शनिवार, 10 दिसंबर 2011

ईमानदार नहीं सत्ता के लिए समझौता कर रहे हैं मनमोहन


बजट तक शायद चलें मनमोहन . . . 50

ईमानदार नहीं सत्ता के लिए समझौता कर रहे हैं मनमोहन

सहयोगियों को लूट की दी खुली छूट



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली। भारत गणराज्य की स्थापना के उपरांत अब तक के सबसे कमजोर और लाचार प्रधानमंत्री के बतौर उभरे कथित तौर पर ईमानदार छवि के धनी डॉ.मनमोहन सिंह ने सत्ता की मलाई चखते रहने के लिए समझौतावादी रवैया अपनाया हुआ है। अपने संगी साथियों को देश को लूटने की खुली इजाजत देकर उन्होंने देश के नागरिकों के साथ बहुत ही बड़ा धोखा किया है। कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के मंत्रियों द्वारा मचाई गई लूट को चुपचाप देखकर कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी और युवराज राहुल गांधी और विपक्ष में बैठी भाजपा ने भी परोक्ष तौर पर मनमोहन सिंह का पूरा पूरा साथ दिया है।

संप्रग के दूसरे कार्यकाल में एक के बाद एक घपले घोटाले सामने आते रहे और विपक्ष सहित सोनिया, राहुल और खुद मनमोहन खामोश बैठे रहे। मामला चाहे कामन वेल्थ गेम्स घोटाले का हो, टूजी, एयर इंडिया, रिलायंस गैस माईन्स, आदर्श सोसाईटी, एस बेण्ड या कोई और बड़ा घोटाला हर मामले में देश को प्रत्यक्ष और परोक्ष तौर पर चलाने वाले खामोश बैठे रहे।

अपने असफल बचाव में वजीरे आजम ने चुनिंदा संपादकों की टोली के सामने खुद को मजबूर जतला दिया। उन्होंने साफ कह दिया कि गठबंधन की कुछ मजबूरियां होती हैं। प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी, कांग्रेस की नजर में भविष्य के वजीरे आजम राहुल गांधी सहित विपक्ष की महान मूर्तियों ने साबित कर दिया कि जनादेश प्राप्त और पिछले दरवाजे से संसद की राजनीति करने वालों के लिए राष्ट्र धर्म से बढ़कर गठबंधन धर्म है। इन परिस्थितियों में भला मनमोहन सिंह को आखिर ईमानदार कैसे कहा जा सकता है। प्रधानमंत्री को भले ही उनके चंपू ईमानदार जतलाने का जतन कर रहे हों पर सच्चाई यह है कि मनमोहन सिंह अघोषित तौर पर भ्रष्टाचार के ईमानदार संरक्षक के बतौर स्थापित हो चुके हैं।

(क्रमशः जारी)

कोई टिप्पणी नहीं: