सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

. . . तो मवेशियों के पीने लायक भी नहीं बचेगी नर्मदा


0 घंसौर को झुलसाने की तैयारी पूरी . . .  69

. . . तो मवेशियों के पीने लायक भी नहीं बचेगी नर्मदा

जानबूझकर पुण्य सलिला को जहरीला बनाने की हो रही तैयारी

(लिमटी खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के मशहूर दौलतमंद उद्योगपति गौतम थापर के स्वामित्व वाले अवंथा समूह के सहयोगी प्रतिष्ठान मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के द्वारा मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के आदिवासी बाहुल्य विकास खण्ड घंसौर में स्थापित किए जाने वाले 1200 मेगावाट के कोल आधारित पावर प्लांट से न केवल पर्यावरणीय खतरा पैदा होने की आशंका है वरन् खेतों की उर्वरक क्षमता कम होगी और आसपास के समस्त जल स्त्रोतों के जहरीला होने की आशंकाएं बलवती हो रही हैं।
जानकारो का कहना है कि थर्मल कोल पावर प्लांट से निकलने वाली राख से पानी इतना प्रदूषित हो जाएगा कि इसे मवेशी भी नहीं पी सकेंगे। गौरतलब है कि 500 मेगावाट के सारणी स्थित सतपुड़ा थर्मल कोल पावर प्लांट से निकलने वाली राख से तवा नदी का पानी इसी तरह प्रदूषित हो चुका है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार तवा नदी में नहाने पर लोगों की चमड़ी जलती है और त्वचा रोग हो जाते हैं। इसकी राख के निस्तारण के लिए हाल ही हजारों पेड़ों की बलि चढ़ा दी गई, जबकि पहले से नष्ट किए गए जंगल की भरपाई नहीं की जा सकी है। इतने दुष्परिणामों के सामने आने के बावजूद मध्यप्रदेश में देवी स्वरूप नर्मदा के किनारे थर्मल कोल पावर प्लांट की अनुमति देना जनहित में नहीं है।
नर्मदा में लाखों लोग डुबकी लगाकर पुण्य का अनुभव करते हैं। उनकी रूह भी इस पानी में नहाने के नाम से कांप उठेगी। राख से नर्मदा की गहराई पर भी असर होगा। वहीं गंगा के जहरीले होने के कारण सरकार ने हाल ही में यह निर्णय लिया है कि इसके किनारे अब ऐसा कोई निर्माण नहीं किया जाएगा, तो नर्मदा की चिंता क्यों नहीं की जा रही है?
मेसर्स झाबुआ पावर लिमिटेड के कोल आधारित पावर प्लांट से उड़ने वाली राख आसपास के खेतों में कहर बरपाएगी। इतना ही नहीं इसकी राख से पुण्य सलिला नर्मदा के प्रदूषित होने का खतरा बरकरार ही है। जानकार बताते हैं कि इससे उड़ने वाली जहरीली राख से नर्मदा का पानी इतना जहरीला हो जाएगा कि इसमें नहाने से खुजली आदि जैसे त्वाचा संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ जाएगा।
पुण्य सलिला नर्मदा का जो हाल होना है वह तो होकर ही रहेगा। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल एवं केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के द्वारा अथाह जल संपदा अपने दामन में समेटने वाली रानी अवंती बाई सागर परियोजना के बरगी बांध के पानी को जहरीला करने की तैयारी की जा रही है।
यह सब देखने सुनने के बाद भी केंद्र सरकार का वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, मध्य प्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मण्डल, जिला प्रशासन सिवनी सहित भाजपा के सांसद के.डी.देशमुख विधायक श्रीमति नीता पटेरिया, कमल मस्कोले, एवं क्षेत्रीय विधायक जो स्वयं भी आदिवासी समुदाय से हैं श्रीमति शशि ठाकुर, कांग्रेस के क्षेत्रीय सांसद बसोरी सिंह मसराम एवं सिवनी जिले के हितचिंतक माने जाने वाले केवलारी विधायक एवं विधानसभा उपाध्यक्ष हरवंश सिंह ठाकुर चुपचाप नियम कायदों का माखौल सरेआम उड़ते देख रहे हैं।

(क्रमशः जारी)

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