बुधवार, 5 मार्च 2014

बैंक भी धोखाधडी में शामिल



       आज देश के भ्रष्टाचार भरे माहौल में हालात यह हो गये हैं कि हर किसी को जैसे ही मौका मिलता है वह भ्रष्टाचार, चोरी-डकैती, धोखाधड़ी करने से बाज नहीं आ रहा और अगर वह सरकारी महकमे में बैठा है तो बेधड़क होकर ऐसे कारनामों को अंजाम देना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझता है| आज के आधुनिक तकनीकि युग में उन्हें मालूम भी रहता है कि अगर हम किसी भी प्रकार का धोखाधड़ी या अनैतिकता से संबंधित गैर-कानूनी कार्य को अंजाम देंगे तो हमें चंद पलों में ही पकड़ा जा सकता है मगर उन्हें भरोसा है अपने उन भ्रष्ट साथियों, अधिकारियों और नेताओं पर जो हर क्षेत्र मे कुकुरमुत्तों के समान उगे हुये हैं, वे भ्रष्ट अधिकारी व नेता उन्हें अवश्य ही बचा लेंगे और उनका बाल भी बाँका नहीं होने देंगे| यह मामला बैंकिंग प्रणाली से संबंधित है जिसमें बैंक अधिका्रियों के द्वारा धोखाधड़ी करते हुये मासूम व निर्दोष ग्राहकों की अज्ञानता व उनकी नासमझी का फायदा उठाते हुये ATM Card धारकों को लूटा जा रहा है| हम जानते कि हैं कि जिस प्रकार बच्चे को चॉकलेट का सहारा देकर उसकी नासमझी और मासूमियत का फायदा उठाकर उसे बहका लिया जाता है और उनका शोषण कर लिया जाता है, आदिवासियों को बहकाकर उनकी जमीनों पर अतिक्रमण कर लिया जाता है| जिसे देखकर कानूनन नाबालिक बच्चों के साथ किये गये किसी भी अनैतिक व गैर-कानूनी व्यवहार पर सज़ा देने का प्रावधान रखा गया है और इसी प्रकार आदिवासियों की सुरक्षा के लिये उनके जमीन जायदाद पर किसी भी प्रकार के लेन-देन पर रोकथाम लगाई गई है|
उसी प्रकार देश की लगभग 80% आबादी नासमझी और साक्षरता के अभाव में जी रही है, उन्हें कोई भी "नटवरलाल" तकनीकि माध्यम का सहारा लेकर बेवकूफ न बना सके इसलिये RBI ने सभी बैंकों को निर्देष दिया हुआ है कि,"किसी भी Debit Card धारक के खाते में हुये लेन-देन से संबंधित मामले में किसी भी हालात में खाताधारक को SMS जरूर मिलना चाहिये अगर ऐसा नहीं होता है तो तुरन्त ही उसके साथ हुई धोखाधड़ी की रकम उसके खाते में जमा करनी चाहिये" परन्तु लगभग अधिकांशतः बैंक इस भ्रष्टाचारी भरे माहौल में इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं बल्कि ऐसा दिखाई दे रहा है कि, खाताधारकों की नासमझी का फायदा उठाकर गिरोह स्तर पर Debit Card धारकों को धोखाधड़ी करते हुये लूटने का कार्य कर रहे हैं| यह मामला लुधियाना की श्रीमती अलका रानी पत्नि श्री. शिवनाथ झा(पताः अजीत नगर, गली नं. 1, प्लॉट नं. 76-77, भाटिया बेट, मेट्रो शॉपिंग कॉम्पलेक्स के पीछे, लुधियाना – 141008) का है| जिनका "बैंक ऑफ इंडिया" में खाता है जब वे "पंजाब नैशनल बैंक" के ATM से रुपय निकालने के लिये गईं तो वहाँ के हालात कुछ इस प्रकार थेः- दरवाज़ा पूरी तरह खुला हुआ था, गार्ड वहाँ मौजूद नहीं था, कोई भी अन्दर आकर ATM से पैसा निकालने वाले को कुछ भी कहने का अधिकार रखता था|
अगर ऐसे हालात किसी भी ATM के हों तो यह साफ नज़र आता है कि उस ATM को किसी लूटपाट व धोखाधड़ी करने वाले गिरोह द्वारा ही संचालित किया जा रहा होगा और उसमें बैंक के मैनेजर और अधिकारी कहीं न कहीं पूरी तरीके से अवश्य ही शामिल होंगे क्योंकि ऐसे ATM अगर इस प्रकार की हालत में चल रहे हैं तो वह नियमों को ताक पर रख कर ही चलाये जा रहे हैं, जिसके जिम्मेदार उस ATM के संचालक ही होंगे| "पंजाब नैशनल बैंक" के ATM में भी बिलकुल यही हालत दिखाई दे रहे हैं| इसमें बैंक मैनेजर इसलिये शामिल हो सकता है क्योंकि ATM के ऊपर ही बैंक की शाखा भी मौजूद है|
अलका जी के साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत जब उन्होंने अपने बैंक "बैंक ऑफ इंडिया" में की, तो किसी भी अधिकारी ने उसे गंभीरता से नहीं लिया जैसे उनके लिये यह रोजमर्रा की बात हो, जो यह बताने के लिये पर्याप्त है कि "बैंक ऑफ इंडिया" के अधिकारीगण भी इस पूरे गोरखधंधे मे शामिल हैं| यहाँ यह आरोप इसलिये लगाया जा रहा है क्योंकि अगर कोई भी प्रभारी(In-charge) सर्वप्रथम यह अवश्य चाहेगा कि उसके क्षेत्र में किसी भी प्रकार का गैर-कानूनी कार्य नहीं हो इसलिये वह छोटी से छोटी अव्यवहारिक गतिविधी पर भी नज़र रखते हुये उसे दुरूस्त करना चाहेगा मगर यहाँ ऐसा कुछ नहीं दिखाई दिया जो यह दर्शाने के लिये पर्याप्त है कि ऐसी घटनायें इन अधिकारियों के लिये रोजमर्रा की बात है|
ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि अधिकारी अयोग्य हो या उनसे कहा गया हो कि "यदि आपके बैंक के खाताधारक के साथ इस प्रकार की कोई भी अव्यवहारिक घटना हो तो उस पर आपको ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है, उन्हें लुटने दो वे लोग अपने आप रो-पीटकर चुप हो जायेंगे"| जबकि अगर यह अधिकारीगण अपने काम के प्रति ईमानदार होते तो फौरन ही कार्यवाही करते हुये संबंधित घटना क्षेत्र के ATM के बैंक को सूचित करके वीडियो फुटेज लेते हुये कार्यवाही शुरू कर देते मगर आज 40 दिन हो गये हैं पर यह लोग अभी भी सो रहे हैं और सोच रहे हैं कि पीड़ित भी थकहार कर चुपचाप बैठ जायेगा और हमारा धंधा बदस्तूर जारी रहेगा| न ही इन लोगों ने "पंजाब नैशनल बैंक" की शाखा के मैनेजर या उनके मुख्य कार्यालय को शिकायत की कि उनके बैंक के ATM में बिना गार्ड के लेन-देन किया जा रहा है जिसका खामियाज़ा ATM धारकों को उठाना पड़ रहा है| संबंधित मामले में संगठन पीड़िता के शपथ-पत्र(जो साथ में संलग्न है) के साथ संबंधित विभागों - थाना प्रभारी, "पंजाब नैशनल बैंक" की लुधियाना शाखा और मुख्य कार्यालय, "बैंक ऑफ इंडिया" की लुधियाना शाखा और मुख्य कार्यालय, बैंकिंग लोकायुक्त, पंजाब राज्य महिला आयोग और पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत-पत्र भेज रहा है|

नकवी ने निर्मल बाबा से कर डाली राहुल की तुलना !


(शैलेंद्र)
जयपुर (साई)। भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी ने सोमवार को जयपुर में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की तुलना निर्मल बाबा से कर दी. नकवी ने कहा कि निर्मल बाबा की तरह देश में राहुल बाबा नाम के एक और बाबा हो गए हैं.
नकवी ने कहा कि निर्मल बाबा की तरह ही राहुल भी दरबार लगाते हैंसमस्याओं का समाधान करते है. नकवी जयपुर में भाजपा चुनाव प्रबंध समिति की बैठक में भाग लेने आए थे. सरकार को निशाने पर लेते हुए भाजपा नेता ने कहा कि राहुल गांधी सक्रिय रहते तो सरकार को जल्दबाजी में अध्यादेश नहीं लाने पडते. लेकिन वह जन धन की लूट का नजारा देख रहे थे. राहुल गांधी अपने घर से प्रधानमंत्री कार्यालय तक ही पदयात्रा कर लेते तो ठीक रहता. नकवी ने कहा कि कांग्रेस और भ्रष्टाचार एक है.
 लोकपाल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोकपाल के साथ मजाक किया है. कांग्रेस यह चाहती है कि सरकार जाने के बाद भी वह सब करवा सकते हैं जो अब कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लोकपाल के चयन के लिए गठित चयन समिति से न्यायविद् नरीमन पहले ही इस्तीफा दे चुके है तथा थॉमस ने भी इस्तीफा दे दिया है. नकवी ने कहाकि कांग्रेस ने मुसलमानों को चुनावों में टिकट तो दिए हैं लेकिन उनका शोषण भी किया है.

