सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

अवैध कमाई का अड्डा बना खवासा चौकपोस्ट


अवैध कमाई का अड्डा बना खवासा चौकपोस्ट

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। सिवनी नगर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खवासा भ्रष्ट अधिकारियों का चहेता ग्राम है, क्योंकि यहां स्थापित जांच चौकियां भ्रष्ट अधिकारियों को चंद महिने में ही करोड़ों का आसामी बना देती है और यहां के भ्रष्टाचार पर किसी की नजर भी नही होती। क्योंकि यहां हो रहे भ्रष्टाचार पर नेता भी नजर नहीं डालते, चाहे वह किसी भी पार्टी के हों। खवासा चौक पोस्ट में सभी नेताओं एवं अधिकारियों को मैनेज करने की परंपरा है, जिसे बड़ी ईमानदारी से इन भ्रष्ट अधिकारियों को निभाना पड़ता है, क्योंकि यह बहुत अच्छी तरह जानते है कि अगर यहां ईमानदारी नहीं दिखाई गई तो इनके भी मंसूबों पर पानी फिर सकता है।
खवासा चौक पोस्ट पर स्थापित कृषि उपज, वाणिज्य कर एवं परिवहन जांच चौकी, जिन्हें सरकार ने अपने राज्य के सुरक्षा और आयात- निर्यात कर की देखरेख के लिए स्थापित की थी, लेकिन अब यह मूल उद्देश्य से भटक चुकी हैं। यहां पदस्थ अधिकारी- कर्मचारी सिर्फ पैसे की भूख रखता है। नोटों की चमक के आगे ये यह भूल चुके हैं कि यह स्वार्थ भावना पूरी करने के लिए राज्य को प्रतिमाह करोड़ों की चपत लगा रहे हैं। खवासा जांच चौकियों पर बरसने वाले धन का कोई भी अनुमान नहीं लगा सकता। अगर इसका अनुमान हमें लगाना है तो पूर्व में रहे त्रिविभागीय मंत्री की आर्थिक उन्नति देखकर बड़ी आसानी से यहां की कमाई का अनुमान लगाया जा सकता है और अब तक यहां पदस्थ रहे आरटीआई की स्थिति भी देखें तो यही समझ में आएगा कि खवासा में बेशुमार धन बरसता है।
सूत्र बताते हैं कि  खवासा में पोस्टिंग के लिए ये अधिकारी अपने मुख्यालय पर लाखों की चढ़ोत्तरी चढ़ाकर खवासा पर पदस्थापना पाते हैं और वह लाखों की चढ़ौत्तरी को सूद समेत वसूल करने के लिए भ्रष्टाचार की परकाष्ठा को भी पार कर जाते हैं। खवासा पर चल रहे भ्रष्टाचार के खुले खेल पर हमारे जिले के जनप्रतिनिधि भी हरी झंडी दे रहे हैं। न तो कांग्रेस, भाजपा, सपा, राकांपा, बसपा जैसे प्रमुख राजनैतिक दल भी यहां के भ्रष्टाचार को लेकर मौन साधे बैठे हैं।
विगत वर्ष राकांपा युवा मोर्चा के एक नेता ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए यहां हो रहे भ्रष्टाचार पर माननीय मुख्यमंत्री को पत्र से अवगत कराया, जिसकी जांच के आदेश भी दिए गए और जांच अधिकारी के रूप में कुरई थाना प्रभारी को नियुक्त किया गया, लेकिन यह जांच ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है, जिससे यह प्रतीत होता है कि संभवतः दोनों के बीच में सेटिंग हो गई है और अगर नहीं तो फिर नेता का शांत बैठना समझ से परे है। कहते हैं गधे की लात और नेता की बात का कभी भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि जहां से पैसा मिले नेता उसी पक्ष को सही ठहराते हैं और जहां से न मिले उस पक्ष को गलत ठहरा देते हैं, लेकिन खवासा चौकपोस्ट एक ऐसा स्थान है, जिसके खिलाफ में कोई भी नेता और तो और कोई भी राजनीतिक दल यहां हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर अपनी आवाज बुलंद करने के लिए तैयार नहीं है।
