शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

कमल नाथ की सभा का व्यय जुड़ सकता है रजनीश और राजकुमार के खाते में!

कमल नाथ की सभा का व्यय जुड़ सकता है रजनीश और राजकुमार के खाते में!

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। 13 नवंबर को सिवनी और केवलारी विधानसभा में संपन्न हुई केंद्रीय मंत्री कमल नाथ की सभा का व्यय भी सिवनी से कांग्रेस प्रत्याशी राजकुमार खुराना और केवलारी के कांग्रेस प्रत्याशी रजनीश सिंह के खाते में जोड़ा जा सकता है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के बाद यह कवायद की जा सकती है।
ज्ञातव्य है कि मध्य प्रदेश के जनसंपर्क संचालनालय द्वारा 13 अक्टूबर को जारी समाचार में कहा गया था कि मध्यप्रदेश में इस साल होने वाले विधानसभा निर्वाचन के दौरान उम्मीदवारों को चुनाव खर्च के मामले में बेहद सतर्क रहना होगा। निर्वाचन व्यय पर आयोग और विभिन्न टीमों की लगातार निगरानी रहेगी। उम्मीदवारों की निर्वाचन अभियान संबंधी प्रत्येक गतिविधियाँ भी वीडियोग्राफर के केमरे में दर्ज हांेगी।
विज्ञप्ति में आगे कहा गया था कि चुनाव के दौरान राजनैतिक दलों के स्टार प्रचारकों का दौरा, रैली, सभाओं पर भी विशेष निगाह रखी जायेगी। यदि उम्मीदवार स्टार प्रचारक के साथ यात्रा करता है तो पचास प्रतिशत यात्रा खर्च प्रत्याशी के चुनाव खर्च में जोड़ा जायेगा। यदि उम्मीदवार स्टार प्रचारक के साथ पंडाल सभा करता है और सभा में अपने नाम के साथ उसका फोटो या पोस्टर प्रदर्शित होता है तो सभा का खर्च भी प्रत्याशी के खाते में जोड़ा जायेगा। स्टार प्रचारक के साथ यात्रा खर्च में उन्हीं को छूट मिलेगी, जो परिचारक, सुरक्षा एवं चिकित्सा कर्मी, प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का कोई प्रतिनिधि, कोई व्यक्ति या दल का सदस्य जो चुनाव क्षेत्र का प्रत्याशी तथा प्रत्याशी के चुनाव अभियान में सम्मिलित नहीं है।

जुड़ेगा प्रत्याशी के व्यय में खर्च: गुप्ता
इस संबंध में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। मीडिया सर्टिफिकेशन और मीडिया मानीटरिंग समिति की प्रभारी बबीता मिश्रा ने बताया कि इस बारे में समूची जानकारी व्यय प्रेक्षक दे पाएंगे। इस संबंध में सिवनी के व्यय प्रेक्षक श्री गुप्ता से (9425827384) जब चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि आयोग के निर्देश पर स्टार प्रचारकों के कार्यक्रमों की वीडियोग्राफी करवाई जा रही है। सिवनी एवं केवलारी विधानसभा में 13 जून को हुई केंद्रीय मंत्री की सभा की सीडी तैयार हो गई है एवं आज संपन्न एल.के.आडवाणी की सभा की वीडियोग्राफी वे देखेंगे और निर्धारित करेंगे कि प्रत्याशी के खाते में व्यय जोड़ा जाए अथवा नहीं। उन्होंने कहा कि अगर स्टार प्रचारक द्वारा अभ्यार्थी के पक्ष में प्रचार किया जाता है, तो आधा खर्च प्रत्याशी के खाते में चला जाएगा।

दिया तले अंधेरा की कहावत चरितार्थ हो रही छपारा में

कौन समझेगा सिवनी की प्रसव वेदना. . .2

दिया तले अंधेरा की कहावत चरितार्थ हो रही छपारा में

(लिमटी खरे)

सिवनी के नाम से शहरों के नामों की कमी प्रदेश में नहीं है। होशंगाबाद जिले का सिवनी मालवा भी काफी मशहूर है। जिला सिवनी को सिवनी छपारा के नाम से पहचाना जाता है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। सिवनी को देश प्रदेश में पहचान दिलाने में छपारा का अपना अलग महत्व है। बावजूद इसके छपारा आज भी विकास को बुरी तरह तरस रहा है। छपारा के अविकसित रहने की पीड़ा यहां के निवासियों को अवश्य ही सालती होगी।
छपारा का नाम आते ही लोगों के जेहन में कांग्रेस के कद्दावर नेता हरवंश सिंह ठाकुर का नाम आना स्वाभाविक ही है। हरवंश सिंह ठाकुर ने छपारा को एक पहचान दिलवाई है। इसका कारण हरवंश सिंह ठाकुर की रिहाईश छपारा के करीब बर्रा में होना है। इसके अलावा सिवनी की सांसद रहीं और वर्तमान में सिवनी की विधायिका श्रीमति नीता पटेरिया का आशियाना भी छपारा में है। छपारा निवासी रमेश जैन को सिवनी विधानसभा के लोगों ने विशाल जनादेश देकर विधायक बनाया।
छपारा की जनता ने वैसे तो कांग्रेस पर ही भरोसा जताया है। वर्ष 2008 में जब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हैट्रिक लगाई उस समय भी छपारा अंचल के लोगों ने कांग्रेस के कद्दावर नेता हरवंश सिंह ठाकुर को ही अपना भाग्य विधाता चुना। छपारा के लोगों का दर्द आज भी उनके चेहरे पर दिखाई पड़ता है क्योंकि भाजपा की सांसद रहीं और वर्तमान में सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कांग्रेस के हरवंश सिंह ठाकुर, कांग्रेस के विधायक रमेश जैन के रहते हुए भी छपारा आज भी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक सात पर अवस्थित छपारा शहर के लोगों के दर्द को इस बात से समझा जा सकता है कि प्रमुख राजनैतिक दल कांग्रेस और भाजपा के भरपूर कद के नेता देने के बाद भी छपारा को नगर पंचायत का दर्जा नहीं मिल पाया है। छपारा संभवतः प्रदेश की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है जिसमें तीस हजार से अधिक जनता निवासरत है। छपारा को ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बनाने की मांग नई नहीं है। इसके पहले भी छपारा के निवासियों ने कांग्रेस के तत्कालीन त्रिविभागीय मंत्री हरवंश सिंह ठाकुर के अलावा भाजपा की सांसद और वर्तमान सिवनी विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, पूर्व विधायक रमेश चंद जैन सहित प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से अनेकों बार गुहार लगाई। विडम्बना ही कही जाएगी कि छपारा के लोगों के हाथों में हर बार ही लालीपॉप लगा। कमोबेश यही आलम कान्हीवाड़ा का है, जिसे उपतहसील का दर्जा दिया जाना था।
छपारा की माटी में पलकर देश प्रदेश में नाम रोशन करने वाले नेताओं के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि नेता यहीं से पनपे हैं मगर इन नेताओं ने छपारा के विकास के बारे में कभी विचार नहीं किया है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधनों का अभाव किसी से छिपा नहीं है और वहीं दूसरी ओर यहां के नेताओं की दिन दूगनी रात चौगनी दर से बढ़ने वाली संपत्ति भी किसी से छिपी नहीं है।
कहने को तो छपारा शहर के दक्षिणी मुहाने से पुण्य सलिला बैनगंगा गुजरती है, बावजूद इसके छपारा के लोगों के कण्ठ प्यासे ही रह जाते हैं। कहा जाता है कि छपारा शहर में चार दशकों पुरानी नल जल योजना के भरोसे ही पानी की सप्लाई हो रही है। छपारा से कुछ ही दूरी पर बर्रा में निवास करने वाले स्व.हरवंश सिंह ठाकुर प्रदेश सरकार में दस साल तक मंत्री रहे। इतना ही नहीं हरवंश सिंह ठाकुर प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री रहे पर छपारा में दिया तले अंधेराकी कहावत चरितार्थ हो रही है। हरवंश सिंह ठाकुर जैसे कद्दावर नेता के रहते हुए भी छपारा में नल जल योजना का न बन पाना अपने आप में विकास की झूठी कहानी कहने के लिए पर्याप्त है।
वर्तमान में चुनावी बिसात में गर्माहट महसूस की जाने लगी है। इस चुनावी गर्माहट में अब जनता प्रमुख राजनैतिक दल कांग्रेस और भाजपा से उनके द्वारा पिछले दशकों में किए गए कामों का लेखा जोखा लेकर बैठी है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रही तब हरवंश सिंह विधायक और मंत्री रहे, उस वक्त विपक्ष में भाजपा थी। वर्ष 2003 के उपरांत दस सालों से प्रदेश में भाजपा की सरकार है और विपक्ष में कांग्रेस बैठी है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि पिछले ढाई दशकों में छपारा की समस्याओं को लेकर किसी ने भी विधानसभा में इस संबंध में प्रश्न करना तो दूर एक ध्यानाकर्षण लगाना तक मुनासिब नहीं समझा।