सुब्रत रॉय अभी हिरासत में ही रहेंगे: सुप्रीम कोर्ट


(सोनाली खरे)
नई दिल्ली (साई)। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को एक सप्ताह तक दिल्ली में ही हिरासत में रखने का मंगलवार को आदेश दिया। न्यायालय ने सहारा समूह द्वारा निवेशकों को धन लौटाने के प्रस्ताव पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि उसने कोई ठोस प्रस्ताव पेश नहीं किया है।
रॉय को तिहाड़ जेल में रहना होगाजहां उन्हें कोई विशेष सुविधा नहीं दी जाएगी। उन्हें जेल का ही खाना खाना होगा और जेल के बिस्तर पर ही सोना होगा। न्यायमूर्ति केएस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति जेएस खेहड़ की खंडपीठ ने सुब्रत रॉय के साथ ही सहारा समूह के दो अन्य निदेशकों रवि शंकर दुबे और अशोक रॉय को भी हिरासत में लेने का आदेश दियाजबकि महिला निदेशक वंदना भार्गव को स्वतंत छोड़ दिया।
सफेद शर्ट के ऊपर जैकेट और सहारा के लोगो वाली काली टाई पहने सुब्रत रॉय को अपराह्न दो बजे शीर्ष अदालत में पेश किया गयालेकिन इससे पहले न्यायालय परिसर में भारी अफरा-तफरी के बीच खुद को वकील बताने वाले एक व्यक्ति ने सहारा प्रमुख के चेहरे पर काली स्याही फेंक दी।
न्यायाधीशों ने कहा कि हम प्रस्ताव से खुश नहीं हैं। कोई ठोस प्रस्ताव अभी तक नहीं आया है। हम इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। कोई बैंक गारंटी नहीं है। वंदना भार्गव के अलावा सभी दिल्ली में हिरासत में रहेंगे। न्यायालय ने साथ ही स्पष्ट किया कि यह अवमानना मामले में आदेश नहीं है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान रॉय के दोनों पुत्र सुशांतो रॉय और सीमांतो रॉय भी न्यायालय में मौजूद थे। हिरासत से बचने के लिये जब रॉय ने अंतिम प्रयास कियातो न्यायाधीशों ने कहा कि हम ठोस प्रस्ताव चाहते हैं। आप आज दीजिये या कल दीजिये। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि अब उनके मामले में 11 मार्च को सुनवाई की जायेगी।
इससे पहलेमामले की सुनवाई शुरू होते ही रॉय ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करने के लिये माफी मांगी ओर यह भरोसा दिलाया कि उसके आदेशों पर वह अमल करेंगे। उन्होंने निवेशकों का धन लौटाने के लिये कुछ और समय देने का भी अनुरोध किया। रॉय ने कहा कि मुझे आप में भरोसा है। यदि मैं आपके आदेश का पालन नहीं करूंतो मुझे सजा दीजिये।
रॉय ने और समय का अनुरोध करते हुये कहा कि निवेशकों का धन लौटाने के लिये समूह अपनी संपत्तियों को बेचेगा। न्यायाधीशों ने रॉय से कहा कि आप नकद में भुगतान नहीं कर सकते हैंक्योंकि यह कानून के खिलाफ है। आपको डिमान्ड ड्रॉफ्ट या चेक से ही भुगतान करना होगा।
न्यायालय ने सहारा समूह को न्यायिक आदेशों का पालन नहीं करने और निवेशकों का धन लौटाने के मामले में परस्पर विरोधी दृष्टिकोण अपनाने के लिये भी सहारा समूह को आड़े हाथ लिया। न्यायाधीशों ने कहा कि आपने हमें मजबूर किया। यदि आप गंभीर होते तो यह नौबत नहीं आती।
न्यायालय ने रॉय और दो निदेशकों को हिरासत में लेने का निर्देश देते हुये कहा कि वह तो अपने आदेश पर अमल कर रहा है। इससे पहलेदिन में रॉय उत्तर प्रदेश पुलिस की गाड़ियों के काफिले में से एक कार से बाहर निकलते ही मनोज शर्मा नाम के एक व्यक्ति ने उनके चेहरे पर बोतल से स्याही फेंक दी ओर फिर चिल्लाने लगा सहारा चोर है।
इस व्यक्ति की वहां एकत्र वकीलों और दूसरे लोगों ने पिटाई की। बाद में उसे पुलिस तिलक मार्ग थाने ले गयी। मनोज शर्मा के बारे में कहते हैं कि पहले भी उसने कांग्रेस सांसद सुरेश कलमाड़ी को अदालत में पेश किये जाते वक्त उन पर जूता फेंका था। शर्मा ने स्याही फेंकने के बाद अपनी शर्त उतारी और चिल्लाने लगावह (रॉय) चोर है। उसने लोगों का धन चुराया है और मैं चोरों के खिलाफ हूं।
सुब्रत रॉय 28 फरवरी से उत्तर प्रदेश पुलिस की हिरासत में थे। प्रदेश पुलिस के सुरक्षाकर्मियों ने अपने और सहारा प्रमुख के लिये प्रवेश पास हासिल कियेताकि दो बजे उन्हें न्यायालय में पेश किया जा सके। इससे पहलेन्यायालय ने रॉय की अनुपस्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुये उनकी गिरफ्तारी के लिये गैर जमानती वारंट जारी करते हुये उन्हें आज दो बजे पेश करने का आदेश दिया था।
इसके बाद रॉय ने गैर जमानती वारंट वापस कराने का असफल प्रयासलेकिन न्यायालय ने उनका अनुरोध ठुकरा दिया था। न्यायालय ने सहारा समूह की दो कंपनियों द्वारा निवेशकों का 20 हजार करोड़ रुपये लौटाने में विफल रहने के मामले को लेकर शुरू की गयी अवमानना की कार्यवाही में रॉय के पेश नहीं होने के कारण उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिया था।

‘आप‘ की लोकप्रियता में गिरावट!


(मणिका सोनल)
नई दिल्ली (साई)। लोकसभा के आने वाले चुनावों में सीएनएन-आईबीएन-लोकनीति-सीएसडीएस इलेक्शन ट्रैकर ने दिल्ली में चौंकाने वाले रिजल्ट की संभावना जताई है।
सर्वे के मुताबिक, दिल्ली में आम आदमी पार्टी के वोटों में जनवरी की तुलना में 13 पर्सेंट की गिरावट आई है। सर्वे में आपऔर बीजेपी, दोनों को ही 2 से 4 सीटें मिलने का अनुमान है। सर्वे की मानें तो दिल्ली में कांग्रेस को 0-2 सीटें मिल सकती हैं। महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना-आरपीआई अलाइंस के कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन से 6-7 सीट ज्यादा मिलने की उम्मीद जताई गई है।

दिल्ली में जनवरी के सर्वे में आपको 48 फीसदी वोट शेयर मिलने की संभावना जताई गई थी। जबकि बीजेपी को 30 फीसदी और कांग्रेस को 13 पर्सेंट मिलने का अनुमान था। सर्वे के अनुसार आपकी लोकप्रियता में पिछले दो महीने में भारी गिरावट आई है। इस वजह से आपका वोट बीजेपी और कांग्रेस की तरफ 6-6 फीसदी खिसका है। हालांकि आपअभी रेस में बरकरार है, जो बीजेपी (36 पर्सेंट वोट) से महज एक पर्सेंट पीछे है। सर्वे में कांग्रेस 22 पर्सेंट वोट मिलने की संभावना जताई गई है। बहरहाल, यदि दिल्ली में विधानसभा इलेक्शन होते हैं, तो आप को 46 पर्सेंट वोट मिलने का अनुमान है। बीजेपी के खाते में 30 पर्सेंट और कांग्रेस को 18 पर्सेंट वोट मिलने का अनुमान है।

कर्मचारियों को 100 प्रतिशत महँगाई भत्ता


(राजेश शर्मा)
भोपाल (साई)। राज्य शासन के कर्मचारियों को वेतन बैण्ड में वेतन और ग्रेड पे के योग पर 100 प्रतिशत महँगाई भत्ता स्वीकृत किया गया है।
यह भत्ता एक जनवरी 2014 से देय होगा। इस संबंध में राज्य शासन ने आज आदेश जारी कर दिये है। इसके पहले 90 प्रतिशत महँगाई भत्ता दिया जा रहा था। अब इस आदेश के बाद 10 प्रतिशत अतिरिक्त महँगाई भत्ता दिया जायेगा। यह आदेश यू.जी.सी. और ए.आई.सी.टी.ई. वेतनमानों में वेतन आहरित करने वाले तथा कार्यभारित एवं आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले कर्मचारियों की सेवा के सदस्यों पर लागू होंगे।

अध्यापक संवर्ग एवं पंचायत सचिव
राज्य शासन ने पंचायत राज संस्थाओं तथा स्थानीय निकायों में नियोजित अध्यापक संवर्ग एवं पंचायत सचिवों को वेतन बैण्ड में वेतन और संवर्ग वेतन के योग पर 100 प्रतिशत महँगाई भत्ता स्वीकृत किया है। यह भत्ता भी एक जनवरी 2014 से देय होगा।

साहूकार न कमाएं एक साल पैसा! शिवराज के बयान पर तरह तरह की चर्चाएं


(अय्यूब कुरैशी)
सिवनी (साई)। सिवनी में कंडीपार में ओलों से हुई तबाही का मंजर देखने आए प्रदेश के निजाम ने आज साहूकारों से भी कर्ज और ब्याज वसूली स्थगित रखने की बात कही। शिवराज सिंह चौहान के इस बयान पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को केवल राहत राशि देकर काम नहीं चलाया जायेगा। प्रदेश सरकार ने निर्णय कर लिया है कि प्रभावित किसानों से कर्ज की वसूली स्थगित कर दी जायेगी। किसानों को बैंक का ब्याज भी नहीं चुकाना होगा। ब्याज की राशि प्रदेश सरकार चुकायेगी। किसान को केवल मुद्दल राशि ही अदा करना होगा।

साहूकार भी वसूली स्थगित रखें
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण दे रही है। इसके बाद भी यदि किसान ने साहूकार से कर्ज लिया है, तो साहूकार को इस वर्ष कर्ज की वसूली रोकना होगा। साहूकार एक साल ब्याज नहीं कमायेगा तो कोई पहाड़ नहीं टूटेगा। कोई भी साहूकार किसान से जबरन वसूली नहीं करेगा। इसके बाद भी कोई साहूकार किसान को परेशान करेगा तो उसे जेल भेज दिया जायेगा।

एसपी को दिए निर्देश
मंच से बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस अधीक्षक को मंच पर बुलाया और उन्हें निर्देश दिए कि अगर कोई साहूकार इन किसानों को दिए कर्ज में कर्ज या ब्याज की वसूली करता है तो पुलिस के द्वारा उस साहूकार के खिलाफ मुकदमा कायम किया जाए।

साहूकारी प्रथा को स्वीकारा!
वहीं, सभा स्थल पर ग्रामीणों के बीच चल रही चर्चा के अनुसार क्या प्रदेश में साहूकारी प्रथा जारी है, और वह भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संज्ञान में है। ग्रामीणों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार सिवनी जिले में निजी तौर पर अवैध रूप से कर्ज देकर भारी मात्रा में ब्याज वसूलने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। लोगों का कहना था कि पूर्व जिला पुलिस अधीक्षक रमन सिंह सिकरवार द्वारा चलाए गए विशेष अभियान में अनेक सूदखोरों के चेहरे सामने आए थे। उनके स्थानांतरण के उपरांत यह मामला ठण्डे बस्ते के हवाले कर दिया गया था। आज भी वह काम बदस्तूर जारी है। ग्रामीण यह कहते भी पाए गए कि बैंक से कर्ज लेने की बात कहने के बजाए निजी साहूकारों की बात शिवराज सिंह चौहान ने की तो किस आधार पर!

मंगलवार, 4 मार्च 2014

2005 से पहले के नोट बदलने की समय-सीमा 1 जनवरी तक बढ़ी


(एडविन अमान)
नई दिल्ली (साई)। आरबीआई ने पुराने नोटों को बदलने की समय-सीमा बढ़ाते हुए अब इसे 1 जनवरी, 2015 कर दी है। पहले यह समय सीमा इसी साल 31 मार्च तक थी। रिजर्व बैंक ने अन्य बैंकों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे पुराने नोटों को बदलने की एवज में लोगों से कोई चार्ज न लें और करेंसी का पूरा-पूरा भुगतान करें। बैंकों से यह भी खयाल रखने को कहा गया है कि नोट बदलने में लोगों को किसी भी तरह की असुविधा न हो।
भारतीय रिजर्व बैंक ने साल 2005 से पहले के जारी किए गए सभी करेंसी नोटों को 31 मार्च 2014 के बाद वापस लेने का फैसला किया था। रिजर्व बैंक ने कहा था कि लोग ऐसे करेंसी नोटों को बैंकों में बदल लें, जिनके पीछे जारी करने का साल नहीं दर्ज है।  केंद्रीय बैंक पहले ही बैंकों के जरिये 2005 से पहले के बैंक नोट को नियमित तौर पर वापस ले रहा है क्योंकि ऐसे नोटों में सुरक्षा उपाय बाद में छपे नोटों के मुकाबले कम हैं। रिजर्व बैंक का मानना है कि 2005 से पहले छपे नोट जो प्रचलन में है, उनकी संख्या इतनी अधिक नहीं है जिससे इसका लोगों पर व्यापक असर पड़े।
आरबीआई ने लोगों से भी अपील की है कि वे नोट बदलने की प्रक्रिया में सहयोग करें। कोई भी बैंक की उस ब्रांच में अपने नोट बदलवा सकता है, जो उन्हें सुविधाजनक लगता हो। गौरतलब है कि इससे पहले आरबीआई ने पुराने नोट बदलने की समय-सीमा 31 मार्च, 2014 तय की थी। हालांकि कुछ शर्तों के साथ इस तारीख के बाद भी नोट बदलना मुमकिन था।
गौरतलब है कि 2005 से पहले जारी सभी करेंसी नोट वापस लेने का फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (त्ठप्) ने कालेधन और नकली नोटों की समस्या से निपटने के लिए लिया है। इसके तहत 500 रुपए और 1000 रुपए सहित सभी मूल्य के नोट वापस लिए जाएंगे और यह काम एक अप्रैल से शुरू हो जाएगा। केंद्रीय बैंक ने यह कदम काले धन तथा जाली नोटों की समस्या पर काबू पाने के लिए उठाया है।

2005 के पहले नोटों को पहचानना बहुत ही आसान है। दरअसल 2005 के पहले छपे नोटों पर प्रिटिंग का साल नहीं छपा है। वहीं 2005 के बाद छपे नोटों में आप साल देख सकते हैं। लोग आसानी से 2005 से पहले जारी करेंसी नोट की पहचान कर सकते हैं। ऐसे नोट के पिछले हिस्से में प्रकाशन का वर्ष नहीं छपा है। वर्ष 2005 के बाद जारी सभी करेंसी नोट के पिछले भाग के नीचे मध्य में प्रकाशन का वर्ष छपा है।

लाइन में टिकट मिलने में हुई देर, तो ट्रेन करेगी इंतजार


(सोनाली खरे)
नई दिल्ली (साई)। टिकट काउंटर पर ज्यादा भीड़ होने की स्थिति में ट्रेन चलने से पहले यात्रियों का इंतजार करेगी. जब तक लाइन में लगे लोग टिकट नहीं ले लेते, गाड़ी स्टेशन पर खड़ी रहेगी. हालांकि इसके कुछ निश्चित नियम-शर्तें होंगी, जिन पर अभी विचार किया जा रहा है.
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष अरुणेंद्र कुमार ने मीडिया को बताया कि जनरल टिकट पर कम दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ाने का इरादा है. इसी सिलसिले में विभिन्न तौर-तरीकों पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि इस वित्त वर्ष के पहले छह माह में यात्रियों की संख्या में आई कमी को देखते हुए रेलवे यह कदम उठा रहा है. रेलवे को नुकसान हुआ है. रेलवे बोर्ड का मानना है कि टिकट लेने के लिए किसी भी यात्री को कतार में 10 मिनट से अधिक खड़ा नहीं होना चाहिए. अगर इससे ज्यादा समय लगता है, तो इसकी समीक्षा करने की जरूरत है.

समस्या ‘चेंज‘ की है
अरुणेंद्र कुमार ने कहा कि उन्होंने कुछ स्टेशनों का दौरा किया और पाया कि नई मशीनों से टिकट तो चंद सेकेंड में मिल जाता है. ज्यादा समय पैसे लेने-गिनने और बकाया पैसे वापस करने में लगता है. इसके लिए काउंटरों की संख्या बढ़ाने, मेले या त्योहार के मौके पर काउंटरों पर प्रमुख स्टेशनों के किराए मोटे अक्षरो में लिखने की व्यवस्था की जाएगी. यात्रियों से चेंज लाने की अपील की जाएगी. चेंज के लिए भी एक काउंटर शुरू करने के बारे में सोचा जा सकता है.

‘आप‘ का परम्परागत ‘हल्दी कुंकुं‘ कार्यक्रम संपन्न

(निधि गुप्ता)
मुंबई (साई)। मुबई दक्षिण मध्य  लोक सभा क्षेत्र में करीब दो लाख पोर्ट से सम्बंधित कामगार और लोग निवास करते है .उन सब के  चहेते पूर्व बरिष्ठ अधिकारी एवम आप पार्टी के संभावित उम्मीदवार रविद्र कुमार खरे के नेतृत्व में महिलाओं के लिए विशेष ‘हल्दी कुंकुं‘ कार्यक्रम का आयोजन दिनबंधूनगर साइन और हिम्मत नगर वडाला में किया गया .जिसमे भरी संख्या  में महिलाओ ने भाग लिया .
श्री खरे ने इस अवसर पर महिलाओ को वर्तमान राजनीति की दुर्दशा के बारे में बताया ,गैस क्यों महगी हुई ? महगाई क्यों हुई ? बिजली क्यों महगी हुई ? आदि के बारे में जागृत किया .जब उनसे इस प्रकार के कार्यकमो के प्रयोजन पर सवाल पूछा गया तो उसके जवाव में रविन्द्र कुमार  खरे  बताया ने बताया कि महाराष्ट्र की उन्नति में स्त्रियों की श्रेष्ठ भूमिका रही है और इसके आलावा  हमारे लोक सभा क्षेत्र में महिलाओं का अनुपात पुरुषों से अधिक है ,इसलिए महिला शक्ति को आमने लेन हेतु   इस  पारंपरिक ‘हल्दी कुमकुम ‘का कार्यक्रम आयोजित किया गया है .