खवासा चौकपोस्ट में आज भी टोकन सिस्टम विधिवत चल रहा है और बिना बिल बाऊचरों के कई माल सिवनी से दूसरे राज्य और दूसरे राज्यों से सिवनी लाया जा रहा है। यह बात और है कि कुछ माह से एक ईमानदार अधिकारी डी. पुरोहित की कार्यप्रणाली के चलते व्यापार जगत में हड़कंप मचा हुआ है और बिना बाऊचरों के माल के आवागमन पर रोक लगी हुई है। बताया जाता है कि किराना व्यवसायियों पर यह ईमानदारी बहुत भारी पड़ी है, जिसके कारण आज बाजार में जीरा भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, लेकिन कई ऐसी खाद्य सामग्री, कपड़ा, लोहा, गल्ला एवं जनरल सामग्री है, जो आज भी पीछे के रास्ते से जिले के बाहर दूसरे राज्यों में और दूसरे राज्यों से जिले के अंदर लाई जा रही है, जिसमें पूर्णतः खवासा चौकपोस्ट पर बैठे भ्रष्ट अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। 
सूत्रों की माने तो यहां पर भ्रष्टाचार का जो भी खेल खेला जाता है, उसकी समस्त जानकारी उच्चाधिकारियों को भी होती है, लेकिन अधिकारी इस भ्रष्टाचार को नजर अंदाज इसीलिए करते हैं, क्योंकि यहां की काली कमाई का कुछ हिस्सा इनक ो भी दिया जाता है और इसी हिस्से के बोझ पर दबकर ये अधिकारी इस भ्रष्टाचार को लेकर कोई कार्यवाही करने की बजाय इस भ्रष्टाचार को नजर अंदाज कर देते हैं। विभागीय सूत्रों की माने तो इस काली का हिस्सा जिले के अदने से अधिकारी से लेकर प्रदेश के प्रमुख मंत्रियों तक जाता है और यही कारण माना जाता है कि खवासा चौकपोस्ट पर कोई भी ईमानदारी अधिकारी अपनी निष्पक्ष कार्यवाही का डंडा घुमाने से कतराता है।
यह बात बहुत कम लोग ही जानते हैं कि खवासा चौक पोस्ट पर एक दिन की आय लाखों पर होती है, जिसमें यह भ्रष्ट अधिकारी सभी को अपना- अपना हिस्सा पहुंचाकर खुद का हिस्सा भी मोटी रकम के रूप में बचाते हैं। बताया जाता है कि खवासा चौक पोस्ट पर रजिस्टर मेंटनेंस की परंपरा है, जिसमें दागी नेताओं के नाम के साथ- साथ बिकाऊ कलमकारों के नाम भी दर्ज है। इस रजिस्टर में इनके नाम के आगे प्रतिमाह  इन्हें दी जाने वाली रकम भी अंकित है, जो ये प्रतिमाह खवासा चौक पोस्ट में जाकर ले लेते हैं, तो कुछ रूआबदार नेता और कलमकारों को यह रकम लिफाफे में पैक करके सम्मानपूर्वक उनके निवास तक पहुंचा दी जाती है।  जब देश का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता और सच्चाई को उजागर करने वाले कलमकार ही इस भ्रष्टाचार के समुंदर में गोते लगा रहे हैं तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इस भ्रष्टाचार की जड़े कितनी मजबूत हैं और इन भ्रष्टाचारियों के मंसूबों के आगे कोई भी ईमानदार शख्स ज्यादा दिन तक टिक नहीं सकता। अब तो इस बात का इंतजार है कि कब कोई ईमानदार जनप्रतिनिधि इनके भ्रष्टाचार को लेकर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई की नई शुरूआत करेगा...।

कोई टिप्पणी नहीं: