सोमवार, 23 जनवरी 2012

रिमोट कंट्रोल से चल रहे हैं कांतिलाल भूरिया


रिमोट कंट्रोल से चल रहे हैं कांतिलाल भूरिया

डीसीसी के नाम हाईकमान देते हैं पीसीसी चीफ को



(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया के हाथ में किसी भी जिले की कांग्रेस कमेटी के गठन का अधिकार नहीं है! जी हां, दूरभाष पर चर्चा के दौरान श्री भूरिया ने कहा कि जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों के नामों के प्रस्ताव क्षेत्रीय क्षत्रपों द्वारा सीधे हाई कमान को भेज दिए हैं। हाईकमान से बरास्ता प्रभारी महासचिव उनके पास नाम आने पर वे इसकी अधिकृत घोषणा कर देंगे।
एमपीसीसी के निजाम श्री भूरिया के दिल्ली प्रवास के दौरान उन्होंने दूरभाष पर चर्चा के दौरान उक्ताशय की बात कही। श्री भूरिया से जब पूछा गया कि उन्होंने अब तक टीकमगढ़, छतरपुर और छिंदवाड़ा की जिला इकाईयों की घोषणा क्यों नहीं की है? के जवाब में उन्होंने कहा कि सत्यव्रत चतुर्वेदी और कमल नाथ ने अपने अपने प्रभाव वाले जिलों के नामों के प्रस्ताव हाई कमान को भेज दिए हैं।
श्री भूरिया ने कहा कि जैसे ही मध्य प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी महासचिव हरि प्रसाद के पास से नामों की सूची अनुमोदन के उपरांत उनके पास आ जाएगी, वे नामों की घोषणा कर देंगे। चर्चा के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री कांति लाल भूरिया के मन से क्षेत्रीय प्रभावशाली क्षत्रपों के अघोषित तौर पर अधीन रहने की पीड़ा भी झलक रही थी।
अब तक घोषित नामों में कांग्रेस महासचिव राजा दिग्विजय सिंह का पड़ला काफी हद तक भारी दिख रहा है। महाराजा ज्योतिरादित्य ने भी अपनी लाज बचाई तो महाकौशल के क्षत्रप कमल नाथ ने बालाघाट और जबलपुर में अपने समर्थकों को जिलाध्यक्ष बनवा दिया। सुरेश पचौरी इस मामले में कमजोर साबित हो रहे हैं।
राजनैतिक वीथिकाओं में यह प्रश्न जमकर घुमड़ रहा है कि जब कमल नाथ ने अपने समर्थकों को बालाघाट और जबलपुर में कुर्सी पर काबिज करवा दिया तब छिंदवाड़ा जिले के मामले को लंबित क्यों रखा जा रहा है। गौरतलब है कि पूर्व पीसीसी चीफ कांतिलाल भूरिया ने इस संवाददाता से चर्चा के दौरान कहा था कि उस वक्त कमल नाथ विदेश यात्रा पर हैं, उनके आते ही उनकी इच्छानुसार छिंदवाड़ा में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। विडम्बना है कि इस बात के लंबा समय बीतने और अन्य जिलों के नामों घोषणा के बाद भी छिंदवाडा, टीकमगढ़ और छतरपुर का विवाद सुलट नहीं सका है।

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