सर्वे दल ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ क्षतिग्रस्त फसलों का करें आकलन


(सोनल सूर्यवंशी)
भोपाल (साई)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी संभागायुक्त एवं कलेक्टर को निर्देश दिये हैं कि सर्वे दल पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ ओला वृष्टि से क्षतिग्रस्त फसलों का सर्वे करें।
उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार विपत्ति की इस घड़ी में किसानों के साथ है और उन्हें हर-संभव मदद दी जायेगी। चौहान ने आज राजगढ़ जिले की ब्यावरा तहसील के गाँव बामलाबे जोड़ का दौरा किया और पीड़ित किसानों से मुलाकात की। इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा भिलाल, सांसद नारायण सिंह आमलाबे, क्षेत्रीय विधायक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ग्राम बामलाबे जोड़ पहुँचने के बाद आसपास के खेतों में गये जहाँ उन्होंने प्रभावित फसलों का जायजा लिया। उन्होंने बाद में किसानों की सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने ओला वृष्टि की विपदा से निपटने के लिए 2000 करोड़ रुपये का इंतजाम किया है और जरूरत पड़ने पर अधिक धनराशि की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी। मुख्यमंत्री ने संभागीय कलेक्टरों को ओला वृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे त्वरित गति से करने को कहा। उन्होंने कहा कि सर्वे रिपोर्ट के बाद सभी प्रभावितों को मुआवजा राशि तत्काल वितरण किया जाये।
मुख्यमंत्री ने किसानों को बताया कि जिन किसानों की 50 प्रतिशत या उससे अधिक फसलें खराब हुई हैं उसे शत-प्रतिशत नुकसान मानकर राहत दी जायेगी। उन्होंने बताया कि जिन किसानों की लहसुन और संतरे की फसल प्रभावित हुई है उन्हें भी राहत राशि दी जायेगी। चौहान ने बताया कि संतरे की फसल को नुकसान होने पर 500 रुपये प्रति पेड़ और 50 प्रतिशत नुकसान होने पर 400 रुपये प्रति पेड़ मुआवजा दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि जिन किसानों की 50 प्रतिशत फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं उनकी बेटी की शादी पर 25 हजार रुपये दिये जायेंगे। किसानों के ऋण के ब्याज की राशि का भुगतान भी शासन द्वारा किया जायेगा, ताकि उन्हें अगली फसल पर 0 प्रतिशत दर पर ऋण मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को मुआवजा राशि वितरण के साथ ही फसल बीमा का लाभ दिलाने के लिये अधिक से अधिक फसल कटाई प्रयोग करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये गये हैं। चौहान ने सभी अधिकारियों-कर्मचारियों से कहा कि वे प्राकृतिक आपदा से पीड़ित किसानों को राहत पहुँचाने में कोताही न बरतें। सभी प्रभावितों को राहत दिलवायें और पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करें। उन्होंने अधिकारी-कर्मचारियों को कहा कि केन्द्र के समान 10 प्रतिशत महँगाई भत्ता दिया जायेगा। सरकार उनकी चिन्ता करेगी, वे किसानों की चिन्ता करें।

परिवहन नियमों का माखौल उड़ा रही यात्री बस




दो के बजाए एक ही दरवाजे की चल रहीं बस
(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। सिवनी से आने जाने वाली यात्री बसें प्रदेश के निजाम शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों और परिवहन विभाग की गाईड लाईन का खुला माखौल उड़ाती दौड़ रही हैं। इन बसों पर न तो फिटनेस का आता पता है और न ही दो दरवाजे ही दिखाई दे रहे हैं। यह सब देखने सुनने के बाद भी जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन आंखें बंद किए बैठा है।
परिवहन विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि यात्री बसों में निर्धारित परमिट नंबर, फिटनेस आदि को वैधता के साथ लिखा जाना चाहिए। इसके अलावा बस में रूट के हिसाब से किराया सूची भी पठनीय तरीके से चस्पा होना चाहिए। विडम्बना ही कही जाएगी कि न तो फिटनेस ही इसमें दिखती है, न ही किराया सूची या परमिट।
यहां यह उल्लेखनीय होगा कि सिवनी का राज्य परिवहन का बस स्टैंड अब परिवहन विभाग की संपत्ति बन गया है। इसके साथ ही साथ बस स्टैंड परिसर में ही यातायात पुलिस की चौकी भी स्थापित हो चुकी है। आश्चर्य का विषय तो यह है कि दोनों ही जिम्मेदार विभागों की नजरों के सामने से रोजाना ही यात्री बस कई फेरे लगाती हैं, पर इनकी नजरें इन पर इनायत नहीं हो पाती हैं।
कहा जा रहा है कि जिन यात्री बसों के पास वैध परमिट नहीं हैं वे भी सड़कों पर दौड़ रही हैं। पर्यटक परमिट पर चलने वाली यात्री बस भी स्टेट कैरिज के मानिंद ही जगह-जगह सवारी भर और उतार रहीं हैं। मजे की बात तो यह है कि जो यात्री बस नागपुर में सपनि के बस स्टैंड के आसपास भी नहीं फटक पाती हैं वे भी सिवनी बस स्टैंड परिसर के अंदर आकर सीना ठोंककर सवारियां, उतार और भर रहीं हैं।
उल्लेखनीय होगा कि कुछ समय पूर्व सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर भी स्टेट कैरिज के रूप में अवैध रूप से संचालित होने वाली यात्री बसों की सूची डाली गई थी। संचार क्रांति के युग में पुलिस और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने भी इसे देखा होगा, पर इन पर अब तक कोई कार्यवाही न होना अपने आप में यह दर्शाने के लिए पर्याप्त है कि निजी बस संचालकों का रेकिट कितना तगड़ा है।
कुछ समय पूर्व प्रदेश के निजाम शिवराज सिंह चौहान द्वारा सड़कों पर एक के बजाए दो दरवाजे वाली बसों को ही चलाने के आदेश दिए गए थे। आज भी एक दरवाजे वाली यात्री बसें बेधड़क चलते हुए शिवराज सिंह चौहान के आदेश को धता बता रही हैं।

किसानों को तत्काल मुआवजे की मांग की रजनीश ने



(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। किसान पुत्र रजनीश हरवंश सिंह ने सिवनी जिले में हुई ओला वृष्टि से प्रभावित किसानों को शीध्र मुआवजा दिए जाने की मांग विधानसभा में बेहद प्रभावी ढंग से रखी।
गौरतलब है कि जिले में गत दिनों हुई भारी अेलावृष्टि से किसानों की शत प्रतिशत चौपट हुई थी। रबी सीजन की फसल का शीघ्र आंकलन करवाते हुए पीड़ित किसानों को त्वरित मुआवजा दिये जाने की मांग केवलारी विधानसभा क्षेत्र्ा के विधायक ठा.रजनीश हरवंश सिह द्वारा की गयी। श्री सिंह ने इस मामले को विधानसभा मंे प्रभावी ढंग से उठाते हुए, इस पर त्वरित चर्चा करवाए जाने की मांग के अलावा शासन-प्रशासन से लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के पहले ही पीड़ित किसानांे को मुआवजा दिये जाने की मांग की।
जिला कांग्रेस प्रवक्ता रामदास ठाकुर ने जारी प्रेस विज्ञप्ति मंे बताया कि गत दिनों प्रदेश के अन्य हिस्सांे की भांति सिवनी जिले में भी हुई ओलावृष्टि के कारण क्षतिग्रस्त हुई किसानों की रबी सीजन की फसलों का आंकलन करने, केवलारी विधायक ठा.रजनीश सिंह ने केवलारी क्षेत्र्ा के विभिन्न ग्रामांे मे पहुंच कर प्रभावित किसानों से मिलकर, इस मामले को शासन-प्रशासन के समक्ष उठाने का अश्वासन दिया था।
इस मामले में श्री ठाकुर ने बताया कि प्रदेश विधानसभा सत्र्ा प्रारंभ होने के पहले दिन ही केवलारी विधायक ठा.रजनीश हरवंश सिंह ने सिवनी जिले के किसानों की ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्त हुई फसलों का मामला उठाते हुए, विधानसभा को अवगत कराया कि सिवनी जिले में गत दिनों ओलावृष्टि से जिले के किसानों की रबी सीजन की फसल को शत प्रतिशत नुकसान पहंुचा है।
श्री सिंह ने बताया कि अनेक ऐसे किसान जिनकी दलहन की चना, मसूर, तुअर आदि की फसल पककर तैयार हो ही रही थी कि प्रकृति की मार ऐसी पड़ी कि लोगों के खेतों में लगी दलहन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गयी है, तथा किसानों के हाथों में डंठल भी हाथ नही लग सके हैं। श्री सिंह ने विधानसभा का ध्यान आकृष्ट कराते हुए बताया कि इस वर्ष सिवनी जिले के किसानों ने गेहूं की फसल मंे काफी लागत लगायी थी। किसानों ने अच्छे बीज, खाद-पानी की व्यवस्था कर गेहूं की फसल अपने खेतांे में लहलहायी थी कि गत दिनों हुई ओलावृष्टि से किसानों के खेतांे मंे लहलहाती गेहूं की फसल पूरी तरह चौपट हो गयी।
श्री सिंह ने आगे बताया कि जिन किसानांे की फसल पकने की स्थिति मे थी, वह टूटकर पूरी तरह खेतांे मे गिर गयी है जबकि जिन किसानों की गेहूं अभी निकासी मंे थी उसकी बालंे पिट जाने के कारण अब उस बाली मंे दाना नही भर पायेगा, इसलिए ऐसे किसान जिनकी गेहंू की फसल खड़ी तो दिख रही है किन्तु उसमें दाना नही भर पायेगा, इसलिए उन्हें भी शत प्रतिशत क्षति मानकर, एवं सर्वे करवाकर मुआवजा दिया जाये। श्री ठाकुर ने बताया कि विधायक श्री सिंह ने शासन का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट कराया कि ओलावृष्टि का मुआवजा अति वृष्टि से क्षतिग्रस्त हुई सोयाबीन फसल की तरह न दिया जाये।
इस संबंध मे श्री सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष के पटल पर जिले के उन किसानों की ऋण पुस्तिका की फोटो कॉपी एवं 150, 200 से लेकर 1000 रुपये तक के वितरित किये जा रहे चैकों को रखते हुए अतिवृष्टि के मुआवजे के वितरण मंे पारदर्शिता की मांग करते हुए ओलावृष्टि से क्षतिग्रस्त हुई फसल से प्रभावित किसानांे को मुआवजा राशि का वितरण लोकसभा चुनाव की लगने वाली आचार संहिता के पूर्व ही करवाए जाने का अनुरोध करते हुए कहा कि कहीं इसका हश्र भी अतिवृष्टि जैसा न हो जाये क्योंकि विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण किसानांे को अब तक अतिवृष्टि का मुआवजा नहीं मिल सका है।
श्री ठाकुर ने बताया कि श्री सिंह ने मुख्यमंत्र्ाी श्री चौहान से इस दिशा में त्वरित कार्यवाही करने की अपेक्षा करते हुए 15 दिनांे के भीतर जिले के किसानों को शत-प्रतिशत फसल का मुआवजा दिये जाने की बात कही है।

मंगलवार, 18 फ़रवरी 2014

महिला वार्ड की मरीज के कपड़े उतरवाए शराबियों ने!

(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय के महिला वार्ड में एक महिला मरीज का चिकित्सकीय परीक्षण के नाम पर उसके कपड़े उतरवाकर दुर्व्यवहार करने का संगीन मामला प्रकाश में आया है। उक्त महिला के साथ छेड़छाड़ करने वाले दो युवक हैं और दोनों ही चिकित्सालय की सुरक्षा में लगे जय अंबे सिक्यूरिटी सर्विस से जुड़े बताए जा रहे हैं।
बताया जाता है कि 16 फरवरी को शाम सात बजे के लगभग जिला चिकित्सालय में प्रथम तल पर स्थित महिला वार्ड में भर्ती एक महिला मरीज, वार्ड में प्रथक से बने कक्ष में अकेली थी। उक्त महिला को अकेला पाकर दो युवक जो शराब के नशे में धुत्त थे बताए जाते हैं वहां पहुंचे और महिला का चिकित्सकीय परीक्षण करने लगे।
पीड़ित महिला ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि उन दोनों युवकों ने उक्त महिला से उसकी बीमारी पूछी, फिर उसके कपड़े उतरवाए और उसके गुप्तांगों में हाथ लगाने लगे। महिला द्वारा आपत्ति किए जाने पर उन्होंने कहा कि वे वहां तैनात नर्स से कहकर उसे प्रथक बने कक्ष से अंदर वाले कक्ष में शिफ्ट कराने की बात कहेंगे, क्योंकि वहां वह अकेली है।
उक्त महिला ने बताया कि उस वक्त उसका पुत्र और अन्य परिजन भी वहां मौजूद थे। बताया जाता है कि इसके पहले कि वह बीमार महिला कुछ समझ पाती वे वहां से भाग खड़े हुए। उक्त महिला द्वारा एक आवेदन देकर अपने साथ घटी घटना के बारे में पुलिस को इत्तला भी दे दी गई है।
मामला सिविल सर्जन के पास
इस संबंध में आज जिला चिकित्सालय के महिला वार्ड में तैनात नर्स ने बताया कि महिला के आवेदन को मूलतः सिविल सर्जन डॉ.सत्यनारायण सोनी के पास सुबह ही भेज दिया गया है। इस पर आगे क्या कार्यवाही हुई, वे बता नहीं पाईं। वहीं, दूसरी ओर सिविल सर्जन कार्यालय में शाम को कोई उपलब्ध नहीं होने से इस संबंध में क्या कार्यवाही हुई, पता नहीं चल सका है।
नहीं मिली कोई शिकायत: दाणी
वहीं, दूसरी ओर इस संबंध में जब नगर कोतवाल अमित विलास दाणी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी में इस तरह का कोई मामला नहीं आया है। अगर इस तरह का कोई मामला आएगा तो उसकी प्राथमिकी अवश्य दर्ज कर, जांच करवाई जाएगी।
संगीन है मामला
जिला चिकित्सालय के महिला वार्ड में एक महिला मरीज के साथ अगर शाम ढलते ही इस तरह की वारदात को अंजाम दिया जाता है तो निश्चित तौर पर जिला चिकित्सालय प्रशासन पर यह एक बहुत बड़ा सवालिया निशान है। जिला चिकित्सालय में पहले भी महिला कर्मचारियों और मरीजों के साथ छेड़छाड़ के मामले प्रकाश में आते रहे हैं।
लग रहे सीसीटीवी कैमरे
यहां उल्लेखनीय होगा कि जिला चिकित्सालय परिसर के अंदर सुरक्षा को मद्देनजर रखकर क्लोज सर्किट कैमरे लगाने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। जहां-जहां कैमरे लग चुके हैं, वे चालू हैं अथवा शोभा की सुपारी बने हुए हैं, यह बात तो अस्पताल प्रशासन ही बेहतर जानता होगा किन्तु एक महिला मरीज के कपड़े उतरवाने के मामले से यह स्पष्ट होने लगा है कि जिला चिकित्सालय का प्रशासन पूरी तरह से नाकारा हो चुका है।
जय अंबे सिक्यूरिटी पर लगे प्रश्न चिन्ह!
इस मामले में जय अंबे सिक्योरिटी के कारिंदों के द्वारा इस तरह की अश्लील हरकत किया जाना बताया जाता है। इस हरकत से जय अंबे सिक्योरिटी पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि सुरक्षा में लगे कर्मचारियों की भर्ती के पहले उनका चरित्र सत्यापन कराया जाना चाहिए। अगर वे वाकई जय अंबे सिक्योरिटी के कर्मचारी हैं तो उनका चरित्र सत्यापन अवश्य ही कराया गया होगा। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि जिला चिकित्सालय में सुरक्षा का काम निजी तौर पर आउट सोर्स कराया जाकर जय अंबे सिक्योरिटी को दिया गया है।
पूर्व में हुई थी पहल
गौरतलब है कि पूर्व में सिवनी में पदस्थ रहे जिला पुलिस अधीक्षक डॉ.रमन सिंह सिकरवार के कार्यकाल में निजी तौर पर संचालित होने वाली सुरक्षा एजेंसियों का पंजीयन, उनकी जानकारी संबंधित थाने में दिए जाने, और कर्मचारियों के चरित्र सत्यापन के लिए प्रयास किए गए थे। विडम्बना ही कही जाएगी कि उसके बाद से यह कार्य पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है िकि पुलिस द्वारा इस दिशा में प्रयास ही बंद कर दिए गए हैं, कि किसी के चरित्र सत्यापन के काम को अंजाम दिया जाए।

बुधवार, 12 फ़रवरी 2014

फोरलेन की आस जगाने दिनेश को साधुवाद

(लिमटी खरे)
सिवनी के निर्दलीय विधायक दिनेश राय के विधायक बनने के उपरांत सिवनी जिले के हित में पहला काम जिसे बतौर विधायक उनके द्वारा अंजाम दिया गया हो वह है फोरलेन के मसले में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री वीरप्पा माईली से भेंट। इस भेंट में प्रदेश के निज़ाम शिवराज सिंह चौहान भी उनके साथ ही थे। प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग द्वारा गत दिवस इस संबंध में जारी समाचार में मुख्यमंत्री द्वारा सिवनी के फोरलेन, खण्डवा के सिंगाजी पॉवर प्लांट सहित कुछ अन्य परियोजनाओं में केंद्रीय वन मंत्रालय के अनुमति हेतु चर्चा किये जाने का उल्लेख किया गया है। जनसंपर्क विभाग चूंकि सरकारी तंत्र का हिस्सा है अतः इसकी बात पर यकीन न किए जाने का कोई कारण नहीं बनता है। इसमें विधायक के नाम का उल्लेख न किया जाना आश्चर्यजनक ही माना जाएगा।
सिवनी के फोरलेन को लेकर वर्ष 2009 से लगातार ही संघर्ष होता रहा है। इस संघर्ष में सिवनी जिले की जनता ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है। वर्ष 2008 के दिसंबर में विधानसभा चुनावों के दरम्यान ही इसको रोकने का ताना बाना बुना गया था। इस चुनाव में सिवनी में श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मर्सकोले एवं शशि ठाकुर भाजपा के तो स्व.हरवंश सिंह ठाकुर कांग्रेस से विधायक चुने गए थे। इनके बतौर विधायक के कार्यकाल में भी इस मामले को जोर शोर से उठाया जाता रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी हुंकार भरी थी कि भले ही सूरज पूरब के बजाए पश्चिम से निकलना आरंभ कर दे, पर फोरलेन सिवनी से ही होकर जाएगी।
समय बीतता गया और खवासा से बरास्ता सिवनी होकर लखनादौन जाने वाले मार्ग पर जर्जर सड़क ने दुर्घटनाओं में खासा इजाफा कर दिया। जिन वन्य जीवों को बचाने की दुहाई दी जा रही थी, वे तो सुरक्षित रहे पर मनुष्य के जीवन पर इस सड़क से होकर गुजरने में प्रश्न चिन्ह लगने लगे। इस मार्ग के न बन पाने के लिए आरोप प्रत्यारोप के कभी न रूकने वाले दौर आज भी बदस्तूर जारी हैं।
इसी बीच अचानक ही सिवनी से खवासा के हिस्से में मोहगांव से खवासा तक के खण्ड में सड़क पर डामरीकरण होना आरंभ हुआ। यह सिवनी वासियों के लिए सुखद अनुभूति से कम नहीं था। इसके पीछे किसी बड़े अधिकारी के पर्दे के पीछे के निर्देश ही प्रमुख माने गए। सड़क बनी और पुनः जर्जरावस्था को प्राप्त हो गई। सड़क का डामरीकरण एक बात तो तय कर गया कि विवादित खण्ड में सड़क निर्माण वर्ष 2009 से अब तक कई बार किया जा सकता था। वस्तुतः सड़क निर्माण या डामरीकरण न करवाकर दुर्घटनाओं को जानबूझकर ही न्यौता दिया गया है। ऐसा किस कारण किया गया? किसके परोक्ष या प्रत्याक्ष निर्देश पर किया गया? इससे किसे लाभ पहुंचा? यह बात तो भविष्य के गर्भ में ही है। फोरलेन में सिवनी में हुई मौतों के लिए असली गुनाहगार आखिर किसे माना जाए?
2008 से अब तक प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सरकार काबिज है। केंद्र में कांग्रेस नीत संप्रग सरकार का कब्जा है। 2013 तक सिवनी में भाजपा के तीन विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, शशि ठाकुर और कमल मर्सकोले ने कभी शिवराज सिंह चौहान को इसके लिए तैयार नहीं किया कि वे उनके साथ दिल्ली जाकर सिवनी के हित वाली फोरलेन के लिए प्रयास करें। इसके लिए गत दिवस सिवनी के निर्दलीय विधायक दिनेश राय ने दिल्ली जाकर मुख्यमंत्री के साथ सामंजस्य बैठाकर केंद्रीय वन मंत्री वीरप्पा मोईली से चर्चा कर सिवनी फोरलेन की उम्मीद जगाई है।
निश्चित तौर पर निर्दलीय विधायक दिनेश राय का यह कदम प्रशंसनीय माना जाएगा। दिनेश राय के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोईली के साथ चर्चा के कुछ चित्र सोशल नेटवर्किंग वेब साईट पर भी दिखाई पड़े हैं। अभी लोकसभा की पदचाप सुनाई दे रही है। हो सकता है कि सिवनी में महज एक विधायक कमल मर्सकोले की विजय (वही भी कृपांक यानी ग्रेस माकर््स से) होने पर शिवराज सिंह चौहान, सिवनी को लेकर कुछ चिंतित हों, इसलिए उन्होंने दिनेश राय के प्रस्ताव को गंभीरता से लिया हो। चाहे जो भी हो दिनेश राय के इस प्रयास से फोरलेन के मामले में कुछ उम्मीद तो जागी है।
वैसे देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी के नुमाईंदों या विधायक कमल मर्सकोले को मुख्यमंत्री से चर्चा कर उनके साथ दिल्ली जाकर इस मामले में सिवनी का पक्ष रखा जाना चाहिए था, पर हालात देखकर हमें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि भाजपा द्वारा इस दिशा में किसी भी तरह के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। रही कांग्रेस की बात तो लगभग नौ माह पूर्व कांग्रेस के कद्दावर नेता हरवंश सिंह ठाकुर के अवसान के उपरांत कांग्रेस मानों सन्निपात से उबर ही नहीं पा रही है।
देखा जाए तो सिवनी का फोरलेन, लखनादौन में लखनादौन विधानसभा, छपारा में केवलारी विधानसभा (दोनों को मिलाया जाए तो मण्डला सिवनी लोकसभा) के साथ ही साथ सिवनी में सिवनी विधानसभा तथा कुरई में बरघाट विधानसभा (दोनों को अगर मिलाया जाए तो बालाघाट सिवनी लोकसभा) से होकर गुजर रही है। पता नहीं क्यों अब तक के सांसद और विधायकों ने इस ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दे पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया है।
बहरहाल, एक बार पुनः इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को साथ लेकर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री वीरप्पा मोईली से चर्चा कर फोरलेन के निर्माण की दिशा में पहल करने और उम्मीद जगाने के लिए सिवनी के निर्दलीय विधायक दिनेश राय वाकई बधाई के पात्र हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि सिवनी के विकास हेतु सिवनी की इस जीवनरेखा को पुनः पहले जैसी हरी भरी और तंदरूस्त करने हेतु सिवनी में कांग्रेस और भाजपा द्वारा दलगत राजनीति से उपर उठकर दिनेश राय का साथ दिया जाएगा, क्योंकि यह विकास की सोच है, किसी व्यक्ति विशेष के श्रेय लेने की बात इसमें नहीं की जानी चाहिए।

