गय्ाा। इस अवसर पर प्रभारी मंत्र्ाी नानाभाऊ मोहोड़ के समक्ष स्टेडिय्ाम में प्रदर्शन मैच महाकौशल टीम एवं सहकारिता टीम के मध्य्ा खेला गय्ाा अंत में दोनों टीमों को स्मृति चिन्ह भी भेंट किय्ाा गय्ाा।

जाली अधूरी!
कार्यक्रम आरंभ होने के पहले किए गए निरीक्षण में साई न्यूज की टीम ने पाया कि खेल एवं युवक कल्याण विभाग द्वारा बहुत ही चतुराई के साथ जिस ओर मंच बनाया गया था उस ओर मैदान की जाली लगा दी गई। शेष हिस्से में जाली लगाने का काम अभी अस्सी फीसदी से ज्यादा बाकी है। इसके उपरांत जब दक्षिण पूर्व सिरे पर टीम पहुंची तो पाया कि बुधवारी तालाब वाले सिरे और सब्जी मण्डी के पिछवाड़े में सड़क पूरी तरह खुली हुई है। इस सड़क से आवारा मवेशी मैदान के पास ही प्रवेश कर रहे थे। दक्षिण पश्चिम वाले सिरे में पेवर टाईल्स की छल्ली लगी हुई थी और दीवार के सहारे चेनल गेट नुमा कुछ लोहे की आकृतियां टिकी र्हुइं थीं। यहां लगभग आधा दर्जन सुअर भी विचरण करते हुए दिखाई दिए। वहीं मैदान के बीचों बीच पश्चिम दिशा में पेवर टाईल्स पानी में पूरी तरह डूबी हुईं थीं, यह सरफेस के अनईवन होने के चलते हुआ।

खुला हुआ है मैदान
मैदान में प्रवेश के लिए अभी कुछ माकूल प्रबंध नहीं हो पाए हैं। एक तो सब्जी मण्डी और बुधवारी तालाब की ओर यह खुला हुआ है, वहीं दूसरी ओर उत्तर पश्चिम दिशा में तो दीवार है ही नहीं। यहां से आवारा मवेशी और सुअर स्वच्छंद तरीके से अंदर आना जाना कर रही थीं। वह भी उस वक्त जब दस मिनिट बाद स्टेडियम का लोकार्पण किया जाना हो।

नहीं था शू टेंक
जानकारों का कहना था कि मैदान में प्रवेश के पूर्व खिलाड़ियों को एक शू टेंक से होकर गुजरना होता है ताकि बाहर की मिट्टी कंकर पत्थर मैदान में जाकर सिंथेटिक सरफेस को गंदा न कर पाएं। शू टेंक के अभाव में जिसका मन हो रहा था वह कीचड़ से सने पैर लेकर मैदान में जाकर सिंथेटिक मैदान में गंदगी फैला रहा था।

नरेश मय रहा प्रोग्राम
चूंकि तत्कालीन विधायक नरेश दिवाकर ने व्यक्तिगत दिलचस्पी लेकर इस मैदान को सिवनी में स्थापित करवाने के लिए एड़ी चोटी एक कर दी थी अतः खेल एवं युवक कल्याण विभाग सहित सारे उद्घोषकों ने महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष और भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश दिवाकर की तारीफ में कशीदे गढ़ दिए। वहीं, समूचे कार्यक्रम के दौरान मंचासीन सिवनी विधायक श्रीमती नीता पटेरिया इसलिए असहज दिखीं क्योंकि उनकी कोई भागीदारी इस मैदान में नहीं थी। जिला भाजपा ने उनके सांसद रहते हुए स्वीकृत हुए इस मैदान के लिए उनसे किसी तरह की राशि की मांग क्यों नहीं की? अथवा की तो क्या उन्होंने नहीं दी? यह बात भी दर्शकों में चर्चित ही रही।