छपारा क्षेत्र की जनता की खामोशी से लग रहा है मानो वह अब सोच समझकर ही कोई फैसला लेने वाली है। छपारा वर्तमान में केवलारी विधानसभा का अंग है। क्षेत्र की जनता कांग्रेस और भाजपा को सालों से आजमाए हुए है, बावजूद इसके छपारा में विकास की किरण प्रस्फुटित न हो पाना भी अपने आप में रिकार्ड ही माना जाएगा। प्रमुख सियासी दलों के प्रत्याशियों से अगर जनता ने यह प्रश्न पूछ लिया कि आखिर दशकों से उनके हितों में इन प्रत्याशियों द्वारा उपयुक्त मंच यानी विधानसभा में क्या प्रश्न किए गए और उन पर क्या कार्यवाही हुई तो प्रत्याशियों के सामने समस्या खड़ी हो सकती है। वहीं दूसरी ओर अब क्षेत्र की जनता नए चेहरे की ओर देखे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

लगा कांग्रेस को झटका! भाजपा ने झटके दो विकेट!

लगा कांग्रेस को झटका! भाजपा ने झटके दो विकेट!

(पीयूष भार्गव)

सिवनी (साई)। सिवनी में पूर्व उप प्रधानमंत्री एल.के.आडवाणी की यात्रा से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं ने आज कांग्रेस का दामन छोड़कर भाजपा की रीति निति में आस्था जताते हुए भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
आज एल.के.आडवाणी की सभा के पूर्व जिला कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुंगवानी क्षेत्र में पैठ रखने वाले धर्मेंद्र सिंह ठाकुर एवं कमलनाथ प्रशंसक फोरम से सालों से जुड़े रहे एवं मण्डी के सदस्य रहे संजय चौधरी ने आज भाजपा की सदस्यता ले ली। इन दोनों नेताओं के साथ ही साथ सिवनी से कांग्रेस के विधायक रहे अब्दुल रहमान फारूखी की पुत्री डॉ.असरा फारूखी ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार भाजपा की रीति नीतियों, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यों एवं भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश दिवाकर की मिलनसार व सेवाभावी छवि से प्रभावित होकर आज माननीय लालकृष्ण आडवानी जी की सभा के दौरान कांग्रेस के पूर्व विधायक स्वर्गीय अब्दुल रहमान फारूकी की पुत्री डॉ.असरा फारूकी सहित, जिला इंका के उपाध्यक्ष ठाकुर धर्मेन्द्र सिंह, कमलनाथ प्रशंसक फोरम के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं पूर्व मंडी सदस्य व किसान कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री संजय चौधरी ने आज अपने 202 साथी कार्यकर्ताओं के साथ भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
भाजपा मीडिया प्रभारी श्रीकांत अग्रवाल ने बताया कि इन सभी नवागत सदस्यों का मंच पर आसीन पार्टी पदाधिकारियों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया। नवागत सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा गांव और किसान की छवि वाले मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में शासन कर रही हैं। हम सभी भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने पर बहुत गर्व महसूस कर रहे है। आज हमें कांग्रेस पार्टी के कष्टों और घुटन से मुक्त होने का अवसर मिला है।

नवागत सदस्यों ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश को दोबारा सामंतशाही व्यवस्था की ओर ढकेलना चाह रही है। कांग्रेस के अनेक नेता पार्टी में चल रही गतिविधियों से बेहद खफा है। इस वेदना से मुक्ती पाने के लिए ही हमने भाजपा का दामन थामा है। हम भाजपा की गरीब किसान एवं मजदूर की सेवा के प्रति संकल्पबद्धता से प्रभावित हैं और ऐसी पार्टी मे आज हम सभी शामिल होकर प्रसन्नता महसूस कर रहे हैं। हम अपने भाजपा के सभी साथियों को यह विश्वास भी दिलाते हैं कि हम सभी पार्टी की विचारधारा के अनुरूप पूरे तन-मन से कार्य करने के लिए संकल्पित हैं।

इतिहास की क्लास ले गए आडवाणी!

इतिहास की क्लास ले गए आडवाणी!