खुद ही शिकायतें करवा रहे आयुष विभाग के उच्चाधिकारी!

आयुष विभाग के आला अधिकारी बंटवा रहे स्वलिखित जन अभिमत प्रपत्र!

(अय्यूब कुरैशी)
सिवनी (साई)। लगता है सिवनी जिले में आयुष विभाग में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को आयुष चिकित्सा एवं स्टॉफ के कार्य व्यवहार पर जन अभिमत शीर्षक का एक प्रपत्र मिला है जिसमें आयुष विभाग के किसी उच्चाधिकारी के हाथ से अभिमत लिखा हुआ है। इसमें आयुष विभाग के कर्मचारियों और चिकित्सकों को कटघरे में खड़ा किया जा सकता है।
साई न्यूज को मिले इस जन अभिमत में चिकित्सालय या औषधालय का नाम, ग्राम या नगर, जिला, अभिमत देने वाले व्यक्ति का नाम और चिकित्सक का नाम तथा अभिमतदाता एवं निरीक्षण कर्ता अधिकारी के हस्ताक्षर का कॉलम रिक्त ही रखा हुआ है।
इसमें प्रश्न और उत्तर के कालम में प्रश्न तो बकायदा प्रिंटेड हैं। इसमें पहले प्रश्न कि क्या आप इस अस्पताल में कार्यरत को जानते हैं के अभिमत में हाथ से हां लिखा हुआ है। इसके बाद दूसरे प्रश्न में क्या चिकित्सक नियम पूर्वक अस्पताल में उपस्थित होते हैं के अभिमत में चि.समय पर औषधालय में नहीं आते। परन्तु औष.आते हैं।
इसके तीसरे प्रश्न में क्या अस्पताल रोज खुलता है के अभिमत में हां लिखा हुआ है। चौथा प्रश्न कि आपकी जानकारी के अनुसार चिकित्सा ज्ञान कैसा है के जवाब में हाथ से अच्छा लिखा हुआ है। पांचवा प्रश्न क्या चिकित्सक रोगियों का इलाज करने एवं सलाह देने में रूचि रखते हैं का अभिमत हाथ से चिकित्सा करते हैं के बाद कुछ अस्पष्ट लिखा हुआ है।
छटवें प्रश्न कि चिकित्सक का रोगियों एवं आम जनता के साथ व्यवहार कैसा के जवाब में अभिमत में व्यवहार सामान्य लिखा हुआ है। सातवें प्रश्न में क्या चिकित्सक अस्पताल स निशुल्क दवाईयां रोगियों को देते हैं के अभिमत में लिखा गया है कि पैसा भी लेते हैं के बाद कुछ अस्पष्ट है फिर लिखा हुआ है कि निशुल्क भी देते हैं। अंतिम प्रश्न कि अस्पताल स्टाफ के व्यवहार के संबंध में अभिमत में लिखा गया है कि अच्छा है।
देखा जाए तो यह अभिमत ग्राम या नगर के लोगों से भरवाया जाना चाहिए। किन्तु बताया जाता है कि जिला आयुष अधिकारी के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अपने ही हाथ से जनता के बजाए अभिमत लिखकर उसकी छाया प्रति बंटवाई जा रही है ताकि आयुष विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जा सके।
जिला आयुष अधिकारी कार्यालय के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि विभाग के ही एक आला अधिकारी द्वारा अपनी ही लिखाई में एक प्रपत्र को भरकर इसकी छाया प्रतियां अपने गुर्गों के माध्यम से बंटवाई जा रही है। सूत्रों का दावा है कि अगर इस छाया प्रति में लिखावट की सतही जांच ही कर ली जाए तो आसानी से पता चल सकता है कि किस अधिकारी द्वारा इस काम को अंजाम दिया जा रहा है।
सूत्रों ने आगे बताया कि इस तरह के प्रपत्र जब भरकर उक्त अधिकारी के पास वापस पहुंचते हैं तब उक्त अधिकारी द्वारा मामले की गंभीरता दर्शाकर आपसी रजामंदी से मामले को सुलटा दिया जाता है। इस मामले में कितनी सच्चाई है इस बारे में जब जिला आयुष अधिकारी से संपर्क करने हेतु 07692 220092 पर फोन किया गया तो फोन की घंटी लगातार बजती ही रही, जिसके चलते आयुष विभाग के अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाया।
संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव से जनापेक्षा है कि इस तरह से अगर कोई अधिकारी अपने ही विभाग के विरूद्ध माहौल बना रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर कार्यवाही सुनिश्चित करें। इसके लिए सबसे पहले निर्धारित जन अभिमत प्रपत्र में लिखवाट का मिलान जिला आयुष अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों की लिखावट से अवश्य करवा लिया जाए ताकि यह पता चल सके कि वह कौन सा जिम्मेदार अधिकारी है जो इस तरह के काम को अंजाम देकर विभाग की छवि पर बट्टा लगाने का कुत्सित प्रयास कर रहा है।

रविवार, 9 फ़रवरी 2014

अन्नदाता किसानों की मेहनत के फूट रहे अंकुर!

पिछले साल की अधिकांश धान सड़ चुकीइस साल की धान हो रही अंकुरित
(महेश रावलानी/पीयूष भार्गव)
सिवनी (साई)। देश के अन्नदाता किसान के द्वारा हाड़ तोड़ मेहनत का मेहनताना भले ही उसे मिल चुका हो किन्तु उसकी मेहनत से ऊगी फसल का अंजाम बेहद ही भयानक और दुखदायी रूप से सामने आ रहा है। ठण्ड के मौसम में हुई बारिश और ओस की बूंदों ने धान को अंकुरित करने के लिए उपजाऊ माहौल तैयार किया। अधिकारियों कर्मचारियों की अनदेखी का यह नतीजा निकला कि धान अंकुरित होने लगी है।
जिला कलेक्टर भरत यादव द्वारा पूर्व में कड़े निर्देश‘ जारी कर कहा गया था कि अगर धान गीली हुई तो अधिकारी कर्मचारियों पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। विडम्बना देखिए धान गीला होना तो दूर धान के अंकुरण की खबरें वह भी छाया चित्रों के साथ मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद भी जिला कलेक्टर द्वारा अब तक इनके विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की है।

हजारों क्विंटल धान हो गया है गीला
पिछले दिनों पानी गिरने से नरेला में रखे हजारों क्विंटल धान में से भारी मात्रा में धान बुरी तरह गीला हो चुका है। दिसंबर और जनवरी माह में गिरते पानी में बिना स्टेग को ढके हुए (जबकि ढकने के लिए पर्याप्त मात्रा में कैप मौजूद थे) धान को खुले में ही रखा गया था। इसके परिणाम स्वरूप धान का अधिकांश हिस्सा गीला हो चुका थाजो अब अंकुरित हो रहा है।

परिवहन का है इंतजार
यद्यपि धान की खरीद समाप्त हो चुकी हैफिर भी जिले भर में धान खरीद केंद्रों पर बारिश के बावजूदधान खुले में बिना बोरा सिले ही रखा हुआ है। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के दल ने पाया कि जगह-जगह सड़कों किनारे रखे धान में बारिश का पानी बुरी तरह बोरों को भेद चुका है। अनेक सोसायटीज के कारिंदों ने साई न्यूज को बताया कि यहां एकत्र धान में से सत्तर फीसदी धान संग्रहण स्थल तक पहुंचने के उपरांत सड़ ही जाएगाक्योंकि यहां से इन्हीं गीली बोरियों में बारिश का भीगा धान संग्रहण केंद्र पहुंचेगा और वहां बिना सुखाए ही इसे छल्ली बनाकर रख दिया जाएगा। अब जबकि धान अंकुरित हो चुका है तब इस धान के खराब होने के लिए किसे जिम्मेवार ठहराया जाएगा।

कलेक्टरप्रभारी मंत्री कर चुके हैं दौरा
सिवनी में अधिकारियों की लापरवाही की दाद देनी होगी। इसका कारण यह है कि जिला कलेक्टर भरत यादव द्वारा खुद खरीद केंद्र और धान संग्रहण केंद्र नरेला का भ्रमण किया जा चुका है। कलेक्टर द्वारा अवश्यक और कड़े निर्देश‘ देने के बाद भी अधिकारियों के कानों में जूं भी नहीं रेंगी है। वहीं दूसरी ओर शिवराज सिंह चौहान मंत्री मण्डल के एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री बालाघाट के विधायक गौरी शंकर बिसेन को दी गई है। बिसेन सिवनी के प्रभारी मंत्री भी हैं। यहां गौरतलब होगा कि गौरी शंकर बिसेन सिवनी जिले के ग्रामीण अंचलों का दौरा कर चुके हैं और उनके संज्ञान में सड़कों किनारे रखे धान की स्थिति आई ही होगी। खाद्यकृषि विभाग के अधिकारियों सहित नागरिक आपूर्ति निगम और विपणन संघ के आला अधिकारियों को न तो कलेक्टर की चिंता है और न ही प्रभारी मंत्री की।

सड़ांध मार रहा है सड़ा धान!
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया का दल जब नरेला में बने स्टेग में पहुंचा तो उसने पाया कि पिछले साल संग्रहित कर रखे धान में से अनेक बोरे धान सड़ चुका है। सड़े बोरे मैदान में यत्र तत्र बिखरे पड़े हैं। यहां तक कि कुछ स्थानों पर तो बोरों के ऊपर फफंूद भी साफ तौर पर दिखाई पड़ रही थी। नरेला से पहले बनाए गए स्टेग में दायीं ओर वाले स्टेग में अंदर घुसते ही कुछ स्टेग के पास सड़ी धान से उठती दुर्गंध अपने आप में यह साबित करने के लिए पर्याप्त मानी जा सकती है कि अधिकारी किसमुस्तैदी‘ के साथ अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। सड़े धान की दुर्गंध इतनी तेज उठ रही है कि वहां खड़ा होना भी मुश्किल ही प्रतीत हो रहा है।

जानवर खा रहे धान!
नान के एक कर्मचारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर साई न्यूज को बताया कि नान के द्वारा संग्रहित की जा रही धान के रखरखाव में पर्याप्त अनियमितताएं बरती जा रही हैं। कर्मचारियों के अभाव के चलते दिन हो या रातसंग्रहण क्षेत्र मेें आवारा मवेशी और जंगली जानवर घुसकर स्टेग के बोरों में मुंह मारकर अपना पेट भर रहे हैं। साई न्यूज की टीम ने पाया कि कुछ स्टेग के आसपास भारी मात्रा में धान जमीन पर बिखरी पड़ी हुई थी। कहा जाता है कि अन्न का एक-एक दाना कीमती होता है पर यहां तो अन्न की बरबादी को ही साफ तौर पर रेखांकित किया जा सकता है। अन्न की इस तरह की बर्बादी सिवनी में ही देखने को मिल रही है शेष स्थानों पर शायद ही धान सड़ा हो।

बना रहे पाखड़ धान!
नान के सूत्रों ने साई न्यूज को आगे बताया कि खाली पड़ी भूमि पर बनाए गए स्टेग के आसपास चूहों का साम्राज्य स्थापित हो गया है। देखरेख के अभाव में चूहे अंदर ही अंदर बारदानों को काटकर मौज काट रहे हैं। कुछ ही माहों में ढंके वाले स्टेग में बोरे अंदर ही अंदर धराशाई हो जाते हैं। इस तरह की धान या चांवल टूट की श्रेणी में आता है। जानकारों का कहना है कि इस तरह चूहों के खाने से टूट वाले ब्रोकन राईस या खण्डा और गीली सड़ी धान जिसे पाखड़ कहा जाता है से मैदा का निर्माण किया जाता है और इससे निकलने वाला राईस ब्राण्ड तेल भी बाजार में उपलब्ध होता है। सूत्रों का कहना है कि इस गीली धान को अगर सुखा लिया जाए तो पाखड़ धान कहलाती है और पाखड़ धान बाजार में बिक नहीं पाती है। जानकारों का कहना है कि इस तरह के चांवल को शराब उत्पादन कंपनियां सस्ते में खरीदकर इससे शराब का निर्माण भी करती हैं।

करोड़ों के हो रहे वारे न्यारे
वहीं नान के सूत्रों ने बताया कि अधिकारियों का ध्यान निर्धारित लक्ष्य (अपना निजी एवं सरकार की ओर से दिया गया) को पूरा करने की ओर ही है। धान किस स्थिति में हैइस बात से उन्हें कोई लेना देना नहीं है। आलम यह है कि पानी गिरने के बाद न तो नरेला में ही कोई अधिकारी यह जानने पहुंचा कि धान की क्या स्थिति है और न ही ग्रामीण अंचलों में ही संबंधित अधिकारियों ने जाने की जहमत उठाई है। पिछले दिनों वर्ष 2013 में खरीदे गए धान को नया धान बताकर स्टेग में लगाने का मामला भी प्रकाश में आया था। बताया जाता है कि इस मामले को भी दबा दिया गया है।

इंतजार है प्रशासनिक कार्यवाही का
जब धान अंकुरित हो चुकी है तो इससे साफ है कि धान की खरीदपरिवहन और भण्डारण में गंभीर लापरवाही बरती गई है। अन्नदाता किसान की खून पसीने की कमाई को अगर इस तरह लापरवाही से बरबाद किया जाएगा तो निश्चित तौर पर यह अक्षम्य लापरवाही की श्रेणी में ही आएगा। अब लोगों को इंतजार संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव के अगले कठोर कदम‘ का ही रह गया है।

शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

जिंदगी का गाना…


(कु.दर्शिता श्रीवास्तव)
आओ… और तुम भी गाओ…
जिंदगी का… गाना
छोड़ अपने दिल की,
धुनों का तराना…
आओ… और तुम भी गाओ…
जिंदगी का गाना…
क्योंकि यूंहि हॅंसते-हॅंसते…
एक दिन हमें ऊपर चले जाना…
यही तो रीत है…
इसलिये ये गीत है…
जो है जिंदगी का फसाना…
तो आओ… और तुम भी गाओ…
जिंदगी का गाना…
उदासी के बादलों पे…
खुशी की एक रोशनी पड़ने दो…
जिंदगी को फिर तुम,
इन्द्रधनुष सी खिलने दो…
ज्यादा न सोचो तुम…
बस यूंहि सुर से सुर…
मिलाओ तुम…
मुस्कुराओ तुम…
और गुनगुनाओ तुम…
ये जिंदगी का…
जिंदगी का गाना…
अब उसपे न रोना तुम…
जिसे कभी… सालों पहले…
तुम्हें था पाना…
क्योंकि जो भी है तुम्हारे पास
वही है सबसे कीमती नज़राना…
छोड़ दो अब झूठे बहाने बनाना…
और दिल से गाओ…
ये जिंदगी का गाना…
जिंदगी का गाना…
संपर्क -
जी.ए.डी.कॉलोनी
बारापत्थर, सिवनी (म.प्र.)
(साई फीचर्स)

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

महिला शिक्षिका परेशान, बच्चे खा रहे जूते और गालियां

प्रधान पाठक पर लगाए शिक्षिका और विद्यार्थियों ने संगीन आरोप
(अरूण चंद्रौल/रफीक खान)
केवलारी (साई)। केवलारी तहसील में सब कुछ सामान्य नजर नहीं आ रहा है। केवलारी विकासखण्ड के ग्राम कंचनवाड़ा की प्राथमिक शाला में आताताई प्रधान पाठक की हरकतों से महिला शिक्षिका और विद्यार्थी आजिज आ चुके हैं। प्राचार्य पर महिला शिक्षिका के साथ छेड़छाड़ और बच्चों को जूतों से पीटने, गाली बकने के संगीन आरोप लगे हैं।
मध्य प्रदेश शासन के मुखिया तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी अधूरी छूटी हुई घोषणाओं, वादों को पूरा करने में लगे हैं, और लाडली लक्ष्मी, स्कूल चलंे हम, छात्रवृत्ति, गणवेश, मध्यान्ह भोजन, निःशुल्क शिक्षा सम्पूर्ण मध्य प्रदेश में दिये जाने के लिए भरसक प्रयास करते चले आ रहे है। शिक्षा धन प्रदान करने के लिये अनेंकों योजनाओं के माध्यम से उनका प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है, जिनका लाभ ग्रामीण क्षेत्र के कोने-कोने में बसे बसाहटों के निर्धन छात्रा-छात्राओ को मिल सकें, ऐसा प्रयास किया जा रहा है। दूसरी तरफ उनके इन सब सार्थक प्रयासों पर पानी फेरने के लिए विकास खण्ड केवलारी में एक शिक्षा मन्दिर ऐसा है, जहां पर विद्यार्थियों को शिक्षा के बदले जूते और गालियां मिल रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विकास खण्ड केवलारी के ग्राम कंचनवाड़ा की प्राथमिक शाला में तीन शिक्षक पदस्थ हैं, जिसमें से एक प्रधान पाठक टेकचन्द उइके हैं। बतौर एच.एम. की हरकतों से वे सदा ही चर्चा का विषय ही बने हुए हैं। प्रधान पाठक की हरकतों के चलते आज पालक शिक्षक संघ अध्यक्ष धरमसिंग उइके, भोलाशंकर बिसेन जनपद सदस्य सहित चमरूलाल, अंजनी, सुमेन्द्र, सविता दमाहे, फूलकली, रेखाबाई, गंगोत्री, लक्ष्मी, गायत्री बाई, अनीता, शांता बाई चन्द्रकला, कुन्ती बाई, राजकुमार, फूलबती, रतना बाई सहित अन्य पालकगणों ने प्राथमिक शाला पहुंचकर पंचनामा तैयार किया।
इस पंचनामा में कहा गया है कि आज दोपहर वे सभी शाला में पहुंचे और बच्चांे से मिले। इस दल को बच्चों ने बताया कि हर दिन मध्यान्ह भोजन तो समय से मिलता है, किन्तु शाला के प्रधान पाठक टेकचन्द उइके शाला में नहीं आते। बच्चों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि हेड मास्टर साहेब जब आते भी हैं तो महज एक या दो घण्टे रूकते हैं।
बच्चों ने आगे बताया कि प्रधान पाठक आते हैं और बच्चों के साथ जूते चप्पल, छड़ी डस्टर, जो भी हाथ में आ जाए उससे पीट पीट कर बुरा हाल कर देते हैं। इतना ही नहीं बच्चों को प्रधान पाठक द्वारा गंदी-गंदी गालियां भी बकी जाती हैं।
बच्चों ने बताया कि उन्हें अमानवीय तरीके से डराया धमकाया जाता है। इसमें आगे लेख किया गया है कि कु.रंजीता देशमुख शिक्षिका से जानकारी लेने पर बताया गया कि प्रधान पाठक टेकचन्द उइके उपस्थिति रजिस्टर में ओडी लेकर केवलारी गए हैं। जब दल ने उपस्थिति रजिस्टर देखा तो ज्ञात हुआ कि टेकचन्द उइके के नाम के आगे 5 और 6 फरवरी को सीएल ओडी लिखा है। इसके साथ ही साथ 7 फरवरी में सीएल लिखा गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जांच दल के प्रतिवेदन में लेख किया गया है कि दूसरे सहायक शिक्षक धनश्याम बसोड़ी केवलारी डाइट में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। अध्ययनरत छात्राओं ने बताया कि उनके प्रधान पाठक हमेशा गुस्से में रहते हैं, आते हैं तो गाली गलौच कर चूता चप्पल मारते हैं और टेबिल पर सिर रखकर सो जाते हैं। कुछ देर रूकने के बाद वह स्कूल छोड़कर चले जाते हैं।
बच्चों के अनुसार प्रधान पाठक द्वारा उन्हें पढ़ाया नहीं जाता है। वहीं दूसरी ओर एक महिला शिक्षिका ने बताया कि वे प्रधान पाठक टेकचन्द उइके से बहुत परेशान हो गई हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें शैक्षणिक कार्य करने में परेशानी हो रही है, आये दिन प्रधान पाठक उनके साथ अनावश्यक रूप से अश्लील टीका टिप्पणी, छीटा कशी करते हुए जलील करते चले आ रहे हैं, जिसके कारण वे मानसिक रूप से बेहद तनावग्रस्त चल रहीं हैं।
उक्त शिक्षिका के अनुसार प्रधान पाठक का व्यवहार उक्त शिक्षिका के प्रति कतई अच्छा नहीं है। उन्होंने मौके पर पहुंचे जांच दल को बताया कि प्रधान पाठक उनकी उपस्थिति पंजी की उपस्थिति को काटकर अनुपस्थित दर्शा देते हैं। इतना ही नहीं उन्होेंने प्रधान पाठक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधान पाठक द्वारा उक्त महिला शिक्षिका के प्रति अपशब्दों का प्रयोग किया जाता है, वह भी विद्यार्थियों के सामने। उक्त महिला शिक्षिका के अनुसार प्रधान पाठक उन्हें झूठे आदिवासी मामलों में फंसाने की धमकी भी दिया करते हैं।
उक्त महिला शिक्षिका ने बताया कि उनके द्वारा 11 जून 2013 को ऑनलाईन आवेदन क्रमांक 69049 द्वारा जिला कलेक्टर सिवनी को, 10 जून 2013 को जिला शिक्षा अधिकारी सिवनी को, 24 अप्रैल 2013 को थाना प्रभारी महिला अपराध प्रकोष्ठ सिवनी को, 29 अगस्त 2013 को राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा को भी लिखित शिकायत भेजी जा चुकी है।
हैरान परेशान उक्त महिला शिक्षिका का कहना है कि बार-बार शिकायत के बाद भी उसकी सुनवाई नहीं होने से उसका मनोबल टूटने लगा है। उक्त पीड़ित महिला शिक्षिका ने कहा कि बार-बार शिकायत के बाद भी पता नहीं क्यों उच्चाधिकारी कार्यवाही से कतरा रहे हैं। उक्त शिक्षिका की पीड़ा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने आत्महत्या पर मजबूर होने तक की बात कह डाली।

मंगलवार, 4 फ़रवरी 2014

अंकुरित होने लगी बारिश में भीगी धान!

बार बार चेताने के बाद भी नान, मार्कफेड करते रहे लापरवाही

(अखिलेश दुबे)


सिवनी (साई)। ई-उपार्जन के माध्यम से सरकारी स्तर पर खरीदी गई धान में करोड़ों की चपत लगाई जाने के संकेत मिलने लगे हैं। बारिश में गीली हुई धान के बारे में खबरों के प्रकाशन के बाद भी खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम, विपणन संघ आदि जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई कार्यवाही न किए जाने से गीली धान अब अंकुरित होना आरंभ हो गई है। यह अंकुरित धान अब शायद ही किसी काम की बचे।
सिवनी में इस साल लगभग बीस लाख क्विंटल धान की खरीदी ई-उपार्जन के माध्यम से सरकारी स्तर पर की गई है। इस धान के संग्रहण, भण्डारण आदि के बारे में सरकारी दावों और संवेदनशील जिला कलेक्टर भरत यादव की चेतावनियों की किस तरह धज्जियां उड़ाई गईं, इसका प्रमाण अंकुरित हो रही धान है।

खुली रखरखाव की पोल
पिछले साल सिवनी में भण्डारित लाखों टन धान को मिलिंग के लिए नहीं भेजा जा सका था। इसके चलते जगह जगह स्टेग में पिछले साल का धान ही पड़ा सड़ रहा है। इसकी सचित्र खबर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया द्वारा पिछले दिनों चित्रों के साथ सिवनी शहर से सटे नरेला में बने स्टेग में भीग रहे धान का समाचार प्रसारित किया गया था। इसके बाद भी न तो जिला प्रशासन द्वारा ही इस संबंध में कोई संज्ञान लिया गया और न ही सांसद विधायकों ने भी इस संबंध में कोई कार्यवाही की है।
धान के भण्डारण में सुरक्षा के अभाव और रखरखाव की पोल भी अब खुलने लगी है। खाद्य विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम, विपणन संघ आदि के अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही के चलते ओपन केंप में रखी धान सड़ चुकी है या फिर सड़ने के कगार पर पहुंच चुकी है। आलम यह है कि पिछले दिनों ही लाकर यहां छल्ली बनाकर रखी गई धान में अंकुरण आरंभ हो चुका है।

दस फीसदी धान हो सकती है खराब!
बताया जाता है कि सिवनी में लगभग बीस लाख क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है। इस धान में से दस फीसदी के लगभग धान खराब होना बताया जा रहा है। धान के स्टेग में ही अंकुरण साफ देखा जा सकता है। सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि गीली धान की बिना एफएक्यू जांच के ही भण्डारित कर दिया गया है। इस धान के भण्डारण के महज एक माह के अंदर ही गीली धान में अंकुरण आरंभ हो चुका है।

पिछले साल की ही धान का संग्रहण
वहीं बताया जाता है कि धान खरीदी केंद्रों पर धान की खरीदी कागजों पर ही करके उनका परिवहन भी करवा दिया गया है। अब जब बात नरेला के केंप में आकर भण्डारित कर स्टाक दिखाने का आया तो पिछले साल की संग्रहित धान को ही उठवाकर नए स्टेग में रखवाकर उसे नई धान बताकर राशि हड़पने के षणयंत्र का ताना बाना भी बुना गया है। सूत्रों की मानें तो हाल ही में इस तरह का एक मामला प्रकाश में भी आया था जिसे नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों ने, ले देकर रफा दफा कर दिया है।