यशोधरा को भूल गए!
प्रदेश की तत्कालीन खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया को मानो खेल एवं युवक कल्याण विभाग भूल गया था। खेल एवं युवक कल्याण विभाग द्वारा उनकी भागीदारी से पूरी तरह किनारा ही किया गया। जबकि सबसे पहले इस खेल मैदान के लिए तत्कालीन खेल संचालक एवं सिवनी में पदस्थ रहे पुलिस अधीक्षक संजय चौधरी के आग्रह पर ही यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा सिवनी में एस्ट्रोटर्फ के लिए पचास लाख रूपए की राशि की स्वीकृति प्रदान की गई थी। खेल युवक कल्याण अधिकारी द्वारा जब स्व.हरवंश सिंह द्वारा पांच लाख रूपए की राशि देने की बात कही गई तो पीछे से नीता पटेरिया ने जोर से संशोधन करते हुए कहा कि पांच नहीं चार लाख।

स्थानीय खिलाड़ियों को नहीं मिला भाव!
इस उद्घाटन समारोह में मंच से उद्घोषकों द्वारा एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान का बीज बोने वाले हॉकी खिलाड़ियों, स्व.सौभाग्य चंद मालू, जानकी प्रसाद पाठक, शशि कान्त शर्मा, राजेंद्र गुप्त आदि का नाम लेना भी शान के खिलाफ समझा गया। वह तो भला हो नरेंद्र अग्रवाल का जिन्होंने अपने संबोधन में पर्दे के पीछे के इन खिलाड़ियों के नाम लेकर लोगों की याद्दाश्त ताजा कर दी कि हार्ट पेशेंट होने के बाद भी सौभाग्य चंद मालू ने इस मैदान के लिए अपने स्वास्थ्य तक की परवाह नहीं की थी।

मीडिया से दूर रहे प्रभारी मंत्री
उद्घाटन के उपरांत जब नरेश दिवाकर द्वारा सिंथेटिक मैदान के बारे में विस्तार से मीडिया को बताया जा रहा था, तभी मीडिया ने प्रभारी मंत्री नाना भाऊ से भी कुछ कहने का आग्रह किया तो वे मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गए। बाद में जब दुबारा मीडिया ने उन्हें घेरा तो उन्होने लगभग खीजते हुए कहा कि क्या कहना है बताओ?

हॉकी जगत की सबसे बड़ी कमी आज पूरी हो गई है। यह उपलब्धि निश्चित तौर पर नरेश दिवाकर के खाते में ही जाएगी। सिवनी को हॉकी का बेहतरीन मैदान तो मिल गया है पर अब जरूरत काबिल खिलाड़ियों को चुनकर उन्हें तराशने की है।

अजय सूर्यवंशी, पूर्व कप्तान, हॉकी, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय सिवनी,

कैसे सुधरे नगर पालिका!

कैसे सुधरे नगर पालिका!

(शरद खरे)

नगर पालिका शब्द का व्यवहारिक अर्थ होता है नगर को पालने वाला। अर्थात नगर को बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाने वाला। नगर पालिका के गठन की अवधारणा यही रही कि नगरीय सीमा के अंदर रहने वालों को बुनियादी जरूरतों के लिए भटकना न पड़े। सिवनी नगर पालिका के हालात देखकर लगता है मानो सिवनी में नगर के बजाए नरक पालिका का शासन हो। सत्ता में बैठे नुर्माइंंदे, देश दुनिया की चिंता कर विज्ञप्तियों का अंबार लगाए हुए हैं, पर सिवनी की सुध किसी को नहीं है।
कांग्रेस में अजीब परंपरा का चलन हो गया है। जिला कांग्रेस कमेटी के तीन प्रवक्ता हैं। तीनों प्रवक्ताओं की तोप की नाल शिवराज सिंह चौहान पर ही जाकर टिक जाती है। शिवराज सिंह चौहान की जन विरोधी नीतियों के बारे में लिख लिखकर वे न तो ऊबते, न उबासी लेते और न ही थकते हैं। इनका धैर्य काबिले तारीफ ही माना जा सकता है। ये भूल जाते हैं कि शिवराज सिंह चौहान को कोसने के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी में पहले माणक अग्रवाल तो अब मुकेश नायक प्रवक्ता के बतौर मौजूद हैं। इनका मूल काम सिवनी जिले के अंदर की अनियमितताओं आदि पर प्रकाश डालने का है। वस्तुतः इस काम से ये मुंह ही चुराते नजर आते हैं। एक दैनिक अखबार (हिन्द गजट नहीं) में विधायक श्रीमती नीता पटेरिया की निधि से दी जाने वाली राशि की फेहरिस्त छपती है, इसमें कांग्रेस के नेताओं पदाधिकारियों के रिश्ते-नातेदारों के नाम होते हैं। तब भी इन्हें शर्म नहीं आती और न ही अफसोस ही होता है श्रीमती नीता पटेरिया को कि वे जनता विशेषकर गरीब गुरबों को दी जाने वाली राशि को अपने विरोधी दलों के संपन्न लोगों को देकर एक गलत और निंदनीय परंपरा का आगाज़ कर रही हैं।
यही आलम भारतीय जनता पार्टी का है। भाजपा के इकलौते प्रवक्ता भी लिए दिए अपना गुबार या भड़ास केंद्र की कांग्रेस सरकार पर निकालते हैं। कांग्रेस पर या मनमोहन सिंह पर वार करने के लिए देश में मुख्तार अब्बास नकवी या प्रकाश जावड़ेकर हैं न भई, आप तो सिवनी जिले पर केंद्रित रहिए। हरवंश सिंह ठाकुर कांग्रेस के विधायक रहे, पर भाजपा ने उन्हें सदा ही बचाए रखा। यह नूरा कुश्ती नहीं तो क्या है? जनता अब भरमाने में नहीं आने वाली। जनता अब आज़िज आ चुकी है इस तरह की नीतियों से।
बहरहाल, बात नगर पालिका की हो रही है। नगर पालिका परिषद् में कांग्रेस और भाजपा के पार्षद लगभग बराबरी से ही हैं। पालिका अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी भारतीय जनता पार्टी के हैं तो उपाध्यक्ष राजिक अकील कांग्रेस के। कांग्रेस के पास 12 पार्षद हैं। आज कांग्रेस के सारे पार्षद अपने अपने दिलों पर हाथ रखकर ईश्वर, अल्लाह, जीज़स, गुरूनानकदेव आदि अपने अपने ईष्ट को हाजिर नाजिर मानकर यह बात कहें कि वे उनके वार्ड में नगर पालिका की व्यवस्था से संतुष्ट हैं! अगर नहीं तो क्या किया है पार्षदों ने उस जनादेश के सम्मान का जो जनता ने उन्हें दिया है। हमारा यही प्रश्न भाजपा के पार्षदों से भी है।
नगर पालिका परिषद् के कार्यालय के अंदर कमीशनखोरी की गलाकाट स्पर्धा मची हुई है। जिस पार्षद को कमीशन नहीं मिला वही अध्यक्ष के खिलाफ तलवार पजाने लगता है। फिर अध्यक्ष कुछ ढीले पड़ते हैं और पार्षद उनकी गोद में जा बैठता है। हम पूरी जिम्मेदारी के साथ कांग्रेस के पार्षदों से पूछना चाहते हैं कि क्या उनके वार्ड में मच्छर भगाने के लिए फॉगिंग मशीन साल भर से घूम रही है? क्या उनके वार्ड में रोजाना साफ सफाई हो रही है? क्या उनके वार्ड में नियमित साफ पीने योग्य पानी की आपूर्ति हो रही है? क्या उनके वार्ड में आवारा मवेशी, सुअर और कुत्तों का आतंक नहीं है? अगर है तो उन्होंने क्या किया? सिर्फ एक पत्र लिखकर उसकी पावती रख लेने से कुछ नहीं होता पार्षद महोदयों! जनता को आप क्या बताएंगे। एक पुराना शेर याद पड़ता है -‘तुम राह में चुपचाप खड़े हो तो गए हो, किस किस को बताओगे कि घर क्यों नहीं जाते. . .।‘
कांग्रेस द्वारा भाजपा शासित नगर पालिका के खिलाफ आंदोलन चलाए गए। अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी के खेत में सड़क किनारे लगने वाले पेवर ब्लाक बनते पकड़े गए। इसके लिए कांग्रेस पार्षद विशेषकर उपाध्यक्ष राजिक अकील बधाई के पात्र हैं, किन्तु जब दो वक्त के बजाए एक वक्त ही साफ पानी की बात आती है तो कहां चला जाता है कांग्रेस के पार्षदों का आंदोलन करने का माद्दा। एक ठेला हटवाने के लिए कांग्रेस के पार्षद जमीन आसमान एक कर देते हैं पर आवारा मवेशी, सुअर, कुत्तों की बारी आती है तब क्यों इन पार्षदों को सांप सूंघ जाता है।
नगर पालिका परिषद् प्रशासन के निकम्मेपन की हद तो तब हो जाती है जब इसे जिले के कलेक्टर का भय भी नहीं रह जाता। संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव ने स्पष्ट और कड़े निर्देश इस बावत दिए हैं कि सड़कों पर आवारा मवेशी, सुअर कुत्ते आदि न घूमते पाए जाएं जिससे यातायात प्रभावित हो। किन्तु नगर पालिका प्रशासन को जिला कलेक्टर की परवाह लेश मात्र भी नहीं है तभी तो आदेश के लगभग एक माह बीतने के बाद भी आवारा सुअर, मवेशी, कुत्ते सड़कों पर धमाचौकड़ी करते नजर आ रहे हैं।

इस मामले में कांग्रेस की चुप्पी तो मैनेज्ड समझ में आती है, पर भारतीय जनता पार्टी की विधायक श्रीमती नीता पटेरिया के साथ ही साथ जिला अध्यक्ष नरेश दिवाकर और नगर अध्यक्ष प्रेम तिवारी को मानो सन्निपात हो गया हो। इनके मुंह भी पता नहीं किस उपकार के बदले सिल गए हैं। हमारा कहना महज इतना है कि एक परसेंट ही सही मानवता के नाते इन्हें जागना ही होगा, वरना सिवनी शहर जिसे शिव की नगरी कहा जाता है की जनता कराह कराह कर दम तोड़ देगी! अब संवेदनशील जिला कलेक्टर से ही अपेक्षा की जा सकती है कि वे ‘कड़े निर्देश‘ के बजाए ‘कठोर कदम‘ स्वयं ही उठाएं और जनता को नारकीय पीड़ा से मुक्ति दिलवाएं।

रविवार, 22 सितंबर 2013

डेंगू से फिर हुई एक महिला की मौत

डेंगू से फिर हुई एक महिला की मौत

(विकराल सिंह बघेल)

केवलारी (साई)। सिवनी में डेंगू जैसी खतरनाक बीमारी से एक 22 वर्षीय विवाहिता की मौत हो जाने के बाद डेंगू से मरने वालों का आंकड़ा 07 पहुंच गया है जो जिला प्रशासन के लिए चिंताजनक है परंतु प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इसकी कतई चिंता नहीं तभी तो सिवनी, छपारा, केवलारी क्षेत्र में डेंगू से मौत हो जाने के बाद भी विधायक पति डॉ.योगेश्वर सिंह ठाकुर और उनकी पूरी टीम निष्क्रिय पड़ी हुई है। 19 सितंबर को छपारा में 4थी के छात्र की मौत के बाद जानकारी मिली कि भाटीवाड़ा निवासी 22 वर्षीय विवाहित महिला विनीता बघेल की डेंगू से नागपुर में मौत हो गई।

बताया जाता है कि केवलारी के पास स्थित मलारा निवासी विनीता बघेल का विवाह, सिवनी विकासखंड के भाटीवाड़ा में हुआ था। गत दिवस विनीता को बुखार आया जिसका इलाज सिवनी में किया गया लेकिन आराम न होने से विनीता को नागपुर ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई। विनीता का अंतिम संस्कार भाटीवाड़ा में किया गया। डेंगू से एक के बाद एक मौत हो जाने के बाद भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को असर नहीं हो रहा है, तभी तो न लार्वा की पहचान की जा रही है और न ही जांच।

एस्ट्रोटर्फ का लोकापर्ण

एस्ट्रोटर्फ का लोकापर्ण

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। सिवनी के हॉकी प्रेमियों के बीस माह की प्रतीक्षा रविवार को उस समय समाप्त हो जाएगी जब मेेजर ध्यानचंद सिंथेटिक हॉकी स्टेडियम का लोकार्पण प्रभारी मंत्री नाना भाऊ माहोड़ के हाथों किया जाएगा।
जिला खेल एवं युवक कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री नाना भाऊ मुख्य अतिथि होंगे तो अध्यक्षता महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष नरेश दिवाकर द्वारा की जाएगी। इसके अलावा जिन नेताओं की गरिमामय उपस्थिति दर्शाई गई है उसकी फेहरिस्त बेहद लंबी है। इसमें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ.ढाल सिंह बिसेन को अध्यक्ष वित्त विकास निगम बताया गया है, के अलावा श्रीमति नीता पटेरिया, श्रीमति शशि ठाकुर, कमल मर्सकोले विधायक के उपरांत जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन चंदेल, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष अशोक तेकाम के उपरांत अंतिम नाम नगर के प्रथम नागरिक राजेश त्रिवेदी का दिया गया है।
नगर के हॉकी खिलाड़ियों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार बीस माह तक हॉकी खिलाड़ियों को इसमें खेलने से वंचित रखने के बाद मेजर ध्यान चंद के नाम पर रखे इस स्टेडियम का उद्घाटन न तो उनकी जन्म तिथि 29 अगस्त और न ही पुण्य तिथि 03 दिसंबर को करवाकर अचानक ही आचार संहिता लगने के डर से 22 सितम्बर को करवाया जा रहा है। वहीं आयोजन के कार्ड में प्रोटोकाल का ध्यान भी शायद नहीं रखा गया है। नगर के प्रथम नागरिक राजेश त्रिवेदी को सबसे आखिरी में स्थान दिया गया है जबकि वे शहर के प्रथम नागरिक हैं।

नरेश की सौगात है सिंथेटिक मैदान

सिवनी के हॉकी खिलाड़ियों को दी जाने वाली यह सौगात तत्कालीन विधायक नरेश दिवाकर की देन है। नरेश दिवाकर के विधायक रहते हुए इस मैदान की परिकल्पना को संजोया गया था। इसके बाद नरेश दिवाकर के ही प्रयासों से उन्होंने विधायक रहते हुए दस लाख रूपए, बरघाट के तत्कालीन विधायक ढाल सिंह बिसेन, श्रीमती शशि ठाकुर एवं राम गुलाम उईके ने पांच पांच लाख तो तत्कालीन विधायक हरवंश सिंह ने चार लाख रूपए की राशि प्रदान की थी। इसके बाद जब जब आवंटन की आवश्यक्ता पड़ी तब तब नरेश दिवाकर ने अपने प्रभावों का उपयोग कर राशि उपलब्ध करवाई है।

भारत गणराज्य का अंग नहीं है लखनादौन नगर परिषद्!

भारत गणराज्य का अंग नहीं है लखनादौन नगर परिषद्!

भाजपा कार्यालय के निर्माण में बाधक बनी नगर परिषद्, नियम विरूद्ध बना दी सब्जी मण्डी, अपनी ही सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठ सकते हैं मण्डल भाजपाध्यक्ष नरेश सेन

(अखिलेश दुबे/अय्यूब कुरैशी)

सिवनी/लखनादौन (साई)। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में लखन कुंवर की नगरी की नगर परिषद् के कारनामों को देखकर लगने लगा है मानो लखनादौन भारत गणराज्य का अंग नहीं रह गया है। लखनादौन में न तो भारत गणराज्य और न ही मध्य प्रदेश के कायदे, कानून, रीति नीति लागू हो रही है। लखनादौन में नगर परिषद् द्वारा मनमर्जी का काम कथित रूप से करवाया जा रहा है। कहा जा रहा है कि पूर्व में कृषि उपज मण्डी की जमीन पर नगर परिषद् द्वारा माननीय न्यायालय के स्थगन के बाद भी सब्जी मण्डी का निर्माण करवा दिया गया। इतना ही नहीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर नाली निर्माण के नाम पर अनुमति लेकर कॉम्पलेक्स के कालम खड़े किए जा रहे थे। लखनादौन में अनुविभागीय दण्डाधिकारी के आवास के सामने वाली सड़क बिना एग्रीमेंट के खोद दी गई ठेकेदार द्वारा और एसडीएम चुपचाप देखती रहीं। गत दिवस माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को धता बताते हुए नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुधा राय द्वारा ‘जनता की अदालत‘ के नाम पर किए गए भौंडे प्रदर्शन में रात दस बजे के बाद तक कानफाडू डीजे बजाए गए, खुद एसडीएम वहां बैठकर इसको देखती रहीं पर तत्काल कार्यवाही करने के बजाए उन्होंने अगले दिन नगर परिषद् को एक नोटिस जारी कर रस्म अदायगी कर डाली। माना जा रहा है कि जिला भाजपा और मण्डल भाजपा के बीच चल रही रस्साकशी के नतीजे के तौर पर उभरकर सामने आ रहा है इस तरह का परिदृश्य जिसमें भाजपा का हर पदाधिकारी मंझे हुए कलाकार के बतौर वहां होने वाले गलत काम का विरोध करना तो चाह रहा है किन्तु लखनादौन की एक शख्सियत के सामने घुटने टेककर अपनी शिकायत संबंधित को कर महज पावती ही पाकर अपना पक्ष मजबूत करता दिख रहा है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की जिला इकाई भी लखनादौन में होने वाले नियम विरूद्ध कामों में घुटनों पर खड़ी होकर सत्तारूढ़ निर्दलीय श्रीमती सुधा राय की तारीफ में राग मल्हार गाती दिख रही है।

कृषि उपज मण्डी की जमीन पर कब्जा!
कृषि उपज मण्डी के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि उनकी जमीन पर नगर परिषद् द्वारा सालों पहले कब्जा कर लिया गया था। बाद में तत्कालीन नगर परिषद् अध्यक्ष दिनेश राय द्वारा लिखित तौर पर इस जमीन को छः माह के अंदर रिक्त कर देने के वायदे के साथ इसका उपयोग किया जा रहा था। बाद में इस जमीन पर नगर परिषद् ने बलात् कब्जा कर लिया। इस संबंध में मण्डी द्वारा आपत्ति लिए जाने पर भी नगर परिषद् द्वारा जमीन को वापस नहीं किया गया। इस संबंध में सूत्रों ने बताया कि इस जमीन पर निर्माण के लिए माननीय उच्च न्यायालय और अनुविभागीय दण्डाधिकारी कोर्ट द्वारा भी स्थगन दिया गया है। बावजूद इसके इन स्थगनों को ठेंगा दिखाते हुए नगर परिषद् द्वारा इस जमीन पर सब्जी मण्डी का निर्माण करवा दिया गया।

एनएच के किनारे खड़े हो रहे थे कालम
इसी तरह नगर परिषद् लखनादौन द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक सात पर एनएच, वन विभाग आदि की जमीन पर पानी निकासी के लिए नाली निर्माण की अनुमति लेने के उपरांत वहां कालम खड़े किए जाने की खबर भी मिली है। बताया जाता है कि यहां भी एक व्यवसायिक कॉम्पलेक्स के निर्माण की योजना बनाई जा रही थी। अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि इस निर्माण पर भी स्थगन दे दिया गया है।