(महेश रावलानी)

सिवनी (साई)। ‘1984 में लोकसभा नहीं, शोकसभा के चुनाव हुए थे। उस समय राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए कांग्रेस आतुर थी। उस चुनाव में कांग्रेस को जितनी सीटें मिली थीं उतनी सीटें तो पंडित जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भी कभी नहीं मिलीं।
उक्ताशय की बात कल तक राजग के पीएम इन वेटिंग रहे एल.के.आडवाणी ने आज मिशन उच्चतर माध्यमिक शाला के दो तिहाई से ज्यादा रिक्त मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए कही। भाजपा नेता आडवाणी आज देर शाम हेलीकॉप्टर से सिवनी पहुंचे और सभा स्थल पर लगभग आधे घंटे रूकने के बाद वापस लौट गए। आडवाणी का भाषण पूरी तरह 2004 तक के लोकसभा चुनावों पर केंद्रित लगा जिसमें उन्होंने संसद के इतिहास को बताने में ही ज्यादा दिलचस्पी दिखाई।
लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा कि वे 1951 से सक्रिय राजनीति में हैं, जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि वे समूचे भारत वर्ष के अनेक जिलों में जा चुके हैं, कम ही जिले ऐसे बचे होंगे जहां वे नहीं गए होंगे। उन्होंने कहा कि 1984 में भाजपा को महज दो सीट मिली थीं, उस चुनाव के बाद कार्यकर्ता उनसे पूछा करते थे कि आखिर क्या हुआ कि लोकसभा में इतनी कम सीटें मिलीं। इस पर वे कार्यकर्ताओं को जवाब दिया करते थे कि चौरासी का लोकसभा चुनाव वाकई में शोकसभा का चुनाव था। उस समय सहानुभूति लहर का फायदा कांग्रेस को मिला। इस समय इंदिरा गांधी की उनके ही सुरक्षा कर्मियों ने हत्या कर दी थी।
आडवाणी ने कहा कि देश में लाल बहादुर शास्त्री और गुलजारी लाल नंदा जैसे ईमानदार और योग्य प्रधानमंत्री देश में हुए हैं। उन्होंने कहा कि 1989 के चुनावों में भाजपा का परफार्मेंस देखने लायक था जिसमें भाजपा को 86 सीट मिली थीं। गठबंधन सरकारों पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस और भाजपा ही दो ऐसी पार्टी हैं जिनके प्रधानमंत्री सबसे ज्यादा समय तक रहे हैं, शेष दलों के पीएम कुछ ही समय के लिए गद्दी पर बैठे। उन्होंने कहा कि एक समय था जब दिल्ली का 7 रेसकोर्स रोड का बंग्ला (भारत के प्रधानमंत्री का सरकारी आवास) सबसे महत्वपूर्ण माना जाता था, पर बाद में यह खिसककर 10, जनपथ (कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी का सरकारी आवास) हो गया है।

नरेश से नहीं मिल पाए आडवाणी
अपने भाषण में पूर्व उप प्रधानमंत्री आडवाणी ने कहा कि चुनाव आयोग के निर्देशों के चलते वे नरेश दिवाकर से नहीं मिल पाए हैं, क्योकि अगर प्रत्याशी मंच पर आएगा तो उनकी यात्रा का सारा खर्च प्रत्याशी के खाते में जुड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि वे चुनाव आयोग से इस बारे में बात करेंगे। भाजपा प्रत्याशी नरेश दिवाकर को जिताने की परोक्ष अपील करते हुए उन्होंने कहा कि अगर आप (सिवनी की जनता) उन्हें जिता देगी तो वे बतौर विधायक उनसे बाद में मिल लेंगे।

जुड़ सकता है यात्रा का खर्च
वहीं, यह चर्चा भी मीडिया के बीच रही कि एल.के.आडवाणी ने नरेश दिवाकर को जिताने की अपील की है, भले ही वह परोक्ष तौर पर की गई हो, तो आडवाणी की सिवनी यात्रा का खर्च नरेश दिवाकर के खाते में जोड़ा जा सकता है। वहीं, एक महिला वक्ता द्वारा आडवाणी के आने के पूर्व नरेश दिवाकर को विजयी बनाने की अपील की गई, जिसे भी व्यय की दृष्टि से प्रत्याशी के खाते में जोड़ने की चर्चा चलती रही।

पढ़ा गए इतिहास
वहीं, श्रोताओं के बीच यह चर्चा चलती रही कि एल.के.आडवाणी द्वारा विधानसभा सिवनी के चुनाव प्रचार के दौरान संसद के इतिहास को क्यों बताया जा रहा है। मिशन उच्चतर माध्यमिक शाला लगभग दो तिहाई खाली मैदान में श्रोता कुछ समय बाद ही इतिहास सुनने में दिलस्पी नहीं दिखाते हुए धीरे धीरे सभास्थल से कूच करते देखे गए।

रहा महिलाओं का स्थल रीता!

सिवनी में हुई इस सभा में पुरूषों के लिए निर्धारित स्थल भी आधे से ज्यादा खाली ही था, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के लिए आरक्षित स्थल में मीडिया कर्मी अलबत्ता इस आरक्षित स्थल पर अवश्य ही देखे गए। मीडिया कर्मियों के अनुसार उनके लिए आरक्षित स्थल में कुर्सियों पर एक दर्जन से ज्यादा महिलाओं ने कब्जा जमा लिया था, अतः मजबूरी में उन्हें महिलाओं के लिए आरक्षित किन्तु खाली पड़े स्थान पर जाकर रिपोर्टिंग करना पड़ा।

कौन देगा बुनियादी सुविधाएं

कौन देगा बुनियादी सुविधाएं

(शरद खरे)

सिवनी शहर आज़ाद भारत का ही एक अंग है। आज़ाद भारत में हर नागरिक को पीने को साफ पानी, प्रकाश, साफ सफाई आदि जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना शासन प्रशासन का प्रथम दायित्व है। अगर किसी नागरिक को यह बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? जाहिर है स्थानीय निकाय यानि नगर पालिका, नगर पंचायत या नगर निगम ही इसके लिए जवाबदेह हैं।
सिवनी शहर में साफ पानी जनता को पिलाने की जवाबदेही नगर पालिका की ही है। नगर पालिका को चाहिए कि वह पानी की गुणवत्ता का पूरा पूरा ध्यान रखे। साथ ही साथ साफ सफाई भी नगर पालिका की ही जवाबदेही है। दोनों ही मामलों में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली नगर पालिका परिषद् फेल्युअर ही साबित हुई है। सिवनी शहर के नागरिक आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरसते ही नजर आ रहे हैं।
सिवनी में भीमगढ़ जलावर्धन योजना के आरंभ होते ही लोगों को लगने लगा था मानो उन्हें जन्नत मिलने वाली हो। वे जन्नत का मजा ले सकेंगे। जैसे ही यह योजना मूर्त रूप में आई, वैसे ही लोगों की आशाओं पर तुषारापात हो गया। लोगों को दो समय पूरा पानी तो छोड़िए, एक समय भी साफ पानी मयस्सर नहीं हो पाया। लोगों का भरोसा तब टूटा जब उनके नलों से, फिल्टर किए हुए पानी के बजाए गंदा बदबूदार और कीड़े युक्त पानी आने लगा। लोगों के नलों ने इस तरह का गंदा पानी उगला तो लोगों का दिल टूट गया। जब भीमगढ़ जलावर्धन योजना आरंभ हुई और सालों तक गंदा पानी मिला तब भी किसी विधायक ने इस बारे में विधानसभा में प्रश्न उठाकर इसकी गुणवत्ता या इसकी कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाया। जिससे यह साबित हो गया कि चोर चोर मौसेर भाई की तर्ज पर सभी जनता को छलने में अपने अपने हुनर का प्रदर्शन करते आए हैं।
सिवनी शहर में कहने को तो विशाल जलसंग्रह क्षमता वाला बबरिया, दलसागर, बुधवारी, मठ तालाब है। इसके अलावा यहां रेल्वे स्टेशन के पास दो तालाब और न जाने कितने कुंए बावली और नलकूप हैं। बावजूद इसके भगवान शिव की नगरी में लोग गर्मी तो छोड़िए बारिश के मौसम में भी कण्ठ की प्यास बुझाने के लिए तरसते नजर आते हैं। क्या यही है भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के सिवनी जिले की किस्मत!
सिवनी में चहुंओर गंदगी पसरी हुई है। नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं। जहां तहां निर्माण कार्य मनमाने तरीके से संचालित हो रहे हैं। नगर पालिका के चहेते ठेकेदारों ने सड़कों पर निर्माण सामग्री बेतरतीब बगरा रखी है। नाली और सड़कों का निर्माण, घटिया और स्तरहीन हो रहा है। कहीं किसी की जमीन पर ही नगर पालिका ने बिना किसी पूर्व सूचना के ही सड़क या नाली का निर्माण करवा दिया है, कहीं नाली उबड़ खाबड़ है तो कहीं नाली पूरी बनी ही नहीं है। महीनों से नाली आधी अधूरी ही पड़ी है।
अतिक्रमण का दानव सिवनी की सड़कों को निगल रहा है। सिवनी में सड़कें तंग गलियों में तब्दील हो गई हैं। सड़कों की स्थिति ऐसी है, उसे देखकर लग रहा है मानों इस पर सर्कस के बाजीगर ही चल सकें। हां कुछ जगहों की सड़कें दुरूस्त हैं। ये जगहें वे मानी जा सकती हैं, जहां प्रशासन के आला अधिकारियों के अलावा सांसद विधायक, पूर्व विधायक आदि निवास कर रहे हैं। इन लोगों के घरों के सामने की या घर पहुंच मार्ग बनाने में पूरी गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता है। क्या इसी तरह की सड़कों का जाल पूरे शहर में नहीं बिछाया जा सकता? क्या कारण है कि नगर पालिका परिषद् द्वारा शेष शहर की सड़कों के निर्माण पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
एसपी बंग्ले से लेकर कलेक्टर बंग्ले, और बाहुबली चौक से लेकर पुराने आरटीओ तक के पहुंच मार्ग पर चलना दूभर था। यह सड़क बनने के बाद ही उखड़ गई। सिवनी में नगर पालिका जो न कराए, कम ही है। बाहुबली चौक से पुराने आरटीओ वाले मार्ग पर सीमेंटीकृत सड़क पर जब तब डामर लगाया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इस सड़क से होकर व्हीव्हीआईपीज यदा कदा आते जाते हैं। दरअसल, सिवनी में अतिविशिष्ट लोगों के उड़न खटोले स्थानीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में ही उतरा करते हैं। ये लोग इसी मार्ग का प्रयोग कर गंतव्य तक जाकर वापस उड़न खटोले से सिवनी से रवानगी ले लेते हैं।
शहर की सफाई व्यवस्था भी इस तरह की हैं कि सारे शहर में जहां तहां कचरों के ढेर पर आवारा मवेशी, कुत्ते, सुअर आदि मुंह मारते नजर आ जाते हैं। लोग परेशान हैं कि आखिर इन आवारा मवेशियों का ईलाज किया जाए तो कैसे? लोगों के घरों में में आवारा मवेशी घुसकर नुकसान कर रहे हैं। दुकानदार भी परेशान हैं, उनके प्रतिष्ठानों के सामने आवारा मवेशी गोबर कर जाते हैं, और सुबह सवेरे जब वे अपने प्रतिष्ठान पहुंचते हैं तो उनके सामने गोबर हटाने की समस्या सबसे बड़ी होती है।
शहर में दलसागर तालाब को लोग आन बान और शान के रूप में देखा करते थे। आज आलम यह है कि दलसागर तालाब में ही गंदगी पसरी पड़ी है। लगभग सवा करोड़ रूपए पानी में बहाने के बाद भी दलसागर की स्थिति नहीं सुधर सकी है। इसके बाद अब पर्यटन विभाग द्वारा इसमें राशि खर्च की जाना प्रस्तावित है।

शहर की अव्यवस्था के संबंध में अनेक बार लोगों के द्वारा भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष नरेश दिवाकर से संपर्क भी किया गया, उनसे शिकायत भी की। एक बार तो व्यापारियों के लीज के मामले में नरेश दिवाकर द्वारा जिला कलेक्टर से चर्चा भी की थी। पर पता नहीं क्यों जनता से जुड़े मुद्दों के मामले में उन्होंने ध्यान देना उचित नहीं समझा। भाजपा शासित नगर पालिका परिषद् के द्वारा इस तरह की कार्यप्रणाली में विपक्ष में बैठी कांग्रेस भी मौन रहकर सहभागी बनी हुई है। टूटी पुलिया के पास वाले इलाके में एक सड़क विशेष के इर्द गिर्द रहने वाले लोगों का हवा पानी, आवागमन भी पालिका द्वारा दो तीन माह से अवरूद्ध किया हुआ है किन्तु कांग्रेस के भी किसी छोटे बड़े नेता को जनता की समस्याओं से लेना देना नजर नहीं आ रहा है। हो सकता है कांग्रेस और भाजपा के छद्म युद्ध में सिवनी की जनता बुरी तरह पिस रही हो, और यही उसके भाग्य में भी लिखा हो!

गुरुवार, 14 नवंबर 2013

नरेश दिवाकर के जनसंपर्क में खूनी संघर्ष!

नरेश दिवाकर के जनसंपर्क में खूनी संघर्ष!

बीजेपी नेताओं ने की मारपीट, चार लोग घायल

(अय्यूब कुरैशी)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले में चुनावी बयार अब तेज होती दिख रही है। सिवनी की चार विधानसभाओं में से सिवनी विधानसभा में चुनाव में कुछ हिंसा होने की खबरें मिल रही हैं। भारतीय जनता पार्टी के सिवनी विधानसभा क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी नरेश दिवाकर के जनसंपर्क के दौरान पुसेरा में खूनी संघर्ष होने की खबर है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के ग्राम पुसेरा में भारतीय जनता पार्टी के सिवनी विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी नरेश दिवाकर के जनसंपर्क के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट करने से चार ग्रामीणों के घायल होने की जानकारी मिली है।
 पुलिस के अनुसार बंडोल थाना क्षेत्र के ग्राम पुसेरा में 10 नवंबर की रात भाजपा कार्यकर्ताओं ने किसी विवाद पर ग्रामीणों से मारपीट कर दी। इस दौरान एक कार्यकर्ता ने तलवार से भी प्रहार कर दिया। इस घटना में घायल हुए चारों ग्रामीणों जागेश्वर बघेल, प्रदीप बघेल, रामकुमार बघेल और राकेश बघेल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
 गंभीर रूप से घायल हुये जागेश्वर बघेल को बाद में उपचार के लिये नागपुर भेज दिया गया। पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है। जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी भरत यादव ने बताया कि इस मामले के दोषियों पर सख्त कायवाही की जायेगी।

गौरतलब है कि इस विधानसभा चुनाव में मसल पॉवर और मनी पॉवर के दुरूपयोग की आशंका पूर्व में भी समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया और हिन्द गजट द्वारा व्यक्त की जा चुकी है।

आखिर, कौन समझेगा सिवनी जिले की प्रसव वेदना!