मुख्य मार्ग में की गई ठेकेदार की मदद
लखनादौन शहर के मुख्य मार्ग के निर्माण के लिए एक करोड़ नब्बे लाख रूपए का टेंडर निकाला गया बताया जाता है। बताते हैं कि इसका ठेका दमोह जिले के तहसील मुख्यालय हटा के निवासी एक ठेकेदार को दिया गया है। वहीं नगर परिषद् के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि हटा में नगर परिषद् अध्यक्ष श्रीमती सुधा राय का समधियाना भी संयोग से है। इस ठेकेदार द्वारा पांच प्रतिशत परफार्मेंस गारंटी जमा न करने, एग्रीमेंट न किए जाने के बाद भी इस सड़क को जेसीबी से खोदने की अनुमति नगर परिषद् द्वारा मौखिक तौर पर प्रदान कर दी गई थी। कहा जा रहा है कि उक्त काम को प्रधानमंत्री सड़क योजना के एक ब्लेक लिस्टिेड ठेकेदार द्वारा करवाया जा रहा है। इस संबंध में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया द्वारा एग्रीमेंट होने के पूर्व की सड़क पर चलते काम की तस्वीरें भी जारी की थीं। उस समय अनुविभागीय दण्डाधिकारी लता पाठक जो कि इस सड़क पर ही रहतीं हैं से इस बावत पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि उनके संज्ञान में कुछ भी नहीं है, सड़क का निर्माण तो चल रहा है पर एग्रीमेंट हुआ या नहीं इस बारे में उन्होंने कहा था कि वे सीएमओ से पूछकर बताएंगी।

भाजपाध्यक्ष नरेश दिवाकर ने भी किया था वायदा!
इस संबंध में जब समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया द्वारा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नरेश दिवाकर से पूछा था तो उन्होंन कहा था कि वे एक दो दिन में जिला कलेक्टर से मिलकर इसकी जांच करवाने की कार्यवाही अवश्य ही करवाकर अवगत कराएंगे। एक माह से ज्यादा समय बीत जाने पर भी इस संबंध में क्या कार्यवाही हुई इस बारे में न तो नरेश दिवाकर को ही समय मिल सका है और न ही किसी अन्य भाजपा के नुर्माइंंदे ने ही इसकी कोई जानकारी दी है।

भाजपा मण्डल अध्यक्ष रहे दो घंटे निरूद्ध
सत्तारूढ़ भाजपा के लिए इससे शर्म की क्या बात हो सकती है कि लखनादौन पुलिस द्वारा भाजपा के मण्डल अध्यक्ष नरेश सेन को दो घंटों तक अकारण ही अघोषित तौर पर कोतवाली में निरूद्ध कर रखा था। बाद में प्रभारी मंत्री के हस्ताक्षेप के बाद वे छूट सके। उन्होंने बताया कि वे अपनी पत्नि के साथ नगर परिषद् के सीएमओ के पास इस बात की आपत्ति व्यक्त करने गए थे कि आखिर नगर परिषद् के विज्ञापन में बाहरी व्यक्ति (दिनेश राय) की फोटो कैसे चस्पा है? इस पर हुए वाद विवाद के बाद सीएमओ की तरफ से थाने में नरेश सेन के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई थी।

हुआ सर्वोच्च न्यायालय का आदेश छलनी
देश की सबसे बड़ी अदालत ने रात दस बजे के उपरांत कानफाडू डीजे बजाए जाने पर बंदिश लगाई थी। यह बंदिश भारत गणराज्य के अंग लखनादौन में लागू नहीं होती। गत 15 सितम्बर को नागपुर और मुंबई की बार बालाओं ने लखनादौन में भौंडा प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन की अनुमति किसने कितने बजे तक दी थी यह बात उस दिन कोई भी नहीं बता सका। इस प्रोग्राम में एसडीओपी और एसडीएम भी उपस्थित थे। अगले दिन एसडीएम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन के लिए नगर परिषद् को नोटिस जारी किया। सवाल यह उठता है कि अगर वे स्वयं रात दस बजे तक चलने वाले कार्यक्रम में मौजूद थीं तो उन्होंने तत्काल उसी समय इसे रोकने की कार्यवाही क्यों नहीं की?