आखिर, कौन समझेगा सिवनी जिले की प्रसव वेदना!

(लिमटी खरे)

1 नवंबर 1956 को अंतिम बार अस्तित्व में आए सिवनी जिले को देखकर कोई भी कह सकता है कि सिवनी जिला आज़ादी के साढ़े छः दशकों बाद भी प्रसव वेदना से लगातार दो चार होता आया है। सिवनी के नीति निर्धारक और देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद और प्रदेश की नीति निर्धारक विधानसभा में सिवनी का पर्याप्त प्रतिनिधित्व होने के बाद भी सिवनी का नवनिर्माण न हो पाना अपने आप में शर्मिंदगी भरा ही माना जा सकता है। आज उमर दराज या प्रौढ़ हो रही पीढ़ी के मानस पटल पर सिवनी के विकसित न हो पाने का दर्द साफ देखा जा सकता है।
अपने आंचल में अकूूत वन संपदा समेटने वाली इस सिवनी के राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात होने के अनेक कारक हैं। इनमें जगतगुरू स्वामी शंकराचार्य की जन्म स्थली, भेड़िया बालक मोगली की कर्मस्थली, एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांध (संजय सरोवर परियोजना), बेहतरीन क्वालिटी के चंदन के लिए प्रसिद्ध चंदन बगीचा, सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता का कार्यालय, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण यंत्री का कार्यालय, राष्ट्रीय राजमार्ग के कार्यपालन यंत्री का कार्यालय, उम्दा किस्म के चावल का उत्पादक, काले हिरण (चिंकारा), सिवनी की पुरानी जिला जेल और सुधारालय जिसमें महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस जैसे स्वतंत्रता संग्राम सैनानी के साथ ही साथ पीर पगारो जैसी हस्तियां भी बंद थीं, जिनसे गोरे ब्रितानी अंग्रेज भय खाते थे।
अस्सी के दशक तक तो सिवनी के वाशिंदे अपने आप को गौरवांवित महसूस किया करते थे कि वे ऐसी माटी में जन्मे या रह रहे हैं, जहां संपन्नता और समृद्धि है। सिवनी के नागरिक पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित गार्गीशंकर मिश्र और सुश्री विमला वर्मा के द्वारा सिवनी को दी गई सौगातों को पाकर अपने आप को प्रफुल्लित महसूस किया करते थे। ऐसा नहीं है कि विमला वर्मा और गार्गी शंकर मिश्र को विरोध न झेलना पड़ा हो।
याद पड़ता है कि सिवनी में खेल के स्टेडियम के मामले में उस समय स्कूल और कॉलेज के युवाओं के विरोध का लंबे समय तक सामना करना पड़ा था पंडित गार्गीशंकर मिश्र और सुश्री विमला वर्मा को। सुश्री विमला वर्मा और पंडित गार्गी शंकर मिश्र द्वारा सिवनी में स्टेडियम की मांग पर बारंबार बनवाने का आश्वासन दिया जाता रहा। उस वक्त जुझारू छात्र नेता संजय चौरसिया द्वारा उद्यत एक नारा याद पड़ता है जो सभी की जुबान पर छा गया था और वह था -‘‘आश्वासन नहीं, स्टेडियम चाहिए। अर्थात अब आश्वासन नहीं चाहिए अब तो स्टेडियम ही चाहिए। अंत में सिवनी के युवाओं के सामने पंडित गार्गी शंकर मिश्र और सुश्री विमला वर्मा को झुकना पड़ा तथा सिवनी में पुलिस लाईन्स के पीछे एक स्टेडियम की सौगत मिल पाई सिवनी को।
शनैःशनैः सिवनी में समृद्धि और संपन्नता को मानो ग्रहण लगना आरंभ हो गया हो। सिवनी में जो कुछ था वह भी एक के बाद एक करके मुट्ठी की रेत के मानिंद फिसलने लगा। सिवनी के लोग हैरान परेशान थे कि आखिर क्या कारण है कि कहां तो जनसेवकों द्वारा सिवनी में एक एक ईंट जोड़कर आशियाना बनाया गया और कहां जनसेवकों द्वारा पूर्व के जनसेवकों की सौगातों को ही सहेजकर नहीं रखा जा पा रहा है। इसी उहापोह में नागरिक रहे और सिवनी की सौगातों के पिटारे में से एक एक कर सौगातें या तो लोगों की आंखों में धूल झोंककर या बलात् निकालकर अन्य जिलों के सरमायादारों द्वारा ले जाई जाती रहीं।
नब्बे के दशक के आगाज के साथ ही सिवनी जिले को मिलने वाली सौगातों का सिलसिला थमने सा लगा। लोगों को लगा कुछ समय बाद ही सही सिवनी की झोली में सौगातें मिलना आरंभ हो जाएंगी। समय बीतता गया सिवनी की झोली में आने वाली रसद बेहद कम होती गई। एक के बाद एक सौगातें मिलने की संभावनाएं के क्षीण होती देख सिवनी वासियों का मन आशंकाओं कुशंकाओं से घबराने लगा।

जनसेवक पता नहीं किसके दबाव में या फिर निहित स्वार्थ के चलते मौन साधे हुए थे, पर सिवनी की जनता लगातार लुट रहे अपनी अमूल्य धरोहरों के खजानों को लुटता देखकर बस इसी डर में आशंकित थी कि कहीं पहरेदार इसी तरह आंख बंद कर बैठे रहे और उसका सौगातों का खजाना रीत न जाए . . .।

निष्पक्ष चुनाव और सरकारी नुर्माइंदे

निष्पक्ष चुनाव और सरकारी नुर्माइंदे

(शरद खरे)