भाजपा कार्यालय का सामान बिखराया!
भाजपा के मण्डल अध्यक्ष नरेश सेन ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि नगर परिषद् लखनादौन द्वारा उन्हें महज आधे घंटे में ही दो नोटिस भेजे गए। एक नोटिस 19 तो दूसरा 20 सितम्बर का है। दोनों ही 20 को उन्हें दिए गए। उन्होंने बताया कि भाजपा के मण्डल कार्यालय का मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन था। हाई कोर्ट ने कुल भूखण्ड में 33 फीसदी भाग में निर्माण के निर्देश दिए थे। इसकी अनुमति पूर्व में जब सनत पटेल सीएमओ थे तब ले ली गई थी। अब उसको रिन्यू करवाना बाकी था। परिषद् ने दो नोटिस थमाकर वहां लगी सैंट्रिंग बिखरा दी, और बाकी सामान उठाकर चल दिए नगर परिषद् वाले। बकौल नरेश सेन नगर परिषद् की दबंगई इस कदर चल रही है कि उन्होंने नोटिस का जवाब देने तक का समय नहीं दिया।

मण्डल भाजपा की रस्म अदायगी!
भाजपा के लखनादौन मण्डल की रस्म अदायगी का यह आलम है कि लखनादौन में होने वाली नियम विरूद्ध घटनाओं के बारे में एक आवेदन की पावती लेकर भाजपा अपनी फाईल ही मोटी करती जा रही है। इस मामले में भी भाजपा की मण्डल की बैठक में एक निंदा प्रस्ताव पारित कर आवेदन बनाकर एसडीएम, एसडीओपी और कोतवाली को दे दिया गया है।

सरकार किसकी? भाजपा या निर्दलीय की!
लखनादौन में भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि लखनादौन में आखिर सरकार किसकी चल रही है? एक अदना सा निर्दलीय प्यादा लखनादौन में अपनी हुकुमत चला रहा है और भाजपा संगठन सहित विधायक भी अपने आप को इस मामले में बौना ही पा रही है। भाजपा के एक पदाधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि लखनादौन में भाजपा भीगी बिल्ली बनी हुई है और निर्दलीय रहे दिनेश राय और सुधा राय शेर की तरह दहाड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधायक और संगठन भी इनका कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे हैं। इन परिस्थितियों में अब भाजपा के कट्टर कार्यकर्ता भी यह सोचने पर मजबूर हो रहे हैं कि अगर भाजपा उन्हें संरक्षण देने में असमर्थ है तो बेहतर होगा कि वे निर्दलीय का झंडा ही थाम लें।

यह है मूल कारण!

समाचार एजेसंी ऑफ इंडिया के भोपाल ब्यूरो से राजेश शर्मा ने बताया कि सिवनी जिले में राय परिवार के खिलाफ मुंह खोलने की जुर्रत भाजपा के नेता इसलिए नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि भाजपा के आला नेताओं का वरद हस्त दिनेश राय पर है। भाजपा के प्रदेश स्तर के नेताओं की आंख का नूर बने हुए हैं दिनेश राय। वहीं भाजपा के अंदरखाने से यह खबर भी छन छन कर बाहर आ रही है कि भाजपा के एक शीर्ष नेता ने सिवनी जिला इकाई को साफ तौर पर निर्देशित किया है कि भले ही पार्टी का कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर चला जाए पर दिनेश राय के खिलाफ न तो कोई कदम उठाया जाए और न ही कोई विज्ञप्ति आदि भी जारी की जाए। संभवतः यही कारण है कि भाजपा जिला इकाई और भाजपाध्यक्ष नरेश दिवाकर सहित सांसद विधायक सभी लखनादौन के मामले में अपने जबड़े सख्ती से भींचे हुए हैं।