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निष्पक्ष चुनाव के लिए अपनी कटिबद्धता सदा ही दुहराई जाती है। चुनाव आयोग की हां में हां मिलाकर सियासी दल के नुर्माइंंदे और सरकारी कर्मचारी भी निष्पक्ष चुनाव की बात कहा करते हैं। निष्पक्ष चुनाव का सीधा मतलब होता है न काहू से दोस्ती न काहू से बैर। अर्थात किसी के पक्ष में न तो प्रचार करना, न ही किसी के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर काम करना। आज़ाद भारत में शुरूआती दौर में तो सब कुछ ठीक ठाक चला पर कालांतर में मामला कुछ गड़बड़ा गया। सरकारी नुर्माइंंदों ने सियासी दलों के साथ कदमताल मिलाने आरंभ कर दिए।
सिवनी में हाल ही में बरघाट विधानसभा में खण्ड चिकित्सा अधिकारी पर कमलके प्रचार के आरोप लगे। जांच में ये आरोप सत्य पाए गए, यह एक बहुत बड़ा उदाहरण है जिसकी निंदा करने से काम नहीं चलेगा। आखिर क्या वजह है कि सरकारी नुर्माइंंदे अपने मूल काम को छोड़कर किसी नेता या दल विशेष के काम को ही अपनी नौकरी मान लेते हैं, जबकि उन्हें सरकारी काम करने के एवज में पगार मिलती है।
जाहिर है राजनैतिक दलों के नुर्माइंंदों द्वारा उन्हें प्रश्रय दिया जाता होगा। अब प्रश्न यह उठता है कि प्रश्रय की दरकार किसे होती है? शायद उसे जो गलत काम करता हो। वरना सीधी साधी नौकरी करने वाले को किसी नेता के प्रश्रय की क्या दरकार! किसी को क्या परवाह कि उसे जनसेवक सहयोग दे, उसका पक्ष ले या संरक्षण दे। निश्चित तौर पर गलत करने वाले को ही राजनैतिक संरक्षण की दरकार होती है।
चुनाव के दौरान कई बार यह भी देखा गया है कि अगर किसी के द्वारा, किसी सक्षम अधिकारी से किसी प्रत्याशी के द्वारा आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत की जाती है, तो उस समय अधिकारी द्वारा मौके पर जाने में हीला हवाला किया जाता है। आज का युग संचार क्रांति का युग है। इस युग में सूचना एक स्थान से दूसरे स्थान तक बहुत ही जल्दी और आसानी से पहुंचाई जा सकती है। अनेक बार इस तरह के समाचार भी मिलते हैं कि फलां उम्मीदवार की शिकायत पर फलां अधिकारी के पास वाहन न होने से वह मौके पर विलंब से पहुंचा।
पिछले दिनों बरघाट विधानसभा क्षेत्र के मुख्यालय बरघाट में पदस्थ खण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ.उषा श्रीपाण्डे के खिलाफ कामरेड राजेंद्र चौहान द्वारा एक शिकायत मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी भोपाल को की गई। इस शिकायत की जांच जिला निर्वाचन अधिकारी सिवनी द्वारा करवाई गई। यह शिकायत जांच में सत्य पाई गई और खण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ.उषा श्रीपाण्डे का मुख्यालय सिवनी कर दिया गया।
देखा जाए तो यह एक राजनैतिक दल के प्रति निष्ठा जताने का मामला था एक सरकारी नुमाईंदे का। कोई भी सरकारी नुर्माइंंदा एक आदमी ही होता है और वह किसी दल विशेष या प्रत्याशी के लिए अपने मन में अनुराग या निष्ठा रख सकता है। उसकी निष्ठा व्यक्तिगत होनी चाहिए। उसके कामकाज में अगर वह निष्ठा दिखाई देती है तो इसे उचित किसी भी दृष्टिकोण से नहीं माना जा सकता है। इसके लिए उस सरकारी नुर्माइंंदे को दोषी करार दिया जाकर उससे जवाब तलब करना आवश्यक है। वैसे यह मामला प्रशासनिक स्तर का और प्रशासन के नुर्माइंंदों का है।
अगर जिला निर्वाचन अधिकारी ने यह पाया है कि खण्ड चिकित्सा अधिकारी बरघाट द्वारा भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में चुनाव प्रचार कर मतदाताओं को रिझाया जा रहा है तो यह निश्चित तौर पर बेहद ही संगीन मामला है। इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग को तत्काल ही कठोर कार्यवाही करना चाहिए।
जिस तरह मीडिया में भी सियासी दलों ने अपने अपने लोगों की घुसपैठ बना ली है, और मीडिया पथभ्रष्ट होता जा रहा है, उसी तरह नौकरशाही को भी यह दीमक खा रहा है। मीडिया में काम करने वाला किसी दल या प्रत्याशी विशेष का अनुयायी हो सकता है, पर उसकी लेखनी में कभी भी यह अनुराग या प्रेम झलकना नहीं चाहिए। अगर ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर वह अपने काम के साथ न्याय नहीं कर रहा है।
कमोबेश यही स्थिति सरकारी कर्मचारियों के साथ होती है। एक बार के वाक्ये का जिकर यहां लाजिमी होगा। सालों पहले चुनावी कव्हरेज में खजुराहो प्रेस टूर के दौरान जब तत्कालीन कलेक्टर से यह सवाल पूछा गया कि वे व्यक्तिगत तौर पर किस पार्टी में दिलचस्पी रखते हैं, किस नेता से वे विशेष रूप से प्रभावित हैं, इस पर उन्होंने कुशलता के साथ छूटते ही जवाब दिया कि प्रशासन सदा ही शासन के साथ होता है, जिसका शासन उसका प्रशासन।अर्थात प्रशासन का कारिंदा किसी दल विशेष में अपनी निष्ठा नहीं रखता है।
खण्ड चिकित्सा अधिकारी बरघाट पर कमल के चुनाव प्रचार की बात साबित हो गई है। इसलिए अब जिला प्रशासन और चुनाव अयोग को अधिक संवेदनशील और सतर्क रहने की आवश्यकता है। अनेक सियासी लोगों और विधायक सांसदों के करीबी रिश्तेदार भी सालों से सिवनी में ही तैनात हैं। वैसे तो इनका तबादला पहले ही हो जाना चाहिए था, पर पता नहीं क्यों इन पर शासन ने अपनी नजरें इनायत नहीं की हैं। अब इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि ये कारिंदे चुनावों को किसी भी दृष्टिकोण से प्रभावित नहीं करेंगे।

हो सकता है कि जिन सरकारी नुर्माइंंदों के रिश्तेदार सियासत में घोषित तौर पर हों उन्हें चुनाव के कार्य से प्रथक रखा गया हो, पर यह तो उनके लिए एक पारितोषक से कम नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि वे चुनाव के काम से मुक्त रहकर और बेहतर तरीके से अपने सगेवालों के पक्ष में माहौल बना सकते हैं। बहरहाल, संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव जो सिवनी के जिला निर्वाचन अधिकारी भी हैं, ने हर पहलू पर सारे दृष्टिकोण से विचार अवश्य ही किया होगा, किन्तु बरघाट खण्ड चिकित्सा अधिकारी द्वारा कमल के पक्ष में किए जाने वाले चुनाव प्रचार के साबित होने से चुनाव आयोग की परेशानियां बढ़ जाएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

बुधवार, 13 नवंबर 2013

जिले में भटक रही दो हजार आत्माएं मांग रहीं कमल नाथ से जवाब: नरेंद्र ठाकुर

जिले में भटक रही दो हजार आत्माएं मांग रहीं कमल नाथ से जवाब: नरेंद्र ठाकुर

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले की सीमा से होकर गुजरने वाले एनएचएआई के फोरलेन में अब तक हुई लगभग दो हजार मौतों के लिए जवाबदेह कौन है? इस बारे में सिवनी की जनता बेहतर तरीके से जानती है। कहा जाता है कि अकाल मौत मरने वाले की आत्मा शांति मिलने तक भटकती ही रहती है। सिवनी जिले में भटक रही दो हजार आत्माएं, कमल नाथ से जवाब मांग रही हैं कि आखिर उनकी गलती क्या है?
उक्ताशय की बात भाजपा के युवा नेता नरेंद्र ठाकुर ‘‘गुड्डू‘‘ द्वारा यहां जारी विज्ञप्ति में कही गई है। नरेंद्र ठाकुर ने आगे कहा है कि कांग्रेस के नेता कमल नाथ यह आरोप लगाते हैं कि सिवनी में फोरलेन का काम प्रदेश की भाजपा के कारण रूका है। पर कमल नाथ क्या 13 नवंबर को सिवनी आने पर इस बात का खुलासा कर पाएंगे कि आखिर पेंच से कान्हा के काल्पनिक वाईल्ड लाईफ कॉरीडोर में उनके कथित रिश्तेदार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से अड़ंगा लगाया गया है तो वही अशोक नाम के व्यक्ति सतपुड़ा, पेंच और मेलघाट वाईल्ड लाईफ कॉरीडोर के मामले में मंुह क्यों सिले बैठे हैं, जो छिंदवाड़ा जिले के टूलेन से होकर गुजर रहा है।
गुड्डू ठाकुर ने आगे कहा है कि कमल नाथ इस बात का जवाब दें कि आखिर छिंदवाड़ा जिले में सड़क निर्माण में केंद्र सरकार कोई बाधा उत्पन्न क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि क्या सिवनी की जनता 21 अगस्त 2009 के आंदोलन को भूल पाएगी, जिसमें कमल नाथ की प्रतीकात्मक शवयात्राएं निकाली र्गइं थीं। आज चुनाव आया है तो कमल नाथ सिवनी आकर यहां की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
नरेंद्र ठाकुर ने आगे कहा है कि कमल नाथ केंद्र में वन एवं पर्यावरण, वस्त्र, भूतल परिवहन, शहरी विकास आदि विभागों के मंत्री रहे हैं, और वे बार बार सिवनी को गोद लेकर अपनी गोद को अघोषित तौर पर अनाथालय ही बताने का प्रयास करते हैं। क्या कमल नाथ यह स्पष्ट करेंगे कि इसके पहले मंत्री रहते हुए उन्होंने सिवनी की झोली में क्या डाला? जाहिर है इसका जवाब कमल नाथ के पास नहीं है। कमल नाथ ने सिवनी की झोली में कुछ डालने के बजाए सिवनी के हितों को झपट्टा मारकर छीना ही है।
नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि जब दिग्विजय सिंह प्रदेश में मुख्यमंत्री थे उस समय सिवनी के राज्य परिवहन की संभागीय कर्मशाला जिसके लिए मण्डला रोड पर आमा झिरिया में जमीन भी आरक्षित हो चुकी थी को बलात् झपट्टा मारकर छिंदवाड़ा ले जाया गया था। इतना ही नहीं स्व.हरवंश सिंह के गृह मंत्री रहते हुए कमल नाथ द्वारा उन पर दबाव डालकर सिवनी पुलिस के लिए हाईवे पेट्रोलिंग के नाम पर आई क्वालिस गाड़ी को भी सिवनी का हक मारकर छिंदवाड़ा ले जाया गया था। जबकि छिंदवाड़ा जिले में नेशनल हाईवे की लंबाई सिवनी से लगभग आधी ही है।
युवा भाजपा नेता नरेंद्र ठाकुर ने आगे कहा है कि कमल नाथ ने सिवनी के हक को मारा है, और इसका प्रमाण उन्होंने राज्य सभा में यह कहकर दे दिया था कि उनकी असली मंशा सिवनी से होकर गुजरने वाले हाईवे को छिंदवाड़ा ले जाने की थी। सब कुछ आईने की तरह साफ है, फिर भला कमल नाथ किस मुंह से सिवनी आकर वोट मांगने का साहस जुटा पा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि सिवनी को अपनी अनाथालय रूपी गोद में रखने वाले कमल नाथ इस बात का जवाब दे पाएंगे कि उनके संसदीय क्षेत्र में पेंच परियोजना जिसका सबसे ज्यादा लाभ सिवनी को मिलने वाला है, वह तीस साल से अधिक समय से क्यों झूला झूल रही है।
नरेंद्र ठाकुर ने आगे कहा कि सिवनी में आखिर ब्रॉडगेज क्यों नहीं आ पा रही है, इस बात का जवाब, है कमल नाथ के पास! क्या कारण है कि छिंदवाड़ा में ब्रॉडगेज की सीटी पूरे जिले में सुनाई दे रही है? उद्योग धंधों के मामले में छिंदवाड़ा संपन्न है। कई सालों से कमल नाथ सिवनी आते हैं और कहते हैं कांग्रेस का परचम लहराओ बाकी हम पर छोड़ दो। नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि क्या अपनी बर्बादी के लिए बाकी सब कुछ कमल नाथ अपने उपर छोड़ने की बात कहते हैं।

इसके साथ ही साथ नरेंद्र ठाकुर ने यह भी कहा है कि सिवनी विधानसभा क्षेत्र की जनता कांग्रेस के प्रत्याशी राज कुमार खुराना के बारे में यह कह रही है कि अब तक जनता ने पप्पू खुराना को ‘‘पोस्टर्स‘‘ और ‘‘फ्लेक्स‘‘ में ही देखा है, जनता इस तरह के ‘‘फ्लेक्सी‘‘ नेता से यह पूछ रही है आखिर सशरीर वे कब उन्हें दर्शन देंगे।

मंगलवार, 12 नवंबर 2013

शलाका पुरूष हरवंश सिंह को ही भूले कांग्रेसी!

शलाका पुरूष हरवंश सिंह को ही भूले कांग्रेसी!

(लिमटी खरे)

अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की जिला इकाई को लगभग ढाई दशकों तक राह दिखाने वाले महाकौशल के कांग्रेसी क्षत्रप ठाकुर हरवंश सिंह को जिले के कृतघ्न कांग्रेसी भूल ही गए हैं। आज हरवंश सिंह की का जन्म दिन है, यह उनका पहला जन्म दिन है जब वे लोगों के बीच नहीं है। जब तक हरवंश सिंह जिंदा थे, तब तक उनके जन्म दिवस पर मीडिया विज्ञापन से पटे रहते थे। आज पहली बार ऐसा हुआ है जब हरवंश सिंह के जन्म दिवस पर मीडिया पूरी तरह सूना ही नजर आया।
न तो जिला कांग्रेस कमेटी के किसी प्रवक्ता द्वारा 10 नवंबर को हरवंश सिंह की जयंति की पूर्वसंध्या पर ही इस तरह की कोई विज्ञप्ति जारी नहीं की गई कि 11 नवंबर को हरवंश सिंह के जन्म दिवस पर जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में कोई कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, न ही 11 नवंबर को भी हरवंश सिंह के जन्म दिवस पर जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में किसी तरह का कोई श्रृद्धांजली कार्यक्रम भी नहीं रखा गया।
11 नवंबर को जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता द्वारा जारी तीन विज्ञप्तियों में सिवनी के कांग्रेस के प्रत्याशी राज कुमार खुराना के 12 नवंबर का भ्रमण कार्यक्रम जारी किया गया है। दूसरी विज्ञप्ति में भाजपा प्रत्याशी नरेश दिवाकर के जनसंपर्क में हुई मारपीट का उल्लेख है। तीसरी विज्ञप्ति में शिवराज सिंह के बारे में उल्लेख किया गया है।
हरवंश सिंह का निधन 14 मई को जिला चिकित्सालय सिवनी में हो गया था। आश्चर्य तो इस बात का है कि शलाका पुरूष हरवंश सिंह को कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता महज छः माह में ही भूल गए (उनके निधन के छः माह 14 नवंबर को पूरे होंगे)। आज जिला कांग्रेस कमेटी में भी किसी तरह के श्रृद्धांजली कार्यक्रम का आयोजन न होने से लगने लगा है मानो अब संगठन की कमान उन हाथों में आ गई है जो हरवंश सिंह की मुखालफत में विश्वास रखते थे।
ठाकुर हरवंश सिंह अब हमारे बीच नहीं हैं। हरवंश सिंह के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालना सूरज को रोशनी दिखाने जैसा ही होगा। हरवंश सिंह ठाकुर ने गरीब परिवार में जन्म लेकर हर मायने में जिन ऊंचाईंयों को छुआ है वह हर किसी के बस की बात नहीं है। इस मार्ग में उन्हें न जाने कितने शूल निकालने पड़े, ना जाने कितने नश्तर चुभे होंगे, न जाने कितनी प्रतिकूल धाराओं का सामना करना पड़ा होगा यह तो वे ही जानें पर हरवंश सिंह कभी डिगे नहीं, रूके नहीं।
सिवनी में कांग्रेस का एक बड़ा तबका हर गलती को ठाकुर साहेब के मत्थे मढ़कर अपने दायित्वों और कर्तव्यों की इतिश्री कर लेता आया है। सिवनी में विमला वर्मा के उपरांत हरवंश सिंह ही थे जो कांग्रेस को जिंदा रखते थे। दलगत सामंजस्य भी वे बेहतर तरीके से ही बनाने में सक्षम थे। 14 मई को उनके निधन के उपरांत उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने साबित कर दिया कि हरवंश सिंह वाकई शलाका पुरूष थे।
संगठन में उनकी पकड़ का कोई सानी नहीं था। एक वाक्या याद पड़ता है। एक बार एक काम के सिलसिले में प्रदेश के तत्कालीन वित्त मंत्री कर्नल अजय नारायण मुशरान के पास जाना हुआ। वहां प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संगठनात्मक ढांचे के बारे में उनसे एक अन्य मंत्री चर्चा कर रहे थे। हमारे अभिवादन को कर्नल साहेब ने मुस्कुराकर जवाब दिया और कुर्सी पर बैठने का संकेत किया। इसके उपरांत उन्होंने कहा कि राजा साहेब (तत्कालीन मुख्यमंत्री राजा दिग्विजय सिंह)।के पास इतना समय नहीं है कि वे संगठन को देख सकें। ऐसी परिस्थितियों में हरवंश सिंह ही दूसरे सक्षम व्यक्तित्व हैं जो संगठन में जान डाल सकते हैं। बकौल कर्नल साहेब, दिग्विजय सिंह और हरवंश सिंह ही दो ऐसे राजनेता हैं जो हर कार्यकर्ता को नाम से पहचानते हैं।
हरवंश सिंह की संगठन क्षमता और कार्यकर्ताओं पर पकड़ के साथ ही साथ सभी को साथ लेकर चलने की सभी मुक्त कंठ से तारीफ किया करते थे। एक समय था जब वे कुंवर अर्जुन सिंह के करीब थे। इसके बाद वे कमल नाथ के करीब आए फिर राजा दिग्विजय सिंह के नौरत्नों में शामिल हो गए। एक साथ तीन तीन क्षत्रपों को साधे रखना कोई हंसी खेल नहीं था। जब तिवारी कांग्रेस बनी तब कांग्रेस और तिवारी कांग्रेस के बीच तालमेल भी हरवंश सिंह जैसी शख्सियत के बलबूते की ही बात थी।
हरवंश सिंह ने चुनौतियों को सदा ही स्वीकारा है। उन्होंने कभी भी कठिन समय में धैर्य नहीं खोया। एक बार उन्हें जब मंत्री पद से महरूम रखा गया था तब भी उन्होंने इसे बहुत ही धैर्य के साथ स्वीकार करते हुए इसे समय का चक्र ही माना। इतने बड़े बड़े पदों पर रहने के बाद भी अहंकार मानो उन्हें छू भी नहीं सका था। ऐसा नहंी कि हरवंश सिंह के विरोधी नहीं थे। हरवंश सिंह के विरोधियों की तादाद बहुत अधिक थी।

बहरहाल, हरवंश सिंह के निधन के उपरांत उनकी पहली जयंति पर जिले भर में उन्हें याद न किया जाना वाकई आश्चर्यजनक ही कहा जाएगा। यह चुनावी बेला है, हरवंश सिंह के न रहने पर उन्हें याद करने का काम कांग्रेस का है, इस मामले में पालीटिकल माईलेज लेना, लाभ हानि का गणित लगाना कांग्रेस या विरोधियों का काम है, पर सिवनी के एक प्रभावशाली नेता, केवलारी के चार बार के विधायक, प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री, सिवनी जिले के प्रभारी मंत्री, मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व उपाध्यक्ष और मध्य प्रदेश विधानसभा के तत्कालीन उपाध्यक्ष होने के कारण सभी का दायित्व था कि हरवंश सिंह ठाकुर को श्रृद्धा सुमन अर्पित करते। इस मामले में कांग्रेस को आगे आना था, पर दुर्भाग्य से कृतघ्न कांग्रेसियों ने इस काम को अंजाम नहीं दिया। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया और दैनिक हिन्द गजट की ओर से हरवंश सिंह ठाकुर को आदर सहित श्रृद्धा सुमन . . .